हिम्मत के दिमाग की नस गरम हो जाती है और वो एक ज़ोरदार थप्पड बिंदिया के मुँह पर जड़ देता है।
और बिंदिया चक्कर खाकर बिस्तर पर जा गिरती है।
हिम्मत;साली रंडी है। रंडी बनकर रह मेरे सर पर मत नाच। देख मत विक्रांत चोद डाल साली को बहुत बातें करने लग गई है ये छिनाल आज कल। इसे इसकी असलियत बतानी ही पडेगी।।
विक्रान्त;आगे बढ़ता है और बिंदिया के बाल पकड़ के उसे खीचता है मगर बिंदिया हिम्मत की बातें सुनकर तिलमिला गई थी। वो विक्रांत को धक्का देकर पीछे की तरफ ढ़केलती है।
बिंदिया ;अपने हाथ दूर रख मुझसे कमीने।
विक्रान्त से रहा नहीं जाता।
साली मुझे गाली देती है। मुझे....
वो अपनी पिस्तोल निकाल के बिंदिया के मुँह में डाल देता है।
अपने मुँह में पिस्तोल के घुसते ही बिंदिया के जैसे होश उड़ जाते है।
आंखेँ फटी की फटी रह जाती है उसे विक्रांत के बारे में पता था की वो बहुत ग़ुस्से वाला इंसान है।
बिंदिया थोडी सँभल जाती है।
विक्रान्त;साली 6 की 6 अभी उतार दूंगा अभी के अभी अब चिल्ला। चिल्ला अब.....
विक्रान्त की आवाज़ सुनकर रानी और रुक्मणी भागते हुए बिंदिया के रूम के पास चली आती है।
हीम्मत;अपने कपडे निकाल देता है और बिंदिया के पास चला आता है।
हिम्मत को देख विक्रांत भी अपनी पेंट खोल के नीचे गिरा देता है।
विक्रान्त;बिंदिया के मुँह से पिस्तोल निकाल लेता है।
साली अगर आईन्दा मेरे सामने ऊँची आवाज़ में बात की न तो याद रख काम ख़तम करने में देरी नहीं करुँगा मैं।
हिम्मत;अब देख क्या रही है रंडी। मुँह खोल और चाट हमारा लंड।
दोनो एक दूसरे को देख हंसने लगते है और बिंदिया अपने हाथों में हिम्मत और विक्रांत का लंड पकड़ लेती है।
खिड़की की आड़ में खड़ी रानी और उसके पीछे खड़ी रुक्मणी विक्रांत और हिम्मत को देख सहम गई थी मगर बिंदिया को देख उन्हें तरस नहीं आ रहा था।
रानी;चलो माँ।
रुक्मणी;उसका हाथ पकड़ के अपने से चिपका लेती है और धीमी आवाज़ में कहती है।
रुक थोडी देर।।
बिंदिया एक एक करके हिम्मत और विक्रांत के लंड को चुसने लगती है।
विक्रान्त;काफी दिनों से बिंदिया पर नज़र गडा कर बैठा हुआ था और आज उसकी दिल की मुराद पूरी हो रही थी।
मगर उसकी नज़रों के सामने उस वक़्त बिंदिया नहीं बल्कि उसे तो नीलम नज़र आ रही थी।
नीलम का वही भोला चेहरा जिसे देख विक्रांत अपना दिल हार बैठा था।
विक्रान्त;बिंदिया को नंगी कर देता है और उसे अपने लंड पर झुका देता है । पीछे से हिम्मत अपनी दो उंगलिया बिंदिया की चूत में घूस्सा कर अंदर बाहर करने लगता है।
अब तक ग़ुस्से में बैठी बिंदिया इस हमले से सिहर उठती है और उसके अंदर की औरत जाग जाती है।
बिंदिया ;आहह हरामी आहह मै तुझे छोड़ूँगी नहीं आहह।
विक्रान्त;साली छोड़ूँगा तो मै तुझे नहीं बहुत नाटक करती है ना तू । आज देख कैसे तेरी चूत सुजा न दूँ तो मेरा नाम भी विक्रांत नही।
हिम्मत का लंड भी तन चूका था वो नीचे लेट जाता है और बिंदिया को अपने ऊपर खीच कर अपने लंड पर बैठा देता है।
बिंदिया; आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह।
हिम्मत;अपने लंड को बिंदिया की चूत पर लगा कर अंदर पेल देता है एक चीख़ के साथ बिंदिया हिम्मत से
चिपक जाती है और हिम्मत नीचे से अपने लंड को बिंदिया की चूत में आगे पीछे करने लगता है।।
थोड़ी ही देर गुज़री थी की बिंदिया पर पीछे से दुसरा ज़ोरदार हमला होता है और वो विक्रांत करता है सटा सट सटा सट वो बिंदिया के चूतडो पर थप्पड़ों की बरसात करने लगता है नीचे से हिम्मत के धक्के और ऊपर से विक्रांत का मरदाना हाथ चूतड़ पर पडने से बिंदिया रोने लगती है मगर उस वक़्त दोनों को उस
बेचारी पर कोई तरस नहीं आता वो बेरहम इंसान उसकी चूतड़ को लाल कर देता है।।
और अपने लंड पर थूक लगा कर उसे बिंदिया के गाण्ड की सुराख़ पर रगडते हुए अंदर की तरफ ड़ालने लगता है।
बिंदिया;नही आहह मेरी आहह मै मर जाऊँगी आहह।
विक्रान्त;मर जा साली रंडी।तेरे रेहने न रहने से मुझे कोई फर्क नहीं पडता आहह।
विक्रान्त;का विराट लंड बिंदिया की गाण्ड के सुराख़ को चीरता हुआ अंदर और अंदर चला जाता है।
अपने दोनों सुराखों में लंड महसूस करके बिंदिया के ऑंसू भी रुक जाते हैं और वो सिसक सिसक के
रोने लगती है । हर धक्का जानलेवा था बिंदिया को साँस लेने भर की मोहलत नहीं मिलती। जहाँ हिम्मत
नशे में बिंदिया को किसी कुतिया की तरह चोद रहा था वहीँ विक्रांत अपने थप्पड का जवाब
दे रहा था जो कई साल पहले बिंदिया ने विक्रांत को मारी थी।विक्रांत और हिम्मत बिंदिया को किसी गली की कुतिया समझकर चोद रहे थे।
उसकी गांड और चूत एक ही समय में दर्द कर रही थी।विक्रांत गांड मारने के साथ साथ बिंदिया की चूचियों पर भी थप्पड़ मार रहा था।थप्पड़ से बिंदिया की गांड तो पहले ही लाल कर दिया था।बिंदिया को आज अपनी औकात पता चल गई थी।
प्रिया;हाँ देवा मै पागल हो जाऊँगी। मुझे नींद भी नहीं आ रही मुझे कुछ कर देवा मुझे कुछ कर।
देवा की नज़र दरवाज़े की तरफ जाती है और उसे महसूस होता है की कोमल दरवाज़े की आड़ में छुपी हुई सब सुन रही है।।
देवा;नहीं नहीं मै तुझे कुछ नहीं करुँगा तुझे कुछ हो गया तो।
प्रिया;कुछ नहीं होंगा। मुझे कुछ करो ना ....
देवा;मैंने कहा न मै कुछ भी नहीं करने वाला तुझे।
मेरी बहन इस घर में आने वाली है । तू जा यहाँ से वरना मुझे तेरी माँ को आवाज़ देना पडेगा।
प्रिया;हरामी कहीं के अगर तूने मुझे अभी के अभी कुछ नहीं किया न तो मै गांव वालों को बता दूँगी और तेरी बहन कभी इस घर में नहीं आ पाएगी।।
देवा के दिमाग की बती जल जाती है अगर ममता की शादी इस घर में करनी है तो प्रिया का मुँह बंद होना
बाहुत जरुरी था और उसका मुँह एक ही शर्त पर बंद किया जा सकता था उसके मुँह में लंड डाल कर।
उस वक़्त देवा के लंड से अच्छी चीज़ वहां कोई नहीं थी।
देवा;प्रिया की गर्दन पकड़ के उसे अपने लंड पर झुका देता है और उसकी कमर अपने मुँह की तरफ कर देता है । इस तरह दोनों एक दूसरे के लंड और चूत की तरफ घूम जाते है।
प्रिया;अपने मुँह में देवा का लंड लेकर चुसने लगती है और देवा प्रिया की चिकनी चूत को चाटने लगता है गलप्प गलप्प।
देवा;जानता था की अगर उसने प्रिया को चोद दिया तो गलत हो जाएगा। वो अभी कुँवारी थी और अगर वो पेट से हो गई तो उससे उसे शादी भी करनी पड़ सकती है।
देवा;के दिमाग में एक बात बसी हुई थी की चोदो उसी को जो चुदने के बाद अपने गले में टाँगे न डाल दे।
मतलब जिससे शादी न करनी पड़े। पदमा शालु और रश्मि को देवा ने इसलिए चोदा था की वो किसी और की अमानत थी और उन्हें चोदने से उसे उनसे शादी नहीं करने पडती।
देवा;सिर्फ नीलम को अपनी दुल्हन बनाना चाहता था और किसी को नही।
देवा;अपने दाँतो से प्रिया की चूत को कुरेदने लगता है।जवानी की आग में जलती प्रिया चीखने लगती है और कुछ ही पालों में देवा के मुँह पर उसकी चूत से गाढा गाढा पानी निकलने लगता है।
देवा देवकी और कौशल्या से विदाई लेकर अपने गांव अपने माँ रत्ना और बहन ममता के पास आ रहा था।
की तभी उससे ख्याल आता है की सुनार के पास उसने कुछ सामान बनाने के लिए दिया था वो ट्रेक्टर को सुनार की दुकान की तरफ घुमा देता है।
सूनार देवा को देखते ही उसकी चीज़ें उसे थमा देता है और अपनी चीज़ों को वैसे ही पाकर जैसा उसने सोचा था देवा दिल ही दिल में बहुत खुश होता है। वो पैसे देकर तेजी से अपने घर पहुंचना चाहता था।
मगर सफ़र अभी बाकी था।
देवा;शालू के घर के सामने से अपने घर की तरफ जा ही रहा था की उसे एक अजनबी आदमी शालु के घर से कुछ दूर अपनी मोटर साईकल पर सिगरेट पीता हुआ दिखाई देता है।
देवा ने इससे पहले उस आदमी को गांव में कभी नहीं देखा था। वो जब उस अजनबी आदमी की आंखो
का पीछा करता है तो पाता है की वो शालु के घर में देख रहा है और शालु के घर में नीलम और शालु कपडे धो रही है।
शालु और नीलम दोनों का ध्यान उस आदमी की तरफ नहीं था वो और कोई नहीं विक्रांत था।
अपने जान से भी ज़्यादा हरदिल अज़ीज़ नीलम को वो आदमी हवस की निगाहों से देख रहा था। ये देख
देवा का खून गरम हो जाता है और वो विक्रांत के पास ट्रेक्टर रोक के नीचे उतर के विक्रांत के सामने खड़ा हो जाता है।
विक्रान्त;देवा को ऐसे देखता है जैसे बस उसे इसी का इंतज़ार था। अगर वहां गांव के कुछ लोग नहीं होते तो शायद विक्रांत वहीँ अपने बन्दूक की 6 की 6 गोलियां देवा की छाती में उतार देता।
देवा;कौन हो तुम वो गरज कर बोला था।
विक्रान्त भी छाती चौडी करके उसकी ऑखों में देखते हुए कहता है।
विक्रान्त सिंह नाम है मेरा।
देवा;तुझे पहले गांव में कभी नहीं देखा।
विक्रांत ;क्यूँ तू यहाँ का हवालदार है जो हर एक की खबर रखता फिरता है । जा जा अपना काम कर।
देवा;विक्रांत का कन्धा पकड़ के दहाडता हुआ उससे कहता है।
तू जो कोई भी है और जहाँ से भी आया है एक बात अच्छी तरह से सुनले अगर दूबारा इस घर के आस पास भी फटका न ज़मीन में गाड दूंगा। समझा चल रास्ता नाप।
विक्रान्त;तेरे माँ का बैदा मारू मुझे धमकी देता है साले।
वो देवा पर झपटता ही है की उन दोनों की आवाज़ सुनकर गांव के दूसरे लोग भी वहां आ जाते है और शालु भी घर के बाहर आ जाती है।
कुछ नहीं काकी ये साला मुझे ठीक नहीं लग रहा था इसलिए हालचाल पूछ रहा था इसके।
शालु;अरे रश्मि नीलम देख देवा अपने मामी के घर से आ गया है।
घर तो आ वहां क्या कर रहा है।
देवा;बाद में आता हूँ काकी।
पहले घर हो आता हूँ।
देवा;विक्रांत को घूरता हुआ अपने घर चला जाता है और विक्रांत भी हवेली के तरफ निकल पडता है।
देवा को देखते ही ममता भागते हुए आँगन में से दरवाज़े के पास आ जाती है और उछल कर देवा से लिपट जाती है।
ममता ;भैया मेरे भैया कब से घर आ रहे थे।
माँ देखो भैया आ गए है।
ममता की आवाज़ सुनकर रत्ना भी बाहर निकल आती है और जैसे ही देवा की नज़रें रत्ना से मिलती है दोनों की ऑंखों में एक चमक सी आ जाती हैं।
देवा के वो शब्द की जब मै वापस आऊँगा तुझे अपनी माँ नहीं पत्नी बनाउंगा।
रत्ना के कानो में गूँजने लगते है।
देवा आगे बढाता है और रत्ना को अपने गले से लगा लेता है।
माँ मुझे तेरी बहुत याद आ रही थी।
रत्ना;मुझे भी बेटा बहुत देर कर दिया तुने
आह।
देवा;अपने मज़बूत हाथों से रत्ना की कमर को मसल देता है और धीरे से उसके कानो में कहता है।
माँ मैं मंगलसुत्र लाया हूँ तेरे और ममता के लिये।
ये सुनकर रत्ना का जिस्म थरथरा जाता है । होंठ सूखने लगते है और वो देवा से अलग हो जाती है।
अब ये प्रेम एक तरफ़ा नहीं रहा था कुछ दिन पहले तक सिर्फ देवा अपनी माँ से प्यार करता था।
मगर अब रत्ना के दिल के बंजर ज़मीन पर भी हलकी हलकी बुन्दा बाँदी होने लगी थी । उसे भी
देवा के गैर मौजूदगी में एहसास हुआ था की देवा ही इस घर का असली करता धरता है।
और वही है जो तन से मन से और धन से ममता और उसकी सारी इच्छाये पूरी कर सकता है।
रत्ना;देवा को घर के अंदर ले आती है और तीनो बैठ कर बातें करने लगते है।
रत्ना और ममता यहाँ की बातें देवा को बताने लगती है और देवा वहां की बातें सुनाता है।
देवा से जब रत्ना को पता चलता है की उसे भी ये रिश्ता बहुत पसंद है और वो लोग अगले हफ्ते शादी की तारीख पक्की करने आने वाले हैं तो रत्ना का दिल ख़ुशी से झूम उठता है।
मगर ममता का दिल जैसे धडकना भूल जाता है उसे सबसे ज़्यादा गम अपने देवा से बिछड़ने का था।
वो तीनो बातें कर ही रहे थे की वहां रश्मि और नीलम भी आ जाती हैं।
देवा;अरे रश्मि तू कब आई।
वो पूछ रश्मि से रहा था मगर नज़रें नीलम पर जमी हुई थी।
नीलम शर्मा कर ममता के पास बैठ जाती है।
रश्मी;मुझे तो आये पाँच दिन हो गये मगर तुम कहा थे।
देवा;बस अपनी बहना के लिए उसका ससुराल देखने गया था।
ममता वहां से उठकर अंदर अपने रूम में चली जाती है।
रत्ना: मैं कुछ खाने के लिए लाती हूँ।
नीलम;काकी आप बैठो मै ले आती हूँ।
रत्ना;अरे हाँ अच्छा हुआ नीलम तू आ गई। मै तुझे संदेशा भेज के बुलवाने ही वाली थी।
नीलम;क्यूँ काकी।
रत्ना;अरे बेटा घर में अब मेहमानो का आना जाना शुरू रहेगा मै सोच रही थी की पीछे के जो दो नए कमरे हैं उनकी साफ़ सफाई कर लूं । आगे चल कर देवा की शादी के बाद काम आएंगे ।
देवा;माँ मेरी शादी कब करने वाली हो।
रत्ना;बस शादी का नाम सुनकर ये ऐसे उछलता है जैसे बारिश में कछवे और मेंढ़क उछलते है।
पहले बहन को बिदा तो कर दे उसके बाद ले अइयो जोरु भी।
नीलम बुरी तरह शरमा जाती है और उसका शरमाना किसी से छुपता नही।
देवा;नीलम एक अच्छी से चाय बना कर लाओ। दर्द से सर फटा जा रहा है मेरा।
नीलम चाय बनाने चली जाती है और रत्ना कुछ घर के काम निपटाने अंदर चली जाती है।
देवा;क्यों री साली क्या हाल है तेरा।
रश्मी; सुख कर काँटा हुए पड़ी हूँ न भूख लग रही है न पानी पीने को मन कर रहा है।
देवा;लगता है तेरा पति ठीक से ठोकता नहीं तुझे।
रश्मी;नहीं न। इसलिए तो यहाँ आई हूँ ज़रा मेरे ज़ालिम से जी भर कर ठुक जाऊँ मगर तू है की मामी के वहां जा मरा था।
देवा;इधर उधर देख रश्मि की ब्रैस्ट को मरोड़ देता है।
तू चिंता मत कर साली आज रात तेरे घर पर जी भर कर करेंगे तेरी माँ के सामने।
रश्मी;और नीलम कहाँ जाएगी।
देवा;वो तू मुझ पर छोड दे।
दोनो मुस्कुराने लगते है और देवा रत्ना से बात करने अंदर चला जाता है।