रानी;तू तो बड़ा कमीना निकला मालकिन पे डोरे ड़ालता है अभी तेरी खबर लेती हूँ।
वो दोनों हाथो में देवा के लंड को पकड़ के ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगती है।
देवा की नज़रें रानी के आधे नंगे ब्रैस्ट पे टीक जाती है
और जिस्म ऐठने लगता है रानी के नाज़ुक हाथ देवा के लंड पे कहर बरपा रहे थे। वो इतनी अदा से लंड को मुठिया रही थी की देवा कुछ देर बाद ही पानी छोड़ने लगता है
आह मालकिन आहह नहीं ये पाप है मालकिन ऐसा मत करो आहह आह।
रानी के दोनों हाथ देवा के लंड से निकले पानी से भर चुके थे।
वो देवा की ऑखों में देखते हुए अपनी उँगलियों को एक एक करके चाटने लगती है।
देवा :ये आप क्या कर रही है मालकिन ये गन्दा है।
रानी;प्यार करती हूँ तुझसे और प्यार में कुछ गन्दा नहीं होता।
देवा ख़ामोशी से रानी को देखने लगता है। रानी के इस हरकत से उसके दिल में भी प्यार का एक छोटा सा दिया जगमगाने लगा था।
रानी;देवा को घर चलने के लिए कहता है और देवा मुस्कराता हुआ हवेली की तरफ कार दौड़ा देता है।
हवेली पहुंच के रानी देवा का हाथ पकड़ के अपने रूम में ले जाती है।
देवा;मना करता जाता है पर रानी उसकी एक नहीं सुनती।
रूम में पहुँच के रानी दरवाज़ा बंद कर देती है।
देवा;छोटी मालकिन मुझे बहुत डर लग रहा है आप दरवाज़ा तो खोल दो वरना किसी ने हमें ऐसे देख लिया तो क्या समझेगा।
मेरी आँखों में देखो इस में सिर्फ प्यार है देवा। ढेर सारा प्यार और जानते हो ये किसके लिए है।तुम्हारे लिए तो जब तक तुम मेरे साथ हो कोई तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड सकता।
देवा;पर मालकिन।
रानी;देवा के शब्द पूरे नहीं होने देती और एक बार फिर से उसके होठो को अपने होठो में भरकर चूसने लगती है।गल्पप गलप्प।
रानी;देवा ज़रा मेरे काँधे तो दबा दो बहुत दर्द कर रहा है।
देवा;क्या करता नौकर जो था जो मालिक कहेंगे वो नौकर करेगा।
वो रानी के बिस्तर पे बैठ के उसके काँधे दबाने लगता है।
रानी; अच्छा एक बात बता । मै तुझे अच्छी लगती हूँ न सच सच बोलना तुझे मेरी कसम है देवा।
देवा;मालकिन आप बहुत खूबसूरत हो । आपके जैसी लड़की मैंने आज तक नहीं देखा। पर मालकिन मै आपसे प्यार नहीं करता। आप आसमानो में उड़ने वाली परी हो और मै ठहरा ज़मीन का एक कीडा।आपका और मेरा कोई मेंल नहीं है मालकिन।
रानी के दिल में आज पहली बार कुछ हुआ था वो देवा को कुछ कुछ जानने लगी थी।
अच्छा वो सब छोड़ ये बता तुझे कैसी लड़की पसंद है।
देवा;मालकिन आप भी न मुझे शर्म आती है।
रानी;हाय मेरे शरमीले तू क़ितना बड़ा बेशरम है मै अच्छी तरह जान चुकी हूँ।
दोनो हिम्मत राव की आवाज़ सुनके अपने बात बीच में बंद कर देते है । देवा की गण्ड फिर से फ़टने लगती है और वो रानी को कल आने का कह के पीछे के दरवाज़े से घर की तरफ निकल जाता है।
वो जब घर पहुँचता है तो पप्पू उसे उसका इंतज़ार करता हुआ मिलता है वो देवा को बताता है की वैध जी के यहां से दवा लाना है।
देवा;पप्पू से कहता है की वो दवा ला देगा।
पप्पू घर चला जाता है।देवा खाना खाके कुछ देर आराम करके अपने खेत में चला जाता है।
उसका दिमाग चारो तरफ घुम रहा था कभी उसे पदमा याद आती तो कभी रानी।
और वैध जी के घर जाने का सोच के किरण।
वो बेहद खुश था एक वक़्त ऐसा था की वो पप्पू के गाण्ड से काम चला रहा था और अब वो वक़्त आ गया था की हर तरफ हरियाली ही हरियाली नज़र आ रही थी।
वो अपना ट्रेक्टर लेके वैध जी के घर की तरफ निकल जाता है रस्ते में उसे पदमा मिलती है।
पदमा;कहाँ जा रहा है देवा।
पदमा के नशीली ऑखें देवा को साफ़ साफ़ बता रही थी की पदमा क्या चाहती है कहाँ कहाँ और कितना चाहती है।
देवा;तुम भी कहाँ कम हो। जबसे तुमने इसे हिलाया है तबसे देखो कैसे खड़ा हुआ है नीचे बैठता भी नही।
किरण;इसे तो मै अभी ठीक करती हूँ।
किरण;देवा को धक्का देके नीचे बैठा देती है और एक झटके में देवा की पेंट नीचे खिसका देती है।
हाय रे कितना मोटा और लम्बा है कल रात भर मेरे सपने में मुझे तरसाता रहा है ये। अब्ब नहीं छोड़ूँगी इसे।
किरण;देवा के लंड को हिलाते हुए अपने मुंह में ले लेती है और उसे गलप्प गलप्प हलक तक खीच के चुसने लगती है।
देवा;आहह आराम से कर किरण आह्हह्हह्हह्हह।
बाहर बैठी पदमा को कुछ शक होता है देवा को अंदर गए काफी वक़्त हो गया था। न वो बहार आया था न किरण । वो उठके उस कमरे की तरफ बढ़ती है और जैसे ही वो दरवाज़े के पास पहुँचती है उसका शक यक़ीन में बदल जाता है।
पदमा;अच्छा तभी तो मै सोचु की तुम डब्बा खोलने गए हो या इसका घाघरा खोलने।
देवा और किरण पदमा को देखकर मुस्कुरा देते है।
काकी ये भी आपके तरह बडी उदास उदास से रहती है सोचा बेचारी की थोड़े उदासी दूर कर दुं।
पदमा;कमर मटकाते हुए उन् दोनों के पास आ जाती है हाँ इस काम में तो तुम माहिर हो ज़रा मै भी तो देखु कितनी तीख़ी मिर्ची है ये वैध की बहु।
पदमा;किरण के होठो को चुम के देखती है किरण के होठो पे देवा का हल्का हल्का पानी भी लगा हुआ था जिसे पदमा चाट लेती है।
किरण;आहह काकी ।
पदमा;बडी तीखी है री तू। मेरे देवा पे क्या जादू कर दिया तूने की एक ही दिन में तेरा दिवाना हो गया।
क़िरण; काकी देवा तो नई चूत का दिवाना है आज इसे हम दोनों ऐसा मजा चखाएंगे की ये भी हमें याद रखे।
पदमा;तू इसे नहीं जानती किरण बिटिया ।बड़ा ज़ालिम है ए।
किरण;देखते है रास्ता ख़तम होता है या मुसाफिर थकता है।
दो लंड की भूखी औरतें जब देवा के लंड को चूसना शुरू करती है तो देवा के मज़े का ठिकाना नहीं था।
कभी पदमा की तो कभी किरण के मुंह में देवा का लंड घूसने लगता है।
किरण;पदमा से भी ज़्यादा चुदक्कड़ औरत थी। वो प्यासी थी भूखी थी और जवान भी थी । चूत की आग जब जिस्म पे हावी हो जाती है तो सामने को तिनका बाकी नहीं रहता सब उसकी चपेट में आ जाते है।
देवा;आज दो भूखी शेरनियों के बीच फँस गया था।
पदमा;देवा के सर के पास आ जाती है और अपनी चूत उसके मुंह के पास ला के उसके सर को अपनी चूत पे दबाती है।
देवा;ज़ुबान बाहर निकाल के पदमा की चूत चाटने लगता है गलप्प गलप्प गलप्प।
किरण की चूत पानी छोड़ रही थी पर ये वो बारिश नहीं थी जो बंजर बीयांबान में हरयाली ला दे।
देवा;के लंड की नसे मोटी हो चुकी थी।
उससे रहा नहीं जाता और वो अपना मुंह पदमा की चूत से हटा के किरण को अपने पास खीच लेता है।
देवा;किरण के कमर पे दो तीन थप्पड मारता है और पीछे से उसके चूत पे थूक लगा के लंड चूत के मुहाने पे रगडने लगता है।
किरण;हाय माँ डाल दे न आहह और कितना तड़पाएगा आह।
पदमा;किरण के मुंह के पास लेट जाती है और देवा जैसे ही पहला धक्का किरण की चूत में मारता है किरण खुद बा खुद पदमा की चूत पे झुकती चली जाती है।
इधर देवा किरण को पीछे से चोद रहा था। उधर किरण पदमा की चूत को अंदर तक चाटने लगती है।
किरण;आहह बड़े दिन के बाद किसी मरद से पाला पड़ा है आहह चोद मुझे ज़ोर से आहह निकाल दे मेरे सारी चूत की मस्ती । आह्ह्ह्ह माँ वो तेरा लंड मेरी चूत को अंदर तक चीर रहा है रे आह्ह्ह्ह्ह्ह।
देवा;आहह तुझे देखना था न कौन थकता है देख अब आहह आह्ह्ह्ह्ह्।
पदमा;चूत की इतनी बुरी तरह चुसाई से पूरी तरह गरम हो चुकी थी। वो भी अपने ओखली में देवा का लंड ले के उसकी पिटाई चाहती थी।
देवा;किरण को अपने ऊपर खीच लेता है और सटा सट अपने लंड को उसके चूत में अंदर बाहर करने लगता है वो इतने तेज़ झटके मारने लगता है की किरण की चूत से एक फौवारा निकलता है और वो काँपते हुए झडने लगती है।
किरण;आहह बस कर देवा आहह काकी देवा से कहो न मुझे छोड दे आहह मेरी चूत फट जाएगी।
पदमा;देवा के अंदर बाहर होते लंड को और किरण की चूत को चाटने लगती है।
मैने तुझसे पहले ही कही थी बड़ा ज़ालिम है ये अब जब तक इसका पानी नहीं निकलता ये तुझे नहीं छोड़ने वाला।
किरण;आहह आप अपनी चूत में ले लो इसे आहह मै मर जाऊँगी आह्ह्ह्ह्ह्।
देवा;इतनी जल्दी नहीं मरने वाली तू किरण आहह आह्ह्ह्ह्ह्ह।
लगातार 10 मिनट के ताबडतोड़ चुदाई से देवा का लंड तो नहीं पर किरण की चूत दूसरी मर्तबा ज़ोर शोर से झडने लगती है। चूत पानी छोड छोड के पूरी तरह खाली हो चुकी थी।
किरण का जिस्म ठण्डा पड़ चुका था और वो बेजान सी हो गई थी।
वो पिछले कई महिनो से नहीं चूदी थी और आज जब चूदी थी तो ऐसे आदमी से जो इंसान और जानवर में कोई फर्क नहीं समझता था।
देवा;किरण की चूत से लंड बाहर निकाल देता है शायद उसे किरण पे रहम आ गया था या फिर पदमा की चूत की आवाज़ उसके लंड को मिल गई थी।
देवा;पदमा ये मेरे किसी काम की नहीं है आज तेरी चूत ही लगता है मुझे ठण्डा करेंगी।
पदमा; पैर खोल के देवा का स्वागत करती है और देवा बिना देर किये अपनी पदमा काकी की चूत को अपने लंड से भर देता है।
पदमा;हाँ ऐसे ही अंदर तक जड़ तक जाने दे आहह
देवा;पदमा की दोनों टाँगें हवा में उठाके दनादन अंदर तक घुसाए जाता है।
किरण;ऑखें फाड़े ये सब देखने लगती है उसे देवा के लंड की ताकत पे तो भरोसा हो गया था बस उसे पदमा की चूत की शक्ति देखनी थी।
देवा;किरण के बाल पकड़ के उसे पदमा की चूत के पास खीचता है।
आहह्ह्ह्ह मुंह खोलललललल सालीईईईईईईईईईईई।
क़िरण;जैसे ही मुंह खोलती है देवा उसके मुंह में लंड पेल देता है कुछ देर तक वो किरण से चुसवाता रहता है उसके बाद पदमा क की गाण्ड पे थूकता है और बिना पदमा से कहे उसके गाण्ड के सुराख़ को भी खोलता चला जाता है।
पदमा;आहह नहीं ना वहां नहीं देवा।
देवा;चुप कर साली आहह तेरा हर सुराख़ मेरा है आह्ह्ह्ह्ह्ह।
कभी किरण के मुंह में तो कभी पदमा के गाण्ड में थोड़े थोड़े देर से देवा दोनों में लंड डाल डाल के चुदाई का मजा लेने लगता है।
आखीर कार पदमा भी देवा के आगे हार जाती है और उसकी चूत से भी गाढा गाढा लावा बाहर बहने लगता है।
देवा;पदमा की गाण्ड में और नहीं टीक पाता और वो अपना लंड बाहर निकाल लेता है और दोनों औरतों के मुंह पे पानी की बारिश करने लगता है।
क़िरण और पदमा इस बारिश में भीग जाते है तीनो का अंग अंग मदमस्त हो चुका था।
देवा; लंड को कपडे से साफ़ करने लगता है और इधर किरण और पदमा एक दूसरे के मुंह में मुंह डाले देवा के पानी को चाटने लगती है।
रात काफी घिर चुकी थी वैध के भी आने का वक़्त हो चला था इसलिए देवा पदमा को साथ लेके गांव की तरफ चल देता है।