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Adultery Meri Bhabhi Ma मेरी भाभी माँ

“अबे तुझे क्या हो गया “

अज्जु ने मुझे हिलाते हुए पूछा

“कुछ नही यार .. ये साली अजीब सी खबर है लेकिन इसमे तू इतना एक्शिटेड क्यो है भाई “

मैने अज्जु को घूर कर देखा ,

“अरे यार जिसका खून हुआ है ना भवानी , उसे मैं अच्छे से जानता था , वो असल मे तिवारी अंकल का खास आदमी था “

“ऊहह लेकिन इसमे तो पठान गैंग लिखा हुआ है “

“अरे भाई ये सभी लोग एक ही है , पठान गैंग अब तिवारी गैंग बन गया है … जो दोनो पहले अलग अलग थे अब एक हो गये है , वही ये जो जीवा गैंग है वो पहले शक्ति गेंग हुआ करता था , ऐसा मैने सुना है अपने पापा से , मुझे भी उतना नही पता “

“ऊहह तो जीवा गैंग वालो ने तिवारी के खास आदमी को मार दिया है “

मैने धीरे से कहा

“यही तो मजेदार बात है दोस्त … जीवा गैंग वालो ने नही बल्कि शक्ति गेंग वालो ने मारा है “

“लेकिन तूने तो कहा की दोनो एक ही है “

“हा लेकिन फिर भी अलग है , दोनो गैंग के लोग भले ही एक होई गये हो लेकिन ये स्टाइल शक्ति गैंग का था , तिवारी अंकल और मेरे पापा तो कल रात से ही बहुत बेचैन थे , ऐसे छोड़ ना यार हमे क्या … ऐसे तू तो पूरा हीरो दिख रहा है बे, सुस ने तो तुझे चमका ही दिया “

मुझे अचानक ही याद आया की मैं कहा हू , अभी ये सब सोचने का समय नही था और सोच कर मुझे कुछ मिलने वाला भी नही था, ये सब बात का पता मुझे संपत मामा से पता चल जाना था ..:

“हा यार सुस ने बोला था की आज मुझे अपने घर ले जाएगी “

“हा लेकिन आज तो मुझे लगता की वो तुझे नही ले जाएगी , उसके घर का महॉल तो आज बहुत ही गर्म होगा, भवानी उसके पिता का बेहद ही खास था “

“हुम्म “

तभी मेरी नज़र नेहा पर पड़ी जो मुझे अजीब निगाहो से देख रही थी, मैने आँखो से ही पूछ लिया की क्या हुआ और उसने आँखो से ही मुझे बता दिया की मैं अच्छा लग रहा हू ..उसकी इस अदा से मेरे मान मे एक अजीब सी टीस सी उठ गयी ..:

मेरे दिमाग़ मे अभी भी भवानी की मौत की तस्वीरे घूम रही थी, कहने को मैं शांत था लेकिन मान मे बहुत ही बेचैनी चल ही रही थी …
 
तभी मेरी नज़र नेहा पर पड़ी जो मुझे अजीब निगाहो से देख रही थी, मैने आँखो से ही पूछ लिया की क्या हुआ और उसने आँखो से ही मुझे बता दिया की मैं अच्छा लग रहा हू ..उसकी इस अदा से मेरे मान मे एक अजीब सी टीस सी उठ गयी ..:

मेरे दिमाग़ मे अभी भी भवानी की मौत की तस्वीरे घूम रही थी, कहने को मैं शांत था लेकिन मान मे बहुत ही बेचैनी चल ही रही थी …

क्लास से छूटने के बाद हम फिर से कॅंटीन मे बैठे थे की मुझे सुस आते हुए दिखाई दी ..

“हाई गाइस “:

“हाई सुस “ आज मोनिका ने ये कहा था , उसने हमेशा की तरह सुस को देखकर नाक कान नही सिकोडे थे शायद इतने दिनों मे उसके दिल से सुस के लिए नफ़रत गायब हो गयी थी उसे भी समझ आ चुका था की ये वैसी लड़की नही है जैसे वो उसे समझते थे , लेकिन नेहा का चेहरा आज भी उसे देखकर मुरझा गया था और ये स्वाभाविक भी था ..

सिवाय नेहा के सभी ने उसे ही कहा :ही:

“तो अंकित चले, आज मेरे घर जाना है तुम्हे “

उसकी बात सुनकर सभी थोड़ा चौक गये

“लेकिन आज तो भवानी की मौत हुई है तुम्हारे घर जाना ठीक होगा “

अज्जु ने कहा

“अरे तो क्या हुआ , इससे हमे क्या लेना देना ये सब पापा का पर्सनल मॅटर है “

सुस की बात सुनकर मैने एक बार अज्जु को देखा , उसने मुझे सुस के साथ जाने का इशारा किया , नेहा का चेहरा बुरी तरह से मुरझा गया था उसे ये सब बिल्कुल भी पसंद नही आ रहा था लेकिन वो बेचारी कर भी क्या सकती थी .. वो ना तो मुझसे और सुस से नज़र भी नही मिला रही थी ..

********

“वाउ यार कितना बड़ा घर है तुम्हारा “

सच मे सुस का घर किसी महल से कम नही था , और साथ ही किसी किले से भी कम नही था , इतने बंदूक धारी इधर से उधर टहल रहे थे , ऐसे लग रहा था की मैं सच मे किसी राजा के पास आ गया हू , चारो ओर बस बंदूक लिए लोगो की भरमार थी …

“ये घर है या फिर किला “

हम अभी भी उसके कार मे बैठे हुए थे , मेन गेट से अंदर आने के बाद भी उसके घर के दरवाजे तक पहुचने मे हमे समय लग रहा था, इतनी बड़ी ज़मीन मे उसका घर बना था कई एकर मे फैला हुआ गार्डन था..

“यार कितने लोग रहते हो तुम लोग इतने बड़े घर मे “

सुस मेरी बार सुनकर बस हँसे जा रही थी ..

“क्या फ़र्क पड़ता है ?? कहने को तो मेरे परिवार मे 5 लोग है , दो भाई है, मा है बाप है लेकिन फिर भी बस अकेले इन नौकरो और बॉडीगार्ड्स के साथ ही रहना पड़ता है , घर वालो को तो कभी मेरी चिंता हुई ही नही…”

वो थोड़ी उदास हो गयी जो की मुझे बिल्कुल भी पसंद नही आ रहा था

“अरे डॉन’त वरी यार मूड ठीक रखो, अपने पिता के पास मुझे ऐसे ही ले जाओगी क्या ??”

मेरी बात सुनकर वो थोड़ा सा हँसी और फिर गंभीर हो गयी

“अंकित मैं तुम्हे पापा से नही मिलवाने वाली हू”

“व्हाट ..??:व्हाट1: तो हम यहाँ आए क्यो है “

इस बार सुस के होठों मे एक मुस्कान थी , और उसने गाड़ी रोक दी

“चलो बताती हू “

हम दोनो नीचे उतरे , मैं अभी भी उस घर के विशाल सौंदर्य मे थोड़ा खो गया था, अंदर जाते ही बड़ा सा कमरा था और जैसा मैने सिर्फ़ फ़िल्मो मे देखा था और गुमावदार दो सीढ़िया , जो की दूसरी मंज़िल मे जाती थी …

हम सीढ़ियो से उपर गये और दूसरी मंज़िल के एक कमरे मे फुचे ..

“वाउ यार क्या कमरा है ये “

मैं अभी भी उस कमरे की सुंदरता से मुग्ध था ,कमरा इतना बड़ा था की गाँव का पूरा घर हो , खिड़की की जाग बड़े बड़े काँच लगाए गये थे जिसपर गोल्डन रंग के पर्दे थे , कमरे के बीचो बीच एक बड़ा सा गोलाकार बिस्तर था जिसपर भी गोल्डन रंग की ही बेडशीट से लेकर सब कुछ गोल्डन ही था , दरवाजो के रंग से लेकर टेबल तक सब कुछ गोल्डन था और साथ ही सभी चीज़ो मे बेहतरीन नक्कासी की गयी थी ..

मैं जहाँ ये सब देखकर अपना मूह फाड़ चुका था वही सुस को मेरे इस एक्सप्रेशन से मानो कोई भी फ़र्क नही पड़ रहा था

“कुछ खाओगे “

उसने पास ही रखे एक फोन को पकड़ते हुए कहा

“नही अभी तो कॅंटीन मे नाश्ता किया था “

“ओके आओ यहाँ बैठो “

उसने अपने बिस्तर की ओर इशारा किया , मैने देखा की उसके कमरे मे एक बड़ा सा सोफा भी रखा हुआ था लेकिन सुस ने मेरा हाथ पकड़कर मुझे अपने बिस्तर मे बैठा दिया ..

“अंकित मैं तुम्हे पापा से नही मिलवाने वाली और ना ही मैं चाहती हू की तुम मेरे बाय्फ्रेंड बनकर मेरे परिवार वालो के सामने जाओ , मैं तुम्हे खाम्खा ही किसी भी मुसीबत मे नही डालना चाहती , मेरे परिवार वालो को कोई भी प्राब्लम नही है की मैं किसी को भी अपना बाय्फ्रेंड बनाऊ, या फिर किसी के साथ भी कुछ भी करू लेकिन …. लेकिन आज तक मैने कभी अपने किसी भी बाय्फ्रेंड कोई घर वालो से नही मिलवाया है , ऐसे भी किसी को कोई भी मतलब नही रहता अगर तुम्हे मिलवा दिया तो वो लोग शक करेंगे और फिर ना जाने शायद तुम्हारे बारे मे पता भी करे और अगर तुम्हे हा मैने उनसे झूठ बोला हो तो फिर ……तो फिर बड़ी परेशानी हो सकती है ..”

“ओह्ह्ह्ह्ह तो ये सब तुम मुझे पहले भी तो बोल सकती थी ना , फिर यहाँ क्यो ले आई “
 
इस बार सुस के होठों मे एक मुस्कान तैर गयी थी

“क्योकि मैं तुमसे बात करना चाहती थी “

“बात तो वहाँ भी हो सकती थी “

“लेकिन वहाँ सब होते है , मैं तुमसे अकेले मे बात करना चाहती थी “

“अकेले मे क्यो..???:?: “

“बस ऐसे ही मुझे और किसी का डिस्टर्बेन्स पसंद नही आता, ऐसे भी तुम मेरे दोस्त हो वो सब नही “

सुस की ये बात सुनकर मैं हैरान हो गया था

“तुम उन्हे पहले से जानती हो ना की मुझे और मैं तुम्हारा दोस्त कब से हो गया मैं तो एक फटीचर था ना “

“हा मुझे ये फटीचर ही पसंद आ गया तो मैं क्या करू “

वो खिलखिलाई साथ ही मैं भी हंसा

“तुम समझ से बाहर हो सुस “

वो चुप हो चुकी थी, जब मैने उसे देखा तो पाया की वो मुझे ही घूर रही थी , बस एकटक मेरे ही चेहरे को देख रही थी … उसकी आँखो मे कुछ तो ऐसा था जिसे मैने कभी नही देखा था ..

“क्या हुआ ऐसे क्या देख रही हो “

“आई लव यू अंकित “

उसने ना सिर्फ़ ये कहा बल्कि मेरे बालो मे अपनी उंगलिया फँसा कर मुझे अपनी ओर खिचने लगी और साथ ही मेरे होठों मे अपने होठों को भी मिला दिया .. मैं बुरी तरह से हैरान हो चुका था, मुझे कैसा रिएक्ट करना चाहिए ये भी मुझे नही पता था , मैने बस अपने होठों को कसकर बंद कर लिए थे लेकिन वो बड़ी ही बेसब्री से मेरे होठों को चूमे जा रही थी …

मैने ज़ोर देकर उसे खुद से अलग किया ..

“सुस ये क्या कर रही हो, हम अभी तो मिले है और तुम ..”

उसने मेरे हाथो को जोरो से अपने हाथो मे पकड़ लिया था उसके आँखो मे आँसू थे जिसे देखकर मैं भी थोड़ा नर्म हो चुका था ..उसने अपने शरीर को मुझसे चिपका दिया था ..

“अंकित ये आज से नही हुआ है ये उस दिन से हुआ जब हम पहली बार मिले थे, आजतक किसी ने भी मुझसे ऐसी बात नही की थी , तुमने मेरी आत्मा को झंझोर दिया था और उसके बाद जब तुमने भाभी के हाथो का पराठा मुझे खिलाया , तुम मुझे बहुत ही पसंद आने लगे थे , और जब जब तुम्हारे पास होती हू तो मुझे लगता है की मेरी दुनिया मे कोई भी परेशानी नही है , तुमने मुझे वो हिम्मत दी है जो अभी तक किसी ने भी नही दी थी , मैं तुम्हे बहुत ही पसंद करती हुई अंकित “

“मैं भी तुम्हे पसंद करता हू सुस लेकिन … ये दोस्ती है ना की प्यार “

मेरी बार सुनकर सुस थोड़ा सा हँसी और मुझसे दूर होकर मेरे सामने खड़ी हो गयी, अभी उसने के वाइट कलर की फ्राक पहनी थी , उसके कपड़े उसके घुटने से उपर ही थे ..

“नही अंकित ये दोस्ती से कही ज़्यादा है , ये पसंद से कही ज़्यादा है , अगर तुम्हे यकीन ना हो तो ये देखो की तुम मेरे जीवन मे कितना महत्व रखते हो “

उसने अपने फ्राकक को नीचे से उठा दिया , मैं कुछ समझ पता उससे पहले ही मेरे सामने जो नज़ारा था उसे देखकर मानो मेरी साँसे ही रुक गयी थी ..

सुस ने एक सफेद रंग की ही पैंटी पहन रखी ती और उसमे लाल रंग से मेरा नाम लिखा हुआ था , अंकित … ऐसा लग रहा था जैसे उसे लिपस्टिक से लिखा गया हो ..

मैं पहली बार किसी लड़की को इस हालत मे देख रहा था , उसके मांसल जांघे मुझे साफ साफ दिख रही थी उसकी पैंटी ऐसे भी उसके योनि को छिपाने मे पूरी तरह से सफल नही हो पा रही थी , वो बहुत ही छोटी सी और पतली पैंटी थी जिसपर यदि मेरा नाम नही लिखा होता तो शायद मुझे सुस की योनि के दर्शन भी हो जाते , उसने बीचो बीच मेरा नाम लिखा था, जो की शायद उसकी योनि की दरार पर था ……..

मेरा गला ये सब देख कर ही सूख गया, ये मेरे जीवन का पहला पल था जहाँ मैं किसी लड़की को ऐसे हालत मे देख रहा था लेकिन …….

लेकिन यही काफ़ी नही था अभी तो सुस की एक और हरकत ने मेरी साँसे ही रोक दी ..

सुस ने अपनी वो पैंटी अपने पैरो से होते हुए उतार दी और उसे मेरे चेहरे मे फेक दिया ………

“ध्यान से देखो इसे अंकित ये मेरे प्यार का प्रूफ है, मैं तुम्हारा नाम उस जगह मे लगा कर घूम रही हू जिसे लड़कियो का सबसे गुप्त अंग कहा जाता है , अब भी तुम ये ही कहोगे की प्यार नही है “

अब मैं क्या कहता ..??

जो हुआ उसने तो मेरा भी दिमाग़ घुमा दिया था , एक तरफ़ मेरी साँसे बेहड़ ही तेज हो गयी थी , दिल की धड़कने तेज थी , वही दूसरी ओर दिमाग़ पूरी तरह से चक्कर खा चुका था ..

लिंग ने भी उत्पात मचाना शुरू कर दिया था ..

क्या सही क्या ग़लत कुछ भी समझ नही आ रहा था .. मैं बुरी तरह से घबराया हुआ वहाँ से भागा .. लेकिन सुस ने फिर से आवाज़ लगाई..

“रूको … मैं तुम पर कोई भी प्रेसर नही डाल रही हू , मैने तो बस अपने दिल की बात कही है … इस बारे मे आराम से सोचना अंकित और ये तुम्हारे लिए है इसे तुम ले जाओ और तुम घर कैसे जाओगे रूको मैं ड्राइवर से बोलकर तुम्हे छुड़वा देती हू ..”

सुस ने मुस्कुराते हुए अपनी पैंटी, जो की ज़मीन मे गिर चुकी थी उसे उठाकर मुझे मेरे हाथो मे दे दिया ……

“मैं … मैं इसका क्या करूँगा “

मैने घबराते हुए कहा, लेकिन वो मुस्कुराइ

“जो मन मे आए करना, लेकिन इसे अपने पास ही रखो “

और वो उसने पैंटी को मेरे हाथो से लेकर मेरे जेब मे डाल दिया ..
 
अपडेट 23

सुस की हरकत से मेरे दिमाग़ का फ्यूज़ ही उड़ चुका था, उसने मुझे घर पहुचने के लिए ड्राइवर का ऑफर दिया लेकिन मैने उसे मना कर दिया, मैं वहाँ से बाहर निकला और तेज़ी के साथ पैदल चलने लगा था ..

मैं अपने ख़यालो मे ही खोया हुआ था की मेरे कानो मे सुस की आवाज़ पड़ी

“नही …. अंकित ..”

वो जोरो से चिल्ला रही थी , मैं अचानक ही अपने ख्वाबो से बाहर आया ..

और जैसे ही मुझे थोड़ा होश आया तो मैने पाया की कोई डंडे जैसी चीज़ मेरे चेहरे के तरफ बढ़ रही थी ..

जैसे मेरे दिमाग़ के सारे तार अचानक से ही आक्टिव हो गये हो , मैं तुरंत ही झुक गया , किसी ने मुझ पर लकड़ी से वॉर किया था, मेरे झुकते ही वो वॉर बेकार हो गया और अचानक से ही जैसे अभी तक सीखी गयी सभी ट्रैनिंग मेरे अंदर से उबाल मार कर बाहर आ गयी , मेरे हाथ अपने आप ही उस मारने वाले इंसान के पेट मे जा लगे और मैने खड़े होते ही अपनी नज़र घुमाई तो देखा की कुछ 4 ब्लॅक ड्रेस पहने लोग मेरी ओर बढ़ रहे है मैं तुरंत ही एक्शन मूड मे आ गया था , उनके हाथो मे डंडे थे लेकिन मैं बिना किसी हथियार के भी उनपर भारी पड़ रहा था , मैं सीधे निशाने पर फोकस करके वॉर कर रहा था , इतने दिनों से जो मुझे सिखाया गया था आज उसका यूज हो रहा था, एक बार तो मुझे यकीन नही आया की मेरी ट्रैनिंग इतनी असरदायक थी ……

तभी सुस की आवाज़ और भी तेज हो गयी

“अरे रुक जाओ ये मेरा दोस्त है ..”

सुस जोरो से चिल्ला कर भागते हुए मेरे पास आ रही थी ..

“रूको ..” एक भारी आवाज़ फिजाओ मे गूँज उठी और सभी लोग जैसे थे वही जम गये , मैं अब भी डिफेन्सिव एक्शन मे ही खड़ा था लेकिन सुस तेज़ी से आकर मेरे पास खड़ी हो गयी और मैं भी रिलॅक्स हो गया था ..

“पापा ये मेरा दोस्त है “

सुस ने लगभग मुझे अपने पीछे छिपाते हुए कहा , मैं जो अभी भी कुछ समझ नही पा रहा था नज़र उठा कर सामने देखा ..

सामने एक लंबा चौड़ा रोबदार मूँछो वाला इंसान खड़ा हुआ मुझे घूर रहा था , कई लोग उसे घेरे हुए थे , रंग गोरा था और काली काली मूँछे पूरे चेहरे मे एक अजीब सी रंगत बिखेर रहे थे …

पापा … यानी यही शख्स था जिसे लोग तिवारी कहते है , कई गार्ड से घिरा हुआ उस शख्स की आँखे लाल थी..

“तुम्हारा दोस्त क्या अँधा और बेहरा है?? जब गार्ड्स ने उसे आवाज़ लगाई तो उसने जवाब क्यो नही दिया, ये तो पापा की तरफ़ तेज़ी से बढ़े ही जा रहा था “

एक लड़के ने कहा , शायद ये सुस का भाई होगा , वही सुस मुझे घुरने लगी , उसकी आँखो मे सवाल था लेकिन मेरी आँखे जब उससे मिली तो शायद उसे जवाब मिल गया और उसके होठों मे मुस्कान आ गयी ..

“अरे पापा असल मे मैने इसे एक पज़्ज़ल पूछा था, और शर्त रखी थी की अगर ये उसे सॉल्व कर लेगा तो इसे मैं प्राइज़ दूँगी , शायद वो उसी सवाल को सोच रहा था और गुम हो गया था क्यो अंकित “

अब उसकी बात तो सच थी मैं उसके ही सवालो मे ही तो खोया हुआ था ..

“जी हा मुझे तो पता ही नही था की कोई मुझे आवाज़ दे रहा है , जब सुस की आवाज़ मेरे कानो मे पड़ी तब मुझे होश आया “

असल मे हुआ ये था की जब मैं घर से बाहर निकला जो की एक बड़े से गार्डन के बीच मे था, मैं एग्ज़िट की तरफ़ ना जाकर गार्डन के अंदर की तरफ़ चलने लगा जहाँ शायद तिवारी और उसके साथी मिलकर बात कर रहे थे, उन्हे देख कर लग रहा था की ये सब अभी अभी कही से आए है , गार्ड्स ने मुझे आवाज़ दी होगी और मैं खोया हुआ था इसलिए मेरे उपर अटॅक कर दिया गया …..

तिवारी अभी भी मुझे खा जाने वाली निगाहो से देख रहा था , तभी एक दूसरे शख्स ने कहा जो की तिवारी से थोड़े कम उमरा का लग रहा था ..

“अच्छा तो ये तुम्हारा दोस्त है बेटी , लड़का तो बड़ा ही चुस्त है , और लड़ना भी जानता है ,कहा से सीखा ये सब “

मैं और सुस एक दूसरे को देखने लगे , मैं कुछ बोलता उससे पहले ही सुस बोल उठी

“भल्ला अंकल असल मे ये गाँव से है , यहाँ हमारे ही कॉलेज मे पढ़ता है, अज्जु का बेस्ट फ्रेंड है उसी ने मुझे इससे मिलवाया था, ये स्वास्तिक अपार्टमेंट मे रूम लेकर रहता है , इसका परिवार गाँव मे है ..शायद वही इसने ये सब सीखा होगा “

अब ये सुस ने कौन से अपार्टमेंट का नाम ले लिया ?? फिर भी सुस की बातों मे बहुत कुछ सच था तो मैने भी कॉन्फिडेन्स के साथ कहा

“जी वो गाँव मे अखाड़ा मे कुश्ती लड़ा करता था और साथ मे एक टीचर ने थोड़ी मार्शल आर्ट भी सिखाई थी तो बस वही है ..”

सुस और मेरी बात सुनकर भल्ला खुश हो गया , अब मुझे याद आया की असल मे अज्जु के पिता को भी भल्ला ही कहा जाता है शायद यही अज्जु का पिता था ..

“ओह ये तो बढ़िया बात है , चलो तुम्हारी और अज्जु की दोस्ती तो हुई “

अब मुझे कन्फर्म हो गया था की यही भल्ला है, भल्ला तिवारी की तरफ़ मुड़ा

“ऐसे एक बात तो है मंत्री जी , लड़के मे दम है , ऐसे ही हमारे लोगो पर अटॅक हो रहे है , आपके परिवार पर भी हमला हो सकता है क्यो ना इस लड़के को ही सुस का बॉडीगार्ड बना दिया जाए , साथ मे रहेगा सुस को भी कंपनी मिल जाएगी और ये अज्जु का दोस्त भी है तो कोई दिक्कत भी नही होगी , इससे आपकी भी चिंता सुस की तरफ़ से ख़त्म हो जाएगी “

मैं कुछ बोलने ही वाला था उससे पहले ही सुस बोल उठी

“हा अंकल ऐसे भी ये अपने घर वालो से झगड़ा कर के आया हुआ है , अपार्टमेंट इसके घर वालो से मिल गया लेकिन अभी इसे पैसे भी चाहिए तो कोई जॉब भी ढूँढ रहा था “

सुस की बाते मेरे दिमाग़ से बाहर जा रही थी आख़िर वो करना क्या चाहती थी ????:?:

“हुम्म ठीक है , आज से इसके लिए भी एक कमरा साफ करवा दो ये यही रहेगा “

तिवारी ने अपनी भारी आवाज़ मे बस इतना ही कहा और वहाँ से निकल गया ..

वही सुस उछाल कर मेरे हाथो को अपने हाथो मे दबा ली , और मैं मूह फाडे ये सब सोचता ही रह गया की ये साला आख़िर हुआ क्या ????

***********

“ये तुमने मुझे किस भसड मे फँसा दिया है ?? “ :

मैं सुस के उपर बुरी तरह से गुस्सा था, वो मुझे अपनी कार मे बैठा कर ना जाने कहा ले जा रही थी ..

“अरे तुम समझते नही , देखो इस तरह से हम दोनो एक दूसरे के पास रह पाएँगे और तुम्हे भी तो अज्जु की शादी तोड़नी है ना “

“हा लेकिन अब मुझे तुमसे डर लगने लगा है “

मेरी बात सुस जोरो से हँसी
 
“इतने तगड़े मर्द हो, इतनी मस्त बॉडी है क्या फाइट करते हो और छोटी सी बात से डर गये “

उसके होठों मे अभी भी शरारत भरी मुस्कान थी

“तुमने हरकत ही ऐसी की थी ये क्या है “

मैने अपने जेब की ओर इशारा करके दिखाया जिसमे उसकी पैंटी रखी हुई थी

“मेरा प्यार “

“तुम्हारे इसी बिहेवियर की वजह से तो मुझे डर लग रहा है पता नही तुम ये सब क्या क्या सोच रही हो “

सुस ने मेरी बात का कोई भी जवाब नही दिया बल्कि वो बस गाड़ी चला रही थी, हम दोनो शांत ही थे , उसने गाड़ी एक कॉलोनी मे घुसा दी ..

“ये हम कहा आ गये है “

“वही जहाँ तुम रहते हो “

सुस मुस्कुराइ, जबकि मैने उसे प्रश्नवचक दृष्टि से देखा

“अरे पापा से बोला था ना की स्वास्तिक अपार्टमेंट मे फ्लॅट है तुम्हारा वही लाई हू ..”

“लेकिन मेरा तो यहाँ कोई भी फ्लॅट नही है , और इतने महँगे जगह मे तो मैं सोच भी नही सकता “

सच मे ये बड़ा ही पॉश इलाक़ा लग रहा था , बड़ी बड़ी गाडिया पार्किंग मे पार्क की गयी थी , गगनचुंबी इमारते थी ..

“हा लेकिन मेरा तो है ना अब से वो तुम्हारा होगा “

मैं बुरी तरह से चौक गया

“लेकिन ??”

उसने मेरे होठों मे उंगली रख दी

“लेकिन वेकीन कुछ भी नही, ऐसे भी पापा को बोल चुकी हू की तुम यहाँ रहते हो तो अब से तुम यहाँ रहते हो समझ गये “

“लेकिन तुम्हारे पापा ने तो मुझे घर मे रहने के लिए कहा है “

वो फिर से मुस्कुराइ

“ तुम वहाँ भी रहोगे “

“मैं यहाँ भी रहूँगा मैं वहाँ भी रहूँगा???

और मेरी भाभी मा ..?? उनका क्या होगा मैं उन्हे अकेले नही छोड़ सकता बता देता हू ..

“अरे बाबा उन्हे कौन अकेले छोड़ने बोल रहा है, तुम उन्हे लेकर यहाँ रह सकते हो , और फिर कभी कभी तुम्हे मेरे घर मे भी आना होगा बस ..”

असल मे मुझे सुस की बात अच्छी लगी , ऐसे भी शायद भाभी मा को जब मैं ये फ्लॅट दिखाता तो वो खुस होती..

हम कार से उतर कर लिफ्ट मे गये , लिफ्ट बंद होने ही वाला था की एक लड़की ने दौड़ते हुए लिफ्ट का दरवाजा रोक लिया ..

“हे सुस, वेट फॉर मी “

“ऊ हाई स्वाती ..”

“बहुत दिनों के बाद दिख रही हो “

“या.. यहाँ आना ही नही होता , ऐसे इससे मिलो तुम्हारा नया पड़ोसी अंकित , ये इसी का अपार्टमेंट है , मैं तो बस यहाँ आती जाती हू अब ये यन्हि रहने वाला है “

“ऊहह हाई मैं स्वाती “

उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया , वही मैं अपना मूह खोले उस हुस्न की परी को देख रहा था

“आपको कौन नही जानता “

मेरी बात सुनकर जहाँ सुस ने थोड़ी नाराज़गी से मुझे देखा वही स्वाती के होठों मे मुस्कान आ गयी ..

“थॅंक्स .. आप मेरी फिल्म्स देखते हो “

“ऑफ कोर्स आपकी पिछली फिल्म तो मेरी फेव थी क्या आक्टिंग की थी आपने “

मेरी बात सुनकर स्वाती खुस हो गयी

“थॅंक्स “

तभी दरवाजा खुला और हमारा अपार्टमेंट आ गया

“ ओके बाइ सुस , बाइ अंकित , अब तो मिलना होता रहेगा “

वो हसते हुए हमे बाइ करने लगी जिसका सुस ने कोई भी जवाब नही दिया , वही स्वाती ने जब मेरा नाम लिया था तो उसने नाम पर थोड़ा ज़्यादा ज़ोर दिया था , शायद यही सुस के चिढ़ने की वजह भी थी ..

“वाउ यार स्वाती कपूर तुम्हे जानती है “

फ्लॅट मे घुसते हुए मैं जैसे चीख पड़ा , वही सुस ने मूह बनाया

“कौन सी बड़ी बात है , बाजू मे ही तो रहती है “

“तुम्हारे लिए नही होगा लेकिन मेरे गाँव मे अगर किसी को पता चल गया ना की मैं स्वाती कपूर के साथ एक ही लिफ्ट मे था तो … तो सोच भी नही सकती की वहाँ के लड़के कभी इसे नही मानेंगे , वाउ स्वाती कपूर , तुमने उनका वो गाना सुना है ..”

मैं गाने ही वाला था लेकिन सुस ने मुझे गुस्से से घूरा

“तुम ये ग़रीबो वाली हरकत करना बंद नही कर सकते क्या ?? अब वो तुम्हारी पड़ोसी है , और ये आक्टर, मॉडेल लोग हमारे सामने क्या है , जब मेरा पापा चाहे इनको नचा देते है , मेरे बर्तडे तक मे ये लोग आ कर नाचते है , और तुम उसके साथ ऐसे बिहेव करके मेरी बेज़्जती कर रहे थे , उस साली की औकात क्या है मेरे सामने , किराए के मकान मे रहती है अभी एक कंप्लेन कर दूं तो उसका बोरिया बिस्तर फेक देंगे कॉलोनी वाले “

सुस का गुस्सा देख कर मैं चुप ही हो गया ..
 
“यार इतना गुस्सा क्यो हो रही हो , वो मेरी फेव है तो बस ..”

“सेक्स करना चाहता है क्या उससे ?? बोल करवा दूं क्या “

सुस की बात सुनकर मैं एक बार उसके चेहरे को ही देखता रह गया ,

“छी तुझे बस इसके सिवा कुछ और नही सूझता ना , जा रहा हू मैं और रख तू इसे अपने पास “

मैने जेब से उसकी पैंटी निकाल कर उस पर फेक दिया और वहाँ से जाने लगा , लेकिन तभी सुस भाग कर मेरे पास आ गयी,

मुझपर जैसे कूद ही गयी , और मेरा गला पकड़कर झूल गयी , मैं लड़खडाता हुआ पास ही रखे सोफे मे जा गिरा ..

उसने अपने होंठ मेरे होठों मे डाल दिए , मैं छूटने की कोशिस कर रहा था लेकिन उसने मेरे चेहरे को बड़ी ही ताक़त से जकड़ रखा था ..

सुस ये क्या कर रही हो ..

“बहुत हो गया अब तो तेरा रेप ही करूँगी “

वो खिलखि लाते हुए बोली

“तेरी तो “

मैं भी भड़क गया था और मैने उसे पलट दिया , अब वो मेरे नीचे थी और चुप भी हो चुकी थी ..

हम दोनो ही एक दूसरे की आँखो मे देख रहे थे

“सुस ये ग़लत है , मैं ये नही कर सकता “

“क्यो खड़ा नही होता क्या , ज़रा देखु तो “

उसने मेरे जीन्स के उपर से ही मेरे लिंग को पकड़ कर जोरो से दबा दिया ..

“अऔच .. कमिनी कही की “

मैं खड़े होने वाला था लेकिन वो अभी भी मेरे गले मे हाथ डाले हुए झूल रही थी ..

मेरा लिंग सच मे पूरी ताकत से खड़ा हुआ था

“ये तो पूरा तना हुआ है फिर भी तू मुझे भाव नही दे रहा है , जानता है मुझसे सेक्स करने के लिए लड़को की लाइन लगी रहती है , सभी चोर निगाहो से मेरे जिस्म को देखते है लेकिन किसी की भी हिम्मत नही होती की मुझे कुछ बोल सके “

“अच्छा तो उनसे ही करवा लेना ना , मुझे छोड़ “

मैं फिर से उठने को हुआ लेकिन सुस ने मुझे फिर से जोरो से अपने से लगा लिया

“साले .. पता नही तुझ मे ऐसा क्या देख लिया की तुझपर दिल आ गया .. और जिसपर सुस का दिल आ जाए वो उसे पा कर ही रहती है “

“अच्छा मैं क्या कोई खिलौना हू जिसे तू पा कर रहेगी , प्यार ना तो खरीदा जा सकता है ना ही छीना जा सकता है समझी ..”

मेरी बात सुनकर सुस ने मुझे थोड़ा ढीला छोड़ दिया , मैं उठ खड़ा हुआ लेकिन सुस का चेहरा उदास था जिसे देखकर मैं फिर से उसके बाजू मे जा बैठा

“मुझमे किस बात की कमी है अंकित जो तू मुझे पसंद नही कर रहा “

उसकी आवाज़ मे एक रोना था , गला जैसे भर गया था

“तू पागल है क्या रो क्यो रही है , अरे आज ही तो तूने प्रपोज़ किया है और आज ही तुझे जवाब भी चाहिए , देख सुस तेरे साथ इतने दिन रहकर मुझे इतना तो पता चल गया है की तू बड़ी ही अच्छी लड़की है , लेकिन थोड़ी पागल भी है , किसी को ऐसे कौन प्रपोज़ करता है यार …. तूने मुझे प्रपोज़ नही किया बल्कि मुझे डरा दिया , मैने जीवन मे कभी ऐसी चीज़े नही देखी थी और तूने तो पूरा पिक्चर ही दिखा दिया “

मेरी बात सुनकर वो शर्मा गयी , जो मुझे और भी अजीब लगा

“वाह क्या अदा है आपके क्या कहने , पहले मेरे सामने कपड़े खोलने मे भी कुछ नही लगा और अब सिर्फ़ उसकी बात सुनकर ही शर्मा रही हो वाह “

वो खिलखिला कर हंस पड़ी

“तू लड़कियो को नही समझ पाएगा रे , जब वो किसी से प्यार करती है तो उसके लिए कुछ भी कर जाती है, मुझे लगा की हर लड़को को एक ही चीज़ चाहिए होती है और अगर मैं तुझे वो ऑफर कर दूं तो शायद तू मान जाएगा , लेकिन तू तो अलग निकला “

“ऊओह तो ये बात है , देख सुस मुझे थोड़ा सोचने का मौका तो दे “

“मैं समझ सकती हू , लेकिन एक चीज़ और “

“क्या ??”

“इस स्वाती से दूर रहना , ये साली जैसे तुझे देख रही थी मुझे पसंद नही आया “

अब साला मुझे समझ नही आ रहा था की मैं कौन सा रणबीर कपूर हू जो ये सब लड़किया मुझे देख रही थी ..:

“यार वो मुझे क्यो देखेगी “

“अरे तू इस साली रांड़ को नही जानता , अगर तुझे इसकी लेनी हो तो मुझे बता देना मैं इसकी दिलवा दूँगी लेकिन इससे इंप्रेस होकर कुछ चूतियापा नही करना “

मैं उसकी बात सुनकर बुरी तरह से चौका

“तू क्या दिलवाएगी “

“जो बोले वो साली हाइ क्लास रांड़ है , सब जानती हू इसके बारे मे “

मैं बस मूह फाडे उसे देख रहा था , पर्दे मे एक संस्कारी लड़की का कॅरक्टर निभाने वाली स्वाती के बारे मे तो मैं ऐसी बात सोच भी नही सकता था ..

“नही यार तुम्हे कोई ग़लत फ़हमी हुई होगी “

सुस जोरो से हंस पड़ी ..

“मेरे पापा के फार्महाउस मे ऐसी कई हेरोयिन्स नंगी नाचती है .. समझ गये “

मैं उसकी बात सुनकर बिल्कुल ही चुप था … चुप और शांत दोनो ही एक साथ था ..

मन मे कोई भी विचार नही आ पा रहे थे , स्वाती का मासूम सा चेहरा मेरे दिमाग़ मे घूम रहा था वही सुस की बाते भी …

इन सब के बीच मैं ये चीज़ बिल्कुल ही भूल सा गया था की कोई मेरे नाम से कत्ल किए जा रहा है , और मैं यहाँ तिवारी की बेटी के साथ खड़ा हू , वो इंसान जिसे अगर इतना भी पता चला की मैं किसके साथ रहता हू तो शायद मुझे जान से मारने मे ज़रा भी देरी ना करे………

“अब शायद तुम्हे जाना चाहिए , तुम अपनी भाभी के साथ जल्दी से यहाँ सिफ्ट हो जाओ “

सुस की बात से मैं फिर से वर्तमान मे आया और फिर जल्दी से वहाँ से निकल गया ……..
 
अपडेट 24

जब मैं हवेली पहुचा तो वहाँ बैठे हुए लोग मुझे देखते ही खड़े हो गये ..

“शिवा भैया की …. “

कोई एक आदमी जोरो से चिल्लाया

“जय जय “

सभी लोग जोरो से चिल्ला उठे ,लोग नगाडे बजा रहे थे और कुछ लोग मुझे अपने कंधे पर उठा कर नाचने लगे, कुछ लोगो ने तो मुझे फुलो की माला भी पहना दी ..

मैं कुछ समझ पाता की ये सब साला आख़िर हो काया रहा है तभी संपत मामा आकर मुझे नीचे उतार कर अपने ऑफीस मे ले गये …..

“जब तुझे मैने मना किया था की तू तिवारी और हमारे बीच नही पड़ेगा तो फिर तूने ये कांड क्यो कर दिया ..”

संपत मामा की बात सुनकर मुझे समझ आया की ये हो क्या रहा है ..

“मामा मैने कुछ भी नही किया है ,”

“क्या ???” मामा बुरी तरह से चौक गये थे …

“तो … तो ये सब किसने किया है ?”

“ मुझे क्या पता की किसने किया है, इतना बड़ा कदम मैं आप से बिना पूछे कैसे ले सकता हू “

संपत मामा थोड़ी देर चुप ही रहे

“अच्छा……. स्टाइल तो शक्ति गेंग वाला है … लेकिन शक्ति गेंग के सभी लोग तो अब इनॅक्टिव है और काम छोड़ चुके है तो फिर ये सब किसने किया होगा “

“आख़िर ये माजरा क्या है , शक्ति गेंग और जीवा गैंग अलग कैसे है “

“कोई खास नही असल मे जीवा गैंग की शुरुआत की थी जीवा ने , और उसकी एक बहन थी जिसका नाम था शक्ति उसने ही शक्ति गेंग की शुरुआत की थी इसलिए उसे शक्ति गेंग कहा गया ..”

“क्या ??? जीवा और शक्ति भाई बहन थे …तो उन्होने अलग अलग गैंग क्यो शुरू किया “

मेरी बात सुन कर संपत ने एक गहरी सांस छोड़ी ..

“यार बहुत पुरानी कहानी है कभी आराम से सुनाउन्गा, अभी जा आरती तेरा इंतजार कर रही है , तू कोई मोबाइल क्यो नही ले लेता , वो बेचारी जब से ये खबर सुनी है की शिवा ने कतल किया है तब से डरी हुई है , और तेरा कोई आता पता भी नही है ..”

“मोबाइल ??”

“ओह हा चल मैं दिलवा दूँगा, अब जा .. मैं पता लगवाता हू की आख़िर इसके पीछे है कौन “

**********

जब मैं अपने कमरे मे गया तो भाभी ने दौड़कर मुझे जकड़ लिया ..

“कहा था तू इतना पता कैसे लगा दिया , जानता है यहाँ क्या हो रहा है लोग कह रहे की शिवा ने अपना पहला शिकार कर लिया ……”

“अरे भाभी मैने कोई भी शिकार नही किया है ये सब पता नही किसने किया है

“वो सब ठीक है लेकिन तू इतने देर से कहा था “

भाभी की बात सुनकर मेरे होठों मे एक मुस्कान आ गयी ..

“वो सुस मुझे अपने पिता से मिलवाने ले गयी थी “
 
भाभी और भी जोरो से चौकी

“हे भगवान ऐसे हालत मे तू तिवारी के पास गया था “

“हा गया तो था लेकिन असल मे सुस को अपने पिता से मिलवाना ही नही था , वो बस बहाना था , असल मे वो तो ..”

मैं बोलते हुए रुक गया , मुझे याद आया की आज सुस ने क्या किया था , मेरे माथे पर पसीना आ गया जिसे देकर भाभी की आँखे बड़ी हो गयी

“क्या किया सुस ने.. कोई ग़लत काम तो नही किया क्या “

मैं शर्म और अजीब से दर से पसीने से नहा चुका था

“बाबू… क्या हुआ तुझे ??:?: इतना पसीना कैसे आ रहा है

“वो… वो भाभी .. वो ..”

“क्या वो वो लगा रखा है बोल तो सही “

“भाभी उसने मुझे प्रपोज़ कर दिया “

“क्या ????”

भाभी पहले तो चौकी लेकिन फिर उनके होठों मे एक मुस्कान सी आ गयी ये थोड़ी शरारती मुस्कान थी

“सिर्फ़ प्रपोज़ किया , मुझे तो नही लगता की सिर्फ़ इज़हार किया होगा , वरना ऐसे पसीने से नही भीग जाता तू “

वो खिलखिलाकर हँसी

“भाभी आप भी ना “

“तो आख़िर क्या किया सुस जी ने “

भाभी की उत्सुकता थोड़ी बढ़ रही थी

“भाभी छोड़ो ना , जो उसने किया वो मैं आपको नही बता सकता “

भाभी का मूह खुल गया था और उन्होने अपने मूह मे हाथ रख लिया

“हे भगवान इतनी तेज निकली वो , मेरे मुन्ना के साथ ….”

“भाभी उसने कुछ अजीब सा किया , उसने मेरा नाम लिखा हुआ था .. “

मैं चुप हो गया , वही भाभी मुझे अजीब निगाहो से देख रही थी

“उसने मेरा नाम … अपने यहाँ पहनने वाले कपड़े मे लिखा था “

मैने कमर के नीचे इशारा करके उन्हे बता ही दिया

“क्या??” वो बुरी तरह से चौकी , वही थोड़ी ही देर मे उनका हंस हंस कर बुरा हाल हो गया था

“हे भगवान कैसी अजीब लड़की है ये सुस , फिर तूने क्या किया ?”

“क्या करता मैं वो वहाँ से भागा “

मेरी बात सुनकर भाभी और भी जोरो से हँसने लगी , उनका गोरा रंग हँसने के कारण गुलाबी हो गया था .. ऐसा लग रहा था जैसे खून उतर आया हो , दांतो की पंक्तिया निखार कर दिखने लगी थी , मैं उनके चेहरे मे खोने लगा था

“ओह्ह्ह्ह मेरा प्यारा मुन्ना …” उन्होने हसते हुए मेरे गालो पर प्यार से हाथ फेरा

“भाभी जानते हो फिर क्या हुआ “

“क्या??”

मैने फिर तिवारी से मिलना, मुझे नौकरी और घर मे रहने के लिए बोलना और उसके बाद सुस का मुझे अपार्टमेंट मे ले जाना और भाभी के साथ रहने की बात करना ये सब बताया .. साथ ही स्वाती के बारे मे भी बताया ..

भाभी ने सभी बाते ध्यान से सुनी और फिर एक गहरी सांस ली
 
“ जिन लोगो ने हमे मुसीबत मे संभाला था उन्हे छोड़कर हम कैसे चले जाए , और फिर ये मर्डर वाले केस से दिक्कते और भी बढ़ जाएगी , मैं तो बोलती हु की तुम सुस और तिवारी से दूर ही रहो “

“भाभी लेकिन आप ही चाहती थी की हम यहाँ से दूर चले जाए , ये एक अच्छा मौका है , उस अपार्टमेंट मे हम दोनो ही रहेंगे , वो बहुत बड़ा फ्लॅट है भाभी , और कितने आमिर लोग रहते है वहाँ पर “

भाभी बड़े ही प्रेम से मुझे देख रही थी

“ ग़रीबी और अमीरी से लोगो के दिल को तो नही तौला जा सकता ना ..”

“हा भाभी वो तो ठीक है लेकिन .”

“अगर तुझे जाना है तो जा मैं तुझे नही रोकूंगी लेकिन … लेकिन मैं तुझे सुस की गुलामी करते नही देख सकती ..”

भाभी इतना बोल कर वहाँ से हट गयी मैं बस उन्हे ही देखता रहा

“भाभी आपने ऐसा सोच भी कैसे लिया की मैं आपको छोड़ के चला जाउन्गा “

मेरी आवाज़ भर्रा गयी थी, उनकी बात से मुझे बहुत ही ज़्यादा दर्द हुआ था , शायद वो भी इस बात को समझ गयी , उन्होने जल्दी से मेरे सर को अपने सीने से लगा लिया

“नही मेरा वो मतलब नही था “

“अब बात को मत घूमाओ भाभी , मैं समझ गया की आप मेरे बारे मे ऐसा ही सोचती है “

उन्होने मुझे और भी जोरो से जकड़ लिया

“नही बाबू तू पागल है क्या …मैं कभी तुझसे दूर होने की सोच भी सकती हू क्या “

“तो अभी जो अपने बोला वो क्या था..”

भाभी चुप हो गयी थी

“मुझे माफ़ कर दे बाबू “

“नही आपने ऐसा सोच भी कैसे लिया की मैं आपको छोड़ कर वहाँ अकेले रह सकता हू “

“सॉरी बाबू वो मूह से ऐसे ही निकल गया ना “

वो मेरे बालो को सहलाने लगी थी , मेरा चेहरा अभी भी उनके उरोजो मे दबा हुआ था

“लेकिन आपने मेरे बारे मे ऐसा कैसे सोच लिया “
 
मैं अब तब बस रोने वाला था, मेरे गले से आवाज़ भी नही निकल रही थी , मेरी भाभी मेरे बारे मे ऐसा कैसे सोच सकती है मुझे बिल्कुल भी यकीन नही हो रहा था ..

“मुझे माफ़ कर दे बाबू, मैं ऐसा नही सोच सकती बस मेरे मूह से निकल गया ये , माफ़ कर दे बाबू “

उन्होने मुझे मनाने के एवज मे मेरे चेहरे को चूमना शुरू कर दिया था , उनके लार से मेरे गाल गीले होने लगे थे ..

भाभी के प्यार से मेरा भी गुस्सा काफूर हो चुका था लेकिन अब गुस्से की आक्टिंग करने मे भी मुझे मज़ा आ रहा था, भाभी मेरी बातों से थोड़ी घबरा गयी थी और मुझे मना रही थी ,मैने रूठा रहना ही सही समझा ..

“आप मुझे अपना नही समझती वरना ऐसी बात नही करती “

मेरी बात से भाभी की आँखो मे भी आँसू आ गये

“तेरे सिवा मेरा अपना कौन है बाबू , जब घर से निकली थी तो तूने ही तो साथ दिया मेरा , पूरी दुनिया ने मुझे ठुकुरा दिया लेकिन तू मेरे साथ रहा.. मुझे माफ़ कर दे बाबू मुझे माफ़ कर दे “

वो रोते हुए मेरे कंधे मे झूल गयी , अब ये थोड़ा ज़्यादा होने लगा था मैने जल्दी से भाभी को उठाया और उसके चेहरे को देखने लगा ..

उनका चेहरा आँसुओ से पूरी तरह से भीग चुका था , मैने अपने होंठ से उसे सॉफ करना शुरू कर दिया, मैने उनके आँखो पर अपने होठों को रख दिया, उन्होने भी अपनी आँखे बंद कर ली थी , उनके आँखो से धुलते हुए आँसुओ को मैं अपने होठों मे समा रहा था ..

मेरे होंठ उनके गालो से होते हुए उनके होंठ तक पहुच गये और मैने हल्के से उन्हे चूम लिया ..वो भी सिहर गयी थी और मेरे अंदर भी कुछ हो गया था .. लेकिन हम दोनो ही एक दूसरे से अलग नही हुए , मैने उन्हे चेहरे के नीचे उनकी ठोडी को भी चूमा और नीचे उनके गले मे अपने होठों को लगा दिया ..

“हुउम्म्म्म” भाभी के मूह से एक सिसकी सी निकल गयी

मैं भी उत्तेजित होने लगा था , मैं भाभी को बहुत प्यार करना चाहता था और मैने उनके होठों को फिर से अपने होठों से लगा लिया , इस बार उन्होने अपना चेहरा दूसरी ओर फेर दिया और आँखे खोलकर मुझे देखने लगी …

अब उनके आँखो से कोई आँसू नही बह रहे थे लेकिन सूखे हुए आँसुओ की बूंदे अभी भी थोड़ी नमी का कारण बन रही थी ..

उनकी बड़ी बड़ी आँखे थोड़ी लाल थी और उसमे खेलती हुई वो काली पुतलिया मुझ पर ही गड़ी हुई थी .. शायद भाभी भी समझने की कोशिस कर रही थी की मैं क्या चाहता हू लेकिन ये तो मुझे भी नही पता था , हम दोनो ही एक दूसरे के आँखो मे देखते रहे और मैं फिर से झुका और इस बार भी भाभी के होठों के उपरी फांको को अपने होठों मे भर लिया ..

मैं उसे हल्के हल्के चूसने लगा था , भाभी ने मुझे नही हटाया और मेरे होंठ थोड़े से और भी शरारती हो गये , वो भाभी के निचले होठों मे जा लगे … चुम्मन थोड़ा और भी मादक होने लगा था की मेरा जीभ सीधे ही भाभी के मूह मे चला गया और यही वो समय था जब अचानक ही जैसे भाभी को होश आया हो मुझसे अलग हो गयी ..

उनकी नज़रे झुकी हुई थी लेकिन मैं उन्हे ही देख रहा था ,

“बाबू चलो सोते है “

उन्होने कुछ भी नही कहा और बिस्तर मे जाकर लेट गयी , वही मेरे आँखो से तो जैसे नींद ही गायब हो गयी थी , मैं भाभी से बात करना चाहता था , उन्हे अपनी बाँहो मे समा कर सोना चाहता था लेकिन जैसे भाभी मुझसे नज़र छुपा रही थी मैं कुछ अजीब हरकत करके उन्हे खोना नही चाहता था ………….
 
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