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उसके झाड़ते ही शत्रुजीत ने उसकी टाँगे अपने कंधो से उतारी & उसके उपर
लेट गया.उसकी बालो भरे मज़बूत छाती ने जब उसकी चूचियो को अपने नीचे पीस
दिया तो कामिनी को दिल मे बड़ी गुदगुदी महसूस हुई.उसने अपनी बाहे उसकी
पीठ पे कस दी & उसे चूमने लगी.थोड़ी देर चूमने के बाद शत्रुजीत ने उसके
होंठो को छ्चोड़ा & उसकी गर्दन का रुख़ किया.अब वो बड़े धीमे धक्के लगा
रहा था.कामिनी तो उसकी चुदाई की कायल थी.वो जानता था की अभी 2-3 बार
झड़ने के बाद कामिनी को दोबारा मस्त होने मे थोडा वक़्त लगेगा तो वो बस
इस तरह से चोद कर उसे समय दे रहा था फिर से तैय्यार होने को.कोई और होता
तो उसके झाड़ते ही खुद भी फारिग हो जाता मगर शत्रुजीत तो उसे तब तक नही
छ्चोड़ता था जब तक कि वो तक के सो ना जाए.
उसे अपने प्रेमी पे बहुत प्यार आया & उसने उसके बालो को चूम लिया.उसने
महसूस किया की धीरे-2 उसका बदन फिर से अपने प्रेमी की हर्कतो से गरम हो
रहा है.तभी उसकी चूत मे उसे हल्का तनाव महसूस हुआ & उसी वक़्त जैसे उसके
दिल मे कसक सी उठी.अपनेआप उसकी टाँगे शत्रुजीत की कमरा पे कस गयी & वो
नीचे से उसके धक्को का जवाब देने लगी.शत्रुजीत ने देखा की कामिनी फिर से
तैय्यार है तो उसने अपनी कोहनियो पे होते हुए धक्के फिर से तेज़ कर
दिए.वो लंड पूरा बाहर निकालता & फिर 1 झटके मे जड़ तक अंदर धंसा
देता,"..आऐईईययईईए....!",हर धक्के पे कामिनी की चीख निकल जाती.
उसकी चूत मे 1 बार फिर से बहुत तनाव बन गया था & उसके दिल मे जैसे कुच्छ
भर गया था.वो 1 बार फिर से मदहोशी के आलम मे मस्त होने लगी थी.शत्रुजीत
बड़े आराम से उसकी चुदाई कर रहा था मगर उसका दिल चाह रहा था की वो बहुत
तेज़ी से धक्के लगाके उसे फिर से उस खूबसूरत मक़ाम तक पहुँचा दे.
उसकी बेचैनी इतनी बढ़ी की उसने अपने प्रेमी को बाहो मे बाँध के करवट ली &
उसे नीचे करती हुई उसके उपर आ गयी.उसकी छाती पे अपने हाथ रख थोडा आगे को
झुकती हुई वो आहे भरती हुई तेज़ी से अपनी कमर हिलाने लगी.शत्रुजीत ने
उसकी कमर को थाम लिया & हल्के-2 उसकी गंद की फांको को दबाते हुए उसकी
उच्छल-कूद का मज़ा उठाने लगा.कामिनी की चूत का कसाव लंड पे और भी बढ़ गया
था & उसके आंडो मे मीठा सा दर्द होने लगा था.
उच्छलने से कामिनी की चूचिया भी बड़े मादक तरीके से हिल रही थी.उन्हे इस
तरह से छल्छलाते देख शत्रुजीत का दिल उन्हे चूसने को ललचा उठा.उसने अपने
हाथ कामिनी की गंद से उपर बढ़ाए & उसे अपने उपर झुकाया & उसकी चूचियो को
मुँह मे भर लिया,"..ऊओवव्व....!",कामिनी ने उसके सर को थाम लिया & वैसे
ही कूदती रही.
बड़ी देर तक शत्रुजीत उसकी चूचियो को दबाते हुए चूमता,चूस्ता रहा.अब
कामिनी की मस्ती अपने चरम पे पहुँच गयी थी.उसने अपनी चूचिया शत्रुजीत के
मुँह से खींची & उठके पिछे की ओर झुक के उसकी मज़बूत जाँघो पे हाथ टीका
के ज़ोर-2 से कमर हिलाने लगी.आँखे बंद किए हुए कामिनी अपनी ही दुनिया मे
खोई हुई थी.
"..आआनन्नह.....!",उसकी चूत मे तनाव बस बाँध तोड़ के निकलने ही वाला था
जब शत्रुजीत ने उसकी चूत के दाने को अपने अंगूठे से रगड़ दिया.वो बाँध
टूट गया & कयि दिन बाद कामिनी ने उस मस्तानी खुशी का एहसास किया जो 1 औरत
शिद्दत से झड़ने के बाद महसूस करती है.वो निढाल हो आगे शत्रुजीत के सीने
पे गिर गयी तो उसने उसकी कमर को अपनी बाहो मे कस लिया & अपने घुटने मोड़
के वैसे ही नीचे से कमर उच्छाल-2 के ज़ोर-2 से धक्के लगाने लगा.
"ऊव्व...ऊव्व...ऊव्व...ऊव्वव..!कामिनी के मुँह से 1 बार फिर आहे निकलने
लगी.वो जानती थी कि जब तो वो 1 बार और ना झाड़ जाए शत्रुजीत भी नही
झदेगा.उसने अपने प्रेमी के सर को पकड़ के अपनी दाई चूची से लगाया & आँखे
बंद कर बस उसके लंड से पैदा हो रही रगड़ से मिलने वाले जिस्मानी मज़े पे
ध्यान देने लगी.
उसकी चूत तो मानो शत्रुजीत के लंड की गुलाम बन गयी थी,1 बार फिर वो झड़ने
को तैय्यार होने लगी थी.शत्रुजीत ने उसकी पूरी चुचि को मुँह मे भर के
इतनी ज़ोर से चूसा की उसके बदन मे बिजली सी दौड़ गयी जोकि उसकी छाती से
सीधा उसकी चूत तक पहुँची.वो बेचैनी से अपनी जंघे भींचने की कोशिश कर
शत्रु के लंड को और कसने की कोशिश करने लगी.
शत्रु के आंडो मे हो रहा मीठा दर्द भी अब इलाज चाहता था.वो पागलो की तरह
धक्के लगाए जा रहा था.कामिनी ने अपनी छाती उसके मुँह मे और घुसाते हुए 1
ज़ोर की आह भरी & उसकी चूत सिकुड़ने-फैलने लगी,शत्रुजीत के लंड को इसी
हरकत का इंतेज़ार था.ये कामिनी के झड़ने की निशानी थी & उसके झाड़ते ही
वो भी झाड़ गया & अपना सारा पानी उसकी चूत मे उडेल दिया.
झाड़ते ही कामिनी उसके उपर निढाल हो गिर गयी & उसकी गर्दन मे मुँह छुपा
लिया.शत्रुजीत भी अपनी साँसे संभालता हुआ उसकी पीठ सहला रहा था & उसके
बालो को चूम रहा था.कामिनी के दिल मे खुशी उमड़ रही थी,कितने दीनो बाद
उसने पूरे तरीके से चुदाई का मज़ा लिया था.
क्रमशः............
लेट गया.उसकी बालो भरे मज़बूत छाती ने जब उसकी चूचियो को अपने नीचे पीस
दिया तो कामिनी को दिल मे बड़ी गुदगुदी महसूस हुई.उसने अपनी बाहे उसकी
पीठ पे कस दी & उसे चूमने लगी.थोड़ी देर चूमने के बाद शत्रुजीत ने उसके
होंठो को छ्चोड़ा & उसकी गर्दन का रुख़ किया.अब वो बड़े धीमे धक्के लगा
रहा था.कामिनी तो उसकी चुदाई की कायल थी.वो जानता था की अभी 2-3 बार
झड़ने के बाद कामिनी को दोबारा मस्त होने मे थोडा वक़्त लगेगा तो वो बस
इस तरह से चोद कर उसे समय दे रहा था फिर से तैय्यार होने को.कोई और होता
तो उसके झाड़ते ही खुद भी फारिग हो जाता मगर शत्रुजीत तो उसे तब तक नही
छ्चोड़ता था जब तक कि वो तक के सो ना जाए.
उसे अपने प्रेमी पे बहुत प्यार आया & उसने उसके बालो को चूम लिया.उसने
महसूस किया की धीरे-2 उसका बदन फिर से अपने प्रेमी की हर्कतो से गरम हो
रहा है.तभी उसकी चूत मे उसे हल्का तनाव महसूस हुआ & उसी वक़्त जैसे उसके
दिल मे कसक सी उठी.अपनेआप उसकी टाँगे शत्रुजीत की कमरा पे कस गयी & वो
नीचे से उसके धक्को का जवाब देने लगी.शत्रुजीत ने देखा की कामिनी फिर से
तैय्यार है तो उसने अपनी कोहनियो पे होते हुए धक्के फिर से तेज़ कर
दिए.वो लंड पूरा बाहर निकालता & फिर 1 झटके मे जड़ तक अंदर धंसा
देता,"..आऐईईययईईए....!",हर धक्के पे कामिनी की चीख निकल जाती.
उसकी चूत मे 1 बार फिर से बहुत तनाव बन गया था & उसके दिल मे जैसे कुच्छ
भर गया था.वो 1 बार फिर से मदहोशी के आलम मे मस्त होने लगी थी.शत्रुजीत
बड़े आराम से उसकी चुदाई कर रहा था मगर उसका दिल चाह रहा था की वो बहुत
तेज़ी से धक्के लगाके उसे फिर से उस खूबसूरत मक़ाम तक पहुँचा दे.
उसकी बेचैनी इतनी बढ़ी की उसने अपने प्रेमी को बाहो मे बाँध के करवट ली &
उसे नीचे करती हुई उसके उपर आ गयी.उसकी छाती पे अपने हाथ रख थोडा आगे को
झुकती हुई वो आहे भरती हुई तेज़ी से अपनी कमर हिलाने लगी.शत्रुजीत ने
उसकी कमर को थाम लिया & हल्के-2 उसकी गंद की फांको को दबाते हुए उसकी
उच्छल-कूद का मज़ा उठाने लगा.कामिनी की चूत का कसाव लंड पे और भी बढ़ गया
था & उसके आंडो मे मीठा सा दर्द होने लगा था.
उच्छलने से कामिनी की चूचिया भी बड़े मादक तरीके से हिल रही थी.उन्हे इस
तरह से छल्छलाते देख शत्रुजीत का दिल उन्हे चूसने को ललचा उठा.उसने अपने
हाथ कामिनी की गंद से उपर बढ़ाए & उसे अपने उपर झुकाया & उसकी चूचियो को
मुँह मे भर लिया,"..ऊओवव्व....!",कामिनी ने उसके सर को थाम लिया & वैसे
ही कूदती रही.
बड़ी देर तक शत्रुजीत उसकी चूचियो को दबाते हुए चूमता,चूस्ता रहा.अब
कामिनी की मस्ती अपने चरम पे पहुँच गयी थी.उसने अपनी चूचिया शत्रुजीत के
मुँह से खींची & उठके पिछे की ओर झुक के उसकी मज़बूत जाँघो पे हाथ टीका
के ज़ोर-2 से कमर हिलाने लगी.आँखे बंद किए हुए कामिनी अपनी ही दुनिया मे
खोई हुई थी.
"..आआनन्नह.....!",उसकी चूत मे तनाव बस बाँध तोड़ के निकलने ही वाला था
जब शत्रुजीत ने उसकी चूत के दाने को अपने अंगूठे से रगड़ दिया.वो बाँध
टूट गया & कयि दिन बाद कामिनी ने उस मस्तानी खुशी का एहसास किया जो 1 औरत
शिद्दत से झड़ने के बाद महसूस करती है.वो निढाल हो आगे शत्रुजीत के सीने
पे गिर गयी तो उसने उसकी कमर को अपनी बाहो मे कस लिया & अपने घुटने मोड़
के वैसे ही नीचे से कमर उच्छाल-2 के ज़ोर-2 से धक्के लगाने लगा.
"ऊव्व...ऊव्व...ऊव्व...ऊव्वव..!कामिनी के मुँह से 1 बार फिर आहे निकलने
लगी.वो जानती थी कि जब तो वो 1 बार और ना झाड़ जाए शत्रुजीत भी नही
झदेगा.उसने अपने प्रेमी के सर को पकड़ के अपनी दाई चूची से लगाया & आँखे
बंद कर बस उसके लंड से पैदा हो रही रगड़ से मिलने वाले जिस्मानी मज़े पे
ध्यान देने लगी.
उसकी चूत तो मानो शत्रुजीत के लंड की गुलाम बन गयी थी,1 बार फिर वो झड़ने
को तैय्यार होने लगी थी.शत्रुजीत ने उसकी पूरी चुचि को मुँह मे भर के
इतनी ज़ोर से चूसा की उसके बदन मे बिजली सी दौड़ गयी जोकि उसकी छाती से
सीधा उसकी चूत तक पहुँची.वो बेचैनी से अपनी जंघे भींचने की कोशिश कर
शत्रु के लंड को और कसने की कोशिश करने लगी.
शत्रु के आंडो मे हो रहा मीठा दर्द भी अब इलाज चाहता था.वो पागलो की तरह
धक्के लगाए जा रहा था.कामिनी ने अपनी छाती उसके मुँह मे और घुसाते हुए 1
ज़ोर की आह भरी & उसकी चूत सिकुड़ने-फैलने लगी,शत्रुजीत के लंड को इसी
हरकत का इंतेज़ार था.ये कामिनी के झड़ने की निशानी थी & उसके झाड़ते ही
वो भी झाड़ गया & अपना सारा पानी उसकी चूत मे उडेल दिया.
झाड़ते ही कामिनी उसके उपर निढाल हो गिर गयी & उसकी गर्दन मे मुँह छुपा
लिया.शत्रुजीत भी अपनी साँसे संभालता हुआ उसकी पीठ सहला रहा था & उसके
बालो को चूम रहा था.कामिनी के दिल मे खुशी उमड़ रही थी,कितने दीनो बाद
उसने पूरे तरीके से चुदाई का मज़ा लिया था.
क्रमशः............