ममता की चीख़ रत्ना के कान तक पहुँच जाती है और वो जग जाती है ममता को अपने पास ना पा के वो उठके देवा के रूम में चली जाती है और सामने का नज़ारा देख उसके पांव तले की ज़मीन खिसक जाती है।
रत्ना; चीखते हुए।
हमारखोरों।
क्या कर रहे हो तुम दोनो।
देवा;और ममता चौंकते हुए उठ के बैठ जाते है।
देवा का लंड ममता की चूत से आवाज़ के साथ बाहर निकल जाता है।
रत्ना;पास में पड़ी हुई लकड़ी ले के दोनों की पिटाई शुरू कर देती है।
कुते कमिने हरामज़ादे अपनी बहन के साथ ये सब करते तुझे ज़रा भी शर्म नहीं आती।
देवा;और ममता की पीठ पर हर जगह रत्ना लकड़ी से मारना शुरू कर देती है।
देवा रत्ना का हाथ नहीं पकडता मगर ममता देवा को बचाने के चक्कर में खुद भी पिटती चली जाती है।
रत्ना;देवा के पास आती है और उसके बाल खीच के सटा सट सटा सट थप्पड की बौछार उसके मुँह पर कर देती है। पास में बैठी ममता भी ज़्यादा देर बच नहीं पाती और रत्ना ममता का मुँह भी लाल कर देती है।
रत्ना;कपडे पहनो तुम दोनों हरामखोरों।
देवा;अपने कपडे पहनता है और रत्ना उसे मारते मारते घर के बाहर ले आते है।
निकल जा मेरे घर से कुत्ते और आज के बाद तेरे शक्ल भी मुझे मत दिखाना समझा।
ममता; ऐसे मत करो न माँ।
वो रोने लगती है।
रत्ना;तुझे भी जाना है तो तू भी निकल जा कुतिया।
रत्ना एक ज़ोर से लकड़ी ममता के पैर पर मारती है और ममता वही रोते रोते बैठ जाती है।
देवा;अपने घर रत्ना और ममता को देखता हुआ घर से बाहर निकल जाता है।
रत्ना;ज़ोर से चीखते हुए उससे कहती है वापस मत आना कुत्ते।
रत्ना पलट के ममता के बाल खीचते हुए उसके मुँह पर चपत मारते हुए उसे घसिटते हुए घर के अंदर ले जाती है।
उसे बार बार यही सोच आ रही थी की कही उसका एकलौता बेटा देवा भी अपने बापू की तरह तो हमेशा हमेशा के लिए नहीं चला गया।
अगर ऐसा हुआ तो वो किसके लिए ज़िंदा रहेंगी उसके खानदान का एकलौता चिराग कही वक़्त की आंधी उसे भी तो अपने साथ उड़ा के नहीं ले गई।
वो खुद को ही कोसने लगती है की आखिर उसने देवा को इतनी बुरी तरह क्यों मारा और आखिरी वक़्त में उसे घर वापस न आने के लिए क्यों कहा।
पप्पू;भी रत्ना को दिलासा दे रहा था। शालु भी पास में बैठी रत्ना के ऑसू पोंछ रही थी मगर घर में जैसे मातम सा छ गया था।
पुरा गांव सकते में था की आखिर देवा अचानक से कहाँ चला गया।
सभी ये जानना चाहते थे की आखिर वो क्या बात हुई की सबसे हँसके बोलने वाला देवा ख़ामोशी से कही चला गया।
रत्ना के घर के बाहर गांव के कुछ लोगों में खुसुर फुसुर शुरू हो गई थी।
कोई कहता की उसका बाप भी ऐसे ही चला गया था और फिर कभी नहीं आया।
कोई ये बोल रहा था की किसी दूसरे गांव वाली लड़की के चक्कर में घर से भाग गया। अपनी माँ और बहन की ज़रा भी चिंता नहीं है।
पदमा;को जब देवा के ग़ायब होने की बात पता चली तो वो भागते हुए रत्ना के पास आ पहुंची उससे जानने के लिए की बात क्या है।
मगर रत्न और ममता कुछ भी बताने के स्थिति में नहीं थी।
देवा के ग़ायब होने की बात आग के चिंगारी की तरह पूरे गांव में पता चल चुकी थी। भला हवेली तक ये चिंगारी कैसे नहीं पहुंचती।
हिम्मत राव के एक नौकर ने हिम्मत को देवा के ग़ायब होने के बारे में जब बताता है तो हिम्मत के चेहरे पर एक चमक सी आ जाती है और वो ज़ोर ज़ोर से हँसने लगता है।
वो दिल ही दिल में सोचने लगता है की उसके रास्ते का कांटा हमेशा हमेशा के लिए चला गया।
हिम्मत की बुरी नज़र न सिर्फ रत्ना पर थी बल्कि देवा के वो बाग वाली ज़मीन पर भी।
हिम्मत राव की गन्दी नज़र थी। पूरे गांव में एक हिम्मत के पास और देवा के पास सब से उपजाऊँ ज़मीन थी।
और हिम्मत राव हमेशा से चाहता था की वो ज़मीन भी उसे मिल जाए।
और अब देवा के चले जाने की बात सुन कर उसे अपना वो खवाब पूरा होते हुए नज़र आ रहा था।
दूसरी रात घिर आई थी मगर सिर्फ देवा के बारे में इतना पता चला था की उसे सर पर चोट लगी थी।
और वो ज़ख़्मी है मगर उसे किसने मारा यही बात गांव के हर आदमी के दिल ओ दिमाग में उलझन पैदा कर रही थी।
पदमा;हवेली में जाके रुक्मणी को देवा के ग़ायब होने की खबर सुनाती है। वो सुनके रुक्मणी बेचैन सी हो उठती है।
सुबह की मार से उसे इतनी तकलीफ नहीं हुई थी जितनी देवा की खबर सुनकर हुई।
रुक्मणी;पदमा तू उसके घर जा न और पता कर न की वो घर आया है के नही।
पदमा;मालकिन उसकी माँ का रो रो के बुरा हाल है।
बैध के घर गया था वो कहते हैं उसके सर पर मार भी लगी हुई थी और तेज़ बुखार भी था।
पता नहीं किस हाल में पड़ा होंगा बेचारा सोच सोच के तो मेरा दिल बैठा जा रहा है।
रुक्मणी; तू जा घर जा और मुझे सुबह जल्दी से आके अच्छी खबर सुना की वो घर आ गया है। जा ना जल्दी।
पदमा; वापस रत्ना के घर की तरफ चली आती है और रुक्मणी की ऑखों से नींद ग़ायब हो जाती है।
वो अपनी पिटाई जैसे कुछ पल के लिए भूल गई थी।
रात के १० बज गए थे। एक एक करके गांव वाले अपने अपने घर लौटने लगते है । शालु भी घर आ जाती है।
मगर नीलम वही ममता का हाथ पकडे दरवाज़े की तरफ टकटकी लगाए बैठी हुई थी।
दोनो के दिल की हालत उस वक़्त वही समझ सकता था जिस ने कभी न कभी किसी न किसी से सच्ची मोहब्बत किया हो।
इधर हवेली में रुक्मणी बिस्तर पर देवा की याद में करवटे बदल रही थी। उधर रानी बाथरूम से नहा कर बाहर निकलती है।
और अपने रूम में हिम्मत राव को देख कर उसका खून खौल उठता है।
मगर वो कुछ नहीं कहती और चुपचाप आकर बेड पर बैठ के अपने बाल सुखाने लगती है उसने सिर्फ टॉवल बांध रखी थी।
उसे अब तक देवा के बारे में पता नहीं था । उसे तो इस बात पर गुस्सा आ रहा था की हिम्मत राव ने रुक्मणी के साथ साथ उसकी भी पिटाई कर दिया था और शायद हिम्मत भी अपनी इसी गलती को सुधारने उस वक़्त वहां मौजूद था।