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हाय रे ज़ालिम.......complete

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रत्ना “आहह…बेटे…ऐसी…ही सहलाओ इन्हे……और जरा…ताकत से जोर से सहलाओ बहुत अच्छा लगता है तुम्हारे हाथ जब इनको दबाते है…आह……बस ऐसे ही हाँ……आहह…दबाते रहो बस…”

रत्ना सिसकी लेते हुए मजा लेने लगती है और देवा उसकी चुचियों को मसलने का काम जारी रखता है।

देवा: “माँ तुम्हारी यह मस्त चुचियाँ…मन करता है की बस दबाता ही रहुँ ऐसे ही…बहुत मोटे और सुन्दर है,,,,इन्हे जब भी तुम्हारे सीने पे लटके हुए देखता हूँ तो बस देखते रहने का ही मन करता है…मन करता है की बस इनका सेवन कर लुँ…”

रत्ना:“मेरे बेटे किसने रोका है तुझे तेरा जो मन करे कर इनके साथ…जब छोटा बच्चा था तब भी बहुत खेलता था इन के साथ…तब इनकी असली सुंदरता से वाकिफ़ नहीं था शायद…आहह…ऐसे ही……और जोर से……बेटा बस ऐसे ही दबाते रहो……और इनकी सुंदरता को बढ़ाओ…”

देवा रत्ना की चुचियों को लगातार फव्वारे के पानी के नीचे दबाने में मगन था, वो आज अपनी माँ की चुचियों पर बहुत फ़िदा लग रहा था और रत्ना को भी आज अपनी चूचियों को अपने बेटे से मसलवाने का बहुत मन भी कर रहा था…

रत्ना:“बेटा मेरे प्यारे देवा…तुम्हारे हाथो में…आह्हः…जादु है…मेरे पति परमेश्वर…”

देवा अपनी रत्न की चुचियों को अब काफी प्यार से और आराम से मसल रहा था।आज क्युकी देवा जानता था की उसके पास बहुत ज्यादा समय है रत्ना के रोम रोम को तराशने के लिये, आज एक बेटा अपनी माँ के हर उस हिस्से का जायजा लेगा जो कोई आम बेटा अपनी जिंदगी में शायद ही सोचता होगा।

आज देवा अपनी रत्ना से अपनी माँ से खूब मजे लेगा क्युकी अभी तो शाम सी ही हुई है…रात तो अभी आनी है…और रत्ना ने तो पहले ही अपने देवा को हूकुम दे दिया है उसे सुबह तक चोदने के लिए…लगता है कल तक रत्ना बिस्तर से उठ तक नहीं पायेगी…

देव,, “माँ आज तुम्हारा यह बेटा अपने लंड का असली 'ताकत दिखायेगा…पुरी रात…तूझे चोद चोद कर”

रत्ना देवा की बातो को सुन कर आज बहुत खुश हो रही थी, कुछ महीनो पहले तक जो रत्ना अपने बेटे को अपनी बहन ममता को चोदते देख उसे डण्डे से मारी थी, आज वही रत्ना खुद उसके लंड पर अपनी बेटी की तरह ही उछल उछल कर अपनी चूत और गांड उस तगडे मरद के लंड से मरवाना चाहती थी…और वह भी पूरी पूरी रात…अपने बेटे की बाँहों में नंगी रह कर…यह सच में देवा का ही 'कमाल है
 
रत्ना: ”पूरी रात चुदाई होगी मेरी वह भी मेरे ही बेटे से, यह सोच के बहुत ही गरम हो रही हूँ मै बेटा…अपनी माँ को थोड़ा ठण्डा कर नहलाके……”

ये कहते हुए रत्ना ने पास में ही रखी हुई तरल साबुन(लिक्विड सोप) का डिब्बा अपने बेटे को दिया…

रत्ना: ,,”जानते हो ना की कहाँ ज्यादा मेंहनत करनी है अपने हाथो से मुझे नहलाने में?”

देवा: “बहुत अच्छे से,” देवा ने डिब्बा पकड़ते हुए कहा

बाथरूम का फव्वारा लगातार चल रहा था जिससे निकलता हुआ पानी दोनों को लगतार भिगो रहा था।

देवा ने डब्बे को खोला, और अपनी माँ रत्ना के नंगी सुडौल चुचियों पर थोड़ा सा साबुन उडेल दिया, जो उसकी चूचियों पर बिखर गया…

रत्ना को अपनी चुचियों पर गिरते हुए तरल साबुन और पानी का आभास होते ही एक गुदगुदी सी महसूस हुई, उसे पता था की देवा उसकी चूचियों को दबाना और मसलना चाहता था, चमकाना तो बहाना है सिर्फ, और वो भी यहि चाहती थी की देवा उसकी चुचियों पर अपने हाथो का 'जादू चलाये और उसे रगड कर नहलाये…

देवा: “माँ तुम बहुत ही कमाल की औरत हो…तुम्हारे आगे तो ममता क्या हर जवान लड़की पानी भरे…यह मस्त उभार तुम्हारे, देखके सिर्फ उनको पकडने मसलने और दबाने का मन करता है…माँ तुम्हे तो मै मरते दम तक चोदना नही छोड़ूँगा”

रत्ना को देवा के मुँह से अपनी प्रशंसा और देवा का उसके शरीर के लिए उतावलापन ही उसे बहुत ख़ुशी दे रहा था और उसे गरम करने का भी पूरा काम कर रहा था…
 
अपडेट 116

देवा ने डब्बे को खोला, और अपनी माँ रत्ना के नंगे सुडौल चुचियों पर थोड़ा सा साबुन उडेल दिया, जो उसकी चुचियों पर बिखर गया…

रत्ना को अपनी चुच्चियों पर गिरते हुए तरल साबुन और पानी का आभास होते ही एक गुदगुदी सी महसूस हुई।

उसे पता था की देवा उसकी चुचियों को दबाना और मसलना चाहता था।

चीखना तो बहाना है सिर्फ,

ओर वो भी यही चाहती थी की देवा उसकी चुचियों पर अपने हाथो का 'जादू चलाये और उसे रगड कर नहलाये…

देवा:“माँ तुम बहुत ही गरम औरत हो…तुम्हारे आगे तो ममता क्या हर जवान लड़की पानी भरे…यह मस्त उभार तुम्हारे, देखके सिर्फ उनको पकडने मसलने और दबाने का मन करता है…माँ तुम्हे तो मै मरते दम तक चोदना नही छोड़ूंगा……”

रत्ना देवा के मुँह से अपनी प्रशंसा और देवा का उसके शरीर के लिए उतावलापन ही उसे बहुत ख़ुशी दे रहा था और उसे गरम करने का भी पूरा काम कर रहा था…

आखिरकर देवा ने डब्बे को रखा और हौले हौले अपने हाथ अपनी माँ की चुचियों की तरफ बढाये और उनपर अपने हाथ रख दिया…

रत्ना के लिए यह पल बहुत ही आनन्द से भरा था और उसके मुँह से एक आह्ह्ह्ह निकल ही गयी।

देवा ने कुछ पलो तक अपने हाथो को अपनी नंगी माँ के मोटी मोटी चुचियों पर रोक कर रखा।

ये पल रत्ना की साँसे तेज करता जा रहा था क्युकी देवा के हाथो में रत्ना के दोनों निप्पल्स थे।

आहीस्ता आहिस्ता देवा ने अपनी माँ की चुचियों पर लगे साबुन को अपने हाथो के स्पर्श से मलना शुरू कर दिया।

जिसके घर्षण को रत्ना अपने निप्पल और चुचियों के ऊपर महसूस करती ख़ुशी से फुली नहीं समां रही थी,

और उसका शरीर ढीला पड़ गया था।

उसने अपनी गरदन मजे के नशे में पीछे करनी शुरू कर ली और अपनी आँखे बंद करने लगी।

देवा ने अपने हाथ रत्ना की चुचियों पर चलाते हुए अपने सर को उसकी पीठ से आगे लाकर उसकी छाती पर लटकती चुचियों के ऊपर अपने हाथो के मर्दन की दिशा को देखते हुए उसे मसलना जारी रखा।

रत्ना के चेहरे पर अब मुसकान आ गयी थी…वो अब अपने बेटे के हाथो के स्पर्श का अपने चुचियों पर पूरा मजा ले रही थी…

कुछ पलो तक देवा अपने हाथ बड़े सबर और प्यार से अपनी माँ रत्ना की चुचियों पर इसी अन्दाज में चलाता हुआ साबुन को चुचियों के ऊपर रगडता रहा।

इन सब के दौरान फुव्वारे का शीतल पानी सदा उन्हें भिगो रहा था…
 
आज एक माँ बेटा सच में पूरे नंगे बेशरम से एक दूसरे के साथ नहा रहे थे…

ये पल शायद ही कोई सपने में देखता हो पर देवा जैसा मरद हर चीज को पा लेता है…

चाहे वो उसकी माँ ही क्यों न हो…

अपनी माँ की चुचियों पर अपने हाथ कुछ पलो तक देवा चलाता रहा और रत्ना उसके मसलने का मज्जा लेती रही।

रत्ना को तभी महसूस हुआ की उसकी मोटी गांड पर कुछ बहुत देर से चूभ सा रहा था…

जी हां यह देवा का वही तगड़ा लंड है जिसकी दीवानी है उसकी बहन ममता

भाभी कौशल्या, काकी शालू, रुक्मणि, रानी, पदमा, रश्मि, नूतन, और भी पता नहि कितनी लड़किया और औरते जिन जिन को देवा ने अपना लंड चखा कर चोदा है…

जैसे ही रत्ना को उसका तगड़ा लण्ड महसूस हुआ उसने पीछे से ही अपना हाथ उसके लंड पर ले गयी और पूरी ताकत से उसे अपने हाथ में जकड लिया और एक मंद सी मुसकान दी।

अचानक हुए लंड पर इस हमले से देवा कुछ ख़ास नही चौंका क्युकी उसके सामने तो पहले से ही ज़न्नत का दृश्य था।

अपनी माँ की बड़ी बड़ी चुचियाँ।

जिन पर अब भी उसके हाथ चल रहे थे…

कुछ पलो तक देवा और रत्ना इसी स्थिति में रहे,

बल्कि रत्ना ने अब अपने हाथ से ही उसके लंड को सहलाना भी शुरू कर दिया था।

जीससे देवा थोड़ा और गरम हो रहा था और रत्ना की चुचियों को और जोरो से दबा रहा था।

देवा “आह्हः माँ कैसा लगा अपने बेटे का हथियार…”

रत्ना: “ममममम आह्ह्हहह…असली मर्दांनगी की निशानी है तुम्हारा यह हथियार मेरे देवा, तुम्हारा लंड किसी भी औरत की जबरदस्त चुदाई कर सकता है, सिर्फ देखने से ही औरत डर जाए ऐसा मूसल हथोड़ा है तुम्हारा यह 9 इंच का लंड…मोटी से मोटी चूत या मोटी गांड की जबरदस्त चुदाई कर सकता है यह तुम्हारा लौड़ा……इसलिए तो मै भी इसकी दीवानी हो गयी हूँ मेरी जान……”

और देवा रत्ना की चुचियों पर लगा हुआ साबुन फव्वारे से निकलते हुए पानी से धोने लगता है

और रत्ना बड़े प्यार से अपने देवा के लंड को सहलाती रहती है।

देवा रत्ना की चुचियों को फव्वारे के निचे रखकर अपने लंड को मसलवा रहा था।

रत्ना लगतार अपने बेटे के लंड पर अपना हाथ चलाती जा रही थी।।

देवा रत्ना की चुचियों को अब थोड़ा जोर से मसलता हुआ साबुन फव्वारे के पानी से साफ़ कर रहा था।
 
कुछ और पलो के बाद देवा ने साबुन के डब्बे को फिर से उठाया और उसकी चुचियों पर इस बार जोश में होने की वजह से बहुत सारा साबुन डाल दिया।

इस बार रत्ना लगतार अपने हाथ की गति को देवा के लंड के ऊपर बढाती जा रही थी…

देवा के हाथ साबुन के डब्बे को दबाये जा रहे थे। वो बहुत तेजी से साबुन को रत्ना की चुचियों पर फैलाता जा रहा था।

कुछ ही पलो में उसने रत्ना की दोनों चुचियों को लगभग ढ़क सा दिया था साबुन से पर तब भी डालता जा रहा था।

देवा का ये जोश देखके और अपनी चुचियों पर गिरते इतने सारे तरल साबुन के स्पर्श से रत्ना ने अपने देवा के लंड को सहलाना थोड़ा और तेज कर दिया और उसकी गेंदो को दूसरे हाथो से दबाने भी लगी।

जब रत्ना ने उसकी गाण्ड दबायी तब देवा की सिसकी निकली।

जिसके परिणाम स्वरुप देवा ने उस डब्बे को जोर से साइड करा और रत्ना की चुचियों पर अपने हाथो से हमला बोल दिया उसने एक चूची को नीचे की तरफ से पकड़ा और दूसरे को साइड से और उन्हें गेंदो की तरह उछालने लगा।

जिससे रत्ना भी सिसकी लेने लगी।

फिर रत्ना ने वो डब्बा उठा लिया और बहुत सारा साबुन देवा के लंड पर गिरा दिया और देवा के लंड को मुठियाने लगी अब देवा का मोटा लंड पूरा साबुन के झाग में लिपटा हुवा था जिसे रत्ना जोर जोर से मसल रही थी फिर रत्ना देवा को लंड को पानी से धोने लगती है।जिससे देवा का लंड चमक उठता है।

अब देवा रत्ना की चुचियों को उछाल उछालकर दबा रहा था और साबुन को और फैलाने की कोशिश कर रहा था

और वही रत्ना अपने नंगे सगे बेटे के लंड से खेल रही थी।

कभी उसे सहलाते हुए गाण्ड दबा रही थी तो कभी उसपे अपनी पकड़ मजबूत करते हुए उसे जोर से दबा रही थी।

और अपनी चुचियों पर देवा के हाथो के मर्दन के एहसास को महसूस करके आहे भर रही थी…

देवा लगातार उसकी चुचियों को उछाल उछाल कर उसके शरीर को भी हिला डूला रहा था…

काफी देर से दोनों एक दूसरे के अंगो को सहला रहे थे जिससे उनकी गर्मी बढती ही जा रही थी,

और उनका जोश भी…

फिर देवा अचानक अपने हाथो से दोनों चुचियों को जकड लेता है और जोर से दबाने लगता है

और रत्ना की गरदन और गालो को चाटने चूमने लगता है।

जीसके फलस्वरुप रत्ना भी अपनी हाथ की चाल को देवा के लंड पर तेज कर देती है आर आहें भरने लगती है…

रत्ना के चेहरे पे एक बड़ी सी मुसकान भी अब फ़ैलती जा रही थी।
 
देवा उसकी चुचियों को बहुत जोरो से दबा रहा था और चुम रहा था गरदन पे…

रत्ना: “आहहहह……आह,,,ह्ह्ह्ह…ही ही…आह………हाय रे ज़ालिम धीरे कर दर्द होता है…………आहहहह बेटे अपनी माँ को चोदना है आज तुझे बुरी तरह…आह…………हाँ……रे ज़ालिम…ऐसे ही करना...... दर्द तो होता रहेगा……पर अपने ही बेटे से चुदवाते हुए मिलने वाला सुख भी तो नसीब होगा……हाय रे ज़ालिम……धीरे से दबा मेरी चुचियों को…आह्ह्ह्ह।

रत्ना यह आहें बहुत ज्यादा जोरो से ले रही थी अगर घर के किसी भी भाग में कोई भी इंसान हो तो वह उसकी आवाज बहुत आराम से सुन सकता है…

अब रत्ना पूरी बेशरमी से आआह्ह्हह्ह्ह्ह कर रही थी…

उसे बाहर वालों से कोई मतलब नहीं था इस वक़्त…

देवा: “तेरी चूत और गांड का भोसड़ा बना दूंगा माँ अपने तगडे लंड से आज सुबह तक चोदुँगा मै आज तुझे……चाहे कितना भी चीखती रहे तू छिनाल माँ…मेरी रत्ना।

माँ तू छिनाल है साली बेटे से चुद्वाती जो है…”

ये कहते हुए देवा रत्ना की चुचियों को और जोरो से दबाता है, और अचानक ही उन्हें छोड भी देता है…

रत्ना की आँखे अब भी बंद थी और उसके हाथ देवा के लंड को सहला रहे थे…कुछ पल बाद रत्ना को एहसास हुआ की देवा ने हाथ हटा लिया है, तभी उसके गाल पर देवा की जीभ चली और उसकी सिसकी निकल गयी…

देवा: “माँ सिर्फ हाथो से ही काम चलवाना होगा मुझे अपने लंड पर क्या……???”

देवा ने रत्ना के कानो में कहा… और रत्ना हँसती हुई शर्मा गयी…

रत्ना: “मेरे होते हुए ऐसा कभी नहीं होगा देवा, मेरे पति…

और ऐसा बोलते हुए रत्ना पलट जाती है और देवा को देखते हुए मुस्कुराने लगती है।

देवा रत्ना की आँखों में साफ़ साफ़ देख पा रहा था की वो अब पक्की रांड बन गयी है…उसकी माँ अब उसकी रांड थी…।

देवा:“ मुँह में ले के चूस अपने बेटे का लंड रत्ना…”

रत्ना देवा की आज्ञा का पालन करते हुए उसके जिस्म पर रखे अपने हाथो को नीचे ले जाती हुई खुद भी नीचे झुकती जाती है और देवा के लंड के सामने झुक कर पैरो पर बैठ जाती है।

रत्ना की आँखों के सामने अब अपने बेटे का लटकता हुआ मोटा लंड था।

उसे देखके रत्ना ने अपने होठो पर जीभ फेरी और एक हाथ से अपने बालो की लट्ट को सही करते हुए दूसरे हाथ से उसके लंड को अपने हाथो में जकड लिया…

और एक गहरी मुस्कराहट के साथ बोली…

रत्ना: मैं तो इसकी दीवानी होती जा रही हूँ…बस आज पूरी रात खाउंगी इसे अपने तीनो छेदों से……जम कर चोदना मेरे शेर आज अपने इस हथियार जैसे लंड से…”

देवा अपनी नज़रे नीचे झुकाये अपनी माँ को अपने तगडे लंड के सामने नंगी देखते हुए बड़ा खुश हो रहा था…
 
रत्ना किसी भी पल उसका लंड अपने मुँह में लेने ही वाली थी…

तभी अचानक दरवाजे पर फिर से किसी ने खटखटाया उस खटखटाहट को सुन देवा चौंक गया

देवा: “माँ की चूत अब कौन साला आ गया…”

रत्ना देवा के जीतनी नहीं चौंकी थी और उसने अब भी उसके लंड को अपने हाथो में जकड़ा हुआ था…

रत्ना: “बेटा होने दो जो भी हो…मैने कहा था न की आज सिर्फ तीन ही दरवाजे खुलेँगे…घर का दरवाजा तो सुबह ही खुलेगा…भूल जाओ सबको और इस नए रिश्ते का सुख भोगो…”

ये कहते हुए रत्ना एक शैतानी मुस्कान देवा को देती है…

देवा उसको देखते हुए मुस्कराता है…

और जोर से छींकता है…”जो कोई भी बहन का लौडा है दरवाजे पर अपनी गांड माराये, आज वह दरवाजा नहीं खूलेगा क्युकी आज देवा अपनी माँ रत्ना की जमकर चुदाई करने वाला है…”

रत्ना पहले तो थोड़ा चौंक गयी पर फिर देवा का जोश देखकर खुश भी हुई और मजाक में उसके लंड के सामने बैठते हुए उसकी गांड पर एक चाँटा लगाती है…

देवा(छीकते हुए): “रत्ना मेरी जान और न तडपाओ और ले लो अपने बेटे के लंड को अपने मुँह में…”

दरवाजे पर अब भी खटखटाहट की अवाजे सुनाई दे रही थी…

पर देवा और रत्ना आज खोलने नहीं वाले थे दरवाजा…

रत्ना मुस्कराती हुई अपना मुँह खोलती है और देवा के लंड की तरफ बढ़ती है,

और अपना एक हाथ उसके लंड पर रखते हुए अपने मुँह में वो तगड़ा मोटा लंड लेने लगती है…

धीरे धीरे रत्ना देवा के लंड के उपरी भाग को चुमते हुए अपने मुँह में पूरा लण्ड लेने की कोशिश करती है।

देवा भी उसका साथ देते हुए उसके मुँह में अपने लंड को पेलने लगता है।

जिससे लंड रत्ना के मुँह में अंदर बाहर होने लगता है।

रत्ना धीरे धीरे अपनी रफ़्तार को बढाते हुए देवा के लंड को जमीन पर बैठे हुए चूसने लगती है।

और इस परम आनन्द का पूरा मजा लेने के लिए अपनी आँखों को बंद कर लेती है,,,

काफी देर तक रत्ना देवा के लंड के ऊपर अपना हाथ चलाते हुए उसके लंड को अपने मुह में अंदर बाहर करते हुए कभी उसके लंड को पूरा अंदर तक लेती हुई उसकी गेंदे दबा रही थी तो कभी उसके तगडे लंड को महसूस करते हुए उसपे अपने थूक से गीला करते हुए उसके टोपे को चूम रही थी…

अब दरवाजा खटखटाना बंद हो गया था।

काफी देर तक रत्ना ऐसे ही देवा के लंड को चूस रही थी।

फिर उसने अपने हाथ पूरी तरह से देवा के लंड पर से हटा दिए।

देवा रत्ना की बात समझ गया और जोर जोर से अपने लंड के झटके रत्ना के मुँह में लगाता हुआ चुसाई का मजा लेने लगा।

जैसे जैसे देवा झटके लगा रहा था।

उसका लंड उसकी माँ के मुँह की गहरायी तक पहुंचने लगा था
 
रत्ना देवा के लंड के एक एक इंच को अपने मुँह में लेना चाहती थी।

और देवा अपनी मर्दानी ताकत से उसकी इच्छा पूरी कर रहा था…

हर झटके के साथ रत्ना का पूरा शरीर हिल रहा था।

जिस वजह से उसके वो बड़ी बड़ी चुचियाँ भी हवा में आगे पीछे हो रही थी…

जिन्हे देखकर देवा ख़ुशी से और तेज तेज झटके दे रहा था।

देवा के झटको की वजह से उसकी माँ की गरदन में लटक रहे देवा के नाम का मंगलसुत्र भी कभी रत्ना की चुचियों के ऊपर आ जा रहा था।

तो कभी चुचियों की दरार के बीच छुप जा रहा था।

देवा यह नजारा देखते हुए ज्यादा खुश हुआ,

आज वह अपनी माँ को अपनी पत्नी बनाने में कामयाब जो हो गया था…।

इसमे सहायक की कोई बात है?

जी बिलकुल नहि, क्युकी अगर माँ बीवी बनने की ना ठानती तो यह सब होना नामुमकिन था…

देवा ने अब अपनी माँ के मुँह को चोदने की रफ़्तार धीमी की और धीरे धीरे रत्ना के हाथ भी अपने बेटे की लंड की लम्बाई को दुबारा तराशने लगे।

अब देवा ने झटके देना बंद कर दिया था

तो रत्ना ने अब अपने आप देवा के लंड को चूसना जारी रखते हुए,

अपने हाथ का सहारा लिया…

कुछ और पल रत्ना ने उसके लंड को मुँह में रखा और धीरे धीरे उसे मुँह से निकालते हुए उसके टोपे तक आ पहुँची

और रत्ना के मुह से थूक बहने लगा।

देवा ने झटके देना तो रोक दिए थे।

पर अपनी आँखों के सामने अपनी माँ को नंगी अपना लंड चुसते हुए देख वह अपनी गर्मी नहीं निकाल पाया था…

रत्ना ने कुछ पल थूक निकालते हुए अपने बेटे के लंड के टोपे को चुसा और चूमती रही।

और फिर उसे अपने मुँह से निकालती हुई अपने हाथो से अपने शरीर को सहारा देते हुए देवा के लंड के टोपे पर प्यार से अपनी जीभ को फ़िराने लगी।

रत्ना के मुँह से अब बहुत सारा थूक निकल रहा था जो उसकी चुचियों पर भी गिर रहा था।

पर प्रेम दीवानी रत्ना अपने देवा के लंड पर अपनी जीभ फिराती रही

और प्यार से अपना सर ऊपर करके देवा को देखते हुए मुस्कुराने लगी…

देवा: “रत्ना मेरी माँ…तू तो अपनी बेटी से भी ज्यादा अच्छी तरह अपने बेटे का लंड चुसती है…मज़ा आ गया…।”

और देवा अपना हाथ रत्ना के सर पर ले जाकर अपना लंड उसके मुँह पर रगडने लगा…

और रत्ना अपने देवा का साथ देती हुई और झुक जाती है और अपने मुँह पर देवा का लंड घिसवाने लगती है।
 
अपडेट 117

रत्ना के मुँह से अब बहुत सारा थूक निकल रहा था जो उसकी चुचियों पर भी गिर रहा था

पर प्रेम दीवानी रत्ना अपने देवा के लंड पर अपनी जीभ फिराती रही,

और प्यार से अपना सर ऊपर करके देवा को देखते हुए मुस्कुराने लगी…

देवा:“रत्ना मेरी माँ…तू तो अपनी बेटी से भी ज्यादा अच्छी तरह अपने बेटे का लंड चुसती है…मज़ा आ गया…।”

और देवा अपना हाथ रत्ना के सर पर ले जाकर अपना लंड उसके मुँह पर रगडने लगा…

और रत्ना अपने देवा का साथ देती हुई और झुक जाती है और अपने मुँह पर देवा का लंड घिसवाने लगती है।।

रत्ना कुछ और पल देवा के लंड का मजा अपने मुँह पर लेती है, और फिर देवा को देखते हुए खड़ी हो जाती है।

रत्ना: “कैसा लगा मेरे बेटे को मेरे द्वारा लंड की यह चुसाई…”

रत्ना ने अपनी चुचियों पर लगे थूक को अपने दोनों चुचियों पर मलते हुए कहा…

देवा रत्ना की बात को सुनते हुए अपने लंड को पकड़ कर रत्ना के सामने उसकी चूत पर दबाया और कहा

“बहुत अच्छा…ममता से बहुत ज्यादा अच्छी तरह लंड चूस लेती हो माँ तुम…अब अपनी चूत भी चखा दो सुबह से नहीं चोदी है…”

रत्ना:“आह…बेटे ममता को भी कुछ दिन के लिए ससुराल से बुलवा ले…मैं उसे दिखाना चाहती हूँ की मै उससे ज्यादा अच्छे से अपने देवा का ख्याल रख सकती हूँ…”

देवा ने मुस्कराते हुए कहा“और मै भी उसे दिखा दूंगा तब की मेरा यह तगड़ा लंड दो औरतो को एक साथ चोद कर उनकी हालत ख़राब कर सकता है…बोल माँ चुदेगी न अपनी ममता के सामने…बोल माँ चुद्वायेगी न अपने सगे बेटे से अपनी सगी बेटी के सामने…बोल की पूरी नंगी होके चुद्वायेगी तू…सिर्फ मेरे नाम का यह मंगलसुत्र पहन कर तू मुझसे चुदवायेगी…और अपने हाथो से ही मेरा यह लंड अपनी बेटी की चुत में डलवायेगी…बोल माँ हम तीनो एक साथ एक ही बिस्तर पर चुदाई करेंगे न…”

देवा की बातो से रत्ना उतेजना में आ गयी और चींखते हुए बोली… “हाँ चुदवाउंगी मै ममता के सामने…।चुदवाउंगी मै अपने सगे बेटे से अपनी सगी बेटी के सामने…पुरी नंगी होकर सिर्फ तेरे नाम का यह मंगलसुत्र पहनकर चुद्वायेगी रत्ना अपने बेटे से अपनी बेटी के सामने…और अपने इन्ही हाथो से मै तेरा लंड पकड़कर अपनी ही बेटी की चुत में डालकर तुम दोनों की चुदाई भी देखुंगी, जैसे कुछ महीनो पहले देखती थी…और हाँ हम तीनो यह एक साथ एक ही बिस्तर पर करेंगे…………”
 
देवा रत्ना की बातो को सुनता हुआ उसे जोर से घुमा देता है और नीचे झुकते हुए खड़े ही खड़े अपने लंड को सीधी खड़ी रत्ना की चूत के छेद पर सेट करने लगता है…

रत्ना देवा के इस हरकत से चौंक जाती है…वह समझ गयी थी की देवा उसे चोदने वाला है,

पर खड़े खड़े चोदेगा यह नहीं सोचा था इस रंडी माँ ने…

रत्ना:“देवा यह क्या कर रहा है…ऐसे खड़े खड़े कैसे चोदेगा मेरी चूत को…?”

देवा:“तू फिकर मत कर मेरी जान…तूझे खड़े खड़े अपनी गोदी में ले के चोदुँगा तेरी चूत को…बहुत मजा आयेगा माँ…”

ये कहते हुए देवा रत्ना की जांघो पर हाथ रखते हुए उसके पैरो को फ़ैलाने की कोशिश करता है…वो रत्ना को पैरो के सहारे लेकर अपनी गोदी में लेने वाला था…

रत्ना ने भी देवा का साथ देते हुए अपने हाथ देवा के गले में डाल दिए…

देवा का लंड का टोपा रत्ना की चूत में घुस चुका था और धीरे धीरे देवा अब रत्ना को उठाने की कोशिश करने लगा,

रत्ना बहुत ख़ुशी से देवा की गोदी में चढ़ने को तैयार थी,

शायद वो इस नए तरह की चुदाई के बारे में सोच कर खुश हो रही थी।

आज दोबारा एक माँ अपनी दहलीज़ को पार करते हुए अपनी शारीरिक जरुरतो के सामने झुक गयी थी और अब बेशर्म जैसी अपने बेटे से चुदवाने वाली थी…

और इस बात में कोई शक नहीं था की इस माँ को अपनी करनी पर कोई पछतावा है…

कयुँकि उसने कुछ गलत करा ही नहीं है, शारीरिक जरूरतें सबकी होती है,

पर जब वह पूरी नही होती तो खुला जख्म बन जाती है,

जीस्म में थोड़े थोड़े समय में खुजली मचती है,

पर मरहम लगाने वाला कोई नहीं होता…

ऐसे में अगर कोई अपना साथ नहीं देगा तो कौन देगा,

और अपने ही बेटे से यह साथ मिल जाए तो अलग ही एहसास प्राप्त होता है।

वह ऐसा एहसास है जो सिर्फ एक औरत ही महसूस कर सकती है,

ये वो एहसास होता है जिसे भगवान ने औरतो को ही दिया है।

हम मरद तो अपने लंड खड़े कर लेते है चूत देखते ही

पर एक औरत को अपनी शारीरिक जरुरतो के साथ साथ अपने जज्बातो का भी ध्यान रखना पड़ता है…

पर जज्बातो पर कभी कभार शारीरिक जरूरतें हावी भी हो जाती है।

जैसा रत्ना के साथ हुआ जो कुछ महीनो पहले एक अदार्श माँ थी।

पर अब अपने ही बेटे की बीवी बन गयी थी।
 
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