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हिन्दी सेक्सी कहानियाँ

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तुझे संतुष्ट करना मुश्किल है

मेरे घर में मै माँ और पिताजी ही थे..मेरी उमर उस समय २५ साल की थी मेरा लंड ७.५ लंबा और २.५ इंच मोटा है..लेकिन मुझे सेक्स का कोई अनुभव नही था..हाँ मूठ मार लेता था..

मै इंजीनियरिंग कर चुका था और अभी नौकरी के लिए प्रयत्न कर रहा था. एक दिन , सुबह ७:०० ऍम पर मै जब उठा और बाथरूम जा रहा था की घर की दरवाजे की घंटी बजी..खोल के देखा तो मेरी मौसी का लड़का रमेश और उसकी बीवी रचना आए है.

माँ ने तुरंत देखा और कहा आओ आओ दोनों ने अपना समान अन्दर रखा और माँ को प्रणाम किया थोड़ी देर कुछ बात करने के बाद भाभी तुरंत किचेन में माँ के साथ काम करने लगी पिताजी बाथरूम से निकले और कपड़े पहन कर काम पर जाने के लिए तैयार हो गए..

तब रमेश और भाभी ने पिताजी को भी प्रणाम किया सबने मिल कर नाश्ता किया.फ़िर रमेश ने कहा की गाव में उसका कोई काम नही चल रहा है और घर की हालत ख़राब होती जा रही है इसलिए मौसी ने कहा है की शहर में जाकर कोई काम ढून्ढो...जब तक रहने का इंतज़ाम नही होता तब तक यहाँ रुकेंगे..

अगर माँ पिताजी चाहे तो..माँ पिताजी दोनों ने कहा कोई बात नही..हमारा घर बड़ा है..एक कमरा उन्हें दे दिया मेरे बाजू वाला...और कहा पहले नौकरी देखो बाद में घर दूंढ लेना..नाश्ता करने के बा???

रमेश भी फ्रेश होकर नौकरी की तलाश में निकल गया. . रमेश के जाने के बाद भाभी माँ के साथ घर के काम में लग गई मै स्नान करने बाथरूम में गया और तैयार होकर बाहर आया.

भाभी मेरे साथ थोड़ी देर बैठ कर बाते करने लगी..थोड़ी देर में हमारी अच्छी दोस्ती हो गई..भाभी का रंग गोरा था.और चुन्चिया एकदम कसी हुयी..पतली कमर...गोल उभरी हुई गांड....कुल मिलाकर भाभी एक चोदने की चीज़ थी..लेकिन अभी मेरे दिमाग में ऐसा कुछ नही आया . मुझसे बात करते हुए वो काम भी कर रही थी.

शाम को रमेश वापस आया..उसे एक नौकरी मिल गई थी किसी लेथ मशीन पर.वो लेथ मशीन का ओपेरटर था..और उसकी तनख्वाह थी २०० रुपये रोज की. . दो दिन ऐसे ही बीत गए..मै उनके कमरे के बाजु वाले कमरे में ही सोता हु..दोनों कमरों के बीच की दीवार ऊपर से खुली है..

रात को दोनों के बीच झगड़ा होता था...भाभी की आवाज़ मैंने सुनी...तुम फ़िर से झड़ गए..मेरा तो कुछ हुआ ही नही...फ़िर से करो ना..लेकिन रमेश कहता था.तेरी चूत कोई घोडा भी चोदेगा तो ठंडी नही होगी..मुझे स???ने दे..ऐसा दो रात हुआ..भाभी उठ कर बाथरूम जाती थी फ़िर बड़बढ़ाते हुए वापस आ कर सो जाती थी.. भैय्या कहते थे..तू बहुत चुदासी है..तुझे संतुष्ट करना मुश्किल है..ख़ुद ही अपने हाथ से आग बुझा ले..

तीसरे दिन , पापा और रमेश नाश्ता करके अपने काम पर चले गए मै लेता था..भाभी मेरे कमरे में आई और कहा की नाश्ता करने चलो..माँ शायद बाथरूम में थी..मैंने किचेन में जा कर नाश्ता करना शुरू किया.भाभी मेरे एकदम से क़रीब आई और बड़े प्यार से बोली संजय..एक बात पूंछू ? मैंने कहा पूंछो ..भाभी बोली "किसी से बताओगे तो नही?" मैंने पूंछा ऐसी कौनसी बात है?और आप तो जानती हो मै चुगली नही करता. . भाभी फिर से बोली मै जानती हु लेकिन आप प्रोमिस दो आप किसी को नही बताएँगे मैंने कहा हाँ मै प्रोमिस देता हु..

तब भाभी ने धीरे से कहा मेरे और तुम्हारे भैय्या के लिए कोक शास्त्र ला दो., मैंने पूंछा ..क्यो? भाभी ने कहा तुम्हारे भाई को औरत की कैसे चुदाई की जाती है वो सीखना पड़ेगा वो मुझे संतुष्ट नही कर पता. मै ने कहा ठीक है मै ला दूंगा मै सुबह मार्केट में गया और एक बुक स्टोर से अच्छा कोक शास्त्र और दो चुदाई की कहानी की पुस्तक ले आया.

घर आकर मैं ने चुदाई की पुस्तके पढी..मेरा लंड खड़ा हो गया..मैंने मूठ मारी..और पहली बार मुझे भाभी को चोदने का ख़्याल आया. कोक शास्त्र में चुदाई की कई तस्वीरे थी..फ़िर मैंने भाभी को तीनो पुस्तके दे दोपहर का खाना खाने के बाद भाभी वो पुस्त ले कर अपने कमरे में चली गई..

पुस्तक पढते हुये वो गरम हो गई..मैंने दरवाजे से देखा वो अपने चूत में हाथ दल के मसल रही थी.. रात को डिनर के बाद १० :३० बजे सब अपने बेडरूम में सोने गए मै ड्राइंग रूम में बैठ कर भाभी और रमेश भाई जो बात कर रहे थे वो सुन रहा था , रमेश ने भाभी की चुदाई की लेकिन उसे संतुष्ट नही कर सका और रोज की तरह जल्दी ही झड़ गया....

भाभी उसे समझाने की कोशिश कर रही थी लेकिन वो सुनता ही नही था उसने कहा मुझसे फालतू बात मत कर तू कभी भी संतुष्ट नही होगी , अखिर में भाभी रूम से बाहर निकली और बाथरूम में गयी ,

बाथरूम से जब वापस आयी तब मैंने भाभी को रोका और भाभी का एक हाथ पकड़ के मेरे गरम लंडपर रख दिया , भाभी में मेरे लंड पर प्यार से हाथ फेरा और बोली ये तो बहुत बड़ा लंड है ..मैंने कहा जब लंड बड़ा और मज़बूत होगा तभी ज्यादा मजा भी आयेगा..

भाभी बोली लगता है एही सच है..लेकिन ये तो मेरी चूत फाड़ देगा भाभी ने कहा आप मूठ मत मरना संजू भाई मै रमेश के सोने के बाद तुमसे चुदाने आऊंगी , ये कह कर मेरे लंड को दबा के वो अपने रूम में चली गई.., जाते ही रमेश बोला यह दूध में शक्कर डाला ही नही है जाके शक्कर मिला के लाओ. भाभी बिना कुछ कहे वो दूध लेके बाहर आयी, और मुझे इशारे से किचेन में बुलाया..मै उनके पीछे किचेन में गया, भाभी धीरे से बोली कोई नींद की गोली है?मैंने कहा बहोत सी है , ममी पहेले लेती थी , मैंने दो गोली निकल के दी भाभी ने दोनों गोली पीस के दूध में डाली और शक्कर डाली फिर चम्मच से हिला के दूध तैयार किया ,

फिर वो बोली मुझे तुम्हारा लंड दिखाओ मैंने पाजामे से लंड बाहर निकला और भाभी के हाथ में दिया...भाभी उसे देख कर हैरान हो गई और बोली..बाप रे इतना लंबा और इतना मोटा..कितना सलोना और तगडा है आज मुझे इस लंड से चुदाना ही है..तुम आज मेरी चूत फाड़ दोगे...मेरा ७.५ इंच लंबा और २.५ इंच मोटा लंड उन्होंने हाथ में ले करा सहलायऍ ? , फ़िर कहा..आज मुझे पूरी औरत बना देना वैसा बोलके दूध अपने साथ लेके वो बेडरूम में चली गयी .

मै अपने बिस्तर पर आ कर लेट गया और भाभी का इंतज़ार करने लगा..मेरा लंड भी बेताब हो गया था..मैंने पुस्तक में जैसा पढ़ा था और जो चुदाई की स्टाइल के तस्वीर देखी थी उन्हें याद करने लगा रात को डिनर के बाद १०:३० बजे सब अपने बेडरूम में सोने गए

मै ड्राइंग रूम मेंबैठ कर भइया भाभी की चुदाई के मजे ले रहा था..आज भी रमेश जल्दी ही झड़ गया. मै बाहर बैठा सब सुन रहा था..भाभी ने उसे समझाया..लेकिन उनके बीच कहा सुनी होने लगी भाभी संतुष्ट नही हुयी.. भाभी उसे समझाने की कोशिश कर रही थी लेकिन वो सुनता ही नही था, अपनी गलती मान ही नही रहा था.

आखिर में भाभी रूम से बाहर निकली और बाथरूम में गयी, अपनी चूत को साफ किया और फ़िर पनि साड़ी से चूत को पोंछते हुए , बाथरूम से जब वापस आयी तब मैंने हिम्मत कर के उन्हें रोका और भाभी का एक हाथ पकड़ के मेरे गरम लंड पर रखा., भाभी के खप से उसे पकड़ा और फ़िर प्यार से उस पर हाथ फेरने लगी और बोली यह तो बहुत बड़ा लंड है

मैंने कहा बड़ा ही नही मजबूत भी है..तुम्हे संतुष्ट कर सकता है..बड़े और मोटे लंड से ही चुदाई का असली मज़ा आता है., भाभी बोली शायद यही सच है.तुम क्या कर रहे हो..मैंने कहा मूठ मार रहा ऊँ..भाभी बोली मत मारो मै अभी रमेश के सोने के बाद तुमसे चुदवाने आऊंगी., ये कह कर वो मेरे लंड को थपथपा के जाने लगी..मैंने उनकी चुन्ची को दबा दिया..वो उईई.कर उठी..और फुसफुसाके बोली..थोड़ा सब्र करो..सब दूंगी..राज्जा..पूरी नंगी होके चुदवाऊन्गी और वो अपने कमरे में चली गई.. जाते ही रमेश बोला यह दूध में शक्कर डाला ही नही है जाके शक्कर मिला के ले आओ .

भाभी बिना कुछ कहे वो दूध लेके बाहर आयी और मुझे इशारा कर के किचेन में बुलाया..मै उनके पीछे उनकी गांड से मेरा खड़ा लंड टिका के खड़ा हो गया..उन्होंने भी मेरे लंड पर अपनी गांड और चिपका दी..फ़िर बोली कोई नींद की गोली है ?मैंने कहा बहुत है.. ममी पहले लेती थी मैंने दो गोली निकाल के दी भाभी ने दोनों गोली पीस के दूध में डाली और शक्कर डाल के फ़िर चम्मच से हिला के दूध तैयार किया फ़िर वो बोली मुझे तुम्हारा लंड दिखाओ , मैंने अपना पाजामा खोला और अपना मूसल बाहर निकला..उसक् ? सुपाडे के छेद से अब पानी निकल रहा था. उसने अब उसे हाथ में लिया..बाप रे ये तो दुगुना लंबा और मोटा है..

मेरा ७.५ इंच लंबा और २.५ इंच मोटा लंड हाथ में लेने की कोशिश की..और कहा कितना सलोना है..और कितना तगड़ा है बहुत मोटा है ये..मेरी चूत फाड़ डालेगा..और झुक के मेरे लंड को चूमा और कहा मेरा इंतज़ार करो ऐसा बोल के दूध अपने साथ ले के वो बेडरूम में चली गयी...
 
तुझे संतुष्ट करना मुश्किल है cont.......................

मै अपने बेड पर आ के पाजामा खोल के सो गया..लंड को मै सहला रहा करीब २० मिनिट के बाद भाभी बेडरूम का दरवाजा खोल के मेरे रूम मे आई उसने आते ही मुझसे कहा संजय आज मेरी पूरी प्यास बुझा दो मेरी चूत को तुम्हारे मोटे लंड से तृप्त कर दो..मैंने भाभी को अपने बिस्तर पर मेरे ऊपर खीच लिया मै तो नंगा ही था, भाभी ने मेरे लंड को महसूस किया मै उन्हें चूमने लगा. उन्होंने फूस फुसते हुए कहा..इतना मोटा लंड मेरी चूत मे धीरे धीरे डालना संजू. मै उन्हें चूमते हुए उनका ब्लाउज खोलने लगा.अंडा ब्रा ऍ ?ही पहना था शायद रमेश से चुदवाते हुए वो पहले ही खोल चुकी थी..मैंने उनकी साड़ी भी खोल के नीचे फेंक दिया..अब सिर्फ़ पेटीकोट मे थी वो..कितनी गोरी थी..मै उन्हें चूमे जा रहा था और चुन्चिया मेरे हाथो मे थे..मस्त नरम मख्खन जैसी चुन्चिया थी..मैंने उनके पेट को सहलाते हुए नीचे चूत पर हाथ लगाया उफ़ लगा जैसे आग लगी है मैंने उनके चूची को आटा गूंथने जैसे मसला वो आह..ओह्ह.. कर रही थी लेकिन बहुत धीरे...फ़िर मैंने उनका पेटीकोट का नाडा खोल दिया और उसे नीचे खीच दिया..चड्डी भी नही थी..मैंने भाभी को मेरे बेड परलिटा दिया उफ़ क्या छोट थी पुस्तक मे कुंवारी लड़की की जैसी चूत थी ठीक वैसी ही चूत की दरार थी..मै तो पागल होने लगा..झुक कर चूत को चूमा..चूत गीली थी..मैंने दाने को ढूंढा उसे मसल दिया भाभी ऑफ़ कर उठी..फ़िर एक ऊँगली गीली चूत मे दाल दी..बहुत टाईट थी चूत..मेरी ऊँगली भी मुश्किल से जा रही थी..भाभी ने कहा अब मुझे पहले तुम्हारे लंड से च ोद दो.. .मैंने उन्हें और तडपाने के लिए अब मेरी जीभ चूत पर लगा दी और चूसने लगा अब भाभी बेचैन हो गई..अहह संजय..क्या कर रहे हो..आह्ह..इश..ओ माँ और जीभ चूत पर लगाने से उनकी चूत से और पानी निकलने लगा ..उन्होंने कहा पहले एक बार इस लंड को अन्दर दाल के चोद डालो..फ़िर बाद मे जो चाहे करना..मैंने कहा ठीक है..और मै उनके पैरों के बीच बैठ गया.मैंने देखा उनकी चूत का सूराख बहूत छोटा है..पास ही टेबल पर फेयर न लवली करें का नया ट्यूब था उसे मेरे लंड पर अच्छे से लगाया..और ऊँगली से भाभी के सूराख पर भी.., भाभी ने अपने पैर अच्छे से फैला दिए मैंने अपना लंड चूत पर रखा..भाभी ने तुरंत लंड हाथ मे पकड़ लिया और अपनी चूत पे रगड़ने लगी , थोड़ी देर के बाद मेरे लंड का सुपाडाअपने चूत के गुलाबी छेद पर रखा और फूसफुसाके बोली संजू ये इतना मोटा है तुम मेरी चूत का ख़्याल रखना..एकदम आहिस्ता आहिस्ता अन्दर डालो..मेरी चूत फाड़ मत देना...ये सुनकर मै और जोश म् ? आ गया..फ़िर भी मैंने लंड के सुपाड़े को अन्दर धकेला..और भाभी..उईई..माँ...कर के उछल पड़ी मैंने अब लंड को धीरे धीरे अन्दर घुसाने लगा लेकिन चूत बहुत टाईट थी..मैंने थोड़ा जोर लगाया और चुन्ची दबा के धक्का दिया आधा लंड अन्दर घुस गया और भाभी उछल पड़ी..मैंने देखा चूत से थोड़ा खून निकल आया..मै डर गया..मैंने पूंछा भाभी ज्यादा दर्द हो रहा है क्या.

भाभी ने कहा तुम फिकर मत करो अन्दर डालो पूरा..आह्ह मजा आ रहा है..लेकिन भाभी के चेहरे पर दर्द दिख रहा था..मैंने आधे घुसे लंड को अन्दर बाहर करना शुरू किया.थोड़ी देर में भाभी ने कहा और तेज ..और तेज.आह..और मै जोश में आ गया.मैंने लंड को बाहर खीचा और पुरी ताकत से अन्दर दाल दिया और इस बार भाभी जोर से चीखने जा रही थी लेकिन अपने ही हाथो को मुँह में डाला और काट लिया उनकी कलाई से खून निकल आया लेकिन वो अब कमर उछालने लगी थीं मुझे चिपक रही थीं..आह..ऊह्ह....संजू..मै आने वाली हूँ..और जोर से..और...और फ़िर उन्होंने दो टिन झटके मारे और मुझसे चिपक गई..उनका पूरा बदन कांप रहा था पसीना निकल आया था और मेरे लंड पर भी बहुत गरम गरम लगा..उनका पानी..उन्होंने मेरा चुम्मा लिया और कहा....आज मेरी चूत पहली बार झड़ी है जिंदगी में..अब तुम जैसे चाहो चोदो मुझे..मैंने कहा तुम्हारी चूत से खून भी निकला है..उन्होंने कहा ..सच्च...मैंने अपना लंड निकल कर दिखाया..जो की लाल हो रहा था..वो मुझसे और जोर से लिपटी और कहा आज ही मै सही मायने में औरत बनी हूँ.. भाभी ने जिस तरह से चूत को झटके दिए उससे मै तो घबरा गया था..मै उनसे कुछ पूछने जा रहा था उन्होंने मेरा मुह हाथ से बंद किया और मेरा लंड वापस चूत में डालने का इशारा किया इस बार मैंने लंड को एक झटके में अन्दर डाला..भाही ने फ़िर से कमर उछालना शुरू किया..शायद अभी पूरी झड़ी नही थी..मेरे लंड को चूत में कस लिया मै उनकी चूची चूसते हुए जोर से झटके मारने लगा“ भाभी ने कहा संजय..बहुत मज़ा आया रहा है..तुम सच में अच्छा चोदते हो..और तुम्हारा ये मजबूत लंड आः..अब मुझे भी मेरे लंड में से कुछ निकलेगा ऐसा महसूस हो रहा था..लंड और कड़क हो के फुल रहा था..

मैंने अब धक्को की स्पीड बड़ा दी मेरे धक्को से भाभी की चुचिया उछल रही थी..और ७-८ धक्को के बाद मैंने लंड को चूत की गहराई में पेल दिया और मेरे लंड से पिचकारियाँ निकलने लगी..एक निकली..दुसरी निकली..तीसरी..चौथी...और ऐसे क़रीब ७-८ मोटी धार की पिचकारी से भाभी की चूत पूरी भर गयी..मै उनके ऊपर ल???ट गया..

वो मेरे बालों में हाथ फेरने लगी..फ़िर हमने एक दुसरे के होठों को बहुत जोर से चूमा.. ,क़रीब ५ मिनिट के बाद भाभी ने कहा अब लंड को बाहर निकाल लो..मै उठा और लुंड जो अभी भी आधा खड़ा था..उसे बाहर निकाला..पक्क की एक आवाज़ हुयी..और भाभी की चूत से मेरा लावा और खून दोनों बह कर चादर पर गिरने लगे , मैंने देखा पहले जो चूत सिर्फ़ एक पतली दरार दिख रही थी अब वो अंग्रेज़ी के "ओ" जैसी दिखने लगी थी , मैंने सोचा भाभी को अब रमेश का लंड बहुत ही छोटा लगेगा.

भाभी ने उठाते हुए आह्ह की आवाज़ की..मैंने अहिस्ता पूंछा क्या हुआ..उन्होंने कहा चूत चरपरा रही है.. मैंने उनका हाथ पकड़ कर खड़ा किया .. उसके बाद हम दोनों बाथरूम में गए..भाभी और मै दोनों नंगे ही थे.. बाथरूम में भाभी चूत साफ करने बैठी तो मैंने देखा और भी बहुत सा माल उनकी चूत से निकला..उन्होंने कहा..कितना माल निकाला है..

रमेश का तो एक चम्मच ही गिरता है...ये तो क़रीब १० चम्मच है..फ़िर उन् होंने मेरे लंड को साबुन लगा के धोया..लंड फ़िर खड़ा होने लगा..मैंने कहा भाभी और एक बार...भाभी ने कहा..देखते है..फ़िर हम दोनों बेद पर आ कर लेट गए नंगे..और सो गए..

थोड़ी देर मैंने उनकी चूची मसली चुम्बन किया..उनकी चूत सह्लायी..भाभी भी मेरे लंड को सहला रही थी.. एक घंटे के बाद फिरसे मेरा लंड खड़ा हुआ अब मैंने भाभी को जगाने लगा.. वो जाग गई

थोड़ी देर चुम्बन के बाद मैंने भाभी से कहा..मेरा लंड चुसो न..उसने पहले मना किया फ़िर किस किया..मैंने भाभी को कहा चाटो..उन्होंने चाटना शुरू किया मैंने कहा सुपाडे को मुह में लो..,उसने कोशिश की..लेकिन पूरा नही ले पा रही थी....मैंने भाभी से कहा तुम अपनी चूत मेरे मुँह के ऊपर रखो..वो दोनों पैर फैला के मेरे मुह पर बैठ गई..मैंने उन्हें कहा मेरे लंड को झुक के मुँह में लो..उसने किया..और इस तरह चूत चटवाते हुए क़रीब १२-१३ मिनिट में वो उह.. आह्ह..और जोर से चाटो..जीभ मेरे अन्दर तक डाल दो..आह्ह..उनकी चूत से पानी निकल के मेरे गले और चहरे पर बहने लगा था..

मै उनकी कुंवारी गांड के छेद को ऊँगली से टटोल रहा था..और भाभी..आह्ह..मेरा होने वाला है..संजय..पूरी जीभ अन्दर डालो..और भाभी ने चूत मेरे मुँह पर दबा दी और झटके मारने लगी..इस बार उन्होंने अपने चूत के पानी से म???रा पूरा मुह भिगो दिया...और बदन ऐँठ कर शांत हो गई..

थोड़ा चूसने के बाद मैंने भाभी को चार पाया बनाया और पिछे से चूत में लंड डाला...इस बार क़रीब ३० मिनिट से ज्यादा मैंने भाभी को चोदा..वो बिस्तर पर पेट के बल लेट गई..लेकिन मै चोदता रहा..

इस दौरान भाभी और ३ बार झड़ी..फ़िर मै पीछे से ही भाभी की चूत में झड़ गया.. और उनके पीठ के ऊपर लेट गया और सामने हाथ डाल कर चूची दबाता रहा.

इस तरह आधा घंटा सोने के बाद हम लोग फ़िर नंगे ही बाथरूम में गए ..तब सुबह के चार बज रहे थे..बाथरूम में साफ होने के बाद वापस आके मैंने भाभी को नंगी ही पकड़ के .बहुत ...चूमा .. मम्मे दबाये..फ़िर वो अपने कपड़े पहन कर बेड रूम में रमेश के पास चली गई..

अब तो मै भाभी को बहुत चोदता हू हपते में तीन चार रात तो भाभी मेरे ही बिस्तर पर रात गुजारती है, और चुदाई का पूरा मज़ा लेती है.. शायद इस बार भाभी गर्भवती है कह रही थी मासिक नही हुआ अभी तक...ये बच्चा मेरा ही है..
 
देखने वाला बस देखता ही रह जाए

मुझे पहली बार सेक्स का अनुभव करने का मौका तब मिला जब मैं २१ वर्ष का था, आज मैं वह अनुभव आप सब से बाँटने जा रहा हूँ। इस समय मेरी उम्र २३ साल की है और मेरा शरीर तंदुरुस्त है और मेरी लम्बाई ५'९" है।

मैंने अपना कुँवारापन अपनी पड़ोस में रहने वाली भाभी के साथ खोया। उनकी सुन्दरता के बारे में क्या बताऊँ आप लोगों को ! फिगर ३५-३०-३६ की होगी। उनके मनमोहक शरीर को देखकर ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है। उनके साथ सेक्स करकने की तमन्ना दिल में कब से थी। उनकी उम्र ३० साल की होगी।

एक दिन ऐसा आया जब मुझे उनके बदन को चूमने का मौक़ा मिला। भैया एक बिज़नेसमैन हैं और वो सुबह ही निकल जाते हैं। उनके २ बच्चे भी स्कूल चले जाते हैं। सुबह जब वह कपड़े सुखाने आती है, तब मैं हमेशा उनकी चूचियों और पेट को देखा करता हूँ। उन्होंने कई बार शायद मुझे देखा भी है कि मैं उन्हें छुप कर उन्हें देखता हूँ, पर उन्होंने कभी किसी से कुछ कहा नहीं। उनके मम्मों को देख कर उनका दूध पीने की इच्छा जाग जाती है। तो दोस्तों आपको अधिक बोर नहीं करते हुए मैं आपको अपना अनुभव सुनाता हूँ।

एक दिन की बात है, मुझे शहर में किसी काम से बाहर जाना था। घर में माँ और पिताजी दोनों ही नहीं थे, और घर में हेलमेट भी नहीं था और कविता भाभी के घर में सिर्फ कविता भाभी ही थी। मुझे अचानक याद आया कि भाभी के घर हेलमेट हो सकता है। तो मैं घर पर ताला लगा कर भाभी के घर हेलमेट लेने चला गया। भाभी कपड़े धो रही थी। जब वह कपड़े धोते हुए उठी तो उनकी साड़ी एक ओर हटी हुई थी और मुझे उनकी दोनों चूचियाँ ब्लाऊज़ में से दिखाई दे रहे थे। मन हो रहा था कि दूध पी लूँ। मैं उन्हें टकटकी लगा कर देखता जा रहा था, भाभी ने भी यह ग़ौर किया और अपनी साड़ी ठीक करते हुए मुझसे काम पूछा।

मैंने बताया कि हेलमेट चाहिए। भाभी ने कहा कि हेलमेट तो कमरे के ऊपर स्टोर में रखा है, चढ़कर उतारना पड़ेगा। भाभी और मैं कमरे में आ गए। मैं एक कुर्सी लेकर आ गया। भाभी ने मुझसे पूछा,"तुम रोज़ मुझे छुप-छुप कर क्यों देखते हो?"

मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि आख़िर भाभी से क्या कहूँ,"आप बहुत सुन्दर हैं और आपका शरीर ऐसा है कि देखने वाला बस देखता ही रह जाए। भैया बहुत भाग्यशाली हैं जो उन्हें आप जैसी पत्नी मिलीं।"

भाभी ने एक शरारत भरी मुस्कान से मुझे देखा. मैंने उनसे कहा कि मैं उन्हें एक बार चूमना चाहता हूँ। उन्होंने थोड़ा झिझकते हुए हामी भर दी। मैंने उनके गालों पर चूम लिया और उसके साथ ही अपना एक हाथ उनकी कमर पर रख दिया और सहलाने लगा।

भाभी ने हँस कर कहा, "अब ठीक है, या कुछ और भी करना है?"

मन तो कर रहा था कि कह दूँ, पर हिम्मत नहीं हो रही थी। तो मैंने भी हँस कर कह दिया, "अनुमति मिल जाए तो सब कुछ कर दूँगा।"वह मुझे शैतान कह कर कुर्सी पर चढ़ गई। अब भाभी अपने दोनों हाथ ऊपर कर के हेलमेट तलाश कर रही थी। उसे इस अवस्था में खड़ा देखकर मेरा लंड भी खड़ा हो गया। मैं उनके मम्मों और पेट को ही देखे जा रहा था। पहली बार मैंने उन्हें इतने नज़दीक से देखा था। अब मेरा नियंत्रण छूट रहा था। तभी भाभी ने मुझसे कहा कि कुर्सी हिल रही है, मुझे आकर पकड़ लो, नहीं तो मैं गिर जाऊँगी।

अब क्या था, मैंने भाभी की गाँड के नीचे से इस तरह पकड़ा कि मेरा चेहरा उनके पेट के सामने रहे। मेरे और उसके पेट के बीच कुछ ही सेन्टीमीटर का फ़ासला था। अब मेरा नियंत्रण छूट गया और मैंने भाभी के पेट पर चूम लिया।

भाभी सहम गई पर कुछ कहा नहीं। इससे मेरी हिम्मत और बढ़ी और मैंने उसके पेट पर किस करना शुरु कर दिया। मैं उन्हें पेट पर चूम रहा था और उनकी नाभि को खा रहा था। अब वो मेरा सिर पकड़ कर अपने पेट से चिपकाने लगी और लम्बी-लम्बी साँसों के साथ हल्की सिसकियाँ लेने लगी।

उन्हें भी बड़ा मज़ा आ रहा था। १५ मिनटों तक उनके पेट को खाने के बाद वह कुर्सी पर बैट गई और मुझसे लिपट गई। अब मुझे हरी झंडी मिल गई थी। मैंने उसे उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया। मैंने अपने कपड़े उतार दिए और उसकी साड़ी भी। वह सच में कितनी सेक्सी लग रही थी - काम की देवी। मैं उसके होंठों को चूसने लगा। वो भी प्रत्युत्तर देने लगी। फिर मैं धीरे-धीरे उसके गले से होते हुए उसकी चूचियों तक पहुँचा।

उसकी चूचियों को चूसता और दबारा रहा और वह सिसकियाँ निकालती रही। अब मैंने उसकी ब्लाउज़ उतार दी और पेटीकोट में घुस कर उसकी चूत को पैन्टी के ऊपर से ही सहलाने लगा। अब मैंने उसे पूरा नंगा कर दिया। उसकी चूत में अपनी ऊँगलियाँ प्रविष्ट कर दीं और लगभग १५ मिनट तक उसे उँगली से ही चोदा। उसकी चूत को खूब चाटा।

वह उउम्म्म्म्म.... आहहहहहहह ओओओह्ह्ह्हहहह, और चाटो! की आवाज़ निकाल रही थी। उसका पानी एक बार निकल गया। मैंने वो पूरा पी लिया। अब उसे भी मेरा लंड चूसने था। मेरा लंड साढ़े छः इंच का है। हम 69 की मुद्रा में आ गए। मैं उसकी चूत खा रहा था और वह मेरा लंड। इसी तरह २० मिनट के बाद वो मुझसे कहने लगी कि और मत तड़पाओ, मुझे जल्दी से चोट दो।

मैंने अपने लंड का सिरा उसकी चूत पर रखा, उसके पाँवों को पैला दिया और ज़ोर के धक्के के साथ लौड़ा अन्दर पेल दिया। वह चिल्लाई और तड़पने लगी। कहने लगी कि धीरे-धीरे करो, दर्द हो रहा है।

पर मैं कहाँ रुकने वाला था, मैं उसे चोदता चला गया। थोड़ी देर के बाद वह भी मस्त हो गई और गाँड हिला-हिला कर साथ देने लगी। उसके मुँह से ओओहहहह... आआआआहहहह... और ज़ोर से... हाएएएएए.... म्म्म्म्महह्हहहहह... आआआआआहहहहह की आवाज़ें निकलना रुक ही नहीं रहीं थीं। और अब मैं उसकी एक चूची को मसल रहा था और दूसरे को चूस रहा था। उसकी घुँडियों को काट रहा था। उसे चोदने के बाद मैं उसकी चूत में ही बह गया और मैं उसके ऊपर लेट गया।

वह मुझसे खुश थी। उस दिन के बाद जब भी मुझे मौक़ा मिलता है, मैं जाकर उसका दूध ज़रूर पीता हूँ और उसे चोदता भी हूँ।
 
भाभी गरम हो गयी

मेरा एक बचपन का दोस्त है। हम दोनों एक साथ बड़े हुए और उसकी शादी हो गई। शादी के कुछ दिनों बाद वो हमेशा अपनी बीवी की चुदाई कैसे करता है, बताता रहता था। जिसे सुनकर मेरा मन भी चुदाई करने को करता था और मैं सोचता था कि वो कैसे भाभी को चोदता होगा और भाभी कैसे चुदवाती होगी।

एक दिन मैंने उसे कहा- यार ! मेर मन चुदाई के लिए करता है और मेरे पास कोई जुगाड़ भी नहीं है। उसने कुछ नहीं कहा, लेकिन अगले दिन उसने मुझे कहा कि मैं उसकी बीवी को चोदना चाहूं तो चोद सकता हूं, उसे कोई परेशानी नहीं। मैंने कहा कि भाभी क्या चुदाई के लिए मान गई

तो उसने कहा- नहीं, लेकिन मान जाएगी क्योंकि उसे ग्रुप सेक्स की कहानियाँ सुनने में अच्छी लगती हैं और मैं उसे तुम्हारे बारे में कुछ नहीं बताऊंगा। आज रात को जब मैं उसे ग्रुप सेक्स की कहानी सुना कर उसकी आंखों पर पट्टी बांध कर चोदूंगा, तभी तुम भी चोद लेना। बाद में उसे बताएंगे कि तुमने भी उसकी चुदाई की है।

रात को मैं उसके कमरे में छुप गया। फ़िर भाभी आई और बोली कि तुम्हारा दोस्त गया क्या?

तो वो बोला- हाँ ! गया।

तो भाभी ने दरवाज़ा बंद कर लिया और बोली- कोई सेक्सी नग्न फ़िल्म दिखाओ ना !

मेरे दोस्त ने XXX फ़िल्म लगा दी। भाभी फ़िल्म देखते देखते गरम हो गयी और मेरे दोस्त के कपड़े उतारने लगी। फ़िर अपने कपड़े भी उतार दिए। मैं तो भाभी का जवानी से भरा बदन देख कर पागल हो गया- क्या फ़ीगर थी उनकी ३६-२६-३४ उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, उनकी इतनी खूबसूरत चूत छूने के लिए मेरा मन मचलने लगा। मेरे दोस्त ने भाभी की आंखों पर पट्टी बांध कर मुझे पास आने के लिए इशारा किया और भाभी के बदन से लिपट गया। सामने भाभी को नंगी देख कर मेरे लंड में तूफान आ गया।

फिर मेरा दोस्त भाभी की चूत घोड़ी बना कर लेने लगा थोड़ी देर में उसने अपना लंड निकाल लिया और मुझे इशारा किया कि मैं लंड डाल दूँ। मैंने तुंरत ही अपना लंड भाभी की चिकनी चूत में डाल दिया।

लंड जाते ही भाभी बोली- अचानक तुम्हारा लंड इतना मोटा क्यों लग रहा है? तो मेरे दोस्त ने उसकी आंखों पर से पट्टी खोल दी तो भाभी ने पलट कर मुझे देखा तो मुस्कराई और कहा कि मुझे अच्छा लग रहा है मैं भी यही चाहती थी कि मेरी चुदाई दो दो लंड से हो, मुझे आज खूब जोर जोर से चोदो।

फिर क्या था मैं तो भाभी को खूब मस्ती में चोदने लगा और भाभी आहें भरने लगी। मैं कभी भाभी की कमर पकड़ता तो कभी चूची। फिर थोड़ी देर बाद मैंने लंड निकल लिया और भाभी को लेटा दिया और कहा कि तुम बहुत सेक्सी लग रही हो और भाभी की चूत को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा भाभी सिसकने लगी और मैं चूत को अपने होटों से जोर जोर से चूमने लगा। भाभी एक दम तड़पने लगी और कहा कि मेरी प्यासी चूत में अपना मोटा लंड डाल कर इसकी प्यास बुझा दो।

फिर मैंने भाभी के उप्पर चढ़ कर चूत में लंड डाल दिया और चूची मुंह में लेकर स्वर्ग का मजा लेने लगा उस समय मेरे दोस्त ने भाभी से कहा कि मैं तो पहले ही जानता था कि तुम चुदवा लोगी क्योकि ग्रुप सेक्स की कहानी सुन कर तुम बहुत जोशीली हो जाती थी। आज तुम्हें चुदते हुऐ देखने में बड़ा मज़ा आ रहा है, लेकिन तुम दोनों मेरे सामने ही चुदाई करना ! नहीं तो लोगों को शक हो सकता है।

तो भाभी ने कहा कि अगर किसी को न पता लगे तो हर औरत चुदवाना चाहती है और यहाँ तो आप मुझे चुदवा रहें हैं, अब तो मैं हर रात आप दोनों से चुदवाना चाहती हूँ।

फिर रात भर मैंने और मेरे दोस्त ने मिल कर भाभी को खूब चोदा उसके पूरे बदन को खूब प्यार किया फिर हर दो तीन दिन में हम तीनो साथ साथ चुदाई करने लगे। फिर एक दिन मेरे दोस्त की बदली पुणे हो गई और हम लोग अलग हो गए। आज कल मेरा मन चुदाई के लिए तड़पता है दिल करता है कि भाभी वापस आ जाए लेकिन ये हो नहीं सकता।
 
मन मुराद पूरी हो गई

भाभी मुझसे लगभग बारह साल बड़ी थी। मैं उस समय कोई १८-१९ साल का था। घर पर सभी मुझे बाबू कह कर बुलाते थे। भाभी की तेज नजरें मुझ पर थी। वो मेरे आगे कुछ ना कुछ ऐसा करती थी कि मेरा लण्ड खड़ा हो जाता था। वो शरीर में भरी पूरी थी और बदन गदराया हुआ था। उनके सुडौल स्तन बहुत ही मनमोहक थे और थोड़े भारी थे। मुझे भाभी के बोबे और मटके जैसे चूतड़ बहुत अच्छे लगते थे। मेरी कमजोरी भी यही थी कि जरा से भाभी की चूंचिया हिली या चुतड़ लचके, बस मैं उत्तेजित हो जाता था और लण्ड को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता था। भाभी को भी ये बात शायद मालूम हो गई थी कि उनके कोई भी एक्शन से मेरा बुरा हाल हो जाता था।

आज भी कमरे में सफ़ाई कर रही थी वो। उसके झुकते ही उसके बोबे झूल जाते थे, और मैं उन्हें देखने में मगन हो जाता था। वो जान कर कर के उन्हें और हिलाती थी। मुझे वो तिरछी नजरो से देख कर मुस्कराती थी, कि आज तीर लगा कि नहीं। वो अपने गोल मटोल चूतड़ मेरी तरफ़ करके हिलाती थी और मुझे अन्दर तक हिला देती थी। आज घर पर कोई नहीं था, सो मेरी हिम्मत बढ़ गई। सोचा कि अगर भाभी नाराज हुई तो तुरंत सॉरी कह दूगा। मैं कम्प्यूटर पर बैठा हुआ कुछ देर तक तो उनकी गोल गोल गाण्ड देखता रहा। बस ऐसा लग रहा था कि उनका पेटीकोट उठा कर बस लण्ड गाण्ड में घुसा दूँ। बस मन डोल गया और मैंने आखिर हिम्मत कर ही दी।

"बाबू, क्या देख रहे हो ?"

"भाभी, बस यूँ ही.... आप अच्छी लगती हैं !"

वो मेरे पास आ गई और सफ़ाई के लिये मुझे हटाया। मैं खड़ा हो गया। अचानक ही मेरे में उबाल आ गया और मैं भाभी की पीठ से चिपक गया और लण्ड चूतड़ों पर गड़ा दिया। भाभी ने भी जान कर करके अपने चूतड़ मेरे लण्ड से भिड़ा दिया। पर उनके नखरे मेरी जान निकाल रहे थे।

"बाबू, हाय ! क्या कर रहा है !"

"भाभी अब नहीं रहा जा रहा है" भाभी ने अपनी गाण्ड में लण्ड घुसता मह्सूस किया और लगा कि उसकी इच्छा पूरी हो रही है। वो पलटी और और मुझे अपनी बाहों में कस लिया और अपनी भारी चूंचियाँ मेरे शरीर से रगड़ दी।

"हाय, पहले क्यूँ नहीं किया ये सब?" और मुझे बेतहाशा चूमने लगी। मुझे भी साफ़ रास्ता मिल गया। मेरी हिम्मत ने काम बना दिया।

"आप इशारा तो करती, मेरा तो लण्ड आपको देखते ही फ़ड़क उठता था, लगता था कि आपको नंगी कर डालू, लण्ड घुसा कर अपना पानी निकाल दूँ !"

"कर डाल ना नंगी, मेरे दिल की निकाल दे, मुझे भी अपने नया ताजा लण्ड का स्वाद चखा दे रे !" भाभी का बदन चुदने के लिये बेताब हो उठा था।

"भाभी, तुम कितनी मस्त लग रही हो, अब चुदा लो ना, मेरा लण्ड देखो, निकालो तो सही बाहर, मसल डालो भाभी, घुसा डालो अपनी चूत में !" मेरा लण्ड तन्ना उठा था।

"बस बिस्तर पर आजा और चढ़ जा मेरे ऊपर, मुझे स्वर्ग में पहुंचा दे, बाबू चोद दे मुझे.... " भाभी चुदने के लिये मचल उठी।

भाभी मुझसे ज्यादा ताकतवर थी। मुझे खींच कर मेरे बिस्तर पर लेट गई।

"पेटीकोट ऊपर कर दे, चाट ले मेरी चूत को !" हा बाबू.... जल्दी कर, फिर चूत की बारी भी आनी चाहिये ना !" भाभी की भी तड़प देखते ही बनती थी, कितनी बेताब थी चुदाने को।

मैंने अपने लण्ड पर चिकनाई लगाई और उसकी गाण्ड पर भी लगा दी और चिकना लण्ड का मिलाप चिकने छेद से हो गया। मैंने उसके झूलते हुए स्तन थाम लिये, और उन्हें मसलना शुरू कर दिया। फिर दोनों ने अपना अपना जोर लगाया और भाभी के मुख से हाय की सिसकारी निकल पड़ी। चिकना लण्ड था इसलिये अन्दर सरकता चला गया।

"हाय रे मजा आ गया, तेरा मोटा है उनसे .... चल और लगा !"

"दर्द नहीं हुआ भाभी.... "

"नहीं मेरी गाण्ड सुन्दर है न, वो भी अक्सर पेल देते हैं, आदत है मुझे गाण्ड मरवाने की !"

"तो ये लो फिर.... मस्त चुदो !" मैंने स्पीड बढ़ा दी, उसकी गाण्ड सच में नरम थी और मजा आ रहा था। भाभी ने भी अपनी मस्त गाण्ड आगे पीछे घुमानी शुरू कर दी। उसके गोल-गोल चूतड़ो के उभार चमक रहे थे। उसकी दरारें गजब ढा रही थी। लटके हुए बोबे मेरे हाथ में मचल रहे थे। उसके निपल काले और बड़े थे, बहुत कड़े हो रहे थे। निपल खींचते ही उसे और मजा आता था और सिसक उठती थी।

"हाय रे भाभी , रोज़ चुदा लिया करो, क्या मस्ती आती है !" मेरे झटके बढ़ चले थे।

"तेरे लण्ड में भी जोर है, जो अभी तक छूटा नहीं, चोदे जा.... मस्ती से.... मुझे भी लगे कि मैं आज चुद गई हूं !" भाभी मस्त हो उठी। भाभी के मुख से सीत्कारें निकल रही थी।

"मस्त गाण्ड है भाभी, रोज गाण्ड देख कर मुठ मारता था, आज तो बस.... गाण्ड मार ही दी !"

"मन की कर ली ना, बस.... अब बस कर.... कल चोद लेना.... मेरी चूत पेल दे अब !" भाभी ने पीछे मुड़ कर नशीली आंखो से देखा।

मैंने अपना लण्ड ग़ाण्ड से निकाला और पहले उसकी गीली चूत को तौलिये से पोंछ डाला, उसे सुखा कर लण्ड को चूत में दबा दिया। सूखी चूत में रगड़ता हुआ लण्ड भीतर बैठ गया।

"अरे वाह्.... मजा आ गया, कैसा फ़ंसता हुआ गया है !" भाभी हाय कह कर सिसक उठी।

मुझे उनकी चूत में घुसा कर मजा आ गया। मैंने उसकी कमर पकड़ कर लण्ड का पूरा जोर लगा दिया। मुझे फिर भी चूत ढीली लगी। मेरे धक्के ऐसा लग रहा था कि किसी नरम से स्पंज से टकरा रहे हैं।

"हाँ भाभी, चूत तो कितनी नरम है, गरम है, आनन्द आ गया !"

उसने अपनी चूत और बाहर निकाल ली और चेहरा तकिये से लगा लिया। पर मुझे कुछ ठीक नहीं लगा। मैंने उसे धक्का दे कर चित्त लेटा लिया और उनकी टांगें अपने कन्धों पर रख ली और चूत के निकट बैठ कर लण्ड चूत में डाल दिया। भाभी ने मुझे पूरा अपने ऊपर खींच लिया और अपनी टांगो के बीच में भींच लिया। मैं उनके बोबे पकड़ते हुए उस पर लेट गया। लण्ड चूत की गहराइयों को बींधता चला गया। उसे शायद पता चल गया था कि उसकी चूत टाईट नहीं है, सो उसने अपनी चूत क कसाव बढ़ा दिया और चूत सिकोड़ ली। मेरी कमर अब जोर से चल पड़ी। चूत कसने से पहले तो वो दर्द से कुलबुलाई, फिर सहज हो गई"जड़ तक चला गया, साला, तेरा सच में थोड़ा बड़ा है, मजा बहुत आ रहा है !"

उसकी कमर भी अब हौले हौले चलने लगी, मेरा पूरा लण्ड खाने लगी। दोनों की कमर साथ साथ चलने लगी। मैं भी उनकी लय में लय मिलाने लगा। लण्ड में एक सुहानी सी मीठी सी मस्ती चलने लगी। कुछ देर के बाद कमर की लय तोड़ते हुए भाभी ने मुझे दबा कर नीचे कर दिया और खुद मेरे ऊपर चढ़ गई और तेजी से धक्के मारने लगी और उसके मुँह से तेज सीत्कारें निकलने लगी।

"साले बाबू.... मर गई, तेरी तो.... भेन चोद .... मैं गई.... आईईईइ ओह्ह्ह्ह्ह। .... बाबूऽऽऽ.... मर गई.... !" कहते हुए वो मेरे से चिपक गई। और चूत का जोर मेरे लण्ड पर लगाने लगी। बार बार चूत दबा रही थी। अचानक उसकी चूत टाईट हो गई और मैं तड़प गया और मेरा वीर्य निकल पडा। और वो निढाल हो कर मुझे पर पसर गई। मैं नीचे से जोर लगा कर उसकी चूत में वीर्य निकाल रहा था। वो भी चूत को हल्का हल्का कस कर पानी निकाल रही थी। मेरे लण्ड पर उसका कसाव और छोड़ना महसूस हो रहा था। कुछ ही देर में हम अलग अलग पड़े हुए गहरी सांसे भर रहे थे।

“भाभी, आप तो मस्त है, कैसी बढ़िया चुदाई करती हैं, मेरी तो माँ चोद दी आपने !”

भाभी ने तुरन्त मेरे मुँह पर अंगुली रख दी, “नहीं गाली नही, मस्ती लो पर गाली मत देना भेन चोद !” भाभी ने मुझे फिर से एक बार और दबा लिया, और हंस पड़ी।

“चल हो जाये एक दौर और .... अब तू मेरी माँ चोद दे, भेन के लौड़े.... !” और उसकी चूत का दबाव मेरे लण्ड पर बढने लगा। जिस्म फिर से पिघलने लगे .... भाभी का मस्त बदन एक बार फिर वासना से भर उठा था.
 
मेरे प्रिय भ्राताश्री,

सादर प्रणाम।

आपको यह जान कर अति हर्ष होगा कि यहाँ सब कुशल-मंगल है, आप पिछले दो वर्षों से विदेश में हैं। यहाँ पर सब आपको सब बहुत याद करते हैं।

आगे समाचार यह है कि आप जब विदेश गए थे तो भाभी आपको बहुत याद करके परेशान होती थी पर आप बेफिक्र रहिये, हमने उनका अच्छे से ख़याल रखा है।

आपके जाने के बाद मुझे पता था कि भाभी बहुत परेशान होंगी तो मैं उनके पास अक्सर जाकर उन्हें समझा बुझा आता था।

पर वो हमेशा कहती- चुन्नू, तू नहीं समझता कि कितना मुश्किल है उनके बिना रहना।

फिर एक दिन मैं उनके कमरे के पास गया तो मैंने उनके कमरे से अजीब-अजीब सी आवाजें सुनी। मैंने खिड़की से झांक कर देखा कि वे बिस्तर पर लेटी हुई हैं और टाँगे फैलाकर अपनी चूत रगड़ रही हैं और मजे ले रही हैं।

मैं समझ गया कि वे आपको बहुत मिस कर रही हैं। मुझसे उनकी वो तड़प नहीं देखी जा रही थी। पर मुझे समझ नहीं आया कि मैं उनकी मदद कैसे करूँ।

फिर एक दिन मैंने उनसे पूछ ही लिया- क्या आप भैया को बहुत मिस करती हैं?

वो बोली- हाँ !

मैं बोला- मैं क्या आपकी कोई मदद कर सकता हूँ?

वो मेरी बात का मतलब नहीं समझी और बोली- तू क्या मदद करेगा?

मैं बोला- मैं कुछ तो भैया की जगह ले सकता हूँ !

वह तब भी मेरा मतलब नहीं समझी और बोली- नहीं रे ! तू क्या मदद करेगा।

मैं अपना सा मुँह लेकर चला आया।

अगले दिन मैंने फिर जब भाभी को चूत रगड़ते देखा तब मैंने प्रण किया कि मैं भाभी को ऐसे नहीं तड़पने दूंगा।

मैंने फिर उनसे पूछा- मैं आपकी कुछ मदद करूँ भैया को भुलाने में?

वह फिर भी हंसने लगी- तू क्या मदद करना चाहता है?

मैंने कहा- अगर आप चाहें तो मैं आपकी सब जरूरतें पूरी कर सकता हूँ।

अब वह समझ गई कि मैं क्या बात कर रहा हूँ। उन्होंने मुझे गुस्सा होकर डांटना शुरू कर दिया कि मैंने ऐसी बात सोची भी कैसे।

फिर मैंने उन्हें बताया कि मैं आपको रोज़ अपने आप को संतुष्ट करते हुए देखता हूँ।

वो यह सुनकर अचानक शर्म से लाल हो गई, बोली- तूने क्या क्या देखा ?

तो मैंने उन्हें सब बता दिया।

वो बोली- तू किसी को बताना नहीं।

मैंने कहा- नहीं मैं किसी को नहीं बताऊंगा पर मुझसे आपकी तड़प देखी नहीं जाती। यदि आपको कोई आपत्ति न हो तो मैं आपको संतुष्ट कर सकता हूँ।

वो बोली- पर चुन्नू यह ठीक नहीं है।

मैंने कहा- आप घबराईये नहीं ! घर की बात घर में ही रहेगी।

यह कह कर मैं भाभी के पास बैठ गया। पर मुझे समझ नहीं आया कि मैं क्या करूँ।

भाभी मुस्कुराकर बोली- क्या हुआ? शरमा रहा है?

मैंने कहा- हाँ, कुछ भी हो, आप मेरी भाभी हैं।

वो बोली- फिर तो तू कुछ नहीं कर पायेगा, तू बस यह सोच कि मैं एक औरत हूँ और तू एक मर्द है और तुझे मेरी प्यास बुझानी है।

यह कह कर भाभी ने अपना साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया और अपने मम्मों के मुझे दर्शन कराये।

मेरा लंड खड़ा हो गया। मैं उन चूचियों पर अपने हाथ रखकर उन्हें दबाने लगा। भाभी धीरे-धीरे कराहने लगी।

उनका हाथ सीधा मेरे लंड पर आकर रुका। वो मेरे लंड को धीरे-धीरे सहलाने लगी। मेरा लंड मेरी पैंट फाड़कर बाहर निकलने के लिये उतावला होने लगा। मैंने उनके ब्लाउज के बटन खोल दिए।

उन्होंने हाथ पीछे ले जा कर अपनी ब्रा के हुक खोल दिए ओर एक झटके में ब्लाउज और ब्रा दोनों उतार दिए और अपने सुडौल ओर तने हुए मम्मे मेरे सामने नंगे कर दिए।

वो फिर पीछे होकर बिस्तर पर आँख बंद करके लेट गई, मैं उनके बगल में लेट गया और उनकी चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा, दूसरे हाथ से दूसरे मम्मे को दबाने लगा।

भाभी के मुँह से आह निकालने लगी। वो बोली- चुन्नू, आज रुक मत ! अपनी भाभी को खुश कर दे।

मैं और ज़ोर ज़ोर से उनकी चूची को चूसने लगा।

उसी दौरान उन्होंने अपने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और उसे नीचे कर दिया। मैंने नीचे जाकर उनका पेटीकोट उतार दिया ओर उनकी जाँघों को चूमने लगा।

और फिर मैंने उनकी पैंटी के ऊपर से उनकी चूत को चूमा, उनकी आह निकल गई। मैंने फिर उनकी पैंटी को नीचे खींचकर उतार दिया और भाभी को पूरा नंगा कर दिया।

फिर उनकी जांघे फैलाकर मैं उनकी चूत चाटने लगा। वो जोर जोर से कराहने लगी और बोली- चुन्नू शाबाश ! मैं बहुत दिनों से इसी के लिए तड़प रही थी। तू तो अपने भैया से भी अच्छी चाटता है।

अब तू रुकना मत ! आज तुझे अपनी भाभी की प्यास पूरी तरह बुझानी है।

थोड़ी देर में उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया। उसके बाद भाभी मेरे ऊपर आ गई ओर मेरे कपड़े उतारने लगी।

मुझे पूरी तरह नंगा करके उन्होंने मेरा लंड जो अब पूरी तरह खड़ा हो गया था अपने हाथ में ले लिया और उसे चूसने लगी। मेरे अन्दर सिरहन सी दौड़ गई।

ऐसा आनंद मुझे ज़िन्दगी में कभी नहीं मिला था जैसा भाभी से अपना लंड चुसवाकर मिल रहा था। भाभी फिर घूमकर अपनी चूत मेरे मुँह के ऊपर ले आई और मैं उनकी चूत चाटने लगा।

इस तरह काफी देर तक वो मेरा लंड चूसती रही और मैं उनकी चूत चाटता रहा।

उसके बाद वो बोली- बस अब और नहीं रहा जाता तू! अब अपनी भाभी को चोद कर खुश कर दे।

मैं यह सुनते ही भाभी के ऊपर चढ़ गया, उनकी टाँगें फैलाई और चूत पर अपने लंड को रगड़ने लगा।

वो बोली- बहनचोद, जल्दी से अन्दर डाल ! कब तक तड़पाएगा अपनी भाभी को?

मैंने कहा- भोंसड़ी वाली रंडी ! साली ! शर्म नहीं आ रही ? अपने देवर से चुदवा रही है?

वो बोली- तू मुझे पागल मत कर ! और मत तड़पा !

मैंने एक झटके में अपना लंड भाभी की चूत में घुसेड़ दिया।

उनकी चीख निकल गई, बोली- बहन के लौड़े ! मेरी जान निकालेगा क्या?

मैंने कुछ नहीं बोला और दबा कर जोर जोर से भाभी को चोदने लगा।

मैंने अपने जीवन में इतना आनंद कभी नहीं पाया था जितना उस दिन भाभी ने दिया। पर मुझे संतुष्टि थी कि भाभी की ज़रुरत को मैंने पूरा किया।

भैया आप चिंता न करें हमने उसके बाद से उनकी हर ज़रूरत का ख्याल रखा है।

बाकी सब कुशल मंगल है।

आपका कनिष्ठ भ्राता

चुन्नू

पर उस दिन हम एक गलती कर गए थे कि हमने कमरे का दरवाज़ा बंद नहीं किया था तो हमें किसी ने देख लिया। किसने देखा और फिर क्या हुआ, यह मैं आपको अपने अगले पत्र में बताऊंगा।
 
समझदार बहू-1



वैसे तो यह आम सी बात है और बहुतों की जिंदगी आपसी समझ की कमी से कुछ इसी तरह की हो जाती है और अलगाव बढ़ जाता है। पर फिर जिंदगी में कोई आ जाता है तो दुनिया महक उठती है रंगीन हो जाती है।

मेरी उमर अब लगभग 46 वर्ष की हो चुकी है। मैं अपना एक छोटा सा बिजनेस चलाता हूँ। 20 साल की उम्र में शादी के बाद मेरी जिंदगी बहुत खूबसूरत रही थी, ऐसा लगता था कि जैसे यह रोमान्स भरी जिंदगी यूं ही चलती रहेगी। उन दिनों जब देखो तब हम दोनों खूब चुदाई करते थे। मेरी पत्नी सुमन बहुत ही सेक्सी युवती थी। फिर समय आया कि मैं एक लड़के का बाप बना। उसके लगभग एक साल बीत जाने के बाद सुमन ने फिर से कॉलेज जॉयन करने की सोच ली। वो ग्रेजुएट होना चाहती थी। नये सेशन में जुलाई से उसने एडमिशन ले लिया... फिर चला एक खालीपन का दौर... सुमन कॉलेज जाती और आकर बस बच्चे में खो जाती। मुझे कभी चोदने की इच्छा होती तो वो बहाना कर के टाल देती थी। एक बार तो मैंने वासना में आकर उसे खींच कर बाहों में भर लिया... नतीजा ... गालियाँ और चिड़चिड़ापन।

मुझे कुछ भी समझ में नहीं आता था कि हम दोनों में ऐसा क्या हो गया है कि छूना तक उसे बुरा लगने लगा था। इस तरह सालों बीत गये।

उसकी इच्छा के बिना मैं सुमन को छूता भी नहीं था, उसके गुस्से से मुझे डर लगता था। मेरा लड़का भी 21 वर्ष का हो गया और उसने अपने लिये बहुत ही सुन्दर सी लड़की भी चुन ली। उसका नाम कोमल था। बी कॉम करने के बाद उसने मेरे बिजनेस में हाथ बंटाना चालू कर दिया था। मेरी पत्नी के व्यवहार से दुखी हो कर मेरे लड़के विजय ने अपना अलग घर ले लिया था। घर में अधिक अलगाव

होने से अब मैं और मेरी पत्नी अलग अलग कमरे में सोते थे। एकदम अकेलापन ...

सुमन एक प्राईवेट स्कूल में नौकरी करने लगी थी। उसकी अपनी सहेलियाँ और दोस्त बन गये थे। तब से उसके एक स्कूल के टीचर के साथ उसकी अफ़वाहें उड़ने लगी थी... मैंने भी उन्हें होटल में, सिनेमा में, गार्डन में कितनी ही बार देखा था। पर मजबूर था... कुछ नहीं कह सकता था। मेरे बेटे की पत्नी कोमल दिन को अक्सर मुझसे बात करने मेरे पास आ जाती थी। मेरा मन इन दिनों भटकने लगा था। मैं दिनभर या तो देसी मासला लैव पर सेक्सी कहानियाँ पढ़ता रहता था या फिर पोर्न साईट पर चुदाई के वीडियो देखता रहता था। फिर मुठ मार कर सन्तोष कर लेता था। कोमल ही एक स्त्री के रूप में मेरे सामने थी, वही धीरे धीरे मेरे मन में छाने लगी थी। उसे देख कर मैं अपनी काम भावनायें बुनने लगता था। इस बात से कोसों दूर कि कि वो मेरे घर की बहू है। कोमल को देख कर मुझे लगता था कि काश यह मुझे मिल जाती और मैं उसे खूब चोदता ... पर फिर मुझे लगता कि यह पाप है... पर क्या करता... पुरुष मन था... और स्त्री के नाम पर कोमल ही थी जो कि मेरे पास थी।

एक दिन कोमल ने मुझे कुछ खास बात बताई। उससे दो चीज़ें खुल कर सामने आ गई। एक तो मेरी पत्नी का राज खुल गया और दूसरे कोमल खुद ही चुदने तैयार हो गई।

कोमल के बताये अनुसार मैंने रात को एक बजे सुमन को उसके कमरे में खिड़की से झांक कर देखा तो... सब कुछ समझ में आ गया... वो अपना कमरा क्यों बंद रखती थी, यह राज़ भी खुल गया। एक व्यक्ति उसे घोड़ी बना कर चोद रहा था। सुमन वासना में बेसुध थी और अपने चूतड़ हिला हिला कर उसका पूरा लण्ड ले रही थी। उस व्यक्ति को मैं पहचान गया वो उसके कॉलेज टाईम का दोस्त था और उसी के स्कूल में टीचर था।

मैंने यह बात कोमल को बताई तो उसने कहा- मैंने कहा था ना, मां जी का सुरेश के साथ चक्कर है और रात को वो अक्सर घर पर आता है।

"हाँ कोमल... आज रात को तू यहीं रह जा और देखना... तेरी सासू मां क्या करती है।"

"जी , मैं विजय को बोल कर रात को आ जाऊंगी..."

शाम को ही कोमल घर आ गई, साथ में अपना नाईट सूट भी ले आई... उसका नाईट सूट क्या था कि बस... छोटे से टॉप में उसके स्तन उसमे आधे बाहर छलक पड़ रहे थे। उसका पजामा नीचे उसके चूतड़ों की दरार तक के दर्शन करा रहा था। पर वो सब उसके लिये सामान्य था। उसे देख कर तो मेरा लौड़ा कुलांचे भरने लगा था। मैं कब तक अपने लण्ड को छुपाता। कोमल की तेज नजरों से मेरा लण्ड बच ना पाया।

वो मुस्करा उठी। कोमल ने मेरी वासना को और बाहर निकाला- पापा... मम्मी से दूर रहते हुए कितना समय हो गया... ?

"बेटी, यही करीब 16-17 साल हो चुके हैं !"

"क्या ?? इतना समय... साथ भी नहीं सोये...??"

"साथ सोये ? हाथ भी नहीं लगाया...!"

"तभी... !"

"क्या तभी...?" मैंने आश्चर्य से पूछा।

"पापा... कभी कोई इच्छा नहीं होती है क्या?"

"होती तो है... पर क्या कर सकता हूँ... सुमन तो छूने पर ही गन्दी गालिया देती है।"

"तू नहीं और सही...। पापा प्यार की मारी औरतें तो बहुत हैं..."

"चल छोड़ !!! अब आराम कर ले... अभी तो उसे आने में एक घण्टा है...चल लाईट बंद कर दे !"

"एक बात कहूँ पापा, आपका बेटा तो मुझे घास ही नहीं डालता है... वो भी मेरे साथ ऐसे ही करता है !" कोमल ने दुखी मन से कहा।

"क्या तो ... तू भी... ऐसे ही...?"

"हाँ पापा... मेरे मन में भी तो इच्छा होती है ना !"

"देखो तुम भी दुखी, मैं भी दुखी..." मैंने उसके मन की बात समझ ली... उसे भी चुदाई चाहिये थी... पर किससे चुदाती... बदनाम हो जाती... कहीं ???... कहीं इसे मुझसे चुदना तो नहीं है... नहीं... नहीं... मैं तो इसका बाप की तरह हूँ... छी:... पर मन के किसी कोने में एक हूक उठ रही थी कि इसे चुदना ही है।

कोमल ने बत्ती बन्द कर दी। मैंने बिस्तर पर लेते लेटे कोमल की तरफ़ देखा।

उसकी बड़ी बड़ी प्यासी आँखें मुझे ही घूर रही थी। मैंने भी उसकी आँखों से आँखें मिला दी। कोमल बिना पलक झपकाये मुझे प्यार से देखे जा रही थी। वो मुझे देखती और आह भरती... मेरे मुख से भी आह निकल जाती। आँखों से आँखें चुद रही थी। चक्षु-चोदन काफ़ी देर तक चलता रहा... पर जरूरत तो लण्ड और चूत की थी।

आधे घण्टे बाद ही सुमन के कमरे में रोशनी हो उठी। कोमल उठ गई। उसकी वासना भरी निगाहें मैं पहचान गया।

"पापा वो लाईट देखो... आओ देखें..."

हम दोनों दबे पांव खिड़की पर आ गये। कल की तरह ही खिड़की का पट थोड़ा सा खुला था। कोमल और मैंने एक साथ अन्दर झांका। सुरेश ने अपने कपड़े उतार रखे थे और सुमन के कपड़े उतार रहा था। नंगे हो कर अब दोनों एक दूसरे के अंगों को सहला रहे थे। अचानक मुझे लगा कि कोमल ने अपनी गाण्ड हिला कर मेरे से चिपका ली है। अन्दर का दृश्य और कोमल की हरकत ने मेरा लौड़ा खड़ा कर दिया... मेरा खड़ा लण्ड उसकी चूतड़ों की दरार में रगड़ खाने लगा।

उधर सुमन ने लण्ड पकड़ कर उसे मसलना चालू कर दिया था और बार-बार उसे अपनी चूत में घुसाने का प्रयत्न कर रही थी। अनायास ही मेरा हाथ कोमल की चूचियों पर गया और मैंने उसकी चूचियाँ दबा दी।

उसके मुँह से एक आह निकल गई।

मुझे पता था कि कोमल का मन भी बेचैन हो रहा था। मैंने नीचे लण्ड और गड़ा दिया। उसने अपने चूतड़ों को और खोल दिया और लण्ड को दरार में फ़िट कर लिया। कोमल ने मुझे मुड़ कर देखा।

फ़ुसफ़ुसाती हुई बोली,"पापा... प्लीज... अपने कमरे में !"

मैं धीरे से पीछे हट गया।

उसने मेरा हाथ पकड़ा... और कमरे में ले चली।

"पापा... शर्म छोड़ो... और अपने मन की प्यास बुझा लो... और मेरी खुजली भी मिटा दो !" उसकी विनती मुझे वासना में बहा ले जा रही थी।

"पर तुम मेरी बहू हो... बेटी समान हो..." मेरा धर्म मुझे रोक रहा था पर मेरा लौड़ा... वो तो सर उठा चुका था, बेकाबू हो रहा था। मन तो कह रहा था प्यारी सी कोमल को चोद डालूँ...

"ना पापा... ऐसा क्यों सोच रहे हैं आप? नहीं... अब मैं एक सम्पूर्ण औरत हूँ और आप एक सम्पूर्ण मर्द... हम वही कर रहे हैं जो एक मर्द और औरत के बीच में होता है।"

कोमल ने मेरा लण्ड थाम लिया और मसलने लगी।

मेरी आह निकल पड़ी।

जवानी लण्ड मांग रही थी।

मेरा सारा शरीर जैसे कांप उठा,"देखा कैसा तन्ना रहा है... बहू !"

"बहू घुस गई गाण्ड में पापा...रसीली चूत का आनन्द लो पापा...!" कोमल पूरी तरह से वासना में डूब चुकी थी। मेरा पजामा उसने नीचे खींच दिया। मेरा लौड़ा फ़ुफ़कार उठा।

"सच है कोमल... आजा अब जी भर के चुदाई कर ले... जाने ऐसा मौका फिर मिले ना मिले। " मैं कोमल को चोदने के लिये बताब हो उठा।

"मेरा पजामा उतार दो ना और ये टॉप... खीच दो ऊपर... मुझे नंगी करके चोद दो ... हाय..."
 
समझदार बहू-2 cont......................

"पापा मार दो गाण्ड ... जरा जोर से मारना... मेरी गाण्ड भी बहुत प्यासी है...अह्ह्ह्ह्ह"

मैंने लण्ड खींच के निकाला और दबा कर अन्दर तक घुसा डाला... कोमल ने अपने होंठ भींच लिये... उसे दर्द हुआ था...

"हाय राम... मर गई... जरा नरमाई से ना..."

"ना अब यह जोश में आ गया है... मत रोको इसे... मरवा लो ठीक से अब !"

दूसरा झटका और तेज था। उसने आँखें बंद कर ली और दर्द के मारे अपने होंठ काट लिये। मैंने लण्ड निकाल कर उसकी गाण्ड की छेद पर थूक का लौन्दा लगाया और फिर से लण्ड घुसा डाला। इस बार उसे नहीं लगी और लण्ड ने पूरी गहराई ले ली। उसकी गाण्ड की दीवारें मेरे लण्ड से रगड़ खा रही थी। मुझे मजा आने लगा था। उसकी सीत्कार भरी हाय नहीं रुकी थी। पर शायद दर्द तो था। मुझे गाण्ड

मारने का मजा पूरा आ चुका था, मैंने उसे और तकलीफ़ ना देकर चूत चोदना ही बेहतर समझा। जैसे ही लण्ड गाण्ड से बाहर निकाला, कोमल ने जैसे चैन की सांस ली।

"कोमल... चल टांगें और खोल दे... अब चूत का मजा लें..." कोमल ने आंसू भरे चहरे से मुझे देखा और हंस पड़ी।

"बहुत रुलाया पापा... अब मस्ती दे दो ना..." मुझे उसकी हालात नहीं देखी गई।

"सॉरी कोमल... आगे से ध्यान रखूंगा !"

"नहीं पापा... यही तो गाण्ड मराने का मजा है... दर्द और चुदाई... न तो फिर क्या गाण्ड मराई..." उसकी हंसी ने महौल फिर से वासनामय बना दिया। मैंने उसकी चूत के पट खोल डाले और अन्दर गुलाबी चूत में लण्ड को घिसा... उसका दाना लण्ड के सुपाड़े से रगड़ दिया। वो कुछ ही पलों में किलकारियाँ भरने लगी। चूत की गुदगुदी से खिलखिला कर हंस पड़ी। ये वासना भरी किलकारियाँ और हंसी मुझे और उत्तेजित कर रही थी। उसकी गुलाबी चूत पर लण्ड का घिसना उसे भी सुहा रहा था और मुझे भी सुहा रहा था। बीच-बीच में मैं अपना लण्ड धक्का दे कर जड़ तक चोद देता था। फिर वापस निकाल कर उसकी रस भरी चूत को लण्ड से घिसने लगता था।

उसकी चूत से पानी टपकने लगा था। उसने मेरा लौड़ा पकड़ पर अपने दाने पर कई बार रगड़ा मारा और फिर मस्त हो उठती थी। वो मेरे लण्ड के पास मेरे टट्टों को भी सहला देती थी। टट्टों को वो धीरे धीरे सहलाती थी। अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था। मै अब चूत में अपना लण्ड अन्दर दबाने लगा, और पूरा जड़ तक पहुंचा दिया। लगा कि अभी और घुस सकता है। मैंने थोड़ा सा लण्ड बाहर निकाला और जोर से पूरा दम लगा कर लण्ड को घुसेड़ मारा।

उसके मुँह से फिर एक चीख निकल पड़ी," आय हाय पापा... फ़ाड़ ही डालोगे क्या?"

"सॉरी... पर लण्ड तो पूरा घुसाये बिना मजा नहीं आता है ना"

"सॉरी... चोदो पापा... आपका लण्ड तो पुराना पापी लगता है..." और हंस पड़ी।

चुदाई जोरों से चालू हो गई... कोमल मस्ती में तड़प उठी। वो घोड़ी की तरह हिनहिनाने लगी... सिसकारियाँ भरने लगी। मेरी भी सीत्कारें निकल रही थी।

"हाय बिटिया... चूत है या भोसड़ी... साली है मजे की... क्या मजा आ रहा है...चला गाण्ड... जोर से..."

"पापा... जोर से चोद डालो ना... दे लण्ड... फ़ोड़ दो चूत को... माईईइ रे...आह्ह्ह्ह्ह्...ऊईईईइ"

उसकी कठोर हुई नरम चूचियाँ मसल मसल कर लाल कर दी थी। चुचूक कठोर हो गये थे...। दोनों स्तनों को भींच कर चुदाई चल रही थी। चूचियों को मलने से वो अति उत्तेजित हो चुकी थी। दांत भीच कर कस कर कमर हिला कर चुदवा रही थी।

"पापा... मैं गई... अरे रे... चुद गई... वो... वो... निकला... हाय रे... माऽऽऽऽऽऽऽ" कहते हुए कोमल ने अपना रस छोड़ दिया। वो झड़ने लगी। मैंने उसके बोबे छोड़ दिये और लण्ड पर ध्यान केन्द्रित किया। लण्ड को जड़ तक घुसा कर दबाव डाला... और दबाते ही गया। उसे अन्दर लगने लगी।

"पापा...बस ना... अब नहीं..."

"चुप हो जा रे... मेरा निकलने वाला है..."

"पर मेरी तो फ़ट जायेगी ना..."

"आह आअह्ह्ह रे... मैं आया... आह्ह्ह्ह्... निकल रहा है... कोमलीईईईइ" मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया।

"कोमल... कोमल... इधर...आ..." मैंने कोमल के बाल पकड़ कर जल्दी से उसके मुँह को मेरे लण्ड पर रख दिया। कोमल तब तक समझ गई थी। उसने वीर्य छूटते ही मुँह में लौड़ा घुसा लिया। मेरा रस पिचकारी के रूप में निकल पड़ा। कोमल वीर्य को गटागट निगलने लगी। फिर अन्त में गाय का दूध निकालने की तरह से लण्ड दुहने लगी और बचा हुआ माल भी निकाल कर चट कर गई।

"पापा... आपके रस से तो पेट ही भर गया।"

मैंने उसे नंगी ही लिपटा लिया...।

"कोमल बेटी... शुक्रिया... तूने मेरे मन को समझा... मेरी आग बुझा दी।"

"पापा... मैं तो बहुत पहले से आपकी इच्छा को जानती थी... आपके पी सी में नंगी तस्वीरें और डाऊनलोड की गई देसी मासला लैव की कहानियाँ तक मैंने पढ़ी हैं।"

"सच ...तो पहले क्यों नहीं बताया..."

"शरम और धरम के मारे... आज तो बस सब कुछ अपने आप ही हो गया और मैं आपसे चुद बैठी।"

कोमल के और मेरे होंठ आपस में मिल गये... उमर का तकाजा था... मुझे थकान चढ़ गई और मैं सो गया।

सुबह उठते ही कोमल ने चाय बनाई... मैंने उसे समझाया,"कोमल देखो, आपस में चोदा-चादी करने से घर की बात घर में ही रहती है... प्लीज किसी सहेली से भी इस बात का जिक्र नहीं करना। सब कुछ ठीक चलता रहे तो ऐसे गुप्त रिश्ते मस्ती से भरे होते हैं।"

"पापा, मेरी एक आण्टी को चोदोगे... बेचारी का मर्द बहुत पहले ही शांत हो गया था।"

"ठीक है तू माल ला और मुझे मस्त कर दे... बस..." हम दोनों एक दूसरे का राज लिये मुस्कुरा उठे। अब मैं उसे मेरे दोस्तो से चुदवाता हूँ और वो मेरे लिये नई नई आण्टियाँ चोदने के लिये दोस्ती कराती है।

... दुखिया की गति दुखिया जाने... और ना जाने कोय...

the end.
 
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