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कभी उंगली के दबाव से सरिता को ऐसा लगता की उसका कलेजा मुँह को आ रहा है तो हिम्मत उसकी चूची की घुंडीयों को मीस देता। 5 मिनट तक ये खेल चलता रहा जब तक हिम्मत का 1” चौड़ा और 4” लंबी उंगली पूरी की पूरी सरिता की गाँड के छेद में समा गयी।
खेल में बदलाव आया और हिम्मत ने दूसरी उंगली घुसाने का प्रयास किया। सरिता को ऐसा लगा जैसे कोई उसे दो टुकड़ो में काट रहा हो। उसके मुँह से हल्की चीख निकली और उसने मिमियाते हुए गुहार लगाई ।
सरिता: हाय अंकल सुनिए ना ।प्लीज़ कोई तेल लगा के कीजीए ना। बहुत दुख़ता है। लगता है हमारा दिल निकल के मुँह से गिर जाएगा ।
हिम्मत ने थोड़ा रहम किया और आयल की प्लास्टिक बॉटल को सरिता के गाँड के छेद पर रखके ज़ोर से दबाया जिससे तेल की पिचकारी निकली और उसके गांड में समा गयी।
हिम्मत ने झट से फिर अपनी दो उंगली अंदर घुसा दी. तेल की लिसलसाहट से अब दोनो उंगलियाँ आराम से अंदर जा रही थी.
5 मिनट बाद हिम्मत ने सरिता के दोनो चूतडों को थाम के उसे थोड़ा उपर उठाया और उसके गाँड के छेद पर अपना 8” लंबा तेल से भीगे लंड का सूपाड़ा टीका दिया।
सरिता ने उसे महसूस कर आने वाले हमले के लिए खुद को अंदर से तैयार कर लिया।
उसने धीरे से सरिता के चूतडो को अपने लंड पे दबाया तो सरिता उचक कर उपर उठ गयी।
अनजाने डर की वजह से वो हर बार खुद को लंड पर से खीच ले रही थी।
3 बार ऐसा होने पर हिम्मत ने सरिता के डर को महसूस किया और फिर उसने एक हाथ सरिता के इर्द-गिर्द लपेटकर खुद से चिपका लिया और दूसरे से अपने लंड को पकड़ कर उसके गाँड के छोटे से छेद पर रखकर हल्का सा दबा दिया। इस बार सूपाड़ा अंदर समा गया।
चिकनाई अच्छा होने की वजह से सरिता को कुछ कम दर्द महसूस हुआ। दूसरी बार हिम्मत ने सरिता को दोनो बाजुओं से जकड़ कर ज़ोर से नीचे दबाया और साथ ही अपनी कमर को भी उपर उछाल दिया। ऐसा करते ही 5” लौडा सरिता की कुँवारी गाँड को फ़ाड़ता हुआ घुस गया।
खेल में बदलाव आया और हिम्मत ने दूसरी उंगली घुसाने का प्रयास किया। सरिता को ऐसा लगा जैसे कोई उसे दो टुकड़ो में काट रहा हो। उसके मुँह से हल्की चीख निकली और उसने मिमियाते हुए गुहार लगाई ।
सरिता: हाय अंकल सुनिए ना ।प्लीज़ कोई तेल लगा के कीजीए ना। बहुत दुख़ता है। लगता है हमारा दिल निकल के मुँह से गिर जाएगा ।
हिम्मत ने थोड़ा रहम किया और आयल की प्लास्टिक बॉटल को सरिता के गाँड के छेद पर रखके ज़ोर से दबाया जिससे तेल की पिचकारी निकली और उसके गांड में समा गयी।
हिम्मत ने झट से फिर अपनी दो उंगली अंदर घुसा दी. तेल की लिसलसाहट से अब दोनो उंगलियाँ आराम से अंदर जा रही थी.
5 मिनट बाद हिम्मत ने सरिता के दोनो चूतडों को थाम के उसे थोड़ा उपर उठाया और उसके गाँड के छेद पर अपना 8” लंबा तेल से भीगे लंड का सूपाड़ा टीका दिया।
सरिता ने उसे महसूस कर आने वाले हमले के लिए खुद को अंदर से तैयार कर लिया।
उसने धीरे से सरिता के चूतडो को अपने लंड पे दबाया तो सरिता उचक कर उपर उठ गयी।
अनजाने डर की वजह से वो हर बार खुद को लंड पर से खीच ले रही थी।
3 बार ऐसा होने पर हिम्मत ने सरिता के डर को महसूस किया और फिर उसने एक हाथ सरिता के इर्द-गिर्द लपेटकर खुद से चिपका लिया और दूसरे से अपने लंड को पकड़ कर उसके गाँड के छोटे से छेद पर रखकर हल्का सा दबा दिया। इस बार सूपाड़ा अंदर समा गया।
चिकनाई अच्छा होने की वजह से सरिता को कुछ कम दर्द महसूस हुआ। दूसरी बार हिम्मत ने सरिता को दोनो बाजुओं से जकड़ कर ज़ोर से नीचे दबाया और साथ ही अपनी कमर को भी उपर उछाल दिया। ऐसा करते ही 5” लौडा सरिता की कुँवारी गाँड को फ़ाड़ता हुआ घुस गया।