• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

हंग्री वुल्फ गेम (इंसान या भूखे भेड़िए ) complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
उस रात ... मीटिंग ख़तम होने के बाद....

शम्शेर और काव्या होटेल के कमरे मे बैठ कर सारा पेपर वर्क निपटा रहे थे. काम ख़तम होते-होते तकरीबन 1:00 अम बज गये......

शम्शेर...... वेल डन काव्या, अब तो ये कांट्रॅक्ट हमे ही मिलेगा. तुम खाने का ऑर्डर दे दो जब तक मैं बार से हो कर आता हूँ....

शम्शेर नीचे होटेल के बार मे चला गया, और काव्या खाने का ऑर्डर दे कर नहाने चली गयी. जाल बिच्छ चुका था. काम देवी के रूप मे जैसे खुद को ढाल चुकी थी. आज काव्या को शम्शेर सामने से फँसता हुआ नज़र आ रहा था और वो इस मौके को अपने हाथ से जाने नही देना चाहती थी.

काव्या के लिए सब सेट था, उसे बस अब पर्फॉर्म करना था. भीगे बदन पर स्लिक की एक नाइट ड्रेस उसने चढ़ा ली, जो गले से इतना खुला था छातियाँ देख कर कोई भी मर्द मचल जाए. जूस मे पहले से उसने सेक्स भड़काने वाली दवा मिला दी थी, ताकि शम्शेर कहीं भटके ना....

सब सेट करने के बाद, काव्या बार-बार दरवाजे से लॉबी को ही देख रही थी. थोड़ी ही देर मे संशेर हल्का लड़खड़ाता दरवाजे की ओर बढ़ता हुआ नज़र आने लगा. काव्या के जाल बिच्छाने का काम शुरू हो गया था. काव्या भाग कर आयने के सामने बैठ गयी और अपने कपड़ों के अंदर हाथ डाल ली.

कुछ इस तरह से वो अपने स्तनों पर हाथ फेर रही थी कि स्मॅशर जब कमरे मे आए तो आयने मे देख कर उसे ऐसा लगे कि काव्या अपने स्तनों पर कुछ लगा रही है.

जैसा काव्या चाहती थी ठीक वैसा ही हुआ. काव्या गाना गुनगुनाते अपने स्तनों पर हाथ फेर रही थी और सम्शेर उसे आएने मे ऐसा करते देख पागल हुआ जा रहा था. देखने मे वो इतना मगन हो गया कि, कब वो अपने हाथ अपने लिंग पर ले गया उसे भी पता ना चला.

काव्या समझ गयी उसे अब आगे क्या करना है, वो आराम से खड़ी हो कर पिछे मूडी, सम्शेर की हालत देख कर उसने अपने मुँह पर हाथ रख कर एक शॉकिंग एक्सप्रेशन दिया..... "सिर्र्र्र्र्र्र्र्ररर"

काव्या की आवाज़ सुन कर जैसे सम्शेर को होश आया हो. खुद की हालत देख कर वो बिना एक शब्द बोले बाथरूम मे घुस गया. थोड़ी देर बाद जब वो लौट कर आया तो थोड़े शर्म के साथ कहने लगा...... "मुझे मंफ़ कर देना, मैं थोड़ा बेकाबू हो गया था"

"थोड़ा क्या शमशेर अभी इतने मे ही इतना बेकाबू हो आगे-आगे देखते जाओ", अपने मन मे सोची बात पर काव्या हँसने लगी और सम्शेर से कही.... "कोई बात नही है सर, आप की भी अपनी ज़रूरतें हैं". और काव्या इतना कह कर अपने दोनो हाथ उपर कर के ज़ोर की एक अंगड़ाई ली.

अंडाइ लेते वक़्त जो उभरे स्तन देखने का नज़ारा था, कमाल का था. शम्शेर की तो साँसे भी चढ़ने लगी थी. उसे ऐसा लगा कि वो थोड़ी देर और यहाँ रुका तो उसके हाथों कहीं रेप ना हो जाए.

शम्शेर..... रात बहुत हो गयी है, मैं अपने रूम मे सोने जा रहा हूँ. कल मिलते हैं.

काव्या...... सर, मैने भी अब तक कुछ नही खाया, बहुत भूकी हूँ. खाना खा कर फिर चले जाएगा.

शम्शेर कुछ नही बोला और चुप-चाप खाने के लिए चल दिया. काव्या को पता था कौन सी दवा कितनी देर मे असर करती है. इसलिए सेक्स की भूख बढ़ाने वाली दवा जूस के साथ मिला दी थी, जो उसने खाने के पहले दे दिया.

शम्शेर खाते हुए भी अपनी चोर नज़र से बस काव्या के स्तनों को हे देख रहा था. सिल्क ऐसे चिपकी थी उसके बदन से की उसे पैंटी के शेप तक नज़र आने लगे थे. मन अब इस कली को मसल कर फूल बनाने का कर रहा था. लेकिन कंपनी उमर और बदनामी ने संयम नही खोने दिया.

पर कब तक आख़िर काबू रखता. खाना ख़तम होते होते दवा ने अपना काम करना शुरू कर दिया था. पैंट की जेब से जब बार-बार हाथ लगा कर सम्शेर अपने लिंग को अड्जस्ट करता तो काव्या को उसमे अपनी जीत नज़र आती थी.

 
खाना ख़तम हुआ, और काव्या अपना रंग दिखाती हुई कहने लगी..... "गुड माइट सर, अब कल मिलते हैं".

काव्या, शम्शेर को गुड नाइट बोल कर सीधा-सीधा उसे जाने के इशारा कर दी. पर सम्शेर को अब वहाँ से जाने का मन नही कर रहा था. कमसिन सी इस लड़की को भोगने का वो मन बना चुका था.

शम्शेर आगे बढ़ा और काव्या को अपनी बाहों मे भर कर उसे चूमने लगा.... काव्या, शम्शेर की बाहों मे कसमसाती खुद को छुड़ाने की कोसिस करने लगी..... "सर ये आप क्या कर रहे हैं, हट जएए.... होश मे आइए"

शम्शेर, काव्या को और ज़ोर से पकड़ते हुए उसके गर्दन के नीचे से चाटने लगा...... "तुम्हे देख कर पागल हो गया हूँ, साली जो मैं कर रहा हूँ वो मुझे करने दे"....

काव्या, शम्शेर को धक्का दे कर खुद से अलग कर दी...... "बिहेव युवरसेल्फ मिस्टर. शम्शेर.... आप बहक गये हैं, जा कर चुप-चाप सो जाइए"......

"दो कौड़ी की नौकर, हरामजादी तेरी औकात ही क्या है.... तेरा रेप कर के यहाँ छोड़ भी दूं, तो भी मुझे कोई कुछ नही कहने वाला... इसलिए तू भी मज़े ले सेक्स के"....

शम्शेर ने काव्या को बिस्तर पर धकेला और उसके उपर कूद गया..... उसके पेट पर बैठ कर उसके दोनो स्तनों को अपने दोनो हाथ मे पकड़ा और ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगा..... काव्या की तो साँसे ही उखड गयी.... स्तनों को मानो आज तो शम्शेर दबा-दबा कर सीने मे ही घुसा देगा....

सेक्स के लिए काव्या तैयार तो थी, लेकिन उसे नही पता था कि वो इसमे खोने लगेगी. जोशीला मर्दाना हाथ का जोरदार अनुभव पा कर काव्या की साँसे बेकाबू हो गयी.... उसका मन ज़ोर-ज़ोर से कर रहा था, कि वो ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला कर कहे.... "निचोड़ डाल हरामी इन्हे, आज पूरा निचोड़ दे"

पर खुद पर काबू रखती काव्या ने विरोध ही जताया..... "छोड़ दीजिए ना सर, मैं बदनाम हो जाउन्गी"

शम्शेर उसके दोनो स्तनों को अपने हाथ मे दबोचे, अपना मुँह काव्या के चेहरे की ओर झुका दिया..... उसकी आखों मे देखते हुए कहने लगा..... "तुम्हे किसी भी बात की फ़िक्र करने की ज़रूरत नही. तू बस सेक्स के मज़े ले, बाकी मैं संभाल लूँगा"...

इतना कह कर शम्शेर ने अपना जीभ बाहर निकाला, जीभ से लार टपकती हुई काव्या के होंठो पर गिरने लगी... और शम्शेर किसी भूखे भेड़िए की तरह टूट पड़ा उसके होंठो पर. काव्या अपने सिर दाएँ-बाएँ करती उसे किस नही करने दे रही थी... और शम्शेर पागल हुआ जा रहा था आज काव्या के हर अंग को चूमने के लिए.

उसका मन भी नही हो रहा था कि वो इतने मस्त स्तनों से अपने हाथ हटाए, पर काव्या के विरोध से शम्शेर झल्ला गया और दो थप्पड़ मारते हुए...... "चुप-चाप जो कर रहा हूँ वो करने दे, वरना जिस बदनामी से डर रही है, वही मैं करवा दूँगा"

,
 


"सर ये आप ग़लत कर रहे हो, मैं बहुत शरीफ हूँ. आप को यदि किसी लड़की का ज़िस्म चाहिए तो वो पैसों से मिल जाएगा मुझे जाने दो"

"तुझे ऐसे कैसे जाने दूं".... सम्शेर ने अपने दोनो हाथ उसके चेहरे पर डाल कर उसके गाल को ज़ोर से दबा दिया. दर्द के साथ उसका मुँह खुल गया. मुँह खुलते ही पहले सम्शेर ने अपना जीभ निकाल कर उसके होंठो को चाटने लगा, फिर पूरी जीभ उसके मुँह मे डाल कर चूमने लगा.

काव्या की साँसे मारे उत्तेजना की चढ़ि जा रही थी. दोनो होंठो के बीच से "ऊऊफफफफफ्फ़... ऊऊफफफफफफ्फ़" की आवाज़ें आने लगी थी. शम्शेर होंठ चूमना छोड़ कर उसके चेहरे से अपनी जीभ फिराता उसके सीने तक ले आया.... "साली अब तक तेरे बदन पर ये कपड़ा क्यों है"....

शम्शेर ने सीने के बीच हाथ रखा और दोनो ओर से कपड़े को चीरते हुए दो हिस्सों मे बाँट दिया..... "सर आप ये ग़लत कर रहे हैं"....

शम्शेर पर अब कोई भी बात असर नही हो रहा था.... उसने काव्या को ज़बरदस्ती उलट-पलट कर के उसके सारे कपड़े उतार दिए और अपने कपड़े भी उतारने लगा. काव्या के लिए कपड़े उतरते देखना काफ़ी कामुक नज़ारा था. वो तो बस जल्द से जल्द लिंग दर्शन को तरसी जा रही थी. अंदर ही अंदर मचले जा रही थी....

शम्शेर भी सारे कपड़े उतार कर जल्दी ही काव्या के पास पहुँच गया... और अपना लिंग उसके हाथ मे थमा कर उसे मसलने के लिए कहने लगा..... काव्या बस लिंग को पकड़े हुई थी. काव्या के हाथ का कोमल स्पर्श दीवाना तो बना रहा था पर उसका कुछ ना करना गुस्सा भी दिला रहा था.

काव्या को कुछ ना करते देख, शम्शेर फिर से गुस्से मे आ गया. फिर से दो थप्पड़ लगाते हुए..... "हरामजादी, जो कहा वो करती रह, वरना आसिड से चेहरा जला दूँगा"

"छोड़ काव्या अब नाटक, और मज़े कर..... वरना ये कमीना मारता रहेगा".... काव्या भी पूरे मूड मे आ गयी, लिंग को हाथों मे ले कर पूरे जोश और मज़े के साथ उपर नीचे करने लगी. काव्या इतनी उत्तेजित हो गयी कि बार-बार वो अपने बदन को मचला रही थी. दोनो पाँव के बीच योनि को फसा कर, रगड़ रही थी.

शम्शेर अपनी गर्दन को पूरा आकड़े बस लिंग की घिसाई का मज़े ले रहा था.... शम्शेर कैसी उत्तेजना मे था ये तो उसे भी पता नही था. लिंग अपना हिलवा रहा था और काव्या के स्तनों को बड़े ज़ोर-ज़ोर से दबा रहा था...... "आहह सिर और ज़ोर से.... ज़ोर-ज़ोर से मस्लो सर. बहुत परेशान करते हैं ये स्तन"...

"ये सर कौन है मेरी रानी.... आअहह बहुत मस्त हिला रही है, ले अब लिंग को ज़रा अपने मुँह मे ले कर चूस"..... एक बार फिर शम्शेर, काव्या के सीने के उपर आया.... अपने बॉल को काव्या के होंठो से लगा कर लिंग को उसके चेहरे पर फिराने लगा....

चेहरे पर लिंग को महसूस करना..... "उफफफफफफफफफफफफफ्फ़" .... जैसे आग सी लग गयी हो काव्या के बदन मे. "इसस्स्शह" के साथ काव्या ने बदन को हवा मे कर के आक्ड़ा लिया. अजीब सी रिसन होने लगी काव्या की योनि से.

काव्या बड़ी कामुकता से मुँह खोली और बॉल को मुँह मे ले कर चूसने लगी... चेहरे पर लिंग का छूना इतना मादक था कि उसने लिंग को हाथ मे पकड़ कर अपने चेहरे पर बड़ी बेसब्री से घिसने लगी.... शम्शेर थोड़ा पिछे हो कर लिंग को काव्या के होंठो से लगा दिया...

काव्या अपने दोनो हाथों से लिंग को पकड़ कर उसकी चमड़ी को पिछे की. शुपाडे के छेद पर जीभ लगाती उसे प्यार से चाटी... फिर मुँह खोल कर धीरे-धीरे पूरा लिंग अपने मुँह के अंदर डाल ली. शम्शेर ऐसा जोश मे आया कि, वो अपनी कमर ज़ोर-ज़ोर से हिलाने लग गया.....

पूरे लिंग को उसकी गर्दन तक धकेल कर, वो रुका रह जाता और जब तक काव्या तड़प कर ...., "उन्न्ञननणणन्... उन्न्ञणणन्" नही करती तब तक वो छोड़ता नही.... काव्या के मुँह से पूरा लार टपक रहा था जो होंठो से बहते नीचे तक छू रहा था.....

शम्शेर पूरा वाइल्ड हो कर लगातार मुँह मे ही धक्के लगाता रहा... धक्के लगाते-लगाते उसकी रफ़्तार काफ़ी तेज हो गयी, और अपना सारा वीर्य काव्या के मुँह मे छोड़ दिया.... पर ये दवा का असर था कि, शम्शेर के लिंग का तनाव और मन की उत्तेजना ज़रा भी कम ना हुई......

शम्शेर अब अपनी उत्तेजना की आग बुझाने काव्या के पाँव के बीच आ गया. वो दोनो पाँव के बीच आया और काव्या की योनि मे 2 उंगली डाल कर तेज-तेज हिलाने लगा. ऐसा लग रहा था कि उंगली से ही सारा काम कर देगा आज...... काव्या ज़ोर-ज़ोर से तेज-तेज सिसकारियाँ भरने लगी..... "उम्म्म्मममममम...... आआन्न्‍नणणनह" की आवाज़ तेज... और तेज होती चली गयी.... योनि का रिसाव शुरू हो गया....

एसी मे भी दोनो के बदन पसीने-पसीने थे. शम्शेर आगे बढ़ते हुए अपने लिंग को योनि से लगाया और दोनो पाँव को फैला कर एक जोरदार धक्का योनि मे लगा दिया...... "अंन्‍नमममममममममम... उन्न्ञननननननणणन् माररर्ररर गाइिईईईईई.... कामीनेययययी ऐसे कएर्ते हैं.... पूरा एक बार मे डाल दिया.... निकाल हरामी बहुत दर्द हो रहा है..... ऊऊऊऊऊऊऊओ मर गयी रीई ... आआनन्नह"......

पर शम्शेर, वो तो दवा की गिरफ़्त मे था. कसी योनि के अंदर की चमड़ी घिसने लगी, हर धक्के पर योनि के अंदर की आग बुझने के साथ दर्द भी उठ'ता. पहले 5 मिनट काफ़ी भारी पड़े काव्या को, उसकी आखों से आँसू तक निकल आए...

पर सम्शेर बिना रुके लगातार धक्के लगाता रहा.... धक्के लगाते हुए उसने अपने दोनो हाथ काव्या के दोनो स्तनों पर डाले. उस पर अपने हाथो की ज़ोर आज़मएश करते हुए ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगा.... तेज-तेज धक्के लगाने लगा..... काव्या का दर्द भी गायब होने लगा था... खुल कर वो भी मज़े लेने लगी..... "आहह.... उम्म्म्मम... इसस्स्शह.... ऊऊफफफफफफ्फ़" की आवाज़ें गूंजने लगी.

ताबड़तोड़ लंबे सेक्स के बाद दोनो हे नंगे वहीं पर सो गये....

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
 
सुबह के वक़्त......

शम्शेर की जब आखें खुली तो वो खुद को देख कर हैरान रह गया... दिमाग़ पर ज़ोर डाल कर वो रात के बारे मे सोचने लगा... रात की बातें उसे याद आने लगी.... तभी बिस्तर पर नज़र गयी... जहाँ पर काव्या के फटे कपड़े और बिस्तर पर खून था....

शम्शेर की साँसे अटक गयी.... माथे पर हाथ रख कर सोचने लगा..... "ये क्या हो गया"

तभी कोने से काव्या के सिसकने की आवाज़ सुनाई दी... अकड़ू बैठी वो बस रोए ही जा रही थी.... उसके आँसू रुक ही नही रहे थे......

शम्शेर कपड़े पहन कर चुप-चाप वहाँ से निकल गया. जल्दी से तैयार हो कर वो अकेला ही मीटिंग के लिए निकल गया. वापस जब लौट कर आया तो होटेल का महॉल ही कुछ अलग था. शम्शेर को पता चला कि काव्या ने अपनी नब्ज़ काट ली है और वो हॉस्पिटल मे है....

शम्शेर जल्दी से हॉस्पिटल पहुँचा, सब से पहले काव्या की हालत के बारे मे पता किया..... कोई ख़तरा नही था उसे, राहत की सांस जैसे मिली हो. शम्शेर वहाँ की पूरी व्यवस्था कर के लौट आया. शम्शेर जब से घर पहुँचा, तब से ही उसे रह-रह कर ये ख्याल आ रहा था कि उसने एक कुवारि लड़की के साथ ग़लत किया.

गहरी चिंता, और आगे क्या करेगा उसे पता नही. टेन्षन मे उसने 2 पॅक लगाया और नींद की गोली खा कर सो गया. अगली सुबह और भी ज़्यादा टेन्षन का महॉल ले कर आया. अख़बार की खबरों मे शम्शेर और काव्या ही सुर्ख़ियों मे थे. काव्या के सुसाइड की कहानी को अख़बार वाले मिर्च मसाला के साथ छाप कर शम्शेर का नाम उस से ज़ोर दिया था.

सुबह से ही उसके घर के फोन की घंटी बजनी शुरू हो गयी. तरह-तरह के गॉसिप चारो ओर थे, और शम्शेर किसी को कुछ जबाव नही दे पा रहा था..... इसी बीच ये खबरें हर्षरधन के पास पहुँची, वो भी अपना सारा काम समेट कर फ़ौरन वापस आ गया.

क्या करे क्या ना करे घर के किसी सद्स्य को समझ मे नही आ रहा था, उपर से इस खबर के छपने के बाद शम्शेर ना तो किसी से मिलता था, और ना ही किसी से बात करता था. सब को यही लगा कि बदनामी के कारण शन्शेर को गहरा सदमा लगा है.

सच ही है, किसी औरत का त्रिया चरित्र क्या से क्या करवा सकता है.... मनु और मानस, पूरा एस.एस ग्रूप और उसके सारे पार्ट्नर्स.... सब की ज़िंदगी उलझी, और इसकी सिर्फ़ एक ही वजह थी वो था किसी लड़की का त्रिया चरित्र और " सेक्स गेम"

हर्षवर्धन सब से पहले काव्या से मिलने गया. काव्या अब भी हॉस्पिटल मे थी और अब तक उसकी ओर से कोई बयान नही आया था. हर्षवर्धन और काव्या की लगभग 1 घंटे तक बात होती रही, अंत मे दोनो गले मिले और हर्षवर्धन वापस लौट आया.

वापस जब वो लौट कर आया तो उसने अपने और काव्या के बीच की सारी बात पूरे घर को बताया. उस वक़्त शम्शेर भी सब सुन रहा था. काफ़ी मंथन और अमृता को काफ़ी कॉन्वियेन्स किया गया... और अंत मे सब ने हर्षवर्धन के फ़ैसले पर सहमति जता दिया.....

सारी उलझने सुलझने के बाद हर्षवर्धन ने अगले दिन का एक प्रेस कॉन्फ्रेंस रखा. प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले ही अख़बार की एक खबर ने फिर से सब को शॉक कर दिया..... जिसमे हर्षवर्धन और काव्या के गले मिलने की तस्वीर थी, और नीचे लिखा था..... "शम्शेर के गुनाह को साबित करती ये तस्वीर, जिसमे एक लड़की को खरीद लिया गया और उसे अपने फेवर मे ले लिया गया"

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 
साथ बने रहने के लिए शुक्रिया दोस्तो
 
नेक्स्ट डे..... ईव्निंग टाइम ... प्रेस कॉन्फ्रेंस.....

उद्योगपति के घर की खबर, वो भी इतने मसालेदार खबर.... कोई कैसे मिस कर सकता था... पूरी मीडीया जमा हो चुकी थी. 5:00 पीयेम का टाइम था प्रेस कॉन्फ्रेंसे का. मीडीया वाले 4:30 से ही आना शुरू हो चुके थे. अब बस इंतज़ार हो रहा था शम्शेर का.

सारे मीडीया वाले अचानक ही खड़े हो गये, क्योंकि मूलचंदानी के किसी सदस्य से पहले हाइ कोर्ट के चीफ जस्टीस और साथ मे एक आड्वोकेट भी पहुँचे थे. सारे मीडीया वाले खड़े हो कर बस एक ही सवाल .... "सर.. सर.... आप का क्या कहना हैं इस पूरे मुद्दे पर ? आप किस की ओर से यहाँ आए हैं ?

चीफ जस्टीस.... हम दोनो यहाँ बस फ़ैसला सुनाने आए हैं. मीडीया का धन्यवाद जिन्होने ये केस हमारे सामने रखा. मैं यहाँ दोनो पक्ष को सुन'ने के बाद अपना फ़ैसला सुनाउन्गा... और किसी को यदि ऐतराज होगा मेरे फ़ैसले से तो यहीं क्रॉस क्वेस्चन कर सकते हैं. आज हम यहाँ इंसाफ़ करने आए हैं...

इतने मे पिछे से काव्या भी चली आ रही थी... काव्या धीमे कदमों से चलती, आ कर बैठ गयी....

काव्या को देखते ही, मीडीया वालों ने अपने सवालों की बारिश कर दी. हां पर सारे सवालों का इशारा एक ही ओर था.... "उस रात होटेल के कमरे मे क्या हुआ था... वहाँ बिस्तर पर क्या उसके कुवरापन लूटने का खून था... और क्या यही वजह थी कि उसने सुसाइड करने की कोसिस की"

"कैईयन्णनन्... कयैईंन्नणणन्" कर के सवालों की बारिश हो रही थी... तभी काव्या ज़ोर से चिल्लाई......

"तुम सब क्या जज हो.... तुम सब क्या खुद को खुदा समझते हो.... जो जी मे आए बक रहे हो. तुम लोगों ने तो एक बाप-बेटी जैसे रिश्ते को ही कलंकित कर दिया. आज मैं खुद की शकल भी आएने मे नही देख पा रही. क्या किसी ने मेरे पास आ कर पूछा कुछ भी.... किसी ने कुछ नही पूछा बस जो जी मे आया छाप दिए. जज साहब मैं अपील करती हूँ कि हमारे सर को झूठा बदनाम करने के लिए, और एक लड़की के चरित्र पर कीचड़ उछालने के लिए इन सब को जैल मे बंद करवा दो"

कहानी मे पलटी.... सारी मीडीया शॉक्ड. मीडीया को समझ मे आ गया कि पैसों ने मामला को दबा दिया है इसलिए ये लड़की पलटी मार रही है और मीडीया को ही बदनाम कर रही है... एक वरिष्ठ पत्रकार ने सारे लोगों को शांत कर के अपना सवाल रखा.....

"हो सकता है आप सही कह रही हो मेडम.... पर ये भी तो हो सकता है की पैसे और पॉवेर ने आप को अपना बयान बदलने पर मजबूर कर दिया हो. आख़िर वो कौन सी वजह थी कि शम्शेर मूलचंदानी जी का बेटा आप से हॉस्पिटल मे मिला, और क्या वजह थी कि आप ने अपने हाथों की नब्ज़ काट ली ? हम मीडीया वाले हैं मेडम, जो खबर हमे जैसी लगती है हम वैसे ही छापते हैं. लोगों के हक़ की आवाज़ उठाना हमारा काम है, और शायद इसलिए हमारे देश मे मीडीया को स्वतंत्र रखा है"

काव्या......

"अधिकार मिलने का ये मतलब नही है ना सर की आप हर किसी पर कीचड़ उछालते रहें. माना कि मीडीया आवाज़ है, पर उस आवाज़ का क्या फ़ायदा जो सही-ग़लत को जाने बिना उठे.... ऐसे तो आप पर से हम सब का भरोसा उठ जाएगा. और हां इज़्ज़त, जान और पैसों से कहीं ज़्यादा कीमती होती है, इसलिए आप ने मुझे तो बदनाम किया ही साथ मे पिता समान मेरे सर पर भी इल्ज़ाम लगा दिया. अब भले यहाँ ये फ़ैसला हो जाए कि हम बेगुनाह्ं है, पर बाहर लोगों को अब यकीन थोड़े ना होगा"......

 
फिर से एक पत्रकार...... मेडम आप अब भी अपने पहले स्टेट्मेंट को ही मॉडिफाइ कर रही है, हमारे सवालों का जबाव नही दे रही.....

"मैं देता हूँ जबाव"....... हर्षवर्धन और अमृता दोनो सामने से आते हुए नज़र आए.... अमृता जा कर काव्या के पास बैठ गयी और उसे सांत्वना देने लगी.....

हर्षवर्धन.......

"आप सब को यही जान'ना है ना कि क्यों काव्या केवल एक ही जबाव को गोल-गोल घुमा रही है. वो पूरी बात नही बता रही तो उसकी वजह मैं हूँ..... चार दिन पहले मैं इंडिया किसी काम से आया था... मैने काम के सिलसिले मे काव्या को भी बुलाया था"....

"उसी दौरान हम दोनो की नज़दीकियाँ बढ़ गयी, और किसी खुमारी मे हम दोनो से एक ग़लती हो गयी. हम दोनो ही उस वक़्त बहक गये थे. बाद मे मैं भी चैन से सो नही पाया कि मैने शादी-सुदा हो कर भी ऐसा काम किया.... दिल पर बोझ सा लग रहा था कि ये मैने क्या कर दिया... और तब मैने ये बात अपनी पत्नी अमृता से बताई"......

"मुझे लगा अब हमारे जीवन मे कई सारी मुसीबतें एक साथ आ जाएँगी. पर अमृता ने अपनी सूझ-बुझ का परिचय देते हुए मुझ से ये कहा कि...... "जो भी हुआ उसमे एक बहके महॉल का पूरा असर था, लेकिन इन सब मे एक लड़की की जिंदगी क्यों बर्बाद हो, इसलिए मुझे उस से भी शादी कर लेनी चाहिए, ताकि समाज मे वो सिर उठा कर जी सके".....

"हम दोनो जब तक ये फ़ैसला कर के काव्या को बताते, तब तक काव्या मारे ज़िल्लत के एक भयंकर कदम उठा चुकी थी. यदि काव्या को कुछ भी हो जाता तो मैं अपने आप को कभी माफ़ नही कर सकता था"

चीफ जस्टीस..... काव्या क्या हर्षवर्धन सही कह रहा है... और अमृता क्या तुम अपने पति की दूसरी शादी के लिए तैयार हो ?

काव्या..... हां ये सही कह रहे हैं. हम दोनो ही बहक गये थे. पर एक बात इन्होने ग़लत कही... मैं अपने संबंध की वजह से हतास हो कर सुसाइड नही कर रही थी.... जैसे मीरा दीवानी थी श्याम की ठीक मैं भी दीवानी हूँ इनकी.... बस मुझे ये दर्द दे रहा था कि मैं किसी लड़की के शादी-शुदा ज़िंदगी के बीच आ गयी.....

अमृता..... तू तो मेरी बहन की तरह है.... और मुझे इस से ज़्यादा खुशी क्या होगी कि तू भी हर्ष से बहुत प्यार करती है.... हां जज साब मैं तैयार हूँ अपने पति की दूसरी शादी के लिए... और मैं तो नाचूंगी भी इन दोनो की शादी मे...

काव्या के बिच्छाए जाल मे सब फस चुके थे. शम्शेर के लिए काव्या कोई देवी हो गयी थी, तो बाकी घर वालों के लिए एक ऐसी लड़की, जिसने सब के सामने अपनी मर्यादा लाँघने को काबूला, और मूलचंदानी की इज़्ज़त बचाई.... हां लेकिन शम्शेर और काव्या के अलावा किसी को भी पता नही था कि उस रात हुआ क्या इन दोनो के बीच....

मोहरे बिच्छ जाने के बाद तो बस अब चाल और मात देने की ही बारी थी. ठीक शादी वाले दिन ही, एक हादसे मे हर्ष और अमृता का नवजात मर गया... जब कि किसी को ये पता नही था कि ये काम भी काव्या का ही किया हुआ है. उसे इस घर मे पहला बच्चा खुद का चाहिए था.....

सुहागरात की सेज़ पर, काव्या ने हर्षवर्धन को खुद से ये कह कर दूर कर दिया कि "अमृता दी महान हैं, और मेरी वजह से उन्हे ये दुख झेलना पड़ेगा की मैने उसके प्यार का बटवारा कर दिया, इसलिए आप एक महीने तक अमृता दी के पास रहेंगे... जिसस से मुझे ये एहस्सास होता रहे, कि मेरे पति पर मेरा आंशिक हक़ है".

कितने भोलेपन से काव्या खुद को अच्छी साबित कर रही थी, पर किसी को पता नही था कि वो इन 1 मंत मे केवल ये कन्फर्म करना चाहती थी कि संशेर का बच्चा उसके पेट मे ठहरा या नही. काव्या ने जो चाहा वही हुआ. शम्शेर का बच्चा उसकी पेट मे पल रहा था.

काव्या एक ज़हर की तरह प्यार से सब पर चढ़ि. पहले तो सब को जीत लिया प्यार से, और हर किसी के बारे मे जानकारी निकाली. और बाद मे जब उसने अपना रंग दिखाना शुरू किया तो सब के होश ही उड़ गये. घर से ले कर ऑफीस तक, हर जगह बस एक ही नाम का सिक्का चलता था, काव्या.

शम्शेर हमेशा अपने तीनो पार्ट्नर्स को मिला कर चला करता था. कंपनी के शेर्स को ले कर कभी भी किसी के मन मे कोई शंका नही थी. पर ये काव्या ही थी जिसने सारे पार्ट्नर्स के बच्चो मे फुट डाल कर एकाधिकार का ज़हर घोल दिया.

 
अपनी हर प्लॅनिंग मे ससक्त, और ज़ुबान की कड़वी. शम्शेर को ना चाहते हुए भी काव्या के हर फ़ैसले मे उसका साथ देना पड़ता था, क्योंकि काव्या, शम्शेर को बता चुकी थी, उसका पहला बच्चा मानस, शम्शेर की ही नाजायज़ औलाद है.

साल दर साल काव्या के आतंक का साया बढ़ता ही चला गया. वो इस कदर सब पर हावी थी कि कोई भी उसका सामना नही करना चाहता था. अंत मे हार कर शम्शेर ने ही फ़ैसला किया कि अब पानी सिर से उपर हो गया है और अब चाहे जो हो जाए वो काव्या को हटा कर ही रहेगा.....

काव्या को हटाने के लिए उत्तराखंड मे फॅक्टरी सेट-अप के बहाने भेजा गया. लेकिन इस से पहले कि शम्शेर, काव्या और मानस को मार कर अपने रास्ते का कटान सॉफ कर देता. काव्या, दीवान के साथ मिल कर मानस पर रेप का इल्ज़ाम लगा दी.

रेप का केस होने से पोलीस पहले ही मानस को पकड़ कर ले गयी, और इधर काव्या ने मजबूरी मे आ कर सुसाइड की साज़िश रच डाली.

_______________________________________________________________________________________________

 
मनु और मानस बड़े ही ध्यान से काव्या की कहानी सुन रहे थे. दोनो को आज ये एहस्सास हो रहा था कि आख़िर किस वजह से अमृता और हर्ष उन दोनो से इतनी नफ़रत करते थे. दोनो पूरी कहानी समझ चुके थे कि क्यों आख़िर सभी लोग काव्या का नाम सुनते ही सिवाय नफ़रत के और कुछ नही उगलते.

फिर भी काव्या की इस कहानी मे कुछ तो अब भी था जो सन्देह्पुर्न था... मनु सारी बात सुन'ने के बाद काव्या से पूछने लगा.......

"आप ने जो सुनाया उसमे कुछ बातें समझ से परे हैं. जैसे कि आप ने ही जन्म दिया हमे, तो फिर हम आप के बच्चे कैसे नही ? और आप के पिछे का एक और मास्टर प्लॅनर कौन है. क्योंकि जिस तरह से आप ने दादू को फसाया, उस के लिए कम से कम 2 लोग चाहिए"

काव्या..... "मुझे टोटल कंट्रोल चाहिए था, और शम्शेर एक मंझा हुआ शातिर खिलाड़ी ठहरा. कहीं मेरे बच्चो को कुछ कर ना दे शम्शेर, इसलिए पैदा होते ही मैने बच्चो को उस दूसरे पार्ट्नर के हवाले कर दिया था, जिसका नाम मैने नही लिया और जिसका ज़िक्र तुम अभी कर रहे थे.

बच्चो के नाम पर मूलचंदानी हाउस मे मैं 2 अनाथ ले कर गयी थी, ताकि वक़्त आने पर मैं उन दोनो की बलि चढ़ाकर भी अपना काम पूरा कर सकूँ. और रही बात मेरे पार्ट्नर की, तो वो ना ही जानो तो अच्छा है. अब तुम दोनो जा सकते हो. और हां फिर कभी दोबारा अपनी शकल मत दिखाना.

मनु जाते-जाते...... "प्लान अच्छा बनाया और कामयाब भी हो गये. पर इतना लंबा इंतज़ार किया अपनी जवानी और अपने बच्चों का बचपन बिगाड़ दिया. गॉड ब्लेस्स यू... हमे खुशी हैं, कि हम अनाथ हैं. शायद इसलिए कभी भी इस धन-दौलत की इक्षा नही रही हमे. हां ! पर अफ़सोस एक बात का ज़रूर रहेगा.... पर जाने दो उस अफ़सोस को जान कर आप क्या करोगी.... चलो भाई....

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 
शाम के वक़्त.... नताली के घर.....

नताली के घर मे सभी पार्ट्नर्स इकट्ठा हुए थे. साथ मे मनु और मानस को भी बुलाया गया....... सब लोग आज मीटिंग कर रहे थे कि कैसे अपनी संपत्ति को उस काव्या से वापस लिया जाए.....

मनु और मानस जैसे ही नताली के घर पहुँचे, सभी पार्ट्नर्स उसका कॉलर पकड़ कर..... "आज हमारे साथ जो हो रहा है उसका ज़िम्मेदार यही है. यही है मास्टरमाइंड.... इन्हे ही ख़तम कर दो. कमीना जिस माँ के लिए लड़ रहा था, वो तो इसकी माँ भी नही है"....

अखिल वहाँ सब को धक्के दे कर हटाने लगा और हाथापाई करने से रोकने लगा.... लेकिन फिर भी सब के सब मनु को छोड़ने का नाम नही ले रहे थे.... तभी मनु इतना तेज चिल्लाया कि सब लोगों का कयंन्न कायँन्न् बिल्कुल शांत हो गया.....

मनु..... "मुझे कोई फ़र्क नही पड़ता कि मेरे पास पैसे है या नही है. जो चला गया उसका लालच नही करता मैं. अपनी मेहनत और दिमाग़ के दम पर फिर खड़ा हो जाउन्गा... लेकिन तुम सब का क्या, जो दादू के दिमाग़ का अब तक खाते आ रहे हो. जिस पोज़ीशन मे अभी तुम लोग हो, उस पोज़ीशन से तुम्हे अपनी पोज़िशन तक पहुँचने के लिए 3 जन्म भी कम पड़ जाएँगे"...

"क्या कह रहे थे, तुम्हारी प्रॉपर्टी जाने के पिछे का मास्टरमाइंड मैं हूँ. चुप करो तुम सब और ज़रा अपने अंदर झाँको. किस के मन मे धोखा नही था, और किसे पूरा एस.एस ग्रूप का मालिक नही बन'ना था. कोई बीच मे सुधरा, कोई अंत मे सुधरा तो कोई सुधरा ही नही.ये तुम सब के लालच का नतीजा है जो तुम सब ऐसे दिन देख रहे हो. मुझे दोष देने से कुछ नही होगा"....

शम्शेर..... शांत हो जाओ सब.... मनु बेटा तू काव्या से मिलने गया था, क्या बात हुई तेरी....

 
Back
Top