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हाय रे ज़ालिम.......complete

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हिम्मत ने पहली बार इतनी छोटी चूत इतनी नजदीक से देखी थी। उसकी बुर पर हल्के हल्के सुनहरे बाल आए हुए थे। उसकी बुर देखकर तो हिम्मत का दिल खुश हो गया।

वो हिम्मत का लंड को देखकर बोली- अंकल, ये तो बहुत बड़ा है।

हिम्मत ने उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रखा और बोला- अब ले … इसे छू कर भी देख और बता कैसा है ये?

उसने लंड को अपने हाथ में पकड़ा और बोली- अंकल ये तो बहुत गर्म है।

हिम्मत: हां, ऐसे ही तेरी भी तो गर्म है यह देख न।

यह कहकर हिम्मत ने उसकी चूत पर हाथ रख दिया. हिम्मत के हाथ का स्पर्श पाकर वो जरा सिहर सी उठी। लेकिन हिम्मत ने उसकी चूत को सहलाना शुरू कर दिया। उसकी चूत के दाने को रगड़ने लगा। उसकी आह निकलने लगी।

हिम्मत ने उसके हाथ का दबाव अपने लंड पर बनाते हुए कहा: अब ऐसे तुम भी आगे पीछे करो।

वो हिम्मत के लंड की मुठ मारने लगी औऱ हिम्मत उसका दाना सहलाने लगा। धीरे धीरे वो गीली होने लगी। उसकी आंखें लाल होने लगीं।

हिम्मत ने उससे कहा- मजा आ रहा है ना!

सरिता: हां अंकल बहुत मजा आ रहा है … और करो।

हिम्मत: रुक … फिर तुझे और मजा देता हूं … तू बिस्तर पर टांगें फैला कर लेट जा।

सरिता लेट गयी, अब उसकी चिकनी चूत हिम्मत के सामने थी। हिम्मत ने झुक कर अपना चेहरा उसके पास किया तो उसमें से साबुन की खुशबू आ रही थी।

हिम्मत ने उससे पूछा- अभी नहा कर आई हो?

तो उसने कहा- हाँ अंकल, बस नहा कर सीधे आपके पास आई हूँ।

हिम्मत ने उसकी अनछुई चूत पर अपनी जीभ लगा दी और उसे चाटने लगा। वो तो उछलने लगी। उसे और ज्यादा मजा देने के लिए हिम्मत उसके संतरे भी निचोड़ने लगा।

वो सिसकारी लेने लगी- आहह अंकल बहुत मजा आ रहा है … और जोर से चाटिए न. मेरे दूध भी आराम से दबाइए ना … मुझे दर्द हो रहा है … आह हहहह … क्या कर दिया आपने अंकल … बहुत अच्छा लग रहा है।

थोड़ी देर बुर चाटने के बाद ही उसका बुरा हाल था। वो अपनी चूत को बार बार उठाते हुए हिम्मत के मुँह पर दबा रही थी। कुछ ही देर में वो हिम्मत के मुँह में झड़ गयी।
 
उसका थोड़ा सा ही पानी निकला था जिसे हिम्मत पूरा चाट गया। एक कुंवारी चूत का निकला हुआ पहला अमृत चखकर हिम्मत का मन तृप्त हो गया।

वो तो निढाल होकर हिम्मत की बांहों में गिर गई। उसने हिम्मत को जोर से जकड़ रखा था। कुछ देर तक हिम्मत ने उसे वैसे ही रहने दिया उसने भी अपने जीवन का पहले स्खलन का मजा लिया था। फिर हिम्मत ने उसके होंठ चूसे, चूचियां दबाईं तो थोड़ी ही देर में वो शांत हो कर बिस्तर में लेट गई।

हिम्मत ने उससे पूछा- कैसा लगा सरिता बेटी?

सरिता- बहुत ज्यादा मजा आया अंकल।

हिम्मत: चल अब तू भी जैसे मजा तुझे आया वैसा ही मजा मुझे भी दिलवा।

सरिता: कैसे अंकल मैं आपको मजा दिलवाने के लिए क्या करूं।

हिम्मत ने उसे उठाकर अपना लंड उसके मुँह के सामने कर दिया।

हिम्मत: अब तू भी इसे चूस और चाट जैसे मैंने तेरी चाटी थी।

सरिता: नहीं मैं नहीं करूंगी, इसमें से सुसु आता है … ये गंदी जगह है।

हिम्मत: अरे मैंने तेरी नहीं चाटी क्या? तुझे मजा नहीं आया क्या? चल अब नखरे मत कर … आजा ले ले मुँह में इसे।

उसने एक बार लंड मुँह में लिया और फिर बाहर निकाल लिया।

सरिता: अंकल अजीब सा लग रहा है … मैं नहीं करूंगी।

हिम्मत ने सोचा कि अब ये ऐसे नहीं मानेगी. उसने एक सौ का नोट और निकाला और उसे दिया और टेबल से शहद लेकर आया और उसे अच्छे से अपने लंड पर चुपड़ लिया. फिर उसके आगे लंड ले जाकर बोला- ले अब चूस अब मीठा लगेगा … जिस तरह तू आइसक्रीम को मजे से चटखारे लेकर चूसती है इसे भी एक आइसक्रीम ही समझ कर चूस।

फिर उसने लंड अपने हाथ में ले लिया। इस बार अब उसे चूसने में परेशानी नहीं हुई। शहद के स्वाद ने हिम्मत का काम आसान कर दिया।

वो धीरे धीरे लंड को अपने मुँह के अन्दर बाहर करने लगी। अब उसे भी लंड चूसना अच्छा लगने लगा। अब वो बड़े मजे से हिम्मत का लंड अन्दर बाहर ले रही थी।
 
हिम्मत का तो बुरा हाल था एक कमसिन लड़की उसका लंड चटकारे ले लेकर चूस रही थी।हिम्मत उसके मुँह की गर्मी सहन नहीं कर पाया। हिम्मत ने उसका सर पकड़ लिया और उसके मुँह के अन्दर जोर जोर से घस्से लगाने लगा। कुछ ही देर में हिम्मत ने अपना माल उसके मुँह में भर दिया।

सरिता हिम्मत का लंड अपने मुँह से बाहर निकालने की कोशिश करने लगी, पर हिम्मत ने भी जब तक उसने हिम्मत का सारा माल नहीं निगल लिया, उसे छोड़ा नहीं।

जब हिम्मत को लगा वो सारा माल पेट के अन्दर ले चुकी है, तभी हिम्मत ने लंड बाहर निकाला।

लंड बाहर निकलते ही सरिता बुरा से मुँह बना कर बोली: अंकल ये आपने क्या कर दिया … आपने तो मेरे मुँह में ही सुसु कर दिया।

हिम्मत: अरे मेरी रानी वो सुसु नहीं था … जब तुझे बहुत मजा आया था, तेरा भी तो नीचे से निकला था, जिसे मैंने चाट लिया था. ऐसे ही ये भी इसका घी था. सुसु थोड़े ही था, इसे पीने से ताकतवर होते हैं। जब तू इसे रोज पीएगी तो तू भी फ़िल्मी हिरोइन जैसी ही मस्त हो जाएगी।

सरिता- लेकिन बड़ा अजीब सा स्वाद था।

हिम्मत: पहली पहली बार जरा अजीब लगता है, आदत पड़ने के बाद तो तू रोज मेरे इस लंड को चूसने और उसके घी को पीने की जिद करेगी।

सरिता- हम्म …

हिम्मत: वैसे बता … मजा तो आ रहा है ना इस नए खेल में।

सरिता: हां अंकल बहुत मजा आ रहा है. अब तो मैं रोज ये खेल खेलूंगी।

हिम्मत: पर एक बात का ध्यान रखना, ये बात किसी को भी पता नहीं लगनी चाहिए ।

हिम्मत ने फिर आगे बढ़ने को सोचा और उसे बोला: चल सरिता अब फिर कुछ नया करते हैं।

सरिता- अंकल और कुछ भी कर सकते हैं क्या?

हिम्मत: अरे अभी तो बहुत कुछ है करने को … अभी तो मुझे बहुत सारे खेल आते हैं। वक्त तो आने दे, मैं तुझे देख कैसे कैसे खेल सिखाता हूं। चल आज का खेल तो सीख ले।

वो झट से राजी हो गई।
 
हिम्मत ने थोड़ी देर उसकी बुर चाट कर गर्म किया और जैसे ही वो झड़ने को हुई उससे पहले उसकी बुर चाटना छोड़ दिया।

सरिता बोली- अंकल जल्दी कुछ करो न … मेरे नीचे कुछ हो रहा है या तो उसे रगड़ो या मेरी उसको चाटो.

हिम्मत :एक बात सुन ले बेटी, मेरे इसको लंड कहते हैं और तेरी इसको बुर …

उसकी बुर पर हिम्मत हाथ घुमाते हुए बोला।

हिम्मत: और हां आज तुझे मजा मैं नहीं … मेरा ये लंड देगा। देख इसमें बहुत मजा आता है चाटने से भी बहुत ज्यादा मजा। पर पहले दिन थोड़ा सा दर्द भी होता है। तुझे वो दर्द सहन करना पड़ेगा, वो भी सिर्फ आज ही बस … कल से तो तुझे बिल्कुल भी दर्द नहीं होगा, सिर्फ मजा ही मजा आएगा।

सरिता बड़े ध्यान से हिम्मत की बात सुन रही थी।

हिम्मत: एक बात और इस बारे में तो किसी को भी किसी भी हालत में नहीं बताना है. बोल सह लेगी थोड़ा सा दर्द?

सरिता: हां सह लूँगी … पर मजा तो दिलवाओ और आप चिंता न करो, बस खेल शुरू करो।

हिम्मत: तो आज मैं अपने लंड को तेरी इस बुर में घुसाउंगा।

सरिता: पर अंकल वहां तो उंगली भी नहीं जा रही थी, इतना बड़ा लंड कैसे जाएगा?

हिम्मत: सब चला जाएगा. बस थोड़ा सा दर्द सहन करना और चाहे कुछ भी हो जाए चिल्लाना नहीं। नहीं तो बाकि रुपये जैसे ही तू चिल्लाई … नहीं दूंगा।

सरिता- नहीं नहीं अंकल मैं नहीं चिल्लाऊंगी, पर जरा आराम से अन्दर डालना। मुझे डर लग रहा है।

हिम्मत: अब तक हमने जो भी किया है। तुझे डर लगा क्या? डर मत मैं हूँ न तेरे साथ। बस थोड़ी देर के दर्द के बाद जिंदगी भर मजे ही मजे हैं। तू जरा भी चिंता मत कर। अब जरा इसे चूस दे ये आज तुझे बहुत मजे करवाएगा।

उसने हिम्मत के लंड को चूस कर और सख्त कर दिया। हिम्मत ने अपने लंड पर ऊपर तक तेल चुपड़ लिया और उसकी बुर में भी जहां तक तेल जा सकता था, उतना तेल से तर कर लिया। फिर उसकी कमर के नीचे एक तकिया रखा, जिससे उसकी बुर जरा ऊपर को उठ गई।

फिर हिम्मत उसकी टांगों के बीच एक पुराना तौलिया बिछा दिया, ताकि बिस्तर खराब न होने पाए। सारी तैयारी करने के बाद हिम्मत ने अपने लंड का सुपाडा उसकी कोमल सी छोटी सी कुँवारी बुर के मुहाने पर रखा और उस पर उसे रगड़ने लगा।
 
बड़ी फिसलन थी, लंड सेंटर पर लग ही नहीं रहा था। हिम्मत ने एक हाथ से लंड पकड़ कर उसकी टांगें फैलाकर लंड को निशाने पर रखा और उसके होंठों से होंठ मिलाकर एक हल्का सा झटका मारा तो लंड का टोपा अन्दर घुस गया था, पर वो छटपटाने लगी।

हिम्मत ने उसके होंठों पर हाथ रखकर कहा: बस यही दर्द है, थोड़ा सा सहन करो बस अभी थोड़ी देर में ही दर्द सही हो जाएगा।

हिम्मत ने लंड को वैसे ही फंसे रहने दिया और उसे सहलाने चाटने चूसने लगा. उसकी चुचियों को सहलाने से उसका ध्यान दर्द से हटकर उस तरफ हो गया। जिससे थोड़ी ही देर में वो नार्मल हो गयी।

हिम्मत: अब दर्द कम है न सरिता बेटी ?

उसने हां में सर हिलाया।

हिम्मत ने उसे सहलाते सहलाते ही एक झटका और मारा तो लंड थोड़ा सा अन्दर और घुस गया। उसकी बुर तो बहुत ज्यादा टाइट थी, लंड को उसकी बुर के अन्दर जाने में बहुत मेहनत करनी पड़ रही थी।

हिम्मत ने लंड पेलने के बाद जैसे ही उसका मुँह खोला, वो रोने लगी- अंकल नहीं, निकाल लो इसे, मैं नहीं सह पाऊंगी। मुझे बहुत दर्द हो रहा है।

हिम्मत: तो ठीक है बाकि 5 हज़ार रुपये कैंसिल। दर्द सहने के ही तो 10 हज़ार रुपये मिल रहे हैं। वो ही तू सहन नहीं कर पा रही है। मैंने कहा भी था कि थोड़ी देर का दर्द है, थोड़ा औऱ दर्द होगा, फिर कभी नहीं होगा। अभी मजा आने लगेगा. फिर भी नहीं करना तो ठीक है, मैं निकाल लेता हूं। अब यहां आना भी मत।

सरिता रोने लगी- अंकल मैं क्या करूँ मुझे बहुत दर्द हो रहा है … ऐसा लग रहा है आपका लंड नहीं, चाकू अन्दर गया है। मेरी बुर फट सी रही है।

बात तो उसकी सही थी इतनी छोटी सी बुर में इतना मोटा लंड जाएगा, तो उसने फटना ही था। पर हिम्मत ने उसे समझाया- देख आधा दर्द तो तूने सह भी लिया है … बस और थोड़ा सा दर्द होगा फिर 5 हज़ार रुपये भी तेरे और मजा भी आएगा। थोड़ी देर की बात है।

हिम्मत ने उसकी पैंटी को उसके मुँह के अन्दर डाला और उसका मुँह हाथ से दबा लिया। लंड को थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर एक जोरदार झटका मारा लंड उसकी बुर फाड़ता हुआ आधा अन्दर घुस गया। उसकी सील टूट चुकी थी। उसका गर्म गर्म निकलता हुआ खून हिम्मत को अपने लंड पर महसूस हो रहा था । हिम्मत का लंड भी उसकी बुर पर बुरी तरह फंसा हुआ था। उसका तो बुरा हाल था. उसके मुँह में पेंटी डाली होने के कारण गूं गूं की ही आवाज बाहर आ रही थी। उसकी आंखें दर्द की अधिकता से बाहर को आने लगी थीं। वो हिम्मत को अपने ऊपर से हटाने की असफल कोशिश कर रही थी।
 
करीब 5 मिनट तक हिम्मत उसके ऊपर ऐसे ही पड़ा रहा, लंड को जरा भी हरकत नहीं दी। जब वो फिर से जरा सा नार्मल सी लगी, तो हिम्मत ने उससे कहा- बस हो गया सरिता, अब मजा आएगा।

हिम्मत ने उसकी पैंटी उसके मुँह से निकाल दी औऱ फिर उसके होंठ अपने होठों से दबाकर हिम्मत ने फिर से एक जोरदार झटके के साथ ही पूरा लंड उसकी बुर में उतार दिया. वो तो बेहोश हो गयी। थोड़ी देर के लिए तो हिम्मत भी डर गया. बुर खुल चुकी थी लंड बाहर निकालते ही उसमें से खून की धार बाहर आने लगी। पर हिम्मत को पता था ये कमसिन लड़की आराम से लंड ले लेगी. क्योंकि बाहर के देशों में इससे भी कम उम्र की लड़कियां लंड का मजा ले चुकी होती हैं।

हिम्मत ने पास रखे कपड़े से उसकी बुर से निकल रहे खून और अपने लंड पर लगे खून को साफ किया और फिर उसकी बुर में आराम से लंड घुसा दिया। इस बार भी लंड टाइट ही अन्दर गया था, पर वो तो बेहोश पड़ी थी। हिम्मत किसी जानवर की तरह लंड अन्दर बाहर करने लगा ताकि उसके होश में आने से पहले लंड उसकी बुर को पूरा खोल सके।

हिम्मत राव अब पूरा जानवर बन चूका था।वह सरिता के छोटे छोटे निप्पलों को अपने दांतों से काट रहा था। और सरिता की बुर में अपना लंड पूरी ताकत के साथ पेल रहा था।

हिम्मत: साली रंडी तू क्या समझती है बेहोश हो गई तो तुझे छोड़ दूँगा साली रंडी। तुझे तो मैं ऐसे पेलूँगा की आज के बाद तेरी बुर में आदमी क्या घोड़े का भी लंड चला जाएगा। साली क्या गरम कुतिया है तू । तू मेरी ज़िन्दगी में आनेवाली सबसे छोटी रंडी है ।

हिम्मत सचमुच का दरिंदा था।उसने सरिता को कितनी शराफत से सेक्स के लिए तैयार किया था।लेकिन अब अपनी असलियत दिखाने लगा था।

हिम्मत ने आधे घंटे तक बेहोशी में ही सरिता की चूत को फाड़ता रहा।सरिता बेहोशी में भी दर्द से कराहने लगती।अब सरिता की चूत कुछ ढीली हो चुकी थी।

थोड़ी देर बाद वो होश में आने लगी, तो हिम्मत ने धक्के लगाने बंद कर दिए. हिम्मत ने उसे अपनी गोद में बिठा लिया, पर लंड नहीं निकाला। फिर पास में रखी पानी की बोतल से उसे पानी पिलाया और पहले से ही लाई हुई दर्द निवारक गोली भी खिला दी। क्योंकि असली दर्द तो उसे चुदाई के बाद पता चलने वाला था।

सरिता रोने लगी: अंकल मैं मर जाऊंगी … निकाल लो अपना लंड मेरी बुर से. सहन नहीं हो रहा है। मेरी बुर फाड़ दी आपने। इतना दर्द होगा पता होता तो कभी नहीं करवाती। अंकल अपनी माँ को बचाने के लिए रुपये के लालच ने तो मेरी जान ही ले ली।
 
हिम्मत: सरिता आज तक चुदाई से कोई भी नहीं मरा है … सभी लोग चुदाई करते हैं। इससे ज्यादा मजा किसी खेल में नहीं आता है। वैसे भी जो होना था सब हो गया। देख मेरा पूरा लंड तेरी बुर ने निगल लिया है। अब दर्द नहीं सिर्फ मजे ही मजे हैं। इस खेल में तुझे लगता है 5 हज़ार रुपये में तेरी हालत खराब हो गयी है … तो ये ले बाकि के 5 हज़ार रुपये तेरे दर्द सहने के और 1 हज़ार रुपये और दूंगा खेल खत्म होने के बाद।

अब लालच से सरिता की आंखें चमकने लगीं. हिम्मत ने भी समझ लिया मेरा काम बन गया। पैसों के लिए तो अब ये मेरा पूरा लंड उछल उछल कर लेगी।

हिम्मत: चलो अब दर्द से ध्यान हटाओ औऱ मजे में ध्यान लगाओ, फिर तुम्हें दर्द महसूस नहीं होगा।

हिम्मत ने उसकी चूचियां मसलीं और होंठ चूसे तो वो नार्मल होने लगी. हिम्मत ने उसे फिर लिटा दिया औऱ लंड को धीरे धीरे उसकी बुर के अन्दर अन्दर बाहर करने लगा. उसके लंड के हर चोट पर उसकी कराह उम्म्ह… अहह… हय… याह… निकल रही थी। हिम्मत का मजा और बढ़ रहा था। लंड तो खुशी से और बडा हो गया था, जो इस उम्र में भी कमसिन कुंवारी बुर फाड़ रहा था। जिस बुर में अभी अभी बाल आने शुरू ही हुए थे, उसमें हिम्मत का मोटा लंड अन्दर तक घुस कर सवारी कर रहा था।

धीरे धीरे उसकी पूरी बुर गीली हो गयी, शायद उसे भी मजा आने लगा था। अब लंड आराम से अन्दर बाहर हो रहा था। हिम्मत ने रफ्तार बढ़ा दी। उसका पूरा लंड पिस्टन की भांति सरिता की बुर में अन्दर बाहर हो रहा था। हिम्मत के हर धक्के में उसकी कराह निकल रही थी, पर आज किसी बात का डर नहीं था। होटल का कमरा साउंड प्रूफ था। हिम्मत उसे पूरी मस्ती में चोद रहा था। कुछ मिनट तक हिम्मत ने उसे अलग अलग आसनों में चोदा।

उसका भी बुरा हाल था. न जाने कितनी बार वो झड़ चुकी थी। उसकी मस्त बुर मारते मारते हिम्मत के लंड ने भी अब जवाब दे दिया। हिम्मत ने उसकी बुर में लगातार पिचकारी मारनी शुरू कर दी। ऐसा लग रहा था, उसकी बुर हिम्मत के लंड को औऱ अन्दर तक खींच रही थी और हिम्मत अपनी पूरी जान अपने लंड के रास्ते उसकी बुर में जैसे लबालब भर दिया। हिम्मत भी निढाल होकर उसके ऊपर ढेर हो गया।

थोड़ी देर बाद हिम्मत ने जब लंड को उसकी वीर्य से लबालब भरी बुर से बाहर निकाला, तो उसमें से वीर्य और खून की धार बहने लगी। हिम्मत ने उसकी ही पैंटी से अपना और उसका मिक्स वीर्य के साथ निकला खून साफ किया। थोड़ी देर बाद हिम्मत उसे बाथरूम ले गया औऱ अच्छे से उसकी बुर गर्म पानी से साफ की ताकि उसकी बुर की अच्छी सिकाई हो सके।
 
उसकी पूरी बुर फट चुकी थी। हिम्मत उसे उठाकर बिस्तर में लिटा दिया औऱ एक दर्दनिवारक गोली और आईपिल उसे खिला दिया।

उसे बहुत दर्द हो रहा था, पर अपनी माँ को बचाने के लालच में पट्ठी अपनी बुर फड़वा ही चुकी थी। हिम्मत ने उसे थोड़ी देर आराम करने को कहा। वो वही बिस्तर में थोड़ी देर बाद सो गई. शाम को जब वो जगी, तो अब उसका दर्द थोड़ा कम था। पर उसकी चाल लंगड़ा रही थी। आखिर चाल बिगड़ती भी क्यों नहीं, जिस बुर में कभी उंगली तक नहीं गयी थी, आज उसमें वो पूरा का पूरा लंड लेकर बैठी थी।

हिम्मत ने उसे रूम पर ही थोड़ी देर चलाया जब उसकी चाल थोड़ा ठीक हुई, तो हिम्मत ने उससे कहा: सरिता अगर मम्मी ने पूछ लिया लंगड़ा क्यों रही है, तो बात देना आज गली में फिसल गई थी, पर ये चुदाई की की बात बिल्कुल भी मत बताना।

उसने हां में सर हिलाया। हिम्मत का एक बार और उसे चोदने का मन था, पर उसकी हालत बहुत खराब थी। उसकी बुर सूजी हुई थी।

हिम्मत ने उसे कपड़े पहनाये और उसे 5 हज़ार इलाज के और 1 हज़ार दर्द सहने के लिए रुपये देते हुए घर जाकर आराम करने को बोला । और वेटर को बुलाकर उसके साथ लड़की को घर भेज दिया।

वो लड़खड़ाते हुए अपने घर चली गयी।

कुछ देर बाद हिम्मत विक्रांत के एक आदमी के पास मिलने गया। हिम्मत ने उस आदमी को देवा को ख़त्म करने के लिए कुछ उपाय करने को कहा।

उस आदमी ने बताया की विक्रांत के साथ उसके सभी साथी भी जेल में है। आप चिंता ना करे मैं आपके गाँव जाता हूँ वहाँ पड़ोस के जंगल के पास जो दारू का अड्डा है वहाँ मेरी पहचान के कुछ आदमी है मैं उनसे काम करवा लूँगा।आप पैसे दीजिये।हमलोग देवा को जल्दी ही ख़त्म का देंगे।हिम्मत राव उस आदमी को पैसे देकर अपने होटल चला जाता है।

उस दिन झाड़ियों में वही आदमी था।जिससे बाकि आदमी पैसो के लेंन देन की बातें कर रहे थे और उसे बाउजी बोल रहे थे।
 
अपडेट 129 पार्ट 2

अब इधर देवा के पास चलते है।

रश्मी की गांड की दमदार चुदाई के बाद देवा की आँख लग गयी थी।

जब वो उठा तब तक रश्मि जा चुकी थी और वो कच्छे में सोया हुआ था और दोपहर हो चुकी थी।

आज उसे नीलम से भी मिलना था तो वो अपने कपडे पहन कर नदी की तरफ चल पडा।

नड़ी किनारे उसे एक लड़की भी दिखाई दी जो एक चादर बिछाये सलवार कमीज में बैठी हुई थी।

उसकी पीठ देवा की तरफ थी।

देवा को समझने में देर नहीं लगी की वो नीलम ही थी…

देवा: “आज मौसम बड़ा खुशमुना है…”

नीलाम आवाज सुनकर पीछे देखती है और देवा को देख कर कहती है।

“हाँ कुछ अलग ही चल रहा है मौसम आज कल…

मेरा मतलब खुशनुमा बहुत ज्यादा…”

देवा नीलम की बात से मुस्कुराया और उसके पास आकर चादर पर बैठ गया…

देवा “बहुत भूख लगी है ”

नीलाम देवा को देखती है और फिर मुस्कराती है, “क्यों ऐसी क्या मेंहनत करके आये हो अपने खेतो में…”

देवा नीलम की बात सुन कर थोड़ा सोच में पड जाता है।

देवा(मन में), “तेरी बहन चोद कर आ रहा हुँ…”

देवा:“आज ज्यादा काम नहीं था पर तब भी भूख लगी है…”

नीलम देवा को देख कर खाना निकलती है और उसके सामने परोस देती है।

देवा, खाने पर टूट पड़ता है…

नीलम, “देवा तुम तो जानते ही हो की मै तुमसे कितना प्यार करती हूँ…”

देव, “ह्म्मम ” और खाना जारी रखता है…

नीलम, “और मुझे तुम्हारे और रत्ना काकी के सम्बन्ध से भी कोई आपति नहीं है…”

देवा थोड़ा खांस्ता है, उसे नहीं लगा था की नीलम यह बात उससे बोलेगी…

देवा: “हाँ…मुझे पता है…”

नीलम: “हाँ माँ ने तुम्हे बताया ही होगा…”

देवा खाना खाना जारी रखता है…

नीलम:“तुम तो यह भी जानते हो की मेरे भाई और माँ के बीच भी यही सब चल रहा है…”

देव, “हाँ.....”

नीलम: “क्या और भी कुछ बाते है जो मुझसे छूप्पी हुई है मेरे परिवार के बारे में ”

देवा अपने मुँह में खाना चबा रहा था “नूतन भी जानती है सब…”

नीलम: “हाँ मुझे वो भी पता है…”

देवा:“तो और कोई बात नहीं है तुम्हारे परिवार के बारे में”

नीलम:“अब मेरे परिवार का हिस्सा तुम भी हो…”

देवा: नीलम का इशारा थोड़ा थोड़ा समझ रहा था पर तब भी बोला “हाँ मै जानता हूँ.....तो....”

नीलम: “तो यह की मै अब चाहती हूँ की हमारा रिश्ता और मजबूत हो…हम दोनों में राज़ न रखो…जो बाते हो मुझे बता दो बेझिझक…”

नीलम की बात सुनते हुए देवा खाना ख़तम कर चुका था।

देवा: मैं भी तुमसे बेपनाह प्यार करता हूँ, और तुमसे राज़ नहीं रखना चाहता, बताओ क्या जानना है तुम्हे…”

नीलम, “हर वो चीज जिससे तुम्हारी नीलम अन्जान है”।
 
देवा ने गहरी सास ली, और मन में सोचा, “क्या बताना चाहिए मुझे…कही नीलम इस बार मुझसे दुर न हो जाए।”

देवा कुछ पल शांत रहकर सोचता रहता है।

नीलम, “सोचो मत कुछ…ऐसी कोई बात नहीं जो तुम्हारे लिए मेरा प्यार कम कर दे देवा”

और नीलम ने आगे बढ़कर देवा के होठो पर चुम दिया…

देवा तभी अपने सोच से बाहर आते हुए नीलम को सारी बाते बताने के लिए राजी हो गया।

देवा “क्या सच्ची तुम नाराज नहीं होगी और मुझे छोड कर नहीं जाओगी सब जानकार नीलम…अगर तुम दुर हो गयी तो मै जी नहीं पाउँगा…”

नीलम: “तुम भरोसा रखो देवा तुम्हारी नीलम तुम्हे कभी छोड कर नहीं जाएगी… बस मौत ही तुम्हारी नीलम को तुमसे दुर ले जा सकने के लायक है…और

काई भी नहीं…”

देवा ने नीलम के होठो पर ऊँगली रख दी… “मौत आये तुम्हारे दुश्मनो को……ऐसी बात दोबारा मत कहना…”

देवा की बात सुनकर नीलम की आँखों में आंसू आ गए जिन्हे गिरने से पहले देवा ने अपने हाथो में ले लिया…

नीलम: “तुम मेरी ख़ुशी चाहते हो न देवा…तो मुझे उन सभी औरतो के नाम बताओ…और अपने प्यार पर भरोसा रखो तुम्हारे साथ ही रहेगा…”

नीलम की यह बात सुनकर देवा सोचने लगा की नीलम ने ऐसा क्यों कहा की सभी औरतो के नाम बताओ…

आखीर वो यह कैसे जानती है की मेरी जिंदगी में रत्ना के अलावा और भी है…

देवा को थोड़ा शक हुआ…

देवा: क्या तुमने ऐसा क्यों कहा नीलम, की औरतो के नाम बताओ…”

देवा की बात सुनकर नीलम ने अपने मुँह पर हाथ रख दिया…

नीलम: “नहीं मेरा मतलब था की जो औरत तुम्हारी जिंदगी में है उनके बारे में बताओ…”

देवा: झूठ भी बोलना नहीं आता मेरी नीलम को…”

देवा ने नीलम की ज़ुल्फ़े सही करते हुए कहा…

नीलम: “नहीं झूठ नहीं मैं..... देवा……”

देवा: “नीलम बताओ क्या बात है…तुमने ही कहा था की हमारे बीच राज़ नहीं रहना चाहिए…”

नीलम: “नहीं कुछ नहीं है देवा कोई राज़ नहीं है…वो तो मुँह से निकल गया था अचानक…”

देवा: नीलम की आँखों में देखने लगता है लगातार और कुछ ही पल में नीलम अपनी आँखे बंद कर लेती है…

देवा: “अपने प्यार पर भरोसा नहीं तुम्हे…”

नीलम कुछ नहीं बोलती…

देवा: “ठीक है मै समझ गया…”

और देवा उठने लगता है।

तभी एक हाथ उसका हाथ पकड़ लेता है।

जब वह पीछे मुडकर देखता है तो रश्मि को अपने सामने मुस्कराता हुआ पाता है…
 
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