इस सब से दूर नीलम के ऑंखें रास्ते पे बीछी हुई थी ।
वो ज़ालिम अब तक नहीं आया था।
आखीर नीलम से रहा नहीं जाता और वो ममता से पूछ लेती है।
नीलम;ममता तेरा भाई नहीं आया।
नीलम;नहीं उन्हें खेत में ज़रूरी काम था फसल की कटाई होनी है ना इसलिए नहीं आए।
नीलम का चेहरा उतर जाता है उसे अपने बदन पे कपडे बिलकुल अच्छे नहीं लगते वो आज जिसके लिए इतनी सजी संवरी थी वही नहीं आया था ।
वो निराश होके घर के अंदर जाने लगती है ।
तभी उसे पप्पू की आवाज़ आती है।
पप्पू;अरे देवा कितनी देर से आ रहा है यार।
उसके कान ये सुनने के लिए तड़प गए थे। वो पीछे मुड के देखती है और सामने वही ज़ालिम खड़ा था उसका दिल किया उसके पास जा के उसके सीने पे दो चार घूँसे जड़ दे । मगर जब देवा से नीलम की ऑंखें चार हुई तो सारा ग़ुस्सा हवा हो जाता है।
देवा नीलम के पास आता है और उसे निचे से ऊपर तक देखने लगता है।
नीलम पलकें झुकाये बस दो शब्द सुनना चाहती थी देवा के मुँह से वो दो शब्द उसकी सारी मेंहनत सफल कर देते।
देवा;अप्सरा लग रही हो आज तुम नीलम।
नीलम से ये सुनके वहां रुकना मुहाल था । वो देवा की ऑखों में देखती है और वही क़ातिलाना हंसी हँसते हुए जिससे देवा घायल हुआ था।
घर में भाग जाती है।
रश्मी के पास खड़ी शालु के चेहरे पर भी मुसकान फैल जाती है। दिल में सुकून उतर आता है की देवा उतना नाराज़ नहीं है जितना वो सोची थी।
देवा;पप्पू के साथ काम में लग जाता है
जितने भी मेहमान आये थे उनके खाने पीने का इन्तज़ाम।
मै आपके क़रीब सिर्फ इसलिए आना चाहता था क्यूंकि मै आपसे जानना चाहता था की मेरे बापू इस हवेली से कैसे ग़ायब हुए थे।
रुक्मणी की ऑखों में ऑंसू आ जाते है।
मुझे कैसे पता होंगा तेरे बापू के बारे में।
देवा;तुम्हारे पति को पता है वो मुझे नहीं बोलने वाले इसलिये।
रुक्मणी; इसलिए तू मुझे इस्तेमाल करके अपने बापू का राज़ पता करना चाहता था।
देवा; हाँ।
रुक्मणी;अपने ऑसू पोंछ लेती है।
मुझे बड़ा दुःख हुआ ये जान के तू मुझे इस्तेमाल कर रहा था।
कोई बात नहीं मै तेरी मदद ज़रूर करुँगी।
तूझे पता करना है ना तेरे बापू के साथ क्या हुआ था।
मै तेरे जागिरदार साहिब से किसी भी तरह ये बात पता करके रहूँगी और तुझे बता दूंगी ।बस....
देवा;रुक्मणि के पास आता है और उसका चेहरा ऊपर उठाके अपनी ऑखें उसकी ऑखों में गाड देता है।
मुझे और भी कुछ चाहिये।
रुक्मणी;क्या।
देवा;ये.....
वो अपने होंठ रुक्मणी के होठो पे रख देता है।
कुछ देर देवा का साथ देने के बाद रुक्मणी अपने होंठ उससे अलग कर देती है।
रुक्मणी;नहीं जो मुझे इस्तेमाल करता है मै उसके साथ कोई रिश्ता नहीं रखना चाहती। तूझे जो पता करवाना है मै उस में तेरी मदद कर दूंगी उसके बाद तू अपने रास्ते मै अपने रास्ते।
देवा;रुक्मणि को देखने लगता है।
उसे पता था अभी रुक्मणी ग़ुस्से में है ।
अपनी मोहब्बत का इज़हार करके उस ने देवा को ये तो बता दी थी की वो देवा के बारे में क्या राये रखती है।
मगर उसे ये नहीं पता था की कही न कही देवा भी रुक्मणी की खुबसुरती का दिवाना है।
दरवाज़े के बाहर खड़ी रानी अपने मुँह पे हाथ रख देती है। उसे तो बस इंतज़ार था हिम्मत राव के वापस आने का।
और हिम्मत राव अपनी रखेल बिंदिया की चूत में पड़ा हुआ था।
रुक्मणी के रूम के बाहर खड़ी रानी अपने रूम में चली जाती है।
रुक्मणी का दिल तो देवा ने तोड़ दिया था मगर उसकी ऑखों में अब भी कुछ सवाल बाकी थे। जिसके जवाब वो देवा से सुनना चाहती थी।
देवा; मैं चलता हूँ मालकिन।
रुक्मणी;रुको मुझे कुछ पूछ्ना है तुमसे।
देवा;पलट के रुक्मणी की तरफ देखता है।
रुक्मणी;देवा के ऑंखों में ऑखें डाल के पूछती है।
तूमने मेरी जान क्यों बचाई।क्या वो भी तुम्हारा कोई नाटक था मेरे क़रीब आने का?
देवा;मुस्कुरा देता है।
मालकिन आपकी जगह कोई भी होता तो मै उसकी भी जान बचाता।
मै आपकी बहुत इज़्ज़त करता हूँ।मुझे आपसे कोई बैर नहीं है।
रुक्मणी;नहीं चाहिए मुझे तुम्हारी हमदर्दी को।
वो अपने अलमारी में से पैसो की एक गड्डी निकाल के देवा के हाथ में रख देती है।
देवा; ये क्या है।
रुक्मणी;तुमने मेरी जान बचाई थी। ये उसकी किमत है।
देवा;तुम मेरी एहसान की कीमत लगा रही हो।
रुक्मणी;मैंने कहा न नहीं चाहिये मुझे तुम्हारा एहसान पैसे लो और निकल जाओ यहाँ से।
देवा;कुछ दिन पहले रुक्मणी के हाथों थप्पड खा चुका था।
वो बात उस ने इसलिए बर्दाश्त कर लिया था क्योंकी उस में उसकी गलती थी मगर आज रुक्मणी ने पैसे दे के देवा का अपमान की थी और देवा एक जवान खून वाला था जो गलती पर अपना सर कटवाना पसंद करता मगर अपना अपमान कभी सहन नहीं कर सकता था।
रुक्मणी;अभी भी देवा के सामने खड़ी थी।
देवा; ये लो आपके पैसे मुझे नहीं चाहिए।
रुक्मणी;देवा के ठुकराये जाने से बुरी तरह अंदर ही अंदर जल रही थी।
उसे देवा का इस तरह उसे ठुकरा देना अपमान लग रहा था।
पैसे लो और दफ़ा हो जाओ तुम गंदे नाली के कीड़े हो जो हर काम के पैसे लेते है । मेरी जान बचाने में भी तुम्हारा कोई मक़सद होगा । अगर कम है तो बोलो और दे दूंगी।
देवा;के हाथ कड़क हो जाते है और वो रुक्मणी को घुर के देखने लगता है।
रुक्मणी;देख क्या रहा है।
देवा का हाथ कड़क हो जाता है और पत्थर के तरह सख्त हाथ से वो रुक्मणी के कनपट्टी पे एक थप्पड जड़ देता है।
रुक्मणी;घूमते हुए बिस्तर पर जाके गिर पडती है।
उसे ऐसे महसूस होता है जैसे किसी ने हथोड़ा उसके मुँह पे मार दिया हो।[/COLOR]