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Adultery Hawas ke ghulam ( हवस के गुलाम )

अंजलि;: नहीं ये सब यही ख़त्म करो ना तो मुझे बताओ ना ही देव को बताना..

सलीम: क्या मेड्म आप दोनो को नहीं बताया तो मेरे पेट में बात नहीं पचेगी.. कहीं बाहर वाले को बोल दिया तो.. इस से बढ़िया तो आप ही सुन लो.. अपनी कमीनी मुस्कान के साथ सलीम बोल पड़ता है..

अंजलि: मन ही मन सोचती है क्या मुसीबत है...

अच्छा ठीक है आगे क्या हुआ..

सलीम: अंजलि जी अभी वाली ग़लतफहमी ना हो इस लिए आप अपने आपको यहाँ समझो और में खुद को.. ताकि फिर से कहानी बीच में ना अटके. वो माँ कसम मुझे इस बार डिस्टर्ब ना करें वरना आपको वो सब करना पड़ेगा. मंजूर है

अंजलि;: कुछ देर सोचती रहती है फिर.. अच्छा ठीक है.. मंजूर है..

सलीम: मन ही मन मुस्काता हुआ सोचता है ये साली बीच में टोके गी ज़रूर.. और फिर इस माकी लोडी का पकड़ लूँगा.. मुझे हरामी बोलती है.. बड़ा गुरूर है इसे अपने खून पर.. अब ये मेरा खून पीएगी.. मादर चोद..

अब सलीम अपनी कहानी आगे बढ़ाता है...

हां तो मेड्म में कहाँ था..

अंजलि: वो एमएलए का लड़का

सलीम: क्या कहा था उसने

अंजलि;: वो वो.. वो अंजलि से पूछता है कि अंजलि तुझे चो.... सेक्स करने के लिए मुझे क्या करना पड़ेगा..'

सलीम: हाहाहा सेक्स नहीं रे चोदने के लिए क्या करना पड़ेगा..

तो अंजलि तैयार हो तुम..

अंजलि: क्या मतलब..

सलीम: बोला था ना अब तुम अंजलि का रोल निभाओगी..

अंजलि: नहीं ये मुझसे नहीं होगा

सलीम:ठीक है कोई बात नहीं.. में ही बताता हूँ
 
सलीम अपना लोड्‍ा अंजलि की तरफ करता है जो एक दम भयानक रूप में आ चुका था.. सलीम बोलता है अंजलि.. इसे मूह में लेकर चूसो... यही है वो हथियार जो तेरी चूत को भोसड़ा बनाएगा.. उसके बाद तेरी ये कामया का भोसड़ा बनाएगा..चल चूस मादर चोद..

अंजलि एक टक सलीम की ओर देखती रहती है...

सलीम: चल आ ना...

सलीम अब खुल कर अंजलि को अपनी ओर बुला रहा था...

अंजलि: काका ये क्या बद तमीज़ी है...

सलीम:अभी तो बताया था ये सब एमएलए का लड़का बोल रहा था जैसे में आपको बुला रहा हूँ वैसे ही..

अंजलि को कुछ समझ नहीं आता कि सलीम कहानी बता रहा है या एक नयी कहानी बना रहा है..

सलीम: तू सोचती रहेगी और में तेरी चूत मार लूँगा बेहन की लोडी चल इसे पकड़ तो सही. सलीम अब कामया का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख देता है.. फिर चल अब चूस इतना कह कर सलीम कामया के मूह की तरफ जा कर अपना लंड कामया के मूह में ठूंस देता है जो नशे की हालत में थी..

अंजलि ये सब देख कर डर जाती है..

अंजलि: काका.. ये ये आप क्या कर रहे है.. हटिए वहाँ से..

अब सलीम कामया के मूह में लंड डाल कर उसकी चूंचिया भी दबा रहा था और हल्के से मसाज भी कर रहा था..

अंजलि एक पल को रुक कर देखती है कि कामया के मूह में बड़ी मुश्किल से सलीम का लोड्‍ा जा रहा था.. अंजलि ये सब देख कर गरम भी हो रही थी और साथ ही डर रही थी.. क्यूँ कि अब हालात उसके काबू के बाहर जा चुके थे..

सलीम: अंजलि जी.. कुछ भी कहिए. आपकी ननद है बहुत गरम...

अंजलि सलीम की ओर एक टक देखती रहती है..

अचानक सलीम अपना लोड्‍ा कामया के मूह से बाहर निकाल लेता है..

अंजलि के लिए ये दृश्य किसी हॉरर फिल्म से कम नहीं था...

अंजलि एक टक सलीम के काले चिकने बड़े लोड्‍े को देख रही थी..

सलीम: अंजलि जी याद है आपको आपने एक बार पूछा था कि मेरी बीवी ने मुझे क्यूँ छोड़ा था..

अंजलि अब सलीम के लोड्‍े को नहीं बल्कि सलीम की ओर देखने लगी उसकी आँखों में सॉफ देखा जा सकता था कि वो जान ना चाहती है कि क्यूँ...

सलीम: उस दिन मेने जवाब दिया था ना कि मेरा हथियार बड़ा है... आप खुद देख लीजिए कितना बड़ा है...

अंजलि एक टक सलीम के लोड्‍े को देखे जा रही थी... अचानक बोल उठी...

अंजलि: माइ गॉड.. लेकिन काका ये इतना बड़ा.. कैसे...

सलीम: ये अपना सुलेमानी हथियार है मेड्म..

अंजलि: तुम्हारी बीवी कैसे लेती थी..

सलीम: हराम जादि लेती तो मेरी भी औलाद होती ना.. उसकी चूत में जब भी लंड डालता तो ऐसे चिल्लाती थी जैसे कुँवारी लड़की की चूत मार रहा हूँ और वो रो रो कर मुझे दुहाईयाँ दे रही हो कि बस रहने दो..

अंजलि: काका इतना बड़ा..

सलीम: क्यूँ क्या देव साहेब का नहीं है..

अंजलि: इतना बड़ा? नो वे..

सलीम: मेड्म आप इसे लेकर देखना.. माँ कसम जो मज़ा बड़े से है वो छोटे में नहीं..

अंजलि: ह्म हाँ.. व्हाट? नो वे.. मुझे तो मार ही डालेगा..

अंजलि खुली आँखों से ख्वाब देख रही थी कि सलीम उसकी चूत मार रहा है..वो अपना पूरा लोड्‍ा उसकी चूत में डाल कर धक्के मार रहा है..

ऐसा सोचते ही अंजलि की पेंटी पूरी गीली हो जाती है और पानी.. वो तो पेंटी से हो कर उसके घुटनो के नीचे पिंडलियों तक आ पहुँचा था..

सलीम: मेड्म उसके बाद वो सलीम ने अपना लोड्‍ा अंजलि की चूत पर रखा और पूछा.. बोल डाल दूं..
 
तभी वहाँ पर बाबू आगया कुछ लड़को को लेकर जिसे मेने ही कहा था.. और हम ने कामया जी को बचा लिया.. लेकिन अंजलि की चुदाई तो सलीम से पक्का हुई है समझ लो..

अंजलि: वो क्यूँ..

सलीम हाहहहाहा हम ने कामया जी को बचाया है अंजलि को नहीं.. अंजलि की चूत तो मेने मारी है और मारूँगा भी.. अंजलि तुम तो मेरी हो तुम्हारी चूत अब सिर्फ़ मेरी है उसे सिर्फ़ ओर सिर्फ़ में मारूँगा..

अंजलि: क्या मतलब ..

सलीम: अंजलि की आँखों में देख कर..

एक बात बताओ मेरा लोड्‍ा कैसा लगा..

अंजलि : नहीं पता मुझे..

सलीम: सोचो मेड्म आगे की बहुत सी बाते है जो मेने नहीं बताई..

अंजलि: सलीम की आँखो में देखती है... उसे एहसास हो जाता है कि जवाब सुने बिना वो कुछ नहीं बताएगा इस लिए अंजलि जवाब देती है..

भयानक.....!!

सलीम: क्या भयानक... वो तो है.. लेकिन आपको कैसा लगा..

अंजलि: एक बार उसके लोडे की तरफ देखती है और वो फिर से ख्वाबो में खो जाती है..

अच्छा है..

सलीम: बस अच्छा है...? या..

अंजलि: सलीम की आँखों में आँखें डाल कर.. मस्त है...!

अब आप आगे क्या हुआ ये बताओ..

सलीम : नहीं अगर ये मस्त है तो पहले इसे एक चुम्मा दो...

अंजलि: शॉक हो जाती है व्हाट..? में ये नहीं कर सकती... आप जानते है आप क्या बोल रहे है.. वैसे ही मेने बहुत सी मर्यादाओं को लाँघ दिया है.. एक बंद कमरे में अपनी ननद के नंगे जिस्म के साथ आपको नंगे देख रही हूँ खड़े खड़े और आपके भद्दे सवाल और भाषा उपर से आप ये सब करने को बोल रहे हैं.. अंजलि की आँखो में आँसू आ जाते है..

क्यूकी अब अंजलि को अपना पति , परिवार , और संस्कार याद आ रहे थे..

सलीम: अंजलि के आँसू पोन्छते हुए.. अंजलि जी मुझे आप पसंद हो.. प्यार करता हूँ आपसे तबसे जब आपसे पहली बार मिला था.. अपनी बनाना चाहता हूँ आपको.. वो क्या बोलते है.. गर्ल फ्रेंड...

अंजलि: शट अप...

सलीम: देखो अंजलि जी आपको किस कर के इसे हल्का सा चूसना होगा... वरना ये सारी बाते में देव साहेब को बताऊंंगा..

अंजलि एक टक सलीम को देखती रहती है..

डरते डरते अंजलि को ख्याल आता है कि अगर देव को इन सब बातों का पता चला तो कामया की तो वो जान ही ले लेगा...

अंजलि धीरे से हाथ बढ़ाती है सलीम के लंड को पकड़ने के लिए..

लेकिन सलीम पीछे हट जाता है..

अंजलि फिर सलीम की ओर देखती है और कहती है..

अंजलि: क्या हुआ.. अब कर तो रही हूँ जो आप चाहते है..

सलीम: मेने कब कहा हाथ लगाओ मेरे लोडे को. मेने तो किस करके इसे चूसने के लिए बोला..

अंजलि: व्हाट..

सलीम: चलो जल्दी करो..

अंजलि के पास सलीम जाता है..अंजलि धीरे से अपना मूह सलीम के लोड्‍े तक ले जाती है तो उसे सलीम के लोड्‍े और कामया के थूक की हल्की सी भीगी भीनी गंध आती है...
 
अंजलि अपना मूह बिगाड़ कर किस करने के लिए आगे बढ़ती है.. अभी 1 या 1.5 इंच की दूरी ही थी अंजलि के होंटो और सलीम के लोड्‍े के बीच की अंजलि की सास अंजलि को आवाज़ देती है..

सुलोचना: अंजलि..... बेटा अंजलि.... कहाँ हो..

अंजलि तुरंत पलट कर दरवाजे की तरफ देखती है और ज़ोर से बोलती है..

अंजलि: जी माँ जी.. आई

सुलोचना: सलीम कहाँ है...

अंजलि;: जी वो कमरा सॉफ कर रहे है..

सुलोचना: उसे भी नीचे बुला..

सलीम जल्दी से कपड़े पहन ने लगा 1 मिनिट में सलीम रेडी हो जाता है..

उधर एक नाइटी उठा कर अंजलि कामया को पहना ने लगती है..

सुलोचना: जल्दी करो.. पूरा दिन नहीं है मेरे पास..

अंजलि: जल्दी से कामया को नाइटी पहना देती है...

अंजलि और सलीम दोनो साथ नीचे आते है..

सुलोचना दोनो को देखती है.. और थोड़ा सा गुस्से में..

सुलोचना: क्या कर रहे थे उपर.. और यूँ पसीने में क्यूँ भीगे हो..

सलीम: माँ जी वो

सुलोचना: अपना हाथ दिखा कर सलीम को चुप करा देती है..

और अंजलि से बोलती है.. तुम बोलो..

अंजलि: माँ जी वो ... वो बोला था ना... पीछे कमरे की ओर देख कर.. हम कमरा सॉफ कर रहे थे.. वहाँ कामया भी सो रही है..

सुलोचना : अच्छा कोई बात नहीं... सुनो अंजलि तुम चाय बना कर लाओ मेरे लिए.. और सलीम मुझे तुमसे कुछ काम है.. तुम यही रूको..

सलीम: जी माँ जी

सुलोचना: सलीम मुझे लगता है कि अब तुम इस घर को अच्छे से संभाल लोगे...

सलीम: चोन्कते हुए... क्या मतलब मालकिन. में कुछ समझा नहीं?

सुलोचना: देखो अभी देव भी घर पर नहीं है और में भी मेरी मंदिर की सहेलियों के साथ हरिद्वार जा रही हूँ. कल सुबह निकल जाउन्गि. और फिर तुम्हे भी अब घर पर काफ़ी दिन हो गये है काम करते हुए उपर से घर में सबसे बड़े हो उम्र में तो तुम अपने अनुभव से इस घर को संभाल सकते हो. जब तक कि देव या में नहीं आजाते वापस.

 
सलीम: जी मालकिन आप बे फिक़र रहे. भगवान की दुआ से ये नाचीज़ घर में किसी को भी किसी भी चीज़ की कमी महसूस नहीं होने देगा..

सुलोचना: मुस्कुराते हुए.. तुम आदमी बहुत अच्छे हो सलीम. ये लो 10 दिन पहले ही अपनी महीने की तनख़्वाह. और हाँ ये कोई अड्वान्स नहीं है ये इसी महीने की है. अगर देव ने पेरेंट कर भी दिया हो तो भी रखलो घर चलाने में काम आएँगे.

सलीम: चुप चाप पैसे ले लेता है..

तभी अंजलि किचन से चाय लेकर आ जाती है..

अंजलि: माँ जी चाय..

सुलोचना: लाओ दो..

अंजलि टेबल पर चाय रखने लगती है कि सुलोचना बोलने लगती है

सुलोचना: अंजलि बेटा.. देखो में कल सुबह हरिद्वार के लिए जा रही हूँ. जब तक में लोटू घर का ध्यान रखना. वैसे तो सलीम को सब समझा दिया है लेकिन घर की बहू होने के नाते बेटा ये फ़र्ज़ तुम्हारा बनता है..

अंजलि: जी माँ जी लेकिन .. आप यूँ अचानक हरिद्वार?क्यूँ?

सुलोचना: मुस्कुराए हुए.. अब भगवान से अपने पोते पोतियों को माँगने जा रही हूँ.

और दो दामाद भी दे दे तो सोने पर सुहागा हो जाए..

तभी सलीम बीच में बिना सोचे समझे बोल पड़ता है..

सलीम: लेकिन माजी उसके लिए आपको तीर्थ करने की ज़रूरत नहीं है आपको पोते पोती तो आपके बेटे की मेहनत से मिलेंगे..

अंजलि सलीम की ये बात सुन कर शरमा जाती है और भाग कर कमरे में चली जाती है. और

सुलोचना वो तो एक टक सलीम को देखने लगती है ऐसी बात सुनकर लेकिन फिर अपनी बहू के शरमा कर भागने के कारण सुलोचना भी मुस्कुराने लगती है और उसे अंजलि की टाँग खींचने का मोका भी तो मिल गया था..

सुलोचना: अरे कहाँ जाती है... यूँ शरमाने से कुछ नहीं होगा.. अब सारी मेहनत देव ही थोड़े ही करेगा कुछ तो तुझे भी करना पड़ेगा.. हे हहहे ऐसा कह कर सुलोचना हँसने लगती है ये बात सुनकर सलीम भी हँसने लगता है..सलीम को हँसता देख कर सुलोचना सलीम से कहती है..

सुलोचना: तू इतना बड़ा हो गया, चेहरे पर सफेद बाल आ रहे है और सर पूरा सफेद होगया लेकिन तुझे इतनी भी समझ नहीं कि औरतों से कैसे बात की जाती है..

(सलीम मन ही मन हंसता है.. साली मेरी समझ तो तेरे से 1000 गुना आगे है बस तू देखती जा..)

 
सलीम मुस्कुराते हुए सुलोचना को जवाब देता है.

सलीम: मालकिन ठीक ही तो बोला अल्लाह हो या भगवान, मेहनत करेगा इंसान तो होगी संतान, बिना मेहनत के कैसे कुछ देगा आपका भगवान..

सुलोचना: अरे तेरी बात 16 आना सच है लेकिन अंजलि बहू है घर की उसके सामने....

सलीम सुलोचना की बात बीच में ही काट देता है..

सलीम: अरे मालकिन छोड़ो वो सब जाने दो.. अभी आपने पोते पोतियों की बात कर ही दी है तो सुनो. में आज एक हकीम के पास गया था... मालकिन बहुत पहुँचा हुआ है वो.. उसने कहा है कि ये दवा किसी भी औरत को 10 से 15 दिन सुबह शाम खिला दो तो बच्चा 100% ठहर जाएगा..

ऐसा कह कर सलीम एक पोटली खोल कर दवा दिखाने लगता है.

सुलोचना: सच सलीम, क्या ये दवा कारगर साबित होगी.

सलीम: माजी ज़रूर होगी.. आज पहली बार थोड़े ही ले रहा हूँ में उनसे दवा...

सुलोचना: तो क्या तुम्हारी बीवी भी अब तक पेट से नहीं हुई...

सलीम: अरे क्या बात करती हो मेम साहेब. मेरी बीवी तो कब की हथियार से खोफ़ खा कर भाग गयी.. अम्मा कहाँ से बनेगी..

सुलोचना: क्या लेकिन क्यूँ..अच्छे भले तो हो.. फिर तुम्हारी बीवी क्यूँ भागी..

सलीम: बेशर्मी से हाथ अपने लोड्‍े पर लगाता है.. और बोलता है.. साली रंडी इसकी वजह से भाग गयी..

सुलोचना : गुस्से से ज़ोर से चिल्लाती है..सलीम? ये क्या बदतमीज़ी है...

सलीम: माफी दे दो मालकिन लेकिन जो भी बोला सच बोला.. आप खुद देख लो.. अल्लाह ने कितनी बड़ी सज़ा दी है मुझे..

ऐसा कह कर सलीम अपना पाजामा उतार देता है..और अपना लंड पकड़ कर सुलोचना को देखता है...

देखो आप और रोने लगता है या यूँ कहूँ कि रोने का नाटक करने लगता है..

और सुलोचना..

सुलोचना तो एक टक सलीम के जंगबहादुर को देखती रहती है... उसके ललाट पर पसीने की बूंदे छलक आती है सुलोचना को कुछ समझ नहीं आता कि क्या करे..

 
तभी सलीम अपना पाजामा उपर चढ़ा कर बाँध लेता है और सुलोचना के पैरों में गिर जाता है..

सलीम: मालकिन मालकिन हमें माफ़ कर दो मालकिन हम भावनाओ में बहकर बहुत कुछ ग़लत कर बैठे आपके सामने हमें माफ़ कर दो..

और सुलोचना सलीम को अपने कदमों में गिरा देख कर दया करने लगती है . सुलोचना सलीम के कंधो को पकड़ कर उसे उठाती है और बोलती है.. कोई बात नहीं सलीम.. जाओ अभी तुम खाना पकाओ.. और हां अंजलि को तुम्हारी वाली दवा खिलाते रहना..और मुस्कुराती है...

सलीम: जी मालकिन.. बिल्कुल...

सलीम तो मन ही मन खुश था.. कि बहुत जल्द सुलोचना को लाइन पर ले आउन्गा लेकिन इन सब से बड़ी खुशी की बात ये थी कि इन 10 दिनो में वो इकलौता मर्द इस घर की 3 जवान हसीनाओं के साथ होगा...

सुलोचना दरवाजे से बाहर निकल जाती है...

और सलीम अगले 2 घंटे में अपना किचन का काम करके फ्री हो जाता है और अंजलि के रूम को नॉक करता है....

अंजलि: अंदर से. कॉन है..

सलीम: में हूँ सलीम

अंजलि: हाँ काका बोलिए.. कुछ काम था?

सलीम: अंजलि जी वो खाना पका दिया है... और मालकिन अभी तक बाहर से लौटी नहीं है.. कुछ और काम हो बता दो..

अंजलि: क्यूँ कही जा रहे है आप...

सलीम: जी वो में बाबू के पास..

 
अंजलि बाबू का नाम सुनते ही उसे कामया के साथ घटा इन्सिडेंट याद आ जाता है.. वो अपनी सास की बातो में इतना खो गयी थी कि उसने सब कुछ भुला दिया था. अपनी सास की दादी बन ने की इच्छा अंजलि को नये सपनो की दुनिया में ले गई और सलीम की बाबू का नाम लेना अंजलि को वापस वास्तविक दुनिया में ले आता है...

अंजलि: काका..

सलीम: जी बोलिए..

अंजलि: काका एक बार देख लीजिए ना कामया को क्या वो सही है अब..

सलीम: जी में देखता हूँ.

अंजलि: थॅंक यू काका में बस 10 मिनिट में आ रही हूँ..

अंजलि इस वक़्त नहाने के बाद कपड़े चेंज कर रही थी...

सॉरी में वो सीन नहीं दिखा सकता क्यूकी अंजलि का गेट लॉक है भाई...

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