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होता है जो वो हो जाने दो complete

राहुल अपनी मां की पैंटी को उठाकर उसे नाक से लगा कर सुंघने लगा। अपने बेटे की इस हरकत को देखकर अलका अंदर ही अंदर गंनगना गई, राहुल था की पैंटी को एकदम नाक से रगड़ रगड़ कर सुन रहा था खास करके उस स्थान को जो स्थान बुर से एकदम चिपका रहता है। वह अपने मित्रों को पेंटी से लगाकर गहरी सांस खींचते हुए बोला।

ओहहहहह.... मम्मी बहुत ही मादक खुशबू आ रही है इसमें से। मेरा तो रोम रोम झनझना जा रहा है। ( अपनी बेटे को इस तरह से मदहोश होकर अपनी पैंटी सुंघते हुए देख कर उसके बदन में अजीब सी हरकत होने लगी उसके बदन में गुदगुदी सी मचने लगी। उसके हाथ में कपड़ों का ढेर था और उसने अपनी साड़ी को थोड़ा सा ऊपर उठा कर कमर के साईड अंदर खोसी हुई थी, जिससे उसकी घुटनों से नीचे की आधी टांगे नंगी दिख रही थी। अलंकार अपनी साड़ी को उठा कर कमर में ठुसने की वजह से और भी ज्यादा कामुक ओर सुंदर लग रही थी। वह एक तरह से राहुल की हरकत कर शरमा गई उसे ईसकी बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि राहुल ऐसी हरकत करेगा। वह राहुल की हरकत पर शर्मसार होते हुए अपने अगल-बगल नजर दौड़ा ले रही थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है। जबकि वह जानती थी कि उसकी छत पर कोई भी कहीं से भी नहीं देख सकता था फिर भी उसके मन में डर बना हुआ था अलका के मन में भी गुदगुदी होने लगी थी। राहुल की इस हरकत ने अस्पताल के बाद से आज पहली बार उसके बदन में एक नई उमंग जगाया था। वह पागलों की तरह पैंटी को सुंघते हुए अपनी मां को देखे जा रहा था। राहुल अपनी मां की पैंटी को सॉन्ग कर उत्तेजित होने लगा था उसके पेंट का तंबू बढ़ने लगा था जिस पर रह रहकर अलका की नजर चली जा रही थी वह क्या करें क्या ना करें उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था हाथों में कपड़ों का ढेर था रेशमी जुल्फों की लटे उसके गालों को छू रही थी। चेहरे पर कामुक्ता और शर्मो हया की मिली जुली मुस्कान बिखर रही थी। राहुल दीवानों की तरह पेंटिं को अपनी नाक पर सहलाते हुए उसकी मादक खुशबू का मजा ले रहा था। यह देख अलका से रहा नहीं गया और वह मुस्कुराते हुए बोली।

क्या कर रहा है , ऐसा कोई करता है क्या।

कोई करे या ना करे लेकिन मैं ऐसा जरूर करूंगा मम्मी, क्योंकि तुम्हारी पैंटी से तुम्हारी बुर की मादक खुशबू आती है जिसे सुनते ही मेरे तन बदन में गुदगुदी होने लगती है एक अजीब सा एहसास होने लगता है ।

( राहुल अपनी मां से कुछ ज्यादा ही खुल चुका था पहले तो वह ऐसी गंदी बातें करने से शर्म आता था लेकिन कुछ ही दिनों में वह अनुभवी हो चुका था उसे पता था कि ऐसी बातें सेक्स को और ज्यादा आनंददायक बना देता है इसलिए ऐसी बातें करने से अब बिल्कुल भी नहीं चुकता था, अलका अपने बेटे के मुंह से ऐसी खुली गंदी बातें सुनकर आवाज रह गई थी लेकिन उसे ऐसी बातें अच्छी लग रही थी राहुल के मुंह से अपनी बुर के बारे में सुनकर उसकी जांघों के बीच गुदगुदी सी होने लगी थी।

इस समय न जाने क्यों राहुल के सामने उस की ऐसी बातें सुनकर उसे शर्म आ रही थी। और शर्म के मारे उसका गोरा सुंदर चेहरा कश्मीरी सेब की तरह लाल होने लगा था। वह अभी भी अपने चारों तरफ नजर दौड़ा ले रही थी, तभी उसकी नजर नीचे पड़ी ब्रा पर गई जो कि पेंटि के साथ ही नीचे गिरी थी लेकिन राहुल ने सिर्फ पेंटी ही उठाया था. वह ब्रा ऊठाने के लिए नीचे झुकी और जैसे ही ब्रा को उठाकर वह सीधे खड़ी हुई तो उसके कंधे से साड़ी का आंचल नीचे गिर गया जिससे उसकी पहाड़ी छातियां अनावृत हो गई। ऊसकी बड़ी बड़ी चूचियां जोकि ब्लाउज के अंदर हीथी लेकिन अलका ने इस तरह का ब्लाउज पहनी थी कि उसकी आधी से ज्यादा चूचियां बाहर को झलक रही थी। राहुल राहुल की नजर जेसे ही अपनी मां की बड़ी बड़ी पहाड़ी छातियों पर पड़ी वैसे ही तुरंत उसके तन-बदन में कामाग्नि की तपन बढ़ने लगी उसकी जांघों के बीच का हथियार सुरसुराने लगा।

अलका अपनी ब्रा को उठाने के बाद एक नजर अपनी ब्लाउज मे कैद चुचियों की तरफ डाली और फिर राहुल की तरफ मुस्कुराते हुए देखते हुए बोली।

यह पेंटिं तो धूलि हुई है।

( यह बात अलका ने इतनी कामुक अंदाज में बोली थी कि राहुल उसकी बात सुनकर अंदर तक चरमरा गया ऊसकी आंखों में तुरंत खुमारी का नशा छाने लगा। अलका यह अच्छी तरह से जानती थी कि यह क्या कह रही है और इसका मतलब भी राहुल अच्छी तरह से समझ रहा था । अलका यह भी जानती थी कि उसकी साड़ी कंधे पर से नीचे फिसल गई है। और उसकी बड़ी बड़ी छातियां ब्लाउज में छेद होने के बावजूद भी कामुक तरीके से प्रदर्शित हो रही है, लेकिन फिर भी वह इस बात को जानबूझकर नजरअंदाज करते हुए वापस साड़ी को कंधे पर डालने तक की सुध नहीं ली थी। अपनी मां की बातों ही बातों में खुले आमंत्रण को पाकर सिसकारी लेते हुए मादक अंदाज में वह बोला।

ससससहहहहहह...... मम्मी तो क्या हुआ यह तो तुम्हारी धुली हुई पेंटी है मैं तो तुम्हारी पहनी हुई भी चड्डी को नाक से लगा कर मस्ती से सुंघ कर उसकी मादक खुशबू का आनंद ले सकता हूं।

( इतना कहने के साथ ही राहुल अपने पैंट के ऊपर से ही खड़े लंड को मसल दिया यह देखकर अलका कि बुर से मदन रस बुंद बनकर ं झर गया। अलका इस समय छत पर राहुल की हरकत और उसकी बातों से मदहोश हुए जा रही थी विनीत का डर उसके मन से लगभग खत्म होते जा रहा था। एक बार फिर से वह राहुल के साथ बहकने लगी थी

ईसी छत पर उन दोनों ने पवित्र रिश्ते की डोरी को तोड़कर एक नए रिश्ते की शुरुआत की थी और आज फिर से कुछ दिनों के विराम के बाद एक बार फिर से उनकी वासना की पुस्तक मे नया अध्याय जुड़ने लगा था।

राहुल लगातार पेंटी को सुंघते हुए धीरे-धीरे अपने कदम को अपनी मां की तरफ बढ़ा रहा था। जैसे-जैसे राहुल उसकी तरफ बढ़ रहा था अलका के बदन में गुदगुदी और ज्यादा बढ़ रही थी उसका बदन कसमसाने लगा था। वह अलका के बिल्कुल करीब पहुंच गया अलका इतनी ज्यादा शर्मसार हुए जा रही थी कि वह अपने बेटे से नजरें तक नहीं मिला पा रही थी। रह रह कर उसकी पलके पटपटा रही थी। वह कभी राहुल को तो कभी नीचे जमीन की तरफ देखने लगती उसके हाथों में अभी भी कपड़ो का ढेर लदा हुआ था। उसका आंचल अभी भी कंधे से लोगों का हुआ था जिस पर राहुल की नजर बराबर बनी हुई थी वह अपनी मम्मी के चारों तरफ धीरे धीरे चक्कर लगाने लगा और उसकी नजरें उसके गुदाज बदन पर चारों तरफ फिरने लगी। राहुल को इस तरह से अपने बदन के इतने करीब चक्कर लगाते हुए घुमने की वजह से वह शर्मसार हुए जा रही थी और उसका बदन शर्म के मारे कसमसा रहा था। राहुल नजरों को अपनी मां के भजन के कोने कोने पर फिरा रहा था अपनी मां के इर्द-गिर्द चारों तरफ चक्कर काटते हुए उसकी नज़र खास करके ब्लाउज से झांकती उसकी बड़ी बड़ी चूचियां और चुचियों के बीच की गहरी लकीर पर फिरती फिरती हुई पीछे कमर के नीचे का पहाड़ी उठाव पर घूम रही थी। अलका भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसके बेटे की नजर उसके बदन पर कहां कहां चिपक रही है। राहुल अपनी मां के पीछे की तरफ जाकर धीरे से ऊसके कानों में मादक स्वर में बोला।

ससहहहहहहह.....मम्मी .... तुम बहुत ही हॉट और खूबसूरत हो, तुम्हारे जैसी खूबसूरत औरत मैंने आज तक नहीं देखा। ( राहुल अपनी मां की तारीफ करते हुए लगातार उसकी पैंटी को भी नाक लगाकर सुंघे जा रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे पेंटी को सुंघते हुए उसकी उत्तेजना पल-पल बढ़ती जा रही है। अपने बेटे के मुंह से अपने बदन की तारीफ सुनकर वह शर्माकर ईठलाते हुए बोली।)

चल झूठा कोई काम नहीं है तो बेवजह की तारीफ किए जा रहा है। ( इतना कहकर वह राहुल के हाथ से अपनी पैंटी को छीन कर जाने लगी तो पीछे से राहुल बोला।)

सच कह रहा हूं मम्मी आप बहुत खूबसूरत हो। ( अपने बेटे की बात सुनकर वह वहीं रुक गई। ) तुम अगर कोई गैर औरत होती तो मैं तुम्हें अपना गर्लफ्रेंड बना लिया होता। ( अपने बेटे की यह बात से वह एकदम से रोमांचित हो गई उसके चेहरे पर मुस्कुराहट फैल गई और वह मुस्कुराते हुए गर्दन घुमाकर पीछे राहुल की तरफ देखने लगी। अपनी मां को अपनी तरफ इस तरह मुस्कुराते हुए देखकर राहुल बोला।) आई लव यू मम्मी।

( राहुल को युं ईजहार बयां करते हुए देख कर अलका बोली।)

तू पागल हो गया है।( इतना कहकर वह मुस्कुराते हुए जाने लगे तो राहुल ने फिर से से रोकते हुए बोला।)

मम्मी रुको।( अलका फिर रुक गई राहुल के बदन मे उत्तेजना बढ़ चुकी थी उसके लंड का तनाव पेंट में तंबू बनाया हुआ था जिस पर बार-बार अलका की भी नजर चली जा रही थी। राहुल की बात सुनकर भर रुक तो गई थी लेकिन वह अपनी पीठ राहुल की तरफ किए हुए ही खड़ी थी। वह बहुत ही उत्सुक थी,वह देखना चाहती थी कि अब राहुल क्या करता है क्या कहता है? तभी राहुल बोला।

मम्मी क्या आप अपनी पेंटी दोगी ऊतार के!

( अलका अपने बेटे की यह बात सुनते ही एकदम सन्न हो गई, साथ ही ऊसके कहे एक-एक शब्द ने उसके बदन में रोमांच फैला दिया। वह जानती थी कि राहुल क्या कह रहा है और उसकी पैंटी के साथ क्या करना चाहता है। लेकिन फिर भी अनजान बनते हुए वह बोली।)

उतार के...... मतलब (इतना कहने के साथ ही अलका राहुल की तरफ घूम गई वह अपना आंचल फिर से कंधे पर रख ली थी, उसकी नजर राहुल की पैंट पर पड़ी तो अभी भी ऊसका पूरा तनाव बना हुआ था, राहुल फिर बोला।)

उतार के मतलब... इस समय आप जो पेंटी पहनी हुई हो उसकोे उतार कर मुझे दो।

क्या करोगे मेरी पैंटी को?

वही करुंगा जो आप की धुली हुई पेंटी के साथ कर रहा था।( पेंट के ऊपर से ही लंड को सहलातो हुए बोला, अपने बेटे को यूंही उसकी आंखों के सामने ही लंड सहलाता हुआ देखकर उसकी बुर में सुरसुराहट बढ़ गई, राहुल की बातों से अलका का उन्माद बढ़ने लगा। वह उन्मादित होते हुए बोली।)

तुम पागल हो गए हो राहुल, ऐसा भी भला कोई करता है क्या?

मैं करुूंगा मम्मी मैं तुम्हारी बुर की खुशबू तुम्हारी पैंटी में महसूस करना चाहता हूं। तुम्हारी बुर सो लाखों फूलों की खुशबू आती है उसकी मादक खुशबू मे मैं अपना सब कुछ भूल जाता हूं। मम्मी दोना।

मेरा मन बहुत कर रहा है आप की पहनी हुई पेंटी की मादक खुशबू अपने सीने में उतारने के लिए।

( अपने बेटे की ऐसी उत्तेजक और उन्माद से भरी गरमा बातों को सुनकर का रोम-रोम जना गया उसके तन-बदन में उत्तेजना की लहर फेलने लगी। वह राहुल की बातों को सुनकर कामोतेजना से भर गई उसे इस बात की उम्मीद कभी नहीं थी कि राहुल ऐसी भी इच्छा रखता है। उसे इस बात पर बिल्कुल भी यकीन नहीं हो पा रहा था कि कोई कैसे भला किसी औरत की यूज़ की हुई पेंटिं को इस तरह से नाक लगाकर सुंघ सकता है। अब तो अलका की भी उत्सुकता बढ़ती ही जा रहीे थी वह भी देखना चाहती थी कि कैसे राहुल उसकी पहनी हुई पेंटी को यु नाक लगाकर मस्ती के साथ सुघता है। वह भी बात बनाते हुए बोली।

नहीं राहुल एेसा नही होता छी: कितनी गंदी बात है। ( अलका जानबूझकर ऐसा बोल रही थी अब तो वह खुद चाहती थी कि उसका बेटा उसकी पहनी पेंटी को सुंघकर मस्त हो। लेकिन वह खुद सामने से अपनी पैंटी उतार कर अपने बेटे को देने में असहजता का अनुभव कर रही थी वह चाहती थी कि उसका बेटा जोर देकर उसकी पेंटी को मांगे। और राहुल यही कर रहा था वह फिर से जोऱ देते हुए अपनी मां से बोला।

दो ना मम्मी प्लीज अब और ना तड़पाओ मेरी हालत देखो( पैंट के ऊपर से ही अपने लंड को हथेली से मसलता हुआ ) मुझसे रहा नहीं जा रहा है प्लीज मम्मी प्लीज...( राहुल एकदम मदहोश होता हुआ आहें भरते हुए अपनी मम्मी से बोल रहा था अलका भी उसकी तड़प देखकर खुद मचलने लगी, और बोली।)

तो तू ही बता मैं क्या करूं।

आप कुछ मत करो मम्मी बस अपनी पहनी कोई पेंटिं निकाल कर मुझे दे दो।

यहां .....छत पर ....।।कोई देख लिेया तो.....

कौन देखेगा मम्मी यहां छत पर वैसे भी हम दोनों के सिवा यहां है ही कौन? ( अलका पूरी तरह से तैयार थी अपनी पैंटी उतार कर अपने बेटे को देने के लिए बस थोड़ा सा ना नुकुर कर रही थी। वैसे भी शाम ढल चुकी थी, अलका भी अच्छी तरह से जानती थी उनकी छत पर कोई भी उन दोनों को देख नहीं सकता था यह तो अलका सिर्फ बहाना बना रही थी। )

दोना मम्मी प्लीज कोई भी नहीं देखेगा।

ठीक है ठीक है, मैं उतार कर तुझे देती हूं,। ( अलका उन्माद से भर चुकी थी इसलिए अपने बेटे के कहने पर पेंटी उतारने के लिए तैयार हो गई, उसके हाथों में अभी भी कपड़ों का ढेर था वह राहुल के सामने खड़ी होकर छत के ऊपर से ही चारों तरफ नजर घुमाकर यह तसल्ली कर ली कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है। पूरी तसल्ली कर लेने के बाद वह फिर पेंटी उतारने के लिए तैयार हो गई।

 
अलका पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी उसके बदन में अपने बेटे के सामने पेंटी उतारने की बात से ही गुदगुदी होने लगी थी। उसके हाथों में अभी भी कपड़ों का ढेर था वह कहां धीरे-धीरे नीचे ले जाने लगी, राहुल की आंखों में वासना का नशा छाने लगा था,वह बहुत कामुक नजरों से अपनी मां की तरफ देख रहा था। उसकी मा भी राहुल की तरफ देखते हुए एक हाथ घुटने तक ले जाकर झुकते हुए, धीरे धीरे उंगलियों से साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी। यह नजारा देखते ही राहुल के साथ ही तीव्र गति से चलने लगी उसके बदन में रोमांच की लहर दौड़ ने लगी। छत पर केवल राहुल ओर अलंका ही थै अंधेरा छाने लगा था कोई उन्हें छत पर देख भी ले ऐसी कोई उम्मीद भी नहीं थी.। धीरे धीरे करके अलका ने अपनी साड़ी को जांघों तक उठा दि,

गोरी गोरी नंगी टांगें देखते ही राहुल के लंड नें ठुनकी मारना शुरू कर दिया। जैसे-जैसे अलका अपने बेटे के सामने अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठा रही थी वैसे वैसे उसकी सांसो का जोर बढ़ने लगा था। धीरे धीरे करके अलका हाथों मे कपड़े का ढेर लिए और एक हाथ से अपनी साड़ी को उठाते हुए साड़ी को जांघो के ऊपर तक सरका दी। साड़ी अब जांघो के ऐसे स्थान तक पहुंच गई थी कि जहां से उसकी पैंटी की किनारी दिखने लगी थी जिस पर राहुल की नजर जाते हैं उसका हाथ खुद ब खुद उसके टन टनाए हुए लंड पर चला गया जो कि इस समय पेंट के अंदर ही गदर मचाए हुए था। अलका भी अपने बेटे को इस तरह से पेंट के ऊपर से ही लंड को सहलाते हुए देखकर चुदास के रंग में रंगने लगी। अलका का भी चेहरा उत्तेजना में तपकर लाल टमाटर की तरह तमतमा रहा था।अलका मुंह हल्का सा खुल चुका था वह बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी अस्पताल वाली घटना को वह पूरी तरह से भूल चुकी थी विनीत का ख्याल उसके दिलों दिमाग से निकल चुका था इसलिए वह इतनी सहज और उत्तेजित नजर आ रही थी। वासना का रंग एक बार फिर से उसके ऊपर चढ़ने लगा था। वह साड़ी को वहीं पर रोक दी जहां से पेंटी की किनारी नजर आ रही थी उस गुलाबी रंग की पैंटी के किनारी को देखते ही राहुल के होश उड़ने लगे थे मदहोशी छाने लगी थी। उसके चेहरे पर उत्तेजना की लालीमा साफ नजर आ रही थी और अलका यही देखना ही चाहती थी। अलका साड़ी को थोड़ा और कमर तक उठा दी अब उसकी गुलाबी रंग की पेंटी पुरी तरह से साफ साफ नजर आने लगी । यह नजारा देख करके राहुल से बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था। अपने बेटे की यह तड़प देखकर अलका मन ही मन मुस्कुरा रही थी। अलका भी कुछ ज्यादा ही उत्सुक थी अपनी पैंटी को उतारने के लिए वह पेंटिं के साथ-साथ अपनी बुर भी दिखाना चाहती थी। ऐसा भी नहीं था कि अलका पहली बार अपनी बुर के दर्शन अपने बेटे को करवा रही हो और ऐसा भी नहीं था कि राहुल पहली बार ही अपनी मां की बुर देखने जा रहा हो । इससे पहले भी यह दोनों सारी मर्यादा को लांघ कर एक हो चुके हैं। दोनों एक दूसरे के अंगों को देख चुके हैं सहला चुके हैं चुम चुके हैं सब कुछ कर चुके हैं। लेकिन फिर भी आज दोनों इस तरह से कामोत्तेजित हो चुके थे एक दूसरे के अंग को देखने दिखाने के लिए की ऐसा लग रहा था कि दोनों आज पहली बार एक दूसरे को ईस हाल में देख रहे हो।

गजब का नजारा बना हुआ था शाम ढल चुकी थी हल्का हल्का अंधेरा छाने लगा था राहुल और अलका दोनों छत पर थे। अलका के हाथों में कपड़ों का ढेर था और वह एक हाथ से अपनी साड़ी को कमर तक उठाए हुए थीऊसकी गोरी गोरी मांसल जांघें अंधेरे में भी चमक रही थी और उसकी छोटी सी गुलाबी रंग की चड्डी जिसे देखकर राहुल बेचैन हो जा रहा था वह बार बार पेंट के ऊपर से ही अपने टंनटनाए हुए लंड को सहलाए जा रहा था। तभी अलका जिस हाथ में कपड़ों का ढेर ली हुई थी उसी हाथ से साड़ी को थाम ली और दूसरे हाथ से अपनी पैंटी को नाजुक उंगलियों में उलझाकर नीचे की तरफ सरकाने लगी , जैसे ही अलका अपनी पैंटी को उंगलियों के सहारे नीचे सरकार ने लगी वैसे ही राहुल की सांसे भारी होने लगी उत्तेजना के मारे उसका बुरा हाल हो रहा था अपनी मां को अपनी पैंटी उतारते देख कर उत्तेजना के मारे उसका गला सूखने लगा। अलका अपने बेटे को तड़पाते हुए धीरे-धीरे अपनी पैंटी उतारने लगी। कभी इस साइड से पैंटी को थोड़ा नीचे सरकारी तो कभी दूसरे साइट पर इस तरह से करते करते वह अपनी पैंटी को जांघो तक सरका दी। अलका की बुर एकदम नंगी हो गई थी राहुल उसे देखते ही तड़प ऊठा और उसे छुने के लिए मचल रहा था। बुर पर हल्के हल्के बालो का झुरमुट स उग गया था, क्योंकि विनीत वाले हादसे के बाद से अलका ने उस दिन से अब तक एक बार भी क्रीम लगाकर अपनी बुर को साफ नहीं की थी। इसलिए एकदम तरोताजा दिखने वाली अलका की बुर इस समय हलके हलके बालों के झुरमुट से घिरी हुई देखकर राहुल को थोड़ा आश्चर्य हुआ लेकिन राहुल को अपनी मां की बुर पर यह हल्के हल्के बाल और भी ज्यादा कामुक्ता का एहसास दिला रहे थे। दोनों की हालत खराब हो जा रहे थे दोनों के मन की लालसा बढ़ती ही जा रही थी अलका नो धीरे से पेंटी को घुटनों के नीचे सरका दी, घुटनों के नीचे आते ही पेंटी खुद-ब-खुद पैरों में जा गिरी

इसके बाद पैंटी निकालने के लिए अलका को ज्यादा जहमत उठाना नहीं पड़ा वह पेंटी में से एक पैर को खुद ब खुद निकाल ली, लेकिन एक पैर में अभी भी उसकी पैंटी फसी हुई थी जिसे वह बिना निकाले ही बड़े ही कामुक अदा से अपना वह पैर हल्के से उठाकर राहुल की तरफ बढ़ा दी राहुल अपनी मां का यह ईसारा समझ गया और तुरंत अपनी मां की तरफ बढ़ा और अपने घुटनों के पास बैठकर अपनी मां के पैर में फंसी हुई उसके गुलाबी रंग की पैंटी को पकड़कर पेर से बाहर निकाल लिया। पेंटी को हाथ में लेते ही राहुल तुरंत पेंटी को अपने नाक से लगाकर सुंघने लगा, राहुल मस्त होकर अपनी मां की पहनी हुई पैंटी को सुंघने लगा। जिसे वह दिनभर पहने हुए थी, पेंटी जो कि हमेशा अलका की मादक खुशबू से भरी रसीली बुर से और उसकी भरावदार गांड से चिपकी हुई रहती थी। जिसकी मादक खुशबू उसकी पैंटी मे उतर आई थी। जिसे सुंघते ही राहुल मदमस्त हो गया। पैंटी की मादक खुशबू उसके नथूनों से होकर सीने में भरते ही उसके पूरे बदन में चुदास की लहर दौड़ने लगी। वह आहें भर-भर कर पैंटी को अपनी नाक और होंठो से रगड़ते हुए पेंटी की मादक खुशबू का मजा ले रहा था। राहुल को इस तरह से अपनी पैंटी सुंघते हुए देखकर अलका का भी मन बहकने लगा। उसने अब तक अपनी साड़ी को नीचे करने की शुध बिल्कुल नहीं ली थी। या जानबूझकर वह अपनी साड़ी को कमर से पकड़ी हुई थी' ताकि राहुल की नजर उस पर भी बराबर बनी रहे।

दोनों के बदन मे ऊन्माद अपना असर दिखा रहा था। राहुल पैंटी को सुघते हुए रसीली बुर पर बराबर नजर गड़ाए हुए था। उसकी आंखों के सामने दुनिया की बेशकीमती चीज बेपर्दा थी भला वह उसे छूने की अपने लालच को केसे रोक सकता था इसलिए वह घुटनों पर चलते हुए अपनी मां की तरफ बड़ा और उसे अपनी तरफ बढ़ता हुआ देख कर अलका कसमसाने लगी। क्योंकि वह समझ गई थी कि अब राहुल क्या करने वाला है उसके बारे में सोचकर ही उसके पैरों में कपकपी सी होने लगी। और अलका के सोचने के मुताबिक ही राहुल हाथ में पैंटी लिए हुए ही उसकी जांघों को हथेली में दबोच कर अपनी नाक को बुर की गुलाबी पत्तियों के बीच रगड़ते हुए उसकी मादक खुशबू को अपने अंदर खींचने लगा। राहुल की हरकत कर अलका एकदम मस्त होने लगी ऊसके बदन मे सुरसुराहट सी होने लगी। अभी राहुल को पत्तियों के बीच नाक लगाएं उसकी मदद खुशबू को अपने अंदर खींचते कुछ सेकंड ही बीते थे कि वह झटके से जांघो को पकड़े हुए ही अपनी मां को दूसरी तरफ घुमा दिया और अलका अपने बेटे के इस हरकत पर गिरते गिरते बची हो तो अच्छा हुआ कि उसके हाथों में दीवार की किनारी आ गई लेकिन उस कीनारी को पकड़ते पकड़ते उसके हाथों से कपड़ों का ढेर नीचे गिर गया लेकिन कमर तक उठी हुई साड़ी नीचे नहीं गिरी राहुल आज कुछ और करना चाहता था। इस तरह से अलका को घुमाने से उसकी भरावदार नितंभ राहुल के आंखों के सामने हो गई और राहुल तुरंत अपनी मां की भरावदार गोरी गोरी और एकदम रुई की तरह नरम गांड की दोनो फांको को अपनी दोनों हथेलियों में दबोच कर फैलाते हुए फांको के बीच अपना मुंह सटा दीया। अपने बेटे की इस हरकत पर अलका पूरी तरह से गनगना गई। उसे समझ में नहीं आया कि राहुल कर क्या रहा है जब तक वह समझ पाती इससे पहले ही राहुल फांकों के बीच अपनी नाक सटाकर ऊसकी मादक खुशबू को अपने अंदर खींचने लगा। अलका एकदम मदमस्त होने लगी उसकी आंखों में नशा छाने लगा। उसके मुंह से हल्की सी सिसकारी निकल गई।

ससससहहहहहह....।राहुल .....

( अलका का इतना कहना था कि तभी सीढ़ियों के नीचे से सोनू की आवाज आई।)

सोनू की आवाज सुनते ही अलका पूरी तरह से हड़बड़ा गई, लेकिन राहुल अपने काम में डटे ही रहा ।वह अपनी मां की भरावदार गांड की दोनो फांकों को अपनी हथेलियों में दबोच कर अपना मुंह फांकों के बीच में डाल कर मस्त हुए जा रहा था उसे इस समय किसी की भी चिंता नहीं थी। उसे भी सोने की आवाज आई थी जोकि अलका को ढूंढ रहा था लेकिन फिर भी वह अपनी इस मस्ती को खोना नहीं चाहता था उसके रग-रग में अलका की भरावदार गांड से आ रही मादक खुशबू दौड़ रही थी। अलका बार-बार अपने हाथ से राहुल के बालों को पकड़कर उसे हटाने की कोशिश कर रही थी लेकिन राहुल था क्या अड़ा हुआ था। वह इस समय किसी भी कीमत पर अपनी मां की भरावदार नितंबों को छोड़ना नहीं चाहता था। क्योंकि इस समय उसे अपनी मां के नितंबों से बेहद आनंद कीे अनुभूति हो रही थी। एकदम रुई की तरह नरम-नरम भरावदार गांड ऐसे लग रही थी मानो कोई लचकदार तकिया हो। राहुल के इस हरकत से अलका पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी, ओर ऊसकी बुर की धार पकड़कर मदन रस रिस रहा था। राहुल नरम नरम नितंबों को दबाते हुए गांड का मजा ले रहा था लेकिन तभी फिर से दोबारा सीढ़ियों के नीचे से आवाज आई।

मम्मी ओ मम्मी छत पर क्या कर रही हो?

( इस बार सोनु की आवाज सुनकर अलका पूरी तरह से घबरा गई वह राहुल को छोड़ने के लिए कहने लगी।)

राहुल छोड़ मुझे जाने दे सोनू मुझे बुला रहा है अगर कहीं वह ऊपर आ गया तो गजब हो जाएगा।( ऐसा कहते हुए वह अपने हाथ से राहुल को पीछे की तरफ ठेलने लगी। लेकिन राहुल था की छोड़ने से इंकार कर रहा था।)

मम्मी मुझे बहुत मजा आ रहा है आपकी मदद गांड की खुशबू मुझे मदहोश बना रही है।( ऐसा कहते हुए वह लगातार गांड की दरारों के बीच अपनी नाक रगड़े जा रहा था।)

मम्मी कितना समय लगा रही हो।( सीढ़ियों के नीचे से फिर से सोनू आवाज लगाया।)

बस राहुल मुझे अब जाने दे (इतना कहने के साथ ही अलका ने जोर से राहुल को पीछे की तरफ धकेला और राहुल भी अलका के इस धक्के से गिरते गिरते बचा, अलका राहुल की गिरफ्त से आजाद हो चुकी थी, और अपने कपड़े दुरुस्त करके नीचे गिरे हुए कपड़ों को समेटने लगी.। राहुल अपनी मां को ही देखे जा रहा था उसका हाल बुरा था उसके बदन में काम अग्नि की आग लपटे ले रही थी । अलका अपने कपड़े समेटकर जाने लगे जाते-जाते वह पीछे मुड़कर देखे उसके चेहरे पर कामुक मुस्कान फैली हुई थी उसकी नजर राहुल के हाथ में जो कि अभी भी उसकी पैंटी थी उस पर गए और वह नीचे सीढ़ियों पर उतरने के लिए पांव रखते हुए बोली मेरे कमरे में आ जाना मेरी पैंटी लौटाने के लिए और इतना कहकर हंसते हुए चली गई। राहुल अलका को कातिल मुस्कान बिखेऱ कर जाते हुए देखता रह गया।

वह वहीं बैठा-बैठा खुश होने लगा क्योंकि आज दश पन्द्रह दिनों के बाद कुछ काम बना था उसे इस बात की खुशी होने लगी कि ईतने दिनों के बाद आज फिर से उसका काम बनता नजर आ रहा था।

अलका अपनी पैंटी वहीं छोड़ गई थी जोंकि राहुल के हाथों में थी। अलका इस समय

साड़ी के नीचे बिल्कुल नंगी थी। इसका एहसास होते ही राहुल के बदन में गुदगुदी होने लगी उसके लंड में ऐठन बढ़ गया, और वह एक बार फिर से अपनी मां की पैंटी को नाक से लगाकर गहरी सांस लिया और फिर उसे अपने पैंट की जेब में रख लिया।

रसोई घर में खाना बनाते समय अलका का भी बुरा हाल था इसे भी बहुत दिनों के बाद उत्तेजना का एहसास हुआ था एक बार फिर से उसका मन मचल रहा था राहुल के लंड को लेने के लिए बहुत दिनों से उसकी बुर में उसके बेटे का मोटा लंड नहीं गया था जिसकी वजह से बुर की खुजली भी बढ़ती जा रही थी। वह रोटियां बनाते समय गर्म तवे को देख रही थी जिस पर रोटी रखते ही वह गरम होकर फूल जाती थी। मुझे इस बात का एहसास हो गया कि तवे की रोटी की तरह ही उसकी बुर का भी यही हाल था। क्योंकि इस समय वह भी गरम होकर फुल चुकी थी जिसका एहसास ऊसे बार-बार साड़ी के ऊपर से ही उस पर हाथ लगाने से हो रहा था। अलका का मन बहकनें लगा था। आज उसको राहुल के लंड की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ रही थी रोटी बनाते समय बार-बार उसे छत वाली घटना याद आ रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि राहुल उसका इतना ज्यादा दीवाना हो चुका है। उस पल को याद करके वह रोमांचित हो उठती थी जब राहुल, अपना मुंह उसके भरावदार गांड की फांकों के बीच डाल कर उसकी मादक खुशबू का मजा ले रहा था। सारी घटनाओं को याद करके उसके बदन में कामाग्नि प्रबल होते जा रही थी उसकी बुर राहुल के लंड से चुदने के लिए तड़प रही थी क्योंकि जिस तरह की खुजली उसकी बुक में मची हुई थी उस खुजली को उसका बेटा ही मिटा सकता था।

खाना बनाने में भी उसका मन बिल्कुल नहीं लग रहा था फिर जैसे तैसे करके वह रसोई का काम समाप्त की।

तीनों साथ में खाना खाने बैठे हुए थे। राहुल की जेब मैं अभी-भी अलका की पेंटिं थी , जिसे वह सोनू की नजर बचाकर अपने हाथ में लिया हुआ था अलका भी भोजन करते समय अपनी पैंटी को अपने बेटे के हाथ में देखकर गंनगना गई। और राहुल भी अपनी मां को ऊकसाते हुए उसे दिखा कर पैंटी को रह रहकर अपनी नाक से लगा कर सुंघ ले रहा था। यह देख कर अलका की बुर की खुजली और ज्यादा बढ़ने लगी थी वह जैसे तैसे करके भोजन ग्रहण के भोजन करने के बाद सोनू अपने कमरे में चला गया और राहुल भी अपने कमरे में जा रहा था की पीछे से उसे आवाज देते हुए अलका बोली।

बेटा मेरे कमरे में आकर वह दे जाना। ( इतना कहकर अलका मुस्कुराने लगी राहुल भी मुस्कुरा कर अपने कमरे में चला गया वह भी उत्सुक था अपनी मां के कमरे में जाने के लिए क्योंकि आज फिर से बिस्तर पर अपनी कला बाजिया दिखाना चाहता था वह तड़प रहा था अपनी मां की बुर में अपना लंड डालने के लिए। राहुल भैया अच्छी तरह से जानता था कि संभोग सुख का संतुष्टि भरा एहसास जो उसकी मां से मिलता था वह किसी से भी नहीं मिल पाता था। कमरे में जाते हुए उसके लंड में संपूर्ण तनाव बना हुआ था। यह तनाव को बने हुए आधे घंटे से ज्यादा हो चुका था लेकिन राहुल इतना ज्यादा उतेजित था की उसके लंड का तनाव थोड़ा सा भी कम नहीं हो रहा था।

 
दूसरी तरफ रसोई घर साफ करते हुए अलका भी अपने बेटे के लंड के बारे में सोच-सोच कर उत्तेजित हुए जा रही थी आज उसने ठान ली थी थी आज एक बार फिर से जमकर अपने बेटे से चुदेगी। यही सोचते हुए वह बार-बार साड़ी के ऊपर से ही अपनी बुर को मसल दे रही थी जिसकी वजह से उसकी कामोत्तेजना और ज्यादा बढ़ जा रही थी। जल्दी-जल्दी रसोई घर की सफाई करके वह अपने कमरे में पहुंच गई लेकिन दरवाजे को खुला छोड़ दी, ऊसकी कड़ी नहीं लगाई थी ताकि राहुल बेझिझक अंदर आ सके। कमरे में जाते ही अलका ने अपनी साड़ी उतार फेंकी और आईने के सामने ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी होकर अपने चेहरे को निहारने लगी। अपने बदन को एकटक निहारते हुए वह मुस्कुराने लगी। अपने बदन को देख कर चेहरे पर आई मुस्कुराहट के राज को वह भी अच्छी तरह से जानती थी। उसे अच्छी तरह से पता था कि इस उम्र में भी उसके बदन में जवानी भरपूर तरीके से बरकरार थी।

वह धीरे धीरे अपनी हथेलियों को ब्लाउज के ऊपर से ही अपनी दोनों चुचीयों पर रखकर हल्के-हल्के दबाने लगी।

राहुल को भी अपनी तरफ बर्दाश्त नहीं हो रही थी वह तुरंत बिस्तर पर से उठा और अपनी मां के कमरे की तरफ चल दिया। अपनी मां के कमरे के दरवाजे पर पहुंचा तो उसे पता चल गया कि दरवाजा खुला हुआ है और वह दरवाजे को हल्कै से धक्का दिया तो दरवाजा खुल गया और फिर वह कमरे में प्रवेश करके सामने नजर करते हुए दरवाजे को बंद कर दिया। सामने नजर पढ़ते ही उसने देखा कि उसकी मां की बदन से साड़ी उतरकर नीचे फर्श पर गिरी हुई थी, और वह सिर्फ इतना उजड़ पेटीकोट में आईने में अपने आप को भी निहार रही थी। अलका को भी पता चल गया था कि उसका बेटा कमरे में आ गया है इसलिए उसके बदन में एक अजीब तरह की गुदगुदी होने लगी। उसकी सांसे उत्तेजना के नारे भारी हो चली। राहुल मन में ढेर सारे अरमान लिया अपनी मां की तरफ बढ़ा, कल का पीछे मुड़कर बिल्कुल भी देखने की सुध नहीं ली वह बस राहुल के कदमों की आवाज को सुनकर अपने बदन में सुरसुराहट का एहसास कर रही थी। राहुल के पेंट में तनाव पूर्ण रुप से बना हुआ था जो कि कुछ ज्यादा ही तना हुआ लग रहा था। राहुल सीधे ही पीछे से आकर अपनी मां को बाहों में भर लिया और बाहों में भरने के साथ ही उसने अपनी दोनों हथेलियों को ब्लाउज के ऊपर से ही उसके बड़े बड़े चुचियों पर रख दिया और अपने पैंट में बने हुए तनाव को पेटीकोट के ऊपर से ही गोल गोल गांड की फांकों के बीच धंसाते हुए अपनी कमर को आगे की तरफ बढ़ा दिया। राहुल की इस हरकत से अलका कसमसाते हुए एकदम से मचल उठी और उसके मुंह से हल्की सी शिसकारी निकल गई।

सससहहहहहह.....राहुल......

और राहुल खाकी ब्लाउज के ऊपर से ही अपनी मां की चुचियों को दबाते हुए अपने लंड को पैंट के ऊपर से ही उसमे बने तंबू को अपनी मां की गांड के बीचोंबीच पेटीकोट के ऊपर से ही धंसाने लगा। राहुल एक साथ दोनों का मजा ले रहा था अपनी मां की भरावदार गांड पर अपने लंड को रगड़ते हुए और उसकी दोनो चुचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही हथेली में भर भर कर दबाते हुए आनंद के सागर में गोते लगा रहा था। अलका मदहोश में जा रही थी उसकी बुर पूरी तरह से गीली हो कर चिपचिपी हो गई थी राहुल भी अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां पेंटी नहीं पहनी है, क्योंकि उसकी उतारी हुई पेंटी तो उसके पास में ही थी।

राहुल अपनी मां की उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाते हुए अपने पैंट में से उसकी पैंटी को निकाल कर उसकी आंखों के सामने अपनी उंगलियों से पकड़कर लहराने लगा। इस तरह से राहुल को उसकी ही पैंटी हाथों में लेकर उसकी आंखों के सामने लहराते हुए देखकर अलका मुस्कुराने लगी और अपने बेटे के हाथों से पेंटिं को छीनते हुए बोली।

त)

ुईसे पागलों की तरह अपनी नाक से लगाकर मदहोश होकर क्यों सुंघता है? तुझे ऐसा करने मे गंदा नहीं लगता (अलका एकदम कामुक होकर बोल रही थी। )

ऊममममम.....मम्मी... (गर्दन को चूमते हुए बोला)

तुम्हें क्या मालूम इसमें कितना मजा मिलता है।

इसमें क्या मजा मिलता है?

( ब्लाउज के बटन को खोलते हुए) ओह मम्मी पेंटिं पर तुम्हारे बुर की खुशबू सिमटी हुई होती है जिसे मैं नाक से खींचकर एक दम मस्त हो जाता हूं। ( अपने बेटे की इस तरह की बात को सुनकर वह मदहोश हुए जा रही थी) ऐसा लगता है कि जैसे मैं तुम्हारे पेंटी नहीं बल्कि तुम्हारी बुर पर नाक लगाकर सुंघ रहा हूं। ( इतना कहने के साथ ही वह अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन को खोल दिया।)

तू चाहे तो बुर में भी नाक लगा कर सुघ सकता है फिर क्यों पेंटी को नाक लगाकर सुंघता है। ( इतना कहने के साथ ही वह अपने बदन को कमान की तरह पीछे की तरफ झुका कर अपने बेटे को ब्लाउज निकालने का इशारा कर दी क्योंकि वह आईने में देख चुकी थी कि उसके बेटे ने ब्लाउज के सारे बटन खोल दिए थे। राहुल भी अपनी मां के इश ईसारे को समझ गया था की वह अब अपने ब्लाउज को ऊतरवाना चाहती थी, और बुर में नाक लगाकर सुंघने के इशारे को भी समझ गया था, अच्छी तरह से समझ गया था कि उसकी मां अब ऊससे अपनी बुर चटवाना चाहती थी' और राहुल खुद बेताब था अपनी मां की बुर को चाटने के लिए लेकिन पहले वह अपनी मां के ब्लाउज को उतारने के लिए उसके कंधे पर से ब्लाउज की किनारीे को पकड़कर पीछे की तरफ खींचने लगा और अगले ही पल उसके बदन के ब्लाउज बाहों से होता हुआ निकल गया। इस वक़्त उसकी मां सिर्फ ब्रा और पेटिकोट पर आईने के सामने खड़ी थी और राहुल पीछे से उससे बराबर सटा हुआ ब्रा के ऊपर से ही उसकी चूचियों को दबा रहा था। कमरे का माहौल पूरी तरह से गर्म हो चुका था। अलका के मुंह से रह रहकर सिसकारी की आवाज निकल जा रही थी राहुल आईने में अपने और अपनी मां को देखते हुए उसकी बड़ी बड़ी चुचियों को ब्रा के ऊपर से ही दबाए जा रहा था। उत्तेजना के मारे अलका का चेहरा लाल टमाटर की तरह तमतमा रहा था। अलका के हॉठ हलके से खुले हुए थे जिससे उसके मोतियों की तरह चमकते हुए दांत दिख रहे थे जिसकी वजह से उसकी खूबसूरती में और भी ज्यादा इजाफा हो रहा था। राहुल के भी सब्र का बांध टूट रहा था वह हल्की-हल्की अपनी कमर को अपनी मां के नितंबों पर हिलाते हुए आगे पीछे करने लगा ऐसा करने में उसे बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी और अलका भी मदमस्त हुए जा रही थी राहुल ब्रा के हुक को खोले बिना ब्रा के कप के नीचली किनारी को

पकड़ कर आगे की तरफ खींच कर उसे क्यों क्योंकि वक्त पर चढ़ा दिया जिससे अलका के दोनों बड़ी-बड़ी नारंगीया तनकर सामने आईने में दिखने लगी अपनी मां की बड़ी बड़ी चुचियों की खूबसूरती देखकर राहुल से रहा नहीं गया और उसने दोनों निप्पलों को अपनी उंगलियों के बीच लेकर उसे मसलते हुए सुराहीदार गर्दन को चूमने लगा। अलका उत्तेजना में इतनी ज्यादा सरो बोर हो चुकी थी कि जल बिन मछली की तरह तड़प रही थी। और वह खुद अपने दोनों हाथ को पीछे की तरफ लाकर अपने बेटे के नितंबों पर रखकर उसे अपने बदन से और ज्यादा सटाने लगी जिससे राहुल का लंड पेटीकोट के ऊपर से ही हल्के-हल्के उसकी बुर वाली जगह पर ठोकर लगाने लगा इससे अलका की तड़प और ज्यादा बढ़ गई। मुझसे बर्दाश्त कर पाना मुश्किल हो जा रहा था और राहुल हल्के हल्के अपनी कमर को हिलाता हुआ बड़ी बड़ी चुचियों को मचल मचल कर एकदम लाल टमाटर की तरह कर दिया। दोनों के मुख्य से हल्की हल्की सिसकारी निकल जा रही थी दोनों अपनी उत्तेजना को दबाने में नाकामयाब साबित हो रहे थे। ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में अलका का गोरा बदन मक्खन की तरह चमक रहा था जिसे देखकर कोई भी उसका दीवाना हो जाए। चुचियों का कद उत्तेजना के मारे थोड़ा सा बढ़ गया था और उसकी छोटी सी निप्पल तनकर छोटी ऊंगली की तरह हो चुकी थी दोनों एक दूसरे में खो चुके थे आईना दोनों के रूप रंग को अच्छी तरह से बयां कर रहा था।

सससहहहहहह.....राहुल..... मुझसे रहा नहीं जा रहा है राहुल.....ऊफ्फफ..... कुछ कर राहुल मेरा अंग अंग तेरे मिलन के लिए तड़प रहा है। ( अलका कामुकता भरी आवाज में राहुल से बोली राहुल समझ गया था कि उसकी मां बेहद उत्तेजित हो चुकी है और अनुभवी हो चुका राहुल इतना तो समझता ही था कि अब क्या करना है इसलिए वह चुचियों पर से अपनी हथेली को हटाकर उसकी ब्रा के हुक को खोलने लगा। अलका भी तुरंत हरकत में आई उसे भी एक पल भी गंवाना गवारा नहीं था। इसलिए वह खुद अपने हाथों से पेटीकोट की डोरी को खोलने लगी, राहुल आईने में अपनी मां की उत्तेजना और उसके जल्दबाजी के साफ साफ देख पा रहा था। अपनी मां की जल्दबाजी को देख कर राहुल के लंड का तनाव इस हद तक बढ़ गया कि उसे अपने लंड में हल्का हल्का दर्द सा महसूस होने लगा। अलका ने पेटीकोट की दूरी को अपने नाजुक नाजुक उंगलियां की सहायता लेकर खुल चुकी थी और उसकी दोनों तरफ के छोरों को पकड़कर नीचे की तरफ सरकाने लगी, जैसे ही उसने पेटीकोट को जांघों तक लाइ उसमें पेटीकोट को छोड़ दी और हल्की हल्की अपने जांघो को झटकते हुए पेटीकोट को नीचे पैरों में गिरा दी। और गिरी हुई पेटीकोट को पैरों में से निकालकर एक साइड में कर दी इस समय अलका संपूर्ण निर्वस्त्र अवस्था में आईने के सामने खड़ी थी राहुल को जैसे ही यह एहसास हो गया कि इसकी मां के बदन पर एक भी कपड़ा नहीं है और वह पूरी तरह से नंगी खड़ी है तो वह अपना आपा खोते हुए चुचियों को हथेली में भरकर जोर जोर से दबाने लगा। और चुचियों को दबाते दबाते एक हाथ को नीचे जांघो के बीच में ले जाकर हल्के हल्के बालों से भरी बुर को सहलाने लगा। अपनी गरम-गरम और फूली हुई बुर पर अपने बेटे की हथेली का स्पर्श होते ही अलका पूरी तरह उत्तेजना से भर गई और हथेली की रगड़ से उसके मुंह से सिसकारी निकल पड़ी।

आाहहहहहहह...राहुल..... अब बर्दाश्त कर पाना बड़ा मुश्किल हुए जा रहा है कुछ कर राहुल ........

राहुल अपनी मां की उत्तेजना भरी आवाज सुनकर तड़प ऊठा। ऊसका मोटा लंड भी गांड की दरारों में फंसकर गदर मचाई हुए था। राहुल समझ गया था कि अब समय आ गया है ऊसे बिस्तर पर ले जाने का। एक बार तो उसके दिमाग में आया कि वह अपनी मां को गोद में उठाकर बिस्तर तक ले जाए। लेकिन वह अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां का बदन भारी था जोकि उससे उठाया नहीं जा पाता, इसलिए वह जोश में होश नहीं खोना चाहता था।

राहुल अपनी मां का हाथ पकड़कर बिस्तर तक ले गया और बिस्तर के किनारे पर उसके गुलाबी होंठों को चूमते हुए अपने दोनों हाथों को उसकी चिकनी पीठ पर फीराते हुए उसके भरावदार नितंबों पर ले जाकर कस के दबाते हुए उसे बिस्तर पर झुकाते हुए खुद उसके ऊपर झुकता चला गया। धीरे-धीरे राहुल ने अपनी मां के गुलाबी होठों को चूसते हुए और उसके भरावदार नितंबों को मसलते हुए उसे बिस्तर पर लिटा दिया ' दोनों की सांसे तेज चल रही थी दोनों संभोग की कला में लिप्त होने के लिए पूरी तरह से तैयार थे। अलका आहें भरते हुए प्यासी नजरों से अपने बेटे की तरफ देख रही थी और राहुल धीरे-धीरे करके अपने कपड़े उतार रहा था

अगले ही पल राहुल अपने सारे कपड़े ऊतार कर नंगा हो गया अपने बेटे का गठीला बदन देखकर उसकी बुर चोदने की चिकने लगी। राहुल का लंड तनकर छत की तरफ मुँह ऊठाए खड़ा था जिस पर अलका की नजर पड़ते ही उत्तेजना और खुशी के मारे गदगद हो गई। राहुल एक हाथ से अपने खड़े लंड को पकड़ कर ऊपर नीचे करते हुए हिलाने लगा। अपने बेटे के दमदार लंड को इस तरह से हिलते हुए देखकर उसके मुंह में पानी आ गया। एक हाथ से लंड को हिलाते हुए राहुल बोला ।

स्सहहहहहहहह.... तुम बहुत सेक्सी हो मम्मी तुम्हें नंगी देखकर तो मेरी हालत खराब हो जाती है। तुम्हारी यह बड़ी बड़ी चूचियां ऊफ्फ.... इन्हें देखते ही मेरा मन करता है कि इन्हें मुंह में भर कर जोर-जोर से दबाते हुए ईसका सारा रस पी जाऊं।

( अपने बेटे के मुंह से अपनी तारीफ सुनकर अलका प्रसन्नता के साथ उत्तेजना का भी अनुभव कर रही थी और चूची की जाने वाली बात को सुनते ही उसके हाथ खुद-ब-खुद चूचियों पर पड़ी गई और वह खुद ही अपनी चुचियों को दबाने लगे और चुचियों को दबाते हुए बोली।)

सब कुछ तेरा ही है बेटा तेरा जो मन में आए वो कर मेरे साथ तेरे प्यार के बिना मैं अधूरी हूं ना जाने कैसे इतने वर्षों तक में तेरे इसके लिए ( लंड की तरफ इशारा करते हुए) प्यासी तड़पती रही। बस अब मुझे तड़पा मत बुझा दे मेरी बुर की खुजली तेरे लंड से।

दोनों के बीच की यह गंदी बातचीत माहौल को और ज्यादा गर्म कर रहे थे और दोनों आपस में खुल भी रहे थे। दोनों आपस में इस तरह की बात करके और भी ज्यादा काम उत्तेजना का अनुभव कर रहे थे। सभी अपनी चुचियों को मसलते हुए अलका बोली।

बस बेटा अब और मत तड़पा आजा मेरी बाहों में ओर बुझा दे मेरी प्यास को।( इतना कहने के साथ ही वह अपनी मोटी मोटी जांघों को फैला दी। यह देखकर राहुल से रहा नहीं गया और वह, अपनी मां की जांघो के बीच में पलंग के नीचे घुटनों के बल बैठ गया और अलका उसको देखकर कुछ समझ पाती ईससे पहले ही उसने अपने होंठ को अपनी मां की तपती हुई बुर की गुलाबी पत्तियों पर रख कर चुसना शुरु कर दिया। अपने बेटे की इस हरकत पर तो अलका एकदम बदहवास हो गई, अपनी बुर चटाई से उसकी आंखों में नशा छाने लगा, राहुल बार-बार अपनी जीभ के छोर से अपनी मां की बुर की गुलाबी पत्तियों को छेड़ रहा था। जिससे अलका उत्तेजित होकर एकदम मदहोश होने लगी अपने दोनों हाथ से अपने बेटे का सिर पकड़कर अपनी बुर पर दबाते हुए गरम गरम सिसकारी लेना शुरु कर दी। कुछ ही देर में युं ही बुर चाटने चटवाने से दोनों एकदम मदहोश हो गए। अलका लगातार गरम सिसकारी लेते हुए अपने बेटे को चोदने के लिए उकसा रहीे थी।

ससससहहहहहहह...।आहहहहहहहह राहुल..... अब और मत तड़पा मुझे डाल दे अपने मोटे लंड को मेरी बुर में देख केसे तड़प रही है तेरे लंड के लिए....सहहहहह.... बस इंतजार मत कर..अपने लंड को डाल कर चोद मुझे ..:.

अपनी मां की गरम सिसकारी सुनंकर और चुदवाने की तड़प को देखकर राहुल भी ऊत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच गया वह भी तड़प रहा था अपनी मां की बुर में अपना लंड डालकर चोदने के लिए इसलिए वह अपनी मां की रसीली बुर पर से अपना मुंह हटा लिया और जांघों के बीच घुटने रखकर अपनी मां की मांसल जांघों को पकड़कर अपनी तरफ खींचते हुए पलंग के किनारे कर दिया। अब उसकी मां की बुर और लंड के बीच बस दो अंगूल का ही फासला रह गया था जिसे राहुल ने अगले ही पल लंड के सुपाड़े को बुर के गुलाबी पत्तियों के बीच रखकर व फासला भी मिटा दिया। अपने बेटे के लंड के सुपाड़े को अपनी गुलाबी बुर पर महसूस करते ही उसका बदन कमान की तरह एेंठ गया। उसके बदन में जैसे चुदास की लहर भर गई हो इस तरह से वह उत्तेजित हो गई। एक बार फिर से राहुल अपनी मां को चोदने जा रहा था उसकी मां खुद ही अपनी चुचियों को जगाते हुए अपने बेटे के धक्के को सहने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी। वह इसी इंतजार में थी कि कब उसका बेटा अपने दमदार और तगड़े लंड को उसकी बुर में अंदर डालता है और राहुल भी पूरी तरह से लंड को अपने मां की गुलाबी बुर की पत्तियों पर टाकाए हुए अपनी कमर को धीरे धीरे आगे की तरफ सरका रहा था। बुर काम रस से एकदम गीली होकर चिपचिपी हो गई थी, इसलिए लंड का मोटा सुपाड़ा

धीरे-धीरे बुर के अंदर सरक रहा था। धीरे धीरे लंड का मोटा सुपाड़ै सरकते हुए अलका की बुर में उतर गया।

 
एक पल तो अलका दर्द से बिलबिला उठी क्योंकि बुर में लंड लिए उसे 15 दिन जैसे बीत चुके थे इसलिए उसे यह दर्द का एहसास हो रहा था। उसका दर्द कम होता है इससे पहले ही राहुल ने एक जोरदार धक्का लगाया और इस बार बुर की चिकनाहट पाकर लंड बूर के अंदर की सारी अड़चनों को दूर करता हुआ बुर की गहराई मे उतर गया। इस बार तो अलका को और भी ज्यादा वेदना होने लगी राहुल वैसे का वैसा बुर में लंड ठुंसकर अपनी मां के ऊपर ही लेटा रहा और उसकी मां दर्द से बिलबिलाते हुए बोली।

आहहहहहहहहह.....ऊईईईईई....।मां .....मर गई रे....

ऊफ्फ....निकाल ईसे बाहर....तेरा लंड है की गधे का लंड है रे.. मेरी तो जान ही निकली जा रही है .( दर्द से छटपटाते हुए अपने सिर को दाए बाए पटक रही थी। राहुल कुछ देर तक ऐसे ही रुका रहा और आगे अपने दोनों हाथ को बड़ा कर बड़ी बड़ी चुचियों को थामते हुए बोला।)

बस बस मम्मी को थोड़ा सा रुक जाओ थोड़ी ही देर में तुम्हें परम आनंद की अनुभूति होने लगेगी। ( राहुल अपनी मां के दर्द को कम करने के लिए कुछ देर तक यूं ही चुचियों को मसलता रहा और वाकई में थोड़ी ही देर में अलका जो कुछ देर पहले दर्द से तड़प रहे थे वह अब खुद अपने हाथ को राहुल के हाथ पर रखकर अपनी चुचियों को दबाने में मदद करने लगी और गरम सिसकारी लेने लगी। राहुल समझ गया कि आप मामला बिल्कुल फिट है इसलिए वह धीरे से अपने लंड को बुर से बाहर की तरफ खींचा बुर के अंदर सिर्फ लंड के सुपाड़े को हल्के से रहने दिया और बाकी का सारा लंड बुर के बाहर निकाल लिया इसके बाद अपनी मां की मांसल जांघों को हथेलियों में दबोचे हुए एक जोरदार धक्का लगाया और फिर से लंड बुर की गहराई में ऊतरते हुए सीधे बच्चेदानी से जा टकराया। इस बार फिर से अलका की चीख निकल गई लेकिन इस बार अपनी मां के दर्द की परवाह किए बिना ही वह लंड को बुर के अंदर बाहर करना शुरु कर दिया। अब राहुल अपनी मां को धीरे-धीरे चोद रहा था और साथ ही चुचियों को भी दबाए जा रहा था। इससे अलका को दुगना मजा मिल रहा था राहुल कुछ देर तक यूं ही धीरे-धीरे चोट लगाता रहा। लेकिन अपनी मां की गरम सिसकारी को सुनकर वह अपने धक्के तेज कर दीया।

अलका की गरम सिसकारी से पूरा कमरा गूंज रहा था और राहुल था कि रुकने का नाम नहीं ले रहा था। राहुल धड़ाधड़ अपनी मां की बुर में धक्के पर धक्का लगाता रहा और उसकी मां हल्की-हल्की चीख के साथ गर्म आहें भरते हुए सिसकारी लेती रही। अपनी मां की मादक सिस्कारियों को सुनकर राहुल के धक्के और ज्यादा तेज होने लगे।पुच्च पुच्च की आवाज से पूरा कमरा गूंज रहा था बहुत दिनों के बाद दोनों आज चुदाई का मजा ले रहे थे इसलिए कुछ ज्यादा ही लिपट चिपट रहे थे। पंखा चालू होने के बावजूद भी दोनों के बदन से पसीना टपक रहा था। दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे अलका भी मदहोश हो करके अपने बेटे की हर एक ठाप का जवाब नीचे से अपनी कमर को उचका कर दे रही थी। दोनों की चुदाई खासा टाइम तक चल रही थी दोनों अब चरमोत्कर्ष की तरफ बढ़ रहे थे। दोनों की सांसे तेज गति से चलने लगी और दो चार धक्कों के बाद ही दोनों एक दूसरे के बदन से कस के लिपटते हुए

झड़ना शुरु कर दिए। दोनों अपने लक्ष्य को प्राप्त कर चुके थे। दोनों एक दूसरे की बाहों में लंबी सांसे लेते हुए झड़ रहे थे। राहुल ने सुबह 5:00 बजे तक अपनी मां की जमकर चुदाई किया। अलका एकदम मस्त हो कर चुदाई का सुख भोग कर एक दूसरे की बाहों में बाहें डाले कब नींद की आगोश में चले गए दोनों को पता नहीं चला।

दरवाजे पर जोर जोर की दस्तक की आवाज सुनकर अलका की नींद खुली तो वह सामने टंगी दीवार घड़ी में समय देखते ही हड़बड़ा गई, वह बिस्तर से उठने को हुई तो उसे एहसास हो गया कि वह पूरी तरह से नंगी लेटी हुई थी। बगल में राहुल वह भी पूरी तरह से नंगा लेटा हुआ था उसका लंड उसकी जांघों के बीच से ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अलका को ही देख रहा हो। अलका की नजर उस पर पड़ते ही वह मुस्कुराने लगी इस समय उसके लंड को ढीले अवस्था में देख कर यकीन कर पाना बड़ा मुश्किल हो रहा था कि रात भर यह अपनी मां की बुर में गदर मचाए हुआ था। बाहर दरवाजे पर लगातार दस्तक हो रही थी अलका को समझते देर नहीं लगी की दरवाजे पर सोनू ही खड़ा है। वह अब तक दरवाजे को पीट रहा था लेकिन कुछ देर बाद वह बाहर खड़ा होकर दरवाजे पर दस्तक देते हुए बुलाने लगा।

मम्मी मम्मी आज कितना लेट हो गया है अभी तक सो रही हो क्या?

इस बार सोनू की आवाज सुनकर राहुल भी जाग गया।

अपनी और अपनी मां की हालत पर गौर करते ही वह भी घबरा गया।

अब क्या होगा मम्मी बाहर तो सोनू खड़ा है? ( राहुल घबराते हुए अपनी मां से बोला उसकी मां को भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या कहे लेकिन फिर वह राहुल को वैसे ही लेटे रहने को कहा और खुद अपने बदन पर चादर लपेट कर अपने नंगे बदन को छुपाने की कोशिश करते हुए राहुल को बोली।

रुक जा मैं देखती हूं तू बस लेटे रह उठना नहीं।

ठीक है मम्मी।

( अलका बिस्तर पर से नीचे खड़ी हुई और चादर को अपने बदन पर साल की तरह ओढकर उसकी किनारी को अपने चुचियों की तरफ मुट्ठी बाँध की पकड़ ली और दरवाजे की तरफ जाने लगी।)

रुक जा बेटा ऐसे ही दरवाजे को थपथपाते ही रहेगा कि शांति से खड़ा भी रहेगा, आती हूं।

इतना कहने के साथ अलका दरवाजे तक पहुंच गई और अपने अंगो को चादर की ओट से छुपाते हुए धीरे से दरवाजा खोली और सिर्फ इतना ही खोली की सिर्फ उसका चेहरा ही दिख सके। जैसे ही दरवाजा खोलि सामने सोनू खड़ा था। और सोनू को देखते ही बोली।

क्या हुआ बेटा इतनी जोर-जोर से दरवाजा क्यों पीट रहे हो?

मम्मी पहले घड़ी में देखो तो कितना समय हुआ है आज आप लेट हो चुकी है।

हां बेटा मुझे मालूम है थोड़ा तबीयत ठीक नहीं था इसलिए नींद नहीं खुली (जम्हाई लेते हुए बोली)

बात करते समय अलका से हल्का सा दरवाजा खुल गया और सोनू अपनी मां को गौर से ऊपर से नीचे तक देख रहा था उसकी नजर तभी बिस्तर पर पड़ी तो उस पर राहुल लेटा हुआ था उसे देखते ही वह बोला।

भाई यहां क्यों सोया है मम्मी? ( सोनू के इस सवाल से अलका थोड़ा सा हड़बडा़ गई और हड़बडाते हुए बोली।

वो वो वौ... उसके कमरे का पंखा चल नहीं रहा था इसलिए गर्मी की वजह से वह मेरे पास आ गया सोने, अच्छा तुम चल कर तैयार हो मैं जल्दी से नहाकर आती

हुं। ( अलका बात को बदलते हुए बोली और वह भी अच्छी तरह से जानती थी कि सोनू की उमर अभी यह सब समझ सके ऊतनी नहीं हुई थी, लेकिन तभी उसे राहुल का ख्याल आ गया जिसे कुछ दिन पहले तक भोला समझती थी और वही भोला लड़का आज दिन रात उसकी बुर को रगड़ रहा था यह ख्याल मन में आते ही ऊसके चेहरे पर मुस्कुराहट बिखर गई। सोनू के चाहते हैं वह दरवाजा बंद करके राहुल को बाहर जाने का इशारा किया लेकिन वह उसका उससे पहले ही वह किस हाल में थी वैसे ही चादर लपेटे हुए ही वह अपने बाथरुम में चली गई।

आज स्कूल जाने में लेट तो हुआ ही था घर से निकलते निकलते राहुल अपने ही फूल के गमले से एक गुलाब का फूल तोड़कर उसे जेब में रख लिया। स्कूल में पहुंचते ही वह सबसे पहले नीलू से मिला और नीलू से मिलते ही अपने जेब से गुलाब का फूल निकालकर नीलू को थमाते हुए बोला ।

आई लव यू नीलू आई लव यू । ( राहुल के इस तरह के रोमांटिक प्रपोजल से नीलू बेहद प्रसन्न हुई। उसके चेहरे पर असीम प्रसन्नता के भाव साफ-साफ झलक रहे थे। उसे इस बात पर बिल्कुल भी यकीन नहीं हो रहा था कि राहुल उसे इस तरह से प्रपोज कर रहा है क्योंकि वह जानती थी कि राहुल बेहद शर्मीला लड़का था। इसलिए आज उसकी यह अदा देखकर नीलू के तो वारे न्यारे हो गए। नीलू भी मुस्कुराकर फूल को अपने पर्स में रखते हुए लव यु टू कहकर अपने गहरे प्यार का ठप्पा लगा दी। विनीत की गेर हाजिरी में दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा था दोनों एक दूसरे के बिना अब बिल्कुल भी रह नहीं सकते थे। नीलु उसे कभी फिल्म देखने तो कभी पार्क में सब जगह पर उसे साथ में लेकर घूमने लगी। नीलू अब उसे सीरियसली प्यार करने लगी थी हालांकि इस प्यार के पीछे भी उसका शारीरिक सुख को भोग लेने की आकांक्षा छुपी हुई थी लेकिन इसके साथ ही उसका प्यार भी गहराता जा रहा था। स्कूल के ऊपरी मंजिल पर दोनों सबसे नजरें बचाकर मिल ही लेते थे और खाली पड़े क्लास में अक्सर दोनों एक दूसरे के अंगों से छेड़छाड़ करने का पूरा फायदा उठाते थे। दिन गुजरता जा रहा है स्कूल से घर पहुंचने के बाद वह अपनी मां की बाहों में खो जाता था उसकी मां ने अपने सारे अरमान अपने बेटे से ही पूरा कर रही थी दिन रात जब भी मौका मिलता अपनी बुर की खुजली मिटाने के लिए अपने बेटे के लंड पर सवार हो जाती थी। और विनीत की भाभी से भी फोन पर लगातार बात हो रही थी वह फोन पर ही अश्लील बातों का सहारा लेकर के उसका पानी निकालने में ऊसकी मदद करता और साथ ही खुद भी विनीत की भाभी के गंदी बातें सुनकर गर्म हो जाता और अपने लंड को हिला कर अपने आप को शांत कर लेता। राहुल तीनो औरतों में उलझा हुआ था तीनो का प्यार उसे बराबर मिल रहा था। एक का भी साथ छोड़ देना उसके लिए गवारा नहीं था और ना ही तीन औरतों में से कोई भी उसका साथ छोड़ना चाहती थी। रोज रात को वह अपनी मां के कमरे में जाता है या तो खुद ही उसकी मां उसके कमरे में आ जाती और फिर वासना का जबरदस्त खेल बिस्तर पर खत्म होता।

एक दिन स्कूल से छूटने के बाद नीलू राहुल को पीछे बैठा कर उसके चौराहे तक छोड़ने जा रहे थी। नीलू को भी काफी दिन हो गए थे राहुल के लंड से चुदवाए उसकी बुर राहुल के लंड की प्यासी हुए जा रही थी। लेकिन राहुल के लंड को अपनी बुर में लेने का उसे कोई मौका हाथ नहीं लग रहा था। चुम्मा चाटी एक दूसरे के अंगों से खेलना उसे से जलाना और यहां तक की तलाश में नीलू उसके लिंग को मुंह में लेकर भी झाड़ देती थी लेकिन उसे अपनी बुर में लेने का मौका नहीं मिल पा रहा था इसलिए वह उससे जी भर के और खुल के चुदवाना चाहती थी. इसलिए रास्ते में वह राहुल से बोली।

क्या राहुल तुम तो मेरी अब किसी भी सब्जेक्ट में मदद करने के लिए मेरे घर नहीं आते। ( नीलू की यह बात सुनकर राहुल के बदन में गुदगुदी होने लगी क्योंकि सब्जेक्ट में मदद करने का मतलब वह अच्छी तरह से जानता था वह भी कुछ दिनों से तड़प रहा था नीलू की टाइट बुर चोदने के लिए, इसलिए वहां ठंडी आहें भरता हुआ बोला।)

कभी तुम बुलाओगी नहीं तो मैं आऊंगा कैसे ,मैं भी तो तड़प रहा हूं तुम्हारे सब्जेक्ट में मदद करने के लिए।

( राहुल की बात सुनकर नीेलु मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली।)

सच राहुल क्या तुम भी वैसे ही तड़पते हो जैसे में तड़पती हुं।

( स्कूटी पर बैठे-बैठे अपने दोनों हथेलियों से नीलूं की कमर पकड़ते हुए वह बोला।)

सच बोलूं मैं भी बहुत तड़पता हूं तुममें एकाकार होने के लिए, तुम्हारे बदन की कुंवारी खुशबू को अपने बदन में उतारने के लिए। तुम्हारे यह दोनों( चुचियों की तरफ इशारा करते हुए) नारंगीयो को दबा दबा कर उसे मुंह में ले कर पीने के लिए।

( राहुल के हथेलियों का अपनी कमर पर कसाव और उसकी गर्म बातें सुनकर नीलू मस्त होने लगी। वह कुछ बोल पाती उससे पहले ही वह चौराहा आ गया जहां उसे उतरना था। जैसे ही राहुल स्कूटी से नीचे उतरा नीलू चेहरे पर कामुक भाव लाते हुए बोली।)

राहुल मेरी जान कल घर पर मैं बिल्कुल अकेली हूं और कल छुट्टी भी है ओर कल मम्मी सुबह से ही देर शाम घर पर नहीं रहेंगी वह किसी पार्टी में जाएगी इसलिए कल मेरे घर जरुर आना मेरे सब्जेक्ट पर ध्यान देने के लिए। ( नीलू ने सब्जेक्ट शब्द बोलते ही राहुल को आंख मारी थी क्योंकि वह दोनों सब्जेक्ट का मतलब अच्छी तरह से जानते थे। राहुल भी छुट्टी के दिन उसके घर पर ही दिन गुजारने का फैसला करते हुए हामी भर दिया। और नीलू ओके बाय बोलते हुए वहां से चली गई।)

 
छुट्टी का दिन आते ही राहुल का रोम रोम पुलकित होने लगा क्योंकि उसे मालूम था कि आज सारा दिन उसे नीलू की नंगी बाहों में गुजारना है। उसकी कोमल बूर की

मादक गंध को अपने बदन में उतारकर उत्तेजित होकर उसे जी भरकर चोदना है यह सब सोचकर ही राहुल मस्त हुए जा रहा था उसके लंड का तनाव पैंट में बढ़ने लगा था । वह अपने लंड के बढ़ते हुए आकार को पेंट के ऊपर से ही मसनते हुए रसोईघर में गया और फिर दरवाजे पर ही खड़ा होकर अपनी मां का पिछवाड़ा घूरने लगा। गोल-गोल भरावदार पिछवाड़ा देवकर राहुल से बिल्कुल भी सब्र करना मुश्किल होने लगा। वैसे भी सुबह से ही नीलू का ख्याल करते करते उसके बदन में उत्तेजना रह-रहकर बढ़ती जा रही थी वह एकदम से चुदवासा हो चुका था और इस समय उसे बुर की जरूरत थी जिसमें वह अपना लंड डालकर शांत हो सके। वैसे भी सारी रात अलका ने उसे सोने नहीं दि थी, रात भर चुदाई का खेल जोरों शोर पर चलता रहा कभी राहुल ऊपर तो कभी आलका उपर कभी झुक कर तो कभी घोड़ी बनकर सारे संभोग के आसन वह रात को आजमा चुके थे। लेकिन फिर भी यह बदन की प्यास एेसी थी की बुझाने से भी नहीं बुझ रही थी। राहुल से रहा नहीं गया और वह पीछे से जाकर अपने तने हुए लंड को अपनी मां की भरावदार नितंबों से सटाते हुए उसे पीछे से अपनी बाहों में भर लिया तने हुए लंड का स्पर्श अपने भारी नितंबों पर होते ही हल्का उचक ते हुए बोली।

छोड़ मुझे छोड़ पागल हो गया है क्या तू देख नहीं रहा है कि सोनू भी यहीं बैठा हुआ है। ( अपनी मां की बात सुनते ही उसका ध्यान सोनु पर गया तो वह भी हड बढ़ाते हुए सोनू की तरफ देखने लगा जोकि रसोईघर के बाहर बैठकर पढ़ाई कर रहा थ

राहुल सोनू को देखते ही तुरंत अपनी बाहों के घेरे से अपनी मां को आजाद करते हुए दूर खड़ा हो गया।

अलका यह देख कर मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए सब्जी चलाने लगी और सब्जी चलाते हुए बोली।

रात भर मेरे अंदर डाल कर मेरे ऊपर चढ़ा रहा और फिर भी तुझे अभी नशा चढ़ा है।

क्या करूं मम्मी तुम्हारा पिछवाड़ा देख कर मुझसे रहा है जाता न जाने मुझे क्या होने लगता है । देखो तो सही(लंड की तरफ ईशारा करते हुए) मेरी हालत कैसे हुए जा रही है। मुझसे इस समय सब्र करना नामुमकिन सा हूआ जा रहा है।

हां वह तो दिख ही रहा है तेरा तो यही हाल रहता है न जाने मुझ में क्या देख लेता है कि तु अपना सब्र खो बैठता है।

मम्मी ये तुम्हारी भरावदार बड़ी-बड़ी गांड, जिसे देखते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है और फिर तुम्हारी रसीली बुर मे लंड डालके चोदने की तड़प बढ़ जाती है।

तेरी बातों से तो मेरा भी मन बहकने लगा है। ( सब्जी में मसाला डालते हुए)

तभी तो कह रहा हूं कुछ करो ना ताकी हम दोनों का काम बन जाए।

क्या करूं कैसे करूं सोनू सामने बैठा है उसे कहीं जाने के लिए भी नहीं कह सकती क्योंकि उसने पहले ही कह दिया है कि मैं पढ़ाई कर रहा हूं और मुझे कहीं भी कुछ लेने भेजना नहीं। वरना मसाला लेने ही भेज देती।

तो फिर कैसे होगा मम्मी (राहुल के लं का तनाव बढ़ता ही जा रहा था।)

मन तो मेरा भी बहुत करने लगा है। रुक जा कोई उपाय ढुंड़ती हुं । ( वह सब्जी चलाते-चलाते उपाय ढूंढने लगी तभी उसके चेहरे पर एक चमक आई और वह रसोई घर के दरवाजे की तरफ कदम बढ़ाते हुए बोली। )

बेटा उस दिन की तरह आज भी दरवाजा ठीक से बंद नहीं हो रहा है।( दरवाजे को बंद करते हुए) ले फिर से इसे ठीक कर तो( राहुल की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए आंख मारी) मैं तो इस दरवाजे से तंग आ गई हूं।

( राहुल अपनी मां का इशारा पूरी तरह से समझ गया था, उस दिन की तरह आज भी सोनू के सामने दरवाजे का बहाना बनाकर अपनी प्यास बुझाने का पूरा जुगाड़ बना चुकी थी। राहुल खुशी से अपनी मां को बाहों में भरते हुए बोला।)

ओहह मम्मी तुम बहुत अच्छी हो बड़ी शातिर की तरह तुम्हारा दिमाग चलता है।

( अलका भी राहुल को अपनी बाहों में कसते हुए बोली)

चल अब बिल्कुल भी देर मत कर समय बहुत कम है।

( रसोई घर का दरवाजा अलका ने एक बहाने से बंद कर दी थी ताकि सोनू को यही लगेगी दरवाजे में प्रॉब्लम की वजह से बंद किया हुआ है। अलका का रोमांच बढ़ता जा रहा था क्योंकि आज पहली बार वह इस तरह से संभोग सुख का आनंद उठाने जा रही थी उसके बड़े लड़के और छोटे लड़के के बीच में बस यह दरवाजा ही था। अलका भी इस रोमांच के चलते की रसोई घर में वह अपने बड़े बेटे से चुदने जा रही हे जबकि उसका छोटा बेटा रसोई घर के बाहर बैठ कर पढ़ रहा है। इतना सोच कर ही वह रोमांचित हुए जा रही थी । राहुल के साथ-साथ अलका भी पूरी तरह से चुदवासी हो चुकी थी। तभी अलका अपने दोनों हाथ से साड़ी को कमर तक उठा दी और गांड को उचकाते हुए थोड़ा झुक कर दरवाजे के हत्थे को पकड़ते हुए बोली ।

बेटा पहले दरवाजे की सिटकनी को ( पेंटी की तरफ इशारा करते हुए )थोड़ा नीचे की तरफ सरका के ठीक से देख ले ताकि कुंडी बराबर अंदर जा सके।

( मम्मी की बात सुनते ही मैं दंग रह गया क्योंकि मम्मी द्वीअर्थी भाषा मैं बात कर रही थी। उनकीे बातों के मतलब को राहुल अच्छी तरह से समझ गया था। अलका अपनी पैंटी को नीचे सरकाने की बात कर रही थी। जोकि दरवाजे के उस पार बैठे सोनू को ऐसा ही लग रहा था कि ऊसकी मम्मी दरवाजे को रिपेयर करने की बात कर रही है। अलका का कामी दिमाग बहुत ही गजब का काम कर रहा था। राहुल अपनी मां के इस अदा को देखते ही उत्तेजना से भर गया उसकी मां इस समय साड़ी को कमर पर उठाए दरवाजे के हेंडल को पकड़ कर झुकी हुई थी। जिससे उसके भरावदार नितंब राहुल की आंखों के सामने नग्न नाच करते नजर आ रहे थे गुलाबी रंग की पैंटी उसके गोरे-गोरे गांड पर बहुत ही खूबसूरत फब रही थी। राहुल के लंड में खून का दौरा इतनी तीव्र गति से हो रहा था कि उसे ऐसा लग रहा था कहीं यह लंड की नसें फट ना जाए। राहुल धीरे से अपने हाथ को बढ़ाकर अपनी मां की गुलाबी पेंटी के दोनों छोर को उंगलियों में फंसा लिया और धीरे-धीरे पेंटी को नीचे सरकाने लगा। उसकी मां पीछे निचले को माफ कर राहुल की हरकतों पर नजर रखी हुई थी। अलका की भी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी। अगले ही पल राहुल ने अपनी मां की गुलाबी पेंटी को सरका कर नीचे जांघो तक ला दिया। अब उसकी आंखों के सामने उसकी मां की बड़ी-बड़ी भरावदार गांड एकदम नंगी थी

और गांड की फांको के बीच की लकीर के नीचले हीस्से से उसकी फुलीी हुई रसीली बुर झांक रही थी। जिसे देखते ही राहुल का लंड मोर बनकर नाचते हुए ठुनकी लेने लगा। राहुल से रहा नहीं गया और वह अपने दोनों हथेलियों को गांड पर रखकर मसलने लगा। अलका जल्दबाजी में थी इसलिए रह-रहकर वह दरवाजे की कुंडी को दरवाजे पर पीटते हुए बोलती।

ठीक है बेटा ठीक से देख कुंडी बराबर लग नहीं रही है। ( ताकि बाहर बैठा सोनू यही समझे की दोनों मिलकर दरवाजे की रिपेयरिंग कर रहे हैं। राहुल ने तुरंत अपने पैंट की बटन खोल कर उसे नीचे घुटने तक सरका दिया

अलका गहरी सांसे लेते हुए पीछे नजरे घुमाकर राहुल को ही देख रही थी उसे इंतजार था कि कब उसका मोटा लंड उसकी बुर में समा जाए। राहुल अपनी मां के नितंबों को पकड़े हुए ठीक उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया बुर की गुलाबी छेद की पोजीशन लंड के बराबर आ नहीं रही थी इसलिए वह नितंबों को पकड़े हुए ही बोला।

मम्मी थोड़ा दरवाजे को मेरी तरफ खींचो ताकि दरवाजे में कुंडी ठीक से लग जाए। ( राहुल की बात सुनते ही अलका अपनी भारी भरकम गांड को थोड़ा और उचकाते हुए बोली।)

ले बेटा मुझसे अभी से ज्यादा नहीं हो पाएगा तो ही अपने हाथ से एडजस्ट कर ले।

( अपनी मां की बात सुन कर रहुल खुद ही भरावदार गांड को पकड़कर अपने लंड के स्तर तक ले आया और गर्म सुपाड़े को बुर की गुलाबी पत्तियों के बीच सटा कर बोला। )

मम्मी अब मैं थोड़ा धक्का दूंगा देखना तुम हैंडल पकड़ कर रखना ऐसा ना हो की कुंडी छटक जाए वरना सारा मेहनत बेकार जाएगा।

तू चिंता मत कर बेटा तू धक्का लगा मैं संभाल लूंगी( अलका कसमसाते हुए बोली। और राहुल अपनी मां की भरावदार गांड को हथेलियों में कसके दबोचे हुए अपनी कमर को आगे की तरफ बढ़ाने लगा और उसका लंड बुर की चिकनाहट पाकर धीरे धीरे अंदर की तरफ सरकने लगा जैसे जैसे राहुल के लंड का सुपाड़ा बुर के अंदर उतर रहा था अलका के मुंह से वैसे-वैसे सिसकारी छूट रही थी । अलका बार-बार कुंडी को दरवाजे पर पटकती दरवाजे पर अपनी हथेली ठोकती ताकि सोनू को यही लगे की रसोई घर के भीतर कुछ और नहीं चल रहा है बल्कि दरवाजे की रिपेयरिंग हो रही है।

धीरे धीरे करके राहुल ने अपना समूचा लंड अपनी मां की बुर में डाल दिया और कमर को थामे हुए धीरे-धीरे लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। थोड़ी ही देर में अलका की सिसकारी छूटने लगी लेकिन यह सिसकारी की आवाज बाहर बैठा सोनू ना सुन न ले इसलिए अपने होंठ को दांतों तले जोर से दबाते हुए अपनी उत्तेजना को दबाने की पूरी कोशिश करने लगी। राहुल धड़ाधड़ अपने लंड को बुर के अंदर बाहर करते हुए चोद रहा था। और अलका बीच-बीच में दरवाजे को रोकते हुए बोले जा रहीे थी।

हां हां बस ऐसे ही हां बेटा बस ऐसे ही थोड़ा जोर से ठोक तो बराबर जाएगा हां बस ऐसे ही थोड़ा पकड़ दरवाजे को हां बस ऐसे ही अब अच्छे से ठोक आज इसका काम तमाम कर दे मैं तो इस दरवाजे से तंग आ गई हूं बार-बार रिपेयरिंग की जरूरत पड़ती है ।

हां मम्मी बस तुम ही सही दरवाजे को पकड़कर खड़ी रहो आज एकदम से ठीक कर देता हूं( जोर जोर से धक्के लगाते हुए) ऐसे ही ठोकु ना मम्मी।

हां बेटा बस ऐसे ही, देख दरवाजे की कड़ी बराबर जा रही है हां ऐसे दो चार बार और कर लगता है एकदम ठीक हो जाएगा।

दोनों के द्वीअर्थी संवाद की वजह से माहौल और भी ज्यादा गरमा चुका था आज दोनों अपने अपने बदन में एक नई उत्तेजना का एहसास कर रहे थे। जबरदस्त माहौल बना हुआ था रसोई घर में बड़ा बेटा अपनी मां की जमकर चुदाई कर रहा था और छोटा बेटा कैसे घर के बाहर बैठ कर पढ़ रहा था। राहुल की उत्तेजना पल-पल बढ़ती जा रही थी उसे और ज्यादा नशा चढ़ने लगता जब अलका की मोटी मोटी जांघें उसकी जांघों से टकराती, ऊफ्फ गजब का नशा चढ़ जाता । धीरे-धीरे दोनों अपने चरमोत्कर्ष की तरफ बढ़ने लगे अलका कि सिशकारी बढ़ रही थी लेकिन वह दांतों को भींच कर दबा ले रही थी। राहुल के धक्के तेज होने लगे।

बस बेटा बस लगता है आज ठीक हो जाएगा। हां बस ऐसे ही दो चार धक्के और लगा कड़ी जा रही है बराबर बस बेटा बस, अलका का बदन एंठने लगा साथ ही राहुल की भी सांसे तेज चलने लगी और दो चार धक्कों में ही दोनों एक साथ झड़ गए। दोनों बड़ी तेजी से हांफ रहे थे। थोड़ी देर में जब दोनों की सांसे दुरुस्त हुई तो राहुल ने अपनी मां की बूर से लंड को बाहर खींच लिया

और अपने कपड़ों को भी दुरुस्त करने लगे। अलका अपनी पेंटिं को कमर पर चढ़ाते हुए बोली।

अब देख इसकी कड़ी बिल्कुल सटीक अंदर बाहर हो रही है अब बराबर हो गया है। ( यह बात वह सोनू को सुनाने के लिए बोली थी थोड़ी देर में वहां रसोई घर का दरवाजा खोल दी दोनों बिल्कुल सामान्य नजर आ रहे थे वह दोनों को देखते ही सोनू बोला।)

मम्मी दरवाजा ठीक हो गया।

हां बेटा अब दरवाजा बिल्कुल ठीक हो गया है (इतना कहने के साथ ही अलका राहुल की तरफ देख कर मुस्कुराने लगी)

 
दरवाजा ठीक करने के बहाने दोनों सोनू के उपस्थित होने के बावजूद भी अपनी काम प्यास को बुझाने में सफल रहे। हां अपनी यह प्यास बुझाने के चक्कर में सब्जी थोड़ी जल गई थी, सब्जी के जल जाने का दुख दोनों को बिल्कुल नहीं था बल्कि अपने बदन की जलन को शीतलता प्रदान करने की संतुष्टी दोनों के चेहरे पर साफ नजर आ रहीे थी।

राहुल ने तो अपने जिस्म की भूख को अपनी मां को चोदकर मिटा लिया था लेकिन पेट की भूख मिटाने के लिए उसे जली हुई सब्जी ही खाना पड़ा। खाना खाकर वक्त अलका और राहुल दोनों एक दूसरे को देखते हुए मुस्कुरा रहे थे।

खाना खाने के बाद राहुल पढ़ाई का बहाना बनाकर घर पर नीलू के घर जाने के लिए निकल पड़ा। रास्ते भर नीलू के बारे में सोच सोच कर वह अपने बदन में उत्तेजना का अनुभव कर रहा था। उसके रेशमी बाल उसके गोरे-गोरे गाल गुलाबी रस भरे होठ उसका भरा हुआ बदन. उसके गोल गोल नारंगी की तरह चुचीया उसके बदन में रोमांच जगा रहे थे। खास करके नीलू की भरावदार और चुस्त गांड, जिसके बारे में सोचते ही राहुल की आंखों के सामने उसकी नंगी गांड और गांड की फांकों के बीच से झांकती हुई उसकी गुलाबी बुर और बुर की गुलाबी पक्तियां नजर आने लगती थी खास करके स्कूटी पर बैठती हुई नीलू ज्यादा जेहन में बसी हुई थी क्योंकि जब भी वह स्कूटी पर बैठती थी या उठती थी तब तब उसके भरावदार गांड कीसी रुईदार गद्गे की तरह दबती और उठती थी। जिसे देखकर राहुल के बदन में चुदास की चीटियां रेंगने लगती। राहुल का मन यह सब याद करके नीलू से जल्दी से जल्दी मिलने के लिए तड़पने लगा। वह चौराहे पर आकर जल्दी से एक ऑटो किया और सीधे नीलू के बंगले के सामने उतर गया। बंगले का गेट खोलकर वह दरवाजे तक गया और दरवाजे पर पहुंचते ही उसकी उत्सुकता बढ़ने लगी वह अंदर से थोड़ा घबरा रहा था क्योंकि नीलू ने यह नहीं बताई थी कि उसकी मम्मी घर से कब जाएंगेी इसलिए वहां मन में यही सोच रहा था कि अगर नीलू की मम्मी घर पर उपस्थित रहीे तो वह क्या कहेगा। फिर भी घबराते हुए वह बेल बजा दिया। थोड़ी देर बाद से दरवाजे के भीतर कदमों की आहट सुनाई दी वह समझ गया कि अब दरवाजा खुलने वाला है लेकिन कौन खोलेगा यह उसे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था। उसका दिल ज़ोरों से धड़क रहा था, तभी दरवाजा खुला और सामने का नजारा देखकर राहुल के होश ही उड़ गए । सामने नीलु ही थी। नीलू ईस समय बला की खूबसूरत लग रही थी। बाल गीले ही थे लेकिन उसने बालों को एक रिबन से बांध रखी थी और बालों की लटे गालों पर चहल-कदमी करते हुए लहरा रहे थे। नीलू ने एक गंजी टाईप सफेद रंग की पहनी हुई थी। जोकि बाल के पानी की एक एक बूंद के गिरने की वजह से जगह जगह से भीग कर बदन पर चिपक गई थी जिससे उसका गोरा बदन साफ साफ झलक रहा था। राहुल के बदन में एकाएक झनझनाहट का अनुभव हुआ जब उसकी नजर नीलू की छातियों पर गई जो कि स्लीप में से उसकी ब्राउन रंग की निप्पल पानी में भीगने की वजह से स्लीप के ऊपर से साफ साफ नजर आ रही थी। एक बात तो साफ़ थीै कि इस समय नीलू स्लीप के नीचे ब्रा बिल्कुल नहीं पहनी हुई थी। राहुल की तो आंखें फटी की फटी रह गई क्योंकि जो नजारा उसने देखा था वह भले ही कपड़ों में था लेकिन बहुत ही कामुक नजारा था। नीलू कमर के नीचे की स्कर्ट पहनी हुई थी जोकि घुटनों तक आ रही थी आज नीलु अपने रुप रंग रवैया से और भी ज्यादा खूबसूरत और सेक्सी लग रही थी। राहुल तो नीलू के रूप-रंग में ऐसा खो गया की वह ईस बात को भूल ही गया था कि इस समय वह दरवाजे पर खड़ा है। नीलू भी अच्छी तरह से समझ गई थी कि राहुल की नजर उसके छाती के उभारों पर ही टिकी हुई थी। इसलिए वह राहुल को ओर ज्यादा तड़पाते हुए अपने लाल-लाल होठों पर कामुक मुस्कान बिखेरते हुए अपनी हथेली को अपनी चुचियों पर हेल्कैसे फिराते हुए

बोली।

क्या हुआ राहुल ऐसे क्या देख रहे हो?

नीलू की बात सुनकर जैसे उसे नींद से जगाया गया हो इस तरह से थूक निगलते हुए बोला।

ओह नीलू आज तो तुम्हारा यह रुप देख कर मेरा मन एकदम से डोलने लगा है आज बहुत ज्यादा खूबसूरत और सेक्सी लग रही हो।

( राहुल के मुंह से अपनी तारीफ के शब्द सुनकर नीलू मन ही मन प्रसन्न होने लगी और प्यारी मुस्कान बिखेरते हुए बोली।)

अंदर तो आ जाओ या यूं ही दरवाजे पर खड़े खड़े ही बात करोगे।

तुम्हारे साथ तो मैं कहीं भी खड़े होकर बात कर सकता हूं क्योंकि जब तुम पास होती हो तो ना मुझे धूप छांव का पता चलता है ना दिन रात का।

चलो अब बातें ना बनाओ और अंदर आ जाओ।

( राहुल मुस्कुराते हुए कमरे में दाखिल हो गया और नीलू ने दरवाजे को बंद कर दी , नीलू दरवाजे को बंद कर ही रही थी कि तभी राहुल बुला।)

आंटी है या चली गई?

मम्मी तो सुबह ही चली गई करीब 9:00 बजे ही अब से मैं तुम्हारी बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रही थी कि आप आओगे कब आओगे लेकिन तुम हो कि....खैर छोड़ो देर आए दुरुस्त आए। अच्छा यह बताओ क्या लोगे चाय या कॉफी या फिर कोल्ड्रिंक।

( राहुल नीलू की गोल-गोल चुचियों पर नज़र गड़ाते हुए बोला।)

ना चाय ना कॉफी और ना ही कोल्ड्रिंक, मुझे तो आज बस तुम्हारा दूध पीना है।

( नीलू राहुल की बात सुनकर फिर से हंसने लगी और बोली।)

धत पागल तुम एकदम बुद्धू होते जा रहे हो। अभी मेरे (अपनी चुचियों को हथेलियों में कसते हुए )इस में से दूध थोड़ी निकलता है।

कुछ भी हो नीलू लेकिन मैं आज तुम्हारी चुचियों को मुंह में भर भर कर इसका सारा रस निचोड़ डालूंगा (इतना कहने के साथ ही वह नीलू की तरफ आगे बढ़ने लगा और नीलू खिलखिलाते हुए पीछे की तरफ कदम ले जाने लगी लेकिन राहुल लपक कर उसे अपनी बाहों में भर लिया और फिर सोफे पर लेट आते हुए उसके होठों को चूमने लगा और एक हाथ से कपड़े के ऊपर से ही उसकी तनी हुई चूची को दबाते हुए बोला।

मेरी रानी मेरी प्यारी नीलू आज मुझे तुम अपना दूध पिला ही दो।

( नीलू हंसते हुए उसे अपने ऊपर से हटाने की पूरी कोशिश करते हुए बोली।)

नहीं बिल्कुल भी नहीं आज मैं तुम्हें इसे छूने भी नहीं दूंगी। ( नीलू इनकार तो कर रही थी लेकिन अंदर ही अंदर वह ऐसा ही चाहती थी जैसा कि राहुल करना चाहता था। राहुल भी कम नहीं था उसे अब औरतों को अपने कामों में करना अच्छी तरह से आता है इसलिए वह नीलू के गुलाबी होठों को चूसते हुए एक हाथ स्लिप के अंदर ले जाकर अठखेलियां करती उस गोलाई को पकड़ लिया और उसे दबाना शुरु कर दिया। थोड़ी ही देर में नीलू के ऊपर हीं और उसके गुलाबी होठों का रस चूसते हुए दूसरा हाथ भी स्लिप के अंदर डाल कर नीलू की दूसरी गोलाई को भी हथेली में भर लिया। नीलू के दोनों खरबूजे राहुल के हाथ लग चुके थे उसे तो जैसे मुंह मांगी मुराद मिल चुकी थी। दोनों चूचियां हाथ में आते ही राहुल रबर की गेंद की तरह दोनों को दबाना शुरु कर दिया और थोड़ी ही देर में नीलू कमजोर पड़ने लगी उसकी आंखों में खुमारी का नशा छाने लगा। राहुल उसके होठों को चूसना छोड़कर अपना ध्यान चूचियों पर ही लगा दिया। थोड़ी ही देर में नीलु चूची मर्दन से मस्त होने लगी। रह रह कर उसकी गरम सिसकारी छुटने लगी। उसे रहा नहीं गया राहुल के नीचे कसमसाते हुए वह अपनी स्लिप को खींचकर चूचियों के ऊपर चढ़ा दी।

अब नीलू की दोनों नारंगी है राहुल की आंखों के सामने थी और राहुल दोनो चुचियों को कस कसके दबाते हुए

अपना मुंह उसकी ब्राउन कलर की नीप्पल पर लगा कर चूसना शुरू कर दिया। इस तरह से चुसाई करते देख नीलू बदहवास होने लगी, वह अपना होश खोने लगी उसकी स्कर्ट जांघो से सरक कर कमर तक आ गई । राहुल को इसका एहसास हो गया कि नीलू की स्कर्ट सरककर कमर तक चली गई है और उसकी चिकनी जांघे बिल्कुल नंगी हो चुकी है इसलिए राहुल चुचियों को मुंह में भरकर चूसते हुए एक हाथ नीचे ले जाकर चिकनी चिकनी जांघों को सहलाना शुरु कर दिया। नीलू की तो हालत ही खराब होने लगी राहुल बराबर डटा रहा। वह एक साथ नीलू के संगमरमर जैसे चिकने बदन पर टूट कर बिखरना शुरू हो गया था कभी चूचियों को दबाता तो कभी निप्पल को मुंह में भर कर पीने लगता तो कभी नीलूं के दूधिया चिकनी जांघों को सहलाने लग जाता इतने पर भी उसका मन बिल्कुल भी नहीं भर रहा था। उसके पैंट में ऊसका मोटा लंड गदर मचाए हुए था।

उसने तुरंत एक हाथ नीचे ले जाकर अपने पेंट के बटन को खोलना शुरू कर दिया' वह बटन खोलते हुए लगातार नीलू की चूचियों को दबा दबा कर पीए जा रहा था नीलु की तो हालत पतली होती जा रही थी। उसके मुंह से लगातार गर्म सिसकारी की आवाज़ आ रही थी ओह राहुल ससससहहहहहहह.....क्या कर रहे हो.....ऊंमममममम..... मुझसे तो रहा नहीं जा रहा है...। और पीअों राहुल पूरा सससससहहहहहहह.....मुंह में भर कर......आहहहहहहहह..... दबा दबा कर पीअो।

ओहहहहहहह....राहुल..... ( नीलू उत्तेजना बस अटक अटक कर बोल रही थी और साथ ही गर्म सिसकारी भरते हुए राहुल के बालों में अपनी उंगलियां उलझाकर उसे कस कर अपनी छातियों पर दबाकर उसे और जोर से चुचीया पीने के लिए उकसा रही थी। राहुल भी अपना होशा खो बैठा था। उसने अपनी पेंट नीचे जांघोे तक सरका दिया उसके अंडरवीयर में गजब का भयानक उभार बना हुआ था जो कि अब वह उभार नीलू की जांघों के बीच उसकी पेंटी के तले फूली हुई बुर पर बराबर महसूस हो रहा था। राहुल के तने हुए लंड को अपने बुर पर महसूस करते हीैं वह जल बिन मछली की तरह तड़प उठी। और वह तुरंत अपने दोनों हथेलियों को राहुल के नितंबों पर रखकर उसे अपनी बुर पर दबाने लगी। राहुल अब अच्छी तरह से समझ गया था कि नीलू का लोहा पूरी तरह से गर्म हो चुका है बस अब उस पर चोट करने की देर है। वैसे तो राहुल का हथोड़ा भी गरम भट्टी की तरह तपने लगा था , उसे भी ठंडा होने के लिए शीतल जल से भरे झील की तलाश थी जोकि नीलू के जांघों के बीच छुपी हुई थी। राहुल भी अब अगले आक्रमण की तैयारी कर चुका था, इसलिए वह चूची वाले मोर्चे को छोड़कर खड़ा हुआ और खड़ा होकर अपने कपड़े उतारना शुरू कर दिया नीलू तरसी और उत्सुक आंखो सेराहुल को कपड़े उतारते हुए देख रही

नीलू की नजरे खासकर के उसके उभरे हुए अंडरवियर पर ही टिकी हुई थी जिसे राहुल एक झटके से उतार कर अपनी टांगों से बाहर निकाल दिया और इस समय राहुल पूरी तरह से नीलू की आंखों के सामने नंगा खड़ा था। राहुल अपने तने हुए लंड को नीलू की आंखों के सामने पकड़कर उसे ऊपर-नीचे करते हुए हीलाना शुरु कर दिया। जिसे देख कर नीलू की बुर उत्तेजना के मारे फूलकर पकौड़ी हो गई। राहुल कुछ कह पाता ईससे पहले ही नीलू आगे बढ़कर राहुल के लंबे लंड को अपने हथेली में भर ली और राहुल की आंखों में झांकते हुए बड़ी ही कामुक अंदाज से अपनी जीभ को बाहर निकालकर जीभ की किनारी से लंड के सुपाड़े को चाटना शुरु कर दि। जैसे ही नीलु के जीभ का स्पर्श लंड के सुपाड़े पर हुआ वैसे ही तुरंत राहुल के बदन में रोमांच की लहर भर गई। नीलू भी जैसे कि उसे और ज्यादा तड़पा रही हो इस तरह से जीभ की किनारी को

लंड के सुपाड़े के चारों तरफ गोल-गोल घुमाते हुए उसे चाटना शुरू कर दी। नीलू के इस कामुक हरकत की वजह से राहुल के बदन में कामोत्तेजना कि वह लहर भर गई की उसे ऐसा लगने लगा कि जैसे नीलू उसके बदन पर धीरे-धीरे छुरिया चला रही हो। राहुल से बिल्कुल रहा नहीं गया उसके मुंह से भी गरम सिसकारी की आवाज आने लगी।

ओह नीलू सससहहहहहहहहह.....आाााहहहहहहह...।मेरी जान यह क्या कर रही हो मुझे ऐसा लग रहा है कि ससससहहहहह...... मेरा पूरा बदन हवा में झूला झूल रहा है। ( और इतना कहने के साथ ही राहुल ने नीलू के सर पर अपने दोनों हाथ रख कर अपनी कमर को आगे की तरफ बढ़ाया ' नीलू भी राहुल के इशारे को समझते हुए अपना पूरा मुंह खोल दी और अगले ही पल राहुल का तना हुआ मोटा लंबा लंड होठो पर रगड़ खाता हुआ

गले तक ऊतर गया। नीलू पूरा लंड मुंह में लेकर चूस ना शुरू कर दी। राहुल के मुंह से गरम सिसकारी की आवाज आने लगी। गले तक लंड लेकर उसे चूसने की वजह से ऊग्ग..... ऊग्ग ......ऊग्ग ....की नीलू के गले से आ रही थी। पूरा माहौल गरमा चुका था राहुल भी एकदम मैच्योर की तरह उसके बालों को पकड़कर हल्के हल्के कमर को आगे पीछे करते हुए उसके मुंह को ही चोद रहा था। कुछ देर तक राहुल ऐसे ही नीलू के मुंह चोदने का मजा लेता रहा। नीलू पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी,ऊसकी बुर से नमकीन पानी अमृत की बूंद की तरह रीस रहा था । नीलू की चुदास से भरी बुर राहुल के लंड के लिए तड़प रही थी जिसे वह अपनी हथेली से रगड़ रगड़ कर और भी ज्यादा गर्म कर रही थी। कुछ देर तक राहुल यूंही नीलू को अपना लंड लोलीपोप की तरह चुसवाता रहा । अब ऊससे भी रहा नही जा रहा था। राहुल को भी याद नीलू के बुर की तड़प लगने लगी थी इसलिए कहा नीलू के मुंह में से अपने लंड को बाहर की तरफ खींचकर निकाला। राहुल का समुचा लंड नीलू के थुक में सना हुआ था। जिसे राहुल अपनी मुट्ठी में भरते हुए और उसे आगे पीछे कर के हिलाते हुए बोला।

बस मेरी जान अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है अब तो तुम्हारी बुर में अपना लंड डाल कर ही अपनी प्यास बुझाऊंगा।

वह भी अपनी टांग को सोफे के नीचे फैलाते हुए बोली।

तो देर किस बात की है आ जाओ। मैं तो कब से तैयार बैठी हूं।

ओह मेरी जान तुम्हें तो देखते ही मुझे ना जाने क्या होने लगता है।( इतना कहते ही राहुल झुककर नीलू की स्कर्ट को पकड़कर नीचे की तरफ खींचते हुए उसको निकालने लगा। स्कर्ट के निकलते ही नीलू ने खुद अपनी पैंटी को नीचे की तरफ सरकाते हुए उसे अपनी लंबी चिकनी टांगो से निकाल कर नीचे फर्श पर फेंक दी। नीलू अपनी स्कर्ट और पेंटी के बदन से दूर होते ही अपने स्लिप को भी निकाल कर फेंक दी।राहुल और नीलू दोनों इस समय संपूर्णता नग्नावस्था में थे। नीलू उत्तेजना के मारे अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों पर अपनी हथेली रगड़ रही थी और राहुल वहीं पास में खड़ा खड़ा अपने लंड को मुठिया रहा था। नीलू की गर्मी देखकर राहुल से रहा नहीं गया और राहुल झुककर नीलु की जांघों को फैलाते हुए जांगो के बीच अपने लिए जगह बनाने लगा। राहुल के इस हरकत पर नीलू के बदन में गुदगुदी होने लगी। क्योंकि उसे मालूम था कि अब कुछ ही सेकंड में उसकी बुर के अंदर राहुल का मोटा लंड घुसने वाला है।

तभी राहुल अपने लंड को पकड़े हुए नीलुं के ऊपर झुकना शुरु कर दिया। और अगले ही पल अपने दमदार लंड के सुपाड़े को नीलू की पसीजति हुई बुर की गुलाबी पत्तियों के बीच टीका दिया ,लंड का गरम सुपाड़ा बुर से स्पर्श होते ही नीलु गद गद हो गई । उत्तेजना के मारे उसकी बुर की गुलाबी नाजुक पत्तियां किसी सूखे पत्ते की तरह फड़फड़ाने लगी। राहुल की भी उत्तेजना परम शिखर पर विराजमान हो चुकी थी किसी भी पल वह आक्रमण कर सकता था क्योंकि उसने अपने लिए जगह बना लिया था। नीलू भी जबरदस्त प्रहार के लिए अपने आप को तैयार करते हुए बड़ी तेजी से सांस लेते हुए अपने बदन को सिकुड़े हुए थी। अभी तो राहुल ने सिर्फ अपने लंड के सुपाड़े को ही बुर से सटाया था और इतने में ही नीलू के पसीने छूट गए थे राहुल के मर्दानगी का लोहा वह पहले ही मान चुकीे थी। तभी राहुल अपनी कमर को आगे की तरफ बढ़ाते हुए सुपाड़े को गुलाबी पत्तियों के बीच से अंदर की तरफ सरकाने लगा। नीलू दर्द को दबाते हुए अपने होठों को दांत से भींच ली। धीरे धीरे करते हुए राहुल ने अपना पूरा समुचा लंड नीलू की बुर में जड़ तक उतार दिया। नीलू अंदर तक सहम गई वह दर्द से छटपटा रही थी क्योंकि राहुल के मोटे लंड ने नीलू की बुर पर कोई भी रहम नहीं दिखाया वह नीलू की बुर की गुलाबी पत्तियों के बीच से बड़ी बेरहमी से रगड़ता हुआ अंदर तक उतर गया। जैसे ही राहुल का लंड नीलु की बुर की जड़ मे ऊतरा वैसे ही नीलू के मुख्य से हल्की सी कराहने की आवाज निकल गई।

आहहहह...राहुल......

राहुल कहां मानने वाला था वह नीलू की पतली कमर को अपनी हथेलियों में थामकर धीरे धीरे अपने लंड को बुर के अंदर बाहर करते हुए चोदना शुरू कर दिया। धीरे धीरे करते हुए नीलू की सिसकारियां पूरे कमरे में गूंजने लगी। राहुल के बदन से पशीना टपक कर नीलू की छातियों पर गिर रहा था। जिस पर नजर पड़ते हैं राहुल ने तुरंत अपने हाथ को बढ़ाकर नीलू की दोनो चुचियों को थाम लिया और मैं जोर-जोर से बताते हुए नीलू की बुर मे लंड पेलना शुरु कर दीया। राहुल के मोटे लंड की वजह से नीलू के बुर की गुलाबी पत्तियां फेल चुकी थी।

सससससहहहहहह .....राहुल बहुत मजा आ रहा है...... गजब की ताकत है तुम्हारे में.... तुमने मेरी बुर को अंदर तक हिला कर रख दिया है.....आहहहहहह......आहहहहहहहहह.. (तब तक राहुल ने दो-तीन जबरदस्त धक्के लगा दिया .... और नीलू के मुख से आह निकल गई।)

गजब की चुदाई चल रही थी दोनों थकने का नाम नहीं ले रहे थे राहुल के हर धक्के पर सोफे मै से फचर फचर की आवाज आ रही थी। करीब आधे घंटे तक नीलु की बुर को रगड़ने के बाद नीलु की सिसकारीया बढ़ने लगी और राहुल के भी धक्के तेज हो गए। और दो चार धक्कों के बाद ही दोनों एक दूसरे को अपने बदन से भींचते हुए झड़ने लगे।

 
राहुल और नीलू दोनों एक दूसरे के बाहों में भेजे हुए झटके खाते हुए झड़ रहे थे।ईस अप्रीतम अद्भुत जबरदस्त संभोग के पश्चात जो दोनों के बदनमे संतुष्टि का आभास हो रहा था ऐसा सुख वह दोनों को इस दुनिया के किसी भी वस्तु में प्राप्त नहीं होता। दोनों लंबी लंबी सांसे लेते हुए एक दूसरे के बदन को चुमैं जा रहे थे। राहुल का मोटा लंड अभी भी नीलू की पनियाई बुर में अंदर तक घुसा हुआ था। जिसका एहसास नीलू को पल-पल चरमोत्कर्ष का एहसास करा रहा था। नीलू इस चुदाई से एकदम गदगद हो चुकी थी। दोनों सोफे पर संपूर्ण नग्नावस्था में लेटे हुए थे। धीरे धीरे राहुल का टनटनाया हुआ लंड नीलू की बुर में ही शिथिल पड़ने लगा था। धीरे-धीरे करके खुद ही राहुल का शिथिल पड़ा हुआ लंड नीलू की बुर मे से बह रहे मदन रस के साथ फीसलकर बाहर आ गया। थोड़ी देर के लिए यह वासना का तूफान शांत हो चुका था। नीलू राहुल के बालों में अपनी नाजुक उंगलियों को गोल-गोल घुमाते हुए बोली।

राहुल मैं तुम्हारी दुल्हन बनना चाहते हैं इस तरह प्रेमिका बनकर तुमसे ना जाने कितनी बार चुदवा चुकी हूं लेकिन मेरी दिली ख्वाहिश यही है की हम दोनों की शादी हो तुम मेरे पति मैं तुम्हारी पत्नी बनु और तुम्हारी दुल्हन बनकर सुहागरात को तुमसे जी भरकर चुदवाऊ। और सच कहूं तो तुम्हारी दुल्हन बनने के बाद तुम से चुदवा कर जो मुझे शारीरिक संतुष्टि मिलेगी वह एकदम अतुल्य होगी जिसकी तुलना नहीं कर सकते।

नीलू की ऐसी रोमांटिक बातों को सुनकर राहुल एकदम गदगद हो गया और वह नीलू के गुलाबी होठों को चूमते हुए बोला।

मैं भी यही चाहता हूं नीलू और भगवान करे ऐसा ही हो क्योंकि मैं भी तुमसे अब बेहद प्यार करने लगा हूं तुम्हारे बिना मैं अब जी नहीं सकता।

दोनों एक दूसरे से प्यार की बातें करते हुए एक दूसरे के बदन को सहला रहे थे अभी तो शुरुआत हुई थी अभी पूरा दिन बाकी था दोनों कुछ देर तक यूं ही नंगे ही एक दूसरे की बाहों में बाहें डाल कर लेटे रहे। दोनों को एक दूसरे के बदन से कुछ ज्यादा ही सुकून मिल रहा था तभी नीलू राहुल को अपने बदन के ऊपर से हटाते हुए बोली।

मुझे तो भूख लग रही है राहुल रुको मैं कुछ खाने को ले आती हूं।( इतना कहकर वह उठने लगी और पास में पड़े कपड़े के उठाकर पहनने ही वाली थी कि राहुल उसे रोकते हुए बोला।)

नीलू आखिर इस घर में हम दोनों अकेले ही हैं और कोई हमें देख भी नहीं सकता है तो क्या यह लिबास पहनना जरूरी है,

मतलब?

मतलब यही कि मैं चाहता हूं कि जब तक मैं यहां हूं तब तक तुम और मैं बिल्कुल नंगे होकर ही रहे क्योंकि तुम जब पूरे कपड़े उतारकर नंगी होती हो तो तुम्हारी खूबसूरती और भी ज्यादा बढ़ जाती है।

( राहुल की बातें सुनकर नीलू मुस्कुरा दे और मुस्कुराते हुए बोली।)

सच पूछो तो मैं भी यही चाह रही थी तुमने मेरे दिल की बात कह दी । ( और इतना कहने के साथ ही वह किचन की तरफ जाने लगी राहुल उसे जाते हुए देख रहा था। और ज्यादा देर तक उसे सिर्फ देखता हुआ वहां पर खड़ा नहीं रह सकता और वह भी नीलू के पीछे-पीछे किचन की तरफ जाने लगा क्योंकि वह कर भी क्या सकता था, नजारा ही कुछ इस तरह का बना हुआ था नीलुकी गोल गोल दुधीया रंग की मदमस्त गांड को ऊपर नीचे हीचकोले खाते हुए देखकर राहुल अपने आप को रोक नहीं सका और नीलू की मदभरी गांड को निहारते हुए किचन की तरफ जाने लगा नीलू किचन में प्रवेश कर गई थी और पीछे पीछे राहुल भी किचन में आ गया था। नीलू फ्रीज में से ब्रेड का पैकेट निकाली और साथ ही जाम की जार भी निकाल ली , राहुल भी फ्रिज के पास पहुंच गया, राहुल नीलू के बिल्कुल पीछे ही खड़ा था जहां से वह नीलू के नितंबों को लगातार घूरे जा रहा था तभी अचानक नीलू के हाथों से ब्रेड का पैकेट नीचे गिर गया और जैसे ही वह ब्रेड उठाने के लिए नीचे झुकी वैसे ही तुरंत उसका भरदार नितंब राहुल के लंड से टकरा गया। राहुल का ढीला लंड जैसे ही नीलू के भराव दार नितंबों से टकराया जैसे कि तुरंत ढीले लंड में एक जान सी आ गई हो और उसके लंड में हरकत होना शुरू हो गया। यू एकाएक लंड का स्पर्श अपनी गांड पर महसूस करते ही ं नीलू उचक के खड़ी हो गई , और मुस्कुराते हुए बोली।

क्या राहुल क्या करते हो?

तभी फ्रीज में से केले के गुच्छे में से एक केला तोड़कर

लेते हुए बोला।

क्या करूं जान ं तुम्हारी मदमस्त गांड को देख कर मुझसे रहा नहीं जाता।

( इतना सुनते ही वह मुस्कुराने लगी और फ्रिज को बंद करके ब्रेड के पैकेट को लेकर ओवन के करीब गई तब तक राहुल केले के छिलके को निकाल चुका था। और जैसे ही उसे खाते हुए नीलू के नजदीक गया नीलू उसके केले को देखकर जो कि कुछ ज्यादा ही मोटा था बोली इससे ज्यादा मोटा और तगड़ा तो तुम्हारा केला( उंगली से लंड की तरफ इशारा करते हुए) है।

( राहुल नीलु की बात सुनकर हंस दीया ओर बोला )

तो ठीक है इस बार मैं तुम्हारे बुर में अपने लंड की जगह इस केले को ही डालूंगा।

ना बाबा ना इतने छोटे से केले से मेरा क्या होगा मुझे कुछ तुम्हारे गधे जैसे लंड से ही चुदना है।( इतना कहकर नीलू ब्रेड पर मक्खन लगाने के लिए नीलू के मुंह से ऐसी गंदी बातें सुनकर राहुल पूरी तरह से गनगना गया था ना जाने क्यों उसे नीलू के मुंह से गंदी बातें सुनना बहुत ही अच्छा लगता था। नीलू ब्रेड पर चमची से मक्खन लगा रही थी जिसकी वजह से उसके भरावदार नितंब ऊपर नीचे होते हुए बड़े ही मादक अदा से हिल रहे थे जिसे देखते ही राहुल से रहा नहीं गया और वह नीलू के बदन से जाकर सट गया। नीलू के नंगे बदन से सटने से उसका लंड टंनटना कर खड़ा होने लगा

उसका तनाव में आता हुआ लंड भरावदार गांड की फांकों के बीच की लकीर में गस्त लगाने लगा और गश्त लगाते हुए धीरे-धीरे अपनी औकात पर आ रहा था। नीलू मोटे लंड को अपनी गांड पर रगड़ खाते महसूस करके कसमसाने लगी और कसमसाते हुए ब्रेड पर बटर लगाने लगी राहुल पीछे से उसके नंगे बदन को अपनी बाहों में भर कर उसके दोनो चुचियों को पकड़ लिया, जैसे ही राहुल ने कस के उसकी दोनों चुचियों को हथेली में दबोचा वैसे ही उसके मुख से सिसकारी फूट पड़ी।

ससससससहहहहहहहह......राहुल .....।

लेकिन राहुल कहां मानने वाला था। उसके हाथों में तो वैसे से भरे दो आम आ चुके थे जिसे वह किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहता था।वह तो मजे ले लेकर जोर जोर से दबाने लगा । साथ ही अपनी कमर को हिलाते हुए नीलू की गांड पर लंड को लगातार रगड़े जा रहा था जिससे नीलू भी गरम होने लगी थी। नीलू उत्तेजित होते हुए ब्रेड पर बटर लगा चुकी थी और उसे ओवन खोलकर उस में रख कर ओवन ऑन कर दी उधर ब्रेड ओवन में गर्म हो रहा था और बाहर नीलू गरम हो रही थी राहुल तो नीलू की चुचिया दबा दबा कर एकदम लाल टमाटर की तरह कर दिया था। वह चुचियों को दबाते हुए लगातार उसकी सुराहीदार गर्दन को चूम रहा था जिससे नीलू की उत्तेजना ओर ज्यादा बढ़ रही थी। थोड़ी देर में राहुल का लंड टनटनाकर पूरे सुरूर में आ चुका था। नीलू की पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी क्योंकि राहुल एक हाथ ऊसकी चुची पर से हटा कर उसके चिकने पेट से होते हुए जांघों के बीच गुलाबी पत्तियों के ऊपर रगड़ने रहा था जिसकी गर्माहट पर नीलू तुरंत चुदवासी हो करके गर्म सिसकारी छोड़ने लगी

ओहहहहहह....राहुल...सीईईईईईई....... मुझे फिर से कुछ कुछ हो रहा है मुझसे रहा नहीं जा रहा है राहुल...

आहहहहहहहहह.....राहुल......

नीलू की गरम सिसकारी सुनकर राहुल पुरी तरह से उत्तेजित होकर चुंदवासा हो गया अब उससे एक पल भी रुक पाना बड़ा मुश्किल हो रहा था। राहुल का लंड नीलू की बुर में घुसने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुका था इसलिए एक पल की भी देरी किए बिना राहुल में नीलू की एक टांग घुटने से पकड़ कर किचन पर रख दिया। अनुभवी नीलू अच्छी तरह से समझ गई थी कि राहुल अब क्या करने वाला है इसलिए वह खुद ही आगे की तरफ झुका कर अपनी गांड को राहुल की तरफ ऊचका दी । नीलू को इस तरह से चुदवासी होकर अपनी गांड को ऊचकाते हुए देख कर राहुल से रहा नहीं गया और उसने तुरंत अपने लंड को हाथ में थाम कर एक हाथ से नीलु की नरम नरम गांड को पकड़कर लंड के सुपाड़े को नीलू की रसीली बुर की गुलाबी फांकों के बीच टिकाकर हल्के से अपनी कमर को आगे की तरफ धकेला बुर पहले से ही एक दम पानीयाई हुई थी इसलिए बिना रुकावट के हल्के से धक्के में ही पूरा सुपाड़ा बुर के अंदर उतर गया।सुपाड़े को बुर के अंदर उतरते ही नीलू की सिसकारी तेज हो गई।

ससससससहहहहहह.....आहहहहहहहहहह.... राहुल इतना कहने के साथ ही वह अपने बदन को कसमसाने लगी और राहुल उसकी दोनों बाजू से भरावदार गांड को पकड़ कर एक तेज धक्का लगाया और और राहुल का समूचा लंड एकदम तेजी के साथ बुर की दीवारों को रगड़ता हुआ सीधे जाकर ठीक बच्चेदानी से जा टकराया। जैसे ही राहुल के लंड का सुपाड़ा बच्चेदानी से टकराया वैसे ही नीलू के मुंह से दर्द भरी आह निकल गई वह दर्द से कराहने लगी।

ओहहहहहहह....मां मर गई रे...... निकालो राहुल.... ईसे निकालो .....ऊई मां ......कितनी तेजी से तुमने अंदर डाला है....आहहहहहहहह..... मेरी तो जान ही निकली जा रही है। ऊफ्फ.... बहुत दर्द हो रहा है राहुल मुझसे यह दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा है।

( वाकई में राहुल ने बड़ी तेजी और बेरहमी के साथ अपने लंड को नीलू की बुर में ठुंस ़ दिया था। ना जाने कितनों का लंड अपनी बुर में ले चुकीे नीलू इस बार राहुल के लंड के वार ं को सह नहीं पा रही थी। और यह बात राहुल भी अच्छी तरह से जानता था कि एक बार उसने अपने लंड को बड़ी शक्ति के साथ ओर बड़ी ही बेरहमी के साथ नीलू की बुर में पेल दिया था। ईसलिए नीलु से बरदाश्त नही हो पा रहा था।

राहुल ऊसके दर्द से वाकीफ था। ईसलिए वह ऐसे ही उसकी गांड को थामे रुक आ रहा लेकिन अपने लढ को 1 इंच भी बाहर नहीं निकाला। कुछ देर तक वह यूं ही उसके चुचियों को दबाता रहा है और इसका असर थोड़ी देर में नीलू पर होने लगा क्योंकि चुची को मसलने से थोड़ी ही देर में नीलू के मुंह से आ रही दर्द के कराहने की आवाज आनंददायक सिसकारी में बदलने लगी। राहुल समझ गया कि अब दर्द की जगह आनंद नहीं ले लिया है इसलिए वह अपने लंड को बाहर की तरफ खींचा और फिर हल्के से अंदर डाला। नीलू को मजा आने लगा और राहुल धीरे-धीरे लंड को अंदर बाहर करते हुए नीलू को चोदने लगा दोनों को बेहद मजा आ रहा था पूरा किचन नीलू कि शिसकारियों से गुंज रहा

था।

 
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