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Adultery एक अधूरी प्यास- 2

निर्मला अपनी कामुकता भरी हरकत की वजह से एकदम रंडी पन के एहसास से भरी जा रही थी क्योंकि इस समय वह अपने बेटे के लंड को किसी स्टिक की तरह पकड़ कर सीढ़ियां चल रही थी और शुभम को भी अपनी मां की इस हरकत पर पूरी तरह से उत्तेजना की आगोश में शमाता हुआ महसूस कर रहा था शीतल बार-बार पीछे की तरफ नजरें करके सीढ़ियां चढ़ते हुए मां बेटों की हरकत को देख रही थी और मन ही मन खुश भी हो रही थी छोटे-छोटे ड्रेस में शीतल और निर्मला सीढ़ियां चढ़ते हुए बेहद खूबसूरत और सेक्सी लग रही थी शुभम तो अपनी प्यासी नजरों से दोनों की मदमस्त बड़ी बड़ी गांड के दर्शन करके धन्य हो रहा था,,,।

इस समय तीनों को देखकर ऐसा ही लग रहा था कि जैसे किसी पोर्न मूवी की शूटिंग चल रही हो बेहद अद्भुत और मादकता से भरा हुआ नजारा था,,,। सामान्य जीवन में एक औरत और आदमी के लिए शायद ही यह दृश्य देखने को मिले, लगभग इस तरह का दृश्य सामान्य जीवन में एकदम दुर्लभ ही था,, एक जवान लड़के के हाथों में दो दो गदराई जवानी अंगड़ाई ले रही हो इससे बड़ी बात क्या हो सकती है शुभम की किस्मत वाकई में बड़ी तेज थी क्योंकि जब से जवान होना शुरू हुआ था तब से लेकर अब तक वह ना जाने कितनी रसीली बुर का स्वाद ले चुका था और तो और जवान गदराई औरत अपने आप ही उसकी झोली में आकर गिर जाती थी,,,,

निर्मला अपने बेटे के लंड को पकड़कर सीढ़ियां चढ़ते हुए उसकी तरफ देख कर मुस्कुराते हुए बोली,,,।

आज देखना है कि हम दोनों की गरम जवानी का रस तू अपने मोटे लंड से नीचोड़ता है या हम दोनों की रसीली बुर तेरे लंड के छक्के छुड़ा देगी,,,

मुझ को चैलेंज मत करना मम्मी मुझे अपने मोटे लंड पर पूरा विश्वास है एक बार जब तुम दोनों की बुर में घुसेगा ना तो तुम दोनों की बुर का भोसड़ा बना देगा,,,,

यह तो वक्त ही बताएगा मेरे राजा (शीतल शुभम की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए बोली)

मुझे भी उस वक्त का बेसब्री से इंतजार है (ऐसा कहते हुए शुभम अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर जोर से चपत लगाते हुए) तुम दोनों रंडियों की बड़ी-बड़ी गांड देखकर मेरी हालत खराब हो रही है मुझसे रहा नहीं जा रहा है जल्दी चलो बेडरूम में,,,,।

मादरचोद इतनी जल्दी भी क्या है अभी तो पूरी रात पड़ी है (निर्मला भी अपने बेटे को गंदी गाली देते हुए बोली।)

रात तो पूरी पड़ी है भोंसड़ी की लेकिन तेरे भोसड़े ने मेरे लंड की हालत खराब कर दी है इसलिए कह रहा हूं चल जल्दी से बेडरूम में मुझे अपने लंड को तेरी बुर में डालकर चोदना है,,,,।

निर्मला तेरा बेटा तो एकदम से उतावला हो गया भोसड़ी का पता नहीं पूरी रात टिक पाएगा कि नहीं,,,,

साली रंडी तुम दोनों को एक साथ चोदुगा ना फिर भी रात कम पड़ जाएगी तुम दोनों ही थक कर सो जाओगे लेकिन मेरा लंड वैसा का वैसा टन टन आकर खड़ा रहेगा,,,,

देखना कहीं ऐसा ना हो जाए कि जो गरजता है बरसता नहीं नहीं तो तू ही थक कर बिस्तर पर पड़ा रहेगा और हम दोनों तेरे लंड को खड़ा करने में पूरी रात गवा देंगे,,,।

तेरी बुर में कुछ ज्यादा ही आग लगी है साली तेरी बुर को सबसे पहले ठंडा करूंगा,,,।

( तीनों के ऊपर मत मस्त जवानी और बियर का सुरूर छाया हुआ था जिसकी वजह से तीनों एक दूसरे को गंदी गंदी गालियां देते हुए बातें कर रहे थे और इस तरह की बातें करने में उन्हें बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी वह तीनों इस तरह की बातें करके काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहे थे देखते ही देखते कमरा दिया गया शीतल कमरा खोल कर उन दोनों का स्वागत की निर्मला अभी भी अपने बेटे का लंड को पकड़ कर लगभग खींचते हुए कमरे में ले गई,,,।

धीरे से मादरचोद कहीं टूट गया ना तो दोनों अपनी बुर मसलते रह जाना,,,,

तेरी टूटे हुए लंड से भी चुदने में मजा आएगा,,,,( आंख मारते हुए निर्मला अपने बेटे से बोली तो शुभम अपनी मां का हाथ पकड़कर अपनी तरफ एकदम से खींचकर उसे अपनी बाहों में ले लिया और बोला,,,।)

साली मादरचोद तेरी जवानी कुछ ज्यादा ही शोर मचा रही है (और इतना कहते हुए शुभम तुरंत अपने होंठ को अपनी मां के होंठ पर रखकर चूसना शुरू कर दिया.... निर्मला भी अपनी बेटी के लंड को पकड़े पकड़े काफी गरमा गई थी वह भी कसके अपनी बाहों में अपने बेटे को भरते हुए उसका साथ देने लगी शुभम का लंड उसकी जांघों के बीच रगड़ खा रहा था जिससे निर्मला को अद्भुत सुख का अनुभव हो रहा था,,,। शीतल भी कहां पीछे रहने वाली थी वह अपने हाथों से ही अपने छोटे से ड्रेस को निकाल फेंकी देश के अंदर उसने ब्रा नहीं पहनी थी इसलिए उसकी नंगी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह इधर-उधर हिलने डुलने लगी,, पर वह तुरंत शुभम के पीछे उसकी पीठ से चिपक गई शुभम को शीतल की बड़ी-बड़ी चूचियां का एहसास उसका स्पर्श अपनी पीठ पर होते ही वह पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डूबने लगा शीतल जानबूझकर अपनी चूचियों को उसकी पीठ पर रगड़ रही थी हालांकि यह एहसास शुभम को थोड़ा कम लग रहा था इसलिए वह अपने हाथ से अपनी शर्ट के बटन खोलने लगा और देखते ही देखते वह भी पूरी तरह से नंगा हो गया उसकी नंगी पीठ पर अपनी नंगी चूचियों को रगड़ कर शीतल बेहद उत्तेजित हुए जा रही थी,,,, निर्मला अपने बेटे के होठों का रस पीते हुए विकास नीचे की तरफ ले जाकर उसके लंड को पकड़ लिया और अपनी टांगों के बीच अपनी बुर वाली जगह पर उसके लंड के सुपाड़े को रगड़ना शुरू कर दी,,,,

आहहहहह,,, सुभम,,,,, ऊफफफ,,,,,,

अंदर लेने का मन कर रहा है ना मम्मी,,,

हारे बहुत मन कर रहा है कि तेरा लंड मेरी बुर की गहराई में अंदर तक जाकर छू जाए,,,,,,

ऐसा ही होगा मम्मी,,,,( ऐसा कहने के साथ ही शुभम अपनी मां के छोटे से ड्रेस पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठाने लगा और उसकी मां अपने बेटे का साथ देते हुए अपने दोनों हाथ ऊपर की तरफ उठा दी शुभम ने तुरंत अपनी मां के छोटे से ड्रेस को निकाल कर नीचे फर्श पर फेंक दिया,,, निर्मला ब्रा पेंटी दोनों पहनी हुई थी,,, लेकिन इतनी जल्दी सुबह मैं अपनी मां के बदन पर से उसकी आखरी वस्त्र को उतारना नहीं चाहता था इसलिए वह अपनी मां को एक बार फिर से अपनी बाहों में लेकर उसे चूमने लगा,,,, शुभम की कामुक हरकतों की वजह से निर्मला की सिसकारी छूट रही थी और शीतल अपनी बड़ी बड़ी चूचियों को अपने दोनों हाथ में लेकर उसे शुभम की नंगी पीठ पर रगड़ रही थी शीतल संपूर्ण रूप से एकदम नंगी थी,,, छोटे से ड्रेस के अंदर उसने पैंटी भी नहीं पहनी हुई थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि बेडरूम में चल कर उसे उतारना ही है इसलिए पहले से ही वह पैंटी को उतार फेंकी थी,,,

बेडरूम का माहौल पूरी तरह से गरमा चुका था,,, बेडरूम के अंदर की खिड़कियों के पर्दे लगे हुए नहीं थे लेकिन खिड़की के शीशे बंद थे,,,, लेकिन ऊंचाई पर होने की वजह से किसी से देखे जाने का डर बिल्कुल भी नहीं था इसलिए तीनों निश्चिंत थे,,,, बेडरूम के बीचो बीच किंग साइज का बेड लगा हुआ था जिस पर तीनों आराम से सो सकते थे और जिस दिन आए थे वह तीनों इसी बेड पर सोए भी थे,,,

ओहह,,, शुभम मेरे राजा मुझसे रहा नहीं जा रहा है मुझसे प्यार करें मुझे अपनी बाहों में ले ले मेरे रस निचोड़ दे औहहह शुभम,,,, मेरे राजा,,,,।

ऐसा ही होगा मेरी रानी तो बिल्कुल भी चिंता मत करो आज की रात में तुझे ऐसा सुख दूंगा तु जिंदगी भर याद रखेगी,,,

( इतना कहने के साथ ही शुभम अपनी मां के कंधों को पकड़कर इतनी जोर से दूसरी तरफ घुमाया की पलभर में ही निर्मला की पीठ शुभम की तरफ हो गई लेकिन निर्मला गिरते-गिरते बची थी तब तक शुभम उसे अपनी बाहों में लेकर अपने बदन से सदा लिया था,,,, पर ऐसा करने की वजह से निर्मला की बड़ी-बड़ी गांड शुभम के लंड से एकदम से टकरा गई थी,,,, और सुबह में उत्तेजित होता हुआ तुरंत अपनी दोनों हथेलियों को नीचे की तरफ ले जाकर अपनी मां की बड़ी-बड़ी जनों को पकड़कर उसे अपनी तरफ खींच लिया जिससे उसकी बड़ी बड़ी गांड एकदम से सट गई और शुभम का लंड उसकी गांड की बीच की दरार से छटक ते हुए सीधा नीचे की तरफ आ गया जहां से उसका सुपाड़ा निर्मला की बुर से स्पर्श होने लगी,,,,

ओहहहह, मां,,,,,,,( शुभम के लंड का सुपाड़ा निर्मला की बुर से स्पर्श होते ही निर्मला के मुख से आह निकल गई,,,। शुभम पागलों की तरह ब्रा के ऊपर से ही अपनी मां की बड़ी बड़ी चूचियों को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया,,, मीठे-मीठे दर्द के कारण निर्मला का पूरा बदन कसमसा रहा था और वह हल्की-हल्की सिसकारियां ले रही थी,,,, दोनों मां बेटों की कामुक हरकतों को देखकर शीतल भी पूरी तरह से मस्ती में आ गई थी,,, और वह शुभम के पीछे ही धीरे-धीरे उसके पीठ को चूमते हुए नीचे की तरफ बैठने लगी शीतल की आंखों के सामने शुभम की गांड थी और से देखते हैं शीतल अपने होठों को उसकी गांड पर रखकर चूमना शुरु कर दी यह शुभम के लिए पहला मौका था जब कोई औरत उसके नितंबों को अपने होठों से चूम रही थी,,, जिसकी वजह से शुभम पूरी तरह से उत्तेजित हो गया और अपनी पूरी उत्तेजना अपनी मां की बड़ी-बड़ी सूचियों पर उतारने लगा,,,, शीतल अपने होठों से अपना कमाल दिखा रही थी और शुभम अपनी मां की चूचियों को दबा दबा कर उस का रस निकालने में लगा था लगातार दर्द के मारे निर्मला के मुंह से गर्म सिसकारी निकल रही थी और शुभम उसकी नंगी पीठ को चूमते हुए अपने दांतो से उसकी ब्रा की पट्टी को पकड़ कर खींच दिया,,,, देखते ही देखते निर्मला के ब्रा का हुक खुल गया और उसकी खरबूजे जैसी भरपूर चूचियां बुरा की कैद से आजाद हो गई ब्रा जैसे ही उनकी चुचियों पर से ढीली हुई शुभम एक पल भी गंवाए बिना अपनी मां की ब्रा को उसकी गोरी गोरी बाहों में से निकाल फेंका और उसकी नंगी चूचियों को दशहरी आम की तरह अपने हाथों में पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया और लगातार अपने लंड की ठोकर उसके नितंबों के बीचो-बीच मार रहा था,,,

शीतल पागलों की तरह अपने दोनों हाथों में शुभम की गांड को पकड़कर दबाने के साथ-साथ उसके ऊपर अपने होठों का चुंबन छोड़ रही थी,,,, शीतल मदहोश होते हुए उसके नितंबों को हथेली में दबोच ते हुए अपना हाथ उसकी दोनों टांगों के बीच से आगे की तरफ ले गई तो तुरंत उसके हाथ में शुभम का टनटनाता हुआ लंड आ गया,,, फिर क्या था शीतल को तो जैसे मुंह मांगी मुराद मिल गई,,,, शीतल के तन बदन में आग लगी हुई थी वह किसी पॉर्न मूवी का सीन दोहराते हुए शुभम को इशारों में ही अपनी दोनों टांगों को फैलाने के लिए खुली और शुभम भी अपने दोनों टांगों को फैला लिया और देखते ही देखते शीतल उसकी दोनों टांगों के बीच से निकलते हुए बैठे-बैठे ही शुभम के लंड से खेलते हुए उसे अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,,,

आहहहहहहह,,,, गजब अद्भुत अतुल्य बेहद मादकता से भरा नजारा कमरे के बीचो बीच दर्शाया जा रहा था अगर कोई इस नजारे को देख ले तो उसे यही लगे कि पोर्न मूवी की शूटिंग चल रही है,,,,। शीतल और निर्मला दोनों किसी से कम नहीं थी दोनों अपने बेटे पर पूरी तरह से छाने की कोशिश कर रही थी,,, शीतल के सर के ऊपर ही निर्मला की बड़ी बड़ी गांड थी और शीतल अपनी लालच को रोक नहीं पाई और अपना दोनों हाथ ऊपर की तरफ करके दोनों हाथों से निर्मला की बड़ी-बड़ी गांव को पकड़ ली जो कि लाल रंग की पैंटी में लिपटी हुई थी,,,, शीतल का इस तरह से अपनी बड़ी बड़ी गांड का दबाना निर्मला को बेहद आनंदित कर जा रहा था,,,। निर्मला दोनों तरफ से मस्ती के सागर में गोते लगा रही थी,,,। शीतल रह-रहकर शुभम के पूरे समूचे लंड को अपने गले तक उतार कर कुछ सेकंड तक उसे अपने मुंह में लेकर वापस ऊगल दे रही थी,,,,

शुभम भी आनंद के सागर में गोते लगा रहा था उसके दोनों हाथों में उसकी मां की दशहरी आम थी जिसे दबा दबा कर आनंद की परिभाषा को इशारों में ही प्रकाशित कर रहा था और नीचे से अपनी कमर को हिलाता हुआ शीतल के मुंह को चोद कर संभोग सुख की तृप्ति का एहसास शीतल को दिला रहा था,,,, लगभग लगभग 3 नंगी हो चुके थे केवल शीतल के बदन पर ही मात्र छोटी सी पेंटी लिपटी हुई थी,,, तीनों को इस समय शिमला की कातिल ठंडी का अहसास तक नहीं हो रहा था वह तीनों वातावरण के विरुद्ध अपनी ही मस्ती में खोए हुए थे वातावरण की कातिल ठंडी निर्मला और शीतल की गर्म जवानी के आगे पिघलती हुई नजर आ रही थी,,,,

लगातार निर्मला के मुख्य कर्म से इस कार्यों की आवाज फूट रही थी जो कि पूरे कमरे को मादकता का एहसास दिला रही थी साथ ही शीतल का इस तरह से पोर्न एक्ट्रेस की तरह लंड चूसना नहले पर दहला साबित हो रहा था,,,, उसके दोनों हाथों में निर्मला की भारी-भरकम नितंबों का भार था जिसे वह अपनी हथेली में संभाले हुए दबा रही थी,,,

कैसा लग रहा है मम्मी,,,

बहुत मजा आ रहा है बेटा ऐसा लग रहा है स्वर्ग का सुख मिल रहा है सच शीतल नहीं आना कर हम दोनों को स्वर्ग का अनुभव करा दी बहुत मजा आ रहा है ऐसे ही दबाते रे,,,आहहहहहहह,,,आहहहहरहहह,,,

और तुझे कैसा लग रहा है शीतल रानी,,,,( ऐसा कहते हुए शुभम अपनी कमर आगे पीछे करके शीतल के मुंह को चोद रहा था शीतल अगर बोलना भी चाहे तो भी नहीं बोल सकती थी लेकिन यह बात शुभम भी अच्छी तरह से जानता था कि भले वह बोले या ना बोले उसे भी जन्नत का मजा मिल रहा था,,,।

मजा तीनों को आ रहा था शिमला में आकर शीतल और निर्मला के अंदर का रंडी पन बाहर आ रहा था, तभी तो शुभम की दोनों टांगों के बीच में आकर शीतल शुभम के मोटे तगड़े लंड को लॉलीपॉप की तरह अपने मुंह के अंदर बाहर कर रही थी और साथ ही निर्मला की बड़ी-बड़ी गांड को अपनी हथेली से दबा दबा कर उसे लाल टमाटर की तरह कर दी थी,,,, शुभम पागलों की तरह अपनी मां के दशहरी आम को दबा रहा था काफी देर तक दबाने की वजह से निर्मला की गोरी गोरी चुचीयां एकदम लाल टमाटर की तरह हो गई थी,,,, और उसके मुख से लगातार गर्म सिसकारी फूट रही थी,,,, शीतल के तन बदन में होते हैं ना इतना ज्यादा जोर मार रहा था कि उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसकी बुर में चीटियां रेंग रही थी वह एक हाथ से निर्मला की बड़ी बड़ी गांड को दबा रही थी और दूसरे हाथ से अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों को मसल रही थी और साथ ही अपने मुंह में शुभम के मुंसल को लेकर उस का आनंद उठा रही थी,,,, शीतल से रहा नहीं गया तो वह दोनों हाथों का सहारा लेकर निर्मला के बदन से उसका आखिरी वस्त्र उसकी चड्डी भी उतारने लगी जिसमें निर्मला पूरा सहयोग दे रही थी देखते ही देखते शीतल नहीं मिला की चड्डी उतार कर उसे भी पूरी तरह से नंगी कर दी,,,,

निर्मला की गांड पूरी तरह से नंगी होने के साथ ही,,, शीतल निर्मला की दोनों जांघों को पकड़ कर उसे फैलाने का इशारा की निर्मला भी उसका इशारा समझते हुए हल्के से अपनी दोनों टांगों को फैला दी जिससे टांगों के बीच की वह पतली दरार शीतल को एकदम साफ नजर आने लगी,,,, शीतल के तन बदन में आग लगी हुई थी जिंदगी में उसने जो अब तक नहीं की थी उसे करने का इरादा वह अपने मन में बना ली थी इसलिए शुभम के लंड को मुंह में डालकर चूसते हुए ही शीतल अपना एक हाथ निर्मला की दोनों टांगों के बीच ले जाकर हल्के से उसकी बीच की दरार को स्पर्श करने लगी शीतल की उंगली को अपनी बुर के पर महसूस करते ही शीतल पूरी तरह से उत्तेजित हो गई उसे समझ में नहीं आ रहा था किसी पर क्या करने वाली है और यही कश्मकश में शीतल अपनी बीच वाली उंगली को निर्मला की बुर में प्रवेश करा दी निर्मला की बुर पहले से ही काफी गीली हो चुकी थी जिसकी वजह से शीतल को अपनी उंगली डालने में जरा भी दिक्कत पेश नहीं आई लगभग लगभग शीतल ने अपनी आधी उंगली सीतल की बुर में डाल दी थी,,,,, और आधी उंगली बुर के अंदर जाते हैं निर्मला के मुंह से आह निकल गई और मुंह से आह निकलने के साथ ही निर्मला खुद अपने दोनों हाथों को शुभम के हाथों पर रखकर जोर से अपनी चूची को दबा दी,,,, यह निर्मला की तरफ से अपने तन बदन में हो रही हलचल को दबाने की कोशिश थी लेकिन जवानी की आग बुझने की जगह और ज्यादा भड़क जाती है और यही शीतल और निर्मला दोनों के साथ हो रहा था शीतल अपनी आधी ओवली निर्मला की बुर में डालकर भी संतुष्ट नहीं हुई तो अपनी दूसरी उंगली को उसकी बुर में डाल दी,,,,

आहहहहहहह,,, रे रंडी क्या कर रही है भोसड़ा चोदी,,,,आहहहहह,,, उंगली से ही मेरी बुर चोदने का इरादा है क्या तेरा,,,,?

साली कुत्तिया मेरा बस चले तो मैं खुद तेरी बुर में घुस जाऊं कितनी लाजवाब बुर है तेरी, तभी तो तेरा बेटा तेरे पीछे लट्टू बन कर घूमता है,,,, ना तू अपनी टांग खोल कर अपने बेटे को अपने बुर दिखाई होती और नआ यह दिन देखने को होता,,,,( शीतल शुभम के लड़के को अपने मुंह में से निकाल कर अपने दोनों उंगली को निर्मला की बुर में पेलते हुए बोली,,,, और मुंह में से लंड बाहर आते ही शुभम अपने लंड को हाथ में पकड़ कर उसके सुपारी को अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड की गहरी गहराई में ऊपर से नीचे तक रगड़ना शुरु कर दिया,,,,।

आहहहहहहह,,,,आहहहहह,,,,, शुभम मुझसे रहा नहीं जा रहा है अपने लंड को मेरी बुर में डाल दे मेरी बुर में आग लगी हुई है,,,,( निर्मला मदहोश होते हुए गरम सिसकारी लेकर अपने बेटे से बोली,,,, निर्मला की बातें सुनकर इसी तरह से रहा नहीं गया और वह शुभम के लड्डू को पकड़कर निर्मला की बुर पर उसके गर्म सुपाड़े को रखकर,, शुभम को बोली,,,।)

डाल दे शुभम अपनी मां की बुर में पूरा लंड,,,,

( निर्मला तो अपनी बेटे के लंड के सुपाड़े को अपनी बुर पर महसूस करते ही पूरी तरह से सुलग उठी,,, वह जल्द से जल्द अपने बेटे के लंड को अपनी बुर के अंदर गहराई में महसूस करना चाहती थी लेकिन शीतल की बात सुनकर और उसकी हरकत को देखते हुए शुभम बोला,,,।)

इतनी जल्दी नहीं डालूंगा मेरी रानी तेरी बुर में अभी तो तेरे बदन से खेलना है,,, चल आजा बिस्तर पर,,,,( इतना कहने के साथ ही शुभम अपनी दोनों भुजाओं में अपनी मां की मांसल कमर को दबोच ते हुए उसे अपनी गोद में उठा लिया और नरम नरम बिस्तर पर ले जाकर पटक दिया,,,

आहहहहहहह,,,,, धीरे से शुभम,,,,,( निर्मला अपने आप को संभालते हुए बोली और शुभम की ताकत को देखकर शीतल मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,,, निर्मला पीठ के बल लेटी हुई थी उसकी दोनों चूचियां पानी भरे गुब्बारों की तरह इधर-उधर लहरा रहे थे जिसे देखकर शुभम के मुंह में पानी आ रहा था,,,, शुभम को साफ नजर आ रहा था कि इस तन मर्दन के कारण उसकी मां की दोनों चूचियां टमाटर की तरह लाल हो गई थी,,,, शुभम मन में यह सोच कर मुस्कुरा रहा था कि वह काफी देर से अपनी मां की चूचियों पर मेहनत कर रहा था जिसका फल उसे मिल रहा था,,,,। तीनों संपूर्ण रुप से एकदम नंगे थे,,,, शीतल शुभम के करीब खड़ी थी,,, पर वह गहरी गहरी सांसे लेते हुए निर्मला के नंगे बदन को देख रही थी,,,। शीतल को गहरी सांसे लेते हुए देखकर शुभम अपनी मां की आंखों के सामने ही शीतल का हांथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा,,, और उसे अपनी बांहों में भरते हुए उसकी खरबूजे जैसी चुचियों को हाथ में लेकर दबाते हुए अपने होंठ को उसके होंठ पर रखकर चूसना शुरू कर दिया,,,,, इस दृश्य को देखकर निर्मला के मन में किसी भी प्रकार का एतराज नहीं था क्योंकि शिमला में आकर उसके सोचने का ढंग भी बदल चुका था वह भी पूरी तरह से मजे लेने के मूड में थी और इस बात से खुश थी कि उसके बेटे की वजह से उसकी सहेली को चुदाई का भरपूर सुख मिल रहा है जिसके लिए वह बरसों से तड़प रही थी,,,। तभी तो अपने बेटे को इस तरह से शीतल के खूबसूरत बदन से खेलते हुए देख कर उसे खुशी मिल रही थी और उत्तेजना के मारे शीतल अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर शुभम के लंड को पकड़ कर हिलाने लगी और यह देखकर निर्मला अपनी दोनों टांगे फैलाकर अपनी हथेली से अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों को मसलने लगी,,,, कुछ देर तक सीता के लाल-लाल होठों का रसपान करने के बाद शुभम अपना हाथ शीतल की दोनों टांगों के बीच ले जाकर उसकी बुर को स्पर्श करते हुए बोला,,,,,

अब देखना मैं अपनी मां को कैसे तृप्त करता हूं कैसे इसकी जवानी की आग बुझाता हूं,,,,।

( इतना कहने के साथ ही शुभम बिस्तर पर अपनी मां की तरफ आगे बढ़ा और देखते ही देखते उसकी दोनों टांगों को फैलाते हुए बोला,,,।)

अपनी टांगों को तो खोल दो मेरी रानी फिर देख यह तेरा राजा बेटा क्या करता है,,,,,।
 
( निर्मला पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डूबती चली जा रही थी उत्तेजना के मारे उसका गला सूख रहा था और अपने बेटे की बात सुनते हुए वह भी हल्के से और ज्यादा अपनी दोनों टांगों को फैला दी देखते ही देखते उसकी बुर की गुलाबी आंखें हल्का सा मुंह खोलकर शुभम का स्वागत करने लगी,,,, शुभम की आंखों के सामने उसकी मां की बुर तवे पर फूल रही रोटी की तरह लग रही थी,,,, और जैसे रोटी खाने की भूख एक भूखे इंसान में होती है उसी तरह से शुभम के अंदर भी अपनी मां की बुर में पूरी तरह से समय पर अपनी भूख मिटाने की भूख और ज्यादा बढ़ती जा रही थी इसलिए देखते ही देखते अपने घुटनों के बल आगे बढ़ा और अपनी मां की कमर पकड़कर,,, अपने प्यार से होठों को अपनी मां की कचोरी जैसी फुली हुई बुर पर रख कर चाटना शुरू कर दिया,,,,, देखते ही देखते निर्मला के मुंह से गर्म सिसकारियो का सैलाब फुट पड़ा वह जोर-जोर से सिसकारी लेने लगी,,,,।

आहहहहहहह,,,आहहहहहहह,ऊईईईईईई मां,,,, ऊफफफ,,, मैं मर जाऊंगी औहहहहह शुभम यह क्या कर रहा है,,,,आहहहहहहह,( इस तरह की गरम सिसकारियां लेते हुए निर्मला अपना सर तकिए पर इधर-उधर पटक रही थी,,,, या देखकर शीतल की उत्तेजना बढ़ने लगी उसकी बुर फूलने की चटनी लगी और वह भी बिस्तर पर चढ़ गई,,, और देखते ही देखते निर्मला के सर के इर्द-गिर्द अपना घुटना टीका कर अपनी गुलाबी बुर को निर्मला के होठों के करीब ले गई,,,,, शीतल की हरकत को देखकर निर्मला अच्छी तरह से समझ गई कि उसे क्या करना है वह भी दोनों हाथ ऊपर की तरफ करके शीतल की कमर को थाम ली और उसके गुलाबी बुर के गुलाबी पत्तियों पर अपने होंठ रख कर उसे चाटना शुरू कर दी,,,,,

मादकता भरा यह दृश्य केवल पोर्न मूवी में ही देखा जा सकता था लेकिन शिमला के इस बंगले में निर्मला अपने बेटे के साथ मिलकर शीतल के साथ जवानी और संभोग का अद्भुत खेल खेल रही थी जिसे देखकर शायद पोर्न मूवी की एक्ट्रेस भी शर्मा जाए क्योंकि उन्हें तो बार बार रीटेक करना पड़ता है लेकिन इन दोनों को बिल्कुल भी रिटेक करना नहीं पड़ रहा था,,, दोनों अपने अपने तरीके से धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे,,, तीनों का यहां शिमला घूमने आना लगभग लगभग सफल होता नजर आ रहा था क्योंकि इस तरह का सुख उन तीनों ने अभी तक नहीं भोगा था इस तरह के दृश्य को तादृश्य करने की कल्पना में भी कभी नहीं सोचे थे,,,,

शुभम चप चप करके अपनी मां की कचोरी जैसी फूली हुई बुर को चाटने में लगा हुआ था,,, और निर्मला गरम सिसकारी लेते हुए शीतल की बुर को चाट रही थी बुर चाटने में कितना अद्भुत आनंद की प्राप्ति होती है निर्मला को इस समय बराबर पता चल रहा था तभी तो उसका बेटा दिन रात अपनी मां की बुर चाटने में लगा रहता था,,,,। कुछ देर तक शुभम अपनी मां की बुर की सेवा करने में जुटा रहा इसके बाद वह अपना मुंह अपनी मां की दोनों टांगों के बीच में से बाहर निकाल लिया और अपने लंड को हिलाते हुए आगे की तरफ बढ़ने लगा जहां पर शीतल घुटनों के बल बैठकर शुभम की मां को अपनी बुर चटाने में लगी हुई थी,,,,।

तुम हट जाओ सीतल रानी इसे मैं देखता हूं,, ऐसा कहते हुए शुभम घुटनों के बल आगे बढ़ते हुए अपनी मां के चेहरे के करीब पहुंच गया वह अपनी मां की दोनों चुचियों के इर्द-गिर्द अपना घुटना रखकर अपने लंड को हिलाते हुए अपने लंड को अपनी मां के खूबसूरत चेहरे पर पटकने लगा,,,

आहहहहहहह,,,,, धीरे से शुभम लगता है,,,।

जब तक मुंह में नहीं लेगी तब तक अपने लंड को ऐसे ही पटक ते रहूंगा,,,,,( इतना सुनते ही निर्मला अपने हाथ से अपने बेटे के लंड को पकड़ कर अपने मुंह में भर ली और उसे चूसना शुरू कर दी,,, और जैसे ही निर्मला ने अपने बेटे के लैंड को पूरा मुंह में लेकर चूसना शुरू करी,वेसे ही तुरंत शुभम के मुंह से गर्म सिसकारी फूट पड़ी ,,,,।)

आहहहहह,, मां,,,,,,,,( इतना कहते हुए एकदम मस्ती के सागर में डूबते हुए वह अपनी आंखों को मुंद दिया ऐसा लग रहा था कि जैसे वह स्वर्ग में घूम रहा हो,,,, अपनी मां के मुंह में लंड डालकर शुभम को जिस तरह का एहसास हो रहा था उसके चेहरे से शीतल को साफ पता चल रहा था शीतल को अच्छी तरह से समझ में आ रहा था कि शुभम को कितना ज्यादा मजा आ रहा है अपनी मां के मुंह में लंड डालकर,,, इसलिए वह बिस्तर पर खड़ी हो गई,,, और धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए अपनी कचोरी जैसी फूली हुई बुर को शुभम के होठों से लगा दी शुभम आंखों को बंद किया हुआ था लेकिन जैसे ही शीतल की गरमा गरम बुर को अपने होठों पर महसूस किया वैसे ही उसकी आंख खुल गई और अपनी नजरों को ऊपर करके शीतल की तरफ देखा और शीतल भी उसकी तरफ देखें दोनों की नजरें आपस में टकराई,,, पल भर में ही दोनों के तन बदन में मदहोशी अपना असर कर गई और शुभम अपने पैसे होठों के बीच से अपनी जीभ निकालकर शीतल की बुर को चाटना शुरू कर दिया,,, शुभम कटोरी में भरी खीर की तरह शीतल की बुर को चाट रहा था और उसमें से निकल रहा मदन रस अपनी जीत के सहारे अपने गले के नीचे उतार रहा था नमकीन स्वाद से भरा हुआ शीतल की बुर का मदन रस शुभम को इस समय अमृत के समान लग रहा था जिसकी एक बूंद भी व नीचे नहीं गिरने देना चाह रहा था,,, गजब का नजारा बिस्तर पर बना हुआ था इतनी गर्माहट भरे दृश्य से पूरा कमरा गरमा चुका था,,,। केवल बिस्तर पर का नजारा अगर कोई अपनी आंखों से देख ले तो उसे यकीन नहीं होगा कि यह नजारा शिमला की कातिल ठंडी का है क्योंकि तीनों संपूर्ण लगना अवस्था में एक दूसरे के अंगों से मजा ले रहे थे और ठंडी का अहसास तीनों को बिल्कुल भी नहीं हो रहा था बल्कि घर से बाहर निकलते ही बिना गर्म कपड़ों के बदन में ठंडी प्रवेश कर जाने का डर सत प्रतिशत बना हुआ था लेकिन इन तीनों को शिमला की ठंडी बेअसर लग रही थी इसमें इन तीनों का बिल्कुल भी दोष नहीं था क्योंकि शीतल और निर्मला की दहेकती जवानी के आगे शिमला की ठंडी घुटने टेक दे रही थी,,,,।

निर्मला मदहोश होकर अपने बेटे के लंड को पूरा का पूरा गले तक उतार दे रही थी और शीतल शुभम के बालों को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर हल्के हल्के अपनी कमर को उसके मुंह पर चला रही थी और शुभम पागलों की तरह जहां तक हो सकता था वहां तक अपनी जीभ को शीतल की दूर में डालकर उसकी मलाई को चाटने में लगा हुआ था,,,, तीनों पूरी तरह से मदहोश हुए जा रहे थे तीनों की गरम सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थी साथ में शीतल और निर्मला के कलाइयों में रंग बिरंगी चूड़ियाो की खनक माहौल को पूरी तरह से मादकता से भर दे रही थी,,,

निर्मला से रहा नहीं जा रहा था उसकी बुर में आग लगी हुई थी जल्द से जल्द वह अपने बेटे का लंड को अपनी बुर की गहराई में महसूस करना चाहती थी,,,,इसलिए अपने बेटे के लंड को अपने मुंह में से बाहर निकाल दी और लगभग हांफते हुए बोली,,,,

शुभम मेरे राजा अब मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है मुझसे मेरी जवानी की गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही है अब जल्द से जल्द तू अपने मोटे लंड को मेरी बुर में डाल दे,,,,,

(शुभम भी मौके की नजाकत को अच्छी तरह से समझ रहा था वहजानता था कि घंटों सेवा अपनी मां के खूबसूरत बदन से खेल रहा था ऐसे में उसकी मां का पूरी तरह से चुदवासी हो जाना लाजमी था,,,शुभम को भी अब महसूस हो रहा था कि उसके लंड को उसकी मां की बुर में जाना बेहद जरूरी है क्योंकि उसके लंड की भी हालत खराब होती जा रही थी और शीतल भी इसी पल का बेसब्री से इंतजार कर रही थी अपनी गुलाबी बुर चटवा चटवा कर उसमें भी लंड लेने की तड़प बढ़ती जा रही थी,,,।

अब शुभम भी पूरे मामले को अपने हाथ में ले लेना चाहता थावह अच्छी तरह से समझ गया था कि उसके घर के आगे शीतल और उसकी मां घुटने टेक दि थी,,,,इसलिए शुभम भी बिल्कुल भी देर न करते हुए अपनी मां की दोनों टांगों के बीच अपने लिए जगह बनाने लगा,,,।

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शिमला की कड़कड़ाती ठंडी में कमरे का माहौल पूरी तरह से गरमा चुका था,,,, शिमला में आकर उन तीनों की दूसरी रात थी और दूसरी रात से ही तीनों की सुहागरात की शुरुआत हो रही थी,,, सुहागरात इसलिए कि तीनों प्लान बनाकर शिमला में यही करने आए थे इसलिए एक तरह से इन तीनों का सुहागरात ही थी,,,। किंग साइज बेड पर शुभम शुभम की मां और सीतल तीनों संपूर्ण रूप से अपने वस्त्र का त्याग करके एकदम नग्न अवस्था में संभोग क्रिया की ओर अग्रसर हुए जा रहे थे,,,,

सर्वप्रथम शुभम संभोग की शुरुआत अपनी मां की चुदाई से करने जा रहा था इसलिए वह अपना संपूर्ण चार्ज अपनी मां की दोनों टांगों के बीच ले लिया था,,, निर्मला की भारी भरकम भराव दार,,, बड़ी बड़ी गांड की वजह से शुभम को अपनी मां की गांड के नीचे नरम नरम तकिया लगाने की कोई भी आवश्यकता जान नहीं पड़ रही थी,,,, बिना तकिया लगाए ही निर्मला की रसीली बुर शुभम के मस्त लंड के सिधान पर आ रही थी,,,, लेकिन फिर भी शुभम अपनी बाकी मदमस्त गांड के नीचे अपने दोनों हाथ को ले जाकर उसकी बड़ी बड़ी गांड को अपनी हथेलियों में दबोचते हुए उसे अपनी तरफ खींच कर उसकी दोनों मोटी मोटी जांगो को अपनी जांघों पर चढ़ा दिया,,,,,

आहहहह,, बेहद आह्लादक दृश्य था,,, अपनी ही मां के साथ शुभम की कामुक हरकतों को देखकर शीतल की हालत खराब हुए जा रही थी,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी जिस अंदाज से वह अपनी मां को बिस्तर पर लिटा कर उसकी बड़ी-बड़ी जांघों,,,को अपनी जांघों पर उसके नितंबों को पकड़कर अपनी तरफ खींचते हुए चढ़ाया था उसकी यह ताकत देखकर उत्तेजना के मारे शीतल की बुर पानी छोड़ रही थी,,,, निर्मला के मुंह से एक शब्द भी नहीं पूछ रहे थे उत्तेजना के मारे उसके गाल एकदम लाल टमाटर की तरह हो गए थे वह गहरी गहरी सांसे लेते हुए शुभम की तरफ देख रही थी जिसकी आंखों में उसकी जवानी की मदहोशी साफ झलक रही थी,,, अपने बेटे की आंखों में उभरते हुए वासना को देखकर निर्मला अच्छी तरह से समझ गई थी कि आज की रात भर उसकी बुर के नमकीन रस को अपने लंड से पूरी तरह से नीचोड़ लेगा,,,,, शुभम की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी इस समय शुभम अपनी मां के संपूर्ण नंगे वजूद को अपनी जांघों पर चढ़ाया हुआ था उसकी आंखों के सामने उसकी मां की रसीली कचोरी की तरह खुली हुई पूरी नजर आ रही थी जिसमें से चटनी रूपी मदन रस बाहर निकल रहा था और उस रस को देखकर शुभम के मुंह में पानी आ रहा था,,,। शुभम का लंड निर्मला की बुर की पतली दरार के ऊपर पूरी तरह से लेट कर शायद आराम कर रहा था,,, शुभम के मोटे तगड़े लंबे लंड के नीचे उसकी मां की बुर का संपूर्ण वजूद दबा हुआ था,,,,, निर्मला की पुर के ऊपर लेटे हुए सुमन के लंबे तगड़े लंड को देखकर शीतल शायद मन ही मन में अंदाजा लगा रही थी कि शुभम का लंड बुर में घुसने के बाद कहां तक जाता है जो कि निर्मला की नाभि तक लंड का सुपाड़ा पहुंच रहा था यह देखकर शीतल अंदर ही अंदर सिहर उठी,,,,

शुभम की आंखों में खुमारी साफ झलक रही थी वह अपनी हथेली से अपनी मां की चिकनी जांघों को सहला कर अपने अंदर उत्तेजना का सैलाब पैदा कर रहा था यह बिल्कुल ऐसा ही था जैसे कि गुब्बारा फुलाने से पहले अपने मुंह में ढेर सारी हवा भरना पड़ता है तब जाकर गुब्बारा का असली आकार नजर आता है ठीक उसी तरह से शुभम भी अपनी मां की चुदाई के पहले अपने अंदर पूरी तरह से उत्तेजना की चिंगारी को भड़का देना चाहता था इसीलिए वह अपनी मां की गोरी गोरी चिकनी चारों को हल्के हल्के सहलाते हुए उसे बीच-बीच में दबोच दे रहा था,,,, जिससे निर्मला की आह निकल जा रही थी,,, निर्मला से शुभम के लंड को अपनी बुर के ऊपर इस तरह से लेटना बर्दाश्त नहीं हो रहा था उसका बदन पूरी तरह से कसमसा रहा था,,, हल्के हल्के उसकी कमर ऊपर की तरफ ऊठ बैठ रही थी,,,, यह देखकर शुभम अपना दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां की चिकनी कमर को दोनों हथेलियों में दबाकर अपनी तरफ खींच लिया,,,,

आहहहहहहह ,,,,,, ऐसे ही तड़पा कर मेरे बदन में आग लगाता रहेगा या इसे बुझाएगा भी,,,,

बुझा दूंगा मेरी जान पहले तेरे बदन से खेल तो लेने दे,,, तू इतनी खूबसूरत है कि जितना भी तेरे बदन से खेलूं जी नहीं भरता,,,,( ऐसा कहते हुए शुभम एक हाथ में अपना लंड पकड़ कर उसे अपनी मां की बुर पर पटकना शुरू कर दिया उसके लंड के मोटे छुपाने की चोट से अपनी गुलाबी बुर की पत्तियों पर साफ महसूस हो रही थी जिसकी वजह से वह हल्के दर्द के मारे अपना सिर दूसरी तरफ घुमा ली और हल्की सी सिसकारी उसके मुंह से निकल गई,,,,।)

शुभम इतना मत तड़पा तेरी मां को देख तेरा लंड अंदर लेने के लिए कैसे तड़प रही है,,,,।

थोड़ा तड़पेगी तभी तो ज्यादा मजा लेगी,,,, देखना आज ऐसी चुदाई करूंगा कि जिंदगी भर याद रहेगा,,,,( इतना कहकर शुभम अपने मुंह से थूक निकाल कर अपने नंबर पर लगाने ही वाला था कि उसे रोकते हुए शीतल बोली,,,।)

अरे मेरे राजा जब मैं हूं तो अपने लंड पर थूक लगाने की क्या जरूरत है,,,,( इतना कहने के साथ ही शीतल शुभम की तरफ आगे बढ़ी और उसके लंड को अपने हाथ में लेकर अपने मुंह में डालकर से चूसना शुरू कर दी और अच्छे से अपने थुक से उसके लंड को एकदम भिगो डाली,,,, और फिर से शुभम के लंड को बाहर निकाल दी,,, और शुभम को आंखों से इशारा करते हुए उसके लंड को पकड़कर निर्मला की बुर की गुलाबी पतियों के बीच रख दी,,,।

अब डाल दे बड़े आराम से जाएगा,,,,,

( शीतल एकदम स्वच्छंद हो चुकी थी एकदम खुले मन की एकदम चंचल जोकि शुभम के लंड को अपने मुंह में डालकर उसे की ना करके निर्मला की बुर के लिए तैयार कर चुकी थी,,, शुभम भी अब एक पल की देरी करना नहीं चाहता था इसलिए धीरे-धीरे अपने लंड को अपने हाथ में पकड़ कर अपने लंड के सुपाड़े को उसकी गुलाबी बुर की पत्तियों के बीच में धंसाना शुरू कर दिया,,, देखते ही देखते शुभम को मोटा तगड़ा सुपाड़ा निर्मला की गुलाबी बुर की पत्तियों को चीरता हुआ अंदर समा गया जैसे-जैसे लंड का सुपाड़ा निर्मला को अपनी बुर के अंदर घुसता हुआ महसूस हो रहा था वैसे वैसे उसे अपने चेहरे का हाव भाव बदलता हुआ महसूस हो रहा था,,,, मीठा मीठा दर्द का एहसास उसके चेहरे पर साफ झलक रहा था,,, देखते ही देखते शुभम अपने समूचे लंड को अपनी मां की बुर की गहराई में उतार दिया,,,, पर अपनी मां की कमर पकड़कर अपनी कमर को हल्के हल्के हिलाना शुरू कर दिया,,,, शीतल अपनी फटी आंखों से सुभम के मोटे तगड़े लंड को निर्मला की बुर के अंदर बाहर होता हुआ देख रही थी,,।

शुभम के मोटे तगड़े लंड को इतनी आराम से निर्मला की कसी हुई बुर में आता जाता देख कर शीतल की खुद की बुर फुदकने लगी,,,, शीतल इतनी फतेह अधिक उत्तेजना का अनुभव कर रही थी कि वह खुद ही अपनी दोनों चुचियों को अपने हाथ से पकड़ कर दबाना शुरू कर दी,,,,

किंग साइज बेड के नरम नरम गद्दे पर घमासान मचा हुआ था,,,, शुभम एक लय में अपनी कमर को हिला रहा था,,,, शुभम का लंड जब निर्मला की बुर से बाहर आता तब शीतल को साफ तौर पर नजर आ रहा था कि निर्मला की मदन रस में शुभम का लंड पूरी तरह से नहाया हुआ था,,,। यह देखकर शीतल के मुंह में पानी आ रहा था,,, शुभम के हल्के हल्के धक्के के साथ भी निर्मला की बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह छातियों पर लहरा रही थी यह देख कर शीतल के मुंह में पानी आ गया और वह अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर शीतल की चूचियां पकड़ ली और उसे जोर जोर से दबाना शुरू कर दी,,,

आहहहहहहह,,, शीतल ऐसे ही दबा जोर जोर से दबा मुझे बहुत मजा आ रहा है प्लीज शीतल इसे मुंह में लेकर पी,,,आहहहहह,,, मेरे दुद्दू को पी जा,,,आहहहहह,,,,, शीतल मेरी जान बिल्कुल भी देर मत कर इसे मुंह से लगा ऐसा कहते हुए निर्मला खुद अपनी दोनों चूचियों को पकड़ कर शीतल की तरफ आगे बढ़ाने लगी,,, शीतल तो पहले से ही मदहोश हो रही थी निर्मला की तरफ से इस तरह की बेशर्मी भरी हरकत को देखकर और उत्तेजना से भर गई तभी उसके दिमाग में एक युक्ति सूझी और वह निर्मला के चिकने पेट पर अपने नितंबों को रखकर बैठ गई,,, पर उसकी चुचियों को जोर जोर से दबाना शुरू कर दी शुभम की जबरदस्त चुदाई और स्तन मर्दन के द्वारा निर्मला पूरी तरह से सातवें आसमान में उड़ने लगी,,,। शुभम मदहोश हुआ जा रहा था उसकी कमर की रफ्तार बढ़ती जा रही थी उसके ठीक आंखों के सामने सीजर अपनी बड़ी बड़ी गांड उसकी मां के पेट पर रख कर बैठी हुई थी और उसकी चूचियों को दबा रही थी,,,,,

ओ मेरी जान शीतल रानी,,,, क्या मस्त कमर है तेरी,,,( ऐसा कहते हुए शुभम अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर शीतल की कमर को दोनों हाथों से थाम लिया और उसे अपनी हथेली में दबाना शुरू कर दिया,,,। औरत के गोरे गोरे बदन के हर एक हिस्से को अपनी हथेली में लेकर दबाने का भी अपना अलग मजा होता है यह बात शुभम अच्छी तरह से जानता था,,,, तभी तो शुभम की मजबूत हथेली में अपनी कमर को महसूस करते हैं शीतल के तन बदन में आग लग गई वह चाहती थी कि जिस तरह से शुभम उसकी मां की बुर में अपना लंड पेल रहा है उसी तरह से उसकी भी बुर में लंड पेले,,,, लेकिन शायद अभी अपनी बुर में शुभम के लंड को महसूस करने का समय बाकी था,,,,,,, शुभम भी शीतल और अपनी मां में से अपनी मां को ही अग्रिमता देते हुए सर्वप्रथम अपनी मां की ही बुर में लंड डालने का शुरुआत किया था क्योंकि हो सकता था कि अगर वासी पर की बुर में अपना लंड डालकर सबसे पहले की चुदाई करता है तो शायद निर्मला को बुरा लग सकता था,,,, लेकिन फिर भी मजा शीतल को भी बेहद आ रहा था कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिंदगी में इस तरह का मजा तभी ले पाएगी,,, और वह भी एक मां बेटे के साथ मिलकर,,,,

शीतल द्वारा स्तन मर्दन का कार्यक्रम जारी था,,, शुभम अपनी मां की बुर में लंड डालता हुआ हलकी हलकी चपत शीतल की गांड पर लगाना शुरू कर दिया शुभम की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी आंखों के सामने थी,,, शीतल की बड़ी-बड़ी मदमस्त गांड को देखकर उसकी आंखों में नशा छा रहा था,,, और यह सारा नशा शुभम अपनी मां की बुर पर उतार रहा था वह लगातार अपनी मां की बुर में लंड पेले जा रहा था जिसमें से फच्च फच्च की आवाज आ रही थी,,,

शीतल की गांड पर चपत लगा लगा कर शुभम ने शीतल की गांड को एकदम लाल कर दिया था,,, शुभम जैसे जैसे उसकी गांड पर चपत लगा रहा था वैसे वैसे शीतल के तन बदन में मदहोशी बढ़ती जा रही थी,,,,

आहहहहह आहहहहहहह,,,,, शुभम,,,,,

( शीतल चपत लगाने के नीचे दर्द से कराह उठती थी लेकिन वह अच्छी तरह से जानती थी कि शुभम के द्वारा चपत लगाने पर उसे भी मजा आ रहा था,,,,)

हाय मेरी रंडी मां तेरी गुलाबी बुर में बहुत नशा है रे,,,, साली के बुर में जितना जोर जोर से लंड पेलो मन ही नहीं भरता ना मेरा ना इसका,,,, साली एक नंबर की छिनार है,,,आहहहहह,,,, पर मैं बहुत खुश हूं ऐसी मम्मी पाकर इसने अपनी जवानी लुटा दी मेरे प्यार में,,,,।( ऐसा कहते हुए मैं शुभम जोर-जोर से अपनी कमर हिला रहा था,,,।)

साले मादरचोद अच्छा है कि तेरी जवानी की प्यास बुझा रही हूं वरना बाथरूम में बैठा बैठा मुठ मारता रहता,,,

सही कही मादरचोद मैं तो तेरा शुक्रगुजार हूं कि तूने अपनी गुलाबी बुर को मुझे सौंप दी,,,, नहीं तो सच में दूसरों की तरह मुझे भी अपने हाथ से लंड हीलाकर काम चलाना पड़ता,,,,।

ऐसी नौबत कभी नहीं आती मेरे राजा मैं थी ना तेरे लिए अपनी दोनों टांगें फैलाकर तुझे अपनी बुर के अंदर ले लेती,,,

तो अभी भी कौन सी देर हो गई है मेरी रानी फैला दी अपनी टांगों को और ले ले मुझे अपनी बुर के अंदर,,,आहहहहहहह,,,आहहहहरहहह,,,,

पहले अपनी मां की बुर में समा जा जो तेरी भी अपनी दोनों टांगें फैला है तेरा लंड़ अपनी बुर में ले रही है,,,।

( ऐसा कहते हुए शीतल जोर-जोर से निर्मला की चूचियों को दबाना शुरू कर दिया और दर्द से कराहने की आवाज निर्मला के मुंह से आने लगी,,,।)

तुम दोनों के भोंसड़े में घुसुंगा लेकिन बारी-बारी से,,, मेरी छम्मक छल्लो पहले अपनी बुर का रस मुझे पिला दे ,,,(ऐसा कहते हैं वह सुबह में अपने दोनों हाथ से उसके बड़ी-बड़ी ब्रांड को पकड़कर उठाने लगा शीतल झट से शुभम के इशारे को समझ गई और वह अपने हाथ की कोहनी के बल होकर अपनी गांड को एकदम हवा में उठा दी,,,, शीतल की कौन हवा में लहराते हुए ठीक शुभम के मुंह के सामने आ गई,,, अपने प्यासे होठों के ठीक सामने शीतल की मदमस्त गांड को देखकर शुभम का जोश बढ़ गया उसकी प्यास जाग गई और वह अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर तुरंत शीतल की बड़ी बड़ी गांड को अपने हाथ में थाम लिया और अपने होठों को उसकी बुर की गुलाबी पत्तियों पर रख कर चाटना शुरू कर दिया,,,,,, शुभम पागलों की तरह अपनी मां की बुर में धक्के लगा रहा था और साथ ही शीतल की बुर को अपने होठों से चाट रहा था शीतल के तन बदन में आग लगी हुई थी वह निर्मला की बड़ी बड़ी चूचियों को अपने दोनों हाथों में थाम कर दशहरी आम की तरह बारी-बारी से दोनों चुचियों को पीना शुरू कर दी,,,, शुभम की बलिष्ठ भुजाओं में शीतल और निर्मला खुद को पिघलता हुआ महसूस कर रहे थे,,,,, निर्मला भी अपने दोनों हाथों को ऊपर की तरफ लाकर शीतल के झूलते हुए खरबूजे को अपने हाथ में पकड़ ली और उसे दबाना शुरू कर दी दोनों एक दूसरे की चूचियों को दबा कर मजा ले रही थी,,,, शुभम अपनी रफ्तार को बिल्कुल भी कम नहीं कर रहा था ऐसा लग रहा था कि अपनी मां की बुर को शिमला की रात की पहली चुदाई में ही भोसड़ा बना देगा,,,, जो भी हो निर्मल अपने बेटे की जबरदस्त चुदाई से पूरी तरह से संतुष्ट नजर आ रही थी,,,,

बंगले के बाहर बर्फ गिरना जारी था ऐसे में सोसाइटी के सभी लोग अपने अपने कमरे में हीटर जलाकर ठंडे मौसम में अपने कमरे को गर्म करने की पूरी कोशिश करते हुए नींद की आगोश में सो चुके थे लेकिन इस कमरे का दृश्य दूसरे कमरों से बिल्कुल भिन्न था इस कमरे में हीटर जी बिल्कुल भी जरूरत नहीं थी क्योंकि,,,, शीतल और निर्मला की गर्म जवानी पूरे कमरे को गर्म करने में हीटर का काम कर रही थी,,, कड़कड़ाती ठंड में भी तीनों बिना वस्त्र के एकदम नंगे किंग साइज बेड पर जवानी का मजा लूट रहे थे बल्कि अपनी मां की जबरदस्त चुदाई करते हुए शुभम के माथे पर पसीने की बूंदें उपस आई थी,,,। अपनी मां की चुदाई का मजा लेते हुए बुर चटाई का आनंद भी ले रहा था,,,, शीतल मदहोश होते हुए अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे की तरफ शुभम के चेहरे पर पटक रही थी जिसकाका आनंद लेते हुए शुभम भी जोर जोर से शीतल की गांड पर चपत लगा रहा था,,,,,आहहहहह आहररररहह ऊऊहहहहह ,,,ऊईईईई मां कि गर्म सिसकारियों के साथ-साथ शीतल और निर्मला के कलाइयों की चूड़ियों की खनक से पूरा कमरा मादकता से भरता चला जा रहा था,,,,।

सोसाइटी में हर घर के हर एक कमरे में कभी-कभार या तो फिर नए जोड़ें हो तो कुछ दिन के लिए रोज-रोज चुदाई का खेल तो चलता रहता है लेकिन किसी को कानों कान भनक तक नहीं थी कि इस घर में दो औरत और एक जवान लड़कए की चुदाई चल रही है,,, पर वह भी उनमें से एक मां बेटा हैं,,,,, तभी तो शीतल शिमला लेकर आई थी दोनों को मजे करने के लिए ताकि अगर कोई देख भी लें तो फिर भी कोई फिकर ना हो,,,,

अपनी मां की गुलाबी बुर की चुदाई और शीतल की बड़ी-बड़ी गांड को पकड़े हुए उसकी बुर की चटाई शुभम के होश उड़ा रही थी एक साथ दोनों की बुर को चोदना चाहता था इसलिए बिना बोले ही वह शीतल की गांड को पकड़कर नीचे की तरफ जाने लगा शीतल को समझ में नहीं आया कि सुबह क्या करने वाला है बस वजह से जैसे उसकी गांड पर दबाव दे रहा था वैसे वैसे अपनी कमर को नीचे की तरफ ला रही थी,,,, शुभम ठीक अपने लंड की सामने शीतल की बुर को ले आया और अब थोड़ा सा तो उसकी बुर पर लगाकर अपने लिए जगह बनाने लगा हालांकि इस दौरान भी उसकी कमर चल रही थी और वह अपनी मां को चोद रहा था,,,, देखते ही देखते वह एक हाथ से अपना लंड पकड़ कर अपनी मां की पुर से बाहर खींच लिया,,,, जैसे ही निर्मला को अपनी बुर में से लंड बाहर निकलता हुआ वह महसूस हुआ वह पागलों की तरह अपना सिर उठाकर शीतल की दोनों टांगों के बीच से अपने बेटे के लंड को देखने लगी,,, जोकि शुभम अपने लंड को शीतल की बुर पर एडजेस्ट कर रहा था,,,, शीतल गहरी सांसें लेते हुए उत्सुकता वस पीछे की तरफ सुभम की हरकत को देख रही थी उसका दिल जोरों से धड़क रहा था,,, क्योंकि मैं समझ गई थी कि सुभम अब एक साथ दोनों की बुर को चोदना चाहता है,,,, देखते ही देखते शुभम अपना पूरा लंड शीतल की बुर में डाल दिया,,, शीतल को दर्द का अनुभव होने लगा क्योंकि उत्तेजना में ऐसा लग रहा था कि जैसे शुभम का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा हो गया है,,, लेकिन थोड़ी ही देर में उसे मज़ा आने लगा,,,, शुभम शीतल को चोद रहा था और निर्मला शीतल की चूचियों को दबा रही थी दोनों को मजा आ रहा था नीचे से बिना कुछ बोले निर्मला अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठाकर बार-बार शुभम को उसकी बुर में लंड डालने का इशारा कर रही थी जो कि शुभम भी अच्छी तरह से समझ रहा था और अपनी मां के इशारे का मान रखते हुए व शीतल की बुर में से अपना लंड निकाल कर अपनी मां की बुर में पेल दिया,,, अब वह एक साथ दो दो बुर्का मजा ले रहा था औरत को वह एक साथ दोनों तरफ से चोद रहा था अपनी मां को आगे से चोद रहा था और शीतल को पीछे से चोद रहा था उसे बहुत मजा आ रहा था जिंदगी में पहली बार बार इस पोजीशन का भरपूर फायदा उठा रहा था,,,, जब जब वह अपनी मां की बुर में लंड डालकर उसे चोदता तब वह शीतल की बड़ी बड़ी गांड को पकड़कर ऊपर की तरफ उठा देता और उसकी बुर को चाटना शुरू कर देता और उस दौरान लगातार अपनी मां की बुर में अपना लंड पेलता रहता,,, और जैसे ही अपनी मां की बुर में से लंड निकालता तो शीतल की गांड को पकड़कर नीचे की तरफ ले आता और उसकी बुर में लंड डाल देता,,,

पूरे कमरे में तीनों की गरम सिसकारियां गूंज रही थी लेकिन इसी सिसकारी को सुनने वाला कोई नहीं था क्योंकि कमरा चारों तरफ से बंद था और खिड़कियों पर शीशा लगा हुआ था जिससे आवाज बाहर जाने की गुंजाइश बिल्कुल भी नहीं थी,,,, तीनों की सांसे तेज चल रही थी तीनों चरम सुख के बेहद करीब हो गए थे,,,

शीतल की सांसे और तेज चलने लगी और उसके मुंह से गरम सिसकारी के साथ-साथ,,, गालियां निकलने लगी,,,।

मादरचोद भोसड़ी वाले और जोर जोर से धक्के लगा फाड़ दे मेरी बुर को मेरी बुर का भोसड़ा बना दे,,,,आहहहहहहह,, मेरे राजा क्या मस्त चोदता है रे तू और जोर जोर से चोद मेरा निकलने वाला है,,,।

तू बिल्कुल भी चिंता मत कर रंडी छिनाल,,, आज मैं अपने लंड से तेरी बुर को चोद चोद कर पानी पानी कर दूंगा,,, साली हरामजादी बहुत आनंद लेने का शौक है ना तेरा आज तेरा शौक पूरा कर दूंगा,,,

शुभम की गाली देते हुए जोर-जोर से अपने लंड को शीतल की बुर में डालने लगा और अगले हई भलभलाकर पानी छोड़ दी शीतल पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी थी,,,, उसकी जवानी की आग शांत हो चुकी थी लेकिन शीतल की गर्म जवानी को बुझते हुए देखकर निर्मला की बुर में कुछ ज्यादा ही सोले भड़क रहे थे,,, वह बार-बार अपनी कमर ऊपर की तरफ उठा दे रही थी शीतल को निपटाने के बाद,,, शुभम अपनी मां की कमर को थाम ता हुआ बोला,,,।

तू चिंता मत कर भोंसड़ी की आज तेरी बुर को भोसड़ा बना दूंगा,,,( इतना कहते हुए सुबह में एक बार फिर से अपनी मां की बुर में समा गया और उसकी कमर को थामे हुए उसको चोदना शुरू कर दिया,,, शुभम के धक्के इतनी जबरदस्त थी कि किंग साइज का बेड भी चरमरा रहा था,,, शीतल अभी भी उसी तरह से निर्मला के ऊपर छाई हुई थी उसकी दोनों चूचियों को दबा रही थी देखते ही देखते 15 20 धक्कों में ही निर्मला का पानी निकल गया और शुभम भी चरम सुख के बेहद करीब था उसका भी पानी निकलने वाला था वजह से ही उसे एहसास हुआ कि उसका पानी निकलने वाला है इस बार वह अपनी मां के अंदर अपना पानी ना डालते हुए लंड को बाहर निकाल लिया और अपने लंड का पानी शीतल के पिछवाड़े पर गिराना शुरू कर दिया,,,।

चुदाई की पहली पारी समाप्त हो चुकी थी रात के 12:00 बज रहे थे लेकिन अभी भी रात बाकी थी,,,।

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पहली बारी समाप्त हो चुकी थी दूसरी इनिंग शुरू करने के लिए,,, तीनों को थोड़ी एनर्जी की जरूरत थी,,, तीनों एक ही बिस्तर पर निर्वस्त्र अवस्था में पड़े हुए थे तीनों अपने बदन की गर्मी को अपने-अपने नाजुक अंगों से बाहर निकाल फेंके थे,,,, शीतल के पिछवाड़े पर शुभम का माल गिरा हुआ था जिसे वह,,, पास में पड़ी पेंटी उठाकर साफ करने लगी अभी भी तीनों की गहरी गहरी सांसे चल रही थी,,, सांसो की गति के साथ निर्मला की बड़ी-बड़ी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी शीतल भी उसके बगल में लेट गई थी,,,, उसकी भी दोनों चूचियां सांसो की गति के साथ ऊपर नीचे हो रही थी शुभम पलंग पर बैठे हुए नीचे पैर लटका कर गहरी गहरी सांसे लेता हुआ अपने लंड को देख रहा था जिसमें से अभी भी शीतल और उसकी मां का मदन रस चु रहा था,,,,।

औहहह मम्मी सच में मजा आ गया,,,, पहली बार एक साथ दो औरत को चोद कर इतना मजा आया है कि पूछो मत,,, ऊफफफ,,, अभी भी पूरे बदन में गनगनाहट हो रही है,,,आहहहह,,,, कितना मजा आ रहा था एक की बुर में डालकर फिर दूसरे की बुर में डालो,,, आंखों के सामने दो दो नंगी औरत किस्मत वालों को यह सब मिलता है दो दो बड़ी-बड़ी गोरी गोरी गांड,,,, क्या किस्मत पाई है मैंने,,,।

( शुभम एकदम खुश होकर बोले जा रहा था और उसे खुश होता हुआ देखकर निर्मला के साथ-साथ शीतल भी प्रसन्न हो रही थी,,,, शीतल अपनी दोनों टांगे फैलाकर अपनी हथेली को अपनी बुर की गुलाबी पत्ती पर रखकर रगड़ते हुए बोली,,,,।)

हमें भी तो बहुत मजा आया शुभम मैं तो कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी कि किसी मर्द के पास ऐसा लैंड भी होगा जो एक साथ दो दो औरतों की प्यास बुझाएगा,,, वरना यहां तो दो-दो नंगी औरत को देखते ही सामने वाले का पानी निकल जाए लेकिन तू तो पक्का मर्द है एक साथ मेरी ओर खुद की मां की बुर की प्यास मिटा दिया,,,, अच्छा एक बात बताना शुभम क्या तू अपने लंड की सरसों के तेल से मालिश करता है क्या,,,?

नहीं तो ऐसा कुछ भी नहीं है,,,( शुभम अपने लंड को पकड़ कर उसपे लगे दोनों औरतों के मदन रस की बूंदों को गिराने के लिए झटक ते हुए बोला,,,।)

कुदरती ताकत से भरपूर है मेरे बेटे का लंड,,,,,( निर्मला गहरी सांस लेते हुए बोली,,)

सच में निर्मला तू किस्मत वाली है जो तुझे शुभम जैसा बेटा मिला,,,,

तो तू भी पैदा कर ले शुभम जैसा,,,।

इतने साल तो गुजर गए मां बनने की उम्मीद धुंधली होती जा रही है,,, अब नहीं लगता कि मैं कभी मां बन पाऊंगी,,,

( शीतल उदास होते हुए बोली लेकिन अभी भी वह अपनी गुलाबी बुर की पतियों को अपनी हथेली से मसल रही थी,,।)

भगवान की मर्जी के आगे किसका बस चलता है,,,( निर्मला शीतल को सांत्वना देते हुए बोली,,,, शुभम यह सब सुन रहा था लेकिन उनकी बातों का उस पर जरा भी फर्क नहीं पड़ रहा था,,,। दीवार पर टंगी घड़ी में 12:00 बज रहे थे,,,,,, बाहर पूरी तरह से सन्नाटा छाया हुआ था शुभम उसी तरह से बिस्तर पर से उठा और खिड़की के करीब पहुंच गया जहां से उसे बाहर का नजारा साफ नजर आ रहा था बाहर अभी भी बर्फ गिर रही थी,,,, बाहर गिर रही बर्फ को देखकर शुभम भी हैरान था कि बाहर कड़ाके की ठंडी पड़ रही थी लेकिन कमरे के अंदर वह और उसकी मां और शीतल बिना कपड़ों के एकदम नंगे बिस्तर पर लेटे हुए थे शुभम को इस बात का एहसास हो गया कि वाकई में औरत के बदन की गर्मी बर्फ के पहाड़ को भी पिघला सकती है,,, वह मन ही मन खुश था इस बात से कि उसकी मां बहुत खूबसूरत और जवान बदल की मालकिन थी जिसका वह भरपूर मजे ले रहा था,,।

शुभम खिड़की पर खड़ा होकर बाहर का नजारा देख रहा था और शीतल और निर्मला शुभम की तरफ देख रहे थे शुभम का हट्टा कट्टा गठीला बदन दोनों को मनमोहक लगता था उसकी चौड़ी छाती मजबूत बाहें मोटी कसी हुई जांगे और उसके गोलाकार नितंब शीतल और निर्मला दोनों को भाता था,,,। और शुभम की सबसे ज्यादा खास चीज उसकी टांगों के बीच लटकता हुआ उसका धारदार खंजर जिसकी चोट जानलेवा तो नहीं लेकिन जिंदगी का असली सुख का मजा दे जाती थी,,,, और वही लटकता हुआ खंजर शीतल और निर्मला दोनों का पसंदीदा अंग था,,,। शिमला आकर तीनों में जबरदस्त बदलाव आया था,,,। निर्मला तो अपनी इस बदलाव से काफी खुश और संतुष्ट नजर आ रही थी वह मन ही मन सोच भी रहे थे कि जिंदगी का असली मजा तो इसी तरह से आता है,,,।

शीतल लगातार अपनी बुर को मसल रही थी,,, और बुर को मसलते मसलते उसे जोरों की पेशाब लग गई,,,, कमरे में भी बाथरूम की सुविधा उपलब्ध थी इसलिए ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं थी और इसलिए शीतल बिस्तर पर से उठी और नंगी ही बाथरूम की तरफ जाने लगी,,, निर्मला को नहीं मालूम था कि वह मुतने जा रही है इसलिए वह बोली,,,।

कहां जा रही है शीतल,,,?

मुतने जा रही हूं बड़े जोरों की आई है,,,, करना हो तो तू भी आजा,,,,( इतना कहकर शीतल बाथरूम में घुस गई और दरवाजा बंद कर ली,,,, शीतल के मुंह से मुतने वाली बात सुनकर शुभम के बदन में एक बार फिर से गर्मी छाने लगी,,, शीतल की बात का असर निर्मला पर भी हो रहा था वह भी अपनी दोनों टांगों के बीच अपना हाथ ले जा करके अपनी गुलाबी कचोरी को मसलने लगी,,, शुभम अपनी मां की हरकत को देख कर उसकी तरफ मुंह कर लिया और अपने नितंबों को खिड़की के दीवार से सटा दिया और बड़े आराम से अपनी मां की कामुकता भरी हरकत को देख रहा था,,, बाथरूम के अंदर शीतल के मन में खुराफात चल रही थी वह बाथरूम के अंदर ठीक दरवाजे के सामने बैठी हुई थी दरवाजे की तरफ गांड करके,,,, तभी उसके मन में खुराफात उठी और वह हाथ ऊपर की तरफ लाकर दरवाजे की कुंडी खोल कर दरवाजा खोल दी,,,, दरवाजा खोलने की आवाज के साथ ही शुभम और निर्मला दोनों की नजर बाथरूम में गई तो बाथरूम के अंदर का नजारा देखकर दोनों दंग रह गए,,,, शीतल उन दोनों की आंखों के सामने बैठकर पेशाब कर रही थी उसकी बड़ी बड़ी गांड ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में और भी ज्यादा चमक रही थी,,,,

यह नजारा देखते ही शुभम के तन बदन में खलबली मचने लगी पल भर में ही ढीला हो रहा लंड टाइट होना शुरू हो गया,,,, शीतल की बड़ी बड़ी गांड और उसे पेशाब करते हुए देखकर निर्मला के टांगों के बीच सुरसुरी पैदा होने लगी,,,।

शुभम से रहा नहीं गया और वह बाथरूम की तरफ जाने लगा,,, इतना कुछ शीतल के साथ उसकी मां की आंखों के सामने हो जाने के बाद अब शुभम को नहीं लगता था कि कुछ भी करने के लिए उसकी मां की इजाजत नहीं पड़ेगी क्योंकि उसकी मां की भी सहमति शामिल थी,,,।

औरत को पेशाब करता हुआ देखना शुभम की सबसे बड़ी कमजोरियों में से एक थी अब तो कुछ नहीं ना जाने कितनी औरतों को इस तरह से अपनी बड़ी बड़ी गांड दिखाते हुए पेशाब करते देख चुका है और ज्यादातर औरतें उसे खुद पेशाब करते हुए अपनी बड़ी-बड़ी गांड का नजारा दिखाती थी उनमें से अब शीतल भी एक थी,,,,। शीतल कामुक नजरों से पेशाब करते हुए पीछे की तरफ देख रही थी,,,।

पर शीतल की आंखों के सामने ही शुभम भी बाथरूम में प्रवेश कर गया,,,, भला निर्मला कहां पीछे रहने वाली थी कामुकता भरे नजारे को देख कर उसके तन बदन में भी खलबली मची हुई थी उसे रानी क्या हुआ बिस्तर से उठ कर देखते ही देखते ही अपनी बड़ी बड़ी गांड को मटकाते हुए बाथरूम के अंदर पहुंच गई,,,,।

आहहहहह अद्भुत अतुलनीय बेमिसाल जबरदस्त नजारा बाथरूम के अंदर बना हुआ था शीतल अभी भी बैठी हुई थी ठीक उसके बगल में निर्मला खड़ी थी और उन दोनों के सामने शुभम खड़ा था जिसका लंड अब दोनों मटकती गांड को देखकर खास करके शीतल को पेशाब करता हुआ देखकर एकदम खड़ा हो गया था,,,,।

तुम दोनों को भी पेशाब लग गई क्या,,,?

गांड खोलकर मुतोगी तो,, भला अपने आप पर कोन काबू कर पाएगा,,,, मुझसे तो रहा नहीं किया तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड और साथ में तुम्हारी बुर से निकल रही सीटी की आवाज सुनकर मैं पागल हो गया और तुम्हारे पीछे पीछे बाथरूम में आ गया शायद मम्मी भी तुम्हारी मदमस्त गांड देखकर अपने आप को संभाल नहीं पाई और इधर आ गई,,,( शुभम अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला,,,।)

तू सच कह रहा है शुभम वैसे तो मुझे पेशाब नहीं लगी थी लेकिन शीतल को इस तरह से अपनी गांड दिखाते हुए पेशाब करते हुए देखकर मुझको भी प्रेशर आ गया,,,,

तो देर किस बात की है पेशाब करना शुरू करो,,,,

( इतना कहने के साथ ही शुभम अपनी खड़े लंड में से पेशाब की धार मारने लगा,,, लेकिन निर्मला के मन में कुछ और चल रहा था आज बैठकर पेशाब नहीं करना चाहती थी आज कुछ और करना चाहती थी उसे अपने बेटे के लंड में से पेशाब निकलता हुआ साफ नजर आ रहा था,,, यह देखकर निर्मला की बुर कुलबुलाने लगी,,,, शीतल का भी यही हाल था व नीचे बैठे हुए ही शुभम की तरफ देख रही थी जो कि अपने खड़े लंड को अपने हाथ में लेकर जोर-जोर से हिलाता हुआ पेशाब कर रहा था उसके झूलते हुए लंड को देखकर शीतल के घुटनों में कपकपी दौड़ गई,,,, पर उसे दर्द महसूस होने लगा तो वह खड़ी हो गई,,,।

निर्मला क्या करने वाली है यह दोनों को नहीं पता था निर्मला अपनी बेटे को पेशाब करते हुए और खास करके उसके हिलते हुए लंड को देखकर पूरी तरह से कामोत्तेजना से भर चुकी थी,,,, शुभम ठीक है अपनी मां के सामने खड़ा था निर्मला की आंखों के सामने उसके बेटे का लंड था जो कि ठीक उसकी बुर के सिधान पर था,,, निर्मला बिल्कुल भी देर नहीं करना चाहती थी उसके अंदर भी बराबर का प्रेशर बना हुआ था और वह अपने बेटे की आंखों में झांकते हुए अपनी गुलाबी बुर की गुलाबी पत्तियों के बीच से अमृतमयी पेशाब की धार अपने बेटे के लंड पर मारने लगी,,,,,आहहहहह गजब,,,,( अपने खड़े लंड पर अपनी मां के पेशाब की धार को महसूस करते ही शुभम के मुंह से एकाएक निकल गया वह पूरी तरह से तृप्त हो चुका था एक अद्भुत एहसास से उसका पूरा बदन कसमसा ने लगा था निर्मला के साथ-साथ शुभम के लिए भी यह पहला मौका था जब दोनों इस तरह की उत्तेजनात्मक स्थिति से गुजर रहे थे पहली बार शुभम अपने लंड के ऊपर किसी औरत के पेशाब की धार को गिरते हुए देख रहा था और वह भी अपनी ही मां की बुर से निकल रहे पेशाब की धार को यह नजारा देखकर शीतल के तन बदन में आग लग गई निर्मला अपने बेटे से चुदवाती है यह बात तो वह हजम कर ले गई थी लेकिन निर्मला कि इस तरह की कामुकता उससे बिल्कुल भी हजम नहीं हो रही थी वह तो पूरी तरह से मदहोश होने लगी शायद यह निर्मला पर बियर का और मदहोश जवानी का असर था जो कि वह इतनी ज्यादा खुल चुकी थी,,,, निर्मला की आंखों में खुमारी साफ नजर आ रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह बीयर नहीं बल्कि चार बोतलों का नशा करके बैठी हो,,,, अपने बेटे की तरफ देखकर मदहोशी में वह मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,,,, शीतल के तन बदन में आग लगी हुई थी शुभम अब अपने लंड को हिला नहीं रहा था बल्कि अपनी मां की बुर में से निकल रही पेशाब की धार ठीक उसके लंड पर ही गिरे इसलिए ठीक से अपने लंड को पकड़े हुए था,,,। निर्मला अपनी उत्तेजना को काबू में नहीं कर पा रही थी,, अपने दहकते होठों को अपने बेटे के प्यासे होंठों के करीब ले जाकर उसके होंठ को अपने होंठों में दबा कर चूसना शुरु कर दी,,,,

आहहहहह,,,, ऊफफफ,,,,, यह नजारे को देखकर शीतल के मुंह से गर्म सिसकारी फूट रही थी वह अपनी बुर को मसलते हुए गोल गोल अपने नितंबों को घुमा रही थी,,, उसे भी रहा नहीं गया पेशाब कर चुकी थी लेकिन मां बेटे दोनों की कामुकता भरी हरकत को देख कर उसे भी प्रेशर आने लगा और वह भी अपने पेशाब की धार को शुभम के लंड पर मारने लगी दोनों के पेशाब की धार इतनी तेज थी कि शुभम का लंड ऊपर नीचे हिल जा रहा था लेकिन बेहद आनंद की अनुभूति भी उसे हो रही थी यह तीनों के लिए अद्भुत एक अविस्मरणीय एहसास की तरह,,,,। निर्मला जिस तरह से अपने बेटे के होंठों को चूस रही थी शुभम पूरी तरह से पागल हो गया उसके ऊपर मदहोशी जाने लगी और अब अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां की नंगी चूची को पकड़कर दशहरी आम की तरह दबाना शुरू कर दिया देखते ही देखते वह अपनी मां को अपनी बाहों में ले लिया हालांकि अभी भी दोनों के नाजुक अंगों में से पेशाब की धार फूट रही थी,,,, शुभम अपनी मां के लाल लाल होठों को चूसता हुआ अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ ले जाकर उसकी बड़ी बड़ी गांड को मसलना शुरू कर दिया शुभम के तन बदन में इतनी ज्यादा उत्तेजना फैल गई थी कि अब उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था,,,,

दोनों मां-बेटे की उत्तेजना को देखकर शीतल के तन बदन में आग लगी हुई थी वह खुद ही अपनी बुर को मसल रही थी,,, देखते ही देखते सुबह अपनी मां की गांड को मसलता हुआ उसे बाथरूम में दीवार के करीब ले जाकर दीवार से सटा दिया,,, शुभम अपने लिए पूरी तरह से पोजीशन बना लिया था,, वह अपनी मां की दोनों टांगों को पकड़ कर दीवार से सट आए हुए हैं उसकी मोटी मोटी टांगों को अपनी कमर से लपेट लिया था,,,,
 
एक बार फिर से शीतल शुभम की ताकत और उसकी तेजी को देखकर मंत्रमुग्ध हो गई थी अभी भी सीतल शुभम की भरपूर मर्दाना ताकत को समझ नहीं पाई थी,,,।

शुभम पूरी तरह से तैयार था अपनी मां की बुर में लंड डालने के लिए लेकिन अभी भी उसकी मां की बुर से पेशाब की धार निकल रही थी,,, शुभम पेशाब सहित अपनी मां की रसीली बुर में अपना लंड पेल दिया और उसे चोदना शुरू कर दिया,,, शिमला की कड़कड़ाती ठंडी में वह अपनी मां की भरपूर चुदाई कर रहा था,,, निर्मला का संपूर्ण बदन खास करके उसकी बड़ी बड़ी गांड शुभम के दोनों हाथों के बीच झूल रही थी और शुभम के खुंटे का सहारा पाकर वह एकदम डटी हुई थी,,, शुभम का हर धक्का निर्मला को जन्नत की सैर करा रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे शुभम उड़न खटोला बनकर अपनी मां को उस पर बिठाए हुए हवा में लेकर उड़ रहा हो,,,, दोनों की मजबूत मांसल जाएंगे जब एक दूसरे से टकराती थी तो उनमें से ऐसी मधुर मादक आवाज आती थी मानो कि कोई तबला वादक बहुत ही ताल में तबला बजा रहा हो,,,, शुभम की हर थाप पर निर्मला की आह निकल जा रही थी जो कि बेहद मधुर संगीत की तरह मादक लग रही थी शीतल पूरी तरह से हैरान थी शुभम की मजबूत भुजाओं की ताकत को देखकर शीतल अपनी आंखों से देख रही थी कि कैसे शुभम अपनी मजबूत भुजाओं में अपनी मां की भारी-भरकम शरीर को उठाए हुए खूटे की तरह उसकी बुर में लंड पेल रहा था,,,।

और उसे उठाने में शुभम को जरा भी दिक्कत नहीं आ रही थी यह देखकर शीतल के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी उसकी बुर कुलबुलआने लगी,,,, एक अजीब सा एहसास शीतल को अपनी बुर के अंदर महसूस हो रहा था वह अपनी बुर की तरफ नजर झुका कर देखी तो एकदम कचोरी की तरह खुली हुई थी जो कि उत्तेजना के मारे फूल पीचक रही थी,,,।

धीरे-धीरे घड़ी अपनी धुरी में घूम रही थी एक बजने वाला था लेकिन तीनों की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी,,, उत्तेजना के मारे निर्मला का गला सूखता जा रहा था उसकी आहा के साथ उसके चेहरे की रंगत हर पल बदलती जा रही थी उत्तेजना के मारे उसका गोरा गाल सुर्ख लाल हो चुका था,,,,

और जोर जोर से चोद मादरचोद बड़ा दम है तेरे में भोसड़ी के और जोर-जोर से पेल मेरी बुर में अपना लंड,,,,

साली रंडी इतनी जोर जोर से चोद रहा हूं फिर भी तुझे कम पड़ रहा है रुक अभी बताता हूं,,,,।

इतना कहने के साथ ही शुभम जोर जोर से धक्के लगाने लगा इतनी जोर जोर की निर्मला की जांघों के मांस का घेराव पानी में फेंके गए कंकड़ की तरह पानी की तरह लहर मार रहा था,,, यह देखकर शीतल की हालत खराब हो रही थी जिस जोश के साथ शुभम अपनी मां को चोद रहा था और जिस शिद्दत से निर्मला अपने बेटे से चुदवाया ही थी यह देखकर शीतल के पसीने छूट जा रहे थे,,, वाकई में इस तरह का सीन उसने आज तक पोर्न मूवीस में भी नहीं देखी थी आज आंखों से पोर्न मूवी से भी जबरदस्त और बेहद काम उत्तेजना से भरपूर नजारा देखकर वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,,। वह शुभम की तरफ आगे बढ़ी है और उसके नितंबों पर हाथ रखकर उसे हल्के हल्के दबाते हुए बोली,,,।

तुम मां बेटे की चुदाई देखकर मेरी बुर में चीटियां रेंग रही है,,, शुभम मुझे भी अपनी बुर में तुम्हारा लंड लेना है मेरी बुर से पानी फेंक रहा है,,,,,( इतना कहने के साथ ही शीतल इतनी ज्यादा चुदवाती हो गई थी कि शुभम के ठीक पीछे अपने बदन को सटाकर उसके नितंबों के बीचो बीच अपनी समोसे जैसी फूली हुई बुर को उसके नितंबों से रगड़ना शुरु कर दी यह एहसास शीतल के साथ-साथ शुभम के लिए भी अद्भुत था उसकी कचोरी जैसी फूली हुई बुर उसके नितंबों से रगड़ खा रही थी जिसका एहसास शुभम को बराबर हो रहा था,,,, और इस अद्भुत अहसास से भर कर वह अपनी मां की बुर में और जोर से लंड पहनने लगा देखते ही देखते निर्मला की सिसकारी की आवाज तेज हो गई और शुभम अपनी मां की बुर में लंड पेलता हुआ बोला,,,।

शीतल मादरचोद रंडी मेरी छिनार तेरा नंबर भी आएगा तेरी बुर में भी अपना लंड ऐसा पेलूंगा कि तू जिंदगी भर याद रखेगी,,, साली रंडी बस अपनी बुर को मेरी गांड से रगडते रहे मुझे गर्माहट दे,,,,,( इतना सुनते ही सीतल और भी उत्तेजना के साथ अपनी बुर को उसके नितंबों पर रगड़ने लगी,,,,,) आहहहह,,,आहहहहहहह,,,, शीतल मेरी जान तूने तो मुझे मस्त कर दिया रे बस,,, अपनी मां को निपटा दूं

तब तुझको भी रगडुंगा,,,,,

जल्दी से निपटा अपनी मां को मादरचोद मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,,आहहहहह,,,आहहहहहह शुभम मेरे राजा मेरे सरताज बहुत मजा आ रहा है मुझे,,,,( ऐसा कहते हुए शीतल उत्तेजना के मारे जिस तरह से शुभम जोर जोर से अपनी कमर हिला था वह अपनी मां को चोद रहा था उसी तरह से शीतल भी अपनी कमर को आगे पीछे करके शुभम के नितंबों को चोदने लगी,,, निर्मला भी यह सब अपनी आंखों से देख रही थी उसे भी शीतल की हरकत बेहद ऊन्मादक लग रही थी,,,। निर्मला मदहोश हुए जा रही थी,,,

वह अपनी रसीली जीभ से अपने प्यासे तपते हुए होठों को चाट रही थी यह देखकर शुभम अपने होंठ अपनी मां के लाल लाल होंठ पर रखकर चूसना शुरू कर दिया और लगातार उसे चौदे जा रहा था,,, शीतल की सहेली जो कि इस समय अमेरिका में ही रहती थी वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि शीतल शिमला घूमने के बहाने उसके बंगले का उपयोग अपनी वासना बुझाने के लिए चुदाई का खेल खेलने के लिए करेगी,,,,।

ससहहहहह आहहहहहहह ,ऊमममममम, ऊफफफ,,,,ओहहहह, शुभम,,आहहहहहहह,आहहहहहहह,,

इस तरह की गरम सिसकारीयो से पूरा बाथरूम गूंज रहा था,,,

ओहहहह,,, मेरे राजा मेरा बेटा मेरा राजा बेटा मेरा होने वाला है मेरा पानी निकलने वाला है बेटा और जोर से पेल आहहहहहहह मेरा बेटा और जोर जोर से धक्के लगा,,,,

अपनी मां की गरम सिसकारियां की आवाज के साथ साथ उसकी बातें सुनकर शुभम समझ गया कि उसकी मां चढ़ने वाली है इसलिए वह बराबर से अपनी मां की दोनों टांगों को पकड़कर अपनी दोनों हथेली से उसकी कमर को दबोच लिया और बराबर दीवार से सटाकर और जोर जोर से धक्के लगाकर चोदना शुरू कर दिया शुभम के थक्के इतनी तेज थे की निर्मला से सहन नहीं हो रहा था लेकिन उसका हर एक तक का उसे स्वर्ग का सुख दे रहा था और देखते ही देखते निर्मला झड़ने लगी,,, और झड़ने के साथ ही उसकी बुर की मांसपेशियां शुभम के लंड को अपनी बुर के अंदर ही जकड़ने लगी,,,, जिस तरह से उसकी मां झड़ रही थी उसका एहसास शुभम को और भी ज्यादा उत्तेजित कर रहा था उसका लंड पूरी तरह से उसकी बुर की अंदरूनी दीवारों के बीच फंसा हुआ था लेकिन फिर भी शुभम की ताकत बुर में लंड को अंदर बाहर करने में सक्षम हो रही थी,,,। वह पूरी तरह से झड़ चुकी थी उसका गला उत्तेजना के मारे सूख चुका था लेकिन फिर भी शुभम इतने ज्यादा उत्तेजित था कि अपने लंड को अपनी मां की बुर में से बाहर नहीं निकाल रहा था और उसी में पेले जा रहा था,,, और पीछे उसके नितंबों पर अपनी बुर रगड़ रही शीतल उस की चुदाई देखकर तड़प रही थी,,,,

बस करो सुबह कुछ मेरे लिए भी बचाओगे या तुम भी झड़ जाओगे,,,,

ले आजा रंडी तू भी नंबर लगाए खड़ी है,,,,( निर्मला अपने बेटे के हाथ में से अपनी टांग को निकालकर नीचे रखते हुए बोली,,,) तेरी बुर में बहुत आग लगी है,,,,।

बहुत लगी है तू तो अपनी आग बुझा ली,,,,( इतना कहने के साथ ही शीतल आगे की तरफ आने लगी और निर्मला हटकर दूसरी तरफ खड़ी हो गई उसकी सांसे अभी भी तेजी से गहरी गहरी चल रही थी जिसे दुरुस्त करते हुए फिर मिला दो कदम पीछे हट कर आराम से दीवार से पीठ सटा कर खड़ी हो गई,,,, उत्तेजना के मारे शुभम का लंड दिल की धड़कन की तरह धड़क रहा था उसमें से निर्मला का मधुर रस नीचे टपक रहा था,,,। शुभम निर्मला का हाथ पकड़कर उसे अपने आगे लेने लगा इस बार वह शीतल को अपनी भुजाओं के सहारे गोद में नहीं उठाया बल्कि उसका मुंह दीवार की तरफ करके उसकी बड़ी-बड़ी गांड को अपनी तरफ खींच लिया,,, और शीतल शुभम के हाथों का खिलौना बनते हुए जैसे जैसे वह उसके बदन को अपने हिसाब से झुकाता गया ठीक वैसे ही सीतल अपने बदन को उसके हिसाब से एडजस्ट करने लगी देखते ही देखते शीतल की मदमस्त बड़ी बड़ी गांड शुभम की आंखों के सामने और शुभम के मोटे तगड़े लंड के सिधान पर आ गई,,,, सबसे खूबसूरत और मदमस्त बदन की मल्लिका निर्मला की चुदाई करने के बाद भी शुभम ज्यो का त्यों डटा हुआ था,,, उसके लंड में जरा भी ढीलापन नहीं आया था यही तो शुभम की खासियत थी,,,,। आधी रात से ज्यादा का समय हो रहा था और ऐसे में दोनों मां-बेटे और शीतल बाथरूम के अंदर जवानी का मजा लूट रहे थे शीतल तो अपनी किस्मत पर इतराने लगे थे क्योंकि वह कभी नहीं सोची थी कि उसकी जिंदगी में इतना अद्भुत सुख उसे से प्राप्त होगा,,,,।

शीतल पीछे की तरफ नजरें करके शुभम की हरकत को देख रही थी जो कि इस समय अपने लंड को खिलाता हुआ उसकी तरफ आगे बढ़ रहा था और देखते ही देखते उसकी गुलाबी पुर की गुलाब की पत्तियों के बीच रखकर अपने दोनों हाथ से उसकी भारी-भरकम नितंबों को पकड़कर अपनी कमर पर दबाव देता हुआ उसे आगे की तरफ फैलने लगा पहले से ही मलाई से गीली हो चुकी शीतल की बुर में लंड का स्वागत करने लगे और देखते ही देखते उसका स्वागत करते हुए उसे अपने शयन कक्ष के अंदर उतार ली,,, जहां पर ढेर सारी तपन और गर्मी महसूस हो रही थी और यही तो एक रास्ता था शिमला की कड़कड़ाती ठंडी से बचने के लिए,,,, शिमला की कड़कड़ाती ठंडी में एक यही एक ऐसी सुरंग की गुफा थी जिसके अंदर दुनिया भर का सुकून और शांति मिलती थी,,,। किसी कातिल ठंडी में जीवन को रक्षण मिलता था शुभम अपने मोटे तगड़े नंबर को शीतल की गर्माहट बड़ी सुरंग में डालकर अपनी जिंदगी को एक नया आयाम दे रहा था जिसमें शुभम को तो सुकून मिल रहा था लेकिन शीतल को भी तृप्ति का एहसास हो रहा था इस सुख के आगे औरतों को और मर्दों को दुनिया का हर सुख फीका लगता था और फिर क्या था अभी जिंदगी में औरत और मर्द को अगर संभोग सुख प्राप्त ना हो तो उसका जीवन व्यर्थ होता है,,,। और इस समय मां बेटे और शीतल तीनों अपने जीवन को सार्थक करते हुए चुदाई का भरपूर आनंद लूट रहे थे शुभम को औरतों की पीछे से चुदाई करने में बेहद आनंद की प्राप्ति होती थी और शायद औरत को भी इस पोजीशन में चुदवाने का परम आनंद महसूस होता था क्योंकि इस पोजीशन में लंड पूरी तरह से बुर की गहराई नाप लेती है,,,।

शुभम का लंड इस समय शीतल की दूर की गहराई नापते हुए उसके बच्चेदानी में चोट लगा रहा था जिससे शीतल का आनंद दोगुना हो जा रहा था,,, बच्चेदानी पर लंड का ठोकर लगना यह अद्भुत एहसास सीतलपुर शुभम से मिलने के बाद ही महसूस हो रहा था वरना इस बारे में वह कभी सोची भी नहीं थी कि इस तरह का सुख भी होता है औरत की जिंदगी में जो कि मर्दों पर ही आधारित रहता है वरना शीतल की बुर की चुदाई शुभम के लंड से आधा भी नहीं होगा,,, ऐसे अधूरी लंड से चुदाई कर भला शीतल अपनी जवानी को कैसे अपने काबू में रख पाते फिर भी बड़ी हिम्मत करके इतने साल तक शीतल अपनी जवानी को बरकरार रखे हुए थे उस पर दाग लगने नहीं दी थी लेकिन शुभम के आगे वह पूरी तरह से अपने दामन बिछा दी थी,,,।

शुभम का हर एक जबरदस्त धक्का शीतल को अद्भुत सुख से भर दे रहा था शीतल पीछे खड़ी दीवार से अपनी पीठ सताए हुए इस अद्भुत दृश्य का लुफ्त उठा रही थी उसके मुंह से एक भी शब्द नहीं कर रहे थे क्योंकि शुभम इतना जबरदस्त सीकर की चुदाई कर रहा था कि निर्मला के पास बोलने लायक शब्द नहीं बचे थे ऐसा लग रहा था कि मानो बल्लेबाज क्रीज पर पूरी तरह से चमके और सामने वाली टीम के परखच्चे उड़ा रहा हो,,, हर बोल को अपने बल्ले से चौका छक्का लगा रहा हो,,, शीतल शुभम की इस अद्भुत पारी से पूरी तरह से निहाल हो चुकी थी,,,, शीतल के पास बोलने के लिए एक भी शब्द नहीं बचे थे बस उसके मुंह से शब्द की जगह गर्म सिसकारी की आवाज फुट रही थी शुभम के धक्के इतनी तेज थे की शीतल की गांड एकदम लाल हो चुकी थी,,,, बड़ी शिद्दत से शुभम का मोटा तगड़ा लंबा लंड शीतल की बुर की गहराई नाप कर बाहर आ रहा था,,, पर देखते ही देखते शीतल का भी काम तमाम हो गया शीतल के झड़ने के तुरंत बाद शुभम भी झड़ गया,,,,,

तीनों को मजा आ गया था तीनों तृप्त हो चुके थे एक बार फिर तीनों एक साथ पेशाब करके बाथरूम से बाहर आ गए शीतल तो बिस्तर पर पढ़ते ही एकदम चारों खाने चित हो गई निर्मला का भी यही हाल था लेकिन शुभम बिल्कुल भी थका नहीं था,,,। शीतल थोड़ी ही देर में गहरी नींद में सो गई बहुत पेट के बल सोई हुई थी जिससे उसकी बड़ी बड़ी गांड छत की तरफ उभरी हुई नजर आ रही थी,,,। निर्मला कि पूर्व में हल्का हल्का दर्द हो रहा था इसलिए वह अपनी दोनों टांगे फैलाकर नींद की आगोश में चली गई थोड़ी देर बाद शुभम बिस्तर पर से उठा और एक नजर दीवार पर टंगी घड़ी पर डाला तो रात के 3:00 बज रहे थे,,,। शीतल की बड़ी बड़ी गांड देखकर शुभम के लंड में एक बार फिर से तनाव आने लगा,,,, एक बार फिर से अपनी मां के दोनों टांगों के बीच जगह बनाने लगा लेकिन उसकी मां उसे नींद में ही हटाते हुए बोली,,,।

सो जा सुभम मुझे नींद लग रही है,,,,

( शुभम बेमन से अपनी मां की बात को मानते हुए वह भी रजाई खींचकर तीनों पर ओढा दिया और अपना एक हाथ अपनी मां की दोनों टांगों के बीच मेंले जाकर अपनी मां की बुर सहलाते हुए नींद की आगोश में चला गया,,,, इसी तरह से शुभम शुभम की मां और शीतल तीनों रोज चुदाई का मजा लेते रहे,,, कब 1 सप्ताह बीत गया यह उन्हें भी पता नहीं चला इस बीच वह तीनों ने पूरा सिमला घूम लिया था,,, लेकिन इस बीच शुभम को एक भी मौका नहीं मिला था कि वह घर की नौकरानी शांति की बुर में अपना लंड डाल सकें शांति भी शुभम के लंड के लिए तड़प रही थी,,,,।)

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तीनों शिमला में आकर संपूर्ण रुप से संतुष्टि का अहसास और एक नयापन महसूस कर रहे थे 1 सप्ताह के अंदर ही तीनों जिंदगी का असली मजा लूट चुके थे,,, शुभम अपनी जिंदगी से बेहद खुश नजर आ रहा था एक हाथ में लड्डू तो दूसरे हाथ में पेड़ा था,,, शुभम बारी-बारी से अपनी मां और शीतल दोनों की मदमस्त जवानी को अपने हाथों से लुट रहा था,,,।

ऐसे ही 1 दिन दोपहर के 2:00 बज रहे थे,,, शुभम काफी उत्साहित नजर आ रहा था क्योंकि उसकी पेंट में बवंडर उठ रहा था उसे घर से बाहर जाना था और शीतल और उसकी मां आराम कर रहे थे तीनों ड्राइंग रूम में ही थे सोफे पर एक तरफ निर्मला तो दूसरे सोफे पर शीतल लेटी हुई थी,,, शुभम बार-बार खिड़की से बाहर झांक रहा था बाहर हल्की हल्की बर्फ गिर रही थी मौसम एकदम ठंडा और सुहावना नजर आ रहा था,,,। निर्मला अपने बेटे की कुतुहुलता को समझ नहीं पा रही थी,,, वह अपने बेटे से बोली,,,।

शुभम आराम कर ले बेटा रात को फिर जागकर मेहनत ही करनी है,,,।

आराम हराम है मम्मी,,,( शुभम खिड़की से बाहर झांकता हुआ बोला,,।)

क्या,,,,( निर्मला आश्चर्य जताते हुए बोली,,।)

मेरा मतलब है कि मम्मी यहां पर हम घूमने आए हैं और इसका से सोकर आराम करते रहे तो मतलब ही क्या रहेगा,,,

तो,,,( निर्मला फिर से आश्चर्य से बोली,,,)

तो क्या मम्मी मुझे घूमना है,,,।

बाहर हल्की हल्की बर्फ गिर रही है,,,।

तो क्या हुआ मम्मी मुझे कुछ नहीं होने वाला ऐसी ही हल्की हल्की बर्फ में तो घूमने का मजा आता है,,,।

तो यहां के रास्ते से अनजान है कहां घूमेगा,,,

मैं सब जानता हूं मम्मी बस एक-दो घंटे में लौट आऊंगा आखिरकार इधर आया हूं कि थोड़ा बहुत घूमने का मजा तो ले लूं,,,,

जाने दे यार यह बच्चा नहीं है,,, थोड़ी देर घूम कर चला आएगा,,,( शीतल सोफे पर आधी नींद में लेटे-लेटे ही बोली,)

ठीक है लेकिन जल्दी आ जाना और मोबाइल लेकर जाना,,,( निर्मला भी अपनी तरफ से इजाजत देते हुए बोली शुभम एकदम खुश नजर आ रहा था वह जल्दी से अपना मोबाइल लेकर अपने पेंट की जेब में डाल लिया और एक ओवरकोट पहन लिया और माथे पर है लगा लिया था की गिरती हुई बर्फ से थोड़ी रक्षण हो सके,,,।)

थैंक्यू मम्मी मैं जल्दी लौट आऊंगा,,,( इतना कहने के साथ ही वह बाहर निकल गया,,, शुभम काफी खुश नजर आ रहा था अपने घर के गेट से बाहर निकलकर वह जैसे ही सड़क पर आया वह अपनी जेब में से एक कागज की चीट निकाला और उस पर लिखे हुए पते को पढ़ने लगा,,, शांति उसे कागज की चीज चोरी से हम आते हुए बता दी थी कि लगभग लगभग 15 मिनट का रास्ता पैदल चलने से था,,,, और आज सुबह ही वह शुभम के हाथों में अपना पता लिखकर कागज की पर्ची थमा दी थी,,,, क्योंकि शांति के भी तन बदन में शुभम को अपने अंदर महसूस करने की तड़प जाग रही थी,,, जिस तरह से वह उसका हाथ पकड़कर बड़े से पेड़ के पीछे ले गया था और अपनी मनमानी करते हुए उसकी साड़ी को कमर तक उठाकर उसे चोदने की पूरी तैयारी कर चुका था उसकी हिम्मत देखकर घर की नौकरानी शांति उस पर पूरी तरह से मेहरबान होने की ठान ली थी,,, शुभम की हिम्मत और मर्दाना ताकत से भरपूर उसके मजबूत अंग को देखकर उसे अपनी टांगों के बीच में सोच कर के वह पूरी तरह से शुभम के आगे अपने घुटने टेक दी थी,,, अगर कार की लाइट का फॉक्स उन दोनों पर उस रात ना पड़ा होता तो शांति उस दिन शुभम जैसे नौजवान लड़के के साथ संभोग सुख भोग चुकी होती,,, क्योंकि घर पर पहुंचने पर शुभम की हरकतों के बारे में सोचकर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी,,, वह भी जल्द से जल्द शुभम से मिलकर अपने तन की प्यास बुझा ना चाहती थी और वह बंगले पर ही अपनी प्यास बुझाने के मूड में थी लेकिन शीतल निर्मला की मौजूदगी में ऐसा होना संभव बिल्कुल भी नहीं था,,, इसलिए थक हारकर वह ना चाहते हुए भी उसे अपने घर बुला रही थी क्योंकि आज के दिन उसके घर पर कोई नहीं था वह शाम तक अकेली ही थी,,, और अपने हाथ आए इस मौके का वह पूरी तरह से फायदा उठाना चाहती थी,,,

शुभम को उसके घर तक का रास्ता पैदल ही तय करना था वह बड़ा उत्सुक था जल्दी से जल्दी उसके घर पहुंचने के लिए वह शांति हकीकत राय मदमस्त जवानी को बेपर्दा होते हुए देखना चाहता था उसके गोलाकार नितंबों को अपने हाथों से सह लाना चाहता था,,,, वह अपनी मस्ती में गीत गुनगुनाता हुआ पैदल चला जा रहा था,,,, थोड़ी दूर जाना होगा कि तभी एक होटल से एक खूबसूरत जवान महिला अपने तन बदन को ठंडी से रक्षा करने के लिए पूरी तरह से गर्म कपड़ों से ढकी हुई थी,,,, मोटर से निकलकर शुभम के आगे आगे चलने लगी हाई हील का सैंडल पहने हुए थी जिसमें उसकी चाल बेहद मादक नजर आ रही थी,,, वह महिला उसके आगे चल रही थी इसलिए शुभम ने उसके चेहरे को नहीं देखा था लेकिन उसके बदन की बनावट और उसके नितंबों का घेराव देखकर पूरी तरह से उसके प्रति आकर्षित हो चुका था,,,, उन दोनों के बीच की दूरी तकरीबन पांच 7 मीटर की थी शुभम की अनुभवी आंखें उस महिला की खूबसूरत बदन के ढांचे का आंखों ही आंखों में नाप ले रहा था,,, वह महिला जींस पहनी हुई थी जिसकी वजह से उसके नितंबों का कसाव जींस में कुछ ज्यादा ही कसा हुआ नजर आ रहा था और उसकी कसी हुई गांड देखकर शुभम का मन डोलने लगा था वह उसे ही घूरता हुआ चला जा रहा था,,,। तभी वह महिला आगे चलते चलते एक लग्जरियस कार के आगे रुक गई,,, और अपने पर्स में से गाड़ी की चाबी निकाल कर कार का दरवाजा खोलने लगी इतने से ही शुभम समझ गया था कि वह काफी पैसे वाली औरत है,,, इधर-उधर देखे बिना ही कार का दरवाजा खोल कर अंदर बैठ गई,,, लेकिन तभी कार के अंदर दाखिल होने से पहले ही उसके पर्स में से उसका छोटा सा बटुआ नीचे गिर गया था जिसके बारे में उसे पता नहीं चला और वह कार में बैठ गई और कार को स्टार्ट कर दिए शुभम यह सब देख रहा था वह जल्दी से दौड़ता हुआ कार के पास गया और बटुआ उठाकर,, कार में बैठी महिला को कार का शीशा खटखटा कर देने लगा पहले तो उस महिला को समझ में नहीं आया कि यह क्या कर रहा है कार स्टार्ट हो चुकी थी,,,, वह महिला उसे इशारे से ही हर जाने के लिए कह रही थी लेकिन शुभम उसका बटुआ उसे देना चाहता था इसलिए बार-बार उसके कार के शीशे को थपथपा रहा था,,,। शुभम की हरकतों से महिला को अच्छी नहीं लग रही थी वह उसे डांटना चाहती थी इसलिए अपना हाथ आगे बढ़ा करवा कार का शीशा खोलने लगी और शीशा खुलते ही बोली,,,।

पागल हो क्या इस तरह से किसी को परेशान किया जाता है तुम्हें शर्म नहीं आती एक औरत को इस तरह से परेशान करते हुए तुम्हारा मतलब क्या है इस तरह से कार का शीशा थपथपा रहे हो,,,।( कार में बैठी महिला बिना कुछ सोचे समझे शुभम की बात को सुने बिना ही एक सांस में सब कुछ भूल गए शुभम तो हैरान था उसकी बातें सुनकर वह एकटक उसे देखने लगा उस महिला की खूबसूरत चेहरे को देखकर वह दंग रह गया था बेहद खूबसूरत एकदम लाल टमाटर की तरह गोल चेहरा था उस महिला का जो कि शुभम को बिल्कुल चांद के टुकड़े की तरह लग रहा था वही तक उसे देख रहा था तो वह महिला बोली,,,।)

पागल है क्या तू किसी औरत को कभी देखा नहीं क्या जो इस तरह से घूर कर देख रहा है,,,

( शुभम को उस महिला की किसी भी बात का बुरा नहीं लग रहा था वह तो उसकी खूबसूरती के रस में पूरी तरह से नहा लेना चाहता था वह बस उसे घूरे जा रहा था और फिर हाथ में लिया हुआ बटवा उसकी तरफ आगे बढ़ाकर उसके बगल वाली सीट पर रखकर मुस्कुराता हुआ वहां से आगे बढ़ गया,,, वह महिला सीट पर रखिए बटुए को देखते ही एकदम से चौक गई क्योंकि वह बटुआ उसी का था वह जल्दी से बटुए की चैन खोलकर अंदर देखी तो सब कुछ बराबर था पटवा में तकरीबन ₹25000 रखा हुआ था क्योंकि बिल्कुल वैसे का वैसा ही था तुरंत ही उस महिला को अपनी गलती का एहसास हुआ वह कार का दरवाजा खोल कर इधर-उधर देखी तो शुभम उसे जाता हुआ नजर आया वह दौड़ कर उसके पास गई,,,।

मैं माफी चाहती हूं मैं बहुत शर्मिंदा हूं अपनी गलती के लिए (वह महिला दौड़ कराने की वजह से हांफते हुए बोली,,)

मुझे बिल्कुल भी नहीं मालूम था कि तुम मेरा बटवा लौटाने के लिए कार का शीशा थपथपा रहे हो मुझे अपनी गलती पर शर्मिंदगी महसूस हो रही है क्योंकि मैं यही समझ रही थी कि तुम कोई आवारा लड़के या भीख मांगने वाले हो,,,।

तो क्या मैं तुम्हें भीख मांगने वाला दिखता हूं,,,( शुभम उस महिला के सामने स्टाइल मारते हुए अपने दोनों हाथों को फैलाते हुए बोला,,,।)

नहीं नहीं बिल्कुल नहीं दिखते तो बिल्कुल भी नहीं हो और तुम्हारी शक्ल और तुम्हारे कपड़े देखकर तो यही लगता है कि तुम भी रईस खानदान से हो,,,, देखो मैं फिर शर्मिंदा हूं मिस्टर जो भी हो नाम तो मुझे तुम्हारा मालूम नहीं है,,,।

शुभम,,,, शुभम नाम है मेरा,,, और मैं शिमला घूमने के लिए आया हूं,,,,

अनमोल,,,, मेरा नाम अनमोल है,,,( वह महिला अपना हाथ आगे बढ़ाकर शुभम से हाथ मिलाने का इशारा करते हुए बोली,, शुभम भला उस महिला को स्पर्श करने का मौका कैसे यहां से जाने दे सकता था वह भी अपना हाथ आगे बढ़ा कर उस महिला से हाथ मिलाया और बोला,,,)

इस अनजान शहर में तुमसे मिलकर बहुत खुशी हुई,,

और मुझे भी तुमसे मिलकर बहुत खुशी हुई इतनी खुशी कि मैं बता नहीं सकती कि आज के दौर में भी तुम्हारे जैसे ईमानदार लड़के हैं,,, तुम शायद जानते नहीं हो कि जो बटुआ तुम मुझे लौटाए हो उसमें ₹25000 था,,,( वह महिला मुस्कुराते हुए बोली,,।)

देखिए अनमोल जी,,, अब उसने ₹25000 था या कुछ और इससे मेरा कोई वास्ता नहीं है बस मैं तो अपना फर्ज निभा रहा था वह बटुआ आपका था तो आप तक पहुंचना बेहद जरूरी था और वैसे भी मेरे मम्मी पापा ने मुझे इस तरह के संस्कार नहीं दिए हैं कि मैं किसी की चीज या उनका रुपया पैसा ले लूं,,,

( वह महिला जो कि तकरीबन 32 35 साल की थी वह शुभम की बातें सुन कर मुस्कुरा रही थी शुभम की बातें उसे अच्छी लग रही थी और वह बोली,,।)

तुम्हारी ईमानदारी मुझे बहुत अच्छी लगी वैसे तुम भी बहुत अच्छे हो,,,, और हां,, जो होटल देख रहे हो ,,,(हाथ से इशारा करते हुए)

होटल अनमोल,,,( शुभम तपाक से बोल पड़ा।)

हां वही वह मेरा ही है कभी आना,,, खिदमत करने का मौका मुझे भी देना,,, तुम्हारी ईमानदारी देखकर दिल एकदम खुश हो गया है,,,।

ठीक है मिस अनमोल,,,,( शुभम जानबूझकर अनमोल के आगे मिस शब्द का प्रयोग किया था वह जानना चाहता था कि वह कुंवारी है या शादीशुदा वैसे तो उसकी उम्र के हिसाब से शादीशुदा ही होनी चाहिए लेकिन उसकी खूबसूरती देखकर सुबह को समझ नहीं आ रहा था और वैसे भी उसके माथे पर ना बिंदी थी ना माथे में सिंदूर इसलिए शुभम को समझ में नहीं आ रहा था,,, शुभम के मुंह से मिस शब्द सुनकर उस महिला के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई थी,,,) मैं जरूर तुम्हारी होटल में आऊंगा वैसे तुम्हारा नाम तुम्हारे माता-पिता ने एकदम सोच समझकर ही रखा है नाम जैसे ही तुम भी बेहद अनमोल हो,,,,।

( इतना कहकर शुभम वहां से चलता बना क्योंकि वह जानता था कि जिस तरह की बातें वह करता था उसे सुनकर कोई भी औरत आफरीन हो जाती थी और वहीं अनमोल के साथ भी हुआ शुभम की बातें सुनकर उसे बहुत ही अच्छा लगा और वह उसे देखती ही रह गई जब तक कि शुभम आंखों से ओझल नहीं हो गया,,, थोड़ी ही देर में घर ढूंढने में मशक्कत करने के बाद शांति का घर उसे मिल ही गया,,, शांति घर के बाहर दरवाजे पर खड़ी होकर उसका इंतजार कर रही थी ताकि शुभम कहीं नजर आ जाए तो वह उसे भुला सके लेकिन शुभम की नजर भी उसके ऊपर पढ़ चुकी थी दोनों की नजरें आपस में टकराई थी दोनों के चेहरे खिल उठे थे दोनों के होठों पर मुस्कान आ गई थी,,, अभी भी हल्की हल्की बर्फ गिर रही थी शांति ओवरकोट और कर खड़ी थी वातावरण में ठंड का एहसास जबरदस्त था लेकिन दोनों एक दूसरे से मिलने के लिए बेहद तड़प रहे थे,,,। जैसे-जैसे शुभम उसके करीब आता जा रहा था जैसे जैसे उसकी दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी और टांगों के बीच कंपन का एहसास उसके संपूर्ण बदन में खलबली मचा रहा था,,,,

मुझे आने में देर तो नहीं हुई,,,,( शुभम शांति के करीब पहुंचता हुआ बोला,,,।)

तुम्हारा इंतजार करते-करते ऐसा लग रहा था कि जैसे एक-एक पल सदियों की तरह गुजर रहा था,,,, अब मुझसे रहा नहीं जाता चलो जल्दी घर में,,, अंदर आओ,,,,( शांति इधर उधर नजर घुमाकर अपनी तसल्ली के लिए देखते हुए बोली ,,, शांति आगे आगे और शुभम पीछे पीछे कमरे में दाखिल हो गया,,,।)

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नौकरानी शांति धड़कते दिल के साथ शुभम को अंदर कमरे में ले गई,,, शुभम को घर में लाते हो उसे आस पड़ोस में किसी ने नहीं देखा था वैसे भी इतनी ठंड और ऊपर से हल्की हल्की बर्फ गिरने की वजह से सड़क पर चहल-पहल बहुत ही कम थी,,,

शुभम शांति को अपनी बाहों में लेने के लिए बेहद उतावला था लेकिन वह अपने आप पर कंट्रोल किए हुए था,,, शांति की गोलाकार नितंबों का घेराव गर्म कपड़ों में साफ नजर आ रहा था,,,।

बैठो,, छोटे बाबू,,,

तुम मुझे शुभम कह सकती हो,,,

बड़ा अजीब लगता है आप लोग इतने बड़े घर के हो,,,, पहली बार कोई अच्छे घर का मेरे घर आया है,,,।( शांति शर्माते हुए बड़े संकोच में बोली,,,) यह छोटा सा कमरा( अपने कमरे में चारों तरफ नजर दौड़ाते हुए,,) तुम्हारी हैसियत के हिसाब से मैं तुम्हारी खातिरदारी तो नहीं कर सकती लेकिन क्या लोगे गर्म या ठंडा,,( शांति अपनी मादक अदा बिखेरते हुए बोली,,,।)

अब तो मुझे शर्मिंदा कर रही हो मेरी नजर में कोई छोटा बड़ा बिल्कुल भी नहीं है अमीरी गरीबी यह सब मुझे बिल्कुल भी रास नहीं आती मेरे लिए सब बराबर है,,,, बस खूबसूरत होना चाहिए,,,( शुभम अंतिम में खूबसूरत शब्द पर दबाव देते हुए बोला था और शुभम के कहने का मतलब शांति अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए उसके होठों पर मुस्कान आ गई,,,।)

फिर भी मेरे घर आए हो तो थोड़ी बहुत तो खातिरदारी का मौका मुझे मिलना ही चाहिए,,,।

तुम जिस तरह की खातिरदारी करोगी शांति शायद उस तरह की खातिरदारी कोई नहीं कर पाएगा,,,,

तुम्हारे कहने का मतलब मैं अच्छी तरह से समझ रही हूं लेकिन फिर भी औपचारिकता रूप से,,, कॉफी पियोगे या कुछ और,,, कुछ और से मेरा मतलब है कि यहां ठंडी के मौसम में लगभग लगभग सभी लोग शराब या बीयर का सेवन जरूर करते हैं,,, तुम क्या लोगे,,,।

मैं तो गरमा गरम दूध पियूंगा,,,( शुभम शांति की बड़ी बड़ी छातियों की तरफ देखता हुआ बोला,,,।)

जरूर वह भी पीने को मिलेगा लेकिन उसके लिए अभी थोड़ा समय है,,,,( शांति अपने ओवरकोट को व्यवस्थित करते हुए बोली क्योंकि यह जानती थी कि ऐसा करना कोई मायने नहीं रखता फिर भी वह शुभम की बातों से थोड़ा शर्म महसूस कर रही थी,,,) मैं गरमा गरम कॉफी लेकर आती हूं,,,।

( और शुभम का जवाब सुने बिना ही शांति रूम से सटे किचन में चली गई और थोड़ी ही देर में गरमा गरम कॉफी लेकर आ गई,,,। कॉफी के ट्रे को टेबल पर रखते हुए एक कप शुभम को पकड़ा कर दूसरा कब लेकर कुर्सी पर बैठ गई और गरमा गरम कॉफी की चुस्की लेने लगी,,, शुभम अच्छी तरह से देख रहा था कि शांति बड़े ही मादक अदा से गरमा गरम कॉफी की चुस्की ले रही थी,,, उसके लाल-लाल होठों को और होटो पर लगी हुई कॉफी के रस की बूंद देखकर शुभम का मन डोलने लगा था,,, शुभम के पेंट में हलचल मची हुई थी,,, वह बार-बार शांति की आंखों के सामने ही अपने पेंट में आए बवंडर को दबाने की कोशिश कर रहा था और शुभम की इस हरकत पर शांति की नजर चली जा रही थी,, और यह देख कर शांति की हालत खराब होती जा रही थी क्योंकि वह जानती थी कि शुभम अपना हाथ पैंट के ऊपर रख कर क्या कर रहा है,,,।

वैसे कौन-कौन रहता है यहां,,,

मैं मेरे पति और मेरे दो बच्चे जो कि आज मेरे पति उन्हें लेकर घूमने गए हैं,,,

घूमने गए बच्चों को लेकर और ऐसे बर्फ बारी में,,,

इतना तो यहां वालों के लिए नॉर्मल है कोई ज्यादा दिक्कत नहीं होती आप सब बाहर से आए हैं इसलिए आप लोगों को दिक्कत होती है,,,।

( कॉफी खत्म होते-होते दोनों के बीच में काफी वार्तालाप हो चुकी थी,,, शुभम और नौकरानी शांति के लिए यह वार्तालाप एक औपचारिकता बस ही थी,,, बल्कि दोनों एक दूसरे में जल्द से जल्द समाने के लिए उतावले हुए जा रहे थे लेकिन समझ में नहीं आ रहा था कि शुरू कौन करें,,,।)

तुम उस दिन भाग क्यों गई,,,?( शुभम कॉफी का कप ट्रे में रखते हुए बोला)

भागती नहीं तो और क्या करती कोई देख लेता था मैं तो बदनाम हो जाती,,,।

तुम नाहक ही डर कर वहां से भाग गई वह कार तो सीधे चली गई,,,। अगर मेरी बात मान कर वहां रुक गई होती तो शायद,,,,( इतना कहकर शुभम खामोश होकर उसकी तरफ देखने लगा तो शांति बोली,,,।)

अगर वहीं रह गई होती तो इस तरह से तुम मेरे घर ना आते,,,,।

( दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा दिए,,, शांति की टांगों के बीच हलचल मची हुई थी,,, उस दिन किचन में और पेड़ के पीछे शुभम के कठोर पन को वह अपनी टांगों के बीच बहुत ही अच्छी तरह से महसूस की थी,,,, इसलिए तो शुभम की मर्दाना ताकत के आगे विवश होकर हुआ है आज शुभम को एक रत होने के लिए अपने घर बुलाई थी,,,। क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि ऐसी कातिल ठंडी में गर्मी का एहसास सिर्फ शुभम ही दिला सकता है,,, दोनों कॉफी पी चुके थे,,, शांति को समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या करें वह खाली कप को ट्रे में रख कर,, ट्री को उठाने ही वाली थी कि शुभम के सब्र का बांध टूट गया क्योंकि जिस कार्य को करने के लिए वह इतनी दूर चल कर आया था उसमें काफी समय लग रहा था और वह इस तरह से अपना समय गंवाना नहीं चाहता था,,,, इसलिए जैसे ही शांति ट्रेन थाने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाई तुरंत शुभम अपना हाथ आगे करके उसकी कलाई थाम लिया,,,, शुभम इतने जोरो से उसकी कलाई को पकड़ा था कि उसे दर्द महसूस होने लगा,,,।

आहहहह,,, क्या कर रहे हो शुभम छोड़ो ना,,,( शांति इतराते हुए अपनी कलाई को शुभम के हाथों से छुड़ाने की नाकाम कोशिश करते हुए बोली,,,।)

मैं छोड़ने के लिए नहीं तुम्हें पकड़ने के लिए इतनी दूर आया हूं,,,( इतना कहने के साथ ही शुभम शांति को अपनी तरफ खींचा तो शांति एकदम से उसके ऊपर गिरने लगी और शुभम उसे पकड़ कर अपनी बाहों में ले लिया,,, शांति शुभम की गोदी में एकदम से बैठ गई थी और शुभम उसे दोनों हाथों से अपनी बाहों में लेकर उसके खूबसूरत चेहरे को देख रहा था,,,, और उसके खूबसूरत चेहरे को देखते हुए बोला,,)

बनाने वाले ने तुम्हें बहुत ही फुर्सत से बनाया है,,, दो बच्चों की मां होने के बावजूद भी कोई कह नहीं सकता कि तुम शादीशुदा हो,,,

( इस तरह की तारीफ सुनकर शांति एकदम से शरमा गई और शर्मा कर दूसरी तरफ नजर फेर ली,,, शुभम की गोद में बैठ कर शांति को बेहद शर्मिंदगी का अहसास हो रहा था क्योंकि वह शुभम और अपने बीच के उम्र की खाई को अच्छी तरह से भाप चुकी थी वह शादीशुदा और दो बच्चों की मां थी और शुभम जवानी की दहलीज पर खड़ा था,,, गोरे गोरे चेहरे पर आई लालिमा को देखकर शुभम के तन बदन में उत्तेजना का ज्वर चढ़ने लगा वह दोनों हाथों से शांति का खूबसूरत चेहरा पकड़कर अपनी तरफ किया और देखते ही देखते उसके लाल-लाल होठों पर अपने होंठ रख कर उसे चूसना शुरू कर दिया,,, शांति एकदम से मदहोश होने लगी बरसों बाद किसी ने इस तरह से उसके होठों को चुंबन किया था,,,, चुंबन क्या शुभम तो उसके होठों को अपने मुंह में लेकर उसके रस को पीना शुरू कर दिया था,,, और साथ ही अपना एक हाथ उसके ऊपर कोर्ट में डाल कर उसकी नंगी चिकनी कमर को हल्के हल्के सहला रहा था,,, देखते ही देखते दोनों का चुंबन और जबरदस्त होने लगा मदहोशी के आलम में शांति भी उसका सहयोग करने लगी,,, जिस तरह का उत्तेजना से भरपूर शुभम ने उसके होंठों को चूमना शुरू किया था इस तरह से तो उसके पति ने कभी उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर चुंबन भी नहीं किया था,,,,,

करता भी कैसे दिन रात शराब के नशे में जो डूबा रहता था,,, औरतों से कैसे प्यार किया जाता है यह उसे आता ही नहीं था,,, शुभम के हाथ उसकी चिकनी कमर पर से पूरे बदन पर घूमने लगे थे,,,। देखते ही देखते उसके होंठों का रसपान करते हुए शुभम ब्लाउज के ऊपर से उसकी मदमस्त गोल-गोल चूचियों को दबाना शुरू कर दिया,,,।

क्रमशः

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आहहहह आहहहहह,,,,ऊहहहहहहह,,

(शुभम जोर-जोर से नौकरानी शांति की चूचियों को दबा रहा था जिसकी वजह से उसके मुख से गर्म सिसकारी के साथ-साथ कराहने की आवाज निकल रही थी,,शुभम को शांती की चूचियों को दबाने में बहुत आनंद आ रहा था क्योंकि उसकी दोनों चूचियां टेनिस के बोल की कड़क कड़क थी,,, शुभम हैरान था क्योंकि अब तक उसने कड़क दिखने वाली चूचियों को दबा कर इनकी गर्माहट का अहसास ही किया था लेकिन शांति की चुचिया ऊतनी नरम नहीं थी जितनी की होनी चाहिए थी,,,। शांति की दोनों चुचियों को देखने की उत्सुकता शुभम के अंदर बढ़ती जा रही थी। वह जल्द से जल्द शांति के दूध से भरी दोनों गुब्बारो के दर्शन करना चाहता था,,,। इसलिए शांति का ओवरकोट उसके बदन से उतारे बीना ही वह ब्लाउज के बटन खोलने लगा,,,

बहुत तेज हो तुम,,,,(शांति शुभम की आंखों में आंखें डाल ते हुए बोली)

अगर तेज नहीं होता तो इस समय मैं तुम्हारे घर पर नहीं होता,,,।(पर इतना कहने के साथ ही शुभम शांति के ब्लाउज के सारे बटन खोल कर उसकी ब्राह्मी के दर्द नंगी चूचियों को अपने दोनों हथेली में भरकर दबाना शुरू कर दिया,,,, पीले रंग की ब्रा में शांति की मदमस्त चूचियां बेहद खूबसूरत लग रही थी,,,,)

आहहहहह,,, थोड़ा धीरे ,,,(शांति कराहते हुए बोली,,)

धीरे धीरे दबाऊंगा तो ना तो तूम्हे मजा आएगा और ना ही मुझे ,,, चुचियों का असली मजा तभी आता है जब उन्हें जोर जोर से मसला जाता है।(ऐसा कहते हुए शुभम शांति की ब्रा को नीचे से पकड़ कर ऊपर की तरफ खींच दिया जिससे उसकी दोनों संतरे उछल कर बाहर आ गए, और उसके दोनों मदमस्त चुचियों को देखकर शुभम की आंखें चकाचौंध हो गई। वास्तव में शांति की चुचियों में एक अजीब प्रकार का आकर्षण था। शुभम फटी आंखों से शांति की दोनों चूचियों को घूरे जा रहा था,,,, शुभम अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर उसकी दोनों चूचियों की गोलाइयों को थाम लिया,,, चॉकलेटी कलर की निप्पल अलग अंदाज में अपनी चुचियों का आकर्षण और ज्यादा बढ़ा रही थी। उसकी कड़ी तनी हुई निप्पल को देखते ही शुभम के मुंह में पानी आ गया,,,शांति की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी क्योंकि वह शुभम की गोद में बैठी हुई थी और शुभम का लंड पुरि औकात में आ चुका था जो की सीधा शांति के गोलाकार नितंबों पर गड़ रहा था,,,, लेकिन शुभम के लंड की चुभन अपनी गांड पर महसूस करके शांति कामातुर हुए जा रही थी,,,, शुभम से रहा नहीं गया और वह शांति की दोनों चुचियों को जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,, शांति उत्तेजना के मारे शुभम की गोद में कसमसा रही थी, शुभम के मुंह में पानी आ रहा थावैसे भी वह जब से शांति को देखा था तब से उसका दूध पीने का बहुत उसका मन कर रहा था इसलिए वह बिल्कुल भी समय गवाएं बिना अपना मुंह नीचे की तरफ लाकर अपने होंठों में उसकी कड़ी निप्पल को भर लिया और उसे जोर जोर से चूसना शुरू कर दिया,,, यह सब शांति के सोचने के बिल्कुल विपरीत हो रहा था,,

शांति को यही लगा था कि शुभम भी दूसरे मर्दों की तरह घर में आते ही उसके कपड़े उतारे गया तो उसकी साड़ी कमर तक उठाकर उसको चोदना शुरू कर देगा और काम खत्म करके चला जाएगा लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था वह यह बात नहीं जानती थी कि तुम दूसरे मर्दों की अपेक्षा उनसे बहुत ही अलग था, वह तब तक औरतों के जिस्म से खेलता था जब तक की औरत पूरी तरह से काम विह्वल ना हो जाए,,,शांति को शुभम का इस तरह से उसके दूध को मुंह में भर कर पीना बहुत ही अच्छा लग रहा था,, पेशे से वह एक नौकरानी थी इसलिए उसे ऐसा ही लग रहा था कि शुभम उसके बदन से इस तरह से खुलकर नहीं खेलेगा। लेकिन ऐसा लग रहा था कि शुभम उसके जिस्म से नहीं बल्कि उसके दिमाग से खेल रहा था क्योंकि पल-पल शुभम शांति को एक नया झटका सा दे रहा था इसलिए तो वह मुंह में उसकी चूचियों को भरकर पीते हुए एक हाथ नीचे की तरफ लाकर उसकी साड़ी को ऊपर की तरफ उठा रहा था,,,,मखमली चिकनी टांगों पर शुभम की गर्म हथेलियों का स्पर्श शांति को पूरी तरह से मदमस्त कर रहा था।देखते ही देखते शुभम शांति की साड़ी को घुटनों के ऊपर तक ला दिया उसकी मदमस्त मोटी मोटी जांघों पर अपनी हथेली घुमाते हुए शुभम को यह एहसास हो रहा था कि जैसे वह मक्खन को अपनी हथेली से फैला रहा हो,,,शुभम की हरकत की वजह से शांति के पूरे बदन में चीटियां रेंग रही थी उत्तेजना की चिकोटि उसके बदन के हर एक कोने को काट रही थी,,

आहहहहह शुभम,, ऐसे मत काटो दर्द होता है,,,

लेकिन मुझे तो ऐसे ही मजा आता है तुम्हारी चूचियों के निप्पल एकदम कैडबरी चॉकलेट की तरह है,, जैसे मुंह में लेकर चूसने में मुझे बहुत मजा आ रहा है,,,,(इतना कहने के साथ शुभम फिर से उसकी दोनों चूचियों पर टूट पड़ा बारी-बारी से दोनों चूचियों को मुंह में लेकर स्तनपान करने का आनंद लूट रहा था,,,। स्तनपान करना शुभम की विलासिता में संपूर्ण रूप से शामिल था वैसे भी उसने अपनी मां का दूध कम और दूसरी औरतों की चुचियों का स्तनपान कुछ ज्यादा ही किया है,,, शांति पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी वह आंहे भर रही थी,,, उत्तेजना की मदहोशी में उसकी दोनों आंखें बंद थी बस एहसास उसे जगा रहा था,,,। घुटनों तक उठी हुई साड़ी के अंदर हाथ डालकर शुभम उसकी बुर को टटोल कर देखना चाहता था और जैसे ही उसकी हथेली शांति की दोनों टांगों के बीच आई तो बुर की गर्माहट से वह पूरी तरह से पिघलने लगा,,, शांति अंदर पेंटिं नहीं पहनी थी,,, यह एहसास शुभम को शांति की दोनों टांगों के बीच हाथ लगाते ही हो गया वह मन ही मन सोचने लगा कि शांति पूरी तैयारी के साथ घर के अंदर उसका इंतजार कर रही थी,,,बुर पर हाथ पढ़ते ही शुभम से रहा नहीं किया और वह उसकी समोसे जैसी खुली हुई बुर को अपनी हथेली में जोर से दबोच लिया,,,,।

आहहहह,,,,(शांति एकदम से सिहर उठी उसे इस बात का अहसास बिल्कुल भी नहीं था कि शुभम उसकी बुर के साथ यह हरकत करेगा... लोग तो दूर को अच्छे से सहलाते हैं हल्का-हल्का दबाते हैं,,, लेकिन यह मुआ तो उसे जोर से मसल दिया,,,, शांति अपने मन में ही यह बात बोल कर अपने चेहरे पर बनावटी गुस्सा करने लगी। शुभम उसके चेहरे के बदलते भाव को देखकर बोला,,,)

क्या हुआ मेरी जानू,,,

इतनी जोर से कोई दबाता है क्या,,,,?

मैं दबाता हूं ना जानू,,,,,(शुभम के मुंह से अपने लिए जानू शब्द सुनकर शांति के चेहरे पर मुस्कान आ गई,, क्योंकि शांति अपनी और शुभम के बीच उम्र की गहरी दीवार को अच्छी तरह से समझती थी,,, और इतनी छोटी उम्र का होकर वह उसे जानू कह रहा था,,,, खैर कोई बात नहीं शांति शुभम से खुश थी,,,,कचोरी जैसी फुली हुई बुर को अपनी हथेली में लेकर वह बार-बार उसे जोर जोर से दबा दे रहा था,,,,उत्तेजना के मारे शांति अपना संतुलन खोती जा रही थी बार-बार वह उसकी गोद से नीचे की तरफ खसक जा रही थी जिसे शुभम बार-बार उसकी बड़ी गांड के नीचे हाथ लगाकर उसे अपनी तरफ खींच ले रहा था।

शुभम को उसके बदन से खेलने में बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी साथ ही उसे यह भी एहसास हो रहा था कि उसका खड़ा लंड उसकी गांड के बीचो-बीच चुभ रहा था,,।

कुछ देर तक शुभम ऐसे ही शांति के बदन से खेलता रहा जब तक की शांति एकदम गरम होकर पूरी तरह से गर्म सिसकारी की आवाज निकालने लगी और थोड़ी देर में शांति के मुख से गरमा गरम आवाज आने की वह पूरी तरह से गरमा चुकी थी,,,। आनंद की परकाष्ठा के एकदम करीब पहुंच गई थी,,, उसकी बुर से मदन रस का लगातार बहाव हो रहा था।,,,शुभम को समझते देर नहीं लगी कि अब वह घड़ी आ चुकी है जब उसके एक-एक वस्त्र को उतारकर निर्वस्त्र किया जाए,,, एक बार फिर शुभम उसके लाल-लाल होठों को मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया,,,,साथ ही अपनी गोदी में लिए हुए ही वह शांति के ओवरकोट को उतारने लगा शांति भी समझ गई कि अब शुभम उसे नंगी करना चाहता है,,, इसलिए वह शुभम का पूरी तरह से सहयोग करने लगी,देखते ही देखते शुभम शांति के कपड़े उतार कर पूरी तरह से उसे निर्वस्त्र कर दिया वह उसकी आंखों के सामने खड़ी थी और वह भी उसके सामने ही खड़ा था जिसके आखरी वस्त्र के रूप में वह ऊसकी ब्रा को उसकी बाहों में से निकाल रहा था,,,,जिंदगी में पहली बार शांति को शुभम के द्वारा कपड़े उतारने में बेहद आनंद की प्राप्ति हुई और शायद बरसों बाद वह किसी मर्द के सामने इस तरह से निर्वस्त्र खड़ी थी,,,शुभम तो उसकी मदद से नंगी जवानी को देखता ही रह गया उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी आंखों के सामने जो महिला खड़ी है वह पैसे से नौकरानी है,,। शायद नौकरानी बनना उसकी मजबूरी ही रही होगी वरना वह किसी के घर की महारानी होने के काबिल थी। शुभम से रहा नहीं गया और वह उसके चारों तरफ चक्कर काटते हुए उसके खूबसूरत नंगे बदन के संपूर्ण वजूद को अपनी आंखों से देखने लगा।

यकीन नहीं होता कि तुम इतनी खूबसूरत हो

(शुभम की बातें सुनकर शांति मंत्र में तो मुस्कुरा रही थी उसके बाद खुले हुए थे जो कि अपनों को उतारते समय शुभम ने ही उसके बाल के बक्कल को खोल कर उसके रेशमी बालों को खुला कर दिया.)

तुम्हारा जवानी से भरा यह बदन मेरी जान ले रहा है,,,,सच तुम्हें इस तरह से नंगी देख कर मैं बहुत खुश हूं आज तक मैंने तुम्हारे जैसी खूबसूरत औरत नहीं देखा कि दो दो बच्चों की मां होने के बावजूद भी इतनी टाइट हो।

(भला दुनिया में ऐसी कौन सी औरत होगी जो अपनी तारीफ नहीं सुनना पसंद करेगी,,, शुभम के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर शांति फूले नहीं समा रही थी,,,वह अंदर ही अंदर बेहद प्रसन्न हो रही थी और उसकी प्रसन्नता उसके चेहरे पर साफ झलक रही थी। और वह चोर नजरों से शुभम के पेंट में बने तंबू को भी देख रही थी जिस पर इस समय उसका पूरा हक था। शुभम भी यह बात समझ गया था कि शांति नजरें झुका कर उसके कौन से अंग को देख रही है इसलिए वह शांति की आंखों के सामने खड़ा हो गया और उसकी खूबसूरती की तारीफ जारी रखते हुए अपनी जींस का बेल्ट खोलने लगा। यह देख कर शांति की सांसे ऊपर नीचे होने लगी उसका संपूर्ण बदन कसमसाने लगा,,,एक औरत के लिए यह पल बेहद उन्माद और उत्तेजना से भरा होता है जब उसकी आंखों के सामने कोई मर्द अपने कपड़े उतारता हो,,, खास करके जब अपनी पैंट उतार रहा हो,,, क्योंकि औरत अच्छी तरह से समझ जाती है कि अब यह क्या करने वाला है,,।उसकी आंखों के सामने ही वह अपनी पैंट उतार कर उसके कौन से मर्दाना ताकत भरा अंग दिखाने वाला है,,, ओर यही क्रिया शुभम को करता देख कर शांति की टांगों के बीच हलचल होने लगी उसका पूरा बदन उत्तेजना के मारे कसमसाने लगा,,,,

वह ललचाए आंखों से चोर नजरों से शुभम की तरफ देख रही थी शांति संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में शिमला की कड़कड़ाती सर्दी में अपने कमरे के बीचों बीच खड़ी थी। लेकिन ऊसे ठंडी का एहसास जरा भी नहीं हो रहा था क्योंकि जवानी का जोश और शुभम की कामुक हरकतों ने उसके तन बदन में आग लगा दी थी।

शुभम अपना बेल्ट खोलते हुए शांति को ही देख रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि नौकरानी का जिस्म इतना खूबसूरत और जवान हो सकता है,,,, शुभम शायद यह भूल गया था कि वह नौकरानी बाद में लेकिन एक औरत पहले थी,, उसके पास भी उसी तरह का हुस्न का खजाना था जो कि उसकी मां के पास था। शुभम की आंखों में नौकरानी शांति की टांगों के बीच की पतली दरार एकदम से बस गई थी,,, एकदम चिकनी रेशमी बालों का रेशा तक नजर नहीं आ रहा था ऐसा लग रहा था कि अभी कुछ घंटों पहले ही उसने क्रीम लगाकर उसे अच्छी तरह से साफ की थी उत्तेजना के मारे कचोरी की तरह पूरी तरह से फुल चुकी थी,,, शांति की गरम तवे पर फूली हुई रोटी की तरह बुर को देख कर यह बात अच्छी तरह से समझ में आ रही थी कि रोटी और बुर में कुछ ज्यादा फर्क नहीं होता। क्योंकि दोनों का काम भूख मिटाना ही होता है। रोटी पेट की आग जाती है और बुर जिस्म की,,,
 
देखते ही देखते सुभम अपनी बेल्ट को उतार कर एक साइड में रख दिया और अपने पेंट की बटन खोलने लगा,,, यह सब देख कर शांति के मन में मलाल पैदा हो रहा था क्योंकि यह शुभ काम वह अपने हाथों से करना चाहती थी लेकिन शर्म के मारे वह कुछ बोल नहीं पा रही थी। देखते ही देखते शांति की आंखों के सामने शुभम अपनी पेंट को नीचे उतारकर घुटने तक कर दिया,,, शांति हैरान थी क्योंकि शुभम के अंडर वियर में अच्छा-खासा तंबू बना हुआ था।

अंडरवियर में बना था वो बेहद मनमोहक और उन्माद से भरा हुआ लग रहा था।

ओह शांति,,, मेरे करीब आ ओ,,,आहहहहह,,,(शुभम बेहद ऊतेजनात्मक तरीके से अपनी अंडरवियर में उठे हुए तंबू को अपनी मुट्ठी में लेकर दबाते हुए गरम सिसकारी लेकर बोला,,,शांति अपनी नजरों से शुभम की हरकत को देखकर पूरी तरह से पानी-पानी हो गई लेकिन उसके मन में लालच पैदा हो गई बहुत जल्द से जल्द शुभम के करीब जाना चाहती थी,,, अपने मलाल को पूरा करना चाहती थी इसलिए वह एक कदम आगे बढ़ा कर शुभम के करीब पहुंच गए शुभम उसे एक झटके में अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसकी पतली कमर को थाम कर अपनी तरफ खींच लिया और उसके लाल-लाल होठों पर अपने होंठ रख कर चुंबन लेना शुरू कर दिया। देखते ही देखते शांति पूरी तरह से उत्तेजित होने लगी क्योंकि वह पूरी तरह से शुभम के बदन से चिपकी हुई थी और उसके अंडरवीयर में बना तंबू उसकी टांगों के बीच सीधा उसकी बुर के ऊपरी दीवारों पर ठोकर मार रहा था,,,।शांति से रहा नहीं गया और वह अपने हाथ को नीचे की तरफ ले जाकर अंडरवियर के ऊपर से ही शुभम के लंड को पकड़ ली,, अंडरवियर के ऊपर से ही शांति के नारा मुगलों का स्पर्श पाते ही शुभम का लंड पूरी तरह से अंडरवियर के अंदर हलचल मचाने लगा,,,, जिससे शुभम का चुंबन और ज्यादा प्रगाढ़ हो गया। शुभम पागलों की तरह शांति के लाल लाल होंठों को चूस रहा था।

शांति पागलों की तरह अंडरवियर के ऊपर से ही शुभम के लंड को अपनी मुट्ठी में कस के ऐंठ रही थी,,,, शुभम की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी,, शुभम अपने हाथों से ही अपनी टी-शर्ट उतारने लगा,, अपना ओवरकोट वह पहले से ही उतारकर कुर्सी पर रख दिया था। देखते ही देखते लगभग शुभम भी संपूर्ण रूप से नंगा हो चुका था बस उसके बदन पर अंडर वियर ही रह गई थी और उसकी पेंट घुटनों में फंसी हुई थी। दोनों की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी शांति को यकीन नहीं हो रहा था कि वह अपने से कम उम्र के लड़के के साथ इस तरह से मदहोश हो जाएगी। इतनी देर में शांति को समझते देर नहीं लगी कि शुभम काफी अनुभवी लड़का है। शुभम की हरकत को देखते हुए वह समझ गई कि वह कई औरतों के साथ संबंध बना चुका है,,, तभी तो वह अपनी हर एक हरकत से उसे मदहोश किए जा रहा था।

दोनों के बीच किसी भी प्रकार का वार्तालाप हो नहीं रहा था दोनों एक दूसरे के चेहरे पर अपनी गर्म सांसे छोड़ रहे थे। दोनों की सांसो की गति बड़ी तेज चल रही थी शुभम उसके होठों का रसपान करते हुए उसके दोनों संतरो को पकड़ कर अपनी मुट्ठी में भींच रहा था,,,

आहहहहह आहहहहहब,,, सुभम,,,,ओहहहहहहह,,,

स्तन मर्दन से लगातार शांति के मुख से गर्म सिसकारी फूट रही थी।,,

ओहह शांति मेरी रानी मेरी जान,,,आहहहहहह,,,,(ऐसा कहते हुए शुभम उसके दोनों कंधों पर अपना हाथ रख कर उसे नीचे की तरफ दबाने लगा क्योंकि उसे नीचे बैठने की इशारा कर रहा था,,, शांति उसके हाथों के दबाव के नीचे बेटी चली गई और देखते ही देखते वह अपने घुटनों के बल हो गई... शुभम की अंडर वियर में अपना तंबू ठीक उसकी आंखों के सामने था. जिसे देख कर उसकी टांगों के बीच थरथराहट हो रही थी. शायद जो शुभम कराना चाहता था वह शांति समझ गई थी इसलिए शुभम की तरफ देखते हुए अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर शुभम के अंडर वियर को दोनों हाथों से पकड़कर नीचे की तरफ खींचने लगी। और देखते ही देखते शांति ने , श्रम के अंडरवियर को उतारकर उसे घुटनों तक खींच दी,, अंडरवियर की कैद से आजाद होते ही शुभम का लंबा तगड़ा लंड हवा में झूलने लगा,,,

उसके ऊपर नीचे होकर झूलते हुए लंड को देखकर शांति की आंखें फटी की फटी रह गई, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह हकीकत में यह सब देख रही है या कोई सपना है। क्योंकि शांति आज तक इस तरह के मर्दाना ताकत से भरे हुए लंबे तगड़े मोटे लंड को नहीं देखी थी।उससे रहा नहीं गया और वह अपने हाथ आगे बढ़ाकर उसके झूलते हुए लंड को अपने हाथ में थाम ली।लंड की गर्माहट उसे अपनी हथेली के साथ-साथ पूरे बदन में महसूस हो रही थी खास करके शुभम के लंड को पकड़ते ही उसकी बुर उत्तेजना के मारे फुलने पिचकने लगी थी,,,
 
इसे मुंह में लो शांति,,,, तब जाकर इसे शांति मिलेगी,,,,

(शुभम के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर शांति एकदम हैरान थी क्योंकि दोनों के बीच उम्र का फर्क कुछ ज्यादा ही था...शुभम को जब वह पहली बार देखी थी तो उसे इस बात का आभास तक नहीं था कि यह लड़का इतना तेज तर्रार होगा। जोकि धीरे-धीरे इस मकाम तक पहुंच जाएगा कि उसे उस लड़के को अपने घर बुलाना पड़ेगा। लेकिन होनी और हकीकत को कौन टाल सकता है शायद शांति के नसीब में शुभम की तरफ से तृप्ति का एहसास लिखा हुआ था इसलिए तो आज वह अपने ही कमरे में एक अनजान लड़की के सामने एकदम नंगे होकर घुटनों के बल बैठ कर उसके लंड को मुंह में लेकर चूसने की तैयारी कर रही थी। अगले ही पल शांति के लाल-लाल होठों के बीच से गुजरता हुआ शुभम का मोटा तगड़ा लंबा लंड एकदम गले तक पहुंच गया,,,,)

आहहहहह,,,,गजब ,,,,,,,(शांति के होठों के बीच की गर्माहट को पाकर शुभम के मुख से गरमा गरम सिसकारी फूट पड़ी,, सुभम अद्भुत अहसास से भर गया था,,, गजब का सुख मिल रहा था,,, शांति तो पागल हुए जा रही थी वह आइसक्रीम के कौन की तरह पूरा मुंह खोलकर शुभम के लंड का स्वागत करते हुए उसे अपने गले तक आश्रय दे रही थी उसका बस चलता है तो वह गले से नीचे गटक जाती,,,,देखते ही देखते शांति के तन बदन में कुमारी का नशा छाने लगा मदहोशी अपनी गिरफ्त में लेने लगी इसलिए तो वह पागलों की तरह अपना मुंह जोर-जोर से आगे पीछे करते हुए शुभम के लंड को चूस रही थी और शुभम भी अपनी कमर को आगे पीछे करता हुआ शांति के मुंह को चोद रहा था,,, शुभम के लिए सब पूरा मामला परम उत्तेजना से भरा हुआ था क्योंकि किसी के घर में घुसकर उसके पति की गैर हाजिरी में चोरी-छिपे उससे शारीरिक संबंध बनाने में कुछ ज्यादा ही मजा आता है।इसलिए तो इस अद्भुत पल का मजा लेते हुए शुभम अपनी कमर को आगे पीछे करता हुआ शांति के मुंह को चोद रहा था।

शांति के मुख से घुटी-घुटि सी आवाज बाहर आ रही थी,,,,

कुछ देर तक दोनों मजा लेते रहे शुभम कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का अनुभव कर रहा था वह इस बात से डर रहा था कि कहीं शांति के द्वारा अद्भुत चुसाई से गर्म होकर उसका लंड पिघल ना जाए,,, इसलिए वह गरम आहें भरते हुए शांति के मुंह से अपने बमपिलाट लंड को बाहर निकाल लिया,,,। लंड के मुंह से बाहर निकलते ही शांति गहरी गहरी सांसें लेने लगी उसका मुंह खुला का खुला था और वह नजर ऊपर करके शुभम की तरफ देख रही थी। शुभम नीचे जो कर उसकी दोनों बाहें थाम लिया और उसे ऊपर उठाने लगा,,, पर एक बार फिर से शुभम ऊसके लाल-लाल होठों में एकाकार हो गया,,,पास में ही बिस्तर था और एक नजर बिस्तर पर डालकर शुभम शांति को अपनी गोद में उठा लिया,,,,

आहहहह,,, क्या कर रहे हो गिर जाऊंगी मुझे डर लगता है,,,, अरे सुनो तो नीचे उतारो मुझे,,,,

(शांति कुछ और कह पाती इससे पहले ही धम्म की आवाज के साथ,, पलंग पर बिछाई गद्दी पर चारों खाने चित हो गई,,, शुभम उसे पलंग पर गिरा तो ही अपने लैंड को पकड़कर हीलाते हुए बोला,,,)

जानेमन मेरी बाहों में तुम्हें डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है,,,(शांति शुभम की तरफ देखी तो देखती ही रह गई वाकई में वह अपना हीलाते हुए बलशाली लग रहा था,,,शांति के लिए पहली बार था कि किसी ने उसे अपनी गोद में उठाया था और वह भी तब जब वह पूरी तरह से नंगी थी एक अद्भुत अहसास से वह भर गई,,, शांति शुभम के ऊपर नीचे हो रहे लंड को देखते हुए बोली।)

मैं तो डर ही गई थी,,,,

मैं तुमसे कहा ना डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है इतना कहने के साथ ही शुभम घुटनों के बल बिस्तर पर चढ़ गया,,, और उसकी दोनों टांगों को अपने हाथ में पकड़ कर फैला दिया,,, शांति को ऐसा लग रहा था कि अब वह उसे चोदेगा,,,लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था इतनी जल्दी शुभम किसी भी औरत पर चढ़ नहीं जाता जब तक कि उसे अपनी हरकतों से पानी पानी ना कर दे,,, शांति की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,, उसके बदन में हलचल मची हुई थी। जिंदगी में पहली बार मैं अपने से कम बहुत ही कम उम्र के लड़के के सामने इस तरह से नंगी लेटी थी,,वह कर भी क्या सकती थी एकदम मजबूर हो गई थी वरना अपनी मर्जी के बिना व किसी को हाथ भी नहीं लगाने देती थी लेकिन क्या करें शुभम की बात ही कुछ और थी उस दिन किचन में जिस तरह की हरकत करते हुए उसने उसे उत्तेजना के परम शिखर पर ले गया था और साथ ही रात को सड़क पर चलते हुए जिस तरह से वह उसका हाथ खींच कर पेड़ के पीछे ले जा कर के उसे चोदने की कोशिश किया था उससे शांति पूरी तरह से प्रभावित हो चुकी थी और जल्द से जल्द शुभम से चुदवाने कि आस बंधा कर रखी थी,,, जो कि आज उसकी मंशा पूरी होने जा रही थी,,,, देखते ही देखते कब शुभम अपना मुंह उसकी दोनों टांगों के बीच ले जा करके उसकी कचोरी जैसी फूली हुई बुर के ऊपर रखकर उसके मदन रस को चाटना शुरू कर दिया यह शांति को पता ही नहीं चला,,,,,

आहहहरहह,,,,,की गरम सिसकारी की आवाज के साथ ही शांति अपनी भारी-भरकम गोलाकार गांड को ऊपर की तरफ उठा दी,,, शुभम को अपनी दोनों टांगों के बीच झुका हुआ देखकर एकदम मस्त हो गई उसे यकीन नहीं हो रहा था कि जो वह अपनी आंखों से देख रही है वह सच है,,क्योंकि उसका पति कभी भी उसे इस तरह से प्यार बिल्कुल भी नहीं करता था और बुर चाटने की तो बात ही दूर थी,, अपने पति के बाद उसने किसी से भी संबंध बनाई थी उन लोगों ने आज तक उसकी बुर को अपने मुंह से नहीं लगाया था लेकिन शुभम उन सब से अलग सबसे जुदा था। क्योंकि वह शांति के पेसे से नहीं बल्कि उसके खूबसूरत जिस्म को प्यार करता था इसलिए एक हाई क्लास औरत और नौकरानी शांति में उसे बिल्कुल भी फर्क नहीं लग रहा था तभी तो वह बिना झिझक के उसकी रसीली बुर को अपने होठों से लगाकर उसके मदन रस को जीप से चाट रहा था,,,,

शुभम अपनी जीभ का कमाल उसकी कचोरी जैसी फूली हुई बुर पर बराबर दिखा रहा था,,,,शांति शुभम की हरकत की वजह से पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी और वह पलंग पर अपना सर उत्तेजना के मारे दाएं बाएं पटक रही थी,,,।

ओहहहह,,, शुभम यह क्या कर रहा है तू आहहहहह,,,,,शांति की उत्तेजना उसके बस में बिल्कुल भी नहीं थी वह अपने दोनों हाथों से अपनी बड़ी बड़ी चूची को दबाए जा रही थी और शुभम की हरकतों का मजा लूटे जा रही थी,,,,, शुभम को भी शांति की बुर चाटने में बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी। देखते ही देखते शुभम उसकी रसीली पुर के अंदर एक साथ अपनी दो उंगली डाल दिया क्योंकि वह जानता था,,, उसके लंड के लिए उसकी बुर के अंदर रास्ता बनाना बेहद जरूरी है,,, वरना उसके मोटे लंड का मोटा सुपाड़ा उसकी बुर के छोटे से छेद को पार नहीं कर पाएगा,,,,,दो ऊंगली एक साथ अपनी बुर के अंदर महसूस करते ही शांति एकदम पागल होने लगी एकदम मदहोश होने लगी उसकी आंखों में नशा छाने लगा। उसकी सिसकारियां की आवाज पूरे कमरे में गूंजने लगी,,,, शुभम उसकी बड़ी बड़ी गांड की नीचे अपनी दोनों हथेली ले जाकर के उसके नितंबों को दबाता हुआ उसकी बुर चाटने का आनंद लूट रहा था,,,,, शिमला की कड़कड़ाती 3डी में दोनों निर्वस्त्र होकर पलंग पर जवानी का आनंद लूट रहे थे इस बात से शांति भी एकदम हैरान थी क्योंकि अधिकतर जब भी बर्फ गिरती रहती है तब वह अपने पूरे कपड़े उतार कर अपने पति से नहीं चुदवाती या किसी से भी नहीं चुदवाती,,,क्योंकि ठंडी ही ईतनी पडती है कि बिल्कुल भी हिम्मत नहीं होती कि अपने सारे कपड़े उतार कर चुदाई का आनंद लूट सके,,, और ऐसा उसके साथ नहीं बल्कि अधिकतर लोगों के साथ होता था,,, उसको चोदने वाला भी कभी भी अपने सारे कपड़े उतारता नहीं था केवल काम भर का ही,,, अपनी पेंट नीचे करके साड़ी ऊपर करके ज्यादा कुछ हो तो ब्लाउज के बटन खोल कर मजा ले लिया जाता था लेकिन शुभम की कामुक हरकतो ने उसे इतना अधिक गर्म कर दिया था कि,,,वर्क आप अपने हाथों से उसके सारे कपड़े उतार कर उसे निर्वस्त्र कर दिया यह उसे पता ही नहीं चला था और आलम यह था कि शिमला की कड़कड़ाती ठंडी में उसी समय ठंडी का बिल्कुल भी एहसास नहीं हो रहा था। शुभम कुछ देर तक यूं ही शांति की बुर पर अपने होंठ लगाकर उसके रसीले रस को चूसता रहा,,,। शांति के बदन को कसमसाता हुआ देखकरशुभम को समझते देर नहीं लगी कि अब ऊसे अपनी बुर के अंदर उंगली नहीं बल्कि लंड चाहिए,,,,इसलिए शुभम देखते ही देखते शांति की मखमली मोटी चिकनी जांघों के बीच अपने लिए जगह बना लिया।
 
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