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हाय रे ज़ालिम.......complete

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दूसरी तरफ,, देवा का घर।

रत्ना अपने देवा के लिए पूरी शिदत से तैयार हो रही थी, आज वो देवा को अपनी जवानी से और दीवाना बनाना चाहती थी…

इसलिये उसने अपने अलमारी से सारे सेक्सी कपडे बाहर निकाल लिए और बारी बारी उन्हें पहनने लगी…

उसके पास सिर्फ एक या दो ट्रांसपेरेंट नाइट कवर्स थे जो नाइटी के ऊपर पहने जाते थे, पर रत्ना ने फैसला किया की वो सिर्फ उन कवर्स को पहनेगी आज और नाइटी नही, साथ ही।

उसने सबसे सेक्सी पेंटी पहनी और ऊपर एक थोड़ी पारदर्शी सी ब्रा भी पहन ली।

फिर आखिर में उसने उस नाइटी को भी पहन लिया और अपने देवा का दिया हुआ मंगलसुत्र भी अपने गले में डाल कर मेकअप करने लगी की तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।

माँ दरवाजा खोलों मै आ गया…

देवा की आवाज सुनके रत्न को बेहत ख़ुशी हुई और वो भागते हुए दरवाजे पर गयी और दरवाजा खोला।

दरवजा खोलते ही देवा अंदर आ गया, रत्ना दरवाजे के पीछे थी इसलिए देवा को वो दिख नहीं रही थी।

अरे माँ आप कहाँ हो।

की तभी देवा की आँखों पर किसी के कोमल हाथ आ गए और उन्हें ढ़क लिया।

रत्ना:यही हूँ मेरे बेटे देवा। तुम्हारे साथ ही है तुम्हारी रत्ना,,,

देवा:क्या माँ आँखे क्यों ढ़क दी मेरी??

रत्ना: आज मै अपने देवा के लिए बहुत सजी हूँ और चाहती हूँ की मेरा बेटा थोड़ा और इन्तजार करे मेरे लिये....अभी थोड़ा सजना और बाकी है, मैंने खाना खा लिया है और तुम्हारे लिये खाना लगा दिया है.....खा लो जल्दी से तब तक मै तैयार होती हूँ और…

रत्ना यह कहते हुए अपने हाथ देवा की आँखों पर रखी हुई थी और अपने कमरे की तरफ बढ़ रही थी जैसे ही वो अपने कमरे में पहुची उसने देवा के आँखों पर से अपने हाथ हटाये और एक ही झटके में अपने कमरे में घुस कर कमरा बंद कर लिया…

देवा को अपनी माँ की यह शरारत से और उत्सुक्ता बढ़ने लगी और बोला…

रत्ना मेरी जान जल्दी से पूरा कर लेना अपना शृंगार। तुम्हारा पति तुम्हारे साथ वक़्त बिताना चाहता है…

रत्ना यह सुनकर थोड़ा शर्मायी और मेकअप में फिर से जुट गयी…

और देवा ने अपने हाथ मुँह धोये और खटिये पर खाना खाने बैठ गया, आज उसकी माँ ने सारा खाना उसके मनपसन्द का बनाया था, जिसे देख कर देवा को बहुत खुशी हुई और वो खाना खाने में जुट गया…
 
दूसरी तरफ.....पप्पू का घर।

सभी लोग साथ रसोई घर में जमीन पर बैठे रात्रि भोजन ग्रहण कर रहे थे, की तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।

शालु:इस समय कौन आ गया, देख जरा जाकर नीलम बेटी।

नीलाम उठी और दरवाजा खोला, सामने वीना खड़ी थी

बीना: माँ कह रही थी कि तुम घर आयी थी और कुछ देर इन्तजार भी करा था…

नीलम,,, हाँ कुछ बाते करनी थी तेरे से...आ जा अंदर मै खाना खा लूँ फिर बाहर जाकर आराम से बात करते है।

वीना नीलम के पीछे पीछे घर के आंदर आ गयी।

शालु:अरे वीना बेटी आओ आओ कैसी हो... आओ ..कैसे आना हुआ,, तेजा कैसी है।

बीना: नमस्ते काकी... । माँ ठीक है।बस ऐसे ही नीलम से मिलने आयी थी।

वीना खटाई पर बैठ जाती है बाकि सब अपना खाना खाते रहते है

नुतन: अरे वीना आजा तू ही खाना खा ले हमारे साथ।

वीना: नहीं भाभी मै खाके ही आयी हूँ।…

नीलम ने अपना खाना जल्दी ख़तम कर लिया....चल वीना बाहर चलते है, माँ मै वीणा के साथ यहीं गली में ही टहलने जा रही हूँ।

शालु: ठीक है पर ज्यादा देर मत रहना बाहर।

और नीलम वीना के साथ बाहर चली जाती है…

बीना: क्या बात है नीलम तू इतनी परेशान क्यों दिख रही है, सब ठीक तो है न?

नीलम: नहीं मै कहाँ परेशान हूँ। फिकर मत कर सब कुछ ठीक है। वो तो मै बहुत दिन से तुझसे मिली नही थी न और बाते भी नहीं करी तो तेरे घर आ गयी थी…

ऐसे ही कुछ देर नीलम इधर उधर की बाते करने में लग जाती है…

दूसरी तरफ.....

देवा का घर

देवा ने अपना खाना ख़तम कर लिया था इसलिए वो खटिये से उठा और अपने जूठे हाथ पानी से धोये और रत्ना का इन्तजार करने लगा।

रत्ना मेरी जान और कितनी देर सताओगी अपने पति को…देवा चीख़ के बोला।

हल्के बोलो बेटा बाहर कोई सुन न ले अभी सिर्फ 7 ही बजा है, और थोड़ा सबर करो,, फल मीठा ही मिलेगा… रत्ना बोली।

पर मुझे तो खट्टा और मीठा दोनों चाहिए मेरी जान…

देवा के मुँह से यह बात सुन कर रत्ना की हँसी छूट गयी और साथ ही साथ उसे शर्म भी आ गयी, की उसका अपना सगा बेटा उसे क्या क्या कहने लगा है अब।

रत्ना ने फिर अपने तैयार होने की गती को बढा दिया और अपना काम जल्दी जल्दी करने लगी।
 
दूसरी तरफ,, नीलम और बीना।

बीना: और बता देवा कैसा है…

नीलम देवा का नाम सुनते ही शर्मा गयी और साथ ही साथ उसके दिमाग में सुबह वाली और कल रात वाली घटना भी सामने आ गयी, और उसे याद आया की उसे वीना से उस बारे में भी तो बात करनी है, पर आखिर कैसे स्टार्ट करे यह बात??

नीलम: वो अच्छा है वीना, अच्छा सुन एक बात पुछनी थी तुझसे बस मेरी बात को गलत मत लेना।

वीना: अरे पगली दोस्त हूँ। गलत क्यों लुंगी, तू बेझिझक पूछ क्या मैंटर है?

नीलम को समझ नहीं आ रहा था की वो कैसे बोले की उसका अपना भाई उसकी माँ को चोदता है और देवा भी अपनी माँ को चोदता है,, क्या यह सही हो रहा है?

नीलम: वीणा मुझे समझ नहीं आ रहा की मै यह बात तुझसे कैसे कहूँ। शर्म आ रही है।

बीना: ऐसी क्या बात है क्या देवा ने तेरे साथ कुछ…?

नीलम: नहीं वीना यह नही पर कुछ इसी से रिलेटेड है।

वीना: मतलब देवा ने किसी के साथ करा?

नीलम: नहीं देवा के बारे में नहीं है।

बीना: तो कौन है, क्या किसी और ने तेरे साथ कुछ करा?

वीना अपना दिमाग लगाते हुए तुक्के भिड़ा रही थी।

नीलम: नहीं नहीं यह नहीं मेरे बारे में है नहीं देवा के बारे में...

नीलम ने झूठ बोला, वो देवा को शायद बदनाम नहीं करना चाहता थी।

बीना: तो बता फिर की आखिर क्या बात है।

नीलम: क्या घर वालों में सम्भोग होना आम बात है?

नीलम के मुँह से यह शब्द सुन के वीना को एक झटका सा लगा।

बीना: यह…यह तू क्या पूछ रही है…मतलब ऐसा क्या हुआ…तूने ऐसा क्यों पुछा।

नीलम को अहसास हुआ की वीना के पसीने छूट गए है…

दूसरी तरफ.... देवा का घर

७:१५ हो गए है रत्ना और कितना सताओगी अपने बेटे को अपने सुहाग को.... देवा रत्ना के दरवाजे को खटखटाते हुए बोला…

उसने ऐसा बोला ही था की तभी दरवाजा खुला जिसे देवा बहुत खुश हो गया।

वह जैसे ही अंदर घुसा उसने पाया की कमरे की बत्ती बंद है और बिलकुल अँधेरा है....

इसलिये उसने सबसे पहले बत्ती चालु करी और सामने का नजारा देख कर उसका लंड खड़ा होने लगा…
 
चुदाई जारी रहेगी......

बहुत सारे कमेंट और लाइक के लिए थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अपडेट भी जल्दी देने की मैं कोशिश करूँगा।कहानी आपलोगों को कैसी लगी ।अपने विचार अवश्य दें।thanks.
 
अपडेट 111

दूसरी तरफ.....नीलम का घर।

नीलम: देख मैंने कहा था न की बात अलग सी है।

बीना: पर तूने ऐसा पूछा क्यों? क्या कुछ हुआ है ऐसा कही।

वीना यह बोलति हुई थोड़ी हकला सी रही थी।

इस बात को नीलम ने भाँप लिया और उसे थोड़ा शक होने लगा और दोपहर वाली बात याद आ गयी जब वो वीना के घर में थी और रसोई से सिसकी की अवाजें आ रही थी।

नीलम: ऐसा ही मान ले वीना की मैंने कुछ ऐसा देखा है…तू बस बता क्या ऐसा होने आम है…

वीना यह सुनके और पसीना पसीना हो गयी थी और कुछ बोली नही।

नीलम ने कई बार उसका नाम लिया पर वीना अपनी ही दुनिया में खो गयी थी, यह साफ़ हो गया था नीलम के दिमाग में की वीना के घर में भी वही चल रहा है जो उसके घर और देवा के घर चल रहा है…पर अब वो यह बात नहीं बोल सकती थी।

नीलम ने उसे एक दो बार हिलाया तो वो असल दुनिया में वापस आयी।।

नीलम: बता न वीना…तू कहाँ खो गयी है।

बीना: तूने कहा देखा यह सब सच सच बता…

नीलम: क्या मतलब?

बीना: अरे तूने परिवार के ही लोगो को सम्भोग करते हुए कहाँ देखा बता....

नीलम को लगने लगा की पक्का वीना के घर में कुछ चल रहा है और वीना भी उसमे शामिल है…पर नीलम यह जानती थी की अगर उसने तेजा और वरुण वाली बात बोली तो वीणा का मुँह नहीं खूलेगा और वो बात को बदल देगी, पर अगर उसने अपने घर की बात उससे कही तो शायद वीना अपना मुँह खोल दे अपनी मरजी से, पर अगर नीलम ने वीना को शालु और पप्पू की चुदाई के बारे में वीना को बताया तो उसी के घर वाले बदनाम होंगे अगर वीना ने यह किसी और को बता दिया तो…

कुछ देर नीलम ऐसे ही सोचती रही और उसने यह फैसला किया की उसके पास अपने घर की बात बोलने के अलावा कोई और चारा नहीं है…

नीलम: वीना पहले तू मुझसे वायदा कर की यह बात हम दोनों के बीच में ही रहेगी और किसी तीसरे को कभी नहीं पता चलेगी।

वीना: मै वादा करती हूँ।

नीलम: यार मेरा भाई और मेरी माँ के बीच यह सब चल रहा है।

नीलम के मुँह से यह बात सुनकर की शालु और पप्पू चुदाई करते है वीना को एक झटका मिलता है, पर मन ही मन उसे राहत भी मिलती है।

बीना: क्या।

नीलम: हाँ वीना मुझे कल पता चला, और भाभी भी इसमें मिली हुई है, पप्पू भैया माँ और भाभी को एक साथ…

बीना: हाय सच्ची।

वीना अब थोड़ी राहत महसूस करती है।
 
नीलम: सिर्फ मेरा भाई ही नहीं देवा भी अपनी माँ के साथ करता है…

बीना: क्या?

वीना देवा के बारे में सुनकर और राहत पाती है।

नीलम: हाँ वीरा मुझे उसके बारे में भी आज ही पता चला सुबह जब मै देवा के घर गयी थी तो मैंने देखा की…।

ये कहते हुई नीलम ने वीरा को सुबह की घटना बतायी जिसमे देवा अपनी माँ की गांड मार रहा था।

बीना: नीलम यह तो बहुत आश्चर्य की बात है की पप्पू और देवा अपनी-अपनी माँ के साथ सम्भोग करते है।

नीलम(शर्माते हुए): मुझे भी बहुत झटका लगा था, पर सुन। पता है आज सुबह जब मैंने देवा और रत्ना काकी को देखा था तो नीचे थोड़ी खुजली भी हुई थी…

नीलम की यह बात सुनकर वीना मंद मंद मुस्करायी।

नीलम माँ बेटे की चुदाई देख कर गरम हो गयी…मतलब यह भी कश्ती में सवार हो सकती है।

नीलम: वीरा मुझे बता क्या यह सब बहुत आम हो चुका है आज कल? परिवार वालो के बीच सम्भोग होना इतना आम हो चुका है क्या? मेरी दुविधा को मिटा बीना।

बीना: नीलम पहले तू बता की तुझे यह चीज बुरी लगी या नहीं?

वीना के सवाल पूछने पर नीलम ने सोचा की वीरा यह क्या पूछ रही है, भला कोई माँ बेटा चुदाई करेगा तो क्या बेटी को अच्छा लगेगा? भला यह कैसा सवाल हुआ।

नीलम: वीना यह तू क्या कह रही है।।यह कैसा सवाल है।।मैने अपनी माँ और भाई को जो करते देखा है वो सही कैसे हो सकता है।

बीना: यह तो तेरा दिमाग कह रहा है नीलम पर तेरा दिल भी क्या यही कहता है की यह गलत है?

नीलम: तू कहना क्या चाहती है वीना? खुल कर बता।

बीना: मै इतना कहना चाहती हु की जब तूने शालु काकी को पप्पू भैया से करवाते देखा था तो तेरे शरीर में क्या एहसास हुआ था?

नीलम: सच कहु तो पहले मुझे बहुत झटका लगा था और फिर मुझे नीचे अजीब सा लगा।

बीना: मतलब तेरा पानी निकला अपनी माँ और भाई को देख कर?

नीलम: यह कैसी बात कर रही है वीना। मै ऐसा सपने में भी नहीं सोच सकती की मै उन दोनों के बीच जो हो रहा है उसे देख कर अपने को शांत रख सकूँ।

बीना: देख नीलम यह जो सब हो रहा है आज कल थोड़ा आम हो गया है।

नीलम: तुझे कैसे पता।

बीना: पहले तू मुझसे वायदा कर की मै जो भी तुझे बताऊँ वो हमारे बीच ही रहे।

वीना के मुँह से यह शब्द सुनकर नीलम समझ गयी की अब वीना क्या कह सकती है…तेजा और वरुण के बारे में।

नीलम: मैं वादा करती हूँ।
 
बीना: नीलम मुझे गलत मत समझना पर मेरे घर में भी यही सब हो रहा है।

नीलम(चौंक कर): हे भगवान।

बीना: मेरा भाई और मेरी माँ साथ ही सोते है रात को।

नीलम चौंक जाती है और उसका शक सच हो जाता है।

नीलम: मुझे तो यकीन नहीं हो रहा तेजा काकी और वरुण भी यह सब करते है।

बीना: हाँ और नीलम एक बात कहूँ।

नीलम: हाँ।

बीना: इसमें कुछ गलत नहीं है।

नीलम: वह कैसे?

बीना: तू तो जानती ही है की बापू को मरे कितना समय हो गया है।शुरुआत मै मैंने माँ को बहुत दुखी देखा था शायद उनकी शारीरिक जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही थी इसलिए वो बहुत दुखि थी…

पर 2 साल पहले माँ काफी खुश रहने लगी थी जो उनके चेहरे पर भी साफ़ दिखती थी और जब मैंने थोड़ी ताक झांक की तो उन दोनों को रंगे हाथ पकड़ा पहले तो मै बहुत चिल्लायी दोनों पर, पर मुझे फिर एहसास हुआ की माँ की भी शारीरिक जरूरतें है, और वो दूसरी शादी तो कर नहीं सकती, तो अगर घर की बात घर में रहे और माँ भी खुश रहे तो मुझे कोई दिक्कत नही।

इसलिये मैंने उनके रिश्ते को अपना लिया और वो दोनों अब घर में पति पत्नी की तरह रहते है,,,

मै अब उन्हें कुछ नहीं कहती…बस माँ खुश है तो मै भी। आखिर उनकी जरूरतें पूरी होनी भी जरुरी है।

नीलम यह सब सुनके थोड़ी हैरान हुई की वीना ने यह रिश्ता अपना लिया है,,,वह कुछ बोलने ही वाली थी की तभी वीना बोली।

बीना: और एक बात और नीलम तू किसी को मत बताना कुछ महीनो पहले मुझे लगा की जब माँ भी कर सकती है भाई के साथ तो क्यों न मै भी बहती गंगा में हाथ धो लूँ।

ये कहते हुए वीना ने एक शरारती मुस्कान ले आई।

नीलम(चौंक कर) क्या, मतलब तू भी वरुण के साथ?

बीना: इसमें क्या हर्ज है जब बेटा माँ को चोद सकता है तो बहन भाई से नहीं करवा सकती?

वीना के मुँह से चोदना शब्द सुनकर नीलम और चौक गयी उससे यकीन नहीं हो रहा था की उसकी अपनी सहेली अपने भाई से चुदवाती है…

नीलम: वीना यह तू क्या कह रही है तेरा भाई है वो और तू उससे? छी....

बीना: भाई के साथ साथ मरद भी है…और इसमें कुछ गलत नही है नीलम मेरी बात मान…जिंदगी मजे लेने के लिए है उसे बर्बाद करने का क्या फायदा। जब बिना बदनामी के अपने ही घर में तगड़ा लंड मिल जाए तो बाहर मुँह मारने की क्या जरुरत।
 
नीलम: छी: वीना यह कैसे शब्द इस्तेमाल कर रही है…।

बीना: अब लंड को लंड ही तो कहूँगी…

नीलम: वीना मुझे यकीन नहीं हो रहा है की तू यह सब करती है अपने भाई के साथ। क्या काकी को पता है तुम्हारे और वरुण के बारे में.....

बीना: पता है…बल्कि हम तीनो यह साथ ही करते है रोज अब तो…आज रात को भी मेरा भाई अपने मस्त मस्त लौडे से मेरी और माँ की चुत को चोदेगा एक साथ…

बहुत कमाल का लौडा है मेरे भाई का नीलम सच…मैं दीवानी हो चुकी हूँ…बस पूरे दिन चुदाई का ही मन करता रहता है मेरा और माँ का।

नीलम वीना के मुँह से यह बाते सुंनकर भौचंकी रह जाती है।।उसका मुँह खुला का खुला रह जाता है जब वीना उससे यह सब कहती है और उसके मुँह से कुछ नहीं निकलता…वो बहुत हैरत में आ गयी थी…उसे यकीन नहीं हो रहा था की वीरा और उसकी माँ तेजा साथ मिलकर उसके भाई वरुण से चुदवाती है।

नीलम: वीना तुझे पता तो है न की तू क्या कह रही है ?मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा तेरी बातो पर…

बीना; ठीक है तो फिर कल मै साबित करके दिखाउंगी तुझे, कल मै आउंगी तेरे घर पर फिर अपने साथ ही अपने घर ले जाऊंगी और अपने भाई और माँ की करामात साफ़ साफ़ दिखाउंगी…। तैयार रहना…और हाँ यह बाते हमारे बीच ही रहनी चाहिए…

इतना कह के वीरा अपने घर की तरफ निकल गयी पर नीलम वही मूरत जैसी खड़ी मुँह खोले खड़ी थी…उसे यकीन नहीं हो रहा था जो कुछ भी वीरा अभी उससे कह कर गयी थी…और कल वो अपनी बात साबित भी करेगी…
 
अपडेट 112

दूसरी तरफ....देवा का घर।

देवा ने अंदर जाकर कमरे की बत्ती जलायी और अपने सामने का नजारा देख कर अपने लंड को खड़ा होने से नहीं रोक सका…सामने उसकी माँ एक ट्रांसपेरेंट नाइटी में खड़ी थी, उसने अंदर ब्रा पेंटी पहनी हुई थी।

और काफी मेकअप भी किया हुआ था।

रत्ना देवा को अपनी तरफ देखते हुए पाकर थोड़ा मुस्कराते हुए अपनी अदा को और निखारती है।

तो कैसा लगा आज का माल?? रत्ना ने बड़ी आशा भरी नज़रो से देवा की तरफ देख कर पुछा

पर देवा ने कोई जवाब नहीं दिया क्युकी वो तो अपनी माँ की सुंदरता देख कर ही अलग ही दुनिया में पहुच गया था…

रत्ना ने अपना सवाल दोबारा पूछा तब देवा ने जवाब दिया…

“एक दम झक्कास और मननमोहक मेरी जान रत्ना”

देवा के मुँह से अपनी बडाई सुनकर रत्ना थोड़ा शरमाती है पर देवा उसकी तरफ बढ़ता है और उसे अपनी बाहों में लेकर चूमने लगता है, रत्ना भी उसके होंठो को अपने होठो में जकड लेती है और चूसने लगती है।

कुछ देर तक रत्ना और देवा एक दूसरे के होठो को ऐसे ही प्यार से चूसते हुए प्यार करते रहते है,,,

फिर रत्ना देवा से अलग होती है और पीछे हटती हुई कहती है…।

“मेरी जान अभी तो पूरी रात बाकी है बल्कि अभी तो रात भी नहीं हुई है सिर्फ ७:३० हुआ है…।

इतनी भी क्या जल्दी है यह जिस्म आपका ही है…पूरा हक़ है आपका इस पे…” रत्ना बोली।

“रत्ना मेरी जान…क्या करुं तू आज लग ही आइटम रही है…

मेरे से रहा नहीं जा रहा…

अपनी माँ को जान लगाकर चोदुँगा मै आज अपने मोटे तगडे लौडे से…

आज तेरी गांड और चूत दोनों फाड़ के रख दूंगा माँ…

बच नहीं पाओगी अब तुम मेरे लंड से…”

देवा ने अपने लंड को अपनी धोती पर से पकड़ कर कहा…

रत्ना यह सुनकर एक शैतानी हँसी हँस देती है और आगे बढ़कर देवा के हाथ को उसके लंड के ऊपर रख देती है।

“तो मै कौन सा अपने बेटे को रोकने वाली हूँ अपनी गांड और चूत को फाडने से…”

रत्ना देवा का लंड जोर से दबा कर बोली, और फिर अपना हाथ नीचे कर कर पीछे को हटने लगी…

और जैसे जैसे वो पीछे हटती जा रही थी वो अपने नाइटी के बटन को भी एक एक करके खोलती जा रही थी…
 
जब सारे बटन खुल गए तो वो देवा को देखते हुए अपनी नाइटी को अपने जिस्म पर से हटाने लगी।

और देवा के सामने उसकी माँ धीरे धीरे करके ब्रा और पेंटी में सामने दिखने लगी…

देवा यह नजारा देख कर और गरम हो रहा था…

आज पहली बार उसकी अपनी माँ उसके लिए तैयार हुई थी वो भी एक पत्नी की तरह जो अपने पति के लिए तैयार होती है हर रात चुदाई से पहले।

और फिर धीरे धीरे करके अपने सारे कपडे उतार कर अपने पति से चुदवाती है।

रत्ना मुस्कूराते हुए अपनी नाइटी को निकाल कर देवा के ऊपर फेकती है देवा उसे पकड़ लेता है और अब रत्ना अपने देवा के सामने सिर्फ ब्रा और पेंटी में ही थी।

“तो मेरे पति देव आज रात कहाँ अपनी पत्नी को चोदने वाले है अपने तगडे लंड से?” रत्ना ने मुस्कराते हुए देवा से सवाल किया।

“जहाँ मरजी हो मेरी जान तुम्हारी वहां चोदूँगा तुम्हे खुलकर, पर अभी पहले अपने जिस्म से तो रूबरू करवाओ” देवा ने कहा…

यह सुनकर रत्ना देवा के सामने से गुजरती हुई बिस्तर पर बैठ जाती है।

देवा रत्ना की अदाओ को देखकर अपनी धोती पर से ही अपने लंड मसल रहा था उसने यह भी पाया की उसकी माँ इस समय भी उसके नाम का मंगलसुत्र अपने गले में पहनी हुई थी…

“आज देवा पूरा मूड में है, असली मजा तो आज आयेगा चुदाई का अपने बेटे के साथ” रत्ना ने मन में सोचा।

लगता है आज रत्ना ने कुछ सोच कर रखा है अपने मन में…

शायद वो कुछ अच्छा करना चाहती है अपनी चुदाई में…

“माँ अब जल्दी से यह बाकी कपडे भी निकाल दो ना, मै मरा जा रहा हु तुम्हे नंगा देखने के लिए” देवा ने कहा

“हाँ हाँ मेरे बेटे मै भी मरी जा रही हु तेरे सामने नंगी होने को, और तेरे से खुल कर चुदवाने को भी…

आज मै चाहती हूँ की तू मुझे पूरी रात नंगा रखे और चोदता रहे…

मेरी चूत गांड और मुँह तीनो छेदों में अपना लंड डाले और मुझे चोदता रहे…” रत्ना ने अपनी चुचियों से खेलते हुए कहा…

यह सुनके देवा ने अपनी धोती का नाड़ा खीचा और धोती को नीचे कर दिया और अपना कुर्ता भी ऊपर करके निकल दिया फिर बोला।

“आज मै तुम्हारी सारी गर्मी निकाल दूंगा माँ…

देखती जा आज तेरे बेटे का लंड नहीं थकेगा बिलकुल…

आज मै तेरे हर चीज को भर दूंगा अपने वीर्य से और तेरी मतवाली गाँड को मार मार कर सुजा दुँगा…।

चल जल्दी से नंगी हो जा साली छिनाल”

कमरे में देवा की गालिया गूंज रही थी…
 
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