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हाय रे ज़ालिम.......complete

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जहां इससे पहले सबल घूस्सा हो वहां सुई की चुभन से क्या होने वाला था।

देवा ने अपने लंड से रश्मि की चूत को वहां तक खोल दिया था।

पप्पू की लूल्ली का उस पर कोई असर नहीं हो रहा था।

रश्मी;आहह भैया तुम्हारी लूल्ली में दम नहीं है पता नही।

नुतन का क्या होगा उसे भी देवा के नीचे सुला देना ।

पप्पू;साली छिनाल बहुत मस्ती चढ़ी है ना तुझे। तो ले......

शायद पप्पू की मर्दांनगी को ठेस पहुंची थी वो रश्मि के मुँह में मुँह डाल कर अपनी कमर को घचा घच घचा घच आगे पीछे करते हुए रश्मि को चोदता चला जाता है।

रश्मी;अपनी चूत की आग में जलती हुई ससुराल से मायके आई थी इस उम्मीद में की वो अपने प्यारे देवा से दिन रात कमर उछाल उछाल के छुदवाएंगी मगर

यहाँ आकर उसे पता चला की देवा गांव गया है। उस दिन से वो तड़प रही थी आज अपने भाई के लंड में वो खो जाना चाहती थी ।

अपना रस कस अपना सब कुछ बहा देना चाहती थी मगर ऐसा नहीं होता जिस गाण्ड को लंड की आदत लगी हो उसके लंड में औरत की चूत को शांत करने की ताकत नहीं रहती और पप्पु अपनी बहन की चूत में पानी छोडता हुआ हाँफने लगता है।

रश्मी;तिलमिला जाती है।

वो पप्पू के नीचे से निकल जाती है और खड़ी होकर अपने कपडे पहनने लगती है।

कुत्ते कमिने देवा से गाण्ड मरवा के भी तुझ में ताकत नहीं आई।

हरामी कही का। आगे से मुझे हाथ भी लगाने का सोचा न तो जान से मार दुंगी।

वो पैर पटकते हुए वहां से चली जाती है।

और पप्पू अपने मुरझाये हुए लंड को देख सोच में पड़ जाता है की नूतन का क्या होगा।
 
उधर गांव में देवा कोमल के घर में अपने बिस्तर पर लेटा हुआ था।

मगर उसे नींद नहीं आ रही थी।आगे रूम से उसे कोमल और उसके पति की आवाज़ें उसे सोने नहीं दे रही थी।

दरवज़ा पूरी तरह बंद नहीं था। देवा उठके दरवाज़े के पास चला जाता है।

अंदर कोमल पूरी तरह नंगी होकर अपने पति के लंड पर सवारी कर रही थी।

कोमल का चेहरा दरवाज़े की तरफ था और वो आवाज़ें निकाल निकाल के सटा सट अपने पति के लंड पर ऊपर नीचे हो रही थी।

देवा;कोमल के बदन का तो दिवाना उसी दिन हो गया था जिस दिन उसने पहली बार उसे देखा था।

कोमल;अपना सर उठा कर दरवाज़े की तरफ देखती है। उसे जैसे कोई फ़र्क़ नहीं पडा की उसके सामने देवा खड़ा था।

बल्कि वो और चीखने लगती है।

कोमल; आहह मारो जी धक्के तुम्हारे लंड में अब वो बात नहीं रही जो मुझे मुता दे आह्ह्ह।

कोमल का पति ; साली छिनाल तू भी पहले वाली कोमल कहा रही तुझे तो हर दिन लंड चाहिए। खेत में काम करू या तुझे चोदता रहूँ।

कोमल;उन्हह उन्हह आह्ह्ह्ह।

बातें बनाओ बस तुम तो। छोटे छोटे लौंडे तुमसे अच्छा चोद लेते है।

कोमल का पति शायद और नहीं रोक पाता और वो कोमल की चूत के अंदर ही पानी निकाल देता है वो पानी रिसता हुआ कोमल की झांटो पर से बहता हुआ नीचे गिरने लगता है।

कोमल उस पानी को अपने हाथ पर लेती है और देवा की ऑखों में ऑखें डाल के अपनी गीली उंगलिया अपने मुँह में लेकर चुसने लगती है । वो इस तरह से अपने पति के पानी को चाट रही थी जैसे किसी का लंड चूस रही हो।

देवा;वहां से आकर अपने बिस्तर पर लेट जाता है। उसका लंड तन चूका था उसे भी कोमल नज़र आ रही थी। उसकी ऑखों में जैसे खून उतर आया था। कोमल का अपनी कमर उछाल उछाल के चुदवाना साफ़ बता रहा था की वो क्या चाहती है मगर देवा नए रिश्तेदारी के कारण चुप था।

वो अपनी सोच में गुम था की कोई उसे रूम में अंदर आता हुआ दिखाई देता है।

वो उसकी तरफ देखने लगता है जब वो उसके क़रीब पहुँचती है तो देवा हैरान रह जाता है।

जीस हालत में कोमल अंदर अपने पति से चुदवा रही थी वो उसी हालत में अब देवा के सामने खड़ी थी। बिलकुल नंगी।

देवा;उसे देखने लगता है।

कोमल उसके पास बैठ जाती है और अपना हाथ देवा के लंड पर रख के उसे कस के पकड़ लेती है।
 
देवा;आहह काकी क्या कर रही हो तुम।

कोमल;ज़ोर से देवा के लंड को पायजामे में मरोड़ देती है।।

देवा;आहह पागल हो गई हो क्या।

कोमल; हाँ देवा पागल हो गई हूँ मै । जबसे मैंने तुझे कौशल्या और उसके बाद देवकी को पागलों की तरह चोदते हुए देखा है। तू अपनी भाभी और मामी को चोद सकता है तो अपनी बहन के होने वाली सास को क्यों नहीं चोद सकता।

देवा;तुम क्या कह रही हो काकी मुझे समझ में नहीं आ रहा।

कोमल; अच्छा तुझे समझ में नहीं आ रहा।

क्या देख रहा था तू फिर और ये इतना बड़ा क्यों हो गया है मुझे देख कर।

देवा ;समझ जाता है की अब मासूम बनने का वक़्त नहीं अब दुश्मन को राउण्ड ड़ालने का वक्त है तो कोमल को पकड़ के अपने बिस्तर पर गिरा देता है और उसके ऊपर चढ़ के दोनों हाथों से उसके बड़े बड़े संतरो को मसलने लगता है।

कोमल; हाय बेटा सारा रस निकाल के पी जा आह्ह्ह्ह।

देवा;तेरी गाण्ड और तेरे इन दोनों ख़रबूज़ों को देख मेरा लंड खड़ा हो गया है काकी अब तू खुद इन्हें लेकर मेरे पास आई है अब मै तुझे नहीं छोड़ूँगा गलप्प गलप्प।

कोमल; मैं भी तो यही चाहती हूँ तो मुझे न छोड़े बस मुझे इसे मुँह में लेने दे। पहले मेरा मुँह सुख चूका है इसकी याद में।

देवा; ले ले मेरी काकी। तू भी चख ले देवा का लंड।

कोमल;पैजामा खोल के उतार देती है और लहराता हुआ देवा का लंड हाथ में पकड़ लेती है।

हाय दैया ये तो मुठी में भी नहीं आ रहा।

देवा;मुँह में जाएगा तेरे चल पहले चाट इसे।

कोमल झुकती है और पलक झपकते ही देवा का लंड ग़ायब हो जाता है कोमल अपने

हलक के अंदर तक उसे उतार देती है गलप्प

गलपप।

देवा भी दोनों हाथों में मज़बूती से कोमल की ब्रैस्ट को पकड़ के उन्हें किसी भैस के थन की तरह निचोडने लगता है।

जैसे कोई दूध दुहने वाला अपने भैंस का दूध दुह रहा हो। अपने ब्रैस्ट को इतने

गरम हाथों में पा कर कोमल का बदन ऐठने लगता है और वो और ज़ोर जोर से देवा के लंड को चुसने लगती है।
 
मगर देवा देवा था कम से कम देवा औरत के मुँह की गर्मी से झड जाने वालों में से वो नहीं था।

देवा का लंड कोमल की गाण्ड देख कर ही खड़ा हो चूका था । वो और देर न करते हुए कोमल को लिटा देता है और अपने लंड को उसके मुँह के पास से लेकर नीचे सरकता हुआ नाभी से होता हुआ चूत पर आकर रुक जाता है।

कोमल साँसें रोके उस पल का बेसब्री से इंतज़ार करने लगती है जब ये ज़ेहरीला नाग उसे अंदर जा घुसेगा।

और उसे ज़्यादा इंतज़ार नहीं करना पडता । देवा एक झटके में लंड कोमल की चूत में ठोक देता है।

कोमल की कमर ऊपर की तरफ उठती है।

हाय मर गई मै तो आह्ह्ह ओह्ह्ह्ह्ह।

ऐसे भी कोई घुसाता है भला।

देवा;ऐसे ही घुसाया जाता है काकी आहह आहह।

ऐसे ही चोदा जाता है छिनाल रंडी को ले साली आह्हह्हह्हह्हह।

कोमल ; हाँ मेरे राजा सच कहा तूने असली मरद ऐसे ही चोदते है आह्ह्ह्ह।

मगर तू उधेड के रख देगा मेरी चूत को माँ नही ना।

वह कमर भी उछाल रही थी और चीख भी रही थी उसकी चीखें बंद करने के लिये देवा को अपना मुँह उसके मुँह से लगाना पडता है और गुं गुं की आवाज़ से कोमल की चुदाये करने लगता है।

उसके लंड में वो ताकत थी की साँस रुकवा दे । दो मिनट भी नहीं होता और कोमल को

पसीना छूटने लगता है। चूत की दिवार रह रह कर बस बस करने लगती है मगर देवा एक बार चोदना शुरु करने पर वो किसी के कहने पर नहीं रूकता था।

वो अपने लंड को इतनी अंदर डालते हुए कोमल को चोदने लगता है की कोमल निढाल सी हो जाती है

अपनी गाण्ड पर नाज़ करने वाली कोमल का सामना अब असली मरद से हुआ था।

देवा;दोनों हाथों से उसके ब्रैस्ट को मसलते हुए होठो को अपने मुँह में लेकर चुसते हुए सटा सट सटा सट लंड चूत के अंदर बाहर अंदर बाहर करते चले जाता है।

हर धक्का कमर तोड़ देने वाला था देवा का।

देवा को लगता है की उसका लंड पूरी तरह से कोमल की चूत में नहीं घुस पा रहा है।

वो लंड बाहर निकाल लेता है । लंड के बाहर आते ही कोमल चैन की साँस लेती है मगर अगले ही पल जब देवा कोमल को उल्टा करता है और अपने दोनों हाथों में उसकी कमर को पकडता है तो कोमल समझ जाती है की क्या होने वाला है।

कोमल; आहह मार के दम लेगा क्या देवा आह्ह्ह्ह।

देवा;चुप कर साली मुझे बीच में टोकने वालों पर बहुत ग़ुस्सा आता है।

वो अपने लंड को पीछे से कोमल की चूत पर लगा देता है और उसे धीरे धीरे अंदर अंदर और अंदर तक पहुंचा देता है।

कोमल के मुँह से चीख निकल पडती है और उसकी चीख सुनकर प्रिया जग जाती है।
 
अब आगे क्या होगा? जानने के लिए पढ़ते रहिये।

बहुत सारे कमेंट और के लिए थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अपडेट भी प्रतिदिन देने की मैं कोशिश करूँगा।कहानी आपलोगों को कैसी लगी ।अपने विचार अवश्य दें।thanks
 
अपडेट 73

देवा के साथ साथ कोमल भी पसीना पसीना हुए जा रही थी। देवा की कमर इतनी तेजी से आगे पीछे होने लगती है की कोमल को अपना हाथ अपने मुँह पर रख कर अपनी चीखें दबानी पडती है।

गुं गुं गुं की आवाज़ें फिर भी पूरे रूम में गूंज रही थी।

प्रिया;कोमल की आवाज़ से जग चुकी थी । वो बिना आवाज़ किये अपने रूम के दरवाज़े के पास चली आई और जैसे ही वो सामने का नज़ारा देखती है उसकी साँस हलक में अटक से जाती है।

उसकी माँ अपने होने वाली बहु के भाई से ऐसे पांव पसारे चुद रही है। ये देख उससे बहुत ग़ुस्सा आता है मगर अगले ही पल कोमल के मुँह से निकलती सिसकियाँ उसे बतला देती है की सब कुछ उसकी माँ की मर्ज़ी से हो रहा है।

प्रिया के लिए नाक़ाबिल बर्दाश्त वाली बात थी।

वो ये सब नहीं देख सकती थी। वो पलट कर अपने बेड पर आकर बैठ जाती है और सोचने लगती है की माँ को क्या हो गया है वो क्यों अपनी इज़्ज़त की धज्जियां उड़ा रही है।

कोमल; आहह देवा । कुतिया समझ रखा है क्या तूने मुझे।

प्रिया;फिर से चौंकती है और इस बार उसका दिल अपने दिमाग के हाथों हार जाता है और कदम खुद ब खुद दरवाज़े की तरफ बढ़ जाते है।

वो फिर से वहीँ आकर छुप कर खड़ी हो जाती है।

उसकी माँ कुतिया की तरह झुकी हुई थी और देवा पीछे खड़ा अपने लंड पर तेल लगा रहा था।

देवा;काकी तेरे जैसे मोटी गाण्ड वाली औरतें मुझे बहुत अच्छी लगती है दिल तो करता है ऐसी गाण्ड को रोजाना चोदता रहूँ । हाय साली ने क्या कमर बनाई है अपनी। रोज़ किस से चुदवाती हो काकी।

कोमल;अरे कहाँ बेटा ये तो ऐसे ही बाहर निकल आई है।।

ऊई माँ वहां नहीं....... बेटा दर्द होगा मुझे भी और तुझे भी।

देवा;फिर कहाँ।

कोमल;चुत मार मेरी। वो बाद में दे दूंगी।

देवा;कुछ सोचते हुए अपने लंड को कोमल की चूत पर लगा देता है और दोनों हाथों में कोमल के बड़े बड़े बाहर को निकले हुए कमर पकड़ के अपना लंड पीछे से चूत में पेल देता है एक आहह सी कोमल के मुँह से निकलती है और वो ज़मीन चाटने लगती है।

देवा;का लंड अपने शबाब पर था उसकी नज़र काफी वक़्त से इस फैली हुई गाण्ड पर थी । आज उसने सोच ही लिया था की चाहे कुछ भी हो जाये वो कोमल की गाण्ड मार कर ही रहेगा। वो तो बस कोमल की चूत मार कर उसे उतेजित कर रहा था।
 
देवा के लंड से निहाल हो चुकी कोमल अपना सर इधर उधर घुमाने लगती है। मरद क्या होता है और लंड की मार कैसे होती है उसे आज पता चल रही थी वो जैसे ही पीछे पलट कर देखती है देवा अपना लंड चूत से बाहर निकाल के झट से गाण्ड की सुराख़ पर लगा देता है।

कोमल;नही बेटा वहां नही न । मार डालेंगा ये मुआ मुझे।

तूझे कहा न मैंने बेटा नही ना।

देवा;चुप कर साली बहुत हो चूका। वो बिना रुके सटा सट सटा सट तीन चार ज़ोरदार थप्पड कोमल की गाण्ड पर जड़ देता है ये देख प्रिया के तनबदन में आग लग जाती है देवा न सिर्फ उसकी माँ को चोद रहा था बल्कि उस पर हुक्म भी चला रहा था। वो देवा को खरी खोटी सुनाना चाहती थी मगर उसके कदम एक इंच भी आगे नहीं बढ़ पा रहे थे। उसका हाथ पेट से सरकते हुए नीचे बढ़ता चला जाता है और उसे हैरत भी होती है खुद पर की वो अपनी माँ को पराए मरद से ऐसे चुदता देख इतनी उत्तेजित हो रही है।

प्रिया;अपने हाथ से अपनी चूत को कुरेदने लगती है और इधर कोमल सिहर जाती है।

जब देवा अपने लंड को कोमल की गाण्ड पर घीसने लगता है।

कोमल;आहह मार डाल मुझे ज़ालिम आहह मार दे आज इससे मुझे उन्हह।

देवा;अपने लंड पर थूक लगाकर उसे कोमल की गाण्ड में उतारने लगता है कमर बड़ी थी मगर कोमल की गाण्ड का सुराख़ सच में छोटा था । देवा को भी दर्द होने लगता है और उससे ज़्यादा कोमल को । वो अपने मुँह में तकिया दबा लेती है मगर उसके जिस्म की तड़प सामने खड़ी प्रिया साफ महसूस कर सकती थी। अपनी माँ को इतने दर्द में देख कर भी प्रिया का जिस्म थरथराने लगता है । उसकी नज़र देवा के लंड पर जम जाती है और धीरे धीरे सरकता हुआ वो काला साँप कोमल के छोटी सी बिल में चला जाता है।

एक चीख़ कोमल के मुँह से निकलती है और वो चीख़ सुनकर प्रिया की चूत से पानी बहने लगता है।

कोमल;देवा आहह मेरी कमर दुःख रही है ना नाही ना रुक जा।

देवा;बस हो गया काकी थोड़ा दर्द नहीं सह सकती तू मेरे लिए आह्ह्ह्ह।

कोमल;अरे ज़ालिम तेरे लिए तो अब मै अपनी जान भी दे दूँ।ऐसा दर्द असली मरद ही दे सकता है औरत को आहह। बेटा धीरे धीरे कर ना।
 
देवा;साली बहुत छोटा सुराख़ है तेरा आहह फँसा जा रहा है मेरा तो आहह ऐसी गाण्ड तो देवकी मामी की भी नहीं है।

कोमल;आहह देवा रे।

बहुत किस्मत वाली है तेरे मामी जो उसे तेरे जैसा बेटा मिला है आह्ह्ह।

देवा;तू भी बन जाएँगी किस्मत वाली जब मेरी बहन इस घर में आएगी काकी।

कोमल; अरे रानी बना कर रखूँगी मै तेरी बहन को ।बस तू अपनी इस काकी का ख्याल रखने आ जाया करना। आहह बोल आएगा न मेरी लेने उन्हह।

देवा; हाँ तेरी गाण्ड मुझे कहीं से खीच लाएँगी कोमल।

कोमल;आहह चोद अपनी कोमल को देवा आह्ह्ह्ह।

देवा बिना रुके अपने लंड से कोमल की गाण्ड को खोलता चला जाता है और अपना पानी बहने के बाद प्रिया बिस्तर पर जा कर बैठ जाती है वो दिल ही दिल में सोच लेती है की उसे सुबह क्या करना है।

सवेरा होते होते देवा कोमल को अपने पास से उसके रूम में भेज देता है और कोमल कमर पर हाथ रख कर लंगड़ाती हुए अपने बिस्तर पर जा कर लेट जाती है।सुबह कोमल के उठने से पहले प्रिया जग जाती है और वो देवा को भी जगा देती है । प्रिया के बापू भैसो का चारा लाने खेत में निकल चुके थे।

देवा को अभी अभी नींद आई थी की प्रिया के उसे ज़ोर से हिलाने से वो हडबड़ा कर जग जाता है और सामने प्रिया को देख थोड़ा हैरान भी हो जाता है।

देवा;क्या हुआ।

प्रिया; चीखते हुए क्या हुआ।

कमीने इंसान क्या समझ रखा है तुमने इस घर को।

मै सब देख चुकी हूँ रात जो कुछ हुआ है यहाँ।

अपना सामान उठाओ और वहीँ चले जाओ जहाँ से आये हो । क्यूंकि इस घर में तुम जैसे इंसानो के लिए कोई जगह नहीं और तुम्हारे बहन इस घर की बहु कभी नहीं बन सकती। मै हरी भाई से सब कुछ कह दूंगी ।

ये कहकर वो वहां रूकती नहीं बल्कि अपने रूम में चलि जाती है। देवा पर तो जैसे सुबह सुबह पहाड गिर पड़ा था। वो इधर उधर देखने लगता है और उसे कोमल दरवाज़े के आड़ में खड़ी दिखाई देती है।।

प्रिया की बाते सुनकर कोमल के भी पांव तले की ज़मीन खिसक गई थी।
 
उधर देवा के गांव में विक्रांत कदम रखता है वो अपने मोटरसाइकिल पर बैठ कर जैसे ही गांव के कच्चे रास्ते से होता हुआ हवेली की तरफ बढ़ता है उसकी नज़र एक घर पर पडती है वो घर और किसी और का नहीं बल्कि शालु का था।

नीलम;सुबह सुबह अपने गाये बकरियों को चारा खिला रही थी वो अभी अभी नहा कर बाहर आई थी। उसके बाल खुले हुए थे और गीले बालों पर पानी की हल्की हल्कि बूंदें सुबह की रौशनी में और भी ज़्यादा चमक रही थी।

विक्रान्त;यहाँ शिकार करने आया था मगर वो नीलम की एक झलक पाकर जैसे खुद शिकार हो गया था।

नीलम की नज़र अचानक से विक्रांत के तरफ चली जाती है और वो एक अजनबी आदमी को इस तरह उसे घूरता देख बुरी तरह डर जाती है और सीधा घर के अंदर जा कर दरवाज़ा विक्रांत के मुँह पर बंद कर देती है।

विक्रान्त मुस्कराता हुआ अपनी बाइक शुरु कर देता है और हवेली की तरफ बढ़ जाता है।

हवेली में रुक्मणी और रानी अभी अभी नहा कर बाथरूम से बाहर निकलती है जब से दोनों माँ बेटी का रिश्ता एक नए बंधन में बँधा था न रानी को हिम्मत राव की परवाह थी और न अब रुक्मणी हिम्मत में खोई रहती थी।

बिंदिया अपने मालिक के साथ एक रूम में नंगी सोई हुई थी।

रानी;अपने माँ के बाल सँवारते हुए उसके गाल को चूम लेती है।

दोनो अभी आधी से ज़्यादा नंगी थी बस नीचे दोनों ने पेंटी पहन रखी थी।

रुक्मणी;क्या बात है बड़ा प्यार आ रहा है आज कल अपनी माँ पर रानी।

रानी;क्या माँ तुम भी न तुम सच में बहुत सुन्दर हो।

रुक्मणी;रानी की ऑंखों में देखने लगती है।
 
जो सुख वो अपने पति से चाहती थी अपनी चूत में लगी आग को वो हिम्मत के लंड से बुझाना चाहती थी वही सुलगती हुई आग रानी अपनी ज़ुबान से बुझा रही थी। मगर ये वो आग होती है जो ज़ुबान से नहीं बुझती बल्कि ये तो और बढ़ती चली जाती है।।

रानी;क्या देख रही हो माँ।

रुक्मणी;कुछ नहीं सोच रही हूँ अब तेरे भी हाथ पीले कर दुं।

रानी;माँ तुम भी न।।

वो रुक्मणी के गले से लग जाती है और दोनों के ब्रैस्ट आपस में घिस जाते है और इस से एक चिंगारी सी पैदा होती है जो दोनों के तन बदन में फ़ैल जाती है।

रानी;अपने दोनों हाथों से रुक्मणी की कमर को सहलाने लगती है।

और रुक्मणी अपनी ऑंखें बंद कर लेती है । रानी की गरम साँसें उसे उसके होठो पर महसूस होती है।।

रुक्मणी अपने ऑंखें खोल कर रानी कहते हुए अपने ज़ुबान बाहर निकाल कर रानी के होठो को चुमते हुए उसे अंदर डाल देती है दोनों एक दूसरे को चुमते हुए पेंटी के ऊपर से एक दूसरे की चूत को रगडने लगती है

रानी;गलप्प माँ गलप्प।

कि तभी बाहर से किसी की आवाज़ दोनों को चौंका देती है।

रुक्मणी;इस वक़्त कौन हो सकता है।
 
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