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Guest
दिव्या इस समय अपनी टांगे पूरी फैला चुकी थी, वो रह रह कर अपना मुंह बेड में दबा कर अपनी आहें रोकने की कोशिश करती है, इस समय उसे कोई फरक नहीं पड़ता अगर कर्नल उसे चोद भी देता, वहीं अब राजेश भी शांत हो चुका था। वो बस स्क्रीन को देखे जा रहा था पर रेणुका के सवाल से वो थोड़ा होश में आता है।
रेणुका: तो तुम्हें भी मजा आ रहा है ये सब देख के।
राजेश: पागल हो क्या तुम। ये क्या कह रही हो।
रेणुका: हाहाहा, मैं पागल हूँ या तुम झूठ कह रहे हो।
रेणुका इतना कह अपना हाथ राजेश के लंड पर रख देती है।
रेणुका: देखो ये ऐसे ही खड़ा है क्या।
राजेश शर्म से कुछ कह नहीं पाता पर रेणुका उसके लंड से अब अपना हाथ नहीं हटाती, राजेश भी रेणुका को कुछ कहना नहीं चाहता था पर फिर भी वो खुद ये एक्सेप्ट करने को तैयार नहीं था कि वो खुद एक गैर मर्द से अपनी बीवी की चुदाई तरफ देखना चाह रहा है,वो फिर से रेणुका से हेल्प मांगता है कि शायद उसका दिल पिघल जाये और वो उसे छोड़ दे।
रेणुका: तुम्हे क्या लगता है राजेश कि अगर मैं तुम्हें छोड़ भी दूं तो क्या तुम दिव्या के पास जा पाओगे। आज कर्नल किसी भी कीमत पर दिव्या को नहीं छोड़ने वाला है।
राजेश: अभी भी देर नहीं हुई है, मैं अभी भी दिव्या को इस टॉर्चर से बचा सकता हूँ।
रेणुका: हाहाहा, तुम्हें लगता है कि जो भी हो रहा है वो टॉर्चर है, तुम इतने बेवकूफ़ तो नहीं हो।
अब रेणुका राजेश का लंड पेंट से बाहर निकाल लेती है और वह कुछ नहीं बोल पाता, राजेश की नज़रें शर्म से झुक चुकी हैं और रेणुका के लंड को मसलने से वह तड़प रहा था।
रेणुका राजेश के हाथ खोल देती है तो वह एकदम से दरवाजे की ओर भागता है और उसे खोलने की भरपूर कोशिश करता है, काफी देर तक वह दरवाजा पीटता है पर उसका कोई फायदा नहीं होता। रेणुका उसे समझाती है कि इस सब का कोई फायदा नहीं है तो वह पलट कर देखता है और उसकी नजर सीधी स्क्रीन पर पड़ती है।
रेणुका: तो तुम्हें भी मजा आ रहा है ये सब देख के।
राजेश: पागल हो क्या तुम। ये क्या कह रही हो।
रेणुका: हाहाहा, मैं पागल हूँ या तुम झूठ कह रहे हो।
रेणुका इतना कह अपना हाथ राजेश के लंड पर रख देती है।
रेणुका: देखो ये ऐसे ही खड़ा है क्या।
राजेश शर्म से कुछ कह नहीं पाता पर रेणुका उसके लंड से अब अपना हाथ नहीं हटाती, राजेश भी रेणुका को कुछ कहना नहीं चाहता था पर फिर भी वो खुद ये एक्सेप्ट करने को तैयार नहीं था कि वो खुद एक गैर मर्द से अपनी बीवी की चुदाई तरफ देखना चाह रहा है,वो फिर से रेणुका से हेल्प मांगता है कि शायद उसका दिल पिघल जाये और वो उसे छोड़ दे।
रेणुका: तुम्हे क्या लगता है राजेश कि अगर मैं तुम्हें छोड़ भी दूं तो क्या तुम दिव्या के पास जा पाओगे। आज कर्नल किसी भी कीमत पर दिव्या को नहीं छोड़ने वाला है।
राजेश: अभी भी देर नहीं हुई है, मैं अभी भी दिव्या को इस टॉर्चर से बचा सकता हूँ।
रेणुका: हाहाहा, तुम्हें लगता है कि जो भी हो रहा है वो टॉर्चर है, तुम इतने बेवकूफ़ तो नहीं हो।
अब रेणुका राजेश का लंड पेंट से बाहर निकाल लेती है और वह कुछ नहीं बोल पाता, राजेश की नज़रें शर्म से झुक चुकी हैं और रेणुका के लंड को मसलने से वह तड़प रहा था।
रेणुका राजेश के हाथ खोल देती है तो वह एकदम से दरवाजे की ओर भागता है और उसे खोलने की भरपूर कोशिश करता है, काफी देर तक वह दरवाजा पीटता है पर उसका कोई फायदा नहीं होता। रेणुका उसे समझाती है कि इस सब का कोई फायदा नहीं है तो वह पलट कर देखता है और उसकी नजर सीधी स्क्रीन पर पड़ती है।