कोमल डर भी रही थी और चूत गरम भी हो रही थी एक तरफ चूत की आग थी दूसरी तरफ बेटी के जग जाने का डर था।
देवा के हाथ अपना जादू दिखाने लगते है और ठण्डा पड़ चूका शोला फिर से भड़क उठता है कोमल की चूत में भी आग के शोले जल उठते है और वो भी अपने ज़ुबान देवा के मुँह के अंदर तक डालकर उसका मुँह गीला करने लगती है गलप्प गलप्प
गलप्प उहन गप्पप्प गलप्पप्प।
देवा;अपना पैजामा उतार देता है
और कोमल अपनी साडी को जिस्म से अलग कर देती है
देखते ही देखते दोनों जोश में आकर पूरे नंगे हो जाते है।
अब कोमल को न प्रिया की मौजूदगी की चिंता थी और न अपने बहु के घर में चुदवाने का डर।
वो नंगी हो चुकी थी और जब औरत खुद से पूरी नंगी होती है उसका मतलब एक ही होता है की वो रात भर खुलकर अपनी कमर उछाल उछाल कर अपने प्रेमी से चुदवाना चाहती है।
कोमल;देवा के लंड की तरफ झुकती है और देवा दोनों हाथों में कोमल की कमर को थाम कर अपना मुँह उसकी बडी सी गाण्ड के पीछे छुपी चुत पर लगा देता है
दोनो एक दूसरे को चाटने लगते है।
जहां देवा का लंड कोमल के मुँह में और मोटा होने लगता है वहीँ कोमल की चूत भी सुलगती जाती है और देवा अपनी ज़ुबान को अंदर डाल कर उस आग में घी का काम करने लगता है गलप्प गलप्प्प।
कोमल;गलप्प आज नहीं सोने दूंगी बेटा गलप्प
इस लंड ने तो मुझे वहां से यहाँ लाया है गलप्प
आज नहीं गलप्प गलप्प्प।
देवा; थपाक करके एक ज़ोरदार थप्पड कोमल की गाँड पर जड़ देता है।
साली बहुत बड़ी छिनाल है तू कोमल।
कोमल ;हाँ छिनाल हूँ मै मगर बस तेरी गलप्प गलप्प।
तेरे लंड की दिवानी हूँ मै गलप्प
रंडी हूँ मै अपने देवा की गलप्प गलप्प।
पास में चुप चाप लेटी हुई प्रिया की ऑंखों में नशा ही नशा चढ़ने लगता है । उसके हाथ खुद ब खुद अपनी चुचियाँ और चूत की तरफ बढ़ने लगते है जवान चूत के सामने चुदाई हो और वो खामोश रहे ऐसा हो ही नहीं सकता।
न देवा का लंड बर्दाश्त कर पा रहा था और न कोमल की चूत दोनों बेक़रार थे जल्द से जल्द एक दूसरे में घुस जाने को।
देवा ;कोमल को चित लिटा देता है उसकी दोनों टांगों को अपने कन्धे पर रख कर अपने लंड को कोमल के क्लाइटोरिस जिसे गांव वाले छूट का दाना कहते थे। उस पर घीसने लगता है।
पहले ही गरम हो चुकी उस चूत में ऐसी सरसराहट सी होती है की कोमल अपने बाल खीचने लगती है।
कोमल कमर को लंड तक मिलाने के लिए ऊपर की तरफ उठाने लगती है मगर वो ज़ालिम अभी ज़ुल्म करने को तैयार नहीं था और मज़लूम जो था वो चाहता था की उस पर जबरन ज़ुल्म किया जाए।
उस पर उसकी चूत पर वो कहर बरपा किया जाए जिस से उसकी चूत कई दिन तक लंड का नाम न ले।
कोमल;आहह।
चोद ना बेटा।
इतनी दूर से चुदवाने आई है तेरी कोमल तुझसे आहह
तू है की ड़ालता नही।
देवा;अपने लंड को ठीक कोमल की चूत पर लगा देता है कोमल अगले पल का इंतज़ार करने लगती है की कब वो अंदर जाए और उसे चैन आए।
देवा;गर्दन घुमा कर प्रिया की तरफ देखता है प्रिया के आँखें भी उस वक़्त उसी जगह टीकी हुई थी जहाँ देवा का लंड रुका हुआ था।
देवा;सट करके एक धक्के में आधे से भी ज़्यादा लंड कोमल की गीली चूत में उतार देता है।
पक्क की आवाज़ से कोमल की चूत खुलती है और लंड चूत को चीरता हुआ अंदर घुस जाता है इधर चूत और लंड का मिलाप होता है उधर एक
दबी दबी सी चीख प्रिया के मुँह से निकल जाती है।
बस उसी पल देवा और प्रिया की आँखें टकराती है।
एक बेशरम सी हंसी देवा के चेहरे पर देख प्रिया बुरी तरह शरमा जाती है।
और उसकी नज़रें झुकती चली जाती है।
कोमल;आहह मेरी चूत में से रात भर मत आहह निकालना देवा।
बस ऐसे ही ऐसे ही उई माँ ड़ालता जा रे
अंदर तक आहह आह्ह्ह्ह।
देवा;देखती जा मेरी जान।
देवा रात भर तेरे साथ क्या करता है।
तेरा यहाँ आना बेकार नहीं जाने दूंगा।
चुदाई की तो अभी शुरुवात हुई थी।
रात भी अभी जवान हुई थी।
लंड का चूत से अभी मिलाप हुआ था।
एक माँ अपने जवान बेटी की आँखों के सामने कमर उठा उठा कर चुदवाना चाहती थी।
ज़ालिम अपने ज़ुल्म से बाज़ नहीं आ रहा था वो लगातार अपने लंड को कोमल के चूत की गहराईयों में उतारता चला जाता है।
हर धक्का किसी हथोड़े की तरह कोमल की चूत पर बरसाने लगता है।
कोमल;आहह बस आह्ह्ह आज लगता है मार देगा मुझे तू । आह्ह्ह्ह्ह्।
देवा;आह्ह्ह्ह साली अपने सांड से चुदवाने आई है ना तो इतनी जोर से अब क्यों चिल्ला रही है।
वो दोनों ये भूल गए थे की रूम में एक जवान लड़की भी मौजूद है।
जो आँखें बंद करके सब सुन रही है और जितना अंदर देवा का लंड जा रहा था कोमल की चूत में। उससे भी ज़्यादा तेजी से प्रिया अपनी चूत को रगडने में लगी हुई थी।
एक बेटी के सामने उसकी माँ चुद रही थी वो भी अपनी कमर उछाल उछाल कर।
ये नज़ारा बहुत कम देखने सुनने को मिलता है मगर प्रिया वो लड़की थी जो ये सब देख रही थी।
उसे अपनी माँ पर आज ग़ुस्सा नहीं आ रहा था बल्कि वो जलन महसूस करने लग गई थी अपनी माँ से की काश वो कोमल की जगह लेटी होती और वो मुस्सल उसके ओखली में अंदर बाहर जा रहा होता।
कमल;उईइइइइ माँ।
रूक़ भी जा ना बेटा
दूख़ता है ना इतने अंदर तक मत पेल उसे आह्ह्ह्ह्ह्
ओह्ह्ह्ह्ह।
देवा;दोनों टाँगें खोल देता है कोमल की और अपने लंड को उसकी बच्चेदानी तक पेलने लगता है।
पच पच खच खच की आवाज़ें रूम में गूँजने लगती है।
कोमल;अपने मुँह में अपनी पेंटी ठूँस लेती है।
वो जानती थी की ये नहीं रुकने वाला और इस पर किसी के बात का भी कोई असर नहीं होगा।
वो गुं गुं की आवाज़ के साथ झरने लगती है।
चुत से पानी का फव्वारा बहने लगता है और उस पानी से देवा का लंड नहाने लगता है।
प्रिया;झटके से अपनी कमर को थोड़ा सा अनजाने में ऊपर की तरफ उठाती है।
एक सिसकी उसके मुँह से निकल पडती है।
देवा;समझ जाता है लौंडिया बहुत गरम है।
मगर उस वक़्त प्रिया के साथ कुछ करना मतलब बिल्ली के गले में घंटी बाँधने जैसा था।
देवा;धीरे से प्रिया के कान के पास जाकर कहता है
तेरी चूत की महक बहुत अच्छी है।
ज़रा तेरी माँ की चूत की महक कैसी है बता मुझे।
ये कहकर देवा अपने लंड को प्रिया के होठो के क़रीब ले जाता है और उसे प्रिया के होठो पर घीसने लगता है।
चूत घिस घिस कर प्रिया की आधी शर्म तो चलि गई थी और आधी अपनी माँ और देवा की चुदाई देख कर।
वो आँखें नहीं खोलती मगर जो खोलना होता है वो ज़रूर खोल देती है।
हल्के से वो अपना थोड़ा सा मुँह खोल देती है और उस छोटे से सुराख़ को बड़ा करना देवा जानता था।
वो अपने लंड को प्रिया के मुँह के अंदर सरकाता चला जाता है।
नमकीन सा पानी जैसे ही प्रिया की ज़बान से लगता है प्रिया का तन बदन फडक उठता है और उसकी आँखों में वही नज़ारा फिर से आ जाता है जब उसकी माँ पैर पसारे देवा से चुद रही थी।
वो सब भूल जाती है और पहली बार किसी मरद के लंड पर अपनी ज़ुबान फेरती है।
वो देवा के लंड को चाटना चाहती थी । उससे मुँह में भर कर चुसना चाहती थी मगर तभी दोनों को कोमल के क़दमों के आवाज़ सुनाई देती है और देवा अपना लंड बाहर निकाल लेता है और प्रिया से अलग हो जाता है।
कोमल;कमर मटकते हुए देवा के क़रीब आ जाती है।
तब तक प्रिया अपने सर के ऊपर कंबल ओढ़ चुकी थी।
कोमल;देवा का हाथ पकड़ के उसे बिस्तर पर चलने की लिए कहती है मगर देवा उसे वहीँ प्रिया के बगल में लिटा देता है।
कोमल;धीमी आवाज़ में
प्रिया जाग जायेगी ।
देवा;मुझे नहीं पता।
वो कोमल को लिटा देता है और झट से अपना मुँह उसकी चूत से लगा कर अपनी ज़ुबान को उसकी चूत में डालकर चाटने लगता है।
देवा;यही तो चाहता था की कोमल उसकी बेटी के पास में लेट कर चुदे।
जीससे प्रिया की चूत में और ज़्यादा चिंगारियाँ पैदा हो जाएँ और होता भी वही है थोडी देर की चूत चटाई से ही कोमल की चूत का दाना भी मोटा होकर देवा के लंड को अपने अंदर बुलाने लगता है मगर देवा उसकी चूत की तरफ देखता भी नहीं बल्कि कोमल को कुतिया बना देता है और सटा सट दो तीन थप्पड कोमल की गाण्ड पर जड़ देता है।
आंखों में आँसू लिए कोमल देवा के तरफ गर्दन घुमा कर देखने लगती है।
देवा;अभी कहाँ रो रही है मेरी जान अभी तो मैंने तुझे वो दर्द दिया भी नही।
कोमल;इशारे से ना कहती है मगर अगले ही पल उसे देवा की बात सच होते हुए लगती है।
देवा का लंड उसकी चूत की बजाये गाण्ड के सुराख़ पर घीसने लगता है और कोमल समझ जाती है । ये ज़ालिम क्या चाहता है।
मगर देवा भी कोमल की कोमलता से अन्जान था।
जैसे जैसे देवा अपने लंड को कोमल की गाण्ड पर रगडने लगता है वैसे वैसे कोमल भी अपनी कमर पीछे की तरफ झुकाते चलि जाती है और दोनों टाँगें इतनी चौडी कर देती है की देवा के मोटे लंड से गाण्ड का सुराख़ आसानी से खुल जाए।
कोमल;आजा मेरे कुत्ते मार अपनी कुतिया की गाण्ड ज़रा दबा कर।आह्ह्ह्ह्ह्ह।
देवा;सच में उसी पल अपने लंड को कोमल की गाण्ड में उतार देता है दोनों हाथों में बड़ी सी कोमल की कमर को पकड़ कर वो अपने लंड को मोटी गाण्ड के छोटे से सुराख़ में उतार देता है।
और खचा खच सटा सट की आवाज़ें फिर से रूम में गूँजने लगती है मगर इस बार कोमल ज़्यादा चिल्ला नहीं रही थी बल्कि अपनी कमर को पीछे की तरफ धकेल कर देवा के लंड से अपनी गाँड मरवाने का आनन्द ले रही थी।
जीससे देवा समझ जाता है की इस कुतिया को गाण्ड मरवाना ज़्यादा अच्छा लगता है अगर इसकी बेटी भी इसके जैसी होगी तो मजा आ जाये। ये सोच सोच कर ही उसका लंड फुलने लगता है और वह कुतिया बनी कोमल की गांड को खोलता चला जाता है।
देवा प्रिया को दिखा दिखा कर उसकी माँ कोमल को किसी रंडी की तरह चोदने लगता है कभी गांड तो कभी चूत तो कभी मुँह।जब अगली बार देवा अपना लंड कोमल की गांड में पेलता है तो कुतिया बनी कोमल झड़ने लगती है और बेसुध हो जाती है और इधर देवा कोमल की गांड मारते हुए उसकी बेटी प्रिया की चूचियों को मसलने लगता है।जिससे देवा का लंड और आक्रामक हो जाता है।
कोमल की गाण्ड उस लंड को अपने फँदे में फँसा लेती है और ऐसे फँसाती है की सुबह होने से कुछ देर पहले कोमल और देवा एक दूसरे से अलग होते है।
देवा;नहाने चला जाता है और जब वो बाहर आता है तो उसे ममता और प्रिया कहीं जाते हुए नज़र आते है।
देवा;कहाँ जा रही हो तुम दोनो।
ममता ;ओफ़ हो भाई नूतन से मिलने जा रही है और कहाँ जाएंगी।
देवा;ठीक है जा।
ममता और प्रिया चली जाती है।
देवा;सोचने लगता है की उसे भी तो नूतन से मिलना था।
वो जल्दी जल्दी अपने कपडे पहनने लगता है और जब वो तैयार होकर बाहर आता है तो रत्ना उसके सामने आ जाती है। वो बाजु से जाने लगता है मगर रत्ना उसे जाने नहीं देती।
देवा रत्ना को घुरने लगता है।
देवा रत्ना से नाराज़ था और उससे बात नहीं कर रहा था मगर रत्न देवा को किसी भी कीमत में मनाना चाहती थी।
रत्ना;की आँखों में आये आँसू देवा देख चुका था।
रत्ना;ऐसा मत कर मेरे साथ। तू जानता है तेरे सिवा मुझे कोई नहीं भाता देवा। मुझसे बात बंद करके तुझे क्या मिलेगा।
देवा;तुम भी खुश रहोगी और मै भी।
रत्ना;मुझसे बात न करके तू खुश है।
देवा;हाँ खुश हूँ मै । कम से कम कोई अपने जवान औलाद को तमाचा तो नहीं मारता न।
जाने दो मुझे हटो सामने से।
रत्ना;नहीं। नहीं जाने दूंगी आज अगर तू नहीं माना तो मै अपने आप को कुछ कर लुंगी।
देवा;क्या करोगी।
रत्ना; कुछ भी ....देख मै सब कुछ बर्दाश्त कर सकती हूँ मगर तेरी बेरुख़ी नही।
देवा :क्यूँ क्यों नहीं बर्दाश्त कर सकती।
रत्ना;क्यूंकि मैं.....
क्यूंकि मैं......
मै तेरी माँ हूँ।
वो दिल की बात नहीं कह पाती और देवा को इस बात पर और ग़ुस्सा आ जाता है।
वो रत्ना का हाथ पकड़ के उसे अपने सामने से हटा देता है।
रत्ना; इतनी बेरुखी देख अपनी आँसू नहीं रोक पाती और फूट फूट कर रोने लगती है।