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हाय रे ज़ालिम.......complete

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अपडेट 88

देवा;नहाने चला जाता है और रत्ना परेशान हो जाती है...........

रत्ना;का ध्यान बार बार भटक रहा था एक तो वो खुद के रवैये को लेकर परेशान थी की उसे हो क्या गया है। वो जो नहीं चाहती थी वो खुद अपनी मर्ज़ी से कर रही है।

और देवा को उसकी मर्ज़ी भी करने दे रही है।

नही नहीं अब मै देवा को अपने क़रीब नहीं आने दूंगी।

वो कुछ सोच कर ये बात अपने मन में ठान लेती है।

देवा;नहाकर बाथरूम से बाहर आता है और आते ही अपनी माँ के कमर में पीछे से चिपक जाता है।

वो सिर्फ टॉवल लपेटे हुए था।

और उस टॉवल के पीछे का शैतान अपनी जगह की तलाश में रत्ना की चूतड़ पर ठोकर मारने लगता है।

अपने जज़बातों को एक तरफ रख कर रत्ना देवा की तरफ घुम जाती है।

उसकी आँखें कुछ और बता रही थी और वो कुछ और ठान चुकी थी।

देवा;क्या बात है मेरी जान।

देवा;पूरा भी नहीं कह पाता की रत्ना एक थप्पड देवा के गाल पर जड़ देती है।

देवा;की सिट्टी पिट्टी गूंज उठती है।

वो अपने गाल को सहलाते हुए रत्ना को देखने लगता है

कुछ देर पहले जो औरत अपनी चूत का मीठा पानी पीला रही थी उसे अचानक क्या हो गया है।

रत्ना;अपनी हद में रह लड़के।

आइन्दा मेरे क़रीब भी मत आया।

तो मुझसे बुरा कोई न होगा।

रत्ना की ऑंखों में उठा वो ज्वाला देवा देख लेता है और बिना कुछ बोले वापस अपने रूम में जाकर कपडे पहनने लगता है।

रत्ना;देवा के लिए खाना बनाने लगती है

उसके दिल में फिर से हलचल शुरू हो जाती है

क्या मैंने सही किया।

मुझे देवा को नहीं मारना चाहिए था।

वो मुझसे नाराज़ न हो जाए।

कही वो फिर से घर छोड कर न चला जाए।
 
कई सारे सवाल रत्ना को परेशान करने लगते है मगर उन् सब सवालों की वजह खुद देवा था।वो अपनी माँ रत्ना से प्यार की बात भी करता था और बाहर की औरतों की लेने को भी पीछे नहीं हटता था।

रत्ना; जानती थी आज मारे गए थप्पड देवा को सही रास्ती पर ले आयेगी।

और वो सिर्फ उसके और उसकी होने वाली पत्नी नीलम के बारे में सोचेगा।

देवा;कपडे पहनकर बाहर जाने लगता है।

रत्ना;अरे कहाँ जा रहा है । खाना तो खा ले।

मगर जिसके गाल पर थप्पड़ पडा हो उसे खाना भी अच्छा नहीं लगता।

देवा;सीधा अपने खेतों की तरफ बिना रत्ना को जवाब दिए निकल जाता है।

खेत में जाने के बाद अपने खेत के कुँवें पर जाकर देवा बैठ जाता है।

उसे उस वक़्त रत्न पर बहुत ग़ुस्सा आ रहा था।

आखीर उसने उसे मारा क्यों । यही बात देवा को परेशान कर रही थी।

मै माँ को इतना प्यार करता हूँ मगर माँ मुझे हमेशा परेशान करती है।

ठीक है अब माँ को बताऊंगा की मुझे उसकी नहीं उसे मेरी ज़रूरत है।

माँ नहीं चाहती न मै उसके क़रीब जाऊँ।

मै नहीं जाऊँगा।

जब तक वो खुद चल कर मेरे पास नहीं आती।

देवा;खुद से बातें करने लगता है।

इधर रत्ना की देवा की सोच से बिलकुल उलटी सोच हो रही थी।

वो देवा को नाराज़ नहीं करना चाहती थी। बस वो ये चाहती थी की देवा अपनी ज़िम्मेदारियाँ समझे। इस तरह गांव में खुले सांड की तरह न घुमता रहे।

रत्ना;अपनी सोचों में ही गुम थी की कोई उसे आवाज़ देता है।

जने पहचानी आवाज़ सुनकर रत्ना चौंक जाती है और दरवाज़े की तरफ देखने लगती है।

दरवाज़े पर तीन औरतें खड़ी थी।

ममता ;माँ......

रत्ना;ममता मेरी बच्ची आ गई तू। मै तुझे लाने के लिए देवा को आज भेज ही रही थी।रत्ना अपनी ममता को अपने ममता के आँचल में समेट लेती है।
 
कोमल;अरे समधन जी आप सोच रही थी लो हम अपनी बेटी को उसकी माँ से मिलाने ले भी आए।

रत्ना;कोमल और साथ में आये प्रिया को भी अंदर ले आती है।

उन्हें नाश्ता पानी देने के बाद वो उन्ही के पास बैठ जाती है।

रत्ना;सच में मुझे तो विश्वास नहीं हो रहा अभी भी।

की मेरी ममता मेरी ऑंखों के सामने है।

कोमल;देख लो समधन।

आपकी अपनी ममता ही है।

और हाँ ये आपकी बेटी थी अब मेरी दूसरी बेटी है।

मै ममता को प्रिया से कम थोड़े प्यार करती हूँ।

मुझे कह रही थी माँ से मिल कर आती हूँ।

मैने कहा चल मै ही तुझे वहां छोड़ आती हूँ।

एक दो दिन मै रहूँगी तुझे जितना रहना है रह लेना।

प्रिया को भी साथ ले आए।

दोनो साथ में वापस आ जाएंगी।

रत्ना;ये तो अपने बहुत अच्छा सोचा समधन।

सच में ममता को आप मुझसे ज़्यादा चाहती है। ये बात तो साबित हो गई।

रत्ना;अरे प्रिया बिटिया बड़ी गुमसुम से बैठी हो।

मगर एक बात कहूँगी बड़ी सुन्दर लग रही हो इन कपडो में। शादी में तो ठीक से मिल भी नहीं पाई थी तुम से। अब एक दो हफ्ते यही रहो मेरे पास।

प्रिया;मुस्कुरा देति है।

ममता;माँ भैया कहीं दिखाई नहीं दे रहे।

रत्ना;देवा वो अभी अभी बाहर गया है आ जायेगा।

देवा;का नाम सुनकर तीन चुतों में जैसे पानी सा आ जाता है।

अपने भाई की छिनाल बहन ममता बेक़रार थी अपने भैया यानी सैयां से मिलने को।

वही कोमल की गाण्ड भी खुल बंद हो रही थी।

उसके नीचे पिस जाने को

और जो सबसे चुपचाप बैठी थी प्रिया उसकी चूत का पर्दा सबसे ज़्यादा उतेजित था देवा को देखने के लिये।

रत्ना;समधन जी आप लोग थक गए होगे।

आराम कर लो तब तक मै खाना बना लेती हूँ।।

ममता;माँ मै तुम्हारी मदद करती हूँ।

कोमल;चल प्रिया तू भी थोड़ा आराम कर ले।

कोमल और प्रिया रूम में आराम करने चलि जाती है और ममता अपनी माँ से ससुराल की बातें करने बैठ जाती है।
 
दोनो माँ बेटी धीमी आवाज़ में खाना पकाते हुए बातें करने लगती है।

देखते ही देखते सुबह से शाम और शाम से रात हो जाती है मगर देवा का न ग़ुस्सा कम होता है और न वो घर जाता है।

रत्ना; जानती थी देवा इतनी देर नहीं लगाता। आज उसके चाँटे की वजह से देवा घर नहीं आया है उसकी चिंता और बढ़ने लगती है की तभी देवा की आवाज़ सुनकर उसकी जान में जान आती है।

देवा;जैसे ही घर में दाखिल होता है उसे बीच के रूम में प्रिया बैठे हुए नज़र आती है।

एक पल के लिए देवा ठिठक सा जाता है

ओ प्रिया को पहचान ही नहीं पाता।

सलवार कमीज में रहने वाली प्रिया आज चोली घाघरे में उसके सामने बैठी हुई थी।

उसके बाजु में कोमल और उसके पास ममता को देख देवा खुश हो जाता है । उसका सारा ग़ुस्सा जैसे उड्डन छु हो जाता है।

ममता; भइया....

वह भागते हुए आकर अपने देवा से लिपट जाती है

कोमल और प्रिया के लिए ये एक भाई बहन की मोहब्बत थी मगर देवा और ममता के लिए ये बिछड़े हुए प्रेमियों का मिलन था।

देवा;भी अपनी बहन को अपनी बाहों में समेट लेता है

कैसी है मेरी गुडिया।

ममता ;ठीक हूँ भइया।

देवा;कोमल और प्रिया के सामने अपना कोई भी राज़ नहीं खोलना चाहता था क्यूंकि उसकी कोई भी गलती ममता की आने वाली ज़िन्दगी ख़राब कर सकती थी।

देवा;ममता से अलग होकर कोमल और प्रिया से मिलता है।

कोमल के साथ साथ प्रिया की ऑंखें भी चमक उठती है। थोड़ी देर बातें करने के बाद देवा अपने रूम में चला जाता है।
 
रत्ना;देवा के लिए चाय बनाकर उसके रूम में जाने लगती है मगर ममता उसे पीछे से आवाज़ देकर रोक लेती है।

ममता;लाओ माँ भइआ को मै चाय दे आती हूँ तुम अम्मा और प्रिया के पास बैठो।

रत्ना;देवा से बात करके उसे मना लेना चाहती थी मगर जो वो चाह रही थी वो वैसे नहीं हो पा रहा था।

ममता;चाय लेकर देवा के रूम में चलि जाती है और कप टेबल पर रख कर देवा से लिपट जाती है अपने भाई के पूरे चेहरे को ममता चुमती चलि जाती है और ममता और देवा भी अपनी बहन के हर एक अंग अंग को अपने हाथों से मसलने लगता है।

ममता;भैया मेरे देवा कितनी याद आई मुझे तुम्हारी मुआहहहह मुआह....

देवा;मुझे भी तू बहुत याद आती है ममता मेरी जान।

दोनो एक दूसरे के होठो को चुमने लगते है।

ममता ;अपने भाई की मज़बूत बाहों में खुद को ढिला छोड देती है और देवा उसे बड़ी आसानी से सँभाल लेता है।

देवा; ये बता तेरी सास और ननद यहाँ कैसे।

ममता ;अम्मा तो मुझे यहाँ छोडने आई है वो दो दिन बाद चलि जाएगी।

प्रिया यहीं रुकेंगी और मेरे साथ बाद में जाएंगी।

देवा;और सुना सब कैसे चल रहा है वहाँ।

ममता; तुम्हारे बिना कैसे चल सकता है भइया।

सब है वहां मगर जहाँ तुम नहीं वहां मुझे अधूरापन लगता है।

देवा;फिर से अपनी बहन को अपनी बाहों में जकड लेता है ।कोई बात नहीं आज तुझे जम कर पुरानी बातें याद दिला दूँगा।

ममता;नहीं नहीं अभी नहीं। अम्मा के जाने के बाद

वरना मेरा जीना मुश्किल हो जाएगा वहां....

अम्मा के जाने के बाद जो करना है करो जैसे करना है करो।

बस दो दिन और.....

देवा;दिल ही दिल में सोचने लगता है चलो अच्छा हुआ तूने खुद कह दिया वैसे भी दो दिन देवा का पूरा ध्यान कोमल की मोटी गाण्ड और चूत मारने पर था ।

ममता ;क्या सोच रहे हो।

देवा;कुछ नहीं तू जा। मै आता हूँ।

ममता बहार चलि जाती है और देवा अपने लंड को सहलाते हुए कुछ सोचने लगता है।
 
कुछ देर बाद देवा बाहर आकर कोमल और प्रिया के पास बैठ जाता है और उनसे हँस हँस के बातें करने लगता है । वो रत्ना को ऐसे बता रहा था जैसे उसे रत्ना की कोई परवाह ही नहीं है और ममता के आ जाने से उसे सारी खुशियाँ मिल गई है।

रत्ना;दूर से ये सब देख अंदर ही अंदर जल भून रही थी। जब से देवा घर आया था उसने रत्ना की तरफ एक बार भी नहीं देखा था न उससे कोई बात किया था।

बस ममता और कोमल में खोया हुआ था देवा।

औरत चाहे कोई भी हो जब वो किसी से प्रेम करने लगती है तो वो बस ये चाहती है की उसका प्रेमी सिर्फ उसे देखे उससे बात करे और किसी भी दूसरी लड़की की तरफ आँख उठाकर भी न देखे मगर देवा वो सब कर रहा था जिस चीज़ से औरतों को नफरत होती है।

रत्ना;खाना खाने का मन नहीं है क्या।

ममता ;अरे हाँ देखो न माँ । भैया की बातों में कुछ याद नहीं रहा।

चलिये खाना खा लेते है।

प्रिया आओ।

ममता अपनी सास और प्रिया को खाना खाने ले जाती है। उनके जाने के बाद रत्ना देवा के पास आकर बैठ जाती है।

देवा;उठकर जाने लगता है मगर रत्ना उसका हाथ पकड़ लेती है।

मुझे तुमसे बात करनी है।

देवा;कुछ नहीं कहता।

रत्ना;सुन रहे हो न तुम।

देवा;नहीं मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी।

दूर रहना चाहती हो ना तुम मुझे। ठीक है दूर रहूँगा मै भी।

देवा ये केहकर कोमल और ममता की तरफ चल देता है और रत्ना की ऑंखों में हज़ारों दिए टिमटिमा जाते है।

कहते है मोहब्बत इम्तहान लेती है।

कभि कभी मोहब्बत करने वालों की जान भी लेती है।

यहाँ सवाल जान का नहीं था।

मगर देवा की हरकतें रत्ना को तिल तिल मार ज़रूर रही थी।

मेहमान घर में थे। इसलिए रत्ना कुछ कह भी नहीं सकती थी।

मगर देवा की बेरुख़ी उसे अंदर ही अंदर खाए जा रही थी। उसे एक और डर सताने लगा था की ममता के आ जाने से देवा उसे सच में भूल न जाए।

मगर देवा के दिल का हाल सिर्फ देवा जानता था और कोई नही।

रात के खाने के बाद ममता अपनी माँ के रूम में सोने चली जाती है। देवा अपने रूम में और कोमल प्रिया के साथ एक रूम में सोने।
 
अब आगे क्या होगा? जानने के लिए पढ़ते रहिये।

बहुत सारे कमेंट और के लिए थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अपडेट भी प्रतिदिन देने की मैं कोशिश करूँगा।कहानी आपलोगों को कैसी लगी ।अपने विचार अवश्य दें।thanks
 
अपडेट 89

सभी अपने अपने रूम में सोने चले जाते है।

सफर की थकान काफी थी ममता को इसलिए वो थोड़े देर अपनी माँ से बातें करने के बाद नींद के आग़ोश में चलि जाती है।

मगर रत्ना की आँखों से नींद ग़ायब हो चुकी थी।

वो औरत जिसका सब कुछ देवा था उसका अपना बेटा

आज वही देवा उस से नाराज़ हो चूका था।

और ऐसा भी नाराज़ की अपनी रत्ना की तरफ एक नज़र देखने को भी तैयार नहीं था वो ज़ालिम।

रत्ना;अपने बिस्तर से खडे हो जाती है और किचन में आकर एक गिलास में दूध लेकर देवा के रूम की तरफ चलि जाती है।

दरवज़ा अंदर से बंद नहीं था वो थोड़ा सा धक्का देती है जिससे दरवाज़ा थोड़ा सा खुल जाता है।

रत्ना;अंदर देखती है कहीं देवा सो तो नहीं गया।

मगर जो उससे दिखाई देता है वो देख उसका जिस्म थरथरा जाता है। उसके हाथ में मौजूद दूध का गिलास छलक जाता है।

अंदर देवा बिलकुल नंगा लेटा हुआ था अपने लंड को सहलाते हुए।

मोटा लम्बा काला पूरी तरह खड़ा

अपना पूरा फन फ़ैलाये अपने शिकार को डँस लेने के लिए बेक़रार।

देवा का वो जवान फौलादी लंड उसके हाथ में से बाहर निकल कर फुंफकार रहा था।

रत्ना; चूत की मारी थी पति का लंड बहुत कम दिन मिल पाया था उसे और अब जब अपनी जवानी के वही दिनों में लौटने लगी थी तो देवा उससे नाराज़ हो गया था।

अपने धड़कते हुए दिल को क़ाबू में रख कर रत्ना ज़ोर से खंखारती है जिससे देवा चौंक जाता है और अपने लंड पर कंबल डाल देता है।

देवा;कौंन...

रत्ना;कांपते पैरों से अंदर चली आती है।

हुश्न की मल्लीका अपने पूरे शबाब में देवा के सामने मौजूद थी।

रत्ना का बदन थोडा भी ढिला नहीं था।

जिस औरत को बहुत दिन से लंड न मिला हो वो कस जाती है।

उसकी चूत भी आपस में चिपक सी जाती है।

मखमली सफेद बदन उस पर सामने की तरफ लटकते हुए वो खूबसूरत रेश्मी चूचियां देख एक पल के लिए देवा के अंदर का जानवर उससे कहता है।
 
देख क्या रहा है मादरचोद चल खीच ले उसे बिस्तर पर और मसल दे।

मगर देवा जानता था जितनी दूरियां वो बढ़ायेंगे उतनी ही क़रीब रत्ना आती चलि जाएगी।

देवा;कुछ नहीं कहता।

रत्ना;आगे बढ़ती है और अपने हाथ में का गिलास उसके पास की टेबल पर रख देती है।

तूमने खाना बहुत काम खाया था। दूध पी लेना और कुछ चाहिए क्या।

देवा;ख़ामोश रहता है और उसकी ख़ामोशी रत्ना को बता देती है की रूम के बहार चलि जाओ।

कुछ देर और देवा के शब्द सुनने के लालच में रत्ना वही खड़ी रहती है मगर देवा कोई जवाब नहीं देता।

आखीरकार रत्ना उलटे पांव अपने रूम में चलि जाती है।

रात घिरने लगती है चारों तरफ सन्नाटा पसर जाता है। उसी सन्नाटे में चोदु लंड खड़ा हुआ करते हैं।

देवा;अपने बिस्तर से खड़ा हो जाता है और चुपचाप दबे पांव कोमल के रूम की तरफ बढ़ जाता है।

ठंढ काफी बढ़ चुकी थी इसलिए कोमल और प्रिया अपने अपने रज़ाई में दूबक कर सोई हुई थी।

देवा; धीरे से कोमल के पास जाकर बैठ जाता है।

कहते है चूदी हुई चूत जल्दी सो जाती है और जवान कुँवारी चूत हो या लंड रात में बहुत देर से सोते है।

प्रिया का भी यही हाल था अपनी चूत खुलने के दिन गिनते प्रिया को नींद नहीं आ रही थी मगर जैसे ही देवा के क़दमों की आवाज़ उसे सुनाई देती है वो अपनी आँखें बंद कर लेती है।

कोमल;इतनी दूर से यहाँ सोने नहीं आई थी

बल्कि अपने देवा से चुदने आई थी।

देवा;अपना हाथ कोमल की कमर पर रख कर उसे दबाने लगता है।

ठंडी के दिनों में अपने नरम कमर पर गरम हाथ पडते ही कोमल सिहर उठती है।

वो गर्दन घुमा कर देवा की तरफ देखती है।

उसकी आँखें रात के अंधरे में भी चमक रही थी।और उन नशीली आँखों में बस एक इल्तिजा थी की ज़ालिम

चोद दे मुझे रात भर।

कोमल;अपनी कोमल बाहें खोल देती है और देवा उस से लिपटता चला जाता है।
 
देवा;बड़ी याद आती है मुझे तेरी।

कोमल; शी शी धीरे बेटा प्रिया जग जाएगी ना।

देवा;अपने हाथों से कोमल की साडी ऊपर चढाने लगता है और उसे कमर के ऊपर तक चढा कर अपना हाथ उसकी पेंटी में डाल देता है।

कोमल;आहह आते ही शुरु हो गया । बड़ा ज़ालिम है तू उहननन।

देवा;तेरी कमर इतनी प्यारी है ना काकी मेरा लंड कब से खड़ा हुआ है तुझे देख कर। बस घर वालों के सोने का इंतज़ार कर रहा था की कब सब सोते है और कब मै तेरी चूत और गाण्ड में लंड अटकाए तुझे चोदता रहूँ।

कोमल;आहह मै भी तो कब से रास्ता आहह देख रही हूँ बेटा तेरा उन्हह।

देख न तेरी काकी इतनी दूर से तेरे लिए आई है। आ

मिटा दे जन्मों की प्यास मेरी आह्ह्ह्ह।

दोनो की आवाज़ सुनकर प्रिया के कान खड़े हो जाते है और जोश के मारे उसकी साँस भी फुलने लगती है।

जिसकी वजह से उसे ठसका लग जाता है।

वो खाँसते हुए उठ कर बैठ जाती है।

कोमल अपने और देवा के ऊपर कंबल खीच लेती है

क्या हुआ बिटिया।

प्रिया; उहहू हु

कुछ नहीं माँ.....

वो फिर से दोनों की तरफ मुँह कर के लेट जाती है।

राजाई के अंदर भी देवा एक मिनट के लिए चैन से नहीं रहता वो अपना लंड पायजामे में से बाहर निकाल लेता है और उसे कोमल के हाथों में थमा देता है।

गरम लोहे के रॉड की तरह तना हुआ देवा का लंड हाथ में तो कोमल के आ जाता है मगर बिटिया न जग जाए ये डर भी सताने लगता है । क्यूंकि जब देवा चोदता था तो औरत कितनी भी बड़ी रंडी क्यों न हो उसकी चीखें निकल ही जाती थी।

कोमल;धीरे से देवा के कान में लंड को सहलाते हुए कहती है।

अभी नही ना प्रिया जग सकती है।

मगर देवा किस की सुनता था वो अपने होठो को कोमल के होठो पर रखकर दोनों हाथों से उसकी चुचियों को मसलने लगता है।
 
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