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कमलजीत- अच्छा ठीक है। मैं तुम्हें आवाजें लगा रही थी।
रूबी अंजान बनते हुए- “क्या हुआ मम्मीजी? कोई काम था?”
कमलजीत- अरे तुम तो नहा रही थी और इधर राम का पैर फिसल गया और उसे चोट लगी है। उसकी नाक से खून बह रहा है। उसे कोई दवाई वगेरा या मरहम है तो दे दे।
रूबी- ठीक है मम्मीजी। मैं आपको देती हूँ मेडिसिन।
कमलजीत- अरे नहीं तू खुद ही दे दे। मुझे किचेन में काम है। वो बाहर ही बैठा है। जा उसे दे दे और मेरे साथ आकर किचेन में हाथ बटाना।
रूबी जो की रामू का सामना नहीं करना चाहती और अभी भी रामू पे गुस्सा है। किसी तरह अपने मन को समझाकर दवाई ढूँढने लगती है और दर्द की गोली और मरहम लेकर बाहर आती है। बाहर रामू फर्श पे बैठा हुआ था और रूबी को देखकर अपनी आँखें झुका लेता है। रूबी भी उससे अपनी नजरें नहीं मिलाती और उसके पास दर्द की गोली और मरहम रखकर वापिस लौट जाती है।
उसके व्यवहार से रामू समझ जाता है की रूबी अभी भी गुस्से में है। अब तो उसके गुस्से के ठंडा होने का इंतेजार करना होगा और कोई ऐसी हरकत नहीं करनी होगी जिससे उसको अपने उससे हाथ धोना पड़े। अभी चार दिन पड़े हैं, 15 दिन होने में और सीमा के वापिस काम पे आने में। शायद तब तक कुछ बात बन जाए और रूबी उसे माफ कर दे। यही सोचता हुआ रामू अपने कमरे में आ जाता है।
रात को भी जब वो खाना लेने जाता है तो रूबी उससे कुछ नहीं बोलती और उसकी प्लेट में खाना डालकर उसे दे देती है। राम भी चुपचाप रहता है और कोई बात नहीं करता। वो अब कल का इंतेजार करता है जब वो सफाई करने घर में आएगा। रात को सोने के टाइम वो इस उम्मीद में रूबी के कमरे की तरफ जाता है की शायद उसे आज फिर रूबी अपनी चूत ठंडी करती दिख जाए। पर वहां पर पहुँचने पे देखता है की रूबी सोई हुई है।
राम उदास मन से वापिस आ जाता है और सोने की कोशिश करता है। अगले दिन जब सफाई का टाइम आता है तो कमलजीत राम को सफाई करने के लिए बोलती है। राम समझ नहीं पाता की आज रूबी दिखाई क्यों नहीं दे रही? और बड़ी बीवीजी क्यों उससे सफाई को बोल रही है? वो अधूरे मन से सफाई करने की कोशिश करता है पर उसका दिल तो बार-बार रूबी के दीदार के लिए तड़प रहा था। उसे लग रहा था की अभी रूबी आएगी और अपने मुश्कुराते चेहरे से उससे बातें करेगी। पर ऐसा कुछ नहीं हुआ।
रूबी अंजान बनते हुए- “क्या हुआ मम्मीजी? कोई काम था?”
कमलजीत- अरे तुम तो नहा रही थी और इधर राम का पैर फिसल गया और उसे चोट लगी है। उसकी नाक से खून बह रहा है। उसे कोई दवाई वगेरा या मरहम है तो दे दे।
रूबी- ठीक है मम्मीजी। मैं आपको देती हूँ मेडिसिन।
कमलजीत- अरे नहीं तू खुद ही दे दे। मुझे किचेन में काम है। वो बाहर ही बैठा है। जा उसे दे दे और मेरे साथ आकर किचेन में हाथ बटाना।
रूबी जो की रामू का सामना नहीं करना चाहती और अभी भी रामू पे गुस्सा है। किसी तरह अपने मन को समझाकर दवाई ढूँढने लगती है और दर्द की गोली और मरहम लेकर बाहर आती है। बाहर रामू फर्श पे बैठा हुआ था और रूबी को देखकर अपनी आँखें झुका लेता है। रूबी भी उससे अपनी नजरें नहीं मिलाती और उसके पास दर्द की गोली और मरहम रखकर वापिस लौट जाती है।
उसके व्यवहार से रामू समझ जाता है की रूबी अभी भी गुस्से में है। अब तो उसके गुस्से के ठंडा होने का इंतेजार करना होगा और कोई ऐसी हरकत नहीं करनी होगी जिससे उसको अपने उससे हाथ धोना पड़े। अभी चार दिन पड़े हैं, 15 दिन होने में और सीमा के वापिस काम पे आने में। शायद तब तक कुछ बात बन जाए और रूबी उसे माफ कर दे। यही सोचता हुआ रामू अपने कमरे में आ जाता है।
रात को भी जब वो खाना लेने जाता है तो रूबी उससे कुछ नहीं बोलती और उसकी प्लेट में खाना डालकर उसे दे देती है। राम भी चुपचाप रहता है और कोई बात नहीं करता। वो अब कल का इंतेजार करता है जब वो सफाई करने घर में आएगा। रात को सोने के टाइम वो इस उम्मीद में रूबी के कमरे की तरफ जाता है की शायद उसे आज फिर रूबी अपनी चूत ठंडी करती दिख जाए। पर वहां पर पहुँचने पे देखता है की रूबी सोई हुई है।
राम उदास मन से वापिस आ जाता है और सोने की कोशिश करता है। अगले दिन जब सफाई का टाइम आता है तो कमलजीत राम को सफाई करने के लिए बोलती है। राम समझ नहीं पाता की आज रूबी दिखाई क्यों नहीं दे रही? और बड़ी बीवीजी क्यों उससे सफाई को बोल रही है? वो अधूरे मन से सफाई करने की कोशिश करता है पर उसका दिल तो बार-बार रूबी के दीदार के लिए तड़प रहा था। उसे लग रहा था की अभी रूबी आएगी और अपने मुश्कुराते चेहरे से उससे बातें करेगी। पर ऐसा कुछ नहीं हुआ।