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हाय रे ज़ालिम.......complete

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ममता की चीख़ रत्ना के कान तक पहुँच जाती है और वो जग जाती है ममता को अपने पास ना पा के वो उठके देवा के रूम में चली जाती है और सामने का नज़ारा देख उसके पांव तले की ज़मीन खिसक जाती है।

रत्ना; चीखते हुए।

हमारखोरों।

क्या कर रहे हो तुम दोनो।

देवा;और ममता चौंकते हुए उठ के बैठ जाते है।

देवा का लंड ममता की चूत से आवाज़ के साथ बाहर निकल जाता है।

रत्ना;पास में पड़ी हुई लकड़ी ले के दोनों की पिटाई शुरू कर देती है।

कुते कमिने हरामज़ादे अपनी बहन के साथ ये सब करते तुझे ज़रा भी शर्म नहीं आती।

देवा;और ममता की पीठ पर हर जगह रत्ना लकड़ी से मारना शुरू कर देती है।

देवा रत्ना का हाथ नहीं पकडता मगर ममता देवा को बचाने के चक्कर में खुद भी पिटती चली जाती है।

रत्ना;देवा के पास आती है और उसके बाल खीच के सटा सट सटा सट थप्पड की बौछार उसके मुँह पर कर देती है। पास में बैठी ममता भी ज़्यादा देर बच नहीं पाती और रत्ना ममता का मुँह भी लाल कर देती है।

रत्ना;कपडे पहनो तुम दोनों हरामखोरों।

देवा;अपने कपडे पहनता है और रत्ना उसे मारते मारते घर के बाहर ले आते है।

निकल जा मेरे घर से कुत्ते और आज के बाद तेरे शक्ल भी मुझे मत दिखाना समझा।

ममता; ऐसे मत करो न माँ।

वो रोने लगती है।

रत्ना;तुझे भी जाना है तो तू भी निकल जा कुतिया।

रत्ना एक ज़ोर से लकड़ी ममता के पैर पर मारती है और ममता वही रोते रोते बैठ जाती है।

देवा;अपने घर रत्ना और ममता को देखता हुआ घर से बाहर निकल जाता है।

रत्ना;ज़ोर से चीखते हुए उससे कहती है वापस मत आना कुत्ते।

रत्ना पलट के ममता के बाल खीचते हुए उसके मुँह पर चपत मारते हुए उसे घसिटते हुए घर के अंदर ले जाती है।
 
अपडेट 62

रत्ना;ममता के बाल खीचते हुए घर के अंदर ले आती है।

बोल कब से चल रहा है ये सब। बोल कुतिया बोल।

ओ मुँह से भी बोल रही थी और हाथों का भी इस्तेमाल कर रही थी।

ममता थी की रोये जा रही थी उसे अपनी माँ की पिटाई से रोना नहीं आ रहा था वो तो अपने देवा के लिए परेशानी में रोये जा रही थी।

जीस तरह से देवा ने ममता की तरफ देखा था घर से निकलने से पहले वो सोच सोच के ममता का दिल घबरा रहा था।

की कही देवा कुछ उल्टा सीधा न कर दे कही कोई अनहोनी न हो जाए।

रत्ना;अरे बोलती क्यों नही।

ममता; आखिर कर रत्ना का हाथ पकड़ लेती है।

बस माँ बस...

रत्ना;साली मेरा हाथ पकड़ती है क्या यही शिक्षा दी है मैंने तुझे।

कामिनी तुझसे कुछ दिन भी नहीं रहा गया अपने भाई को अपने ऊपर चढाने में तुझे ज़रा भी शर्म नहीं आई।

ममता;जब एक माँ अपने बेटे को अपने ऊपर चढ़ा सकती है तो बहन क्यों नही।

रत्ना;क्या। क्या बोली तू... वो ममता के बाल खीचते हुए दो तीन थप्पड और उसके गाल पर जड़ देती है।

ममता;तुम्हारी ननद देवकी मामी।

रत्ना;तू कहना क्या चाहती है।

ममता;हाँ हाँ तुम्हारी देवकी।

वो अपने बेटे रामु से चुदती है दिन रात।

तुम्हारे खानदान में होता है ये सब और तुम मुझे बोल रही हो।

हाँ मुझे शर्म नहीं आई क्यूंकि मै सच्चा प्रेम करती हूँ भैया से।

और अगर तुमने मुझे और भैया को अलग करने के बारे में सोचा भी ना माँ तो मैं कुँवें में कूद के जान दे दूंगी बोल देती हूँ।

जवान खून एक वक़्त तक ज़ुल्म सहता है मगर जब कोई भी चीज़ चाहे वो नाजायज़ प्रेम ही क्यों न हो

जब इन्तहा पर आता है तो उसे कोई नहीं रोक सकता।

रत्ना;ऑंखें फाड़े अपनी बेटी ममता को देखने लगती है। उसके कहे गए वो चंद शब्द उसके कानो में गूँजने लगते है।

रत्ना;सर पकड़ के बैठ जाती है।

रत्ना अभी जब अपने भाई के घर गई थी तब उसने ऐसा कुछ देखी थी जिस पर उसे यक़ीन नहीं हुआ था।

उसने रामु को और देवकी को एक दूसरे के गले लगते हुए देखी थी और रामु देवकी की कमर दबाते हुए उसे चुम रहा था।

रात का अँधेरा था मगर रत्ना को लगा था की वो कौशल्या नहीं बल्कि सुडौल जिस्म वाली देवकी ही होगी।

उस बात को वो भूलना चाहती थी मगर आज जब ममता के मुँह से उसने ये बात सुनी तो उसके पांव तले की ज़मीन निकल गई थी।

वो रात न ममता सोई और न रत्ना।
 
जहां एक तरफ रत्ना, देवा और ममता के रिश्ते को लेके परेशान थी की कही गांव में ये बात पता चल गई की एक भाई अपनी बहन को चोदता है।

तो क्या होंगा।

ये बात उससे परेशान तो कर रही थी मगर एक और चीज़ उसके जिस्म में हलचल मचा रही थी।

ममता के कही हुई वो बात की जब एक बेटा अपनी माँ को चोद सकता है तो एक भाई क्यों नही।

रामु;देवकी को चोदता है।

यही एक बात उसके तन बदन में आग लगा रही थी।

वो अपने बिस्तर पर सोई हुई थी।

बाहर मौसम ठण्डा था हलकी हलकी बरसात ने मौसम को ख़ुशगवार बना दिया था मगर रत्ना का जिस्म भट्टी के तरह जल रहा था।

आंखे बंद करते ही उसे देवा और ममता चुदाई करते हुए नज़र आ जाते।

वो बेचैन भी थी और परेशान भी दूसरी तरफ ममता का पूरा ध्यान देवा की तरफ था।

वो दिल हि दिल में अपने भगवान से दुआ मांग रही थी की बस उसके भाई को सही सलामत घर भेज दे चाहे तो उसकी जान ले ले।

रात का वो ख़ौफ़नाक सन्नाटा तो किसी तरह कट गया मगर सुबह का सूरज भी नए उम्मीद ले के नहीं आया था।

सुरज सर पर आ गया था मगर देवा का कोई अता पता नहीं था।

ममता ;रत्न के पास जाके बैठ जाती है।

माँ....

रत्ना की ऑखें सूजी हुई थी वो शायद रात भर रोई थी

वो ममता की तरफ नहीं देखती।

ममता; माँ मेरी बात तो सुनो....

माँ तुम मुझे जान से मार दो मगर भैया को देखो न कहाँ गए है। कितनी देर हो गई है।

उन्होने कुछ खाया भी नहीं माँ किसी को खेत में भेज के पता लगाओ ना माँ की भैया कहाँ है।

रत्ना; ममता की तरफ ज़हरीली नज़रों से देखती है।

ममता;माँ मै जानती हूँ तुम मुझसे नफरत करती तो मै ये भी नहीं चाहती की तुम मुझे माफ़ करो।

मगर भैया को कुछ हो गया ना माँ तो मै तुम्हें कभी माफ़ नहीं करुँगी।

रत्ना; अच्छा मुझे माफ़ नहीं करेगी कलमुँही जा मर जा तू भी अपने भाई के साथ जा के । मेरा पीछा छोड़ो तुम दोनो ।मुझे तुझसे कोई बात नहीं करनी।

ममता; रोती बिलखती वहां से उठके अपने रूम में चली जाती है।
 
इधर हवेली में भी सब कुछ उथल पुथल होने के क़रीब था।

हिम्मत राव की बेरुख़ी जहाँ रुक्मणी को परेशान किये हुए थी । वही रानी भी बहुत ग़ुस्से में था।

रुक्मणी;हिम्मत राव के पास जाके बैठ जाती है। वो उस वक़्त हुक्का पी रहा था।

हिम्मत;एक नज़र उठाके रुक्मणी की तरफ देखता है।

रुक्मणी; मैं पूछती हूँ आखिर कब तक आपके दोस्त की बीवी यहाँ रहेंगी।

हिम्मत;क्यूँ तुझे क्या तकलीफ हो गई है बिंदिया से।

रुक्मणी;देखिये मै चुप हूँ इसका मतलब ये नहीं की मै कुछ नहीं कर सकती।

हिम्मत;हुक्का एक तरफ रख के खड़ा हो जाता है।

क्या मतलब है तेरे कहने का।

रानी भी वहां आ जाती है।

बापु माँ बिलकुल ठीक कह रही है।

रानी;जब से वो आई है आप बहुत बदल गए हैं आखिर मै आपकी बेटी हूँ।

और आप मुझसे भी ठीक से बात नहीं कर रहे । जब देखो उस कलमुँही बिंदिया के रूम में पड़े रहते हो।

हिम्मत;खामोश लडकी।

रुक्मणी;उसे खामोश करने से सचाई चुप नहीं जाएगी।

हिम्मत;रुक्मणि की तरफ पलटता है और एक ज़ोरदार थप्पड पहली बार रुक्मणी के मुँह पर जड़ देता है।

साली मुझसे ऊँची आवाज़ में बात करती है।

रुक्मणी नीचे गिर पडती है और फूट फूट के रोने लगती है।

हिम्मत;तुम दोनों माँ बेटी मुझे क्या अपनी गुलाम समझते हो।

मेरी मर्ज़ी है जिसके साथ रहूँ जहाँ चाहे वहां रहूँ । तुम दोनों मुझे बोलने वाली होती कौन हो।

रुक्मणी; मैं आपकी पत्नी हूँ।

हिम्मत; पत्नी है तो घर के अंदर एक कोने में पडी रह। मेरे सर पर सवार होने की कोशिश मत कर।

अगर अपने हद से आगे जाएगी तो अच्छा नहीं होगा।

रुक्मणी; क्या करेंगे आप।

हिम्मत;ये सुनके पास में पड़े हुए लकड़े से सटा सट सटा सट रुक्मणी की पिटाई शुरू कर देता है।

रुक्मणी;चिखने चिल्लाने लगती है।

पास में खड़ी रानी ये देख के बुरी तरह डर जाती है।

हिम्मत;मेरी जुठन खाने वाली तुझे कहाँ से इतना बोलना आ गया साली ले ये ले....

रुक्मणी;आहह आहः

रानी हिम्मत का हाथ पकड़ लेती है।

बस बापू बस जानवर की तरह मार रहे हो तुम माँ को।

हिम्मत;हाथ छोड।

रानी;नहीं छोडूंगी।

हिम्मत;नहीं छोड़ेगी।

ले तू भी ले....
 
हिम्मत राव को लगने लगा था की उसके अस्तित्व पर आंच आने वाली है।

वो औरतें जो उसके हुक्म के बिना खाना भी नहीं खाती थी आज उन दोनों ने किसी नागिन की तरह अपना फन उठाया था।

और हिम्मत राव अच्छी तरह जानता था साँप हो या औरत किस तरह उसे कुचला जाता है।

पुरे गांव में वो अपने इसी रवैये की वजह से बदनाम था।

रानी और रुक्मणी दोनों सिसक सिसक के रोने लगती है।

तभी वहां बिंदिया आती है।

बिंदिया;बस भी कीजिये ना।

नादान है ये दोनो।

हिम्मत; अच्छी तरह से समझा देना दोनों को मेरे सामने ऊँची आवाज़ में बात करने के बारे में सोचना भी मत।

वरना वहां पहुंचा दूंगा जहाँ से कभी लौट के नहीं आयेंगे समझी।

वो हाथ में की लकड़ी फेंक के अपने रूम में चला जाता है।

रुक्मणी और रानी को बिंदिया सहारा देने लगती है मगर दोनों उसका हाथ तक नहीं थामती।खुद अपने रूम में चलि जाती है।

बिंदिया; उन दोनों के जाने के बाद खुद से कहती है।

रुक्मणी आज तुम्हें अपने पति की असली औक़ात पता चली है साली हरामी।

सुबह से दोपहर हो गई थी और दोपहर से रात मगर देवा का कोई अता पता नहीं था।

अब रत्ना को भी उसकी चिंता सताने लगी थी वो शालु के घर जाती है और उससे देवा के बारे में पूछती है।

शालु;नहीं देवा तो सुबह से यहाँ नहीं आया।

क्यूं सब ठीक तो है ना रत्ना।

रत्ना;नहीं न शालु देख न कल रात से ग़ायब है पता नहीं कहाँ चला गया।

ये सुनके शालु भी बेचैन हो उठती है और वो पप्पू को और गांव के जवान लड़कों को देवा की तलाश में दौड़ा देती है।

हर कोई देवा की तलाश करने लगता है।

छोटा सा गांव था अम्बेटकली।

हर जगह उसे तलाश करते है मगर देवा कही भी नज़र नहीं आता।

रत्ना की हालत ख़राब होने लगती है शालु उसे ख़ोद खोद के देवा के घर से जाने के वजह पूछती है।

मगर रत्ना बस रोये जाती है और कुछ नहीं कहती। क्या कहती वो की बहन को चोदते देख मैंने उसे और उसकी बहन की पिटाई की तो वो घर छोड के चला गया।

पप्पू और गाँव के कई लोग जब वापस थक हार के रत्ना के घर आते है तो रत्ना एक एक से पूछती है मगर हर कोई बस एक जवाब देता है।

की उन्हें देवा कही नज़र नहीं आया।

ये सुनके घर में बैठी ममता ज़ोर ज़ोर से रोने लगती है।

सब बस यही सोचने लगते हैं की आखिर देवा गया तो गया कहाँ।
 
अब आगे क्या होगा? जानने के लिए पढ़ते रहिये।

कमेंट के लिए थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अपडेट भी प्रतिदिन देने की मैं कोशिश करूँगा।कहानी आपलोगों को कैसी लगी ।अपने विचार अवश्य दें।thanks
 
अपडेट 63

रत्ना के आँसू थे की रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।

उसे बार बार यही सोच आ रही थी की कही उसका एकलौता बेटा देवा भी अपने बापू की तरह तो हमेशा हमेशा के लिए नहीं चला गया।

अगर ऐसा हुआ तो वो किसके लिए ज़िंदा रहेंगी उसके खानदान का एकलौता चिराग कही वक़्त की आंधी उसे भी तो अपने साथ उड़ा के नहीं ले गई।

वो खुद को ही कोसने लगती है की आखिर उसने देवा को इतनी बुरी तरह क्यों मारा और आखिरी वक़्त में उसे घर वापस न आने के लिए क्यों कहा।

पप्पू;भी रत्ना को दिलासा दे रहा था। शालु भी पास में बैठी रत्ना के ऑसू पोंछ रही थी मगर घर में जैसे मातम सा छ गया था।

पुरा गांव सकते में था की आखिर देवा अचानक से कहाँ चला गया।

सभी ये जानना चाहते थे की आखिर वो क्या बात हुई की सबसे हँसके बोलने वाला देवा ख़ामोशी से कही चला गया।

रत्ना के घर के बाहर गांव के कुछ लोगों में खुसुर फुसुर शुरू हो गई थी।

कोई कहता की उसका बाप भी ऐसे ही चला गया था और फिर कभी नहीं आया।

कोई ये बोल रहा था की किसी दूसरे गांव वाली लड़की के चक्कर में घर से भाग गया। अपनी माँ और बहन की ज़रा भी चिंता नहीं है।

पदमा;को जब देवा के ग़ायब होने की बात पता चली तो वो भागते हुए रत्ना के पास आ पहुंची उससे जानने के लिए की बात क्या है।

मगर रत्न और ममता कुछ भी बताने के स्थिति में नहीं थी।

देवा के ग़ायब होने की बात आग के चिंगारी की तरह पूरे गांव में पता चल चुकी थी। भला हवेली तक ये चिंगारी कैसे नहीं पहुंचती।

हिम्मत राव के एक नौकर ने हिम्मत को देवा के ग़ायब होने के बारे में जब बताता है तो हिम्मत के चेहरे पर एक चमक सी आ जाती है और वो ज़ोर ज़ोर से हँसने लगता है।

वो दिल ही दिल में सोचने लगता है की उसके रास्ते का कांटा हमेशा हमेशा के लिए चला गया।

हिम्मत की बुरी नज़र न सिर्फ रत्ना पर थी बल्कि देवा के वो बाग वाली ज़मीन पर भी।

हिम्मत राव की गन्दी नज़र थी। पूरे गांव में एक हिम्मत के पास और देवा के पास सब से उपजाऊँ ज़मीन थी।

और हिम्मत राव हमेशा से चाहता था की वो ज़मीन भी उसे मिल जाए।

और अब देवा के चले जाने की बात सुन कर उसे अपना वो खवाब पूरा होते हुए नज़र आ रहा था।
 
पप्पू; रत्ना से कहता है

काकी हमने गांव के हर घर वालों से पूछ लिया है मगर देवा का किसी को कोई पता नहीं बस एक घर रह गया है।

रत्ना; किसका।

पप्पू;वैध जी का कही वहां तो नहीं गया देवा।

रत्ना;उठ के बैठ जाती है।

हाँ हाँ वही गया होगा चल मै भी साथ चलती हूँ।

पप्पू;नहीं काकी मै और मेरे दोस्त देख आते है।

रत्ना;नहीं नहीं मुझे भी साथ ली चल बेटा।

पप्पू;ठीक है चलो फिर।

और रत्ना ;पप्पू और उसके दोस्तो के साथ वैध जी के घर की तरफ चल पडते है।

जब वो सभी वहां पहुँचते है तो उन्हें वैध और उसकी बहु किरण ऑंगन में दिखाई देते है।

इतने सारे गांव वालों को एक साथ देख वो थोड़े घबरा से जाते है।

रत्ना;किरण के पास जाती है।

किरण;क्या बात है माँ जी।ये सब लोग यहाँ क्या कर रहे है।

किरण;रत्ना को जानती थी। देवा की माँ होने के कारन किरण उसकी बहुत इज्जत भी करती थी।

मगर रत्न को देवा और किरण के रिश्ते के बारे में कुछ भी मालूम नहीं था।

रत्ना;किरण बिटिया मेरा देवा यहाँ आया है क्या।

किरण;हाँ आया था।

रत्ना;कब कहाँ है वो मुझे उसके पास ली चलो।

किरण;माँ जी देवा कल रात में यहाँ आया था किसी ने उसे बहुत बुरी तरह से पीटा था।

उसके सर में से खून भी निकल रहा था मैंने और बापु ने उसकी मरहम पट्टी की उसके बाद उसे यही सोने के लिए ऑगन में चारपाई लगा दी।

मगर जब सुबह देखा तो वो यहाँ नहीं था पता नहीं कहाँ चला गया।

बैध जी;हाँ बिटिया उसकी तबियत बहुत ख़राब थी। तेज़ बुखार भी था कुछ जड़ी बुटियों का खुराक़ दिया था

मैने उसे। मगर उसे आराम की बहुत ज़रुरत थी सुबह वो नहीं दिखा तो हमने सोचा की शायद वो घर चला गया होगा।

मै तुमसे पुछने आने ही वाला था उसके बारे में।

ये सुन के रत्ना वही बैठ जाती है।

उसे रात की घटना फिर से याद आ जाती है किस बुरी तरह उसने लकड़ी से देवा की पिटाई की थी।

देवा का खून भी निकल रहा था ये सोच सोच के रत्ना का दिल दहलने लगता है।

पप्पू और उसके दोस्त मिलकर रत्ना को समझा बुझा के घर ले आते है।
 
दूसरी रात घिर आई थी मगर सिर्फ देवा के बारे में इतना पता चला था की उसे सर पर चोट लगी थी।

और वो ज़ख़्मी है मगर उसे किसने मारा यही बात गांव के हर आदमी के दिल ओ दिमाग में उलझन पैदा कर रही थी।

पदमा;हवेली में जाके रुक्मणी को देवा के ग़ायब होने की खबर सुनाती है। वो सुनके रुक्मणी बेचैन सी हो उठती है।

सुबह की मार से उसे इतनी तकलीफ नहीं हुई थी जितनी देवा की खबर सुनकर हुई।

रुक्मणी;पदमा तू उसके घर जा न और पता कर न की वो घर आया है के नही।

पदमा;मालकिन उसकी माँ का रो रो के बुरा हाल है।

बैध के घर गया था वो कहते हैं उसके सर पर मार भी लगी हुई थी और तेज़ बुखार भी था।

पता नहीं किस हाल में पड़ा होंगा बेचारा सोच सोच के तो मेरा दिल बैठा जा रहा है।

रुक्मणी; तू जा घर जा और मुझे सुबह जल्दी से आके अच्छी खबर सुना की वो घर आ गया है। जा ना जल्दी।

पदमा; वापस रत्ना के घर की तरफ चली आती है और रुक्मणी की ऑखों से नींद ग़ायब हो जाती है।

वो अपनी पिटाई जैसे कुछ पल के लिए भूल गई थी।

रात के १० बज गए थे। एक एक करके गांव वाले अपने अपने घर लौटने लगते है । शालु भी घर आ जाती है।

मगर नीलम वही ममता का हाथ पकडे दरवाज़े की तरफ टकटकी लगाए बैठी हुई थी।

दोनो के दिल की हालत उस वक़्त वही समझ सकता था जिस ने कभी न कभी किसी न किसी से सच्ची मोहब्बत किया हो।

इधर हवेली में रुक्मणी बिस्तर पर देवा की याद में करवटे बदल रही थी। उधर रानी बाथरूम से नहा कर बाहर निकलती है।

और अपने रूम में हिम्मत राव को देख कर उसका खून खौल उठता है।

मगर वो कुछ नहीं कहती और चुपचाप आकर बेड पर बैठ के अपने बाल सुखाने लगती है उसने सिर्फ टॉवल बांध रखी थी।

उसे अब तक देवा के बारे में पता नहीं था । उसे तो इस बात पर गुस्सा आ रहा था की हिम्मत राव ने रुक्मणी के साथ साथ उसकी भी पिटाई कर दिया था और शायद हिम्मत भी अपनी इसी गलती को सुधारने उस वक़्त वहां मौजूद था।
 
हिम्मत; क्या बिटिया नाराज़ है हमसे।

रानी;सर उठाके उसके तरफ देखती है मगर कुछ नहीं कहती।

हिम्मत; अच्छा बाबा देख अब हँस भी दे। अरे मेरी जान तू बीच में नहीं आती तो मै तेरे साथ ऐसा कुछ करता क्या। हाँ इधर आजा मेरी बाहों में।

रानी; हटो भी बापू सब जानती हूँ मै आपके बारे में। सुबह मार पिटाई और रात में घिसाई।

हिम्मत;रानी की टॉवल खीच देता है इससे पहले की रानी उसे पकड़ पाती वो जिस्म से अलग हो जाता है और नंगी रानी हिम्मत के सामने आ जाती है।

रानी के जिस्म पर हिम्मत की मार के ज़्यादा निशान नहीं थे। क्यूंकि सबसे ज़्यादा मार तो रुक्मणी को पड़ी थी।

हिम्मत;अपनी धोती कुर्ता उतार के फ़ेंक देता है और रानी की तरफ बढ़ता है मगर रानी पीछे सरकती चली जाती है।

रानी;मेरे पास मत आइये मै बोल देती हूँ बापु।

हिम्मत;क्यूँ मेरी जायदाद है तू जो चाहे वो मै करूँ चुप चाप यहाँ आजा।

रानी;नहीं आऊँगी और अगर ज़ोर ज़बर्दस्ती करेंगे तो मै चिल्लाऊँगी।

हिम्मत;चिल्ला।

हिम्मत रानी का हाथ पकड़ के उसे बेड पर अपने साथ गिरा देता है वो झटपटाने लगती है।

मगर हिम्मत की मज़बूत बाहों से रानी निकल नहीं पाती और थोडी देर हाथ पैर मारने के बाद वो निढाल सी हो जाती है।

हिम्मत;कहाँ लगा है मेरी बिटिया को।

रानी;इतनी बुरी तरह से मारा है आपने बापू जैसे जानवर को मारते है।

हिम्मत;ज़रा देखने दे मुझे भी।

ये कहके हिम्मत रानी के जिस्म पर सवार हो जाता है और सर से चुमता हुआ नीचे चूत तक पहुँच जाता है।

जैसे ही हिम्मत के होंठ रानी की चूत से टकराते हैं रानी अपनी ऑंखें बंद कर लेती है। प्यासी चूत में फिर से पानी आने लगता है।

रानी;आहह बापू वहां नही ना उन्हह ......

हिम्मत;बहुत सूखि सूखि लग रही है बिटिया।

रानी;हैं सूखि है वो। उसे ढेर सारा मीठा मीठा पानी चाहिए अपने बापू के लंड का आहह बाप्पु।

चूत की आग ने रानी को ये भुला दिया था की सुबह वो अपने बापू से बहुत नाराज़ थी।

हिम्मत;रानी की चूत को चाट चाट के लाल कर देता है और जब पहला पानी रानी की चूत से बहने लगता है।

हिम्मत उसे भी अपने मुँह में उतारने लगता है गलप्प गलप्पप्प गलप्प।

पानी पीने के बाद जैसे ही हिम्मत रानी के बगल में आके लेटता है रानी हिम्मत के लंड के पास चली जाती है और उसे अपने होठो से चूम के जगाने की कोशिश करती है।
 
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