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गतान्क से आगे...
"उम्म..छ्चोड़ो ना....प्लीज़!!!!...औउ मा...ऊव्व.....!",अंधेरे कमरे मे
रजनी की मस्त आवाज़े गूँज रही थी.वो अपने प्रेमी को बस सतही तौर पे मना
कर रही थी की वो उसके जिस्म से और ना खेले मगर उसका दिल तो चाहता था कि
अब बस पूरी उम्र बस वो ऐसे ही उसके मज़बूत जिस्म की पनाह मे पड़ी
रहे.इंदर & वो बिस्तर पे लेटे थे & इंदर उसकी चूत के दाने को दाए हाथ की
उंगली & अंगूठे से पकड़ के हल्के-2 मसल रहा था & उसकी ये हरकत रजनी को
जोश से पागल कर रही थी.
"तुम तो कहती थी कि तुम्हारे बॉस बीमार हैं मुझे तो बिल्कुल तन्दरुस्त
नज़र आए.",इंदर ने उसके होंठो पे अपनी ज़ुबान फिराई.
"उम्म...",जवाब मे उसने उसकी ज़ुबान को अपने मुँह के अंदर खींच लिया न&
कुछ पल उसे चूमती रही,"..नही इंदर,वो सचमुच बीमार है.यकीन मानो उन्हे दिल
की बीमारी है."
"अच्छा.."..तो फिर मेरी दवा अपना कमाल क्यू नही दिखा रही.कितनी मुश्किल
से उसने उस दवा का नाम & फिर उसकी जगह उस स्लो पॉइजान को ढुंडा था (ये
कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है )जो उसने उनकी
दवा की जगह रखा था...कही सहाय ने उसकी रखी डिबिया बदल के नयी डिबिया तो
नही ले ली..अब ये कैसे पता चलेगा?..यानी उसे कुच्छ और तरीका अपनाना
पड़ेगा...,"अहह...ह......ऊहह...ऊहह...!",उसकी उंगलियो की हरकत से झड़ती
रजनी ने उसके ख्यालो को तोड़ा.
वो उसके बाई तरफ लेटी साँसे लेती हुई अपने जिस्म को अभी-2 मिली खुशी का
पूरा लुत्फ़ उठा रही थी.इंदर ने उसे करवट ले अपनी ओर घुमाया फिर उसकी बाई
टाँग हवा मे उठा के खुद भी अपनी बाई करवट पे हुआ & अपना लंड उसकी उसके रस
से भीगी चूत मे पेल दिया,"..ऊव्वववव....!",रजनी अपनी टांग उसकी कमर पे
कसते हुए उसके सीने से लिपट गयी.अपना बाया हाथ इंदर ने रजनी की गर्दन के
नीचे लगाया & दाए से उसकी गंद मसल्ने लगा.
"और तुम्हारे भाईय्या?"
"प्रसून भाय्या...",आज रजनी को इंदर के घर पे बिताई उस दोपहर से भी
ज़्यादा मज़ा आ रहा था,"..उनके बारे मे 1 मज़ेदार बात बताऊं?"
"हूँ.",इंदर के कन खड़े हो गये मगर वो झुक के उसकी ठुड्डी ऐसे चूमने लगा
मानो उसे कोई खास मतलब ना हो इस बात से.
"उम्म्म्म....!",रजनी ने अपना बाया हाथ उसकी पीठ पे फिराते हुए उसकी गंद
को सहलाया,"..मॅ'म उनकी शादी करना चाहती हैं."
"क्या?!",चौंक के इंदर उसकी ठुड्डी छोड़ उसे देखने लगा.
"हां..",& फिर चुद्ते हुए रजनी ने झड़ने तक उसे बताया की कैसे शाम लाल जी
के आने पे उसके कान मे ये बात पड़ी थी & देविका & सुरेन सहाय अपने वकील
से भी इस बारे मे बात कर रहे थे.झड़ने के कुछ देर बाद इंदर ने लंड निकाला
तो रजनी ने थकान से चूर हो आँखे बंद कर ली.उसे सोता देखा इंदर उठा & कमरे
की खिड़की तक चला गया.अभी भी बारिश वैसे ही ताबड़तोड़ हो रही थी....आख़िर
उसे इस बात का पता कैसे नही चला?..ये शादी तो नही हो सकती किसी भी हालत
मे नही!..(ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है
)उसका पूरा प्लान चौपट हो जाएगा अगर उस पागल की शादी हो गयी तो.ये शादी
का ख़याल तो पक्का देविका के दिमाग़ की उपज होगा.सुरेन सहाय के बस का नही
था ऐसा सोचन.उसने जितना सोचा था देविका उस से भी कही ज़्यादा चालाक थी.आज
वो बहुत खुश था वो एस्टेट मे घुस जो गया था मगर इस नयी खबर ने उसकी खुशी
काफूर कर दी थी.
उसका दिल बेचैन हो उठा & उसे शराब की तलब लगी मगर यहा शराब थी कहा.वो
मुड़ा & रजनी की ओर देखा.वो बेख़बर सो रही थी.उसने अपने कपड़े पहने & सोई
हुई रजनी के बदन पे चादर डाली & वाहा से निकल उसके क्वॉर्टर के ठीक उपर
अपने क्वॉर्टर मे चला गया.
कामिनी ने आँखे खोल खिड़की के बाहर देखा तो पाया की सुबह हो चुकी थी &
बारिश भी रुक चुकी थी मगर बादल अभी भी छाए थे.रात काफ़ी देर तक वीरेन
सहाय पैंटिंग बनाता रहा था & कोई 1 बजे उसने उसे छ्चोड़ा था.वो उसी के
गेस्ट रूम मे अभी सोकर उठी थी.
बिस्तर से उतरी तो कामिनी ने देखा की उसके कपड़े आइरन करके पास पड़ी
कुर्सी पे रखे थे.घर मे कोई नौकर तो आया नही लगता था फिर इन कपड़ो को
प्रेस किसने किया?कामिनी की ब्रा & पॅंटी भी वाहा रखे थे....यानी की
वीरेन ने ही उसके कपड़े वाहा रखे थे..उसने उसके अंडरगार्मेंट्स भी
छुए..इस ख़याल से कामिनी के गाल शर्म से लाल हो गये.
रात को वो वीरेन की दी सारी पहन के ही सो गयी थी.सारी उतार अपने कपड़े
पहनते हुए उसे रात की बाते याद आ गयी.(ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग
कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है )पैंटिंग बनाते वक़्त दोनो ने 1 दूसरे से
नज़रो का जो खेल खेला था उसने उसके दिल मे अभी फिर से गुदगुदी पैदा कर दी
& उसके होंठो पे मुस्कान फैल गयी.
कपड़े पहन वो बाहर आई,"गुड मॉर्निंग,कामिनी जी!"
"गुड मॉर्निंग."
"आइए चाइ पीजिए.",दोनो बैठ के चाइ पीने लगे.चाइ पीते वक़्त भी कामिनी ने
गौर किया की वीरेन बीच-2 मे उसके चेहरे को देख रहा था.चाइ पीते हुए कोई
खास बातचीत नही हुई & उसके ख़त्म होते ही कामिनी ने चलने की बात की.
"चलिए मैं छ्चोड़ देता हू.",वीरेन उठा & थोड़ी ही देर बाद दोनो उसकी कार
मे कामिनी के घर के लिए रवाना हो गये.घर पहुँचते ही कामिनी ने वीरेन को
उसके घर मे आ साथ नाश्ता करने का न्योता दिया मगर वीरेन ने काम का बहाना
कर उसे शालीनता से मना कर दिया.
कार गियर मे डाल उसने कामिनी की ओर देखा,"तो आज शाम आप आ रही हैं ना?"
"हां.आने के पहले मे आपको फोन कर दूँगी."
"ओके.तो शाम को मिलते हैं.",वीरेन की नज़रे उसके चेहरे से फिसल उसके झीनी
सारी मे से झाँकते उसके क्लीवेज पे आई मगर फ़ौरन सँभाल गयी.उसने क्लच
छ्चोड़ा तो कार आगे बढ़ गयी & वाहा से निकल गयी.
वीरेन ने कहा था की पैंटिंग बनाने मे समय लगता है & अभी कामिनी को उसके
पास कुच्छ दीनो तक आना पड़ेगा.कामिनी इसके लिए तैय्यार हो गयी थी,उसने
कहा की शाम को काम के बाद जो 2-3 घंटे उसके पास बचते थे उसी समय मे वो
उसकी पैंटिंग के लिए आ जाया करेगी.
वीरेन की कार नज़रो से ओझल हुई तो कामिनी ने दरवाज़ा खोला & गुनगुनाते
हुए घर मे दाखिल हुई.वीरेन की दिलचस्पी ने उसके दिल मे भी उमंगे पैदा कर
दी थी.वो अपने कमरे मे गयी & काम के लिए तैय्यार होने लगी.अभी तो उसे
कोर्ट जाना था मगर उसका दिल चाह रहा था (ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग
कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है )क फ़ौरन शाम हो जाए & वो वीरेन के बंगल पे
पहुँच जाए ये देखने के लिए की आज दोनो का नज़रो का खेल कहा तक पहुँचता
है.
-------------------------------------------------------------------------------
"तो इंदर जी,समझ मे आ गया आपको सारा काम?",उसकी लाई फाइल पे सुरेन सहाय
ने दस्तख़त किए.
"यस सर.स्टाफ के लोग काफ़ी मदद कर रहे हैं इसलिए कोई परेशानी नही हो रही है."
"बहुत अच्छे लेकिन अगर कोई भी परेशानी हो तो मुझे ज़रूर बताएँ."
"थॅंक यू,सर.",इंदर फाइल ले वाहा से बाहर निकलने लगा.दरवाज़ा खोलते ही
उसने देखा की शिवा वाहा 1 फाइल लिए चला आ रहा था.दोनो ने मुस्कुरा के 1
दूसरे को ग्रीट किया & फिर शिवा अंदर घुस गया & इंदर बाहर चला गया.
"सर,ये उस सेक्यूरिटी सिस्टम्स वाली कंपनी ने अपना कोटेशन दिया है,1 बार
आप इसे चेक कर लीजिएगा."
"ओके.शिवा.1 बात बताओ भाई?"
"पुच्हिए,सर."
"क्या हमे सच मे इन चीज़ो की ज़रूरत है?"
"बिल्कुल है,सर.",शिवा ने उनपे बहुत ज़ोर डाला था की एस्टेट की हिफ़ाज़त
के लिए अब बाडो & तारो से उपर उठना पड़ेगा,"..सर,बाडेन & तार तो ठीक है
मगर इतने बड़े इलाक़े के चप्पे-2 पे हर वक़्त नज़र रखना तो मुश्किल है
चाहे आप कितने भी आदमी क्यू ना भरती कर ले.ये मशीन्स हमारे काम को आसान
करेंगी & हम अपना सेक्यूरिटी स्टाफ भी कोई 20% तक कम कर सकते हैं.."
"..जो पैसे यहा खर्च हो रहे हैं,आप ये सोचिए की वो पैसे सेकर्टी स्टाफ को
कम कर के बचा लिए जाएँगे."
"हूँ,तुम्हारी बात तो ठीक लगती है,फिर भी मैं 1 बार ये कोटेशन & इस मामले
मे तुमने जो मुझे रिपोर्ट मुझे दी थी उसे फिर से पढ़ लेता हू."
"ओके,सर.",शिवा वाहा से चला गया.
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"वाउ!",कामिनी वीरेन के साथ उसके स्टूडियो मे खड़ी उसकी बनाई खुद की
पैंटिंग देख रह थी,"..कितनी सुंदर पैंटीइंग बनाई है वीरेन आपने..मैं ऐसी
दिखती हू क्या?!...यकीन नही होता.ये आपके हाथो का कमाल है!",वीरेन की
पैंटिंग मे कामिनी की शख्सियत पूरी उभर के आई थी.पैंटिग देखने पे ये लगता
था मानो को रानी अपने दीवान पे बैठी हो,उसके चेहरे पे रौब झलक रहा था मगर
वो घमंडी नही लग रही थी बल्कि बड़ी ही अज़ीम लग रही थी.
"जी नही.ये आपकी शख्सियत का कमाल है.आप जैसी हैं वैसे ही मैने उसे इस
काग़ज़ पे उतार दिया है.",वीरेन मुस्कुराते हुए उसे देख रहा था.उसकी
नज़रो मे अपनी तारीफ देख 1 पल को कामिनी जैसी विश्वास से भरी लड़की की
पॅल्को पे भी हया का बोझ आ पड़ा(ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग
कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है ).नज़रे झुका के वो फिर से अपनी तस्वीर
देखने लगी,वो जानती थी की वीरेन अभी भी उसे देखे जा रहा है.
"पैंटिंग तो बन गयी यानी मेरा काम ख़त्म?",उसने बात बदली.
"ख़त्म!अभी तो आपका काम शुरू हुआ है मोहतार्मा!"
"क्या मतलब?"
"मतलब ये की ये तो पहली तस्वीर है.अभी तो मैं तब तक आपकी तस्वीरे
बनाउन्गा जब तक की मुझे ये ना लगे कि अब आपकी शख्सियत का कोई भी पहलू
दिखाने को बाकी नही रहा है."
"आप भी ना!अब ऐसी भी कोई खास बात नही है मुझमे.",कामिनी ने बोल तो दिया
मगर वीरेन की बातो ने उसके दिल मे बहुत खुशी भर दी थी.
"..जिसका मतलब है की मैं आपकी पेंटिंग्स बनाता रहूँगा.",वीरेन ने जैसे
उसकी बात सुनी ही नही थी.
"प्लीज़!अब और तारीफ मत कीजिए वरना मुझमे गुरूर आ जाएगा."
"बिना गुरूर के तो हुस्न फीका ही लगेगा.",इस आख़िरी बात ने तो कामिनी के
गालो को शर्म से और भी सुर्ख कर दिया.
"अच्छा-2.तो आज कौन सी पेनिंट्ग बनाएँगे मेरी?"
"अभी बताता हू.",वीरेन ने पास का कपबोर्ड खोला.बरसो बाद वो किसी लड़की के
लिए अपने दिल मे ऐसे जज़्बात महसूस कर रहा था.ऐसा नही था कामिनी से मिलने
से पहले उसका किसी लड़की से कोई रिश्ता नही था.कयि लड़किया आई & गयी मगर
कोई भी उसके दिल मे ऐसी जगह नही बना पाई की वीरेन को लगे की वो उसके बगैर
जी नही सकता.बस 1 लड़की थी जिसने उसके दिल मे ये एहसास पैदा किया था मगर
वो..
उसने अपने माज़ी के बारे मे सोचना छ्चोड़ा.वो जो भी था,जैसा भी था,बीत
चुका था & ये खूबसूरत लड़की जो उसके स्टूडियो मे खड़ी थी ये हक़ीक़त थी &
उसे अब बस इसी बात से मतलब था.
"उम्म..छ्चोड़ो ना....प्लीज़!!!!...औउ मा...ऊव्व.....!",अंधेरे कमरे मे
रजनी की मस्त आवाज़े गूँज रही थी.वो अपने प्रेमी को बस सतही तौर पे मना
कर रही थी की वो उसके जिस्म से और ना खेले मगर उसका दिल तो चाहता था कि
अब बस पूरी उम्र बस वो ऐसे ही उसके मज़बूत जिस्म की पनाह मे पड़ी
रहे.इंदर & वो बिस्तर पे लेटे थे & इंदर उसकी चूत के दाने को दाए हाथ की
उंगली & अंगूठे से पकड़ के हल्के-2 मसल रहा था & उसकी ये हरकत रजनी को
जोश से पागल कर रही थी.
"तुम तो कहती थी कि तुम्हारे बॉस बीमार हैं मुझे तो बिल्कुल तन्दरुस्त
नज़र आए.",इंदर ने उसके होंठो पे अपनी ज़ुबान फिराई.
"उम्म...",जवाब मे उसने उसकी ज़ुबान को अपने मुँह के अंदर खींच लिया न&
कुछ पल उसे चूमती रही,"..नही इंदर,वो सचमुच बीमार है.यकीन मानो उन्हे दिल
की बीमारी है."
"अच्छा.."..तो फिर मेरी दवा अपना कमाल क्यू नही दिखा रही.कितनी मुश्किल
से उसने उस दवा का नाम & फिर उसकी जगह उस स्लो पॉइजान को ढुंडा था (ये
कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है )जो उसने उनकी
दवा की जगह रखा था...कही सहाय ने उसकी रखी डिबिया बदल के नयी डिबिया तो
नही ले ली..अब ये कैसे पता चलेगा?..यानी उसे कुच्छ और तरीका अपनाना
पड़ेगा...,"अहह...ह......ऊहह...ऊहह...!",उसकी उंगलियो की हरकत से झड़ती
रजनी ने उसके ख्यालो को तोड़ा.
वो उसके बाई तरफ लेटी साँसे लेती हुई अपने जिस्म को अभी-2 मिली खुशी का
पूरा लुत्फ़ उठा रही थी.इंदर ने उसे करवट ले अपनी ओर घुमाया फिर उसकी बाई
टाँग हवा मे उठा के खुद भी अपनी बाई करवट पे हुआ & अपना लंड उसकी उसके रस
से भीगी चूत मे पेल दिया,"..ऊव्वववव....!",रजनी अपनी टांग उसकी कमर पे
कसते हुए उसके सीने से लिपट गयी.अपना बाया हाथ इंदर ने रजनी की गर्दन के
नीचे लगाया & दाए से उसकी गंद मसल्ने लगा.
"और तुम्हारे भाईय्या?"
"प्रसून भाय्या...",आज रजनी को इंदर के घर पे बिताई उस दोपहर से भी
ज़्यादा मज़ा आ रहा था,"..उनके बारे मे 1 मज़ेदार बात बताऊं?"
"हूँ.",इंदर के कन खड़े हो गये मगर वो झुक के उसकी ठुड्डी ऐसे चूमने लगा
मानो उसे कोई खास मतलब ना हो इस बात से.
"उम्म्म्म....!",रजनी ने अपना बाया हाथ उसकी पीठ पे फिराते हुए उसकी गंद
को सहलाया,"..मॅ'म उनकी शादी करना चाहती हैं."
"क्या?!",चौंक के इंदर उसकी ठुड्डी छोड़ उसे देखने लगा.
"हां..",& फिर चुद्ते हुए रजनी ने झड़ने तक उसे बताया की कैसे शाम लाल जी
के आने पे उसके कान मे ये बात पड़ी थी & देविका & सुरेन सहाय अपने वकील
से भी इस बारे मे बात कर रहे थे.झड़ने के कुछ देर बाद इंदर ने लंड निकाला
तो रजनी ने थकान से चूर हो आँखे बंद कर ली.उसे सोता देखा इंदर उठा & कमरे
की खिड़की तक चला गया.अभी भी बारिश वैसे ही ताबड़तोड़ हो रही थी....आख़िर
उसे इस बात का पता कैसे नही चला?..ये शादी तो नही हो सकती किसी भी हालत
मे नही!..(ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है
)उसका पूरा प्लान चौपट हो जाएगा अगर उस पागल की शादी हो गयी तो.ये शादी
का ख़याल तो पक्का देविका के दिमाग़ की उपज होगा.सुरेन सहाय के बस का नही
था ऐसा सोचन.उसने जितना सोचा था देविका उस से भी कही ज़्यादा चालाक थी.आज
वो बहुत खुश था वो एस्टेट मे घुस जो गया था मगर इस नयी खबर ने उसकी खुशी
काफूर कर दी थी.
उसका दिल बेचैन हो उठा & उसे शराब की तलब लगी मगर यहा शराब थी कहा.वो
मुड़ा & रजनी की ओर देखा.वो बेख़बर सो रही थी.उसने अपने कपड़े पहने & सोई
हुई रजनी के बदन पे चादर डाली & वाहा से निकल उसके क्वॉर्टर के ठीक उपर
अपने क्वॉर्टर मे चला गया.
कामिनी ने आँखे खोल खिड़की के बाहर देखा तो पाया की सुबह हो चुकी थी &
बारिश भी रुक चुकी थी मगर बादल अभी भी छाए थे.रात काफ़ी देर तक वीरेन
सहाय पैंटिंग बनाता रहा था & कोई 1 बजे उसने उसे छ्चोड़ा था.वो उसी के
गेस्ट रूम मे अभी सोकर उठी थी.
बिस्तर से उतरी तो कामिनी ने देखा की उसके कपड़े आइरन करके पास पड़ी
कुर्सी पे रखे थे.घर मे कोई नौकर तो आया नही लगता था फिर इन कपड़ो को
प्रेस किसने किया?कामिनी की ब्रा & पॅंटी भी वाहा रखे थे....यानी की
वीरेन ने ही उसके कपड़े वाहा रखे थे..उसने उसके अंडरगार्मेंट्स भी
छुए..इस ख़याल से कामिनी के गाल शर्म से लाल हो गये.
रात को वो वीरेन की दी सारी पहन के ही सो गयी थी.सारी उतार अपने कपड़े
पहनते हुए उसे रात की बाते याद आ गयी.(ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग
कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है )पैंटिंग बनाते वक़्त दोनो ने 1 दूसरे से
नज़रो का जो खेल खेला था उसने उसके दिल मे अभी फिर से गुदगुदी पैदा कर दी
& उसके होंठो पे मुस्कान फैल गयी.
कपड़े पहन वो बाहर आई,"गुड मॉर्निंग,कामिनी जी!"
"गुड मॉर्निंग."
"आइए चाइ पीजिए.",दोनो बैठ के चाइ पीने लगे.चाइ पीते वक़्त भी कामिनी ने
गौर किया की वीरेन बीच-2 मे उसके चेहरे को देख रहा था.चाइ पीते हुए कोई
खास बातचीत नही हुई & उसके ख़त्म होते ही कामिनी ने चलने की बात की.
"चलिए मैं छ्चोड़ देता हू.",वीरेन उठा & थोड़ी ही देर बाद दोनो उसकी कार
मे कामिनी के घर के लिए रवाना हो गये.घर पहुँचते ही कामिनी ने वीरेन को
उसके घर मे आ साथ नाश्ता करने का न्योता दिया मगर वीरेन ने काम का बहाना
कर उसे शालीनता से मना कर दिया.
कार गियर मे डाल उसने कामिनी की ओर देखा,"तो आज शाम आप आ रही हैं ना?"
"हां.आने के पहले मे आपको फोन कर दूँगी."
"ओके.तो शाम को मिलते हैं.",वीरेन की नज़रे उसके चेहरे से फिसल उसके झीनी
सारी मे से झाँकते उसके क्लीवेज पे आई मगर फ़ौरन सँभाल गयी.उसने क्लच
छ्चोड़ा तो कार आगे बढ़ गयी & वाहा से निकल गयी.
वीरेन ने कहा था की पैंटिंग बनाने मे समय लगता है & अभी कामिनी को उसके
पास कुच्छ दीनो तक आना पड़ेगा.कामिनी इसके लिए तैय्यार हो गयी थी,उसने
कहा की शाम को काम के बाद जो 2-3 घंटे उसके पास बचते थे उसी समय मे वो
उसकी पैंटिंग के लिए आ जाया करेगी.
वीरेन की कार नज़रो से ओझल हुई तो कामिनी ने दरवाज़ा खोला & गुनगुनाते
हुए घर मे दाखिल हुई.वीरेन की दिलचस्पी ने उसके दिल मे भी उमंगे पैदा कर
दी थी.वो अपने कमरे मे गयी & काम के लिए तैय्यार होने लगी.अभी तो उसे
कोर्ट जाना था मगर उसका दिल चाह रहा था (ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग
कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है )क फ़ौरन शाम हो जाए & वो वीरेन के बंगल पे
पहुँच जाए ये देखने के लिए की आज दोनो का नज़रो का खेल कहा तक पहुँचता
है.
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"तो इंदर जी,समझ मे आ गया आपको सारा काम?",उसकी लाई फाइल पे सुरेन सहाय
ने दस्तख़त किए.
"यस सर.स्टाफ के लोग काफ़ी मदद कर रहे हैं इसलिए कोई परेशानी नही हो रही है."
"बहुत अच्छे लेकिन अगर कोई भी परेशानी हो तो मुझे ज़रूर बताएँ."
"थॅंक यू,सर.",इंदर फाइल ले वाहा से बाहर निकलने लगा.दरवाज़ा खोलते ही
उसने देखा की शिवा वाहा 1 फाइल लिए चला आ रहा था.दोनो ने मुस्कुरा के 1
दूसरे को ग्रीट किया & फिर शिवा अंदर घुस गया & इंदर बाहर चला गया.
"सर,ये उस सेक्यूरिटी सिस्टम्स वाली कंपनी ने अपना कोटेशन दिया है,1 बार
आप इसे चेक कर लीजिएगा."
"ओके.शिवा.1 बात बताओ भाई?"
"पुच्हिए,सर."
"क्या हमे सच मे इन चीज़ो की ज़रूरत है?"
"बिल्कुल है,सर.",शिवा ने उनपे बहुत ज़ोर डाला था की एस्टेट की हिफ़ाज़त
के लिए अब बाडो & तारो से उपर उठना पड़ेगा,"..सर,बाडेन & तार तो ठीक है
मगर इतने बड़े इलाक़े के चप्पे-2 पे हर वक़्त नज़र रखना तो मुश्किल है
चाहे आप कितने भी आदमी क्यू ना भरती कर ले.ये मशीन्स हमारे काम को आसान
करेंगी & हम अपना सेक्यूरिटी स्टाफ भी कोई 20% तक कम कर सकते हैं.."
"..जो पैसे यहा खर्च हो रहे हैं,आप ये सोचिए की वो पैसे सेकर्टी स्टाफ को
कम कर के बचा लिए जाएँगे."
"हूँ,तुम्हारी बात तो ठीक लगती है,फिर भी मैं 1 बार ये कोटेशन & इस मामले
मे तुमने जो मुझे रिपोर्ट मुझे दी थी उसे फिर से पढ़ लेता हू."
"ओके,सर.",शिवा वाहा से चला गया.
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"वाउ!",कामिनी वीरेन के साथ उसके स्टूडियो मे खड़ी उसकी बनाई खुद की
पैंटिंग देख रह थी,"..कितनी सुंदर पैंटीइंग बनाई है वीरेन आपने..मैं ऐसी
दिखती हू क्या?!...यकीन नही होता.ये आपके हाथो का कमाल है!",वीरेन की
पैंटिंग मे कामिनी की शख्सियत पूरी उभर के आई थी.पैंटिग देखने पे ये लगता
था मानो को रानी अपने दीवान पे बैठी हो,उसके चेहरे पे रौब झलक रहा था मगर
वो घमंडी नही लग रही थी बल्कि बड़ी ही अज़ीम लग रही थी.
"जी नही.ये आपकी शख्सियत का कमाल है.आप जैसी हैं वैसे ही मैने उसे इस
काग़ज़ पे उतार दिया है.",वीरेन मुस्कुराते हुए उसे देख रहा था.उसकी
नज़रो मे अपनी तारीफ देख 1 पल को कामिनी जैसी विश्वास से भरी लड़की की
पॅल्को पे भी हया का बोझ आ पड़ा(ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग
कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है ).नज़रे झुका के वो फिर से अपनी तस्वीर
देखने लगी,वो जानती थी की वीरेन अभी भी उसे देखे जा रहा है.
"पैंटिंग तो बन गयी यानी मेरा काम ख़त्म?",उसने बात बदली.
"ख़त्म!अभी तो आपका काम शुरू हुआ है मोहतार्मा!"
"क्या मतलब?"
"मतलब ये की ये तो पहली तस्वीर है.अभी तो मैं तब तक आपकी तस्वीरे
बनाउन्गा जब तक की मुझे ये ना लगे कि अब आपकी शख्सियत का कोई भी पहलू
दिखाने को बाकी नही रहा है."
"आप भी ना!अब ऐसी भी कोई खास बात नही है मुझमे.",कामिनी ने बोल तो दिया
मगर वीरेन की बातो ने उसके दिल मे बहुत खुशी भर दी थी.
"..जिसका मतलब है की मैं आपकी पेंटिंग्स बनाता रहूँगा.",वीरेन ने जैसे
उसकी बात सुनी ही नही थी.
"प्लीज़!अब और तारीफ मत कीजिए वरना मुझमे गुरूर आ जाएगा."
"बिना गुरूर के तो हुस्न फीका ही लगेगा.",इस आख़िरी बात ने तो कामिनी के
गालो को शर्म से और भी सुर्ख कर दिया.
"अच्छा-2.तो आज कौन सी पेनिंट्ग बनाएँगे मेरी?"
"अभी बताता हू.",वीरेन ने पास का कपबोर्ड खोला.बरसो बाद वो किसी लड़की के
लिए अपने दिल मे ऐसे जज़्बात महसूस कर रहा था.ऐसा नही था कामिनी से मिलने
से पहले उसका किसी लड़की से कोई रिश्ता नही था.कयि लड़किया आई & गयी मगर
कोई भी उसके दिल मे ऐसी जगह नही बना पाई की वीरेन को लगे की वो उसके बगैर
जी नही सकता.बस 1 लड़की थी जिसने उसके दिल मे ये एहसास पैदा किया था मगर
वो..
उसने अपने माज़ी के बारे मे सोचना छ्चोड़ा.वो जो भी था,जैसा भी था,बीत
चुका था & ये खूबसूरत लड़की जो उसके स्टूडियो मे खड़ी थी ये हक़ीक़त थी &
उसे अब बस इसी बात से मतलब था.