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हंग्री वुल्फ गेम (इंसान या भूखे भेड़िए ) complete

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मनु अपनी आँख मूंद कर उस पल मे जा कर झाँकने लगता है..... "उफफफ्फ़ राम्या..... लगता है नागिन अपना बदला लेने आई है. बेबी... हम लौन्डो की आपस की बात ऐसी ही होती है... ऑड मॅनर किसी की बात सुन'ना.... आओ, अब तुम्हारे भी सितम देख लेंगे"

मनु मुस्कुराता वो लेटर अपने जेब मे डाल लेता है, और स्नेहा को फोन कर के उस से कल के ऑक्षन के बारे मे सारे इन्फर्मेशन माँगने लगता है.....

इधर जब से ऑक्षन की खबर आई थी वंश और राजीव फूले नही समा रहे थे..... रात को ही दोनो ने अपनी एक अर्जेंट मीटिंग रखी.....

वंश.... राजीव ये सब से सही मौका है... दोनो बाप बेटे के झगड़े मे एस. एस ग्रूप का पूरा पवर अपने हाथ मे लेना.... एक बार ये डील हमारे साथ हो जाए, फिर तो उस हर्षवर्धन को अपना पाँव मे गिरा देंगे... और उसका बाप शमशेर मूलचंदानी, जो जादू की छड़ी दिखाता रहता है, उसे उसकी भी औकात पता चल जाएगी.....

राजीव.... यार, पर वो कुत्ता तो है रौनक.... वो साला इस बार भी कोई ना कोई पंगा करेगा....

वंश.... वो ऐसा नही कर पाएगा.... क्योंकि उस कुत्ते को कौन सी हड्डी दे कर शांत करना है वो मैं जान गया हूँ.... बस कल किसी तरह ये ऑक्षन हमारे हक़ मे हो....

वंश वहाँ से चला जाता है.... और उसके जाते ही राजीव मुस्कुराते हुए सोचता है.... "तू तो हर्षवर्धन और रौनक से भी ज़्यादा कमीना है.... बस ये डील हो जाने दे... फिर तो धीरे-धीरे तुम्हारी भी औकात पता चल जाएगी".

मनु के इस छोटे से इन्फर्मेशन से, पूरा एस.एस ग्रूप अपनी-अपनी प्लॅनिंग मे लग गया था. बात वही पुरानी थी, प्रभुत्व और धन का नशा. एस.एस ग्रूप को दो लोगों ने शुरू किया था, शम्षेर और अजिताभ ने. और जब इन दोनो ने अपना सारा कारोबार नये लोगों पर शिफ्ट किया तो ग्रूप 6 भागो मे बाँट दिया.

हर्षवर्धन, रौनक, वंश, राजीव और सुकन्या ... इन सब को कंपनी के 15% शेयर मिले और 25% शेयर, दोनो भाई मानस और मनु के नाम पर था..... मानस घर छोड़ते वक़्त अपने शेयर मनु के नाम पर कर के चला गया था, और तब से सारे बोर्ड ऑफ डाइरेक्टर्स की निगाहे उन एक चौथाई शेयर पर थी, जो मनु के पास था.

मनु को अनुभव कम था, इसलिए उसने आज तक कभी अपने कंपनी के शेयर पब्लिस नही किए, और इसी वजह से सारे बोर्ड ऑफ डाइरेक्टर्स उसकी कंपनी का दीवालिया निकालने मे लगे थे. पूर्ण अधिपत्य हासिल करने के लिए मनु के 25% हथियाने का खेल कब से शुरू था, और मनु के फ़ैसले ने सब को जैसे हसीन सपने दिखाना शुरू कर दिए हो....

 


अगली सुबह 12 बजे.... डाइरेक्टर्स चेंबर....

सारे बोर्ड डाइरेक्टर्स बैठे हुए थे, 12 से 1, 1 से 2 बज गये.... सब बड़ी बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे... चिढ़'ते हुए सब लगातार... "व्हाट दा हेल ऑफ दिस मीटिंग" ...... "वॉट दा हेल ऑफ दिस मीटिंग"

सारे बोर्ड ऑफ डाइरेक्टर्स चिल्लाने लगे और मनु से कॉन्टेक्ट करने की कोसिस करते रहे... पर कोई रेस्पॉंड नही. फाइनली ... 4पीएम बजे मनु ने मीटिंग हॉल मे शिरकत किया....

सभी लोग नाराज़गी दिखाते, उसके मिस-बिहेव पर सवाल उठाने लगे.... मनु सब को शांत करते हुए कहा....

"मैने, मीटिंग शुरू हो 12 बजे ऐसा लिखा था, मीटिंग मे मैं 12 बजे आऊ, ऐसा नही कहा था. बाइ दा वे मैने ये समय आप सब को सिर्फ़ इसलिए दिया ताकि आप सब बिड की डील आपस मे फाइनल कर सके, शांति से.. सो, शुड वी स्टार्ट" ????

सारे बोर्ड डाइरेक्टर्स एक दूसरे का मूह देखने लगे.....

सुकन्या..... इसमे फाइनल क्या करना है, मनु मेरा भतीजा है, वो अपनी बुआ से ही डील करेगा....

मनु..... हां तो बस डील बताओ ना, या फिर कंपनी ऐसे ही आप के नाम कर दूं....

सूकन्या की बात पर जैसे ही मनु ने हँसते हुए जबाव दिया.... वैसे ही उस महॉल मे तो गहमा-गहमी शुरू हो गयी... सब एक दूसरे पर आरोप लगाना शुरू कर दिए... और मनु को अपनी ओर मिलाने के लिए तरह-तरह के प्र-लोभन देने लगे.....

अचानक ही वहाँ का महॉल बिल्कुल शांत हो गया.... शम्षेर मूलचंदनी मीटिंग हॉल मे सिरकत करते चेयर पर बैठ गये....

शम्षेर..... आप सब बोर्ड मेंबर्ज़ को देखते हुए मुझे लगता है कंपनी का फ्यूचर सही हाथों मे नही..... मनु के दिए गये समय मे भी आप सब बोर्ड ऑफ डाइरेक्टर्स फ़ैसला नही कर पाए, जब कि मनु इस डील को फेयर करने के लिए, ओपन डील रखा और आप सब मिल कर एक नतीजे पर पहुँचें इसलिए वक़्त भी दिया..... लेकिन लगता है आप सब अभी बड़े डिसिशन लेने के लायक नही हुए".

"आप सब को दी गयी ज़िम्मेदारी और हरकतों को देखते हुए, मैं अभी से मनु को एस.एस ग्रूप का एमडी अनाउन्स करता हूँ..... अब भी नियम वही रहेंगे..... सारे बोर्ड ऑफ डाइरेक्टर अपने प्रपोज़ल रखेंगे लेकिन फाइनल डिसिशन एमडी का ही होगा. अभी से सारे बोर्ड ऑफ डाइरेक्टर्स मनु को रिपोर्ट करेंगे..... यदि किसी को मेरे फ़ैसले पर ऐतराज हो तो अभी कहे".....

शम्षेर की बात सुन कर सभी लोगों का मूह खुला ही रह गया..... किसी के लिए ये पचा पाना मुस्किल था कि, कल का लड़का उसके सिर पर बैठ गया.... लेकिन कॉर्पोरेट का पुराना उसूल, दिल मिले ना मिले, गले लगा कर हाथ मिला कर बधाइयाँ देते रहिए....

 


शम्षेर अनाउन्स करने के बाद वहाँ से चले गये, और बाकी सारे लोग मनु को बधाई देने मे लग गये..... तुरंत ही पूरे ऑफीस मे इन्फर्मेशन चली गयी.... जिसे बर्बाद होना था वो अब मालिक बन चुका था..... और बाकी सभी लोग, किसी मात खाए खिलाड़ी की तरह वहाँ से निकल गये...

इधर राजीव, वंश और रौनक तीनो मीटिंग से निकल कर राजीव के घर पहुँचे....

तीनो हॉल मे बैठे थे, एक नौकर तीनो को शराब सर्व किया..... तीनो अपनी हार भुनाते बैठ कर पीने लगे. तभी राजीव की सेक्सी वाइफ तनु उन तीनो के बीच सिरकत करती, आ कर बैठ गयी, और तीनो को शराब पीते देख टॉंट करने लगी.....

"मुबारक हो, मूलचंदानी का वारिस ही अब कंपनी संभालेगा. उस लड़के को तुम सब के सिर पर बिठा दिया, जिसकी खुद की कंपनी डूब रही है. पता चला तुम सब मेहनत करते रहो, और सारा क्रेडिट उन्हे मिलता रहे"

तनु की बात पर वंश और राजीव बस तमाशा देखते रहे.... रौनक ने अपना पेग ख़तम कर के एक और पेग बनाने लगा..... बड़ी अदा से तनु ने उसका पेग बनाती सेक्सी अदा से उसकी ओर बढ़ा दी.... रौनक ने वो पेग झट से अपने हाथ मे लिया और एक बार मे खाली कर दिया...

"रौनक जी आप सब भी इस शराब के ग्लास की तरह है... प्यार से आप तीनो इसे भरते रहेंगे... और वो मूलचंदानी झटके मे खाली करते रहेंगे.... मेरी मानो तो समय आ गया है जब वो मूलचंदानी शराब के प्याले भरे, और हम उसे खाली करे".

रौनक को फिर एक पेग बना कर तनु बढ़ा दी, पर रौनक उसे नीचे रख कर, वहाँ से बिना कुछ कहे चला गया.....

वंश..... ये तो भाग गया....

टानू.... भाग तो रहा है वंश, पर तीर निशाने पर लगा है.... अब बस एक बार और थोड़ा सा ब्रेन वॉश करूँगी, फिर ये खुद-व-खुद हमारी ओर होगा...

राजीव.... एक बार ये हमारी तरफ हो जाए, फिर लीगली कंपनी के चेर्मन हम होंगे, और तब सारे शेर को पब्लिक कर के उनकी जड़े खोद देंगे....

तनु.... तुम लोग भरम मे जी रहे हो क्या.... तुम तीनो के मिला कर भी 45% ही होते हैं, बाकी के 55% तो उन्ही के पास है.

वंश.... सूकन्या, हर्षवर्धन या मनु मे से किसी एक से मिल भी जाए, पर मनु और हर्षवर्धन कभी एक नही होंगे.

तनु.... वंश अब भी ग़लत ख्यालात मे जी रहे हो, तीनो को एक होते देर नही लगेगी....

राजीव.... लेकिन वो कैसे तनु....

टानू..... क्योंकि सूकन्या तो अपना फ़ायदा देख कर मनु के साथ ही जुड़ेगी, लेकिन हर्ष भले मनु से मिले कि ना मिले, उसकी बेटी काया तो मनु को ही सपोर्ट करेगी. और यदि ऐसा हुआ तो हर्ष को ना चाहते हुए भी मनु से मिलना होगा.....

वंश.... ह्म ! तो अब...

तनु...... मेरे पास एक आइडिया है, लेकिन वंश तुम्हे अभी फ़ैसला करना होगा कि क्या तुम दिल से हमारे साथ हो....

वंश.... साथ ना होता तो क्या यहाँ बैठा होता....

तनु..... ह्म ! फिर ठीक है वंश.... तुम अब तमाशा देखते जाओ.....

 


मीटिंग से वापस आते ही इनकी कहानी शुरू हो गयी थी, और इधर मनु एमडी बनते ही... अपनी जीत की खुशी ना मना कर, अपने अगले टारगेट की ओर रुख़ किया. अब पूरा ग्रूप ही उसके इशारों पर नाचने वाला था....

मनु ने, जाय्निंग के पहले घंटे मे ही पूरे ग्रूप को हिला दिया. एक सर्क्युलर जारी करते हुए, पूरे ग्रूप मे काम कर रहे हर एम्पॉलये का सॅलरी मे 20% का इज़ाफ़ा दे दिया... मनु की इस हरकत पर सूकन्या उस पर भड़कती हुई, उस पर अपने पोस्ट का मिसयूज़ करने का इल्ज़ाम लगाने लगी.... लेकिन मनु मुस्कुराते बस इतना ही कहा.... "आप चिंता ना करो बुआ... आज का इनवेस्टमेंट कल का फ़ायदा है"

सूकन्या गुस्से मे भन्नाती सीधा वॉशरूम मे घुस गयी..... सूकन्या वॉशरूम के अंदर दो घूँट विश्की के पिति, अपना चेहरा नोच रही थी, और अपने बाप शम्षेर को पेट भर कर गालियाँ दे रही थी.

सुकन्या, काफ़ी गुस्से मे लगातार बस यही सोच रही थी की... "आख़िर क्यों पापा ने ऐसा किया, क्या उन्हे अपनी बेटी नही दिखी इस पोस्ट के लिए".... वो चिढ़ि-चिढ़ि बस अपनी धुन मे थी, तभी शम्षेर का पीए अर्जुन कामत, वॉशरूम के अंदर घुस गया....

अर्जुन को देख कर सूकन्या अपने हॅंड पर्स को उस पर फेंक कर मारते कहने लगी..... "तू भागता है कि नही यहाँ से" ... सूकन्या उसे गुस्से मे ऐसे घूर रही थी, मानो वो उसे खा जाएगी.

अर्जुन तेज़ी से सूकन्या की ओर बढ़ा, और बूब्स को कपड़ों के उपर से दबाते हुए उसके होंठ चूमने लगा. सूकन्या उसे धक्के देती, पिछे हटाई...

"डॉन'ट टच मी रास्कल. हरामजादे, जब पापा यहाँ ऑफीस आ रहे थे तो क्या तू उनके पिच्छवाड़े मे घुस गया था"

अर्जुन, फिर से ज़बरदस्ती उसके बूब्स को अपने दोनो हाथों से दबाते हुए कहने लगा.... "उनके नही तुम्हारे जानेमन... ओह कम ऑन सू तुम्हे देख कर तो आज कंट्रोल नही हो रहा. देखो इसका हाल"... इतना कह कर अर्जुन ने अपनी जिप खोल कर अपना लिंग बाहर निकाल दिया....

सूकन्या..... हट जा कुत्ते की जात, साले गंदे नाली कीड़े.... तेरी वजह से ही वो एमडी बन गया है...

अर्जुन गुस्से मे उसे एक थप्पड़ मारता कहने लगा..... "शांत हुआ गुस्सा, या और दूं खींच कर. भूल गयी वो किसका बेटा है, काव्या का. याद दिलाऊ क्या काव्या के बारे मे"

सूकन्या, थोड़ी शांत होती हुई..... "उसकी याद मत दिलाओ, मर गयी अच्छा हुआ, पर अभी तो सब तुमहरे सामने हुआ. तुम चाहते तो मनु को एमडी बन'ने से रोक सकते थे"....

अर्जुन.... तुम पागल हो, देखो अभी मेरा मूड बहुत अच्छा है, इसे खराब क्यों कर रही हो...

अर्जुन, अपनी बात कहते-कहते फिर से उसके बूब्स दबाने लगा..... सूकन्या भी थोड़ी मूड मे आती उसके लिंग को अपने हाथ मे पकड़ कर मसल्ति हुई कहने लगी.... "अर्जुन कन्फ्यूज़ ना करो, अभी तुम ने ऐसा क्यों होने दिया"

"उफफफफ्फ़ ... ज़रा मूह मे भी लो इसे.... सुकन्या मैने कई बार कॉल किया था, चाहो तो कॉल चेक कर लो, पर मीटिंग हॉल मे शायद कॉल जॅमर लगा था"....

 
दोस्तो कहानी कैसी चल रही है
 
सूकन्या नीचे बैठ गयी और अपना बड़ा सा मूह खोल कर, लिंग पर जीभ फिराई फिर उसे गीला कर के अपने मूह मे डाल कर चूसने लगी....

"उम्म्म्मम.... उम्म्म्मममम" कर के सूकन्या उसे चूसने लगी और अर्जुन उसका सिर पकड़ कर अंदर बाहर करने लगा.

थोड़ी ही देर मे मनु पूरा जोश मे आ गया.... बड़ी तेज़ी से सूकन्या को उठा कर उसे स्मूच करने लगा, और पैंट के बटन खोल कर उसकी पैंट को पैंटी सहित नीचे खिसका दिया.

सूकन्या की पैंट उसके जांघों के नीचे आ गयी, अर्जुन उसे पीछे घुमा दिया.... सूकन्या वॉश बेसिन के रॅक पर अपने दोनो हाथ टिका कर कमर को बाहर निकाल ली.

बिल्कुल सफेद बम को देख कर अर्जुन दोनो हाथ से उसे थप-थपाते उसकी दरारों मे अपना मूह डाल कर दाँतों से हल्का बाइट करने लगा.... सूकन्या उपर की तरफ उचक कर एक मादक सिसकारी भरी..... "ओह ! अर्जुन डार्लिंग"......

सूकन्या की कमर खुद-व-खुद हिलने लगी, और अर्जुन भी अपने दाँत से उसके योनि को कुरेद'ते हुए उस पर ज़ोर से जीभ फिराने लगा....

"इसस्शह .... अर्जुन... अब जल्दी भी करो, कयि दिनो की प्यासी मैं भी हूँ"

अर्जुन तुरंत खड़ा हुआ, और अपने लिंग को योनि पर थोड़ा रगड़ते उसे झटके दे कर अंदर डाल दिया..... "उफफफफफफफफ्फ़.... माइ डॉग्गी.... उम्म्म्मम..... फक्क्क हार्डर बेबी"

अर्जुन अपने हाथ आगे बढ़ा कर दोनो बूब्स को कपड़ों के उपर से ज़ोर-ज़ोर दबाते हुए तेज-तेज धक्के देने लगा....

"ओह्ह्ह्ह सुकन्या... माइ फ़किंग बिच.... मज़्ज़ाअ आ रहा है ना".....

"उम्म्म्मम... अर्जुन, बहुत प्यासी हुन्न..... हर्द्द्द... माइ डोगी.... हार्ड... फक्क हरद्द्द... ओह्ह्ह बेबी..... पर तुम्हे मेरी ज़रा भी चिंता नही.... आअहह... कब मुझे टोटल पॉवर मिलेगा".....

"ऊऊऊऊ.... सुकन्या... जल्द ही माइ बिच... एक भाई तो गया, दूसरे का भी कुछ सोचना होगा"......

"आहह ! स्वीटहार्ट.... फक्क्क हार्डर... ज़रा ज़ोर से मस्लो बूब्स को.... आहह... अब तो लगता है मानस नही मनु को ही आउट करना था"

"अहह.... तू चिंता क्यों करती है.... आहह... आहह.... ऊऊऊऊओ..............

"ऑश अर्जुन ... कम ऑन माइ फेस बेबी..... मेरे फेस पर गिराऊओ.... उफफफफफफ्फ़"

जल्दी से सूकन्या मूरी और अपनी आखें मूंद कर चेहरा उपर कर ली.... "आहह... आअहह... आअहह" ... और पाचक से जैसे बंदूक से गोली निकल रही हो.... लिंग ने टीन चार झटके खाए और पूरा गरम लावा सूकन्या के चेहरे पर गिरा.

अर्जुन दीवाल से टिक कर तेज-तेज सांस लेने लगा. सूकन्या अपने हॅंड बॅग से रुमाल निकाल कर अपने चेहरे और योनि को सॉफ कर के खड़ी हो गयी और अपने कपड़े को जल्दी से ठीक करने लगी....

सूकन्या..... अर्जुन तुम ना जगह देखते हो ना वक़्त, बस कहीं भी शुरू हो जाता है.... निकलो अब यहाँ से जल्दी...

 
दोनो वापस आ कर सूकन्या के कॅबिन मे बैठे...... "सुकन्या, दिन-व-दिन तुम और जवान, और हॉट होती जा रही हो, तुम्हे देख कर तो कंट्रोल नही होता"

सूकन्या.... बस-बस अर्जुन, केवल बातें भर कर लो, लेकिन मुझे कभी टोटल कंट्रोल मत देना. मुझे तो लगता है, तुम से बस सेक्स की उम्मीद ही रखूं, बाकी सब उम्मीदें बैमानी है.

अर्जुन.... अर्रे तुम भी ना डार्लिंग, नाराज़ हो जाती हो.... अर्रे मनु ने जो गेम प्लान किया था वो सोचा समझा था. ज़रा तुम भी समझने की कोसिस करो, कोई भी बोर्ड मेंबर एक साथ नही सब टूटे हैं. अब तो बस देखती जाओ... मनु ने जो पाया है, उसे डुबाने के लिए लोग ज़रूर तुम से कॉंटॅक्ट करेंगे... बस मौके की तलाश मे रहो... और भूलो मत, तुम्हारा 15% मेरी ही देन है, वरना तुम्हारे पति ने तो सब दान ही कर दिया था.

सूकन्या.... भगा दूँगी अर्जुन तुम्हे... पहले वो कामिनी काव्या अब उस नकारा की याद दिला रहे हो.... हां बाबा भूली नही मैं अब तक और ना कभी भूलूंगी... पर डार्लिंग सिर्फ़ 15% से क्या होता है.....

अर्जुन.... सब्र रखो सुकन्या, वरना जल्दी पाने की चाहत मे कहीं सब कुछ ना खो दो....

अर्जुन और सूकन्या दोनो बात कर ही रहे थे... तभी सूकन्या के मोबाइल पर तनु का कॉल आया.... उसके कॉल को देख कर सूकन्या बड़ी हैरानी से अर्जुन की ओर देखने लगी....

"किसका कॉल है".....

"तनु है".....

"पिक करो सुकन्या, टोटल पावर की ओर ये पहला कदम है"

सूकन्या ने कॉल पिक-अप किया.... थोड़ी देर इधर उधर की बातें हुई... फाइनली, नेक्स्ट वीक सनडे को सुकन्या के साथ मीटिंग फिक्स हो गयी.....

सूकन्या ... और ... अर्जुन....

सूकन्या..... ह्म ! अब समझी तुम्हारे इशारे अर्जुन... तब से तुम इसी ओर इशारा कर रहे थे....

अर्जुन..... हां इसी की तरफ मेरा इशारा था.... मुझे पता था ये लोग कॉन्टेक्ट करेंगे ही करेंगे... पर उस से पहले तुम्हे हर्ष से एक डील सेट करनी होगी....

सूकन्या.... हर्ष से डील, इसका मतलब हर्ष भी इनके साथ मिल गया है क्या....

अर्जुन..... मुझे नही लगता हर्ष इनके साथ होगा.... लेकिन हर्ष इनके साथ हो कि ना हो... एक डील तो तुम्हे हर्ष से करनी ही होगी....

सूकन्या..... कैसी डील अर्जुन....

अर्जुन..... पहले इन से मिलो, और देखो कि ये चाहते क्या हैं....

तनु.... राजीव... और वंश....

तनु.... गुड न्यूज़, सूकन्या मान गयी है हम से मिलने के लिए, लेकिन सनडे से पहले तक रौनक को भी अपने साथ होना पड़ेगा.....

वंश.. और .. राजीव... दोनो एक साथ.... "वो मेंटल है, तुम ही उसे हॅंडल करो"

वंश.... लेकिन सब एक मत होंगे कैसे, सारे शेयर किसके नाम पर करे और किसे एमडी पावर दे.

तनु.... इस पर लडो मत तुम दोनो... उसके लिए तो बेहतरीन आइडिया है मेरे पास... तुम दोनो गिव अप कर दो और उन्ही दोनो को फ़ैसला करने दो, दोनो मे से म्ड कौन होगा. मेरे कइट्ती पार्टी का टाइम हो गया मैं चली... एंजाय करो दोनो, जल्द ही एस.एस ग्रूप का काया पलट होने वाला है.

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सब के सुहाने दिन के सपने, और सब का घुमा फिरा कर एक ही टारगेट टोटल कंट्रोल. मनु अपना काम ख़तम कर के वापस घर आया... अभी थोड़ा रिलॅक्स ही हुआ था कि उसके फोन की घंटी बजने लगी.....

मनु.... हेलो..

मानस.... कैसा है मनु...

मनु.... भाई.... अच्छा हूँ भाई.... लेकिन अब बहुत हुआ, वापस आ जाओ प्लीज़. मैं अकेला हो गया हूँ....

मानस.... एंजाय कर, और कभी खुद को अकेला मत समझना. और याद है ना जाते-जाते मैने क्या कहा था....

मनु.... वही तो कर रहा हूँ भाई.... नेवेर ट्रस्ट ईवन शॅडो....

मानस.... कूल मनु... लगता है बड़ा हो गया... चल मैं कॉल रखता हूँ, अपना ख्याल रखना और ज़्यादा सोचना मत.

मानस, एकलौता जो इन कॉपोरेट अफेर्स से दूर था... गहरी सांस लेते खुद से कहा.... "बस एक बार मिल जाओ.... किधर छिपे हो"

मानस थोड़ी देर खुद के अतीत मे झाँका. छोटे-छोटे उसके भाई बहन, उनकी प्यारी खिली सी मुस्कान, और साथ मे उन सब के सिर पर हाथ फेरती उसकी माँ. इस पल को याद कर के मानस मंद-मंद मुस्कुरा रहा था....

एक गहरी सांस के साथ अपनी आखें खोला... एक लड़का उसके पास खड़ा, उसे जगाने की कोसिस कर रहा था....

मानस..... क्या हुआ छोटू, पता चला कुछ वो सब कहाँ गये.

लड़का.... हां साब जी सब पता चल गया. वो दीवान साहब और उनकी बेटी कहाँ है वो तो पता नही, लेकिन हां उसके एक करीबी दोस्त कानपुर मे रहते हैं, वो आप को दीवान साब के बारे मे ज़रूर बता सकते हैं.

मानस.... उस आदमी का कोई पता भी है, या बस कानपुर का ही नाम ले कर आया है....

लड़का.... हा हा हा.... नही नही साहब जी पूरा पता भी लाया हूँ.

मानस.... ठीक है फिर, जल्द से जल्द कानपुर जाने की व्यवस्था करवाओ.

"थॅंक्स गॉड, आख़िर कर कुछ तो हाथ लगा.... काश कोई जादू होता और मैं सीधा दीवान के पास ही पहुँच जाता. अब तो हद है इस बेचैनी की.... कोई मुझे जल्द से जल्द कानपुर पहुँचाओ"... मानस, से अब एक पल की भी देरी बर्दस्त नही हो रही थी... वो जल्द से जल्द किसी तरह से कानपुर पहुचना चाह रहा था.

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कॉर्पोरेट अफेर्स मे खुद को सब से स्ट्रॉंग समझने वाला खिलाड़ी, इस वक़्त खुद को काफ़ी तन्हा समझ रहा था. हर्षवर्धन ने कल रात रौनक से बात किया, और मनु के विषय पर चर्चा करना चाहा. लेकिन रौनक ने उससे "तबीयत खराब सी लग रही है" .. ऐसा कह कर फोन रख दिया.

अमृता.... हर्ष, तुम इतना टेन्षन क्यों ले रहे हो, ग़लती तुम्हारी ही है जो तुम ने मनु को कम आँका.

हर्ष.... ह्म्म्म्म ! तुम सही कर रही हो, पर ये रौनक को क्या हुआ, वो मुझे अवाय्ड क्यों कर रहा है.... उसके दिमाग़ मे चल क्या रहा है....

अमृता..... मुझे तो शक़ हो रहा है, क्योंकि कल राजीव, वंश और रौनक तीनो ही एक वक़्त पर निकले थे....

हर्ष..... मुझे क्या पता अमृता, तीनो शायद मनु के पोस्ट को भूना नही पाए, और अनाउन्स के बाद ही निकल गये हो. अब तीनो के बीच कल कुछ हुआ या नही ये तो उन्ही तीनो मे से कोई एक बता सकता है.... लेकिन पापा का यूँ अपना पोस्ट छोड़ देना और मनु को उसकी जगह बिठा देना, ये तो मेरे समझ से परे है....

अमृता..... आप अभी ऑफीस जाओ, मैं आज घर पर रह कर पता करती हूँ, पापा जी ने ऐसा क्यों किया...

हर्षवर्धन ऑफीस के लिए निकल जाता है, और अमृता शम्षेर से बात करने उसके कमरे पहुँच जाती है..... "क्या मैं अंदर आ जाऊ डॅडी जी"

शम्षेर..... आओ, आओ अमृता... तुम्हे आने के लिए इज़ाज़त की क्या ज़रूरत...

अमृता..... डॅडी जी मुझे आप से ये उम्मीद नही थी, आप ने मेरा दिल तोड़ा है...

शम्षेर..... दिल और मैने, वो कैसे अमृता...

अमृता..... अपना पोस्ट उस कुतिया के बच्चे को दे कर...

शम्षेर..... अमृता, अब जाने भी दो इस बात को. नया खून है हमारे बिज़्नेस को बहुत आगे ले जाएगा.... कुछ अच्छा होता है तो खुश होना चाहिए....

अमृता.... इसमे अच्छा क्या था पिताजी. खुद की कंपनी को तो वो डूबा रहा है... और आप ने पूरे ग्रूप की ज़िम्मेदारी उस पर सौंप दिया. अच्छा है डॅडी जी, मेरी सेवाओं का क्या खूब सिला दिया है...

शम्षेर, गुस्से मे..... एहसान ना दिखाओ अमृता, तुम ने जो भी किया था वो बस अपने स्वार्थ मे किया था, उसे सेवा का नाम नही दो...

अमृता..... डॅडी जी, उसमे केवल मेरा हे स्वार्थ नही था, आप का भी अपना स्वार्थ भी जुड़ा हुआ था.... और हां यदि मैं डूबी तो आप को भी नही छोड़नी वाली, याद रखना ये बात.... आप के इस एसएस ग्रूप की बुनियाद मेरे दिमाग़ की उपज से रखी गयी थी....

शम्षेर..... मेरी उम्र तो बीत चुकी अमृता, अब इन धमकियों का मुझ पर कोई असर नही होगा. तुम ने मूह खोला तो मेरा कुछ नही जाएगा, उल्टा तुम्हारे हिस्से के 15% जो हैं वो भी मनु का हो जाएगा.... और तब शायद तुम्हे पछतावा हो कि क्यों तुमने अपना मूह खोला.... नाउ गेट लॉस्ट... जो करना है करो. और कहीं यदि मेरा दिमाग़ खिसका तो मैं पूरा ग्रूप उसके नाम पर कर दूँगा...

अमृता..... सॉरी डॅडी जी, मैं थोड़ा गुस्से मे आ गयी थी. पर मेरी हालत भी तो समझिए. हर्ष के रहते आप ने मनु को एमडी बना दिया....

शम्षेर..... तुम दोनो नकारे हो, और मुझे बस मनु मे फ्यूचर नज़र आता है. मैने ग़लती किया... मुझे उन दोनो भाइयो को भी तुम सब के बराबर शेर्स देने थे...

अमृता.... डॅडी जी, ज़रा ये भी तो सोचिए कि पूरे ग्रूप को खड़ा करने मे मेरा क्या योगदान था....

शम्षेर.... मैं भुला नही कुछ भी अमृता, लेकिन शायद तुम लोग भूल चुके हो.... दिमाग़ के घोड़े दौड़ाओ और सोच को बदलो पहले, और इस बात पर गौर करो कि आख़िर मनु ही क्यों एमडी के लायक है.... जब तुम्हे बात समझ मे आ जाएगी, समझ लेना तुम्हे जो चाहिए वो तुम्हे मिल गया....

अमृता, शम्षेर को गयी थी तो समझाने, लेकिन खुद ही समझ कर आ गयी.... इधर पूरा ऑफीस और फॅक्टरी वर्कर फूल-माला लिए, ऑफीस गेट पर मनु का इंतज़ार कर रहे थे.... जैसे ही मनु की कार गेट पे पहुचि सारे वर्कर ने उसका रास्ता रोक लिया....

किसी की आखों मे आँसू थे, तो किसी के होंठो पर खुशी.... सब ने मनु के कल के फ़ैसले का स्वागत किया.... कयि सारे वर्कर्स और सब की कुछ ना कुछ परेशानिया, सब ने अपनी परेशानी भी रखनी चाही, लेकिन भीड़ मे सब की बात हवा हो गयी....

मनु सब लोगों की बधाइयाँ स्वीकार कर सीधा एमडी चेंबेर मे आया.... आज उसके पास दो पीए थे... एक तो उसकी अपनी स्नेहा... और दूसरा अर्जुन.....

मनु.... अर्जुन बॉस अब क्या आप मेरे पिछे रहेंगे....

अर्जुन.... मौका मिला है सर, प्लीज़ मना मत करना ......

मनु.... पर एक समस्या है अर्जुन बॉस.... मैं स्नेहा को हटा भी तो नही सकता.... अच्छा एक काम करो आप, मेरी पिच्छली चेयर खाली है, उसे जा कर आप देखो.. मुझे वहाँ के सीईओ के लिए किसी ना किसी को तो अपायंट करना ही है, तो आप क्यों नही....

अर्जुन..... क्या बात कर रहे हैं सर, सच मे मैं ये सही सुन रहा हूँ....

मनु.... हां बिल्कुल सही सुन रहे है, जा कर एचआर से अपना नया अपायंटमेंट लेटर कलेक्ट कर के आज ही वहाँ का काम संभालिए....

अर्जुन के जाते ही..... मनु क्या वो सीईओ के काबिल था....

मनु..... चिल स्नेहा और आज का काम बताओ....

स्नेहा.... आज का सब से ज़रूरी काम, मिस स्नेहा की सॅलरी केवल 20% ही क्यों बढ़ी.... उसे तो 200% बढ़ना चाहिए था....

मनु..... हा हा हा .... चलो मज़ाक छोड़ो, और मुझे एक सीरीयस पॉइंट पर डिसकस करना है...

स्नेहा..... एस बॉस, बताइए....

मनु..... स्नेहा मुझे लगता है ऑफीस स्टाफ और फॅक्टरी वर्कर की कयि तरह की समस्या है, जो सुनी नही जाती.... मैं सोच रहा हूँ एक ग्रीवेन्स कमिटी बनाऊ, जो वर्कर्स की परेशानी सुन'ने और उसे सॉल्व करने के लिए बने.....

स्नेहा..... ह्म ! मनु इसमे ग्रीवेन्स कमिटी की कोई ज़रूरत नही समझ मे आती है. ऑलरेडी एचआर है ना उनकी सुन'ने के लिए.... बस नियमों मे थोड़े बदलाव लाने होंगे.... और उसके लिए अपने लॉ अड्वाइसर की राई ले लो.....

मनु..... हां ठीक है... कल की एक मीटिंग उनके साथ रख दो.... और ये एमडी चेंबर तुम्हारा.... बैठ कर फाइल्स चेक करते रहना .... कोई ज़रूरी फाइल लगे तो मुझे मसेज करना, कॉल कर के डिस्ट्रब मत करना...

स्नेहा.... लेकिन मनु, आज पहले दिन ही कहाँ जा रहे हो.....

मनु..... मुझ से कोई जला है... उसकी जली को बुझाने या भड़काने जा रहा हूँ ... अभी कुछ कह नही सकता ......

स्नेहा.... बेस्ट ऑफ लक मनु.... मुझे पूरी डीटेल बता देना ......

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