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Adultery Meri Bhabhi Ma मेरी भाभी माँ

“हाँ साली माफ़ कर देंगे चल उधर कोने मे चल, थोडा तेरा रस तो निचोड़ ले .”

एक ने भाभी के जिस्म को देखकर कहा

“मादर चोद “

मैं उठ खड़ा हुआ था और उसके कॉलर को पकड़ चुका था ,मेरी आँखे गुस्से मे लाल थी ,

“पोलीस वाले का कॉलर पकड़ता है साले “

दूसरा चिल्लाया

अब पता नही दिन भर का गुस्सा था या क्या था मैने एक खीच कर झापड़ उसके गालो पर जड़ दिया …सभी बस मूह फाडे मुझे ही देख रहे थे ..

“मादरचोद पोलीस वाले पर हाथ उठाता है “

दूसरा कुछ करता उससे पहले एक लात उसके पेट पर पड़ चुका था ,वो बिल्कुल ही बेहाल सा नीचे पड़ा था, तभी एक घुसा पहले के पेट मे

भी लगा दिया ,वो भी एक ही घुसे मे तड़पता हुआ नीचे पड़ा हुआ था ..

ये सब देख कर भाभी की हालत भी खराब हो चुकी थी उन्होने मेरा हाथ खिचा जैसे बोल रही हो कि भागो यहाँ से ..

मुझे भी मेरी ग़लती समझ आने ल्गी थी लेकिन अब देर हो चुकी थी क्योकि एक पोलीस की गाड़ी तभी हमारे पास आई …और दोनो की हालत देखकर वही रुक गई

“ये क्या हो रहा है ..”

एक इनस्पेक्टर वहाँ से निकला उसे देख कर दोनो ही उठ खड़े हुए, दोनो ने उसे सलाम ठोका ..

“साहब ये साली रंडी है और ये उसका दल्ला है, दोनो यहाँ ग्राहक खोज रहे थे “

एक सिपाही बोल उठा उसकी बात सुनकर मेरा माथा फिर से खनक गया था, मैं उसे एक और घुसा लगा देता लेकिन भाभी ने मेरा हाथ थाम लिया ..

वही इनस्पेक्टर ने एक बार भाभी के जिस्म को गौर से देखा, पता नही ऐसा क्या था उनके जिस्म मे जो हर कोई उन्हे ही घूर रहा था, उसने

अपनी जीभ अपने होंटो पर चलाई ..

“वाह ये रांड़ तो मस्त लग रही है, कितना लेती है रे एक रत का “

उसकी आवाज़ मे कुछ ऐसा था कि मैं काबू से बाहर होने ल्गा था , मेरा मन किया की साले का मूह तोड़ दूं ,वही भाभी ये सब सुनकर भी मेरा हाथ जोरो से जकड़े हुए थी ..

वो इनस्पेक्टर मुझे देखने लगा

“क्यो बे बहुत दम दिखा रहा है, ले चलो साले को थाने इसका दम निकालते है वही इस रंडी के भी मज़े लेंगे इसी के सामने “

उसका इतना कहना ही था कि मैने ज़ोर लगाया और मेरा बाजू जो कि अभी तक भाभी के हाथो मे था वो छूट गया मैं आगे बढ़ने ही वाला था की एक आवाज़ आई ..

“ए इनस्पेक्टर, सालो चोर उचक्को को तो पकड़ते नही हो और सीधे साधे लोगो को परेशान करते हो ..”

हम सभी उसी आवाज़ की ओर देख रहे थे, एक काला कलूटा, लंबा चौड़ा आदमी सामने खड़ा था, चहरे मे हल्की दाढ़ी थी वही बड़ी बड़ी

मुन्छे …
 
“कालवा, ये तेरा मामला नही है इसमे मत पड़ “

इनस्पेक्टर गरजा

“मैं बहुत देर से इन लोगो को देख रहा हूँ, बेचारे परेशान लगते है और पोलीस वाले मदद करने की बजाय इनका ईस्तमाल करना चाहते हो ..”

“देख कालवा ..”

“तू देख इनस्पेक्टर ग़रीब लोगो को छेड़ा ना तो तेरे सभी छेद बंद कर दूँगा समझ ले “

कालवा की आवाज़ मे वो बात थी की वहाँ खड़ा हुआ हर शख्स चुप हो गया, पोलीस वाले भी बस इनस्पेक्टर पर नज़र जमाए हुए थे वही

इनस्पेक्टर को समझ नही आ रहा था कि वो क्या करे जैसे वो कुछ सोच रहा था…

“कालवा बोला ना कि ये तेरा मामला नही है, तू क्यो भगवान बनने की कोशिस कर रहा है, साला पूरा शहर तो भूखे नंगो से भर गया है “

“यही भूखे नंगे तुम अमीरो का काम करते है समझ लेना, मजदूरो की सर्की ना तो फिर क्या होगा तू जानता है, छोड़ उसे और जा अपने रास्ते “

कालवा की आवाज़ मे एक धृड़ता थी, इनस्पेक्टर ने मुझे गौर से देखा फिर एक नज़र भाभी के जिस्म पर डाली ..

“साले आज तू बच गया लेकिन कभी मेरे हाथ आया ना तो देख तेरी गर्मी कैसे निकलता हूँ और इस रांड़ की तो ..”

“ए…. लड़की से इज़्ज़त से बात कर “

कालवा फिर से चिल्लाया, इनस्पेक्टर बिना कुछ बोले ही वहाँ से चला गया था …..

इस बार कालवा हमारे सामने था ..

‘क्या रे इतनी रत को यहाँ क्या कर रहे हो “

मैने अपनी पूरी की पूरी स्टोरी उसे सुना दी ,कालवा ने एक बार भाभी पर उपर से नीचे नज़र डाली , ये आदमी भी अंजान ही था, उसके मूह से शराब की बदबू भी आ रही थी , लेकिन फिर भी मुझे कालवा मे एक अजीब सा भरोसा हो गया था वो यहाँ हमारे लिए किसी संकटमोचन जैसा साबित हुआ था ..

“हूंम्म तो बेटा तुम्हारी स्तिथि तो बहुत ही गंभीर है, रहोगे कहाँ कुछ सोचा है “

मैने ना मे सर हिलाया

“देखो इस शहर मे कोई भी किसी के लिए मुफ़्त मे कुछ भी नही करता, मैं तुम्हे सस्ते मे एक खोली दिलवा दूँगा वही रह जाओ, लेकिन अभी तुम्हे उसके लिए कुछ पैसे देने होंगे, कुछ पैसे है तुम्हारे पास ..

“जी है लेकिन थोड़े ही है ..”

“कोई बात नही, झोपड़ पट्टी की खोली सस्ती ही होगी, एक महीने का किराया आज दे दो, बाकी दूसरे महीने के लिए मैं तुम्हे कल ही किसी

काम मे लगवा दूँगा, अब तुम जवान हो तो इससे तो काम नही करवाओगे, खुद मेहनत करो और इसे भी पालो ..”

मैने उसकी बात मे सर हिलाया, हम उसके पिछे पिछे जाने ल्गे ,एक ही घंटा हुआ होगा उसने हमारे हाथ मे एक चाबी थमा दी और कुछ पैसे

ले लिए …उसके जाने के बाद हम कमरे मे आ गये ,उसे देखकर मेरी आँखो से आँसू ही निकल गये थे, वही हाल भाभी का भी था ……

“तुम्हे कहाँ महलो मे रहना था और मेरे कारण तुम इस झोपडे मे रहना पड़ रहा है, दुनिया की सारी मुसीबाते मैने तुम पर डाल दी, अब भी

वक़्त है सोनू तू चले जा मुझे छोड़ कर “

भाभी फफक पड़ी थी ..मैने पूरे कमरे मे नज़र डाली ,एक ही कमरा था वो भी टूटा फूटा सा, जर्जर होती सी दीवारे थी ,हल्की रोशनी वाला एक बल्ब लगा था वो ही पूरे कमरे को प्रकाशित करने के लिए काफ़ी था, कोई समान वहाँ नही था, ज़मीन फर्श की थी ,मैने एक कोने मे अपना समान डाला ,भाभी अभी भी बुत बने हुए वही खड़ी थी ..

मैने उनकी बाँहो को अपने हाथो मे पकड़ा..

“भाभी अब यही हमारी जिंदगी है ,अगर आप के साथ रहने के लिए मुझे स्वर्ग छोड़ कर नर्क मे जाना पड़े तो मैं ख़ुसी खुशी वहाँ चले जाउन्गा क्योकि मैने जानता हूँ जहाँ आप जैसी औरत हो वो वही स्वर्ग बना देगी ,मेरा भाई चूतिया था जिसने आपकी कद्र नही की मैं उसके जैसा चूतिया नही हू …”

भाभी नम आँखो से कुछ देर मुझे यू ही देखती रही और फिर मुझे खुद के बाँहो मे घेर लिया, वो मेरे सीने मे सर रखकर रोने लगी …

“तू कितना बड़ा हो गया रे, अपनी भाभी से इतना प्यार करता है मेरा सोनू ,जब मैं आई थी तो तू एक मासूम सा बच्चा था और आज एक पूरे मर्द जैसे मेरी इज़्ज़त की रक्षा कर रहा है ..”

मैने भी अपनी बाँहो मे उन्हे समा लिया था, मैने उन्हे अपने से और भी जोरो से चिपकाया जैसे मैं नही चाहता कि वो मुझसे दूर चले जाए …

ये एक नये सफ़र की शुरूआत थी और एक पुराने सफ़र का अंत भी
 
अपडेट 5

बिस्तर तो हमारे पास नही था हम दोनो फर्श मे ही लेट गये थे,शरीर की थकान इतनी थी कि नींद कब आई पता ही नही चला,दीवार से सॅट कर भाभी सो गयी थी वही मैं उनके बाजू मे ही सोया था ,कमरा इतना बड़ा भी नही था कि हम कही दूर दूर सो सकते,दो लोगो के सोने के

बाद थोड़ी जगह और बची थी ,उसमे हमे अपने बाकी के समान को रखना था ,खैर अभी तो हमारे पास कुछ था ही नही ….

मेरी नींद किसी के दरवाजा खटखटाने से खुली ,मेरे साथ भाभी भी जाग गई थी ,आवाज़ देने वाली कोई औरत थी..मैने दरवाजा खोला ..और वो हमे देखकर मुस्कुराइ ..

“तो तुम लोग हो जिन्हे कालवा रात मे लाया “

मैने हां मे सर हिला दिया

“ओह देखने मे तो अच्छे घर के लगते हो भाग कर आए हो क्या ..”

अब मैं उनसे क्या कहता ,मैं कुछ जवाब देता उससे पहले ही वो बोल पड़ी ..

“अरे छोकरि तेरा नाम क्या है..”

“जी जी आरती ..”भाभी ने बड़े ही सभ्य तरीके से कहा

“ओह्ह तो चल यहाँ सुबह सुबह ही पेट साफ कर ले वरना फिर भीड़ हो जाएगी ,सरकारी सुलभ है पास ही ,पूरी बस्ती वही आती है तो भीड़

लग जाता है ,सभी औरतें सुबह जल्दी ही जाती है वहाँ ,वही से नहा कर भी आ जाना ..”

भाभी ने हाँ मे सर हिलाया और अपने बॅग से कुछ कपड़े निकाल कर उसके साथ चली गई ,मैं फिर से वही सो गया था लेकिन इस बार मुझे

फर्श के कठोरता का आभास होने लगा था ..

1 घंटे बाद वो वापस आ गई ,उनके चहरे मे एक मुस्कान थी,

मुझसे नज़र मिलते ही उन्होने कहा

“यहाँ की औरते तो हमारे गाँव जैसी ही है ,लगता है मैं यहाँ अच्छे से रह लूँगी ,यहाँ औरते मिलकर एक सहकारी समूह चलाती है जिससे सरकारी मदद भी मिलती है ,वो लोग मिल्कर कपड़े सीलने का काम करती है “

उनके आँखो मे आई चमक से मुझे बहुत राहत मिली ,थोड़ी देर मे कालवा भी आ गया ,मैं उसके साथ चला गया,सच मे मुझे मेरे गाँव की ही याद आ गयी लोग कुछ ऐसे ही थे लेकिन यहाँ के सभी लोग बस मजदूर ही थे मुझसे मिलने और मेरी कहानी जानने का कौतूहल सभी के

अंदर था ,वहाँ मुझे पता चला कि कालवा एक तरह से यहाँ का डॉन ही है और जो औरत सुबह आई थी वो उसकी बीवी थी ..

कालवा ने मुझे 9 बजे तक अपने साथ चलने को कहा,खाना भी कालवा के घर से आ गया था ,

“देख जहाँ ले जा रहा हू वो यहाँ के बाप है ,उनके सामने ज्यदा बोलना मत समझा “

कालवा ने जाते हुए मुझसे कहा

‘जी भाई “

थोड़ी देर मे बाकी के लोग भी साथ हो लिए ,हम फिर से उसी स्टेशन के पास थे,बस स्टॅंड के पिछे एक गोदाम था कालवा वही मुझे काम

दिलवाने वाला था ,मुझे बाहर ही रुकवा कर कालवा अंदर गया थोड़े देर मे मुझे भी बुला लिया गया ..

“लाला साहब यही लड़का है जिसके बारे मे मैने बताया था “

लाला ने मुझे उपर से नीचे तक देखा ..

“हूंम्म दिखने मे तो कुछ खास नही है फिर भी पोलीस वाले को मार दिया “

उन्होने मुझे घुरते हुए कहा
 
“साहब मारने के लिए शरीर नही बल्कि जिगर चाहिए “

मैने बहुत ही शालीनता से जवाब दिया ,वही कालवा मुझे घूर्ने ल्गा था जैसे मुझसे कोई गुनाह हो गया हो ,लेकिन शायद लाला को मेरी बात पसंद आ गयी थी ..

“हुम्म बढ़िया ,चलो ठीक है इसे लोडिंग वाले काम मे लगा दे ..”

“साहब कुछ कम मेहनत वाला काम दे दीजिए ना नया लड़का है “कालवा ने लाला से रिक्वेस्ट किया

“अरे नया है तो क्या साला मैं कोई धर्मशाला तो खोल के नही बैठा हू जो है वो करेगा तो करे वरना जाए यहाँ से “

लाला ने साफ साफ शब्दो मे जवाब देदिया था ,मुझे नौकरी करनी ही थी चाहे जो भी हो जाए ,मैने कालवा को आँखो से ही इशारा किया कि मुझे काम करने मे कोई दिक्कत नही है …

और मैने जीवन का पहला कम किया, बोरियो को ट्रको मे उतारने चढ़ाने का काम ,ऐसे लगा जैसे हड्डिया टूट गई हो,तब जाकर मुझे 300 रुपये दिए गये ,पहली बार अपनी कमाई को हाथो मे लेकर मैं फूले नही समा रहा था,मुझे याद आया कि घर मे खाने के लिए कुछ नही है वही

बिस्तर भी नही है ,लेकिन 300 मे आख़िर क्या क्या आ सकता था ,

कालवा ने मुझे देसी दारू ऑफर की लेकिन मैने उसे साफ मना कर दिया,मैने दारू कभी नही पी थी और पीने का कोई इरादा भी नही था ,मैं तो बस जल्दी से जल्दी जाकर भाभी के हाथो मे अपनी ये कमाई देना चाहता था ,बाकी के लोग दारू पीने चले गये थे और मैं घर की ओर

भागा ..

घर या वो एक कमरे की खोली ही अब मेरा घर थी ,वो मेरे लिए किसी महल से कम भी ना थी क्योकि वहाँ मेरी प्यारी भाभी माँ रहती है ..

कमरे का दरवाजा खटखटाना नही पड़ा क्योकि वो पहले से ही खुली हुई थी ,वहाँ मुझे दो महिलाए बैठी हुई दिखाई दी ..

भाभी मुझे देखते ही खुश हो गयी थी ..

“अच्छा आरती हम चलते है …”वो दोनो ही मुस्कुराते हुए निकल गयी ..

मैं देखे कर हैरान था ,कोने मे एक चूल्हा बना दिया गया था वही एक घड़ा भी रखा हुआ था ,कुछ बर्तन और राशन समान के डिब्बे ..

“ये क्या है भाभी ..”

वो मुस्कुराइ

“अरे यहाँ के लोग दिल के बहुत अच्छे है देखने मे ग़रीब ज़रूर है लेकिन दिल के बहुत ही बड़े लोग है ,पास की राशन की दुकान वाले से मेरी पहचान करवा दी उसने उधार मे समान दे दिया और ये बिच्छाने के लिए बिस्तर भी पास . दुकान से उधार मे ले आई ,शोभा(कालिया की बीवी) बोली कि जब तुझे पहली पगार मिलेगी तो सब लौटा देना ,जानता है यहाँ पर कपड़े सीलने का बड़ा सा समूह है सूपरवाइज़र ने तो

मुझे देखते ही काम पर रख लिया …अब सब ठीक हो जाएगा सोनू दिल लगाकर काम करूँगी और तू फिर से पढ़ना शुरू कर सकता है अब “

मैं खुश था इसलिए क्यो कि ये सब हो रहा था, नही, बल्कि इसलिए क्योकि इससे भाभी के चहरे मे चमक थी ,वो खुस थी और उनकी ख़ुसी के लिए मैं कोई भी कीमत चुकाने को तैयार था …

मैने जेब से अपनी पहली कमाई निकाली और उनके आगे कर दिया ..

“भाभी ये मेरी पहली कमाई “

इसे देखकर वो बहुत ही भावुक हो गई लेकिन जैसे उन्होने मेरे हाथो को उन्होने ध्यान से देखा ..

“तेरे हाथो मे तो छाले पड़ गये है..”
 
उनकी आँखो से पानी गिरने लगा था..

“हां आदत नही है ना इसलिए कुछ दिन मे आदत हो जाएगी “

उन्होने खिचकर मुझे अपने सीने से ल्गा लिया..

“नही नही तू कल से ऐसे काम मे नही जाएगा मैं कैसे भी करके कुछ कमा लूँगी तू बस पढ़ाई कर, ये दिन देखने के लिए तो नही आया था ना मेरे साथ “

“ओहो भाभी आप भी ना, दोनो मिलकर कमाएँगे तब तो यहाँ से निकल पाएँगे ,वरना क्या सारी जिंदगी यही रहना है “

“नही सोनू तुझे मेरी कसम है तू ऐसा काम नही करेगा “

मैने उनके चहरे को अपने हाथो से जकड लिया ,उनका वो प्यारा सा चेहरा उनके ही आँसुओ से भीग चुका था ,बड़ी बड़ी आँखे अभी भी नम थी ,मुझे अपने भाई की किस्मत पर दुख होता है कि उसने इन्हे छोड़ दिया था ,इतनी सुंदर, ममता से भरी हुई थी मेरी भाभी ,मैने बड़े ही प्यार से उनके गालो मे एक किस किया ,मेरे होंठो मे उनके आँसू भी लग गये थे थोड़ा सा नमकीन सा स्वाद मेरे जीभ मे लगा ..

“भाभी मैं अब बच्चा नही हूँ पूरा मर्द बन गया हू ,आप क्यो फिक्र करती हो ,मैं पढ़ुंगा भी और कमाउन्गा भी ,और अपनी भाभी को रानी बनाकर रखूँगा “

मेरे बात से उनके होंठो मे एक मुस्कान तो तैरि लेकिन आँखे अभी भी गीली ही थी ,उन्होने मेरे गालो पर अपना हाथ रख दिया और बड़ी ही ममता से सहलाया ..

“इतना प्यार क्यो करता है तू अपनी भाभी से “

मैने उन्हे पास बिछे हुए बिस्तेर मे बिठा दिया और उनके गोद मे सर रखकर लेट गया …

“क्योकि आपने मुझे जितना प्यार दिया उतना तो मेरी माँ ने भी मुझे नही दिया,आप मेरे लिए मेरी माँ हो मेरी बड़ी बहन भी हो ,और मेरी सबसे अच्छी दोस्त भी …”

वो बड़े ही प्यार से मेरे बालो को सहला रही थी और थोड़ा झुक कर उन्होने मेरे माथे पर एक किस किया ..

“चल अब प्यार जताना हो गया हो तो कुछ खाने के लिए बना दूं बहुत भूख लग रही है “

मैं भी उनके गोद से उठ गया था…

“भूख तो मुझे भी बड़ी तेज लगी है लेकिन खाएँगे क्या ???”

वो थोड़ी देर सोची फिर ध्यान से राशन की ओर देखने ल्गी

“सब्जिया तो है नही आज खिचड़ी ही खा लेते है “

जब सोने का समय आया तो मैं थोड़ा असमंजस मे फँस गया था ,बिस्तर एक ही था जो की ज़मीन मे बिच्छा हुआ था और भाभी उसमे सो नही रही थी ..

“मुझे कुछ नही पता बिस्तर मे तू सोएगा मैं फर्श मे ही सोउंगी “

उन्होने ज़िद की

“क्या भाभी आप भी आप बिस्तर मे सोइए मैं फार्स मे सोउंगी “

“अरे तू इतनी मेहनत कर रहा है तेरे शरीर को ज्यदा आराम की ज़रूरत है “

उन्होने मुझे लगभग डाँटते हुए ही कहा ..

“अच्छा अगर आप बिस्तर मे नही सोवोगि तो मैं भी नही सोता जाओ “

मैने झूठमूठ ही सही अपना मूह फूला लिया था ..वो मेरे गालो को अपने हाथो मे भर ली .और जोरो से हिला दिया

“बदमाश कही का …चल ठीक है दोनो ही सो जाते है “

मैने एक बार उन्हे देखा, वो बस मुस्कुरा रही थी , उन्होने बिस्तर बिच्छाया और फिर कोने मे सो गई बिस्तर मे थोड़ी सी ही जगह बची थी ..

“आजा यहाँ सो जा “

मैं थोड़ा घबरा रहा था ..

“अरे इतना बड़ा हो गया है अभी भी मुझसे घबराता है ,चल आ “

मैं उनके बाजू मे जाकर लेट तो गया था लेकिन उनका जिस्म मेरे जिस्म से छु रहा था और वही मुझमे थोड़ी अजीब सी फीलिंग का जन्म हो

रहा था ,उन्होने मेरा चेहरा अपनी ओर किया और मेरे माथे मे एक किस कर दिया ..

“सोजा बेटे …”

उनके चहरे मे आई वो प्यारी सी मुस्कान इतनी प्यारी थी कि मैं बस उसे देखता हुआ खो ही गया था ..

“क्या हुआ ?? ऐसे क्यो देख रहा है “

“आप बहुत ही प्यारी हो भाभी “

मैं अब भी उन्हे देख रहा था ..वो बस मुस्कुराइ

“चलो सो जाओ “

वो पलट कर सो गई ,

उन्होने अभी एक पुरानी साड़ी पहनी थी और ब्लाउस, उनकी पीठ का कुछ हिस्सा मुझे दिख रहा था लेकिन उनके लंबे बाल बिखरे हुए थे,पता नही मेरे अंदर क्या हुआ मैं उनसे सॅट गया और बालो को एक तरफ़ करके उनके खुले हुए कंधे पर एक किस कर दिया …

“सोनू ..”

भाभी ने हल्के से कहा लेकिन वो पलटी नही मैने अपने हाथ को उनकी कमर से लपेट लिया और उनसे बिल्कुल ही सॅट कर सोने ल्गा …

मेरे पूरे शरीर मे काम की वजह से आज तगड़ा दर्द था और बिस्तर कोमल तो नही लेकिन फर्श से तो बेहतर था मेरी नींद लगने ल्गी थी और मेरा एक पैर भाभी की कमर को घेर चुका था ,नींद मे अचानक मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरे हाथो को पकड़ा है ,शायद मेरे हाथ भाभी के

पेट से उठते हुए उनके वक्ष स्थलो(बूब्स) तक पहुचने वाले थे इसलिए भाभी ने बड़े ही प्यार से उसे पकड़कर नीचे कर दिया था ,मेरे चहरे मे

बस एक मुस्कान थी और आँखो मे अब गहरी नींद….
 
अपडेट 6

अगले दिन जब मैं काम पर गया तो मुझे वहाँ वो इनस्पेक्टर दिखा जो उस दिन बस स्टॅंड मे था ,मैं समान से भरे हुए बोरे उठा कर एक ट्रॅक मे डाल रहा था ,वो इनस्पेक्टर लाला के साथ कुछ बाते कर रहा था ,मैने उसे देखते हुए भी अनदेखा कर दिया लेकिन ना जाने कैसे उसकी

नज़र मुझपर पड़ ही गई ..

थोड़ी देर मे ही वो मेरे पास पहुचा साथ मे लाला भी था ,

“तू वही है ना जो उस रात बस स्टॅंड मे मिला था “

वो थोड़ी दूर खड़े मुझे घूर रहा था, मैने बस हाँ मे सर हिलाया ..

“लाला जानता है उस रात ये और इसकी एक छमिया मुझे मिले थे साले ने दो कॉन्स्टेबल को मार दिया था वो तो कालवा वहाँ आ गया वरना

,इसकी उस माल को नंगा करके नचाता “

उसकी बात सुनकर मेरा दिमाग़ खनकने लगा था मैने उस इनस्पेक्टर को घूरा ..

“क्या घूर रहा है बे मारेगा मुझे “

वो आगे आ ही रहा था कि लाला ने उसे रोक दिया ..

“अरे पांडे साहब जाने भी दीजिए नया लड़का है थोड़ी गर्मी ज्यदा है इसमे “

“साले की गर्मी तो मैं निकालूँगा, मेरे हत्थे चढ़ा तो फिर देखना क्या हालत करता हूँ साले की “

इतना बोलकर वो तो चला गया फिर लाला मुझे घूर्ने ल्गा, मैं अपना काम ही कर रहा था की उसने मुझे अपने पास बुलाया ..

“क्यो बे शहर मे नया नया आया है और इतनी गर्मी दिखा रहा है ,जानता है कि ये इनस्पेक्टर क्या कर सकता है “

“जानता हूँ साहब लेकिन ये साला नही जानता कि मैं अपनी भाभी के लिए क्या कर सकता हूँ ..”

वो मुझे और भी अजीब निगाहो से घुरने लगा था

“क्या कर सकता है “

“जान से मार दूँगा साले को अगर उनपर नज़र भी डाली तो “

लाला कुछ समझने की कोशिस कर रहा था तभी कालवा की आवाज़ आई ,

“बोला था ना इस लड़के को कोई दूसरा काम दो आग है साले मे “

कालवा वही थोड़ी दूर खड़े हुए हमारी बाते सुन रहा था ..
 
“हुम्म आग तो है ,चल टेस्ट भी कर लेते है ,ले जा इसे हामिद के पास ,वो देख लेगा “

कालवा ने सर हिलाया वही लाला ने किसी को फोन लगाया और कालवा मुझे लेकर एक बाइक मे बैठा कर कही ले गया ,मुझे दो तीन चीज़े अभी भी समझ नही आ रही थी पहला कि कालवा के पास ये बाइक कहाँ से आई दूसरा कि ये साला कालवा जब दूसरी जगह पर काम

करता है तो फिर यहाँ आया कैसे ..

और मैने ये पुच्छ ही लिया

“अरे छोटे मैं तो लाला के पास आया था काम से और ये मेरे सेठ की बाइक है…”

“आपका सेठ कॉन है “

“है एक कभी ले चलूँगा तुझे वहाँ पर साला चूतिया आदमी है वो पूरे का पूरा, चल अभी हामिद से मिल ,तू उसको पसंद आ गया तो तुझे गॅंग मे शामिल कर लेगा “

“गॅंग भाई ये कैसा धंधा है ..”

“साले इस शाहर मे अगर किसी भी चीज़ मे सबसे ज़्यादा पैसा है तो यहीं है ,पैसे से नहाएगा तू “

“भाई मुझे पैसे उतने ही चाहिए जितने मे मैं अपनी और अपनी भाभी की जिंदगी बेहतर कर सकूँ ,हम सुकून से जी ले यही बहुत है “

कालवा ने गाड़ी मे अचानक से ब्रेक मार दिया ..

“साले मतलब तुझे जीवन भर मज़दूरी ही करना है “

“भाई मुझे कोई ग़लत काम नही करना है “

कालवा ने मुझे ध्यान से देखा

“चल ठीक है तुझे अगर यही करना है तो यही कर ,तुझे फिर से छोड़ देता हू लाला के पास, कभी अगर ज़रूरत पड़ी तुझे मेरी तो बताना मैं तुझे हामिद से मिलवा दूँगा “

“जी भाई “

मैं ग़रीब था मेरे पास पैसो की ज़रूरत भी थी लेकिन मैं किसी भी कारण से ऐसा काम नही कर सकता था जिससे मेरी भाभी को कोई

परेशानी हो आख़िर ग़लत काम करके मैं उनके सामने कैसे जाता..

शाम जब मैं घर पहुचा तो फिर से शरीर का अंग अंग दर्द दे रहा था और कल से ज़्यादा दर्द दे रहा था ,पूरा शरीर ही टूटा हुआ लग रहा था, भाभी मुझे देखते ही समझ गई थी कि मेरे शरीर मे दर्द हो रहा है , उन्होने मुझे बिस्तर मे लेटने के लिए कहा और अपनी शर्ट भी उतारने की हिदायत दे दी , उन्होने सरसो का तेल गर्म करके मेरे शरीर पर मलना शुरू कर दिया ..

“अरे भाभी इन सबकी क्या ज़रूरत है “

“देख तू काम करना चाहता है ,ठीक है मैं मना नही करूँगी लेकिन ,तुझे दर्द हो रहा है ये मैं नही देख सकती बस ,अब चुप चाप लेटा रह और मुझे मालिश करने दे “

“अरे भाभी आप भी ना बच्चो जैसे जिद्दी हो रही हो “

मेरी बात का उन्होने कोई भी जवाब नही दिया वो बस चुप चाप मालिश करती रही ,उन्होने मेरे पीठ पर तेल लगाया और साथ ही साथ मेरे हाथ और पैरो मे भी अच्छे से मालिश कर दी ..

“अब थोड़ा ठीक लगा”
 
उन्होने मुस्कुराते हुए कहा

“पहले से भी अच्छा हो गया हूँ मैं ,लेकिन मालिश के कारण नही बल्कि आपके प्यार के कारण “

उन्होने मेरे गालो जो जोरो से खींचा

“बहुत मस्का मारना सीख गया है ,चल खाना बना दिया है खा ले “

मैं रोटियाँ ख़ाता रहा और भाभी मेरे लिए गर्म गर्म रोटिया देती रही ..

“आप क्यो नही खा रही हो ??”

“पहले तू तो खा ले “

“नही आपको भी मेरे साथ ही खाना होगा”

दो तीन रोटियाँ खाने के बाद मैने कहा

“अरे बाबा रुक तो जा पहले तू खाना खा ले “

“चलो आप भी खाओ “

मैने रोटी का एक टुकड़ा उनके मूह के पास लाया और उन्होने अपना मूह खोल दिया, रोटी का टुकड़ा अंदर चला गया था वो उसे चबाने लगी थी. लेकिन उनके आँखो मे पानी की कुच्छ बूंदे आ रही थी

“क्या हुआ भाभी ??”

“इतना प्यार आज तक मुझे किसी ने नही किया रे , तेरे भैया ने मेरा हुष्ण देख कर मुझसे प्रेम कर लिया था लेकिन वो प्रेम बस उनका वहम ही निकला , वो प्रेम नही शायद जिस्म की भूख थी , या फिर महज जवानी मे होने वाला एक आकर्षण , उन्होने हमेशा मेरी खुशी से पहले अपनी खुशी को प्राथमिकता दी , उनके लिए शरीर की संतुष्टि के ही मायने थे , जब तक उनका शांत नही होता तब तक तो बहुत ही प्यार

दिखाते लेकिन जब हो जाता तो बस ऐसे दिखाते जैसे उन्होने मुझसे शादी करके मुझपर अहसान किया हो , मैं एक ग़रीब घर की लड़की थी

लेकिन गैरत वाली थी अगर मुझे पता होता की वो शादी के बात अपनी दौलत का रोब मुझपर दिखाएँगे तो मैं कभी उनसे शादी नही करती ..”

वो रोने ही लगी थी , मैने उनके कंधे पर हाथ रखा ..

“मेरी वजह से तू भी दर दर की ठोकर खा रहा है , तेरे भैया को मुझपर गुस्सा था जो वो तुझपर भी निकाल रहे थे ,वरना तुझे कभी ऐसे नही

जीना पड़ता और गाँव वाले भी तेरे साथ खड़े होते “

मैं उनकी बात सुनकर थोड़ा सा हंसा , वो मुझे अजीब निगाहो से देखने लगी ..

“भाभी मुझे पता है कि अगर आप नही होती तो मेरा क्या होता , वो तो चाहते थे कि पूरी जायदाद खुद ही हड़प ले लेकिन आपके कारण नही

कर पाए मैं जानता हूँ की आप मेरे लिए उनसे भी लड़ जाती थी “

वो मुझे देखने ल्गी

“ हाँ भाभी मैं जानता हूँ , मैने आप लोगो की बाते भी सुनी थी जब माँ पिता जी का देहांत हुआ था ,जब वो आप से कह रहे थे कि इसे कुछ भी करके रास्ते से हटाना है ताकि पूरी जायदाद पर कब्जा कर लिया जाए , लेकिन आपने उन्हे मना कर दिया था यहाँ तक कि धमकी भी दे दी

थी कि अगर उन्होने ऐसी कोई कोशिश भी की तो आप सबको उनके इरादो के बारे मे बता देंगी ..”

“तूने वो सब सुना था “

भाभी आश्चर्य मे थी और मैं मुस्कुरा रहा था

“हाँ भाभी तभी से मुझे समझ आ गया था कि आप कितनी अच्छी हो , अगर आप नही होती तो शायद मैं भी नही होता इसलिए अपने को ऐसा

दोष मत दिया करो आप मेरे लिए क्या हो ये तो मैं बता भी नही सकता , आइ लव यू भाभी ..”

मैने ये उनकी आँखो मे देखते हुए कहा था ..

वो बस मुझे भीगी हुई आँखो से देख रही थी , उन्होने मेरे गालो पर अपने कोमल हाथ रख दिए ,और थोड़ा आगे आकर उन्होने मेरे गालो पर एक चुम्मन दे दिया

“मैं भी तुझसे बहुत प्यार करती हूँ बेटा “

जब भी वो एमोशनल होती थी तब वो मुझे बेटा कहती थी ..

मैने ऐसा गाँव वालो से सुन रखा था कि मेरी भाभी एक बांझ है , मतलब उन्हे बच्चा नही हो सकता , इस बारे मे मैने कभी उनसे बात नही की थी लेकिन शायद वो मुझे ही अपना बेटा मानती थी .. ये सोचकर ही मेरे होठों मे एक मुस्कान आ गई ..
 
अपडेट 7

मैं अभी अपने काम मे ही लगा हुआ था कि शोभा भाभी मुझे दौड़ते हुए आते दिखी …

“सोनू सोनू “ वो जोरो से चिल्ला रही थी

“क्या हुआ भाभी “मैं उनके पास पहुच गया था

“सोनू तेरी भाभी को कुछ लोग उठा कर ले गये “

“क्या ..?” उनकी बात जैसे मुझे कुछ समझ मे ही नही आई थी …

“कुछ लोग..”

“कॉन……. कॉन थे वो लोग ??”

मैं बुरी तरह से सदमे मे था

“पता नही बेटा लेकिन जब मैं और आरती काम के लिए निकले तो बीच मे उन्होने हमे रोका और आरती को उठा कर ले गये …”

तब तक लाला भी वहाँ पहुच गया था

“ज़रूर ये इनस्पेक्टर पांडे की करामात होगी ..”

तभी मुझे वहाँ कालवा दिखा ,वो भी बात सुन रहा था ,उसने मुझे अपनी बाइक मे बिठाया और गाड़ी दौड़ा दी ..

मेरा खून जल रहा था ,चेहरा और दिल गुस्से की आग से धधक रहे थे ,

“मुझे पता है कि वो लोग कहाँ गये होंगे..”

उसने गाड़ी एक वीरान इलाक़े मे खड़ी कर दी ,एक बड़े गोदाम जैसी जगह थी और बाहर एक जीप खड़ी थी उसकी नंबर प्लेट मे पोलीस लिखा हुआ था , मैं तेज़ी से आगे बढ़ा और गोदाम का दरवाजा खोल कर अंदर दाखिल हुआ वहाँ मैने जो भी देखा उसे देख कर मेरा दिमाग़ ही सुन्न हो गया था …

अंदर वो इनस्पेक्टर और दो उस दिन वाले सिपाही थे जिन्हे मैने मारा था उनके साथ ही साथ कुछ और भी लोग थे जो कि किसी गुंडे जैसे लग रहे थे ..

उनकी नज़र मुझ पर पड़ी तो वो इनस्पेक्टर जोरो से हंस पड़ा

“देखो देखो कौन आया है , इस साले के सामने ही इस छमिया के जिस्म की धज्जिया उड़ाउंगा फिर इसकी चमड़ी निकाल कर साले के अंदर

की पूरी गर्मी निकालूँगा ,पकडो साले को ..”

मैने पास ही पड़ा हुआ एक रॉड उठा लिया था वो गुंडे जैसे लोग मुझे पकड़ने के लिए दौड़े मैं भी उनकी ओर प्युरे ताकत से भाग रहा था ,वही थोड़ी दूर ज़मीन मे पड़ी हुई भाभी के जिस्म मे नाम मात्र का ही कपड़ा रह गया था ,दोनो सिपाही उनका हाथ पकड़े हुए थे और उन्हे ज़मीन मे लिटा दिया था ,साड़ी शरीर से निकाल दी गई थी ब्लाउस भी जैसे फाड़ दिया गया हो .. एक नज़र उनके उपेर पड़ते ही मेरा खून उबाल

मारने लगा था , वो लोग मेरे पास आ चुके थे मैने जोरो से रॉड घुमाया लेकिन ये क्या ,किसी ने पीछे से मुझे लात मार दी मैं लड़खड़ाता हुआ गिर गया था..
 
दो लोग जो सामने से आ रहे थे और एक जिसने मुझे पिछे से लात मारी थी तीनो ने मिलकर मुझे दबोच लिया था , उन्होने मुझे अपने काबू मे

कर लिया था और पकड़कर इनस्पेक्टर के पास ले गये ,भाभी की आँखो मे दहशत नाचते हुए दिखाई देने लगी थी ..

“इसे छोड़ दो तुम लोग जो बोलोगे मैं करूँगी ..”

भाभी की बात सुनकर सभी जोरो से हँसने लगे, मुझे बुरी तरह से मारा गया था , आँखो के सामने अंधेरा छा गया था लेकिन भाभी की बात सुनकर मुझे फिर से एक झतका लगा ..

मैने अपना पूरा ज़ोर लगाया था अपनी आँखो को खोलने के लिए लेकिन नाकाम रहा था , सामने की हल्की हल्की सी तस्वीर मुझे दिखाई दे रही थी ,लेकिन सब कुछ धुँधला धुँधला सा ही था ,

“तेरे साथ ही सब करूँगा मेरी जान और एक एक कर सभी करेंगे लेकिन थोड़ा रुक तो जा ,इस साले को बहुत ही गर्मी चढ़ि थी ना तो पहले

उसे तो उतारने दे ,पानी डालो रे इसके उपर आँखे खुलवाओ इसकी इसके सामने ही इसकी छमिया की इज़्ज़त उतारते है ..”

तभी मेरे उपर किसी ने थोड़ा पानी डाला मेरी आँखे थोड़ी और खुली , इनस्पेक्टर मेरे पास ही खड़ा हुआ था उसने अपने हाथो से मेरे मूह को दबोच लिया था ..

“क्यो बे मादरचोद बहुत अकड़ थी ना तेरे अंदर अब देख तेरा और इस आइटम का क्या हाल करता हूँ “

“रुक जा मादरचोद “ मेरे पास इतनी ताकत नही बची थी कि मैं कुछ ज़ोर से बोल पाता ,मैने धीरे से ही कहा

“अभी भी जान है साले मे “ वो इनस्पेक्टर हसने लगा ,

“कोई बात नही जान होनी चाहिए तभी तो ये सब देख पाएगा ..”

वो भाभी तक पहुच चुका था ,भाभी के रोने की आवाज़ मेरे कानो मे स्पष्ट थी ..

“प्लीज़ उसे छोड़ दीजिए उसे जाने दीजिए, आप जो बोलोगे मैं वो करूँगी ..”

वो फिर से गिडगिडाइ

“जाने दूँगा मेरी जान पहले तेरे मज़े तो ले लूँ “

इनस्पेक्टर ने भाभी के स्तनों को मसलना शुरू कर दिया था ,मुझे बस भाभी के रोने की आवाज़ आने लगी ,दिमाग़ पूरी तरह से सुन्न हो चुका था ,मैने आँखे बंद कर ली और अपने आप से ही बाते करने लगा

“क्या तुझे ऐसी नामर्दों वाली जिंदगी चाहिए ,क्या तेरी भाभी के साथ कोई कुछ करे उसे तकलीफ़ दे और तू यू ही आँखे बंद करके बैठा रहेगा

,क्या तू एक नामर्द है , क्या इसके बाद तू जी पाएगा … “

और इन सबका एक ही उत्तर आया .................... नही ..
 
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