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Adultery प्यास बुझाई नौकर से

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रामू से कहीं ज्यादा तो रूबी मजा ले रही थी। लण्ड का चूत के अंदर-बाहर होना वो अच्छी तरह महसूस कर रही थी। एक साइड को चेहरा करके रूबी सिसकियां लेने लगी थी। राम अपने हाथों से रूबी के उभारों के पकड़ लेता है और घुटनों पे रहते हुए ही धीरे-धीरे चोदता रहता है। इधर रूबी की सिसकियां तेज होनी लगती हैं, तो रामू समझ जाता है की रूबी चरमसुख की ओर बढ़ने लगी है। रामू धक्के मारना बंद कर देता है और रूबी की गर्दन को चूम लेता है। रूबी धक्के बंद होने से चकित हो जाती है, और रामू की ओर नीम बेहोशी में देखती है। मानो कह रही हो की ऐसी ही धक्के लगते रहो।

रामू- मेरी रानी को मजा आ रहा है ना?

रूबी- बहुत आ रहा है मेरे राजा।

रामू- तुम्हारे पति ने कभी ऐसा चोदा है क्या?

रूबी- नहीं।

रामू- तुम्हारी चूत के पानी ने मेरे लण्ड को पूरी तरह भिगो दिया है और लण्ड पूरी तरह चमक रहा है।

रूबी- तुमने उसका पानी निकाल दिया है इसलिए।

रामू- दिल कर रहा है ऐसे ही पूरी जिंदगी तुम्हारी चूत में लण्ड पेले रखू और चोदता रहूं।

रूबी- तो चोदो ना... रुक क्यों गये? मैं तो तुम्हारी ही हूँ।

रामू- सिर्फ आज के लिए ही हो। फिर दुबारा पता नहीं समय मिल पाएगा या नहीं?

रूबी- अगर किश्मत में हुआ तो मिल ही जाएगा।

रामू- पर मैं आपके बिना नहीं रह सकता। आप रह सकती हो क्या?

रूबी- नहीं मेरे राजा। पर हम कर भी क्या सकते हैं?

रामू- करने को तो कुछ भी कर सकते हैं। पर आपको ही करना होगा कुछ।

रूबी- हाँ। देखते हैं।

रामू- कुछ तो सोचना पड़ेगा, कोई तरकीब निकालनी पड़ेगी आपको। कुछ करो ना मेरी जान। आपको कभी निराश नहीं करेंगे। इतना चादेंगे की अपनी प्यास बुझ जाएगी।

रूबी- तो अभी तो करो। क्यों तड़पा रहे हो?

रामू रूबी की तड़प देखकर मुश्करा पड़ता है और तीन-चार जोरदार धक्के लगाता है जिससे रूबी पूरी तरह हिल जाती है और उसके उभार ऊपर-नीचे होने लगते हैं। तब राम रूबी की कमर को बाहों में लेकर उसे अपने ऊपर कर लेता है और खुद रूबी के नीचे हो जाता है।

रूबी के लिए यह नया अनभव था। उसके पति ने कभी भी उसको अपने ऊपर नहीं किया था, तो रूबी को नहीं पता था की वो क्या करे। रामू उसकी हालत को समझता हुआ उसकी पूरी नंगी पीठ पे हाथ फिराने लगता है।

रूबी के तन में छींटियां रेंगने लगती हैं। रामू के ऐसा करने से रूबी की कमर अपने आप हिलने लगती है। रामू उसकी उत्तेजना को और बढ़ाने के लिए रूबी के चूतरों को हाथों में ले लेता है और सहलाने लगता है। अब कंट्रोल रूबी के पास था। चूत की प्यास बुझानी उसके हाथ में थी। रामू तो नीचे बस मजे से लेटा हुआ था। रूबी की छातियां रामू की छाती पे रगड़ रही थी और चूतर आगे-पीछे हो रहे थे।
 
इधर रामू के हाथ की उंगलियां रूबी के चूतरों की दरार में घुसकर गाण्ड के छेद के साथ खेल रही थी। रूबी की उत्तेजना और भड़क गई और रूबी लण्ड को पूरा चूत में लिए हुए रामू की जांघों पे बैठ जाती है और फिर धीरे धीरे ऊपर-नीचे होने लगती है।

राम का गरम रोड जैसा लण्ड पूरा अंदर-बाहर होने लगता है। राम अपने हाथों से रूबी की कमर पकड़ लेता है। रूबी का ऊपर-नीचे होना तेज हो गया था और वो चरमसुख की ओर बढ़ने लगी थी। ऊपर-नीचे होने से रूबी के उभार भी उछलने लगते हैं।

रामू अपने हाथों से दोनों उभारों को पकड़ लेता है और मसलने लगता है। रूबी को अब इससे मतलब नहीं था की राम धक्के लगा रहा है या नहीं। उसे तो बस चरमसुख चाहिए था और वो अपनी स्पीड और तेज कर लेती है और बेशर्मों की तरह लण्ड लेने लगती है। उसकी नजर ड्रेसिंग टेबल के शीशे में पड़ती है और खुद को रंडियों की तरह लण्ड लेती देखकर थोड़ी सी शर्मा जाती है। पर उसकी शर्म वासना के आगे टिक नहीं पाती और रूबी अपनी धुन में अपने रास्ते पे ही चलती रहती है।

रामू रूबी की स्पीड देखकर समझ जाता है की वो कभी भी झड़ सकती है और वो भी अपना चूतर उठाकर लण्ड पेलने लगता है। लण्ड के अंदर-बाहर होने से रूबी आहें भरनी लगती है।

रूबी- “आह्ह... आअहह... उफफ्फ... उफफ्फ... चोदो मेरे राज्जा उफफ्फ... मेरी प्यास्स बुझा दो मेरे राजा... आज्ज मेरी जवानी को लूट लो... पेल्ल दो मुझे लन्ड से... उईई मा... फक्क मीईई.. चोद दो... मर गई मैं तो.."

रूबी अब कंट्रोल में नहीं थी। उसके चूतर जब रामू की जांघों से टकराते थे तो ठप-ठप। की आवाज आती थी। रूबी को लगता है जैसे उसके पूरे जिश्म की ताकत उसकी चूत में समा गई हो। उसकी सांसें मानो रुक जाती हैं

और वो अपने हाथों से राम की छाती को जोर से जकड़ लेती है और सिसकती है- "आअहह..."

एक लंबी सी आहह... भरते हुए रूबी लण्ड को चूत में पूरा ले लेती है और रामू की जांघों पे अपने चूतर टिका लेती है और झड़ने लगती है। आँखें बंद किए हये वो चूत के पानी से लण्ड को नहला रही थी। रामू उसकी चूत का फैलना सिकुड़ना अपने लण्ड पे अच्छी तरह महसूस कर रहा था।

इधर रूबी की सांसें नार्मल होने लगती हैं, और वो राम की छाती पे पसर जाती है और उसकी छाती को चूम लेती है। रूबी दूसरी बार झड़ गई थी इस कामक्रीड़ा में। लेकिन रामू अभी एक बार भी नहीं झड़ा था। रामू अपने हाथों से उसके रेशमी बालों से खेलने लगता है। रूबी को उसका ऐसा हाथ फेरना बहुत अच्छा लगता है।

रामू- मेरी जान कैसा लग रहा है?

रूबी- बहुत अच्छा।

राम- पहले कभी दो बार झड़ी हो?

रूबी- नहीं।

रामू- तो बताओ किसका लण्ड तकतवर है? मेरा या तुम्हारे उस पति का?

रूबी- तुम्हारा। तुम अभी भी नहीं झड़े क्या?

रामू- नहीं मेरी जान। मैं तुम्हें खुशी देना चाहता हूँ। तुम्हें भी तो पता चले असली चुदाई क्या होती है?

रूबी- हाँ। सच में ऐसा अनुभव पहले नहीं हुआ कभी भी।

रामू- आज से तुम्हारी चूत मेरे लण्ड की हो गई है।

रूबी- हाँ पूरी तरह। आज से यह तुम्हारी ही है। जैसा दिल आए इसे भोगना।

रामू- बस मेरे लण्ड को प्यार करो, इसकी सेवा करो। यह तुम्हारा पूरा ख्याल रखेगा।

रूबी- तुम कब झड़ोगे? टाइम भी निकला जा रहा है। मुझे डर है उम्मी पापा कहीं आ ना जाएं।

राम- पर अभी तो टाइम है आने में।

रूबी- अरे क्या पता कब आ जाएं। पास ही तो गये हैं।

रामू- तो क्या करें, चोद दे तुम्हें?

रूबी- अभी तक क्या कर रहे थे?
 
राम रूबी को फिर से अपने नीचे लकर लेता है और खुद ऊपर आ जाता है, और रूबी के होंठों को चूमने लगता है। रूबी भी अपने हाथ रामू के सिर के बालों में फेरते हुए उसके होंठों का रसपान करती है। रामू एक हाथ से रूबी के उभारों के साथ खेलने लगता है और उसे उत्तेजित करने लगता है। इसका असर रूबी पे होने लगता है

और हल्की-हल्की सिसकियां लेने लगती है। राम अपने हाथ से जोर से रूबी के उभार पे चिकोटी काट लेता है जिससे रूबी की चीख निकल जाती है।

रूबी- आअहह... धीरेss |

रामू- क्या धीरे। खुद भी तो जोर-जोर से ऊपर-नीचे होकर चुदवा रही थी। मैंने थोड़ा सा जोर से दबा दिया तो चीख निकल गई।

रूबी- मैंने कब चुदवाया? तुमने चोदा।

रामू- अभी तक तो तुम खुद ही मेरे ऊपर आकर खुद को चुदवा रही थी। मैंने तो कुछ किया ही नहीं अभी तक।

रूबी- जब तुम्हारा लण्ड मेरी चूत में चला गया तो चुदाई तो हो ही गई ना। क्या फर्क पड़ता है ऊपर कौन और नीचे कौन?

रामू- हाँ वो तो ठीक है, पर मैंने तो अपना जोर लगाया ही नहीं अभी तक। अभी तो मेरे लण्ड ने तुम्हारी चूत को रगड़ा ही नहीं अच्छे से। तब जाकर काम खतम होगा।

रूबी- अच्छा जी। मेरे राजा काम खतम कब करेगा?

राम- जब मेरी रानी बोलेगी।

रूबी- मैंने कब मना किया है? तुम ही तड़पा रहे हो अपनी रानी को।

रामू- तो फिर चोद देते हैं रानी को। तुम्हारी चूत में अपना वीर्य डालकर तुम्हें पूरी तरह अपनी बना लेते हैं।

रूबी- अरे नहीं, प्लीज अंदर मत झड़ना।

रामू- क्या हुआ?

रूबी- कुछ हो गया तो?

रामू- कुछ नहीं होता। सुरक्षित नहीं है क्या अभी?

रूबी- नहीं वो बात नहीं है, पर फिर भी डर लगता है। बाहर ही झड़ना।

रामू- मेरी रानी मिलन तो तब ही संपूर्ण माना जाता है जब मर्द अपना वीर्य औरत के अंदर उड़ेले। हम तो पूर्ण मिलन चाहते हैं। अपने वीर्य से आपकी चूत की जनम जनम की प्यास बुझाना चाहते हैं।

इधर रूबी पूरी तरह से गरम हो गई थी और अपनी कमर हिलाने लगती है जिससे राम को ग्रीन सिग्नल मिलता है और वो भी अपनी कमर धीरे-धीरे हिलाने लगता है। रूबी को अपने अंदर लण्ड अंदर-बाहर होता महसूस होने लगता है।

चूत ने लण्ड पे पूरी तरह पकड़ बना रखी थी। रूबी अपने हाथ रामू की पीठ पे लेजाकर उसे सहलाने लगती है

और रामू रूबी के होंठों को चूस रहा था। ऊपर से रामू रूबी के गुलाबी होंठों का रसपान कर रहा था और नीचे लण्ड चूत का रसपान कर रहा था। रूबी हल्की-हल्की सिसकियां लेना शुरू कर देती है।

रूबी- “हाँ हाँ हमम्म... ऊह्ह.."

राम- मजा आ रहा है ना?

रूबी- “हाँ। उफफ्फ.."

रामू- कहाँ तक जा रहा है?

रूबी- बहुत अंदर तक।

रामू लण्ड को बाहर निकालकर जोर से धक्का लगाता है और लण्ड पूरा चूत में घुस जाता है।
 
रामू लण्ड को बाहर निकालकर जोर से धक्का लगाता है और लण्ड पूरा चूत में घुस जाता है।

जिससे रूबी पूरी तरह हिल जाती है- “आअहह... कितने बेरहम हो। धीरे से करो ना.."

राम- “रहा नहीं जाता बीच-बीच में। वैसे भी चूत को लण्ड के लिए पूरी तरह तैयार कर रहे हैं। अब तो रोजाना चोदने को मिलेगी..."

रूबी- हँसते हुए- “ऐसे क्यों लगता है? सपने लेना छोड़ दो.."

रामू- तो क्या दुबारा नहीं चुदवाओगी?

रूबी- क्यों? मैं क्य

रामू- क्यों अच्छा नहीं लग रहा क्या?

रूबी- लग रहा है। बहुत अच्छा लग रहा है।

रामू- तो फिर दुबारा चुदवाने से क्यों मना कर रही हो। आजतक तो किसी औरत ने मुझे दुबरा ना नहीं बोला।

रूबी- अच्छा जी... इतना बड़ा लण्ड शायद उन्हें भा गया हो?

राम- “तो मेरी रानी को नहीं भाया?" और जोर का झटका लगाता है।

रूबी- आहह... धीरे।

रामू- बताओ ना... नहीं भाया?

रूबी- बहुत भाया है।

राम- तो फिर? अगली बार के लिए मना क्यों कर रही हो मेरी जान?

रूबी- पता नहीं। शायद वैसे ही।

राम- तो नहीं चाहिए तो छोड़कर चले जाएं ऐसे ही।

रूबी- जा सकते हो?

राम- “आजमा के देख लो...' फिर दोनों एक दूसरे की आँखों में देखते हैं और रामू अपने धक्के लगाना बंद कर देता है पर रूबी अपनी कमर हिलाती रहती है।

कुछ देर बाद रामू उठने की कोशिश करता है और रूबी उसकी दोनों बाहों को पकड़ लेती है।

रामू- क्या हुआ? अभी तो बोलती थी के दुबारा नहीं करेंगे।

रूबी- मजाक कर रही थी बाबा।

रामू- तो फिर क्या चाहती हो?
 
रूबी- बस यही की मुझे सारी उमर बस ऐसे ही चोदते रहो। मेरी चूत जो तुम्हारे लण्ड के लिए इतने दिनों से तड़प रही थी, उसे शांत कर दो। इस सुखी जमीन को अपने पानी से तरबबतर कर दो। हमें औरत होने का असली मतलब समझाओ।

राम फिर से जोर का धक्का लगाता है तो रूबी की चीख निकल जाती है। रूबी उसके होंठों को चूमने लगती है।

राम- कभी छोड़कर तो नहीं जाओगी?

रूबी- मैं क्यों अपने राजा को छोड़ने लगी?

राम- सच में बताओ जितना आनंद तुम्हें आज आ रहा है कभी मालिक के साथ आया?

रूबी- नहीं कभी नहीं। तुम तो झड़ने का नाम ही नहीं ले रहे हो। बुरी तरह से चूत को फैला रखा है तुम्हारे लण्ड ने। मैं तो तुम्हारी दीवानी

राम अपने धक्के थोड़े से तेज कर देता है। रूबी अपनी बाहों से उसकी गर्दन पे घेरा बना लेती है और नीचे से कमर हिलाने लगती है। अब चत थोड़ी सी खल गई थी और राम का लण्ड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। कुछ देर बाद रूबी अपनी टांगों से राम की कमर को घेरा बना लेती है और चूतर उठा-उठा के लण्ड चूत में लेने लगती है। अपनी बाहें रामू के गर्दन में डाले रूबी खूबसूरत पलों का मजा ले रही थी।

राम अपनी स्पीड थोड़ी सी और बढ़ा लेता है। उसका लण्ड जब चूत से बाहर निकलकर अंदर जाता है तो रूबी की चूत के पानी से भीगे लण्ड की टक्कर से फच-फच। जैसी आवाजें आने लगती है।

रामू रूबी को छेड़ते हुए- “यह आवाजें कहां से आ रही हैं?"

रूबी- मेरी उससे।

रामू- किससे?

रूबी- चूत से?

राम- वो क्यों ऐसी आवाजें निकाल रही है?

रूबी- बेचारी को इतने अच्छे से तुम्हारा लण्ड रगड़ मार रहा है की उसका पानी निकल रहा है। जब तुम्हारा लण्ड उस पानी में गोता लगाता है तो टकराने से आवाज निकलती है।

रामू- मेरी रानी तो समझदार हो गई।

रूबी- तुमने बना दिया मेरे रज्जा उफफ्फ... तुम सच में ही एक असली मर्द हो। पूरी जिंदगी मुझे ऐसे ही चोदते रहना। उफफ्फ... मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकती हूँ। मैं अपनी जवानी का पूरा रस तुम्हें पिला दूंगी। बस सिर्फ मेरे बने रहना और तुम जैसा चाहोगे जहां चाहोगे मैं चुदवाऊँगी। बस मेरी इस प्यास को बुझा दो.."

रामू देखता है की रूबी धीरे-धीरे फिर से चरमसुख की ओर बढ़ रही थी। वो भी अब स्पीड में आ चुका था। रामू अब रूबी की टांगों को अपने कंधों पे रख लेता है। अब रूबी के चूतर हवा में उठ चुके थे। रामू का लण्ड जब पूरा चूत में घुसता तो लण्ड की गोलियां रूबी के चूतरों से सट जाती थी। रामू आगे झुकता है जिससे उसका चेहरा रूबी के चेहरे के पास आ जाता है। रूबी इस पोजीशन में रामू के पूरे कंट्रोल में थी। वो अब बिल्कुल भी नहीं हिल पा रही थी। अगर उसका शरीर हिलता भी था तो वो राम के जोरदार झटकों के कारण ही हिलता था। रूबी को लग रहा था जैसे लण्ड उसकी बच्चेदानी से टकरा रहा हो।
 
इधर रूबी की आंहों से पूरा कमरा भर जाता है। वो भी चरमसुख के बहुत करीब आ चुकी थी। इधर रामू भी समझ चुका था की रूबी अब काफी करीब थी। रूबी की हालत देखकर रामू अपने धक्के और तेज कर देता है। वो खुद भी रूबी के साथ ही झड़ना चाहता था ताकी उन दोनों का संपूर्ण मिलन हो सके। रूबी की सिसकियों से पूरा घर गूंजने लगा था।

रूबी- "आअहह... आअहह... और जोर से मेरे रज्जा ... आई लव यू उफफ्फ... चोद दो अपनी रानी को... और तेज

ओह माँ उफफ्फ... आहह... बहुत मजा आ रहा है उफफ्फ... उफफ्फ..."

राम- “आहह... आअहह.."

रामू के धक्कों से रूबी बुरी तरह हिल रही थी। उसके अंदर एक ज्वालामुखी फटने को तैयार था, और अचानक वो फूट गया। रूबी की चूत पानी छोड़ने लगती है। रूबी का पूरा जिश्म अकड़ जाता है। रूबी आँखें बंद किए अपने चरमसुख का पूरा आनंद लेती है। चूत तो मानो पानी छोड़े जा रही थी और रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। कुछ देर बाद रूबी की सांसें नार्मल होने लगती हैं, और जिश्म ढीला पड़ने लगता है।

इधर रामू जो की झड़ने के कगार पे था, चार-पाँच जोरदार धक्के लगाता है और फिर उसके लण्ड से पिचकारी निकलती है। रामू आखिरी धक्के के साथ अपने को रूबी के उठे हुये चूतरों से चिपका लेता है। लण्ड गाढ़ा वीर्य चूत में उगलने लगता है। रामू एक बार फिर से धक्का लगाता है तो लण्ड और वीर्य चूत में उड़ेल देता है। रामू दो-चार और धक्के लगाता है और वीर्य चूत में भरने लगता है। रूबी को रामू का झड़ना अपनी चूत में महसूस होता है और वो अपनी आँखें खोलकर रामू को देखती है जो की आँखें बंद किए हए झड़ रहा था।

आखीरकार, रूबी की चूत को रामू ने अपने पानी से सींच दिया था। रामू अब ढीला पड़ जाता है और रूबी के ऊपर लेट जाता है, और उसका चेहरा रूबी के चेहरे के एक साइड में तकिये में घुस जाता है। दोनों अपनी सांसें कंट्रोल में करने की कोशिश करने लगते हैं। दोनों जने इस लंबी चुदाई से बुरी तरह थक गये थे। कुछ देर बाद रामू अपना चेहरे उठाकर रूबी की आँखों में देखता है।

रूबी चेहरा उठाकर उसके होंठों को चूम लेती है। यह चुंबन रूबी की संतुष्टि का प्रतीक था। रामू अब उठ जाता है

और बेड से उतर जाता है। इधर रूबी तीन बार झड़ने से बुरी तरह थक गई थी और ऐसे ही लेटी रहती है। रामू उसकी हालत समझ जाता है और उसके ऊपर कम्बल दडाल देता है और खुद रूबी के कमरे के बाथरूम में गरम पानी से नहाने लगता है। कुछ देर बाद वो बाथरूम से निकलता है और रूबी को देखता है जो की अभी भी लेटी हुई थी। शायद चुदाई की थकावट में नींद में चली गई थी। रामू उसके कमरे से विजयी मुश्कान लेता हुआ अपने कमरे में चला जाता है।

*****

*****
 
अगले दिन रूबी रामू से पूरा दिन नजरें नहीं मिला पाती। जो सुख रामू ने उसे दिया था लखविंदर से कभी वैसा सुख नहीं मिल पाया था। संचमुच औरत क्या होती है रामू से ही उसे पता चला था। दोनों को सिर्फ रात में ही बात करने का मौका मिलता है। एक दूसरे के प्यार की कसमें खाते दोनों दुबारा मिलने के लिए तड़पने लगते हैं। पर किश्मत उनको दूसरा मौका नहीं दे रही थी।

रूबी जो के एक बार रामू का लण्ड भोग चुकी थी, दोबारा से मिलने के लिए बुरी तरह तड़प रही थी। पर उसके हाथ कुछ भी नहीं था। पता नहीं दुबारा चूत को कैसे रामू का लण्ड नसीब हो पाएगा उसको। दोनों को बस फोन से ही काम चलना पड़ रहा था।

जब दिल में कोई चाह हो तो रास्ता भी बन जाता है। रामू के प्यार में तड़प रही रूबी को भी अचानक एक रास्ता दिखाई देता है, जिससे उसे राम को पाने के लिए तड़पना नहीं पड़ेगा। अब उसे अपने प्लान को इंप्लिमेंट करने के लिए बस सास ससुर को मनाना होगा। रूबी पहले लखविंदर से बात करके उसकी सहमति लेना चाहती थी। अगर लखविंदर मान जाता है तो फिर काम आसान हो जाएगा।

तगड़े लण्ड को भोगकर रूबी उसकी दीवानी हो गई थी। वो खुद ही किसी तरह रामू से चुदवाने के लिए प्लान बनाने लगी थी। रामू ने सच ही बोला था की अगर वो एक बार उसके नीचे लेट गई और चुदवा लिया तो दुबारा खुद ही छुदवाने के लिए आएगी। रामू की बात बिल्कुल सच होने जा रही थी। अगले दिन लखविंदर का फोन आता है।

रूबी- हेलो।

लखविंदर- अरे मेरी जान क्या कर रही हो?

रूबी- कुछ नहीं बस टीवी देख रही हूँ।

लखविंदर- मैंने सोचा मुझे याद कर रही होगी।

रूबी- अरे याद तो उनको करते हैं, जो दूर हों। आप तो हमेशा मेरे दिल के करीब ही रहते हैं।

लखविंदर- अच्छा जी। पर हम तो आपको याद ही करते रहते हैं।

रूबी- क्या याद करते हो?

लखविंदर- बस आपके बारे में सोचते रहते हैं की कब छुट्टी मिलेगी और आपसे मिलेंगे और प्यार करेंगे।

रूबी- अच्छा जी?

लखविंदर- सच में तुम्हारे बिना दिल नहीं लगता। बहुत तड़प रहे हैं आपसे मिलने के लिए।

रूबी- तो छुट्टी ले लो और आ जाओ।

लखविंदर- यार छुट्टी का तो पंगा है। मिलती नहीं इतनी जल्दी।

रूबी- तो फिर ऐसी ही तड़पते रहो।

लखविंदर- "जान तुम्हें प्यार करने का बहुत दिल कर रहा है। अगर काम की मजबूरी ना हो तो तुम्हें छोड़कर कभी ना जाऊँ..."

रूबी- अच्छा वो सब छोड़ो, मैंने एक बात करनी है आपसे।

लखविंदर- बोलीए जनाब।
 
रूबी- मैं सोच रही थी की सदियों में मैं और मम्मीजी पिछले पार्क में धूप में बैठते हैं, तो हमें घर के अगले दरवाजे से जाना पड़ता है। और पार्क तो हमारे कमरे के पीछे है बिल्कुल। तो मैं सोच रही थी के हमारे कमरे और प्रीति के कमरे के बीच जो छोटी सी गली है, वहां से अगर दरवाजा निकाला जाए तो हमें आसान रहेगा और घूमकर नहीं जाना पड़ेगा।

लखविंदर- बस इतनी सी बात। मैं पापा से बात कर लेता हूँ।

रूबी- पक्का ?

लखविंदर- अरे मेरी जान पक्का हो जाएगा। अब किस दो पहले।

रूबी जो की अंदर से खुश थी होंठों की किस देती है- “मुआअहह.."

लखविंदर- लव यू बेबी।

रूबी- लव यू डियर।

फिर दोनों कुछ देर और बातें करते रहते हैं। रूबी खुश थी की लखविंदर झट से ही मान गया। अब कोई इश्यू नहीं होगा और पापा को भी लखविंदर खुद ही मना लेगा। मेरा काम तो आसानी से बन गया। बस पापा मान जाएं। बस एक बार दरवाजा निकल आए तो मैं रात को रामू से मिल सकूँगी। वो दिन गुजर जाता है और रात को खाने के टाइम सभी बैठे खाना खा रहे होते हैं।

हरदयाल- बहू, लखविंदर का फोन आया था। वो बोल रहा था की तुम्हारे कमरे के साथ दरवाजा निकालना है, जिससे तुम।हे और तुम्हारी सासू माँ को घूमकर ना जाना पड़े पिछली साइड.."

रूबी- जी पापा। घूमकर जाना पड़ता है तो अच्छा नहीं लगता। ऐसे सीधे ही पीछे बैठ सकते हैं, आराम रहेगा।

कमलजीत- हाँ अगर ऐसा हो जाता है तो ठीक ही रहेगा। हमें इतना घूमकर पीछे धूप में बैठने के लिए नहीं जाना पड़ेगा।

हरदयाल- जब घर बनाया था मैंने तो तुम्हें बोला ही था की इस साइड भी दरवाजा रख लेते हैं, तुमने ही मना किया था।

कमलजीत- अरे तब बात कुछ और थी। मुझे क्या पता था की सर्दियों में पूरा दिन हम पीछे ही काटेंगे।

हरदयाल- ठीक है मैं देखता हूँ।

रूबी- ठीक है पापा।

हरदयाल गाँव के आदमी को बोलता है, जो लक्कड़ का काम करते हैं। वो कल आ जाएगा उससे बात कर लेना।

रूबी- जी।

रूबी अब फूले नहीं समा रही थी। उसकी मन की इच्छा पूरी होने वाली थी। बस कुछ दिन और। फिर उसे रामू से मिलने में कोई प्राब्लम नहीं होने वाली थी। रात को सोते टाइम रूबी और राम फिर से बातें करते हैं।

रूबी- मेरे पास तुम्हारे लिए साइज है।

राम- वो क्या होता है?

रूबी हँसते हुए- “कुछ नहीं बस कुछ दिन बाद पता चलेगा मैं क्या बोल रही थी?"

राम- अरे बताओ ना मेरी जान।

रूबी- बस खुद ही देख लेना कुछ दिन बाद।

रामू- मैंने क्या देखना। मैं तो सिर्फ आपको अपने सामने पूरी तरह नंगी देखना चाहता हूँ।

रूबी- अच्छा जी। इतनी तड़प?

खुद भी तो तड़प रही हो।

रूबी- बस कुछ दिन और मेरे राजा फिर शायद हमारी किश्मत में मिलना लिखा हो।

रामू को रूबी की बातों से कुछ उम्मीद बनती लगती है। रामू बोला- “ऐसा क्या हुआ जो आपको लगता है की दुबारा से हम दोनों मिल पाएंगे?"

रूबी- पागल, वही तो बोल रही हूँ की कुछ दिन इंतेजार करो शायद हमारी जिंदगी में एक दूसरे का प्रेम लिखा हो।

राम- सच में रूबी जी? आपसे मिलने के लिए तड़प रहा हैं। आपको अपनी बाहों में भरके प्रेम करना चाहता हूँ।

रूबी- रामू जी धैर्य रखो। जो किश्मत में होगा वो मिल जाएगा।

रामू- “आपकी बातों से लगता है की आने वाले दिनों में कुछ तो अच्छा होने वाला है.." और हँस देता है।

रूबी- हँस क्यों रहे हो?

रामू- बस आपके ऊपर।

रूबी- क्यों?

राम- आपकी बातों से लगता है की आपने कोई ना कोई तरकीब निकाल ली होगी मिलने के लिए।

रूबी हँसती है।

रामू- बताओ ना?

रूबी- हाँ कुछ ऐसा ही समझो की मिल सकते हैं।

रामू खुश हो जाता है- “कब, कैसे, कितना टाइम मिल पाएंगे? मालिक मालेकिन कही जा रहे हैं?

रूबी- धीरे-धीरे इतने सवाल इकट्ठे ही पूछ लोगे?

रामू- “बताओ ना मेरी रानी?” और रूबी को दुबारा भोगने की सोचते ही रामू का लण्ड टाइट होने लगता है।

रूबी- जल्द ही। मम्मी पापा कही नहीं जा रहे।

रामू- तो अगर कहीं नहीं जा रहे तो कैसे मिलेंगे उनके होते हए? अगर मौका मिलता भी है तो कितना टाइम मिल सकेंगे।

रूबी- मिल सकेंगे।

राम- कितना टाइम?

रूबी- जितना तुम चाहो।

रामू- मुझे तो तुम्हें अच्छे से चोदने का टाइम चाहिए।

रूबी- “धत्.."

राम- “धत्... क्या। बताओ ना जितना मैं चाह मिल सकेगा टाइम?"

रूबी- शायद मिल जाए।

फिर दोनों ऐसे ही बातें करते रहे। रात को भी रामू यही सोचते-सोचते हुए सो जाता है की पता नहीं रूबी किस टाइम की बात कर रही थी। रूबी भी अब जल्दी से अगले दिन का इंतजार करते-करते सो गई।
 
अगले दिन दोपहर में कोई गाँव का आदमी जो की दरवाजे खिड़कियों का काम करता है, हरदयाल के घर आ जाता है। हरदयाल किसी काम के लिए शहर गया हआ था। तो बात अब सिर्फ रूबी और कमलजीत को ही करनी थी। बातों-बातों में पता चलता है की दरवाजा बनाने और फिट करने में चार दिन लगेंगे। रूबी को बस अब दिन ही गिनने थे और उसके बाद उसे और तड़पने की जरूरत नहीं पड़नी थी।

रात को फिर से राम रूबी से जानने की कोशिश करता है। पर रूबी फिर उसे बातों में ही उलझा लेती है और उसे दरवाजा निकालने के बारे में नहीं बताती। कुछ दिन निकल जाते हैं, और आखीरकार, सटर्डे के दिन दरवाजा अपनी जगह फिट हो जाता है। उस दिन दीवार तोड़ते हुसे दरवाजा फिट करता देखकर रामू को सारी गेम समझ में आ जाती है। आज तो रूबी के पैर जमीन पे नहीं टिक रहे थे। उधर राम भी समझ जाता है की जिस तरह रूबी उसके लिए तड़प रही है वो आज ही उसे भोग पाएगा। दोनों से रहा नहीं जा रहा था।

रात को राम रूबी के फोन पे काल करता है। पर रूबी फोन बार-बार काटती जाती है। राम समझ नहीं पाता की वो ऐसा क्यों कर रही है? आखीरकार, रूबी अपने कमरे में आ जाती है और राम का फोन पिक करती है।

राम- रूबी जी अपने तो हमें चकित कर दिया। पर आप फोन क्यों काट रहे हो?

रूबी- अरे मैं मम्मी पापा के साथ टीवी देख रही थी।

रामू- ठीक है मेरी जान। तो?

रूबी- तो क्या?

रामू- दरवाजा कब खालोगे?

रूबी- क्यों वो क्यों खोलना है?

रामू- दरवाजा खालोगे तभी तो अंदर आ पाऊँगा।

रूबी- नहीं रामू तुम अंदर नहीं आओगे मम्मी पापा यहां पे हैं। अगर उन्होंने हमारी बातें सुन ली तो मुश्किल हो जाएगी।

राम- तो?

रूबी- तो क्या?

रामू- आप आओगे?

रूबी चुप रहती है।

रामू- बताओ ना आप आओगे?

रूबी- पता नहीं देखती हूँ।

कुछ देर बातें करने के बाद दोनों घरवालों के सोने का इंतेजार करते हैं। रूबी को इंतेजार था की कब मम्मी पापा टीवी देखना छोड़ें और सो जाएं। उनके सोने के बाद ही वो कुछ कर पाएगी।

इधर राम अपने कमरे बैठा इस बात से अंजान था की घर वाले सोए हैं या नहीं। वो बार-बार फोन करके रूबी से बात करता है। पर अभी हरदयाल सोया नहीं था, और टीवी देख रहा था। कुछ देर बाद आखीरकार, हरदयाल टीवी बंद करके अपने कमरे में चला जाता है और पूरे घर की लाइटें आफ हो जाती हैं।

रामू यह सब देखकर खुश हो जाता है। अब कुछ देर का इंतेजार और वो रूबी को अपने सामने पाएगा। लेकिन आधा घंटा बीत गया, रूबी का नाम निशान नहीं। वो बार-बार फोन करता है पर रूबी उसे धैर्य रखने को बोलती है। रूबी असल में तसल्ली कर लेना चाहती थी की सास ससुर दोनों गहरी नींद में सो जाएं, तभी वो कोई रिस्क ले। इधर राम का बुरा हाल था। अपने कम्बल में बैठा टाइट लण्ड को सहला रहा था। लण्ड था की बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था।

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रात के 12:30 का टाइम और रूबी तसल्ली करके धीरे से पीछे का दरवाजा खोलती है और धीरे-धीरे रात के घने अंधेरे में रामू के कमरे की तरफ बढ़ती है। उसका दिल रात की शांति में जोर-जोर से धड़क रहा था और वो उसकी आवाज भी सुन सकती थी। रामू के कमरे के पास आकर वो दरवाजे को धकेलती है, तो दरवाजा खुल जाता है।

दरवाजा खुलने की आहट सुनकर रामू दरवाजे की तरफ देखता है तो अपनी हसीना को सामने पाता है। रूबी कमरे में एंटर करते ही कमरे की लाइट आफ कर देती है। पूरे कमरे में अंधेरा पसर जाता है। रामू अपनी चारपाई से उठकर खड़ा हो जाता है और रूबी को रामू के पैरों की आहट सुनाई पड़ती है। रामू रूबी के पास आकर रूबी को कंधों से पकड़ लेता है।

रामू- बहुत तड़पया है आपने मुझे।

रूबी शर्माती हुई बिना कुछ बोले खड़ी रहती है।

राम- “अपने लाइट क्यों बंद कर दी? मैं आपको कैसे देख पाऊँगा। आपके हसीन खूबसूरत चेहरे के दीदार के लिए मेरी आँखें तरस गई हैं..” कहकर रामू रूबी के कंधों को छोड़कर लाइट ओन करने के लिए बढ़ता है और तभी रूबी उसका हाथ पकड़कर रोक लेती है- “नहीं.."

रामू- क्या हुआ मेरी जान? अब तो हम सिर्फ दोनों ही हैं इस कमरे में। पूरी दुनियां नींद की आगोश में है।

रूबी- नहीं मुझे डर लग रहा है। अगर कहीं घर वाले जाग गये और उन्हें पता चल गया तो?

रामू रूबी की हालत समझता है। आज पहली बार चोरी छिपे है तो थोड़ा घबराएगी ही। बस कुछ दिनों में पूरी तरह डर खतम हो जाएगा रूबी का।

रामू- ठीक है मेरी जान जैसे तुम्हें ठीक लगे।

रामू रूबी को अपनी बलिष्ट बाहों में ले लेता है। रूबी भी अपनी बाहों से राम की कमर के इर्द-गिर्द घेरा बना लेती है और दोनों ठंड में एक दूसरे के जिस्मों की गर्मी का आदान प्रदान करने लगते हैं। दोनों एक दूसरे से ऐसे चिपके हए थे, मानो बरसों बाद दो प्रेम करने वाले मिल रहे थे।
 
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