‘’और जोर से खींचो.. दांतों से कुचलो। तकलीफ भी होती है तो होने दो। यह दर्द भी मुझे कई दिनों तक इस मजे को याद रखने में मददगार होगा।''
उसकी ख्वाहिश के मुताबिक मैं थोड़े जोर से उसके चूचुकों को खींचने लगा। बीच-बीच में दांतों से हल्के-हल्के कुचलता और फिर उस पर गीली जीभ रोल करके उस तकलीफ को भरने की कोशिश करता।
काफी देर एक चूचुक के साथ खेल चुका तो उसने दूसरा मेरे मुंह में दे दिया और खुद मेरे सर को सहलाती, आंखें बंद किये हौले-हौले सिसकारती रही। फिर मेरे मुंह से अपने चूचुक को निकालती हुई नीचे हुई और मेरे होंठों पर अपने होंठ टिका दिये और उन्हें चूसने लगी।मुझे उसके होंठों का स्वागत करने में देर नहीं लगी और मैं दुगने जोश से उसके होंठों को चूसने लगा। बीच में कहीं वह मेरे मुंह में जुबान घुसेड़ देती तो कहीं मैं अपनी जीभ उसके मुंह में घुसा देता।
अचानक सेठानी ने मुझे अपने से दूर किया और बोली
" अच्छा बाबा अच्छा....मेरी भी चोंदना ... अब उठो... और फ्रेश होकर-नाश्ता करो और जाओ फिर रात को दस से पहले आ जाना--तुम्हारे लिये
छोकरी बुला रही हूँ...आज हमें उसकी जवान कर दिखाओ-"
“जी...जी..." लौड़ा कस गया था। अब मैं अपने भाग्य पर फूले नहीं समा रहा था । नाश्ता करने के बाद
मैने, कहा-“अब कल ही जाउन्गा....।"
'
'' ठीक है फिर तब तक आराम कर लो '' सेठानी बोली
उस समय संध्या के साढे सात बज रहे थे ।
वह मेरे जवान लंड से चुदवा कर थक गई थी पर मैं पुन: जवानी की उमंग से भर गया था ।
"तुम्हें दिक्कत तो नहीं होगी-" वह नग्न अवस्था मे आलीशान विस्तर पर मेरी ओर करवट बदल कर पूछी,
“जी,...जी.....नहीं...." ' मेंने उतारेगये कपड़ो को पहन...अपने को ठीक-ठाक करते हुए कहा । उसने अपनी हसीन छोकरी को आवाज़ दी । वह आई-तो उसके लूटे गये बदन की मस्ती से लंड थोड़ा और कसा ।
मीना अपनी नंगी माँ को देख-गुलाबी हो चहक के साथ बोली- '' चलिए सर '' वह अभी उसी शर्ट और स्कर्ट में थी ।।