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रूबी इस हालत में अपनी नाइटी में हाथ डालकर अपने मम्मे दबा रही थी। पर उसकी बेचैनी बढ़ती जा रही थी। इसी बेचैनी के बीच उसने अपने एक हाथ से नाइटी के ऊपर से अपनी चूत को छुआ तो उसे थोड़ा सा गीलापन का एहसास हुआ। उसकी चूत ने पानी छोड़ा था और चुदवाने के लिए पूरी तरह तैयार थी। पर उसकी विडंबना ही ये थी की उसे चोदने वाला नहीं था।
कुछ देर रूबी ने अपनी चूत को नाइटी के ऊपर से ही रगड़ा, तो उसकी अंदर की आग और भड़क गई और प्रीति को अपनी नाइटी को अपनी कमर तक उठना ही पड़ा। रूबी ने अपनी पैंटी के ऊपर से ही अपनी चूत और महसूस किया की पैंटी पूरी तरह से गीली थी। रूबी को पता था इस हालत में उसको नींद आना मुश्किल ही है, जब तक चूत शांत नहीं होती। उसने धीरे से अपना हाथ पैंटी के अंदर डाला और चूत की पंखुड़ियों के साथ खेलने लगी। अपनी आँखें बंद किए हुए प्रीति और हरजीत की चुदाई को याद करने लगी। धीरे-धीरे उसने अपनी एक उंगली को चूत के अंदर डाल दिया और अंदर-बाहर करने लगी।
रूबी की सांसें तेज हो रही थी। अचानक उसके मुंह से निकला 'उफफ्फ' हरजीत और प्रीति की चुदाई को अपने आँखों के सामने लाते हये वो मदहोशी में खोने लगी। उसने अपनी उंगली की रफ्तार बढ़ा दी। उसका गला सूखने लगा। वो अपनी जीभ से होंठों को लाटने लगी। अब रूबी की दूसरी उंगली ने पहली वाली को जान कर लिया और दोनों साथ मिलकर रूबी का पानी निकालने की कोशिश करने लगी।
रूबी की सांसें तेज हो गई। आँखें बाद किए वो इमेजिन कर रही थी की हरजीत प्रीति की जगह उसे चोद रहा है। प्रीति की जगह वो हरजीत के नीचे लेटकर लण्ड का स्वाद ले रही थी। अब उंगलियों की रफ्तार तेज हो गई और रूबी अपने क्लाइमेक्स की तरफ बढ़ने लगी। रूबी की सिसकियां बढ़ने लगी। उफफ्फ... आहह... उम्म्म... की आवाजें रूबी के गुलाबी होंठों से निकल रही थी। इतनी ठंड में भी रूबी के बदन पे पशीना आ गया था। हरजीत के लण्ड की कल्पना करती रूबी पूरी स्पीड से उंगलियों को अपनी चूत के अंदर-बाहर कर रही थी। दोनों उंगलियां चूत के रस से सराबोर थीं।
तभी रूबी की साँस अटकी और चूत ने अपना पानी छोड़ दिया। रूबी तेज-तेज सांसें लेने लगी और बेड पे लेटी लेटी शांत हो गई। धीरे-धीरे रूबी की सांसें और धड़कन कंट्रोल में आने लगी। रूबी की चूत की आग ठंडी हो चुकी थी। पहले भी रूबी पता नहीं इस आग को अपनी उंगलियों के साथ कितनी बार ठंडी कर चुकी थी। पर यह आग बढ़ती ही जा रही थी। इस आग को ठंडा करने के लिए तगड़े मोटे लाड की जरूरत थी, जो की रूबी को साल भर बाद मिलता था। चूत की आग ठंडी होते ही रूबी की आँखें भारी होने लगी। नींद ने कब उसको अपने आगोश में ले लिया उसे पता भी ना चला।
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कुछ देर रूबी ने अपनी चूत को नाइटी के ऊपर से ही रगड़ा, तो उसकी अंदर की आग और भड़क गई और प्रीति को अपनी नाइटी को अपनी कमर तक उठना ही पड़ा। रूबी ने अपनी पैंटी के ऊपर से ही अपनी चूत और महसूस किया की पैंटी पूरी तरह से गीली थी। रूबी को पता था इस हालत में उसको नींद आना मुश्किल ही है, जब तक चूत शांत नहीं होती। उसने धीरे से अपना हाथ पैंटी के अंदर डाला और चूत की पंखुड़ियों के साथ खेलने लगी। अपनी आँखें बंद किए हुए प्रीति और हरजीत की चुदाई को याद करने लगी। धीरे-धीरे उसने अपनी एक उंगली को चूत के अंदर डाल दिया और अंदर-बाहर करने लगी।
रूबी की सांसें तेज हो रही थी। अचानक उसके मुंह से निकला 'उफफ्फ' हरजीत और प्रीति की चुदाई को अपने आँखों के सामने लाते हये वो मदहोशी में खोने लगी। उसने अपनी उंगली की रफ्तार बढ़ा दी। उसका गला सूखने लगा। वो अपनी जीभ से होंठों को लाटने लगी। अब रूबी की दूसरी उंगली ने पहली वाली को जान कर लिया और दोनों साथ मिलकर रूबी का पानी निकालने की कोशिश करने लगी।
रूबी की सांसें तेज हो गई। आँखें बाद किए वो इमेजिन कर रही थी की हरजीत प्रीति की जगह उसे चोद रहा है। प्रीति की जगह वो हरजीत के नीचे लेटकर लण्ड का स्वाद ले रही थी। अब उंगलियों की रफ्तार तेज हो गई और रूबी अपने क्लाइमेक्स की तरफ बढ़ने लगी। रूबी की सिसकियां बढ़ने लगी। उफफ्फ... आहह... उम्म्म... की आवाजें रूबी के गुलाबी होंठों से निकल रही थी। इतनी ठंड में भी रूबी के बदन पे पशीना आ गया था। हरजीत के लण्ड की कल्पना करती रूबी पूरी स्पीड से उंगलियों को अपनी चूत के अंदर-बाहर कर रही थी। दोनों उंगलियां चूत के रस से सराबोर थीं।
तभी रूबी की साँस अटकी और चूत ने अपना पानी छोड़ दिया। रूबी तेज-तेज सांसें लेने लगी और बेड पे लेटी लेटी शांत हो गई। धीरे-धीरे रूबी की सांसें और धड़कन कंट्रोल में आने लगी। रूबी की चूत की आग ठंडी हो चुकी थी। पहले भी रूबी पता नहीं इस आग को अपनी उंगलियों के साथ कितनी बार ठंडी कर चुकी थी। पर यह आग बढ़ती ही जा रही थी। इस आग को ठंडा करने के लिए तगड़े मोटे लाड की जरूरत थी, जो की रूबी को साल भर बाद मिलता था। चूत की आग ठंडी होते ही रूबी की आँखें भारी होने लगी। नींद ने कब उसको अपने आगोश में ले लिया उसे पता भी ना चला।
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