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बारीश का पानी नीलम के पूरे बदन को भिगो चुकी थी।
उसके भागने की वजह से पानी उसके चारो तरफ छलक रहा था, नीलम एक प्यारी सी मुस्कान के साथ जो किसी भी मरद को लुभा ले नीलम अपने देवा की तरफ भागते हुए ला रही थी…
नीलम के हर छोटे कदम के साथ देवा की ख़ुशी बढ़ती जा रही थी।
ये लम्हा किसी रोमांटिक मूवी की तरह हो रहा था।
वक्त ने तो जैसे सिर्फ इन दो प्रेमियो की ख़ुशी के लिए अपनी चाल हलकी कर दी हो ऐसा प्रतीत हो रहा था…
देवा और नीलम का प्यार एक मिसाल बनने लायक है।
ऐसा प्यार जो सिर्फ जिस्मानी नहीं है रूह से रूह बँधा हुआ है।
देवा और नीलम दो जिस्म एक जान है, लैला मजनू, हीर राँझा के बाद देवा नीलम वाली उपाधि भी शायद इनके प्यार को एक छोटा सा मुकाम दे इतना बड़ा है इनका प्यार…
देवा बांहे फ़ैलाये अपनी नीलम से गले लगने को बेताब थे।
नीलम भी भागति हुई अपने देवा की बांहो में बसना चाहती थी यह उसकी उत्तेजना से पता चल रहा था जिसके बल पर नीलम बारिश में भीगती हुई भाग रही थी…
ये लमहा तो जैसे समय की चाल को धीरे कर चुका था।
आखिरकार,नीलम देवा की बांहो में समां गई और देवा ने उसे अपने सीने से जकड लिया
और दोनों ने एक गहरी लम्बी साँस लेते हुए जोर जोर से रोना शुरू कर दिया…
दोनो एक दूसरे से कस कर लिपटे हुए थे।
नीलम के भिगने की वजह से उसे देवा के शरीर की गर्मी और अच्छी लग रही थी।
और देवा के होठो को सिर्फ अपने प्यार के स्पर्श मात्र ने ही मंत्रमुग्ध कर दिया था।
उसकी तो ख़ुशी का कोई ठिकाना ही नहीं रहा था।
दोनो एक दूसरे से कस कर लिपटे हुए थे और रो रहे थे…
देवा: “नीलम…”
नीलम: “नहीं…कुछ मत बोला नहीं…बस कुछ नहीं…।
नीलम देवा को शांत करके बस उससे लिपटी रहती है…
ये सबुत है सच्चे प्यार का…
नीलम को अपने प्रेमी से किसी बात की आशा नही है सिवाये इसके की वह उसे बेइन्तेहा मोहब्बत करे……
जो की देवा करता ही है…
ये एक और वजह थी की नीलम को देवा और रत्ना के रिश्ते से परेशानी नही थी।
नीलम देवा को और कस कर अपनी बाहों में जकड लेती है।
उसके भागने की वजह से पानी उसके चारो तरफ छलक रहा था, नीलम एक प्यारी सी मुस्कान के साथ जो किसी भी मरद को लुभा ले नीलम अपने देवा की तरफ भागते हुए ला रही थी…
नीलम के हर छोटे कदम के साथ देवा की ख़ुशी बढ़ती जा रही थी।
ये लम्हा किसी रोमांटिक मूवी की तरह हो रहा था।
वक्त ने तो जैसे सिर्फ इन दो प्रेमियो की ख़ुशी के लिए अपनी चाल हलकी कर दी हो ऐसा प्रतीत हो रहा था…
देवा और नीलम का प्यार एक मिसाल बनने लायक है।
ऐसा प्यार जो सिर्फ जिस्मानी नहीं है रूह से रूह बँधा हुआ है।
देवा और नीलम दो जिस्म एक जान है, लैला मजनू, हीर राँझा के बाद देवा नीलम वाली उपाधि भी शायद इनके प्यार को एक छोटा सा मुकाम दे इतना बड़ा है इनका प्यार…
देवा बांहे फ़ैलाये अपनी नीलम से गले लगने को बेताब थे।
नीलम भी भागति हुई अपने देवा की बांहो में बसना चाहती थी यह उसकी उत्तेजना से पता चल रहा था जिसके बल पर नीलम बारिश में भीगती हुई भाग रही थी…
ये लमहा तो जैसे समय की चाल को धीरे कर चुका था।
आखिरकार,नीलम देवा की बांहो में समां गई और देवा ने उसे अपने सीने से जकड लिया
और दोनों ने एक गहरी लम्बी साँस लेते हुए जोर जोर से रोना शुरू कर दिया…
दोनो एक दूसरे से कस कर लिपटे हुए थे।
नीलम के भिगने की वजह से उसे देवा के शरीर की गर्मी और अच्छी लग रही थी।
और देवा के होठो को सिर्फ अपने प्यार के स्पर्श मात्र ने ही मंत्रमुग्ध कर दिया था।
उसकी तो ख़ुशी का कोई ठिकाना ही नहीं रहा था।
दोनो एक दूसरे से कस कर लिपटे हुए थे और रो रहे थे…
देवा: “नीलम…”
नीलम: “नहीं…कुछ मत बोला नहीं…बस कुछ नहीं…।
नीलम देवा को शांत करके बस उससे लिपटी रहती है…
ये सबुत है सच्चे प्यार का…
नीलम को अपने प्रेमी से किसी बात की आशा नही है सिवाये इसके की वह उसे बेइन्तेहा मोहब्बत करे……
जो की देवा करता ही है…
ये एक और वजह थी की नीलम को देवा और रत्ना के रिश्ते से परेशानी नही थी।
नीलम देवा को और कस कर अपनी बाहों में जकड लेती है।