देवा;को बिस्तर पर लेटे हुए काफी वक़्त हो चुका था मगर उसके दिमाग में एक ही बात घुम रही थी किसी न किसी तरह रुक्मणी को अपना बना लेना ताकि वो उसका काम कर सके।
वो उठ के रुक्मणी के कमरे में चला जाता है
और उसके पास जाके लेट जाता है।
रुक्मणि;की अभी अभी आँख लगी थी।
इधर देवा की गाण्ड भी फटी पडी थी ये सोच सोच के की अगर रुक्मणी ने शोर मचा दी तो वो तो गया काम से।
मगर उसके इरादे बहुत मज़बूत थे। वो किसी भी कीमत पर कामयाब होना चाहता था।
ड़रते ड़रते वो अपना एक हाथ रुक्मणी के चिकने पेट पे रख देता है।
रुक्मणी; धीरे धीरे अपनी ऑखें खोलती है और फिर झट से बंद कर देती है।
देवा;अपने हाथ को रुक्मणी के पेट पे घूमाते हुए उसे ऊपर की तरफ ले जाता है।
रुक्मणी;अब भी नींद में सोने का नाटक कर रही थी।
देवा;की हिम्मत थोडी बंधती है और वो उसका पल्लू उसकी चूचि पर से अलग कर देता है।
रुक्मणी;की बड़े बड़े चूचे थोड़े ज़ोर ज़ोर से ऊपर निचे होने लगते है।
देवा;जान जाता है की रुक्मणी सोने का नाटक कर रही है।
ये जानके उसका हौसल और बढ़ जाता है की रुक्मणी जग जाने के बाद भी चुप है।
उधर रुक्मणी भी धीरे धीरे गरम होने लगती है।
देवा;अचानक ही अपने होंठों से रुक्मणी के कान को चुम लेता है।
रुक्मणी किसी तरह खुद को संभाले हुए थी।
देवा के होंठ अब रुक्मणी की गरदन तक पहुँच चुके थे और एक हाथ हलके हलके रुक्मणी की चूचि को मसलने लगता है।
देवा के लंड को भी उस वक़्त बहुत निंद आ रही थी वो भी मुर्झाया हुआ पड़ा था।
रानी;देवा के छाती को चुमते हुए देवा के लंड को हाथ में ले के हिलाने लगती है।
देवा;उन्हह क्या है रानी जा न मुझे सोने दे।
रानी;अपनी पेंटी भी निकाल के फ़ेंक देती है और देवा के मुँह की तरफ अपनी चूत करके 69 के पोजीशन में आ जाती है।
देवा की ऑखें अभी भी बंद थी मगर वो तब पूरी तरह खुल जाती है जब रानी देवा के अण्डकोष(टेस्टिस) को बरे तरह मसलते हुए उसके लंड को मुँह में ले के चुसने लगती है गलप्प गलप्प......
देवा के लंड में जान आने लगती है और अपने होठो के इतने पास चमकते हुए चूत को देख उसके मुँह में भी पानी आने लगता है वो अपने होंठ रानी की चूत पे लगा देता है और दोनों प्रेमियों के तरह एक दूसरे को चाटने लगते है गलप्प गलप्प..........
देवा;साली तू नहीं सुधरेगी गलप्प गलप्प....
रानी;हाँ नहीं सुधरूंगी मै गलप्प गलप्प....
कुछ देर बाद देवा रानी को कुतिया (डॉगी स्टाइल) में झुका देता है और धीरे से अपने लंड पे थूक लगा के उसे रानी की चिकनी चूत में घुसा देता है।
रानी को बड़ा सुकून मिलता है जब लंड का सुपाडा उसकी चूत के अंदर चला जाता है ।
मगर ये सुकून थोडी देर का था उसकी ऑखें उस वक़्त फटी की फटी रह जाती है जब देवा बिना कुछ बोले अपने लंड का बाकि का हिस्सा एक झटके में अंदर पेल देता है।
देवा; ले साली बहुत आग लगी है ना इसमें आह्ह्ह्ह्ह्ह।
रानी अपने कमर को आगे की तरफ खीचने लगती है मगर देवा दोनों हाथों से उसकी कमर को पकड़ के सटा सट अपना लंड उसकी चूत के अंदर तक घूसाने लगता है।
देवा;आहह तूने सोये हुए कामदेव को जगा के बहुत बडी गलती कर दी आहह्हह्हह्हह्हह।
रानी;आहह चोद मुझे देवा । आहह ऐसे चोदने के लिए तो जगाई हूँ तुझे मैं।
रानी अपने चरम सीमा पे पहुँच चुकी थी। किसी भी वक़्त उसकी चूत पानी की एक धार देवा के लंड पे छोड सकती थी मगर उसे उस वक़्त झटका लगता है जब देवा ठीक वक़्त पे अपने लंड को बाहर खीच के चुदाई बंद कर देता है।
रानी;आहह देवा क्या कर रहा है चोद न रुक क्यों गया। बाहर क्यों निकाल लिया रे।चोद न मै मर जाऊँगी आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्।
देवा;नहीं चोदूँगा ।
रानी: मैं तेरे हाथ जोडती हूँ पांव पडती हूँ ऐसा ज़ुलम मत कर । दो तीन धक्के मार दे बस आहह रहम खा मुझपे आह्ह्ह्ह्ह् प्लीज्जज्जज्जज्जज्ज देवाआआआआ।
देवा;पहले बता तू मेरे बापू के बारे में क्या जानती है।
रानी;मुझे नहीं पता कुछ भी आह्ह्ह्ह्ह्हहह चोद रे चोद ना ।
देवा;बोल मेरे बापू इस हवेली में काम करते थे और एक दिन अचानक वो ग़ायब हो गये बोल क्या पता है तुझे इस बारे में।
रानी;मुझे नहीं पता सच में नहीं पता माँ जानती होगी। तुझे कितने दिनों से कह रही हूँ माँ को पटा ले। एक बार वो तेरे मुठी में आ गई तो सब कुछ बोल देगी जो तू जानना चाहता है और हमारे सम्बन्ध के बारे में भी किसी को कुछ नहीं बोलेगी।
देवा;तेरी माँ को सब पता होगा।
रानी; हाँ सब पता होगा बापू माँ से कुछ नहीं छुपाते सच कह रही हूँ मै । अब तो डाल दे अंदर आह्ह्ह्ह्ह्ह।
देवा के घर का रास्ता पदमा के घर के सामने से होकर गुज़रता था।
अपनी धुन में देवा को जाता देख पदमा उसे आवाज़ दे देती है।
पदमा; क्यूँ रे मुये।
कहाँ रहने लगा है आज कल दिखाई भी नहीं देता । कही उस वैध की बहु के टाँगों के बीच तो पड़ा नहीं रहने लगा है तु।
देवा का मूड पहले से बहुत ख़राब था हर तरफ से उसे नाकामी ही मिल रही थी ऊपर से पदमा के ताने उसे बर्दाश्त नहीं होते और वो पदमा को धक्का दे के दिवाल से सटा देता है।
साली दो तीन दिन तुझे नहीं किया तो मुझे ताने देने लग गई।
पदमा;उन्हहहहहहहह मुझे तेरी कोई ज़रुरत नहीं है।
ये जो तेरे बच्चा मेरे पेट में पल रहा है ना इसे अपने बापू की याद आ रही थी । मुझे बोला माँ माँ बापू कहाँ है कब आयेंगे।
अब जब बच्चा दिया है तो इसका पालन पोषण भी तुझे करना पड़ेगा । रोज़ रोज़ मुझे करेगा तभी तो हट्टा कटा गबरू तेरे जैसा बच्चा जनूँगी मै।
देवा को पदमाँ की बात पे हंसी आ जाती है और वो पदमा के होंठ चूम लेता है।
बस थोड़ा काम बढ़ गया है इसलिए नहीं आ रहा हूँ तेरे पास।
पदमा; काम काम बस काम करते रह तू तो थकता नही है क्या।
देवा;अरे हाँ काम से याद आया तू भी तो हवेली में काम करती है । तुझे पता होगा न मेरे बापू के बारे में वो कैसे ग़ायब हो गये।
पदमा: मैं तो वहां बस बर्तन और कपडे धोने जाती हूँ अंदर क्या होता है मुझे नहीं पता वैसे भी हिम्मत राव बड़ा कमीना इंसान है।
मुझे तो बहुत डर लगता है उससे।
तू भी दूर रहा कर देवा उस कमिने से।
देवा;डर तो उसे लगेगा अब मुझसे।
मै चलता हूँ रात में आऊँगा।
पदमा;रुक ज़रा।
पदमा अपने होने वाले बच्चे के बाप को एक बार और अपने होठो की सलामी देती है और फिर उसे जाने देती है।
देवा;जब घर पहुँचता है तो रत्ना उसे ऑगन में झाड़ू मारते मिलती है।
रत्ना;अरे देवा आ गया तू रुक थोडी देर अभी तुझे नाश्ता दे देती हूँ।
देवा;नहीं माँ मै नाश्ता करके आया हूँ।
ये कह के देवा अपने कमरे की तरफ बढ़ जाता है।
वो अपने कमरे के सामने से गुज़र ही रहा था की उसे ममता के कमरे से खुसुर पुसुर की आवाज़ सुनाई देती है।
वो दरवाज़े के झिरी में से झाक के देखता है और उसकी ऑखें अंदर का नज़ारा देख के फटी की फटी रह जाती है।
अंदर ममता और नूतन बिलकुल नंगी एक दूसरे से चिपके मुँह में मुँह डाले एक दूसरे की चूत पे चूत रगड रही थी।
देवा;को यकिन नहीं होता उसकी बहन ऐसा भी कर सकती है और वो अपने कमरे में चला जाता है।
और थोडी देर बाद जब बाहर आता है तो रत्ना अब भी झाड़ू लगा रही थी मगर अब उसकी साडी का पल्लू उसके कमर में ठुंसा हुआ था वो झुक के झाड़ू लगा रही थी जिससे उसके मोटे मोटे ख़रबूज़े आगे की तरफ झुके हुए थे।
देवा;माँ मै खेत में जा रहा हूँ।
रत्ना;उसी हालत में देवा से बातें करने लगती है।
आरे दूध पीके जा ना।
देवा;तुमने गाय का दूध निकाल लिया क्या।
रटीना;नहीं तू निचोड के निकाल ले जल्दी देती है वो तेरे हाथ से।
देवा; सोच में पड़ जाता है।
इससे पहले रत्ना ने कभी देवा से ऐसी बातें नहीं की थी।
रत्ना;अरे खड़ा क्या है चल जल्दी कर निचोड के निकाल ले जितना चाहिए तुझे।
देवा;मुझे देर हो रही है माँ मै चलता हूँ और देवा अपने सर को खुजाता हुआ खेत में चला जाता है।
आज उसके साथ वो हो रहा था जो इससे पहले कभी नहीं हुआ था।