• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Adultery मेरी नशीली चितवन

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
मनीष सर: आह संध्या .. क्या मस्त मोटी गांड है तेरी. क्या महक हैं तेरी गांड की

मैं ; सर .. बहुत अच्छा लग रहा ..आप बहुत मस्त गांड चाटते हो.

सर: आह..संध्या तू भी बहुत मस्त चाट रही मेरी गांड.

मैं: सर आप की गांड बहुत साफ़ सुथरी हैं. बहुत मस्त मरदाना खुशबु ओर स्वाद है.

मैं प्यार से पूरी जीभ अंदर बाहर कर के सर की गांड का गुलाबी छेद चाटने लगी. सर की गांड सच मे बहुत साफ़ थी ओर सच मे उसकी महक ओर स्वाद बहुत अच्छा लग रहा था. मुझे गरम कर रहा था. सर ने तभी मेरी गांड को चाटकर अपने दूसरे साथ से एक जोरदार चांटा मेरी गांड पर मार दिया..ओर बोला - कामिनी.. ! .छिनाल..! गांड ..मटका कर रोज मेरे लण्ड को तरसाती है.

मैं..- आह सर. सॉरी . मुझे नहीं मालूम था मेरी गांड ने आपके प्यारे लण्ड को इतनी तकलीफ दी. आप मेरी गांड को मार-मार कर पिटाई कर दो .. सक्त सजा दे दो सर.

सर. - . यह ले.. उम्...आह.. तेरी गांड तो लाल हो गयी.

उन्होंने मेरी गांड पर एक..दो.. ऐसे कई चपाट मारे..

मैं - उह सर..दर्द होता है..उम्.....मारो सर..होने दो उसको लाल सर..मेरी कमीनी गांड को आज सजा दे दो.

ओर मैंने भी सर की गांड को हलके से दातों से चबा दिया. मेरे काटने से सर. - .आह..उफ़.. संध्या ! कर के गरम आहें भरने लगे. मैंने भी मौका देखा ओर सर की गांड पर एक चांटा जोर से मार दिया.

वैसे ही सर बोले .- आह संध्या ! .. ओर जोर से..

मैं - हाँ सर..आपकी गांड भी लाल हो रही हैं..इसकी अच्छी से पिटाई करती हूँ. आपने कठोर अनुशाषण से सब बच्चों को डरा कर रखा है. आपकी यही सजा है.

मैं सर की गांड पर जोर-जोर से चपाट मारते रही.

सर भी..आह ..संध्या.. ओर..जोर से...उम्म्म...हाँ दे दो मुझे सजा.. आह.. अगली बार स्केल पट्टी ओर अपनी सैंडल से मारकर इसको सजा देना...सर उफ़.. आह करते रहे.

मेरी गांड को निचे रखकर कर वो अब मेरी चूत को चाटकर चूत का रस पी रहे थे. मैं भी उनके गांड पर चांटे मार मार कर थक गयी थी..पर उनकी प्यास बुझी नहीं थी.. मुझे मालूम था उनकी प्यास अब मेरे सैंडल या स्केल पट्टी से बुझेगी.

मैंने उनका लण्ड फिर से पकड़ लिया. उनका लण्ड ..फूल कर फुफकार रहा था. मैंने धीरे से उनका लण्ड आपने मुँह में लेकर पूरा अपने गले तक डाल दिया.

सर..आह...संध्या ...क्या मस्त बुल्ला चुस्ती है तू

मैं : सर आपका बुल्ला हैं ही बहुत प्यारा , एकदम जबरदस्त

मनीष सर खुश हो गये : आह संध्या .. सर मत बोलो.. सिर्फ मनीष बोलो.

मनीष सर..अपनी गांड आगे पीछे कर के मेरे मुँह को चोद रहे थे. उनका पूरा लण्ड मेरे मुँह मैं ठूस जाता ओर उनकी गोटियाँ मेरे ओंठों के निचे टकरा जाती.

मैं : नहीं सर यह गलत है.. आप मेरे सर हो. मेरे से बड़े हो,

मनीष सर का लण्ड मेरे मुँह में धक्के पर धक्के दे रहा था.. ओर वो मेरी चूत का दाणा प्यार से चूस रहे थे.

मनीष सर.: संध्या हम दोनों बिस्तर पर नंगे है. नंगे लोग न बड़े होते न छोटे , सब एक समान ..आह संध्या तेरी मुन्नी (दाणा) कितनी रसीली हैं..

मनीष सर ने हलके से मेरे चूत का दाणा ओंठों से दबा दिया. .

मैं: आह मनीष...! उम्म्म.........उह....करके झड़ गयी. मेरे शरीर ने कांप के कही झटके दिये. झड़ते वक्त मैंने भी मनीष सर के लण्ड के टोपे को जोर से चूस लिया ओर अपने होठों से दबा दिया.

मनीष सर: आह...ले ले मेरा पानी संध्या .. पूरा पानी पी ले . ओर उन्होंने पूरा पानी मेरे मुँह मैं डाल दिया. मैंने उनको सिर्फ उनके नाम से बुलाने से वो खुश हो गये थे.

उनके लण्ड का पानी खारा ओर गाढ़ा था. मैंने भी उनके लण्ड का सूपड़ा चूस चूस कर सारा पानी पी लिया. मनीष सर भी अपनी जीभ निकाल कर मेरी चूत का पानी चाट रहे थे.

मनीष सर बड़े खुश हो गये: वाह संध्या मजा आ गया .. पहली बार किसी ने मेरे लण्ड का पानी पिया. बता कैसे लगा.

मैं: मनीष आप के लण्ड का पानी बहुत स्वाद भरा था. एकदम लाजवाब ओर गरम - एकदम आप जैसे.

सर खुश हो गये. वह मेरी ऊपर कुछ देर लेटे रहे ओर मेरे चूत का पानी चाटते रहे. मैंने भी उनका लण्ड अपने मुँह से तब तक बाहर नहीं निकाला जब तक वह सिकुड़ नहीं गया था.

सर सोफे पर बैठ गये. सर ने मुझे अपनी गोदी में बिठा दिया ओर मुझे चूमने लगे. मेरे ओंठों पर अभी भी उनके लण्ड का पानी लगा था. वह मेरे होंठ चूसकर सब पानी पीने लगे. उन्हें अपने लण्ड के पानी का स्वाद मेरे मुँह से चखते हुए बड़ा मजा आ रहा था.

सर ने कहा : संध्या अब शाम हो गयी. वॉचमैन आता ही होगा. देखो आगे से ख्याल रखो. मुझे तेरे ओर राजवीर के खेल से कोई दिक्कत नहीं पर ओर किसी ने देख लिया तो बदनामी होगी. तेरा नाम ख़राब होगा...वगैरे ...वगैरे .. वह मुझे समजा रहे थे.

मैंने सर से कहा..सर सॉरी.. मैं आगे से ख्याल रखूंगी. पर मैं ऐसा नहीं करती तो आप मुझे कैसे मिलते? सर मुस्कुरा दिये. सर ने पूछा - फिर से मिलोगी.

मैं: हाँ सर , आप मुझे बुला लेना जब भी आप फ्री हो. प्रोजेक्ट भी पूरा करना है ना.

हम दोनों हंसने लगे. सर ने हँसते कहा - पर एक शर्त पर. तुम मुझे अकेले मैं मेरे नाम से बुलाओगी .

मैंने कहा - हां मनीष

सर के सिकुड़े हुए लण्ड को देखकर मुझे पता लग गया था की सर एक पारी (inning ) के खिलाडी है. हमने कपडे पहने, पर पैंटी नहीं होने की वजह से , स्कर्ट के अंदर अभी भी नंगी थी. जाने से पहले सर ने मुझे फिर से अपनी बाहों मैं भर लिया ओर एक लम्बा गुड बाय चुम्मा दिया ओर मेरे स्कर्ट के अंदर अपनी ऊँगली डाल दी. मेरी गीली चूत का रस अपनी ऊँगली से निकाल कर उन्होंने मुझे आँख मार दी ओर उनकी ऊँगली मुंह मैं डालकर चूसते रहे. सर क्लास में जितने सक्त ओर कठोर थे, प्यारके मामले में इस उम्र मैं भी उतने ही ज्यादा रंगीन थे.

मैं अपने कपडे ठीक ठाक कर के .. कॉलेज से बाहर आयी ओर अपने हॉस्टल की तरफ जाने लगी. कॉलेज की टाइमिंग ख़तम हो गयी थी, सब घर चले गये था, सुनसान था. कैंटीन के सामने मुझे राजवीर अकेला खड़ा मिला. राजवीर ने कहा - संध्या कहा थी. कब से तुझे ढूंढ रहा था.

मैंने कहा - यही लाइब्रेरी मैं थी. उसने कहा - मैंने तुझे वहा भी ढूंढा , तू दिखी नहीं.

मैंने कहा - टॉयलेट में होंगी तभी शायद. क्या करू, पैंटी नहीं होने की वजह से सब गिला हो जाता है.

राजवीर मुस्करा दिया: अच्छा है ना. ! तुझे मस्त फ्री लग रहा होगा. निचे से ठंडी हवा भी चूत को लग रही होगी. यार क्लास में कुछ मजा नहीं आया. मनीष सर ने सारा खेल बिगाड़ दिया. चलो ना कही चलते हैं.

मैंने कहा - कहा जायेंगे ? ओर अनीता ?

राजवीर: मैंने अनीता से जानबुज कर झगड़ा कर डाला. वो अपने रूम पर हॉस्टल चली गयी है. . चल टेरस पर चलते है.

मेरी चूत में लण्ड की भूक लगी थी. उस वक्त सिर्फ राजवीर उसे बुझा सकता था. मैंने आस पास देखा. कोई नहीं था. मैं राजवीर के सात उसके पीछे चलने लगी.
 
मैं राजवीर के पीछे पीछे चलने लगी. जैसे सीढ़ियां चढ़ने लगे, राजवीर ने मुझे उसके आगे चलने को कहा. प्लीज मुझे पीछे से तेरी मटकती गांड देखनी है.

राज: संध्या तू सीढ़ी चढ़ती है, तेरे चूतड़ पीछे से मस्त हिलते है..क्या मस्त गांड है तेरी - भरी और गदरायी सी. !

उसने पीछे से स्कर्ट के अंदर साथ डाल कर मेरी गांड पकड़ ली और मेरे चूतड़ अपने दोनों हाथों से मसलने लगा.

मैं एक पैर जैसे ऊपर कर देती, सीढी चढ़ने , वह निचे से मेरे चूत को भी पकड़कर दबा देता. मेरी चूत अब बहुत गीली हो गयी थी. मैं जानबूझ कर धीरे धीरे गांड को ठुमके देकर चल रही थी. राज एकदम पागल हो गया था.

राज: तेरी चूत की भट्टी आज बहुत गरम है.

मैं: हाँ..जल्दी से इसको शांत कर दे.

हम छत पर पहुँच गये. इतनी लम्बी बड़ी छत पर कोई नहीं था. बाकि की बिल्डिंग / इमारतें भी बहुत दूर थी. शाम के अँधेरे में कोई देख नहीं सकता था.

मैंने कहा - राज कोई आ जायेगा तो?

राज: कोई नहीं आयेगा संध्या, मैं हूँ.. तू डर मत.

छत की टावर के बाजु एक कोना था..वहा एक- दो पुराने टेबल भी पड़े थे. राज ने अपने पूरे कपडे निकाल दिये और टेबल के कोने पर रख दिये. राजवीर पंजाब का सरदार शेर था. झट से नंगा हो गया. मैं उसको पहली बार नंगा देख रही थी. साढ़े छह फ़ीट लम्बा - हट्टा-कट्टा, बड़ी दाढ़ी, सर पर पगड़ी.. उसकी मांसल भुजाये , और उसकी किसी मोटे चौडे खंबे जैसे जंघा - एकदम बॉलीवुड के सनी देओल जैसे लगता था. उसका पूरा गोरा बदन सर से पाँव तक काले घुंगराले बालों से भरा था. उसकी मोटी जांघों के बीच से लटकता उसका गोरा लण्ड - १० इंच का, मोटा गुलाबी सूपड़ा, ओर उसकी दोनों टांगों के बिच उसके लटकते टट्टे ..मुझे वह स्वप्निल से भी सुन्दर लग रहा था. मेरे जीवन का सबसे सुन्दर ओर मरदाना नंगा आदमी..शायद..!

राजवीर ने खड़े खड़े मुझे भी नंगा कर दिया..और पागलों की तरह मुझे चूमने लगा, मेरे आम मसल कर चूसने लगा. उसने मुझे टेबल की दूसरी बाजु बिठा दिया. मैंने अपने दोनों हाथों से उसका लण्ड पकड़ लिया. उसका लण्ड एकदम गरम ओर सख्त था. मैंने राजवीर का मुँह मेरे मम्मों से दूर किया..

मैं: राजवीर ये चुम्मा चाटी बाद में करो यार . पहले इसको मेरे अंदर डाल दो.

राजवीर ने मुझे टेबल पर सुला दिया ओर मेरे पैर ऊपर करके मेरी छाती से लगा दिये. अब मेरी गांड ऊपर हो गयी थी ओर चूत सामने खुल गयी थी. राजवीर ने अपने हाथों से मेरी चूत मसल दी..ओर हलके से अपन हाथों से मेरी चूत पर मार दिया.

मैं: आह.....ओह..राज..दर्द होता हैं. मारो मत. जल्दी से डाल दो.

राज: चुप बेहेन की लोड़ी... तेरी फुद्दी में तो आग लग गयी है.. बता क्या डाल दू..ठीक से बता.

मैं: मेरी फुद्दी में तेरा लण्ड डाल दे राजवीर प्लीज्.

राज: हम्म.. मेरी रानी..तेरी गरम फुद्दी मैं अपना लण्ड डाल कर तेरी फुद्दी बज बजा कर लाल कर दूंगा. तेरी फुद्दी पर मूत कर तेरी फुद्दी को ठंडा कर दू?

मैं: ओह राज...प्लीज डाल दे..मुझे चोद दे..

राज: ले रंडी..तू ही अपने हाथों से मेरा लण्ड तेरी फुद्दी में डाल दे.

मैं अपने दोनों हाथों से राज का लण्ड पकड़ कर अपने फुद्दी पर रख दिया. पर वह धक्का नहीं मार रहा. मैंने गांड ऊपर उछाल दी ताकि उसका लण्ड चूत के अंदर डाल दू. उसके लण्ड का टोपा मेरे दाणे पर फिसल जाता ओर घिस जाता.

मैं: ओह.. माँ.. प्लीज राजवीर अंदर डाल दे..मैं मार जाउंगी.

राज: तुझे थोड़ी मरने दूंगी रानी. मारूंगा तो मैं तेरी फुद्दी.. रोज चोद चोद कर इसको सुजा दूंगा. पहले बोल..रोज मेरे से अपनी फुद्दी चुदवायेगी ना ?

मैं: हाँ हमेशा तेरे लण्ड से अपनी फुद्दी चुदवा लुंगी, बस अब डाल दे.

राज: प्रॉमिस कर. ओर रोज क्लास में नंगी आकर मेरे बाजू बैठोगी.

मैं - हां रोज सिर्फ स्कर्ट मैं आउंगी..बिना पैंटी के ओर तेरे बाजू बैठूंगी.

राजवीर ने एक लम्बा जोर से धक्का दिया - ओर एक ही झटके में उसका पूरा लण्ड मेरी चूत में डाल दिया.. मैं ..ओह माँ.बोल कर जोर से चीख उठी. वैसे उसने मेर मुँह पर साथ रख दिया ताकि मेरी आवाज किसी को सुनाई ना दे.

सरदार अब उसका पूरा १० इंच का लण्ड मेरी चूत में गड़ाये था. मैं कांप रही थी. सिसक रही थी. इतने बड़े लण्ड से छटपटा रही थी.

राजवीर ने दूसरे साथ से मेरा दाना मसलना चालू कर दिया. कुछ देर तक वह वैसे ही मुझमे फंसा रहा. अब मुझे कुछ राहत मिली थी.. उसने अपना आधा लण्ड बाहर निकाला ओर फिर से मेरी चूत में अंदर तक टिका दिया. मैं..आह.कर के चिल्लाई पर उसने अभी भी उसका साथ मेरे मुँह पर रखा था. राजवीर अब मुझे धीरे धीरे, लण्ड अंदर-बाहर कर के चोद रहा था. अब उसने रफ़्तार बढ़ा दी थी ओर पूरा लण्ड अंदर बाहर करके मुझे चोद रहा था.

ले रंडी..अब तू भी मेरे लण्ड की गुलाम बन गयी. रोज अपने लण्ड से तुझे सांड जैसे चोदूंगा. आज तक किसी ने तेरी फुद्दी ऐसे चुदी नहीं होगी. .

रोज तुझे मसल दूंगा..चोद चोद कर तेरी फुद्दी ख़राब कर दूंगा. रोज तू अपने चूतड़ मेरे लण्ड पर उछाल उछाल कर चुदवायेगी.

मैं छटपटा रही थी. मेरी चूत जवाब दे रही थी. मैंने.. आह मार गयी..ओह..उफ़...करके उठकर राजवीर को मेरे ऊपर खिंच लिया . उसके ओंठो को मेरे मुँह से जोर से चूसकर / उसके लण्ड पर झड़ने लगी. राजवीर को यह अपेक्षित नहीं था..मेरी चूत के गर्माहट ओर पानी से, वह भी मेरी चूत के अंदर झटके देने लगा. उसका गरम पानी, मेरी चूत में अंदर तक चला गया. मैंने राजवीर को कस के बाँहों में पकड़ लिया था. निचे उसका लण्ड मेरी चूत मैं - एक..२..३...करके झटके लगाता रहा ओर अपना वीर्य का फंवारा मेरी चूत के अंदर उडाता रहा. मैंने थक कर उसको कसके पकड़कर उसके कंधे पर अपनी गर्दन रख दी. तभी मेरी नजर सामने गयी. मुझे टेरेस की दरवाजे के पीच्छे कुछ दिखा. मैंने गौर से देखा. अनीता वहा दरवाजे की पीछे छुपकर हमें देख रही थी.

मैंने राजवीर के कान मैं धीरे से कहा: अनीता हमें दरवाजे के पीछे छुपकर देख रही है.

राजवीर: देखने दे. मुझे उसमे ऐसे भी कोई इंटरेस्ट नहीं है अब.

मैंने उसके पीठ पर साथ फेरते उसकी गांड को जोर से चिमटी ले ली..

राजवीर- आह संध्या..कमीनी ! इतनी जोर से .चिमटी क्यों ले रही हो.

मैं: कमीने . ! कुछ दिनों बाद मुझे भी कहेगा की अब कोई इंटरेस्ट नहीं रहा.

राजवीर: नाही जान , मैं तो तुझे फर्स्ट दिन से देखा, तब से प्यार करता हूँ. तू कहे तो अभी आज तेरे से शादी कर लू. अपने १०-१२ बच्चों की माँ बना दू.

राजवीर का लण्ड अभी भी मेरी चूत में था. अभी भी ऊ वो सख्त था.

मैं: तूने मुझे थका दिया. अब मुझे हॉस्टल तक पैदल जाने की इच्छा नहीं है.

राजवीर: कोण तुझे जाने को कहा रहा .. तू कहे तो तुझे ऐसे ही ले चलू..

ऐसा कहकर रणवीर ने मुझे अपने लण्ड पर उठा लिया ओर मेरी गांड निचे से पकड़कर गोदी में ले लिया. मैं भी उसको वैसे ही चिपके रही ओर गर्दन पर साथ डालकर पकडे रही. .

रणवीर: आजा , आज तुझे कॉलेज की टेरेस की सैर कराता हूँ.

वह मुझे वैसे ही अपने लण्ड पर बिठा कर कॉलेज की टेरेस पर चारो बाजू घूमने लगा. चलने की वजह से मैं उसके लण्ड पर उछल जाती. छत की दिवार हमारे कमर तक थी. पर निचे से कोई देखता तो जरूर पता चलता की हम क्या कर रहे. ऊपर से हम नंगे थे. ओर रणवीर की लम्बाई अच्छी होने से, उसने ऊपर तक मुझे गोदी में उठा लिया था. इसी रोमांच में , मैं फिर से रणवीर के लण्ड पर झड़ गयी. मैंने उसको कास के पकड़ लिया ओर उसके ओंठों को चूसने लगी. उसने भी मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल दी ओर फिर से मुझे उसके गरम लण्ड के झटके ओर पानी के फंवारे का अहसास मेरी चूत के अंदर हुआ. वह भी कांप कर मेरी चूत में झड़ने लगा. चलते चलते मेरी चूत का पानी ओर रणवीर के लण्ड के पानी ..की बुँदे टेरस पर सब जगह गीर गयी.

रणवीर ने कहा : मजा आया संध्या..?

मैं: बहुत.. तू बहुत मस्त है. ..

रणवीर: सब से अच्छी तू है. पर याद रख.. एक सरदार . बाकी बेकार !
 
कॉलेज के फाइनल ईयर की इंजीनियरिंग में मुझे कैंपस इंटरव्यू से बंगलूर में एक अच्छी IT कंपनी में नौकरी मिल गयी थी.. मैं आगे पढ़ना चाहती थी, उसके लिये नौकरी के साथ आगे की पढाई के लिये एग्जाम की तैयारी भी कर रही थी. बंगलूर मैं राज अंकल भी रहते थे. उन्होंने मुझे और मेरी सहेलियों के लिये ऑफिस के पास रहने के लिये फ्लैट ढूंढ कर दिया.

पहले दिन बंगलूर एयरपोर्ट पर राज मुझे लेने आये. उनके बाल अब उम्र के हिसब से थोड़े सफ़ेद हो गए थे, पर उनके बॉडी और भी अच्छी हो गयी थी किसी पके हुए आम की तरह सब जगह से मासलदार हो गयी थी. उनको देख कर मैंने उनको कस के पकड़ लिया ओर एक बड़ा सा आलिंगन दे दिया. उन्होंने भी धीरे से मेरे कान के पास होंठ लगा दिए.. आई मिस्ड यू संध्या.

मैं एक दिन पहले उनके घर चली गयी. मेरी सहेलियां दूसरे दिन आने वाली थी. भाभी भी मुझे देखकर बहुत खुश हुई. नाश्ता चाय करके राज अंकल ने कहा - संध्या को फ़्लैट दिखाता हूँ ओर वहा से फिर ऑफिस चला जाऊंगा.

मेरा फ़्लैट ओर ऑफिस राज अंकल के घर से दूर था. मैं उनकी कार में ड्राइवर की साइड वाली सीट पर बैठ गयी ओर वो ड्राइव करने लगे. मैंने कहा - राज अंकल फ़्लैट में क्या क्या दिखाने ले जा रहे. राज अंकल हंस दिये. तुझे पसंद वो सब दिखा दूंगा. तेरी पसंद का चॉक्लेट भी खिला दूंगा. संध्या तू अब ओर भी मस्त जवान हो गयी है. तेरा आंग अंग मस्त भर गया हैं ओर गदराया शरीर है.

मैंने कहा: आप भी मस्त दिख रहे अब राज अंकल. मस्त हर जगह गदराये ओर पके फल जैसे.

हम दोनों हंस दिये.

फ़्लैट में राज अंकल सीधे मुझे बेडरूम में ले कर गये. उन्होंने प्यार से मुझे पास खिंच लिया ओर मुझे जोर जोर से चूमने लगे. इतने दिन बाद मिल रहे थे..मैंने भी उनको कस के पकड़ लिये. कुछ मिनट में हम नंगा हो गये ओर मैं उनकी गोदी में नंगी बैठी थी. उन्होंने उनका मोटा लण्ड धीरे से मेरी चूत के अंदर डाल दिया था ओर मेरे ओठों को चूस रहे थे, ओर कभी मेरे मम्मों को. मैं बहुत खुश थी. मैं फिर से आज ४ साल बाद अपने सेक्सगुरू से चुदवा रही थी. राज प्यार से मेरी गांड पकड़ कर ऊपर निचे कर के मेरी चूत अपने लण्ड से पेल रहे थे.

राज: संध्या ४ साल में मेरी याद आयी.

मैं: हाँ राज बहुत बार याद आती थी. जब भी किसी से सेक्स करती आपके सिखाये नुस्खे याद करती.

राज: अच्छा क्या क्या याद करती, सिर्फ मुझको याद करती?

मैं: राज सब याद आता, आपका लण्ड, आपका शरीर, आपकी चुदाई, आपका चुम्मा ..सब कुछ.!

राज: ४ साल में मुझमे कुछ फरक लगा तुझे .?

मैं: हां राज, आपका लण्ड अब ओर ज्यादा मोटा ओर बड़ा लग रहा हैं . आप के टट्टे भी बड़े दिख रहे हैं ओर भारी होकर निचे लटक रहे है .. आप पके फल की तरह अब ओर भी मीठे हो गये हो.

राज: अच्छा..मैं पका फल हूँ ! .अभी तुझे पके फल का मीठा रस पिलाता हूँ.

राज ने मुझे बिस्तर पर सुला दिया ओर मेरे ऊपर आकर जोर जोर से मुझे चोदने लगे. मैंने उनको कस कर पकड़ लिया..मेरी चूत गरम हो गयी थी..गीली हो गयी थी मेरे तन-बदन में आग लग गयी थी ओर हम दोनों पसीने मैं भीग गये थे. मैंने..आह..ओह.. चिल्लाकर राज के लण्ड को निचोड़ कर अपनी चूत के अंदर जकड लिया ओर उसको अपने पानी से भिगो दिया, कांपते हुए कई बार मैं उसके लण्ड पर झड़ गयी. राज भी ज्यादा देर तक रोक नहीं पाया ओर कई झटके मार के मेरे चूत में अपना पानी डाल दिया. बहुत देर तक राज मेरे ऊपर नंगा पड़ा रहा. उसका लण्ड अभी भी मेरी चूत में तना हुआ था. वह बिस्तर पर लेटे-लेटे मुझे पकड़कर घूम गया ओर उसने मुझे उसके ऊपर ले लिया ताकि उसका वजन मुझपर से हट जाये. उसका लण्ड अभी भी मेरी चूत में सटा हुआ था ओर मेरी चूत से उसका पानी निचे बहकर उसकी गोटियों पर गीर रहा था. उसने मेरा चेहरा प्यार से दोनों हाथों से पकड़ लिया - संध्या तुझे छोड़कर जाने का मन नहीं कर रहा. क्या में आज रुक जाऊ?

मैंने प्यार से राज के दोनों गालों पर बहुत बार चुम लिया ओर कहा : राज,आपको मेरी परमिशन लेने की की जरुरत कब से पड़ गयी.

राज:काश ! मैं तेरी उम्र का होता ओर मेरी शादी नहीं होती. मैं तुज़से से ही शादी करता.

मैं: हाँ राज, मैं भी सिर्फ आप से शादी करती.

राज अब फिर से मुझे अपनी गांड निचे से उठा उठाकर चोदने लगे. मैं अपने होंठ उनके ओठों में देकर..उनके प्यार में डूब गयी.

मैं मेरे ३ सहेलियों के सात फ़्लैट मैं रहती थी. जब भी अकेले में मौका मिलता राज मुझे चोदने के लिये फ़्लैट पर आ जाते. एक - दो बार भाभी अपने मायके गयी, तो मै उनके घर रहने चली गयी. इसी बीच स्वप्निल का MBA भी पूरा हो गया ओर उसे भी बंगलोरे में नौकरी मिल गयी. मैं बहुत खुश थी. वह अपने दोस्तों के साथ शेयरिंग फ़्लैट में रहता था. पर उसकी साथ अकेले में सेक्स का मजा नहीं आया. मैं बंटी को मिस करती थी.

दोस्तों में गांव के किसान जमींदार के परिवार से थी. इसलिए मुझे शादी के रिश्ते आने लगे. घर से भी शादी का दबाव बढ़ने लगा.आगे की पढाई शादी के बाद करनी ये प्रस्ताव भी मंजूर हो गया. एक दिन मेरे ऑफिस मैं अनीश मुझसे मिलने आये. ६ फ़ीट लम्बे, सुन्दर, कसा हुआ शरीर, आकर्षक व्यक्तिमत्व. उन्होंने MBA किया था ओर बंगलोरे में मल्टीनेशनल कंपनी मैं अच्छी अहदे पर नौकरी कर रहे थे. वो मेरे पिताजी के दोस्त का बेटा था ओर उनकी बंगलोरे मैं जॉइंट फॅमिली थी, खुद का बड़ा मकान था, अपने छोटे भाई ओर माँ बाप के साथ वो वही रहते थे. अनीश को मैं पहली नजर में पसंद आ गयी ओर मेरे पापा ने मेरी शादी फिक्स कर दी ओर तुरंत २ महीने बाद का मुहूर्त भी निकाल दिया.

दोस्तों यह २० साल पहले का जमाना था. मे परिवार के रस्मों ओर कसमों में बंधी लड़की थी. मैंने तुरंत बंटी को फ़ोन किया. वो ओर बुवा पापा के पास मुंबई जाकर मिलने गये. बंटी ने पापा से मुझसे शादी करने की लिये बहुत मिन्नतें की, पर पापा ने साफ मना कर दिया. उन्होंने अपने दोस्त को वचन दे दिया था. फिर पापा बंटी से बोले - देखो बंटी, संध्या पढ़ी लिखी शहर की लड़की हैं, उसका अपना करियर हैं, तू उसे गांव मे कहा रखेगा, वो कैसे रहेगी ?

शादी को अब एक हफ्ता रह गया था. मैं मुंबई आ गयी थी. मैंने गर्भे निरोधक गोलियां खानी बंद कर दी थी. योगा करके ओर अपनी चूत पर क्रीम लगाकर मैं उसको भी कसी हुई करने की कोशिश कर रही थी. आजकल तो ऑपरेशन कर के फटी हुई चूत की झिल्ली जोड़ देते है. तब ऐसे कोई इंतजाम नहीं होता था. में टेंशन मैं थी. अपनी फटी चूत को कैसे छुपा पाऊँगी अनीश से?
 
शादी के दो दिन पहले स्वप्निल घर आया. उसने चुप के मेरे साथ मैं एक चिठ्ठी दे दी. उसकी जाते मैंने वह चिठ्ठी पढ़ी. वो चिट्टी बंटी की थी.

बंटी ने लिखा था : संध्या मैं यही पास मेँ ब्लू स्टार होटल में रूम १०१ में हूँ. प्लीज मुझसे जल्दी मिलने आ जाना.

मैं सोचने लगी..क्या मैं अपने प्यार से मिलने जाऊ ? क्या मैं उसकी साथ भाग के शादी कर लू ? बंटी को मेरे चुदाई के सारे किस्से पता थे. उसकी साथ मेरा कनेक्शन है. मैं उसकी साथ बहुत सुखी रहूंगी.

क्या करू मैं ? मेरे मन मे असंख्य सवालों का बवाल उठ रहा था.

मैंने घर में बहाना बनाया की ब्यूटी पारलर वाली के पास मेक उप फाइनल करने के लिये जाना हैं. ओर मैं होटल ब्लू स्टार चली गयी. मैंने कमरे की घंटी बजायी, बंटी ने दरवाजा खोला. उसके चहरे का तेज गायब हो गया था. उसकी मुस्कान खो गयी थी. वह बहुत उदास लग रहा था. उसकी आँखों में हमेशा की तरह चमक की जगह आज दर्द ही दर्द था. मैं बहुत दुखी हो गयी. उसने मुझे जोर से पकड़ लिया और जोर जोर से रोने लगा.

मैं भी उसके बाँहों में समेट कर उसके साथ रोने लगी.

बंटी: मुझे लगा तू नहीं आयेगी. तू नहीं आती तो शायद मैं मर जाता.

मैं: ऐसे मत बोलो बंटी. मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ. कैसे नहीं आती..

बंटी: चलो संध्या मेरे साथ ..हम लोग भाग कर शादी करते है..

मैं:नहीं बंटी..मैं ऐसा नहीं कर सकती. मेरे पापा का नाम ख़राब नहीं कर सकती. क्या तुम चाहते हो की तुम्हारे मामा का नाम कलंकित हो जाये.

बंटी: फिर मैं क्या करू संध्या. तेरे बिना मैं कैसे जी सकता हूँ.

मैं: अब कुछ नहीं कर सकते, बंटी बहुत देर हो गयी.

बंटी: ऐसे मत कहो संध्या..मैंने सिर्फ तुम्हारे ख्वाब देखे है. मेरे प्यार को ऐसे मत तोड़ो. मेरे दिल की आह लग जायेगी तुझे.

मैं: बंटी प्लीज ऐसे मत कहो..तुम मुझे ऐसे कोस नहीं सकते..प्यार करते हो तो बद-दुवा मत दो.

बंटी: कैसे बदुआ दूंगा तुझे संध्या..मैं तुझे अपने जान से ज्यादा प्यार करता हूँ.. करके बंटी मुझे चूमने लगा.

मैं: क्या करती मैं बंटी. मैं तेरे साथ गांव में भी रह लेती. खेतों में जाती. तेरे साथ गाय-भैंसों का दूध भी निकालती.. मैं तेरे साथ बहुत खुश रहती. पर अब बहुत देर हो गयी सब को.

बंटी: मैं मर जाऊंगा ..! जी नहीं पाउँगा संध्या.. !

उसने मेरे होंठ चूस लिए और उसकी जीभ मेरे मुँह में डाल दी. मुझे बंटी को शांत करना था..वह तिल तिल मर रह था. अपने प्यार से मैं उसको शांत कर दूंगी..समजा दूंगी. मैं भी उसको पागलों की तरह प्यार करने लगी. यह मेरे मन की ग्लानि थी या बंटी के प्रति प्यार, मैं उसके प्यार में डूबती चली गयी. मुझे कुछ नहीं समझ में आ रहा था. सब जगह बंटी ही बंटी नजर आ रहा था. मन में तूफान उठ रहा..था..मैं बंटी से हमेशा के लिए बिछड़ जाउंगी. बंटी ने कुछ सेकंड में ही हम दोनों को नंगा कर दिया था. उसके सर पर भूत सँवार था. उसने मुझे बिस्तर पर सुला दिया, मेरे पैर ऊपर कर दिए और एक झटके में उसका पूरा लण्ड मेरी चूत में ड़ाल दिया. में जोर से चिल्ला उठी..आह बंटी...मर जाउंगी. .. धीरे..!

पर बंटी को कोई फरक नहीं पड़ रहा था.

बंटी: हाँ संध्या..हम दोनों तो ऐसे ही मर जायेंगे.. !

बंटी मुझे..जोर जोर से किसी मशीन की तरह चोद रहा था. एक मुर्दे की तरह !. मेरी चूत कई बार गीली हो कर झड़ गयी..पर उसके चहरे पर कोई भाव नहीं था. उसका गुस्सा बढ़ रहा था. मैं उसको अपने सीने से लिपटना चाहती थी, प्यार करना चाहती थी..पर वो वैसे ही खड़ा खड़ा मुझे चोदे जा रह था.

उसने मेरे पैर पुरे ऊपर छाती से लगा दिए और मेरी गांड एकदम ऊपर कर दी... उसने अपना लण्ड धीरे मेरी चूत से निकाला..और मेरी गांड पर रख दिया..

में: नहीं बंटी..प्लीज..ऐसे मत करो..मैंने कभी नहीं किया !...

मैं कुछ और कहती, उसके पहले ही बंटी ने मुझे जोरदार धक्का दिया और उसका लण्ड मेरी गांड में आधा चला गया. मेरे चूत के पानी से उसका लण्ड पहले ही चिकना हो गया था.

मैं: आह ! मर गयी..प्लीज निकल दो..उफ़..बंटी रहम करो.

मैंने जोर जोर से रोने लगी. मैं तड़प कर छटपटा रही थी. पर बंटी ने मुझे कास के पकड़ रखा था. मेरी गांड में भीषण दर्द हो रह था.

बंटी: संध्या तेरी गांड का उद्घाटन मैं अपनी सुहागरात को प्यार से करनेवाला था. पर अब कोई रास्ता नहीं हैं. तेरे पर पहला हक मेरा था ना

बंटी ने कस के मेरी गांड पकड़ ली और धीरे धीरे अपन लण्ड मेरी गांड में पेलने लगा. मैं तड़प कर रो रही थी. इतना दर्द मुझे कभी नहीं हुवा था. पर बंटी मेरी गांड पकड़ पकड़ कर जंगली की तरह चोदे जा रहा था.

बंटी: ले रंडी..कर ले उस अनीश से शादी..फिर कभी इसके बाद तुझे नहीं मिलूंगा.

मैं बस रोये जा रही थी, पर बंटी ने कोई रहम नहीं किया..उसने अब उसका पूरा मोटा काला 8 इंच का नाग मेरे गांड मैं ड़ाल दिया था. उसका केले जैसे आकiर का लण्ड..मेरी गांड को हर जगह छू रहा था. मेरा दर्द अब कम हो गया था..और मैं..गीली हो रही थी. बंटी धके पर धक्के मार रहा था.

मैं..आह बंटी..प्लीज..धीरे..मैं फिर से कसमसा गयी..

मैंने बंटी को अपने दोनों हाथों जोर से मेरे तरफ खिंच लिया और उसके ओंठो को चूसने लगी...और गरम हो कर थरथरा कर जोर से झड़ने लगी.. मेरी चूत से पानी की गंगा बहने लगी थी. मेरे ऐसे करने से बंटी ने भी कई झटके मेरी गांड में लगाये और मेरी गांड में उसका गरम पानी ड़ाल दिया. वह बहुत देर तक मेरे ओंठों को चूसता रहा, अपनी जीभ मेरे मुँह में डालता रहा. मैं भी उसकी जीभ पागल जैसे चाट लेती..उसको बहुत प्यार करती, जैसे की मेरे जीवन का आखरी दिन है. बंटी का लण्ड अभी भी मेरी गांड में फंसा था..खड़ा था..बिलकुल सिकुड़ा नहीं था.

बंटी ने वैसे हे मेरे जीभ को ओर ओंठों को चूसते हुए.. अपना लण्ड मेरी गांड से धीरे से निकाला ओर एक झटके में मेरी चूत में ड़ाल दिया. वह अब मुझे प्यार करके मेरी चूत चोद रहा था.

बंटी: संध्या..अभी भी समय है.. प्लीज सोच लो..चलो मेरे सात

मैं: बंटी अब बहुत देर हो गयी. तुझे मालूम है मैं भी तेरे से प्यार करती हूँ. कभी कहा नहीं तुज़से पर फिर भी तू जानता था. मैं ही पागल समझ नहीं पायी. मैंने तेरा जीवन नरक बना दिया.. मुझे माफ़ कर दे बंटी.

बंटी: नहीं संध्या..ऐसे मत कहो..तू मेरा प्यार है..खूबसूरत..बस ऐसे ही खुश रहो..मैं तुम्हे ऐसे ही खुश देखना चाहता हूँ.

मैं: उम्.. आह... बंटी...जोर से चोदो..मार डालो मुझे आज..

बंटी: नहीं संध्या..यह हमारा प्यार है..बस हमारे बिच के हसीन पल हम याद रखेंगे हमेशा.

मैं: तेरे बिना मैं कैसे खुश रहूंगी बंटी.. पापा ने मेरे जीवन भी बर्बाद कर दिया.

बंटी: ऐसे मत कहो संध्या.. हमारा प्यार अमर रहेगा..!

मैं: बंटी मुझे वचन दो..तुम खुश रहोगे..मेरे लिये दुखी नहीं रहोगे. तू खुश तो मैं भी खुश रहूंगी. तुझे दुःख देकर मैं कभी सुखी नहीं रह पाऊँगी.

बंटी: हाँ संध्या..मैं खुश रहूँगा ओर तुझे भी खुश रखूँगा.

आह....उह....आहे भरके बंटी मेरी चूत चोद रहा था... मेरी चूत भी अब गीली हो गयी थी.. बंटी का बड़ा मोटा केला मेरी चूत को हर जगह से घिसता था, आनंद देता था. मैंने जोर से बंटी को कसमसा के पकड़ लिया...ओर उसके लण्ड पर झड़ने लगी. बंटी ने भी उसका सारा वीर्य मेरी चूत के अंदर तक ड़ाल दिया..

मेरी चूत के गहराइयों तक उसका गरम पानी चला गया था.
 
कुछ देर के बाद बंटी मेरे ऊपर से उठा ओर मेरे बाजु लेट गया. मैं उठकर बाथरूम चली गया. मैंने देखा बिस्तर पर बंटी का पानी ओर मेरी गांड से निकले खून के धब्बे थे. मेरी गांड बहुत दर्द कर रही थी. मुझे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था. पर फिर भी एक सुखद अनुभूति हो रही थी .. प्यार का पूरापन लग रहा था, बंटी के प्यार से में खुद को संपूर्ण महसूस कर रही थी.

काफी समय हो गया था. मैं वाशरूम में जाकर साफ़ हो गयी .. खुद को सजाया - संवारा ओर बाहर आ गयी. बंटी ओर मैं कुछ नहीं बोल पा रहे थी. वह अभी भी तकिये में मुँह ढक कर सो रहा था..रो रहा था.

मैंने कहा : अच्छा बंटी में चलती हूँ..

बंटी ने कोई जवाब नहीं दिया.

मैं रूम का दरवाजा खोलकर घर की तरफ जाने लगी.

ठीक दो दिन बाद मेरी शादी बड़ी धूम धाम से हो गयी. तीसरे दिन हम फ्लाइट से बंगलूर अनीश के घर आ गये. आज मेरी सुहागरात थी. अनीश के घरवालों ने हमारा कमरा बहुत अच्छी से फूलों से सजाया था. खाना खाने के बद रात को ९ बजे अनीश की माँ मुझे अनीश के कमरे में ले गयी. कहा - बहु..अनीश की दादी बहुत बीमार है. मरने से पहले पोता देखना चाहती है. तू सब संभाल लेना. ओर हंसकर चली गयी.

मैं सुहाग के सेज पर बैठकर अनीश का इंतजार करने लगी. मन में डर था. बंटी ने २ दिन पहले मेरे दोनों छेद चोद चोदकर भुर्ता बना दिया था. मुझे आज बहुत संभाल कर खेल खेलना था.

तभी दरवाजा खुला..अनीश अंदर आ गये. कुरता -पाजामा में वह बहुत आकर्षक लग रहे थे. कसी राजकुमार की तरह. गोरे - चिट्टे.. लम्बे.. मासलदार शरीर.. हाय ! कौन मना करता इनसे शादी करने को. मैं उठकर खड़ी हो गयी तो उन्होंने प्यार से मुझे अपने बाँहों में भर लिया. पता नहीं पर क्यों मुझे अजीब सकून मिला. मैंने भी अपने आप को उनको पूरा सौंप दिया. शादी के पवित्र बंधन को निभाना था.

अनीश ने मेरा चेहरा अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया ओर ऊपर कर के मेरी ओंठो पर उनके होंठ रख दिये. वह बहुत प्यार से धीरी से मीर होंठ चूस रहे थे.

अनीश: संध्या तू कितनी सुन्दर हो. मुझे विश्वास ही नहीं होता की तुम मेरी बीवी हो. अच्छा तुम्हे मैं पसंद हूँ ना. हमारी शादी इतनी जल्दी हो गयी हम लोग आपस मैं कुछ बात भी नहीं कर पाये.

मैं: हां अनीश आप मुझे पसंद हो. हाँ यह बात भी सच हैं की हम एक दूसरे को जान नहीं पाये. सब जल्दी हो गया. आप इतने हैंडसम हो . आपकी तो बहुत गर्लफ्रेंड होगी.

अनीश: नहीं संध्या..कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी. टाइम ही नहीं मिला पढाई के चक्कर में. चलो जो भी हुआ अच्छा हुआ.आगे जो होगा वो भी अच्छा होगा.

अनीश फिर से मेरे होंठ चूसने लगा और मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल दी. उसने मेरी चोली खोल दी ओर ब्रा भी निकाल डाला. वह प्यार से मेरे आम निहारने लगा. उसने धीरे से मेरे आम चाटने लगा ओर प्यार से पप्पी लेने लगा. वह मेरी चूचियों को सहलाने लगा.

मैंने: आह...ओह.. (कर दिया)

अनीश: क्या हुआ संध्या..दर्द होता है क्या ? (मैं समझ गयी.. बंदा सच में कुंवारा है..)

मैं: नहीं दर्द नहीं होता.. अच्छा लगता हैं अनीश. !

अनीश मेरे मम्मों के साथ खेलने लगा. मैंने भी अपना एक साथ उसके कुर्ते के अंदर डालकर uske पेट पर रखा दिया. एकदम ६ पैक एब्स थे.. स्मूथ बिना बालों के..जिम बिल्ट बॉडी थी.

मैं: अनीश आपने के तो एकदम जिम बॉडी बना रखी है.

अनीश: हाँ रोज २ घंटे जिम जाता हूँ. रुको तुम्हे मेरी बॉडी दिखता हूँ..(बोल कर उन्होंने कुर्ता ओर बनियान निकाल दिया. फिर मुझे उनके बाइसेप्स दिखाने लगे. बहुत अच्छी बॉडी बनायीं थी. मेरी चूत उनको ऐसे देखकर गीली हो गयी) बोलो कैसी लगी मेरी बॉडी? (मोर जैसे मोरनी को रिझाने अपना पिसारा फैलता है, वैसे अनीश मुझे अपनी बॉडी दिखा कर उत्तेजित कर रहे थे ओर वो कामयाब भी हो रहे थे. उनकी सुन्दर मसलदर शरीर देखकर मेरी चूत ने पानी छोड़ना चालू लिया था )

मैं: बहुत अच्छी..हैं.

अनीश: पर तेरी बॉडी से कम सुन्दर..तुम्हारे स्तन बहुत सुंदर है संध्या.

ओर वह फिर से मेरे स्तन बच्चों की तरह धिरे से चूसने लगा...सहलाने लगा..सिर्फ एक मादक प्यार...कोई आक्रमकता नहीं, कोई हवस नहीं.. वासना नहीं.

वह मेरे मम्मों को चूसते हुए निचे की तरफ गया ओर मेरी नाभि चूमने ओर चाटने लगे. एक साथ से उसने मेरा पेटीकोट खोलना चाहा पर उसे समझ नहीं रहा था. मैंने खुद मेरी पेटीकोट का नाडा खोल दिया. वैसे उसने मेरी साड़ी ओर पेटीकोट निकाल दिया. अब में सिर्फ एक लाल रंग के पैंटी मैं थी. मैंने सुहाग राt के दिन सब लाल रंग का पहना था..साडी , चोली. पेटीकोट, पैंटी..सब लाल...अनीश मेरे जांघों से खेलने लगा. मैंने भी उसकी पायजामा का नाडा खोल दिया..वैसे उसने उसका पयजामा उतार दिया. उसने एक प्रिंटेड नील रंग की ब्रीफ पहनी थी..उसमे उसके लण्ड का आगे का उभार...ओर मोटी तगड़ी जांघें ओर गांड साफ़ दिखाई दे रही थी. कोई ग्रीक गॉड जैसे. एकदम बिग बॉस विनर सिद्धार्थ शुक्ल जैसे. अनीश मेरी जांघ ओर पैंटी के आजु बाजु चूमने लगा..मेरी गांड दबाने लगा...आह संध्या ! तुम्हारी गांड कितनी बड़ी ओर खूबसूरत है. अनीश ने मेरी पैंटी निकलने के लिए साथ बढ़ाया. मैंने उसे रोक दिया.

मैं: ना.. प्लीज मुझे शर्म आती है..

अनीश: जान अब तू मेरी पत्नी है..शर्मा के कैसे चलेगा..ठीक हैं मैं ही नंगा हो जाता हूँ..

(अनीश ने अपनी ब्रीफ उतार दी. उसकी गोटिया बहुत बड़े आकर की थी..गेंद की तरह. उसका लण्ड कुछ ५ इंच का था पर मोटा था. उसका लण्ड फनफना कर उठ गया ओर झूम कर नाच रहा था. मैंने मेरी जिंदगी में इतना छोटा लण्ड कभी नहीं देखा था. मैं थोड़ी मायूस हो गयी..पर क्या कर सकती थी. जो भाग में हैं, उससे काम चलाना पड़ेगा. अनीश ने मेरे दोनों हाथ अपने लण्ड पर रख दिए ओर मेरे मुँह के पास लेकर आया. मैं समझ गयी..क्या करना है. मैंने प्यार से उसका लण्ड अपने मुँह में ले लिया. अनीश जोर जोर से सांसे लेने लगा. मैने उसका ५ इंच का गोरा गुलाबी लण्ड आसानी से मुँह मैं ले लिया.. वैसे वो बेकाबू हो गया. उसने अपना लण्ड मेरे मुँह से निकाला...ओह रुको संध्या...मेरा नीकल जायेगा. उसका लण्ड उछल उछल कर उत्पात मचा रहा था.

अब उसने मेरी पैंटी निकालने के लिए फिर से साथ बढ़ाया.. तब मैंने फिर से रोक दिया..

मैं: अनीश मुझे बहुत शर्म आ रही..प्लीज लाइट बंद कर दो..

अनीश: ठीक हैं संध्या...(उसने लाइट बंद कर दी..कमरे में सिर्फ जीरो बल्ब की रोशनी थी)

जैसे अनीश ने मेरी पैंटी पूरी निकाल दी..मैंने उसको खींचकर अपने ऊपर ले लिया ओर अपनी टांगे उसके कमर पर कास दी..

अनीश का लण्ड मेरी चूत को ऊपर से घिस रहा था..

मैं: आह ! अनीश धीरे..उफ़.. दर्द हो रहा...पर तुम रुको मत..

अनीश पहली बार सेक्स कर रहा था..वो कुंवारा था..मुझे अब अपना खेल खेलना था...

मैंने उसके लण्ड का सूपड़ा अपनी चूत के द्वार पर कस के जकड लिया .

मैं.. आह अनीश ठीक हैं..अब थोड़ा ओर धक्का दो..अंदर चला जायेगा..

अनीश धक्के दे रहा था. मैंने अपनी चूत को कस लिया था..पर मेरी चूत गीली थी..ज्यादा देर तक रोक नहीं पायी..ओर अनीश का लण्ड सिर्र...सिर.. करता मेरी चूत में पूरा घुस गया.

मैं: उह माँ..मर गयी...यह.. प्लीज निकाल दो...मैं मर जाउंगी..

अनीश: वैसे ही थम गया..उसने मुझे प्यार से चूमा..ओर मेरे आम चूसने लगा..
 
मैंने छटपटाने का नाटक किया..ओर फिर धीरे धीरे शांत होने लगी. वैसे अनीश ने अब मेरी चूत में धक्के मारना शुरू किया. अनीश पूरा पसीना पसीना हो रहा था. यह सेक्स का उसका पहला अनुभव था. मैं कुछ समझ पाती.. तभी..

अनीश: आह संध्या तेरी कुंवारी चूत कितनी कसी हुई है..मेरा पानी नीकल जायेगा ..

अनीश का शरीर कांपने लगा.. उसने कमर को कई झटके दिये.. ओर थोड़ी देर में उसका लण्ड अपने आप मेरी चूत से बाहर नीकल गया. उसके लण्ड के साथ उसका पानी भी मेरी चूत से पूरा बाहर नीकल गया.

वह मेरे ऊपर मेरे स्तनों पर सर रखकर लेट गया . मैं भी उसके बालों को प्यार से सहलाने लगी. कुछ देर बाद अनीश सो गया थाओर खर्राटे ले रहा था.

मैं वहां पड़ी पड़ी सोच रही थी.. कहा यह इतना भोला ओर सच्चा, कुंवारा मर्द ,ओर कहा मैं घाट घाट का पानी पीकर सेक्स में माहिर औरत. क्या अनीश का लण्ड मुझे मेरी चूत के अंदर महसूस भी हुआ ? ८-१० इंच के लण्ड आसानी से लेने वाली मेरी चूत को कुछ भी महसूस नहीं हुआ. ना अनीश का लण्ड, ना उसका पानी. अनीश का पानी..मेरी चूत में ऊपरी भाग में गिरकर आधे रस्ते से पूरा उसके लण्ड के साथ बाहर नीकल गया था. ओर मेरा उन्माद..मेरा पानी..मेरी चूत..वैसे ही प्यासी रह गयी थी. अनीश का यह पहला अनुभव था. हो सकता की वक्त के साथ वो भी माहिर हो जाये. पर क्या उसका लण्ड का आकार मेरी चूत के लिये काफी था? क्या मुझे बंटी का शाप लग गया.. मैं कभी सुखी नहीं रहूंगी ? मैंने उसका दिल तोडा था. उसका दिल सच्चा था, उसका प्यार सच्चा था.

मैं मायूस दिल से सोते हुए अनीश को बाजू लेट गयी. बिस्तर पर जहा अनीश का वीर्य गिरा था , उस पर थोड़ा लाल सिंदूर डाल दिया...ओर गीले टॉवल से पोछ डाला. साफ करने के लिये.. इससे वीर्य के साथ बेडशीट पर थोड़ा लाल रंग भी फैल गया. मैंने अपनी चूत पर एंटीसेप्टिक लगा दी..जैसे की वो फट गयी हो..ओर जख्मी हो.. ओर अनीश के पास नंगी लेट गयी. थकी होने की वजह से जल्दी सो गयी.

सुबह आँख खुली..मैं अनीश के बाँहों में नंगी थी..वह मुझे प्यार से देख रहा था. मैं भी मुस्कुरा दी..

अनीश: संध्या तुम बहुत खूबसूरत हो..तुम खुश हो ना..? तुम्हे ज्यादा दर्द तो नहीं हुआ.

मैं: हां अनीश मैं बहुत खुश हु.. दर्द तो हुआ..पर अब ठीक है..मैंने रात को एंटीसेप्टिक क्रीम लगा दी थी. चलो अब जल्दी उठो. माँ रसोई मैं मेरा इंतजार कर रही होगी. मुझे नहाकर जल्दी जाना है.

हम दोनों उठ गये..मैं बाथरूम नहाने जाने लगी. अनीश की नजर बिस्तर पर लगे दाग पर गयी. उसके चहरे पर मुस्कराहट आ गयी. मैं सुहागरात की इम्तहान में अव्वल नंबर से पास हो गयी थी.

मैं नाहा-धोकर अच्छी सी साड़ी पहन कर निचे गयी. निचे अनीश की माँ, बाबूजी ओर उसका छोटा भाई आकाश चाय पी रहे थे.

आकाश: वाह भाभी आप एकदम फ्रेश लग रही हो. भैया को कहा छोड़ कर अकेले आ गयी.

मैं शर्मा कर: वो आ रहे नहा कर. माँ बताओ क्या करना है..

मैं मेरी सास के पास जा कर हेल्प करने लगी.

आकाश: भैया रोज सबसे पहले उठकर जिम जाते थे. आपने क्या जादू कर दिया..पहली बार लेट हो गये.

मैं: उम् देवर जी आपको बड़ी फ़िक्र हो रही है अपने भैया की..खुद लेकर आ जावो. (हम सब हंसी मजाक कर रहे थे)

आकाश: हाँ फिकर तो हो रही हैं..सही सलामत है ना मेरे भैया..(ओर उसने मुझे आँख मार दी)

मैं हंसकर :देखो माँ..पहले दिन से मुझे छेड़ रहा..मेरा प्यारा देवर..

अनीश फर्स्ट ईयर इंजीनियरिंग में पढ़ रहा था. दिखने में सांवला...साधारन था.. ऊंचाई में भी कम था..५-६ , पर वह भी अपने भाई के साथ जिम जाता था. अनीश जैसे खूबसूरत मर्द का भाई इतना साधारन दिखता था. दोनों को देखकर कोई बोल नहीं सकता था की दोनों भाई हैं. आकाश बहुत मजाकिया स्वाभाव का था ओर पहले दिन से मुझसे घुलमिल गया.
 
थोड़ी देर में अनीश भी निचे आ गये. वह बड़े खुश लग रहे थे. नाश्ते के वक्त माँ ने बताया: अनीश ओर संध्या.. कल रात को तुम दोनों को पम्मी मौसी के घर खाने पर बुलाया है.

अनीश ने कहा - ठीक हैं माँ .. चले जायेंगे.

मैं: माँ , कल पम्मी मौसी के घर जाते वक्त मैं क्या पहनू?

माँ: चलो तुम्हारे कमरे में , तुम्हे समझाती हूँ (इसमें समझाने वाली क्या बात थी.. ? मैं माँ के सात कमरे में चली गई. माँ ने दरवाजा बंद किया )

माँ गंभीर होकर बताने लगी: संध्या तुम्हे जो पसंद हैं वही पहन लो. पर मैं तुम्हे पहले से सचेत करना चाहती हूँ. पम्मी मेरी छोटी बहन बहुत अच्छी ओर सीधी है. पर उसका पती धर्मेश बहुत आवारा ओर लफड़ेबाज़ किसम का आदमी है. तुम बस संभल कर रहना.

मैं: हां माँ ..सब समझ गयी..पर आप ऐसे क्यों कह रहे.. आप ने कुछ देखा क्या?

माँ: धर्मेश दिखने में बहुत सुन्दर ओर खूबसूरत है. बॉलवुड स्टार धर्मेंद्र की तरह. उसी का वो फ़ायदा उठाता हैं. कॉलेज के दिन अपने कमरे में लड़किया बुलाता था. २-३ बार हॉस्टल में नंगी लड़कियों के साथ पकड़ा गया ओर निकाला गया. कोई भी सुन्दर औरत को आसानी से पटा लेता है. पम्मी को भी वैसे ही पटा लिया था. रिश्ते ओर आस पड़ोस की काफी औरतों से सम्बन्ध है. अपनी मीठी बातें, प्यार, या ब्लैकमेल, या खूबसूरती से आसानी से हर औरत को फंसा लेता है.

मैं: ठीक हैं माँ मैं ध्यान रखूंगी. अच्छा हुआ आप ने मुझे आगाह कर दिया.

पर मेरी चूत अपने आप गीली हो गयी थी. धर्मेश चाचा के किस्से सुनकर वह उनको मिलने के लिये बेताब थी. गरम होकर पानी बहा रही थी.

सुहागरात की दूसरी रात भी वैसे ही रही. अनीश ने मुझे बहुत चूसा और चूमा पर चुदाई के वक्त उनका लण्ड कहा ओर किधर झड़ जाता, मुझे कुछ महसूस ओर पता नहीं चलता. मैंने उस रात अनीश से कहा , अनीश हम कही बाहर चलते है..हनीमून पर. ४-५ दिन एक साथ रहेंगे तो एक दूसरे को अच्छी से जान पायेंगे . अनीश ने कहा ठीक हैं मेरी जान. मैं कल ऑफिस से ५ दिन की छुट्टी ले लेता हूँ, हम गोवा जायेंगे. मुझे इन ५ दिनों में अनुमान लगाना था की अनीश को सेक्स में कैसे माहिर किया जा सकता है. दूसरे दिन अनीश ने मुझे ऑफिस से फ़ोन किया की अगले हफ्ते मतलब ३ दिनों के बाद उसे ऑफिस से छुट्टी मंजूर हो गयी है. उसने होटल ओर आने-जाने की फ्लाइट्स की टिकट बुक कर दी थी. उसने मुझे शाम को तयार रहने को कहा.. पम्मी मासी के यहाँ आज खाने पर बुलाया था. मैंने एक अच्छी सी हरे और नीले रंग की डिज़ाइनर साड़ी पहन ली थी और उसपर अच्छा स्लीवलेस और बैकलेस लौ-कट वाला ब्लाउज था. ब्लाउज़ में मेरे ममै एकदम टाइट फिट हो कर ऊपर से बाहर आ रहे थे और मम्मों की दरार साफ दिख रही थी. साड़ी भी मैंने नाभि से बहुत निचे पहनी थी..और मेरी नाभि मेरे पतले और सीधे पैट पर साफ़ दिख रही थी.

जब अनीश घर आये तो वह मुझे देखते रहे. बोले: जानेमन तू तो आज गजब की लग रही हो..एकदम कटरीना कैफ..तुम्हे यही नंगा करने के चोदने का मन कर रहा.

मैंने कहा..चलिए अब .. देर हो रही..पम्मी मासी राह देख रही होगी, घर आकर कर देना नंगा. एक घंटे में हम पम्मी मासी के घर पहुँच गये. पम्मी मौसी ने दरवाजा खोला. मैंने झुककर उनके पाव छू लिये..उन्होंने मुझे आशीर्वाद दिया. पम्मी मासी इस उम्र में भी बहुत खूबसूरत लग रही थी. पम्मी मासी बोली - बहुत मान कर रहा था तुम्हारे शादी में आने का, पर मेरी सास को ऐनवक्त पर अटैक आया और हमें उन्हें अस्पताल एडमिट करना पड़ा. चलो अच्छा हुआ तुम आ गये. अनीश बहु तो बहुत सुन्दर है.. खूब जचती हैं तुम्हारी जोड़ी. तभी पीछे से आवाज आयी.. बहु की सुंदरता की तारीफ तो हमने भी बहोत सुनी, हमें भी देखने दो बहु को . मैंने पलट कर देखा..एक गोरा, एकदम फिट, ५० -५५ की उम्र वाला आदमी था, नीली गहरी आंखें, एकदम कबीर बेदी जैसी, हट्टा-कट्टा पहलवान जैसे. पम्मी मासी ने कहा - संध्या यह तेरे ससुर जी धर्मेश है. सच में कुछ तो बात थी धर्मेश में. सबको आकर्षित कर लेते थे. उन्होंने कुर्ता - पजामा पहना था. मैं और अनीश उनसे मिलने उनकी तरफ बढे.

धर्मेश चाचा: वाह ! सच में इतनी सुन्दर बहु तो तुम्हारे घर में कोई नहीं है. बड़ी अच्छी चॉइस हैं अनीश की.

मैं और अनीश धर्मेश चाचा के पाव छूने निचे झुके..वैसे उन्होंने मेरे पीठ पर साथ रख दिया ओर धीरे से घुमा दिया. बैकलेस ब्लाउज़ की वजह से मेरी पीठ पूरी नंगी थी. उनका साथ एकदम नरम और गरम महसूस हो रहा था..जैसे मुझे ४४० वाल्ट का बिजली का शॉक लग गया. मैं सिहर गयी.

धर्मेश: बहुत सरे आशीर्वाद संध्या ओर अनीश ! फलो , फूलो, जल्दी से अच्छी न्यूज़ दो...ओर हसने लगे.

मैं उनके छूने से हड़बड़ा गे ओर में उनके पांव छू कर उठने लगी..तभी मेरे निचे झुके साथ ऊपर होते हुए उनके कुर्ते को ऊपर कर के उठा दिया. करीब १-२ सेकंड के लिए मेरी नजर सामने उनके उनका पजामा के उभार पर पड़ी. उनका ढीला पजामा फूल गया था ओर वहा उभर कर एक बहुत बड़ा तम्बू हो गया था. उनके लण्ड का आकर ओर मोटापा साफ़ दिखाई दिया. मैंने जल्दी से साथ पीछे लेते ही कुर्ता गीर के निचे हो गया ओर उनके पजामा के उभार को छिपा दिया. धर्मेश मुझे मुस्करा कर कमीने नज़रों से देख रहे थे. मेरी गलती से ही सही पर उनको पता चल गया था की मैंने क्या देखा.

मैंने उनको जानबूजकर अनदेखा कर दिया ओर कोई ध्यान नहीं दिया. ख़ाना खाते वक्त ओर बाद में भी वो पूरी देर तक मुझे ताड़ रहे थे. पर मैंने बिलकुल भाव नहीं दिया. पम्मी मासी ने जाते वक्त हमें तोहफे दिए. उनका एक ही बेटा था जो बाहर विदेश में पढ़ रहा था. घर निकलते वक्त हमें काफी लेट हो गया था. रास्ते पर ट्रैफिक भी कम हो गया था. हम मेन रोड से जा रहे थे, तभी अनीश ने सर्विस रोड पर गाड़ी ले ली ओर एक सुनसान जगह, जहा कोई आसपास दुकान नहीं था वहा रोक दी.

मैं: क्या हुआ अनीश यहाँ क्यों गाड़ी रोक दी.'

अनीश: क्या करू संध्या, तुम्हे देखकर लण्ड फनफना रहा. प्लीज पास आ जाओ थोड़ा रोमांस करते हैं.'

मैं: नहीं बाबा यहाँ नहीं..आपको क्या हो गया ? ...अभी भी गाड़िया आ - जा रही..लोग देखेंगे.

अनीश ने मुझे उसकी तरफ खींच लिया ओर चूमने लगा. कहा : देखने दो. उन्हें भी पता चले की मैं अपनी बीवी से कितना प्यार करता हूँ.

अनीश का यह रूप ओर अंदाज मेरे लिये नया था. पर मुझे अच्छा लगा.. अनीश ने दोनों सामने के सीट पीछे कर दी.. ओर मुझे उसपर खिंच लिया..ओर मेरे होंठ चूसने लगा..उसने मेरे ब्लाउज के सामने के बटन खोल दिए ओर मेरे चूचिया दबाने लगा. हमारे साइड से बहुत सारी गाड़िया जा रही थी. बड़ा रोमांच महसूस हो रहा था. मैंने भी अनीश के शर्ट की ऊपर की कुछ बटन खोल दी ओर उसको चूमने लगी.. अनीश ने अब मेरे पेटीकोट मैं साथ डाल दिया ओर मेरी निकर निचे खिंच ली ओर पूरी निकाल दी.

मैंने कहा: अनीश. ये क्या किया..मेरी पैंटी क्यों निकाल ली.'

अनीश..बस मजा लो रानी..उसने उसकी पैंट का बेल्ट खोल दिया..ओर उसकी अंडरवियर के सात पैंट भी घुटने के निचे खिंच दी. अब वो एकदम नंगा बैठा. उसका लण्ड फनफना रहा था.

अनीश : चुसो न मेरी जान..तू मेरा लण्ड बहुत अच्छी से चूसती हो.

मैं वही झुककर उसका लण्ड मुह में ले लिया ओर उसके लण्ड का गुलाबी सूपड़ा चूसने लगी..मुझे मीठे स्ट्रॉबेरी जैसे लगा.
 
अनीश बहुत गरम हो गया था.. उसने मेरा पेटीकोट ओर साड़ी दोनों ऊपर उठाकर मेरे कमर के ऊपर कर दिए..अब मैं भी पेटीकोट के अंदर एकदम नंगी थी. वह मेरी चूत से खेलने लगा, सहलाने लगा. मेरी चूत एकदम गीली हो गयी थी.

मैं: आह अनीश..लोग देखेंगे...इतने बेशरम कैसे हो गये आज..

अनीश: तू है ही इतनी कमसीन ओर सुन्दर संध्या. तुझे देखकर कोई भी मर्द बेशरम हो जायेगा. धर्मेश चाचा भी आज तुझे भुकी नजर से देख रहे थे.

मैं: चलो कुछ भी..वह हमारे पिताजी की उम्र के हैं.

अनीश: उम्र का क्या लेना देना..पूरा समय वह तुम्हे ताड रहे थे.

मैं: तू तुमने सब देख लिया. तुम्हे तो गुस्सा होना चाहिए था, पर उल्टा तुम खुद गरम हो कर मेरे से यहाँ खुली जगह पर शरारत कर रहे हो.

अनीश. मुझे अच्छा लगा..तुम पर गर्व हुआ..मेरी बीवी की खूबसूरती पर इतने मर्द फ़िदा होते हैं. वैसे धर्मेश चाचा कूद को बड़ा तीसमारखां समझते. पर तूने आज उनको बिलकुल भाव नहीं दिया. सारी हेकड़ी निकाल दी.. बहुत अच्छा लगा..

अनीश: इधर आओ रानी..मेरी गोदी में बैठ जा..

मैं उठ गयी..उनके सीट के दोनों बाजु पैर रख कर उनके जंघा पर बैठ गयी. उन्होंने पीछे से अपने दोनों हाथों से मेरी गांड उठा दी ओर अपने लण्ड पर मेरी चूत सेट कर धीरे धीरे बैठे को कहा. मैं भी उनके लण्ड पर बैठ गयी. उनका मोटा लण्ड अब मेरी चूत के अंदर था. ऊपर से मेरी पेटीकोट ओर साड़ी ने हमें ढक कर रखा था. तभी मेन रोड से एक बड़ा ट्रक साइड से गया..ओर हमें देखकर जानबूझ कर २-३ बार हॉर्न बजा दिया.

मैं: अनीश यहाँ रोड पर सुरक्षित नहीं हैं. पुलिस भी आ सकती है.

अनीश आह बस थोड़ी देर संध्या...वह अपने एक साथ से मेरे चूत को सहलाने लगा. उसका दूसरा हाथ मेरे सर पर था..ओर हम पागलों की तरह एक दूसरे को चुम रहे थे. मैंने अपनी जीभ पूरी अनीश के मुँह में डाल दी. निचे अनीश को मेरी चूत का दाणा..मिल गया..वो उसको सहलाने लगा ओर मरोड़ने लगा. निचे से अपनी कमर को धक्का देकर अनीश मुझे जोर जोर से चोद रहा था. मैं छटपटा रही थी. हम दोनों गाड़ी के AC में भी पसीना हो रहे थे. अनीश जोर जोर से मेरे होंठ ओर मेरी जीभ चूस रहा था. उसने तभी..जोर से मेरी चूत का दाना रगड़ दिया...मैं ..आह..ओह्ह...करके उसके लण्ड पर झड़ने लगी. तभी अनीश भी..आह..उफ़...करके मेरी चूत में उसके पानी का फंवारा उड़ाने लगा. मैंने कस कर उसको पकड़ लिया..उसने भी मुझे जकड लिया..करीब ५ मिनट वैसे बैठ कर हम शांत होने लगे.

अनीश: वह संध्या..मस्त मजा आ गया. आय लव यू बेबी ! क्या तुम्हे अच्छा लगा..

मैंने कहा: हाँ बहुत मजा आया अनीश. आय लव यू टू

अनीश ने मुझे पेपर नैपकिन निकल कर दिये . मैंने उससे मेरी चूत से बाहर निकल रहा उसके लण्ड का पानी साफ किया, फिर उसका लण्ड ओर गोटिया भी साफ़ की. उसकी गोदी से निचे उतरकर मैं अपनी सीट वापस आ गयी. मैंने अपने कपडे ठीक ठाक कर लिये. पर्स से मेक-उप निकाल कर खुद को संवार लिया. अनीश ने भी अपनी पैंट ओर अंडरवियर ऊपर कर के फिर से पहन ली.

गाड़ी स्टार्ट करके हम फिर से घर की तरफ जाने लगे.

जाते जाते मैं सोच रही थी. आज पहली बार मैं अनीश के सात झड़ी थी. कुछ उम्मीद लगा सकती हूँ उससे..ज्यादा नहीं. पर अब मुझे उसकी पसंद धीरे धीरे समझ में आ रही थी. आगे चलकर ओर क्या क्या खोज कर पता चलेगा ,, क्या पता. पर आज तो मैं सच में खुश थी.

अनीश ने कहा: संध्या गोवा जाकर भी ऐसे ही मजे करेंगे. बीच पर. तुम मस्त सेक्सी स्विम सूट खरीद लो.

मैं: हांजी..सब कर लुंगी..ओर क्या हुकुम मेरे आका. ?

अनीश: अच्छा बोलो.. कही तुम्हारे पीरियड तो नहीं आ जायेंगे.

मैं: वैसे अभी आने चाहिए थे. पर मुझे २-३ दिन पहले पता लग जाता है.. हल्का दर्द चालू होता है. अगर ऐसे कुछ लगा तो मैं दवा खा कर पीरियड्स आगे धकेल दूंगी. ताकि हमारी हनीमून अच्छी से हो जाये.
 
तीन दिन के बाद हम सुबह की फ्लाइट पकड़ कर गोवा पहुँच गए. अनीश ने एक बहुत अच्छा फाइव स्टार रिसोर्ट जो एकदम बागा बीच के पास था वह बुक किया था. रिसोर्ट सीधे बीच के सामने था और अपना स्विमिंग पूल और प्राइवेट बीच था. रिसेप्शन पर हमें कमरे की कार्ड - की मिल गयी और सामान बेल बॉय के साथ भेज देंगे ऐसे बताया.

हम कमरे में गए..कमरा बहुत अच्छा था.. कमरे पर शीशे की खिड़किया थी ..जो कर्टेन से ढकी थी. कर्टेन हटा दिए तो सामने बीच का बहुत ही सुन्दर सा नजारा था. मैं खुश हो गयी.

मैं: अनीश कितना सुन्दर नजारा हैं यहाँ से. बीच बाहत सुंदर हैं.

अनीश: बीच कौन देखने आया हैं जान. . मैं तो तुम्हे देखूंगा - रात - दिन नंगी..तुम तो अप्सरा हो.

मैं - बड़ी शरारत सूझ रही है.. घर पर तो बड़े मासूम बने फिरते हो.

अनीश: घर पर तो तुम भी बड़ी सुन्दर, गुणवान और संस्कारी बहु हो. अब यहाँ तुम भी मेरी तरह शरारती हो जाओ.

अनीश मेरी तरफ आया और खिंच कर मुझे बाँहों में ले लिए. मेरी ओंठों पर होंठ रखकर वह जीभ बाहर निकल कर मेरी ओंठों को चाटने लगा. मैंने भो बेशर्मी से अपने होंठ खोल दिए और उसकी जीभ चूसने की कोशिश की..पर वो उसकी जीभ मेरी मुँह में नहीं डाल रहा था. सिर्फ मेरी होंठ चाट रहा था ओर चूस रहा था.

उसने दूसरा हाथ निचे करके मेरी साडी उपर घुटनो तक कर दी. साथ अंदर डाल कर वो मेरी पैंटी के ऊपर से मेरी चूत को सहलाने लगा. मेरी चूत अब गीली हो रही थी. मैंने जोर से अनीश के होंठ छू लिये ओर मेरी जीभ उसकी मुँह में डाल दी. अनीश को यही चाहिए था. उसने प्यार से मेरी जीभ चूसना चालू किया..अपनी जीभ से मेरी जीभ को चाटना चालू कर दिया. मेरी पैंटी के अंदर साथ डाल कर मेरी गीली चूत सहला रहा था और धीरे से उसकी एक ऊँगली चूत के अंदर डाल दी. मैंने भी एक साथ उसके लंड पर रख दिया और सहलाने लगी. वैसे उसने उसकी पैंट पर से उसकी ब्रीफ्स निकाल दी और मेरी हाथों में उसका लंड दे दिया. अनीश अभी भी मुझे चूस रहा था, चुम रहा था, उसकी जीभ अब मेरी मुँह में थी. तभी उसने अपने दूसरे हाथों से मेरी पैंटी निचे खींचकर निकाल दी ओर जमीन पर फेंक दी. उसने अब मुझे बिस्तर पर सुला दिया और मेंरे पर उल्टा लेट कर मेरी चूत चाटने लगा. मैंने भी उसका लंड मेरी तरफ खींच लिया ओर प्यारसे उसके लण्ड के सुपडे को चूसने लगी. हम दोनों ६९ पोजीशन में थे. अनीश बहुत अच्छी से मेरी चूत चाट रहा था..हम दोनों अब पसीना हो गए थे. मैं छटपटा रही थी. मैंने अनीश का सर अपने चूत पर दबा दिया और मेरी चूत उसके ओंठों पर रगड़ने लगी. मैं झड़ने के बहुत करीब थी ... तभी..कमरे की बेल बजी. बाहर से आवाज आयी.

गुड मॉर्निंग ! रूम सर्विस सर.. आपका लगेज ..

अनीश उठा, उसने अपनी ब्रीफ्स - निकर पहन ली. मैंने भी मेरी साडी बिस्तर पर लेटे सीधे कर दी.

अनीश ने वैसे ही सिर्फ अपनी चड्डी पर दरवाजा खोला: कम इन. इधर रख दो सामान.

रूम सर्विस बॉय: सर मेरा नाम अमानुल्लाह हैं..आप मुझे अमन कह सकते हो.

(उसने सामान एक जगह ठीक से रख दिया. मैंने उसको देखा. वह कुछ ४५-५० साल ट्रिम दाढ़ी वाला. कम हाइट वाला - ५-५ पर हट्टा कट्टा पठान आदमी लग रहा था. होटल की ड्रेस उसपर बहुत टाइट लग रही थी. टाइट शर्ट और पैंट में उसके मास-पेशियाँ और मसलदर शरीर का उभार साफ़ दिख रहा था. मैं बिस्तर पर लेटे उसको देख रही थी. उसने देखा अनीश सिर्फ उसकी निकर में हैं ओर मैं बिस्तर पर लेटी हूँ. वो मंद मंद शरारती अंदाज में मुस्करा रहा था)

अमन: सर यह आपके लिए पानी है.. मिनरल वाटर. ..या आपका मिनी फ्रिज हैं.. यह..चाय - कॉफी..के लिए हॉट वाटर केतली..

(वो कमरे में सब सजाने लगा ओर ठीक ढंग से चेक करने लगा)

अमन: सर क्या मैं आपकी रूम ठीक से लगा दू. क्या यह निचे गिरे कपडे अलमारी में रख दू.

अनीश: थैंक यू अमन.. हाँ आप रख सकते हो. (अनीश मेरी बाजु आकर बिस्तर पर लेट गए..उनका एक हाथ मेरी साडी पर मेरी जंघा पर था)

मैं शर्मा गयी. अमन ने पहले मेरी निचे गिरी हुई पैंटी उठाई. फिर अनीश की पैंट.

अमन (मुस्कराकर) : सर लांड्री में नहीं डालना है ना?

अनीश: नहीं..फ्रेश है.. दिखाओ एक मिनट.

अनीश ने अमन के साथ से पैंटी ली ओर जोर से २-३ बार सुंघा..

अनीश; हां फ्रेश हैं..लांड्री की जरुरत नहीं..तुम भी एक बार देख लो..(अनीश ने अमन की मेरी पैंटी फिर से दे दी)

अमन: हां सैर फ्रेश है.. (उसने भी २-३ बार मेरी पैंटी सूंघ ली)

अनीश: अच्छा अमन यह बताओ .. मैंने सुना की यहाँ फेनी बहुत अच्छी मिलती.

अमन वही खड़ा रहा. उसके साथ में अभी भी मेरी पैंटी थी. वह उस पैंटी को दूसरे साथ से सहला रहा था, ओर कभी कभी फिर से सूंघ लेता.

अमन: सर फेनी पीने का मजा बीच पर ही लीजिये. आप जब बीच पर जाओगे तब मुझे बोल देना, मैं फ्रेश फेनी लेकर आ जाऊंगा. क्या मैडम भी लेगी?

अनीश: हाँ मैडम भी सब लेगी. ओर क्या क्या है ?

अमन: सर मसाज भी मिल जायेगा.. आप को जो भी चाहिए..मुझे बोल देना..

(अमन ओर अनीश बात कर रहे थे. अमन अभी भी एक साथ मैं मेरी पैंटी पकड़कर दूसरे साथ से उसको सहला था. कभी कभी बिच में वो मेरी पैंटी फिर से सूंघ लेता ओर कामिनी मुस्कान देकर बात कर रहा था. मैंने देखा अनीश का लंड उसकी ब्रीफ्स में तन कर खड़ा हो गया था..वो मेरी जांघों पर साथ फेर रहा था. मुझे बड़ी शर्म आ रही थी. मेरी चूत बहुत गरम ओर गीली हो गयी थी. अमन का लंड भी उसके टाइट पैंट मैं फुल गया था. उसकी पैंट की एक साइड से उसकी कटे लंड का बड़ा सूपड़ा साफ़ नजर आ रहा था) )

अनीश: अच्छा अमन ..बीच पर कुछ कपड़ों पर या ड्रिंक्स पर प्रतिबन्ध तो नहीं ना.

अमन: सर यह सामने वाला तो होटल का प्राइवेट बीच हैं. यहाँ पर कोई प्रतिबन्ध नहीं. आप चाहे तो मैं आपको अच्छी जगह दिखा सकता हूँ.. जहा आप ओर मैडम दोनों नंगे भी नाहा सकते.

अनीश. अरे वह..यह बात अच्छी होगी. ओर आपके होते हुए हमें डर भी नहीं रहेगा - चोरी का या कपड़ों का..

अमन: ठीक हैं सर..मुझे होटल से कुछ देर तक कस्टमर की सर्विस ओर मदत करने की अनुमती है. आप मुझे इस नंबर पर कॉल कर देना.

अमन ने मेरी पैंटी फोल्ड कर के अलमारी में रख दी. उसके जातें ही मैंने अनीश से गुस्से में कहा..

मैं: अनीश कितने बदमाश हो तुम. मेरी पैंटी उसके साथ में दे दी.

अनीश: तो क्या हुआ जान.. देखा नहीं वह कितनी प्यार से तेरी पैंटी सूंघ कर सहला रहा था. जैसे की पैंटी नहीं, तेरी चूत हो. ओर अनीश जोर जोर से हॅसने लगा.

मैं: बड़े कमीने हो तुम. जैसे की तुम सच में उसको मेरे चूत को सूंघने ओर सहलाने की अनुमती देते.

अनीश: हाँ क्यों नहीं..अगर तू कहती तो दे देता.. ..देखा नहीं उसका लंड कैसे फुफकार रहा था.

अनीश ने मेरी साडी ओर पेटीकोट खींच लिया. चोली निकाल कर मुझे पूरा नंगा कर दिया ओर फिर से ६९ पोजीशन मैं आ गए.

अनीश: आह ! जानू.. तेरी चूत तो बहुत गरम ओर गीली हो गयी.

मैं: जाओ मैं नहीं बात करती..कुछ भी कहते रहते हो..

अनीश मेरी चूत अपनी जीभ से चाट चाट कर - आह जानू...तेरी चूत आज पहलीबार इतने पास से देख रहा हूँ..कितनी खूबसूरत है..

मैंने भी अनीश का खूबसूरत मोटा लण्ड मुँह में ले लिया ओर चूसने लगी..

अनीश: आह रानी ..कितने प्यार से मेरा लण्ड चूस रही आज.. कही अमन का लण्ड समझ कर नहीं चूस रही ना?

मैं उनका लण्ड का सूपड़ा जीभ से चाटने लगी..अनीश मेरी चूत में अंदर जीभ डाल रहा था..मेरी चूत के अंदर अपनी जीभ डालकर साफ़ कर रहा था..सारा पानी पी रहा था.

अनीश: आह ! जानू..बोलो..किसका लण्ड चूस रही हो..मेरा या अमन का..

अब मैं भी वही बात फिर से सुनकर झल्ला गयी. अब अनीश मेंरे दाणे को चूस रहा था. मैं कांप रही थी.

मैं: उम्....यह तो अमन का लण्ड है....

अनीश: ..आह.. कमीनी ..बोलो ..संध्या..कैसा है अमन का लण्ड.
 
मैं: अनीश का लण्ड जोर से चूसते हुए : उम्... मस्त है..मुल्ले का कटा लण्ड है.. बहुत बड़ा ओर मोटा है..

अनीश: मेंरे से मोटा ओर बड़ा..

मैं: हाँ..आप से बहुत बड़ा ओर मोटा..आपका तो अमन के लण्ड के सामने एकदम छोटा बच्चा है..उसका आधा साइज का भी नहीं हैं...

अनीश: आह...ले ले..अमन का पानी पी ले पूरा..उफ़... (कर के जोर से मेरी मुँह में झड़ने लगा. तभी उसने मेरी दाणे को हलके से काट लिया था..

मैं भी: उफ़..आह..अमन...तेरा लण्ड..आह..तेरा पानी.. कर के उसके मुँह में झड़ने लगी)

अनीश ने ६-७ झटके मर के मेरी मुँह मैं उसका पानी डाल दिया था. मै ने बड़े प्यार से सारा गाढ़ा माल निगल लिया..ओर उसके लण्ड को प्यार से धीरेसे चूसती रही. अनीश भी मेरी चूत को चाट कर साफ कर रहा था.

फिर अनीश उठा..मुझे अपनी बाँहों मैं ले लिया..संध्या..मजा आ गया..अगर सच में अमन का लण्ड तुमको दे दू तुम तो ओर भी मस्त सेक्सी हो जाएगी.

मैं: चुप बदमाश...ओर उसकी छाती पर सर छुपाकर सोने लगी.

कुछ देर आराम करने के बाद हम फ्रेश हो गए...खाना खा लिया. रूम पर आकर मैं अपनी स्विमिंग ड्रेस बाथरूम जाकर पहन ली. वो एक मस्त घुटने तक का हलके गुलाबी रंग का सारोंग था..ओर ऊपर लाल रंग का नाभि के ऊपर का टॉप. मैंने सारोंग (स्कर्ट) के निचे नीले रंग की पैंटी पेहेन ली थी. जैसे मैं बाथरूम से बाहर आयी..अनीश मुझे पागल जैसे देखता रहा..

अनीश: आह मेरी जान..आज तो गोवा की बीच पर कत्ले आम होगा. बहुत सरे मर्दों की दिल टूटेंगे ओर हजारो लण्ड तुझे सलामी देंगे.

मैं: चुप बदमाश कही के..चलो अभी..

अनीश ने भी एक सेक्सी पिले रंग की शॉर्ट्स पहनी थी. शॉर्ट्स बहुत टाइट थी.. ओर ऊपर जांघों तक थी. उनकी मसल जाँघे, सामने लण्ड का उभार ओर गांड का अकार एकदम सेक्सी लग रहा था..एकदम दोस्ताना में जॉन अब्राहम की तरह. दिखने में तो अनीश खूबसूरत थे ही.

निचे हमें लॉबी में अमन मिल गया. वह मुझे घूर- घूर कर देख रहा था. मुझे ऐसे ही बहुत शर्म आ रही थी. सुबह मेरे पैंटी के सात वह बहुत देर तक मेरी सामने खेला था. हमें देखकर वो हमारे पास आ गया.. उसने हमें बीच पर जाने का दरवाजा बताया..ओर कहा..आप जाइये..में अभी टॉवल ओर बाकि सामान लेकर आता हूँ.

हम उस दरवाजे से बीच पर चले गए..बहुत शीतल लहर चल रही थी.. बीच के पीछे साइड में ..बहुत खूबसूरत नारियल के पेड़ थे..वहा बहुत सारी टेबल ओर खुर्चिया..बड़ी बड़ी छत्रियों के निचे लगी थी. २-४ विदेशी कपल के अलावा वहा कोई नहीं था. अनीश ने मेरा साथ पकड़ कर पानी के अंदर ले गया...एक दूसरे पर पानी डाल कर हम भीग गए..मैंने देखा की मेरा स्कर्ट ओर टॉप..गिला होकर पारदर्शी हो गया था. पारदर्शी गुलाबी सारोंग चिपक कर मेरी शरीर पर थी जिस में मेरी नीली पैंटी साफ़ दिखाई दे रही ओर पीछे से खुली मेरी गांड. मेरी मम्मी ओर निप्पल्स भी टॉप से नजर आ आ रहे थे. वही हाल अनीश का था. उसकी छोटी सी शॉर्ट्स..उसके गांड ओर लोडे पर चुपक गयी थी ओर वो करीब-करीब नंगा दिख रहा था. पर वो बहुत खुश हो रहा था..उत्तेजित हो रहा था. वो मेंरे मम्मे, चूत, गांड ओर शरीर का हर अंग मसल रहा था. उसकी शॉर्ट्स पर से उसका लण्ड मुझ पर रगड़ देता..मेरी गांड पर दबा देता.

तभी हमने अमन को आते हुए देखा...उसने अपने सात दो बड़ी बास्केट लाया था. उसने नारियल के पेड़ों के करीब एक टेबल लगा दिया..छाँव के लिए बड़ी छत्री लगा दी. फिर वो हमारे पास आया ओर कहा..सर आपका टेबल रेडी है...मैंने फेनी भी टेबल पर रख दी..वहा बास्केट में टॉवल भी रखा है.

हम टेबल के पास चले गए. टॉवल से खुद को सूखा लिया..ओर खुर्ची पर बैठ गए..अमन ने मुझे फेनी की एक गिलास दी..ओर दूसरी अनीश को. साथ में डिश में कुछ स्नैक्स भी थे.

अनीश: एन्जॉय मेरी जान..चीयर्स..!

में भी : चियर्स कर के हम फेनी का आनंद उठाने लगे.

फेनी गोवा की ट्रेडिशनल ड्रिंक है..जो काजू का फल या नारियल से बनता है. उसमे अल्कोहल की मात्रा ज्यादा होती है..

अमन वही रेती में हमारे सामने बैठ गया. मेरे स्कर्ट एक तरफ से खुली थी..जिससे सामने बैठे किसी भी को मेरे पैंटी साफ दिखाई दे रही थी.

अनीश: अरे अमन निचे क्यों बैठे हो. एक चेयर ले लो..ले तू भी एक गिलास ले..

अमन: नहीं सर.. होटेल पॉलीसी के हिसब से में आप के साथ बैठ नहीं सकता हूँ.. मेरी नौकरी चली जाएगी.

अनीश: ठीक हैं..मत बैठो..आजा यहाँ पास छुपकर बैठ जावो..एक गिलास ले लो

अनीश ने जबरदस्ती उसे एक गिलास दिया..वह मेरे खुर्ची के एकदम पास आकर बैठ गया. उसको मेरी जांघें ओर पैंटी एकदम २ फ़ीट की दुरी से दिख रही थी.

अब फेनी पीने से में भी थोड़ी खुल रही थी. अमन डर डर कर थोड़ी सी पि रहा था. अनीश मुझे भी पीला रहा था ओर खुद भी बहुत पी रहा था.

अनीश: अमन..सुबह संध्या की पैंटी फ्रेश थी ना..बदबू तो नहीं थी. (में शर्मा कर लाल हो गयी ओर इधर उधर देखने लगी)

अमन: हाँ सर बहुत फ्रेश थी.. बहुत अच्छी खुश्बू आ रही थी.

अनीश: हाँ बहुत अच्छी खुश्बू थी.. संध्या की.

अमन: हाँ सर ..आप बहुत लकी हो..मैडम बहुत सुन्दर ओर खुश्बुदार है..

तभी मुझे थोड़ा चक्कर जैसे हुआ..

में: उह.....

अनीश: क्या हुआ संध्या...

मुझे थोड़ा अस्वस्थ लग रहा था. थोड़ी से उलटी हो गयी.

अमन : सर लगता है मैडम को नशा हो गया, इसलिए अस्वस्थ लग रहा. इनको थोड़ा आराम की जरुरत है.’

अनीश: हाँ संध्या थोड़ा पानी पी लो. ठीक लगेगा.

अमन: सर मैडम को थोड़ा पैर ऒर शोल्डर की मसाज कर के देता हूँ..थोड़ा ठीक लगेगा.

अनीश: हाँ.. कर दो जल्दी से..कहा करोगे मसाज.

अमन: वहा नारियल के पेड़ के पीछे त्तते की छोटी सी दीवाल लगायी है..कोई देख नहीं पायेगा. मैं वहा पर चटाई और चादर बिछा कर आता हूँ.
 
Back
Top