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Adultery गदरायी लड़कियाँ

धन्यवाद दोस्तो

अपडेट शाम को मिलेगा
 
'' मालकिन को कमसीन लड़कियों केकी बुर से लाल पानी निकलते देखने का बड़ा शौक है डरना नहीं जो कहे फौरन करना मजा भी पाओगे

| और रूपया भी,, वह चलते चलते बोला ।।

जीने से होकर वह हमें सेठानी के कमरे के पास ले गया ।। वह मीना की मां थी ।

उसे दो तीन बार देखा था चालिस के उपर की खुबसुरत हैवी चुतड़ वाली मारवाडिन थी ।

दरवाजा बंद था । . ''जाओ भीतर यही कमरा है- और वह चला गया ।

उसने जो बताया था उसे जानकर जहां हमें चुलबुलाहट का अनुभव हो रहा था-वही सेठानी के अनोखे किस्म के शौक पर आश्चर्य भी हो रहा था । | कभी सोचा भी नहीं था कि इस तरह की अयाश औरते होगी-जो कमसिन बुरको चुदती देखने का शौक रखती होगी ।

एक पल बंद दरवाजे से सटा खड़ा रहा फिर दस्तक के साथ-"अंदर आने की आग्या दें- ।। कह जो प्रवेश किया- तो थुलथुले बदन की बड़ी बड़ी चुचियो वाली मोटी मोटी रानों तथा भारी चुतड़ वाली दूध सी सुफेद रंग की सेठानी को पारदर्शी कपड़े के गाउन में तकिये के सहारे आलीशान बेड़ पर लेटे देख- मदहोशी से भर गया''

उसके शरीर पर गाउन के सिवा कोई और वस्त्र नही था ।

एक प्रकार से औरत नंगी दीख रही थी । | वह तिरछी थी इसलिए सुडौल रान और पपीते सी दोनों एक दूसरे पर लदी चुचियों के बड़े बड़े दानों को देख

तथा चिकने चुतड़ और गांड की फाँक को देख पैंट का भार बढ़ने लगा ।। | इस उम्र में भी काफी आकर्षक लग रही थी ।

वो --बैठो इधर ।

मैं पलंग के पास के कीमती चेचर पर सेक्स से भरते हुए बैठा तो सेठानी का चिकना पेट.. नाभी और दोनों रानों के बीच की चिकनाई देख पेंट का लण्ड

एकदम से कड़ा होकर44() वोल्ट का करंट फेकने लगा । । हमें पहली बार किसी औरत का बदन नंगा दिखा था ।

वास्तव में मीना की मम्मी को इस गाउन में लेटा देख और भी अधिक जवान हो उठा ।

| मीना को भूल मैं उस की बड़ी बड़ी चुचियों पर हाथ फेरने को अंदर से तड़पा । |

 
मीना को भूल मैं उस की बड़ी बड़ी चुचियों पर हाथ फेरने को अंदर से तड़पा । |

वह हमको ध्यान से देखती पूछी-- तुम्हारी उम्र क्या है इस समय

'' जी जी इक्कीसवां चल रहा है--

" अरे मास्टर जी घबराओ नहीं.... तुम्हारा डील डौल् गठीला शरीर पहले | दिन देखती ही समझ गई थी कि अब तुम जवान हो रहे हो-""

और चिपकी रानों के बीच जो जगह बनायी-तो उसकी पावरोटी सी चिकनी बुर का उपरी |भाग हमें दिखा ।।

बुर देख मेरे लण्ड में भरपूर ताव आया । लगा कि मीना की मम्मी हमको जान बुझ कर बुर दिखा रही है।

उस समय उसके आलीसान कमरे की दीवार घड़ी पांच बजा रही थी। उसकी चुची के आगे के दोनों दाने सुपारी के आकार को सांवले रंग के थे। उसी अवस्था में हमें अपने औरत पन का नजारा दिखाती उधर उधर की बाते की फिर होंठो को मीचती बोली- ओके तुम अच्छे लग रहे हो और विस्तर पर

झटके के साथ उठ कर मेरी ओर मुंह करके बैठी तो दोनों चूची के सावंले निप्पल्स पुरी तरह गाउन के ऊपर उभरे जिसे देख मेरा नशा और जवान हुआ ।

मुझे दरवान मनोहर की बाते सचं दिख रही थी । वह इस झीने कंपड़े में अपने चिकने बदन को हमें दिखाती हुयी जरा भी शर्मा नहीं रही थी । मैं अपने आप मस्ती से भर कर सेठानी की बात खुशी खुशी मानने को तैयार था । | उसने मीठी नजर से मेरे गुलाबी चेहरे को देखा- और पुनः गाउन में उभरे

दोनों निप्पलो को देखती बोली--इधर पास घिसक के बैठो इतनी दूर नहीं ...मैं बहुत खुश हूँ....पास आओ तुम्हे मैं प्यारकरूँगी .

भले वह हमसे दुगुनी उम्र की थी । पर गाउन से झांकता चिकना मासंल बदन हमको उसके साथ भरपूर मजा लेने को उकसा चुका था ।

सिगनल मेरा अप था । | मै उठा और चेयर को घिसका कर गुदगुदाते मन से पंलग से सट कर ज्यो ही बैठा त्यो ही वह बिना झेंप के अपनी दोनों मासंल चूचियों को उभार गुदाज हाथो से मेरे गुलाबी गाल को सहला कर मुझे एकाएक जन्नत में पहुँचाती बोली- ठीक है पंसद है लो पकड़ो मेरी चुचियों को मुझे तुमसे लव हो गया है।

इसके साथ ही उसने मेरे हाथ को पकड़ दोनों मासंल चुचियों पर जो खींचा तो में जवानी की उमग से भर उसके दांनां निप्पलो के साथ बड़ी चुची को

पकड़ते ही गजब का मजा आया ।। लगा मेरा लण्ड पैंट के बटन को तोड़ तुरंत बाहर आयेगा ।।

 
इसके साथ ही उसने मेरे हाथ को पकड़ दोनों मासंल चुचियों पर जो खींचा तो में जवानी की उमग से भर उसके दांनां निप्पलो के साथ बड़ी चुची को

पकड़ते ही गजब का मजा आया ।। लगा मेरा लण्ड पैंट के बटन को तोड़ बाहर आयेगा ।।

वह दोनों हाथ को मेरे कंधे पर रख कर मेरे गालों को उंगली से कुरेदती सीना उचका कर मासंल चुचियों का मजा देने लगी ।। | मस्ती और मजे के कारण जो झिझक थी अपने आप दूर हो गई . मैं दोनों चूची को गाउन के उपर से मसलते हुये लंड में 44() वोल्ट का करेंट भर भर जवानी की पहली बहार को लेने लगा ।

अब सेठानी चुटकी से मेरे गालों को मसल मसल मेरी आंखों में आंखे डाल डाल मेरी प्यास को बढ़ाने लगी थी । | कमरे में वह मेरे साथ अकेली थी ।

'' और ताकत से मसलो मज़ा आयेगा मेरी बात मान कर चलोगे तो मीना जैसी कच्ची कलियो को तुमसे चुदवा कर मजा दिलवाऊगी... कभी किसी छोकरी को किये हो वह गाल मसलती बोली ।

मैं आदेश का पालन करते हुएउसकी चुची को जारे जोर से मसलने लगा था । | वह हर सांस के साथ मेरे उपर हावी होती जा रही थी । वह |गोरी-गोरी

रानों के बीच एक बार ही दिखी चिकनी पावरोटी को दबाये थी...।।

मैं जवाव देने में शरमाया तो वह हाथ को तपाक से नीचे लाकर मेरे पैंट में उभार को पकड़ पूरे वदन में बिजली दौड़ाती कहीं| "काहे को शरमाते हो

बताओ किसी छोकरी का मजा लूटे हो या नहीं... ।

"जी.. नहीं ....

'' 'मेरी जैसी औरत को चोदे हो कभी| ''

"जी....जी नहीं " उसके मुंह से चोदना शब्द मेरे मन को पागल बना दिया ।

वह पेंट में उभरे लंड को जो उंगली से बार बार दबा रही थी । उससे गजब का मजा आ रहा था ।।

मैं अब उतेजना में अंधा होकर उस अयाश सेठानी की पकड़ में पूरी तरह आ रहा था ।

 


'' मैं समझ गयी थी कि तू अभी कोरा है....चोदा नही है.''...।। इसके साथ उसने उंगली से फुले सुपाड़े को जो मसला तो मैं आनंद से भर दोनों सुपाडी आकार की कड़ी कड़ी घुन्डियों को धीरे धीरे दवाने लगा ।।

कल्पना और सोच से अधिक मजा हमें सेठानी के बदन के साथ आ रहा था और मैं हर पल के साथ उसके माया जाल में फसंता जा रहा था।

"जी ...जी '' मैं आंखों में आंखे डाल सुपाड़ी के आकार की चुची कोदवा लंड को उभारा ।।

हमारे पास शरमाने की ज़रूरत नहीं हमे तुम्हारे जैसे कुआरे जवानले से लव करने में मजा आता है... मेरी चुची छोड़ो औंर लंड पर से हाथ को हटायी । .

मैं चुची से हाथ को अलग किया तो जो लुफ्त आ रहा था वह किरकिरा हो गया ।

तभी वह झटके के साथ पलंग पर से जो उठी तो मैं गोरी गोरी टागों के बीच के चिकने उभार को देख गदगदा गया ।।

उसने बुर को कमसिन छोकरी की तरह चिकना कर लिया था । | मेरी आंखें उसके मासंल चुतड़ पर फिसली गाउन से पूरा बदन नंगा दीख रहा था मैं सेठानी के साथ अपने कोरे जवान घोड़े को सटपट दौड़ा औरत के बदन का पहला मजा लेने को तैयार था । तभी वह रानो को फैला अपनी गुदाज बुर

को सामने कर गाउन को कमर से ऊपर कर मुझे अपनी बुर दिखाने लगी ...

मैं उसकी नंगी बुर को देखने लगा । वह रानों को पूरी तरह फैला चूतड़ को उचका बोली- ;; इसे सहला कर देखो ज़रा .

देख लीडियो सी चिकनी है शरामाआ नहीं....सलहाओ तुमको मजा आएगा हमको तुमसे

"जी जी हाय कितनी प्यारी प्यारी है-और मैंने दायें हाथ से जो सेठानी के बड़े साइज की गुदाज बुर को सलहाना प्रारम्भ किया तो लगा कि मैं| जन्नत में पहुंच गया होऊँ । मुझे लगा कि उसकी कमसीन लड़की की बुर को सहला रहा हूँ। । वास्तव में चुची से ज्यादा मजो बुर पर हाथ फेरने में आ रहा था

। लोगों का कहना सच था ।

 
मैंने गुदाज चूत में उंगली डाली तो वह अपने हाथ कोसर पर फेरती बोली-आज से मैं तुम्हारी हूँ....लूटो मजा--

मैं पहली जवान पुरानी बुर की फाँक को उगली से सहलाते हुये तीनों त्रिलोक का मजा लेने लगा।

आलीसान कमरा तो मेरे लिये जन्नत था ।। | वह एक हाथ से गाउन को कमर के उपर उठाये दूसरे को मेरे वालों में फेरते हुए अपनी बुरं को उभार

उभार कर हमसे उंगली करवा रही थी और हर सांस के साथ जवानी की प्यास बुझाती जा रही थी । |

" कैसी है मेरी बुर ''

'जी.......... ब्यूटिफुल.....

'मजा आ रहा है कि नहीं ''

'जी ..................

''जब कमसिन लड़की का मजा दिलवाऊगी तब कहोगे बस अब छोड़ो

''जी..जी थोड़ा सा और

'रूको अब थोड़ा और इसके साथ वह हमसे अलग हो रानो को आपस में मीचे गाउन को नीचे करती गुलाबी गाल को चुटकी से मसलती पूछी-अब बोली। हमें लव करोगे कि नहीं।

"जी...जी..करूगां -- मैं उसके मासंल बदन की गर्मी पाकर जोश में अंधा हो गया था। पैंट का नाग फनक फनककर हमको अधेड़ सेठानी को कुआरी अनचुदी लौडियां समझाने को विवश कर चुका था ।

मेरा दोस्त मौज मस्ती करने के तौर तरीकों को मुझे अच्छी तरह चुका था बस आये दिन उसकी सीख को-पेक्टिकल कर जवानी की बहार को लेना था ।

कमरे में शांत वातावरण के साथ मदहोशी पैदा करने वाली मीठी मीठी सुगंध नथुनो मे शमा रही थी ।

पार्टनर की सीख से मैं दरार में उंगली चलाते बुर के गुदाज लहसुन को मसला था जिससे सेठानी को विशेष मजा आया था और वह हमें अच्छा खिलाड़ी समझी थी ।

पुनः तकिये के सहारे पहले की तरह रान पर टाग रख दोनों बेलों को मेरी ओर कर एक पल कुछ सोचती सी हमें देखी । | तो दोस्ती हमारी पक्की है ना

''जी...जी मैं सामने से दिख रही चूचियों को गाउन से झाकते देख बोला ।।

 


'' वैसे तुम कहते हो किसी की चोदे नही हो पर बुर के लहसुन को अच्छे खिलाड़ी की तरह मीस कर हमे चोदवाने के लिए गरम कर रहे थे

इसके साथ सेठानी घिसकी...और दायें हाथ को पुन: पैन्ट पर ला उभरे उभार को पकड़ती बोली-चुची भी अच्छे खिलाड़की की तरह मसले।"

लंड दवाने से मज़ा बढ़ा-तो मैं \दोस्तो के सिखाने की बात बताते कहा।

ओह...अब..समझी...इसीलिए तुम मेरी मीना को पढ़ाने आये थे - हमें लगता है कि तुम मेरी लड़की पर हाथ लगा चुके हो|

"जी..जी.. एकदम नहीं..." मैंने घबराते हुए कहा ।

“ठीक है..कोई नहीं...मीना का मजा मैं दिलवाऊंगी..बटन खोलकर अपने इस दोस्त को बाहर करो-देखकर बतादेंगे कि तुमने मजा लिया है या नहीं?" ।

वह औरत हमारी जवानी को ज्वालामुखी की तरह पुरी की पुरी धक चुकी थी ।

मेरा लंड पैंट में लकड़ी का डंडा बना हुआ था ।

इक्कीस साल की उम्र में लंड के ऊपर पीछे की ओर झान्टे उगी हुयी थी अन्दाजन मेरा लंड पाँच छः इंच का लम्बा था ।

मैं लंड को बाहर करने में थोड़ा झेंपा-तो वह अदा के साथ बोली- फिर शरमाया-कायदे से निकालो वरना पटक कर निकालेंगी -

मैं धीरे से लंड को पैन्ट के बाहर निकालने के लिए खड़ा हुआ- तो वह बाहर झट हमको गुदाज वदन से मीचे - मेरे होठों को अपने नरम नरम होटो से चपचप दो बार चूम कर - जन्नत का मजा देती बोली-'रूको डियर बाद में देखेगी -

मैं उसके अंकपास में वंध कर जन्नत ने पहुँच गया था । हमें उससे चिपक कर खड़े होने में मजा आ रहा था।\

 
चिपकन की अवस्था में सेठानी ऑखों मे आँखें डाल बोली-"डियर | किसी को बाहर पता न चले इस काम के लिए मैं हर नई लड़की को चोदने को दूँगी मैं रूपये दूंगी-तुमको मेरी पंसद की मीना की उम्र की उन लड़कियों को चोदना होगा- जिनकी बुर पर बाल नहीं उगे हों- गदराने की ओर बढ़ती

हो और अनचुदी हो हमे सत्तरह अठारह की छोकरियों को तुम्हारे जैसे हट्टे कट्टे नौजवान से चुदवाते देखने का शौक है- समझे -

मेरा लंड उस समय उसकी नाभी में पैंट के कपड़े के साथ दवा हुआ था।

अब जवानी को उसने पूरी तरह से अपनी पकड़ में ले लिया था उसकी मासल चुचियाँ मेरे सीने में लगकर पहली बार औरत की बहार के बारे मे बता बता रही थी । | मनोहर ने जो बताया वह एकदम सही था।

मुझको मोटी-मोटी बाहों के घेरे से अलग कर मेरे चूतड़ पर हाथ फेरती बोली- '' मैं कमसीन लड़कियो से ज़्यादा खिलवाऊंगी.....मेरे पास तुम भैसा

जवानी का मजा पाओगे-जो कभी किसी के साथ नहीं पा सकते हो समझे ''

'जी......जी पर लड़कियां..... । ।

"उसका देखना होगा....इसके साथ साथ अगर हमसे मजा लेना होगा तो में बराबर तैयार रहूँगी- इसके साथ साथ तुम मेरी मीना पर भी हाथ फेर सकते हो

'' धत''

''धत क्यों वह भी तो, सत्रहवाँ पार कर चुकी हैं

'' जो आप कहेगी मैं करूगा '' - मैं गाउन के उपर से उसकी चुची को पकड़ते कहा तो वह क्रिया करवाती बोली '' घबराना नहीं ताकत से दवाकर;; |

'' मैं सब की बुर फड़वा कर समय से जवान करवा दूँगी ''

कसम से अयाश सेठानी की मस्त बातो से जो मजा मुझे आया मैं सबकुछ भूल गया । | मेरी तो किस्मत चमक गई ।

मेरा भाग्य खुल गया । अशोक अब मेरे पीछे छुट गया था।

एक पल मेरे तमतमाये चेहरे की ओर देखते वह मस्ती और अल्हड़ता के साथ मेरे गाल को चुटकी से मीसती बोली- ;; दिल खोल कर यहां जवानी का मजा लो मैं समझ गयी कि तुम किसी को चोदे नहीं हो कुंवारे हो जाओ मीना को पढाओं हाथ लगाओं मजा लो... जवान करो उसकी भी तुम्हार से समझे | "मीना कुछ नहीं कहेगी गदराई है...मेरी ओर से छूट है उसको पढ़ाने के बाद मेरे से मिलना....!

उस समय लौड़ा मेरा ताव से भरा खड़ा था । वह कमरे से बाहर गई । तो उसके गाउन से बाहर झांक रहे गोल मटोल मासंल चुतड़ो की हिलती डुलती

फाँक को देख्न और अधिक उतेजना से भर चला । ।

मैं धधक रहा था । | उसके जाने के बाद चेयर पर बैठ रंगीन ख्यालों में डुबता हुआ हाथ से खड़े लण्ड को दबा दबा कर ढीला करने लगा । | उसकी गुदाज बुर को ही चोदने को मैं मचल गया था ।

अब कच्ची कली के वजाये वह विखरी कली ही मुझे जन्नत दिखा रही थी ।

 
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