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Guest
गिरधारी - बॉस ये चीटिंग है |
जितेश - जो तू कर रहा था वो चीटिंग है | साले दम है तो असली जिस्म के ताकत से चोदकर दिखा | ये नशा क्यों करता है |
जितेश ने पहली बार कोकीन सूंघी थी | हालाकि उसकी दीदी की छुटकी ने उसे टॉफी के साथ खूब अफीम चटाई थी, लेकिन वो बहुत पुराणी बात थी | उसके थके जिस्म में जान आने लगी |
जितेश के झिझोड़ने के बाद रीमा अपने वजूद में लौटी लेकिन तब तक देर हो चुकी थी | रीमा को उन दोनों के बीच चल रही नुरा कुश्ती से कोई मतलब नहीं था | वो अपने ही कहे गए शब्दों के सदमे में थी | आखिर उसने क्या कह दिया | वासना के गहरे सागर में गोते लागते हुए भी उसके कान सुन्न हो गए, क्या सच में उसने ही ये कहा है | अपने ही शब्दों को सोचकर वो जड़ सी हो गयी | वो खुद को कोरी गांड मराने के लिए किसी अनजान को बुला रही है | वो उसकी कोरी करारी गांड और जिस्म दोनों की दुर्दशा करेगा | एक बार उसका लंड घुसा नहीं की फिर वो उस आदमी के हाथ की लौड़ी बन जाएगी |
बिलकुल सड़क छाप रंडी बनाकर उसकी गाड़ बजाएगा वो | हाय क्यों मै अपने ही जिस्खिम की दुर्रदशा करने पर उतारू हूँ | कोई खुद का सम्मान है यां नहीं उसकी वासना इतनी गहरी है, क्या उसे इस कदर जलील करेगी | उसके खूबसूरत जिस्म की ऐसी की तैसी करवाएगी | उसकी वासना की भूख को वो बस दुसरे के हाथो का खिलौना बनकर रह जाएगी | क्या फर्क पड़ता है रीमा, ये तड़प हमेशा के लिए बुझ जाएगी | अभी कौन तेरी आरती उतार रहा है | अभी भी की हाथ की लौड़ी बनी उसकी बाहों में ही झूल झूल कर चुद रही है | फिर क्या फर्क पड़ता है दो बांहों की जगह चार हो जाएगी, एक लंड की जगह दो हो जायेंगे | एक भले दो, जल्दी से ये तड़प ख़त्म होगी | इस प्यास के लिए किस हद तक जावोगी रीमा, इस वासना को मिटाते मिटाते तुमारा खुद का वजूद ख़त्म हो जायेगा | ये वासना नहीं थी ये पाशविक वासना थी | रीमा की अंतर्मन का वो पहलू जो शायद उससे भी अनछुआ था | ये पाशविकता नहीं तो और क्या थी, एक लंड एक चूत में एक गांड में एक साथ | ये कामुकता का वहशीपन था | क्या करू इसी आग में जलती रहू, लेकिन ऐसे सड़क चलते किसी को अपने जिस्म की गहरइयो में उतार लेना कहाँ तक सही है | रीमा को अपने शब्दों पर पछतावा होने लगा लेकिन तीर तो कमान से निकल चूका था | पता नहीं कौन सी जिद थी, नहीं अब पीछे नहीं हटूंगी | जो भी होगा देखा जायेगा |
जितेश रीमा के फैसले से सन्न रह गया | उधर गिरधारी की तो जैसे लाटरी खुल गयी हो |
जितेश कोकीन चाट कर तरोताजा हो गया था, फिर भी जितेश रीमा को रोकना चाहता था - रीमा एक बार फिर सोच लो .......|
रीमा उसकी बात काटती हुई - बस जितेश मै अब और कुछ नहीं सुनना चाहती हूँ, तुम ठीक से मेरी चूत को चोदो इतनी देर से चोद रहे हो और मेरी चूत की प्यास तो मिटा नहीं पाए | मेरे पुरे जिस्म का ठेका लेने चले हो |
रीमा ने जितेश को ललकार दिया था | जितेश को भी रीमा पर गुस्सा आ गया |
गिरधारी तो जैसे को जैसे इसी पल का इंतजार था उसने बिजली की तेजी से अपने लंड को मसलते हुए बेड पर पहुँच गया |
रीमा वैसे भी दाहिने करवट लेटी जितेश की बांहों में थी | गिरधारी रीमा के पीछे जाकर लेट बैठ गया |
रीमा बोली - मेरे पीछे आ जाओ |
उसके बाद रीमा एक हाथ से पीछे करके उसके लंड को लार से भिगोकर सानने लगी | गिरधारी को तो जैसे जन्नत मिल गई हो तो सपने में भी नहीं सोचा था कोई इस तरह से इतनी खूबसूरत औरत का पिछवाडा बजाने का सौभाग्य उसे मिलेगा | जितेश रीमा से वैसे भी गुस्सा था ऊपर से गिरधारी से थोड़ी सी जलन होने लगी थी हालांकि वह रीमा के कहे अनुसार उसकी चूत में फिर से लंड पेलने लगा लेकिन वह गिरधारी को लेकर थोड़ा सा असुरक्षा महसूस कर रहा था | क्योंकि गिरधारी एक तो उसका नौकर जैसा था दूसरे रीमा उसके सपनों की मलिका थी और उसे अपनी खुली आँखों के सामने सपनों की मल्लिका को अपने नौकर के साथ शेयर करना पड़ रहा था | उसे लगता का रीमा अब सिर्फ उसकी है, रीमा के जिस्म पर सिर्फ उसका हक़ है | रीमा की जवान और हुस्न लुटने का अधिकार सिर्फ उसका है |
रीमा के जिस्म से जिस तरह से वह भोग रहा था यह चीज उसे अखर रही थी | अपने ख्वाबो की मल्लिका को कोई हाथ नहीं लगाने देता यहाँ तो उसी का नौकर उसकी के साथ उसके सपनो की रानी के जिस्म की सबसे नाजुक और कसी कोरी गुलाबी सुरंग का सफ़र तय करने जा रहा था | गिरधारी रीमा की गांड मारने जा रहा था यही सोचकर उसकी छाती पर सांप लोट रहे थे | इसे रात में ही क्यों न भाग दिया कम से कम ये सब तो नहीं देखना पड़ता | साला मेरी बराबरी करेगा इस मादरजात की इतनी औकात हो गयी | पता नहीं रीमा को कौन सा नशा हो गया है अपनी दुर्गति करवाने पर तुली है, आखिर कर भी क्या सकता हूँ जब कुछ सुनने को राजी ही नहीं है | बेटा जितेश अपनी चूत पर फोकस करो बाकि रीमा का जिस्म है वो जाने |
जितेश - जो तू कर रहा था वो चीटिंग है | साले दम है तो असली जिस्म के ताकत से चोदकर दिखा | ये नशा क्यों करता है |
जितेश ने पहली बार कोकीन सूंघी थी | हालाकि उसकी दीदी की छुटकी ने उसे टॉफी के साथ खूब अफीम चटाई थी, लेकिन वो बहुत पुराणी बात थी | उसके थके जिस्म में जान आने लगी |
जितेश के झिझोड़ने के बाद रीमा अपने वजूद में लौटी लेकिन तब तक देर हो चुकी थी | रीमा को उन दोनों के बीच चल रही नुरा कुश्ती से कोई मतलब नहीं था | वो अपने ही कहे गए शब्दों के सदमे में थी | आखिर उसने क्या कह दिया | वासना के गहरे सागर में गोते लागते हुए भी उसके कान सुन्न हो गए, क्या सच में उसने ही ये कहा है | अपने ही शब्दों को सोचकर वो जड़ सी हो गयी | वो खुद को कोरी गांड मराने के लिए किसी अनजान को बुला रही है | वो उसकी कोरी करारी गांड और जिस्म दोनों की दुर्दशा करेगा | एक बार उसका लंड घुसा नहीं की फिर वो उस आदमी के हाथ की लौड़ी बन जाएगी |
बिलकुल सड़क छाप रंडी बनाकर उसकी गाड़ बजाएगा वो | हाय क्यों मै अपने ही जिस्खिम की दुर्रदशा करने पर उतारू हूँ | कोई खुद का सम्मान है यां नहीं उसकी वासना इतनी गहरी है, क्या उसे इस कदर जलील करेगी | उसके खूबसूरत जिस्म की ऐसी की तैसी करवाएगी | उसकी वासना की भूख को वो बस दुसरे के हाथो का खिलौना बनकर रह जाएगी | क्या फर्क पड़ता है रीमा, ये तड़प हमेशा के लिए बुझ जाएगी | अभी कौन तेरी आरती उतार रहा है | अभी भी की हाथ की लौड़ी बनी उसकी बाहों में ही झूल झूल कर चुद रही है | फिर क्या फर्क पड़ता है दो बांहों की जगह चार हो जाएगी, एक लंड की जगह दो हो जायेंगे | एक भले दो, जल्दी से ये तड़प ख़त्म होगी | इस प्यास के लिए किस हद तक जावोगी रीमा, इस वासना को मिटाते मिटाते तुमारा खुद का वजूद ख़त्म हो जायेगा | ये वासना नहीं थी ये पाशविक वासना थी | रीमा की अंतर्मन का वो पहलू जो शायद उससे भी अनछुआ था | ये पाशविकता नहीं तो और क्या थी, एक लंड एक चूत में एक गांड में एक साथ | ये कामुकता का वहशीपन था | क्या करू इसी आग में जलती रहू, लेकिन ऐसे सड़क चलते किसी को अपने जिस्म की गहरइयो में उतार लेना कहाँ तक सही है | रीमा को अपने शब्दों पर पछतावा होने लगा लेकिन तीर तो कमान से निकल चूका था | पता नहीं कौन सी जिद थी, नहीं अब पीछे नहीं हटूंगी | जो भी होगा देखा जायेगा |
जितेश रीमा के फैसले से सन्न रह गया | उधर गिरधारी की तो जैसे लाटरी खुल गयी हो |
जितेश कोकीन चाट कर तरोताजा हो गया था, फिर भी जितेश रीमा को रोकना चाहता था - रीमा एक बार फिर सोच लो .......|
रीमा उसकी बात काटती हुई - बस जितेश मै अब और कुछ नहीं सुनना चाहती हूँ, तुम ठीक से मेरी चूत को चोदो इतनी देर से चोद रहे हो और मेरी चूत की प्यास तो मिटा नहीं पाए | मेरे पुरे जिस्म का ठेका लेने चले हो |
रीमा ने जितेश को ललकार दिया था | जितेश को भी रीमा पर गुस्सा आ गया |
गिरधारी तो जैसे को जैसे इसी पल का इंतजार था उसने बिजली की तेजी से अपने लंड को मसलते हुए बेड पर पहुँच गया |
रीमा वैसे भी दाहिने करवट लेटी जितेश की बांहों में थी | गिरधारी रीमा के पीछे जाकर लेट बैठ गया |
रीमा बोली - मेरे पीछे आ जाओ |
उसके बाद रीमा एक हाथ से पीछे करके उसके लंड को लार से भिगोकर सानने लगी | गिरधारी को तो जैसे जन्नत मिल गई हो तो सपने में भी नहीं सोचा था कोई इस तरह से इतनी खूबसूरत औरत का पिछवाडा बजाने का सौभाग्य उसे मिलेगा | जितेश रीमा से वैसे भी गुस्सा था ऊपर से गिरधारी से थोड़ी सी जलन होने लगी थी हालांकि वह रीमा के कहे अनुसार उसकी चूत में फिर से लंड पेलने लगा लेकिन वह गिरधारी को लेकर थोड़ा सा असुरक्षा महसूस कर रहा था | क्योंकि गिरधारी एक तो उसका नौकर जैसा था दूसरे रीमा उसके सपनों की मलिका थी और उसे अपनी खुली आँखों के सामने सपनों की मल्लिका को अपने नौकर के साथ शेयर करना पड़ रहा था | उसे लगता का रीमा अब सिर्फ उसकी है, रीमा के जिस्म पर सिर्फ उसका हक़ है | रीमा की जवान और हुस्न लुटने का अधिकार सिर्फ उसका है |
रीमा के जिस्म से जिस तरह से वह भोग रहा था यह चीज उसे अखर रही थी | अपने ख्वाबो की मल्लिका को कोई हाथ नहीं लगाने देता यहाँ तो उसी का नौकर उसकी के साथ उसके सपनो की रानी के जिस्म की सबसे नाजुक और कसी कोरी गुलाबी सुरंग का सफ़र तय करने जा रहा था | गिरधारी रीमा की गांड मारने जा रहा था यही सोचकर उसकी छाती पर सांप लोट रहे थे | इसे रात में ही क्यों न भाग दिया कम से कम ये सब तो नहीं देखना पड़ता | साला मेरी बराबरी करेगा इस मादरजात की इतनी औकात हो गयी | पता नहीं रीमा को कौन सा नशा हो गया है अपनी दुर्गति करवाने पर तुली है, आखिर कर भी क्या सकता हूँ जब कुछ सुनने को राजी ही नहीं है | बेटा जितेश अपनी चूत पर फोकस करो बाकि रीमा का जिस्म है वो जाने |