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हाय रे ज़ालिम.......complete

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देवा रत्ना का इशारा पाकर अपना लंड सीधा उसकी गांड के दरवाजे पर रख कर एक जोरदार झटका मारता है जिससे रत्ना की अब तक की सबसे तेज चीख़ निकलती है…

रत्ना आहह हह चोद देवा अपनी माँ की गांड मार जोर से पुरा लंड अंदर डाल दे गांड में…”अरे जालिम थोडा थूक तो लगा दे मेरी गाँड में। मेरी गाँड में दर्द हो रहा है।

देवा: होने दे साली रंडी तू मेरी प्यारी कुतिया है। तेरी गांड कितनी मस्त है साली।तूने मुझे बहुत तड़पाया है उसका बदला तेरी गांड से ही लूंगा।

देवा रत्ना के कमर को अपने हाथो में कैद करके जोर जोर से झटके मारते हुआ रत्ना की गांड मारने लगता है।।

रत्ना की चीखे हर झटके के साथ तेज होती जा रही थी आज खेत के बीच चुदाई के एहसास ने उसमे नई ताक़त भर दी थी की वो देवा के हर झटके का मजा लेते हुए उसे और तेजी से चोदने को प्रोत्साहित कर रही थी…

इस हिंदी कहानी के लेखक और संपादक राकेश है।

देवा “ले रत्ना अपने बेट के लंड को छिनाल…”

मैं तुझे खेतों में दौड़ा दौड़ाकर तेरी गाँड मारना चाहता हूँ साली रंडी।मैं तेरे दोनों पैरो को उठा रहा हूँ तू अपने दोनों हाथों के बल चलेगी और मैं तेरी गाँड मारता रहूँगा। ठीक है कुतिया।

रत्ना: ठीक है मैं कोशिश करती हूँ।

यह कहकर रत्ना अपने दोनों हाथों के सहारे खेत में चलने लगती है और देवा अपनी कुतिया बनी माँ की गाँड मारने लगता है।कुछ देर बाद रत्ना तेज तेज चलने लगती है।ऐसा लगता है जैसे देवा अपनी माँ को दौड़ा दौड़ा कर उसकी गाँड मार रहा है।

दूर से ऐसा लग रहा है जैसे कोई कुत्ता किसी गली की कुतिया को भगा भगा के चोद रहा हो।कुछ देर में रत्ना थक के रुक जाती है लेकिन देवा उसकी मोटी गाँड फाड़ता रहता है।

देवा:आह साली रंडी। कितनी गरम गाँड है तेरी। मेरा लण्ड पिछल रहा है।

रत्ना:आह बेटे तूने तो आज अपनी माँ को सचमुच की कुतिया बना दिया है। अब थोड़ी देर मेरी चूत में भी पेल दे।मेरी चूत आग उगल रही है।
 
देवा अपना मोटा लण्ड अपनी माँ की गाँड से निकाल कर रत्ना के मुँह में पेल देता है।

रत्ना: अरे बेटा अपना लंड को साफ तो कर लेता। मेरी गाँड से निकाल के मेरे मुँह में पेल दिया।क्या क्या लगा होगा उसमे.....

देवा: चुप साली रंडी। तू मेरी रांड है तुझे जैसे मन करेगा तुझे चोदुँगा।तू मेरा लंड ठीक से चूस.....

रत्ना देवा के लंड को किसी कुतिया की तरह चाटने चूसने लगती है।कुछ देर में ही देवा फिर रत्ना को कुतिया बना देता है और उसकी चूत में अपना मोटा लौड़ा पेल देता है।फिर रत्ना की कभी चूत तो कभी गाँड मारने लगता है।

देवा सटा सट रत्ना को चोदता ही जा रहा था वो दोनों क़रीब आधे घंटे से खेतो के बीच पूरे नंगे हुए चुदाई कर रहे थे और खूब चीख़ भी रहे थे…।।

रत्ना को आज किसी बात से मतलब नहीं था चाहे कोई भी देख ले उसे फर्क नहीं पडने वाला था इसलिए वो बस अपनी चुदाई का पूरा मजा लेना चाहती थी जो की वो ले भी रही थी…

10 मिनट और देवा ने रत्ना की गांड को बुरी तरह चोदा और फिर अपना लौडा बाहर निकाल लिया…

रत्ना देवा के लंड के सामने बैठ गई और उसका पानी निकलने का इंतजार करने लगी…

देवा रत्ना की उत्सुक्ता देख अपने लंड को हिलाते हुए सारा पानी उसके मुँह में भर देता है…

रत्ना देवा के लंड को चारो तरफ से चाट कर साफ़ कर देती है और फिर दोनों एक दूसरे को चुमकर कपडे पहन कर खाना खाने बैठ जाते है…

खाना ख़तम करने के बाद रत्ना कुछ पल तक उठ नहीं पाती क्युकी देवा की चुदाई से उसके दोनों छेदों में बहुत दर्द था पर वह काफी खुश भी थी क्यों आज पहली बार उसने खुले आसमान के नीचे अपने ही बेटे के साथ चुदाई करी थी…।

यह लमहा दोनों कभी नहीं भुलेंगे…।

किस्मत से दोनों को किसी ने नहीं देखा था।।

थोड़ी देर बाद रत्ना का दर्द कम हुआ तो वो उठ कर अपने घर चल दी…
 
कहानी के बारे में आपके सुझाव का स्वागत है।कहानी का लास्ट अपडेट 150 वाँ अपडेट होगा।

कहानी पसंद और कॉमेंट करने के लिए सभी पाठकों को थैंक्स।

कहानी जारी रहेगी।अपडेट भी जल्दी देने की मैं कोशिश करूँगा।कहानी आपलोगों को कैसी लगी ।अपने विचार अवश्य दें।thanks.
 
अपडेट 133

देवा अभी नंगा ही लेटा हुआ था।

पप्पू को आता देख देवा थोड़ा उठा।

पप्पू देवा को जमीन पर नंगा लेटा देख मुस्कराया,

पप्पु, “लगता है बहुत मजे मारे है रत्ना काकी के साथ।”

पप्पू देवा के नंगे खड़े लंड को देख रहा था…

देवा:“हाँ मजा तो आया पहली बार खुले में जो चुदाई की और वो भी अपनी माँ के साथ…”

पप्पु, “हाँ बाहर तक गूंज रही थी आवाज़े तुम्हारी, रश्मि भी आयी थी तुमसे मिलने आवाज़े भी सुन ली थी और मुझसे अंदर जाने की जिद्द कर रही थी…”

देवा: “तो आने देता दो-दो चुत मारने को मिल जाती…सोने पे सुहागा ”

पप्पु, “तूने ही तो कहा था की किसी को मत आने देना अंदर ”

देवा:“हाँ कहा था पर चूतिये रश्मि तो सब जानती है। पहले से वो देख भी लेती तो भी कुछ नहीं होता…”

पप्पू देवा के खड़े लंड को काफी देर से देख रहा था…

देवा:“क्या है साले… मूड बन रहा है तेरा मेरा लंड देख कर क्या”

पप्पु: “हाँ देवा गांड मार ले मेरी बड़े दिनों से नहीं लिया है अंदर…”

देवा:“नहीं अभी नहीं अभी तो थक चुका हूँ,,बाद मे मारूँगा तेरी गांड”

पप्पु, “तेरा लौडा चुस्स लुँ फिर?”

देवा: “हाँ चूस ले साले”

और पप्पू देवा के लंड को देखता हुआ उसके आगे बैठ जाता है और उसके लौडे को चुमते हुए अपने मुँह में ले लेता है।

देवा:“आअह्हह्ह्ह्ह चुस साले…मेरे होने वाले साले,,,,साले नामर्द……चूस अपने जीजा के लौडे को…”

पप्पू कुछ देर देवा का लंड चूसता है जब तक देवा पप्पू के मुँह में अपना पानी नहीं छोड देता।

फिर देवा उठ कर अपने कपडे पहन लेता है।

और वहां रश्मि भी आ जाती है।

रश्मि: चोद लिए रत्ना काकी को…मुझे बुलाने की सोची भी नहीं एक बार?”

देवा:“अरे यार माँ अभी ऐसे नही कर पायेंगी किसी के साथ…”

रश्मि: “अपनी बहु के सामने भी नहीं करेगी क्या।”

देवा:“पता नहीं”

रश्मी पप्पू के मुँह से निकलते वीर्य को देखति है।

रश्मि: “भाई तुमने मुँह मीठा भी कर लिया”

और देवा और रश्मि हँसने लगे।

पप्पू ने अपना मुँह साफ़ किया और उठ गया।

पप्पु:“देवा मै कल रश्मि को छोड़ने जा रहा हूँ उसके ससुराल तू भी चल ले और ममता को गाँव ले आ शादी को ज्यादा दिन नहीं बचे है वैसे भी ”

देवा:“क्या रश्मि को छोडने?”

और देवा रश्मि की तरफ देखने लगता है।
 
रश्मी: मैं शादी से एक हफ्ते पहले आ जाऊँगी, वैसे भी मेरी इस वक़्त क्या जरुरत है लोग बिना बताये मजे लेते है और हमे भनक तक नहीं लगने देते।”

पप्पू रश्मि की बात सुनकर मुस्कराया।

देवा: “सही कहा तेरी कोई जरुरत नहीं यहाँ कल छोड आते है तुझे और ममता और उसके घरवालो से भी मिल आऊंगा मैं…”

रश्मी देवा के पीठ पर एक घूस्सा मारती है।

और पप्पू हँसने लगता है

फिर तीनो अपने घर निकल जाते है।

आज देवा नीलम से नहीं मिला।

वह सीधे अपने घर पहुच गया जहाँ पर शालु और रत्ना बैठे बाते कर रहे थे…

शालु देवा को देखकर मुस्कुरायी…

देवा ने रत्ना की तरफ देखा और रत्ना शरमाने लगी…

देवा: “क्या हुआ रत्ना क्यों शर्मा रही हो…”

शालु देवा के मुँह से रत्ना सुनकर मुस्कुरायी पर रत्ना देवा को गुस्से से देखने लगी…

शालु: “क्या बात है जमाई राजा बड़ी जल्दी आ गए खेतो से…लगता है बहुत थकान हो गयी है काम करके…”

और शालु मुस्करायी।

देवा: “हाँ काकी आज बहुत काम किया है खेतो में…”

और देवा रत्ना को आँख मारता है।

शालु को रश्मि ने सब बता दिया था की देवा ने रत्ना को खेत में चोदा है आज।

शालु: “रत्ना कितना मेहनती है तेरा बेटा…बहुत काम करता है खेत में…”

रत्ना शालु से आँखे नहीं मिला पा रही थी उसे समझ आ गया था की शालु क्यु इतना कह रही है।

रत्ना उठि और शरमाती हुई घर के अंदर चलि गयी और देवा और शालु हँसने लगे…

शालु: “और आज तो खुला खुला प्यार किया अपनी माँ को एक बेटे ने…”

देवा: “हाँ बहुत मजा आया अगली बार तुझे भी चोदूँगा खुले में शालु पप्पू के साथ मिलकर…”

शालु:“अच्छा मै भी देखति हु कितनी बेशरमी से चोदता है तू…”

और शालु ने आगे बढ़कर देवा के लंड को सहलाया और मुस्कुराते हुए दरवाजा खोल कर चलि गयी।

देवा घर के भीतर गया तो उसे रत्ना बाथरूम से निकलती दिखाई दी।

रत्ना देवा को देख कर मुस्करायी।

रत्ना: “शालू को कैसे पता चला…”

देवा: “अरे अब तक तो सबको पता चल गया होगा…”

रत्ना: “क्या कैसे…”

देवा:“मैने पप्पू को रखवाली के लिए लगाया था जब तुझे खेत में चोद रहा था तब। वहां रश्मी आयी उसे भी तेरे साथ मिलकर खुले में चुदवाना था मुझसे…पर पप्पू ने आने नहीं दिया…अब तक तो नीलम को भी पता चल चुका होगा।”

रत्ना देवा की बात सुनकर मुस्करायी।
 
रत्ना: “पप्पू को रखवाली के लिए रखा? कहीं हमारा कार्यक्रम तो नहीं देख लिया उसने…”

देवा: “पता नहीं…देख लिया तो क्या हुआ…पप्पू से भी चुदवा लियो…”

रत्ना देवा के गाल पर एक थप्पड़ मारती है प्यार से…

रत्ना: “मुझे तो एक ही लंड की आदत हो गयी है अब दूसरे की जरुरत नहीं…”

देवा:“उसके लंड का होना या न होना वैसे बराबर ही है साला चुतिया है”

रत्ना:“अच्छा नूतन कैसे काम चला रही है फिर?”

देवा: “पता नहीं उसे ही लेती होगी बेचारी।”

रत्ना: “बुला लियो अपनी बहन नूतन को घर किसी दिन, मै तो रोज ही लेती हुँ एक दिन उसे सवारी करा दियो बहुत दिन हो गए है वैसे भी…”

देवा: “अच्छा…ठीक है…और हाँ माँ मै कल पप्पू के साथ जा रहा हु रश्मि को छोड़ने… ममता के ससुराल भी हो आऊंगा…और सोच रहा हुँ उसे ले ही आऊँ यहाँ 2 हफ्ते ही बचे है शादी में…”

रत्ना “हाँ सही कह रहा है तू। अब काम बढ़ने वाला है बुला ले उसे और खुशखबरी भी दे दियो।”

देवा: “हाँ कल ही निकलता हुँ मै सुबह उसके गाँव के लिये।”

और देवा घर पर थोड़ी देर आराम करता है और फिर अपने खेतो पर दोबारा चला जाता है।

वहाँ पहुँच कर देवा को नीलम खड़ी दिखती है।

देवा और नीलम एक दूसरे को देख कर खुश होते है।

देवा: “यहाँ कैसे”

नीलम:“तुम्हे देखने का दिल कर रहा था बस…”

देवा: “सच मे? या कुछ और बात है?”

नीलम मुस्करायी, “कितना अच्छा मौसम है न आज खेतो में बडा अच्छा लगता है खुले खुले खेतो में…है न…”

नीलम की बात देवा सही सही समझ गया…

देवा: “हाँ…और बिलकुल सही मौसम है अपनी होने वाली साली को पीटने का भी।”

देवा की बात सुनकर नीलम खील खिला कर हँसने लगती है…

नीलम: “मेरी बहन को हाथ तक मत लगाना… समझे तुम… गंदे लड़के…”

देवा:“अच्छा मै तो हर जगह उसे पहले से ही हाथ लगा चुका हुँ…वो भी उसकी मरजी से…”

देवा की बात सुनकर नीलम का चेहरा लाल पड गया…।

नीलम:“बेशर्म हो तुम ऐसे खुले में कैसे कर सकते हो…। कोई देख लेता तो क्या बाते होती…”

देवा(हँसते हुए): “तभी तो तेरे भाई को चौकिदारी करने के लिए लगाया था…”

नीलम: “तब भी कोई तुम लोगो की अवाजे सुन लेता तो क्या सोचता”

देवा:“माँ ही कह रही थी की उधर कोई आता नहीं सिर्फ तुम्हारे या मेरे घर को छोड के तो कोई कैसे देखेगा…”

नीलम शांत हो जाती है।
 
वह अब भी देवा से इतना खुलकर नहीं बोल पा रही थी

पर देवा चाहता था की वो भी अब बेशरम बन ही जाए ताकी शादी के बाद सभी औरते उसके लंड के नीचे हो जब भी वो चाहे…

कुछ देर फिर देवा और नीलम इधर उधर की बाते करने लगे।

देवा ने बताया की कल ममता को लेने उसके घर जा रहा है वो…

नीलम:“उसकी सास पे मत कुद जाना… कुछ दिन के लिए काबू रखो…”

देवा: “उसके बाद तो काबू खो सकता हूँ ना अपनी पत्नी पर?”

नीलम शर्मा जाती है और देवा की छाती से लिपट जाती है।

नीलम: “हाँ पत्नी तो होती ही हैं अपने पति को अपने वश में करने के लिए… उसे खुश रखने के लिये।”

देवा नीलम के सर पर हाथ फेरता है और कुछ देर बाद शाम होते ही देवा उसे घर छोड आता है…

अगली सुबह… शादी को 3 हफ्ते यानी 21 दिन बचे है…

देवा पप्पू और रश्मि देवा के ट्रेक्टर पर बैठ कर ममता के गाँव के लिए निकल जाते है।

रश्मी का ससुराल ममता के गाँव के रास्ते में ही पडता है तो देवा और पप्पू रश्मि को दोपहर तक उसके ससुराल पंहुचा कर ममता के ससुराल पहुँचते है…

ममता के ससुराल के ठीक सामने देवकी का भी घर था पर देवा ने पहले ममता के ससुराल जाना ठीक समझा।

उसने दरवाजा खटखटाया।

और कुछ पल में दरवाजा खुला।

और सामने कोई और नहीं ममता खड़ी थी…

ममता अपने भाई को देख कर खुश हो गयी और कुदते हुए उससे गले लग गयी…

देवा भी उससे गले लगा।

देवा:“और मेरी बहना कैसी है…बड़ी पतली लग रही है क्या हुआ खाना नहीं ख़ाती क्या ज्यादा…”

ममता मुस्कुराने लगती है: “अरे नही ख़ाती अच्छा ही हुँ आज कल थोड़ा तेल का कम खा रही हुँ…”

कोमल:“आईये आईये… स्वागत है…”

देवा कोमल को देख पहले आँख मारता है और फिर नमस्ते करता है।

कोमल देवा की हरकत से शर्मा जाती है।

कुछ ही पलो में ममता का पति हरी और उसकी ननद प्रिया भी वहां आ जाते है…

हरि:“देवा भैया कैसे है आप…”

और हरी देवा के पैर छूने लगता है।

देवा उसे रोकता है और फिर गले लगाता है।

देवा: “बढ़िया जीजा जी… आप बताइये काम कैसा चल रहा है…”

हरि भी खेती करता था।

हरि:“बहुत अच्छा कुछ हफ्ते पहले ही फसल बोयी है भैया…”

प्रिया: “देवा जी नमस्ते…।”

देवा की नजर प्रिया पर जाती है और उसी पे टिक जाती है…
 
प्रिया ने दुपट्टा ऊपर कर रखा था जिस वजह से उसके चुचो की रेखा दिख रही थी…

प्रिया ने यह जान बूझ कर किया, प्रिया ने उसे देखकर एक आँख मारी और सामने खड़ी ममता और कोमल ने देख ली।

फिर कोमल का पति भी वहां आ गया, देवा ने झुककर उसके पैर छुये…

ससूर: “कैसे हो बेटे, समधन जी के क्या हाल है।”

देवा: “जी सब अच्छे है… आप लोगो के क्या हाल है आपका स्वास्थ कैसा है।”

ससूर: “हम सब अच्छे से है बेटे, चलो बाते होती रहेंगी तुम आ जाओ और हाथ मुह धो लो…और यह तुम्हारे साथ कौन है और?”

ससुर ने पप्पू को देखकर कहा…

ममता: “अरे यह पप्पू भैया है देवा भाई के दोस्त है… हमारे घर के सदस्य जैसे ही है, नूतन की शादी इन से ही तो हुई है आप शादी में आये भी थे।”

ससूर:“ओह्ह्ह… हाँ याद आया… कैसे हो तुम बेटा नूतन नहीं आयी तुम लोगो के साथ ”

पप्पु:“जी मै बहुत अच्छा हूँ। नूतन का मन तो था पर वो सबको नीलम की शादी के लिए सामान ख़रीदना था न शहर से तो वो नहीं आ सकी…”

ममता: “क्या नीलम की शादी तय हो गयी ???”

और देवा और पप्पू मुस्कुराते हुए, “हाँ…”

ममता ने देवा के चेहरे को देखा और उसे देखने लगी और भागते हुए ख़ुशी से उसके गले लग गयी…।

ममता: “मेरी भाभी आने वाली है मै तो नाचूँगी…”

और देवा हँसने लगता है…
 
अपडेट 134

ममता देवा से गले मिली हुई थी।

और खुश थी यह जानकर की देवा और नीलम की शादी होने वाली है…

कोमल: “अरे वाह बेटा बहुत बहुत मुबारक हो तुम्हे…”

हरि प्रिया और ससुर भी देवा को बधाई देते है…

कोमल: “ममता अब अपने भाई को छोड़ो भी और उसे अंदर आकर मुँह हाथ धो लेने दो थके हुए होंगे सफ़र से…”

और ममता अलग होती है और सब घर के भीतर जा ही रहे होते है की पीछे से आवाज आती है…

देवकी: “मतलब मामी का घर तो भूल ही गए है बच्चे…”

देवा पीछे मुड़कर देवकी को देखता है।

देवा :“मामी नमस्ते…मैं बस अभी आपके पास ही आने वाला था…”

देवकी: “हाँ हाँ ठीक है छोड…अभी मै तेरी शादी की खबर सुनकर खुश हुँ। बहस करने का मन नहीं है…”

देवा:“बुआजी मै रात को आपके यहाँ सोने आ जाऊंगा…”

देवकी: “ठीक है देवा बेटा खाना भी रात का हमारे यहाँ खाना… और दामाद जी कैसे है आप… बहुत दिनों बाद आना हुआ।”

पप्पु:“जी सासु माँ समय नहीं निकल पा रहा था…”

देवकी:“कोई नहीं रात का खाना हमारा यहाँ ही खाना है…अब मै चलती हूँ देवा की शादी की खबर कौशल्या और रामु को देने जाती हुँ”

और देवकी चलि जाती है।

सभी लोग अंदर चले जाते है।

देवा और पप्पू हाथ मुँह धोकर दोपहर का खाना खाते है।

खाना खाते हुए देवा की नजर बार बार प्रिया और ममता पर ही पर रही थी जो देवा को देख कर मुस्कुरा रही थी।

देवा उन्हें देखकर अपने लंड पर हाथ फेरता है।

दोनो लड़कियां शर्मा जाती है यह सब कोमल देख रही थी तो वो हल्का सा खाँसती है।

लडकियाँ अपना खाना खाने लगती है दोबारा और देवा कोमल को देख कर आँख मारता है।

कोमल देवा को सब्जी परोसने आती है और झुककर उसे सब्जी देती है…

देवा की नजर कोमल की मक्खन जैसे चुचो पर पडती है जो कोमल के झुकने के कारण दिख रहे थे।

देवा कुछ पल ऐसे ही उन्हें देखता है और कोमल मुस्कुराती है पर ज्यादा देर नही झुकती क्युकी हरि,

पप्पू और उसका पति अभी वहीँ थे।

सब लोग अपना खाना ख़तम करते है और बैठक मै बैठे गप्पे लडाने बैठ जाते है…

हरि:“देवा भैया अब तो आपकी भी शादी होने वाली है, कैसा लग रहा है आपको?”

देवा “शादी होने से पहले तो अच्छा ही लग रहा है।”

और सभी लोग हँसने लगते है।
 
कोमल: “नीलम से मै मिली हूँ बहुत अच्छी और सुन्दर लड़की है देवा तुम्हे खुश रखेगी वो…”

ममता: “हाँ नीलम मेरी भाभी बनने के लिए बिलकुल ठीक लड़की है, भाई मै तुम्हारे लिए खुश हूँ।”

कोमल:“वैसे शादी है कब की देवा?”

देवा: ठीक 3 हफ्ते आज से”

ममता: “क्या बस इतने ही दिन है ?”

कोमल:“तो बेटा तैयारियां शुरू कर दी क्या?”

देवा:“अभी नहीं शुरू की है, बस अब शुरू कर देंगे लेकिन, मै यहाँ वैसे ममता को लेने भी आया हूँ, वो होगी तो शादी की तैयरियों में माँ का हाथ बटां देगी…”

कोमल: “हाँ हाँ क्यों नहीं ले जाओ कहो तो मै प्रिया को भी भेज दूँ। कुछ काम यह भी देख लेगी…”

देवा:“अरे नहीं कोई नहीं प्रिया को क्यों तकलीफ दे रही है माँ और ममता सब संभाल लेंगी काम।”

प्रिया: “देवा जी कोई तकलीफ नहीं होगी मुझे भी ले चलिये रत्ना काकी की और मदद हो जाएगी…”

ममता: “नहीं प्रिया यहाँ माँ के सर पर सारा काम आ जायेगा तुम यहीं रुको और माँ की मदद करना, मै और माँ सब काम देख लेंगे अच्छे से…”

ममता समझ गयी थी की प्रिया क्यों जाना चाहती थी…

ममता मन ही मन सोच रही थी की अगर इसे भी ले गए तो भाई का लंड इसके साथ भी बांटना पड़ेगा…।

देवा ममता को देखता है और समझ जाता है की ममता ने प्रिया को क्यों रोका है।

प्रिया उदास हो जाती है पर जिद्द नहीं करती।

हरि:“भैया आप कहे तो मै भी चलू…काम में हाथ बटाने…”

देवा: “अरे नहीं आप यहीं रुके खेतो को देखिये…। हमारे यहाँ जमाई लोग आराम करते है न की काम…”

और सब हँसने लगे।

देवा: “देखिये आप सब लोगो को शादी में आना है शादी से 1 हफ्ते पहले ही सारी रस्मे शुरू हो जाएँगी… तो 1 हफ्ते पहले तक आप सब को मेरे घर आ जाना है…”

ससूर:“अरे यह भी कोई कहने की बात है बेटा हम सब जरुर आएंगे…”

देवा: “ममता अपना सामन बाँध लो हम कल सुबह निकल जायेंगे घर के लिए…अच्छा तो हमे इजाज़त दिजिये मामी जी के घर हो आते है अब…”

और सब नमस्कार करने लगे।

देवा और पप्पू देवकी के घर आ गए…

दारवाजा कौशल्या ने खोला था।

कौशल्या: “आ गयी याद अपनी भाभी की देवर जी?”

देवा:“अरे हम तो आपको रोज ही याद करते है भाभी पप्पू और मै दोनों…”

और पप्पू भी कौशल्या को देख कर मुस्कराता है…
 
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