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हिन्दी सेक्सी कहानियाँ

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Guest
हिन्दी सेक्सी कहानियाँ

हाय फ्रेंड्स माय सेल्फ राजेश. में २४ साल का हूँ. में चंदिगढ से हूँ. आई ऍम वैरी बिग फेन ऑफ़ सकसेक्स. में इस को बहोत इयर्स से पढ़ रहा हूँ. मेरा लंड का साइज कभी मीजर नहीं किया बट इतना हे की ये किसी भी लेडी को सटिसफाय करने के लिए काफी हे. ये स्टोरी मेरी और मेरी ट्युशन टीचर की हे में उस टाइम १२th में पढ़ रहा था. मेरी इंग्लिश वीक थी सो मेरे पेरेंट्स ने मुझे पास की एक ट्युशन लेडी के पास पढ़ ने के लिए भेजा. उसका नाम था कंचन (नाम बदला हे ).

वो ट्युशन के साथ साथ स्टिचिंग भी करती थी. वो मेरिड थी और उसके दो बच्चे बी थे. एक गर्ल जो की ५ या ६ इयर्स की होगी. और एक बॉय जो की १ इयर का था. उसका हसबंड ड्रिंक बहोत करता था. और डेली लड़ाई करता था, उसके साथ वो मेरी पडोश में रहती थी सो हमें डेली उसके लड़ाई झगड़े की आवाज आती रहती थी. कंचन बहोत मस्त माल थी. उसका फिगर ३६-३०-३४ था. (जो उसने मुझे बाद में बताया). उसके पास और भी बॉयज एंड गर्ल्स ट्यूशन पढ़ने आते थे. बट वो मेरी पड़ोस में रहती थी सो वो ज्यादा ध्यान मुझ पर देती थी. क्यू की वो नहीं चाहती थी की उसे मेरे घर से कोई कंप्लेंट आये की उसने मुझे ठीक से नहीं पढाया.

जब वो सूट कटिंग कर रही थी निचे बेठ कर तो उसके कमीज मेसे बूब्स दीखते थे. उसके बूब्स बहोत मस्त थे सो में उसे चोर नजर से देखता रहता था. एक दिन में उसके पास ट्यूशन पढने गया तो वहा उसने सबको घर वापस भेज दिया. में उसके गर के पास रहता था, सो उसने मुझे वहीँ रुकने के लिए बोला. क्यू की उसे कुछ काम था. तो उसने मुझे कहा की बेडरूम में बेठ कर लेसन रिवीज कर लो. जेसा उसने मुझे कहा में उसके बेडरूम में चला गया. और उसके बेड पर बेठ कर लेसन रिवीज करने लग गया. करीब १५-२० मिनट बाद उसका बेटा जो की अभी दूध पिता था वो सो कर उठ गया और रोने लगा शायद उसे भूक लगी थी.

वो भागते हुए बेडरूम में आई और अपने बेटे को उठाया और उसे चुप करवाने लगी बट उसे शायद भूक लगी थी. तो वो चुप नि हो रहा था. तो वो वहीँ मेरे सामने बेठ कर अपना एक बूब्स निकाल कर उसे दूध पिलाने लगी. वाव क्या बूब्स था उसका एक दम गोरा और ऊपर निपल. में उसे चोर नजर से देख रहा था और वो मुझे नोटिस कर रही थी. मेरा लंड भी एर्रेक्ट हो गया. में उसे सेट करने लगा तो उसने मुझे देख लिया और गुस्से में बोली क्या कर रहे हो ? में डर गया.

में; कुछ नहीं.

कंचन; तुमने निचे हाथ लगाया क्या हुआ तुम तुम पढाई की तरफ क्यू घ्यान नि लगा रहे. क्या हे निचे बताओ.

में; कुछ नहीं मेम सॉरी.

कंचन; आज कल तुम पढाई से ज्यादा कही और ही ध्यान लगा रहे हो इस लिए मुझे आज ज्यादा काम हे फिर भी मेने सब को छुट्टी दे दी और तुम्हे ट्यूशन पढ़ा रही हूँ.

में; कहा सॉरी मेम तो वो बोली ओके पढाई की तरफ ध्यान दो.

में पढाई करने लगा बट चोर नजर से उसके बूब्स को बार बार देख रहा था. उसने मुझे उसका बूब्स देखते हुए फिर पकड़ लिया.

कंचन; क्या देख रहे हो ?

में; कुछ नहीं मेम.

कंचन; देखो तुम अभी बच्चे हो ये सब बाद में करना थोडा बड़े हो जाओ अपने पेरो पर खड़े हो जाओ फिर ये सब करना.

में; फिर पढाई करने लगा. उसका बेबी सो गया और वो उठ कर बहार चली गयी और काम करने लगी.

उसके जाने के बाद मुझे उसके बूब्स के बारे में सोच कर अपने लंड को सहला रहा था, अचानक ही वो रूम में आई और मुझे देख लिया और बोली क्या कर रहे हो / में बुरी तरह से डर गया, मेरी तो गांड फट गयी की भाई आज तो मेरे पेरेंट्स को ये सब बता देगी. वो मेरे पास आई और अचानक मेरे लंड को पकड़ लिया और मेरी पेंट की जिप खोल कर मेरा लंड बहार निकाल लिया, और बोली लड़का जवान हो गया हे, में उसके इस अचानक से चेंज हुए बिहेव को समज नहीं पाया. इससे पहले की में कुछ कहता उसने मेरा लंड अपने मुह में ले लिया. और फिर जोर जोर से वो चूसने लगी. में तो जेसे सातवे आसमान पे था, बहोत मझा आ रहा था. में उस टाइम तक वर्जिन था और किसी को किस भी नहीं किया था में १० मिनट में ही झड गया. उसने मेरा सारा माल पि लिया, और वो उठी और बोली की कपडे उतारो अपने भी और मेरे भी, जेसा उसने कहा मेने किया. वाओ क्या बूब्स थे उसके मस्त लग रहे थे, में उन्हें सुक करने लगा और वो मेरे सर पर हाथ फेरने लगी.

वो मुझे अपने बूब्स में प्रेस करती जा रही थी, में वेसा ही कर रहा था जेसा मेने पोर्न मूवीज में देखा था, थोड़ी देर बाद वो बोली की उसकी चूत सैक करो. मेने कभी नहीं किया था तो जेसे ही में उसकी चूत के पास गया मुझे अजीब सी स्मेल आई. उसने मुझे जातक से अपनी चूत की तरफ प्रेस किया और में उसे चाटने लगा, वो मोअन कर रही थी आआआआआआ……ऊऊऊऊऊउ…ऊऊऊऊउ….और जोर से करो राजा बहोत दिन हो गए किसी ने हाथ नहीं लगाया इसे…. वो भी थिदी देर में झड गयी.

मेने उसका माल नहीं पिया क्यू की उसका टेस्ट मुझे अच्छा नहीं लगा. वो बोली जल्दी कर जान अब इस चूत को तृप्त कर दो बहोत टाइम से प्यासी हे, तेरे अंकल तो मुझे हाथ भी नहीं लगाते. दारु पि कर आते हे और लड़ाई करते हे डेली. और सो जाते हे. और जब करते हे थोड़ी देर में झड जाते हे.

मेने तो कभी नहीं किया था तो सो मुझे नहीं समज आ रहा था. केसे करूँ तो उसने मुझे निचे लिटाया और मेरे ऊपर बेठ गयी. और मेरे लंड को अपनी चूत में डाल लिया, वाओ क्या माझा आ रहा था लग रहा मेरा लंड जेसे किसी ज्वाला मुखी में हो, गरम. और वो जोर जोर से मेरे ऊपर कूद रही थी, मेने उसे निचे आने को कहा.

और फिर मेने उसके ऊपर लेट कर उसे चोदा, और फिर दोग्गी पोजीशन में, वो लगातार मोअन कर रही थी की बहोत दिनों के बाद चुदाई हुई की बहोत माझा आ रहा हे, और जोर्र्र्रर्र्र से चूओद जूओर्र्र से.., फास्ट फ़क मीई फुच्क्क मीई ..वोव्वव्व्वव्व्व्व याआआ याआअ याआआअ याआअ और लगातार चिल्ला रही थी, और वो अब तक ३ बार झड चुकी थी. में भी बस झड ने वाला था और में उसे जोर जोर से चोदने लगा ३० मिनट हो गए थे और उसकी चूत में झड गया.

वो जोर जोर से साँसे ले ताहि थी और में भी बोली की तुम्हारा लंड बहोत मस्त हे, तुम्हारे अंकल का तो छोटा सा हे, शादी के कुछ टाइम तक तो वो सही चोदते थे बट जेसे जेसे टाइम बितता गया उनका चोदाई का टाइम कम होता गया और में अपनी फिंगर से ही सेटीसफाय होती रही. मुझे अब मस्त लंड मिल गया हे में तुमसे जब चाहे तब चोदूंगी.

फिर वो मेरे लंड को दुबारा चूसने लगी. और मेरा फिर खड़ा हो गया, और मेने उसे कहा की मुझे गांड मारनी हे तो वो बोली नहीं प्लीज् मेरी गांड मत मारन. मेने उसे ज्यादा फ़ोर्स नहीं किया और फिर से उसकी चूत मारी. और दुबारा उसकी चूत में झड गया. उसने मुझे फिर दूध पिलाया और बोली ये तुम्हारा फर्स्ट टाइम था सो तुम्हे वेअक्नेस महसूस होगी. तो दूध पि लो मेने दूध पिया और अपने घर चला गया. उसके बाद जब भी मेरा या उसका मन होता में उसे चोदता.
 
एक रात माँ के साथ

में दिल्ली का हूँ और अभी जोधपुर राजस्थान में जॉब कर रहा हूँ तो तैयार हो जाइये अपने लंड को सहलाने के लिये और अपनी चूत में उंगली करने के लिये ये स्टोरी पिछले महीने की है जब मेरी माँ मुझसे मिलने दिल्ली से जोधपुर आई थी मेरी माँ की उम्र

42 साल है और उनकी फिगर इतनी सेक्सी है की कोई भी उन्हे देख के मूठ ज़रूर मारता होगा.

मेरी माँ का नाम प्रिया है वो एक हाउस वाइफ है जो की मेरे दादा-दादी के साथ दिल्ली में रहती है में उनका इकलौता बेटा हूँ पापा का निधन 2003 में हो गया था एक कार एक्सिडेन्ट में अब स्टोरी पर आता हूँ मेरी उम्र 26 साल की है और 7 इंच का लंड है और 3 इंच मोटा मेरी माँ का फिगर 34-28-34 है और 5 फुट 6 इंच की लम्बाई गोरा रंग क्या क़यामत लगती है.

मेरी माँ न्यू ईयर पर मेरे साथ रहने आई थी क्योकि में 6 महीने से जॉब की वजह से घर नही गया था में हमेशा ही माँ को चोदने का सपना देखकर मुट्ठ मारता था और उनकी पेंटी चुरा के उसे सूँघा करता था जब मेंने माँ को देखा यार मेरा तो लंड ही खड़ा हो गया क्या क़यामत लग रही थी मैने माँ को गले लगाया और हम घर आ गये मेरा कमरा फ्लेट में है.

माँ आते ही फ्रेश होने चली गयी माँ जब नहा के निकली तो माँ ने क्रीम कलर की साड़ी और ब्लाउज पहना था और क्रीम कलर की ब्लाउज जिसमे उनका सफ़ेद ब्रा दिख रहा था मुझे ऐसा लगा की इस वक़्त उनको पकड़ लूँ और चोद दूँ पर कंट्रोल किया क्योकि मेरी हिम्मत उतनी नही थी.

हमने खाना खाया यहाँ वहाँ की बाते की और फिर माँ बोली की में सोने जा रही हूँ मैने कहा माँ क्या में तुम्हारे साथ सो सकता हूँ में दिल्ली में कभी कभी माँ के साथ सोता था तो माँ ने हाँ बोल दिया हम कमरे में गये बड़ा बेड था ठंड बहुत पड़ रही थी और हम एक ही रजाई में लेटे थे बात करते करते माँ सो गयी पर मुझे नींद नही आ रही थी.

माँ अपना एक हाथ सर पर रख कर सो रही थी और उनके बूब्स सांस की वजह से उपर नीचे हो रहे थे अब मुझसे रहा नही गया और में माँ के और करीब जा कर लेट गया और अब मेरा लंड उनकी कमर पर टच हो रहा था मैने धीरे से अपना हाथ माँ के पेट पर रखा माँ हिली नही तब मेंने धीरे से अपना हाथ माँ के सीधे बूब्स पर रख दिया और सहलाने लगा माँ हिली मैने तुरंत अपनी आँख बंद कर ली माँ ने आँख खोली और मेरा हाथ बूब्स पर से हटा के अपने पेट पर रख दिया और सोने लगी.

फिर मेंने कुछ देर इन्तजार किया की माँ सो जाये और मैने फिर से बूब्स पर हाथ रखा क्या सॉफ्ट सॉफ्ट बूब्स थे जैसे ही मैने उनका बूब्स दबाया माँ ने तुरंत आँख खोल दी और मेरा हाथ पकड़ लिया बोली बेटा क्या कर रहे हो ये ग़लत है अब मै हिम्मत करके उनके उपर चड गया और उनके होठो को चूसने लगा वो छटपटाने लगी और मुझे धक्का मारने लगी पर में नही हटा कुछ देर बाद माँ भी मुझे किस करने लगी मेरे होठ को चूसने लगी 10 मिनिट तक किस करने के बाद मैने माँ के होठो को छोड़ा.

माँ मेरी आँखों में देख कर बोली बेटा अब मत रुक मैं बहुत साल से प्यासी हूँ आज बुझा दे मेरी प्यास ये सुनते ही मैने उनकी साड़ी हटा दी और आइसक्रीम की तरह उनके गले गाल और होठ चूसने लगा माँ भी पागल हुये जा रही थी माँ ने मेरे सारे कपड़े उतार दिये मैने भी माँ की साड़ी ब्लाउज और पेटीकोट उतार दिया माँ सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में थी मै एक साइड में हो कर उनको देखने लगा किसी अप्सरा से कम नही लग रही थी.

माँ ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपने उपर खींच के चूमने लगी और मै माँ को चूमे जा रहा था मैने माँ की ब्रा खोल दी और और उनके निपल्स को काटने लगा माँ भी हाँ बेटा आआआहह काटो काट लो राज चूस लो आआअहह सस्स्स्स्स्स्शह आनाआघह काट राज काट आआआहह ह्म्‍म्म्मममममम आआहहाआहह और मेरे बालो को ज़ोर से खीच कर अपने बूब्स पर दबा रही थी

मैने माँ को उल्टा लेटा दिया और उनके कन्धो और उनकी पूरी पीठ को चाट रहा था और माँ आआअहह ह्म्‍म्म्ममममममम राज आआआआहह ह्म्‍म्म्ममममममममम आआआअहह राज चाटो राज मैने भी माँ को आआहह माँ क्या जिस्म है तेरा आआहह माँ बोली बेटा तू मुझे प्रिया बोल गाली दे राज चाट साले मादारचोद चाट मैंने धीरे से माँ की पेंटी के उपर से उनकी गांड काटने लगा फिर माँ की पेंटी अपने दांत से खीच कर उतार दिया और उनकी गांड चाटने लगा और राआज्जजज्ज्ज्ज्ज्ज चाट चाट साले चाट अपनी प्रिया की गांड चाट साले आआआनाआअहह चाट.

फिर मैने माँ को सीधा लेटा दिया उनकी चूत से निकले पानी ने बिस्तर को गीला कर दिया था मैने अब उनके पैरो के बीच बैठ कर उनके पैरो को फैला कर उनकी चूत को अपने हाथ से फैला के उनकी चूत के अंदर वाले हिस्से को चाटने लगा माँ पागल हो रही थी राआआआअशज्जजज्ज आआआअहह चाआटततटतत्त आआआहह साले चाट मादारचोद चटाआआअटतततटतफ तेरे बाप ने कभी मेरी चूत नही चाटी तू साले मादरचोद चाटततटटटटतत्त कहते कहते माँ का जिस्म थोड़ा टाइट हुआ और वो झड़ गयी और माँ ने पूरे रस को चाट लिया.

अब माँ बोली राज अब चोद अपनी माँ को चोद मै माँ के उपर लेटा और माँ ने मेरे लंड को अपनी चूत पर रखा और बोला राज धीरे से बहुत दिनो बाद चुदने जा रही हूँ मैने धीरे से अपना लंड अपनी माँ की चूत में धीरे धीरे से डाला और माँ के उपर लेट गया जब लंड पूरी तरह अंदर चला गया माँ बोली राज चोदो मुझे चोदो.

मैं धीरे धीरे से माँ को चोदने लगा माँ आह राज हाँ राज चोदो राज आआअहह आह आह आह आह आह आह चोदो राज आज इस चूत की गर्मी बुझा दो आआहन चूत का कचूमर बना दो आआअहह चोदो आआअहह आआआअहह हा हा हा हा राज चोदो राज कोँम्म्मममम्मूऊऊँ न्‍न्‍नणणन् आह आह आह आह चोद मादरचोद चोद अपनी माँ को माँ आज दो बार झड़ चुकी थी मैं भी झडने वाला था मैने बोला माँ आज़ में कहाँ झड़ने वाला हूँ.

माँ बोली राज अंदर ही डालो अंदर ही छोड़ दो आआसस्स्स्स्स्शह आआआआहाहह प्रिया आइ लव यू आआआआआआहह करके में झड़ गया और हम दोनो उसी तरह नंगे सो गये।
 
कहानी न्यू ईयर की

यह कहानी न्यू ईयर की है जब शाम को मौका पाकर के मेरे पापा ने मुझे चोद दिया वैसे तो में पापा से कई बार चुद चुकी

हूँ मगर इस बार नये साल की रात में चुदने का मज़ा ही दूसरा था यह बात है की शाम के 5 बज रहे थे में ऑफीस से निकली और घर की और चल दी में भी नये साल की पार्टी उम्मीद में खोई हुई थी तभी मेरे मोबाइल पर एक मैसेज आया मैने देखा तो पापा का था.

वो मुझे विश कर रहे थे और लिखा था की बेटी अगर कुछ मज़ा लेना चाहती हो तो पार्क रॉयल होटल में आ जाओ में वहाँ तुमको किसी से मिलाना चाहता हूँ में समझ गई की पापा ने कोई मुर्गा फँसा लिया है और उसके साथ मिल के मेरी चुदाई का प्रोग्राम रखा होगा में मन ही मन बहुत खुश हो गई मेरी चूत ने पानी छोड़ दियाथा में तुरंत एक ऑटो कर के घर पहुँची और कपड़े बदल कर सीधी पार्क रॉयल होटल पहुँच गई पापा ने जिस रूम में कहा था में सीधी वहीं चली गई दरवाजा खुला में देख कर हक्का बक्का रह गई.

वो आदमी कोई और नही मेरी कंपनी का मालिक था मुझे देख कर बोला अरे आशा तुम में तो तुमको चोदने के बारे में कई बार सोच चुका था मगर में सोच भी नही सकता था की आज नये साल के मौके पर में तुमको चोद पाउँगा भगवान का लाख लाख शुक्रिया है की तुम आ गई हो आज बहुत मज़ा आने वाला है में मुस्कुरा कर अंदर पहुँच गई बेड पर मेरे पापा हाथ मे शराब का गिलास लिये बैठे थे में उनको देख के मुस्कुरा दी वो भी मुस्कुराये में सोच रही थी की पापा मुझे चोदने का कोई भी मौका नही छोड़ते है आज मेरे बॉस के साथ भी मुझे चोदने आ गये थे.

में नखरे करती हुई पापा के पास पहुच गई और उनके पास जा के बैठने लगी मगर मेरे पापा एक हरामी ज़ात के है फ़ौरन अपनी उंगली मेरी गांड में दे दी में उछल गई उई क्या करते हो पापा मेरा बॉस एकदम से खड़ा हो गया हहाई यह तुम्हारे पापा है में मुस्कुरा के बोली हाँ क्यो में हैरान हूँ की कोई पिता अपनी बेटी को हाँ में ज़ोर से हँसीयह पिता नही है यह मेरे पति भी है जब हम दोनो का मन होता है तो हम दोनो चुदाई कर लेते है मेरे पिता होने से पहले यह एक मर्द है और में एक बेटी होने से पहले एक लड़की हूँ तो मेरी चूत पर मेरे बाप का पहला अधिकार है इसलिये में उनको कभी मना नही करती समझे.

बॉस ने मुझे देखा और बोला काश की तुम्हारी जितनी समझदार हर लड़की हो जाये तो हम जैसो को यहाँ वहाँ मुँह नहीं मारना पड़े मैने उसे कहा की कोई बात नही सर आप अपनी बेटी का नम्बर मुझे दे दो में आपकी बेटी को आपसे ना चुदवा दूं तो मेरा नाम बदल दीजियेगा वो खुश हो गया और उसने तुरंत मुझे अपनी बेटी का नम्बर दिया और बोला आशा यह काम जल्दी करवाना में उसकी जवानी को जब भी देखता हूँ तो में बहुत खुश होता हूँ मगर साली चुदने को तैयार नही होती है में क्या करूँ.

मैने उनसे पूछा की आज आपकी बेटी क्या कर रही है मुझे नही पता शायद कही घुमने गई होगी अच्छा तो में पता करूँ मैने यह कह के अपने मोबाइल से उसको फोन मिला दिया उसका नाम रिचा था हेलो..“ “ हेलो.. कौन.. में आशा बोल रही हूँ में रिचा से बात कर रही हूँ जी हाँ आप को मैने पहचाना नही जी आप मुझे नही जानती हैं में आपके पापा की दोस्त हूँ मेरा नाम आशा है. “ अच्छा..जी.. बोलीये..क्या बात है

मुझे आपको कुछ दिखाना था अगर आप फ्री हों तो में आपके पापा के बारे में बहुत कुछ जानती हूँ और उनको एक्सपोज़ करने का यह एक अच्छा मौका है वो आज पार्क रॉयल होटल में किसी के साथ मज़े ले रहे है अगर देखना चाहती हो तो वहाँ पहुँच जाओ में तुमको रूम नम्बर बता देती हूँ उनको वहाँ पर पकड़ सकती हो तुम झूठ बोल रही हो वो ऐसे नही है में अपने पापा को जानती हूँ समझी नही तुम उनको नही जानती हो में उनका नया रुप तुमको दिखा सकती हूँ वो तो ऐसा खराब आदमी है की तुमको भी नही छोड़ेगा.

अगर मौका लगे तो तुमको भी चोद सकता है शट-अप कुत्तिया कौन बोल रही है अरे मेरी प्यारी रंडी अगर तुमको विश्वास नही होता तोआकर अपनी आँखों से देख लो ठीक है चुड़ैल में आ रही हूँ मेने फ़ोन बंद करते ही मेरे बॉस बोले यह क्या किया वो यहाँ आ गई और बात नही बनी तो क्या होगा अरे कैसे मर्द हो अगर प्यार से ना माने तो ज़बरदस्ती चोद देना कोई प्रोब्लम होगी तो मेरे पापा तो है ही साथ देंने के लिये तभी मेरे पापा ने मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुये बोले वो जब आयेगी तब की तब देखेंगे.

अभी तो कुछ दिखा दो मैने उनको देखा और मुस्कुराती हुई बोली पापा तुमसे कुछ छुपा थोड़ी है मैने अपनी कोट उतार के अपनी टी-शर्ट उतार दी और अब मेरे बदन पर एक थर्मा-कोट था उन्होने मुझे मेरे बॉस की तरफ़ धक्का दे दिया में उनसे लिपट गई मेरे बॉस यही कोई 42 साल के मर्द होंगे मगर उनका शरीर काफ़ी भरा हुआ लग रहा था उन्होने मुझे पकड़ा और मुझे किस करने लगे में उनकी बाहों में मधहोश सी होती चली गई

उन्होने मेंरी कोट को उतार कर मेरी ब्रा खोल दी मेरे पापा भी कम नही थे वो नीचे से मेरे कपड़े उतारने के लिये लग गये मेरी पेन्ट उतार कर मेरी पेंटी को उतार रहे थे और मेरी चूत को सहलाने लगे मेरी चूत आग उगलने लगी थी आज सुबह से ही मुझे लग रहा था की में आज किसी ना किसी से तो चुदूगी जरुर। तभी मैने अपनी चूत को तैयार कर लिया था मतलब बालो को साफ कर लिया था।
 
नमकीन चूत

दोस्तो मे अपनी एक भाभी की स्टोरी बताने जा रहा हूँ

उनका नाम अंकिता है वो 29 साल की है मैं जयपुर मे जहाँ रहता हूँ उसी सोसाइटी मे मेरे पास

वाले फ्लेट मे रहती है उनके पति यानी कमल भैया किसी कम्पनी मे एग्ज़िक्युटिव है तो वो पूरे दिनभर बाहर रहते है और भाभी भी जॉब करती है तो उनसे कभी कभी मुलाकात हो जाती है अंकिता भाभी का फिगर बहुत मस्त है 36-28-36 है मैने अब तक भाभी के साथ दो वेलेंनटाइन डे मनाये है और दोनो ही वेलेंनटाइन डे पर भाभी को सेक्सी से दो हॉट ड्रेस मँगवाकर दी है जो उन्हे बहुत पसंद आई है.

मैं भाभी से 2 साल पहले सोसाइटी के जिम मे मिला था पहले ही हेलो से बात स्टार्ट हुई फिर स्माइल पास करना कभी कभी मैं उन्हे जिम मे एक्सरसार्इज़ करते हुये देखता रहता तो वो आकर पूछती थी क्या देखता रहता है मुझमे तो मैं कह देता था की भाभी आप मे तो उपर से नीचे तक बहुत कुछ है दिखाने को लेकिन आप कभी दिखाती ही नही हो हमेशा स्माइल करके चली जाती हो उनका फ्लेट और मेरा फ्लेट पास पास है और हम दोनो के बेडरूम की बाल्कनी भी पास पास है तो हम बहुत बार बाल्कनी मे खड़े होकर बात करते थे.

एक दिन भैया और भाभी रात को चुदाई कर रहे थे और उनके रूम से आवाज़ मेरे रूम मे साफ साफ़ सुनाई दे रही थी मुश्किल से 5 मिनिट ही हुये थे भैया बाल्कनी मे आकर खड़े होकर सिगरेट पीने लगे मैं भी सिगरेट पीने बाल्कनी मे चला गया और ऐसे ही गप्पे मारने लगा अगले दिन भाभी मिली जिम मे तो मैने उन्हे कमेन्ट कर दिया की भाभी दो दो बार मेहनत कैसे करती हो पहले जिम में और रात मे भैया पर तो वो कुछ बोली नही और चली गयी.

मै अगले दिन उनके फ्लेट पर गया और उनसे पूछा भैया कहाँ है तो उन्होने कहा की वो ऑफीस गये है महीने का आखरी चल रहा है इसलिये मैने उनसे फिर वही सवाल किया तो वो रोना स्टार्ट कर दिया तो मैने पूछा ऐसा क्या हुआ तो मुझे हग करके रोने लगी मैं समझ गया की भैया से भाभी संतुस्ट नही है फिर क्या था भाभी को थोड़ी सी बाते की और उन्हे सेट किया फिर मैने उन्हे आइ लव यू बोल दिया उसने कुछ नही बोला मैने उन्हे किस किया लिप्स पर वो रेस्पॉन्स दे रही थी यारो क्या किस था मुझे तो लगा की यह तो आज मुझे खा जायेगी या मेरे लिप्स फिर 15 मिनिट किस करने के बाद वो खड़ी हुई और किचन मे चली गयी अब मेरा 8 इंच का लंड तैयार था मैं भी उनके पीछे किचन मे गया और उनके पीछे जाकर उनकी गर्दन पर किस करने लगा.

फिर धीरे धीरे मैने उनके एयररींग्स निकाल कर किस करने लगा और उनके साथ खेलने लगा भाभी ने उस दिन घर पर टॉप और स्कर्ट पहना था फिर उन्होने अपना फेस मेरी तरफ घुमाया और मुझे बहुत टाइट किस किया और धीरे से बोला की राहुल फक मी में आज से तुम्हारी हूँ फिर क्या था यह सुनते ही मैं उन्हे उनके बेडरूम मे ले गया और बेड पर लेटा दिया और उनकी आँखे बंद कर दी अब धीरे धीरे मैं उनके फेस पर किस करने लगा फिर धीरे धीरे गर्दन पर से होते होये कन्धो तक आया फिर मैने भाभी की टॉप की स्ट्रीप साइड मे कर दी और उनके कन्धो और गर्दन पर किस करने लगा उन्होने आहें भरना स्टार्ट कर दिया ओह राहुल्ल्ल्ल आआआआआआअहह. आहें वो भर रही थी और हालत मेरी ख़राब हो रही थी फिर मैंने उनका टॉप उतार दिया उन्होने ब्रा नही पहनी थी उनके बूब्स मेरे सामने थे और निपल भी टाइट हो रहे थे

मैने एक एक करके उनके निपल्स चूसना स्टार्ट कर दिया फिर उनके पेट पर किस करता हुआ मैं उनकी चूत तक आया पहले मैने उनकी कमर पर बहुत किस करी फिर उनका स्कर्ट उतार दिया अब वो सिर्फ़ अपनी लाल पेंटी मे थीमैंने उन्हे पूछा अंकिता कैसा चाहती हो सॉफ्ट और वाइल्ड सेक्स तो उन्होने कहा स्टार्ट करो सॉफ्ट एंड वाइल्ड मैं समझ गया आज यह बहुत चुदने के मूड मे है मैने उसकी जांघ पर किस करना स्टार्ट किया तो वो पागल हो गयी थी फिर एकदम से वो उठी और और मेरा सर पकड़कर अपनी चूत के पास ले गयी और बोली राहुल मत तड़पा और चाट मेरी चूत को मैने उनकी पेंटी उतारी और जैसे ही उनकी चूत के पास अपने लिप्स लेकर गया उन्होने मेरे सर को अपनी चूत मे घुसा दिया एक बार तो मैं साँस भी नही ले पा रहा था.

फिर मैने उनकी चूत चाटना स्टार्ट किया क्या नमकीन चूत थी मुझे बहुत मजा आ रहा था आह वो चिल्ला रही थी चाट राहुल मेरी चूत आआआआआआआहह और चाट खा जा मेरी चूत को आआआआआआआहह फिर उसने मुझे बेड पर लेटाया और मेरे मुँह के उपर अपनी चूत को रखकर रगड़ने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और उसे तो बता नही सकता पूरे रूम में आआआअहहस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्शह आआआआआआहह की आवाज़ आ रही थी फिर उसने मेरी जीन्स उतारी और मेरा लंड निकाल कर मुँह मे लेकर चूसने लगी क्या गर्म मुँह था उसका वो एक नंबर की एक्सपर्ट थी लंड चूसने मे हम कम से कम 20 मिनिट तक ऐसे ही रहे और फिर हम दोनो एक साथ झड़ने वाले थे तो उसने मुझे कहा की अभी मत निकालना मैने तो अपने आप पर कंट्रोल किया पर वो नही कर पाई.

फिर हम सीधे हुये और वो बोली राहुल अब डाल दो ना मैने फिर अपने पर्स मे से कन्डोम निकाला और उसे दिया उसने फट से कन्डोम लगाया और खूब सारा लूब्रिकेंट भी लगाया मेरे लंड पर जो मैं अपने साथ लाया था और मेरे लंड को अपनी चूत के पास ले गई और बोली डाल दो राहुल मैने एक झटका दिया और पूरा का पूरा 8 इंच का लंड उसकी चूत के अंदर चला गया उसे थोड़ी तकलीफ़ हुई लेकिन थोड़ी देर बाद वो बोली राहुल चोद दो अपनी रांड़ को कुत्तिया की तरहफिर मैने उसे चोदना स्टार्ट किया वो आआआआआआआआआहह फुउऊऊउक्ककककक मीईईईईई रहुल्ल्ल्ल्ल आआआआआआआहह हमम्म्ममममममममममम ममममाआआआआअ फफफफफफफफफफफूक्कककककककककककककककककक्क्क़मम्म्ममीईई कर रही थी और पूरे रूम मे पचक पचक की आवाज़ हो रही थी.

फिर मैने उसे डॉगी स्टाइल मे आने को कहा और उसके उपर चड़ गया और चोदने लगा सच में बहुत मजा आ रहा था और मैने कम से कम 20 मिनिट तक उसे चोदा और उसके बाद उसे बोला की मेरा आने वाला है तो वो बोली की वो अब तक 3 बार झड़ चुकी है और मेरे आने का इन्तजार कर रही थी उसने मेरे लंड से कन्डोम हटाया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी फिर सारा पानी अपने बूब्स और फेस पर डलवा लिया फिर हम दोनो ने फटाफट अपने आपको साफ किया और तैयार हुये और चाय पीने बैठे ही थे की भैया आ गये किस्मत अच्छी थी की हम बच गये तब से लेकर आज तक 2 साल से हम महीने मे कम से कम 15 बार चुदाई करते है और बहुत इन्जॉय करते है.
 
में कुणाल है, जयपुर का रहने वाला हूँ, मैं डॉक्टर हूँ।

बात उन दिनों की है जब मैं अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद एक सीनियर डॉक्टर के क्लिनिक में काम करने लगा था…

वहाँ उसने एक मस्त सी माल को भी लगा रखा था काम पर…

उन दिनों कॉलेज से निकलने के बाद मुझ पर जवानी के मजे लेने का ज्यादा ही जोश था और मैं हर लड़की को बस एक बार प्यार करने की ही सोचता था। क्लिनिक में काम करने वाली उस अप्सरा का नाम मालविका था और उसका कहर ढाता जिस्म किसी को भी दीवाना बनाने के लिए काफी था… वो बहुत ही खूबसूरत और छरहरे बदन की थी, उसका बदन 34-30-36 का तो होगा, उसके मम्मे बड़े ही नुकीले थे और उसकी हर चाल के कदम से उसकी हिलते हुए चूतड़ किसी के भी सोते लंड को खड़ा करने के लिए काफी थे।

मैं भी उस हसीं मालविका का दीवाना हो चला था.. मन ही मन मैं उसे सोच कर मुठ मारा करता था.. मैं उसे मन ही मन चोद भी चुका था।

लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, एक दिन मेरा सीनियर किसी मरीज को देखने बाहर गया हुआ था और मैं उसके कहने पर क्लिनिक जल्दी पहुँच गया था.. क्लिनिक पहुँच कर मैं मालविका का इन्तजार करता रहा लेकिन वो समय पर नहीं आई।

बाहर मौसम भी बारिश का हो गया था तो मैंने उसे फोन करना ठीक समझा… क्लिनिक से ही मैंने उसका नंबर निकाला और उसको फोन किया तो उसने मुझे बताया कि वो रास्ते में ही कहीं रुक गई है और बारिश के कारण थोड़ी देर से आ पायेगी..

मैं भी उसका इन्तजार करने लगा..

इन्तजार ख़त्म हुआ और वो मेरे सामने ही थी.. उस दिन उसने नीले रंग का सूट पहना हुआ था जो पूरी तरह से भीग चुका था।

वो क्लिनिक के अन्दर आई और ठण्ड के मारे कांप रही थी, उसका सूट उसकी जवानी छुपाने में नाकाम हो रहा था… पूरा सूट उससे चिपका जा रहा था और वो अपने हाथों से अपनी इज्जत छुपाने की कोशिश कर रही थी।

और मेरी नजर उसके मम्मों से हट ही नहीं रही थी।

उस दिन उसने काले रंग की ब्रा पहनी थी जो कमीज में से साफ़ साफ़ दिख रही थी।

वो अन्दर जाने लगी कि तभी मैंने उसे रोका।

उसे हल्की हिचकिचाहट तो हुई लेकिन फिर वो रुक गई… पलट कर उसने मेरी तरफ देखा तो मैंने उसे दूर से ही चुम्बन का इशारा कर दिया…

वो शरमा गई और अन्दर जाने लगी… मुझे लगा कि कहीं वो बुरा न मान जाए और मैं उसके पीछे ही चल पड़ा। वो बाथरूम में चली गई और कपड़े बदलने लगी, मैं भी चाबी के छेद से सब कुछ देखने लगा। उसने अपने सारे कपड़े उतारे और शीशे के सामने खड़ी होकर अपने बदन को तौलिये से पौंछने लगी..

अचानक ही वो रुकी और अपने मम्मों पर हाथ रखकर शीशे में देखने लगी..जैसे कि उसे अपने आप से खेलने का मन किया हो..

उसके मम्मे देख कर मुझसे रहा नहीं जा रहा था और मैं वहाँ से हटकर बाहर की तरफ आ गया। मैंने क्लिनिक को अन्दर से बंद कर दिया और उसका बाहर आने का इन्तजार करने लगा..

5 मिनट बाद वो बाहर आ गई और यह देखकर स्तब्ध सी रह गई कि क्लिनिक अन्दर से बंद था…

उसने मुझसे पूछा- क्लिनिक क्यों बंद कर दिया?

मैंने उसे बोला- आज काम करने का मूड नहीं है…

तो वो भी मेरे सामने आकर बैठ गई..

उसके बाल अभी भी गीले थे जिस कारण बालों से थोड़ा पानी उसके चेहरे पर भी आ रहा था।

उसके गीले बाल देख कर मुझे लगा कि शायद उसे ठण्ड लग रही होगी इसलिए सामने की थड़ी से ही मैंने दो चाय मंगा ली।

चाय पीते पीते मैं उसे ही देख रहा था… वो समझ चुकी थी कि मेरी नजर उसके मम्मों से हट नहीं रही थी।

हमारे बीच बस शांति ही थी, हम चाय पी रहे थे कि तभी अचानक वो हुआ जो सोचा भी नहीं था…

असल में ठण्ड के मारे वो कांप रही थी और चाय का गिलास उसके हाथ में हिल रहा था, मैंने ग्लास पकड़ना चाहा कि कहीं गिर न जाए…

जैसे ही मैंने उसका हाथ छुआ, वो मुझे देखने लगी और हाथ पकड़ लिया और बस नजरों में देखने लगी… मैं भी सोचने लगा कि यह हुआ क्या..

कि तभी अचानक वो मेज के इस पार आ गई और मेरे होंठों पे होंठ रख दिए.. इससे पहले मैं कुछ समझ पाता, वो मुझसे पूरी तरह से चिपक चुकी थी जैसे नागिन हो…

उसका ऐसा करना मुझे अच्छा लग रहा था और मैं भी उसका साथ देने लगा.. मैं उसके होंठों को कस कर चूस रहा था और मेरा हाथ भी उसके शरीर को टटोल रहा था… हाथ उसकी पीठ पर था और वो मेरी शर्ट उतारने लगी…उसने मेरे अन्दर अपने लिए वासना जगा दी थी, मेरा लंड तन गया था.. मैं भी उसका साथ देता जा रहा था।

मैंने कुर्ते के ऊपर से ही उसके मम्मों को दबाना शुरू किया और वो मेरे होंठ चूसती जा रही थी.. उसके सख्त मम्मों को दबाने में बड़ा ही मजा आ रहा था और मैं बस उस समय उसके मम्मों को ही प्यार किये जा रहा था। मेरा ऐसा करना उसे और गरमाता जा रहा था और वो बस इ.. ई… ईईई…आह … किए जा रही थी… शायद उसे मेरा ऐसा करना अच्छा लग रहा था।

मैंने मम्मे दबाते हुए उसका कुर्ता हटा दिया ! क्या मम्मे थे उसके ! और बारिश से भीग जाने के कारण उसने ब्रा भी नहीं पहनी थी…

बाहर बादल काफी गहरा गए थे, जिस कारण कमरे में ज्यादा उजाला भी नहीं था और थोड़े से उजाले में उसके मम्मे दूध जैसे चमक रहे थे… मैंने उन्हें दबाना छोड़ कर खाना शुरू कर दिया…

मेरा मुख उसके मम्मों को चूस रहा था और मेरी एक उंगली उसके मुँह में थी जिसे वो लंड की तरह चूस रही थी। उसने और जोर से अपनी चूचियों को मेरे चेहरे पर दबाते हुए कहा- कुणाल, चूसो इन्हें.. और जोर से चूसो… ओह ओह ओह ओह ओह… हाँ हाँ हाँ ऐसे ही… चूसो इन्हें…

उसका ऐसा कहने से जैसे मुझमें और जोश आ गया था और मैं बस उसके मम्मों में घुसा जा रहा था..

उसने बोला- आज पहली बार ऐसा कुछ हो रहा है मेरे साथ और मुझे ये सब बहुत अच्छा लग रहा है।

मैं भी बोला- हाँ, आज पहली बार मैं किसी लड़की के इतना नजदीक हूँ, मुझे बड़ा आनन्द आ रहा है..

और मैं उसके चुचूकों पर काटने लगा… इससे उसके मुंह से दर्द और आनन्द भरा स्वर निकल रहा था।

एक हाथ से उसके मम्मे को नीचे से पकड़ रखा था, निप्प्ल को मैंने अपने दांतों के बीच दबा दिया था और वो बहुत ज्यादा उत्तेजित होती जा रही थी और मेरा चेहरा अपने वक्ष पर बहुत जोर से दबा रही थी।

मैंने भी सही समय सोच कर उसकी सलवार में हाथ डाल दिया, उसने सलवार के अन्दर उसने पैंटी भी नहीं पहनी थी जिस कारण मेरा हाथ सीधा उसकी चूत से टकरा गया, उसकी चूत छूने में बड़ी चिकनी लग रही थी, एक भी बाल नहीं था, जैसे अभी ही शेव करके आई हो… उत्तेजना के कारण उसकी चूत काफी गीली भी हो चुकी थी…

मैंने मम्मों को चूसते चूसते ही उसकी चूत में उंगली करना शुरू कर दी.. जैसे ही उंगली उसकी चूत में गई वो बड़ी जोर से चिल्लाने लगी, वो जोर जोर से ओ ओह… ओह.. ओह.. ओह जैसे आवाजे निकलने लगी… और साथ ही अपने चूतड़ भी हिलाने लगी।

मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोल कर उसे भी उसके शरीर से अलग कर दिया।

एकाएक उसने मुझे पकड़ा और अपने ऊपर खींच लिया और मेरे होठों को फिर से चूसने लगी और बोली- सारे मजे खुद ही लोगे क्या? मुझे मजे नहीं करने दोगे?

मैं हँसा और बोला- जो करना है कर लो, मैं तुम्हारा ही तो हूँ..

यह सुन कर वो नीचे हुई और मेरी जींस के बटन खोलने लगी, उसने जींस के बटन खोल कर जींस अलग कर दी और मेरी चड्डी के अन्दर हाथ डाल दिया…

उसके ऐसा करने से मेरे लंड में करंट सा दौड़ गया और लंड पहले से ज्यादा कड़क होने लगा…उसने चड्डी भी दूसरे हाथ से हटा दी और लंड को एकटक देखने लगी और बोली- इतना बड़ा? यह इतना बड़ा होता है क्या?

उसके चेहरे से डर साफ़ दिख रहा था…

मैं बोला- अरे मेरी जान, डरना कैसा, यह प्यार करने की चीज है, मजे लो और मस्ती मारो…

लेकिन अब भी उसे मेरे 7 इंच लम्बे और 2 इंच मोटे लंड को देखकर डर सा लग रहा था। मैंने उसका डर दूर करने के लिए उसका चेहरा पकड़ा और लंड उसके होंठों पर सटा दिया। उसने भी ज्यादा झिकझिक नहीं की और लंड के टोपे को चाटने लगी। मैं उसके बाल पीछे से पकड़े था और वो लंड के टोपे को चाट रही थी… मैंने एक बार उसे थोड़ा और नीचे की तरफ धकेला और उसने पूरा लंड लेने की कोशिश की लेकिन आधे में ही हट गई और बोली- अगर और लिया तो उलटी हो जायेगी !

मालविका मेरे लंड को अपने मुँह में लेना तो चाहती थी लेकिन डर डर के आगे बढ़ रही थी। एक बार को तो मुझे भी लगा जैसे वो सच में ही उलटी करने वाली हो…

फिर 3-4 मिनट बाद उसे भी मजा आने लगा और लंड को कुल्फी की तरह चाटने लगी और अपने जीभ से चाट भी रही थी। उसके ऐसा करने से लंड और ताव खा रहा था और तड़पता हुआ पूरा उसके मुँह में घुस रहा था…

मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था, मैं भी अब उसके साथ मरीज के लेटने वाली मेज पर 69 की अवस्था में आ चुका था और उसकी चूत चाट रहा था, वो मेरे लंड को चूसे जा रही थी।

हम लोग बस एक दूसरे में खोये हुए थे और क्लिनिक अन्दर से बंद होने का कारण किसी के आने का डर भी नहीं था।

कुछ मिनट तक 69 अवस्था में रहने के बाद अचानक से मालविका जोर जोर से हिलने लगी और सारा पानी मेरे मुंह पर ही छोड़ दिया… उसका स्वाद बड़ा ही अच्छा था और मैं अब भी उसकी चूत चाटे जा रहा था और उसे गरम करने लगा… वो अब भी मेरा लंड मुँह में लिए थी…3-4 मिनट बाद ही वो फिर से तपने लगी और मुझसे बोली- कुणाल, अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है… प्लीज अब मेरी गर्मी शांत कर दो… और अपनी गाड़ी को सही जगह पार्क कर दो… इस जानवर का पिंजरा कब से इसके लिए तड़प रहा है…”

यह सुनकर मैं सीधा हुआ और उसकी चूत के पास आकर बैठ गया और उसके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख दिया, मुझे पता था कि इस अवस्था में सेक्स करने में मजा भी आता है और लड़की के अन्दर पूरा जाता है…

मैंने थूक निकाला और उसकी चूत पर लगा दिया और अपने लंड को ठीक उसके छेद के ऊपर टिका दिया। चूंकि आज तक मालविका ने किसी के साथ कुछ नहीं किया था तो उसकी चूत बड़ी ही मुलायम और सील बंद थी, मैंने अपने हाथों से उसकी चूत को थोड़ा सा खोला और लंड के टोपे को थोड़ा अन्दर घुसाया। जरा सा घुसते ही वो चिल्ला पड़ी और लंड बाहर निकालने को कहने लगी लेकिन मुझे पता था की पहली बार में लड़कियाँ ऐसे ही कहती हैं, मैंने उसकी कमर के नीचे हाथ रखा और थोड़ा सा ऊपर किया। ज्यादा टाईट होने के कारण उसकी चूत में लंड बड़ी मुश्किल से ही जा पा रहा था, मैंने थोड़ा सा धक्का लगाया और लंड थोडा और अन्दर चला गया…

उसने मुझे धक्का देकर हटाने की बहुत कोशिश की मगर मैं हिला नहीं और चूत में आधे लंड को घुसा दिया। वो दर्द के मारे चिल्ला रही थी बहुत जोर से, उसकी चीख से सारा क्लिनिक गूँज रहा था।

मैं आधे लंड को घुसा कर रुक गया ताकि उसका दर्द थोड़ा कम हो जाए… दो मिनट बाद मैंने एक और धक्का लगाया और पूरा लंड उसकी चूत में समा चुका था। शायद उसे ज्यादा दर्द हो रहा था जिस कारण उसकी आँखों में आँसू आ गए थे, वो जोर जोर से आह… आह… आह… उई… इ..ई..आह… ह्ह…करने लगी और उसके चिल्लाने से मुझे भी अच्छा लग रहा था।

मैं धक्कों पे धक्के लगाये जा रहा था और कुछ के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया।

मालविका की हालत बड़ी ख़राब थी, उसकी चूत से खून बह रहा था, उससे चला भी नहीं जा रहा था… मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसे बाथरूम में ले गया और अपने हाथों से ही उसकी सफाई की।

फिर मैंने मालविका को लिटा दिया वो मुझसे नजर नहीं मिला पा रही थी।

जब बाहर मौसम ठीक हो गया तो वो जाने लगी… मैंने उससे उस समय कुछ नहीं कहा… वो चली गई और मैं अगले मौके की इन्तजार करने लगा।
 
मुझे दीदी ना कहो

मैं दिन को घर में अकेली होती हूँ। बस घर का काम करती रहती हूँ, मेरा दिल तो यूँ पाक साफ़ रहता है, मेरे दिल में भी कोई बुरे विचार नहीं आते हैं। मेरे पति प्रातः नौ बजे कर्यालय चले जाते हैं फिर संध्या को छः बजे तक लौटते हैं। स्वभाव से मैं बहुत डरपोक और शर्मीली हूँ, थोड़ी थोड़ी बात पर घबरा जाती हूँ।

मेरे पड़ोस में रहने वाला लड़का आलोक अक्सर मुझे घूरता रहता था। यूँ तो वो मुझसे काफ़ी छोटा था। कोई 18-19 साल का रहा होगा और मैं 25 साल कि भरपूर जवान स्त्री थी। कभी कभी मैं उसे देख कर सशंकित हो उठती थी कि यह मुझे ऐसे क्यूँ घूरता रहता है। इसका असर यह हुआ कि मैं भी कभी कभी उसे यहाँ-वहाँ से झांक कर देखने लगी थी कि वो अब क्या कर रहा है। पर हाँ, उसकी जवानी मुझे अपनी तरफ़ खींचती अवश्य थी। आखिर एक मर्द में और एक औरत में आकर्षण तो स्वाभाविक है ना। फिर अगर वो मर्द सुन्दर, कम उम्र का हो तो आकर्षण और ही बढ़ जाता है।

एक दिन आलोक दिन को मेरे घर ही आ धमका। मैं उसे देख कर नर्वस सी हो गई, दिल धड़क गया। पर उसके मृदु बोलों पर सामान्य हो गई। वो एक सुलझा हुआ लड़का था, उसमें लड़कियों से बात करने की तमीज थी।

वो एक पैकेट लेकर आया था, उसने बताया कि मेरे पति ने वो पैकेट भेजा था। मैंने तुरन्त मोबाईल से पति को पूछा तो उन्होंने बताया कि उस पैकेट में उनकी कुछ पुस्तकें हैं, आलोक एक बहुत भला लड़का है, उसे जलपान कराए बिना मत भेजना।

मैंने आलोक को बैठक में बुला लिया और उसे चाय भी पिलाई। वो एक खुश मिज़ाज़ लड़का था, हंसमुख था और सबसे अच्छी बात यह थी उसमें कि वो बहुत सुन्दर भी था। उसकी सदैव चेहरे पर विराजती मुस्कान मुझे भा गई थी। मुझे तो आरम्भ से ही उसमें आकर्षण नजर आता था। मेरे खुशनुमा व्यवहार के कारण धीरे धीरे वो मेरे घर आने जाने लगा। कुछ ही दिनों में वो मेरा अच्छा दोस्त बन गया था।

अब मुझे कोई काम होता तो वो अपनी बाईक पर बाज़ार भी ले जाता था। वो मुझे कामिनी दीदी कहता था। आलोक की नजर अक्सर मेरी चूचियों पर रहती थी या वो मेरे सुडौल चूतड़ों की बाटियों को घूरता रहता था।

आप बाटियाँ समझते हैं ना ... ? अरे वही गाण्ड के सुन्दर सुडौल उभरे हुए दो गोले ...।

मुझे पता था कि मैं जब मेरी पीठ उसकी ओर होगी तो उसकी निगाहें पीछे मेरे चूतड़ों का साड़ी के अन्दर तक जायजा ले रही होंगी और सामने से मेरे झुकते ही उसकी नजर वर्जित क्षेत्र ब्लाऊज के अन्दर सीने के उभारो को टटोल रही होती होंगी। ये सब हरकतें मेरे शरीर में सिरहन सी पैदा कर देती थी। कभी कभी उसका लण्ड भी पैंट के भीतर हल्का सा उठा हुआ मुझे अपनी ओर आकर्षित कर लेता था।

शायद उसकी यही अदायें मुझे भाने लगी थी इसलिये जब भी वो मेरे घर आता तो मेरा मन उल्लासित हो उठता था। मुझे तो लगता था कि वो रोज आये और फिर वापस नहीं जाये। लालसा शायद यह थी कि शायद वो कभी मेरे पर मेहबान हो जाये और अपना लण्ड मुझे सौंप दे।

छीः छीः ! मैं यह क्या सोचने लगी?

या फिर वो ऐसा कुछ कर दे कि दिल आनन्द की हिलौरें लेने लगे।

एक दिन वो ऐसे समय में आ गया जब मैं नहा रही थी। जब मैं नहा कर बाहर आई तो मैंने देखा आलोक मुझे ऊपर से नीचे तक निहार रहा था। मैं शरमा गई और भाग कर अपने शयनकक्ष में आ गई।

"कामिनी दीदी, आप तो गजब की सुन्दर हैं !" मुझे अपने पीछे से ही आवाज आई तो मैं सिहर उठी।

अरे! यह तो बेड रूम में ही आ गया? फिर भी उसके मुख से ये शब्द सुन कर मैं और शरमा गई पर अपनी तारीफ़ मुझे अच्छी लगी।

"तुम उधर जाओ ना, मैं अभी आती हूँ !" मैंने सिर झुका कर शरमाते हुये कहा।

"दीदी, ऐसा गजब का फ़िगर? तुम्हें तो मिस इन्डिया होना चाहिये था !" वो बोलता ही चला गया।

उसके मुख से अपनी तारीफ़ सुन कर मैं भोली सी लड़की इतरा उठी।

"आपने ऐसा क्या देख लिया मुझ में भैया?" मैं कुछ ऐसी ही और बातें सुनने के लिये मचल उठी।

"गजब के उभार, सुडौल तन, पीछे की मस्त पहाड़ियाँ ... किसी को भी पागल कर देंगी !"

मेरा दिल धड़कने लगा। मेरे मन में उसके लिये प्यार भी उमड़ आया। मैं तो स्वभाव से शर्मीली थी, शर्म के मारे जैसे जमीन में गड़ी जा रही थी। पर अपनी तारीफ़ सुनना मेरी कमजोरी थी।

"भैया... उधर बैठक में जाओ ना ... मुझे शरम आ रही है..." मैंने शर्म से पानी पानी होते हुये कहा।

वो मुझे निहारता हुआ वापस बैठक में आ गया। पर मेरे दिल को जैसे धक्का लगा, अरे ! वो तो मेरी बात बहुत जल्दी ही मान गया ? मान गया ... बेकार ही कहा ... अब मेरी सुन्दरता की तारीफ़ कौन करेगा? मैंने हल्के फ़ुल्के कपड़े पहने और जान कर ब्रा और चड्डी नहीं पहनी, ताकि उसे मेरी ऊँचाइयाँ और स्पष्ट आ नजर आ सके और वो मेरी मस्त तारीफ़ करता ही जाये। बस एक सफ़ेद पाजामा और सफ़ेद टॉप पहन लिया, ताकि उसे पता चले कि मेरे उरोज बिना ब्रा के ही कैसे सुडौल और उभरे हुये हैं और मेरे पीछे का नक्शा उभर कर बिना चड्डी के कितना मस्त लगता है। पर मुझे नहीं पता था कि मेरा यह जलवा उस पर कहर बन कर टूट पड़ेगा।

मैं जैसे ही बैठक में आई, वो मुझे देखते ही खड़ा हो गया।

उफ़्फ़्फ़ !

यह क्या?

उसके साथ उसका लण्ड भी तन कर खड़ा हो गया था। मुझे एक क्षण में पता चल गया कि मैंने यह क्या कर दिया है? पर तब तक देर हो चुकी थी, वो मेरे पास आ गया था।

"दीदी, आह्ह्ह ये उभार, ये तो ईश्वर की महान कलाकृति हैं ..." उसके हाथ अनजाने में मेरे सीने पर चले गये और सहला कर उभारों का जायजा ले लिया। मेरे जिस्म में जैसे हजारों पावर के तड़ तड़ करके झटके लग गये। उसके स्पर्श से मानो मुझे नशा सा आ गया। मेरे गालों पर लालिमा छा गई, मेरी बड़ी बड़ी आँखें धीरे से नीचे झुक गई। तभी मैंने उसके हाथों को धीरे से थाम लिया और अपने गोल गोल उरोजों से हटाने लगी।

"मुझे छोड़ दो आलोक, मैं मर जाऊंगी... मेरी जान निकल जायेगी ... आह्ह !"

"आपकी सुन्दरता मुझे आपकी ओर खींच रही है, बस एक बार चूमने दो !" और उसके अधर मेरे गालों से चिपक गये। मुझे अहसास हुआ कि मेरे गुलाबी गाल जैसे फ़ट जायेंगे ... तभी उसकी बाहें मेरी कमर से लिपट गई। उसके अधर मेरे अधरों से मिल गये। सिर्फ़ मिल ही नहीं गये जोर से चिपक भी गये।

मुझे जैसे होश ही नहीं रहा। यह कैसी सिरहन थी, यह कैसा नशा था, तन में जैसे आग सी लग गई थी।

उसका नीचे से लण्ड तन कर मेरी योनि को छू कर अपनी खुशी का अहसास दिला रहा था। मुझे लगा कि मेरी योनि भी लण्ड का स्पर्श पा कर खिल उठी थी। इन दो प्रेमियों को मिलने से भला कोई रोक पाया है क्या ?

मेरा पजामा नीचे से गीला हो उठा था। दिल में एक प्यारी सी हूक उठ गई। तभी जैसे मैं हकीकत की दुनिया में लौटने लगी। मुझे अहसास हुआ कि हाय रे ! मुझे यह क्या हो गया था? मैंने अपने जिस्म को उसे कैसे छूने दिया... ।

"आलोक, तुम मुझे बहका रहे हो ..." मैंने उसे तिरछी मुस्कान भरी निगाह से देखा। वो भी जैसे होश में आ गया। उसने एक बार अपनी और मेरी हालत देखी ... और उसकी बाहों का कमर में से दबाव हट गया। पर मैं जान कर के उससे चिपकी ही रही। आनन्द जो आ रहा था।

"ओह ! नहीं दीदी, मैं खुद बहक गया था ... मैंने आपके अंग अनजाने में छू लिये ... सॉरी !" उसकी नजरें अब शर्म से नीचे होने लगी थी।

"आलोक, यह तो पाप है, पति के होते हुये कोई दूसरा मुझे छुए !" उसके भोलेपन पर मैंने इतराते हुये कहा।

अन्दर ही अन्दर मेरा मन कुछ करने को तड़पने लग गया था। शायद मुझे एक मर्द की... ना ना ... आलोक की आवश्यकता थी ... जो मुझे आनन्दित कर सके, मस्त कर सके। इतना खुल जाने के बाद मैं आलोक को छोड़ देना नहीं चाह रही थी।

"पर दीदी, यह तो बस हो गया, आपको देख कर मन काबू में नहीं रहा... मुझे माफ़ करना !" कुछ हकलाते हुये वो बोला।

"अच्छा, अब तुम जाओ ..." मेरा मन तो नहीं कर रहा था कि वो जाये, पर शराफ़त का जामा पहनना एक तकाजा था कि वो मुझे कही चालू, छिनाल या रण्डी ना समझ ले। मैं मुड़ कर अपने शयनकक्ष में आ गई। मुझे घोर निराशा हुई कि वो मेरे पीछे पीछे नहीं आया।

फिर जैसे एक झटके में सब कुछ हो गया। वो वास्तव में कमरे में आ गया था और मेरी तरफ़ बढ़ने लगा और वास्तव में जैसा होना चाहिये था वैसा होने लगा। मुझे अपनी जवानी पर गर्व हो उठा कि मैंने एक जवां मर्द को मजबूर कर दिया वो मुझे छोड़ ना सके। मैं धीरे धीरे पीछे हटती गई और अपने बिस्तर से टकरा गई, वो मेरे समीप आ गया।

"दीदी, आज मैं आपको नहीं छोड़ूंगा ... मेरी हालत आपने ही ऐसी कर दी है..." आलोक की आँखों में एक नशा सा था।

"नहीं आलोक, प्लीज दूर रहो ... मैं एक पतिव्रता नारी हूँ ... मुझे पति के अलावा किसी ने नहीं छुआ है।" मन में मैं खुश होती हुई उसे ऐसा करने मजबूर करते हुये उसे लुभाने लगी। पर मुझे पता था कि अब मेरी चुदाई बस होने ही वाली है। बस मेरे नखरे देख कर कहीं यह चला ना जाये। उसकी वासना भरी गुलाबी आँखें यह बता रही थी कि वो अब मुझे चोदे बिना कहीं नहीं जाने वाला है।

उसने अपनी बाहें मेरी कमर में डाल कर मुझे दबा लिया और अपने अधरों से मेरे अधर दबा लिये। मैं जान करके घू घू करती रही। उसने मेरे होंठ काट लिये और अधरपान करने लगा। एक क्षण को तो

मैं सुध बुध भूल गई और उसका साथ देने लगी।

उसके हाथ मेरे ब्लाऊज को खोलने में लगे थे ... मैंने अपने होंठ झटक दिये।

"यह क्या कर रहे हो ...? प्लीज ! बस अब बहुत हो गया ... अब जाओ तुम !"
 
उसने अपनी बाहें मेरी कमर में डाल कर मुझे दबा लिया और अपने अधरों से मेरे अधर दबा लिये। मैं जान करके घू घू करती रही। उसने मेरे होंठ काट लिये और अधरपान करने लगा। एक क्षण को तो मैं सुध बुध भूल गई और उसका साथ देने लगी।

उसके हाथ मेरे ब्लाऊज को खोलने में लगे थे ... मैंने अपने होंठ झटक दिये।

"यह क्या कर रहे हो ...? प्लीज ! बस अब बहुत हो गया ... अब जाओ तुम !" मेरे नखरे और बढ़ने लगे।

पर मेरे दोनों कबूतर उसकी गिरफ़्त में थे। वो उसे सहला सहला कर दबा रहा था। मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी। मेरे दिल की धड़कन तेज होती जा रही थी। बस जुबान पर इन्कार था, मैंने उसके हाथ अपने नर्म कबूतरों से हटाने की कोशिश नहीं की। उसने मेरा टॉप ऊपर खींच दिया, मैं ऊपर से नंगी हो चुकी थी। मेरे सुडौल स्तन तन कर बाहर उभर आये। उनमें कठोरता बढ़ती जा रही थी। मेरे चुचूक सीधे होकर कड़े हो गये थे। मैं अपने हाथों से अपना तन छिपाने की कोशिश करने लगी।

तभी उसने बेशर्म होकर अपनी पैंट उतार दी और साथ ही अपनी चड्डी भी। यह मेरे मादक जोबन की जीत थी। उसका लण्ड 120 डिग्री पर तना हुआ था और उसके ऊपर उसके पेट को छू रहा था। बेताबी का मस्त आलम था। उसका लण्ड लम्बा था पर टेढा था। मेरा मन हुआ कि उसे अपने मुख में दबा लूँ और चुसक चुसक कर उसका माल निकाल दूँ। उसने एक झटके में मुझे खींच कर मेरी पीठ अपने से चिपका ली। मेरे चूतड़ों के मध्य में पजामे के ऊपर से ही लण्ड घुसाने लगा। आह्ह ! कैसा मधुर स्पर्श था ... घुसा दे मेरे राजा जी ... मैंने सामने से अपनी चूचियाँ और उभार दी। उसका कड़क लण्ड गाण्ड में घुस कर अपनी मौजूदगी दर्शा रहा था।

"वो क्या है? ... उसमें क्या तेल है ...?"

"हाँ है ... पर ये ऐसे क्या घुसाये जा रहा है ... ?"

उसने मेरी गर्दन पकड़ी और मुझे बिस्तर पर उल्टा लेटा दिया। एक हाथ बढ़ा कर उसने तेल की शीशी उठा ली। एक ही झटके में मेरा पाजामा उसने उतार दिया,"बस अब ऐसे ही पड़े रहना ... नहीं तो ध्यान रहे मेरे पास चाकू है ... पूरा घुसेड़ दूँगा।"

मैं उसकी बात से सन्न रह गई। यह क्या ... उसने मेरे चूतड़ों को खींच कर खोल दिया और तेल मेरे गाण्ड के फ़ूल पर लगाने लगा। उसने धीरे से अंगुली दबाई और अन्दर सरका दी। वो बार बार तेल लेकर मेरी गाण्ड के छेद में अपनी अंगुली घुमा रहा था। मेरे पति ने तो ऐसा कभी नहीं किया था। उफ़्फ़्फ़्... कितना मजा आ रहा था।

"आलोक, देख चाकू मत घुसेड़ना, लग जायेगी ..." मैंने मस्ती में, पर सशंकित होकर कहा।

पर उसने मेरी एक ना सुनी और दो तकिये नीचे रख दिये। मेरी टांगें खोल कर मेरे छेद को ऊपर उठा दिया और अपना सुपाड़ा उसमें दबा दिया।

"देख चाकू गया ना अन्दर ..."

"आह, यह तो तुम्हारा वो है, चाकू थोड़े ही है?"

"तो तुम क्या समझी थी सचमुच का चाकू है मेरे पास ... देखो यह भी तो अन्दर घुस गया ना ?"

उसका लण्ड मेरी गाण्ड में उतर गया था।

"देख भैया, अब बहुत हो गया ना ... तूने मुझे नहीं छोड़ा तो मैं चिल्लाऊँगी ..." मैंने अब जानबूझ कर उसे छेड़ा।

पर उसने अब धक्के लगाने शुरू कर दिये थे, लण्ड अन्दर बाहर आ जा रहा था, उसका लण्ड मेरी चूत को भी गुदगुदा रहा था। मेरी चूत की मांसपेशियाँ भी सम्भोग के तैयार हो कर अन्दर से खिंच कर कड़ी हो गई थी।

"नहीं दीदी चिल्लाना नहीं ... नहीं तो मर जाऊँगा ..." वो जल्दी जल्दी मेरी गाण्ड चोदने लगा पर मैंने अपने नखरे जारी रखे,"तो फिर हट जा ... मेरे ऊपर से... आह्ह ... मर गई मैं तो !" मैंने उसे बड़ी मस्त नजर से पीछे मुड़ कर देखा।

"बस हो गया दीदी ... दो मिनट और ..." वो हांफ़ता हुआ बोला।

"आह्ह ... हट ना ... क्या भीतर ही अपना माल निकाल देगा?" मुझे अब चुदने की लग रही थी। चूत बहुत ही गीली हो गई थी और पानी भी टपकाने लगी। इस बार वो सच में डर गया और रुक गया। मुझे नहीं मालूम था कि गाण्ड मारते मारते सच में हट जायेगा।

"अच्छा दीदी ... पर किसी को बताना नहीं..." वो हांफ़ते हुये बोला।

अरे यह क्या ... यह तो सच में पागल है ... यह तो डर गया... ओह... कैसा आशिक है ये?

"अच्छा, चल पूरा कर ले ... अब नहीं चिल्लाऊंगी..." मैंने उसे नरमाई से कहा। मैंने बात बनाने की कोशिश की- साला ! हरामजादा ... भला ऐसे भी कोई चोदना छोड़ देता है ... मेरी सारी मस्ती रह जाती ना !

उसने खुशी से उत्साहित होकर फिर से लण्ड पूरा घुसा दिया और चोदने लगा। आनन्द के मारे मेरी चूत से पानी और ही निकलने लगा। उसमे भी जोर की खुजली होने लगी ... अचानक वो चिल्ला उठा और उसका लण्ड पूरा तले तक घुस पड़ा और उसका वीर्य निकलने को होने लगा। उसने अपना लण्ड बाहर खींच लिया और अपने मुठ में भर लिया। फिर एक जोर से पिचकारी निकाल दी, उसका पूरा वीर्य मेरी पीठ पर फ़ैलता जा रहा था। कुछ ही समय में वो पूरा झड़ चुका था।

"दीदी, थेन्क्स, और सॉरी भी ... मैंने ये सब कर दिया ..." उसकी नजरें झुकी हुई थी।

पर अब मेरा क्या होगा ? मेरी चूत में तो साले ने आग भर दी थी। वो तो जाने को होने लगा, मैं तड़प सी उठी।

"रुक जाओ आलोक ... दूध पी कर जाना !" मैंने उसे रोका। वो कपड़े पहन कर वही बैठ गया। मैं अन्दर से दूध गरम करके ले आई। उसने दूध पी लिया और जाने लगा।

"अभी यहीं बिस्तर पर लेट जाओ, थोड़ा आराम कर लो ... फिर चले जाना !" मैंने उसे उलझाये रखने की कोशिश की। मैंने उसे वही लेटा दिया। उसकी नजरें शरम से झुकी हुई थी। इसके विपरीत मैं वासना की आग में जली जा रही थी। ऐसे कैसे मुझे छोड़ कर चला जायेगा। मेरी पनियाती चूत का क्या होगा।

"दीदी अब कपड़े तो पहन लूँ ... ऐसे तो शरम आ रही है।" वो बनियान पहनता हुआ बोला।

"क्यूँ भैया ... मेरी मारते समय शरम नहीं आई ?... मेरी तो बजा कर रख दी..." मैंने अपनी आँखें तरेरी।

"दीदी, ऐसा मत बोलो ... वो तो बस हो गया !" वो और भी शरमा गया।

"और अब ... ये फिर से खड़ा हो रहा है तो अब क्या करोगे..." उसका लण्ड एक बार फिर से मेरे यौवन को देख कर पुलकित होने लगा था।

"ओह, नहीं दीदी इस बार नहीं होने दूंगा..." उसने अपना लण्ड दबा लिया पर वो तो दूने जोर से अकड़ गया।

"भैया, मेरी सुनो ... तुम कहो तो मैं इसकी अकड़ दो मिनट में निकाल दूंगी..." मैंने उसे आँख मारते हुये कहा।

"वो कैसे भला ...?" उसने प्रश्नवाचक निगाहों से मुझे देखा।

"वो ऐसे ... हाथ तो हटाओ..." मैं मुस्करा उठी।

मैंने बड़े ही प्यार से उसे थाम लिया, उसकी चमड़ी हटा कर सुपाड़ा खोल दिया। उसकी गर्दन पकड़ ली। मैंने झुक कर सुपाड़े को अपने मुख में भर लिया और उसकी गर्दन दबाने लगी। अब आलोक की बारी थी चिल्लाने की। बीच बीच में उसकी गोलियों को भी खींच खींच कर दबा रही थी। उसने चादर को अपनी मुठ्ठी में भर कर कस लिया था और अपने दांत भीच कर कमर को उछालने लगा था।

"दीदी, यह क्या कर रही हो ...?" उसका सुपाड़ा मेरे मुख में दब रहा था, मैं दांतों से उसे काट रही थी। उसके लण्ड के मोटे डण्डे को जोर से झटक झटक कर मुठ मार रही थी।

"भैया , यह तो मानता ही नहीं है ... एक इलाज और है मेरे पास..." मैंने उसके तड़पते हुये लण्ड को और मसलते हुये कहा। मैं उछल कर उसके लण्ड के पास बैठ गई। उसका तगड़ा लण्ड जो कि टेढा खड़ा हुआ था, उसे पकड़ लिया और उसे चूत के निशाने पर ले लिया। उसका लम्बा टेढा लण्ड बहुत खूबसूरत था। जैसे ही योनि ने सुपाड़े का स्पर्श पाया वो लपलपा उठी ... मचल उठी, उसका साथी जो जाने कब से उसकी राह देख रहा था ... प्यार से सुपाड़े को अपनी गोद में छुपा लिया और उसकी एक इन्च के कटे हुये अधर में से दो बूंद बाहर चू पड़ी।

आनन्द भरा मिलन था। योनि जैसे अपने प्रीतम को कस के अपने में समाहित करना चाह रही थी, उसे अन्दर ही अन्दर समाती जा रही थी यहा तक कि पूरा ही समेट लिया। आलोक ने अपने चूतड़ों को मेरी चूत की तरफ़ जोर लगा कर उठा दिया।

... मेरी चूत लण्ड को पूरी लील चुकी थी। दोनों ही अब खेल रहे थे। लण्ड कभी बाहर आता तो चूत उसे फिर से अन्दर खींच लेती। यह मधुर लण्ड चूत का घर्षण तेज हो उठा। मैं उत्तेजना से सरोबार अपनी चूत लण्ड पर जोर जोर पटकने लगी।

दोनो मस्त हो कर चीखने-चिल्लाने लगे थे। मस्ती का भरपूर आलम था। मेरी लटकती हुई चूचियाँ उसके कठोर मर्दाने हाथों में मचली जा रही थी, मसली जा रही थी, लाल सुर्ख हो उठी थी। चुचूक जैसे कड़कने लगे थे। उन्हें तो आलोक ने खींच खींच कर जैसे तड़का दिये थे। मैंने बालों को बार बार झटक कर उसके चेहरे पर मार रही थी। उसकी हाथ के एक अंगुली मेरी गाण्ड के छेद में गोल गोल घूम रही थी। जो मुझे और तेज उत्तेजना से भर रही थी। मैं आलोक पर लेटी अपनी कमर से उसके लण्ड को दबाये जा रही थी। उसे चोदे जा रही थी। हाय, शानदार चुदाई हो रही थी।

तभी मैंने प्यासी निगाहों से आलोक को देखा और उसके लण्ड पर पूरा जोर लगा दिया। ... और आह्ह्ह ... मेरा पानी निकल पड़ा ... मैं झड़ने लगी। झड़ने का सुहाना अहसास ... उसका लण्ड तना हुआ मुझे झड़ने में सहायता कर रहा था। उसका कड़ापन मुझे गुदगुदी के साथ सन्तुष्टि की ओर ले जा रहा था। मैं शनैः शनैः ढीली पड़ती जा रही थी। उस पर अपना भार बढ़ाती जा रही थी। उसके लण्ड अब तेजी से नहीं चल रहा था। मैंने धीरे से अपनी चूत ऊँची करके लण्ड को बाहर निकाल दिया।

"आलोक, तेरे इस अकड़ू ने तो मेरी ही अकड़ निकाल दी..."

फिर मैंने उसके लण्ड की एक बार फिर से गर्दन पकड़ ली, उसके सुपाड़े की जैसे नसें तन गई। जैसे उसे फ़ांसी देने वाली थी। उसे फिर एक बार अपने मुख के हवाले किया और सुपाड़े की जैसे शामत आ गई। मेरे हाथ उसे घुमा घुमा कर मुठ मारने लगे। सुपाड़े को दांतों से कुचल कुचल कर उसे लाल कर दिया। डण्डा बहुत ही कड़क लोहे जैसा हो चुका था। आलोक की आनन्द के मारे जैसे जान निकली जा रही थी। तभी उसके लौड़े की सारी अकड़ निकल गई। उसका रस निकल पड़ा ... मैंने इस बार वीर्य का जायजा पहली बार लिया। उसका चिकना रस रह रह कर मेरे मुख में भरता रहा। मैं उसे स्वाद ले ले कर पीती रही। लन्ड को निचोड़ निचोड़ कर सारा रस निकाल लिया और उसे पूरा साफ़ कर दिया।

"देखा निकल गई ना अकड़......... साला बहुत इतरा रहा था ..." मैंने तमक कर कहा।

"दीदी, आप तो मना कर रही थी और फिर ... दो बार चुद ली?" उसने प्रश्नवाचक नजरों से मुझे देखा।

"क्या भैया ... लण्ड की अकड़ भी तो निकालनी थी ना ... घुस गई ना सारी अकड़ मेरी चूत में !"

"दीदी आपने तो लण्ड की नहीं मेरी अकड़ भी निकाल दी ... बस अब मैं जाऊँ ...?"

"अब कभी अकड़ निकालनी हो तो अपनी दीदी को जरूर बताना ... अभी और अकड़ निकालनी है क्या ?"

"ओह दीदी ... ऐसा मत कहो ... उफ़्फ़्फ़ ये तो फिर अकड़ गया ..." आलोक अपने लण्ड को दबा कर बैठाता हुआ बोला। तो अब देर किस बात की थी, हम दोनों इस बार शरम छोड़ कर फिर से भिड़ गये। भैया और दीदी के रिश्तों के चीथड़े उड़ने लगे ... मेरा कहना था कि वो तो मेरा मात्र एक पड़ोसी था ना कि कोई भैया। अरे कोई भी मुझे क्या ऐसे ही दीदी कहने लग जायेगा, आप ही कहें, तो क्या मैं उसे भैया मान लूँ? फिर तो चुद ली मैं ? ये साले दीदी बना कर घर तक पहुँच तो जाते है और अन्त होता है इस बेचारी दीदी की चुदाई से। सभी अगर मुझे दीदी कहेंगे तो फिर मुझे चोदेगा कौन ? क्या मेरा सचमुच का भैया ... !!! फिर वो कहेंगे ना कि 'सैंया मेरे राखी के बन्धन को निभाना ...'
 
बेचैन निगाहे

मेरी शादी हुए दो साल हो चुके हैं। मेरी पढ़ाई बीच में ही रुक गई थी। मेरे पति बहुत ही अच्छे हैं, वो मेरी हर इच्छा को ध्यान में रखते हैं। मेरी पढ़ाई की इच्छा के कारण मेरे पति ने मुझे कॉलेज में फिर से प्रवेश दिला दिया था। उन्हें मेरे वास्तविक इरादों का पता नहीं था कि इस बहाने मैं नए मित्र बनाना चाहती हूँ। मैं कॉलेज में एडमिशन लेकर बहुत खुश हूँ। मेरे पति बी.एच.ई.एल. में कार्य करते हैं। उन्हें कभी कभी उनके मुख्य कार्यालय में कार्य हेतु शहर भी बुला लिया जाता है। उन दिनों मुझे बहुत अकेलापन लगता है। कॉलेज जाने से मेरी पढ़ाई भी हो जाती है और समय भी अच्छा निकल जाता है। धीरे धीरे मैंने अपने कई पुरुष मित्र भी बना लिए हैं।

कई बार मेरे मन में भी आता था कि अन्य लड़कियों की तरह मैं भी उन मित्रों लड़को के साथ मस्ती करूँ, पर मैं सोचती थी कि यह काम इतना आसान नहीं है। ऐसा काम बहुत सावधानी से करना पड़ता है, जरा सी चूक होने पर बदनामी हो जाती है। फिर क्या लड़के यूँ ही चक्कर में आ जाते है, हाँ, लड़के फ़ंस तो जाते ही है। छुप छुप के मिलना और कहीं एकान्त मिल गया तो पता नहीं लड़के क्या न कर गुजरें। उन्हें क्या ... हम तो चुद ही जायेंगी ना। आह !फिर भी जाने क्यूँ कुछ ऐसा वैसा करने को मन मचल ही उठता है, शायद नए लण्ड खाने के विचार से। लगता है जवानी में वो सब कुछ कर गुजरें जिसकी मन में तमन्ना हो। पराये मर्द से शरीर के गुप्त अंगों का मर्दन करवाना, पराये मर्द का लण्ड मसलना, मौका पाकर गाण्ड मरवाना, प्यासी चूत का अलग अलग लण्डों से चुदवाना ...। फिर मेरे मस्त उभारों का बेदर्दी से मर्दन करवाना ...

धत्त ! यह क्या सोचने लगी मैं? भला ऐसा कहीं होता है ? मैंने अपना सर झटका और पढ़ाई में मन लगाने की कोशिश करने लगी। पर एक बार चूत को लण्ड का चस्का लग जाए तो चूत बिना लण्ड लिए नहीं मानती है, वो भी पराये मर्दों के लिए तरसने लगती है, जैसे मैं ... अब आपको कैसे समझाऊँ, दिल है कि मानता ही नहीं है। यह तो आप सभी ही समझते हैं।

मेरी कक्षा में एक सुन्दर सा लड़का था, उसका नाम संजय था, जो हमेशा पढ़ाई में अव्वल आता था। मैंने मदद के लिए उससे दोस्ती कर ली थी। उससे मैं नोट्स भी लिया करती थी।

एक बार मैं संजय से नोट्स लेकर आई और उसे मैंने मेज़ पर रख दिए। भोजन वगैरह तैयार करके मैं पढ़ने बैठी। कॉपी के कुछ ही पन्ने उलटने के बाद मुझे उसमें एक पत्र मिला। उसे देखते ही मेरे शरीर में एक झुरझुरी सी चल गई। क्या प्रेम पत्र होगा... जी हाँ... संजय ने वो पत्र मुझे लिखा था। मेरा मन एक बार तो खुशी से भर गया।

जैसा मैंने सोचा था ... उसमें उसने अपने प्यार का इज़हार किया था। बहुत सी दिलकश बातें भी लिखी थी। मेरी सुन्दरता और मेरी सेक्सी अदाओं के बारे में खुल कर लिखा था। उसे पढ़ते समय मैं तो उसके ख्यालों में डूब गई। मैंने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि कोई मुझसे प्यार करने लगेगा और यूँ पत्रों के द्वारा मुझे अपने दिल की बात कहेगा।

मेरे जिस्म में खलबली सी मचने लगी। चूत में मीठा सा रस निकल आया। फिर मुझे लगा कि मेरे दिल में यह आने लगा ... मैं तो शादीशुदा हूँ, पराये मर्द के बारे में भला कैसे सोच सकती हूँ। पर हे राम, इस चूत का क्या करूँ। वो पराया सा भी तो नहीं लग रहा था।

तभी अचानक घर की घण्टी बजी। बाहर देखा तो संजय था ... मेरा दिल धक से रह गया। यह क्या ... यह तो घर तक आ गया, पर उसके चेहरे पर हवाईयाँ उड़ रही थी।

"क्या हुआ संजय?" मैं भी उसके हाल देख कर बौखला गई।

"वो नोट्स कहाँ हैं शीला?" उसने उखड़ती आवाज में कहा।

"वो रखे हुए हैं ... क्यों क्या हो गया?"

वो जल्दी से अन्दर आ गया और कॉपी देखने लगा। जैसे ही उसकी नजर मेज़ पर रखे पत्र पर पड़ी ... वो कांप सा गया। उसने झट से उसे उठा लिया और अपनी जेब में रख लिया।

"शीलू, इसे देखा तो नहीं ना ... ?"

"हाँ देखा है ... क्यूँ, क्या हुआ ...? अच्छा लिखते हो !"

"सॉरी ... सॉरी ... शीलू, मेरा वो मतलब नहीं था, ये तो मैंने यूँ ही लिख दिया था।" उसका मुख रुआंसा सा हो गया था।

"इसमें सॉरी की क्या बात है ... तुम्हारे दिल में जो था... बस लिख दिया...। अच्छा लिखा था ... कोई मेरी इतनी तारीफ़ करे ... थैंकयू यार, मुझे तो बहुत मजा आया अपनी तारीफ़ पढ़कर !"

"सॉरी ... शीला !" उसे कुछ समझ में नहीं आया। वो सर झुका कर चला गया।

मैं उसके भोलेपन पर मुस्करा उठी। उसके दिल में मेरे लिए क्या भावना है मुझे पता चल गया था। रात भर बस मुझे संजय का ही ख्याल आता रहा। हाय राम, कितना कशिश भरा था संजय... काश ! वो मेरी बाहों में होता। मेरी चूत इस सोच से जाने कब गीली हो गई थी।

संजय ने मेरे स्तन दबा लिए और मेरे चूतड़ो में अपना लण्ड घुस दिया। मैं तड़प उठी। वो मुझसे चिपका जा रहा था, मुझे चुदने की बेताबी होने लगी।

'क्या कर रहे हो संजू ... जरा मस्ती से ... धीरे से...'

मैंने घूम कर उसे पकड़ लिया और बिस्तर पर गिरा दिया। उसका लण्ड मेरी चूत में घुस गया। मेरा शरीर ठण्ड से कांप उठा। मैंने उसके शरीर को और जोर से दबा लिया। मेरी नींद अचानक खुल गई। जाने कब मेरी आँख लग गई थी ... ठण्ड के मारे मैं रज़ाई खींच रही थी ... और एक मोहक सा सपना टूट गया। मैंने अपने कपड़े बदले और रज़ाई में घुस कर सो गई। सवेरे मेरे पति नाईट ड्यूटी करके आ चुके थे और वो चाय बना रहे थे। मैंने जल्दी से उठ कर बाकी काम पूरा किया और चाय के लिए बैठ गई।

कॉलेज में आज संजय मुझसे दूर-दूर भाग रहा था, पर कैन्टीन में मैंने उसे पकड़ ही लिया। उसकी झिझक मैंने दूर कर दी। मेरे दिल में उसके लिए प्रेम भाव उत्पन्न हो चुका था। वो मुझे अपना सा लगने लगा था। मेरे मन में उसके लिए भावनाएँ पैदा होने लगी थी।

"मैंने आप से माफ़ी तो मांग ली थी ना?" उसने मायूसी से सर झुकाए हुए कहा।

"सुनो संजय, तुम तो बहुत प्यारा लिखते हो, लो मैंने भी लिखा है, देखो अकेले में पढ़ना !" मैंने उसकी ओर देख कर शर्माते हुए कहा।

उसे मैंने एक कॉपी दी, और उठ कर चली आई। काऊन्टर पर पैसे दिए और घूम कर संजय को देखा। वो कॉपी में से मेरा पत्र निकाल कर अपनी जेब में रख रहा था। हम दोनों की दूर से ही नजरें मिली और मैं शर्मा गई।

उसमें मर्दानगी जाग गई ... और फिर एक मर्द की तरह वो उठा और काऊन्टर पर आकर उसने मेरे पैसे वापस लौटाए औए स्वयं सारे पैसे दिए। मैं सर झुकाए तेजी से कक्षा में चली आई। पूरा दिन मेरा दिल कक्षा में नहीं लगा, बस एक मीठी सी गुदगुदी दिल में उठती रही। जाने वो पत्र पढ़ कर क्या सोचेगा।

रात को मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई, मैं अनमनी सी हो उठी। हाय ... उसे मैंने रात को क्यों बुला लिया ? यह तो गलत है ना ! क्या मैं संजय पर मरने लगी हूँ? क्या यही प्यार है? हाय ! वो पत्र पढ़ कर क्या सोचेगा, क्या मुझे चरित्रहीन कहेगा? या मुझे भला बुरा कहेगा। जैसे जैसे उसके आने का समय नजदीक आता जा रहा था, मेरी दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी। मुझे लगा कि मैं पड़ोसी के यहाँ भाग जाऊँ, दरवाजा बन्द देख कर वह स्वतः ही चला जायेगा। बस ! मुझे यही समझ में आया और मैंने ताला लिया और चल दी।[

जैसे ही मैंने दरवाजा खोला तो दिल धक से रह गया। संजय सामने खड़ा था। मेरा दिल जैसे बैठने सा लगा।

"अरे मुझे बुला कर कहाँ जा रही हो?"

"क्... क... कहां भला... कही नहीं ... मैं तो ... मैं तो ..." मैं बदहवास सी हो उठी थी।

"ओ के, मैं कभी कभी आ जाऊँगा ... चलता हूँ !" मेरी चेहरे पर पड़ी लटों को उंगली से एक तरफ़ हटाते हुए बोला।

"अरे नहीं... आओ ना... वो बात यह है कि अभी घर में कोई नहीं है..." मैं हड़बड़ा सी गई। सच तो यह था कि मुझे पसीना छूटने लगा था।

"ओह्ह ... आपकी हालत कह रही है कि मुझे चला जाना चाहिए !"

मैंने उसे अन्दर लेकर जल्दी से दरवाजा बन्द कर दिया और दरवाजे पर पीठ लगा कर गहरी सांसें लेने लगी।

"देखो संजू, वो खत तो मैंने ऐसे ही लिख दिया था ... बुरा मत मानना..." मैंने सर झुका कर कहा।

उसका सर भी झुक गया। मैंने भी शर्म से घूम कर उसकी ओर अपनी पीठ कर ली।

"पर आपके और मेरे दिल की बात तो एक ही है ना ..." उसने झिझकते हुए कहा।

मुझे बहुत ही कोफ़्त हो रही थी कि मैंने ऐसा क्यूँ लिख दिया। अब एक पराया मर्द मेरे सामने खड़ा था। मुझे बार बार कुछ करने को उकसा रहा था। उसकी भी भला क्या गलती थी। तभी संजय के हाथों का मधुर सा स्पर्श मेरी बाहों पर हुआ।

"शीलू जी, आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो...!" उसने प्रणय निवेदन कर डाला।

यह सुनते ही मेरे शरीर में बर्फ़ सी लहरा गई। मेरी आँखें बन्द सी हो गई।"य... यह ... क्या कह रहे हो? ऐसा मत कहो ..." मेरे नाजुक होंठ थरथरा उठे।

"मैं ... मैं ... आपसे प्यार करने लगा हूँ शीलू जी ... आप मेरे दिल में बस गई हो !" उसका प्रणय निवेदन मेरी नसों में उतरता जा रहा था। वो अपने प्यार का इजहार कर रहा था। उसकी हिम्मत की दाद देनी होगी।

"मैं शादीशुदा हूँ, सन्जू ... यह तो पाप... अह्ह्ह्... पाप है ... " मैं उसकी ओर पलट कर उसे निहारते हुए बोली।

उसने मुझे प्यार भरी नजरों से देखा और मेरी बाहों को पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया। मैं उसकी बलिष्ठ बाहों में कस गई।

"पत्र में आपने तो अपना दिल ही निकाल कर रख दिया था ... है ना ! यही दिल की आवाज है, आपको मेरे बाल, मेरा चेहरा, सभी कुछ तो अच्छा लगता है ना?" उसने प्यार से मुझे देखा।

"आह्ह्ह ... छोड़ो ना ... मेरी बांह !" मैं जानबूझ कर उसकी बाहों में झूलती हुए बोली।

"शीलू जी, दिल को खुला छोड़ दो, वो सब हो जाने दो, जिसका हमें इन्तज़ार है।"

उसने अपने से मुझे चिपका लिया था। उसके दिल की धड़कन मुझे अपने दिल तक महसूस होने लगी थी। पर मेरा दिल अब कुछ ओर कहने लगा था। यह सुहानी सी अनुभूति मुझे बेहोश सी किए जा रही थी। सच में एक पराये मर्द का स्पर्श में कितना मधुर आनन्द आता है ... यह अनैतिक कार्य मुझे अधिक रोमांचित कर रहा था ... । उसके अधर मेरे गुलाबी गोरे गालों को चूमने लगे थे। मैं बस अपने आप को छुड़ाने की जानकर नाकामयाब कोशिश बस यूँ ही कर रही थी। वास्तव में मेरा अंग अंग कुचले और मसले जाने को बेताब होने लगा था। अब उसके पतले पतले होंठ मेरे होंठों से चिपक गए थे।

आह्ह्ह्ह ...... उसकी खुशबूदार सांसें ...

उसके मुख से एक मधुर सी सुगंध मेरी सांसों में घुल गई। धीरे धीरे मैं अपने आप को उसको समर्पण करने लगी थी। उसके अधर मेरे नीचे के अधर को चूसने लगे थे। फिर उसकी लपलपाती जीभ मेरे मुख द्वार में प्रवेश कर गई और मेरी जीभ से टकरा गई। मैंने धीरे से उसकी जीभ मुख में दबा ली और चूसने लगी। मैं तो शादीशुदा थी... मुझे इन सेक्सी कार्यों का बहुत अच्छा अनुभव था... और वो मैं कुशलता से कर लेती थी। उसके हाथ मेरे जिस्म पर लिपट गए और मेरी पीठ, कमर और चूतड़ों को सहलाने लगे। मेरे शरीर में बिजलियाँ तड़कने लगी। उसका लण्ड भी कड़क उठा और मेरे कूल्हों से टकराने लगा। मेरा धड़कता सीना उसके हाथों में दब गया। मेरे मुख से सिसकारी फ़ूट पड़ी। मैंने उसे धीरे से अपने से अलग कर दिया।

"यह क्या करने लगे थे हम ...?" मैं अपनी उखड़ी सांसें समेटते हुई जान करके शर्माते हुए नीचे देखते हुए बोली।

"वही जो दिल की आवाज थी ... " उसकी आवाज जैसे बहुत दूर से आ रही हो।

"मैं अपने पति का विश्वास तोड़ रही हूँ ना ... बताओ ना?" मेरा असमंजस चरम सीमा पर थी, पर सिर्फ़ उसे दर्शाने के लिए कि कहीं वो मुझे चालू ना समझ ले।

"नहीं, विश्वास अपनी जगह है ... जिससे पाने से खुशी लगे, उसमें कोई पाप नहीं है, खुशी पाना तो सबका अधिकार है ... दो पल की खुशी पाना विश्वास तोड़ना नहीं होता है।"

"तुम्हारी बातें तो मानने को मन कर रहा है ... तुम्हारे साथ मुझे बहुत आनन्द आ रहा है, पर प्लीज संजू किसी कहना नहीं..." मैंने जैसे समर्पण भाव से कहा।

"तो शर्म काहे की ... दो पल का सुख उठा लो ... किसी को पता भी नहीं चलेगा... आओ !"

मैं बहक उठी, उसने मुझे लिपटा लिया। मेरा भी उसके लण्ड को पकड़ने का दिल कर रहा था। मैंने भी हिम्मत करके उसके पैंट की ज़िप में हाथ घुसा दिया। उसका लण्ड का आकार भांप कर मैं डर सी गई। वो मुझे बहुत मोटा लगा। फिर मैं उसे पकड़ने का लालच मैं नहीं छोड़ पाई। उसे मैंने अपनी मुट्ठी में दबा लिया। मैं उसे अब दबाने-कुचलने लगी। लण्ड बहुत ही कड़ा हो गया था। वो मेरी चूचियाँ सहलाने लगा ...

एक एक कर के उसने मेरे ब्लाऊज के बटन खोल दिये। मेरी स्तन कठोर हो गए थे। चुचूक भी कड़े हो कर फ़ूल गए थे। ब्रा के हुक भी उसने खोल दिए थे। ब्रा के खुलते ही मेरे उभार जैसे फ़ड़फ़ड़ा कर बाहर निकल कर तन गये। जवानी का तकाजा था ... मस्त हो कर मेरा एक एक अंग अंग फ़ड़क उठा। मेरे कड़े स्तनाग्रों को संजू बार बार हल्के से घुमा कर दबा देता था।

मेरे मन में एक मीठी सी टीस उठ जाती थी। चूत में से धीरे धीरे पानी रिसने लगा था। भरी जवानी चुदने को तैयार थी। मेरी साड़ी उतर चुकी थी, पेटिकोट का नाड़ा भी खुल चुका था। मुझे भला कहाँ होश था ... उसने भी अपने कपड़े उतार दिए थे। उसका लण्ड देख देख कर ही मुझे मस्ती चढ़ रही थी।

उसके लण्ड की चमड़ी धीरे से खोल कर मैंने ऊपर खींच दी। उसका लाल फ़ूला हुआ मस्त सुपाड़ा बाहर आ गया, मैंने पहली बार किसी का इस तरह लाल सुर्ख सुपाड़ा देखा था। मेरे पति तो बस रात को अंधेरे में मुझे चोद कर सो जाया करते थे, इन सब चीज़ों का आनन्द मेरी किस्मत में नहीं था। आज मौका मिला था जिसे मैं जी भर कर भोग लेना चाहती थी।

इस मोटे लण्ड का भोग का आनन्द पहले मैं अपनी गाण्ड से आरम्भ करना चाहती थी, सो मैंने उसका लण्ड मसलते हुए अपनी गाण्ड उसकी ओर कर दी।

"संजय, 19 साल का मुन्ना, मेरे 21 साल के गोलों को मस्त करेगा क्या?"

"शीलू ... इतने सुन्दर, आकर्षक गोलों के बीच छिपी हुई मस्ती भला कौन नहीं लूटना चाहेगा, ये चिकने, गोरे और मस्त गाण्ड के गोले मारने में बहुत मजा आयेगा।"

मैं अपने हाथ पलंग पर रख कर झुक गई और अपनी गाण्ड को मैंने पीछे उभार दिया। उसके लाल सुपाड़े का स्पर्श होते ही मेरे जिस्म में कंपकंपी सी फ़ैल गई। बिजलियाँ सी लहरा गई। उसका सुपाड़े का गद्दा मेरे कोमल चूतड़ों के फ़िसलता हुआ छेद पर आ कर टिक गया। कैसा अच्छा सा लग रहा था उसके लण्ड का स्पर्श। उसके लण्ड पर शायद चिकनाई उभर आई थी, हल्के से जोर लगाने पर ही फ़क से अन्दर उतर गया था। मुझे बहुत ही कसक भरा सुन्दर सा आनन्द आया। मैंने अपनी गाण्ड ढीली कर दी ... और अन्दर उतरने की आज्ञा दे दी। मेरे कूल्हों को थाम कर और थपथपा कर उसने मेरे चूतड़ों के पट को और भी खींच कर खोल दिया और लण्ड भीतर उतारने लगा।

"शीलू जी, आनन्द आया ना ... " संजू मेरी मस्ती को भांप कर कहा।

"ऐसा आनन्द तो मुझे पहली बार आया है ... तूने तो मेरी आँखें खोल दी है यार... और यह शीलू जी-शीलू जी क्या लगा रखा है ... सीधे से शीलू बोल ना।"

मैंने अपने दिल की बात सीधे ही कह दी। वो बहुत खुश हो गया कि इन सभी कामों में मुझे आनन्द आ रहा है।

"ले अब और मस्त हो जा..." उसका लण्ड मेरी गाण्ड में पूरा उतर चुका था। मोटा लण्ड था पर उतना भी नहीं मोटा, हाँ पर मेरे पति से तो मोटा ही था। मंथर गति से वो मेरी गाण्ड चोदने लगा। उजाले में मुझे एक आनन्दित करती हुई एक मधुर लहर आने लगी थी। मेरे शरीर में इस संपूर्ण चुदाई से एक मीठी सी लहर उठने लगी ... एक आनन्ददायक अनुभूति होने लगी। जवान गाण्ड के चुदने का मजा आने लगा। दोनों चूतड़ों के पट खिले हुये, लण्ड उसमें घुसा हुआ, यह सोच ही मुझे पागल किए दे रही थी। वो रह रह कर मेरे कठोर स्तनों को दबाने का आनन्द ले रहा था ... उससे मेरी चूत की खुजली भी बढ़ती जा रही थी। चुदाई तेज हो चली थी पर मेरी गाण्ड की मस्ती भी और बढ़ती जा रही थी। मुझे लगा कि कही संजय झड़ ना जाए सो मैंने उसे चूत मारने को कहा।

"संजू, हाय रे अब मुझे मुनिया भी तड़पाने लगी है ... देख कैसी चू रही है..." मैंने संजय की तरफ़ देख कर चूत का इशारा किया।

"शीलू, गाण्ड मारने से जी नहीं भर रहा है ... पर तेरी मुनिया भी प्यासी लग रही है।"

उसने अपना हाथ मेरी चूत पर लगाया तो मेरा मटर का फ़ूला हुआ मोटा दाना उसके हाथ से टकरा गया।

"यह तो बहुत मोटा सा है ... " और उसको हल्के से पकड़ कर हिला दिया।

"हाय्य्य , ना कर, मैं मर जाऊँगी ... कैसी मीठी सी जलन होती है..." मैंने जोर की सिसकी भरी।

उसका लण्ड मेरी गाण्ड से निकल चुका था। उसका हाथ चूत की चिकनाई से गीला हो गया था। उसने नीचे झुक कर मेरी चूत को देखा और अंगुलियों से उसकी पलकें अलग अलग कर दी और खींच कर उसे खोल दिया।

"एकदम गुलाबी ... रस भरी ... मेरे मुन्ने से मिलने दे अब मुनिया को !"

उसने मेरी गुलाबी खुली हुई चूत में अपना लाल सुपाड़ा रख दिया। हाय कैसा गद्देदार नर्म सा अहसास ... फिर उसे चूत की गोद में उसे समर्पित कर दिया। उसका लण्ड बड़े प्यार से दीवारों पर कसता हुआ अन्दर उतरता गया, और मैं सिसकारी भरती रही। चूंकि मैं घोड़ी बनी हुई थी अतः उसका लण्ड पूरा जड़ तक पहुँच गया। बीच बीच में उसका हाथ, मेरे दाने को भी छेड़ देता था और मेरी चूत में मजा दुगना हो जाता था। वो मेरा दाना भी जोर जोर से हिलाता जा रहा था। लण्ड के जड़ में गड़ते ही मुझे तेज मजा आ गया और दो तीन झटकों में ही, जाने क्या हुआ मैं झड़ने लगी। मैं चुप ही रही, क्योंकि वो जल्दी झड़ने वाला नहीं लगा।

उसने धक्के तेज कर दिए ... शनैः शनैः मैं फिर से वासना के नशे में खोने लगी। मैंने मस्ती से अपनी टांगें फ़ैला ली और उसका लण्ड फ़्री स्टाईल में इन्जन के पिस्टन की तरह चलने लगा। रस से भरी चूत चप-चप करने लगी थी। मुझे बहुत खुशी हो रही थी कि थोड़ी सी हिम्मत करने से मुझे इतना सारा सुख नसीब हो रहा है, मेरे दिल की तमन्ना पूरी हो रही है। मेरी आँखें खुल चुकी थी... चुदने का आसान सा रास्ता था ... थोड़ी सी हिम्मत करो और मस्ती से नया लण्ड खाओ, ढेर सारा आनन्द पाओ। मुझे बस यही विचार आनन्दित कर रहा था ... कि भविष्य में नए नए लण्ड का स्वाद चखो और जवानी को भली भांति भोग लो।

"अरे धीरे ना ... क्या फ़ाड़ ही दोगे मुनिया को...?"

वो झड़ने की कग़ार पर था, मैं एक बार फिर झड़ चुकी थी। अब मुझे चूत में लगने लगी थी। तभी मुझे आराम मिल गया ... उसका वीर्य निकल गया। उसने लण्ड बाहर निकाल लिया और सारा वीर्य जमीन पर गिराने लगा। वो अपना लण्ड मसल मसल कर पूरा वीर्य निकालने में लगा था। मैं उसे अब खड़े हो कर निहार रही थी। वो अपने लण्ड को कैसे मसल मसल कर बचा हुआ वीर्य नीचे टपका रहा था।

"देखा, संजू तुमने मुझे बहका ही दिया और मेरा फ़ायदा उठा लिया?"

"काश तुम रोज ही बहका करो तो मजा आ जाए..." वो झड़ने के बाद जाने की तैयारी करने लगा। रात के ग्यारह बजने को थे। वो बाहर निकला और यहाँ-वहाँ देखा, फिर चुपके से निकल कर सूनी सड़क पर आगे निकल गया।

सन्जय के साथ मेरे काफ़ी दिनो तक सम्बन्ध रहे थे। उसके पापा की बदली होने से वो एक दिन मुझसे अलग हो गया। मुझे बहुत दुख हुआ। बहुत दिनो तक उसकी याद आती रही।

]मैंने अब राहुल से दोस्ती कर ली। वह एक सुन्दर, बलिष्ठ शरीर का मालिक है। उसे जिम जाने का शौक है। पढ़ने में वो कोई खास नहीं, पर ऐसा लगता था वो मुझे भरपूर मजा देगा। उसकी वासनायुक्त नजर मुझसे छुपी नहीं रही। मैं उसे अब अपने जाल में लपेटने लगी हूँ। वो उसे अपनी सफ़लता समझ रहा है। आज मेरे पास राहुल के नोट्स आ चुके हैं ... मैं इन्तज़ार कर रही हूँ कि कब उसका भी कोई प्रेम पत्र नोट्स के साथ आ जाए ... जी हाँ ... जल्द ही एक दिन पत्र भी आ ही गया ...।

प्रिय पाठको ! मैं नहीं जानती हूँ कि आपने अपने छात्र-जीवन में कितना मज़ा किया होगा। यह तरीका बहुत ही साधारण है पर है कारगर। ध्यान रहे सुख भोगने से पति के विश्वास का कोई सम्बन्ध नहीं है। सुख पर सबका अधिकार है, पर हाँ, इस चक्कर में अपने पति को मत भूल जाना, वो कामचलाऊ नहीं है वो तो जिन्दगी भर के लिए है।
 
फ़ोन-सेक्स

यह कहानी मेरे अनुभव और भावनाओं को व्यक्त करती है। मैं शशांक, उम्र 25 वर्ष, कद 5'11", दिल्ली का रहने वाला हूँ।

मेरे मन में हमेशा सेक्स करने की इच्छा रहती है सबकी तरह, पर मैं रोज उसमें कुछ नया और अच्छा करने की कोशिश करता रहता हूँ।

मैं देखने में पता नहीं कैसा लगता हूँ पर हाँ, लड़कियाँ हमेशा मुझे पर नजर गड़ाए रहती हैं। मुझे अब तक यही सुनने को मिला है कि मैं सबसे सेक्सी लड़का हूँ।

यह कहानी मेरी गर्लफ्रेंड की है जिसकी अब किसी और से शादी हो चुकी है, उसी ने मुझसे प्रथम प्रणय-निवेदन किया था। तब वो 22 साल की और मैं 23 का था।

और मैंने हाँ बोल दिया था क्योंकि मेरे मन में भी उसके लिए भावनाएँ थी पर ग़लत नहीं। वो देखने में बहुत ही सुंदर है, कद 5'5", रंग गोरा चेहरा परी की तरह और तनाकृति 32-28-32

वो मुझ पर जान देती थी। मैं उससे फोन पर घंटों बात करता पर मिलना कम ही हो पाता था। हम दोनो अपने अपने परिवारों के कारण बस दूर से ही एक दूसरे को देख पाते थे पर एक दूसरे से ना मिल पाने के कारण हम दोनों के मन में आकर्षण बढ़ता जा रहा था।

और एक दिन उसने व्रत रखा करवा चौथ का।

शाम को फोन पर बोली- मैं व्रत कैसे खोलूँ?

मैंने कहा- तुम्हारे पास मेरा फोटो है, उसे देख कर !

वो बोली- वो तो कर लूँगी पर पानी कैसे पिलओगे?

मैंने कहा- तुम फोन करना मैं कुछ करूँगा।

उसने शाम को फोन किया और मैंने दिन भर सोचा था पर मुझे कुछ समझ नहीं आया था।

तब तक उसका फोन आ गया- वो फोटो मैंने देख लिया है ! अब मुझे पानी कैसे पिलाओगे?

मैंने फिर सोचा, अचानक मेरे दिमाग़ की बत्ती जली और मुझे एक आइडिया आया, मैंने कहा- तुम्हारा मुँह ही तो जूठा करना है आज ! मैं तुम्हें चूम लेता हूँ ! तुम अपना व्रत खोल लो।

वो शरमा गई और कुछ नहीं बोली।

और हमने फोन पर ही अपना पहला चुम्बन किया। उसके बाद पता नहीं मुझे और उसे क्या हो गया कि हम दोनों एक दूसरे के लिए तड़पने लगे।

एक दिन आख़िर हमें मौका मिला और हम मिले और सिर्फ़ एक दूसरे का हाथ पकड़ कर एक दूसरे की आँखों में देखते रहे। तब उसकी मम्मी आने वाली थी, सो वो चली गई।

फिर फोन पर हमारी बात हुई, उसने पूछा- आपने मुझे बाहों में क्यों नहीं लिया?

मैंने कहा- तुम्हारी मम्मी आने वाली थी ना ! तो मुझे तुम्हें जल्दी ही छोड़ना पड़ता। मैं तुम्हें हमेशा अपने से चिपकाए हुए रखना चाहता हूँ।

वो शरमा गई। फिर हम दोनो इसी तरह बातें करते रहे और बातों में ही बहुत खुल गये। वो अपनी निजी बातें भी मुझसे करने लगी।

एक दिन वो बहुत गर्म हो रही थी और मेरे से मिलकर सेक्स करने की इच्छा (शादी के बाद) जता रही थी पर साथ में अफ़सोस भी कि हम अभी नहीं मिल सकते।

उसी वक़्त मैंने उससे उसके बदन का नाप पूछा और चुचूकों का रंग भी।

उसने कहा- आप खुद ही देख लेना..

अचानक हम दोनों को पता नहीं क्या हुआ, हमने बातों में ही फोन सेक्स शुरु कर दिया।

जो इस प्रकार था...

शशांक : मैं तुम्हें हग करना चाहता हूँ.....

वो : करो ना.... पूछो मत...... मैं आपकी ही हूँ।

शशांक : मेरी आँखो में देखो....महसूस करो...

वो : देख रही हूँ....

शशांक : मैं तुम्हारे होठों को देख रहा हूँ...

वो : हाँ...

शशांक : मैं तुम्हें कंधों से पकड़ रखा है। अब मैं तुम्हारे बाल चेहरे से हटा रहा हूँ और धीरे से अपने होंठ तुम्हारे होंठों की तरफ ला रहा हूँ, फील इट, युअर आइज हस बिन क्लोस्ड...न माई लिप्स आर गोयिंग टू मीट विद यूअर लिप्स...

वो : ह्म्*म्ममममम करो ना प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़

शशांक : बॅट मैंने किस नहीं किया...

वो : करो नाआआआअ...

शशांक : मैंने सिर्फ़ अपनी जीभ को बाहर निकाल कर उसकी टिप से तुम्हारे होंठो को छुआ। लिक कर रहा हूँ....

वो : उमौमौममौमौमा....... आइयी कॅन फील यू शशंकककक

शशांक : अब मेरे हाथ तुम्हें हग कर चुके हैं ! मैं तुम्हारी कमर पर टॉप के ऊपर सहला रहा हूँ...फील कर रही हो नाआआ माइ लाइफ माइ जान..........

वो : हाँ....

शशांक : अब तुमने अपने हाथ से मेरी शर्ट को जींस से निकाल कर मेरी कमर पर सहलाना शुरु कर दिया है।

वो : और मैँने तुम्हे ज़ोर से हग कर लिया है और स्मूच कर रही हूँ ! मैं मर जाऊँगी शशाआआआन्क्क्क्क !

शशांक : ऐसे नहीं मरने देंगे अपनी जान को ! हम साथ में मरेंगे... मैंने धीरे से तुम्हारी आइज पर किस किया और तुम ने अपनी आँखें खोली और अब शरमा रही हो

वो : मुझे कुछ हो रहा है...

शशांक : अब मैंने तुम्हारे लिप्स पर एक छोटा सा किस किया और अपने हाथ से तुम्हारी गर्दन पर से बाल पीछे कर दिए कान के ऊपर से और अपने लिप्स तुम्हारे गले पर रख दिए

वो : मेरे रोए खड़े हो रहे हैं ! मैं मर जाऊँगी.. प्लज़्ज़्ज मेरे पास आ जाओ नाआआ....

शशांक : मैं वहीं हूँ तुम्हारे पास......अब मैंने तुम्हारे पीछे जा कर हग कर लिया है...और अब मैं तुम्हारे कान की लटकन को चूस रहा हूँ....

वो : उम्म्ममम शाआ शाआअंकक

शशांक : मेरा हाथ तुम्हारे दिल के पास हैं मैं तुम्हारी गरदन और कान को चाट रहा हूँ ! मेरा दूसरा हाथ तुम्हारी नाभि के पास है.... और मैं टॉप को थोड़ा सा ऊपर कर पेट पर हाथ फ़िरा रहा हूँ ! अब धीरे धीरे ऊपर करके बूब्स को अपने हाथों से ढक लिया है ! होंठों से गले को लगातार किस कर रहा हूँ....

वो : मुझे तुम्हारे कपड़े तो निकालने दो ! तुमने मेरा टॉप तो निकाल दिया है......

शशांक : हाँ निकालो ना प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़

फिर उसने बातों से मेरे कपड़े निकाल दिए

फिर मैंनें आगे कहा- और अब मेरे तुम्हारे बीच सिर्फ़ ब्रा है, मैंनें पीछे से हग किया हुआ है और तुम्हारी कमर को चाट रहा हूँ ! पर यह ब्रा की हुक स्ट्रीप बीच में आ रही है...

वो : उसे निकाल दो ना प्लज़्ज़्ज़

शशांक : मेरे हाथ तुम्हारे कंधे पर हैं ! मैं पीछे और मैंने धीरे से हाथ बूब्स की ओर बढ़ाने शुरु कर दिए हैं और वक्ष की उंचाइयों पर अपने हाथ ले जा रहा हूँ....

वो : ह्म्*ममम उम्म्म्म

शशांक : मैं तुम्हारे दिल की धड़कन को फील कर सकता हूँ ! अब मैं सामने आकर तुम्हारे कंधे को चूम रहा हूँ ! पर यह ब्रा की स्ट्रीप बीच मे आ रही है.... मैंने दातों के बीच इसे फंसा कर कंधे से नीचे उतार दिया पर सिर्फ़ एक तरफ़ का... फिर अपने लिप्स को तुम्हारे बूब्स के ऊपर ला रहा हूँ लिक करते हुए

वो : उफ्ह्ह्ह ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह्ह

शशांक : मैंने बूब निकाल लिया है दूसरे को ब्रा के अंदर ही हाथ से पकड़ लिया है अब जीभ से तुम्हारे चुचूक को खोज रहा हूँ, उधर उंगली से....

वो : देखो... ये रहे..... जानुउउउउउ.....

शशांक : अहहह मिल गये निप्पल......मैंने सिर्फ़ ज़ीभ की टिप से निपल को छुआ है।

वो : ये कड़ा हो रहा है..............ह्म्*म्म्ममममम उम्म्म्मम जन्नन टच इट विद योर फिंगर प्लज़्ज़्ज़्ज़

शशांक : फिर मैंने झीभ से ही उसे ऊपर मोड़ दिया, फिर नीचे..... फिर लेफ्ट और फिर राइट.... और फिर गोल गोल घुमा रहा हूँ .... अब मैंने इसे चूसना शुरु कर दिया....

वो : लिक इट बेबी.... उम्म्म्मम

मैं चूसता जा रहा था और वो मस्त हुई जा रही थी !

शशांक : अब मैंने पीछे से ब्रा की स्ट्रीप खोल दी और दूसरे बूब को भी मुँह में भर लिया है....

वो : दबाओ दूसरे को... उम्म्म्म इसको भी चूस लो...

काफ़ी देर हम ऐसे ही मज़ा लेते रहे, मुझे उसकी वासना भरी आवाज़ मस्त कर रही थी तो उसे उसे मेरी किस और लिक करने की आवाज़ गरम कर रही थी....

कुछ देर बाद उस ने मुझे कहा....फक मी शशांकककक अब नहीं रुका जा रहा..... फक मी वेरी हार्ड......

शशांक : (पर मैं तो और भी कुछ करना चाह रहा था) रूको मेरी जान...... अभी तो बहुत कुछ करना है.......

अब मैंने टोपलेस तुम्हें हग कर लिया है और तुम्हारे निपल्स मेरे चेस्ट पर निपल्स से रब हो रहे हैं...... और रब करो.....

वो : उम्म्म्मम ह्म्*म्म्ममम ऊएईईईईईमाआआअ शशांकककक यू आर सो सेक्सीईई फक मी प्लज़्ज़ज़्ज़

शशांक : वेट...... जान, आज मैं तुम्हें जन्नत की सैर करा रहा हूँ... अब मैं नीचे जा रहा हूँ और नाभि को लिक कर रहा हूँ... अब और नीचे... मैंने लोअर को लिप्स से पकड़ कर पूरा उतार दिया है...

वो : निकाल दो .... पेंटी भी निकल दो... उम्म्म

शशांक : अब मैं तुम्हारे पैर क अंगूठे को चूस रहा हूँ और लिक करते हुए ऊपर आ रहा हूँ..... अब मेरे लिप्स तुम्हारी जाँघो पर हैं... बहुत सुंदर हो तुम मेरी जान... मुझे आज इस पूरी सुंदरता को भोगने दो..

वो : उम्म्म्मम ह्म्*म्म्ममम ऊएईई मैं तिईईई हूँ..... जो चाहे कर लो ! मुझे इतना सुख कभी नहीं मिला....(उसकी आवाज़ मे वासना घुली थी)

शशांक : अब मैं जन्नत की खुशबू ले रहा हूँ, कौन से रंग की पेंटी पहनी है?

वो : पिंक....

शशांक : बहुत सुंदर है.. अब मैंने लिप्स से पकड़ कर पेंटी नीचे कर दी....

वो : पूरी निकाल दो ना आआ...

शशांक : पूरी निकाल दी... अब मैं ज़ीभ की टिप से तुम्हारी चूत को सहला रहा हूँ, और लिप्स को ज़ीभ से खोलने की कोशिश कर रहा हूँ...... कैसा लग रहा है.... जान....?

वो : उईईई मममम्ममी..... बहुत्त्त्त मस्त लग रहाआआ हैईईइ... करते रहो...

शशांक : (थोड़ी देर बाद.......) जान क्या रेडी हो ? अब डाल दूं?

वो : पूछो मत अब फाड़ दो इसे पर धीरे से करना शुरू में... फकक्क्क मीईईईई प्लज़्ज़्ज़

शशांक : लो जान अब ले लो........ ये देखो कितना तड़प रहा है अंदर जाने को.....

वो : डाल दो नाआआआ अब प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़

शशांक : लो... ये लो....

वो : ह्म्*म्म्मममम ऊएईईईईईई मममयययी

शशांक : अहहह धप्प.......लो जनंननन्

वो : फक्क मीईई जानुउ हार्ड वेरी हार्ड

इस तरह हम तीस मिनट तक लगे रहे वो सीत्कार करती रही।

वो कह रही थी मुझे आज मम्मी बना दो और मैं कह रहा था कि मेरी आज तुम बनोगी हमारे बच्चों की मम्मी....

फिर वो बोली क़ि जो चरम सुख मैंने उसे दिया वो उसे कभी नहीं भूलेंगी और मुझसे मिलने के लिए कहने लगी और बोली- प्लीज़ मुझ ही शादी करना ! मैं तुम्हारा दिया सुख रोज पाना चाहती हूँ...

इस तरह हम आगे बढ़ते रहे।

और एक दिन मेरे घर पर कोई नहीं था, मैंने उसे घर बुला लिया और उसे जम कर चोदा ! वो तो मुझ पर निहाल हो गई। मैंने उस दिन आइस क्यूब और शहद भी प्रयोग किया। उसे उस दिन चरम सुख की प्राप्ति हो गई और मुझे भी...
 
चूत पूजा

न जाने कब से यह मेरे ख्याल में बस गया था मुझे याद तक नहीं, लेकिन अब 35 साल की उम्र में उस ख्वाहिश को पूरा करने की मैंने ठान ली थी। जीवन तो बस एक बार मिला है तो उसमें ही अपनी चाहतों और आरजू को पूरा करना है। क्या इच्छा थी यह तो बताना मैं भूल ही गया। तो सुनिए। मेरी इच्छा थी कि दुनिया की हर तरह की चूत और चूची का मज़ा लूँ ! गोरी बुर, सांवली बुर, काली बुर, जापानी बुर, चाइनीज़ बुर !

यूँ समझ लीजिये कि हर तरह की बुर का स्वाद चखना चाहता था। हर तरह की चूत के अंदर अपने लंड को डालना चाहता था।

लेकिन मेरी शुरुआत तो देशी चूत से हुई थी, उस समय मैं सिर्फ बाईस साल का था। मेरे पड़ोस में एक महिला रहती थी, उनका नाम था अनीता और उन्हें मैं अनीता आंटी कहता था। अनीता आंटी की उम्र 45-50 के बीच रही होगी, सांवले रंग की और लम्बे लम्बे रेशमी बाल के अलावा उनके चूतड़ काफी बड़े थे, चूचियों का आकार भी तरबूज के बराबर लगता था। मैं अक्सर अनीता आंटी का नाम लेकर हस्तमैथुन करता था।

एक शाम को मैं अपना कमरा बंद करके के मूठ मार रहा था। मैं जोर जोर से अपने आप बोले जा रहा था-

यह रही अनीता आंटी की चूत और मेरा लंड ...

आहा ओहो ! आंटी चूत में ले ले मेरा लंड ...

यह गया तेरी बुर में मेरा लौड़ा पूरा सात इंच ...

चाची का चूची .. हाय हाय .. चोद लिया ...

अनीता .. पेलने दे न ... क्या चूत है ... !

अनीता चाची का क्या गांड है ...!

और इसी के साथ मेरा लंड झड़ गया।

फिर बेल बजी ...मैंने दरवाज़ा खोला तो सामने अनीता आंटी खड़ी थी, लाल रंग की साड़ी और स्लीवलेस ब्लाउज में, गुस्से से लाल !

उन्होंने अंदर आकर दरवाज़ा बंद कर लिया और फिर बोली- क्यों बे हरामी ! क्या बोल रहा था? गन्दी गन्दी बात करता है मेरे बारे में? मेरा चूत लेगा ? देखी है मेरी चूत तूने...? है दम तेरी गांड में इतनी ?

और फिर आंटी ने अपनी साड़ी उठा दी। नीचे कोई पैंटी-वैन्टी नहीं थी, दो सुडौल जांघों के बीच एक शानदार चूत थी : बिलकुल तराशी हुई :बिल्कुल गोरी-चिट्टी, साफ़, एक भी बाल या झांट का नामो-निशान नहीं, बुर की दरार बिल्कुल चिपकी हुई !

ऐसा मालूम होता था जैसे गुलाब की दो पंखुड़ियाँ आपस में लिपटी हुई हों..

हे भगवान ! इतनी सुंदर चूत, इतनी रसीली बुर, इतनी चिकनी योनि !

भग्नासा करीब १ इंच लम्बी होगी।

वैसे तो मैंने छुप छुप कर स्कूल के बाथरूम में सौ से अधिक चूत के दर्शन किए होंगे, मैडम अनामिका की गोरी और रेशमी झांट वाली बुर से लेकर मैडम उर्मिला की हाथी के जैसी फैली हुई चूत ! मेरी क्लास की पूजा की कुंवारी चूत और मीता के काली किन्तु रसदार चूत।

लेकिन ऐसा सुंदर चूत तो पहली बार देखी थी।

आंटी, आपकी चूत तो अति सुंदर है, मैं इसकी पूजा करना चाहता हूँ .. यानि चूत पूजा ! मैं एकदम से बोल पड़ा।

"ठीक है ! यह कह कर आंटी सामने वाले सोफ़े पर टांगें फैला कर बैठ गई।

अब उनकी बुर के अंदर का गुलाबी और गीला हिस्सा भी दिख रहा था।

मैं पूजा की थाली लेकर आया, सबसे पहले सिन्दूर से आंटी की बुर का तिलक किया, फिर फूल चढ़ाए उनकी चूत पर, उसके बाद मैंने एक लोटा जल चढ़ाया।

अंत में दो अगरबत्ती जला कर बुर में खोंस दी और फिर हाथ जोड़ कर

बुर देवी की जय ! चूत देवी की जय !

कहने लगा ..

आंटी बोली- रुको मुझे मूतना है !

"तो मूतिये आंटी जी ! यह तो मेरे लिए प्रसाद है, चूतामृत यानि बुर का अमृत !"

आंटी खड़ी हो कर मूतने लगी, मैं झुक कर उनका मूत पीने लगा। मूत से मेरा चेहरा भीग गया था। उसके बाद आंटी की आज्ञा से मैंने उनकी योनि का स्वाद चखा। उनकी चिकनी चूत को पहले चाटने लगा और फिर जीभ से अंदर का नमकीन पानी पीने लगा .. चिप चिपा और नमकीन ..

आंटी सिसकारियाँ लेती रही और मैं उनकी बूर को चूसता रहा जैसे कोई लॉलीपोप हो.. मैं आनंद-विभोर होकर कहते जा रहा था- वाह रसगुल्ले सरीखी बुर !

फिर मैंने सम्भोग की इज़ाज़त मांगी !

आंटी ने कहा- चोद ले .. बुर ..गांड दोनों ..लेकिन ध्यान से !

मैं अपने लंड को हाथ में थाम कर बुर पर रगड़ने लगा .. और वोह सिसकारने लगी- डाल दे बेटा अपनी आंटी की चूत में अपना लंड !

अभी लो आंटी ! यह कह कर मैंने अपना लंड घुसा दिया और घुच घुच करके चोदने लगा।

"और जोर से चोद.. "

"लो आंटी ! मेरा लंड लो.. अब गांड की बारी !"

कभी गांड और कभी बुर करते हुए मैं आंटी को चोदता रहा करीब तीन घंटे तक ...

आंटी साथ में गाना गा रही थी :[

तेरा लंड मेरी बुर ...

अंदर उसके डालो ज़रूर ...

चोदो चोदो, जोर से चोदो ...

अपने लंड से बुर को खोदो ...

गांड में भी इसे घुसा दो ...

फिर अपना धात गिरा दो ...

इस गाने के साथ आंटी घोड़ी बन चुकी थी और और मैं खड़ा होकर पीछे चोद रहा था। मेरा लंड चोद चोद कर लाल हो चुका था.. नौ इंच लम्बे और मोटे लंड की हर नस दिख रही थी। मेरा लंड आंटी की चूत के रस में गीला हो कर चमक रहा था।

जोर लगा के हईसा ...

चोदो मुझ को अईसा ...

बुर मेरी फट जाये ...

गांड मेरी थर्राए ...

आंटी ने नया गाना शुरू कर दिया।

मैं भी नये जोश के साथ आंटी की तरबूज जैसे चूचियों को दबाते हुए और तेज़ी से बुर को चोदने लगा .. बीच बीच में गांड में भी लंड डाल देता ... और आंटी चिहुंक जाती ..

चुदाई करते हुए रात के ग्यारह बज चुके थे और सन्नाटे में घपच-घपच और घुच-घुच की आवाज़ आ रही थी ..

यह चुदने की आवाज़ थी ... यह आवाज़ योनि और लिंग के संगम की थी ..

यह आवाज़ एक संगीत तरह मेरे कानों में गूँज रही थी और मैंने अपने लंड की गति बढ़ा दी।

आंटी ख़ुशी के मारे जोर जोर से चिल्लाने लगी- चोदो ... चोदो ... राजा ! चूत मेरी चोदो ...
 
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