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थैंक्स जो आपलोगों ने हमें इतना सम्मान दिया।मैं अपनी कहानी रोज अपडेट करूँगा।थैंक्स
पदमा की चूत देवा के पानी से पूरी तरह भर चुकी थी। चूत के किनारे तक आ चुका पानी पदमा के करवट लेने से बाहर बहने लगता है और गाण्ड को गीला करते हुए ज़मीन पे गिरने लगता है।
देवा की छाती ऊपर नीचे हो रही थी जिस पे पदमा अपना सर रख देती है।
पदमा;देवा बहुत ज़ालिम है तू । मै तुझे बोलती रही धीरे कर पर तू अपनी कर के ही रहता है।
देवा;पदमा एक बार तेरी चूत में जाने के बाद दिल धीरे धीरे करने को नहीं कहता रानी।
पदमा;अच्छा ये बात है ।
वो अपने होंठ देवा के होठो से मिला देती है।
देवा के हाथ पदमा की पीठ और कमर पे नाचने लगते है और पदमा अपनी चूत के घुंघराले बालो में देवा के लंड को फँसा लेती है।
कुछ ही पलों में देवा का लंड पहले सलामी देता है और इस ईशारे को समझते हुए पदमा देवा की छाती को चुमती हुई नीचे उतरती चली जाती है। उसके होंठ देवा के लंड के पास थे और ज़ुबान देवा के सुपाडे को चाटने को बेताब थे।
देवा;आहह मुंह में ले।
पदमा अपना मुंह खोल लेती है और देवा का लंड पदमा के हलक में जाके अटक जाता है । वो आज बडी चुदासी महसूस कर रही थी । इसीलिए चूत को सहलाते हुए लंड को बड़े प्यार से चुसने लगती है।गलप्प गल्प।
देवा;के लंड का सुपाडा जैसे जैसे पदमा के जुबान को छूता है वैसे वैसे उसमें जान आने लगती है और पूरी तरह टाइट हो जाता है।
पदमा;जितनी ज़ोर से चूत को रगड रही थी उतनी ही ज़ोर से वो लंड भी चूसने लगती है गलप्प गल्प।
पदमा;गलप्प आहह बहुत बड़ा है रे देवा तेरा । ना चूत में पूरा जाता है और न गलप्प मुंह में गलप्प।
देवा;देख तेरी गाण्ड में पूरा कैसे उतार देता हूँ साली अब।
पदमा;गलप्प पहले थोड़ा तेल लगा ले रे गलप्प.....
देवा;पदमा को अपने पास खीच लेता है और अपने लंड पे थूक लगा के पदमा की गाण्ड पे घीसने लगता है।
देवा जैसे ही सुपाडा पदमा की गाण्ड पे लगाता है पदमा को पिछली चुदाई याद आ जाती है ।
पदमा;आहह आराम से घुसाना देवा।
देवा;हाँ काकी बिलकुल धीरे से पेलूँगा।
वो पदमा के दोनों पैरों को ऊपर उठाके अपने लंड को पदमा की गांड के सुराख़ पे रख देता है और धीरे से लंड का सामने का हिस्सा अंदर डाल देता है।
उसका सुपाडा ही इतना मोटा था की पच की आवाज़ के साथ गाण्ड का सुराख़ खुल जाता है और पदमा का बदन थरथरा जाता है।
देवा का दुसरा धक्का इतनी ज़ोर से अंदर पड़ता है की पदमा पूरी तरह हिल जाती है।
पदमा;आहह तू कभी तो मेरी सुना कर आहह धीरे कर आह्ह्ह्ह्ह्हहः
देवा;तीसरे झटके में पूरा का पूरा लंड पदमा काकी की गाण्ड में उतार देता है कुछ पल रुकने के बाद वो अपनी अवकात पे आ जाता है और सटा सट कमर पकड़ के पदमा की गाण्ड को अंदर तक खोलते चला जाता है।
पदमा;चिल्लाने लगती है गीड गिडाने लगती है आहह ज़ालिम आहह मत कर इतने ज़ोर आहह सी माँ।
देवा;आहह देख पदमा तेरी गाण्ड कैसी खुल गई है आहह उसे भी पूरा लंड चाहिए आह साली कितनी गरम और टाइट गांड है तेरी....
पदमा;माँ को पुकारने लगती है पर उस वक़्त सिवाये रश्मि के कोई वहां नहीं था।
रश्मी;की चूत का पानी लगतार बहने लगता है वो अपनी चूत को सहलाना छोड देती हैम बिना सहलाये ही उसकी कुँवारी चूत के दोनों लिप्स फड़ फड़ा रहे थे।
उसकी चूत का पानी जांघ से बहता हुआ अब पैर के पंजे तक पहुँच चूका था। रश्मि की चूत पहली मर्तबा इतनी बुरी तरह किसी की चूत और गाण्ड की चुदाई होते देख रही थी।
पदमा;आहह पानी छोड दे गाण्ड में देवा अहह और उसे मत फाड़ माँ वाह क्या लंड है आहः
देवा;थोडी देर पदमा आहह बस थोडी देर और आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्।
वो थोडी देर और 20 मिनट तक चलते रही पदमा का पूरा जिस्म निढाल हो चुका था। गाण्ड एकदम सुन्न पड़ चुकी थी। पर देवा था की पदमा की गण्ड से लंड निकालने को तैयार नहीं था।
देवा;रश्मि की चूत के पास हाथ लगा के देखता है उसकी शलवार गीली थी। चूत का चिप चिपा पानी जब देवा के हाथ को लगता है तो देवा समझ जाता है की रश्मि झूठ बोल रही है।
शर्म के मारे रश्मि की ऑखें बंद हो जाती है।
देवा;उसके कान में धीरे से कहता है झूठी तेरी चूत तो कुछ और ही कह रही है।
रश्मी;आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह।
देवा;उसके इतने क़रीब था और इस हालत में था की उससे रहा नहीं जाता और वो रश्मि के नीचले होंठ को मुंह में लेके चुसने लगता है गलप्प गल्प।
रश्मी;देवा के छाती पे मुक्के बरसाती जाती है।
पर देवा पूरा रस पी जाने के बाद ही रश्मी को छोडता है।
देवा;जा अब जाके माँ को ये भी बता देना की मैंने तेरे साथ क्या किया।
रश्मी;देवा के टेस्टीस पे ज़ोर से हाथ मार के हँसते हुए वहां से भाग जाती है।
मै माँ को बता दूंगी देवा की तू बड़ा कमीना है।
देवा; लंड को हाथ में पकड़ के बैठ जाता है आह्ह्ह्ह्ह्ह।
उधर हवेली में सन्नाटा पसरा हुआ था।
हिम्मत राव अपनी कार लेके पास के गांव गया हुआ था जहाँ रहती थी बिंदिया।
बिंदिया; एक बहुत ही खूबसूरत औरत थी माँ बाप उसके इस दुनिया में थे नहीं जिसकी वजह से उसकी शादी नहीं हुई थी।गरीब होने की वजह से कोई रिश्तेदार उसे सहारा देने को तैयार नहीं था।
हिम्मत राव; का दिल बिंदिया पे कई साल पहले आ गया था ।
उसने बिंदिया को न सिर्फ सहारा दिया बल्कि उसे दुनिया के हर ऐशो आराम की चीज़ ला के दिया था बदले में बिंदिया ने हिम्मत राव को अपना जिस्म दिया था।
पिछले कई सालो से वो हिम्मत राव के रखेल के रूप में ज़िन्दगी गुज़ार रही थी पर उसका असल मक़सद हवेली की मालकिन बनने का था। हिम्मत राव बिंदिया की मोहब्बत में इस कदर गिरफ्तार हो चुका था की वो बिंदिया के हर जायज़ नजायज़ माँग पूरी करता था।
देवा आँखें खोलता है और ममता को इस तरह अपने से चिपका देख फ़ौरन उसे अपने ऊपर हटा देता है।
देवा- तू यहाँ क्या कर रही है।
ममता; वो मै मै वो .....अरे माँ ने तुम्हे उठाने के लिए कहा है और तुम हो की पता नहीं कैसे कैसे खवाब देखते हो मुझे भी वो चुप हो जाती है।
देवा;उसे कुछ बोलने ही वाला था की रत्ना भागते हुए कमरे के अंदर आती है।
रत्ना;देवा जल्दी उठ तेरे दोस्त पप्पू के बापु की तबियत बहुत ख़राब है पप्पू तुझे लेने आया है चल जल्दी कर।
देवा;झट से बिस्तर छोड देता है और मुंह हाथ धोके पप्पू के साथ उसके घर चला जाता है।
शालु का शराबी पति रात में शराब के नशे में एक गढे में गिर गया था जिसके वजह से उसे काफी मार भी लगा था सर से खून बहने से वो थोड़े थोड़े देर बाद होश में आता और फिर से बेहोश हो जाता।
पास में नीलम और रश्मि बैठी रो रही थी।
शालु; किसी तरह खुद को संभाले हुए थी।
देवा;ज़्यादा पढ़ा लिखा नहीं था पर उसे पता था की इस वक़्त शालु के पति को वैध की ज़रुरत है।
वो शालु से कहता है हमे वैध जी को यहाँ लाना होगा।
पप्पू;देवा को साथ चलने के लिए कहता है पर शालु उसे घर रुक के बापू का ख्याल रखने को कहती है और खुद देवा के साथ ट्रेक्टर में बैठ के वैध के घर चली जाती है।
वैध का घर कुछ किलोमीटर दूर था।
देवा;तूफ़ान के रफ़्तार से वैध के घर पहुँच जाता है।
वो दरवाज़ा खटखटाता है पर अंदर से कोई आवाज़ कोई हलचल सुनायई नहीं देती।
वैध एक ६० साल का आदमी था उसका एक बेटा था जो फ़ौज में था पत्नी उसकी इस दुनिया में थी नहीं अपनी बहु के साथ वो यहाँ रहता था।