देवा;का हाथ शालु के नरम मख़मली जाँघो को टच होने लगता है जिससे बार बार शालु को करेन्ट सा लगने लगता है।
शालु;मुझे घर जाना है ये कह के वो जैसे ही उठती है वापस बैठ जाती है।उसका दरद नाक़ाबिल बर्दाश्त था।
देवा;काकी ऐसा करते है मै आपको गोद में उठाके घर ले चलता हूँ।
शालु;नहीं नहीं मै चली जाऊँगी।
वो एक बार फिर उठने की कोशिश करती है और फिर चीख़ के नीचे बैठ जाती है।
देवा;इस बार शालु से नहीं पूछता वो एक हाथ गरदन के नीचे और दुसरा हाथ कमर के नीचे डाल के फूल से भी हलकी शालु को अपने मज़बूत बाँहों में उठा लेता है।
शालु;गिरने के डर से दोनों हाथ देवा के गर्दन में डाल देती है।
देवा;शालू को इसी तरह उठाके शालु के घर की तरफ चल पड़ता है।
धूप बहुत तेज़ होने के कारण गांव के सभी लोग घरो में या खेतों में थे।
रास्ता एकदम सुनसान था इसलिए शालु को भी किसी के देखने का डर नहीं था।
देवा;के हाथ की उँगलियाँ शालु की कमर को छू रही थी जिससे शालु को नशा सा छाने लगा था । उसे यक़ीन नहीं हो रहा था की देवा उसे इतनी आसानी से उठाके घर ले जा रहा है ।
देवा;काकी तुम बहुत हल्की हो मुझे लगा भारी होंगी।
शालु;अभी तो कह रहा था बहुत भारी हूँ मैं।
देवा;जब मैंने तुम्हें सही तरह से नहीं लिया था न अब सही बता रहा हूँ।
शालु;एक मुक्का देवा के छाती पे जड़ देती है और दोनों शालु के घर पहुँच जाते है।
शालु;अंदर चलके चाय पी'।
देवा;नहीं मुझे हवेली में कुछ काम है ये कह के देवा शालु को कातिल नज़रों से घूरता हुआ हवेली चला जाता है जहाँ रानी और दिल ही दिल में रुक्मणी भी उसका बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी।
रानी;फिर से देवा का हाथ अपने ब्रैस्ट पे रख के उसे दबाती है जिससे देवा के हाथ में फँसे हुए परी के ब्रैस्ट भी दबने लगते है।
देवा;के लंड में हलचल से होने लगती है मरद खुद को कितना भी कण्ट्रोल रखने के कोशिश कर ले। पर जब सामने वाली खुले आम चूत परोस रही हो तो कौन नहीं बहकना चाहेगा।
रानी;अपना गाल देवा के गाल पे रगडते हुए धीरे धीरे अपनी ब्रैस्ट मसलवाने लगती है।
देवा;मालकिन मालिक मुझे जान से मार देंगे अगर उन्हें पता चला की......
रानी;आहह कुछ नहीं होंगा तुम्हें। जब तक मै हूँ बस तुम आहः
देवा;नहीं नहीं मालकिन ये गलत है और देवा रानी को अपने गोद में से उठाके साइड में बैठा देता है।
रानी को यक़ीन नहीं होता की मछली चारा मुंह में लेने के बाद उगल गई
वो चुप चाप बैठ जाते है और देवा कार हवेली की तरफ दौड़ा देता है।
रास्ते में रानी ज़ोर से चीखती है ।
देवा;घबरा के कार रोक देता है।क्या हुआ मालकिन
रानी; आहह मुझे कोई चीज़ काट रही है आहह माँ लगता है बिच्छु है।
देवा;कहाँ मॉल्किन
रानी;इशारे से अपनी जांघ के पास इशारा करती है।
देवा; हम हवेली चलते है आप को वहां देख लेंगे।
रानी;कैसे इंसान हो तुम मै यहाँ दर्द से मर रही हूँ और तुम मुझे देख भी नहीं रहे मुझे बहुत दर्द हो रहा है आहः
देवा;अपना हाथ रानी के जांघ पे रख के देखने लगता है यहाँ दर्द हो रहा है क्या।
रानी;आहह नहीं ऊपर आहह जल्दी कुछ करो न। माँ.....
देवा;क्या करू क्या करुं
रानी;अरे मेरी शलवार उतार के देखो कही ज़हर न चढ़ जाये मुझे आहः
देवा;नहीं कुछ नहीं होंगा मालकिन आप को। देवा काँपते हाथों से रानी की शलवार का नाड़ा खोल देता है।
रानी;झट से अपनी शलवार नीचे उतार देती है और दोनों पैर खोल देती है आहह देखो ।
देवा;झुक के जांघ के आस पास देखने लगता है यहाँ तो कुछ भी नहीं है मालकिन।
रानी;के पतली ट्रांसपेरेंट पेंटी उसकी चूत से एकदम चिपकी हुई थी जिससे चूत के दोनों लिप्स देवा को साफ़ साफ़ दिखाई दे रहे थे।
देवा;एक नज़र उस पे डाल के बिच्छु देखने लगता है
बिच्छु था नहीं तो दिखता कैसे।
जब कुछ नहीं दिखता तो देवा रानी के चेहरे को देखने लगता है।
देवा;कुछ भी नहीं है।
रानी;सब कुछ तो है तुम देखो तो सब दिखेंगा
और ये कहते हुए परी अपना हाथ पेंटी के अंदर डाल के अपनी चूत को सहलाने लगती है आहह लगता है वो अंदर चला गया देवा आहः
देवा;समझ जाता है की रानी झूठ बोल रही थी वो बिना कुछ कहे कार हवेली की तरफ बढा देता है।
हवेली पहुँच के देवा जल्दी से कार से उतरता है और बिना रानी को कुछ कहे अपने घर की तरफ चला जाता है।
रानी;उसे आवाज़ देती रह जाते है पर देवा कुछ नहीं सुनता।
देवा रानी को ले के परेशान तो बहुत था पर उसके लंड का बुरा हाल था।
ज़रा ज़रा सी बात पे खड़ा हो जाने वाला देवा का लंड आज कितना ज़ुल्म सहके भी चुप था उसने उफ़ तक नहीं किया था। पर जब वो देवा के पेंट में चिल्ला रहा था वो ज़ोर ज़ोर से देवा से कह रहा था मुझे नरम बिस्तर चाहिए जल्द से जल्द।
देवा;जानता था अगर ये जग गया तो उसे सुलाना बहुत मुश्किल हो जायेगा।वो अपने लंड को पेंट में एडजस्ट करता हुआ घर की तरफ जाने लगता है की तभी उसे पदमा का ख्याल आता है और वो पदमा के घर के सामने रुक जाता है।
पदमा घर के आँगन में भैंस को चारा खिला रही थी वो सामने देवा को खड़ा देख एक पल के लिए ठिठक जाती है पर अगले हे पल ग़ुस्सा दिखाते हुए घर के अंदर चली जाती है।
देवा;पदमाँ के घर के अंदर चला जाता है।
उसी वक़्त शालु की बेटी रश्मि अपने सहेली के घर से आ रही थी वो देवा को पदमा के घर में जाता देख हैरत में पड़ जाती है।
रश्मी;सोचने लगती है की ये देवा पदमा काकी के घर करने क्या गया है चलो चल के देखती हूँ और वो दबे पांव पदमा के घर के पीछे बनी खिडकी के पास चुप जाती है।यहाँ से उसे पदमा और देवा दोनों साफ़ साफ़ दिखाई दे रहे थे।
देवा;घर के अंदर जाके दरवाज़ा बंद कर देता है।
पदमा;दरवाज़ा खोल और चला जा यहाँ से । मैं कही थी न तुझसे यहाँ मात आना। क्यों आया है।
देवा;काकी गलती हो गई थी मुझसे । माफ़ी दे दो काकी आइंदा ऐसी गलती नहीं होंगी।
पदमा: मैं कुछ सुनना नहीं चाहती। निकल मेरे घर से वरना मै गांव वालो को बुलाऊँगी।
देवा;को एक तो पेंट में लंड परेशान कर रहा था। ऊपर से पदमा अलग भाव दिखा रही थी। उसके सबर का प्याला टूट जाता है और वो एक ज़ोरदार थप्पड पदमा के मुंह पे जड़ देता है।
पदमा;दूर जाके गिरती है उसे दिन में तारे नज़र आ जाते है।
देवा;कब से देख रहा हूँ तुझे मै। साली बड़ा भाव खा रही है चल उठ वो उसके बाल पकड़ के उसे खड़ा कर देता है।
पदमा के आँखों में आंसू आ जाते है। निकल जा यहाँ से अभी के अभी।
देवा;चला जाऊँगा पहले कुछ खा पी तो लेने दे।
देवा पदमा के दोनों ब्रैस्ट को अपने हाथो में ले के कस कस के मसलने लगता है और पीछे से उसकी गाँड में अपना लंड चुभाने लगता है।
पदमा;आहह छोड दे हरामी आहह नहीं करने दूंगी तुझे मै कुछ भी आहः
देवा;तू सिर्फ बोल रही है पदमा। मै जानता हूँ तेरी चूत क्या चाहती है ।
पदमा;कुछ नहीं चाहती हूँ मै नहीं करने दूंगी मतलब नहीं करने दूंगी आहह्ह्ह।
देवा;पदमा को दिवार से खड़ा कर देता है और उसे पीछे से दबा के खड़ा हो जाता है।फिर वो अपनी पेंट को खोल के नीचे गिरा देता है और साथ में अंडरवियर भी।
पदमा अभी भी नहीं नहीं कर रही थी।
देवा;दोनों हाथों से पदमा के ब्रैस्ट मसलते हुए उसका ब्लाउज एक झटके में फाड़ देता है वो अंदर ब्रा नहीं पहनती थी। दोनों ब्रैस्ट अब सीधे देवा के मज़बूत हाथो में आ जाते है ।
पदमा;के नहीं अब बंद हो चुकी थी वो बस उन्हह आहह करने लगती है।
देवा;उसकी साडी भी खोल देता है और दोनों बिलकुल नंगे हो जाते है।
पदमा;के कमर पीछे की तरफ थी देवा उसमें अपना लंड रगडने लगता है।
पदमा;आहह क्या कर रहा है छोड़ आहः
देवा;बोल अच्छे से देगी या ज़बर्दस्ती करुं।
पदमा;नहीं दूंगी आहह कुछ भी नहीं दूंगी मैं।
देवा;पदमा के बाल पकड़ के अपने लंड पे झुका देता है
खोल मुंह और चूस इसे साली।
पदमा;झट से अपना मुंह खोल के लंड को मुंह में गटक जाती है गलप्प गलप्प।
हलक के अंदर चले जाने की वजह से उसकी साँस घुटने लगती है। देवा अपने लंड को जैसे ही बाहर निकालता है । पदमा झट से उसे फिर से अपने मुँह के अंदर खिंच लेती है। उसे इस सब में बहुत मजा आ रहा था।
पदमा;गलप्प आहह ज़ालिम आग लगा के चला गया था न तो अब नहीं जाने दूंगी । आहह चल चोद ले जितना चोदना चाहता है आहह ।
देवा;पदमा को लिटा के उसके दोनों पैर एक हाथ में पकड़ लेता है और चूत पे लंड रगडता हुआ सट से अंदर पेल देता है।