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Adultery गदरायी लड़कियाँ

मैने अपना मुंह उसके मुँह से अलग कर उसकी दायीं चूची के ऊपर रख दिया. उसके दोनों उरोज़ों में एक अजीब सा दर्द हो रहा था. मैं एक हाथ से उसकी दूसरी चूची को हलके हलके मसल रहा था . उसकी सांस बड़ी तेज़ी से अंदर बाहर हो रही थी. उसके दोनों हाथ अपने आप मेरे सर के ऊपर पहुँच गए. वो मेरा मुंह अपनी चूची के ऊपर दबाने लगी. मैं उसकी चूची की घुंडी को अंगूठे और उंगली के बीच में पकड़ कर मसलने लगा और होंठों के बीच में उसका दूसरा चूचुक ले कर उसको ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया.

उसके सारे शरीर में अजीब सी एंठन फ़ैल गयी. मेरे हाथों ने उसके दोनों संवेदनशील उरोज़ों से खेल कर उसकी बुर में तूफ़ान उठा दिया. उसकी बुर में जलन जैसी खुजली हो रही थी. मेरा दूसरा हाथ उसकी बुर के ऊपर जा लगा. मैं अपने बड़े हाथ से उसकी पूरी बुर ढक कर सहलाने लगा. वो अब ज़ोरों से सिस्कारियां भर रही थी. मैने उसके उरोज़ों का मीसना और भी तेज़ कर दिया और दुसरे हाथ की हथेली से उसकी पूरी बुर को दृढ़ता से मसलने लगा.

"आह, अह..अह..मास्टर जी, मुझे अजीब सा लग रहा है, ऊं.. ऊं अम्म..मैं ...आ ..आ ... उफ़, " वो सीत्कारिया मार कर अपने शरीर में दोड़ती विद्युत धारा से विचलित हो चली थी. उसके कुल्हे अपने आप बिस्तर से ऊपर उठ-उठ कर मेरे हाथ को और भी ज़ोर से सहलाने को उत्साहित करने लगे.

मैने उसकी एक चूचुक को अपने दातों के बीच में दबा कर नरमी से काटा, दुसरे चूचुक को अंगूठे और उंगली में हलके भींच कर अहिस्ता से उसकी चूची से अलग खींचने के प्रयास के साथ-साथ अपने बुर के ऊपर वाले हाथ के अंगूठे को उसके भागंकुर के ऊपर रख उसे मसलने लगा.

मैने उसके वासना से लिप्त अल्पव्यस्क नाबालिग किशोर शरीर के ऊपर तीन तरह के आक्रमण से उसकी कामुकता की आग को प्रज्जवलित कर दिया.

 
उसके पेट में अजीब सा दर्द होने लगा, वैसा दर्द उसकी दोनों चूचियों में भी समा गया. कुछ ही क्षणों में वह दर्द उसकी बुर के बहुत अंदर से उसे तड़पाने लगा. उसके सारे शरीर की मांसपेशियां संकुचित हो गयीं.

"मैं .. आ.. आ.. मेरी बुर जल रही है. मैं आह आह अँ ..अँ अँ अँ ऊओह ऊह ," उसके मूंह से चीख सी निकल पडी.

मैने यदि उसकी पुकार सुनी भी हो तो उसकी उपेक्षा कर दी और उसकी चूचियों की घुंडियों को अपने मुंह और हाथ से तड़पाने लगा. उसकी बुर और भगशिश्निका को मैं और भी तेज़ी से मसलने लगा.

"मैं वो झड़ने वाली हूँ. मेरी बुर झाड़ दीजिये मास्टर जी ..ई. ई...आह." उसका शरीर निकट आ रहे यौन-चमोत्कर्ष के प्रभाव से असंतुलित हो गया.

वो यदि मेरे ताकतवर बदन से नहीं दबी होती तो बिस्तर से कुछ फुट ऊपर उठ जाती. उसके गले से एक लम्बी घुटी-घुटी सी चीख के साथ उसका यौन-स्खलन हो गया. उसके कामोन्माद के तीव्र प्रहार से उसका तना हुआ बदन ढीला ढाला हो कर बिस्तर पर लस्त रूप से पसर गया. मैने . तीनो, कामुकता को पैदा करने वाले, अंगों को थोड़ी देर और उत्तेजित कर उसके निढाल बदन को अपनी वासनामयी यंत्रणा से मुक्त कर दिया.

मैं उसे अपनी बाँहों में भर कर प्यार से चूमने लगा. वो थके हुए अंदाज़ में मुस्करा दी. उसके अल्पव्यस्क किशोर शरीर को प्रचण्ड यौन-स्खलन के बाद की थकावन से अरक्षित देख मेरा वात्सल्य मेरे चुम्बनों में व्यक्त हो रहा था.

"मैं, म्मै ऐसे कभी भी नहीं झड़ी," उसने भी प्यार से मुझ को वापस चूमा.

" बेटा, अभी तो यह शुरूवात है," मैने उसकी नाक को प्यार से चूमा. मेरा एक हाथ उसके उरोज़ों को हलके-हलके सहला रहा था.

मैं और वो अगले कई क्षण वात्सल्यपूर्ण भावना से एक दुसरे को चूमते रहे. मैं कुछ देर बाद उठ कर उसकी टागों के बीच में लेट गया.

 
मैने उसके दोनों घुटनों को मोड़ कर उसकी जांघे फैला दीं. अब मेरा मूंह उसकी बहुत गीली बुर के ऊपर था.

उसकी सांस मेरे अगले मंतव्य से उसके गले में फँस गयी. मैं उसकी भीगी झांटों को अपने जीभ से चाटने के बाद उसकी बुर के दोनों भगोष्ठों को अलग कर उसकी गुलाबी कोमल कुंवारी बुर के प्रविष्ट -छिद्र को अपनी जीभ से चाटने लगा. उसकी वासना फिर पूर्ण रूप से तीव्र हो गयी.

मैने अपने हाथों को उसकी टांगों के बाहर से लाकर उसके दोनों फड़कते उरोज़ों को अपने काबू में ले लिया. मैने उसकी बुर अपनी मोटी खुरदुरी जीभ से चाटना शुरू कर दिया. मैने दोनों चूचियों के मंथन के साथ साथ उसके भागान्कुन का मंथन भी अपने दातों से करना शुरू कर दिया था.

मेरे भग-चूषण ने उसकी सिस्कारियों का सिलसिला फिर से शुरू कर दिया.

सेठानी मेरी कामकला को अपनी बुर सहलाते हुए नशीली आँखो से देख रही थी उसका चेहरा लाल हो रहा था शायद वो सब कुछ अपने साथ फील कर रही थी

मैने अपना मूंह उस लोन्डिया की बुर से अचानक हटा लिया. वो बड़ी ज़ोर से आपत्ती करने के लिए कुनमुनाई, तभी मैं अपनी जीभ से उसकी गांड के छोटे से छेद को चाटने लगा. उसके होशोअवास उड़ गए. उसने अपनी छोटी सी ज़िंदगी में इतना वासना का जूनून कभी भी महसूस नहीं किया था. मैने अपना थूक उसकी गांड पर लगा दिया. उसकी गांड का छल्ला फड़कने लगा. मेरी बदस्तूर कोशिश से मेरी जीभ की नोक उसकी गांड के छिद्र में प्रविष्ट हो गयी. उसके मूंह से बड़ी ज़ोर से सिसकारी निकल गयी. मैने अपने एक हाथ से उसके उरोंज़ को मुक्त कर उसकी बुर की घुंडी का मंथन करने लगा. वो हलक फाड़ कर चीखी,"मैं, वो झड़ने वाली हूँ. मेरी बुर झाड़ दीजिये...आह ..आह."

 
मैने आपनी जीभ उसकी गांड से निकाल कर उसकी बुर की भागान्ग्कुर को अपने दातों में नरमी से ले कर अहिस्ता से उसे झझोंड़ने लगा, जैसे कोई वहशी जानवर अपने शिकार के मांस को चीड़ फाड़ता है. उसकी बुर की जलन उसकी बर्दाश्त की ताकत से बाहर थी. उसने अपने दोनों हाथों से मेरा सर पीछे पकड़ कर अपनी बुर में दबा लिया. मैं ने अपने खाली हाथ की अनामिका उसकी गांड में उंगली के जोड़ तक डाल दी.

उसके चूतड़ उसकी अविश्वसनीय यौन-चरमोत्कर्ष के मीठे दर्द के प्रभाव में बिस्तर से उठ कर मेरे मूंह के और भी क़रीब जाने के लिए बेताब होने लगे. मैं उसके थरथराते शरीर को अपने मज़बूत हाथ से नीचे बिस्तर पर दबा कर उसकी रति रस से भरी हुई बुर का रसास्वादन तब तक करता रहा जब तक उसके आनंद की पराकाष्ठा शांत नहीं होने लगी.

उसकी बुर अब बहुत संवेदनशील हो चुकी थी और मेरे चुम्बन उसे करीब-करीब दर्दभरे से लगने लगे. उसने कुनमुना कर मेरा सर अपनी बुर से हटाने के लिए संकेत दिया. मैं उठ कर उसकी खुली पसरी गुदाज़ जांघों के बीच बैठा तो मेरे मूंह पर उसकी बुर का सहवास-रस लगा हुआ था. मैने खूब स्वाद से उसकी बुर और गांड में डाली उँगलियों को प्यार से चूसा.

उसकी वासना मेरी इस हरकत से बड़ी प्रभावित हुई पर उसने मुझे झूठी डांट पिला दी,

"आप ने मेरी गांड की गंदी उंगली को मूंह में ले लिया, उफ,कैसे हैं आप...छे-छी." पर उसका दिल अंदर से बहुत प्रसन्न हुआ.

उसने मेरे हाथ को अपनी तरफ खींचा. मैं अपने भीमकाय शरीर के पूरे भार से उसके कमसिन, किशोर गुदाज़ शरीर को दबा कर उसके ऊपर लेट गया. उसने अपने दोनों नाज़ुक, छोटे-छोटे हाथों से मेरा बड़ा चेहरा पकड़ कर मेरा मूंह अपनी जीभ से चाट-चाट कर साफ़ कर दिया. उसने शैतानी में मेरी मर्दान्ग्नी के मुनासिब खूबसूरत नाक को अपनी जीभ की नोक से सब तरफ से चाटा. जब मेरे मूंह, नाक से उसने अपनी बुर के पानी को चाट कर साफ़ कर दिया तो मेरी नाक की नोक पर प्यार से चुम्बन रख दिया. मैने उसकी नाबालिग, कमसिन, किशोर लड़की के अंदर की औरत को जगा दिया. उसे मेरे ऊपर वात्सल्य प्रेम आ रहा था. मैने उसकी वासना की आग दो बार अविस्वस्नीय प्रकार से बुझा दी थी. आगे पता नहीं और क्या-क्या मेरे दिमाग में था.

 
देखा दोस्तो 6अपडेट के बाद भी चुदाई कम्प्लीट नही हुई ........... चलिए कोई बात नही कल तक तो ही जाएगी
 
rangila wrote: ↑ 14 Dec 2018 12:25
मस्त अपडेट है भाई अगले अपडेट का इंतज़ार रहेगा
 
उसने मेरे हाथ को अपनी तरफ खींचा. मैं अपने भीमकाय शरीर के पूरे भार से उसके कमसिन, किशोर गुदाज़ शरीर को दबा कर उसके ऊपर लेट गया. उसने अपने दोनों नाज़ुक, छोटे-छोटे हाथों से मेरा बड़ा चेहरा पकड़ कर मेरा मूंह अपनी जीभ से चाट-चाट कर साफ़ कर दिया. उसने शैतानी में मेरी मर्दान्ग्नी के मुनासिब खूबसूरत नाक को अपनी जीभ की नोक से सब तरफ से चाटा. जब मेरे मूंह, नाक से उसने अपनी बुर के पानी को चाट कर साफ़ कर दिया तो मेरी नाक की नोक पर प्यार से चुम्बन रख दिया. मैने उसकी नाबालिग, कमसिन, किशोर लड़की के अंदर की औरत को जगा दिया. उसे मेरे ऊपर वात्सल्य प्रेम आ रहा था. मैने उसकी वासना की आग दो बार अविस्वस्नीय प्रकार से बुझा दी थी. आगे पता नहीं और क्या-क्या मेरे दिमाग में था.

" मैं, क्या वो आपका लंड चूसूं?" उसने हलके से पूछा.

मेरे चेहरे पर खुली मुस्कान उसका जवाब था.

मैं उसके सीने के दोनों तरफ घुटने रख कर अपना लगभग पूरा तनतनाया हुए लंड को उसके मूंह की तरफ बढ़ा दिया. मेरा लंड उसकी मुरझाई स्तिथी से अब लगभग दुगना लंबा और मोटा हो गया था. मेरा लंड उसकी चूचियों के ऊपर से लेकर उसके माथे से भी ऊपर पहुँच रहा था.

उसके छोटे-छोटे नाज़ुक हाथ मेरे लंड की पूरी परिधी को पकड़ने के लिए अपर्याप्त थे. उसने दोनों हाथों से मेरा लौहे जैसा सख्त, पर रेशम जैसा चिकना, लंड संभाल कर मेरे लंड का सुपाड़ा अपने पूरे खुले मुंह में ले लिया. उसका मुंह मेरे लंड के सिर्फ सुपाड़े से ही भर गया. उसे लंड को चूसने का कोई भी अभ्यास नहीं था. उसने जैसे भी वो कर सकती थी वैसे ही मेरे लंड को कभी मुंह में लेकर, कभी जीभ से चाट कर अपने प्यारे मास्टर को शिश्न-चूषण के आनंद देने का भरपूर प्रयास किया.

पांच मिनट के बाद मैने अपना लंड उसके थूक से भरे मुंह से निकाल लिया और फिर से उसकी जांघों के बीच में चला गया, " बेटा अब आपकी बुर मारने का समय आ गयाहै."

उसका हलक रोमांच से सूख गया. उसकी आवाज़ नहीं निकली, उसने सिर्फ अपना सिर हिला कर मेरे निश्चय को अपना समर्थन दे दिया.

मैने उसकी गुदाज़ जांघें अपनी शक्तीशाली बाज़ुओं पर डाल लीं. मैने अपना लंड उसकी गीली कुंवारी बुर के प्रविष्टी-द्वार पर ऊपर-नीचे रगड़ा. फिर उसे मेरे, छोटे सेब के बराबर के आकार के लंड का सुपाड़ा अपनी छोटी सी कुँवारी बुर के छिद्र पर महसूस हुआ.

" बेटा, पहली चुदाई में थोड़ा दर्द तो ज़रूर होगा. एक बार तुम्हारी बुर के अंदर लंड घुसड़ने के बाद बुर लंड के आकार से अनुकूलन कर लेगी."

मेरे उसके कौमार्य-भंग की चुदाई के पहले का आश्वासन से उसका दिल में और भी डर बैठ गया.

मैंने एक हल्की सी ठोकर लगाई और मेरे विशाल लंड का बेहंत मोटा सुपाड़ा उसकी बुर के प्रवेश-द्वार के छल्ले को फैला कर उसकी कुंवारी बुर के अंदर दाखिल हो गया.

 
"हाइईईईईईई, धीरे, आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह प्लीज़.आपका लंड बहुत बड़ा और मोटा है. मुझे दर्द हो रहा है, उईईईईईई माँ मररर्र्ररर गैिईईईईईईई आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मालकिंन्ननणणन् बचाओ " वो बिलबिलायी. उसकी बुर मेरे वृहत्काय लंड के ऊपर अप्राकृतिक आकार में फ़ैल गयी थी. उसके सारे शरीर में दर्द की लहर दौड़ गयी. वो छटपटाई और मुझ को धक्का देकर अपने से दूर करने के लिए हाथ फैंकने लगी.

मेरा लंड अब उसकी बुर में फँस गया था. मैने उसकी दोनों कलाई अपने एक विशाल हाथ में पकड़ कर उसके सिर के ऊपर स्थिरता से दबा दी और अपना भारी विशाल बदन का पूरा वज़न डाल उसके ऊपर लेट गया. वो अब मेरे नीचे बिलकुल निस्सहाय लेटने के कुछ और नहीं कर सकती थी. मेरा महाकाय शरीर उसे अब और भी दानवीय आकार का लग रहा था

वो अपने नीचे के होंठ को दातों से दबा कर आने वाले दर्द को बर्दाश्त करने की कोशिश के लिए तैयार होने का प्रयास करने लगी.

मैने अपनी शक्तिशाली कमर और कूल्हों की मांसपेशियों की सहायता से अपने असुर के समान महाकाय लंड को उसकी असहाय कुंवारी बुर में दो-तीन इंच और अंदर धकेल दिया. वो दर्द के मारे छटपटा कर ज़ोर से चीखी, "नहीं, नहीं , मास्टर जी, आपने मेरी बुर फाड़ दी. मेरी बुर से अपना लंड निकाल लीजिये. मुझे आपसे नहीं चुदवाना. आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मर गयी, मैं ...आह मेरीईई चू...ऊ ..ऊ ..त फ..अ..आ..त ग...यी."

वो पानी के बिना मछली के समान कपकपा रही थी.

मैने उसकी दयनीय स्तिथी और रिरियाने को बिलकुल नज़रंदाज़ कर दिया. वो बिस्तर में मेरे अमानवीय शक्तिशाली शरीर के नीचे असहाय थी. मैने उसकी बुर में अपने दानवाकारी लंड को पूरा अंदर डाल कर उसकी चुदाई का निश्चय कर रखा था.

उसकी आँखों से आंसू बहने लगे. मैने कहा "चुप बेटा..शुष.." की आवाज़ों से उसे असहनीय पीढ़ा को बर्दाश्त करने की सलाह सी दी.

अब सेठानी भी पास आ गई और उस लोन्डिया के आँसू पोंछ कर उसको प्यार से बोली '' बस बिटिया अब तो तुम्हारी बुर ने लंड का स्वाद चख लिया है थोड़ी देर मे दर्द ख़तम हो जाएगा थोड़ा हॉंसला रखो बिटिया '' और छोकरी के कच्चे अनारों को मीसने लगी जिससे लोन्डिया के शरीर में आनद की लहरें फिर से किलोल करने लगी .

जब सेठानी ने देखा लोन्डिया दुबारा से मस्ताने लगी है तो मुझे बोली '' मास्टर जी अब तुम अपना झंडा गाढ कर किला फ़तह कर लो ''

 
सेठानी का कहा मानकर मैने उसकी बुर के अंदर अपना लौहे समान सख्त लंड और भी अंदर घुसेड़ दिया. मेरा लंड उसकी कौमार्य की सांकेतिक योनिद्वार की झिल्ली को फाड़ कर और भी अंदर तक चला गया.

छोकरी की दर्द से भरी चीख से सारा कमरा गूँज उठा. वो रिरिया कर मुझ से अपना लंड बाहर निकालने की प्रार्थना कर रही थी. उसके आंसूओं की अविरल धारा उसके दोनों गालों को तर करके उसकी गर्दन और उरोज़ों तक पहुँच रही थी. उसने सुबक सुबक कर रोना शुरू कर दिया.

मैंने कठोर हृदय से उसकी सुबकाई और छटपटाहट की उपेक्षा कर अपने यंत्रणा के हथियार को उसकी दर्द से भरी बुर में कुछ इंच और भीतर धकेल दिया. उसे अपनी बुर से एक गरम तरल द्रव की अविरल धारा बह कर अपनी गांड के ऊपर से बिस्तर पर इकट्ठी होती महसूस हुई.

उसके प्रचुर आंसू उसकी नाक में से बहने लगे. उसका सुबकता चेहरा उसके आंसूओं और उसकी बहती नाक से मलिन ही गया था. वो हिचकियाँ मार कर ज़ोर से रो रही थी. मैने उसके रोते लार टपकाते हुए मुंह पर अपना मुंह रख कर उसकी चीखों को काफी हद तक दबा दिया. उसे लगा की उसकी बुर के दर्द से बड़ा कोई और दर्द नहीं हो सकता. उसे किसी भी तरह विष्वास नहीं हो रहा था कि सिर्फ मेरा लंड अंदर जाने के इस दर्द के बाद कैसे मैं उसे चोद पाउन्गा. उसके दिल में भावना आ चुकी थी की वो दर्द के मारे बेहोश हो जाएगी.

उसका सुबकना हिचकी मार-मार कर रोना जारी रहा, पर मैंने अपने मुंह से उसका मुंह बंद कर उसके रोने की ध्वनि की मात्रा कम कर दी थी. मैंने कस कर उसे अपने नीचे दबाया और अपना लंड उसकी थरथराती हुई बुर में से थोड़ा बाहर निकाल कर अपनी शक्तिवान कमर और कूल्हों को भींच कर अपना लंड पूरी ताकत से उसकी तड़पती कुंवारी बुर में बेदर्दी से ठोक दिया. उसका सारा बदन अत्यंत पीड़ा से तन गया. मैने अपने भारी वज़न से उसके छटपटाते हुए नाबालिग शरीर को कस कर दबाकर काबू में रखा. उसके गले से घुटी-घुटी एक लम्बी चीख निकल पड़ी. वो 'गौं-गौं' की आवाज़ निकालने के सिवाय, निस्सहाय मेरे वृहत्काय शरीर के नीचे दबी, रोने चीखने के सिवाय कुछ और नहीं कर सकती थी. उसकी कुंवारी बुर की मैने अपने, किसी असुर के लंड के समान बड़े लंड से, धज्जियां उड़ा दी.

वो दर्द से बिलबिला रही थी पर उसकी आवाज़ मैने अपने मुंह से घोंट दी थी. उसके नाखून मेरी पीठ की खाल में गढ़ गए. उसने मेरी पीठ को अपने नाखूनों से खरोंच दिया.

वो मुझसे अपनी फटी बुर में से मेरे महाकाय लंड को बाहर निकालने की याचना भी नहीं कर सकती थी. यदि इसको ही चुदाई कहते हैं तो उसने मन में गांठ मार ली कि जब मैं उसे इस यंत्रणा से मुक्त कर दूँगा तो उसके बाद सारा जीवन वो बुर नहीं मरवायेगी .

उसे ज्ञात नहीं कि वो कितनी देर तक रोती बिलखती रही. उसके आंसू और नाक निरन्तर बह रही थी. काफी देर के बाद उसे थोडा अपनी स्तिथी का थोड़ा अहसास हुआ. वो अब रो तो नहीं रही थी, पर जैसे लम्बे रोने के बाद होता है, वैसे ही कभी-कभी उसकी हिचकी निकल जाती थी. मेरा मुंह उसके मुंह पर सख्ती से चुपका हुआ था. उसकी बुर में अब भी भयंकर दर्द हो रहा था. उसे लगा कि जैसे कोई मूसल उसकी बुर में घुसड़ा हुआ था.

मैने धीरे से उसके मुंह से अपना मुंह ढीला किया, जब उसके मुंह से कोई दर्दनाक चीख नहीं निकली तो मैने अपना मुंह उठा कर कहा, " बेटा, तुम्हारी कुंवारी बुर बहुत ही तंग है. सॉरी, यदि बहुत दर्द हुआ तो."

 
उसे विष्वास नहीं हुआ कि उसके चीखने चिल्लाने के बावज़ूद उसकी पीड़ा का ठीक अंदाज़ा नहीं था, "मुझे," वो सुबक कर बोली, 'आपने मेरी बुर फाड़ दी है. आप बहुत बेदर्द हैं, मास्टर जी. आप ने मेरे दर्द का कोई लिहाज़ नहीं किया?"

मैने हल्की सी मुस्कान के साथ उसे माथे पर चूमा, "पहली बार कुंवारी बुर मरवाने का दर्द है, बेटा. आगे इतना दर्द नहीं होगा."

वो अपनी बुर में फंसे मेरे मूसल को अब पूरी तरह से महसूस करने लगी. उसे मेरे अत्यंत मोटे लंड के ऊपर अपनी बुर के अमानवीय फैलाव की जलन भरे दर्द का पहली बार ठीक से अनुमान हुआ. उसकी कुंवारी बुर में अबतक उसकी एक पतली कोमल उंगली तक नहीं गयी थी, उसमे मैने अपना घोड़े से भी बड़ा लंड बेदर्दी से उसकी नाज़ुक, कुंवारी बुर में पूरा लंड की जड़ तक घुसेड़ दिया था.

मैं प्यार से उसका मुंह साफ करने लगा. मैने प्यार से उसके सारे मलिन मुंह से सारे आंसू और बहती नाक को चाट कर साफ़ कर दिया. वो दर्द के बावज़ूद हंस पड़ी, "मास्टर जी, मेरे मूंह पर सब तरफ मेरी नाक लगी है, छी आप कितने गंदे हैं." उसने मुझ को कृत्रिम रूप से झिड़कना दी, पर उसका दिल मेरे लाड़-प्यार से पिघल गया. उसे अब , विशाल शरीर और अमानवीय ताकत के, पर फूल जैसे कोमल हृदय के मालिक मैं पर बहुत प्यार आ रहा था. अब उसे मेरा बेदर्दी से उसकी बुर फाड़ना मेरी मर्दानगी और मर्द-प्रेमी की सत्ता का प्रतीक लगने लगा. आखिर उसके सहवास के अनाड़ीपन का भी तो मुझ को ख़याल रखना पड़ा था?

मैने उसका पूरा चेहरा अपनी जीभ से चाट कर साफ़ कर, दिया

मैंने उसकी नाक को प्यार से चूमा और उसके हँसते हुए मुंह को अपने मुंह से ढक लिया.

मैने धीरे-धीरे अपना लंड उसकी बुर से बाहर निकालना शुरू किया. उसकी सांस उसके गले में फंसने लगी. मैने ने बहुत सावधानी से धीरे-धीरे अपना मूसल लंड उसकी कुंवारी बुर में जड़ तक डाल दिया. उसे बहुत ही कम दर्द हुआ. इस दर्द को वो बुर की चुदाई के लिए कभी भी बर्दाश्त कर सकती थी. मैने उसी तरह अहिस्ता-अहिस्ता उसकी बुर को, अपने महाकाय लंड की अत्यंत मोटी लम्बाई से धीरे-धीरे परिचित कराया. क़रीब दस मिनट के बाद उसकी सिसकारी छूटने लगीं. इस बार वो दर्द से नहीं कामवासना की मदहोशी से सिसक रही थी.

",मास्टर जी अब मेरी बुर में दर्द नहीं हो रहा. हाय,अब तो मुझे अच्छा लग रहा है, "वो कामुकता से विचलित हो, मुझसे अपनी बुर की चुदाई की प्रार्थना करने लगी, "मास्टर, अब आप मेरी बुर मार सकते हैं. आह..आपका लंड कितना मोटा.... है."

 
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