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होता है जो वो हो जाने दो complete



राहुल कभी-ऊसकी गांड को पकड़कर ऊसे चोदता तो कभी उसकी चूचियों को पकड़ कर चुचीयो को दबाते हुए चोदता। राहुल के हर एक धक्के पर नीलू किचन के फर्श पर पसर जा रहीे थी। हर धक्के के साथ ही नीलू की बुर से फुच्च फुच्च की आवाज आ रही थी। आज नीलू राहुल को पूरी तरह से नीचोेड़ डालने के मूड में थी

और खुद भी अपनी बुर में इकट्ठा सारे रस को चरमोत्कर्ष को महसुस करते हुए बहा देना चाहती थी।

थोड़ी ही देर बाद दोनों चरमोत्कर्ष की तरफ बढ़ रहे थे राहुल के धक्के बड़ी ही तीव्र गति से लगने लगे थे। नीलू की सिसकारियां भी बढ़ती जा रही थी तभी थोड़ी देर बाद दोनों का बदन एक साथ अकड़ने लगा। और दोनों हल्की चीख के साथ झड़ने लगे। राहुल नीलू के ऊपर ढह गया दोनों की सांसे तीव्र गति से चल रही थी। दोनों के अंगों से निकला हुआ काम रस धीरे-धीरे करके नीलु की जांघो को भिगोता हुआ नीचे फर्श पर गिरा रहा था।

दोनों दूसरी बात चरमोत्कर्ष का आनंद ले चुके थे नीलू और राहुल दोनों पसीने में तर बतर हो चुके थे। जब तक यह चुदाई चलती तब तक ओवन में ब्रेड तैयार हो चुका था। राहुल नीलू के ऊपर से हटा नीलू के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आ रहे थे उसे पूरी तरह से संतुष्टि मिलती थी। वह राहुल की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए ओवन खोली और उसमें से पूरी तरह से तैयार हो चुका ब्रेड निकालकर ओवन को बंद कर दी। दोनों संपूर्ण नग्नावस्था में भी डाइनिंग टेबल पर बैठकर नाश्ता किए। नीलू का बदन काम रस की वजह से पूरी तरह से चिपचिपा हो चुका था इसलिए उसने राहुल को बाथरूम में साथ नहाने का प्रस्ताव दिया जिसे राहुल हंसते-हंसते स्वीकार भी कर लिया। और स्वीकार भी कैसे नहीं करता उसे भी नीलू के साथ संपूर्ण नग्नावस्था में स्नान करने का मजा जो लेना था।

दोनों पूरे दिन चुदाई का मजा लेते रहे डाइनिंग रूम से शुरू हुआ यह सिलसिला किचन से लेकर के बाथरूम और बाथरूम के बाद बैडरूम तक पूरी तरह से वासना में लिप्त यह चुदाई का खेल चलता रहा। दोनों एक दूसरे के अंगों के रस को पूरी तरह से निचोड़ने में लगे रहे।

राहुल को जाते-जाते नीलू पूरी तरह से थक चुकी थी उसके बदन में संतुष्टि पूरी तरह से अपना असर दिखा दीखा दी थी। नीलु ने दरवाजे पर आकर अपनी मां के आने से पहले ही मुस्कुराते हुए राहुल को विदा कर दी।

राहुल के लिए भी आज का दिन पूरी तरह संतुष्टि भरा रहा।

शाम ढल चुकी थी अंधेरा छाने लगा था राहुल घर लौटते समय रास्ते में मिठाई की दुकान से अपनी मां के मन पसंद की मिठाई खरीद कर घर ले गया। उसे पता था कि उसकी मां मिठाई बहुत पसंद करते हैं लेकिन हमेशा अपने बजट के अनुसार ही कभी कभार ही खरीद पाती थी। लेकिन राहुल तेरी जेब गर्म होने लगी थी इसलिए वह जब भी मन करता था घर पर जरुर कुछ ना कुछ खाने पीने की वस्तुं ले जाया करता था।

घर पर जैसे ही पहुंचा तो उसकी नजर सामने चली गई जहां पर अलका बैठकर पोछा लगा रही थी। बहुत थोड़ा आदमी की तरफ झुक कर पोछा लगा रही थी जिसकी वजह से उसकी भरावदार गांड उभर कर सामने आ रहे थे जिसे देखते ही राहुल के बदन में गुदगुदी सी होने लगी। भरावदार गोल गोल ओर उभरी हुई बड़ी गांड़ हमेशा से राहुल की कमजोरी रही है। चाहे जितनी बार भी चुदाई का सुख भोग चुका हो ं लेकिन जब भी किसी औरत की भराव दार गांड पर नजर जाती थी तो उसका मन चोदने के लिए ललचाने लगता था। यहां भी ऐसा ही हुआ दिन भर नीलू को भोग कर अाया था लेकिन घर पर आते हैं अपनी मां की बड़ी बड़ी मस्त गांड को देखकर उसका मन फिर से चोदने को करने लगा। उसके सोए हुए लंड में फिर से हरकत होना शुरु हो गई। वह मिठाई लेकर घर में प्रवेश किया तभी अलका की नजर राहुल पर पड़ गई। और वह पोछा लगाते हुए बोली।

तू आ गया बेटा कब से तेरा इंतजार कर रही हु।

क्यों मम्मी कोई काम था क्या ?(मिठाई को टेबल पर रखते हुए बोला)

नही रे , लेकीन अब तेरे बिना मेरा बिल्कुल भी मन नहीं लगता। अच्छा यह तू क्या लेकर आया है।

तुम्हारी मनपसंद की मिठाई है मम्मी मैं आज तुम्हारे लिए रसमलाई लेकर आया हूं।

रस मलाई का नाम सुनते ही अलका के मुंह में पानी आ गया उसकी यह पसंदीदा मिठाई थी वह चहकते हुए बोली।

सच बेटा तू कितना अच्छा है तू मेरा इतना ख्याल रखता है मुझे रसमलाई बेहद पसंद है लेकिन तू अपनी आर्थिक स्थिति जानता ही है जब कभी तनख्वाह का दिन आता है तभी मैं मिठाई खरीद कर खा सकती हूं और तुम लोगों को खिला सकती हूं।

हां मम्मी ने जानता हूं तभी तो आज मेरे पास पैसे दे दो मैं तुम्हारे लिए तुम्हारे पसंद की मिठाई लेकर आया हूं।

( कुर्सी पर बैठते हुए राहुल बोला)

ठीक है बेटा मैं जल्दी-जल्दी पहुंचा लगा कर खाना बना देती हुं आज तो खाना बनाने में लेट हो गया है। तुझे भूख तो नहीं लगी है ना।

लगी है ना मम्मी (अपनी आंख को नचाते हुए राहुल बोला।)

बस बेटा थोड़ा इंतजार करना जल्दी से बना देतीे हुं। एक काम कर जब तक खाना नहीं बन जाता तू रसमलाई ही खा लो। ( अलका खड़ी होते हुए बोली।)

मम्मी तुम तो जानती हो मुझे इस रसमालाई से ज्यादा स्वादिष्ट तुम्हारी रसमलाई (उंगली को अपनी मां की बुर की तरफ इशारा करते हुए।) लगती है। और मेरी भूख तो तुम्हारी रसमलाई चाट कर ही मिटेगी।

अपने बेटे की इस तरह की बातें सुनकर अलका का चेहरा सुर्ख लाल रंग का हो गया शर्म की बदरी उसके चेहरे पर साफ नजर आ रही थी। वह पहुंचा और बाल्टी को हाथ में उठा कर बाहर की तरफ जाते हुए बोली।

धत्त तू अब बड़ा शेतान हो गया है। ( इतना कहकर वह गंदे पानी को नाले में बहा कर वापस आ गई। और हाथ पैर धोकर सीधे रसोई घर में घुस गई। पीछे पीछे अपनी मां की मटकती हुई गांड को देखकर वह भी रसोई घर में चला गया और वैसे भी राहुल की मौजूदगी में अलका कुछ ज्यादा ही अपनी गांड को मटका कर चल रही थी।

जिसे देखकर राहुल तो क्या दुनिया के किसी भी मर्द का मन डोल जाए। राहुल का भी बुरा हाल था नीलू को जी भर कर चोदने के बाद भी उसका मन भरा नहीं था। या यूं कह लो कि राहुल अपनी मां की मदमस्त गांड को देख कर एक बार फिर से चुदवासा हो गया था इसलिए वह रसोईघर में अपनी मां के पीछे पीछे चला आया था।

अलका को आभास हो गया था कि राहुल उसके पीछे-पीछे रसोईघर में आ गया है और उसे यह भी मालूम था कि राहुल क्या हरकत करने वाला है। इसलिए अपने बेटे को और ज्यादा ऊकसाते हुए गैस का नॉब चालू करते समय अपनी ऊभरी हुई गांड को कुछ ज्यादा ही उभार कर आगे की तरफ झुक गई। अलका भी दिन भर की प्यासी थी, क्योंकि सुबह-सुबह राहुल ने रसोईघर में दरवाजा ठीक करने के बहाने उसको चोद़कर उसके कामाग्नी को और ज्यादा भड़का दिया था। उसे दिनभर राहुल के मोटे लंड की जरूरत महसूस होती रही लेकिन वह अपना मन मसोसकर रह गई। इसलिए वह सोच रही थी कि क्यों ना एक बार फिर से रसोई घर में ही वह उसकी प्यासी बुर की प्यास बुझा दे। इसलिए वहीं राहुल को ऊकसाने की पूरी कोशिश करने लगी। राहुल की पैंट में तो तंबू बन चुका था राहुल सब्र कर पा़ना वह भी अपनी मां की मध भरी ,ऊभरी हुई गांड देखकर नामुमकिन था। अलका करना चाहते हुए अपनी गांड के भार को कभी दाहिने पैर पर खड़ी होकर टीकाती तो कभी बाएं पैर पर उसकी इस हरकत पर उसकी गांड का मटकना कुछ ज्यादा ही उभर कर सामने आ रहा था। यह देख कर राहुल से रहा नहीं गया और सुबह की तरह ही वह पीछे से अपनी मां को बाहों में भर लिया और साथ ही अपने तंबू को अपनी मां की नरम नरम गांड पर साड़ी के ऊपर से ही धंसाने लगा और साथ ही

ब्लाउज के ऊपर से ही अपनी मां की बड़ी बड़ी चुचियों को दबाना शुरु कर दिया। अलका की सांसे भारी होने लगी थी उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी। अपनी उत्तेजना को दबाते हुए वह बोली।

हट छोड़ मुझे ना जाने तुझे क्या हो जाता है अभी सुबह में ही तो करके गया, और अभी आते ही शुरु हो गया चल तु बाहर जा मुझे खाना बनाने दे।( गैस पर कढ़ाई रखते हुए बोली,ऐसा बिल्कुल भी नहीं था कि अलका का मन चुदवाने को नहीं कर रहा था बल्कि उसके अंदर तो काम भावना एकदम प्रबल हो चुकी थी। लेकिन फिर भी वह जानबूझकर ऐसा जता रही थी कि उसका मन बिल्कुल भी नहीं है। अंदर से तो वह यही चाहती थी कि उसका बेटा अपना मोटा लंड उसकी बुर में डाल कर जमकर चुदाई करें।

 
अपनी मां की बात सुनकर राहुल बोला।)

सुबह में करके गया तो क्या हुआ मम्मी उस बात को बीते तो 10 घंटे हो चुके हैं और मेरा मन तो हर 10 मिनट बाद तुम्हें देखकर ही तुम्हें चोदने को करने लगता है। मेरा बस चले तो मैं तो सारा दिन तुम्हारी बुर में लंड डालकर पड़ा रहु।

तो डालकर पड़ा रहे, तुझे मना किसने किया है ।

( अलका कटी हुई सब्जी को कड़ाही में डालते हुए बोली)

सोनू कहां है मम्मी( ब्लाउज के बटन को खोलते हुए बोला।)

पड़ोस में गया है उसके दोस्तों के घर पर पढ़ाई करने अभी कुछ वक्त है उसे आने में। ( अलका बातों ही बातों में राहुल को पूरी तरह से इजाजत दे चुकी थी और अपनी मां की बात को सुनकर राहुल बोला।)

ओहहहहहह मम्मी मुझसे तो बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है तुम बहुत सेक्सी हो तुम्हें देखते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है।( इतना कहने के साथ ही उसने ब्लाउज के सारे बटन खोल दिया और कैसी हुई ब्रा को अपने दोनों हाथों से खींच कर चूचियों के ऊपर चढ़ा दिया जिससे इस समय ऊसकी दोनों चुंचियां ब्रा की कैद से आजाद हो गई। राहुल अपनी मां की नंगी चूचियों को जोर-जोर से दबाने लगा उसकी मां के मुंह से सिसकारी छूटने लगी

दोनों पूरी तरह से गर्म हो चुके थे। राहुल का तंबू हल्का की गांड के बीचो-बीच उसकी बुर के करीब ही दस्तक दे रहा था। अलका पुरी तरह से उत्तेजना के मारे कहां पर है थे वह कांपते हाथों से सब्जी चलाते हुए बोली।

बेटा पहले दरवाजा तो बंद कर लो अगर कहीं ं समय से पहले सोनू आ गया तो गजब हो जाएगा।

कोई नहीं आएगा मम्मी ऐसे ही चलने दो ना मुझे बहुत मजा आ रहा है।( निप्पल को उंगलियों के बीच मसलते हुए बोला।)

मेरी बात मान ले बेटा जल्दी से दरवाजा बंद कर दे मेरा भी बहुत मन कर रहा है तुझसे चुदवाने के लिए तू नहीं जानता कि आज दिनभर कितना तड़पी हूं तेरे बिना।

ठीक है मम्मी मैं जल्दी से दरवाजा बंद कर देता हूं। ( ईतना कहते ही वह दरवाजा बंद करने के लिए आगे बढ़ा जब तक वह दरवाजा बंद करता है आलू का सब्जी में मसाला डालकर उसे बर्तन से ढंककर पकने के लिए छोड़ दी। राहुल दरवाजा बंद करके जैसे ही लौटा दोनों एक दूसरे की बाहों में समा गए । राहुल अपनी मां की चुचियों को दबाता हुआ उसके गले पर होठों पर जहां पर हो सकता था वहां वहां चुंबन की झड़ी बरसा दिया और अलका कामोत्तेजना के वशीभूत होकर अपने बेटे के पेंट की बटन खोलने लगी, अगले ही पल वह अपने बेटे की पेंट को खोलकर उसे घुटनों को सरका दी

अपने बेटे के तने हुए लंड को देखकर उसके बदन में गुदगुदी होने लगी और वह अपनी हथेली में लंड को-भरकर आगे पीछे करते हुए हिलाने लगी।

सससससससहहहहहहहह.......आहहहहहहहह..... मम्मी बस आ जाओ अब बिल्कुल भी रहा नहीं जाता।

( इतना कहते हुए वह फिर से अपनी मां को अपनी बाहों में भर लिया और उसके गुलाबी होठों को चूसने लगा अपनी मां के होठों को चूसते चूसते वह किचन फ्लोर पर अपनी मां को सटा दिया। और तुरंत दोनों हाथों से साड़ी को ऊपर की तरफ सरकाने लगा। जैसे ही अलका की साड़ी को राहुल कमर को खाया अलका ने खुद साड़ी को थाम ली और राहुल ने तुरंत अपनी मां की पैंटी को पकड़कर नीचे सरकाने लगा, अगले ही पल राहुल नीचे की तरफ झुकते हुए अपनी मां की पेंटी को ऊसकी चिकनी टांगो से निकाल कर फर्श पर फेंक दीया। अलका कमर के नीचे से बिल्कुल नंगी हो गई अपनी मां की नंगी बुर को देख कर राहुल अपने आप पर बिल्कुल भी सब्र नहीं कर पाया और खड़े होकर एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर अपनी मां की बुर पर रगड़ने लगा। अलका अपनी बेटे के गरम लंड के स्पर्श मात्र से ही एकदम चुदवासी हो गई और एकदम कामोतेजना का अनुभव करते हुए उसकी बुर से मदन रस की एक बूंद टपक पड़ी। राहुल तुरंत अपनी मां की दोनों जनों को अपनी कलाइयों का सहारा देकर ऊपर की तरफ उठाया अलका को तो बिल्कुल समझ में नहीं आया कि राहुल क्या कर रहा है, जब तक अलका को कुछ समझ नहीं आता वह किचन फ्लोर पर बैठ चुकी थी और राहुल ने उसकी जांघो को थोड़ा सा फैलाते हुए

अपने लंड के सुपाड़े को अपनी मां की बुर की गुलाबी पत्तियों के बीच टीकाकर अपनी कमर को आगे की तरफ बढ़ाया अलका की बुर पहले से ही पानीयाई हुई थी इसलिए सटाक से पूरा सुपाड़ा बुर के अंदर सरकने लगा। और अगले ही पल उसने एक जोरदार धक्का लगाया जिससे राहुल का पूरा लंड उसकी मां की बुर में समा गया। राहुल का पूरा लंड अलका की बुर में घुस चुका था । राहुल ने तुरंत अपनी मां की नंगी चूचियों को हथेली में भर लिया और उसे दबाते हुए हल्के हल्के शॉट लगाते हुए अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया। अलका अपने बेटे के इस अंदाज पर एकदम गदगद हुए जा रही थी। उसे अंदाजा भी नहीं था कि राहुल ऐसा कुछ कर सकता है। उसने जिस अंदाज से अपनी कलाइयों का सहारा लेकर जांघो से उसे उठाकर किचन फ्लोर पर रखा था अलका खुशी के मारे एक दम झूम उठी थी। इस पोजीशन में अलका को ज्यादा आनंद आ रहा था। राहुल लगातार अपनी मां की चूची को दबाते हुए उसे चोदे जा रहा था। राहुल का मोटा लंड अलका की बुर में सटासट अंदर बाहर हो रहा है अलका अपनी नजरें नीचे झुका कर अपनी बुर की तरफ देख रही थी जिसमें उसके बेटे का मोटा लंड ऊसकी बुर की गुलाबी पत्तियों को फैलाता हुआ जल्दी-जल्दी अंदर बाहर हो रहा था जिसे देखते हुए उसके बदन में रोमांच फेल रहा था। अलका को यह देखकर बड़ा ही मजा आ रहा था वह रहकर राहुल लगातार इतनी जोर जोर से धक्के लगा ताकि उसके मुंह से लगातार गर्म सिसकारी फूट पड़ती।

आहह....आहह...:आहह...आहह...( लगातार धक्के पड़ने पर अलका के मुंह से ईस तरह की आवाज़ आ रही थी। राहुल जोर जोर से धक्के लगाते हुए अपनी मां को अपनी बाहों में भींच कर लगातार उसकी चूचियों को दबाता हुआ उसके गले पर चुंबन की झड़ी बरसा रहा था जो कि अलका की उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ा रहा था। कुछ देर तक यूं ही राहुल अपनी मां को चोदता रहा' ना जाने क्यों राहुल को किचन में चुदाई करना कुछ ज्यादा ही पसंद आ रहा था जिसमे अब अलका को भी मजा आने लगा था।

दोनों की सांसे भारी होती जा रही थी अलका के मुंह से लगातार गर्म सिसकारियां छूट रही थी। राहुल जबरदस्त प्रहार कर रहा था। अपने बेटे के हर धक्के पर अलका पूरी तरह से हिल जा रही थी। उसे हल्का हल्का दर्द भी महसूस हो रहा था लेकिन जितना दर्द हो रहा था उससे कहीं ज्यादा उसे आनंद की प्राप्ति हो रही थी। कुछ ही देर में दोनों के बदन की अकड़न बढ़ने लगी राहुल के साथ साथ अलका भी अपने बेटे को अपनी बाहों में कस के भींच ली और दो-चार धक्के मे ही दोनो भलभलाकर झड़ने लगे दोनों की गर्मी शांत हो चुकी थी। राहुल जल्दी से अपने कपड़े पहन लिया उसकी मा भी किचन फ्लोर से नीचे उतर कर नीचे पड़ी अपनी चड्डी को उठाकर जल्दी से पहन ली ओर अपने कपड़े दुरुस्त कर ली।

राहुल जल्दी से किचन का दरवाजा खोल कर बाहर आ गया तब तक सोनु वापस नहीं आया था। अलका अपनी वासना की भूख मिटा कर खाना बनाने में जुट गई और राहुल अपने कमरे में चला गया।

राहुल का आज का दिन कुछ ज्यादा ही बेहतर जा रहा था। अपने बिस्तर पर लेट कर अपनी सुस्ती मिटा रहा था। कि तभी उसके पैंट में विनीत की भाभी का दिया हुआ मोबाइल वाइब्रेट होने लगा वह समझ गया कि भाभी का ही फोन है। उसे मालूम था कि वीनीत की भाभी आपसे गरम बातें करते हुए अपने आप को शांत करेगी राहुल थोड़ा सा दिन भर की मेहनत के साथ थकान सा महसूस कर रहा था। वह चाहता तो वीनीत की भाभी को कॉल रिसीव नहीं करता। लेकिन वह किसी को भी नाराज नहीं करना चाहता था या किसी से भी दूर रहना नहीं चाहता था क्योंकि तीनों के साथ उसकी आत्मीयता जुड़ चुकी थी तीनों के साथ वह बना रहना चाहता था। वह फिर चाहे उस की मां हो वीनीत की भाभी हो या फिर उसकी प्रेमिका नीलू हो। इसलिए वह ना चाहते हुए भी उसका कॉल रिसीव कर लिया और फिर वह शुरू हो गई वही गंदी बातों का सिलसिला यह सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक कि विनीत की भाभी की गर्मी शांत नहीं हो गई। जब तक वह झड़ नहीं गई तब तक वह फोन कट नहीं की। झड़ने से पहले उसने अपनी ढ़ेर सारी नंगी सेल्फी भी ऊसे व्हाट्स एप पर भेज दी जिसे देखकर राहुल गरम आहें भरने लगा था।

 
तीनों खाना खा चुके थे अलका ने अपने दोनों बच्चों को उनके हिस्से की रसमलाई खाने को दी सोनू तो रसमलाई खा कर बहुत खुश हुआ और राहुल भी अपने हिस्से की रसमलाई खा गया। सोनू खाना खाने के बाद अपने कमरे में चला गया और अलका रसोई घर साफ करने लगी राहुल तब तक वहीं बैठा रहा। अलका बहुत खुश नजर आ रही थी रसोई घर साफ करने के बाद वहां अपने हिस्से की रसमलाई कटोरी में लेकर अपने कमरे की तरफ जाने लगी और साथ ही राहुल की तरफ देखकर कामुक मुस्कान बिखेर रही थी। राहुल भी अपनी मां को देख कर मंद मंद मुस्कुरा रहा था। अलका हाथ में कटोरी लिए जिसमें उसके हिस्से की रसमलाई थी। उसे हाथ में हिलाते हुए बड़े ही कातिल अंदाज में अपनी भराव दार गांड को कुछ ज्यादा ही मटकाते हुए अपने कमरे की तरफ जा रही थी और जाते जाते राहुल की तरफ देखकर बोली अगर तुझे रसमलाई खाना हो तो मेरे कमरे में आ जाना। राहुल अपनी मां के इन शब्दों का अर्थ अच्छी तरह से समझता था सुबह से दो-दो बार अपनी बुर में अपने बेटे का लंड डलवा कर चुदवा चुकी थी, लेकिन उसकी प्यास थी कि मुझे नहीं किया जाए और ज्यादा भड़कने लगती थी। अलका अपने कमरे में चली गई, राहुल भले अपनी मां का इस मस्ती भरे आमंत्रण को कैसे ठुकरा सकता था.। लेकिन वह कुछ देर तक वहीं बैठा रहा और अलका अपने कमरे में पहुंचते ही अपने बदन से साड़ी निकाल कर बिस्तर पर फेंक दी और ब्लाउज के ऊपर के दो बटन को खोल दी।

ऊपर के दो बटन खुलते ही अलका की बड़ी बड़ी चुचियों का आधा भाग ब्लाउज के बाहर झांकने लगा और चुचियों के बीच की गहरी लकीर और भी ज्यादा कामुक लगने लगी अगर किसी की भी नजर अलका की खुली हुई लकीरों पर पड़ जाए तो खड़े-खड़े उसका लंड पानी छोड़ दे। अलका अधखुली ब्लाउज और पेटीकोट में रस मलाई की कटोरी ले कर बिस्तर पर लेट गई, और रसमलाई का स्वाद चखते हुए आनंदित होने लगी।

आखिरकार बाहर राहुल कब तक अपनी चुदवासी मां को कमरे में अकेला छोड़ कर बैठा रहता उसका चुदास से भरा हुआ आमंत्रण उसे फिर से एक बार चुदवासा बना रहा था। दिनभर की चुदाई की यात्रा करने के बाद भी उसे कोई मंजिल नहीं मिली थी। वह कुर्सी से उठकर अपनी मां के कमरे की तरफ जाने लगा, कमरे के पास पहुंचते ही कमरे का दरवाजा उसे खुला मिला क्योंकि अलका जानती थी कि उसका चुदास से भरा हुआ आमंत्रण पाकर उसका बेटा कमरे में आए बिना रह ही नही ं सकता था। कमरे में प्रवेश करते ही उसने एक नजर अपनी मां पर डाली और उसे पेटीकोट और ब्लाउज में देख कर मुस्कुराते हुए दरवाजा बंद कर दिया

अपने बेटे को कमरे में देख कर रस मलाई खाते हुए अलका भी मुस्कुराने लगी ओर बोली।

अच्छा हुआ बेटा तू आ गया यूं अकेले-अकेले रसमलाई खाने में बिल्कुल भी मजा नहीं आ रहा था।

मुझे भी बिना तुम्हारी रसमलाई चखे नींद कहां आती है (अपनी मां के करीब बिस्तर पर बैठता हुआ राहुल बोला। अलका भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा किस रसमलाई की बात कर रहा है इसलिए वह रसमलाई को जीभ से चाटते हुए बोली।)

तो चाट ले चख ले जो मन आए वह कर ले आखिर तुझे रोका किसने हैं। ( अपनी मां की हामि पाते ही राहुल ने तुरंत अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाया, और एक हाथ से अपनी मां की पेटिकोट की डोरी को पकड़कर झटके से खींच दिया, तुरंत ही झटके से खींचने की वजह से पेटीकोट की गांठ खुल गई , और अपने बेटे की इस हरकत करें अलका के बदन में गुदगुदी सी होने लगी। पेटीकोट की डोरी खुलते ही पेटीकोट ढीला हो गया। पेटीकोट के ढीला होते ही राहुल से सब्र करना मुश्किल होने लगा और उसमें तुरंत दोनों हाथ से पेटीकोट पकड़कर कमर से नीचे की तरफ सरकाने लगा, लेकिन अलका की भारी-भरकम गांड के वजन की वजह से पेटीकोट नीचे की तरफ सरक नहीं रही थी जिसे अलका ने भांप ली और खुद ही कटोरी से रसमलाई खाते हुए अपनी भरावदार गांड को ऊपर की तरफ उचका कर अपने बेटे को पेटीकोट निकालने में मदद करने लगी। अपनी मां को यूं अपनी भारी भरकम गांड उचकाते हुए देख कर राहुल ने तुरंत पेटिकोट को घुटनों तक खींच लिया जिसे खुद ही अलका ने अपने पैरों के सहारे उसे अपनी गोरी चिकनी टांगों से निकाल कर बाहर फेंक दि।

राहुल तो अपनी मां की चिकनी जांघो को देखकर मदहोश हो गया। और तुरंत झुककर अपनी मां की जांघो को चूमने चाटने लगा। अलका अपने बेटे के चुंबन तेरे मस्त होने लगी राहुल लगातार जांघों से लेकर घुटनों तक चुंबनों की बौछार लगा दिया अलका रस मलाई खाते हुए मस्त हुए जा रही थी उसके बदन में उत्तेजना की लहर पल-पल बढ़ती जा रही थी। राहुल की नजर जैसे ही अपनी मां की पैंटी की तरफ गई तो बुर वाली जगह पर पेंटिं पूरी तरह से गीली नजर आने लगी। जिसे देखते ही राहुल एकदम उत्तेजना से भर गया और तुरंत उसकी गीली वाली जगह पर अपनी जीभ फिराकर चाटने लगा अलका के बदन में सुरसुरी सी फेलने लगी । अब उसे रसमलाई खाने से ज्यादा अपनी रसमलाई चटवाने की आतुरता बढ़ती जा रही थी। राहुल भी एकदम पागल हो चुका था उसने तुरंत अपनी मां की पैंटी को दोनों छोऱ से पकड़ा और इस बार भी अलका ने तुरंत एक पल भी गवाएं बिना अपनी भारी-भरकम गांड को ऊपर की तरफ उचका दी, राहुल अभी तुरंत अपनी मां की पैंटी को खींचते हुए नीचे की तरफ सरकाने लगा

जैसे जैसे पेंटी कमर से नीचे की तरफ सऱक रही थी, वैसे वैसे अपनी मां की पनियाई बुर को देख कर उसकी आंखों की चमक बढ़ती जा रही थी पेंटी निकालने में राहुल को बहुत ही उत्तेजना का अनुभव हो रहा था ।गोरी चिकनी मांसल जांघोे से होते हुए जैसे जैसे अलका की पेंटी नीचे की तरफ सरक रही थी राहुल के दिल की धड़कन तेज होती जा रही थी। उत्तेजना के मारे राहुल का गला सूख रहा था। अलका जी बदहवास सी हुए जा रहीे थी। उसकी भी बुर कुलबुलाने लगी थी। ऊसकी बुर से मदनरस की बुँदे रह रहकर टपक रही थी। राहुल ने बिना रुके अपनी मां की पैंटी को सीधे घुटनों से नीचे तक उतार दिया और उसे भी अलका ने अपने पैरों के सहारे निकाल फेंकी। अलका रसमलाई खाना बिल्कुल भूल गई उसका ध्यान अब सिर्फ राहुल पर ही लगा हुआ था और उसकी हरकतों पर। राहुल तो अपनी मां की नंगी बुर को देख कर एकदम दीवानों की तरह जांघों के बीच वाली जगह पर चुंबनों की बौछार कर दिया। अलका अपने बेटे के चुंबन से एकदम मस्त होकर कसमसाने लगी और उत्तेजना के मारे दाएं-बाएं अपना सिर पटकने लगी। राहुल को तुरंत अपनी प्यासी जीभ को अपनी मां की रसीली बुर पर रखकर चाटना शुरू कर दिया। बेतहाशा चुंबनों और चटाई के कारण अलका भीगने लगी उसकी बुर से नमकीन पानी का फुवारा फूट पड़ा। नथुनो से निकल रही गर्म सांसों की कसमसाहट में अलका मस्त हुए जा रही थी। मां बेटे के बीच का स्नेह और प्यार का संबंध किस ने वासना और संभोग के सुख में खो गया था। राहुल से बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था बंद कमरों के बीच कोई सोच भी नहीं सकता था कि एक मां और बेटे मर्यादा की सारी हदें लांघकर संभोग सुख की खोज में वासना के समुंदर में इस कदर डूब जाएंगे कि उन्हें उन्हें दुनिया का जरा भी ख्याल नहीं रहेगा। राहुल की जीभ लबालब अलका की बुर की गुलाबी पत्तियों के बीच फड़फड़ाकर चल रही थी जिससे अलका को अद्भुत अतुल्य आनंद की प्राप्ति हो रही थी। तभी राहुल की नजर माता के हाथों में जो रस मलाई की कटोरी थी उस पर गई उसने एक हाथ आगे बढ़ाकर उस कटोरी को थाम लिया अलका को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि राहुल ने कटोरी किस लिए लिया है। अलका कुछ पूछ पाती इससे पहले ही राहुल ने कटोरी को एकदम बुर के ऊपर लाकर उसमें से चार-पांच रसमलाई की बूंदें अपनी मां की बुर की गुलाबी पत्तियों के बीच टपका दिया। अलका को समझते देर नहीं लगी कि उसका बेटा अब क्या करने वाला है वह अपने बेटे के द्वारा आगे होने वाली हरकत के बारे में सोचकर ही रोमांचित हुए जा रही थी। तभी राहुल रस मलाई की कटोरी को एक बाजू रखकर अपनी मां की जांघों के बीच झुक गया और बुर की गुलाबी पत्तियों के बीच जीभ लगा कर चाटना शुरू कर दिया ।

आाहहहहहह गजब का एहसास और स्वाद दोनों का एक साथ आनंद उठा रहा था राहुल। उसे इस समय बेहट आनंद की प्राप्ति हो रही थी और वह चटखारे लगा लगा कर अपनी मां की बूर चाट रहा था। अलका को एकदम चुदवासी हो गई वह अपनी कमर को गोल-गोल घुमाते हुए अपने बेटे से अपनी बुर चटवा रही थी।

ससससहहहहहहहहहह...... राहुल तूने तो मेरे पूरे बदन में आग लगा दी है रे।ओहहहहहहहहह...राहुल....ऊफ्फफफ....

ओर चाट ....चाट....मेरी बुर को....ऊम्म्म्म्..:.... ( सिसकारी लेते हुए अलका उत्तेजना के मारे अपना सिर बाय-बाय पटक रही थी यह देखकर राहुल और भी ज्यादा चुदवासा हुए जा रहा था और जोर जोर से अपनी मां की बुर को लबा लब चाटे जा रहा था। कुछ देर तक यूं ही राहुल अपनी मां की बुर में ही मस्त होता रहा , पेंट के अंदर उसका लंड टनटनाकर एकदम लोहे की छड़ की तरह हो गया था। और उसने उत्तेजना के कारण हल्का हल्का दर्द भी होने लगा था इसी तरह का एक ही इलाज था और वह था चुदाई जबरदस्त चुदाई।

अलका का भी यही हाल था वह भी पूरी तरह से चुदवासी हुए जा रही थी वह सिसकारी लेते हुए राहुल से चुदाई करने के लिए गिड़गिड़ाने लगी थी।

ससससससहहहहहहहह.....आहहहहहहहहह.....राहुल..... बस भी करो राहुल अब तो मुझसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा है। बस आप मेरी बुर से अपनी जीभ निकालकर अपना मोटा लंड डाल दो। ऊहहहहहह.....राहुल....

अपनी मां की उत्तेजना से भरी हुई बातें सुनकर राहुल काफी दिल तड़प उठा अपनी मां को चोदने के लिए इसलिए वह बुर पर से अपना मुंह हटा लिया ओर जल्दी से अपनी जगह पर खड़ा होकर अपनी पेंट के बटन खोलने लगा अपने बेटे को पेंट खोलता हुआ देखकर अलका की बुर मे खुजली होने लगी। और वह खुद ही अपनी हथेली उस पर रगड़ कर अपनी उत्तेजना को शांत करने की कोशिश करने लगी और देखते ही देखते राहुल ने अपनी पेंट की बदन खोल कर पेंट को तुरंत घुटने से नीचे सरका कर उसे उतार दिया। ऊफ्फ्..... क्या खुमारी छाई हुई थी अलका की आंखों में जब उसकी नज़र अपनी बेटे के खड़े लंड पर पड़ी गजब का हथियार था उसका ऊसकी मोटाई लंबाई उसके सुपाड़े का अंडाकार आकार देख कर अलका की बुर फूलने पिचकने लगी। वह अपनी बुर को मसलते हुए एकटक अपने बेटे के लंड को देखने लगी। वग जानबूझकर उसे अपनी मुट्ठी में लेकर आगे पीछे करते हुए हिलाने लगा जिसे देख कर अलका से बिल्कुल भी रहा नहीं गया और वह तुरंत बेठ गई।

 


ओहहहहहह राहुल तेरा लंड देख कर तो मुझसे बिल्कु......( इतना ही कही थी कि इसके आगे की सब्जी उसके मुंह में ही घुट कर रह गए क्योंकि तब तक उसने अपने बेटे के लंड को थाम कर अपने मुंह में भर ली थी

और उसे चूसने शुरू कर दी। राहुल तो एकदम मस्त हुए जा रहा था। कुछ ही पल में उसके मुंह से भी गर्म सिसकारी छूटने लगी।

आहहहहहहहह.....मम्मी ....ऊूूूहहहहहहहहहह..... बहुत गर्म हो मम्मी तुम मुझे बहुत मजा आ रहा है ऐसा लग रहा है कि जैसे मेरा पूरा बदन हवा में गोते लगा रहा है बस एसे ही चाटते रहीए मम्मी...आहहहहहह..... मम्मी ...थोड़ा जीभ से.....आहहहह.:..हां हां हां मम्मी बस एेसे ही...ऊफ्फ्....बहोत मजा आ रहा है।

राहुल को अपना लंड चटवाने में बहुत मजा आ रहा था उसकी मां भी अपने बेटे के लंड को बड़े चाव से लॉलीपॉप की तरह चाट रही थी। दोनों अपनी अपनी मस्ती में मस्त हुए जा रहे थे। राहुल को डर था कि कहीं वह अपनी मां के मुंह में ही ना झड़ जाए। इसलिए उसने तुरंत अपनी मां के मुंह में से अपने लंड को बाहर खींच लिया। अलका भी शायद यही चाहती थी क्योंकि उसे अब अपनी बुर में लंड लेना था इसलिए वह खुद ही अपने हाथों से ब्लाउज के बाकी बटन को खोलना शुरू कर दी, और ब्लाउज के बटन खुलते ही हमें झट से अपने हाथ को पीछे ले जाकर ब्रा की हुक को खोलते हुए स्ट्रेप को भी नीचे सरका दी। उसे इतनी जल्दी थी कि वह एक साथ ब्लाउज और ब्रा दोनों को उतार फेंकी। राहुल अपनी मां का उतावलापन देखकर बोला वह मम्मी तुम तो एकदम चुदवासी हो गई हो इस उम्र में भी तुम गजब की सेक्सी लगती हो मैं तो तुम्हारा दीवाना हो गया हूं। कसम से मम्मी आपकी खूबसूरत और सेक्सी बदन को देखकर ना जाने कितनों का पानी निकल जाता होगा। ( राहुल लंड को मुठीयाते हुए बोला। अलका भी अपने बेटे के मुंह से अपने बदन की तारीफ सुनकर खुशी से एकदम गदगद होने लगी। और झूठ मुठ का नाराजगी दर्शाते हुए बोलेी।)

चल अब बस भी कर बेकार की बातें छोड़कर चल अब चढ़ जा मेरे ऊपर और आज ऐसा चोद की मैं पानी पानी हो जाऊं (बिस्तर पर पीठ के बल लेटने हुए अलका अपने बेटे से बोली। राहुल कहां पीछे हटने वाला था वह तो पहले से ही तैयार था ऐसे हालात में तो राहुल और भी ज्यादा निखरकर सामने आता था। अलका अपनी टांगे फैलाकर बिस्तर पर लेट चुकी थी राहुल अपने लंड को हिलाता हुआ अपनी मां की जांघों के बीच अपने लिए जगह बनाने लगा। जगह बनाते ही वह अपनी मां की जांघों को अपनी जांघ पर चढ़ा दिया । जांघ से जांघ की रगड़ दोनों की कामोत्तेजना को बढ़ाने लगी। राहुल लंड के सुपाड़े को अपनी मां की बुर के गुलाबी पत्तियों के बीच रख कर सुपाड़े पर हल्का सा दबाव बनाया तो सुपाड़ा गच्च करके बुर के अंदर सरक गया। सुपाडा जैसे ही बुर के अंदर प्रवेश किया अलका का मुंह खुला का खुला रह गया। उसके माथे पर पसीने की बूंदें उपसने लगी । राहुल अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से थाम कर अपनी कमर को आगे की तरफ बढ़ाया तो उसका मोटा लंड धीरे धीरे रगड़ खाता हुआ बुर मे घुसने लगा,जैसे जैसे लंड बुर मे घुस रहा था वेसे वेसे अलका की सांसे अटकती जा रही थी। धीरे-धीरे करके राहुल ने पूरा लंड अपनी मां की बुर में डाल दिया।

और आहें भरते हुए लंड को अंदर बाहर करते हुए अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया। राहुल की जगह अगर दूसरा कोई होता तो थक कर न जाने कब से चूर हो गया होता क्योंकि आज के दिन बाद सुबह से ही चुदाई का खेल खेल रहा था ना जाने कितनी बार उसके घंटे में काम रस का फुवारा बुर में छोड़ा था। लेकिन फिर भी अपनी मां की अंगड़ाई लेते हुए मस्त जवानी में एक बार फिर से उसके अंदर जोश भर दिया था और राहुल नतीजन अपनी मां की बुर में लंड पेल कर उसे चोद रहा था। ऐसे तेज तेज धक्के लगा रहा था कि अलका को कमरे के अंदर भी आसमान के तारे नजर आ रहे थे।

अपनी मां की चुचियों को पकड़कर राहुल बिना रुके लगातार बुर के अंदर धक्के पर धक्का लगा रहा था। उसकी कमर के हर ठाप पर पूरा पलंग हील जा रहा था। गजब का कामुक नजारा बना हुआ था राहुल अपनी मां के कमरे में उसके ही बिस्तर पर उसे चोद रहा था। अलका के रेशमी घने बाल खुले हुए थे जोकि बिस्तर पर इधर उधर बिखरे हुए थे। चेहरे पर शर्म और संतुष्टि की लालिमा छाई हुई थी। इस समय अलका पूरी तरह से अपने बेटे के कब्जे में थी क्योंकि वह हर तरह से अपनी मां को चोद रहा था। कभी अपने लंड की रफ्तार को कम कर देता तो कभी बढ़ा देता । कभी जोर जोर से चूचियों को मसलता हुआ चोदता तो कभी झुक कर ऊंन चुचीयों को मुंह में भर कर पीते हुए चोदता। वह हर तरह से अपनी मां की ले रहा था अलका तो अपने बेटे के एक हुनर से एकदम गदगद हुए जा रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि यह उसी का बेटा है एकदम सीधा-सादा भोला-भाला सा दिखने वाला उसका बेटा आज उसको ही चोद चोद कर ऊसकी बुर को पानी पानी कीए जा रहा था। राहुल जब कभी थक जाता तो उसकी मां की दूसरी टांग को दूसरी टांग पर सटा कर दोनों टांगों के बीच से उसकी बुर में लंड डालकर चोदता। गर्म सिस्कारियों से पूरा कमरा गूंज रहा था। राहुल के माथे पर पसीना का पक्का अलका की चूची ऊपर गिर रही थी।

आाााहहहहहहह....ओोहहहहह मम्मी बहुत मजा आ रहा है देखो तो कैसे मेरा लंड तुम्हारी बुरमे सटासट अंदर बाहर हो रहा है।ऊूहहहहहहह मम्मी मेरे मोटे लंड को देखकर ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगता है कि तुम्हारी छोटी सी बुर में घुस जाएगा। आहहहहहहह....आहहहहहहह.... ( राहुल गर्म आहें भरते हुए अपनी मां की गंदी बात करके अपनी मां को चोदा जा रहा था अपने बेटे की गंदी बात सुनकर अलका भी मस्त हुए जा रही थी। अलका भी अच्छी तरह से जानती थी कि अगर चुदाई के दौरान एकदम गंदी बातें करते हुए चुदाई करवाने में अत्यधिक आनंद की अनुभूति होती है इसलिए उसे भी बहुत मजा आ रहा था।

हां बेटा..... बस ऐसे ही बस ऐसे ही...... जोर जोर धक्के लगा .......मेरी बुर को पानी पानी कर दे ...।...हां बस ऐसे ही बेटा...ऊफ्फ... चोद बेटा चोद....आहहहहहह.....आहहहहहहहहह.....आहहहहहहह..... ( अपनी मां की सिसकारी भरी गंदी बाते सुनकर राहुल ने लगातार दो चार धक्के जोर जोर से लगा दिया जिससे अलका के मुंह से आह निकल गई। दोनो पसीने से तरबतर हुए जा रहे थे राहुल ठाप पर ठाप लगाए जा रहा था। पूरा पलंग चरमरा रहा था अलका बिस्तर पर पीठ के बल चुदवाते हुए हर धक्के के साथ ऐसे हील रही थी कि जैसे मानो कोई उसे झूला झूला रहा हो। कुछ भी हो दर्द भरी आह मेरी सिसकारी से भरी मस्ती छुपी हुई थी जिसका दोनों ही भरपूर आनंद ले रहे थे कुछ देर तक यूं ही दोनों की चुदाई का कार्यक्रम चलता रहा । तभी थोड़ी देर बाद अलका की सिसकारी तेज हो गई अपनी मां की तेज होती सिसकारी की आवाज की आवाज को राहुल जल्द ही भांप गया और उसने अपने धक्कों को दुगनी गति से चलाना आरंभ कर दिया। मानो अलका की बुर में लंड नहीं कोई मशीन अंदर बाहर हो रही है इतनी तीव्र गति से राहुल का लंड उसकी मां की बुर में अंदर बाहर हो रहा था। थोड़ी ही देर में अलका अपनी बांहो मे राहुल को कस के भींच ली राहुल भी कस के अपनी मां को अपनी बांहो मे भींचते हुए जोर जोर से चोदना शुरु कर दीया। और थोड़ी ही देर मे दोनो गर्म आंहे भरते हुए एकसाथ झड़ने लगे। दोनों एक साथ झढ़ कर संतुष्टि प्राप्त कर लिए थे। राहुल और अलका दोनों नंगे ही एक दूसरे की बाहों में सो गए।

राहुल का प्यार अपनी मां के लिए दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा था लेकिन इसे प्यार कह पाना ठीक नहीं होगा क्योंकि यह प्यार नहीं प्यार के रुप में वासना था जोकि दोनों के देश के पवित्र रिश्ते को पल पल बर्बाद किए जा रहा था। अलका भी एक तरह से अपने बेटे की दीवानी हो चुकी थी अपने बेटे के रूप में उसे एक प्रेमी मिल गया था जोकि उसकी हर इच्छा को पूरी कर रहा था वह फिर आर्थिक हो या शारीरिक। अलका पहले से ही काफी खूबसूरत थे लेकिन अपने बेटे से शारीरिक संबंध स्थापित करके उसकी खूबसूरती दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही थी। अलका और राहुल मां-बेटे कम प्रेमी और प्रेमिका या एक तरह से पति-पत्नी बन चुके हैं क्योंकि दोनों के बीच जो संबंध थे वह ईसी रिश्ते को मायने देते थे। राहुल जब भी घर में रहता था तो उसकी नजरें अपनी मां पर ही टिकी रहती थी बार-बार उसकी नजरें अपनी मां के भरे हुए बदन पर ऊपर से लेकर नीचे तक घूमती रहती थी ना जाने कितनी बार वह अपनी मां को भोग चुका था लेकिन फिर भी यह जिस्म की भूख बदन की प्यास बुझाए नहीं बुझ रही थी। अलंका का भी यही हाल था जब से उसने राहुल से चुदवाना शुरु की थी तब से लेकर अब तक. चुदाई की भूख उसकी कम नहीं हुई थी बल्कि हर दिन बढ़ती ही जा रही थी। वैसे भी अलका जिस उम्र से गुजर रही थी उस उम्र में चुदाई की बहुत कुछ ज्यादा ही होने लगती हैं। और अलका तो अपनी जवानी के दिनों से ही सेक्स की भूखी थी। अपनी जवानी के दिनों में ही वह सेक्स के सुख से वंचित रह गई थी और इस उमर में जब आ करके अपने ही जवान बेटे का दमदार और तगड़ा लंड मिल रहा था चुदवाने के लिए तो भला अलका कैसे पीछे रहने वाली थी अपने बेटे का जवान लंड पाकर वह तो दिन-ब-दिन और ज्यादा चुदाई की भूखी होती जा रही थी। वह भी अब इसी ताक में रहती की कब का बेटा अपना मोटा लंड उसकी बुर में डालकर उसे चोदे और उसकी बुर की खुजली को मिटाए और यही दिन रात जब भी मौका मिलता अलका अपनी प्यास अपने बेटे से चुद कर बुझा ले रही थी।

राहुल अपनी प्रेमिका नीलू की भी लगातार चुदाई करते हुए उसे भी लंड का सुख बराबर दे रहा था और ऊसकी रसीली बुर का स्वाद खुद भी चख रहा था। राहुल का प्यार ऊसकी मां के साथ साथ नीलू से भी गहराता जा रहा था। हालांकि राहुल को विनीत की भाभी की कमी महसूस हो रही थी क्योंकि एक वही उसकी एक टीचर थी जिसमें उसे संभोग की कला का ज्ञान दी थी। वह जब भी विनीत की भाभी के पास जाता तो उसे कुछ ना कुछ नया ही सीखने को मिल रहा था। राहुल को विनीत की भाभी की भी बुर की याद तड़पा रही थी। कुछ भी हो राहुल को उसकी भाभी के साथ भी बेहद आनंद की प्राप्ति होती है राहुल की पांचों उंगलियां धी मे तेर रही थी। अपने घर में भी अपनी मां की चुदाई कर रहा था और बाहर नीलू की। राहुल आनंद के सागर में पूरी तरह से डूबा हुआ था साथ ही उसके साथ साथ उसकी मां और नीलू भी खूब मजा ले रही थी। नीलू और राहुल दोनों प्यार की हद से आगे बढ़ चुके थे। वाकई में दोनों जब भी मिलते थे जीने मरने की कसमें खाया करते थे दोनों पूरी तरह से एक दूसरे के साथ विवाह को बंधन में बंधने के लिए तैयार थे। धीरे धीरे करते दिन गुजरने लगे राहुल ओर अलका अपनी ही मस्ती में खोए हुए थे। अलका के जीवन में मस्ती के साथ साथ एक शांति सी फैली हुई थी लेकिन यह शांति तूफान से पहले की शांति थी। क्योंकि राहुल को वीनीत की भाभी का फोन आया कि वह कल आने वाली है राहुल तो यह सुनकर बहुत खुश हुआ लेकिन अलका आने वाली मुसीबत से बिल्कुल भी अनजान थी। क्योंकि विनीत उसकी हंसती-खेलती जिंदगी में जहर घोलनें आ रहा था। एक गलती अलका के लिए कितनी भारी पड़ सकती थी वह आने वाला समय ही बता सकता था। राहुल को तो सिर्फ विनीत की भाभी की रसीली बुर ही नजर आ रही थी। लेकिन भाभी के साथ आने वाला वीनीत उसके लिए भी कितनी बड़ी मुसीबत है इस बात से राहुल बिल्कुल भी अनजान था। वह तो उसके द्वारा भेजी गई नंगी तस्वीरों को देख देखकर मुठ मारकर वीनीत की भाभी को याद कर रहा था।।

उसके आने से एक दिन पहले वाली रात को राहुल ने अपनी मां की जमकर चुदाई किया और अलका ने भी उस रात को अपने बेटे से अत्यधिक आनंद लेते हुए चुदवाइ। अलका भी आने वाले खतरे से अनजान थी, वह नहीं जानती थी कि आने वाला दिन उसके लिए मुसीबतों का पहाड़ लेकर आएगा। अपने बेटे से संतुष्टि भरी चुदैई करवा कर आराम से चैन की नींद सो गई ।

 
सारे काम करके अलका सजधजकर बच्चों को स्कूल भेज कर खुद ऑफिस चली गई उसके दिन बड़े अच्छे से गुजर रहे थे ईस समय उसे कोई भी परेशानी नहीं हो रही थी ना तो आर्थिक रुप से ना तो शारीरिक रूप से दोनों ही रूप से अलका पूरी तरह से संतुष्ट थी। रोज अपने बेटे द्वारा शारीरिक कसरत हो जा रही थी इसी वजह से उसकी खूबसूरती और भी ज्यादा निखरते अा रही थी।

राहुल भी बहुत खुश था क्योंकि आज उसे विनीत की भाभी से मिलने जाना था बहुत दिन हो गए थे उसे विनीत की भाभी की बुर का स्वाद चखे। लेकिन राहुल को यह नहीं पता था कि उसका ही दोस्त अब इसके लिए मुसीबत बनने वाला था। विनीत की भाभी ने राहुल को फोन करके यह बता दी थी कि उसे कब घर आना है। वीनीत की भाभी के घर पर जाने की पूरी तैयारी राहुल ने कर लिया था। उसकी याद में आज रह-रहकर राहुल का लंड ठुनकी ले रहा था। यही हाल वीनीत की भाभी का भी था। वह भी जब से गई थी तबसे ढंग से चुदवाने का मौका भी नहीं मिल पाया था और जब मौका मिला तो राहुल की तरह तगड़ा मोटा लंड नहीं मिल पाया। इसलिए माफी राहुल से चुदवाने के लिए तड़प रही थी और वहां से निकलते ही राहुल को फोन कर दी थी कि आज घर पर आ जाना।। आग दोनों जगह बराबर लगी हुई थी।

विनीत को तो राहुल की मां की याद सता रही थी जब से उसने अस्पताल में अलका को भोगा था , सबसे उसको अलका के बदन को ले करके एक अजीब सा सुरूर छा गया था। दिन-रात उसे बस अलका ही नजर आती थी। क्योंकि उसने आज तक अलका जैसी औरत ना देखा था और ना ही भोगा था बार-बार उसे अलका का नंगा बदन आंखों के सामने नजर आ रहा था उसकी बड़ी बड़ी चूचियां जिसे वह उस रात दबा दबा कर अपने मुंह में भर कर चूसा था, उसकी मोटी मोटी मांसल केले के तने के सामान चिकनी जांगे , ऐसी जांगो के बारे में विनीत ने कभी कल्पना भी नहीं किया था , और अलका की खूबसूरत जांघो उसने अपनी हथेली से निकलते हुए उसके गरम स्पर्श का अहसास अपने अंदर उतारा था। जिसकी गर्मी उसे आज तक अपनी हथेली में महसूस होती थी। उसे इस बात का भी यकीन उसे भोगने के बाद भी नहीं हो पा रहा था कि इस उम्र में भी उसकी रसीली बुर का कसाव पहले की तरह बरकरार है। उसने तो आज तक ऐसी कसी हुई बुर में कभी लंड भी नहीं डाला था। नीलु को भी जब वह पहली बार चोदा था तब भी जो ऐसा जान का के साथ उसे आया था वैसा एहसास उसके साथ कभी भी महसूस ही नहीं हुआ।

इसलिए तो वह अलका की खूबसूरती और उसके बदन के प्रति पूरी तरह से कायल हो चुका था। इसलिए तो वह अलका को फिर से भोगना चाहता था। अलका के खूबसूरत बदन के मादक खुशबू को वह फिर से अपने सीने में उतारना चाहता था। वह भी अलका से मिलने के लिए पूरी तरह से बेकरार था।

राहुल तो स्कूल से छूटते ही सीधे विनीत की भाभी के घर पहुंच गया। विनीत की भाभी उसे देखते ही बहुत प्रसन्न हुई। बहुत दिनों से काम की प्यासी थी और उसने जी भर के राहुल से चुदवा कर अपने काम की प्यास बुझाई । राहुल भाई कुछ दिनों से नीलू और अपनी मां की प्यास बुझाने में लगा हुआ था आज एक बार फिर से विनीत की भाभी की बुर पाकर उसकी जबरदस्त चुदाई किया। जाते समय फिर से वीनीत की भाभी ने राहुल को कुछ पैसे दी जिसे राहुल ले करके अपने पेंट की जेब में रख लिया' और घर से बाहर आ गया।

शाम के वक्त विनीत अलका का इंतजार करते हुए उसी मार्केट में बैठा रहा लेकिन ना जाने कब अलका वहां से निकल गई इस बात का विनीत को पता भी नहीं चला। विनीत को यह लगा कि शायद अलका ऑफीस ही नही गई होगी। ऊस दीन तो राहुल हांथ मसल के रह गया।

अलका घर पहुंचकर घर में राहुल को देखते ही खुश हो गई। खुशी खुशी वह भोजन तैयार करने में जुट गई। ऊसे बड़ी बेसब्री से रात का इंतजार था क्योंकि रोज की तरह आज भी उसकी बुर में खुजली मची हुई थी जो कि उसका बेटा ही अपना लंड डालकर मिटा सकता था।

खाना बन चुका था तीनों गरमा गरम भोजन करके संतुष्ट हो चुके हैं रोज की तरह दोनों अपने कमरे में चला गया और राहुल अपनी मां के पीछे पीछे उसके कमरे में।

आज जब राहुल अपनी मां के कपड़े उतारकर उसे नंगी कर रहा था तब जैसे ही राहुल अलका की पेंटिं को खींच कर नीचे सरकाने लगा तभी उसकी नजर पेंटिं पर हुए छोटे से छेंद पर पड़ी , पेंटिं को टांगो से निकालने के बाद वह उस छोटे से छेद को अपनी मां को दिखाते हुए बोला।

मम्मी तुम्हारी गांड थोड़ी और ज्यादा बड़ी होती जा रही है तभी तो देखो यह पेंटी फटने लगी है।

अपने बेटे की यह बात सुनकर अलंका शरमा गई क्योंकि वह जानती थी कि महंगी पेंटी और ब्रांडेड कंपनी की वह खरीद नहीं पाएगी इसलिए बाजार से लाकर चालू कंपनी की पैंटी वह पहनती थी। वह एकबार पहले भी बता चुकी थी, और वही बात फीर से दोहराते हुए बोली।

बेटा मैं तुझे पहले भी तो बता चुकी हुं की महंगे और ब्रांडेड पैंटी और ब्रा पहनने की मेरी हैसियत नहीं है। इसलिए यह सब जो भी पहनती में बाजार से लाते हैं एक दो महिना तो बड़ी मुश्किल से चलता है और फटना शुरू हो जाती है।

( अपनी मां की बात और उसकी मजबूरी जानकर राहुल बोला।)

कोई बात नहीं मम्मी 10 दिन बाद मेरा जन्मदिन है मैं तुम्हारे लिए ब्रांडेड कंपनी की ब्रा और पैंटी और एक अच्छी सी गाऊन खरीद कर आप को गिफ्ट कर दूंगा।

( अपने बेटे की बात सुनकर अलका हंसने लगी और हंसते हुए बोली।)

अरे ऐसा कैसे हो सकता है बेटा जन्मदिन तेरा है और तू खुद मुझे गिफ्ट देगा बल्कि मुझे तुझे गिफ्ट देना चाहिए था।

तो क्या हुआ मम्मी आप तो रोज मुझे गिफ्ट देती हो

( बुर की तरफ इशारा करते हुए) और इससे अनमोल दूसरा कोई भी गिफ्ट नहीं हो सकता।

( राहुल की बात सुनकर अलका एक बार फिर से मुस्कुरा दी और मुस्कुराते हुए बोली।)

तू बहुत चालाक है सच में यह औरत की सबसे अनमोल गिफ्ट है जो कि मैंने तुझे अर्पित कर दिया लेकिन फिर भी तो मुझे मेरे जन्मदिन पर कुछ ना कुछ तो देना ही होगा।

मुझे कुछ नहीं चाहिए मम्मी बस अपनी यही अनमोल तोहफा मुझे हमेशा देते रहना मैं हमेशा खुश रहूंगा।

यह अनमोल तोहफा तेरा ही है बेटा इस पर सिर्फ तेरा ही हक है। तू जब चाहे जेसे चाहे इसे ले सकता है।

( अलका अपनी हथेली को अपनी बुर पर मसलते हुए बोली। राहुल अपनी मां को अपनी बुर को मसलते हुए देखा तो अपनी भी हथेली अपनी मां की हथेली पर रखकर दबा दिया। राहुल की ईस हरकत पर अलका की सिसकारी छूट गई, और वह सिसकारी लेते हुए बोली।)

ससससहहहहहहह......आााााहहहहहहह..... राहुल मेरे को इतना तेरे जन्मदिन पर मैं तुझे जरुर कोई ना कोई तोहफा दूंगी। ( राहुल अपनी मां की बुर को मसलते हुए एकदम से चुदवासा हो गया था और वह अपनी मां की कलाई हो तुम अपनी हथेली में तो करते हुए अपनी मां के ऊपर सवार हो गया और अपने लंड के सुपाड़े को अपनी मां की बुर की गुलाबी पत्तियों के बीच टीकाते हुए बोला।

बस मम्मी अब कुछ मत बोलो तुम मेरे लंड का सिर्फ मजा लो( इतना कहने के साथ ही राहुल ने अपना पूरा लंड अपनी मां की बुर में पेल दिया। और अपनी मां को चोदने लगा दोनों ने एक बार फिर से पूरी रात चुदाई का सुख लेते रहें। )

दूसरे दिन स्कूल जाते समय अलका ने राहुल से बोली की स्कूल से सीधा घर पर आाना कहीं जाना मत क्योंकि आज बाजार जाना है घर का कुछ सामान खरीद कर लाना है तो मेरी मदद कर देना क्योंकि आज मेरे ऑफिस की छुट्टी है इसलिए मैं आज सारा दिन घर पर ही हूं।

ठीक है मम्मी (इतना कह कर राहूल अपने स्कूल चला गया विनीत के आ जाने के बाद राहुल और नीलू छुप-छुपकर मिलने लगे क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि बात का बतंगड़ बने ,। नीलू भी जितना हो सकता था विनीत से दूर ही रहने की पूरी कोशिश करती थी।

 
स्कूल छुटने के बाद राहुल सीधे अपने घर पर चला गया

क्योंकि वह अपनी मां की बात याद थी उसे बाजार जाना था इसलिए शाम को दोनों साथ में ही बाजार चले गए। पूरी खरीदी हो चुकी थी अलका सामान का थैला लेकर मिठाई की दुकान के बाहर खड़ी होकर राहुल का इंतजार कर रही थी जो कि मिठाई की दुकान में मिठाई खरीद रहा था।

अलंका कीे ताक में बैठा वीनीत अलका का इंतजार कर रहा था तभी मिठाई की दुकान के आगे से खड़ी देखकर विनीत अंदर ही अंदर बहुत खुश हुआ, वह अलका की खूबसूरती देखकर हैरान हुए जा रहा था क्योंकि दस पंद्रह दिनों में अलका और ज्यादा खूबसूरत हो गई थी। अलका को देखते ही राहुल के लंड में सुरसुराहट होने लगी। वह अलका की तरफ बड़ा ही था कि तभी एका एक मिठाई की दुकान में से मिठाई खरीद कर राहुल निकला और मिठाई की थैली को अलका को थमाने लगा। राहुल को वहां देख कर वह भी अलका के साथ वीनीत तो दंग रह गया । उसके पांव जहां थे वहीं ठीठक गए। विनीत को तो कुछ समझ में ही नहीं आया कि आखिर यह हो क्या रहा है। वह बस आंखें फाड़े अलका और राहुल को देखे जा रहा था अलका राहुल से हंस-हंस के बातें कर रही थी जो कीे विनीत को जरा भी अच्छा नहीं लग रहा था। उसके मन में राहुल और अलका को लेकर के ढेर सारे सवाल पैदा होने लगे उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार राहुल और अलका के बीच संबंध कैसा है दोनों का रिश्ता क्या है?

यह सवाल विनीत के मन में उठना लाजमी था क्योंकि राहुल का दोस्त होते हुए भी उसने आज तक उसके ना घर गया था ना उसकी मां से ही मिला था। इसलिए अलका को राहुल के साथ देखकर इस समय वह हैरान हो रहा था। वीनीत वहीं खड़ा रहा ,अलका और राहुल अपने रास्ते जाने लगे तो विनीता से रहा नहीं गया वह दोनों के बीच के संबंध को जानना चाहता था इसलिए वह भी उनके पीछे-पीछे नजरें बचाकर जाने लगा। राहुल रह रहकर चलते समय अपनी मां का हाथ पकड़ ले रहा था। जो कि यह बात वीनीत को कांटे की तरह चुभ रही थी। क्योंकि एक तरह से वो अलका को अपनी प्रेमिका समझ बैठा था जिसके साथ इस में अस्पताल में शारीरिक सुख का आनंद ले लिया था इसलिए वह नहीं चाहता था कि अगर किसी गैरों के साथ घूमती फिरे । विनीत दोनों से कुछ दूरी बनाकर उन दोनों के पीछे पीछे जाने लगा। उन दोनों की बातें भी उसे सुनाई दे रही थी ।

विनीत को तो तब झटका लगा जब राहुल के मुंह से वह अलका के लिए मम्मी मम्मी शब्द सुना। उसे अपने कानों पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं हुआ वह तो जब अलका भी उसे बेटा बेटा करके संबोधित कर रही थी तब उसे यकीन हुआ कि राहुल अलका का ही बेटा है जो कि उसका मित्र भी है। विनीत को तो आप और भी ज्यादा राहुल से जलन होने लगी। क्योंकि उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि राहुल की मम्मी इतनी ज्यादा खूबसूरत और सेक्सी होगी जिसका वह खुद दीवाना हो चुका है। जिसके साथ अस्पताल में एक रात भी गुजार चुका है। दोनों के पीछे जाते-जाते वह चौराहे तक आ गया। जहां से राहुल और अलका अपने घर के लिए मुड़ गए। इतनी गहरी दोस्ती होने के बावजूद भी विनीत आजतक राहुल के घर कभी नहीं गया था इसलिए वह उसका घर भी नहीं देखा था। इसलिए वह राहुल का घर भी देखना चाहता था इसलिए ऊन दोनों के पीछे पीछे लगा रहा है। अलका की भारी-भरकम भटकती हुई गाने को देखकर इस समय भी विनीत की हालत खराब हुए जा रही थी। राहुल के प्रति जलन की भावना के बावजूद अलका की खूबसूरत गांड को देखकर उसका लंड ठुनकी ले रहा था। इसमें वीनीत का बिल्कुल भी दोष नहीं था क्योंकि हालात चाहे कैसे भी हो अलका की खूबसूरती सब पर अपना जादू चला ही देती थी।

धीरे धीरे चलते हुए अलका ओर राहुल का घर भी आ गया । विनीत आज पहली बार अपने दोस्त का घर देख रहा था। घर देखने के बाद विनीत वहां से चला गया लेकिन उसके मन में राहुल के प्रति नफरत होने लगी और अलका को पाने कि उसकी चाहत बढ़ने लगी।

ऐसे कुछ समझ में भी नहीं आ रहा था एक तरफ तो वह सोचता था कि अलका राहुल की मां है इसलिए कुछ करना ठीक नहीं है क्योंकि अभी तक जो हुआ उसके बारे में राहुल को बिल्कुल भी नहीं पता था अगर कहीं राहुल को कुछ पता चल गया तो वह भी वीनीत के बारे में क्या सोचेगा। लेकिन तभी बार बार उसकी आंखों के सामने अलका का कामुक बदन उसकी खूबसूरती उसकी बड़ी बड़ी चूचियां और उसकी भराव दार गांड नजर आने लगती, और उसकी खूबसूरत चिकनी बुर नजर आती जिसमें वह अपना लंड डालकर उसे चोद रहा था। यह सब ख्याल आते हैं विनीत का दिमाग फिर बदलने लगा। वह किसी भी हालत में अलका को फिर से पाना चाहता था वह उसको फिर से चोदना चाहता था उसकी खूबसूरत रसीली बुर का नमकीन पानी अपने होठों से लगाकर पीना चाहता था। विनीत यह चाहता था कि अलका खुद ऊसकी दीवानी हो जाए। वह यह चाहता था की अलका खुद अपनी बड़ी बड़ी गांड को उसके लंड पर रखकर अपनी बुर में उसका लंड ले और लंड पर उठक बैठक करते हुए चुदवाने का आनंद ले यह सब सोचकर ही ऊसका लंड पूरी तरह से पागल हो चुका था जिसे वह अलका के बारे में सोचकर मुठ मारकर शांतहुआ।

विनीत मन में ठान लिया था कि चाहे जो भी हो जाए अलका को वह किसी भी कीमत पर पाकर रहेगा चाहे इसके लिए ऊसे कुछ भी करना पड़े। अलका को पाने के लिए वह यह भी भूल जाएगा कि अलका राहुल की मां है उसके परम मित्र की मां। वह राहुल से भी दुश्मनी लेने को पूरी तरह से तैयार हो गया था।

अलका और राहुल दोनों अपने जीवन में आने वाले तूफान से अनजान अपनी ही मस्ती में खोए हुए थे। राहुल अपनी मां के कमरे में एकदम नंगा हो कर के अपनी मां की कपड़े उतार रहा था। और साथ ही उसके बदन को चुंबन से नहला भी रहा था। अलका के लिए अपने बेटे के साथ अपने ही बिस्तर पर बिताए हुए हर एक पल अविस्मरणीय यादगार के रूप में उसके मन मस्तिष्क में बसता चला जा रहा था। जो आनंद कुछ नहीं ना से उसका बेटा उसे दे रहा था वह आनंद उसके लिए अतुल्य था वह मन में कभी कभी सोचती भी थी कि अगर राहुल के साथ उसके शारीरिक संबंध स्थापित नहीं होते तो वह इसे सूखे के लिए सारी जिंदगी तड़पती रह जाती और उसे ऐसा अद्भुत आनंद से भरा हुआ सुख कभी भी हासिल नहीं हो पाता। राहुल के लिए भी यह पल अविस्मरणीय था। राहुल एक-एक करके अपनी मां के खूबसूरत बदन पर से उसके लिबास को हटा रहा था। और कुछ ही देर में उसके बदन पर से अंतिम वस्त्र के रूप में उसकी पैंटी को भी उसकी चिकनी जानवरों से होते हुए उसकी गोरी टांग में से निकाल कर नीचे फर्श पर फेंक दिया। इस समय राहुल और अलका दोनों निर्वस्त्र अवस्था में एक दूसरे के बदन से चिपके हुए चुम्मा-चाटी कर रहे थे राहुल का टनटनाया हुआ लंड अलका की जांघों के बीच रगड़ खा रहा था। जिस की रगड़ को अपनी बुर के इर्द-गिर्द महसूस करके अलका चुदवासी हुए जा रही थी और खुद ही अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर और अपने बेटे के लंड को पकड़ कर अपनी बुर की फांको के बीच रगड़ कर मस्त हुए जा रही थी।

ससससससहहहहहह.... बहुत ही गर्म लंड है रे तेरा...आहहहहहहहह.... बस अब बिल्कुल भी देर मत कर डाल दे मेरी बुर में तेरा लंड...

अलका अपने बेटे के लंड की गर्मी महसूस करके बदहवास हुए जा रही थी। और खुद ही अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठा कर ल़ंड को अपनी बुर में डालने की नाकाम कोशिश कर रही थी। अपनी मां के उतावलेपन को देखकर राहुल से भी रहा नहीं गया और उसने तुरंत अपने खड़े लंड को अपनी मां की बुर में उतारना शुरू कर दिया। राहुल बहुत ही तीव्र गति से अपनी मां की चुदाई कर रहा था और अलका लगातार सिसकारी लेते हुए मजे ले रही थी। राहुल हर आसन का प्रयोग करके अपनी मां को भोग रहा था लेकिन जैसे ही वह अपनी मां को पीछे से चोदने के लिए अलका को घुटने और पैर के बल झुकाया तो उसकी नजर अलका के भूरे रंग के उस छेंद पर चली गई। ऊस कामुक छोटे से छेद को देखकर राहुल का मन बदल गया, उसे वह पल याद आ गया जब उसने विनीत की भाभी के कहने पर उसकी गांड मारा था गांड मारने का अनुभव राहुल को बड़ा ही बेहतरीन लगा था लेकिन उसके बाद से उसे गांड मारने का सुख हासिल नहीं हो सका । इसलिए इस समय वह अपनी मां की गांड के भूरे रंग के छेद को देख कर उसकी वही सोई हुई इच्छा फिर से जाग गई। और राहुल ने खुद थोड़ा सा थुक लगाकर उस छेद को गीला करने लगा। गिला करने के बाद जैसे ही उसने अपने लंड के सुपाड़े को उस भूरे रंग के छेंद पर टिकाया ही था की अलका को आभास हो गया की उसका बेटा कुछ अलग करने जा रहा है, वह तुरंत झुके हुए ही अपनी नजरें पीछे करके राहुल की तरफ देखिए और उसे ऐसा ना करने के लिए कहने लगी।

नहीं बेटा ऐसा मत करो मैंने आज तक ऐसा कभी नहीं करवाई मुझे तो ऐसा मालूम भी नहीं है कि उस जगह पर करवाया भी ज्यादा है कि नहीं। तू तो देख ही रहा है कि उसका अच्छे अभी कितना छोटा है और तेरा लंड का सुपाड़ा ही इतना मोटा है कि अंदर जाएगा ही नहीं अभी नहीं बेटा।

बस मम्मी एक बार एक बार थोड़ा ट्राई तो करने दो।

नहीं राहुल बिल्कुल भी नहीं तुझे मेरी कसम आज ऐसा मत कर किसी दिन मौका देखकर जरूर तेरा लंड अपनी गांड में लूंगी।

( एक बार राहुल अपनी मां की बात मान गया और एक छोटे से छेद में लंड ना डाल कर उसकी रसीली मदन रस से टपकती हुई बुर में डाल कर चोदना शुरू कर दिया और कुछ मिनटों बाद दोनों गरम आहें भरते हुए झड़ गए। )

दूसरे दिन स्कूल में नीलू राहुल से बात करने के लिए मौके की तलाश करने लगी लेकिन विनीत के होते हुए उसे मौका हाथ नहीं लगा। नीलू राहुल को दिलों जान से चाहने लगी थी इसलिए उसके बगैर एक पल भी काटना उसके लिए मुश्किल हो जाता था। राहुल से मिलकर उसे राहत मिलती थी लेकिन जब से वीनीत वापस आया था वह ठीक से राहुल से मिल भी नहीं पाई थी। इसलिए जब भी थोड़ा सा भी समय मिलता है तो दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़कर मुस्कुरा लेते थे। नीलू भी विनीता से कन्नी काटने लगी थी वह भी मौके की तलाश में थी कि जब भी उसे मौका मिलेगा तो वह वीनीत से सारे रिश्ते तोड़ देंगी क्योंकि राहुल के मिल जाने से वह वीनीत कोई भी रिश्ता आगे नहीं बढ़ाना चाहती थी। वह भी बस मौका ही ढूंढ रही थी विनीत से मिलकर वह सब कुछ क्लियर कर लेना चाहती थी। वैसे उसके लिए खुशी की बात आज यह थी कि उसके पापा बिजनेस टूर को पूरा करके महीनो बाद आज घर लौट रहे थे। नीलू उसके पापा की चहिती थी। नीलू भी अपने पापा से बहुत प्यार करती थी उसके पापा ने भी उसकी हर जिद पूरी की थी उसकी हर ख्वाहिशों का ख्याल रखा था इसलिए वह घर पर अपने पापा के आने का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रही थी क्योंकि आज वह अपने पापा से राहुल के बारे में बात करना चाहती थी। और उसे यकीन भी था कि उसके पापा उसकी यह ख्वाहिश भी जरुर पूरी करेंगे क्योंकि अपने पापा की वह ईकलौती संतान थी। धन-दौलत की कोई भी कमी नहीं थी। सब कुछ उसके पास था बस वह अब राहुल को पाना चाहती थी यही बात वह राहुल से करना चाहती थी लेकिन विनीत की मौजूदगी में वह राहुल से कुछ भी कह नहीं पाई।

विनीत राहुल से मिला जरूर लेकिन उसकी आंखों में आज राहुल खटक रहा था। राहुल से जलन सी होने लगी थी क्योंकि जिस तरह से वह अलका का हाथ पकड़कर रास्ते पर चला जा रहा था और जिस तरह से हंस हंस कर दोनों बातें कर रहे थे यह सब वीनीत से देखा नहीं जा रहा था। राहुल को क्या पता था कि विनीत के मन में क्या चल रहा है। राहुल तो उसे हंस कर बातें कर रहा था लेकिन विनीत ही कुछ खींचा खींचा सा लग रहा था। स्कूल से छूटने के बाद राहुल घर चला आया।

अलका शाम को ऑफिस से छूटने के बाद बहुत खुश नजर आ रही थी उसे अब हमेशा घर पर पहुंचने के बहुत जल्दी पड़ी रहती थी। इसलिए मैं ऑफिस से बाहर निकलते ही जल्दी-जल्दी घर की तरफ जाने लगी उसके चेहरे पर हमेशा मुस्कुराहट रहती थी उसके चेहरे पर खूबसूरती की लालिमा साफ साफ नजर आती थी।

अलका आने वाली मुसीबत से बिल्कुल अनजान थी क्योंकि बाजार में विनीत ऊसका इंतजार कर रहा था। अलका मन में रोमांटिक गीत गुनगुनाते हुए पैदल चली जा रही थी। वह मिठाई की दुकान से आज फिर से रसमलाई खरीदना चाहती थी क्योंकि जिस तरह से राहुल ने पिछली रात को रसमलाई का सही उपयोग करते हुए उसकी बुर की चटाई किया था ऊस आनंद के वशीभूत होकर के आज अलका फिर से वही चाहती थी कि उसका बेटा फिर से रात को रस मलाई के रस को उसकी बुर टपकाते हुए अच्छे से उसकी बुर की चटाई करें, यही सोचकर वह बाजार में पहुंचते ही मिठाई की दुकान पर चली गई और वहां से रसमलाई पर करवा कर जैसे ही दुकान पर बाहर निकली , अपने ठीक सामने विनीत को देखकर उसका पूरा वजूद कांप गया

पंकज तू विनीत को पूरी तरह से भूल चुकी थी कुछ दिनों में राहुल ने ढेर सारा प्यार देकर उसे सारी दर्द देने वाली बातों को भुलवा चुका था। उसे ना तो विनीत ही याद रहा और ना ही ऊससे लिए गए पैसे और ना ही उसके साथ अस्पताल में बिताया वह पल याद रहा जिसे याद करके वह अपने आपको ही कोसती रहती थी। सारी भुली बाते वीनीत को देखते ही एक बार फिर से याद आ गई। अलका की तो सांसे ही अटक गई थी। ऊसमें इतनी भी हिम्मत नहीं थी कि अपने कदम आगे बढ़ा सकें। तब तक विनीत उसके बिल्कुल करीब आ गया चेहरे पर कामुक मुस्कान लिए वह अलका से बोला।

वाह आंटी वाह आप तो अब बहुत ज्यादा खूबसूरत लगने लगी हो। आपकी खूबसूरती का राज तो बता दो।

( अलका उस की ऐसी बात सुनकर हैरान नहीं हुई क्योंकि वह जानती थी कि अस्पताल में किस तरह का दोनों के बीच वाक्या हो चुका था उससे विनीत के द्वारा ऐसी ही बातों की उम्मीद की जा सकती थी। विनीत की ऐसी बात सुनकर अलका को बहुत गुस्सा आया लेकिन कर भी क्या सकती थी इसलिए वह सिर्फ इतना ही बोली।)

इस तनख्वाह पर मैं तुम्हारे पूरे पैसे लौटा दूंगी।( इतना कहकर वह आगे बढ़ने लगी तो उसके पीछे पीछे विनीत चलते हुए बोला।)

मैं पैसे मांगने नहीं आया हूं आंटी मैं तो बस आप से बात करने आया हूं।

मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी है रही बात पैसो की तो ईस तनख्वाह को मैं तुम्हें पूरे पैसे लौटा दूंगी और मुझसे यूं मिलने की कोशिश बिल्कुल भी मत करना।

मैं कह तो रहा हूं आंटी के मुझे पैसे नहीं चाहिए। ( वह अलका के पीछे पीछे जाते हुए बोला। इस बार गुस्से में अलका वही फुटपाथ पर रुक गई और उसकी तरफ गुस्से में देखते हुए बोली।)

पैसे नहीं चाहिए !क्यों नहीं चाहिए पैसे आखिर तुमने मुझे उतार दिए हैं उसे लौटाना मेरा फर्ज है और मैं तुम्हें जरूर लौटाऊंगी।

( यहां सड़क पर लोगों का आना जाना कम था जो भी जा रहे थे वह लोग अपने अपने वाहन से निकल जा रहे थे फुटपाथ पर सिर्फ वीनीत और अलका ही थे इसलिए मौका देखकर वीनीत बोला। )

मैं तुमसे एक भी पैसा नहीं लूंगा आंटी और जो पैसे मैंने तुम्हें दाया हूं उसे लौटाने की भी जरूरत नहीं है । हां उसके बदले में आप मुझे....( इतना कहकर विनीत इधर उधर नज़र घुमाकर देखने लगा की कहीं कोई सुन तो नहीं रहा है। और अलका विनीत की बात को समझ नहीं पा रही थी इसलिए बोली।)

बदले में क्या? ......

उन पैसों के बदले में आंटी मैं आपको..... मैं आपको....

चचचच.... चोदना चाहता हूं।( विनीत इससे पहले इतना गंदा लड़का कभी भी नहीं था लेकिन उसके सर पर वासना सवार हो गई थी वह अलका की खूबसूरती को अलका को पाना चाहता था उसे किसी भी कीमत पर भोगना चाहता था। जबकि वह जानता था की अलका उसकी मां की उम्र की है और उसके दोस्त की मां भी है।

लेकिन जब एक बार वासना का भूत सर पर सवार होता है तो अपनी मनमानी कर के ही छोड़ता है। वही हाल विनीत का भी था अलका के मदमस्त बदन ने उसके दिमाग पर अपना पूरी तरह से कब्जा बना चुका था। जिसके असर से निकल पाना विनीत के लिए बहुत ही मुश्किल था वह अलका को किसी भी कीमत पर भोगना ही चाहता था। विनीत के मुंह से अपने लिए इतने गंदे शब्द और इसकी इच्छा जानकर अलका को इतना गुस्सा आया कि उसने विनीत के गाल पर थप्पड़ मारने के लिए अपने हाथ उठा दि।)

हरामजादे तेरी इतनी हिम्मत( इतना कहकर जैसे ही अलका ने विनीत को मारने के लिए जैसे ही हाथ उठाए विनीत झट से उसकी कलाई को थाम लिया। और इतने गंदे शब्दों में उसे बोला कि वह अंदर ही अंदर शर्मिंदा हो गई वह डर के मारे उसका बदन कांप गया। वह अलका की कलाई पकड़ते हुए बोला।)

हाय जानेमन नाजुक हाथ मेरे गाल पर थप्पड़ मारने के लिए नहीं बल्कि मेरे लंड को हिलाने के लिए है।

( अलका को उम्मीद नहीं थी कि विनीत ईतने गंदे शब्दों का प्रयोग करेगा। वह अभी भी अलका की तलाई को अपनी मुट्ठी में दबोचे हुए था जिसे अलका छुड़ाने की पूरी कोशिश कर रही थी। लेकिन वीनीत उसकी कलाई को छोड़ नहीं रहा था।)

वीनीत तुझसे मुझे ऐसी उम्मीद नहीं थी मैं तेरी मां की उम्र की बराबर है फिर भी तू मुझसे ऐसी चाहत रखता है तुझे शर्म आनी चाहिए। ( वह विनीत के हाथों से अपनी कलाई को छुड़ाने की नाकाम कोशिश करते हुए बोली।)

अच्छा मुझे शर्म आनी चाहिए और मेरी रानी अस्पताल में जो तुमने मुझसे चुदवा चुदवा कर मजा लि तब शर्म नहीं आ रही थी। उस समय तो अपनी उम्र का तुझे बिल्कुल भी ख्याल नही आया। और अब कहती है कि मैं तेरी मां की उम्र के बराबर हूं। देख मेरी रानी तुझे चोदने के बाद जो सुख जो आने में मुझे मिला वह आज तक किसी और औरत को चोदने के बाद भी नहीं मिला। इसलिए मैं तुझे फिर से चोदना चाहता हूं। बदले में मैं तेरा सारा कर्जा माफ कर दूंगा और ऊपर से तुझे पैसे भी दूंगा। ( इतनी गंदी बात अपने बारे में सुनकर अलका की आंखों में आंसू आ गए। वह सोच भी नहीं सकती थी कि उसकी जिंदगी में ऐसा भी दिन आएगा। वीनीत उसकी कलाई को छोड़ते हुए बोला।)

तुझे सोचने का मैं पूरा वक्त देता हूं ठीक तरह से मान जा वरना मुझे दूसरे तरीके भी आते हैं।( इतना कहकर विनीत वहां से चला गया। विनीत की धमकी और उसके इरादे के बारे में जानकार अलका की हालत बिल्कुल खराब हो गई थी। उसकी आंखों से आंसू छलक रहे थे कोई देख ना ले इसलिए वह अपनी ही साड़ी से अपने आंसू पोंछते हुए धीरे-धीरे अपने घर की तरफ जाने लगी । )

दूसरी तरफ नीलू बहुत खुश थी क्योंकि बिजनेस टूर पर लौटकर उसके पापा घर पर आ चुके थे और उसके लिए ढेर सारे गिफ्ट और कपड़े भी लेकर आए थे जिन्हें वह बारी-बारी से देख कर खुश हो रही थी। वह अपने पापा से राहुल के बारे में बात करना चाहती थी लेकिन उसे अभी यह समय ठीक नहीं लगा वह सोच रही थी कि खाते समय वह अपने पापा से जरूर राहुल के बारे में बात करेगी उसकी मम्मी भी खुश थी।

डिनर करने नहीं अभी अभी कुछ समय बाकी था नीलू अपने पापा से इधर उधर की बातें कर रही थी कि तभी अचानक नीलू के पापा के सीने में जोऱों का दर्द ऊभरने लगा। पलभर में ही नीलू के पापा का पूरा शरीर पसीने में भीग गया नीलू तो एकदम घबरा गई नीलू की मम्मी ने तुरंत एंबुलेंस को फोन कर दी। एंबुलेंस को आते ही तुरंत नीलू के पापा को अस्पताल पहुंचाया गया।

नीलू की मम्मी ने विनीत को भी फोन करके अस्पताल में बुला ली।

सभी लोग की नजर बंद दरवाजे पर ही टिकी हुई थी। करीब 1 घंटे बाद अंदर से डॉक्टर बाहर आया और उसने बताया कि उनको दिल का दौरा पड़ा था। यह सुनकर नीलू के साथ-साथ सभी लोग घबरा गए डॉक्टर ने बताया कि उनके सामने कुछ भी ऐसी बातें ना की जाए जिससे उनको दुख हो। वरना अगर ऐसा होगा तो इस बार फिर मुश्किल है वहां कुछ ही देर में होने होता जाएगा तब आप एक-एक करके उनसे मिल सकते हैं।

इतना कहकर डॉक्टर चला गया नीलू की आंखों से तो आंसू थम नहीं रहे थे। कुछ देर बाद नीलु के पापा को होश आया तो नीलू और उसकी मम्मी अपने पापा से मिलने कमरे में गई। डॉक्टर ने ज्यादा बोलने के लिए मना किया था इसलिए उन्होंने खुद बताया कि उनकी तबीयत अब ठीक है और बात ही बात में नीलू की मम्मी से वह विनीत के भैया और भाभी को भी बुलाने को कह दिया।

 
Reich Pinto wrote: ↑ 25 Jun 2017 18:47
hmm some very strange happenings in otherwise very cool loving story :(
 
विनीत की बातें सुनकर के तो अलका के होश ही उड़ गए थे उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें। घर पर पहुंचते ही पहले वह बाथरूम में जाकर रोने लगी उसकीे एक गलती उसे इतनी भारी पड़ेगी उसने कभी सपने में भी नहीं सोची थी। इस मुसीबत से कैसे छुटकारा पाया जाए इसका उपाय उसे सुझ भी नहीं रहा था। लेकिन क्या करती आने वाले समय का सामना तो करना ही था उसे जैसे तैसे करके उसने खाना बनाई लेकिन खाने का बिल्कुल भी मन नहीं कर रहा था। अपने दोनों बच्चों को खाना परोस कर वह तबीयत का बहाना करके अपने कमरे में चली गई अपनी पसंदीदा रसमलाई को भी बिल्कुल नहीं चखी। सोनू और राहुल को यही लग रहा था कि शायद मम्मी की तबीयत खराब है इस वजह से उन्होंने खाना नहीं खाई इसलिए राहुल ने हीं रसोई घर की सफाई कर के बर्तन साफ कर के रख दिया। । वह अपनी मां की तबीयत पूछने के लिए उसके कमरे में गया तो उसकी मम्मी पेट के बल अोंधी लेटी हुई था जिससे उसकी भरावदार गांड बहुत ही कामुक अंदाज में नजर आ रही थी जिसे देखते ही राहुल के बदन में उत्तेजना का प्रसार होने लगा और कामोत्तेजना के वशीभूत होकर के उसने अपनी हथेली को अपनी मां की नरम नरम गांड़ पर रख दिया, लेकिन उसकी मां ने राहुल का हांथ हटाते हुए बोली।

आज नहीं बेटा आज मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही है।

दवाई ली मम्मी।

हां बेटा दवा खा लि हूं तु जा अपने कमरे में सो जा और मुझे भी आराम करने दें। ( इतना कहकर वह फिर से आंखें बंद कर ली राहुल के वहां खड़े रहने का कोई मतलब नहीं था इसलिए वह भी कमरे से बाहर आ गया।)

विनीत को जब नीलू की मम्मी ने अपने भैया भाभी को बुलाने को कहीं तो विनीत ने उन्हें बताया कि उसके भैया बिजनेस टूर पर गए हुए हैं जो कि दो-चार दिन बाद लौटेंगे। नीलू के पापा की तबीयत में सुधार होने लगा था नीलू अब खुश नजर आने लगी थी क्योंकि वह अपने पापा से बेहद प्यार करती थी और उन्हें इस हाल में देख पाना उसके लिए बड़ा मुश्किल था।

धीरे-धीरे दो-तीन दिन गुजर गए, विनीत लगातार उन लोगों के साथ ही अस्पताल में रह रहा था। वैसे भी नीलू और विनीत के परिवारों के बीच अच्छे संबंध थे नीलू के पापा और विनीत के भैया दोनों आपस में कई बिजनेस की डील भी कर चुके थे। इसलिए नीलू के पापा चाहते थे कि बिजनेस की डील भी अब रिश्तेदारी मे बदल जाए। विनीत जी उन्हें अच्छा लगता था और नीलू के लिए यही सही लड़का है ऐसा मन में विचार भी बना लिए थे लेकिन अभी तक यह बात उन्होंने किसी से भी नहीं कही थी। इस मेजर अटैक के बाद वह काफी घबरा गए थे उन्हें लगने लगा था कि अब उनके पास ज्यादा समय नहीं है इसलिए वह विनीत के भैया को बुला कर के वह शादी की बात करना चाहते थे। और अपना सारा बिजनेस विनीत और नीलू को विनीत के भैया के देखरेख में सौंपना चाहते थे। लेकिन विनीत के भैया के बाहर होने की वजह से यह बात हो नहीं पाई।

डॉक्टर ने आज उन्हें घर जाने की इजाजत दे दिया था लेकिन मैं ज्यादा बोलने की छूट दिया था और ना ही ज्यादा चलने फिरने कि छोड़ दिया था और महीनों तक तो बिजनेस के बारे में बिल्कुल भी सोचने विचारने के लिए मना कर दिया था क्योंकि जरा सा भी प्रेशर उनकी जान पर खतरा बन सकता था।

नीलू के पापा को छुट्टी मिल चुकी थी वह घर आ चुके थे साथ में नीलू और विनीत भी थे नीलू ने अभी तक यह बात राहुल को नहीं बताई थी और उसे मौका भी नहीं मिला था कि यह बात तो वह राहुल से बता सके।

विनीत कामन अस्पताल में बिल्कुल भी नहीं लग रहा था और जब उन्हें छुट्टी मिल गई थी तो वह बहुत खुश था क्योंकि वह अस्पताल में बेमन से रुका हुआ था उसका मन तो अलका में ही खोया हुआ था। वह तो नीलू से और दोनों परिवारों के बीच संबंध अच्छे होने की वजह से नीलू के परिवार के साथ साथ था। नीलू के पापा को घर तक पहुंचाने के बाद वीनींत वहां से चला गया। विनीत के जाते ही उनके पापा नीलू की मम्मी से नीलू की शादी के बारे में चर्चा करने लगे। उन्होंने बताया कि वह नीलू की शादी विनीत से करना चाहते हैं ताकि वह और उसके भैया और नीलू तीनों के साथ साथ नीलू की मम्मी भी बिजनेस को चला सके क्योंकि उनको भरोसा नही था की उनकी तबीयत ठीक रहेगी। नीलू की मम्मी को भी विनीत पसंद था इसलिए उन्होंने भी कोई एतराज नहीं जताया। दो दिन बाद विनीत के भैया आने वाले थे तब ऊन्हे घर पर बुलाते नीलू के पापा उनसे सारी बात करना चाहते थे।

इधर विनीत अलका से मिलना चाहता था उसका मन अलका पर ही अटका पड़ा था। वह अलका की खूबसूरती के मोह पास में बंध चुका था। जिससे छूट पाना हो उसके लिए बड़ा मुश्किल हुआ जा रहा था।

राहुल भी कुछ दिनों से अपनी मां के रवैया से परेशान था। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां को क्या हुआ है जब भी वह उसके नजदीक जाने की कोशिश करता हूं तो तबीयत खराब होने का बहाना बनाकर बात को आगे बढ़ने से रोक देती। राहुल को भी अपनी मां का उखड़ा-उखड़ा सा चेहरा दर्द दे रहा था उसके लिए समझ पाना मुश्किल बजा रहा था कि आखिरकार उसकी मां को परेशानी क्या है।

स्कूल जाने पर जैसे ही उसकी मुलाकात नीलू से हुई वह उसके ऊपर सवालों की झड़ी बरसा दिया। क्या बात है नीलू तुम कुछ दिनों से स्कूल क्यों नहीं आ रही हो मैं तुमसे मिलने के लिए कितना तड़प रहा था लेकिन तुम हो की.... अच्छा यह बताओ थी कहां पर तुम जो इतने दिन स्कूल नहीं आ सकी।

अरे रुको तो सही थोड़ा सांस ले लो तुम तो बस हो की शुरू ही पड़ गए। आप थोड़ा वेट कर बात करते हैं।

( इतना कहने के साथ ही वह पास के पेड़ के नीचे बैठ गई राहुल भी उसके बगल में बैठ गया।)

राहुल मेरे पापा घर आ गए हैं क्योंकि महीनों बाद बिजनेस दूर करने के बाद लौटे हैं। मैं शाम को तुम्हारे बारे में बात करना ही चाहती थी कि उन्हें दिल का दौरा पड़ गया। ( इतना सुनते ही रावण के चेहरे पर आश्चर्य के भाव फैल गए।) और उन्हें ले करके हम हॉस्पिटल भागे ' भगवान की बहुत बड़ी कृपा थी की उनकी जान बच गई वरना ना जाने क्या हो जाता।

नीलू इतना कुछ हो गया लेकिन तुमने मुझे बताई भी नहीं।

कैसे बताती उस दिन से मैं लगातार हॉस्पिटल में ही थी तुम्हारे पास अगर फोन होता तो मैं जरुर तुम्हें फोन कर देती। ( राहुल को नीलू की बात सही लगे वह उससे संपर्क करती भी तो कैसे करती राहुल के पास मोबाइल जरूर है लेकिन उसका नंबर सिर्फ विनीत की भाभी के पास था और राहुल के पास मोबाइल है यह बात कोई जानता भी नहीं था। )

कोई बात नहीं नहीं तो भगवान का शुक्र है कि सब कुछ ठीक हो गया।

सच कह रहे हो भगवान की बड़ी कृपा है मैं भी कोई अच्छा सा समय देखकर तुम्हारे बारे में जरूर पापा से बात करुंगी।

विनीत भी स्कूल नहीं आता था लेकिन इस बारे में राहुल ने जरा भी ध्यान नहीं दिया। विनीत भी राहुल से मिला लेकिन विनीत आप पहले की तरह उससे नहीं मिलता था। क्योंकि राहुल को देखते ही उसे अलका याद आ जाती थी और उसे राहुल से जलन होने लगती थी।

राहुल को चोदने की तड़प लगी हुई थी। कुछ दिन से उसे चोदने को तो क्या बुर के दर्शन करने को भी नहीं मिला था। ना तो उसे विनीत की भाभी का फोन ही आ रहा था ना तो नीलू को बहुत होता था क्योंकि वह खुद कुछ दिनों से परेशान थी। और उसकी मा थी की जबसे वीनीत ने उसे धमकी दिया था तब से किसी भी काम में

उसका मन ही नहीं लगता था उसे हर जगह धमकी देता हुआ वीनीत हीं दिखाई दे रहा था।

तीन-चार दिनों से रास्ते में अलका को वीमीत नहीं मिला था। इसलिए उसे थोड़ा राहत थी लेकिन फिर भी वह डर के मारे बाजार में कुछ खरीद भी नहीं पाती थी उधर से वह जल्दी से जल्दी निकल जाना चाहती थी। इसलिए शाम को वह अपने चारों तरफ नजर दोड़ा कर देखते हुए ऑफिस से लौट रही थी भगवान से मनाए भी जा रही थी कि उसे भी नहीं तो कभी भी कहीं भी दिखाई ना दे। बाजार से गुजरते समय वह कुछ ज्यादा ही चौक्कनी ं हो जाती थी। नजरें बचाकर वह बाजार से आगे निकल गई उसके मन में थोड़ी राहत हुई लेकिन जैसे ही बाजार से थोड़ी दूरी पर पहुंची ही थी ंकि सन्न से बाइक आकर उसके सामने ही रुकी अलका तो डर के मारे कांपने लगी जब उसने अपने सिर पर से हेलमेट को उतारा ' हेलमेट के पीछे विनीत ही था। उसे देखते ही अलका कांपने लगी। अलका को कांपते हुए देख कर विनीत मुस्कुराते हुए बोला।

क्यों डर रहे हो मेरी जान मुझ से डरने की तुम्हें कोई भी जरूरत नहीं है। बस मेरी बात मान लो तुम्हारा सारा डर दूर हो जाएगा।

नहीं विनीत ऐसा मत करो कुछ तो रहम करो मुझ पर। मैं दो बच्चों की मां हुं। मेरी इज्जत से यूं ना खेलो विनीत।

जानता हूं मेरी जान कि तुम्हारे दो बच्चे हैं। और तुम्हारे दो बच्चों में से एक बच्चा मेरे ही क्लास में पढ़ता है जो कि मेरा दोस्त भी है। ( यह सुनकर अलका आश्चर्यचकित हो गए और आश्चर्य के साथ बोली।)

तुम्हारे साथ तुम झूठ बोल रहे हो।

मैं झूठ नहीं बोल रहा हूं अलका डार्लिंग तुम्हारे उस बच्चे का नाम राहुल है। और वह मेरी क्लास में है और मेरा दोस्त भी है।

तुम मेरे बेटे के दोस्त होने के बावजूद भी अपने ही दोस्त की मां पर तुम अपनी नियत बिगाड़ रहे हो तुम्हें शर्म नहीं आती। ( इतना कहने के साथ ही वह जाने ही वाली थी कि उसने फिर से उसकी कलाई पकड़ लिया और कलाई पकड़ते हुए बोला।)

रुको तो सही मेरी जान जो तुम मुझे कह रही है वही मैं भी तुम्हें कह सकता था कि तुम अपने बेटे के दोस्त के साथ चुदवाइ तो तुम्हें क्या अपने बेटे के दोस्त के साथ चुदवातो हुए शर्म नहीं आई।

वह मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल थी मैं बहक गई थी और मैंने तुम पर भरोसा की। मैं करती हूं उस पल को जो मैं तुम्हारे साथ बहक गई।( अपना हाथ छुड़ाने की नाकाम कोशिश करते हुए।)

तो एक बार और बहक जाओ मेरी जान बस एक बार एक बार और मुझे चोदने दो तुम्हें( अलका वीनीत की यह गंदी बातें सुनकर शर्म से मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि वह ऐसी गंदी बातें सुन कैसे ले रही है। लेकिन मजबूर थी उसकी मजबूरी का कारण बहुत बड़ा था इसलिए वह खामोश थी।

लेकिन अपनी इज्जत बचाने कि वह पूरी नाकाम कोशिश कर रही थी विनीत के सामने वह मिन्नतें करती गिड़गिड़ाती लेकिन उसके सर के ऊपर तो वासना का भूत सवार था जो कहां मानने वाला था। बह उसकी कलाई पकड़े हुए ही बोला।

जानेमन बस एक बार एक बार फिर से अपनी रसीली बुर का स्वाद चखा दे। बस एक बार मुझे चोदने दे उसके बाद मैं तुझे कभी भी परेशान नहीं करूंगा और ना ही तुझे दिया हुआ पैसा वापस मांगुगा। बस एक बार मेरी बात मान जा।

नहीं विनीत ऐसा मत कर मेरी इज्जत चली जाएगी और हम लोगों के पास इज्जत के सिवा कुछ नहीं है ।बस तेरे साथ एक बार बाहक गई थी उसका बदला मुझसे युं न ले। ( अलका विनीत के हाथों से अपनी कलाई को छुड़ाने की पूरी कोशिश कर रही थी लेकिन विनीत का हाथ कुछ ज्यादा ही मजबूत था।)

देख मैं फिर कहता हूं सीधे सीधे मान जा वरना मुझे उंगली टेढ़ी करके भी घी निकालना आता है। अब तो तू अच्छी तरह से जान ही गई होगी कि तेरा बेटा मेरे ही स्कूल में पढ़ता है। जरा सोच अगर मैं अपने दोस्तों से पूरे स्कूल में यह कह दो कि राहुल की मां मेरे साथ सेट है और वह मुझ से चुदवाती भी है , तो सोच जरा क्या होगा। राहुल के साथ साथ तुम्हारी भी इज्जत की धज्जियां उड़ जाएगी उसका स्कूल में आना दुश्वार हो जाएगा और फिर वह परेशान होकर के स्कुल ही छोड़ देगा। क्या तुम ऐसा चाहती हो।

( विनीत की यह बात सुनकर के तो अलका सन्न रह गई। उसे इस बात का बिल्कुल भी यकीन नहीं था कि विनीत ऐसा कुछ भी कर सकता है अब उसका डर और ज्यादा बढ़ गया था उसके चेहरे पर डर के भाव साफ नजर आ रहे थे। अलका का डरा हुआ चेहरा देखकर विनी को लगने लगा कि इस बार उसकी धमकी जरूर काम करेगी इसलिए वह उसकी कलाई छोड़ते हुए बोला।)

मेरी इच्छा पूरी कर दें वरना बेटा कहां हो वैसा ही कर दूंगा तो कहीं भी मुंह दिखाने के लायक नहीं रह जाओगी तुम्हारे पास सोचने का पूरा मौका है मुझे जल्द से जल्द बताना कि तुम क्या चाहती हो अभी तो मैं जा रहा हूं लेकिन फिर आऊंगा।( इतना कहने के साथ ही वह बाइक स्टार्ट कर के चला गया। अलका के सर पर तो मानो मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है आज की दी हुई धमकी उसे अंदर तक हिला गई थी इसके बारे में किसी से कह पाना भी बड़ा मुश्किल था। वह जैसे तैसे कर के अपने घर पर पहुंची और फिर वही बाथरूम में जाकर रोने लगी। अलका को अपने चारों तरफ सिर्फ अंधेरा ही अंधेरा दिख रहा था उसे कोई राह सिध नहीं रही थी।

दूसरी तरफ विनीत का भाई घर पर आ चुका था। ऊसे नीलूं के पापा ने बुलवाया था और शाम को ही उनके घर जाने का प्लान बन चुका था। शाम को ठीक समय पर विनीत उसकी भाभी और उसके भैया नीलू के घर पर जाने के लिए निकल पड़े।

नीलू के घर पर तैयारियां चल रही थी अनिल की मम्मी रसोई में ढेर सारे पकवान तैयार कर रही थी और नीलू भी अपनी मां का हाथ बँटा रही थी लेकिन उसे यह नहीं मालूम था कि घर में है क्या जो आज इतने पकवान बनाए जा रहे हैं। इसलिए वह सब्जी काटते हुए अपनी मां से बोली।

आज क्या बात है मम्मी आज इतनी ढेर सारे पकवान बनाए जा रहे हैं कोई खास बात है क्या।

हां खास बात तो है आज तेरी शादी की बात करने के लिए तेरे पापा ने विनीत के भैया सहित पूरे परिवार को निमंत्रण दिए हुए हैं। और वह लोग किसी भी वक्त घर पर आ सकते हैं। ( इतना सुनते ही नीलू तो सन्न हो गई जिसे कि उसे किसी सांप ने सूंघ लिया हो। उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह बस जड़वंत उसी स्थान पर खड़ी रह गई। उसे तो जैसे कोई हो सही ना हो उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसके पापा ने इतना बड़ा फैसला उससे पूछे बिना ले लिए हैं।)

 
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