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Adultery Hawas ke ghulam ( हवस के गुलाम )



अभी अंजलि अपने विचारों से बाहर निकली ही थी कि घर के डोर की बेल बजती है..

अंजलि सीडियाँ उतरती हुई नीचे आती है… अंजलि देखती है कि सलीम चाचा डोर ओपन करने गये हुए है.

दरवाजा जैसे ही खूलकता है.. कामया भाभी बोलते हुए अंजलि के गले लगती है…

लेकिन थोड़ी देर में उसे पता चल जाता है कि वो उसकी भाभी नहीं बल्कि सलीम चाचा है..

कामया थोड़ा आसेहज महसूस करती है और नीचे गर्दन करती हुई आगे चली जाती है… वही कामया के साथ आई बाहर खड़ी आरती मूह खोले खड़ी थी.. ये सब इतना जल्दी हुआ कि किसी को समझने में भी नहीं आया..

वही अंजलि ये सब देख कर अपनी जगह मूरत बनी खड़ी थी… अंजलि के मनोभाव ऐसे थे कि वो उन्हे किसी को समझा भी नहीं पाती.. समझती कैसे खुद समझती तो समझा पाती.

जहाँ एक ओर अंजलि को कामया पर सलीम चाचा के गले लगने पर गुस्सा था वही दूसरी और जलन थी कि आख़िर सलीम चाचा कामया को क्यूँ प्यार करते है…

तभी सलीम अपना गला सॉफ करते हुए आरती से बोलता है..

सलीम: आप अंदर नहीं आएँगी क्या? (सलीम ये सब बोल कर वापस महॉल नॉर्मल कर देता है..)

अंजलि: अरे आरती बाहर क्यूँ खड़ी हो? आओ अंदर आ जाओ.. अपना ही घर है ससुराल नहीं है.....

आरती शरमाती हुई अंदर आ जाती है.. वही कामया और अंजलि दोनो एक दूसरे को ताली देते हुए हँसने लगती है…

अंजलि: अच्छा कामया ये तो बताओ तुम इतना खुश क्यूँ थी जो आते ही मेरे गले लग जाने वाली थी… और अपने कंधे से कामया के कंधो को एक हल्का सा धक्का मारती है..

कामया शरमा जाती है..

कामया: भाभी वो भैया का फोन आया था. बोल रहे थे कि वो नहीं आ पाएँगे.. वो सनडे तक वहाँ से रवाना होंगे..

अंजलि: इसमे इतनी खुशी की क्या बात है?

आरती: भाभी कितनी भोली हो.. ये पार्टी करना चाहती है यहाँ पर… वो भी हार्डकोर पार्टी.. वित मास्क आंड डॅन्सिंग.

अंजलि: चोन्कने का मूह बनाते हुए पागल है क्या.. तेरे भैया जान से मार डालेंगे……

कामया: तभी तो खुश हूँ वो नहीं आ रहे तो हम पार्टी आराम से कर सकते है..

 
आरती: हाँ भाभी काफ़ी दिन हो गये मेने भी पार्टी नहीं की है.. पहले हॉस्टिल में तो अपने फ्रेंड्स के साथ खूब पार्टी हो जाती थी.. बट अब नहीं..( अपना सॅड सा फेस बना लेती है)

अंजलि: ठीक है लेकिन हार्डकोर पार्टी??????

आरती : एक दिन की तो बात है…

कामया: प्लीज़ भाभी मान जाओ ना..

अंजलि: सोचने का नाटक करते हुए ठीक है लेकिन कोई भी अननोन पर्सन नहीं आएगा पार्टी में..

कामया: ओन्ली फ्रेंड्स पक्का..

आरती: यस ओन्ली फ्रेंड्स..

अंजलि: ओके और ये मास्क का क्या खेल है.. ?

आरती: भाभी मास्क पार्टी कपल वग़ैरा करते है.. बट हम लोगो ने सोचा जो कपल डॅन्स होगा उसमे हम इसे यूज़ करेंगे..

अंजलि: लेकिन:

कामया अंजलि के कंधो को पकड़ कर उसे सीडियों से साइड में करती है…

कामया: ओह हो भाभी कितने सवाल पूछती हो.. अब नो लेकिन वेकीन… हम पार्टी की तैयारी करते है… चलो आरती..

आरती: ये शुवर बेब…हहेहहे (दोनो बहने खिलखिलते हुए उपर चली गयी)

तभी सलीम पीछे से अंजलि को बोलता है

सलीम: मेड्म?

अंजलि एक दम से डरती हुई पीछे घूमती है…?

अंजलि: क्या है?

सलीम: जी वो चाय….

अंजलि टी कप्स को देखती है और फिर सलीम की ओर देखती है.. और एक कप उठा कर उसे थॅंक यू बोलती है..

तभी सलीम बोलता है..

सलीम: मेड्म प्लीज़ मेरी मदद करने के बारे में एक बार सोचिए तो सही?

अंजलि अभी एक घुट भी चाय नहीं पी थी कि उसने सलीम की बात सुन कर उसे गुस्सा आगया.

अंजलि: तुम्म…

 
तभी उपर से आवाज़ आती है…

भाभी…

सलीम: चुदवायेगी कामया को मुझसे?

अंजलि.. हाअ

अंजलि : व्हाट?

भाभी यहाँ आई ये..

सलीम तुम आओगी आज चुदवाने..

अंजलि: आई.. शट अप?

अंजलि: आरती आ रही हूँ प्लीज़ रूको..

सलीम: आपने दोनो वादे किए है मुझसे प्लीज़ जल्दी से पूरे कर दीजिए..

अंजलि: मेने कब…. तभी अंजलि को अभी हाल ही में हुए कॉन्वर्सेशन याद आते है और ना चाहते हुए भी मुस्कुरा पड़ती है..

सलीम अंजलि का हाथ पकड़ कर..

सलीम: थॅंक यू मेड्म आपकी ये मुस्कुराहट देखने के लिए आँखें तरस गयी थी.. और थॅंक यू मुझे माफ़ करने के लिए..

अंजलि: इट्स ओके अब जाओ और अपना काम करो.. ऐसा कह कर अंजलि उपर आरती के पास जाने लगती है..

वही सलीम किचन में आकर खाना पका ने लगता है..

आज सलीम ने पूरे खाने में हकीम की दी हुई दवा मिलाई थी…

अंजलि उपर कामया और आरती के साथ पार्टी की तैयारी कर रही थी…

कामया: भाभी इस पार्टी में हम सिर्फ़ अपने फ्रेंड्स को बुलाएँगे .. तो फिर हार्डकोर पार्टी में क्या कमी है.. मम्मी यहाँ होती तो वैसे ही पार्टी नहीं करने देती और भैया तो जान ही लेलेते… प्लीज़ भाभी आप तो हमारा साथ दो..

आरती: हाँ भाभी प्लीज़…. सिर्फ़ इस बार .. फिर क्या पता अगली बार कामया दीदी यहाँ हो ही ना..

कामया:तेरा क्या मतलब यहाँ हो ही ना से?

आरती: अरे दीदी आपकी शादी भी तो हो सकती है ना.. हहेहहे

आरती और अंजलि दोनो इस बात पर हँसने लगती है और कामया नाराज़ होते हुए आरती पर झपट ती है लेकिन अंजलि आरती को अपने पीछे छिपा लेती है..

 
आरती: अरे दीदी आपकी शादी भी तो हो सकती है ना.. हहेहहे

आरती और अंजलि दोनो इस बात पर हँसने लगती है और कामया नाराज़ होते हुए आरती पर झपट ती है लेकिन अंजलि आरती को अपने पीछे छिपा लेती है..

इसी तरह मस्ती करते हुए तीनो पार्टी की तैयारी करती है… और दोपहर का लंच टाइम आ जाता है…

अंजलि: आरती आज तुम पार्टी के लिए पहली बार हम सब के साथ बात कर रही हो…

आरती: सॉरी भाभी..

कामया: हाँ आरती ये ग़लत बात है क्या करती रहती है तू अपने कमरे में…

आरती: सॉरी दीदी वो हॉस्टिल में एक ही रूम में रहने की आदत पड़ गई है.. और फिर मेरी फ्रेंड्स भी तो नहीं है यहाँ पर… तो अकेले रहना ही अच्छा लगता था.. बट इस पार्टी की वजह से मुझे लगा यही सही वक़्त है सब से फिर से नॉर्मल होने का..

अंजलि: हाँ बिल्कुल सही कहा …

तभी सलीम की एंट्री होती है…

सलीम: अंजलि जी खाना तैयार है, टेबल पर लगा दिया है.. आप लोग आजाए..

कामया: जी काका अभी आई आप चलो..

अंजलि मन ही मन सोचती है.. कामया जो आदमी आज तुम्हे खाने पर बुला रहा है वो ही आदमी तुझसे तेरी जवानी लेने का ख्वाब भी देख रहा है..

अंजलि अभी ये सोच ही रही थी कि आरती अंजलि के कंधों पर हाथ रख कर..

आरती: चलो भाभी.. खाना ठंडा हो रहा है…

अंजलि: हाँ.. ह्म(चोन्कते हुए) चलो… चलते है..

तीनो घर की औरतें लंच कर रही थी और सलीम उन्हे खाना परोस रहा था..

तभी सलीम बोलता है…

सलीम -कामया मेड्म आपसे एक सवाल पुच्छू..

कामया: हाँ काका बोलो…?

अंजलि और आरती दोनो सलीम की ओर देखने लगती है..

 
अंजलि मन ही मन डर भी रही थी कि कही बुद्धा अपना मूह ना खोल दे कि उसने उनकी भाभी के साथ क्या क्या हरकतें की थी..

सलीम: वो मेड्म एक कहानी सुना नी थी ताकि आप उसका न्याय कर सके..

कामया: कहानी?

आरती: आइ लव स्टोरीस… प्लीज़ सूनाओ ना काका..

अंजलि आँखो से सलीम को इशारा करती है कि बकवास बंद रखे और अपना मूह बंद रखे.. लेकिन फिर भी उसे आरती की एग्ज़ाइट्मेंट देख कर बोलना पड़ा…

अंजलि: हाँ हाँ क्यूँ नहीं सूनाओ..

कामया: हाँ अब तो सुना ही दो 2-2 वोट भी मिल गये अब तो.. हहहे और वैसे भी भाभी आड्वोकेट तो है ही सो वो जज भी कर देगी... क्यूँ भाभी?

अंजलि: यस श्योर.. क्यूँ नहीं (थोड़ा सा परेशान होते हुए)

फिर सलीम वही कहानी दोहराता है जो कामया के साथ हुआ था जब सलीम उसे कुछ लड़को से बचा कर घर लाता है…

(सलीम मेड्म एक लड़की थी. उसे कुछ चार लड़के अपनी दोस्ती के जाल में फँसा कर उसे अपनी गाड़ी में बिठा कर ले गये और कहीं से उसे दारू पिला दी. जब वो लड़की पूरी तरह से नशे में हो गई तो वो चारो लड़के उसके साथ ग़लत काम करने की कोशिश करने लगे.. तभी वहाँ से कोई बुड्ढ़ा गुजर रहा था यही कोई 45-50 या फिर 55-60 का. वो बुड्ढ़ा कोई और नहीं उस लड़की के घर में काम करने वाला नोकर ही था. उसने उस लड़की को पहचान लिया.. उस बुड्ढे ने अपने जान ने वाले लड़के के साथ मिलकर उस लड़की की इज़्ज़त बचा ली और उस लड़की को घर लेकर आ गया. लेकिन उस लड़की को इतना भी होश नहीं था कि उसे घर कॉन लेकर आया. उसके बाद उस बुड्ढे ने देखा कि वो लड़की बहुत ज़्यादा कामुक हो रखी है शायद उस लड़की को कोई नशीली दवा भी दी गयी थी जिस से वो कामुक हो गयी. तो उस बुड्ढे ने उस लड़की की काम वासना शांत करने के लिए अपनी मर्यादा लाँघ दी लेकिन उस लड़की के कोमार्य को बिना नुकसान पहुँचाए. उस लड़की की भाभी ने उस बुड्ढे को ये सब करते देख लिया लेकिन जब उसे एहसास हुआ कि बुड्ढे ने ये सब उस लड़की के लिए किया है जिसे नशीली दवा दी गयी है तो उसने उसे कुछ नहीं कहा. लेकिन अब उस बुड्ढे को उस लड़की से प्यार हो गया जिसकी उसने इज़्ज़त बचाई. ये बात उस लड़की को पता भी नहीं कि उसकी इज़्ज़त भी किसी ने बचाई थी. तो उस बुड्ढे ने उसकी भाभी से ये बात कही और उसने उस लड़की की भाभी से मदद माँगी लेकिन वो मना कर रही है. उस लड़की की भाभी किसी भी तरह से उस नोकर की मदद नहीं करना चाहती)

अंजलि ये कहानी सुन रही थी साथ ही परेशान भी हो रही थी.. कि ये क्या चाहता है?

 
कामया: ये तो बड़ी मुश्किल है…

आरती: क्या मुश्किल है दीदी इसमे?

अंजलि: काका एक बात नहीं बताई आपने उस लड़की की उमर क्या है..

सलीम: यही कामया मेड्म के बारबर ही होगी..

अंजलि: मतलब दोनोकी उमर में फ़र्क कम से कम भी 15 साल से ज़्यादा का होगा है ना

सलीम: जी मेड्म..

आरती: भाभी इस से कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि क्या उमर है? और कितना अंतर है? फ़र्क ये है कि उस बुड्ढे ने जान बचाई है लड़की की. अगर उसकी इज़्ज़त लूट गई होती तो वैसे भी कोई लड़का उस से शादी नहीं करता. और हो सकता है वो चारों लड़के उसे ब्लॅकमेल करके उसे एक गंदी लड़की बना देते जैसे मुंबई की रेड लाइट एरिया में होती है..

कामया: इसका मतलब लड़की को बुड्ढे के साथ शादी कर लेनी चाहिए..

आरती: मेरे ख़याल से हाँ बट लड़की को मालूम नहीं तो वो कैसे एक दम से हाँ कर सकती है तो मेरे हिसाब से लड़की की भाभी को धीरे धीरे उस लड़की को उस बुड्ढे से पटवाना चाहिए… हहेहहे

अंजलि: शट अप आरती कुछ भी बोलती हो..

सलीम: मेड्म आप कोई दूसरा रास्ता बताइए ना जिस से दोनो मिल जाएँ..

अंजलि: व्हाट? में ऐसा कभी नहीं करूँगी…?

आरती और कामया दोनो अंजलि की तरफ आश्चर्य से देखने लगती है.

अंजलि: मेरा मतलब उस बुड्ढे को अपनी भावनाओ पर काबू रखना चाहिए..

 
कामया: नहीं भाभी आरती सही कह रही है.. उसकी भाभी को उस बुड्ढे की मदद करनी चाहिए इस से उस लड़की को भी पता चलेगा कि उसकी इज़्ज़त किसने बचाई. और वो ज़रूर उस बुड्ढे से शादी करने को तैयार हो जाएगी…

अंजलि: लेकिन कामया?

सलीम: तो ये तय हुआ कि लड़की की भाभी को बुड्ढे की मदद करनी चाहिए.

कामया: जी

आरती : जी बिल्कुल करनी चाहिए.

सलीम: लेकिन उस लड़की की भाभी ने कोई कोशिश नहीं की उसकी मदद की तो…

आरती टेबल से उठ खड़ी हुई और बोली..

आरती: तो उस बुड्ढे को उसकी भाभी को सज़ा देनी चाहिए और उस लड़की को सब सच बता देना चाहिए..

अंजलि: व्हाट?

कामया: बस होगया न्याय.. अब चलो उपर..

कामया ऐसा बोलकर टेबल से उठ खड़ी हुई और उपर कमरे में जाने लगी और आरती अंजलि को बोलने लगी..

आरती: भाभी खाना खा लिया आपने:

अंजलि: हाँ ../

आरती : तो फिर चलो शाम की पार्टी की तैयारी भी करनी है..

अंजलि भी कामया के पीछे –पीछे चली जाती है..

तभी आरती एक बड़ा सा बॅग निकाल कर सलीम को देती है..

आरती: काका इस में जो सामान है उस से आप पूरे हॉल को सज़ा दीजिए आज शाम को पार्टी है.. और हाँ ये कुछ मास्क है जो आप वहाँ साइड में रख दीजिएगा..

सलीम: जी मेड्म…

 
उपर आरती , कामया, और अंजलि पार्टी की तैयारी कर रही थी.. बाहर से खाना ऑर्डर दे दिया गया था.. और अपने करीबी फ्रेंड्स को आरती और कामया पहले ही इन्वाइट कर चुकी थी… अंजलि से पूछा तो अंजलि ने अपनी कुछ फ्रेंड्स को भी इन्वाइट किया..

आरती: काका आप भी किसी को इन्वाइट करना चाहे तो कर लीजिए..

सलीम: मेड्म मेरा तो कोई दोस्त नहीं है हाँ 2 लोग है एक मूह बोली बेटी है और एक लड़का है जो….

कामया बीच में ही बोल पड़ी इट’स ओके काका इन्वाइट कर्लो उन्हे भी..

इतना बोल कर कामया आरती दोनो तैयार होने चली जाती है… और वही अंजलि भी तैयार होने अपने रूम में चली जाती है..

शाम को करीब 6 से 6.30 के करीब अंजलि, कामया ऑर आरती सभी पार्टी के लिए तैयार होकर नीचे आ गई…

सबने अपना अपना मास्क उठा लिया…

तभी कामया और आरती ने कॉल करके गेस्ट को इन्वाइट किया … ये सभी गेस्ट इन तीनो के कुछ क्लोज़ फ्रेंड्स ही थे.. जिन्हे इस पार्टी के लिए पहले ही बोल दिया गया था.. लेकिन ये पार्टी एक मास्क पार्टी होगी ये किसी ने नहीं कहा.. सब के लिए एक अड्वेंचरफ़ुल सर्प्राइज़ था..

वही सलीम भी थोड़ा बहुत पार्टी के बारे मे जान चुका था तो उसने कामया से पूछा ..

सलीम: कामया बेटी क्या मुझे पार्टी में रुकना होगा… या फिर में जाउ…

कामया: ऐसा क्यूँ पूछ रहे हो काका. आप तो फॅमिली मेंबर्ज़ की तरह हो.. आप रुकिये ना पार्टी मे..

सलीम: लेकिन बेटा ये तो तुम लोगो की पार्टी है इस में मुझ बुड्ढे का क्या काम, ओर फिर यहाँ मेरे जानकार भी तो नहीं है…

कामया: ऑफ हो तो इसमे क्या है.. आप अपने किसी दोस्त को बुला लो…

 
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