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Guest
उस रात ... मीटिंग ख़तम होने के बाद....
शम्शेर और काव्या होटेल के कमरे मे बैठ कर सारा पेपर वर्क निपटा रहे थे. काम ख़तम होते-होते तकरीबन 1:00 अम बज गये......
शम्शेर...... वेल डन काव्या, अब तो ये कांट्रॅक्ट हमे ही मिलेगा. तुम खाने का ऑर्डर दे दो जब तक मैं बार से हो कर आता हूँ....
शम्शेर नीचे होटेल के बार मे चला गया, और काव्या खाने का ऑर्डर दे कर नहाने चली गयी. जाल बिच्छ चुका था. काम देवी के रूप मे जैसे खुद को ढाल चुकी थी. आज काव्या को शम्शेर सामने से फँसता हुआ नज़र आ रहा था और वो इस मौके को अपने हाथ से जाने नही देना चाहती थी.
काव्या के लिए सब सेट था, उसे बस अब पर्फॉर्म करना था. भीगे बदन पर स्लिक की एक नाइट ड्रेस उसने चढ़ा ली, जो गले से इतना खुला था छातियाँ देख कर कोई भी मर्द मचल जाए. जूस मे पहले से उसने सेक्स भड़काने वाली दवा मिला दी थी, ताकि शम्शेर कहीं भटके ना....
सब सेट करने के बाद, काव्या बार-बार दरवाजे से लॉबी को ही देख रही थी. थोड़ी ही देर मे संशेर हल्का लड़खड़ाता दरवाजे की ओर बढ़ता हुआ नज़र आने लगा. काव्या के जाल बिच्छाने का काम शुरू हो गया था. काव्या भाग कर आयने के सामने बैठ गयी और अपने कपड़ों के अंदर हाथ डाल ली.
कुछ इस तरह से वो अपने स्तनों पर हाथ फेर रही थी कि स्मॅशर जब कमरे मे आए तो आयने मे देख कर उसे ऐसा लगे कि काव्या अपने स्तनों पर कुछ लगा रही है.
जैसा काव्या चाहती थी ठीक वैसा ही हुआ. काव्या गाना गुनगुनाते अपने स्तनों पर हाथ फेर रही थी और सम्शेर उसे आएने मे ऐसा करते देख पागल हुआ जा रहा था. देखने मे वो इतना मगन हो गया कि, कब वो अपने हाथ अपने लिंग पर ले गया उसे भी पता ना चला.
काव्या समझ गयी उसे अब आगे क्या करना है, वो आराम से खड़ी हो कर पिछे मूडी, सम्शेर की हालत देख कर उसने अपने मुँह पर हाथ रख कर एक शॉकिंग एक्सप्रेशन दिया..... "सिर्र्र्र्र्र्र्र्ररर"
काव्या की आवाज़ सुन कर जैसे सम्शेर को होश आया हो. खुद की हालत देख कर वो बिना एक शब्द बोले बाथरूम मे घुस गया. थोड़ी देर बाद जब वो लौट कर आया तो थोड़े शर्म के साथ कहने लगा...... "मुझे मंफ़ कर देना, मैं थोड़ा बेकाबू हो गया था"
"थोड़ा क्या शमशेर अभी इतने मे ही इतना बेकाबू हो आगे-आगे देखते जाओ", अपने मन मे सोची बात पर काव्या हँसने लगी और सम्शेर से कही.... "कोई बात नही है सर, आप की भी अपनी ज़रूरतें हैं". और काव्या इतना कह कर अपने दोनो हाथ उपर कर के ज़ोर की एक अंगड़ाई ली.
अंडाइ लेते वक़्त जो उभरे स्तन देखने का नज़ारा था, कमाल का था. शम्शेर की तो साँसे भी चढ़ने लगी थी. उसे ऐसा लगा कि वो थोड़ी देर और यहाँ रुका तो उसके हाथों कहीं रेप ना हो जाए.
शम्शेर..... रात बहुत हो गयी है, मैं अपने रूम मे सोने जा रहा हूँ. कल मिलते हैं.
काव्या...... सर, मैने भी अब तक कुछ नही खाया, बहुत भूकी हूँ. खाना खा कर फिर चले जाएगा.
शम्शेर कुछ नही बोला और चुप-चाप खाने के लिए चल दिया. काव्या को पता था कौन सी दवा कितनी देर मे असर करती है. इसलिए सेक्स की भूख बढ़ाने वाली दवा जूस के साथ मिला दी थी, जो उसने खाने के पहले दे दिया.
शम्शेर खाते हुए भी अपनी चोर नज़र से बस काव्या के स्तनों को हे देख रहा था. सिल्क ऐसे चिपकी थी उसके बदन से की उसे पैंटी के शेप तक नज़र आने लगे थे. मन अब इस कली को मसल कर फूल बनाने का कर रहा था. लेकिन कंपनी उमर और बदनामी ने संयम नही खोने दिया.
पर कब तक आख़िर काबू रखता. खाना ख़तम होते होते दवा ने अपना काम करना शुरू कर दिया था. पैंट की जेब से जब बार-बार हाथ लगा कर सम्शेर अपने लिंग को अड्जस्ट करता तो काव्या को उसमे अपनी जीत नज़र आती थी.
शम्शेर और काव्या होटेल के कमरे मे बैठ कर सारा पेपर वर्क निपटा रहे थे. काम ख़तम होते-होते तकरीबन 1:00 अम बज गये......
शम्शेर...... वेल डन काव्या, अब तो ये कांट्रॅक्ट हमे ही मिलेगा. तुम खाने का ऑर्डर दे दो जब तक मैं बार से हो कर आता हूँ....
शम्शेर नीचे होटेल के बार मे चला गया, और काव्या खाने का ऑर्डर दे कर नहाने चली गयी. जाल बिच्छ चुका था. काम देवी के रूप मे जैसे खुद को ढाल चुकी थी. आज काव्या को शम्शेर सामने से फँसता हुआ नज़र आ रहा था और वो इस मौके को अपने हाथ से जाने नही देना चाहती थी.
काव्या के लिए सब सेट था, उसे बस अब पर्फॉर्म करना था. भीगे बदन पर स्लिक की एक नाइट ड्रेस उसने चढ़ा ली, जो गले से इतना खुला था छातियाँ देख कर कोई भी मर्द मचल जाए. जूस मे पहले से उसने सेक्स भड़काने वाली दवा मिला दी थी, ताकि शम्शेर कहीं भटके ना....
सब सेट करने के बाद, काव्या बार-बार दरवाजे से लॉबी को ही देख रही थी. थोड़ी ही देर मे संशेर हल्का लड़खड़ाता दरवाजे की ओर बढ़ता हुआ नज़र आने लगा. काव्या के जाल बिच्छाने का काम शुरू हो गया था. काव्या भाग कर आयने के सामने बैठ गयी और अपने कपड़ों के अंदर हाथ डाल ली.
कुछ इस तरह से वो अपने स्तनों पर हाथ फेर रही थी कि स्मॅशर जब कमरे मे आए तो आयने मे देख कर उसे ऐसा लगे कि काव्या अपने स्तनों पर कुछ लगा रही है.
जैसा काव्या चाहती थी ठीक वैसा ही हुआ. काव्या गाना गुनगुनाते अपने स्तनों पर हाथ फेर रही थी और सम्शेर उसे आएने मे ऐसा करते देख पागल हुआ जा रहा था. देखने मे वो इतना मगन हो गया कि, कब वो अपने हाथ अपने लिंग पर ले गया उसे भी पता ना चला.
काव्या समझ गयी उसे अब आगे क्या करना है, वो आराम से खड़ी हो कर पिछे मूडी, सम्शेर की हालत देख कर उसने अपने मुँह पर हाथ रख कर एक शॉकिंग एक्सप्रेशन दिया..... "सिर्र्र्र्र्र्र्र्ररर"
काव्या की आवाज़ सुन कर जैसे सम्शेर को होश आया हो. खुद की हालत देख कर वो बिना एक शब्द बोले बाथरूम मे घुस गया. थोड़ी देर बाद जब वो लौट कर आया तो थोड़े शर्म के साथ कहने लगा...... "मुझे मंफ़ कर देना, मैं थोड़ा बेकाबू हो गया था"
"थोड़ा क्या शमशेर अभी इतने मे ही इतना बेकाबू हो आगे-आगे देखते जाओ", अपने मन मे सोची बात पर काव्या हँसने लगी और सम्शेर से कही.... "कोई बात नही है सर, आप की भी अपनी ज़रूरतें हैं". और काव्या इतना कह कर अपने दोनो हाथ उपर कर के ज़ोर की एक अंगड़ाई ली.
अंडाइ लेते वक़्त जो उभरे स्तन देखने का नज़ारा था, कमाल का था. शम्शेर की तो साँसे भी चढ़ने लगी थी. उसे ऐसा लगा कि वो थोड़ी देर और यहाँ रुका तो उसके हाथों कहीं रेप ना हो जाए.
शम्शेर..... रात बहुत हो गयी है, मैं अपने रूम मे सोने जा रहा हूँ. कल मिलते हैं.
काव्या...... सर, मैने भी अब तक कुछ नही खाया, बहुत भूकी हूँ. खाना खा कर फिर चले जाएगा.
शम्शेर कुछ नही बोला और चुप-चाप खाने के लिए चल दिया. काव्या को पता था कौन सी दवा कितनी देर मे असर करती है. इसलिए सेक्स की भूख बढ़ाने वाली दवा जूस के साथ मिला दी थी, जो उसने खाने के पहले दे दिया.
शम्शेर खाते हुए भी अपनी चोर नज़र से बस काव्या के स्तनों को हे देख रहा था. सिल्क ऐसे चिपकी थी उसके बदन से की उसे पैंटी के शेप तक नज़र आने लगे थे. मन अब इस कली को मसल कर फूल बनाने का कर रहा था. लेकिन कंपनी उमर और बदनामी ने संयम नही खोने दिया.
पर कब तक आख़िर काबू रखता. खाना ख़तम होते होते दवा ने अपना काम करना शुरू कर दिया था. पैंट की जेब से जब बार-बार हाथ लगा कर सम्शेर अपने लिंग को अड्जस्ट करता तो काव्या को उसमे अपनी जीत नज़र आती थी.