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होता है जो वो हो जाने दो complete

वह जाते-जाते वीनीत की भाभी की तरफ देखा तो वह थक कर सो चुकी थी। वह जाते जाते एक बार उसको झकझोर कर जगाने की कोशिश करने लगा लेकिन वह एकदम बेशुध हो चुकी थी। वह नींद के आगोश में चली गई। राहुल कमरे से बाहर निकला और वीनीत की तरफ गुस्से में देखते हुए बोला।

इसे कहते हैं चुदाई। ( और इतना कहकर वह चला गया विनीत उसे जाते हुए देखता रहा लेकिन कुछ भी कर पाने जितनी हिम्मत उसमे नहीं थी।)

राहुल विनीत के घर से जा चुका था वह जैसा प्लान बनाया था ठीक वैसा ही हुआ था विनीत को नीचा दिखाने में वह कोई भी कसर बाकी नहीं रखा था विनीत खुद शर्मिंदा हो चुका था उसे इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा ही नहीं था कि राहुल ऐसे कदम भी उठा सकता है। उसे इस बात से ज्यादा हैरानी हुई कि राहुल को कैसे पता चल गया कि विनीत और उसकी भाभी के बीच में शारीरिक संबंध का रिश्ता है। उसके मन में भी इस समय ढेर सारे सवाल उमड़ रहे थे जिसका जवाब उसकी भाभी या राहुल ही दे सकता था । विनीता शर्मसार हो कर वह खिड़की पर खड़ा रहा उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें । कुछ देर तक वह वहीं पर बुत बना खड़ा रहा। विनीत की भाभी थकान से चूर हो चुकी थी उसे इसका अंदाजा भी नहीं था कि राहुल आज इतना जमकर उसकी चुदाई करेगा।

विनीत की भाभी राहुल से बहुत ही ज्यादा खुश और संपूर्ण संतुष्टि का एहसास लिए बेसुध होकर बिस्तर पर पड़ी थी। विनीत कुछ देर तक वहां खड़ा रहने के बाद बिना कुछ बोले ड्राइंग रूम में आकर बैठ गया उसका मन इधर उधर भाग रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अब करना क्या है उसका दांव खुद उस पर ही भारी पड़ गया था।

थोड़ी देर बाद उसकी दादी अपनी साड़ी को ठीक करते हुए ड्राइंग रूम में आई तो उसे देखते ही वीनीत अपनी जगह से खड़ा होता हुआ बोला।

भाभी राहुल इधर क्या करने आया था।

कुछ नहीं वह कुछ नोटबुक लेने आया था तो मैंने उसे कह दी कि विनीत अभी घर पर नहीं है जब आए तो ले लेना । ( वह अपनी साड़ी ठीक करते हुए बोली, )

लेकिन तुम कब आए?

मैं तो कब से आ चुका हूं भाभी तभी तो पता चला कि राहुल इधर आया था। ( विनीत की बात सुनकर होती वह भी कुछ बोली नहीं बल्कि अपनी हालत को दुरुस्त करने लगी कुछ देर तक खामोशी छाई रही तभी वीनीत बात को आगे बढ़ाते हुए बोला।)

यह सब कब से चल रहा है भाभी। ( विनीत थोड़ा गुस्से में बोला विनीत के सवाल पर उसकी भाभी थोड़ा सक पका गई। कुछ देर तक उसे समझ नहीं आया की विनीत क्या कह रहा है इसलिए वह हड़ बड़ाते हुए बोली।)

ककककक.... क्या कब से चल रहा है?

वही तुम्हारे और राहुल के बीच में।

( इस बार उसको अंदेशा हो गया कि कुछ गड़बड़ हो चुकी है फिर भी बात को संभालते हुए वह बोली।)

मेरे और राहुल के बीच में...... क्या चल रहा है? तुम पागल तो नहीं हो रहे हो तुम्हें शर्म नहीं आती है की बातें करते हो वह तुम्हारा दोस्त है तुमसे मिलने घर पर आया था बस और क्या।( वह अपना मुंह दूसरी तरफ फेरते हुए बोली।)

बनो मत भाभी, मैंने अपनी आंखों से तुम दोनों की कामलीला देख चुका हूं। ( विनीत अपनी भाभी का गुस्से से जोर से हाथ पकड़ते हुए बोला। )

देख लिए तो देख लिए मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता और तुम अपने काम से काम रखो दूसरों के कमरे में झांकना छोड़ दो। समझ गए।

( विनीत की भाभी को समझ में आ गया था कि वीनीत ने सब कुछ देख लिया है तो बात को घुमाने से कोई फायदा नहीं है इसलिए वह विनीत से साफ़ साफ़ बोल दी। विनीत भी गुस्से में था इसलिए वह अपनी भाभी का हाथ जोर से झटकते हुए बोला।)

नहीं तुम्हारी सारी काली करतूतों को भैया को बता दूंगा।

जा बता दे लेकिन यह सब बताने पर भी कुछ फायदा नहीं होगा उल्टा मैं तुझे ही फसा दूंगी। बस मुझे इतना ही कहना होगा कि मुझे नग्नावस्था में देखकर तुम्हारे भाई से कंट्रोल नहीं हुआ और वह मेरे साथ जबरदस्ती करना चाहता था तो मैंने उसे जोर से दो तमाचे गाल पर जड़ दि। बस मेरा इतना ही कहना होगा उसके बाद तुम जानते हो कि तुम्हारे भैया तुम्हारे साथ क्या करेंगे तुम्हें घर से भी निकाल देंगे।( वह इतराते हुए बोली। विनीत यह सब बातें सुनकर सन्न रह गया लेकिन फिर भी अपनी भाभी की बात पर आशंका जताते हुए बोला।)

तुम अच्छी तरह से जानती हो भाभी की भैया तुम्हारी इन सब मनगढ़ंत बातों पर कभी भी विश्वास नहीं करेंगे।

करेंगे जरूर करेंगे( अपनी गांड मटकाते हुए दो चार कदम चलते हुए वह बोली।) तू अभी बहुत नादान है विनीत तू औरतों की मायाजाल को नहीं जानता। मर्दों की समझदारी बड़प्पन चालाकी सब कुछ औरतों की दो टांगो के बीच आते ही धरी की धरी रह जाती है। तेरे भैया भी मेरी टांगों के बीच आते ही सब कुछ भूल जाएंगे यह भी भूल जाएंगे कि तू उन का छोटा भाई है और वही करेंगे जो मैं कहूंगी।

तू बहुत बेशर्म है भाभी।

अच्छा तो यह बात है तेरे साथ सोती हूं तो सती सावित्री और तेरे दोस्त के साथ सोई तो बेशर्म। तेरी भाभी होने के बावजूद जब मैं तेरे साथ संभोग सुख का आनंद लेती थी तभी तुझ को समझ लेना चाहिए था कि मैं कितनी प्यासी हूं। तेरा भाई मुझे चोद कर संतुष्ट नहीं कर पाता था तब मैंने तेरा सहारा ली, और जब मुझे तेरे से भी ज्यादा दमदार और तगड़ा लंड मिल गया तो मैं तेरे दोस्त से चुदवाने लगी। सही मायने में तुझे कहूं तो असली मर्द राहुल ही है उसे पता है की औरतों को कैसे खुश किया जाता है। और उसके पास औरतों को संपूर्ण रुप से संतुष्टि प्रदान करने वाला लंबा तगड़ा हथियार भी है। जो कि तुम दोनों भाइयों के पास उसका आधा भी नहीं है।

( अपनी भाभी की ऐसी गंदी और कड़वी बातें सुनकर विनीत शर्म से पानी पानी हुए जा रहा था इससे बड़ी शर्मकी बात विनीत के लिए क्या होगी की उसकी भाभी ही उसकी मर्दानगी पर सवाल उठा रही हो। विनीत ऐसी बातें सुनकर गुस्से में बोला।)

बस भाभी बस मुझे नहीं मालूम था कि तुम इतनी बड़ी बेशर्म निकलोगी।

अच्छा तुम्हारे साथ सोऊं तो सती सावित्री और तुम्हारे दोस्त के साथ सो गई तो बेशर्म।

मुझे यकीन नहीं आ रहा है कि तुम इस तरह की औरत निकलोगी।

बस अब मे ईससे ज्यादा कुछ नहीं सुनना चाहती जैसा चाहती हूं वैसे ही रहो अगर जरा भी चालाक बनने की कोशिश किए तो तुम्हारे लिए ही अच्छा नहीं होगा।

( इतना कहने के साथ ही वह अपने कमरे में चली गई और विनीत वहां पर ठगा सा खड़ा रह गया । वह चारों खाने चित हो चुका था उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था उसके सोचने के बिल्कुल उल्टा हो रहा था। वह एकदम से बौखला गया था। उसकी प्यारी भाभी जिसे वह जी जान से ज्यादा मानता था उसे अपने ही दोस्त के साथ रंगरेलिया मनाते हुए देखकर दंग रह गया था। वह अब राहुल से मिलने के लिए छटपटा रहा था वह अपनी बेइज्जती का बदला राहुल की मां को चोद कर लेना चाहता था। वह भी अपने मन में ठान लिया था कि आगे उसे क्या करना है।

दूसरे दिन स्कूल जाते वक्त विनीत रास्ते में ही राहुल का इंतजार कर रहा था और वह उसे रास्ते में मिल गया । राहुल को देखते ही विनीत का भी खून खोलने लगा वह सड़क पर ही राहुल का गिरेबान पकड़कर उसे धमकाने लगा। लेकिन राहुल था कि हंसे जा रहा था क्योंकि उसे अच्छी तरह से मालूम था की उसने कौन सा दांव खेल चुका है वीनीत के साथ। विनीत के हाथों में अब एक भी बाजी नहीं रह गई थी। जितना विनीत क्रोधित हो रहा था उतना ही ज्यादा राहुल हंस रहा था राहुल की हंसी विनीत को जहर की तरह लग रही थी। राहुल की हंसी बंद नहीं हो रही थी उसको इतना से हंसता हुआ देखकर विनीत उससे बोला।

हंस मत हरामजादे मुझे अभी के अभी अपने पैसे भी चाहिए और तेरी मां भी , तू खुद अपनी मां को मेरे पास लाएगा वरना आज मैं पूरी स्कूल को बता दूंगा कि तेरी मां के साथ मेरा क्या रिश्ता है। ( विनीत राहुल का गिरेबां पकड़ते हुए बोला लेकिन विनीत की यह बात सुनकर राहुल उसे जोर से धक्का दिया और वह नीचे जमीन पर गिर गया। और उसके नजदीक जाकर बोला।)

हरामजादे कुत्ते तो क्या हम लोगों को बदनाम करेगा मैं चाहूं तो अभी इसी वक्त तेरी और तेरे खानदान की धज्जियां उड़ा सकता हूं। लेकिन तू ऐसे नहीं मानेगा लगता है तुझे एक बार फिर से असली नजारा दिखाना होगा। ( विनीत के गिरेबान को कस के पकड़ते हुए)

हरामजादे तू तो देख ही चूका है कि नहीं क्या क्या कर सकता है लेकिन शायद इससे भी तेरा पेट नहीं भर रहा है, तो सुन आज रिशेेश में ऊपर के मंजिलें पर आ जाना शायद वहां का नजारा देखकर तुझे कुछ सीखने को मिलेगा और आइंदा से मेरे साथ ऊलझने की गलती ना कर सके। ( वह जाने ही वाला था कि फिर से दिनेश की तरफ मुड़कर गुस्से में बोला।) और हां सिर्फ देखना और उससे मिला इससे ज्यादा कुछ भी करने की कोशिश किया तो तेरा बना बनाया सारा खेल बिगड़ जाएगा और तू कहीं का नहीं रह जाएगा समझ गया।

( इतना कहकर राहुल स्कूल की तरफ चला गया विनीत वहीं खड़ा फिर से सोचने लगा कि आखिरकार उसके साथ हो क्या रहा है प्रिया राहुल ऊपर की मंजिल पर ऊसे क्या दिखाने वाला है। उसके सामने सारे राज अभी राज ही थे उसकी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी कि आखिर राहुल उसे दिखाना क्या चाहता है। अलका को लेकर के उसकी चाहत बढ़ती जा रही थी वह उसे लगभग हासिल कर ही लिया था लेकिन एक दिन में सारा खेल उल्टा पड़ने लगा था। लेकिन फिर भी वह अलका को भोगने की उम्मीद पर कायम था वह मन में अलका को लेकर के ख्याली पुलाव बना रहा था उसे लगता था कि अलका उसके हाथ लग जाएगी। जिसके लिए उसने इतना कुछ कर दिया अपनी दोस्ती भी दांव पर लगा दिया इतनी आसानी से वह अलका को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था। वह ऊसे किसी भी हाल में पाना चाहता था।और ऊसे पाने के लिए मन में ठान लिया था कि आज शाम को किसी भी हाल में चाहे कुछ भी हो अलका को भोगकर ही रहेगा।

मन में यह ख्याल करके वह स्कूल की तरफ चल दिया क्लास में बैठे-बैठे वह रिशेश होने का इंतजार कर रहा था।

 
007 wrote: ↑ 21 Jul 2017 15:28
रोहित आपकी इस कहानी ने एक लाख व्यूज का पड़ाव पार कर लिया है बधाई हो दोस्त
 
विनीत को बड़ी बेसब्री से रिशेेश होने का इंतजार था। उसके मन में एक अजीब सा डर भी बना हुआ था लेकिन फिर भी उत्सुकता भी थी कि आखिरकार राहुल उसे क्या दिखाने वाला है उसका दिल जोरो से धड़क रहा था हालात के हाथो वह इतना लाचार हो चुका था कि कुछ भी उस के पक्ष में होता नजर नहीं आ रहा था।

आखिरकार इंतजार की घड़ियां खत्म हुई दीवार घड़ी की सुई अपनी नियत स्थान पर पहुंचते ही स्कूल में रिशेेश की घंटी भी बज गई। राहुल के चेहरे पर संतुष्टि भरी मुस्कान तैर रही थी। लेकिन वीनीत के चेहरे पर तो जैसे 12:00 बजे हुए थे। वह राहुल के हाथों का कठपुतली बना हुआ था वह जैसे चाहता, वैसा ही उसे नचा रहा था। रीषेश की घंटी बजते ही दोनों एक दूसरे को घूरते हुए क्लास से बाहर निकले , राहुल उसे थोड़ा आगे को निकल गया, विनीत ऊससे कुछ दूरी बनाकर उसके ऊपर नजर गड़ाए हुए था उसे इंतजार था कि वह कब स्कूल की ऊपरी मंजिल पर जाएगा कुछ देर तक यूं ही वहां खड़ा रहा। कुछ ही मिनट बाद उसकी नजरों ने जो देखा उसे देख कर उसे अपनी आंखो पर विश्वास नहीं हुआ। राहुल और नीलू दोनों हंस हंस कर बातें कर रहे थे राहुल ने उसके कान में कुछ धीरे से कहा जिससे दोनों सबसे नजरें बचाते हुए ऊपरी मंजिलें की तरफ जाने लगे। राहुल का तो यह देखकर होश ही ऊड़ गया था। दोनों के बीच कुछ गड़बड़ होने की आशंका वीनीत को साफ नजर आ रही थी। वह धड़कते दिल के साथ दोनों के पीछे पीछे ऊपरी मंजिल पर जाने लगा, राहुल और नीलू भी नजरे बचाते हुए उस क्लास की तरफ बढ़ रहे थे जिस क्लास में दोनों बहुत बार अपनी मर्यादाओं को लांघ चुके थे। मैंने तुमसे कुछ दूरी बनाकर ही चल रहा था ताकि उन लोगों की नजर उस पर ना पड़ सके लेकिन राहुल को अच्छी तरह से मालूम था कि लिमिट इन दोनों के पीछे पीछे आ रहा है इसलिए उसे जानबूझकर जलाने के उद्देश्य से उसने अपने एक हाथ को नीलू की संगमरमरी पीठ पर धीरे-धीरे सरकाते हुए नीचे की तरफ ले जाकर नीलू की भरी हुई भरावदार गोल गांड पर अपनी हथेली फिर आते हुए उसे अपनी हथेली में दबोच लिया और गांड को दबोचे हुए हैं पीछे की तरफ नजर घुमाकर विनीत की तरफ देखते हुए धीरे से आंख मार दिया। विनीत अब तो राहुल की इस हरकत से एकदम जल भून गया। उसे इसकी भी उम्मीद बिल्कुल नहीं थी राहुल के व्यवहार पर का पता चला था कि दोनों के बीच लंबे समय से कुछ चल रहा है। नीलू उसकी होने वाली पत्नी थी। नीलू से उसे इस तरह की कतई उम्मीद नहीं थी। वह नीलू पर हमेशा से अपना ही हक समझता था क्योंकि नीलू भी उसे बेहद प्यार करती थी लेकिन इस समय उसकी आंखें जो देख रही थी वह सनातन सत्य था उसकी होने वाली बीवी के नितंबों पर उसका ही दोस्त राहुल की हथेली घूम रहीे थी। जो की बहुत कुछ कह रही थी। वीनीत का गुस्से से बुरा हाल था लेकिन हालात कुछ इस तरह के खड़े हो चुके थे कि विनीत कुछ करने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं था।

उसके देखते ही देखते दोनों खाली क्लास में चले गए और दोनों के अंदर प्रवेश करते ही फटाक की आवाज के साथ दरवाजा बंद हो गया दरवाजा के बंद होते ही विनीत के दिल की धड़कन तीव्र गति से चलने लगी। उसे इसका आभाष अच्छी तरह से हो गया था कि बंद कमरे में दोनों के बीच कुछ गंदा ही होने वाला है। वह दबे क़दमों से दरवाजे के करीब पहुंच गया और कमरे के अंदर का दृश्य देखने के लिए वह दरवाजे में से जगह तलाशने लगा। विनीत के कानों में कमरे के अंदर से आ रही आवाज साफ साफ सुनाई दे रही थी और उस आवाज को सुनते ही गुस्से के मारा उसका खून खौल रहा था। कमरे के अंदर से नीलू की ही आवाज आ रही थी।

छोड़ो राहुल क्या कर रहे हो तुम्हें तो जरा भी सब्र नहीं होता।ऊंहहहहहहह..... छोड़ो ना .....आहहहह....प्लीज ऐसे मत दबाओ दर्द होता है।

( कमरे के अंदर से आती नीलू की मादक आवाज को सुनकर विनीत बेचैन हो गया उसके कानों में उसकी आवाज किसी सुल की तरह चुभ रही थी। उसे पक्का यकीन हो गया था कि कमरे के अंदर दोनों के बीच गंदा ही हो रहा था ।वह अंदर की बातों को तो आराम से सुन ले रहा था लेकिन अंदर का नजारा देख सके ऐसा कोई जुगाड़ उसे नजर नहीं आ रहा था कि तभी उसकी नजर दरवाजे के किनारे पर पतली सी दरार पर पड़ी और वह तुरंत दरार मैं अपनी नज़र गड़ा कर अंदर के दृश्य को देखने की कोशिश करने लगा। दरवाजे की उस पतली दरार से जैसे ही उसने कमरे के अंदर अपनी नजर दौड़ाया तो अंदर का नजारा देख कर दंग रह गया। वह कभी सपने में भी नहीं सोच सकता था कि नीलू उसके साथ इस तरह की बेवफाई करेगी।

वह गुस्से से एकदम बौखला गया था वह भी कर क्या सकता था अंदर का नजारा ही कुछ ऐसा था। नीलु के शर्ट के ऊपर के दोनों बटन खुले हुए थे। ब्रा ऊपर की तरफ ऊठी हुई थी उसकी दोनों चूचियां राहुल की हथेली में कसी हुई थी और वह उसकी निप्पल को मुंह में भर कर चूस रहा था। नीलू के चेहरे के भाव को देख कर साफ मालूम पड़ रहा था कि नीलु को इसमें बहुत ज्यादा मजा आ रहा था। राहुल बड़े मजे लेते हुए नीलू की दोनो चुचियों को बारी-बारी से मुंह में भर कर चूस रहा था। विनीत से यह सब देखा नहीं जा रहा था लेकिन ना चाहते हुए भी वह अपनी आंखों को दरवाजे की पत्नी दरार से सटाए रहा। राहुल जोर-जोर से उसके चुचियों को दबाते हुए बोले जा रहा था कि।

ओह नीतू मेरी जान मैं तुमसे बेहद प्यार करता हूं तुम्हारे बिना मैं जी नहीं सकता। ( ऐसा कहते हुए वह नीलू की गोल-गोल दोषियों को अपनी हथेली में भरकर जोर जोर से दबाने लगा जिससे नीलू की गरम सिसकारी निकल जा रही थी।)

ससससहहहहहहहह....राहुल मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूं तुम्हारे बिना मे भी नहीं जी सकती। ( राहुल के चेहरे को अपनी हथेलियों में लेते हुए बोली। यह सब देखकर विनीत जल भून जा रहा था वह गुस्से में आग बबूला हो चुका था। वह अंदर का दृश्य देखने में अपने आप को असमर्थ पा रहा था उसकी इच्छा हो रही थी कि दरवाजा तोड़कर अंदर चला जाए और राहुल की जमकर धुलाई कर दे। वह ऐसा करने की सोच रहा था लेकिन बार-बार उसे राहुल की दी हुई धमकी याद आ जा रही थी कि अगर वह कुछ भी किया तो उसका बना बनाया सारा खेल बिगाड़ देगा। विनीत को यह भी नहीं समझ में आ रहा था कि कौन सा बना बनाया खेल बिगाड़ देगा लेकिन एक अजीब प्रकार का डर विनीत के मन में बैठ चुका था जिसकी वजह से वह आगे कदम बढ़ाने में घबरा रहा था। तभी विनीत की नजर जब राहुल की कमर के नीचे गई तो वह सन्न रह गया, राहुल एक हाथ से अपने पेंट की बटन को खोल रहा था और साथ ही बोल रहा था कि।

नीलू तुम मुझसे प्यार तो करती हो लेकिन तुम्हारी शादी तो वीनीत के साथ तय हो गई है।

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो राहुल इसमें पापा की तबीयत ठीक नहीं है इसलिए मैं उनसे तुम्हारे बारे में कोई भी जिक्र नहीं करना चाहती लेकिन मेरा यकीन मानो सब कुछ हालात ठीक होते ही मैं तुम्हारे बारे में पापा से बात करूंगी और मेरे पापा जरुर मेरी खुशी के लिए मान जाएंगे और मैं तुम्हारी ही दुल्हन बनुंगी।

( ऐसा कहते हुए वह खुद ही अपना एक हांथ नीचे ले जाकर के राहुल की मदद करते हुए उसके पैंट की चेन को खोलने लगी' नीलू की बात सुनकर और उसकी हरकत को देखकर राहुल शर्मिंदा होने लगा और उसे एक झटका सा लगा, उसे आज तक इस बात की भनक तक नहीं लग पाई थी कि दोनों के बीच कुछ चल रहा है और बात बढ़ते-बढ़ते यहां तक बढ़ गई थी दोनों एक दूसरे से शादी करना चाहते थे और नीलू खुद अपने पापा से राहुल के बारे में बात करने वाली थी। नीलू की बात सुनते ही राहुल के पैरों के नीचे से जैसे जमीन खिसक गई हो। उसकी आंखों के सामने अंधेरा सा छाने लगा उसे ऐसा लगने लगा कि वह कहीं गिर ना जाए इसलिए अपने आप को संभालते हुए दरवाजे का टेका ले लिया। वह शर्मिंदगी से गड़ा जा रहा था लेकिन कर भी क्या सकता था वह तो नीलू के साथ शादी करके अपने भविष्य के सपने बुनना शुरू कर दिया था। लेकिन आज सच्चाई जानकर उसे एक झटका सा लगा था उसकी नाक के नीचे ही यह सब कुछ चल रहा था और उसे कानों-कान पता भी नहीं चला। विनीत ना चाहते हुए भी अंदर का दृश्य देखने के लिए अपने आपको संभाल कर फिर से अपनी नजर को दरवाजे की पतली दरार से ज्यों ही अंदर की तरफ ़ दौड़ाया तो अंदर का नजारा देखकर उसका माथा ठनक गया। राहुल का लंड उसकी पेंट से बाहर लटक रहा था जिसे नीलू अपनी हथेली में भरे हुए धीरे-धीरे मुठिया रही थी। विनीत बार-बार शर्मसार हुए जा रहा था उसके सब्र की सीमा समाप्त हो रही थी। लेकिन राहुल के आगे वह पूरी तरह से लाचार और मजबूर हो गया था राहुल ने वीनीत को कुछ इस तरह से घेर लिया था कि जिससे निकल पाना विनीत के बस में नहीं था।

सच नीलु तुम मेरी दुल्हन बनोगी ना कहीं तुम वीनीत से शादी करके उसकी दुल्हन बन गई तो ।

( अपनी हथेली को राहुल के होठों पर रखते हुए) नहीं राहुल ऐसा मत बोलो मैं तुमसे ही प्यार करती हूं और तुम्हारी ही दुल्हन बनुंगी चाहे कुछ भी हो जाए।

ओहहहहहह नीलू मेरी जान तुम कितनी अच्छी हो इसीलिए तो मैं तुमसे बेहद प्यार करता हूं।

( राहुल को मालूम था कि वीनीत दरवाजे के बाहर खड़ा होकर अंदर का दृश्य देख रहा है। इसलिए जानबूझकर ऐसी बातें कर रहा था और नीलू के मन की बात ऊगलवा रहा था ताकी वर्तमान परिस्थिति की स्थिति को जान कर विनीत अच्छी तरह से समझ सके कि राहुल क्या कर सकता है। तभी राहुल एक और झटका देने वाली बात नीलू से बोला।

नीलू प्लीज एक बार मेरा लंड मुंह में लेकर चूस लो मेरा बहुत मन कर रहा है तुम्हें लंड चुसवाने का... प्लीज नीलु ।)

राहुल की बात सुनकर वीनीत अंदर ही अंदर जलभुन गया क्योंकि आज तक वह समझता था कि नीलू सिर्फ

उसके ही लंड को मुंह में लेकर चूसी है लेकिन आज उसे कुछ और देखने को मिलने वाला था। नीलू अभी भी उसके लंड को मुट्ठी में भरकर हिला रही थी। वह राहुल के लंड को हिलाते हुए बोली।

राहुल रिशेष पूरी होने वाली है चलो नीचे चलते हैं। ( लंड को मुठीयाते हुए बोली।)

क्या नीलू अभी बहुत समय है अच्छा सच सच बताना क्या तुम्हारा मन नहीं कर रहा है मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसने का ।

( नीलू राहुल की बात सुन कर हंसने लगी और हंसते हुए बोली।)

मेरा तो हमेशा मन करता है तुम्हारे लंड को मुंह में लेकर चूसने का ।

( और इतना कहने के साथ हुआ नीचे घुटनों के बल बैठ गई यह देखकर विनीत की हालत ऐसी हो गई थी कि जैसे उसे सांप सूंघ गया हो। उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार करें तो क्या करें वह बस बूत बना अंदर का दृश्य देखता रहा। और नीलू देखते ही देखते राहुल के मोटे लंबे लंड को धीरे धीरे करके अपने गले तक निगल गई। जिस तरह से नीलु उसके लंड को चूस रही थी राहुल की तो सिसकारी छूट रही थी। विनीत इसे यह सब देखा नहीं जा रहा था और वह राहुल था कि जानबूझकर विनीत को यह सब देखने के लिए मजबूर किए हुए था उसने झट से अपनी जेब से मोबाइल निकाल कर रिकॉर्ड करना शुरु कर दिया। बाहर दरवाजे पर खड़ा अंदर का दृश्य देख रहा वीनीत राहुल की चालाकी को अच्छी तरह से समझ चुका था। राहुल बार-बार दरवाजे की तरफ देख ले रहा था विनीत को लग रहा था कि जैसे वह उसी को देख रहा हूं जबकि दरवाजे की तरफ देखना यह राहुल का इशारा था कि वह उसी को सब कुछ दिखा रहा है। नीलुू लंड चूसते हुए राहुल को रिकॉर्डिंग करते हुए देखीतो वह राहुल की हरकत को देखकर मुस्कुरा दी वह गले के अंदर तक लंड को लेकर अच्छी तरह से लंड की चुसाई कर रही थी। राहुल को यूं विनीत को दिखाते हुए उसकी होनो वाली पत्नी से लंड चुसवाते हुए बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी। रह रह कर राहुल की सिसकारी छुट जा रही थी।

विनीत का पूरा बना बनाया खेल बिगड़ चूका था विनीत ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि सीधा-साधा लगने वाला राहुल इस तरह की हरकत भी कर सकता है। यह एक तमाचा था विनीत के गाल पर। राहुल अपनी कमर को आगे पीछे हिलाते हुए नीलू के मुंह को ही चोद रहा था उसे पता था कि कुछ ही समय बचा हे रिशेष पूरी होने में। इसलिए वह विनीत को एक और झटका देना चाहता था इसके आगे का नजारा दिखा कर इसलिए वह तुरंत नीलू के मुंह में से अपने लंड को बाहर की तरफ खींच कर निकाल लिया। नीलू की सांसें भारी हो चली थी वह अपनी सांसो को दुरुस्त करती इस से पहले ही राहुल ऊसके कंधो को पकड़ कर उठाते हुए

( नीलू कुछ समझ पाती उससे पहले ही वह टेबल की तरफ उसका मुंह करके उसे नीचे की तरफ झुका दिया नीलू को अब समझ में आ गया था कि राहुल क्या करने वाला है उसका भी बहुत मन कर रहा था चुदवाने को लेकिन इस तरह से जल्दबाजी में चुदवाना पड़ेगा उसे पता नहीं था लेकिन फिर भी उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी और साथ ही दरवाजे के बाहर खड़े विनीत की भी, राहुल की खड़े लंबे मोटे लंड को देखकर विनीत की भी हालत खराब हो जा रही थी उसे राहुल से इस बारे में भी काफी जलन हो रही थी।

राहुल ने झटके से नीलू की स्कर्ट को ऊपर कमर तक चढ़ा दिया और दरवाजे की तरफ देखते हुए जल्दी से नीलू की गुलाबी रंग की पैंटी को भी पकड़ कर नीचे जंघोा तक सरका दिया। राहुल के हाथों से अपनी पैंटी को नीचे सरकावाती हुई नीलु को देखकर नीलु के ऊपर उसे गुस्सा आने लगा। उसे नीलू से भी इस तरह की बेशर्मी की उम्मीद नहीं थी लेकिन वह भी उसकी भाभी की तरह बेशर्म निकल गई थी।

क्या कर रहे हो राहुल रीशेष पूरी होने वाली है क्यों मेरी भी गर्मी को बढ़ा रहे हो।( नीलू का भी बहुत मन था चुदवाने का लेकिन उसे इस बात की फिक्र भी थी की कहीं यह चुदाई का कार्यक्रम पूरा ना हो सका तो वह प्यासी ही रह जाएगी लेकिन उसकी शंका को दूर करते हुए राहुल बोला।)

तुम चिंता मत करो मेरी जान मैं तुम्हें चोद चोदकर तुम्हारी बुर से पानी का झरना बहा दूंगा बस तुम देखती जाओ। ( इतना कहने के साथ ही वह विनीत को चिढ़ाने के लिए अपने लंड को अपनी उंगलियों से पकड़कर ऊपर नीचे करके हिलाते हुए दरवाजे की तरफ दिखाने लगा ,लंड की मोटाई और चौड़ाई देखकर विनीत का भी गला शुखने लगा। तभी राहुल अपने लंडको पकड़ कर लंड के सुपाड़े को नीलू की गांड के नीचे के भाग में उसकी गुलाबी बुर पर टिका दिया। नीलू की बुर इतनी ज्यादा पनीया ई हुई थी कि राहुल को अंदर डालने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी और लंड पहले ही प्रयास में बुर की गहराई नापने लगा। राहुल नीलू की गांड को पकड़कर शुरू से ही जोर जोर से धक्के लगाते हुए चोदना शुरू कर दिया था। हर धक्के के साथ नीलू की सिसकारी निकल जा रही थी। दरवाजे के बाहर खड़ा विनीत यह सब देख कर दंग रह जा रहा था कुछ देर पहले जो नीलू और राहुल कोई समझता में देखकर गुस्से में तमतमाया हुआ था, वही विनीत राहुल की जबरदस्त चुदाईको देखकर मंत्रमुग्ध हो चुका था। बुर और लंड के संगम से उत्पन्न हो रही फच्च फच्च की

आवाज इतनी तेज थी कि कमरे के साथ-साथ दरवाजे के बाहर खड़ा विनीत के कानों में भी साफ साफ सुनाई दे रही थी जिसे सुनकर वीनीत का लंड भी खड़ा हो गया था अपनी स्थिति को जानकर विनीत अपनी ही नजरों में गिरा जा रहा था लेकिन कर भी क्या सकता था कमरे के अंदर का दृश्य नीलू भले ही उसकी होने वाली बीवी थी इतना ज्यादा गर्म नजारा देख कर वीनींत तो क्या उसकी जगह कोई भी होता तो उसका भी हाल वीनीत की तरह ही होता। राहुल बड़े ही तीव्र गति से नीलू की चुदाई कर रहा था और उसकी चुदाई करते हुए बोल रहा था कि।

आहहहहहहहह...नीलु मेरी जान कैसा लग रहा है तुम्हें।

ससससहहहहहहह....राहुल बहुत मजा आ रहा है राहुल बस ऐसे ही चोदते रहो...आहहहहहह....

छोटा तो नहीं पड़ता ना मेरा लंड तुम्हारी बुर के लिए..

.( राहुल तेज धक्के लगाते हुए बोला।)

नहीं मेरी जान ऐसा बिल्कुल भी नहीं है मुझे तो तुम्हारे लंड देखकर कभी-कभी लगता है कि मेरी बुर में जाएगा भी या नहीं।

( नीलू का जवाब सुनकर राहुल बहुत प्रसन्न हुआ क्योंकि वह जानता था कि नीलू का जवाब वीनीत भ ीं सुना होगा और सुनकर जल भून गया होगा। और एैसा था भी नीलू का जवाब सुनकर विनीत शर्म से पानी पानी हो गया था कि तभी रिशेश पूरी होने की घंटी बज गई, घंटी की आवाज सुनते ही राहुल ने धक्कों की गति को और ज्यादा तेज कर दिया जैसे-जैसे धक्के बढ़ते जा रहे हैं वैसे वैसे नीलू की सिसकारी भी बढ़ती जा रही थी। और दो चार धक्कों के बाद ही दोनों भलभला कर झड़ने े लगे। राहुल का काम पूरा हो चुका था उसने अपना आखिरी पत्ता भी वीनीत के सामने खोल दिया था और वीनीत राहुल के इस पत्ते को देखकर ढेर भी हो चुका था। राहुल और नीलू कमरे के बाहर आते इससे पहले ही विनीत अपना टूटा हुआ दिल लेकर वहां से जा चुका था।

 
राहुल के द्वारा एक बार फिर से संतुष्टि भरा संभोग सुख पाकर नीलू अति प्रसन्न हो गई थी। उसे क्या मालूम था कि उसके संभोग का सीधा प्रसारण विनीत देख रहा था वह देख क्या रहा था राहुल उसे दिखा रहा था। राहुल के चेहरे पर भी संतुष्टि भरा अहसास साफ झलक रहा था।

चुदाई की गरमा-गरम संतुष्टि के साथ उसके चेहरे पर विजयी मुस्कान भी तैर रही थी। उसे अपने ऊपर और अपने प्लांट पर पूरा विश्वास था जो कि उसे लगने लगा था कि उसका प्लान पूरी तरह से सफल हो चुका है और ऐसा था भी विनीत की हालत को देख कर यह तय हो चुका था कि राहुल अपने मकसद में कामयाब हो चुका था।

राहुल और नीलू भी अपने क्लास में आ गए राहुल नीलू के साथ जो किया सो किया लेकिन उसे विनीत के सामने प्रदर्शित करना नहीं चाहता था लेकिन वह भी मजबूर हो चुका था वह जानता था कि विनीत उसकी इस चाल से एक दम मात हो जाएगा। राहुल के सामने बड़ी ही संकट की घड़ी थी उसे अपनी मां को ही प्रमुखता देनी थी। राहुल यह अच्छी तरह से जानता था कि नीलू चाहे जितना भी वादे कसमे खा ले लेकिन उसकी शादी राहुल के साथ नहीं हो सकती क्योंकि उसकी मम्मी पापा कभी भी यह नहीं चाहेंगे कि उसकी लड़की ऐसे घर में ब्याह कर जाए जहां उनके खुद का ठिकाना ना हो। देर-सबेर नीलू भी इस वास्तविकता को समझ जाती की उसके मम्मी पापा भी उसकी शादी राहुल के साथ नहीं होने देंगे, कहां वह अमीर घराने की नीलू और कहां राहुल जो ढंग से उसे अपने घर में रख भी नहीं सकता था ।वह ऊन सुख सुविधा मुहैया नहीं करा सकता था जो सुख सुविधा वह अपने घर में भोगती थी।

राहुल कीसी भी हाल मे अपनी मां की ईज्जत को बचाना चाहता था विनीत को उसके गंदे इरादे में कामयाब नहीं होने देना चाहता था बरसों से कमाई हुई इज्जत को वह ऐसे ही गंवा दे ये ऊसके लिए नामुमकीन था। इसलिए उसे अपनी मां की इज्जत और घर की बदनामी से बचाने के लिए ऐसे कठोर कदम उठाएं क्योंकि इसी तरह से ही वीनीत की अकल ठिकाने आ सकती थी, क्योंकि समझाने से वह समझने वाला नहीं था उनका के कामुक बदन का नशा उसके सिर पर सवार हो चुका था इसलिए वह नशा उतारने के लिए यह कदम उठाना राहुल के लिए बेहद जरूरी था। राहुल के लिए यह बर्दाश्त कर पाना बड़ा मुश्किल था कि उसकी मां के संबंध उसके ही दोस्त वीनींत के साथ बन चुके थे । लेकिन किसी तरह से वह इस कड़वे घूंट को पीकर अपने आप को संभाल ले गया था। उसे अपनी मां के इस बात से थोड़ी तसल्ली मिली थी कि जो कुछ भी हुआ था वह अनजाने में हुआ था जिस का पछतावा उसे हो रहा था।

वैसे भी राहुल यह अच्छी तरह से जानता ही था कि उसकी मां बेहद खूबसूरत और खूबसूरत बदन वाली महिला थी जिसके आगे नीलू और विनीत की भाभी उसके पास बराबर भी नहीं थी इसलिए वह अपनी मां से नाराज ना हो करके बल्कि उसे इस मुसीबत से छुटकारा दिलाने के लिए अपनी चहीती नीलू और खूबसूरत विनीत की भाभी के साथ ऐसा खेल खेलना पड़ा।

अलका राहुल की मां ही नहीं बल्कि उसकी सब कुछ उसकी प्रेमिका तक हो चुकी थी। ऐसे में वह अपनी बेहद खूबसूरत बहुत ही कामुक और भरे हुए बदन की हुस्न की मल्लिका अलका को अपनी आंखों के सामने किसी और के हाथों में जाते हुए कैसे देख सकता था इसलिए उसने सारा प्लांन रचाया। और अपने पलान में लगभग कामयाब हो चुका था।

क्लास में छुट्टी होने तक विनीत अपना मुंह लटकाए बैठा रहा उसके गरम-गरम अरमानों पर राहुल ने ठंडा पानी दो डाल दिया था। राहुल अंदर ही अंदर बेहद खुश नजर आ रहा था क्योंकि उसने निश्चित तौर पर अपनी मां को दुष्ट विनीत के हाथों से बचा लिया था। विनीत के मन में ढेर सारे सवाल चल रहे थे जिनका जवाब सिर्फ राहुल ही दे सकता था इसलिए वह राहुल से मिलकर सारी बातें करना चाहता था । उसके मन से अलका का ख्याल लगभग पूरी तरह से निकल चुका था। लेकिन कुछ यादें जो राहुल की मां से जुड़ी हुई थी वह शायद जिंदगी भर उसके जेहन से कभी नहीं मिट पाती। राहुल की मां की खूबसूरत कामुक बदन की कसक उसके तन-बदन में अभी तक झनझनाहट पैदा कर दे रही थी। उसकी मंन की आखिरी इच्छा यही थी कि वह एक बार फिर से राहुल की मां को भोग पाता लेकिन उसकी मन की इच्छा उसके मन में ही दब के रह गई। विनीत के मन की इच्छा लगभग पूरी होने वाली थी अलका भी तैयार हो चुकी थी कि एक बार फिर से विनीत के साथ सोकर शायद वह इस मुसीबत से छुटकारा पाने लेकिन एक मौके पर राहुल ने पूरी बाजी पलट दिया था। विनीत राहुल से चोट खाकर मुंह के बल गिर पड़ा था।ं तभी छुट्टी होने की घंटी बज गई राहुल पहले ही क्लास के बाहर निकल गया पीछे-पीछे विनीत भी क्लास के बाहर आ गया राहुल पैदल ही सड़क पर चला जा रहा था कि पीछे से राहुल उसे आवाज देकर रुकने को कहा। राहुल रुक गया वह देखना चाहता था कि विनीत का मिजाज अभी भी वैसा ही है या बदल गया है।

तूने यह अच्छा नहीं किया राहुल , दोस्त होकर तूने दोस्त के पीठ पर छुरा भोंका है। ( विनीत अपनी हार के कारण बौखलाया हुआ था इसलिए वह गुस्से में राहुल से इस तरह की बातें करता हुआ बोला।)

तेरे मुंह से यह सब बातें अच्छी नहीं लगती वीनीत । तूने भी तो वही किया जो मुझे मजबूरन करना पड़ा। ( राहुल विनीत को जवाब देते हुए बोला।) मैं कभी भी नहीं चाहता था कि मैं ऐसा करूं लेकिन तूने मुझे मजबूर कर दिया है सब करने के लिए।

तू सब कुछ जानते हुए भी कि वह मेरी भाभी है उसके साथ भी तूने गंदा काम किया और तो और यह भी तुझे अच्छी तरह से पता था की नीलू मेरी प्रेमिका है और मेरी होने वाली पत्नी भी फिर भी तूने उसके साथ भी गंदा काम किया।

लेकिन तू भी तो अच्छी तरह से जानता ही था कि जिसके साथ तुने गलत काम किया और जिसके साथ तू अभी भी गलत काम करने के लिए इस कदर पागल हुआ था वह मेरी मां है। ( राहुल की बात सुनकर विनीत के पास कहने के लिए कोई शब्द नहीं बचे फिर भी वह अपने बचाव में बोला।)

तेरी मां भी यही चाहती थी , तेरी मां की ही मंजूरी पाकर हम दोनों आगे बढ़ें।

झूठ बिल्कुल झूठ हरामजादे, वह तो मजबूर थी । तूने उसकी मजबूरी का फायदा उठा कर उसके साथ गलत काम किया और आगे भी यही करना चाहता था। वह तो अच्छा हुआ कि आगे कुछ और गलत होता इससे पहले ही मुझे मेरी मां ने तेरे बारे में सारी सच्चाई बता दी।

( राहुल की बात सुनकर विनीत एकदम से हड़बड़ा गया और शक पकाते हुए बोला।)

ततततत... तू भी तो वही कर रहा है और मुझे इल्जाम देता है।

( राहुल विनीत की यह बात सुनकर हंसने लगा उसे हंसता हुआ देखकर विनीत को अजीब सा लगा लेकिन फिर वह हंसते हुए ही बोला।)

साले तेरी भाभी तो मेरी दीवानी है और तेरी गर्लफ्रेंड नीलू भी मेरी दीवानी है। तो यह जानने के लिए उत्सुक होगा कि यह सब कब से चल रहा है और तो और लड़कियों औरतों से दूर भागने वाला राहुल आज उनके इतने करीब केसे पहुंच गया। और हां जो यह तू मुझे और मेरे परिवार को समाज में बदनाम करने की धमकी देता फिरता है ना मैं चाहता तो ना जाने कब से पूरे स्कूल में तेरे और तेरी भाभी के बीच कैसा रिश्ता है सब कुछ बता देगा तब तु यहां मुंह दिखाने के भी लायक नहीं रह जाता। ( राहुल की बात सुनते ही वीनीत एकदम सन्न हो गया, उसे यह समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी भाभी और उसके बीच क्या चल रहा है यह उसे कैसे पता चल गया। उसका भी खुलासा करते हुए राहुल बोला।) बड़ा दुहाई दे रहा था ना तु कि मेरी भाभी मेरी मां के समान है उसी ने मुझे बचपन से पाल पोस कर बड़ा किया मेरा इतना ज्यादा ख्याल रखती है यह सब तू ही कह रहा था। साले यह सब मुझे भी नहीं पता चलता कि तेरे और तेरे भाभी के बीच में कैसा रिश्ता है अगर मैं उस दिन अपनी इंग्लिश की नोट लेने तेरे घर ना आया होता। तेरे घर पहुंचते ही मैंने देखा कि दरवाजा खुला हुआ था मैं अंदर चला गया और मैंने कमरे में तुझे तेरी भाभी को चोदता पाया। मैं तो यह सब देखकर एकदम दंग रह गया क्योंकि तू अपनी बड़ी भाभी को मां के समान मानता था और तू खुद अपनी मां समान भाभी को चोद रहा था। तेरी नंगी भाभी को तुझसे ही चुदवाते देख कर मुझे बड़ा अजीब लगा। तूने तो मुझे नहीं देखा लेकिन तेरी भाभी मुझे देख ली थी कि मैं खिड़की से सब कुछ देख चुका हूं लेकिन तेरी भाभी बिना शर्माए मुझे देखते हुए जमकर तेरे लंड पर कूदने लगी। मुझसे यह नजारा बर्दाश्त नहीं हो रहा था और मैं वहां से बिना कुछ बोले चला गया। लेकिन तेरी भाभी का नंगा बदन और उसकी मदमस्त कर देने वाली अदा बार बार मेरी आंखो के सामने तैर जा रही थी। मुझसे रहा नहीं गया और मैं फिर से नोट मांगने के बहाने तेरे घर पहुंच गया। ( विनीत राहुल की बातों को बड़े ध्यान से सुन रहा था और उसे गुस्सा भी आ रहा था लेकिन सुनने के सिवा और कुछ कर भी नहीं सकता था। ) तेरे घर पहुंचा तो तू घर पर मौजूद नहीं था, और तेरी भाभी मौका देख कर मुझ ऊकसाने लगी और सच कहूं तो मुझे भी बेहद आनंद आने लगा था तेरी भाभी का मदमस्त बदन देख-देख कर मेरा भी लंड हिचकोले खाने लगा था। ( राहुल की बात सुनकर वीनीत क्रोध से भरा जा रहा था लेकिन कर भी क्या सकता था, राहुल उसको और ज्यादा जलाते हुए अपनी बात को बढ़ाने लगा।)

मुझे तो यकीन ही नहीं आ रहा था कि ऐसा कुछ हो जाएगा तेरी भाभी ने मुझ पर अपने बदन का अपने कामुक हुस्न का ऐसा जाल बिछाया की जो नहीं होना था वही हो गया तेरी भाभी ने मुझसे उस दिन चुदाई का पूरा मजा ली और सही बताऊ तो चुदाई का मजा क्या होता है मैंने भी उसी दिन जाना( राहुल विनीत को और ज्यादा जलाते हुए बोला ।) तेरी भाभी ने मेरा कुंवारा पन उसी दिन तोड़ दि थी।

( राहुल अपने चेहरे पर विजयी मुस्कान बिखेरते हुए बोल रहा था और विनीत उसकी मुस्कुराहट और उसकी बातें सुनकर जलभुन जा रहा था। )

और हां वींनीत मैं नहीं जाता था तेरी भाभी को चोदने बल्की तेरी भाभी खुद मुझे फोन करके जब भी उसका मन मोटा लंबा लंड लेने को करता तो मुझे बुलाती थी। इसलिए उसने देख मुझे (अपनी जेब में हाथ डालकर मोबाइल निकालते हुए) यह उसका मोबाइल भी दी है।

राहुल के हाथ में मोबाइल देखते ही विनीत दंग रह गया। क्योंकि वाकई मे वह उसकी भाभी का ही मोबाइल था। वाह मोबाइल देखते ही उसे झपटने के लिए हाथ बढ़ाते हुए बोला।

यह मोबाइल तो मेरी भाभी का है।

( राहुल ने अपना हाथ पीछे लेते हुए और मुस्कुराते हुए बोला। )

हां

 
राहुल के हाथ में मोबाइल देखते ही विनीत दंग रह गया। क्योंकि वाकई मे वह उसकी भाभी का ही मोबाइल था। वाह मोबाइल देखते ही उसे झपटने के लिए हाथ बढ़ाते हुए बोला।यह मोबाइल तो मेरी भाभी का है।( राहुल ने अपना हाथ पीछे लेते हुए और मुस्कुराते हुए बोला। )

हां, यह मोबाइल तेरी भाभी का ही है और तुझे पता है कि तेरी भाभी ने मुझे यह मोबाइल क्यों दी है।

ताकि जब भी उसका मन चुद़वाने को करें ,अपनी बुर में मोटा लंड लेने को करे तो तुरंत मुझे फोन करके अपने पास बुला सके। और ऐसा होता भी था जब भी उसका मन जमकर चुदाई करवाने के लिए तड़पता था तो वह मुझे फोन करके अपने घर बुला लेती थी और मैं भी उसकी प्यास को बखूबी बुझाता था। क्योंकि जब से उसने अपनी बुर में मेरा मोटा लंबा लंड डलवा कर चुदवाई है तब से तेरा लंड ऊसे छोटा पड़ने लगा है और यह बात तू भी अच्छी तरह से जान ही गया होगा।

( राहुल जानबूझकर उसकी भाभी के बारे में गंदी गंदी बातें करके उसे बता रहा था ताकि विनीत और ज्यादा जले और ऐसा हो भी रहा था विनीत अपनी भाभी के बारे में कानों से तो सुन रहा था लेकिन वह राहुल की सारी बातें सीधा उसके दिल में चोट पहुंचा रही थी। वह खामोश बुत बना राहुल की बातें सुनता रहा।)

विनीत तू नहीं जानता कि तेरी पीठ पीछे मैंने तेरी भाभी के साथ क्या क्या गुल खिलाए हैं , तेरी भाभी तो मुझ पर फिदा हो गई है, दीवानी है मेरीे, जैसा मैं कहूं वैसा वह करती है। उसे तो हर रोज अगर मिले तो मेरा लंड ही अपनी बुर में लेकर दिन रात पड़ी रहे। ( ऐसा कहते हुए राहुल हंसने लगा राहुल के हंसने की आवाज उसके दिल में छुरा भोंक रही थी वह अंदर ही अंदर राहुल से जल भून जा रहा था। उसे इस बात का पूरा मलाल था कि उसकी नाचनीचे यह सब चलता रहा है और उसे इस बात की बिल्कुल भनक तक नहीं लगी। अलका को भोगने की मंशा उसके दिल में ही दब कर रह गई थी। विनीत चाह कर भी अलका की देह लालीत्य को भुला नहीं पा रहा था लेकिन अब अलका को पाने का सारा रास्ता उसके लिए बंद हो चुका था। राहुल उसको गुस्से से देखते हुए फिर बोला।)

नीलू के साथ भी मेरा किस तरह का रिश्ता है यह तो तू आज क्लास में देख कर अच्छी तरह से समझ ही गया होगा। नीलू के साथ भी मेरा सब कुछ हो गया और इस बात की भनक तुझे कानों-कान तक नहीं हुई। जिस तरह से तेरी भाभी मेरी दीवानी हो चुकी है उसी तरह से नीलू भी मेरी दीवानी हो चुकी है। नीलू से मुझे मिलाने की गलती तूने हीं की थी ना तू नीलू से मुझे मिलाया होता और ना नीलु मेरी बाहों में आकर इस तरह से सिमटती। जिस दिन से तूने मुझे नीलू से मिलाया उसी दिन से नीलु मुझे देखते ही मेरी तरफ आकर्षित होने लगी। वह मुझे एक बहाने से घुमाने ले जाती थी सैर सपाटे कराती थी , और एक दिन वह मुझे पढ़ाई की तैयारी के बहाने अपने घर ले गई और उस दिन उसने भी तेरी भाभी की ही तरह अपनी रसीली बुर का स्वाद

जमके उसने मुझे चखाई और एक बार जो ऊसने मेरे

लंड को अपनी बुर मे लेकर चुदवाई , फिर तो वह भी तेरी भाभी की ही तरह मेरे मोटे तगड़े लंड की दीवानी हो गई और कब मुझसे प्यार करने लगी है पता ही नहीं चला। और अब तो हाल यह है कि वह मेरे बिना रह नहीं सकती मेरे खातिर भी तेरे से भी सारे रिश्ते तोड़ लेगी।

अगर मैं कह दूं तो वह मेरे साथ अभी के अभी शादी कर ले और शादी करने के बाद आखिर कब तक मां-बाप नाराज रहेंगे एक ना एक दिन तो अपना ही लेंगे और उसके घर पर उसके बिजनेस पर सब पर मेरा राज होगा। मेरे एक इशारे पर तेरा पत्ता साफ हो जाएगा मैं जानता हूं कि ऊससे शादी करने के बाद तो उसके बिजनेस का मालिक बन जाएगा और यह सपना तू अच्छी तरह से देख रहा है लेकिन तू यह नहीं जानता कि तेरा सारा बना बनाया खेल में चुटकी बजाते ही बिगाड़ सकता हूं ' तेरी पत्नी बनने से पहले ही वह ना जाने कितनी बार मेरे साथ सुहागरात मना चुकी है मैं चाहूं तो उसे तेरी पत्नी बनने से पहले अपनी पत्नी बना लुं। ( राहुल की यह सब बातें सुनकर विनीत के चेहरे पर तो जैसे हवाइयां उड़ने लगी। उसे इसका अंदाजा तक नहीं था कि राहुल की मां के साथ गंदा काम करने की वजह से उसे इतना कुछ भुगतना पड़ेगा। वह तो राहुल के दिमाग से एकदम परेशान हो चुका था राहुल के परिवार पर वह अपना शिकंजा करना चाहता था। वह राहुल के परिवार को बदनामी का डर दिखाकर उसकी मां को चोदना चाहता था उसे देखना चाहता था उसे हर तरह से अपनी बनाकर रखना चाहता था। लेकिन राहुल के दिमाग में और उसकी समझदारी की वजह से विनीत चारों खाने चित हो चुका था ।उसके पास करने के लिए अब कुछ भी नहीं बचा था। विनीत के सारे सपने टूट चुके थे विनीत को इस तरह के हाल में देखकर राहुल मुस्कुरा रहा था और विनीत हैरान परेशान होकर उसके सामने बूत बना खड़ा था। राहुल को उसके परेशान सा चेहरा देखने में बड़ा आनंद मिल रहा था अब जाकर उसके दिल को सुकून मिला था क्योंकि ऐसी ही परेशानी और डर को वह अपनी मां के चेहरे पर देख चुका था इसलिए वही हाल वीनीत का देखकर उसकी खुशी का ठिकाना ना था वह विनीत का हाल देख कर बोला।)

बस यही डर यही परेशानी में तेरे चेहरे पर देखना चाहता था जो कि मैं अपनी मां के चेहरे पर देखते आ रहा था। मैं चाहता तो तुझे सब कुछ अपने मोबाइल पर भी दिखाकर तेरी बोलती बंद कर सकता था ।तेरी शान ठिकाने ला सकता था। लेकिन जो काम तुने मेरी मां के साथ किया था उसकी मजबूरी का फायदा उठाकर तूने जो उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया था। और उसे फिर से भोगने के लिए यह सारा षड्यंत्र रचाया था। इसलिए मुझे तेरी औकात दिखाना जरूरी था इसलिए मैंने तेरी भाभी के साथ रंगरेलिया मनाता हुआ रिकॉर्डिंग की बजाए तुझे उसका सीधा प्रसारण दिखाने का पूरा बंदोबस्त बना लिया था। कल मैं उस स्कूल ना जाकर सीधे तेरे घर चला गया और तेरी भाभी को यह बोला कि तू शाम तक लोटेगा किसी काम से बाहर जा रहा है। तेरी भाभी तो है ही बहुत चुदवासी ,उसे तो मौका मिल गया मुझसे चुदने का। मैं तेरे घर में प्रवेश करते ही दरवाजे को खुला ही छोड़ दिया उसे लोक नहीं मारा बस ऐसे ही बंद कर दिया ताकि तू आराम से कमरे में आ सके। और मैंने हल्की सी खिड़की भी खुद ही छोड़ दिया था कि तू उस खिड़की में से तेरी भाभी और मेरा चुदाई का सीधा प्रसारण अपनी आंखो से देख सके।

और जैसा मैं चाहता था ठीक वैसा ही हुआ मुझे तो स्कूल छूटने तक का ही इंतजार था मुझे मालूम था कि तू घर में घुसते ही अपनी भाभी के कमरे तक जरूर आएगा। और तू आकर सब कुछ अपनी आंखों से देख भी लिया और यही मैं चाहता भी था। जानता है तेरी भाभी कितनी बड़ी चुदवासी है स्कूल छुटने तक मैंने उससे पांच छ बार जमकर चोदा और उसने चुदाई का पूरा लुफ्त उठाई। अपनी भाभी को मेरे से चुदते देख तेरे माथे पर जो परेशानी के पसीने छूट रहे थे तेरे चेहरे पर जो हैरानी छाई हुई थी यही मै तेरे चेहरे पर देखना चाहता था।

( विनीत पूरी तरह से घायल हो चुका था बिना मारपीट के बिना लड़ाई झगड़े की विनीत पूरी तरह से राहुल के सामने पस्त हो चुका था। राहुल अपने चेहरे पर विजई मुस्कान बिखेरते हुए उसे उसकी ही भाभी का मोबाइल दिखाते हुए बोला।)

तेरी भाभी के साथ हो तेरी होने वाली बीवी के साथ मेरे किस तरह के नाजायज संबंध शारीरिक संबंध हे, इसकी सारी रिकॉर्डिंग इस मोबाइल में है तेरे पास तो मेरी मां को बदनाम करने का कोई सबूत भी नहीं था फिर भी हम शरीफ लोग हैं इसलिए सबूत से नहीं बातों से ही हम लोगों को बदनामी का डर पूरी तरह बना रहता है।

आखिर तू चाहता क्या है ? (बहुत देर बाद भी नहीं सोच समझ कर बोला)

तू अब इस लायक भी नहीं रहा कि मैं तुझे आगे क्या करना है इसके लिए बताऊं कुछ भी तो अपना हाल देख कर खुद ही समझ जाना चाहिए कि तुझे अब क्या करना है कैसे करना है। जो तू अपने मन में मेरी मां को पाने का गंदा सपना संजो रखा है । अपना हाल देखकर तुझे यह समझ जाना चाहिए कि अब आगे से किसी अपने सपने के साथ चलना है या नहीं। फिर भी मैं तेरे अच्छे के लिए इतना बता दूं कि आइंदा अगर तू मेरे परिवार को बदनाम करने की या फिर मेरी मां के आसपास भी भटका तुम मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।

और हां मैं चाहूं तो इस रिकॉर्डिंग के जरिए तुझे तेरे परिवार सहित पूरी तरह से बदनाम कर सकता हूं। पूरे समाज में तू और तेरा परिवार कहीं मुंह दिखाने के काबिल भी नहीं रह जाएगा।

( विनीत आंखें नीची करके राहुल की सारी बातें सुने जा रहा था और सुनने के सिवा कुछ कर भी नहीं सकता था राहुल उसे हिदायतें देते हुए धमका रहा था।)

विनीत अगर मैं चाहूं तो इस रिकॉर्डिंग के जरिए आंखें भी तेरी आंखों के सामने ही तेरी भाभी के साथ चुदाई का पूरा सुख ले सकता हूं। और तू मेरा कुछ भी बिगाड़ नहीं सकता और अगर चाहूं तो तेरी होने वाली बीवी नीलू के साथ भी सब कुछ कर सकता हूं और तू कुछ भी नहीं कर सकता। लेकिन मैं अब ऐसा करुंगा नहीं आज आखिरी बार तुझे सबक सिखाने के लिए मुझे यह सब करना पड़ा। और अब से मेरा और तेरा कोई रिश्ता नहीं है और ना ही तेरी भाभी के साथ और ना ही नीलू के साथ आज सब कुछ त्याग रहा हूं। तू अपनी दुनिया में मस्त रह और मैं अपनी दुनिया में।

अगर अभी भी तेरे मन में कोई शंका हो या और कोई षड्यंत्र तेरे मन में बन रहा हो तो वह भी बता देना इसका भी इलाज में अच्छी तरह से कर दूंगा। यह तू अच्छी तरह से समझ लेना।

( इतना कहने के साथ ही राहुल मस्ती में अपने रास्ते पर चल पड़ा विनीत वहीं खड़ा उसे जाते हुए देखता रह गया एक हारे हुए सिपाही की तरह वह मैदान ए जंग में घुटनों के बल बैठा हुआ था। उसके पास कोई रास्ता नहीं था शिवाय राहुल की दी हुई हिदायतो पर कायम रहने के। विनीत भी वही खड़े राहुल को तब तक देखता रहा जब तक की वह उसकी आंखों से ओझल नहीं हो गया इसके बाद वह भी अपने रास्ते पर चल पड़ा।

राहुल अब सुकून की सांस ले रहा था उसने अपनी मां अलका के लिए दो दो औरतों का साथ छोड़ चुका था वह चाहता तो दोनों औरतों के साथ भी अपने संबंधों को कायम रख सकता था क्योंकि उन दोनों के साथ संबंध रखने में भी उसे कोई अड़चन नहीं होती लेकिन वह अब इस दुनिया में वापस नहीं जाना चाहता था। वह अलका से ही बेहद प्यार करता था दो दो औरतों को अलका के लिए त्याग कर देना ईसी से इस बात की साबिती होती थी कि अलका की खूबसूरती उसका भरा हुआ बदन, विनीत की भाभी और नीलू की खूबसूरती पर भारी पड़ रही थी वरना कौन बेवकूफ होगा जो वीनीत की भाभी जैसी मस्त योवन वाली औरत और खूबसूरती की कुतुब मीनार की ऊंचाई को छूती हुई नीलु जेसी लड़की को छोड़ेगा। लेकिन राहुल तीनों औरतों के साथ मजे ले चुका था उसे अच्छी तरह से मालूम था कि तीनों में से कौन सबसे ज्यादा बेहतर है वह अच्छी तरह से जानता था कि ऊसकी मां के मादक बदन के हर एक अंग से मदन रास टपकता था। और राहुल अलका के मदनरस का दीवाना हो चुका था।

राहुल अपने घर नां जा कर इधर-उधर घूमता रहा। उसे शाम होने का इंतजार था। जब शाम ढले लगी पर अंधेरा छाने लगा तो उसे पता चल गया कि उसकी मां घर पर आ चुकी होगी और घर का काम कर रही होगी तब जाकर वह अपने घर की तरफ जाने लगा। घर में प्रवेश करते ही वह सीधा रसोईघर की तरफ गया और जैसे ही दरवाजे पर पहुंचा तो उसकी नजर सीधे अपनी मां पर गई जो कि इस समय भी आटा ही गुंथ रही थी। और आटा गूथते हुए जिस तरह से उसकी भरावदार गांड मटक रही थी। उसे देखते ही ऊसकी पुरानी यादें ताजा हो गई। अपनी मां की मटकती हुई गांड को देख कर उसे अपने ऊपर सब्र नहीं हुआ और वह रसोईघर के अंदर दाखिल हो गया।

 
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