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हंग्री वुल्फ गेम (इंसान या भूखे भेड़िए ) complete

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इधर तनु और रौनक के जाते ही नताली और मानस...

नताली..... मानस हमने दाँव तो खेल दिया है, पर कहीं पासा उल्टा पड़ा तो मनु की सारी प्रॉपर्टी चली जाएगी.

मानस..... ये रिस्क तो हमे उठाना ही था. अब तो इस पार या उस पर. लेकिन हमारे मदद करने के चक्कर मे तुम ने अपनी सारी प्रॉपर्टी भी दाँव पर लगा दिया.

नताली.... नोट एग्ज़ॅक्ट्ली. मेरे पास तो मेरा सब कुछ है. मेरी फॅमिली, मेरा लव फिर मैं इन पैसों की चिंता क्यों करूँ.

मानस..... ह्म्‍म्म्म ! और ये मैं अपनी उसी फॅमिली के लिए कर रहा हूँ, जिसे इन लोगों ने अपने स्वार्थ के लिए हम से अलग कर दिया.

नताली..... एसस्स मानस इट'स ऑल अबाउट फॅमिली. वैसे फॅमिली से याद आया, तुम डंप के डंप ही रहोगे.... नाराज़ कर दिया ना बेचारी को....

मानस.... मैने क्या किया नताली. हद होती है किसी भी चीज़ की. क्या अकेले मुझे ही प्यार है ड्रस्टी से जो मैं ही हर बात की पहल करूँ.... हुहह

नताली..... डफर... तुम ज़रा सा आगे तो बढ़ो वो अपना दिल तुम्हारे कदमों मे रख देगी. तुम बाय्स इतने रूड क्यों होते हो. क्या थोड़ा सा एमोशनल हो कर एक लड़की की फीलिंग नही समझ सकते. बेचारी तुम्हारे लिए इतनी दूर तक आई और तुम हो कि....

मानस.... हां ठीक है लेक्चर ना दो मुझे. जाता हूँ मैं भी. यार वो सब समझती है, कि मैं नर्वस हो जाता हूँ, फिर भी वो मुझे जान बुझ कर परेशान करती है.

नताली.... हुहह ! हॅंडल वित केयर.... ठीक है तुम नर्वस ही होते रहो, अभी यदि तुम ने उसे पर्पस नही किया तो मैं उसे वापस भेज दूँगी.

मानस.... धमकी तो ना दो, ठीक है जाता हूँ....

मानस भी ऑफीस से तुरंत निकला. उस के जाते ही नताली ने तुरंत कॉल लगा दिया ड्रस्टी को...

ड्रस्टी.... कैसी हैं नताली जी...

नताली.... तुम्हारी आवाज़ इतनी भारी क्यों है....

ड्रस्टी.... क्या करूँ, इतनी दूर मैं उनके लिए आई हूँ और वो हैं कि मुझे समझ ही नही रहे. जानती हूँ कि उन्हे मुझ से बेहद प्यार है, पर क्या आगे बढ़ कर वो दो शब्द बोल नही सकते. लगता है हार कर मुझे ही बोलना पड़ेगा, तब उन मे हिम्मत आएगी....

नताली.... नही बाबा, तुम्हारे बुद्धू को सब समझा दिया है. और ये भी कह दिया, यदि आज उसने प्रपोज नही किया तो तुम्हे वापस जाने का बोल दूँगी. भागा-भागा गया है तुम्हारे पास. बी रेडी और हां लड़कियों की इज़्ज़त बचा के. खूब नखरे करना और उसे ही बोलने देना...

ड्रस्टी चहक्ती हुई.... "हां ऐसा ही करूँगी".....

ड्रस्टी से बात करने के बाद नताली के दिमाग़ मे शैतानी आइडिया आए और उसने तुरंत कॉल मनु को लगा कर सारी बात बता दी. सब मानस की नर्वस सी हालत का मज़ा लेने के लिए निकले....

मानस ऑफीस से निकल कर सीधा ड्रस्टी के पास पहुँचा..... ड्रस्टी ने जैसे ही मानस को अपने सामने देखा उसकी धडकने बढ़ गयी. अंदर से जैसे वो "वॉवववव, यअहह, वूहूओ" करती चहक रही हो. पर अपने अरमान काबू रखते थोड़ा रूड होती पूछने लगी..... "हां कहिए क्यों आए हैं"

ड्रस्टी जब इतना कह रही थी तभी पिछे-पिछे नताली, मनु और स्नेहा भी वहाँ पहुँच गये थे. ड्रस्टी और मानस बाहर दरवाजे पर खड़े थे और फूलों के फेन्सिंग के पिछे से ये तीनो छिप कर देख रहे थे.

ड्रस्टी जैसे ही अपनी बड़ी आखें करती मानस के आने का कारण पूछी वैसे ही मानस की सारी हिम्मत हवा हो गयी. ड्रस्टी खड़ी मानस को घूर रही थी, और अंदर से हंस रही थी वहीं खड़े-खड़े मानस सोच मे पड़ गया की अब कैसे कहे...

मानस.... मैं .. वू.. मैं इधर से गुजर रहा था तो सोचा तुम से मिलता चलूं...

ड्रस्टी.... ह्म ! बस इतना ही सोच कर आए थे....

"अब क्या कहूँ क्या-क्या सोच कर आया यहाँ... लेकिन ये भी ना कि यहाँ आया तो प्यार से मुस्कुरा कर अंदर आने को कहे. उल्टा ऐसे रिक्ट करी कि अब जो भी कहने आया था उसे कहने की हिम्मत नही बची.... ड्रस्टी तुम समझती क्यों नही, कितना लव है तुम्हारे लिए इस दिल मे"...

 
ड्रस्टी से नही रहा गया, वो थोड़ी नरम होती पूछने लगी.... "क्या हुआ मानस क्या सोचने लगे, कुछ कहना है क्या"

मानस.... हां मैं वो कहना चाह रहा था.... मैं वो...

ड्रस्टी मुस्कुराती हुई अपनी गर्दन हिलाती..... "हां, हां क्या ... क्या कहने वाले हो मानस"...

मानस थोड़ी हिम्मत जुटा कर अपने घुटनो पर बैठ गया.... ड्रस्टी के हाथों को हाथ मे लिया...... उसे देखते हुए.... "ड्रस्टी... ड्रस्टी"....

ड्रस्टी अपनी नज़रें झुकाती.... "हां मानस अब कह भी दो"

मानस हाथ थामे, अपने धड़कते अरमान के साथ..... "ड्रस्टी वो मैं तुम से.. वो मैं ये कह रहा था"...

ड्रस्टी.... "हां मानस, हां... कहो भी आगे"

मानस.... ड्रस्टी, तुम आज बहुत खूबसूरत लग रही हो. मेरी धड़कनें तेज हो रही हैं... हाथ कांप रहे हैं बस तुम समझ जाओ, अब अल्फ़ाज़ नही निकल पाएँगे....

ड्रस्टी अंदर से मुस्कुराइ..... "मैं उन अल्फाज़ों को समझती हूँ मानस, पर तुम भी तो मेरे अरमान समझो. बस अब तुम भी हिम्मत कर के आइ लव यू कह दो. और कह कर यूँ गले लगो कि सीने की तड़प मिट जाए".... मुस्कुराती हुए ड्रस्टी बस सोचती रही, और मानस घुटनो पर बैठे उसके हाथों को अपने हाथ मे थामे, देखे जा रहा था.

ड्रस्टी.... मानस, प्लीज़ अब कह भी दो. सब कुछ कह दीजिए बस अब वो अल्फ़ाज़ भी कह दो जिसे सुन'ने के लिए मैं बेकरार हूँ....

मानस, को सीधे इशारे... अब तो कहना ही था... मानस कहने की फिर से कॉसिश करने लगा..... "ड्रस्टी, तुम्हे जब से देखा हूँ होश ही नही

रहता. हर वक़्त तुम्हारा ही ख्याल रहता है. तुम्हे ना देखूं तो चैन नही आता"....

ड्रस्टी.... हां मानस.... वो तो पहले भी कह चुके. मुझे भी तुम्हे देखे बिना चैन नही आता... कुछ अधूरा सा लगता है तुम बिन... आयेज...

मानस.... हां आगे....

इतना कह कर मानस ने फिर एक पॉज़ लिया और टुकूर-टुकूर ड्रस्टी को देखने लगा.... इतना पॉज़, मनु इरिटेट होते हुए फॅन्सिंग के आगे आ गया और चिल्ला कर कहने लगा..... "ड्रस्टी उस लल्लू को छोड़ दो उस से कुछ नही हो पाएगा, मैं तुम्हे कहता हूँ.... आइ लव यू आक्सेप्ट माइ

प्रपोज़ल".

 
तभी पीछे से स्नेहा और नताली भी आगे निकल कर आ गयी..... स्नेहा, मनु को घुरती हुई कहने लगी..... "ये सब क्या था... आज तक मुझे तो

कभी प्रपोज किए नही और यहाँ लव यू-लव लव-यू कहा जा रहा है... हुन्न्ञन्"

नताली.... सच मे स्नेहा इस ने आज तक तुम से आइ लव यू नही कहा....

स्नेहा.... नही कहे थे. ऐसा नही था नही कहे, पर दबे कुचले से शब्दों मे फोन पर कहा था वो भी मेरे लव यू के जबाब मे.

नताली.... हुहह ! तुम्हे तो खुद से कहना ही नही चाहिए था.

मनु, स्नेहा और नताली का वहीं पर ग्रूप डिसक्यूसषन शुरू हो गया. इधर सब को देख कर ड्रस्टी हाथ छुड़ा कर अंदर भागना चाहती थी, पर

मानस उस के हाथ को और ज़ोर से पकड़े उसे जाने ही नही दे रहा था.

तीनो की चपर-चपर सुन कर मानस चिल्ला दिया..... "कबख्तों शांत हो जाओ, मुझे मेरी गृहस्थी बसा लेने दो"....

मानस की आवाज़ सुन कर तीनो शांत हो गये. वहीं मानस का इतना कॉन्फिडेन्स देख कर ड्रस्टी के दिल से एक ही आवाज़ निकली..... "हाए

अल्लाह, अब क्या ये सब के सामने प्रपोज करेंगे"

इधर मानस सब को चुप करा कर ड्रस्टी के हाथो को होटो से लगा लिया.... ड्रस्टी की धड़कने मानो सीने से बाहर निकल कर धड़कने लगेगी. बदन मे हल्की कंप-कपि.... और मानस उसके हाथ को चूमते हुए उसकी आखों मे देखा... और देख कर कहने लगा..... "आइ लव यू ड्रस्टी. तुम नही तो मैं नही"

तभी पिछे से नताली चिल्ला दी.... "वूऊओ ऊऊओ ऊऊऊ, बाहों मे ले कर अब होंठों को चूमते हुए अपने प्यार का इज़हार करो".

ड्रस्टी, नताली की बातें सुन कर शर्म से पानी-पानी हो गयी. उस से अब वहाँ रुक पाना संभव नही था इसलिए वो हाथ छुड़ा कर तेज़ी से अंदर भाग गयी. ड्रस्टी के अंदर जाते ही स्नेहा भी सब को चलने के लिए कहने लगी.... "चलो, अब इन को भी हमे कुछ प्राइव्सी देना चाहिए, चलो सब यहाँ से"....

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ईव्निंग.... मुंबई काया फ्लॅट....

घर को आपस मे ही लड़ते देख और अपने भाई रजत की हरकतें सुन अब जैसे देल्ही उसे काटने के लिए दौड़ रही थी. एक दिन पहले ही वो मुंबई आ गयी थी, और आज हर्षवर्धन और अमृता पहुँच गये थे....

काया को समझ मे नही आया कि अभी कल ही वो आई थी, और आज मोम-डॅड दोनो सामने.... काया अंदाज़ा लगा सकती थी ये दोनो क्यों आए होंगे...

काया.... मोम-डॅड, अभी कल ही तो आई मैं देल्ही से, ऐसी भी क्या एमर्जेन्सी कि आप दोनो आज यहाँ...

अमृता.... बात ही कुछ ऐसी थी काया....

अमृता और हर्ष ने अपने दिल का पूरा दर्द काया के सामने रख दिया. हर वो बात जो शुरू से हुई थी काव्या, अमृता और हर्ष के बीच. शम्शेर और एसएस ग्रूप को ले कर. और फाइनली मनु और मानस से नफ़रत की वजह भी.

बीती किसी बात का अफ़सोस नही था उन दोनो को, सिवाय इतना कि उसने उन दोनो भाई के साथ कभी जस्टिफाइ नही किया. फिर मानस और मनु के अलग होने की ज़िम्मेदारी अपने उपर लेती अमृता कहने लगी..... "दोनो भाई के अलग होने की वजह एक तरह से हम ही हैं, पर

बेटा तुम चाहो तो हमारा परिवार फिर एक हो जाएगा, सब लोग एक छत के नीचे बस तुम ही कर सकती ही यदि तुम कोसिस करो तो"

काया को अपने मोम-डॅड का पछतावा सच्चा लगा...... पर डर के मारे उसकी धड़कनें बहुत तेज हो गयी, क्योंकि मनु अब अपने ही परिवार को बर्बाद करने पर तुला था. काया..... वो मनु को जानती थी उसने अगर सोच लिया तो कर के छोड़ेगा.

अपने मोम-डॅड को सुन'ने के बाद, दोनो अब इनोसेंट से नज़र आ रहे थे. रजत से भी कोई शिकवा नही रहा क्योंकि वो समझ चुकी थी कि

उसके दिमाग़ मे उसके मोम-डॅड ने क्या बीज बोया था.... पर जो सब से बड़ी समस्या थी वो थी मनु का दृढ़ प्रण.

काया सोच मे पड़ गयी. दिल से एक ही आवाज़ आ रही थी ..... "कहीं देर ना हो जाए, उसे मनु का प्लान बता देना चाहिए". काफ़ी असमंजस मे काया फसि थी और अंत मे ना चाहते हुए भी ऐसा फ़ैसला करना पड़ा जिसके लिए उसे अफ़सोस सा हो रहा था.... पर कोई ना कोई नतीजे

पर पहुँच कर एक जबाव तो देना ही था....

काया गहरी साँसे लेती कहने लगी....... "मैं इन किसी भी मसलों मे आप सब के बीच नही पड़ूँगी. जो भी आप लोगों ने किया उस का कुछ तो परिणाम होगा हे. मैं रजत को भी देख चुकी हूँ, और उसकी नफ़रत भी. दोनो भाई उस छत के नीचे आ भी गये तो भी उन-दोनो भाई के लिए

जो नफ़रत का बीज आप ने रजत के दिल मे बो चुकी हैं, क्या वो ख़तम हो जाएगा. पहले रजत को सम्भालो, जिस दिन वो सम्भल गया, मैं

वादा करती हूँ उन दोनो भाई को उस छत के नीचे ले आउन्गि. मैं चलती हूँ मेरे क्लास का टाइम हो गया है"

काया फिर वहाँ रुकी नही. खुद से सॉरी कहती वो निकली, सब जानती हुए भी उसने सारी बातें छिपा ली. निर्दोष से लग रहे अपने पेरेंट को

छोड़ दिया उसके हाल पर. बाहर आते ही उसने तुरंत कॉल अखिल को लगाया....

 


अखिल..... मेरी सोणिये, मेरी हीरिए... मैनु छड के कित्थे भाग गयी ओये....

काया.... कुछ नही अखिल, बस देल्ही मे अच्छा नही लग रहा था इसलिए यहाँ चली आई...

अखिल.... क्या हुआ काया... कुछ परेशान सी लग रही हो....

काया.... थोड़ी अपसेट हूँ अखिल, क्या तुम मनु भाई के पास मेरा एक संदेश पहुँचा दोगे....

अखिल.... हां बोलो ना क्या....

काया.... उन से कहना, दूसरी ओर भी परिवार के लोग हे हैं, हो सके तो दोबारा सोचना.....

अखिल.... ह्म ! समझ गया, कह दूँगा उसे मैं. पर इस वक़्त मैं भी बहुत परेशान हूँ...

काया.... क्या हुआ अखिल...

अखिल..... मेरी धड़कन कहीं दूर हो गयी मुझ से और वो धड़कना बंद कर चुकी है...

काया.... मतलब...

अखिल.... मतलब तुम दूर कहीं जा कर ऐसे मायूस रहोगी, तो मेरी धड़कनें समझो रुकी हुई हैं...

काया.... अखिल प्लीज़ अभी नही, मुझे कुछ भी अच्छा नही लग रहा है...

अखिल.... मैं कुछ कहूँ...

काया..... हां कहो...

अखिल.... जब कुछ समझ मे नही आए ना तो उसे वक़्त पर छोड़ दो. उन के साथ कभी बुरा नही हो सकता जो अच्छे हों. एग्ज़ॅंपल मे तुम्हारा भाई मनु है. इसलिए चेहरे पर स्माइल लाओ और सब कुछ वक़्त पर छोड़ दो. एक बात मैं अच्छे से जानता हूँ, मनु तुम्हे रुला कर कुछ भी हासिल नही करेगा....

काया.... हां मैं जानती हूँ ये बात. फिर भी पता नही क्यों अजीब सा लग रहा है. रखती हूँ फोन, मैं बाद मे बात करती हूँ....

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साथ बने रहने के लिए शुक्रिया दोस्तो
 
श्रेया... इन मनु ऑफीस......

दो दिन से कोई मुलाकात नही हुई थी मनु से. अपने जाल को और मजबूत करने के इरादे से श्रेया, मनु के ऑफीस पहुँच गयी. ऑफीस मे

स्नेहा.... स्नेहा को देख कर ही श्रेया चिल्लाती हुई कहने लगी.... "ये बचल्लन लड़की यहाँ क्या कर रही है"

ना कोई बात, ना ही कोई दुआ सलाम, और आते ही सीधे ऐसे शब्द... स्नेहा का मुँह खुला का खुला रह गया था... उसे समझ मे ही नही आया की वो क्या जबाव दे और वो रोई सी आँखें लिए मनु को देखने लगी.

दो पल लगे मनु को कॉर्डिनेट करने मे, फिर बोला मनु..... "श्रेया, दिस इस नोट दा मॅनर टू टॉक माइ एंप्लायी, या तो तुम इससे अभी सॉरी बोल रही हो या हमारी कभी बात नही होगी".

श्रेया, महॉल को देखती हुई, ना चाहते हुए भी स्नेहा को सॉरी बोली. बोलते वक़्त उसकी कड़ी सी ज़ुबान से निकलता सॉरी देखने लायक था.... मनु फिर ऑफीस के कुछ काम स्नेहा को समझा कर श्रेया के साथ निकल गया.

मनु जब जा रहा था, उसने दबी सी नज़रों से स्नेहा को देखा. उस की आखें ऐसी थी मानो वो खा जाए अभी मनु को. खैर मनु, श्रेया को ले कर

बाहर आ गया. दोनो जैसे हे अकेले मे आए श्रेया, मनु के गले लगती उसका होंठ चूम ली...

श्रेया.... मनु दिस ईज़ नोट फेर, तुम्हारी वजह से मुझे उस दो कौड़ी के घटिया नौकर को सॉरी बोलना पड़ा.

मनु.... कोई बात नही, कभी-कभी हमे वो भी करना पड़ता है जो हम नही चाहते. अब स्नेहा को देख कर ही तुम्हे स्मझ जाना था कि मुझे

उस की ज़रूरत है तभी वो मेरे ऑफीस मे है...

श्रेया.... हां वो तो समझ मे आ रहा है... और बताओ कहाँ बिज़ी हो आज कल. ना तो फोन करते हो और ना ही मेरे साथ कहीं घूमने जा रहे हो.

मनु... मानस को अलग करने के बाद साजिश कुछ ज़्यादा ही बढ़ गयी है. बस कुछ दिन और ठहर जाओ, इन सब की साजिशो का मुँह तोड़

जबाव दे दूं फिर तो तुम्हारे लिए वक़्त ही वक़्त है....

श्रेया..... उन्न्ञणणन्.. और तब तक मैं क्या करूँगी....

 
मनु.... तुम मेरा काम आसान कर सकती हो...

श्रेया.... वो कैसे...

मनु.... ह्म्‍म्म्म !!! बता तो दूं पर तुम लड़कियों के पेट मे बात पचती कहाँ है....

श्रेया..... मैं किसी से भी ये बात शेर नही करूँगी .... सच्ची बाबा....

मनु...... मैं पवर ऑफ अटर्नी का यूज़ कर के अपनी कंपनी के पैसे मानस की कंपनी मे चुपके से इनवेस्ट करूँगा और उस से हुए फ़ायदे से

मैं बाकी के पार्ट्नर्स के शेर खरिदुन्गा....

श्रेया.... वो अपनी कंपनी मे तुम्हे क्यों इनवेस्ट करने देगा, और कर भी दिए तो कितना प्रॉफिट कमा लोगे...

मनु.... पागल लड़की... उस के पास 10000 करोड़ का शिप्पिंग कांट्रॅक्ट आने वाला है.... सोचो ज़रा 70% प्रॉफिट भी मैने निकाला तो मैं कहाँ

पहचूँगा... इसलिए अब तुम मेरा काम आसान करोगी या नही...

श्रेया.... तुम्हारा काम कैसे होगा आसान ज़रा ये तो बताओ....

मनु..... बस पवर ऑफ अटर्नी के किसी एक ओनर के सिग्नेचर चाहिए जिस मे उसका कन्सेंट हो कि मैं उनका पैसा बाहर इनवेस्ट कर सकूँ....

श्रेया..... इसका मतलब तुम ये चाहते हो कि मैं तुम्हारे इन पेपर्स पर अपनी मोम का सिग्नेचर ला कर दूं.

मनु.... हां बस इतनी सी मदद चाहिए...

श्रेया.... मनु... तुम्हारा दिमाग़ तो ठीक है ना, तुम ये क्या करने के लिए कह रहे हो...

मनु..... मत करो फिर. वैसे मैं ये सब कर किस के लिए रहा हूँ बताओ तो ज़रा. किस की इक्च्छा थी कि पूरा एस.एस ग्रूप उस के कदमों मे हो....

श्रेया..... मनु, पर वो सूकन्या है सुकन्या.... तुम तो जानते हो मेरी मम्मा को, फिर भी ये करने को कह रहे हो.

मनु...... 2000 करोड़ का प्रॉफिट होगा कम से कम, तुम सोच लो तुम्हे क्या करना है, ये रहा पेपर....

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