अपने खवाबों में देवा की तस्वीर संजोती हुई रत्ना जब देवा को इस तरह घबराया हुआ देखती है तो फ़ौरन बिस्तर से उठ कर खड़ी हो जाती है।
रत्ना;क्या हुआ रे इतना घबराया हुआ क्यों है।
देवा;माँ मुझे अजीब सी आवाज़ें सुनाई दे रही है
जो मुझे दिखाई देता है वो किसी को दिखाई नहीं देता।
पता नहीं मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है।
रत्ना;तू यहाँ आकर बैठ और आराम से बता हुआ क्या। कोई जंगली जानवर देख लिया क्या तूने।
देवा;रत्ना की साडी से अपना चेहरा साफ़ करता है और धीरे धीरे उसे सारी घटना सुना देता है।
रत्ना;देख देवा मुझे लगता है थकान की वजह से तुझे वहम हो गया है। ऐसा कुछ भी नहीं है बेटा।
देवा;नहीं वो मेरा वहम नहीं है मुझे साफ़ साफ़ वो तीनो लोग दिखाई देते है और फिर ग़ायब हो जाते है।
कल मै हवेली जाकर वही खुदाई करुँगा और देखूँगा की बात आखिर है क्या।
रत्ना; मैं तुझे अकेला नहीं जाने दूंगी। मै भी तेरे साथ चलुंगी।
देवा;कुछ नहीं कहता और अपने रूम में आकर बिस्तर पर लेट जाता है।
आज उसका दिल किसी काम में नहीं लग रहा था और खास कर उसका पसंदीदा काम चूत की घिसाई जब की ममता और प्रिया दोनों रूम में तैयार थी और बड़ी बेसब्री से देवा का इंतज़ार भी कर रही थी की कब देवा रूम का दरवाज़ा खोलेगा और कब अपनी हैवानियत उन दोनों पर बरपा करेंगा।
मगर देवा कुछ और ही सोच रहा था।
उधर रत्ना भी देवा की बात सुनकर परेशान सी हो गई थी । उसे ये डर सताने लगा था की कहीं देवा पर किसी ने कोई जादू टोना तो नहीं कर दिया।
कही वो देवा को भी खो न दे जैसे कई साल पहले देवा का बाप ग़ायब हुआ था उसी तरह कहीं देवा भी ग़ायब न हो जाए।
जब से तुझे माँ के साथ और फिर तेरी बहन के साथ देखी हूँ तब से मेरा बदन मेरा साथ नहीं दे रहा । मुझे हर पल हर घडी तेरे जिस्म की चाह सता रही है।
जीस तरह तूमने अपनी सगी बहन को कस कर चोदा था सुबह। क्या मुझे एक बार करोगे। सच कहती हूँ दासी बन कर रहने को तैयार हूँ तेरी। तू जो कहेंगा वो करुँगा बस एक बार मेरा बदन ढीला कर दे।
देवा; जोर से एक तमाचा प्रिया की नंगी कमर पर जड़ देता है।
साली छिनाल आखिर अपनी माँ की तरह तू भी आ गई अपनी चूत लेकर। जा नहीं करता क्या कर लेगी।
प्रिया;एक हाथ से देवा का पैजामा खोल देती है और झट से देवा का आधा खड़ा लंड अपने हाथ में पकड़ लेती है।
क्यूं ये लंड सिर्फ बहन की चूत के लिए है क्या।
हमारा दिल करे तो हम किसके पास जायें।
देवा;अपने दोनों हाथों में प्रिया की कमर को पकड़ कर उसे मसलने लगता है
क्यूं तेरा भाई भी तो तेरी लेता है जा न उसके पास।
प्रिया :आह अगर मेरे भाई में तेरे जैसी बात होती तो मै यहाँ नहीं होती मेरे भैया के नीचे होती।
वहाँ तेरी बहन को एक दिन भी मेरे भाई के साथ सोने नहीं दूंगी अगर मुझे तडपता छोड दिया तूने तो....
देवा;तेरी माँ की गांड माँरू साली मुझे धमकी देती है।
चल मुँह खोल और चाट जा पूरा का पूरा तेरी माँ तो गाण्ड उछाल उछाल का लेती थी। देखता हूँ तू किसकी बेटी है तेरी माँ की या किसी और की।
प्रिया;नीचे झुकति चली जाती है और देवा के पायजामे को उसके बदन से अलग कर देती है।
पहले से ही आधा खड़ा लंड प्रिया के नाज़ुक से हाथों में आ जाता है।
वैसे तो प्रिया इतनी बड़ी चुदकड़ औरत नहीं थी जितनी की उसकी माँ कोमल थी।
मगर दोनों में एक बात सामान थी। दोनों की कमर पीछे की तरफ निकली हुई थी। इस से पता चलता था की दोनों को पीछे से मरवाना ज़्यादा पसंद है।
चूत एकदम साफ़ थी और बड़े बड़े निप्पल्स के साथ प्रिया के दोनों ब्रैस्ट दूध की धार बहाने को तैयार थे।
देवा;अपने लंड को अपने हाथ में लेकर प्रिया के मुँह के सामने हिलाता है जैसे उसे ललचा रहा हो।
वो झट से देवा के दोनों टेस्टीस को पकड़ लेती है और अगले ही पल देवा का लंड अपने मुँह में लेकर अंदर तक खीचते हुए चाटने लगती है गलप्प गलप्प गलप्प।
देवा;तेरी माँ की चूत। तेरी माँ भी ऐसे ही है दोनों छीनाल हो तुम आह्ह्ह्ह।
प्रिया;बेटी किसकी हूँ गलप्प गलप्प गलप्प्प।
वो लंड चूत की खुश्बू सूंघ कर ही खड़ा हो जाया करता था। आज तो शिकार चल कर खुद सामने से आया था। भला आज देवा कहाँ रुक्ने वाला था। हालाँकि सुबह से वो रुक्मणी और ममता को एक एक बार चोद चूका था मगर जब प्रिया अपनी गाण्ड मटकाते हुए उसके बिस्तर पर आकर लेटी तो जवान लंड में फिर से सरसराहट होने लगी थी।
वो बढ़ते बढ़ते प्रिया के हलक में अटकने लगता है और प्रिया से उसे और अंदर लेना मुश्किल हो जाता है मगर फिर भी प्रिया उसे अपने मुँह से बाहर नहीं निकालती और चाटते चलि जाती है।
देवा थका हुआ था वो प्रिया को और मेहनत नहीं करने देता और उसे अपने नीचे खीच लेता है।
देवा;साली बड़ी नरम है तू तो....
तेरी चूत कैसी है देखना पडेगा।
प्रिया;गरम साँसें देवा के चेहरे पर छोड़ने लगती है उसकी साँस फूल चुकी थी और बदन की गर्मी धीरे धीरे चूत के रास्ते बाहर निकलने को बेताब थी।
चूत तुम्हारे पास है लंड घुसा कर देख लो कैसी है।
देवा;अपने होठो से प्रिया के मुँह को दबा देता है और दोनों हाथों से प्रिया के मोटे मोटे ब्रैस्ट को मसलते हुए अपने लंड का पहला धक्का उसकी चूत में मार देता है।
वो चीखती है मगर आवाज़ बाहर नहीं निकल पाती। उसकी चूत चीर जाती है और कमर ऊपर की तरफ उठने लगते है।
चुत को वो लंड अपने अंदर फिट करने में वक़्त लगता है वो जैसे ही सुकून की साँस लेती है दुसरा ज़ोरदार धक्का जो सीधा बच्चेदानी से जा टकराता है।
प्रिया;की आँखें बंद हो जाती है और देवा अपना पूरा वजन प्रिया के ऊपर डाल कर धप्पा धप धप्पा धप अपने लंड से प्रिया की चुदाई शुरु कर देता है
हाँफते हुए प्रिया भी पीछे हटने वालों में से नहीं थी । वो भी अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठा कर देवा के लंड को टक्कर देने लगती है।
देवा;अपने लंड को जितनी अंदर उतारता है प्रिया भी उतने ऊपर अपनी कमर को उठाती चली जाती है।
देवा; छिनाल साली बहुत छोटी सी है तेरी चूत आहह लंड मेरा दुखने लगा है।
प्रिया;तेरे पास इसलिए तो आई हूँ अपनी ओखली खुलवाने। आहह ऐसा चोद मुझे रात भर की कभी न भूल पाऊँ ये रात मै । आहह मुझे भर दे अंदर तक देवा आहह। वह अपने हाथों के नाख़ून से देवा की पीठ को दबोच लेती है और देवा अपने लंड से उसकी चूत को पानी पानी करने पर उतावला हो जाता है।
पुरे रूम में घच घच घच की आवाज़ें गूँजने लगती है।
कुछ देर पहले जहाँ सन्नाटा पसरा हुआ था । अब वही सिसकारीयों की आवाज़ें गूँजने लगती है।
प्रिया;आहह मेरे राजा ऐसी चुदाई आज से पहले किसी ने नहीं की मेरी आहह आज मरद का एहसास हो रहा है उन्हह उधेड़ कर रख दे मुझे अंदर तक।
आह्ह्हह माँ वो उह्ह्ह्ह।
देवा के धक्के जानलेवा होते थे।
वो जब अपनी पूरी ताकत से किसी औरत पर सवार होता था तो औरत मूत देती थी।
आज प्रिया का भी वही दिन था वो अब तक मुती तो नहीं थी मगर चूत का गाढा गाढा पानी अभी से चूत से बाहर बहने लगा था और उस चिकनाहट से लंड को बड़ी आसानी हो रही थी अंदर बाहर आने जाने में।
देवा की रफ़्तार बढ़ने लगती है और प्रिया की साँसें और ज़्यादा फुलने लगती है।
होंठो से होंठ ऐसे मिलते है जैसे बचपन के बिछडे हुए दो लोग मिल रहे हो।
न देवा रुकने को तैयार था और न प्रिया उसे रोकने को।
पिछले 20 मिनट से दोनों बस एक दूसरे से चिपके अपनी अपनी आग ठन्डी करने में लगे हुए थे।
आखीर प्रिया की हिम्मत जवाब दे जाती है और वो चीखते हुए अपनी चूत का ढेर सारा पानी देवा के लंड पर उंडेल देती है।
देवा भी उसके पीछे पीछे अपने लंड का पानी वही चूत के अंदर निकाल कर लम्बी लम्बी साँसें लेने लगता है।
उनकी आँखों से साफ़ लग रहा था की वो दोनों क्या चाहते है।
प्रिया;फिर से देवा के लंड को अपने मुँह में लेकर उसे दूबारा खड़ा करने में लग जाती है और इस बार देवा भी प्रिया को घुमा कर उसकी चूत और गाण्ड दोनों चाटने लगता है।
दोनो फिर से उसी काम में लग जाते है और रात से सुबह कब होती है दोनों को पता नहीं चलता।
जब सुबह की पहली किरण दोनों के चेहरे पर आती है तब दोनों जैसे होश में आते है और देवा अपने लंड को प्रिया की चूत से बाहर निकाल कर अपना पानी उसके मुँह में उंडेल देता है।
प्रिया;लंगडते हुए ममता के पास जाकर लेट जाती है।
चुत जगह जगह से कट सी गई थी और थोड़ा थोड़ा खून भी बह रहा था आज। मगर ये दर्द प्रिया को बहुत अच्छा लग रहा था । वो अपनी ऑंखें बंद करके रात भर की चुदाई याद करने लगती है और देवा नहाने चला जाता है।
सुबह का नाश्ता करने के बाद देवा सीधा कुदाल और फावड़ा लेकर घर से निकलने लगता है तो रत्ना भी उसके साथ हो लेती है । दोनों जब हवेली पहुँचते है तो रुक्मणी और रानी उन दोनों माँ बेटे को देख हैरान रह जाते है।
रुक्मणी के पुछने पर देवा उसे भी सारी बात बता देता है
रुक्मणी और रानी भी उन दोनों के साथ हवेली के पीछे चले आते है।
उस नीम के पेड़ को देख देवा एक पल ठिठक जाता है
जब वो ठीक उस जगह पहुँचता है जहाँ उस बूढ़े आदमी ने कहा था तो फिर से देवा को वही आवाज़ सुनाई देती है।
मगर इस मर्तबा भी सिवाये देवा के किसी और को वो आवाज़ सुनाई नहीं देती।
रत्ना;कहाँ खोदने के लिए कहा था उन लोगों ने तुझे।
देवा;अपने हाथ में का कुदल ठीक उसी जगह मारता है जहाँ उसे ठीक लगता है।
और वो उस नीम के पेड़ के नीचे ज़मीन खोदता चला जाता है।
3 फ़िट ज़मीन खोदने के बाद कुदाल छन के साथ किसी चीज़ से टकरा जाता है।
थोड़ा और खोदने के बाद वहां एक बहुत बड़ा सन्दूक दिखाई देता है।
चारों भी उस सन्दूक को देखने लगते है।
कोई चीज़ उस सन्दूक से उन चारों को आवाज़ दे रही थी।
तीनो औरतों की हिम्मत नहीं होती उस सन्दूक को खोलने की मगर देवा बिना एक पल भी गंवाये उसे खोल देता है।
और सन्दूक खुलते ही.................................................