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Adultery मेरी नशीली चितवन

मैंने भी उस सुन्दर विशाल लण्ड को पूरी इज्जत दी. दोनों हाथों से प्यार से पकड़ कर उनका गुलाबी सूपड़ा चूसने लगी. एक साथ से मैंने उनकी बड़ी बड़ी सांड जैसे गोटिया पकड़ ली ओर सहलाने लगी. धर्मेश अंकल खुश हुए. वोः लम्बे लम्बे स्ट्रोक से मे्रे मुँह को चोदने लगे. मैंने मेरी गर्दन ऊपर की ओर उनका पूरा लण्ड मे्रे गले तक अंदर ले लिया.

धर्मेश अंकल ; आह रानी..तू तो बड़ी एक्सपर्ट है लण्ड चूसने मेँ. अनीश बड़ा लकी है..

धर्मेश अंकल मे्रे मुँह को जोर जोर से चोदने लगे..मैंने भी उनकी गोटियां सहलाई..ओर २-३ बार उनका पूरा १० इंच का लोडा गले के अंदर तक ले लिया..वो हाफने लगे ओर..ुम.. ाः.. आह.. करके मे्रे मुँह में झड़ने लगे.

मैंने उनका लण्ड गले से बाहर निकाला ओर उनका पूरा पानी अपने जीभ पर लिया ताकि उसका स्वाद ले सकू. वाह ! .. क्या बात थी. उन्होंने १५-२० फवारे में इतना सारा वीर्य मे्रे मुँह में ठूस दिया. ओर क्या स्वाद था.. मीठा शहद.. इतना स्वादिष्ट वीर्य मैंने कभी नहीं चखा था. में उनके वीर्य के खुशबू ओर स्वाद की दिवानी हो गयी. तभी बाहर हमें कुछ आवाज आयी.

धर्मेश अंकल: जल्दी जावो संध्या..शायद तुम्हे तेरी सास ढूंढ रही.

में जल्दी से साफ़ सुथरी होकर बाहर आ गयी.ओर सोफे पर बैठ गयी. वीर्य चखने की मेरी लालसा तृप्त हो गयी थी. कुछ देर बाद धर्मेश अंकल आये ओर सामने वाले सोफे पर बैठ गए. उनके चहरे पर ख़ुशी थी, मीठी मुस्कान थी ओर आँखों में शरारत थी. वोह बार बार मुझे उनकी नज़रों से घायल करते, उनकी नजर मुझे नंगा महसूस कराती.

शाम को हम वापस घर आये. धर्मेश ने मुझे पागल कर दिया था, मेरी वीर्य चखने की लालसा फिर से बढ़ गयी थी. बैडरूम जाकर मैंने झट से अनीश की पैंट निचे कर दी , उसको नंगा कर के उसके लण्ड को पागलों की तरह चूसने लगी. अनीश जोर जोर से हसने लगा..अरे में भूल गया तुम्हारी गर्भावस्था की लालसा..इतने देर तक बिना वीर्य चखे कैसे दिन गुजरा ?

मैंने अनीश का पूरा लण्ड गले तक ले लिया ओर जोर जोर से चूसने लगी..मैंने आंखें बंद कर ली. मेरी आँखों के सामने धर्मेश अंकल का खूबसूरत लण्ड ओर उनके वीर्य की महक ताजा हो गयी. बहुत जल्दी अनीश झड़ गया..ओर मैंने उसका सारा वीर्य पी लिया. .अनीश हैरानी से मुझे देख रहा था.. संध्या तुम्हारी क्रेविंग्स / लालसा हर दिन बढ़ते जा रही है. मैंने कहा - हाँ .. क्या करू जान..तुमने ही आदत लगा दी.. ओर हम दोनों हंसने लगे ओर फिर एक दूसरे की बाँहों में नंगे सो गए.

सुबह जब आँख खुली तो मुझे वीर्य की महक आ रही थी ओर मुँह में स्वाद आने लगा था. मे्रे हाथों में अनीश का लण्ड फनफना रहा था. वोह अभी भी सोया था. मेरी वीर्य के स्वाद की लालसा जाग गयी थी..ओर मैंने उठकर अनीश का लण्ड को फिर से मुँह में ले लिया ओर चूसने लगी. अनीश भी धक्के मार के मेरा मुँह चोदने लगा. कुछ देर बार वोह झड़ गया ओर में जीभ से चाट चाटकर उसके वीर्य का स्वाद लेने लगी. पर वो स्वाद ओर खुशबू ना था. अब मेरी लालसा किसी ओर स्वाद ओर खुशबू की थी..धर्मेश अंकल के वीर्य की..उफ़. अब कैसे होगा?

अनीश मुझे निहार रहा था.. क्या हुआ रानी? तुम्हारी लालसा आज तृप्त नहीं हुई? तुम अभी भी अस्वस्थ हो?

मैंने कहा .. नहीं ऐसी नहीं है...ओर कुछ बहाना बना के बाथरूम चली गयी. में सोचने लगी.. मेरी लालसा बढ़ रही थी..पर वोह अब धर्मेश अंकल के लण्ड की खुशबू ओर उनके वीर्य के स्वाद के लिए थी. मै बैचैन हो उठी. क्या करे ? कैसे करे? मुझे कोई रास्ता दिख नहीं रहा था.

में पूरी सुबह सोच रही थी की क्या किया जाये..तभी मे्रे सास ससुर ने हमें निचे बुलाया. उन्होंने बताया की उन्हें आज ही ुरगेंटली अनीश की बुवा की देखभाल के लिए भोपाल जाना पड़ेगा. उन्हें दिल का दौरा आ गया ओर पता नहीं कितने दिन लग जाये. सो उन्होंने पम्मी मौसी से बात कर ली है. जब तक मे्रे सास ससुर वापस नहीं आते तब तक पम्मी मौसी ओर धर्मेश अंकल कुछ दिन हमारे घर रहेंगे ओर मेरी देखभाल करेंगे. मुझे आश्चर्य हुआ. भगवन ने मेरी सुन ली.. दिल से अंदर ही अंदर में बहुत खुश हो गयी. दोपहर को मे्रे सास ससुर फ्लाइट से भोपाल चले गये. अनीश उन्हें एयरपोर्ट छोडने गये ओर वहां से ऑफिस चले गये. तभी मुझे दरवाजे की रिंग सुनाई दी..शायद पम्मी मौसी ओर धर्मेश अंकल आ गये थे..में दौड़ी दौड़ी गयी..ख़ुशी से..उनके स्वागत के लिए.

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मैंने दौड़ कर जाकर दरवाजा खोला. सामने धर्मेश अंकल उनकी कमसीन नजरों से मुझे देखकर मुस्कराने लगे. उनके सात पम्मी मौसी थी और उसके पीछे एक बहुत खूबसूरत लड़का था. वह कुछ सोलह सत्रा साल का था, लम्बा पतला और बहुत गोरा चिट्टा गबरू जवान. उसने टाइट टी शर्ट और हाफ पैंट पहनी थी और उसकी झील सी नीली आंखें थी. उसके दोनों हाथों में बैग्स थे. पम्मी मौसी ने बताया की वो उनका नौकर यासीन हैं जो गेस्ट रूम में रहेगा और घर के काम में मदत करेगा, उम्र की वजह से अब पम्मी आंटी से ज्यादा चला नहीं जाता और घर के काम भी नहीं होते.

मैंने उनका मुस्करा कर स्वागत...पम्मी आंटी ने मुझे पास खींचकर गले से लगा लिया. धर्मेश अंकल कहा पीछे रहते, उन्होंने भी मुझे प्यार से गले लगाया.. और अपने दोनों साथ मेरी गांड पर रखकर अपनी और खिंच लिया और मेरी चूत के ऊपर से अपना मोटा कड़क लण्ड रगड़ दिया. मेरे शरीर में कंपकपी हो गयी और मैं सिहर गयी. उन्होंने हलके से मेरे कान के पीछे भी अपनी जीभ फेर ली. पर मुझे अच्छा लगा. मैंने देखा के यासीन पीछे से सब देख रहा था और उसके नीली आँखों में अजीब चमक और शरारत थी.

मैंने यासीन से कहा..ऊपर टेरस पर सर्वेंट रूम है, खाली पड़ा है तुम वही पर रहना और पम्मी मौसी का सामान गेस्ट रूम मैं रखवा दिया.मैंने कहा - अंकल और मौसी आप बैठिये, मैं आप के लिए चाय बनाती हूँ, वैसे यासीन ने कहा, मैडम मैं हेल्प कर देता हूँ, आप सिर्फ मुझे बताये की क्या क्या कहा रखा है. यासीन बड़ा चुस्त और फुर्तीला लड़का था. मैं उसे किचन की सब चीजे दिखाने लगी. वो मेरे बिलकुल पास खड़ा था और एक एक चीज कहा रखी वो देख रहा था. जैसे मैं उसे बर्तन के ट्रे दिखाने निचे झुकी, मेरी गांड उसके लण्ड से टकरा गयी. मैंने हाफ पैंट के अंदर उसका एकदम लोहे जैसे सख्त औजार महसूस किया.

मैं वही झुकी रही..और बताने लगी - यासीन यह देखो यहाँ बर्तन है, और उस ड्रावर में चकला - बेलन है.

यासीन - हां मैडम समझ गया .. चमच और प्लेट्स कहा पर है?

वह पीछे से थोड़ा और मेरे पास आ गया और मुझे उसका लण्ड मेरी गांड की दरार पर महसूस हुआ.

मैंने उसे दिखाया - यह देखो यहाँ पर सब प्लेट्स, चमच रखे हुए है.

यासीन - मैडम चीनी और चाय पाउडर कहा रखा है ?

मैंने उसे दिखाया - यहाँ देखो चीनी और चाय पाउडर है

यासीन - : मैडम मसाले कहा रखे है?

वो अब मेरी गांड से चिपक गया था और अपना लण्ड मेरी गांड की दरार में रगड़ रहा था. मुझे भी मजा आ रहा था. मुझे पता चल गया था की वो जानबूझ कर इतना सब पूछ रहा ताकि मेरे गांड अपने लण्ड से रगड़ सके.

मैंने उसे दिखाया - यह देखो मसाले यहाँ रखे है..

तभी धर्मेश अंकल किचन में आये और बोले - संध्या सब ठीक से समजा दिया ना..देखो यासीन अब सब काम तू संभाल ले, संध्या को कुछ भी तकलीफ न हो, उसको कोई काम न करना पड़े. हम दोनों हड़बड़ा गए, यासीन पीछे हट गया और मैं भी झट से खड़ी हो गयी.

यासीन: हा सब, आप बिलकुल फिक्र मत कीजिये, मैं मैडम का बहुत अच्छी से ख्याल रखूँगा

यासीन ने झट से चाय बना ली और हम सब चाय के मजे लेने लगे. फिर पम्मी मौसी ने कहा - मैं थक गयी हूँ मैं जरा आराम कर लेती हूँ और वो अपने गेस्ट रूम में चली गयी. अब कमरे में सिर्फ मैं और धर्मेश अंकल थे और टीवी देख रहे थे .. वह मुझे कमसिन नजरों से देख कर मुस्करा रहे थे. मुझे फिर से उनके लण्ड की खुशबू और स्वाद की लालसा बढ़ने लगी. मैंने कुछ सोचा और मुस्कुरा कर धर्मेश अंकल को देखा और उठकर जाने लगी.

धर्मेश अंकल - अरे संध्या कहा जा रही हो, बैठो..बातें करते है.

मैंने कहा - अंकल अभी आयी, चेंज कर के .. और उनको मादक नजरों से देखकर अपने कमरे में चली गयी. मैंने मेरी पैंटी और ब्रा निकाल दी, पूरा नंगी हो गयी और मेरा एक लाल रंग का पुराना गाउन पहन लिया, जो लेग साइड से कटा था, गाउन मुझे बहुत टाइट फिट हो रहा था. प्रेगनेंसी के कारन मेरा बदन भरा था और वजन भी बढ़ रहा था. लग रहा था की थोड़ी सी हलचल से टाइट गाउन कभी भी फट जायेगा.
 
मैं फिर से हॉल में आ गयी और एक लम्बी सी अंगड़ाई लेकर सोफे पर बैठ गयी. धर्मेश अंकल मुझे घूर रहे थे. उनको ४४० वाल्ट का झटका लगा था. उनकी आँखों में चमक और वासना थी. नजरों से मुझे चोद रहे थे. उनकी पैंट के अंदर बड़ा उभार आ गया था और उनका लण्ड फुफकार रहा था. उनको टाइट गाउन से मेरे खड़े चूचियां साफ़ दिखाई दे रही थी.. मैं भी शरारती अंदाज मैं उनको देखती और मुस्करा देती. मैं फिर से उठी और जाने लगी.

धर्मेश : अरे संध्या कहा जा रही हो

मैंने कहा : कुछ नहीं अंकल जरा वाशरूम जाकर आती हूँ .. हमारे वाशरूम के दरवाजे का का लॉक भी ख़राब हो गया, मैकेनिक को भी बुलाना पड़ेगा..

और मैं मुस्कुरा कर अपने कमरे मैं चली गयी. मैंने अब धर्मेश अंकल को मेरे कमरे मैं आने की दावत दे दी थी.

मैं अपने कमरे में आकर आईने के सामने खड़ी हो गयी.. मैंने देखा की धर्मेश अंकल दरवाजे पर खड़े थे.. वह अंदर आ गए और प्यार से मुझे पीछे से जकड लिया..

उनके दोनों साथ मेरे पेट पर थे मैंने उनके दोनों साथ प्यार से पकड़ ले और सिसकारी भरी. वह मेरे गले पर चूमने लगे...और फिर मुझे अपनी तरफ मोड़ कर मेरे गाल चूमने लगे..मैंने भी उनको कास के पकड़ लिया..मेरे जांघों के बीच मुझे उनका सख्त गरम लण्ड महसूस हुआ.

उन्होंने प्यार से मेरे ओंठों पर होंठ रख दिए और रसपान करने लगे...मेरी जीभ चूसने लगे.. धर्मेश अंकल बहुत अच्छे प्रेमी थे.. पहली बार मुझे प्यार कर रहे थे..वह मुझे गले के निचे किस करने लगे और जैसे उन्होंने मेरे बूब्स चाटने गाउन को निचे किया..वैसे मेरा गाउन - चिर्र.. करके फटता चला गया.. उन्होंने उसे पूरा फाड् डाला और एक तरफ फेक दिया और मैं अब उनके सामने एकदम नंगी थी. मैंने शर्मा उनको कस के पकड़ लिया..और उनकी टी शर्ट निकाल दी..

धर्मेश अंकल - संध्या तुम गजब की सुन्दर हो.. क्या तुझे मैं पसंद हूँ?

मैंने हाँ मैं गर्दन हिला दी..वैसे उन्होंने कहा

धर्मेश अंकल - ऐसे नहीं संध्या..बोलकर इजहार करो..क्या तुम्हे मैं पसंद हूँ?

मैंने कहा - हा अंकल..आप बहुत अच्छे हो.. मुझे आप बहुत पसंद हो.

धर्मेश अंकल - क्या तुम्हे अंकल से चोदना पसंद है?

मैंने कहा - हाँ मुझे अच्छा लगा..

धर्मेश अंकल - बताओ संध्या तुम्हे अंकल क्यों पसंद है?

मैंने कहा - आप बहुत अच्छे हो, बहुत प्यार करते हो..

धर्मेश अंकल - सिर्फ मैं पसंद हूँ ? मेरा लण्ड पसंद नहीं आया?

मैंने कहा - हाँ अंकल आपका लण्ड बहुत अच्छा है..इतना सुन्दर लण्ड मैंने कभी नहीं देखा..

धर्मेश अंकल - ऐसी बात है तो अपने अंकल को तुम खुद अपने हाथों से कपडे निकाल कर नंगा करो

मैं शर्मा गयी. नखरे करके कहा - मुझे शर्म आती है

धर्मेश अंकल - तू अपने अंकल को चाहती है ना..फिर इसमें क्या शर्म .. हम एक दूसरे को पहले भी नंगा देख चूका

मैंने प्यार से धर्मेश अंकल के कपडे निकलने चालू किये.. मैंने उनकी बनियान निकाल दी. उनका गोरा बदन काले बालों से भरा था..बड़ा सेक्सी कसा हुआ बदन था..मर्दाना बालों वाला बदन था और बहुत अच्छी सी मर्दानी खुशबू आ रही थी. धर्मेश ने मुझे सीने से लगा लिए.. मैं उनके बदन की खुशबू से मोहित हो गयी..उन्होंने मेरे मम्मे प्यार से अपने हाथों में लिए और मसलने लगे.

मैंने उनकी बेल्ट खोली और उनकी पैंट निचे की..

उन्होंने एक सेक्सी जॉकी ब्रीफ्स पहनी थी.. उसमे उनके लण्ड का खड़ा उभार साफ दिख रहा था..इतना बड़ा उभार मैंने कभी नहीं देखा था.उन्होंने मेरे बाल पकडे और मेरा चेहरा अपने उभार पर रगड़ने लगे. उनके ब्रीफ्स से उनके लण्ड की खुशबू मुझे पागल कर रही ही.. वैसे उन्होंने अपनी ब्रीफ निचे कर के निकाल दी और मेरे चेहरा पर अपना लण्ड और गोटिया सहलाने लगे.

मैंने भी प्यार से उनका लण्ड पकड़ लिया और उनके लण्ड का गुलाबी टोपा अपने जीभ से चाटने लगी..वैसे वह - आह ! संध्या रानी..उम्..क्या मस्त चूसती है तू मेरा लण्ड.

मैंने उनके लण्ड का सूपड़ा चूसना चालू किया.. और चेहरा ऊपर कर के उनका पूरा लण्ड अपने गले तक अंदर डाल दिया. मेरी थूक से उनका लण्ड एकदम चिकना हो गया था.. और मेरे गले मैं आगे पीछे फिसल रहा था. उनका शानदार लण्ड एकदम गरम और सख्त हो गया था.. वह बड़े प्यार से मेरी आँखों मैं आंखें जमाये मेरा मुँह चोद रहे थे. फिर धर्मेश अंकल ने उनका पूरा लण्ड मेरे गले मैं ठूस दिया..मेरे आँखों से आंसू आने लगे...पर अच्छा लग रहा था.. धर्मेश अंकल बोले - ले रंडी खा ले मेरा पूरा लण्ड..खा ले पूरा.. फिर उन्होंने अपना लण्ड मेरे गले से निकाला मुझे खड़ा किया और बिस्तर पर पीठ के बल सुला दिया ..

मैं भी नंगी..पैर फैला कर, अपनी चूत खोलकर रंडी जैसे लेट गयी. वह मेरे सर के बाजु से आये ...और मेरे दोनों बूब्स मसलने लगे..फिर उन्होंने अपना लण्ड मेरे बूब्स के दरार मैं फसा दिया और दोनों बूब्स एकसात जोड़ दिए और अपने लण्ड से मेरे बूब्स चोदने लगे. मेरे कोमल मुलायम बूब्स पर उनका सख्त गरम लोडा फिसल रहा था.. रगड़ रहा था..मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. तभी वो निचे झुक कए और मेरी चूत चाटने लगे.. ऐसे करने से उनकी गांड मेरे चेहरे के ऊपर आ गयी.. उनकी काले बलोंग वाली गोरी गांड बहुत खूबसूरत थी.. गांड की दरार मैं बालों के बीच उनका गुलाबी छेद बहुत मस्त लग रहा था. तभी उन्होंने अपनी गांड और निचे झुका ली और उनकी गांड का छेद मेरे नाक पर रगड़ने लगे. मुझे उनकी गांड की खुशबू बहुत मादक ली..

धर्मेश अंकल - रंडी चाट ले..मेरी गांड..अपनी चीभ से

मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली और उनकी बालों वाली गांड चाटने लगी.. क्या मस्त स्वाद था उनकी गांड का मैं कामुक हो गयी.. तभी उन्होंने मेरी चूत की दरार के अंदर अपनी मोटी लम्बी जीभ घुसा दी..और अपने नाक से मेरी चूत का दाना रगड़ने लगे. मैं कांप रही थी..उधर उनकी गांड मेरे मुँह पर रगड़ गयी थी और मैं मेरी जीभ उनके छेद केअंदर डाल डाल कर चाट रही थी. तभी धर्मेश अंकल ने मेरे चूत का दाना अपने ओंठों में ले लिए और जोर जोर से चूसने लगे. मेरी चूत से पानी का झरना बाह रहा था.. मैंने उनका सर अपने दोनों हाथों से अपनी चूत पर दबा दिया.. और गांड उछाल उछाल कर उनके मुँह मैं झड़ने लगी.. हाय ! मर गयी... उह....और उन्होंने भी उनकी गांड का छेद मेरे मुँह मैं दबा दिया..वह मेरा सारा पानी पी गए..बोले - वाह रानी..क्या अमृत जल है..तेरी चूत का पानी तो अमृत से मीठा है. रोज इसे पिया करूँगा.

अब उनका लण्ड फुफकार रहा था..उनका नाग अब मेरे भीगे बिल में जाने को बेताब था..वह उठे और मेरे पैर अपने कंधे पर उठा दिए और उनके लण्ड का गुलाबी सूपड़ा मेरी चूत के द्वार पर रख दिया.

वैसे मैंने घबरा कर कहा .. धर्मेश अंकल सिर्फ ऊपर ऊपर..मेरे बच्चे को खतरा हो सकता..

धर्मेश अंकल - हाँ संध्या..मुझे तेरी तबियत की फ़िक्र है..सिर्फ ऊपर ऊपर चोदूूँगा .. उस कामदेव को मैं मना नहीं कर पायी..धर्मेश अंकल ने धीरे से उनके १० इंच लण्ड का ३ इंच का गोल मोटा टोपा मेरी चूत में डाल दिया. वैसे मैं कराह उठी ..आह धर्मेश अंकल..दर्द होता है..आपका लण्ड बहुत मोटा है..

धर्मेश अंकल - मेरी जान अभी तो सिर्फ ३ इंच डाला है..पूरा १० इंच अंदर डालूंगा तो क्या करोगी.. और वह मेरे ऊपर अपने हाथों के बल हल्का से लेट गए और मेरे ओंठों को चूमने लगे.उनकी मोटी लम्बी जीभ मेरे मुँह मैं अंदर तक चली गयी.. मुझे लग रहा था जैसे मैं दोनों साइड से चुद रही हूँ..उनका लण्ड मेरी चूत चोद रहा था और उनकी जीभ मेरा मुँह. मैं कामवासना मैं डूब गयी थी..कोई होश नहीं था.. मैंने उनका सर कस के पकड़ लिया और पागलों की तरह उनको चूमने लगी..इसी गरमाहट मैं मेरी चूत में जोरदार कम्पन हुई और पानी की गंगा बहने लगी. मेरे चूत के पानी से धर्मेश का लण्ड और चिकना हो गया.

धर्मेश अंकल - आह ! रानी..तेरी चूत का पानी कितना गरम है ..तेरी कसी हुई गरम चूत मेरे लण्ड की मस्त मालिश कर रही है.. मैंने महसूस किया की उनका लण्ड अब मेरी चूत मैं आसानी से आधा चला गया था. धर्मेश अंकल फिर से अपनी कमर हिलाकर अपने लण्ड को धक्के देकर मेरी चूत की चुदाई करने लगे..

मैंने कहा - धर्मेश अंकल ..अब बस..और आपका माल मेरी चूत मैं मत डालना..इन्फेक्शन हो सकता..गर्भे अवस्था मैं इन्फेक्शन सेहत के लिए अच्छा नहीं.

धर्मेश अंकल मुस्करा दिए.. हा मुझे पता है रानी.. पर क्या करू..जब तू मुझे अंकल बुलाती है तो मेरा लण्ड तुझे चोदने को बेताब हो जाता है..

मैंने कहा.. उह मेरे प्यारे अंकल.. आप मेरे सबसे अच्छे अंकल हो..अब मेरी चुदाई कर दो..और अपना पानी मेरे मुँह मैं डाल का मुझे पीला दो..

वैसे धर्मेश अंकल उत्तेजित हो गए ..वह प्यार से अपने लण्ड से मेरी चूत चोदने लगे..पर अभी भी वह सिर्फ आधा लण्ड अंदर डाल कर ही चोद रहे थे.

धर्मेश अंकल - आह मेरी रानी..ले अपने अंकल से चुदवा ले..अब तू अपने अंकल से रोज चुदवा लेना.

मैंने कहा - हां अंकल आप मुझे रोज चोदना और अपने लण्ड से पानी पिलाना..

धर्मेश अंकल ने उनका लण्ड मेरी चूत से बाहर निकाला और मेरे मुँह मैं ठूस दिया.. आह सांध्य..ले..पी ले मेरा पानी..और एक के बाद एक फवारा उनके लण्ड से मेरे मुँह में गिरता गया..उनके लण्ड ने इतना पानी भरा की मेरा पूरा मुँह उनके वीर्य से भर गया..कुछ ओंठों पर आ गया.. मैं जीभ से चाट कर उनके वीर्य का स्वाद बहुत देर तक लेती रही.

वह वही नंगे मेरे बाजु सो गए और मुझे उठाकर अपने बाँहों में ले लिया.

धर्मेश अंकल - यह क्या संध्या तू अभी भी मेरा वीर्य मुँह में रखा है..निगल लो..क्या बात है.. तुझे पसंद नहीं आया मेरे वीर्य का स्वाद.

मैंने कहा.. नहीं अंकल ऐसी बात नहीं है.. मैं तो सुबह से इसके लिए तड़प रही थी.

फिर मैंने उनको सब सच बता दिया की प्रेगनेंसी की वजह से कैसे मुझे उनके वीर्य के स्वाद और खुशबू की लालसा लग गयी. वो सुनकर बड़े खुश हो गए.

धर्मेश अंकल - ऐसी बात है ! तू जब भी मन करे बोल देना..मैं तुझे अपना वीर्य पीला दूंगा.

मैंने उनको चुम लिया.. अब अआप जाइये अंकल..नहीं तो पम्मी मौसी को शक हो जायेगा..

वह मुस्करा कर बोले - अरे वो गहरी नींद सोती है..उसको कोई सुधबुध नहीं होती.. तू चिंता मत कर

फिर उन्होंने कपडे पहने ..

मैंने कहा - धर्मेश अंकल अब मैं क्या पहनू .आपने मेरा गाउन फाड् दिया..

वह मुस्करा कर बोले - मैं तुझे कल २ नए गाउन ला दूंगा.आज तू ऐसे ही नंगी सोयेगी.

उन्होंने फिर से मेरे सर को, फिर गालों को, चूचियों को चूत को बारी बारी से चूमा और चाटा और मुस्करा कर चले गए.
 
मैं पसीने से लथपथ थी. मेरे बदन से सिर्फ धर्मेश अंकल के शरीर की मर्दाना खुशबू आ रही थी. कोई भी सिर्फ दूर से सूंघ कर बता देता की मैं किसी मर्द से चुदी हूँ और मेरे शरीर पर उस मर्द की खुशबू ने कब्ज़ा कर लिया है. अनीश का ऑफिस से आने का टाइम भी हो गया था. मैं बाथरूम गयी और नहाने लगी .. पर धर्मेश के बदन की मर्दाना खुशबू मेरे शरीर से नहीं जा रही थी. २-३ बार साबुन लगाकर नहाने के बाद मैं बाहर आयी और थक कर संतुष्टि से सो गयी.

मैंने सिर्फ एक चादर ओढ़ ली और धर्मेश अंकल का कहना मान कर पूरी नंगी सो गयी. कुछ देर बाद अनीश आया .. मेरी आंखें खुली तो देखा की वह पूरा नंगा था. उसने मेरी चादर बाजु कर दी थी .. और वह मेरे नंगे जिस्म को चुम रहा था चाट रहा था. उसका ५ इंच का छोटा लण्ड एकदम सख्त होकर फुफकार रहा था.. मेरे चूचियां चूसने के बाद वह मेरे ओंठों पर होंठ रखकर चूमने लगा.. मेरी जीभ चूसने लगा ..

अनीश - मम संध्या रानी आज तू बड़ी हॉट और सेक्सी लग रही है .. लगता हैं मेरा वीर्य पीने के लालसा मैं तड़प कर नंगी सोई है..

मैंने भी अपने दोनों साथ अनीश के गले मैं डाल कर उसको चुम लिया..हाँ मेरे राजा..तुम्हारा इंतजार था.

अनीश - संध्या तुम्हारा किस बड़ा हॉट लग रहा आज..अलग महक आ रही है.. तुम्हारे शरीर से भी बहुत अच्छी अलग महक आ रही.

ओह ! यह क्या.. मैं भूल गयी..मैंने मुँह साफ़ नहीं किया था.. धर्मेश का वीर्य का स्वाद बहुत देर अपने मुँह मैं रखना चाहती थी. क्या अनीश समझ गया की यह वीर्य की महक है?

मैंने कहा - हाँ आज आपका वीर्य नहीं मिला तो मज़बूरी में दही क्रीम खा लिया ..

अनीश - यह बात है .. ? फिर अच्छे काम में देरी नहीं करते ..

और अनीश ने उसका लण्ड मेरे मुँह में डाल दिया.. अनीश का छोटा ५ इंच का लण्ड.. मैं आसानी से चूस लेती थी..उसके लण्ड की महक और वीर्य की खुशबू बस यही उसके लण्ड की खासियत थी. छोटा लण्ड था पर सुन्दर था..और कड़क सख्त दमदार.. बाकी लम्बाई और मोटाई मैं बुरी तरह मार खा गया.. पर उस कमी के लिए उसने मुझे काफी बड़े-बड़े लण्ड वाले मर्दों से चुदवाया था ..और बड़े खुले विचारों का था. बहुत जल्दी वह मेरे मुँह मैं झड़ गया..मैं बड़े प्यार से बहुत देर तक अपने मुँह मैं उसके वीर्य की महक और स्वाद लेती रही. फिर भी मुझे कमी लग रही थी.. धर्मेश अंकल की महक और वीर्य का चस्का लग गया था..लालसा पैदा हो गयी थी.

शाम को कुछ देर बाद यासीन हमें खाना खाने बुलाने आया.. मैंने एक टॉप और स्कर्ट पहन ली..अंदर कुछ नहीं था.. अनीश ने कहा- तुम जाओ , मैं फ्रेश होकर आता हूँ. मैं खाने के डाइनिंग टेबल पर बैठ गयी.. कुछ देर बाद धर्मेश अंकल आये तो वह मेरे बाजु वाली खुर्ची पर बैठ गए..मैंने उन्हें मुस्कराते देखा और कहा - यहाँ अनीश बैठता है..

धर्मेश अंकल - धीरे से - कोई बात नहीं. कुछ दिन मैं उसकी जगह ले लूंगा ..और हंस दिए

मैं भी मुस्करा दी..

तभी पम्मी मौसी और अनीश भी आ गए..और हमारे सामने वाली चेयर्स पर बैठ गए..

धर्मेश अंकल - अरे अनीश .. शायद मैं तेरी जगह बैठ गया.. तुम यहाँ बैठ जाओ.

अनीश - अरे नहीं अंकल..कोई फरक नहीं पड़ता.. आप जहा चाहे बैठ लो.. घर की बात है.

धर्मेश अंकल - चलो ठीक है.. अनीश तू ठीक कहता है..घर की बात है.. ठीक है ना संध्या ..तुम्हे कोई परेशानी तो नहीं..?

और धर्मेश अंकल ने उनका साथ मेरे जांघों पर रख दिया.. वह धीरे से उनके हाथों से मेरा स्कर्ट ऊपर करने लगे.मेरी खुली जांघों को सहलाने लगे

मैंने कहा - कोई परेशानी नहीं अंकल .. घर की बात है..और आप तो बुजुर्ग है..हमारे अंकल है.. आप बस आदेश दीजिये.

धर्मेश अंकल - अरे संध्या आदेश क्या देना.. बस हम तेरा ख्याल रखने आये है..बहुत प्यार से तुझे संभालेंगे ..

धर्मेश अंकल मुस्करा दिए और एक आंख मार दी..मैं उनके इशारे सब समझ रही थी.. उन्होंने मेरा स्कर्ट ऊपर कर के अपना साथ अब मेरी चिकनी चूत पर रख दिया था और बड़े प्यार से सहला रहे थे.

मुझे बहुत शर्म आ रही थी.. मेरी चूत से पानी बह रहा था..वही पानी से धर्मेश अंकल मेरी चूत की मालिश कर के सहला रहे थे. बाकि सब लोग खाना खा रहे थे..और यासीन सबको परोस रहा था.. धर्मेश एक साथ से खाना खा रहे थे और दूसरे साथ से मेरी चूत को मसल रहे थे. मेरी चूत से लगातार पानी बह रहा था. तभी धर्मेश ने उनकी एक ऊँगली मेरी चूत मैं डाल दी..

मैं - आह....उफ़..

पम्मी मौसी - क्या हुआ संध्या सब ठीक है ना..

मैंने कहा - कुछ नहीं मौसी बस थोड़ा पेट मैं गड़बड़ है..

पम्मी मौसी -हां प्रेगनेंसी मैं यह सब होते रहता है..

तभी धर्मेश अंकल ने मेरी चूत के अंदर दो ऊँगली डाल दी..और मेरी चूत की दीवाल को कुरेद कर पानी निकाल रहा था..फिर उन्होंने अपनी दोनों उँगलियों से मेरी चूत का पानी बाहर निकाला और मुँह मैं डालकर चाटने लगे..

धर्मेश - वाह ! यासीन .. क्या अचार बनाया है ! मुझे यही अचार पसंद है.

और बेशरम जैसे ऊँगली पर लगा मेरी चूत का पानी जीभ बाहर कर के लपलपा कर चाटने लगे. मुझे बड़ी शर्म आयी.

पम्मी मौसी - हाँ तो खा लो जितनी आपको खानी है .. वैसे मैंने सुना है की संध्या भी बहुत अच्छी चटनी बनती है. संध्या तेरे अंकल के लिए एक दिन बना देना ..इन्हे चटनी बहुत पसंद है.

धर्मेश अंकल ने फिर से अपनी उंगलिया मेरी चूत मैं डाल दी..और बोले - हाँ संध्या..चटनी जरूर बनाना .. और सिर्फ मेरे लिए..मैं तेरी पूरी चटनी अकेले खा लूंगा.. और मुझे फिर से आँख मार दी..

मैंने कहा..हाँ धर्मेश अंकल जरूर बनाउंगी..स्पेशल चटनी..सिर्फ आपके लिए..

यासीन हमें रोटी परोसने आया ... उसने कहा .. हां संध्या मैडम .सब को जैसे चटनी चाहिए सिर्फ आप ही बना सकती है..और वो मुस्करा दिया .

यासीन ने मुझे और धर्मेश को देख लिया था.. पर शायद उसको अपने मालिक के शौक का अंदाजा बहुत अच्छी से था. मैं शर्मा गयी..और धर्मेश अंकल फिर से उंगलिया बाहर करके चाटने लगा. मैं बहुत गरम हो गयी थी.. छटपटा रही थी.. बस झड़ने के कगार पर लाकर धर्मेश ने मुझे प्यासा छोड दिया था.
 
यासीन ने मुझे और धर्मेश को देख लिया था.. पर शायद उसको अपने मालिक के शौक का अंदाजा बहुत अच्छी से था. मैं शर्मा गयी..और धर्मेश अंकल फिर से उंगलिया बाहर करके चाटने लगा. मैं बहुत गरम हो गयी थी.. छटपटा रही थी.. बस झड़ने के कगार पर लाकर धर्मेश ने मुझे प्यासा छोड दिया था.
 
रात को मुझे नींद नहीं आ रही थी. अनीश और मैं हम दोनों सात में नंगे सोते है. अनीश घोड़े बेचकर सो गया था.. पर मुझे नींद नहीं आ रही थी..मुझे फिर से क्रेविंग्स आ रही थी .. धर्मेश के वीर्य के स्वाद की .. तभी मोबाइल पर व्हाटअप्प्स पर धर्मेश अंकल का मैसेज आया ..

धर्मेश अंकल : गुड नाईट जान..स्वीट ड्रीम्स

मैंने लिखा - मुझे नींद नहीं आ रही

धर्मेश अंकल : क्यों ? बोलो क्या सेवा करे की आपको नींद आये ?

मैंने लिखा - बस फिर से मेरी लालसा जगी है..

धर्मेश अंकल - तो देर किस बात की.. मेरा लण्ड तैयार है..तुम्हे अपना दूध पीला कर शांत कर दू..

मैंने लिखा - पर कैसे..

धर्मेश अंकल - किचन में आ जाना

मैंने लिखा- नहीं रिस्की है

धर्मेश अंकल - अनीश सो गया क्या ?

मैंने लिखा - हा वह घोड़े बेच कर सोता है..उसको कुछ होश नहीं रहता

धर्मेश अंकल - ठीक हैं फिर मैं तुम्हारे बैडरूम मैं आता हूँ. पम्मी भी गहरी नींद सोई है.

मैंने लिखा - नहीं ! ऐसे कुछ भी.नहीं करना .यह संभव नहीं है..यहाँ अनीश मेरे बाजु सोया है..आप कुछ भी बोलते..

मैं धर्मेश अंकल के मैसेज का वेट करने लगी.. कुछ देर बाद मैंने सोचा की शायद कुछ प्लान बना रहे..

मैंने लिखा - कुछ और प्लान बनाओ

तभी मेरे बैडरूम का दरवाजा धीरे से खुला..धर्मेश अंदर झांक कर देख रहा था.. मैं घबरा गयी..पर उसने अपने होंठ पर ऊँगली रख कर मुझे चुप रहने को इशारा किया ..और इशारे से वैसे ही सोते रहो कहा. उसने देखा अनीश दूसरी तरफ मुँह करके सोया है..धर्मेश अंकल अंदर आ गए .. बेड की मेरे तरफ की बाजु मैं..वो भी पूरा नंगे थे. मैं हैरान हो गयी.. कितना जांबाज मर्द है.. इसको बिलकुल डर नहीं लगा..पति के होते एक महिला के बैडरूम में नंगा घुस गया..वाह रे शेर !

धर्मेश अंकल ने उसके लण्ड का सूपड़ा मेरी ओंठों पर रख दिया.. मैं प्यार से उसके लण्ड को चूसने लगी.. उसकी खुशबू से मैं खुश हो गयी.. आनंद आने लगा..लालसा मीट रही थी. धर्मेश अंकल ने मेरे चादर उठा कर साइड मैं रख दी.. मुझे नंगा देखकर बहुत खुश हो गए.

धर्मेश अंकल धीरे से मेरे कान में बोले - वाह रे रंडी..तू सच मैं नंगा सोई..मेरे कहने पर..तुझे कल एकदम सेक्सी गाउन ला दूंगा.

मैं कुछ नहीं बोली..डर के मारे मैं धर्मेश अंकल का पूरा लण्ड चूसने लगी.. जल्दी झड़ जाये और मेरी बैडरूम से चला जाये..मैं डर और उत्तेजना के कारन बहुत रोमांचित हो रही थी. पर धर्मेश अंकल एकदम बे-फिक्र थे और प्यार से मुझे देख कर चोद रहे थे. उनकी आँखों की भाषा जबरदस्त थी . मादकता भरी नजरो से मेरे से आंखें मिला कर मेरा मुँह चोद रहे थे.

उन्होंने एक साथ से मेरा बूब्स मसलना चालू किया और दूसरा साथ मेरी चूत को सहलाने लगा. अब मैं और उत्तेजित हो गयी..होंठ दबाकर अपनी आहें , आवाज दबाने की कोशिश करने लगी. मैं प्यार से धर्मेश अंकल के लण्ड का गुलाबी सूपड़ा चूस रही थी. तभी अनीश मेरी बाजु पलटा और उसका एक साथ मेरे छाती पर रख दिया और उसका पैर मेरी कमर पर रख दिया. अनीश का लण्ड मेरी गांड पर रगड़ रहा था.

नींद में अनीश ऐसे हमेशा करता था..मुझे आदत थी. पर मैं अब डर गयी थी.. अगर अनीश ने आंखें खोली तो वो उसके बीवी के मुँह मैं धर्मेश अंकल का लण्ड देख लेगा. पर धर्मेश बिलकुल कॉंफिडेंट थे. वह वैसे ही अपना लण्ड मेरे मुँह मैं अंदर बाहर करते रहे. फिर धर्मेश अंकल ने इशारा करके मुझे अनीश की तरफ पलटने कहा.. वो क्या चाहता था मैं समझ नहीं रही थी. मैंने अनीश का पैर मेरी कमर से निचे किया और अनीश की तरफ पलट गयी. ऐसे करने से अनीश ने अपना चेहरा निचे करके मेरे बूब्स में घुसा दिया. अनीश अक्सर सोते वक्त ऐसे करता है..बच्चों की तरह उसको मेरे बूब्स की महक पसंद है..और छोटे बच्चे जैसे दोनों पैर जोड़कर सिमटकर सो जाता है.

मेरे बूब्स पर मुझे अनीश की गरम सांसे महसूस हो रही थी.तभी धर्मेश जो बेड के साइड पर खड़ा था, उसने मेरा एक पैर हलके से ऊपर उठाया और धिरे से अपने मोटे लण्ड का सूपड़ा मेरी चूत मैं डाल दिया. मुझे इसकी बिल्कुत अपेक्षा नहीं था. सब इतनी जल्दी हुआ. मुझे डर लग रहा था कही अनीश जाग ना जाये.. रोमांचित हो कर मैं सर से पाँव तक सिहर गयी..और मेरी चूत से पानी बहने लगा. इससे धर्मेश के लण्ड को आसानी हो गयी..मेरी चूत के ओंठों को चीरता हुआ उसका लण्ड आधा मेरी चूत के अंदर चला गया. मैं कांपने लगी. मेरा शौहर , मेरा पति मेरे सीने से लगा, मेरे बूब्स मैं अपना चेहरा रगड़कर नंगा सोया था, और पीछे से उसका कमीना मौसा मेरी चूत चोदे जा रहा था. मैं थरथराने लगी, और अपने होंठ दबा दिए और जोर जोर से मेरी चूत से पानी बहने लगा.

बड़ी मुश्किल से मैंने अपनी आहे - आवाज दबाई.. धर्मेश अंकल बहुत खुश हुए..उनके लण्ड पर मेरी पानी की चिकनाहट से अब उनको और आसानी हो गयी. वह अब मुझे धीरे से लम्बे स्ट्रोक से चोद रहे थे..पूरा लण्ड मेरी चूत से बाहर निकाल कर फिर से अंदर डाल देते. इसके कारन मेरे चूत का दाना और होंठ दोनों रगड़ जाते .. आज मेरी खैर नहीं थी..मैं बड़ी लाचार थी. पर बहुत मजा और आनद भी आ रहा था. इतना रोमांचित सेक्स पहले कभी अनुभव नहीं किया था. बहुत देर तक धर्मेश अंकल मुझे चोदते रहे..इस दौरान मैं और २ बार झड़ गयी.

तभी धर्मेश अंकल ने मेरा ऊपर वाला पैर थोड़ा आगे खिंच कर ..परे पति के कमर पर रख दिया. इससे मेरी चूत मेरे दोनों जांघों में दब गयी, और धर्मेश अंकल के लण्ड को दबाने लगी. धर्मेश अंकल फिर से मुझे धीरे धीरे चोदने लगे. बड़ा अजीब नजारा था. उनके लण्ड और कमर के धक्के से मेरी बॉडी भी अनीश से चिपक जाती, मेरा ऊपर वाला पैर अनीश के कमर पर रगड़कर फिसल जाता, और मेरे बूब्स अनीश के मुँह पर रगड़ जाते. अब मैं फिर से अपने होश खो रही थी.. मैंने अपने ऊपर वाले हाथों से अनीश का सर प्यार से मेरे बूब्स पर दबा दिया .. और थरथरा कर फिर से धर्मेश अंकल के लण्ड पर तीसरी बार झड़ने लगी. मैं बहुत देर तक झड़ रही थी और फिर शांत होने लगी.

तभी धर्मेश अंकल ने मेरी चूत से अपना लण्ड बाहर निकाला, उसने मेरा चेहरा पलट लिया, और ऊपर से अपने लण्ड को मेरे मुँह में डाल कर पिचकारी छोड़ने लगा. मेरे पति का चेहरा मेरे सीने से दबा था और धर्मेश अंकल मेरे मुँह में उनकी पिचकारी उड़ा रहे थे. उनका लण्ड अनीश के चेहरे के बिलकुल ऊपर और करीब था सारा गाढ़ा रसीला वीर्य मेरे मुँह मैं डाल कर वो चुपके से कमरे से बाहर चला गया. मैं कही देर तक धर्मेश अंकल का वीर्य मुँह मैं रखकर उसका स्वादपान करती रही, उसकी खुशबू सूंघती रही और फिर संतुष्टि से सो गयी.

सुबह जब आँख खुली तो देखा अनीश मेरे ओंठों को अपने जीभ से चाट रहा था. वह मेरे दोनों ओंठों को चूस चूसकर चूमने लगा. अनीश ने कहा - गुड मॉर्निंग रानी.. कैसी हो.. लगता है तुमने फिर से रात को दही-क्रीम खा लिया.. तुम्हारा किस बहुत मस्त लग रहा.

अनीश फिर से अपनी जीभ मेरे मुँह मैं डाल कर चाटने लगा.. जितना भी धर्मेश अंकल का वीर्य मेरे मुँह मैं होंगे वह सब उसने चाट चाट कर गटक लिया. वो बहुत खुश था. अनीश बोला - संध्या तुम रोज ये दही खाया करो. इसके स्वाद से मुझे तुम्हारा चुम्बन बहुत अच्छा लगता.

मैं हैरान थी. चुप बैठी. नहाने चली गयी

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सुबह मैं छत पर टहलने गयी..! इसी बहाने मेरा व्यायाम हो जाता.. मैं छत के चारो कोनो पर टहलने लगी. तभी मैं सर्वेंट रूम के सामने गयी.. तो देखा दरवाजा पूरा खुला था. एक चटाई पर यासीन सिर्फ एक छोटी सी अंडरवियर मैं सोया था. अंडरवियर मैं उसके लण्ड का उभार साफ़ दिख रहा था. लम्बा साढ़े छे फुट का हत्ता कट्टा आदमी था यासीन. एकदम गोरा और बदन पर काले बाल .. बहुत सुन्दर लग रहा था..उसकी मोटी मोटी जांघें ,, उसके ताकत का साबुत दे रही थी... गर्मी के दिन थे..इसलिए खुले में सोया था..

मैंने छत के कई राउंड लगायें और उसको देखते रही .. तभी मेरा पैर थोड़ा लचक गया और मैं दर्द से कराह उठी . आह.. ूई माँ.. गर्भा अवस्था मैं ऐसे पैर लचकना सेहत के लिए बहुत खतरनाक होता है. मुझे बहुत दर्द हो रहा था.. आह...मर गयी मेरी माँ..ोूफ...मेरी आवाज सुन कर यासीन की नींद टूट गयी. वो वैसे ही भागकर मेरे पास आया..

यासीन - क्या हुआ मेमसब..आप ठीक है..वह मेरे पैर को देखने लगा..जिसको पकड़ कर मैं सहला रही थी..

मैं - मेरा पैर फिसल गया...पैर की नस लचक गयी..बहुत दर्द हो रहा है..

यासीन मेरे सामने अपने दोनों पैरों पर बैठ गया. और मेरा पैर देखने लगा. ऐसे हगने वाली पोजीशन मैं बैठने से उसके लण्ड का उभर बिलकुल मेरे आँखों के सामने था. उसकी बड़ी बड़ी जांघों..और उनकी नसे.. कसीस बॉडीबिल्डर की तरह लग रही थी.. कश्मीरी लिबास में..ढीले कुर्ते और पाजामा में.. उसका कसा हुआ बदन छुप गया था..जो आज निखर के मेरे सामने आया था..उसकी नीली गहरी आंखें..उफ़... कितना सुन्दर मर्द है..कश्मीरी मर्द बहुत सुन्दर होते है.. वह मेरे पैर को मालिश करके सहलाने लगा. पर मेरा दर्द कम नहीं हो रहा था. मैंने कहा - यासीन मुझे निचे लेकर चलो जल्दी..

मेरे से चला नहीं जा रहा था. यासीन ने मुझे वैसे ही अपनी गोदी मैं उठाया और निचे सीढ़ियों से लेकर जाने लगा. मैंने उसके गले में अपने दोनों साथ डाल कर कस के पकड लिया. ऐसे करने से मेरा चेहरा उसकी बालों वाली छाती से चिपक गया. आह क्या खुशबू थी उसके जिस्म की..मर्दानी महक,,मेरे होंठ उसके छाती पर घिसने लगे. मेरे होंठ अब उसके छातीके निप्पल्स से रगड़ रहे थे...पर मुझे दर्द भी हो रहा था. दर्द कम करने को मैं अपने दांत दबा देती..इससे यासीन के निप्पल मेरे दातों के बीच में २-३ बार आ गए और वहा काटने के निशान भी आये. यासीन ने ..हर बार दर्द से आह किया पर कोई शिकायत नहीं की. जैसे यासीन ने मुझे सोफे पर लिटाया...मेरा एक साथ उसके निकर के ऊपर से रगड़कर निचे आया.

.मेरे शरीर मैं जैसे करंट लग गया..यासीन को भी सनसनी हुई और वह कुछ सेकंड के लिए कांप गया.. मैंने देखा उसका लण्ड पूरा कड़क हो गया और निकर छोटी होने से उसमे से इलास्टिक से बाहर आ रहा था.. उसने मेरे तरफ देखा. उसकी झील सी नीली आँखों में मैं खो गयी.. तभी मैंने मेरा साथ उसके लण्ड के ऊपर से निकाल डाला..मेरे हैट पर उसके लण्ड का सख्त और मोटापा महसूस हुआ.. जवान लण्ड था.. अपने खूबी पर था.. मैंने शर्मा कर कहा...जाओ पहले कपडे पहन लो..मैंने जल्दी पम्मी मौसी और अनीश को आवाज दी..वो भाग कर आये..

अनीश ने जल्दी से फॅमिली डॉक्टर को बुलाया.डॉक्टर खन्ना एक ७० साल के वयस्क डॉक्टर है. वो आर्मी में डॉक्टर थे. इसलिए एकदम फिट और हट्टे कटे लम्बे..और अपनी उम्र से काफी जवान दिखते है. वो जल्दी आ गये और मेरा चेक उप करने लगे. अब तक यासीन भी कपडे पहन कर निचे आ गया था. डॉक्टर खन्ना ने कहा - संध्या को उसकी बैडरूम में लेकर चलो ..

मुझे चेक उप करना पड़ेगा." जैसे मैं सोफे से उठने लगी .. यासीन ने कहा रुको मैडम.. उसने मुझे मेरे पति अनीश और धर्मेश चाचा के सामने अपने गोदी मैं उठा लिया और मेरी बैडरूम में लेकर जाने लगा. मैं उसकी इस ढिटाई से हक्का बक्का होकर उसको देखने लगी. धर्मेश चाचा मुस्करा रहे थे..और अनीश की आँखों मैं अजीब चमक थी. मुझे यासीन के बदन की खुशबू अच्छी लग रही थी..

डॉक्टर खन्ना ने सिर्फ अनीश को अंदर आने की परमिशन दी..

डॉ. खन्ना.. संध्या .. गाउन ऊपर कर दो.. और घुटने भी ऊपर कर लो..

मैंने गाउन ऊपर कर दिया..मैं अंदर पूरी नंगी थी..पैंटी नहीं पहनी थी.. घुटने मोड़ने से अब मेरी चूत डॉ. खन्ना को साफ़ दिख रही थी.

डॉ. खन्ना.. संध्या रिलैक्स रहो. तुम्हे पता हैं अंदर कैसे चेक उप करते है.. घर से आते वक्त जल्दी में मैं ग्लोव्स लाना भूल गया..पर यह इमरजेंसी है..तुम शांत रहो..ठीक है..?

मैंने कहा.. ठीक है डॉक्टर सब , पर दर्द के कारण मैं घुटने मोड़ नहीं पा रही..

डॉ. खन्ना.. अनीश आप संध्या के घुटने पकड़ कर सहारा दो..

अनीश ने मेरे घुटने पकड़ कर ऊपर उठाये और दोनों हाथों से पकड़ के रखे..अपनी बीवी की चूत खुलकर डॉक्टर के सामने पेश कर दी. उसकी आँखों मैं अजीब चमक थी. वह बार बार अपनी जीभ अपने ओंठों पर फेर रहा था. उसकी पैंट में उसका लण्ड तम्बू बना रहा था.

डॉ.खन्ना .. ने पहले..मेरी चूत को पास से देखा..सहलाया और एक ऊँगली अंदर डाली..

वैसे मैंने..आह डॉक्टर... दर्द हो रहा..

डॉ.खन्ना..कोई बात नहीं संध्या..मुझे ठीक से देखने दो..बहुत जरुरी हैं

डॉ.खन्ना का साथ का पंजा बहुत बड़ा था और उनकी उँगलियाँ भी बड़ी बड़ी और मोटी थी. जैसे हर ऊँगली कोई बड़ा लण्ड. डॉ. खन्ना की एक ऊँगली मेरे चूत मैं आगे पीछे होकर टटोल रही थी.. और अब मुझे अच्छा लग रहा था..मेरी चूत में सनसनी हो रही थी..

मैंने..आह...उह..किया

डॉ. खन्ना.. क्या हुआ संध्या इधर दर्द हो रहा क्या ? उन्होंने मेरे चूत के अंदर उनकी ऊँगली दबायी..वैसे मैंने..आह ! डॉक्टर !

मैंने कहा.. नहीं दर्द नहीं हो रहा..

डॉ. खन्ना - फिर चिल्लाई क्यों?

मै शर्मा गयी.. वह गुदगुदी हुई इसलिए .और आपकी ऊँगली बहुत बड़ी है.. डॉ. खन्ना मुस्करा दिए और खुश हो गये .. मैंने देखा अनीश की आँखों मैं अजीब ख़ुशी थी..उसकी पैंट के अंदर उसका लण्ड फनफना रहा था. अपने बीवी को ऐसे नंगा कर के और डॉक्टर की हरकतों से उसको मजा आ रहा था. डॉ. खन्ना ने पुरानी स्टाइल की लूस ढीली पैंट पहनी थी.. पर उसके कारण उनकी पैंट में ज्यादा बड़ा तम्बू हो गया था..

अनीश ने कहा.. हाँ डॉक्टर सांब..सच में आपकी उँगलियाँ बहुत मोटी और बड़ी हैं..मेरे से डबल साइज लग रहा है..

मैंने सोचा..डॉ. खन्ना का तम्बू भी डबल साइज है..

तभी डॉ. खन्ना ने उनकी ऊँगली निकाली और कहा अनीश ऐसी ही पकडे रहो ..देखो सब ठीक है..अच्छी बात है की ब्लीडिंग नहीं हो रहा है.. मुझे एकबार फिर से ठीक से देखकर कन्फर्म करना पड़ेगा ..वह अनीश को समजा रहे थे.

अनीश.. है डॉक्टर ..मैं कोई रिस्क नहीं लेना चाहता ..आप ठीक से चेक करके कन्फर्म करे

डॉ. खन्ना ने फिर से धीरे से .. लिक्विड लुब्रीकेंट लगा कर उनकी बड़ी ऊँगली मेरी चूत मैं डाल दी..और आगे पीछे करने लगे.. फिर उन्होंने दूसरी ऊँगली भी डाल दी..मेरी चूत में अब आग लग गयी.. वह गीली होने लगी.. शर्म के मारे में आहे भी नहीं भर पा रही थी. डॉक्टर की दोनों उंगलिया कोई बड़े १० इंच लण्ड जैसे मोटी लग रही थी..मुझे पता था इस चेक उप की कोई जरुरत नहीं थी. पर डॉक्टर भी अपनी तमन्ना और हवस पूरी कर रहा था..चेक उप के बहाने..वह भी बिना ग्लोव्स के.डॉक्टर उसकी दोनों उँगलियाँ..मेरी चूत में अंदर तक डाल रहा था..और उंगलिया गोल गोल घुमाकर मेरी चूत की हर दिवार को रगड़ रहा था. मेरी चूत के पानी से उसकी उंगलिया गीली हो गयी..और अब उसको और भी आसानी हो गयी.
 
मेरे से अभी कण्ट्रोल नहीं हो रहा था.. मेरा बांध फूटने में था.. वहा डॉक्टर की उँगलियाँ मेरी चूत मैं जादू कर रही थी.. और मेरी चूत से लगातार पानी बह रहा था..तभी डॉक्टर की उँगलियों ने मेरी चूत के दाने को जोर से रगड़ डाला.. उनकी एक उंगली मेरे दाणे को पकड़ कर गोल गोल रगड़ने लगी. तभी उन्होंने अपने दोनों ऊँगली में मेरे दाणे को पकड़ कर चिमटी ले ली..जिस के कारन मैं सकपका गयी .. और तड़प रही थी..मेरा साथ अपने आप..डॉक्टर के पैंट के पास गया और उनका लण्ड मेरी मुट्ठी मैं जोर से पकड़ लिया. और .उह.. आह..करके बेशरम होकर झड़ने लगी. डॉक्टर ने आराम से दोनों उँगलियाँ निकाल ली..वह भी हड़बड़ा गये थे.. मेरे मुट्ठी मैं उनका लण्ड फनफना रहा था..वह आसानी से धर्मेश अंकल जितना मोटा और १० इंच लम्बा लण्ड होगा.. मुझे जब थोड़ा होश आया..मैं शर्मा गयी और अपना साथ वापस पीछे ले लिए.. डॉक्टर खन्ना भी जल्दी संभल गये और बोले - अनीश ..सब ठीक है..मैं कुछ गोलिया लिख कर देता हूँ..तुम बाहर आ जाओ .. और वह जल्दी से बाहर चला गया.

मैं आह..आह..कर के झड़ रही थी.. अब मेरे साथ सिर्फ अनीश था.. मेरे कमीने पति को भी रहा नहीं गया..वह निचे झुक कर मेरे चूत पर अपने होंठ रखकर मेरा पानी पीने लगा.. चाट चाट कर उसने मेरी चूत का सारा पानी पी लिया..वह चाट रहा था और मैं लगातार उसके मुँह में पानी छोड़ रही थी. मेरी चूत पूरी चाट चाट कर साफ़ करके कुछ देर मैं अनीश बाहर डॉक्टर से मिलने चला गया.

डॉक्टर ने कुछ दवाई दी और कहा.. संध्या के पैर की मालिश करनी होगी दिन में तीन बार. तभी धर्मेश अंकल ने कहा..कोई दिक्कत नहीं..यासीन बहुत अच्छी मालिश करता है..डॉक्टर को घर के बाहर छोड़ कर अनीश भागा हुआ हमारे बेडरूम में आया..मैं बिस्तर पर लेटी थी..वो अपने कपडे निकाल कर पूरा नंगा हो गया..उसका लण्ड अभी भी फड़फड़ा रहा था.. उसने आते ही उसका लण्ड सीधे मेरे मुँह में डाल दिया..आह ! संध्या रानी.. चूस ले मेरा लण्ड..

मैं भी प्यार से मेरे पति का लण्ड चूसने लगी. तभी मेरी नजर दरवाजे पर गयी.. दरवाजा आधा खुला था..वहा से धर्मेश अंकल खड़े होकर सब देख रहे थे..उनकी पाजामे में भी तम्बू बन गया था..वो अपने दोनों हाथों से अपने लण्ड को सहला रहे थे. मुझे देखकर मुस्कुरा रहे थे..और उनकी आँखों से मुझे चोद रहे थे. अनीश की पीठ दरवाजे की तरफ थी .. इसलिए उसे दिख नहीं रहा था.

अनीश - आह रानी...क्या मस्त लण्ड चूसती है तू.. डॉ. खन्ना ने क्या मस्त उनकी उँगलियों से तेरी चूत की चुदाई की..बहुत मजा आ रहा था देखने में..

मैं कुछ बोल नहीं सकती थी.. अनीश का लण्ड मेरे मुँह में था. धर्मेश अंकल सब सुन रहे थे..और कमीनी नजरों से मुझे देखकर मुस्करा रहे थे.

अनीश - वाह रानी आज मजा आ गया.. मन कर रहा था की आज डॉक्टर से भी तुझे चुदवा लू.. आह....उफ़...बताओ डॉक्टर का लण्ड पकड़ कर मजा आया ?

मैं: उम्..हां,,, अनीश का लण्ड अभी भी मेरे मुँह मैं था..

अनीश: बोलो कैसे था डॉ. का लंड..मेरे से बड़ा था..

अनीश ने मुझे जवाब देने के लिए..अपना लण्ड मेरे मुँह से बाहर निकाल दिया..बोलो रानी बता..कैसे था डॉ. का लण्ड..

मै: बहुत मोटा और बड़ा था..तुमसे डबल साइज..था..

अनीश.. आह रानी..बोलो क्या मेरे सामने डॉ. के मोटे लंड से चुदवायेगी ?

मै - हम्म हाँ..

मेरी ऑंखें धर्मेश अंकल को देख रही थी..वह भी बड़े मस्ती मैं थे...और अपना लण्ड सहला रहे थे..और कमीनी स्माइल दे रहे थे..

अनीश जल्दी ही मेरे मुँह में उसके लैंडसे वीर्य की पिचकारी उड़ाने लगा. मैंने भी प्यार से सब निगल लिया.. अनीश ने मुझे किस किया - ी लव यू संध्या डार्लिंग.. और कपडे पेहेन कर ऑफिस जाने की तैयारी करने लगा. धर्मेश अंकल तब तक चले गये थे.

मुझे अभी भी चलने में दर्द हो रहा था. अनीश ने यासीन को बुलाया और कहा .. देखो यासीन में ऑफिस जा रहा हूँ.. तुम पहले संध्या की मालिश कर देना.. फिर इसको बाथरूम ले जाना..नहाने को.. मैडम को कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए..समझे?

यासीन - हाँ सब समझ गया..आप चिंता मत करो..मैडम को कोई तकलीफ नहीं होगी.

कुछ देर बाद यासीन..एक कटोरे में गरम तेल लेकर आया...मैडम आप सोये रहिये.. मैं यहाँ बिस्तर पर ही आपकी मालिश कर दूंगा ..

में फिर भी उठ गयी..और बिस्तर एक एक साइड पर पैर निचे जमीं पर रख कर बैठ गयी. वैसे यासीन मेरे पैरों के पास निचे जमीं पर बैठ गया.उसने मेरा लचका हुआ दाया पैर अपनी गोदी में ले लिया..और धीरे धीरे तेल लगाने लगा.. उसके साथ बहुत मुलायम पर सख्त मर्दाने थे . उसने मेरी नस पकड़ ली..और मैं आह..करके दर्द से कराह उठी. यासीन - मैडम मैंने नस पकड़ ली..अब आप चिंता मत करो में..इसको ठीक से मालिश करूँगा..

फिर वो उस नस को पाँव से लेकर घुटने टाक मालिश करने लगा.. मुझे अच्छा लगने लगा.. मेरा गाउन बीच मैं आता..वो उसको ऊपर घुटने पर रख देता ..

यासीन - मैडम यह नस ऊपर कमर तक जाती है..इसको ऊपर कमर तक मालिश करनी पड़ेगी...आप गाउन थोड़ा ऊपर उठा लो.

मैंने गाउन थोड़ा ऊपर जांघों तक ले लिया... वैसे यासीन ने फिर से पाँव से लेकर..जांघों तक उस नस को पकड़ कर सहलाने लगा.. मुझे अच्छा लग रहा था. पर दूसरा पैर लटका रहने के कारण थोड़ी परेशानी हो रही थी.. यासीन मेरी परेशानी भांप गया.. उसने मेरा बाया पैर हलके से उठाया और उसके कंधे पर दाये बाजु रख दिया. और मेरे दाये पैर को पकड़ कर वह पाँव से लेकर कमर तक मालिश करने लगा.. इसके कारण मेरा गाउन पूरा कमर तक चला गया..पर मुझे अच्छा लग रहा था...मैंने ऑंखें बंद कर ली...

यासीन..के होंठो में जादू था...वह पूरा एक ही बार में पाँव से लेकर कमर तक मेरे पैर की नस की गरम तेल से मालिश कर रहा था. मैंने ऑंखें खोली...देखा यासीन लगातार मेरे पैरों के बीच घूर रहा था..उसके आँखों मैं चमक थी.. तभी मेरे को अहसास हुआ के मेरे दोनों पैरों के बीच उसका चेहरा है..और मेरा गाउन कमर के ऊपर चला गया है..जिसके कारण यासीन को मेरी नंगी जाँघे और गुलाबी चूत साफ़ दिखाई दे रही है.. उसका चेहरा मेरे चूत से सिर्फ २ फ़ीट के फासले पर था. चूँकि मेरा एक पैर उसके साथ में ऊपर की तरफ था..और दूसरा उसके कंधो पर, मेरी चूत के होंठ भी खुल गये थे..और उसको चूत की दरार साफ़ दिखाई दे रही थी.. यह देखकर मेरी चूत के होंठ फड़फड़ाने लगे..

वो..यासीन के ओंठों से मिलने को तड़पने लगे.. यासीन एक साथ से मेरी नस की मालिश कर रहा था..और उसका दूसरा साथ मेरे जांघ पर था.. मेरी चूत के बिलकुल करीब..तभी यासीन ने ऊपर देखा..मेरी ऑंखें उसकी नीली आँखों मैं डूबने लगी.. मैं कुछ नहीं कर पा रही थी.. कैसे सम्मोहन था.. तभी मुझे यासीन का साथ मेरी चूत पर महसुस हुआ और मेरे शरीर मैं कम्पन होने लगी.. मेरा सम्मोहन टुटा और मैंने जल्दी से गाउन निचे कर दिया और कहा - बस यासीन..आज के लिए इतना काफी है..मुझे अब बाथरूम जाना है..

यासीन एकदम भांप गया जैसे कोई मीठा सपना टूट गया .. उसका मुँह उदास हो गया ..उसने बड़े कष्ट से उसका साथ मेरी चूत के ऊपर से उठाया.. जब वो मेरे पैरों से उठा तब मैंने देखा की उसके पाजामे तम्बू बन गया था..और प्रिकम के कारण गिला निशान भी था. उसने मुझे उठाकर शावर के निचे खड़ा कर दिया. कुछ कपडे और टॉवल लेकर दिए. मैंने खड़े खड़े ही शावर के निचे नाहा लिया. फिर टॉवल से अपना बदन पोंछ लिया .. पर बाथरूम मैं निचे पानी था..इसलिए मैं अपने कपडे वहां नहीं पेहेन सकती थी. मैंने मेरा टॉवल..मेरे छाती से बांध लिया ..मेरे मम्मे ढक गये..और बड़ा टॉवल था..इसलिए जांघों तक मेरा बदन ढक गया .. मैंने फिर से यासीन को आवाज दी..

वो बाथरूम मैं आया..मुझे देखता रहा..मेरे गीले बदन पर पानी की बुँदे..मै बहुत सुन्दर लग रही थी..उसने मुझे फिर से गोदी में उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया . ऐसे करते वक्त मेरे पैर फ़ैल गये .और उसको मेरी चूत के बार बार दर्शन होते रहे.. . उसके जाने के बाद मैंने अपने कपडे बिस्तर पर पहन लिए... नीले रंग का गाउन था...मुझ पर बहुत जचता था .. पैंटी और ब्रा नहीं पहना ..
 
ब्रेकफास्ट और दोपहर का कहना खाने के बाद..धर्मेश अंकल मेरे बैडरूम में आ गये..उनके साथ मैं गरम तेल का कटोरा था.

मैं: अरे धर्मेश अंकल आप..पम्मी आंटी सो गयी क्या ?

धर्मेश अंकल: हाँ मेरी जान वो सो गयी...दोपहर की मालिश मैं करूँगा...और तुझे अपनी मलाई भी खिलाऊंगा..और हंसने लगे

मै : अंकल पहले दरवाजा बंद कर लो

धर्मेश अंकल: हाँ नहीं तो सुबह जैसे दुर्घटना हो जाएगी ..और हम दोनों हसने लगे..

मैंने कहा - अच्छी बात नहीं है अंकल ऐसे मिया - बीवी को छुपकर देखना

धर्मेश अंकल - अच्छा हुआ सपना जान..आज मैंने देख और सुन लिया..अब आगे..हम दोनों को छुपकर कुछ नहीं करना पड़ेगा ..

मैं: क्या मतलब अंकल ? कैसे अंकल ?

धर्मेश अंकल - बताता हूँ..पहले मालिश करने दो..मैं तो तुम्हे पूरा नंगा करके मालिश दूंगा..

धर्मेश अंकल के आँखों मैं वासना भरी चमक थी..कोई भी औरत उनकी आँखों मैं खो जाती..

उन्होंने मेरा गाउन निकाल कर मुझे पूरा नंगा कर दिया...और वह खुद भी पूरा नंगे हो गये..उनका १० इंच का गोरा मोटा लण्ड..फड़फड़ा रहा था..उसके टोपे से प्रिकम की चिपचिपी बून्द बाहर निकल रही थी.

उन्होंने मुझे उठा कर अपनी गोदी मैं बिठा लिया और प्यार से मेरे ओंठों पर अपने होंठ रख दिए और किस करने लगे. उनका दूसरा साथ मेरे चूत को सहला रहा था धर्मेश अंकल: संध्या रानी तुम बहुत सुन्दर हो..इसलिए अनीश तुमसे इतना प्यार करता है..और डॉक्टर भी फिसल जाता है...

मैं हॅसने लगी..क्या अंकल आप भी..

अब धर्मेश अंकल एक साथ से मेरे गोल आम दबा रहे थे और दूसरे साथ से मेरी चूत के अंदर ऊँगली डाल कर आगे पीछे कर रहे थे.उनके होंठ अब मेरे गुलाबी निप्पल्स का रसपान कर रहे थे. मैंने भी प्यार से उनका मोटा कड़क लण्ड पकड़ लिया. धर्मेश अंकल का लण्ड बहुत सुन्दर था..इतना सुन्दर लण्ड मैंने पहले कभी नहीं देखा था..१० इन्चा का मोटा, गोरा.. लाल लाल सूपड़ा , मस्त केले के आकार जैसे टेढ़ा घुमा हुआ ..एकदम मरदाना लण्ड था..जब भी चोदते हर औरत को खुश कर देते ..मैं भी मस्ती मैं आ गयी.. उनके रंग में बेशरम होकर रंगने लगी. रिश्ते में वह मेरे मौसेरे ससुर थे.. पर मुझे उनकी रंडी बना दिए थे.

वह अब अपनी उँगलियों से मेरे चूत के दाणे को प्यार से सहलाने लगे..और बोले

धर्मेश अंकल - : संध्या लगता हैं सुबह डॉक्टर ने बहुत मजे लिए तेरे से ..और अनीश को भी पसंद आया..

मैं सिसक रही थी..मेरे चूत का दाणा फटने वाला था.मैंने ..उम् .. आह सिसक कर कहा.. कुछ नहीं बोल पा रही थी.

धर्मेश अंकल ने अब मुझे हल्का सा उठाया और अपने लण्ड पर धीरे से पर बिठा दिया...उनका मोटा १० इंच का लण्ड धीरे से मेरी गीली चूत को चीरता अंदर तक चला गया..

आह ! धर्मेश अंकल...और मैं पागलो की तरह उनको किस करने लगी..उनके होंठ चूमने लगी..और मेरी जीभ उनके मुँह के अंदर डाल दी

धर्मेश अंकल ने अपने दोनों हाथों से मेरी गांड दोनों बाजु से पकड़ी थी ..और मुझे ऊपर निचे उछाल कर अपने लण्ड की सवारी करा रहे थे... वह मेरी आँखों में देख रहे थे..

धर्मेश अंकल; अनीश को तुम्हे दूसरों से चुदवाना अच्छा लगता है न..कितने लोगों से चुदवाया उसने तुम्हे..

अब यह बात मेरे और मेरे पति के बीच की थी..मैं बता नहीं सकती थी...वैसे उन्होंने मुझे उठाया जोर जोर से अपने लण्ड को आगे पीछे कर के मेरी चूत चोदने लगे. मैं उनकी गहरी आँखों में खो रही थी..

मैं..आहा..धर्मेश अंकल..हां...! अनीश को पसंद है..

धर्मेश अंकल - यह तो अच्छी बात है..अनीश ककोल्ड निकला .. अब देखो मैं कैसे उसको दबाकर उसके सामने तुझे चोदता हूँ...वह खुद मेरे पास आकर तुम्हे चोदने के लिए भिक मांगेगा ..मैंने ऐसे कही ककोल्ड पतियों के सामने उनकी बीवियों की चुदाई की हैं. ..अनीश तो बच्चा है..

आह धर्मेश अंकल....मैं...सकपका गयी..और उनके लण्ड पर झड़ने लगी...

मेरे चूत के पानी से उनका लण्ड पूरा गिला हो गया..और उनकी गोटिया भी भीग गयी...उन्होंने मुझे बिस्तर पर लिटाया...और उनका लण्ड और गोटिया मेरे चहरे के पास लेकर आये...संध्या मेरा लंड चाट कर साफ़ कर दो..और गोटिया भी.. मैं भी प्यार से उनका लंड चाट चाट कर साफ़ करने लगी..और उनके टट्टे भी..क्या खुशबू है..क्या गजब का स्वाद है..

उन्होंने मुझे फिर से किस किया और बोले..मेरी प्यारी संध्या ..तुम तो मेरी सब से प्यारी रंडी हो.. हो ना..बालो ?

मैं: हाँ धर्मेश अंकल मैं सिर्फ आपकी रंडी हूँ.. वह वही मेरे बाजू में लेट गये..और मुझे अपनी बाँहों मैं जकड लिया

मैं भी वैसे नंगी उनकी बाँहों मैं सो गयी..हम दोनों एक दूसरे के बाँहों मैं नंगे सो कर खुश थे.
 
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