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हाय रे ज़ालिम.......complete

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उधर हिम्मत राव पिछले कई दिन से अपनी रखेल बिंदिया के घर पड़ा हुआ था। ये सोच के की रानी ने अब तक अपना काम कर लिया होगा।

आज हिम्मत राव वापस अपने घर आने वाला था।

वो और बिंदिया रात भर से जगे हुए थे हिम्मत राव से ज़्यादा चुदकड़ और चालाक बिंदिया थी। वो हिम्मत राव की दौलत से प्यार करती थी।

हिम्मत राव;अपनी रखेल बिंदिया के साथ बाथरूम में था और हिम्मत राव का लंड बिंदिया की चूत में नहीं बल्कि गाण्ड में धँसा हुआ था।

बिंदिया को चूत से ज़्यादा गाण्ड में लंड लेने का शौक था।

हिम्मत राव: आहह साली बहुत प्यारी है तू बोल तुझे आज क्या चाहिए मुझसे । आज आहह मै बहुत खुश हूँ।

बिंदिया; उन्हह जो माँगूँगी वो देना पड़ेगा आपको आज ही।

हिम्मत राव ;हाँ मेरी जान दूंगा न। बोल क्या चाहिए तुझे।

बिंदिया ;उन्हह मुझे भी अपने साथ हवेली ले चलिये।

हिम्मत राव ;आहह तू क्या करेगी वहां और मै क्या बोलूँगा सबसे।

बिंदिया;बोल देना की मै आपके दोस्त की पत्नी हूँ और आपके दोस्त किसी जरूरी काम से दूसरे मूल्क गए हुए है।

हिम्मत;मगर बिंदिया।

बिंदिया ;अगर मगर कुछ नहीं बस मुझे आप वहां ले के चलिये। फिर देखो हमारे बीच के हर कांटे को मै कैसे साफ़ कर देती हूँ । न रहेंगी रानी और न रहेगी आपकी वो पत्नी रुक्मणी।

हिम्मत राव को समझते देर नहीं लगती। बिंदिया के वहां चलने में हिम्मत का ही फायदा था। वो ज़ोर का झटका बिंदिया के गाण्ड में मार देता है। ये इस बात की मोहर थी की बिंदिया भी आज शाम हिम्मत राव के साथ हवेली जाने वाली है।
 
अपडेट 50

हिम्मत राव की तरफ से इजाज़त मिलने से बिंदिया की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था उसे अपनी मंज़िल क़रीब दिखाई देने लगी थी। जिस मक़सद से उसने हिम्मत को अपनी चूत के जाल में फंसाई थी वो मक़सद जल्द पूरा होने वाला था।

एक साथ नहाने के बाद दोनों हिम्मत राव और बिंदिया हवेली की तरफ चल देते है।

बिंदिया ने लाल कलर की सिल्क की साडी पहनी हुई थी पीछे से ब्लाउज बहुत लो कट था। बड़े बड़े ब्रैस्ट बाहर की तरफ लटके हुए थे।

अपने दोनों ब्रैस्ट की नुमाईश करते हुए बिंदिया हँस हँस के हिम्मत से बाते कर रही थी और हिम्मत राव कार चलाने से ज़्यादा बिंदिया की तरफ देख रहा था।

उधर खेत में देवा अपने काम में लगा हुआ था काम में उसका मन नहीं लग रहा था। रात की बात उसे ज़्यादा याद आ रही थी।

अपनी भाभी कौशल्या की चिकनी चूत और नूतन का वो छोटा सा सुराख़ जिस में ठूँस ठूँस के उसने रात भर बेचारी की जम के चुदाई किया था।

जब भी नूतन की चूत का ख्याल देवा को आता उसका लंड सलामी देने लगता । लुंगी में होने के कारण देवा का लंड फूल गया था वो बार बार अपने लंड को जांघों में दबा दबा के काम करने लगता।

खेत में के मज़दूरों को खाना खाने की छूट्टी देके वो कुंवे के मुंडेर पर बैठ जाता है। उसे भी भूख लगी थी घर से निकलते वक़्त उसने रत्ना से कहा भी था की उसका खाना खेत में ही भिजवा देना । मगर रत्ना अभी तक खाना ले के नहीं आई थी।

बार बार देवा की नज़रें रास्ते की तरफ जाने लगती है की तभी उसे दूर से ममता आते दिखाई देती है।

जब ममता क़रीब पहुँचती है तो देवा उसे देखता ही रह जाता है।

उसने शायद नूतन की सलवार कमीज पहनी थी।

नुतन ममता से थोडी दुबली थी जिसकी वजह से उसके कपडे ममता को बहुत टाइट फिट बैठे थे।

सलवार इतनी फिट थी की ममता के मोटे मोटे दोनों कमर साफ़ पीछे की तरफ उभरे दिखाई दे रही थी ब्रैस्ट की साइज और गोलाइयां देवा ठीक ठीक बता सकता था । अपने चेहरे पे मुस्कान लिए ममता देवा को अपना हुस्न दिखा रही थी।

ममता; अब देखते ही रहोगे या फिर कुछ करोगे भी भइया।

देवा;क्या।

ममता; मेरा मतलब है भूख नहीं लगी क्या। चलो खाना खा लो।

देवा;माँ नहीं आई।

ममता;माँ को घर में बहुत काम है मैंने सोचा मै ही तुम्हें दे आती हूँ खाना।

देवा;जल्दी से दे दे मेरी बहना।

ममता; मैं तो कब से देने के लिए तैयार हूँ भाई आप ही नहीं लेते।
 
देवा;मुस्कुराता हुआ ममता की तरफ बढ़ता है और उसके हाथ में से खाने की टोकरी लेके अचानक से ममता के लाल गुलाबी गालों को चूम लेता है।

ममता के जिस्म में बिजली सी दौड जाती है।

उन्हह क्या करते हो भइया।

देवा;आज मेरी बहना बहुत प्यारी लग रही है।

क्या एक भाई अपने बहन को प्यार भी नहीं कर सकता।।

ममता धीमी आवाज़ में देवा से कहती है की

भाई तो जो चाहे वो कर सकता है।

खास कर आप देवा भाई मैंने कब रोकी हूँ।

देवा;अपनी बहन को कस के अपने चौड़े छाती से चिपका लेता है।

दोनो बड़े बड़े कठोर ब्रैस्ट देवा की छाती में दबते चले जाते है।

ममता; उन्हह दबी दबी सी आवाज़ ममता के हलक से निकल जाती है अपनी जवानी के आग में जलती ममता के चूत अब उसका साथ बहुत कम देने लगी थी । सुबह जब से उसने अपनी बहन नूतन की चीरी हुई कटी हुई चूत देखी थी। तब से उसकी चूत का कतरा कतरा पानी गिर रहा था और उसके पेंटी को गीला कर रहा था । आज वो अपनी चूत की आग बुझाने के मक़सद से ही देवा के पास आई थी मगर शायद देवा कुछ और चाहता था वो एक बार फिर से अपनी बहन ममता के गाल मगर थोड़ा होठो के क़रीब चूम लेता है।

इस बार ममता के होठो का कुछ हिस्सा भी देवा चूम लेता है और निचे बैठ जाता है।

ममता खाना लगा देती है और देवा के पास ही बैठ जाती है।

देवा;तूने खाना खाया।

ममता;हाँ खा ली।

देवा;आज तो बहुत भूख लगी है मुझे।

ममता;मुझे भी।

देवा;क्या।

ममत की नज़रें देवा के जिस्म को घुरने लगती है जब उसकी नज़रें उस हिस्से पे पहुँचते है जो ममता के लिए सबसे खास था तो वो हैरान रह जाती है।

देवा की लुंगी में उभार साफ़ दिखाई दे रहा था।

ममता के मुँह से अचानक ही निकल जाता है।

हाय दैया।

देवा; क्या हुआ ममता।

ममता ; मुँह पर दुपट्टा रख के अपनी हंसी छुपा लेती है।

कुछ नहीं आप खाना खाओ।

देवा;खाना खाने लग जाता है।

ममता;भाई रात में आप कहाँ थे।

देवा;चौंक के ममता की तरफ देखता है।

मै मै वो मै अपने कमरे में था और कहाँ होऊँगा............. क्यु।

ममता;नहीं रात में मै पानी पीने उठी थी आपके कमरे में भी पानी रखने चली गई तो आप वहां नहीं थे।

देवा;नहीं नहीं शायद मै शौचालय(टॉयलेट) में गया होऊंगा।

ममता; अच्छा हाआआ हो सकता है।
 
देवा की पेशानी पे पसीना देख ममता दिल ही दिल में हंसने लगती है । वो जानती थी देवा रात में कहाँ था और किसके साथ था। उसे भी अफ़सोस इस बात का था की वो वहां नहीं थी।

ममता; भाई रक्षा बंधन आ रहा है आप मुझे क्या देने वाले हो।

देवा;क्या चाहिए तुझे।

ममता;वो जो आज तक आपने मुझे कभी नहीं दिया।

देवा;गौर से ममता की तरफ देखने लगता है।

तू लेगी जो मै दूंगा तुझे।

ममता;बड़े प्यार से भला आपकी दी हुई कोई भी चीज़ मेरे लिए अनमोल होंगी और रक्षाबन्धन के दिन तो आप मुझे प्यार से दोगे ना। मै भी बड़े प्यार से लुंगी।

देवा;सोच ले कही तुझे पसंद नहीं आया तो।

ममता; ऐसा हो ही नहीं सकता।

वैसे क्या देने वाले हो।

देवा;वो मै तुझे उसी दिन दूंगा। जब तू बांधेंगी।

ममता; क्या।

देवा; राखी।

ममता; हाँ बांधूंगी ना।

दोनों अपने अपने जज़्बात एक दूसरे से खुल के नहीं मगर लिपे पुते शब्दो में कह चुके थे।

ममता जान चुकी थी की देवा उसे बहुत ही खास तोहफ़ा देने वाला है राखी के दिन और देवा ने क्या सोचा था ये तो सिर्फ देवा ही बेहतर जानता था।

देवा; अच्छा अब तू जा मै थोड़ा काम निपटा के घर आ जाऊँगा।

ममता;बर्तन और बाकि के चीज़ें उठाके घर की तरफ चल देती है उसकी कमर इस अदा में मटक रही थी की देवा अपने लंड को सहलाये बिना नहीं रह पाता।

देवा;दिल ही दिल में सोचने लगता है।

अगर ये मेरी सगी बहन नहीं होती तो अभी के अभी इसे चोद देता.....

शालु;अपने घर में बैठी सब्ज़ि काट रही थी रश्मि के चले जाने से घर बहुत सूना सूना सा लगने लगा था। नीलम तो घर में रहते हुए भी नहीं है ऐसे लगती थी। बहुत कम बात करने की उसकी आदत की वजह से।

पप्पू;शालु के सामने बैठा हुआ था और नीलम शालु के पीठ के पीछे बैठी रोटिया बना रही थी।

शालु ने साडी पहन रखी थी। पूरे गांव में रत्ना और शालु के ब्रैस्ट के जैसे बड़े बड़े ब्रैस्ट किसी औरत के नहीं थे। बड़े होने के साथ साथ एकदम सुडौल भी थे और जब भी वो साडी पहनती थी ब्लाउज को फाड़ के बाहर निकलने को बेताब रहते थे शालु के दोनों ब्रेस्ट।

पप्पू;की हरामि नज़र अपनी माँ की दोनों ब्रैस्ट पर ही थी।
 
माँ रश्मि के चले जाने से घर कितना सूना सूना लग रहा है ना।

शालु;नज़रें उठाके पप्पू की तरफ देखती है।

और उसे अपने दोनों ब्रैस्ट को घूरता देख थोडा हड़बड़ा जाती है।

उसकी नजरे झुक जाती है।

हाँ सूना सूना तो हो गया है।

कोई बात नहीं तेरी दुल्हन आ जाएंगी न फिर तुझे ऐसा नहीं लगेंगा।

पप्पू;माँ तुम भी न । वो माँ की बात पे शरमाता हुआ नीचे बैठ जाता है और अपना सर शालु की गोद में डाल देता है । शालु पलक बंद करके बैठी हुई थी जिसकी वजह से पप्पू के मुँह के सामने शालु के दोनों ब्रैस्ट लटकने लगते है।

शालु;अपने बेटे के सर पर हाथ फेरते हुए फिर से सब्ज़ि काटने लगती है।

मगर इस बार शालु के दिल की धड़कने थोड़े बढी हुई थी।

क्यूंकि पप्पू की गरम साँसे शालु अपने ब्रैस्ट पर महसूस कर रही थी।

पिछले कई महिनो से उसकी चूत चूदी नहीं थी। देवा को भी मना कर चुकी थी और उसका पति बस गाण्ड मरवाने भर के लायक रह गया था । ऐसे में चूत की आग दिन ब दिन सुलगती ही जा रही थी ऐसे में पप्पू के इस तरह उसे घूरना आग में घी का काम कर रहा था।

पप्पू;अपने चेहरे पर शालु की साडी का पल्लू ले लेता है

और अपनी ज़ुबान बाहर निकाल के हलके से शालु की ब्रैस्ट पर फेरता है।

ब्लॉउस के ऊपर से ही उसे ऐसे महसूस हो रहा था जैसे वो सच में ब्रैस्ट पर ज़ुबान फेर रहा हो।

शालु; काँप जाती है।

उसे अजीब ही लग रहा था। पहली बार पप्पू ने ऐसी कोई हरकत किया था मगर उसे पप्पू के इस हरकत पर ग़ुस्सा नहीं आ रहा था । वो अपने काम में लगी रहती है।

ये देख पप्पू की हिम्मत और बढ़ जातती है और वो पूरी ज़ुबान बाहर निकाल के शालु के ब्रैस्ट पर फेर देता है।

शालु;उन्हह करके रह जाती है।

पप्पू अपनी माँ के गोद में ऐसे सोया हुआ था जैसे कोई बच्चा दूध पीते वक़्त माँ की गोद में सोता है।

पप्पू की हिम्मत और बढ़ने लगती है और इस बार वो पूरा मुँह खोल के शालु के निप्पल को मुँह में पकड़ लेता है।

एक हलकी सी सिसकी शालु के मुँह से निकलती है और उसका एक हाथ पप्पू के सर पर चला जाता है।

जैसे कोई माँ अपने बच्चे को दूध पिलाते हुए सर सहलाती है।

पप्पू;अब्ब पूरी तरह समझ गया था की शालु भी क्या चाहती है वो.....

अपनी गरदन थोड़े नीचे करके शालु के चिकने पेट को चूम लेता है । दूध की तरह सफेद और मखमल की तरह नरम मुलायम शालु के पेट को चुमते ही पप्पू का छोटा सा लंड पहला सलामी देता है।

शालु;मज़बूती से पप्पू का सर पकड़ लेती है।

वो सब्ज़ि काटना बंद कर देती है । उसकी ऑखें बंद हो जाती है।

पप्पू;मौके का फायदा उठाते हुए एक ऊँगली से शालु की ब्लाउज को ऊपर की तरफ सरकाने लगता है मगर ब्लाउज बहुत टाइट था वो अपने जगह से हिलता भी नही।

दो चार कोशिशो के बाद भी पप्पू नाकाम ही रहता है।

वो ज़ोर से अपनी माँ के निप्पल को काट लेता है।

शालु;आहह माँ।

नीलम;क्या हुआ माँ।
 
शालु;उन्हह नहीं कुछ नहीं चाकू चुभते चुभते बच गया।

नीलम;संभाल के माँ।

पप्पू;फिर से शालु का निप्पल ब्लाउज के ऊपर से मुँह में ले लेता है।

शालु;अपने बेटे पर तरस खाते हुए थोड़ा सा झुकती है। जिसकी वजह से उसके दोनों ब्रैस्ट और नीचे की तरफ लटकने लगते है और ब्लाउज की पकड़ थोडी ढीली पड़ जाती है।

पप्पू;जल्दी से एक तरफ के ब्लाउज को थोड़ा ऊपर चढ़ा देता है और वैसे ही बिना ब्रा वाली खूबसूरत मुलायम ब्रैस्ट पप्पू के मुँह के सामने आ जाती है।

नीलम को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।

शालु;भी हैरान थी की वो क्या कर रही है पप्पू की छोटी से छोटी गलती पर उसकी पिटाई कर देने वाली शालु को उसकी चूत ने इतना बेबस कर दी थी की वो खुद अपने बेटे के मुँह में अपना निप्पल देने को तैयार हो गई थी।

पप्पू;लपक के निप्पल को मुँह में भर लेता है और भूखे बच्चे की तरह शालू के ब्रैस्ट में से दूध निकालने की कोशिश करने लगता है।

गलप्प गलप्प गलपप।

शालू;उन्हह उन्हह आहह दबी दबी आवाज़ में सिसकने लगती है उसकी आवाज़ नीलम के कानो तक नहीं जा रही थी मगर पप्पू आसानी से सुन सकता था की शालु कितनी गरम हो चुकी है।

लगभग १० मिनट तक पप्पू शालु के ब्रैस्ट और निप्पल को चूसते रहा और अचानक ही शालु की पकड़ पप्पू के सर पर और मज़बूत हो जाती है वो चार पांच झटके लेती है और पप्पू के सर पर से हाथ हटा देती है।

पप्पू;अब्ब भी निप्पल मुँह में लिए हुए था।

शालु;उसके मुँह में से निप्पल को निकाल लेती है और अपना ब्लाउज ठीक करके खड़ी हो जाती है।

वो जल्दी से सब्ज़ि की टोकरी एक तरफ रख के बाथरूम की तरफ लपकती है।

पप्पू;अपनी माँ के कमर को पीछे से देखता है शालु की कमर पर बड़ा सा गीला गीला पानी का निशान बना हुआ था।

पप्पू दिल ही दिल में मुस्कुरा देता है और घर के बाहर निकल जाता है।

रास्ते में उसकी मुलाकात देवा से होती है।

और दोनों बातें करते हुए देवा के घर की तरफ चलने लगते है।

इधर हिम्मत और बिंदिया हवेली पहुँच चुके थे।

अपने बापु को कई दिनों बाद देख जहाँ रानी का ख़ुशी का ठिकाना नहीं था। वही बिंदिया को देख दिल में कुछ उलझन भी थी। वैसे ही सवाल रुक्मणी के दिल में भी उठने लगे थे। जब उन दोनों ने हवेली के बाहर हिम्मत राव के साथ बिंदिया को भी कार से उतरते हुए देखते है।
 
ढेर सारे कमेंट के लिए सभी को थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अपडेट भी प्रतिदिन देने की मैं कोशिश करूँगा।कहानी आपलोगों को कैसी लगी ।अपने विचार अवश्य दें।thanks
 
अपडेट 51

देवा और पप्पू दोनों देवा के घर की तरफ चल पडते है।

देवा;क्या बात है बेटा बहुत कलियाँ खिल रही है तेरी। बात क्या है।

पप्पू; बात ही कुछ ऐसी है भाई।

देवा;अब बोल भी दे तेरे पेट में तो कोई बात ज़्यादा देर तक रुकती नहीं चल बता । क्या बात है।

पप्पू;भाई आज न कमाल हो गया।

देवा;क्या।

पप्पू;पहले यहाँ बैठो।

पप्पू देवा का हाथ पकड़ के एक नीम के पेड़ के निचे बैठा देता है।

वो न आज मै माँ के गोद में सोया हुआ था।

पप्पू धीरे धीरे करके देवा को सारी बात बता देता है

देवा;बड़े गौर से पप्पू की बात सुन रहा था और पप्पू के हर शब्द पर देवा के लंड की नसे मोटी होते जा रही थी।

आखीर शालु को तो देवा भी कितने दिनों से पेलना चाहता था मगर जब से शालु ने उसे धमकाई थी उस दिन से देवा की गाण्ड फटी पड़ी थी मगर आज जब पप्पू उसे बड़े चाव से अपने और शालु की बात सुना रहा था तो देवा को भी महसूस होने लगता है की शायद कुछ बात बन जाए।

पप्पू;भाई डर भी बहुत लग रहा है और दिल भी और कुछ करने को उछल रहा है।

बालो न भाई मै क्या करूँ।

देवा;अब्बे डर मत बस धीरे धीरे तेरी माँ के और क़रीब होता जा । तू देख कुछ ही दिनों में वो खुद अपना लंहगा उतार के तेरे पास चलि आएगी।

पप्पू;सच भाई मगर मुझे माँ से डर बहुत लगता है कही उसने मेरी पिटाई कर दी तो.....

देवा;नहीं करेगी बस तू थोड़ा धीरज रख के काम लेना।

जल्दबाज़ी में काम बिगड सकता है उसके बाद तो हर रात अपनी माँ को पेल सकता है अपने इस छोटे से लूल्ली से।

ये कहते हुए देवा अपने हाथ में पप्पू की लूल्ली पकड़ लेता है।

पप्पू;आहह आहह क्या करते हो कही भी शुरू हो जाते हो भाई तुम तो...

देवा;एक बार और पप्पू के लूल्ली मरोड़ के देवा खड़ा हो जाता है।

चल अब चलते है माँ रास्ता देख रही होगी।

पप्पू;तुम जाओ मै घर जा रहा हूँ।

देवा;ठीक है।

और दोनों अपने अपने घर चले जाते है।
 
देवा;दिल ही दिल में सोच रहा था की साली शालु कितनी छिनाल है मैंने हाथ लगाया तो मुझे धमकी दे रही थी और खुद के बेटे को लाइन दे रही है।

कोई बात नहीं आखिर पप्पू की असलियत तो सिर्फ मै जानता हूँ और जिस दिन शालु को पता चलेगी उस दिन क्या होगा।

वह मुस्कुरा देता है और घर में दाखिल हो जाता है।

रत्ना;आँगन में बैठी भैंस का दूध दुह रही थी।

उसकी साडी जांघो तक चढ़ चुकी थी और भैंस से ज़्यादा बडी बडी उसकी चूचियां सामने की तरफ लटकी हुई थी।

अपनी माँ को इस रूप में देवा ने कई बार देखा था मगर आज पप्पू की बाते सुनने के बाद उसका दिल अपनी माँ को गौर से देखने को कर रहा था।

रत्ना निचे से ऊपर तक कसी हुए औरत थी।

बडे बड़े मोटी मोटी कमर पेट एकदम चिकना मोटे भरे हुए ब्रैस्ट और उस पर सबसे ज़्यादा दिल छू लेने वाले उसके होंठ जो हर दम रस से भरे हुए रहते थे। देवा के बापु की मौत के बाद से किसी ने भी उन्हें पिया नहीं था।

रत्ना को महसूस होता है की कोई उसके पीछे खड़ा है।

वो गरदन घुमा के पीछे की तरफ देखती है।

अरे बेटा आ गया तु।

देवा;हाँ माँ अभी आया हूँ क्या हुआ भैंस दूध नहीं दे रही क्या।

बडी देर से तुम इसकी थन सहला रही हो।

रत्ना;हाँ रे देख न आज कल तो बस सहलाना ही ज़्यादा पडता है।

देवा;रुक जाओ मै सहला देता हूँ।

भैंस का दूध निकालने से पहले उसके थन को तेल से मालिश करना पडता है।

देवा;अपनी माँ के पीछे बैठ जाता है और रत्ना थोड़े आगे की तरफ खिसक जाती है।

रत्ना के हाथ भैंस के थन पर थे। दोनों हाथ तेल से भिगे हुए थे। देवा अपने हाथ पर भी तेल लगा के थनो की मालिश करने लगता है।

पीछे से देवा का लंड शायद रत्ना की गाण्ड के दरार में चूभ रहा था इसलिए वो बार बार आगे की तरफ सरकने लगती है।

देवा;अपने हाथों को रत्ना के हाथों पर रख देता है और उसे थन पे दबाने लगता है।

देखो माँ ऐसे कस के मालिश करने से जल्दी दूध निकलता है।

रत्ना को ऐसे महसूस हो रहा था जैसे देवा तेल लगा के उसकी चूचियों की मालिश कर रहा है।

हाँ रे तू तो बड़ा अच्छा मालिश करता है मुझे तो आती भी नही।

देवा: मैं हूँ न माँ मेरे होते हुए तुम्हें चिंता करने की कोई ज़रूरत नही।

रत्ना;तेरा ही तो सहारा है बेटा। बस तेरे लिए तो जिए जा रही हूँ मैं।

देवा का लंड पूरे तरह खड़ा हो चुका था और धोती में से उसका नोक सीधा रत्ना के गाण्ड की दरार में चुभने लगता है।

रत्ना;आहह ।

देवा;क्या हुआ माँ

रत्ना;कुछ नहीं शह्ह्ह्ह्ह।

उसकी सिसकारियां बता रही थी की उसे कुछ हो रहा है इससे पहले की देवा और कोई हरकत करता देवकी मामी वहां आ जाती है।
 
देवकी;अरे देवा किसका दूध निकाल रहा है।

दोनो माँ बेटे चौंक के देवकी की तरफ देखते है।

रत्ना;खड़ी हो जाती है और अंदर चली जाती है।

देवकी और रत्ना का मज़ाक का रिश्ता था। दोनों एक दूसरे से मज़ाक भी बहुत करती थी मगर अकेले में। आज देवकी ने ऐसी बात कह दी थी की दोनों माँ बेटे शर्मा गए थे।

देवा;खड़ा हो जाता है और देवकी के पास आ जाता है

अभी तो भैंस का दूध निकाल रहा था रात में आपका निकालूँगा मामी।

देवकी;हलकी सी चपत देवा के गाल पे मारती है।

जितना दूध निकालना है आज रात निकाल ले क्यूंकि कल हम जा रहे हैं अपने गाँव।

देवा;इतनी जल्दी अभी अभी तो तुम सब आये हो।

देवकी;अरे तेरी मामा का न दिल घर में लगता है और वहां भी तो देखना पड़ेंगा न रामु खेत खलियान सब नौकरों के भरोसे छोड़ के आया है।

देवा का चेहरा उतर जाता है।

देवकी;अरे मेरा राजा बेटा तू चिंता क्यों करता है।

तेरा दिल बेहलाने के लिए कौशल्या को कुछ दिन यहां छोड के जा रही हूँ।

देवा के चेहरे पर कौशल्या का नाम सुन के चमक आ जाती है और वो देवकी के गले लग के दोनों हाथों से ज़ोर से देवकी की कमर को दबाके अलग हो जाता है।

देवकी;बेशर्म कही का चल हाथ मु धो ले।

रात का खाना खाने के बाद सभी ऑगन में बैठे बातें कर रहे थे। सिर्फ नूतन अपने कमरे में लेटी हुई थी देवा उठके अंदर चला जाता है।

नुतन बिस्तर पर बेसुध सोई हुई थी। उसका चेहरा चाँदनी की तरह चमक रहा था। देवा उसके पास जाके बैठ जाता है और झुक के उसके होठो पर अपने होंठ रख देता है।

नुतन उन्हह करके कसमसाके उठ जाती है।

क्या है सोने दो ना भइया।

देवा;इधर उधर देखता है अभी भी बाहर से सभी के हंसने बोलने की आवाज़ सुनाई दे रही थी। देवा जल्दी से अपनी धोती को निचे गिरा के अपना लंड हाथ में पकड़ लेता है । नूतन की चिकनी चूत की खुशबु सूँघते हुए तो वो यहाँ आया था।

नुतन अब भी ऑखें बंद किये सोई हुए थी । अचानक उसे अपने होठो पर कुछ गरम गरम महसूस होता है वो थोड़े से ऑखें खोल के देखती है और फिर दूबारा बंद कर देती है।

देवा;अपना लंड पकड़ के नूतन के होठो पर फेरने लगता है।

नुतन की चूत चीर ज़रूर गई थी । उसे देवा के लंड की मार से बुखार भी आ गया था मगर चुदाई के ललक उसके दिल में शोर मचा रही थी।

कुछ देर बाद नूतन अपना थोड़ा सा मुँह खोल देती है।

देवा लंड को एक झटका देता है और नूतन का पूरा मुँह खुल जाता है और देखते ही देखते लंड आधे से भी ज़्यादा अंदर चला जाता है।
 
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