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रौनक, मनु का कॉलर पकड़ते..... "कमीने ये सब तुम्हारा किया कराया है.... तुम ने ही उस शिप को डूबा दिया...... ये तुम दोनो भाई का ही प्लान है. मैं तुम दोनो को कोर्ट तक ले जाउन्गा... तुम्हे जैल करवाउन्गा. तुम्हारे गंदे इरादे कभी कामयाब नही होंगे"....
मानस..... अर्रे सर लालच तो आप सब का ही सिखाया है. जैसा आप ने कहा वैसा ही हो मेरी ये दुआ रहेगी, पर उसके लिए आप के पास प्रूफ और पैसा होना चाहिए. बिन पैसे तन-तन गोपाला रे भाई. वैसे मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि, बड़े प्यार से आप सब अपनी पूरी संपत्ति यहाँ दे कर जाने वाले हैं....
राजीव..... सड़क का कोई आदमी हूँ जो तुम्हारे जाल से निकल ना पाऊँ, जिस प्रॉपर्टी के लिए तुम दोनो ने पूरा सड़ायंत्र रचा वो प्रॉपर्टी मैं तुम्हारे नाम कभी नही होने दूँगा..... तुम्हे जो करना था वो कर चुके, नाउ इट'स और टर्न....
मानस...... दम है बॉस, आप के डाइलॉग और पंच कमाल के हैं... वैसे प्रॉपर्टी बचाने से याद आया..... मनु ने आप के घर 6 दिन पहले एक लव लेटर भिजवाया था शायद आप उस लेटर के बारे मे नही सोच रहे......
रौनक और राजीव सोचने लगे मानस की बात पर.... उन्हे ध्यान आया, उस लेटर का जिसमे सॉफ लिखा गया था..... "कंपनी अपनी सेक़ुरिटी के लिए सभी लोन लिए पार्ट्नर्स के अकाउंट का स्टेट्मेंट चाहती है... ताकि सेक़ुरिटी रहे कंपनी का पैसा डूबा नही"....
जैसे ही उन्हे ये ध्यान आया, सब के सब सिर पकड़ कर बैठ गये..... चिल्लाने और कौतूहल का महॉल हो गया..... सभी लोग पागल से हो गये..... ऐसा लग रहा था जैसे अभी हे दोनो भाई का कतल कर देंगे....
मनु..... "चिल्ला लो... चिल्ला लो... पर चिल्लाने से कुछ नही होगा. अब देखा जाए तो तुम्हारे पास कोई ऑप्षन नही.... मेरा कहा मानो और अपनी पार्ट्नरशिप परीसेंटेज और पूरी प्रॉपर्टी , एस.एस ग्रूप के नाम कर दो. वरना कल स्टेट्मेंट ना मिला तो लीगल आक्षन के तहत कंपनी तुम से पैसे वसूलेगी... और इधर का 10000 करोड़ वो अलग से देना होगा"....
"इसलिए मेरे शुभ-चिंतकों, और एस.एस ग्रूप के मालिक बन'ने का ख्वाब देखने वालों मित्रों... कलेजे पर पत्थर रखो और अपनी संपत्ति एस.एस ग्रूप को दे कर मुझ से क्लीन चिट ले लो... ये आखरी बार कह रहा हूँ, वरना तुम्हारी कंपनी तो मेरे नाम हो ही जाएगी पर 10000 करोड़ का नुकसान नही भर पाओगे".
सदमा सा था उन सब के लिए. हर चीज़ इतने प्लान से किया गया था, कि कोई चारा नही छोड़ा था मनु ने उन दोनो के लिए.... 10000 करोड़ पहले से डेट हो गये थे, उपर से उनके हिस्से के शेर की कोई वॅल्यू नही बची जिसे शो कर के कंपनी को ये बता सके कि दिया हुआ लोन सुरक्षित है और वो सारे पैसे वापस कर सकते हैं.....
कोसते हुए सब ने वही किया जैसा मनु ने चाहा....... "तुम दोनो भाई याद रखना, जिस मूलचंदानी नाम के नीचे तुम ने मुझे धोका दिया है वो फॅमिली कभी तुम्हारी नही हो सकती.... उपर वाला सब देख रहा है... वो ज़रूर इंसाफ़ करेगा"
मनु........
"हा हा हा हा..... इसे तुम उपर वाले का इंसाफ़ ही समझ सकते हो.... हरा इंसान हर वक़्त भगवान को ही इंसाफ़ करने कहता है. लेकिन आज का भगवान मैं ही हूँ और मैने इंसाफ़ कर दिया. दुखी मत हो, मैं इतना निर्दयी भगवान भी नही. सुना है अपना नुकसान हो तो बुरा लगता है पर दूसरे का नुकसान देखने मे बड़ा मज़ा आता है.... इसलिए कल काया के बर्थदे मे आ जाना... जैसे आज तुम्हारे उपर से छत और नीचे से ज़मीन गयी, वैसे ही कल उनकी बारी होगी"....
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मानस..... अर्रे सर लालच तो आप सब का ही सिखाया है. जैसा आप ने कहा वैसा ही हो मेरी ये दुआ रहेगी, पर उसके लिए आप के पास प्रूफ और पैसा होना चाहिए. बिन पैसे तन-तन गोपाला रे भाई. वैसे मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि, बड़े प्यार से आप सब अपनी पूरी संपत्ति यहाँ दे कर जाने वाले हैं....
राजीव..... सड़क का कोई आदमी हूँ जो तुम्हारे जाल से निकल ना पाऊँ, जिस प्रॉपर्टी के लिए तुम दोनो ने पूरा सड़ायंत्र रचा वो प्रॉपर्टी मैं तुम्हारे नाम कभी नही होने दूँगा..... तुम्हे जो करना था वो कर चुके, नाउ इट'स और टर्न....
मानस...... दम है बॉस, आप के डाइलॉग और पंच कमाल के हैं... वैसे प्रॉपर्टी बचाने से याद आया..... मनु ने आप के घर 6 दिन पहले एक लव लेटर भिजवाया था शायद आप उस लेटर के बारे मे नही सोच रहे......
रौनक और राजीव सोचने लगे मानस की बात पर.... उन्हे ध्यान आया, उस लेटर का जिसमे सॉफ लिखा गया था..... "कंपनी अपनी सेक़ुरिटी के लिए सभी लोन लिए पार्ट्नर्स के अकाउंट का स्टेट्मेंट चाहती है... ताकि सेक़ुरिटी रहे कंपनी का पैसा डूबा नही"....
जैसे ही उन्हे ये ध्यान आया, सब के सब सिर पकड़ कर बैठ गये..... चिल्लाने और कौतूहल का महॉल हो गया..... सभी लोग पागल से हो गये..... ऐसा लग रहा था जैसे अभी हे दोनो भाई का कतल कर देंगे....
मनु..... "चिल्ला लो... चिल्ला लो... पर चिल्लाने से कुछ नही होगा. अब देखा जाए तो तुम्हारे पास कोई ऑप्षन नही.... मेरा कहा मानो और अपनी पार्ट्नरशिप परीसेंटेज और पूरी प्रॉपर्टी , एस.एस ग्रूप के नाम कर दो. वरना कल स्टेट्मेंट ना मिला तो लीगल आक्षन के तहत कंपनी तुम से पैसे वसूलेगी... और इधर का 10000 करोड़ वो अलग से देना होगा"....
"इसलिए मेरे शुभ-चिंतकों, और एस.एस ग्रूप के मालिक बन'ने का ख्वाब देखने वालों मित्रों... कलेजे पर पत्थर रखो और अपनी संपत्ति एस.एस ग्रूप को दे कर मुझ से क्लीन चिट ले लो... ये आखरी बार कह रहा हूँ, वरना तुम्हारी कंपनी तो मेरे नाम हो ही जाएगी पर 10000 करोड़ का नुकसान नही भर पाओगे".
सदमा सा था उन सब के लिए. हर चीज़ इतने प्लान से किया गया था, कि कोई चारा नही छोड़ा था मनु ने उन दोनो के लिए.... 10000 करोड़ पहले से डेट हो गये थे, उपर से उनके हिस्से के शेर की कोई वॅल्यू नही बची जिसे शो कर के कंपनी को ये बता सके कि दिया हुआ लोन सुरक्षित है और वो सारे पैसे वापस कर सकते हैं.....
कोसते हुए सब ने वही किया जैसा मनु ने चाहा....... "तुम दोनो भाई याद रखना, जिस मूलचंदानी नाम के नीचे तुम ने मुझे धोका दिया है वो फॅमिली कभी तुम्हारी नही हो सकती.... उपर वाला सब देख रहा है... वो ज़रूर इंसाफ़ करेगा"
मनु........
"हा हा हा हा..... इसे तुम उपर वाले का इंसाफ़ ही समझ सकते हो.... हरा इंसान हर वक़्त भगवान को ही इंसाफ़ करने कहता है. लेकिन आज का भगवान मैं ही हूँ और मैने इंसाफ़ कर दिया. दुखी मत हो, मैं इतना निर्दयी भगवान भी नही. सुना है अपना नुकसान हो तो बुरा लगता है पर दूसरे का नुकसान देखने मे बड़ा मज़ा आता है.... इसलिए कल काया के बर्थदे मे आ जाना... जैसे आज तुम्हारे उपर से छत और नीचे से ज़मीन गयी, वैसे ही कल उनकी बारी होगी"....
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