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हाय रे ज़ालिम.......complete

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ढेर सारे कमेंट के लिए सभी को थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अपडेट भी प्रतिदिन देने की मैं कोशिश करूँगा।कहानी आपलोगों को कैसी लगी ।अपने विचार अवश्य दें।thanks
 
अपडेट 53

देवा अपने खेत में काम कर रहा था मगर उसका मन वहां बिलकुल नहीं लग रहा था बार बार वो एक ही बात सोच रहा था की आखिर रुक्मणी ने उसे क्यों बुलाया है क्या उसे पता चल गया है की उसके बापु कहाँ है। क्या वो ज़िंदा है ऐसे कई सारे सवाल देवा के मन में पैदा हो रहे थे।

वो खेत के मज़दूरों को अपना अपना काम बता के हवेली की तरफ चला जाता है।

हवेली में जब वो पहुँचता है तो उसे वहां से हिम्मत राव अपनी गाड़ी में कही जाता हुआ दिखाई देता है। हिम्मत राव की नज़र देवा पर नहीं पडती मगर देवा उसे देख लेता है और उसे देखते ही उसके तन बदन में आग सी लग जाती है।

वो हवेली में दाखिल होता है और उसे वही दरवाज़े पर रानी मिल जाती है। रानी देवा को देख खुश हो जाती है और उसका हाथ पकड़ के अपने रूम में ले आती है।

रानी;हम्म क्यों रे ज़ालिम कहाँ रहता है न कोई अता न पत्ता अपना काम निकल गया बस । उसके बाद पुछने भी नहीं आया की मै ज़िंदा भी हूँ या नही।

रानी के शब्द ऐसे लग रहे थे जैसे कोई प्रेमिका अपने प्रेमी से नाराज़ है उसके ना मिलने से।

देवा;मुस्कुरा देता है।

नही मालकिन ऐसी कोई बात नहीं है मेरे मामी और मामा आये हुए है इसलिए कही जा नहीं पाया अब आ गया हूँ न बोलिये क्या बात है।

रानी;देवा को बड़े गौर से देख रही थी। वो देवा को बिस्तर पर लिटा देती है और खुद उसके ऊपर चढ़ जाती है। उसके दोनों पैर देवा के इर्द गिर्द आ जाते है थोड़ा सा झुक के वो देवा की छाती पर अपनी दोनों ब्रैस्ट घीसने लगती है।

सच बता मेरी याद नहीं आती है क्या तुझे।

देवा;आती है।

रानी; अच्छा कब आती है।

देवा;हर वक़्त आती है जब भी मै साँस लेता हूँ।

जाहीर सी बात थी की देवा झूठ बोल रहा था उसे रानी से रत्ती भर भी प्रेम नहीं था। वो तो रानी के ज़रिये अपने बापू तक पहुँचना चाहता था।

रानी; पीछे हाथ डालके अपनी कमीज का चैन खोल देती है और दोनों ब्रैस्ट बाहर निकाल देती है उन दोनों को देवा के मुँह के सामने ला के बड़े प्यार से कहती है।

ले चूस इन्हें बड़े कड़क हो गये है तेरे बिना ये।

देवा;रानी को अपने ऊपर से हटा देता है और खुद खड़ा हो जाता है।

अभी नहीं मुझे कुछ काम है।

बडी मालकिन से।

रानी; अच्छा तो तू यहाँ माँ से मिलने आया था मै समझी मुझसे मिलने आया है।

निकल जा यहाँ से अभी के अभी।

अपने चूत पे धक्का लगता देख रानी बिदक गई थी।

देवा :उसके पास आता है और उसके बाल को कस के पकड़ के खीचता है।

मैने तुझसे पहले भी कहा था मुझसे ऊँची आवाज़ में बात करेंगी न तो बहुत बुरा हाल करुँगा।

रानी की ऑंखों में ऑंसू आ जाते है।

आह छोड मुझे दर्द होता है। नहीं चिल्लाऊंगी अब से उन्हह छोड ना देवा।
 
देवा उसके बालों को छोड के रुक्मणी की तरफ चला जाता है और रानी सोच में पड जाती है की आखिर क्या बात करनी है देवा को माँ से।

देवा रुक्मणी के रूम में चला जाता है वहां रुक्मणी और बिंदिया बैठी हुई थी न चाहते हुए भी रुक्मणी को बिंदिया से बातें करनी पड रही थी। उसका दिमाग तो रात से ख़राब था मगर मेहमान होने के कारण वो बिंदिया से बात करने पर मजबूर थी।

जब देवा वहां पहुँचता है तो दोनों एक साथ देवा की तरफ देखते है।

बिंदिया पहली बार देवा को देख रही थी।

देवा एक उडती सी नज़र बिंदिया पर डालके रुक्मणी के पास जाके ज़मीन पर बैठ जाता है।

रुक्मणी;अरे वहां नीचे नहीं यहाँ ऊपर कुरसी पर बैठो देवा।

देवा;नहीं मै यहीं ठीक हूँ।

रुक्मणी; बिंदिया ये देवा है यह गांव में रहता है।

और देवा ये रुक्मणी है तुम्हारे जागिरदार साहिब के दोस्त की पत्नी कुछ दिन के लिए यहाँ आई हुई है।

देवा;बिंदिया को नमस्ते करता है।

मगर बिंदिया पर देवा का वो असर हुआ था की बिंदिया पहली नज़र में ही घायल हो गई थी।

अब तक कई मरदों को अपने चूत के दम पर नचाने वाली बिंदिया की चूत खुद देवा के सामने गुलाम बनने को एक पल में तैयार हो गई थी।

बिंदिया बड़े गौर से देवा को देखने लगती है।

उपर से निचे तक एक हट्टा कटा गबरू जवान था देवा। बिंदिया उसे देख के बता सकती थी की खड़ा होने के बाद देवा का लंड कितना बड़ा लगता होगा और यही वजह थी की उसका दिल देवा पर बुरी तरह आ गया था।

रुक्मणी के सामने बिंदिया देवा को इस तरह देख रही थी की रात की बात तो उसने किसी तरह बर्दाश्त कर ली मगर रुक्मणी जिस मरद से प्यार कर बैठी थी उस पर भी बिंदिया की बुरी नज़र देख रुक्मणी बुरी तरह सकपका जाती है।

रुक्मणी;देवा चलो मुझे तुमसे कुछ काम था । वो हम डॉ के पास गए थे न वहां से कुछ दवायें लानी है। चलो मै तुम्हें बता देती हूँ।

देवा को अपने साथ ले के रुक्मणी दूसरे रूम में चली जाती है।

देवा पीछे पीछे चल देता है एक खाली रूम में पहुँच के देवा रुक्मणी से पुछने लगता है । क्या बात है मालकिन कौन सी दवायें।

रुक्मणी;अरे कुछ नहीं रे। उस कमीनी की बुरी नज़र से बचाने के लिए तुझे यहाँ लाई हूँ।

मेरा एक काम करोगे देवा।
 
देवा;आप हूकुम करो मालकिन।

रुक्मणी;वो जो बिंदिया है न वो तेरे मालिक के दोस्त की पत्नी नहीं बल्कि कोई और है। मुझे ये पता करके बता दे की वो कौन है और यहाँ किसलिए आये है।

देवा;क्यों मालकिन।

रुक्मणी;अब तुझसे क्या छुपाना।

कल रात तेरे मालिक उस कमिनी के साथ वो सब कर रहे थे। जो उन्हें नहीं करना चाहिए था। मैंने अपनी ऑखों से देखा। अगर तू मुझे ये पता करके बता दे की तेरे मालिक और उस बिंदिया के बीच क्या चल रहा है तो मुझ पर बहुत एहसान होंगा।

देवा;आप जानके क्या करोगी।

जब आपने सब देख ही लिया है। तो साफ़ पता चलता है की उनका रिश्ता क्या है।

रुक्मणी;हाँ मगर मुझे पक्का करना है की वो यहाँ क्यों आई है । ये जो सारी ज़मीन जायदाद देख रहा है ना तू ये सब मेरी बाप्पू की दी हुई है। कुछ भी नहीं बचा था तेरे मालिक के पास। तू मुझे पक्का पक्का सबूत दे दे। मै तेरे मालिक से हमेशा हमेशा के लिए दूर हो जाऊँगी और ये सारी जायदाद गरीबों में बाँट के कही दूर चली जाऊँगी।

मुझे ये पता करना है की ये बिंदिया कौन है और कहाँ से आई है और उसका मकसद क्या है।

देवा;हो जायेंगा मालकिन मै तो समझा था की....

खैर जाने दो।

रुक्मणी;क्या समझा था तु।

देवा;उदास मन से रुक्मणी की तरफ देखते हुए कहता है।

मुझे लगा था की आपको पता चल गया है की मेरे बापू के साथ क्या हुआ है।

रुक्मणी;तू मेरा ये काम तो कर दे उसके बाद मै भी पता लगवा लुंगी की तेरे बापू कहाँ है।

देवा;खड़ा हो जाता है।

ठीक है मालकिन मै आपका ये काम किये देता हूँ और आपको अपना वादा भी निभाना होगा । मुझे बस बता दो की मेरे बापू कहाँ है। हैं भी या नहीं और किसने उनके साथ बुरा किया है । माँ कसम ज़मीन में ज़िंदा नहीं गाड दिया न उसे तो मेरा नाम भी देवा नही।

रुक्मणी;देवा की छाती से चिपक जाती है।

हम दोनों एक कश्ती के मुसाफिर है । देवा दोनों को साथ मिलकर कुछ सोचना और करना पडेगा।

देवा की मोटी अकल में रुकमणी की ऐसी बाते नहीं घुसती थी। वो रुक्मणी को बिना कुछ बोले वहां से चला जाता है।
 
देवा अपने घर के तरफ चला जाता है वो जाना तो चाहता था खेत में मगर अपने धुन में वो घर आ जाता है। घर में जब वो पहुँचता है तो उसे देवकी और रामु नूतन के साथ घर के ऑंगन में खड़े दिखाई देते है।

रामु;अरे ये आ गया देवा भी । चलो भाई हम तुम्हारे ही लिए रुके हुए थे।

देवा;क्यों क्या हुआ।

रामु;अरे भाई हम वापस जा रहे है।

देवकी;हाँ देवा वहां भी तो देखना होंगा ना। अब तो नूतन की शादी की भी तैयारी करनी है।

नुतन ;वहाँ खड़ी शर्मा रही थी।

देवा; अच्छा भाभी कहाँ है।

देवकी;वो ममता के साथ है वो कुछ दिन यहीं रुकेगी तुम्हारा ख्याल रखने के लिये।

देवा देवकी की बात समझ के हँस देता है।

रत्ना भी अपना समान ले के वहां आ जाती है।

देवा;अरे माँ तुम कहाँ चली।

रत्ना;मुझे भी ये लोग अपने साथ कुछ दिन के लिए ले जाने की ज़िद कर रहे है अब कल रक्षाबन्धन भी है। सोचती हूँ भाई को राखी बांध के वापस आ जाऊँगी तुम मुझे लेने आ जाना।

देवा;अचानक से मुझे बताया भी नहीं तुमने माँ।

देवकी;अब तू क्या बच्चा है जो दिन भर माँ के पीछे पीछे रहेगा । छोड भी दे माँ का आंचल कुछ और पकड़।

आखरी जुमले देवकी ने थोड़े धीमी आवाज़ में कहे थे मगर सबके कानो तक वो पहुँच ज़रूर गए थे।

देवा कर भी क्या सकता था।

वो अपनी माँ और मेहमानो को अपने ट्रेक्टर में बैठा के चौराहे तक छोड आता है।

जब वो वापस घर में आता है तो उससे कौशल्या टकरा जाती है।

कौशल्या;आहह आराम से देवर जी दुःखता है ना।

देवा; कौशल्या की कमर में हाथ डालके उसे अपने से चिपका लेता है।

क्या दुखता है मेरी जान।

कौशल्या; देवा की धोती पर से उसका लंड पकड़ लेती है । ये चुभने से दुःखता है।

देवा;ममता कहाँ है।

कौशल्या;अपने रूम में है।

देवा;आज तुझे मै सोने नहीं दूंगा भाभी।

घर में कोई ना होने की वजह से दोनों खुल के बातें कर रहे थे मगर ये सारी बातें ममता को सुनाये दे रही थी वो दिवार के पीछे से कान लगाके सब सुन रही थी।

कौशल्या;मगर ममता का क्या।

देवा;उसे भी अपने साथ लेना पडेगा वरना काम नहीं जमेगा।

कौशल्या मुस्कुरा देती है।

बहनचोद।

देवा भी कौशल्या की कमर दबाते हुए उसके होठो को चुमने लगता है।

भाभी चोद मामी चोद बन गया ही गया हूँ ।अब बहन चोद भी बन जाऊं।

कौशल्या;हमम।

दोनो एक दूसरे के होठो को चुमने लगते है।
 
देखते ही देखते रात घिर आती है रात के १२ बज रहे थे

आज रक्षाबन्धन का दिन लग गया था।

देवा;अपने रूम में लेटा हुआ था की तभी कौशल्या और ममता हाथ में एक थाली लिए वहां आते है। उनको देख देवा उठके बैठ जाता है।

देवा;अरे इतनी रात में राखी बांधेंगी क्या ममता।

ममता ;हाँ भाई मै सबसे पहले आपको राखी बाँधना चाहता हूँ।

देवा;ठीक है बांध ले। वो अपना हाथ आगे बढाता है।

ममता उसके सामने बैठी हुई थी।

कौशल्या;वहाँ तो तुम हमेशा बँधवाते हो देवर जी आज कही और बँधवाओ अपनी बहन से।

दोनो भाई बहन कौशल्या को देखने लगते है और ये कहते हुए कौशल्या देवा की धोती खीच देती है।

ममता शर्मा जाती है।

हलांकी पहले ही कौशल्या ने ममता को समझा दी थी की क्या होने वाला है और उसे क्या करना है मगर अपने भाई के लंड को देख ममता बुरी तरह शर्मा जाती है।

कौशल्या;देवा का लंड हाथ में पकड़ लेती है और एक हाथ में ममता का हाथ पकड़ के उसका हाथ देवा के लंड पर रख देती है।

कांपते हुए हाथों में बड़ा सा लंड आ जाता है।

कौशल्या धीमी आवाज़ में ममता से कहती है अपने भाई का तिलक कर दे ममता।

ममता ;कैसे भाभी।

कौशल्या;अपने मुँह में ले के।

ममता;नहीं ना भाभी....

कौशल्या;अरे शरमाती क्यों है तू ही तो कह रही थी मुझसे की तू अपने भाई से प्रेम करती है।

और अब शर्मा रही है।

कौशल्या;चल ले मुँह मे।

ममता;देवा की ऑखों में देखने लगती है।

देवा;ममता का सर अपने लंड पर झुका देता है और पहली बार ममता के मुँह में कोई लंड वो भी अपने भाई का वो भी रक्षाबन्धन के दिन चला जाता है।

ममता;गलप्प गलप्प गलप्प गलप्पप्पप्पप्पलल्ल।

अपनी बहन के मुँह में लंड का सोच सोच के ही देवा के लंड में बहुत जान आ जाती है और वो देखते ही देखते रॉड की तरह कड़ा हो जाता है।

इतना मोटा की आज से पहली कभी नहीं हुआ था। लंड की नसे इतने मोटी हो जाती है की ऐसा लगने लगता है जैसे फट जाएगी।

कौशल्या अपने कपडे उतार देती है और देवा भी अपनी शर्ट उतार देता है।

कौशल्या; ममता के पीछे से जाके उसकी क़मीज़ और सलवार का नाडा खोल देती है । ममता तो अपने भाई के लंड में मगन हो चुकी थी।

देवा उसके मुँह में से लंड बाहर निकाल लेता है। ममता के थूक से लंड पूरी तरह गीला हो चुका था।

कौशल्या; इस पर राखी नहीं बांधेंगी ममता।

ममता; हाँ बांधूंगी ना।

ममता थाली में से राखी उठाके देवा के खड़े लंड पर बांध देती है।
 
राखी से बँधा लंड चमक रहा था । पास में बैठी ममता जैसे ही खड़ी होती है उसकी सलवार खुली होने की वजह से निचे उतर जाती है और वो सिर्फ अपने पेंटी में रह जाती है।

अपनी चूत पर दोनों हाथ रखे उसे बहुत शर्म आ रही थी।

कौशल्या पीछे से ममता को पकड़ के उसके ब्रैस्ट मसलने लगती है और देवा अपने हाथ से ममता की पेंटी उतार देता है।

ममता;उन्हह भाई क्या कर रहे हो।

देवा: मैने तुझसे कहा था न मैंने तुझे इस दिन एक बहुत बड़ा तोहफ़ा दूंगा यही है वो तेरी चूत को आज खोल दूंगा मेरी बहना।

ममता ;उन्हह नहीं ना भाई।

देवा;ममता को लिटा देता है । वो जानता था की ये इंकार कुछ देर का है । अपनी बहन को लिटाने के बाद दोनों कौशल्या और देवा ममता के जिस्म पर टूट पडते है।

कौशल्या ममता की ब्रैस्ट को मुँह में ले लेती है और देवा अपनी बहन की चिकनी फूली हुई कुँवारी चूत पर अपना मुँह लगा देता है । हलके भूरे बालों वाली ममता की चिकनी चूत से भीनी भीनी खुसबू आ रही थी । उस महक में खो के देवा अपनी ज़ुबान उस की चूत में पेल देता है। मगर वो ज़्यादा अंदर नहीं जा पाती क्यूंकि अंदर चूत का पर्दा देवा की ज़ुबान को रोक देता है।

ममता;चीख पडती है।

उन्ह्ह्ह माँ जी आहह भाभी आहह ऐसा मत करो न भइया आहह्ह्ह्ह।

अपनी चूत पर अपने भाई के होठो के स्पर्श से ही ममता सिसक उठी थी। वो कई दिन से देवा से चुदवाना चाहती थी और आज जब वो दिन आया था तो वो बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी।

कौशल्या; देवा देर मत कर लगा दे भोग अपनी बहन को।चोद डाल इस कच्ची कलि को और बना ले इसे अपनी रांड।

देवा;ममता के दोनों पैर खोल देता है और अपना मोटा लंड अपनी बहन की चूत पर घीसने लगता है जैसे कोई कसाई बकरा काटने से पहले छुरी तेज़ करता हो।

देवा;डाल दूँ ममता तेरी चूत मे।

ममता;हाँ भैया डाल दो । बना दो मुझे लड़की से औरत। लगा दो मुझपर अपनी मोहर खोल दो मेरी चूत को।

तभी देवा अपने लंड को अपनी बहन ममता की फूली हुई कुँवारी चूत के छेद पर अपने लंड को रखकर एक जोर का झटका मारता है।देवा का लंड उसकी बहन की कुँवारी फूली हुई चूत को चिड़ता फाड़ता हुआ देवा का लंड ममता की चूत में फँस जाता है।

माँ ओह्ह्ह आह्ह्ह्ह आहह मर गई मर गई उह ओह माँ भइया बाहर निकाल लो ना उन्हह......

देवा पुरी ताक़त से अपना लंड अपनी बहन की चूत में घुसा देता है और उस दर्द से ममता बुरी तरह चीख़ पडती है।

चुत का पर्दा फट जाता है । ममता की चूत से ढेर सारा खून बहने लगता है।
 
कौशल्या;बस हो गया न ममता बस चुप हो जा।

ममता ;नहीं नहीं बाहर निकालो आहह मै मर रही हूँ मुझे नहीं करवाना । उन्हह भैया निकाल लो न आअह्हह्हह्हह।

देवा ममता के ऊपर झुक के अपने राखी बँधे लंड से सटा सट अंदर बाहर अपना लंड करने लगता है।

थोडी देर बाद

देवा: आहह मेरी बहना तेरी चूत बहुत छोटी है। इसलिए दर्द ज़्यादा हो रहा है तुझे आह्ह्ह्ह।

ममता: भैया बहुत दर्द हो रहा है ना । सच में ओह्ह्ह मुझे नहीं करना ये आह हां ओह आह माँ वो....

मगर ममता की बातो का देवा पर कोई असर नहीं होता और वो अपनी चुदाई की रफ़्तार कम किये बिना अपनी बहन की चूत को अंदर तक खोलता चला जाता है।

धीरे धीरे ममता की सिसकारियां बंद होने लगती है और उसे भी इस में मजा आने लगता है । इस चुदाई में जिस दर्द से वो चीख़ रही थी। जिस लंड को वो बाहर निकालने के लिए कह रही थी । अब उसी लंड को अपनी कमर उठा उठा के अंदर लेने लगती है।

कौशल्या;अब कैसा लग रहा है ममता।

ममता; उन्हह दर्द तो हो रहा है उहँन भाभी आहह मगर मुझे चाहिए आह्ह्ह्ह।

कौशल्या; ममता के ब्रैस्ट मुँह में ले के चुसने लगती है ।हाँ अब घर में रह के रोज़ देवा से चुदवाना तू। भाई ऐसा है तेरा की तुझे बाहर मुँह मारने की ज़रूरत नहीं पडेगी।

देवा कौशल्या के होठो को चुमते हुए सटा सट ममता को चोदने लगता है। खून से सना हुआ उसका लंड अब बडी आसानी से ममता की चूत में अंदर बाहर होने लगता है।

ममता;भैया आज रक्षाबंधन के दिन आपने मुझे चोद के मुझे सच में बहुत प्यारा तोहफ़ा दिया है। मै आपकी दिल से आभारी हूँ।

देवा;ये तो हर मेरा फ़र्ज़ है मेरी बहना तुझे हर तरह से खुश रखना।

ममता; उन्हह भैया धीरे से करो न आह्ह्ह्ह।

मगर वो भूखे शेर को धीरे से खाने का बोल रही थी। उसे शायद पता नहीं था की जो भी देवा को धीरे से करने के लिए कहता है। देवा उसे और ज़ोर से करता है।
 
अपडेट 54

ममता ;अपने भाई देवा के लंड की रफ़्तार बर्दाश्त नहीं कर पाती है और चीखते हुए अपनी चूत का पहला पानी अपने भाई के नाम करते हुए झरने लगती है।

उन्हह भाई या आहह मेरा पेशाब निकाल दिए आपने उन्हह आह्ह्ह्ह्ह्।

कौशल्या;पेशाब नहीं पगली तेरा पानी निकल रहा है अपने भाई के लंड की रगड से।

ममता सर उठाके अपने चूत की तरफ देखने लगती है। उसकी चूत के लिप्स सीकूड़ते फिर फैल जाते। मगर अभी भी देवा का लंड सटा सट उसकी चूत में अंदर बाहर हो रहा था।

ममता ढिली पड़ चुकी थी । उसके ढीली पडने से देवा को कोई फर्क नहीं पडने वाला था बल्कि चूत से पानी निकल जाने से ममता की चूत में और ज़्यादा चीकनाहट आ गई थी।

देवा;ममता तेरे चूत अंदर से बहुत गरम और छोटी है मेरी बहना आहह बहुत मजा आ रहा है । आज पहली बार ऐसा लग रहा है जैसे मेरा लंड तेरे चिकनी चूत में कही खो जायेगा आह्ह्ह्ह्ह्ह।

ममता ;उन्हह आपकी अमानत है भैया उन्हह आपको ख्याल रखना है अब से इसका रोज़ । उईईईईई माँ मेरे भैया बहुत बड़ा है आपका लंडड..........

इधर कौशल्या की चूत से चिंगारियाँ निकल रही थी। भाई बहन की चुदाई देख के उसका तन बदन जल बिन मछली की तरह तड़प रहा था। मगर देवा था की उसकी चूत की तरफ ध्यान ही नहीं दे रहा था।

ममता के होंठ सूखने लगते है।

बार बार वो अपने होठो पर ज़ुबान फेरने लगती है।

कौशल्या उसके होठो के पास आ जाती है।

ममता; उन्हह भाभी पानी आहह माँ

इससे कहो न मुझे पानी पी लेने दे।

कौशल्या देवा की तरफ देखती है और बिना कुछ बोले अपनी चूत को ममता के होठो के पास ले जाती है।

ले चाट इसे।

ममता;अपने होठो के क़रीब इतनी चिकनी चूत देख के और ज़्यादा चुदासी होने लगती है। नूतन की चूत कई बार चाट चुकी थी ममता । आज भाभी की चूत कैसे छोड सकती थी।

ममता; एक हलकी से थपकी कौशल्या के चूत पर मारके झट से अपने होंठ उसकी चूत पर लगा देती है और काशी का जिस्म अकड़ता चला जाता है । नीचे से देवा के लंड के जबरदस्त धक्के और ऊपर से कौशल्या की चूत दोनों सुराख़ ममता के जैसे बंद हो गये थे।

देवा;एक थप्पड कौशल्या की कमर पर मारता है।

कौशल्या;आहह अपने जिस्म को ढीली छोड़ते हुए देवा को खा जाने वाली नज़रों से देखने लगती है।

कौशल्या दोनों हाथों से ममता के सर को पकड़ लेती है और फिर सुर्र की आवाज़ से उसकी चूत से पेशाब सीधा ममता के मुँह में गिरने लगता है। अचानक से अपने मुँह में खारा खारा पानी आने से पहले तो ममता कुछ समझ नहीं पाती और जब उसे समझ में आता है तो वो और अंदर तक अपनी ज़ुबान डाल के कौशल्या का पेशाब पीने लगती है।

इस तरह कौशल्या की चूत से पेशाब पीता देख देवा के लंड में खतरनाक तौर पर जोश आ जाता है और वो अपनी बहन की दोनों टांगों को हवा में उठाके ममता को चोदने लगता है।
 
ममता कुछ नहीं कर सकती थी। उसके मुँह में कौशल्या का पेशाब गिर रहा था और चूत में देवा का लंड उधम मचा रहा था।

जैसे ही कौशल्या अपनी चूत ममता के मुँह से हटाती है। देवा ममता के सर को पकड़ के उसे बैठा देता है और अपने लंड को उसकी चूत से निकाल के उसके मुँह के सामने ले आता है।

देवा;आहह पेशाब तो पी ली अब भाई के लंड का शहद भी पी जा मेरी प्यारी बहना।

ये कहते हुए वो अपने लंड का गाढा गाढा सफेद पानी ममता के मुँह में निकालने लगता है।

देवा जानता था की चूत में पानी निकालना खतरनाक हो सकता है उसकी पानी से औरत बहुत जल्द माँ बन सकती है इतनी ज़्यादा पानी में ढेर सारे बच्चा पैदा करने वाले जीव होते है।

ममता;आहह पूरा मुँह खोल लेती है थोडी देर पहले खारे पानी से अपना मुँह मीठा करने वाली ममता के मुँह में अब मलाई आने से चूत की लिप्स पूरी ताकत से फड़फड़ाने लगती है और वो भी अपने भाई के साथ दूसरी मर्तबा झडने लगती है।

देवा;बिस्तर पर लेट जाता है उसके पास में ममता भी ढेर हो जाती है।

चुत से खून के साथ साथ पानी भी बहने लगता है।

कौशल्या;देवा के नंगे जिस्म पर लेट जाती है।

और देवा की छाती पर अपना सर रख के देवा के निप्पल को मुँह में लेके चुसने काटने लगती है।

देवा;आहह भाभी थोडी साँस तो लेने दे।

ममता भी अपना चेहरा देवा की छाती पर रख के उसके ऑंखों में देखने लगते है

दो खूबसूरत औरतें देवा के पास बिलकुल सटी हुई थी कौशल्या की चूत जहाँ देवा के मुरझाये हुए लंड को जगाने की कोशिश कर रही थी। वही ममता अपने होठो को देवा के होठो के पास ला के धीरे से कहती है।

ममता;भैया माँ को पता चल गया तो क्या होगा।

देवा;ममता को भी अपने ऊपर खीच लेता है।

मेरे होते हुए घबराती क्यों है तुझे तो मै कई दिनों से चोदना चाहता था और उससे पहले माँ को। मगर माँ एक कठोर दिल की औरत है मैंने कितनी बार माँ के पास जाने के कोशिश किया मगर हर बार माँ मुझसे दूर चलि जाती है।

ममता ;क्या तुम माँ के साथ भी ये सब करना चाहते हो

तुम्हेँ शर्म नहीं आती।

देवा; अच्छा तुझे शर्म नहीं आती मेरे लंड पर राखी बांध कर चूत कुटवाते हुए।

ममता शर्मा जाती है।
 
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