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हाय रे ज़ालिम.......complete

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संदूक में क्या है?अब आगे क्या होगा? जानने के लिए पढ़ते रहिये।

अपडेट 100 बहुत खास होनेवाला है जिसमे रत्ना की जबरदस्त चुदाई होनेवाली है।

बहुत सारे कमेंट और लाइक के लिए थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अपडेट भी प्रतिदिन देने की मैं कोशिश करूँगा।कहानी आपलोगों को कैसी लगी ।अपने विचार अवश्य दें।thanks.
 
और सन्दूक खुलते ही.................................................

अपडेट 98

और सन्दूक ख़ुलते ही..........

रत्ना रुक्मणी रानी और देवा के होश उड़ जाते है।

जो सामने था वो देख बड़े से बड़े कलेजे वाला आदमी भी चक्कर खा कर ज़मीन पर गिर जाए।

रत्ना को चक्कर आने लगता है वो बस गिरने वाली थी की देवा उसे सँभाल लेता है।

सन्दूक में तीन कंकाल थे।

कुछ कपडे और उन कंकालो के हाथों पैरों के हड्डियों में कुछ गहने।

वक्त की मार ने बदन पर से सारा माँस तो निकाल दिया था बस हड्ड़ियाँ रह गई थी।

ऐसे नज़ारा उन चारों की ऑंखों ने न कभी देखा था न कभी सुना था।

रुक्मणी; जोर से चीख़ पड़ती है माँ आआआआआआआआ।

रानी;माँ क्या हुआ संभालो अपने आप को।

रुक्मणी;ज़ोर ज़ोर से रोने लगती है।

ये मेरी माँ के कंगन है और ये मेरी माँ का बाज़ू बंद है

मारने वाले ने हाथों पैरों में से कंगन नहीं उतारे थे

शायद वो जल्दी में रहा होगा।

अगर उन तीनो में से एक कंकाल रुक्मणी के माँ का था तो बाकि के दो कंकाल किसके थे।

देवा;बड़ी हिम्मत करके एक एक करके तीनो कंकालो को बाहर ज़मीन पर लिटा देता है।

सन्दूक लोहे का होने की वजह से हाड़ियाँ अब तक सही सलामत थी और चीख चीख कर अपनी दास्तान सुना रही थी।

रुक्मणी;की चीखें सुनकर आस पास के खेतों से लोग भी वहां जमा होने लगते है और देखते ही देखते सारा गांव वहां जमा हो जाता है।

जब देवा सन्दूक के अंदर से बाकी के कपडे और कुछ चाँदी के गहने बाहर निकालता है तो रत्ना की आँखें फटी की फटी रह जाती है।

वो भाग कर उन गहनो में से एक हाथ में पहनने का कड़ा उठा लेती है।
 
देवा;का बाप इसी तरह का कड़ा अपने हाथ में पहनता था।

रत्ना;समझ चुकी थी के वो दुसरा कंकाल किसका है।

देवा;अपनी माँ को देख रहा था और रत्ना की आँखों से आँसू की लड़ी बहने लगती है।

वो फूट फूट कर रोने लगती है।

दोनो औरतें इतनी बिखर चुकी थी की उन्हें सँभालना बेहद मुश्किल था।

देवा;माँ बस भी करो रो क्यों रही है।

रत्ना;देवा मेरे बच्चे ये कड़ा तेरे बापू पहना करते थे।

ये तेरे बापू है तेरे बापु।

आह्ह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह माँ आआआआआ...

ये सब देखने से पहले मै मर क्यों नहीं गई।

वो जो अब तक अपने आप को सुहागन समझ कर हाथों में चूडियां पहना करती थी मांग में कभी कभी अपने पति का सिन्दूर लगाया करती थी।

अपने दोनों हाथों को ज़मीन पर पटकने लगती है और हाथों में की कांच की चूडियों को पटक पटक कर तोड़ देती है।

हर कोई खुसुर पुसुर करने लगता है वहां सरपंच भी आ जाते है।

उन गांव वालों में से एक बूढा आदमी तीनो कंकालो को देख कर बताता है की इन में से एक औरत है और दो मरद है।

पुरा गांव वहां उमड जाता है।

रुक्मणी समझ जाती है के अगर उन में से एक उसकी माँ है तो दुसरा उसके पिता जी का कंकाल है।

वो दोनों एक साथ तीर्थ यात्रा पर गए थे मगर वापस लौट कर नहीं आये थे।

मगर उन दोनों को देवा के बाप के साथ किसी ने यहाँ मार कर उनकी लाशें दबा दिया था।

पुरे गांव में मातम सा छा जाता है।

जब ये खबर देवा के मामा मामी के घर पहुँचती है की देवा के बापू की लाश मिली है तो कोमल और देवकी का परिवार भी देवा के गांव भागे चले आते है।

हर कोई रत्ना और उसके परिवार को इस मुश्किल घडी में सहारा देने उनके घर पहुँच जाता है।
 
सरपँच और गांव वाले जल्द से जल्द तीनो लाशों का अन्तिम संस्कार की तैयारियों में लग जाते है।

दूसरी तरफ रुक्मणी का भी बुरा हाल था।

वो ये समझ रही थी की उसके माँ और बापू तीर्थ यात्रा के दौरान मारे जा चुके है मगर इस तरह उनकी लाशें मिलेंगी उसने कभी सोची नहीं थी।

रात शुरू होने लगती है और गांव वाले अन्तिम संस्कार की सभी तैयारी करके देवा के घर पहुँचते है।

देवा;अपने घर में ज़मीन पर बैठा था।

उसका दिमाग बिलकुल खाली था।

उसे अपने बापू की शक्ल भी ठीक तरह से याद नहीं थी।

मगर आज जो उसने देखा था वो देख वो अंदर ही अंदर टूट चूका था।

ममता और रत्ना का रो रो कर बुरा हाल था।

शालु नीलम दोनों माँ बेटी रत्ना और ममता को सँभाल रही थी मगर उन्हें सँभालते सँभलते वो दोनों भी रो पडती थी।

सरपँच;देवा बेटा तुम बहुत बहादुर बच्चे हो बेटा।

तुम्हे इस मुश्किल घडी में खुद को भी और अपनी माँ बहन को भी संभालना होगा।

अगर तुम इस तरह सदमें में चले जाओंगे तो कैसे चलेगा बेटा।

देखो मेरी तरफ।

अपने बापू की आत्मा को परमात्मा के पास जाने दो बेटा उन का अन्तिम संस्कार कर दो।

चलो शाबाश।

सरपँच एक भला आदमी था।

वो देवा को दिलासा देकर उसे सँभालते हुए शमशान भूमि तक ले जाता है।

पुरे रास्ते देवा एक ज़िंदा लाश की तरह लड़खड़ाते हुए चलता है।

वो बस एक बार अपने बापू से मिलना चाहता था।

एक बार अपने बाप के गले लगना चाहता था।

एक बार जी भर कर अपने बापू से लिपट कर रो लेना चाहता था।

मगर आज जब उसकी अपने बापू से मुलाकात हुई तो ऐसे की दिल के सारे अरमाँ आंसुओं में बह निकले थे।

सभी गांव वाले शमशान भूमि में जमा थे।

हर की आँख में आँसू थे।

हर किसी के दिल में उनकी मौत का सच जानने की तड़प थी।

मगर जिसके दिल में ये तड़प सबसे ज़्यादा थी वो चुपचाप खड़ा था।
 
रत्ना;अपने आँसू पोंछ कर देवा के पास आती है।

देवा;अपनी माँ के तरफ देखता है।

रत्ना;जा देवा अपने बापू को आग दे।

मगर एक बात की कसम खा ले अभी की जिस किसी ने भी तेरे बापू के साथ ये किया है तू उसे भी एक दिन इसी तरह अर्थी पर लिटा के दम लेगा।

रत्ना की आवाज़ में दर्द था। गुस्सा था।

एक जूनून था और इन्साफ की गुहार थी अपने बेटे से की अगर तूने अपने बाप के कातिल को सजा नहीं दिया तो तू मेरी औलाद नही।

देवा;अपनी माँ के सर पर हाथ रख देता है।

मै कसम खाता हूँ माँ तेरे सर की।

आज मै अपने पिता को आग दे रहा हूँ।

बहुत जल्द उनका कातिल भी यहाँ इसी तरह अर्थी पर लेटा होगा।

एक बेटे ने अपने माँ के सर पर

अपने बाप की लाश के सामने कसम खाया था।

जैसे जैसे आग उस चिता से लिपटी चलि जाती है वैसे वैसे देवा के अंदर की आग भी सुलगती चली जाती है।

गुस्सा और जूनून अपने चरम पर पहुँच जाता है।

रुक्मणी देवा और रत्ना तीनो जानते थी की इस के पीछे कौन है।

सभी गांव वाले चिता को आग देकर धीरे-धीरे लौट जाते हैं लेकिन देवा वहीं से बैठा रहता है। तब उसकी मां रत्ना बाद में उसे घर चलने के लिए बोलती है।

रत्ना: कब तक बैठा रहेगा बेटा चल हम लोग घर चलते हैं।

देवा: तुम घर जाओ मैं थोड़ी देर रुक के आता हूं कुछ देर मै अकेले रहना चाहता हूं।

यह सुनकर रत्ना अपने घर लौट आती है ।

तभी देवा को फिर से वो तीनों लोग दिखने लगते है अब देवा को समझ में आने लगा कि वो तीनों कौन है।चूँकि पहली बार सिर्फ एक अधेड़ आदमी मिला था उसने भी अपना चेहरा ढक रखा था और उस दिन वे तीनो एक साथ रात में ही मिले थे और देवा उनका चेहरा ठीक से नहीं देख पाया था। आज भी रात हो चुकी है इसलिए देवा को साफ़ नही दिख रहे है और पिछली बार की तरह तीनों ने अपना चेहरा भी ढका हुआ है।
 
देवा:आप लोग अपना चेहरा क्यों हमेशा मुझसे छुपाये रहते है और सिर्फ मुझे दिखाई देते है क्यों।

देवा का बाप:बेटे हमारे पास अब इंसानो की तरह शरीर

नही है इसलिए हम सभी को दिखाई नहीं देते है । हमारा चेहरा भी सड़ गल चूका है तुम देख नहीं पाओगे।

तुम्हारे साथ हमारा गहरा रिश्ता है इसलिए तुम सिर्फ हमारी परछाई देख रहे हो।

एक देवा का बाप था और बाकि दोनों रुक्मिणी के माता पिता थे।

देवा के पिता बोलते हैं बेटे हमारी आत्मा बहुत दिन से भटक रही थी। आज हमें इस योनि से मुक्ति मिल गई है।

अब हमें ईश्वर के पास जाना ही होगा क्योंकि हमारा बुलावा आ चुका है बड़ी मुश्किल से हमने इतनी देर तक सिर्फ इसलिए इंतजार किया ताकि हम तुमसे अकेले में मिल सके।

देवा: बापू मैं जानना चाहता हूं कि आप लोगों का यह हाल किसने और कैसे किया था क्या हमें बता सकते हैं

आप लोग।

देवा का बाप: बेटे हम ज्यादा कुछ तो नहीं बता सकते लेकिन हमको जिस आदमी ने मारा उसका नाम है हिम्मत राव क्योंकि इससे ज्यादा हम नहीं बता सकते हमें यहाँ ज्यादा देर रुकने का इजाजत नहीं है। हमें जल्द से जल्द जाना होगा।

देवा: मैं आप तीनों से ये वादा करता हूँ की हिम्मत राव की उसके किये की सजा जरूर मिलेगी।

फिर तीनों देवा से आंसू भरी बिदाई लेते हैं और धीरे-धीरे आकाश की तरफ जाकर अदृश्य हो जाते है।

थोड़ी देर के बाद देवा उदास मन से घर लौट आता है।

रत्ना उसका इंतज़ार कर रही थी।
 
हिम्मत राव को भी यी बात पता लग गई थी की देवा ने अपने बाप की लाश ढूंढ़ लिया है और साथ में रुक्मणी को भी अपने माँ बाप की बारे में पता चल गया है।

वो जिस बिल में छुप कर बैठा था अब उसका वहां छुपना खतरे से खाली नहीं था क्यूंकि बहुत जल्द देवा उसे ढूँढ़ते हुए वहां पहुंचने वाला था।

इससे पहले की देवा उस तक पहुंचे हिम्मत वहां से निकल जाता है।

हिम्मत भी देवा का सामना करना चाहता था मगर इस बार आर पार की लड़ाई के लिये।

एक तरफ बाप के कातिल की तलाश थी तो दूसरी तरफ बेटे को भी बाप के पास भेजने की सोच।

सुबह तक अस्थियाँ भी ठण्डी हो जाती है मगर जो आग अंदर जल रही थी वो इतनी आसानी से नहीं बुझने वाली थी।
 
तीन महीनें बाद-

......

..........

.........

अपडेट 99

वक्त किसके लिए रुका है जो यहाँ रुकता

एक एक दिन गुज़रता चला जाता है और दिन महीनो में बदल जाते है।

देवा को अपने बापू को आग दिए हुए तीन महिने बीत चुके थे। मगर अब तक हिम्मत का कोई अता पता नहीं चला था।

देवा ने हर तरफ उसे ढूंढा।

मगर वो ऐसी जगह था जहाँ देवा का पहुंचना मुश्किल था मगर नामुमकिन नही।

रत्ना भी पहले से बेहतर थी।

ममता अपने ससुराल जा चुकी थी।

साथ में प्रिया भी अपनी चूत पर देवा का निशान साथ लिए जा चुकी थी।

गांव वाले भी धीरे धीरे करके वो बात जैसे भूल गए थे। मगर देवा के लिए एक एक दिन किसी चुनौती से कम नहीं था।

देवा;जब से अपने बाप की चिता के पास से आया था।

तब से वो खोया खोया सा रहने लगा था।

सुबह उठता खेतों में चला जाता।

रात में आता और सो जाता।

ना उसे किसी से बात करना अच्छा लगता था न किसी के साथ वक़्त गुजारना।

उसकी ये हालत देख शालु नीलम और खास कर रत्ना बहुत परेशान हो गई थी।

दिन ब दिन देवा का व्यवहार और संजीदा होने लगा था

वो रत्ना की तरफ भी नहीं देखता था।

ये सोच कर की वो अपनी माँ से कैसे नज़रें मिलाए

क्यूंकि अब तक वो अपने बाप के कातिल तक नहीं पहुँच पाया था।

शालु और नीलम रत्ना के पास बैठी थी।

शालु;रत्न मुझे बहुत डर लग रहा है।

जीस तरह देवा बदल गया है मुझे उसे देख घबड़ाहट होने लगी है। तू उसकी माँ है उसे समझा।

उसे सांसरिक बना दे रत्ना वरना मुझे डर है कहीं हम देवा को खो ना दे।

रत्ना;हाँ मुझे भी उसे देख चिंता सताने लगी है

ठीक से बात भी नहीं करता।

जब देखो अपने ख्यालों में खोया रहता है।

नीलम तू उससे बात करके देख।

नीलम;माँ मैंने एक नहीं कई बार कोशिश की मगर वो मेरी एक नहीं सुनता।

कहते है जब तक अपनी माँ को दिए वचन नहीं पूरा कर लेते तब तक ऐसे ही रहेंगे।

शालु नीलम दोनों रत्ना के पास कितनी देर बैठ कर अपने घर चले जाते है और रत्ना खुद को उस वक़्त के लिए धीरे धीरे तैयार करने लगती है।

जिस बात से वो भाग रही थी।
 
शालु की बात रत्ना के दिल में घर कर जाती है।

उसे सबसे ज़्यादा प्यार देवा से था।

उसे ठीक करने के लिए रत्ना कुछ भी कर सकती थी

कुछ भी.......

वो खुद से पूछती है।

क्या मै सच में देवा के लिए कुछ भी कर सकती हूँ।

सब कुछ।

हर वो चीज़ जो देवा चाहता है।

जब ये ख्याल उसके दिल से टकराता है तो एक चमकदार बिजली सी लहर उसके पूरे बदन में दौड जाती है।

रत्ना अपनी आँखें बंद कर लेती है।

और अब तक जो जो देवा उसके साथ करता आया है और जो वो करना चाहता है। सब बाते उसकी आँखों के सामने से गुज़रने लगता है।

उसके हाथ अपने आप गर्दन से होते हुए उसकी चुचियों तक पहुँच जाते है।

एक मदमस्त गठीली औरत जो पिछले कई सालों से लंड के लिए तड़प रही थी।

आज रत्ना खुद को बहुत हल्का महसूस कर रही थी।

शालु की बातें उसे अंदर ही अंदर तोड मरोड़ रही थी।

शालु कुछ देर पहले उसे कहके गई थी की देवा को सांसरिक बना दे।

रत्ना;इसका मतलब अच्छी तरह जानती थी।

वो जानती थी देवा क्या देख कर वापस इस दुनिया में आ जायेगा।

वो क्या चीज़ है जिसकी महक जब उसके नाक में जाएँगी तो उसका दिमाग सारी बातें भूल कर

बस रत्ना का दिवाना हो जायेगा।

रत्ना;अपनी आँखें खोल लेती है।

और अपने रूम में कुछ सोच कर चली जाती है।

आज उसका दिल उस दिन की तरह धड़क रहा था जिस दिन देवा के बापू ने पहली बार रत्ना को सुहागरात के वक़्त नंगा किये थे।

रत्ना खुद को आईने में देखते हुए अपनी साड़ी

अपना पेटिकट अपना ब्लाउज और पेंटी उतार कर बिस्तर पर फ़ेंक देती है।

आज उसका दिल ये सब पहनने के लिए नहीं कह रहा था।

वो एक छोटा सा बाक्स खोलती है

उस बक्से में वही मंगलसूत्र था जो कुछ महिने पहले देवा ने उसे दिया था।

रत्ना;उस मंगलसुत्र को अपने हाथ में लेती है

फिर अचानक से उसे क्या होता है की वो उसे अपनी चूत पर रख कर धीरे धीरे दबाने लगती है।

उउन्ह उन्हह आह्ह्ह्ह।

यही वो चूत थी जिसे कई बार देवा चाट चूका था मगर अब तक इसकी गहराई नाप नहीं पाया था।

आज रत्ना भी चाहती थी की देवा हर उस जगह पहुँच जाये जहाँ वो हमेशा से जाना चाहता था।
 
उधर शालु और नीलम घर पहुँच जाते है।

पिछले दो महिने से शालु और नूतन का बुरा हाल था।

देवा ने उन की तरफ एक बार भी नहीं देखा था

और पप्पू का चप्पु कभी कभार ही चलता था।

वो भी कुछ वक़्त के लिये।

उसके लूल्ली में वो ताकत नहीं था जो औरत को चीखने पर मजबूर कर दे।

दोनो औरतें अपनी चूत की आग आपस में बुझा रही थी।

नुतन को पहले ममता की चूत चाटने में मजा आता था और अब ये आदत उसने अपनी सास को भी लगा दी थी।

नीलम और पप्पू के सो जाने के बाद दोनों सास बहु

शालु के रूम में रात भर नंगी रहती और अपनी चूत में बैगन डाल डाल कर उसे ठण्डा करने की कोशिश करती। मगर लंड जैसा मज़ा किसी में नहीं आता।

नुतन पप्पू नीलम और शालु को खाना देने के बाद उनके साथ खाना खाने बैठ जाती है।

नीलम और पप्पू अपनी धुन में खाना खा रहे थे मगर शालु की नज़रें बार बार नूतन के ब्रैस्ट की तरफ जा रही थी और नूतन बार बार अपने होठो को दाँतो के नीचे दबा कर शालु से कुछ कहना चाहती थी।

पप्पू और नीलम खाना खा कर रूम में सोने चले जाते है

नुतन सारे बर्तन उठा कर उन्हें धोने चलि जाती है।

शालु भी उसका हाथ बटाने उसके साथ घर के पीछे चलि जाती है।

वो लोग वहीँ अपने कपडे और बर्तन धोया करते थे।

नुतन सलवार कमीज में थी और शालु साडी में।

दोनो आस पास बैठ कर बर्तन साफ़ कर रही थी।

दोनो चुप थी मगर आँखें सब कुछ कह रही थी।

शालु;क्यूँ री छिनाल क्या देखे जा रही है कब से मुझे।

नुतन ;तेरी चूत की महक आ रही थी मुझे

वो सूँघ रही थी।

शालु; रंडी है तू नूतन मुझे पता होता तो कभी मेरे बेटे से तेरी शादी नहीं करती।

नुतन ;तुम भी कहाँ कम हो सासु माँ। देवा से भी चुदवाती हो अपने बेटे से भी और अब अपनी बहु की चूत के पीछे पड़ी हो।

शालु;चल जल्दी जल्दी साफ़ कर छिनाल कहीं की फिर तुझे बताती हूँ ।
 
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