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हंग्री वुल्फ गेम (इंसान या भूखे भेड़िए ) complete

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कानपुर नवाब के घर....

ड्रस्टी ने अपने घर पर पूरा महॉल जमा लिया था. पूर्वी, उसके पिता शेखर दीवान, शौकत आवाँ (नवाब) उसकी बेगम और इन सब को होस्ट कर रही थी ड्रस्टी....

दीवान.... नवाब साहब कहीं आप ने दूसरी शादी तो नही कर ली जिसकी खुशी मे आप हमे यहाँ बुलाए हैं.

नवाब.... एक से तो निजाद नही मिल पा रहा दीवान साहब, कहाँ आप दूसरी को गले बाँध रहे हो.

पूर्वी.... अच्छा है ना अंकल नयी आंटी आने से सब बॅलेन्स हो जाएगा.

ड्रस्टी'स मोम.... आप दोनो को शर्म नही आती, जवान बेटियों के सामने ऐसी बातें करते...

पूर्वी.... अंकल, आज लगता है आप कि उपर बेलन पक्का टूटेंगे. अभी तो इनडाइरेक्ट हम सब का नाम ले कर चुप करा रही है, ज़रा अकेले कमरे मे जाना... आज तो आप की कुटाई पक्की है... वैसे कोई मुझे बताएगा हमे यहाँ बुलाया क्यों गया है...

ड्रस्टी.... मतलबी लोग, कोई कारण हो तो ही बुलाएँगे क्या, वैसे नही बुला सकती. बाइ दा वे एक सर्प्राइज़ के लिए बुलाया है...

पूर्वी.... कैसा सर्प्राइज़, आंटी तुझ पर बेलन ना तोड़ें इसलिए हम सब के सामने अपने बाय्फ्रेंड को बुला ली घर...

ड्रस्टी.... कैंची की तरह चलती है तेरी ज़ुबान. चुप कर पागल.... 2 मिनट वेट करो अभी सर्प्राइज़ भी दिखेगा...

4/5 मिनट वैसे ही खींचा तनी का महॉल चला, तभी ड्रस्टी के मोबाइल पर रिंग हुआ और वो मानस को लेने बाहर चली गयी, और जब लौट कर मानस के साथ हॉल मे आई........

4/5 मिनट वैसे ही खींचा तानी का महॉल चला, तभी ड्रस्टी के मोबाइल पर रिंग हुआ और वो मानस को लेने बाहर चली गयी, और जब लौट कर मानस के साथ हॉल मे आई........

मानस को देखते हे वहाँ मौजूद सभी लोग अवाक रह गये गये. किसी को विस्वास नही हो रहा था की ड्रस्टी ऐसे शॉकिंग सर्प्राइज़ देगी. वहीं जहाँ सब लोग शॉक्ड थे, पूर्वी का अलग ही एक्सप्रेशन था....

पूर्वी.... कौन हैं ये माशूर हस्ती, जिसे देख कर सब खड़े हो गये.

जैसे ही पूर्वी ने ऐसा कहा, अब तो नवाब साहब और उनकी बेगम, दोनो दुगने शॉक्ड हो गये. वो दोनो बस दीवान की ओर देखने लगे.

नवाब.... ये सब क्या है दीवान साहब. आप ने तो कहा था कि ये लड़का पूर्वी को छेड़ता था, परेशान करता था, और इसी वजह से आप ने इनके घर की नौकरी छोड़ दी. इन्होने आप को इतना तंग किया कि आप पुरखों की ज़मीन बेच कर दर-दर भटकने पर मजबूर हुए. लेकिन यहाँ तो पूर्वी इसे पहचानती तक नही.

मानस.... ओफफफफफ्फ़ ओ' दीवान साहब ने ऐसा कहा था, लेकिन इन्होने तो मुझ पर ये इल्ज़ाम लगाया था कि "मैने इनकी बेटी के साथ रेप किया है". क्यों दीवान साहब आप ने इन लोगों को बताया नही. और ज़रा देखिए तो जिनका का रेप हुआ है, वो मुझे जानती तक नही.... कितनी बड़ी ट्रॅजिडी है....

पूर्वी.... क्या ???? .. मानस...

मानस... जी हां मानस. एक अटकी पड़ी गुत्थी सुलझाने के लिए पिच्छले काई सालों से भटक रहा हूँ....

नवाब.... दीवान साहब आप बोलते क्यों नही. चुप क्यों हैं...

दीवान, गहरी सांस लेता.... "देखो मानस उस दिन जो हुआ वो ग़लत हुआ पर जो कुछ भी हुआ वो मुझ से करवाया गया था, मुझे माफ़ कर दो".

मानस..... उस दिन जो हुआ... उस दिन जो हुआ..... क्या नही हुआ था उस दिन. मुझ पर रेप का इल्ज़ाम लगाया, मेरी माँ का कतल हो गया, और उसे स्यूयिसाइड का नाम दे दिया गया. मेरे सिर पर खून सवार है. मुझे उन सब के नाम चाहिए जो-जो इस खेल शामिल थे वरना जैसे मैं अपनी माँ बिना तड़प रहा हूँ, ठीक वैसे ही आप अपनी बेटी के बिना तड़पेंगे.

इतना कह कर मानस ने अपनी कमर से गन निकाल लिया और पूर्वी को गन पॉइंट पर लिया... ये देख सारे लोग डर से थर्राँने लगे......

ड्रस्टी... मानस, प्लीज़ आराम से बात करते हैं, ये गन हटा लो प्लीज़....

मानस..... कोई कुछ नही बोलेगा, आज सिर्फ़ दीवान बोलेगा.... दीवान बकना शुरू करो, वरना मैं जिस आग मे जल रहा हूँ तुम्हे भी जला दूँगा...

दीवान.... प्लीज़ मेरी बेटी को कुछ मत करो, उसे छोड़ दो. मैं तुम्हे सब का नाम बताता........

"बताता" पर ही रेकॉर्डर अटक गयी दीवान की, और देखते ही देखते उसके सीने से खून बहने लगा. कहीं दूर से निशाना लगा कर गोली मारा गया था. खिड़की के काँच से गोली सीधा दीवान के सीने मे, और वो सीना पकड़ कर नीचे गिर गया..... "काव्या... काव्या"..... और इतना बोलते-बोलते दीवान ने अपना दम तोड़ दिया.

सभी हैरान..... और अपने पापा का खून देख कर पूर्वी बेहोश सी हो गयी. नवाब ने तुरंत पोलीस को कॉल कर दिया. पोलीस जब आई तो पूर्वी ने सारा इल्ज़ाम मानस पर मढ़ते हुए रोती-रोती कहने लगी.... "गन ले कर आया है ये, मेरे पापा को मार डाला, मुझे भी मार देगा"

मानस को किसी भी इल्ज़ाम की चिंता नही थी, वो तो बस खुद से झल्लाया हुआ था, उसकी आत्मा जैसे रो रही थी. जिस दीवान की तलाश मे दिन रात एक कर दिया वो दीवान मिला तो सही पर बिना कुछ बताए मर गया. आतमा जैसे कल्पी हो और सीने मे आग भड़क गयी थी. एक बार फिर खेल, खेला जा चुका था.

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सनडे की सुबह...

पूरा परिवार तैयार था शादी की बात करने जाने के लिए. एक पर्फेक्ट फॅमिली हॉलिडे की ओर. जहाँ एक ओर हर्षवर्धन, अमृता और सुकन्या मनु के जीवन का नया तमाशा देखने जा रही थी. वहीं रजत और श्रेया भी इनके साथ जा रहे थे.

रजत की खुशी इस मे थी कि वो मनु और काया को मरते देखना चाहता है, वहीं श्रेया इस इरादे से थी कि स्नेहा और मनु का रिस्ता टूट जाए. वहीं मनु के इस रिस्ते के लिए दो मायूस प्रेमी भी जाने वाले थे.

अखिल ने जो काया के साथ उसे जला कर अपने प्यार के एहस्सास करने का दाव खेला था, उसमे बेचारा खुद फस गया. प्लॅनिंग ये थी कि तड़पती काया की रूह को शांति उसके घर रात मे जा कर दी जाए. लेकिन उफ़फ्फ़ ये पोलीस की नौकरी केस के सील-सिले मे देर रात हो गयी.

और सुबह जब अखिल ने काया से कॉंटॅक्ट किया तो उसके मिज़ाज देख कर अखिल का मंन रोने-रोने जैसा करने लगा. आशिक़ी और दोस्ती का पुराना नाता. फॅमिली सेक़ुरिटी के नाम पर एस.पी साहब भी साथ जाने की तैयारी करने लगे, जिसका अप्लिकेशन उसने मनु से लिखवाया.

बड़ी सी बस और एक ही बस मे पूरी फॅमिली चल दिए मनु के रिस्ते की बात करने के लिए. रास्ते मे सारे लोग अपने-अपने प्लान मे लगे हुए थे, वहीं काया चुप-चाप पिछे बैठी थी. अखिल, काया को पिछे से देख-देख अपनी फूटी किस्मत पर रो रहा था...

सभी लोग बस मे आपस मे बात करते हुए जा रहे थे.. अखिल ने मौका देख कर काया के गले पर पिछे से अपनी उंगली फिरा दिया.... काया खा जाने वाली नज़रों से पिछे घूमी, अपनी एक उंगली अखिल के ओर दिखा दी. मानो कहना चाह रही हो.... "डॉन'ट डेर".

काया फिर से चुप-चाप सीधी बैठ गयी..... तभी काया के मोबाइल पे मसेज बीप हुआ..... "सूऊ सॉली, प्लीज़ एक बार बात कर लो, मैं सब समझाता हूँ... प्ल्ज़, प्ल्ज़, प्ल्ज़," .....

काया रिप्लाइड.... "गो टू हेल".... मनु ने दोबारा मेसेज किया.....

"प्लज़्ज़्ज़्ज़ एक बार बात तो सुन लो"

इस बार काया ने मेसेज का रिप्लाइ नही किया. वो गुस्से मे चुप-चाप सीधी बैठी थी. अखिल एक बार फिर काया के ठीक पिछे आया. गले के ठीक उपर अपने नाक लगा कर, तेज साँसे खींचा और अपने होंठ काया के गले से लगा कर उसे चूम लिया.

काया का बदन जैसे सिहर गया हो. मीठा सा अहसास उसके बदन मे जैसे तैर गया हो, और गर्दन अपने आप झुक गयी. लेकिन अगले ही पल, काया गुस्से मे तम-तमाई सीट पर चढ़ि, और अखिल का कॉलर पकड़ कर उसे घूर्ने लगी.....

अखिल, छोटा सा मुँह बनाए..... "सॉली"

काया के एक्सप्रेशन मे कोई चेंज नही, और वो कॉलर पकड़े अब भी घूर रही थी. अखिल फुसफुसाते हुए..... "सॉली ना, बहुत तड़प रहा था मैं भी. वो मिश्रा जी ने ऐसा कहा था करने के लिए... उसी का आइडिया था तुम्हे जलाऊ. सॉली काया... तुम्हे तडपा कर मैं भी बहुत तडपा हूँ.... आइ लव यू ना"

काया सुनती रही, सुनती रही. जैसे ही अखिल ने आइ लव यू कहा, काया उसकी शर्ट को खींची, और उसके होंठ को अपने होंठ मे दबा कर चूमने लगी. काया मदहोशी की सांस खींचती, अपनी आखें मुन्दे अपने प्यार के अहसास वाले किस मे खोती चली गयी....

वहीं अखिल की आखों के सामने पूरा मूलचंदानी परिवार बैठा हुआ था. फटी सी आखों से वो नज़रे घुमा कर सब को देख रहा था. अखिल की साँसे अटकी थी, और काया तो जैसे होंठ को चूमते हुए उसमे खो चुकी थी. वो ना तो होंठ छोड़ने का नाम ले रही थी, और ना ही कॉलर.

तभी अखिल को लगा हर्षवर्धन पिछे मूड रहा है. वो झट से अपने सीट पर बैठ गया, और काया अब भी होंठो को गोल किए आखें मुन्दे उसी पोज़िशन मे थी.

हर्षवर्धन.... काया पिछे क्यों मूडी हो.

काया, अपनी आखें खोलती हल्का मुस्कुराइ..... "डॅड, मैं एस.पी सर से उनके इंटरेस्टिंग केस के बारे मे पूछ रही हूँ".....

हर्षवर्धन फिर से अपने काम मे लग गया...... "तुम पागल हो क्या, मरवाओगी. यूँ सब के सामने कोई किस करता है क्या".

काया.... किसी से प्यार करो तो टूट कर, किसी से नफ़रत करो तो वो भी टूट कर. ये बीच वाला काम अपने से नही होता है एस.पी सर.

काया की बात सुन कर, अखिल अपनी बड़ी सी आखें किए काया को देखने लगा... "टूट कर प्यार... वॉववववव"

अखिल भी अब उठा, काया के गले पर पिछे से हाथ डाला. दोनो की नज़रें मिली, होंठ खुद-व-खुद पास आते चले गये. आखें बोझिल हो कर धीरे-धीरे बंद होती चली गयी. और लबों से लब टकरा गये. दोनो एक दूसरे मे डूब कर, एक दूसरे को चूमने लगे.

कोई फ़िक्र नही थी कि वो कहाँ थे, बस दोनो डूब कर एक दूसरे को चूम रहे थे. तभी अखिल के कनपटी पर एक तमाचा पड़ा. दोनो की किस टूटी, और अखिल टुकूर-टुकूर उपर देखने लगा.

काया ने जब अपने सामने मनु को देखी तो वो शर्मा कर विंडो साइड खिसक गयी और कंबल से अपना मुँह ढक लिया. वहीं मनु ने गुस्से भरी नज़रों से देखते उसे अपने साथ अपने सीट पर ले गया.

अखिल बेचारा मनु को क्लरिफिकेशन देना चाहता था, पर जब भी मनु की तरफ घूमता तो मनु उसे खा जाने वाली नज़रों से देखता और अखिल चुप-चाप फिर सीधा बैठ जाता.....

अखिल की हालत देख कर काया हँसने लगी.... "आज तो लगता है एस.पी सर गियो"

पूरा कारवाँ आख़िर कार पहुँचा मथुरा. स्नेहा उन सब को देख कर इतनी खुश थी कि मानो उसका दिल उच्छलने का कर रहा हो. वो अपने कमरे मे जा कर "यॅ.. यॅ" करती अपनी हाथ उच्छल रही थी.

 
पूरा परिवार बैठा डाइयनिंग टेबल पर. मनु और स्नेहा, एक दूसरे को देखते, हल्का मुस्कुराते और फिर अपनी नज़र फेर लेते. दोनो के अंदर अजीब सी खुशी थी, और दिल मे गुदगुदी सी हो रही थी. बहुत ज़्यादा इधर-उधर की बातें नही हुई, सीधे मुद्दों पर आते मनु और स्नेहा के रिस्ते की बात शुरू हो गयी.

स्नेहा के पापा को बड़ा अच्छा लगा, बिल्कुल एक अच्छे रिश्तेदार की तरह पूरा मूलचंदानी पदीवार अपने लड़के की शादी की बात करने आया था, भला उसे क्यों इनकार हो. सब राज़ी थे, और पंडित जी को बुलावा भेजा गया.

इतने मे ही पूरे मूलचंदानी खानदान के पास मेसेज आने लगे. "चेक न्यूज़, चेक न्यूज़"

हर्षवर्धन.... न्यूज़ ज़रा लगाइए तो, पता नही हमारे असोसीयेट और बिज़्नेस पार्ट्नर्स क्यों बार-बार मेसेज कर रहे... चेक न्यूज़, चेक न्यूज़.

सभी ने हर्षवर्धन की बात का समर्थन करते हां मे हां भर दिया. टी.वी ऑन हुआ न्यूज़ चॅनेल खुला... और ब्रेकिंग न्यूज़ नीचे बोल्ड फ्लश और उपर एक आदमी गला फाड़ रहा था.....

"पैसों के दम पर क़ानून को ताक पर रखने वाले मूलचंदानी हाउस के लोग. इनके एम.डी मिस्टर. मनु मूलचंदानी जहाँ पूरी कॉमपार्टमेंट को बेहोश करवा कर अपनी सेक्रेटरी के साथ वयभिचार का नंगा नाच नाचते हैं, वहीं इसके बारे भाई मानस मूलचंदानी को कल पोलीस ने उसके ही एक एक्स-एम्पॉलय शेखर दीवान के खून के इल्ज़ाम मे कानपुर मे आरेस्ट किया"

मनु और स्नेहा के सेक्स वीडियो को बार-बार टी.वी स्क्रीन पर प्ले किया जा रहा था. अपने परिवार के सामने ऐसी वीडियो, शर्मिंदगी से उस को मर जाने का मन करने लगा. वो रोती हुई भाग गयी अपने कमरे मे. इधर मूलचंदानी फॅमिली अंदर से मज़े लेती, स्नेहा के पापा को कहने लगी, "नही ये सब फेक दिखाया जा रहा है".

वहीं एक आदमी की इज़्ज़त उच्छल गयी थी सरे आम. स्नेहा के पिता ने तैश मे आते हुए सब को अपने घर से बाहर का रास्ता दिखाया. आज एक बार फिर मनु की रूह तक रोई थी. अमृता ने ऐसा प्लान किया था कि रिपोर्टर्स स्नेहा के घर के बाहर तक पहुँचे ....

तरह-तरह के सवाल... पहले मूलचंदानी फॅमिली से, जिस पर चुप्पी साधे वो लोग निकल गये. फिर सवाल एक लड़की के पिता से, जिसकी लड़की की वीडियो बार-बार प्ले हो रही थी. उस बाप की आखों मे आँसू थे, कोई जबाव नही था बस अपने घर के दरवाजे को बंद कर लिया......

दोनो भाइयों की रूह तक रो रही थी, और सीने मे आग लगी थी. मानस जिसे पागलों की तरह ढूँढ रहा था, जब वो मिला तो उसकी तलाश को दीवान की मौत से ख़तम कर दिया. वहीं मनु को आज बहुत दिनो बाद अंदर से खुशी मिली थी. लेकिन उसे इस कदर रौंदा गया कि उस से उसकी सब से प्यारी चीज़ दूर हो गयी.

मनु ने खुद को संभाला और वो तुरंत अखिल के साथ निकला....

अखिल.... ये सब क्या है मनु, ऐसी बचकाना हरकत....

मनु..... अखिल कुछ मत पूछ अभी. ऐसी जगह मारा है कि ज़ख़्म नही दिखेंगे किसी को, पर ये ज़ख़्म मुझे जीने नही देगा. मेरे भाई तू छान बीन शुरू कर, जितने पैसे लगने है लगा दे बस तू उस टेप को फर्जी साबित कर, और किसने करवाया उसका नाम ढूंड निकाल. बाकी का मैं देख लूँगा.

मनु ने फिर तुरंत अपने लॉयर को कॉल किया. केस उसे पहले से पता था. उसने मनु को सब सजेस्ट कर दिया. टेप का केस वो यहाँ हॅंडल कर लेगा. मानस के केस के लिए उसने कानपुर के ही एक क्रिमिनल लॉयर से कॉंटॅक्ट कर लिया.

सारी बातें होने के बाद..... "कंप्लेन पहुँच गयी है अखिल. मैं चाहता हूँ इस केस को तुम पर्सनली हॅंडेल करो. बाकी बातें कानपुर से लौटने के बाद मे करते हैं".

 
मनु, तुरंत वहीं से कानपुर पहुँच गया. मनु, सीधा पोलीस स्टेशन पहुँचा. कई सालों बाद दोनो भाई ने एक दूसरे को देखा था, लेकिन देखा भी तो कैसे..... दोनो भाइयों के आँखों मे आसू थे, और खड़े बस एक दूसरे को ही देख रहे थे...

सनडे का दिन था, मानस के केस मे बैल लेने मे टाइम लग गया. लेकिन पैसे हो तो कुछ भी मुस्किल नही. लॉयर बैल पेपर ले आया, और मनु अपने भाई को ले कर चल दिया.....

मनु... ठीक हो भाई...

मानस.... सब जानते हुए भी पूछ रहा है...

मनु.... ह्म ! मैं समझ सकता हूँ. छोड़ो भी, जिनको जो करना था वो कर गये. सब भूल जाओ अब हमे नयी शुरुआत करनी है, बिल्कुल नये तरीके से. तुम्हारी ज़रूरत है भाई...

मानस.... मनु, तेरी आँखें कुछ और कहानी बयान कर रही, क्या हुआ है. तू रोया है...

मनु.... कुछ नही भाई... छोड़ो भी ये सब. अब बस मेरे साथ रहो. हम मिल कर उन सब के हर किए का बदला लेंगे बिल्कुल अलग अंदाज़ मे.

मानस.... ह्म्‍म्म्म ! यार दिल मे बोझ है... चल, चल कर कुछ पीते हैं....

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मूलचंदानी हाउस.....

अमृता.... क्यों सुकन्या.. ये दाव कैसा लगा. अब तो मैं कह सकती हूँ ना, "अब देखो तमाशा".

सुकन्या.... वाहह ! मज़ा आ गया. मनु के साथ तुम ने उसके भाई को भी क्या खूब लपेटा है. और उस काव्या भक्त, आस्तीन के साँप दीवान को भी ठिकाने लगा दी. क्या बात है अमृता, हॅट्स ऑफ.

अमृता.... नही मानस के बारे मे मुझे नही पता था. मुझे भी न्यूज़ से ही पता चला. शायद हर्ष का प्लान हो.

हर्षवर्धन..... मानस की इन्फर्मेशन मेरे पास कहाँ से आई. वैसे भी मैं जल्लाद नही, जो किसी का मडर करवा दूं... मानस के साथ उधर क्या

हुआ मुझे भी न्यूज़ से ही पता चला.

अमृता.... छोड़ो, लेकिन खुश तो हो ना. आह्ह्ह्ह ! उसका तड़पता चेहरा देख कर ऐसा लगा जैसे उसकी कमिनि माँ तड़प रही हो. तुम सोच नही सकते कितनी सुकून मे हूँ....

सुकन्या..... सेम हियर अमृता. लेकिन दोनो भाई को एक साथ लपेट गया. उन्हे भनक भी पड़ी तो हमे छोड़ेगा नही.

अमृता.... तो बिगाड़ क्या लेगा. उसे तो यकीन है कि उसके साथ किसने बुरा किया... लेकिन जब वो अपने प्यारे दोस्त से इस केस को फॉल्स साबित करने कहेगा तो फिर भगवान जाने कि कौन सा नाम सामने आएगा. और तब मैं अपने बेटे मनु के लिए एक एननोसेंट माँ रहूंगी. मनु

खुद पर धिक्कार करेगा और कहेगा... "मैने इस देवी जैसी माँ पर शक़ किया"... हा हा हा.

सुकन्या.... चलो अब कहीं जा कर दिल को चैन मिला. अब मुझे लग रहा है कि कहीं कोई प्लान था. अब अगला मूव क्या होगा....

अमृता.... वेट & वॉच. पहले मनु के एम डी पोस्ट से रेसिग्नेशन की डिमॅंड तो आने दो, फिर हम उसे अपने कदमों तले दबाएँगे.....

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रजत... सम की बातचीत....

रजत.... साले, कमिने तू है किधर.... हरामजादे तूने तो कहा था कि दोनो का काम तमाम हो जाएगा, फिर क्या हुआ.

सॅम..... साले तू क्या पागल है. एक तो बस से पूरा परिवार एक साथ जाते हो, उपर से एस.पी भी उस बस मे. तेरी ग़लत इन्फो थी, इसमे हम क्या करेंगे.

रजत..... हां-हां ठीक है समझ गया. तू ये बता मेरा काम कब होगा.

सॅम.... काम तो कर दिया. देखा नही क्या, उस मानस को कैसे फसा दिया. मुझे लगा किसी को तो मार कर अपने दोस्त को खुश कर ही दूं...

रजत..... तो क्या तूने वो करवाया था...

सॅम.... हां मैने करवाया था. अब तो खुश है ना....

रजत..... वाहह ! अब लग रहा है मेरा पैसा सही हाथों मे है. कल जो उस कुत्ते का एक्सप्रेशन था वो उसके मरने से ज़्यादा मज़ेदार था. उसे दर्द तो दे दिया, अब उस से मुक्ति भी करवा दे....

सॅम.... हां वो भी हो जाएगा.... लेकिन दोस्त एक मर्डर की डील तो पूरी हो गयी, अब बस एक का ही होगा... तू बता टारगेट किसे करना है... मनु या काया....

रजत.... मनु, काया और उसके भाई मानस तीनो.... आज शाम पैसे ले जाना.....

सम ने ओके कहा और कॉल कट हो गया...... दीप्ति..... "बड़े कामीने हो, बिना कुछ किए वसूली"

सॅम.... इस बार 1 करोड़ लूँगा. अपना कोटा पूरा, फिर इधर से कटने का टाइम आ जाएगा....

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शाम का वक़्त, एस.पी ऑफीस.....

अखिल, इन्वेस्टिगेटिंग ऑफीसर से पूछते..... "केस सॉल्व हो गया"

ऑफीसर.... मामूली सा केस था सर, जैसा आप ने कहा था वैसा हमने करवा दिया है. ये रहा फोरेन्सिक रिपोर्ट.... वीडियो फेक थी, और हां ये वीडियो किसी वंश के कहने पर लीक हुई थी, जिसके बदले किसी बॉडीगार्ड को बहुत पैसे मिले थे.

अखिल.... थॅंक्स तुम जा सकते हो....

अभी इनकी बातें ख़तम हे हुई थी कि काया भागती हुई एस.पी ऑफीस मे पहुँची.....

अखिल, पहले अपने जूनियर्स को बाहर भेजा...... "व्हाट हॅपन्स, तुम इतनी परेशान क्यों हो"

काया.... अखिल वो... वूऊ...

अखिल.... कम डाउन काया... इतना परेशान क्यों हो...

काया... परेशान ना होऊँ तो क्या करूँ.... कल से मनु भैया नही लौटे हैं....

अखिल.... हां वो कानपुर गया था... मानस के पास ...

काया.... मेरा दिमाग़ मत खराब करो. कल 4 बजे हे उन्होने बताया वो कानपुर से निकल रहे हैं.... अब तक नही पहुँचे.... फोन भी नही लग रहा है....

अखिल.... कम डाउन काया, आ जाएँगे, कोई बच्चा थोड़े ना है... तुम टेन्षन ना लो....

काया.... मन मे कैसे-कैसे सवाल आ रहा हैं, और तुम मुझे बस शांत रहने के लिए कहो... हुहह ! गुड बाइ, मैं खुद ढूँढ लूँगी अपने भाई को....

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एक दिन पहले....

मनु और मानस दोनो भाई अपना-अपना गम मिटाने मयखाने मे घुसे. दोनो ने इतना पिया कि होश ही नही था. लेकिन इन सब बातों मे मानस कहीं भूल चुका था कि किसी लड़की का दिल उसके लिए धड़कने लगा है. हालाँकि ड्रस्टी के दिमाग़ ने कभी इस बात को नही कबूला, पर

दिल मे बस मानस का ही ख्याल रहता था....

पोलीस स्टेशन से जब दोनो भाई निकल रहे थे तभी से ड्रस्टी उन दोनो के पिछे थी. उसे खुद भी पता नही था क्यों, पर वो मानस के पिछे

उस बियर बार मे गयी. लेकिन मानस ने उसे रिक्वेस्ट करते वहाँ से जाने के लिए कह दिया. ड्रस्टी फिर भी उस का इंतज़ार करती रही.

1 घंटा, 2 घंटा, 3 घंटा.... समय बीत'ता रहा, ड्रस्टी के घर से भी कॉल आने लगे, लेकिन ड्रस्टी पास के रेस्तरा मे बैठी दोनो भाई के बाहर

निकलने का इंतज़ार करती रही. रात के तकरीबन 8.30पीयेम बजे, जब ड्रस्टी से बर्दास्त नही हुआ, वो फिर से उस बियर बार मे चली गयी.

वहाँ जब पहुँची तो देखी दोनो भाई पी कर बेहोश थे.... ड्रस्टी ने पहले तो उस बियर बार का पेमेंट की फिर वहाँ कुछ लोगों की मदद से दोनो भाई को टॅक्सी मे बिठाई, और अपने घर तक ले कर आई. नवाब साहब और उनकी बेगम ने जब दोनो भाई को देखा तो चकित रह गये,

लेकिन इस बार अपनी बेटी से कोई सवाल नही किया और दोनो को घर मे आने की पर्मिशन दे दिया....

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सुबह-सुबह.....

नवाब, मनु को घूरते हुए...... "तुम्हारे बारे मे कल टीवी पर दिखा रहे थे"....

मनु.... हम यहाँ पर कैसे पहुँचे...

नवाब.... दोनो भाई पी कर बेहोश थे तो मेरी बेटी तुम्हे यहाँ ले कर आई...

मनु हैरान होने लगा, तब मानस ने जबाव दिया..... "मनु ये नवाब साहब हैं, दीवान साहब के दोस्त हैं"

मनु.... ओह्ह्ह्ह ! शुक्रिया आप लोगों का जो भी आप सब ने किया. एहसान है आप लोगों का. कल जो कुछ भी यहाँ हुआ या वहाँ, सब किसी

की साज़िश थी, एक बहुत बुरी साज़िश....

मानस.... मनु कल वहाँ क्या हुआ था, मुझे कुछ बताया क्यों नही...

मनु.... क्या बताता, जाने भी दो ना....

मानस.... नही तू मुझे बता क्यों नही रहा, क्या हुआ था...

नवाब उसे कल वाली न्यूज़ दिखाने लगा... मनु के साथ किए को देख कर मानस का दिल भी रोने-रोने जैसा करने लगा..... "मनु, तू दिल

छोटा क्यों करता है, स्नेहा से तुम्हारी शादी की बात मैं करने जाउन्गा. किसी के कुछ भी दिखा देने से थोड़े ना कुछ हो जाता है".

मनु.... कुछ नही होता, बल्कि बहुत कुछ हो जाता है.... खैर जाने दो भाई, स्नेहा और उनकी फॅमिली को मैं समझा लूँगा...

नवाब..... बहुत अफ़सोस हो रहा है तुम दोनो के साथ ऐसा होता देख कर. यदि कल की वारदात मैं नही देखता तो मुझे भी शायद ये न्यूज़ सच लगता, लेकिन कल जो देखा उस से मैं हैरान हूँ. ऐसा फिल्मों मे देखा था लेकिन रियल मे भी ऐसा होता है पता चल गया. हुआ क्या था

तुम्हारे साथ, और दीवान ने सब को झूठी कहानी क्यों बताई. क्या हुआ था उस दिन...

मानस.... "वो ऐसी रात थी, जिसने हम दोनो भाई को अनाथ होने पर मजबूर कर दिया. मैं बोरडिंग से लौटा था, और शिमला अपनी माँ के पास गया था.... एक रात रुका और अगली सुबह हमारी ज़िंदगी बदल गयी थी".

"अगली सुबह मुझ पर पूर्वी को रेप करने का आरोप लग गया, और मेरी माँ ने उस गम मे सुसाइड कर लिया... ये थी कहानी उस रात से सुबह के बीच की... जब कि सब से बड़ा झटका ये था कि मैं सुबह 9 बजे उठा और रात को हे मेरी माँ ने सुसाइड कर लिया था. और उस

जगह पर कितने लोग थे उस रात ... सिर्फ़ 3. मैं, दीवान और मेरी माँ... पूर्वी को ना तो मैने रात मे देखा और ना ही सुबह"....

"हमे भिखारियों की तरह जीने पर मजबूर कर दिया. करोड़ो के मालिक के पास एक रुपया नही होता था. कभी-कभी तो हमे घर का समान बेच कर अपना गुज़ारा करना पड़ता था.... मेरे पिता और मेरी सौतेली माँ ने ऐसा मुँह मोड़ा कि जैसे वो हमे जानते नही..... माँ तो सौतेली थी,

लेकिन बाप तो अपना था, किसी को रहम नही आया... बस एक दादा था जो हम से हमदर्दी रखता था".

नवाब.... तो क्या तुम्हारे दादा ने तुम्हे तुम्हारा हक़ नही दिलवाया....

मानस.... "हां दिया ना लेकिन तब जब मैं लीगली उसका मालिक हो गया. उस से पहले बस हमारे बाल पर प्यार से हाथ फेरा करते थे".

"फिर मनु ने जब से कंपनी संभाला, मैं तब से इस दीवान को ढूँढ रहा हूँ. ढूंड रहा था उसे पागलों की तरह. लेकिन इतनी लंबी तलाश के बाद........ जिसने भी कल का कांड किया है उसने सही नही किया. अब सच जान'ने का कोई ज़रिया नही, लेकिन हम जानते हैं किसने सारा

कांड करवाया है.... जैसे खून के आँसू हम दोनो भाई रोए हैं उन्हे भी रुलाएँगे"....

नवाब.... तुम दोनो के साथ इतना बुरा हुआ, सुन कर मेरी रूह कांप गयी. तुम दोनो ने तो फिर भी उसे झेला है. एक बात अपने अनुभव से कहना चाहूँगा..... बदले की भावना अपने दिल से निकाल दो. ये बदले की भावना तुम्हे अँधा कर देगी. तुम दोनो बस अपना काम करते जाओ, पुराने दिन कभी मत भूलना. उपरवाला सब को मौका देता है, वो तुम्हे भी देगा.....

मनु.... शुक्रिया आप की सलाह के लिए अंकल. लेकिन एक बात मैं अपने अनुभव से कहता हूँ.... यहाँ आप जितना भूलने की कॉसिश करेंगे, लोग आप के ज़ख़्मों को और कुरेदेंगे.... आप को वो किसी नपुंसक की तरह देखेंगे. हम तो शांत ही थे, बताओ ना क्या बिगाड़ा किसी का...

मेरा भाई भटकता रहा सिर्फ़ अपने साथ हुए उस भयानक हादसे का पता लगाने... मैं उनकी कंपनी को भी आगे लेजा रहा था, जो इन सब के ज़िम्मेदार हैं... लेकिन हमे मौका देने के बदले देखो किसे मौका दे दिया....

नवाब... ह्म ! छोड़ो ये, जाने अंजाने मे मैं भी तुम्हारा गुनहगार हूँ. बिना कुछ जाने मैने भी तुम्हे अपने दरवाजे से भगा दिया.

मानस.... कोई बात नही अंकल. आप भी किसका विस्वास करते, किसी अपने का या मुझ जैसे गैर का....

नवाब.... नही, तुम गैर नही अब, मेरे बेटे जैसे हो. और हां खाना खा कर जाना...... और कोई आर्ग्युमेंट नही...

मनु.... क्यों केवल लंच ही कारवाओगे डॅडी जी.... डिन्नर नही...

नवाब.... हा हा हा.... अच्छा है ये अटिट्यूड मनु, बस मैं इसी की बात कर रहा था.....

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