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Adultery गदरायी लड़कियाँ

“अच्छा अब जो करना हो जल्दी कर लो बहुत देर हो गयी वैसे भी; मीना ना आ जाए यहाँ पर!” सेठानी व्यग्रता से बोली.

“अरे सेठानी जी टेंशन न लीजिए अब मैं इसकी बुर मे पेलने वाला हूँ '' मैंने कहा.

मैंने पोजीशन संभाल कर सुपाडे को गुलाबी छेद पर लगाया और दोनों संतरों को चमक कर दबाते जो ताकत से लंड पेला ...तो छोकरी हाय..हाय कर सेठानी की ओर देखने लगीं ।

पर हाय री मेरी किस्मत लंड उसकी संकरी चूत में नही घुस पाया और और साइड मे फिसल गया

" तुम अच्छे से इसकी बुर में पेलो कुआरी है...पहली पहली बार ऐसा होता है...और एक बार जब बुर मे चला जाता है है तो बड़ा मज़ा आता है -" और हाथ से छोकरी को दवा ...उसे घूर कर देखी ।..

मैने उसकी टांगें उठा कर घुटने मोड़ दिए और लंड को उसकी चूत में चार पांच बार स्वाइप किया और उसके दाने पर लंड घिसा जिससे मस्तानी छोकरी की मुनिया झनझना गयी और आनन्द भरी किलकारी उसके मुंह से निकल पड़ी. उसकी चूत का छेद स्वयमेव सांस लेता, कम्पन सा करता दिखाई दे रहा था.

अब मैंने अपने लंड को जन्नत का दरवाजा दिखाया और उसे एक हाथ से दबा लिया ताकि वो फिसले न; फिर मैंने गदराई लड़की की आंखों में झांका. डर और आशंका की परछाईयाँ वहां तैर रहीं थीं.

, तैयार हो जाओ ?” मैने जोश मे आते हुए कहा

“मेरा पहली पहली बार है मालकिन !” वो बोली.

“बस थोड़ा सा चुभेगा; सह लेना. आवाज नहीं निकालना. ठीक है?”

उसने सहमति में सिर हिलाया और अपना निचला होंठ दांतों से दबा लिया.

 
मैंने लंड को हल्का सा चूत पर दबाया और कमर को जरा सा पीछे करके फिर पूरी ताकत से लंड उसकी धधकती चूत में धकेल दिया. मैंने सुपाड़े को बुर में घुसेड़ने के लिये जो धक्का मारा तो सुपाड़ा कच से बुर में गया ।

छोकरी के मुंह से घुटी घुटी सी आवाज निकली लेकिन उसने अपनी बहादुरी का परिचय दिया और लंड का पहला वार झेल गयी अपनी चूत में. फिर मैंने एक बार और उसे अच्छे से अपनी ग्रिप में लिया और एक धक्का और … इस बार पूरा लंड जड़ तक उसकी चूत में धंस गया और मेरी झांटें उसकी झांटों से जा मिलीं.

वो एक मेहनतकश लड़की थी तो वो दर्द को पी गयी. उसकी आंखों में आंसू छलछला उठे थे पर उसने ज्यादा हाय तौबा नहीं मचाई और जैसे तैसे खुद को संभाले रही.

कुंवारी बुर में लंड आराम से तो कभी घुसने वाला है नहीं जब तक जोर नहीं लगेगा चूत बिल्कुल भी जगह नहीं देगी. इसीलिए कहते हैं कि चूत को मारना पड़ता है, मारा जाता है लंड से तब कहीं जा के वो घुसने देती है लंड को.

उस छोकरी की चूत बेहद कसी हुई निकली उसकी चूत ने मेरे लंड को इस कदर कसके भींच रखा था कि जैसे किसी शेरनी के जबड़े में पहला शिकार फंसा हो. मैंने लंड को बाहर खींचना चाहा तो चूत लंड को ऐसे दबोचे थी कि पूरी की पूरी चूत ही लंड के साथ खिंच के बाहर की तरफ आने लगती थी. मैंने थोड़ा धैर्य रखना उचित समझा और रुक गया. छोकरी को चूमने पुचकारने दुलारने लगा. मेरे ऐसे प्यार जताते ही उसकी रुलाई फूट पड़ी. आखिर थी तो कच्ची कली ही.

उसके चेहरे और माथे पर इतनी सर्दी में भी पसीना छलक उठा था. मैंने दुपट्टे से उसका माथा गाल सब अच्छे से पोंछ डाले और उसे अपने सीने से चिपका लिया और उसके बालों में हाथ फेरते हुए उसे छोटी बच्ची की तरह दुलारने लगा.

लड़की की टाँगे अब दायें बाएं पूरी चौड़ाई में फैलीं हुईं थीं और उसकी चूत में मेरा लंड किसी खूंटे की तरह अडिग गढ़ा हुआ था.

“अब कैसा लग रहा है मेरी रानी को?” मैंने उसके दोनों कच्चे अनारों को दबोच कर उसके होंठ चूम कर पूछा.

 
‘’ हाई दैया मास्टर जी निर्दयी हो आप. दया ममता तो है नहीं आपके दिल में बिल्कुल!” वो भरे गले से बोली.

“नहीं बेटा, ऐसे नहीं कहते. मैं आराम से करता तो हो ही नहीं पाता. माफ़ करना बेटा !” मैंने उसे सांत्वना दी.

वो कुछ नहीं बोली चुप रही.

'' अब तुम्हारा बुर खुल गया है अब तुमको कभी दर्द नही होगा '' सेठानी ने उसके कमसिन टमाटर जैसे गालों को सहलाते हुए कहा

थोड़े ही समय बाद मुझे महसूस हुआ कि मेरे लंड पर चूत की पकड़ कुछ ढीली पड़ी है. मैंने धीरे से कोई दो तीन अंगुल लंड को बाहर की तरफ खींचा तो इस बार चूत साथ नहीं आयी. उस छोकरी का चेहरा भी अब कुछ शान्त नजर आ रहा था और उसकी सांसें भी नार्मल, व्यवस्थित रूप से चलने लगीं थीं.

मैं कसी बुर को पा...जवानी की उमंग से भर बाकी के लंड को 2-3 धक्के मार-मार छोकरीं की कसी बुर में पेलने लगा। वह हाय...हाय...! मालकिन फट गई...कह कर छटपटाने लगीं । । पर मैं ताकत से दवा--दवा कर बुर में अपना लंड घुसेड़ने गया ।

तभी बुरे से हल्का खून देख-सेठानी खुश हो बोली-शावस डियर- बहुत अच्छे मज़ा आ गया..खून फेंकदी इसकी बुर चोदों अब -" -

मैं चोदने लगा । छोकरी मछली की तरह तड़फड़ाने लगी सेठानी उसके दबाए - मेरे लंड को कुआंरी बुर में आते-जाते देख, खुशी से झूमने लगी । . . अनचुदी बुर को चोदने का मजा हमें पागल बना रहा था । " |

 
मैंने लंड को अब अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया. अब लोन्डिया के मुंह से कामुक कराहें निकलनें लगीं. जाहिर था कि उसे अपनी पहली चुदाई का मज़ा आने लगा था. इस तरह मैं धीरे धीरे लंड को अन्दर बाहर करता रहा. थोड़ी ही देर बाद उसकी चूत अच्छे से पनियां गयी और लंड सटासट अंदर बाहर होने लगा .

अब मैंने लंड को अच्छे से बाहर तक निकाल निकाल कर वापिस चूत में पेलना शुरू किया तो उस छोकरी को भी मज़ा आने लगा और वो अपनी चूत उठा उठा कर मेरे लंड से लोहा लेने लगी. जल्दी ही चुदाई अपने शवाब पर आ गई और चूत लंड में घमासान मच गया. लंड अब बड़े मजे से गचागच, सटासट उसकी चूत में अन्दर बाहर होने लगा था.

'' बेटा, लंड खाकर अब तूम लड़की से औरत बन गयी हो अब तो मजा आ रहा है न लंड का?” सेठानी ने उसके संतरों को सहलाते हुए उससे पूछा. वो कुछ नहीं बोली और उसने अपना मुंह मेरे सीने में छुपा लिया और अपनी उंगली से मेरी छाती पर कुछ लिखने लगी.

“तूम डर रही थी न मेरे लंड से. अब यही लंड तुझे अच्छा लगने लगा है न!”

मेरी बात सुन के उस ने सिर हिला कर हामी भरी.

'' मास्टर जी, मुझे क्या पता था ये सब. मैं तो सोच रही थी कि जहां मेरी छोटी उंगली भी नहीं घुसी कभी वहां आपका ये इतना बड़ा डंडा तो मेरे पेट में घुस के मुझे मार ही डालेगा आज!” वो बड़ी मासूमियत से बोली.

 
'' हाय मेरी जान ..... लंड ने आज तक किसी की जान नहीं ली कभी, ये तो सिर्फ मज़ा देता है.” मैं बोला और लंड को उसकी चूत से बाहर खींच लिया.

उसकी चूत से ‘पक्क’ जैसी आवाज निकली जैसी कोल्ड ड्रिंक की छोटी बाटल का ढक्कन ओपनर से खोलने पर निकलती है; ऐसी आवाज नयी चूत का वैक्यूम रिलीज होने से ही आती है. अब मेरा मन उसे घोड़ी बना के चोदने का था.

हाय , अब तू घोड़ी की तरह खड़ी हो जा!” मैंने उससे कहा और उसे समझाया कि क्या करना है. मेरी बात समझ कर वो झट से किसी चौपाये की तरह औंधी होकर अपने हाथ पैरों के सहारे खड़ी हो गयी. और अपना सिर सेठानी की गोद मे रख लिया

सेठानी उस गदराई हसीना की मादक चुचियों को सहलाने लगी

उसके मस्त भरे भरे गोल मटोल कूल्हे जिन पर कल उसकी चोटी लहरा रही थी इस वक़्त मेरे सामने अनावृत थे. मैंने उसके दोनों चतड़ोंको अच्छे से सहलाया और उन पर खूब चपत लगाईं फिर बीच की दरार खोल कर देखा. उसकी गांड की चुन्नटें बहुत ही कसीं हुईं थीं मैंने लंड को पूरी दरार में दबा के तीन चार बार स्वाइप किया.

ये स्थान भी बड़ा संवेदनशील था उसका; मेरे लंड छुलाते ही वो मज़े के मारे कमर हिलाने लगी. लेकिन मैंने उसकी बुर को ही निशाना बना के लंड घुसेड़ दिया और नीचे हाथ लेजाकर उसके मम्में दबोच कर उसकी पीठ चूम चूम कर उसे चोदने लगा.

 
फिर उसके सिर के बाल खींच लिए मैंने जिससे उसका मुंह ऊपर उठ गया और उसकी चूत को बेरहमी से ठोकने लगा. लोन्डिया धीरे धीरे करने की गुहार लगाती रही पर जोश में सुनता कौन है.

ये छोकरी तो लम्बी रेस की घोड़ी निकली; उसे चोदते हुए पंद्रह मिनट से ऊपर ही हो चुके थे पर वो झड़ने का नाम ही नहीं ले रही थी; मेरा लंड तो टनाटन खड़ा था पर मुझे थकान होने लगी थी. मैंने लंड बाहर खींच लिया और थोड़ा रेस्ट करने लेट गया. छोकरी भी मेरे बगल में आ लेटी और मेरा सीना सहलाने लगी.

लड़की की की सांसें भी तेज तेज चल रहीं थीं पर वो मुझसे लिपटी जा रही थी और उत्तेजना से उसने मेरा लंड पकड़ लिया और उसे अपनी चूत की दरार में घिसने लगी.

“कैसा लग रहा है मेरी रानी को?” मैंने उसकी चूत पर चिकोटी काट कर पूछा.

“मुझे नहीं पता, आपका काम आप ही जानो!” वो शर्माते हुए बोली और मेरी छाती में मुंह छिपा लिया लेकिन लंड अपने हाथ से नहीं छोड़ा.

“अब दर्द तो नहीं हो रहा न?” सेठानी ने पूछा तो उसने इन्कार में सिर हिला दिया पर बोली कुछ नहीं.

'' बेटा, चल अब तू मास्टर जी के ऊपर बैठ कर राज कर !”

“क्या सेठानी जी? मैं समझी नहीं?”

“अरे अब तुम मास्टर जी के ऊपर चढ़ जाओ और उन्हें चोद डालो अच्छे से!” सेठानी ने उस गदराई छोकरी के संतरों का दबाते हुए कहा

मैं भी छोकरी के हुस्न का मजा उसे अपने ऊपर बैठा कर लेना चाहता था. उसके उछलते मम्में देखना चाहता था, उसकी चूत लंड को कैसे लीलती है इसका रसास्वादन करना चाहता था.

 
सेठानी जी के कहने पर छोकरी मेरे ऊपर आकर बैठ गयी. ट्यूबलाइट की तेज रोशनी में उसके ठोस तने हुए उरोज, उसका सुगठित बदन दमक उठा. फिर उसने अपने दोनों हाथ उठा कर अपने बाल समेटे और उनका जूडा बना कर बालों में गांठ बांध ली.

वो नजारा भूलना मुश्किल है मेरे लिए. इस पोज में लड़की कितनी सुन्दर लगती है. वो आपके ऊपर नंगी बैठी हो और अपने बालों का जूडा बांध रही हो! ऐसे में उसकी बाहों के तले हिलते उसके स्तन, उसकी कांख के बाल, उसकी आर्मपिटस में उगा हुआ वो बालों का गुच्छा और वहां से निकलती उसके बदन की प्राकृतिक सुगन्ध… मैं तो धन्य हो गया वो सब देख महसूस करके!

इसके बाद छोकरी ने मोर्चा संभाल लिया, चुदाई की कमान अपने हाथो में ले ली; वो थोड़ी सी ऊपर उठी और मेरा लंड पकड़ कर उसने अपनी चूत के छेद पर सेट किया और बड़े आहिस्ता से बैठती गयी. मैंने महसूस किया कि मेरा टोपा उसकी रिसती चूत में गप्प से घुस गया.

उस के मुंह पर दर्द के निशान उभरे पर उसने अपने दांत भींचे और ईईई ईईई ईईई जैसी आवाज करते हुए समूचा लंड लील गयी और फिर हांफती हुई सी मेरी छाती पर सिर टिका के सुस्ताने लगी.

“शाबाश बेटा, ये हुई न कोई बात. अब तू मास्टर जी के लंड को अपनी बुर में अन्दर बाहर कर; ध्यान रखना लंड को चूत से बाहर मत निकलने देना!” सेठानी ने उसे सीख दी.

समझदार छोरी थी तो सेठानी का मकसद फौरन समझ गयी और उसने अपने दोनों हाथ मेरी छाती पर टिकाये और कमर को ऊपर उठाया और फिर बैठ गयी; मेरा लंड किसी पिस्टन की तरह उसकी चूत में से बाहर निकला और फिर से वहीं जा छुपा.

 
छोकरी ने यही एक्शन बार बार दुहराया और फिर तेजी से मुझे चोदने लगी और फिर थोड़ी ही देर में किसी कामोनमत्त नवयौवना की भांति लज्जा का परित्याग कर कामुक आहें कराहें किलकारियां निकालती हुई मुझे चोदने लगी.

मैं बड़े आराम से उसकी नटखट चूचियों का उछालना कूदना देखता रहा; बीच बीच में मैं उसके निप्पलस खींच कर अपने सीने पर रगड़ने लगता और उसके कूल्हों के बीच की दरार को, उसकी गांड के झुर्रीदार छिद्र को अपनी उँगलियों से सहलाने लगता जिससे छोकरी की वासना और प्रचण्ड रूप ले लेती और वो किसी हिस्टीरिया के मरीज की तरह अपनी कमर चलाने लगती.

कई बार ऐसा हुआ कि मेरा लंड फिसल कर उसकी चूत से बाहर निकल गया लेकिन उसने जल्दी ही मेरे लंड की लेंग्थ के हिसाब से अपनी कमर उठाना और गिराना सीख लिया और फिर एक बार भी लंड को बाहर नहीं निकलने दिया. वो छोकरी ऐसे ही करीब पांच सात मिनट मुझे चोदती रही फिर थक कर उतर गयी मेरे ऊपर से.

'' मास्टर जी थक गयी मैं तो. अब आप आओ मेरे ऊपर!” वो मेरा हाथ पकड़ कर खींचती हुई बोली.

उस छोकरी के संग चुदाई का पहला दौर ही काफी लम्बा खिंच गया था जिसकी मुझे कतई उम्मीद नहीं थी. समय बहुत हो चुका था. ऐसा सोच कर मैंने नवयौवना को दबोच लिया और फचाक से उसकी चूत में लंड पेल कर उसे चोदने लगा; अब झड़ने की जल्दी मुझे थी सो मैंने ताबड़तोड़, आढ़े तिरछे गहरे शॉट्स उसकी चूत में मारने शुरू किये; छोकरी किसी कुशल प्रतिद्वन्दी की तरह लगातार मेरे लंड से अपनी चूत लड़वाती रही.

मास्टर जी मास्टर जी, मुझे कसके पकड़ लो आप, जमीन सी हिल रही है मेरे भीतर से कुछ तेज तेज निकल रहा है.” वो बोली और फिर वो झटके से मुझसे लिपट गयी.

और मुझे अपनी बांहों में पूरी शक्ति से कस लिया और अपनी टाँगें मेरी कमर में लपेट दीं.

“अरे बेटा रुक तो सही, मेरा पानी निकलने वाला है; मुझे बाहर निकालने दे.” मैंने उसे चेतावनी दी.

'' कोई नही मेरे भीतर ही भर दो आप तो!” वो मुझसे कस के लिपटते हुए बोली कि कहीं मैं उससे अलग न हट जाऊं.

“अरे तुझे कुछ हो गया तो?”

'' कुछ नही होगा … मैं इसे गर्भ निरोधक गोली दे दूँगी आप अपना पूरा मज़ा लीजिए मास्टर जी !” सेठानी ने कहा

सेठानी की बात सुन कर अब मुझे क्या चिंता होनी थी, मैंने आखिरी दस बीस धक्के और लगा कर अपना काम भी तमाम किया और मेरा लंड लावा उगलने लगा. उधर कोकरी की चूत के मस्स्ल्स फैल सिकुड़ कर मेरे लंड से वीर्य को निचोड़ने लगे, एक एक बूंद निचुड़ गयी उसकी चूत में और फिर उसकी चूत एकदम से सिकुड़ गयी और मेरा लंड शहीद होकर बाहर निकल गया.

इसके बाद हम अलग हो गये और छोकरी ने अपनी चूत पास पड़ी चादर से अच्छे से पौंछ डाली और अपने कपड़े पहन लिए और बालों का जूडा खोल कर बाल फिर से बिखरा लिए.

मैंने भी लंड पौंछा और आँखे बंद कर लेट गया

 
उस कमसिन हसीना की चुदाइ करके मैं एक तरफ लेट गया और मुझे कब नींद आ गई मुझे पता भी नही चला

सुबह मेरी आँख मीना के जगाने से खुली तो देखा सुबह के सात बज चुके थे .मीना चाय का कप लिए खड़ी थी मैं फटाफट उठा हाथ मुँह धोया और फिर मीना से चाय का कप लेकर चाय पीने लगा .

चाय पीने के बाद मैंने मीना पर एक भरपूर नज़र डाली मीना इस समय स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा लग रही थी उसने पिंक कलर का शलवार सूट पहन रखा था उसे देखते ही मेरा नागराज अंगड़ाइया लेकर फूँकारने लगा मैने मीना की कमर में हाथ डाल कर उसे अपने से चिपका लिया और उसका माथा गाल कई कई बार चूम डाले. फिर तो मुझ पर जैसे दीवानगी सी सवार हो गयी. मैं मीना को सब जगह चूमता चला गया उसके गाल, गला गर्दन और फिर हमारे होंठ कब एक दूसरे के होंठों से जुड़ गये पता ही न चला.

‘कुंवारी कन्या के अधरों का प्रथम रसपान का स्वाद कितना अलौकिक कितना मधुर होता है.’ ये मैंने उस दिन जाना.

मीना कोई विरोध नहीं कर रही थी वरन वो भी मेरे संग बहती सी चली जा रही थी की जहां नियति ले जाये वहीं चले चलें जैसी मनःस्थिति थी हम दोनों की.

जो कुछ हो रहा था वो जैसे स्वयं ही, बिना हमारे कुछ किये ही हो रहा था. मैंने कब मीना के उरोज दबोच लिए और उन्हें कब मसलने लगा मुझे खुद याद नहीं.

'' आहह मास्टर जी धीरे … इत्त्ति जोर से नहीं; दुखते हैं.” मीना कांपती सी आवाज में बोली. तो मुझे होश सा आया तो मैंने देखा कि मेरा हाथ मीना के कुर्ते के अन्दर उसकी ब्रा के भीतर उसके नग्न स्तनों को मसल रहा था … गूंथ रहा था …मसल रहा था. उसके फूल से कोमल स्तन मेरी सख्त मुट्ठी में जैसे कराह से रहे थे. मुझे अपनी स्थिति का भान हुआ तो मैंने अपना हाथ उसकी ब्रा से बाहर निकाल लिया.

मैंने देखा तो मीना की नज़रें झुकी हुयीं थीं. मैंने उसे फिर से अपनी बांहों में भर लिया और उसका निचला होंठ चूसने लगा. साथ में मेरा एक हाथ उसकी जांघों को सहलाए जा रहा था.

अब मीना भी चुम्बन में मेरा साथ देने लगी थी और उसकी पैर स्वयमेव खुल से गये थे. मेरा हाथ उसकी जांघों के जोड़ पर जा पहुंचा और अपनी मंजिल को सलवार के ऊपर से ही छू लिया और धीरे से मसल दिया.

पुरुष के हाथों की छुअन का असर, उसकी तासीर लड़की के जिस्म पर जादू के जैसा असर दिखाती है. विशेष तौर पर अगर उसके स्तनों या चूत को छेड़ दिया जाए तो.

मीना की चूत पर मेरा हाथ लगते ही वो मोम की तरह पिघल गयी और मीना ने चुम्बन तोड़ कर अपना सिर मेरे कंधे पर झुका दिया. मेरी उंगलियाँ शलवार के ऊपर से ही उसकी चूत से खेलती रहीं, मसलती रहीं, चूत की दरार में घुसने का प्रयास करती रहीं पर सलवार के ऊपर से ऐसा हो पाना संभव ही नहीं था. हां मीना की झांटों का झुरमुट मुझे अच्छी तरह से महसूस हो रहा था.

 
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