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Erotica नेहा और उसका शैतान दिमाग

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समर ने थोड़ा साँस ली। दीदी ने मेरा खड़ा लण्ड देखा लिया। उसने सोचा। मगर मैंने भी तो अपनी दीदी को अपनी टांगों के बीच छूते देखा था। उसके दिमाग में अपनी दीदी को लेकर गलत ख्याल आने लगे। अकेले में तो दीदी क्या-क्या करती होंगी? क्या वो भी अपनी चूत के साथ? क्या वो भी चदाई? क्या वो अभी वाशरूम में अपनी चूत से खेल रही है? समर का लण्ड झटके मारने लगा। उसे सेक्स चढ़ने लगा।

तभी नेहा बाहर आ गई- “कुछ हुआ इसका..” उसने पूछा और आकर समर के साथ बेड पे बैठ गई।

“नहीं दीदी..” समर ने लैपटाप ठीक करने का नाटक किया। वो तिरछी नजरों से अपनी दीदी के मनमोहक बदन को देख रहा था। कितना गोरा और साफ था उसका बदन। उसने देखा की नेहा के हाथ में कुछ था। कुछ कपड़े जैसा। उसने ध्यान से देखा। दो कपड़े थे शायद। नेहा ने अपनी पकड़ ढीली की, और समर का दिल जोर से धड़कने लगा। वो समझ गया नेहा के हाथ में क्या था।

ब्रा और पैंटी। उसकी दीदी वाशरूम में जाकर अपनी ब्रा और पैंटी उतार के आ गई थी।

समर ने एक बार फिर देखा। हाँ... इसमें कोई संदेह नहीं था की नेहा के हाथ में उसकी ब्रा और पैंटी ही थी। नेहा ने अपने अंदरूनी वस्त्र उतार दिए थे। समर ने नेहा के बदन की ओर देखा। अब उसकी दीदी के शरीर पे दो ही कपड़े थे। एक पतली छोटी टाप और एक छोटी सी शार्ट। उसका लण्ड आपे से बाहर होता जा रहा था।

नेहा ने ये जानबूझ कर किया था और वो जानबूझ कर समर को दिखा भी रही थी। ताकी समर और तड़पे। नेहा खुद बहत उत्तेजित थी। नेहा ने अपनी ब्रा और पैंटी समर के बेड पे रख दी।

नेहा ऐसा नाटक कर रही थी जैसे ये बहुत मामूली बात है। मगर समर के लिए ये मामूली नहीं था। उसने तो पहली बार अपनी बहन के ये वस्त्र देखे थे। उस गुलाबी ब्रा और कच्छी को देखकर ही उसके दिमाग में सेक्स चढ़ रहा था।

नेहा- "इतना घूर के क्या देखा रहा है, कभी किसी लड़की के इनरवेयर नहीं देखे क्या?" नेहा ने पूछा।

समर- “दीदी वो मैं...” समर इधर-उधर देखने लगा।

नेहा- “मैं सोते वक्त उतार देती हूँ अंडरगार्मेंट्स। वैसे भी गर्मी बहुत है। अभी तेरे कमरे में हूँ इसलिए टाप और शार्ट पहना है। अपने रूम में तो मैं ये भी नहीं..” ये कहकर वो रुक गई और एक नाटी स्माइल दी। समर की हालत और खराब हो गई।

समर मन में- क्या कहना चाहती थी दीदी? क्या वो अपने रूम में नंगी सोती है? वो सेक्स और एक्साइटेशन की लहर में बह रहा था। वो इमेजिन कर रहा था अपनी बहन को नंगा, और उससे मजा आ रहा था।

नेहा खड़ी हुई और कमरे में इधर से उधर टहलने लगी। समर भी छुप-छुप के उसे देखा रहा था। उसके चूचे अपने टाप में उभर रहे थे। वो इतने बड़े थे और बिना ब्रा के सपोर्ट के वो नेहा की छाती पर झूल रहे थे। उसकी शार्ट इतनी छोटी और पतली थी की परी गाण्ड की शेप नजर आ रही थी। समर का मन कर रहा था की लण्ड बाहर निकालकर मूठ मार ले। उससे कंट्रोल नहीं हो रहा था।

 
समर मन में- क्या कहना चाहती थी दीदी? क्या वो अपने रूम में नंगी सोती है? वो सेक्स और एक्साइटेशन की लहर में बह रहा था। वो इमेजिन कर रहा था अपनी बहन को नंगा, और उससे मजा आ रहा था।

नेहा खड़ी हुई और कमरे में इधर से उधर टहलने लगी। समर भी छुप-छुप के उसे देखा रहा था। उसके चूचे अपने टाप में उभर रहे थे। वो इतने बड़े थे और बिना ब्रा के सपोर्ट के वो नेहा की छाती पर झूल रहे थे। उसकी शार्ट इतनी छोटी और पतली थी की परी गाण्ड की शेप नजर आ रही थी। समर का मन कर रहा था की लण्ड बाहर निकालकर मूठ मार ले। उससे कंट्रोल नहीं हो रहा था।

समर- "दीदी ये ठीक नहीं हो रहा अभी। कल देख लूंगा। अभी सो जाते हैं...” समर ने कहा। अब वो लण्ड को शांत करना चाहता था। उसे पता था की जब तक दीदी यहां रहेगी वो मूठ नहीं मार पायेगा।

नेहा- “ओहह... ठीक है। कल देख लेना इसे। लेकिन तू अभी से क्यों सो रहा है? आज तो घर पे कोई नहीं है। रात भर तू मस्ती मार सकता है। और तू सो रहा है.." नेहा ने पूछा। उससे समझ में आ रहा था की समर ये क्यों कर रहा है? उससे पता था की उसका लण्ड बेकाबू हो रहा है।

समर- “बस दीदी... नींद आ रही है.." समर ने कहा।

नेहा- “तो सो जा। मैं तुझे थोड़ी कुछ बोल रही हूँ। मैं चली जाऊँगी बाद में। तू सो जा...” नेहा ने कहा।

समर परेशान हो गया- “आप यहां रहोगी तो मुझे नींद कैसे आयेगी?"

नेहा- “अच्छा तो तू मुझे यहां से भगाना चाहता है..." नेहा ने कहा- “क्यों... ऐसा क्या करेगा मेरे जाने पर? ब्लू फिल्म देखेगा..."

समर- “नहीं दीदी..." समर बोला।

नेहा- “तो क्या मूठ मारेगा?"

समर के तोते उड़ गये। उसे यकीन नहीं हुआ अपने कानों पर। उसकी दीदी ने उसके मन की बात पढ़ ली थी। लेकिन... उसकी दीदी को मूठ मारने का मतलब पता था.. ये सब उसके सिर के ऊपर से जा रहा था। अब क्या कहूँ? समर ने नाटक करना चाहा- “क्या? आप क्या कह रही हैं.. मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा.."

नेहा- “मगर मुझे सब समझ में आ रहा है। समर बच्चू, तू मुझे बेवकूफ नहीं बना पायेगा.." नेहा ने कहा।

समर- “मैं किसी को बेवकूफ नहीं बना रहा...” समर ने कहा। वो इस दलदल में फँसता जा रहा था।

नेहा- “हाँ.. तो फिर साफ बोल की तुझे मूठ मारना है। मैं चली जाऊँगी यहां से चुपचाप.." नेहा ने कहा। अब उसे भी नहीं पता था की आगे क्या किया जाए? वो बस कुछ ना कुछ बोले जा रही थी।

"नहीं..." समर ने कहा।

नेहा- “तो ठीक है। मैं यही हूँ। तू सो जा.." नेहा ने कहा।

 
समर बेचारा फँस गया था। उसका लण्ड डिस्चार्ज चाहता था। अब तो उसे दर्द होने लग गया था। मगर वो अपनी बहन के सामने ये स्वीकार नहीं कर सकता था।

नेहा ने उसकी परेशानी को देखा लिया। मगर वो उसे थोड़ा और तड़पाना चाहती थी। समर के बेड के आपोसिट एक खिड़की थी। नेहा वहां गई और खिड़की की तरफ मुँह करके खड़ी हो गई। उसे पता था की समर की नजर सीधा उसकी गाण्ड पर जायेगी, और वो बिल्कुल सही थी।

समर बस उसकी सुडौल गाण्ड को देख रहा था। उसे समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे? तभी नेहा खिड़की के सहारे थोड़ा झुक गई, और अपनी गाण्ड और बाहर निकल दी। समर का दिल और तेजी से भागने लगा। दीदी ऐसा क्यों कर रही है? क्यों अपनी प्यारी सी गाण्ड मेरी आँखों के सामने रख रही है? क्यों मेरे लण्ड की परीक्षा ले रही है? मैं मर जाऊँगा। समर ये सब सोच रहा था। और उसका हाथ अपने आप उसके लण्ड पे चला गया।

नेहा जानती थी की समर उसकी गाण्ड को निहार रहा होगा, और पागल हो रहा होगा। वो जानबूझकर अपनी गाण्ड हल्के-हल्के से हिलाने लग गई और अपनी टांगों को आपस में मसलने लगी।

समर और नशे में हो गया। उसको अब लण्ड को शांत करना ही था। बिना कुछ सोचे उसने अपना हाथ अब अपने पाजामे में डाल दिया और लण्ड को सहलाने लगा। वो भूल गया की उसकी दीदी अभी वहीं है। उसने अपनी आँखें बंद कर ली और लण्ड को हिलने लगा। वो अब सेक्स के सागर में डूब चुका था। अब रुकना न था। वो कहीं खो सा गया था।

नेहा ने पीछे देखा, तो उसे ऐसा नजारा दिखा जिससे उसकी चूत फड़कने लग गई। उसमें से पानी निकलने लगा। उसका भाई आँखें बंद करके पाजामे के अंदर अपने लण्ड से खेल रहा था। वो अपनी दुनियां में गुम था। नेहा का मन किया की ऐसे ही अपने भाई को देखती रहे। मगर नहीं, उसके दिमाग में कुछ और ही था।

नेहा- “पता था मुझे। तुझे मूठ मारना था.." नेहा जोर से बोली।

अपनी दीदी की आवाज सुनकर समर अपने सपनों की दुनियां से नीचे आ गिरा। उसे एहसास हुआ की वो कहाँ है और क्या कर रहा है? उसका हाथ पाजामे के अंदर था। उसने अपना लण्ड पकड़ रखा था। ऊपर देखा तो उसकी बहन की नजर सीधा उसके पाजामे हाथ पे थी। समर समझ गया की उसने कितनी बड़ी गलती कर दी है।

नेहा का प्लान कामयाब हो गया था। उसने अपने भाई को सेक्स के सागर में डुबो दिया था। देखना ये था की अब नेहा क्या कदम उठायेगी?

समर शर्म के मारे मरा जा रहा था। उसने धीरे से अपना हाथ बाहर निकालने की कोशिश की, मगर।

नेहा- “अरें.. क्या हुआ... जो काम कर रहा था वो पूरा तो कर.." नेहा बोली।

समर सन्न रह गया- “आई आम सो सारी दीदी। मुझसे गलती हो गई। पता नहीं मुझे क्या हो गया था दीदी?" समर डर गया था। उसकी हालत खराब हो रही थी।

नेहा- “अरे समर... तू पागल है क्या? तुझे मेरी शकल पे कहीं भी गुस्सा या निराशा दिख रही है क्या?" उसने समर के गाल पे हाथ फेरा- “मैं तो खुश हूँ की तू इतना होशियार हो गया है की तुझे अपनी बाडी की जरूरतें पूरा करना आता है..."

ये दीदी क्या कह रही है? मेरे मूठ मारने से वो खुश है? समर ने सोचा भी ना था ये। फिर से उसके पास कहने के लिए कुछ नहीं था। उसका हाथ अभी भी पाजामे के अंदर था।

 
ये दीदी क्या कह रही है? मेरे मूठ मारने से वो खुश है? समर ने सोचा भी ना था ये। फिर से उसके पास कहने के लिए कुछ नहीं था। उसका हाथ अभी भी पाजामे के अंदर था।

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नेहा- “चल अब जो कर रहा था उससे पूरा कर.." नेहा बोली।

समर बौखला गया- “नहीं दीदी, बिल्कुल नहीं। मैं आपके सामने ऐसा कुछ नहीं कर सकता...” वो बोला।

नेहा- “अभी तो कर रहा था। मैंने देखा तू क्या कर रहा था पाजामे के अंदर। मुझे सब समझ आता है...” नेहा बोली- “तुझे कहा ना मेरे सामने शर्माने की जरूरत नहीं है। आराम से मूठ मार...”

समर ये बातें सुन तो रहा था मगर उसे यकीन नहीं हो रहा था। एक नार्मल भाई बहन का रिश्ता इस मोड़ तक कैसे पहुँच गया, जहाँ बहन अपने भाई को मूठ मारने के लिए उकसा रही है।

नेहा- “चल चालू कर..." नेहा ने फिर कहा।

समर- "नहीं..." वो अपना हाथ बाहर निकालने लगा की नेहा ने उसका हाथ पकड़ लिया।

नेहा- “सेक्सुवलिटी को लेकर शर्माना नहीं चाहिये। तू एक नौजवान है। मूठ मारना बहुत नार्मल है। और तू अपने रूम में है, बाहर सड़क पे नहीं जो शर्मा रहा है." नेहा बोली- “मैं तेरी बहन हूँ। हाँ... मगर उससे ज्यादा मैं तेरी दोस्त हूँ। तू कुछ गलत नहीं कर रहा। इसे समझ, और अब पूरा कर इसे.."

समर की शकल के तोते उड़े हुए थे। लेकिन वो बुत बनकर बैठा हुआ था।

नेहा- “एक और कारण है जो मैं तुझे ये करने को बोल रही हूँ.." नेहा बोली।

समर- “क्या दीदी?"

नेहा- “समर तू मेरा छोटा भाई है मगर तुझे मैं ये एक दोस्त के नाते बता रही हूँ। मैंने आज तक कभी किसी लड़के को असलियत में खुद से खेलते नहीं देखा। मैं बहुत उत्सुक हूँ। इसलिए मैं चाहती हूँ की तू मुझे दिखाए। अब जब इतना अच्छा मर्द मेरे घर में है तो मैं बाहर किसी और से ये क्यों कहूँ?" नेहा ने कहा।

समर फिर हैरान हो गया। उसकी दीदी एक लड़के को मूठ मारते हुए देखना चाहती थी, और वो लड़का आज समर बनने वाला था।

समर- “दीदी, मुझे ये अच्छा आइडिया नहीं लगा...” समर बोल ही रहा था।

तभी नेहा बोल पड़ी- “ओहह... अब समझी। तुझे विजुवल स्टीम्युलेशन नहीं मिल पा रहा.” और वो फिर से खिड़की की ओर मुँह करके खड़ी हो गई, और कहा- “ये ले... पहले भी तू मेरी आस देखकर मूठ मार रहा था ना...

ले अब फिर से देख मेरी आस...” वो बोली- “आस को हिन्दी में क्या कहते है... ओहह... हाँ... गाण्ड.."

 
अपनी दीदी के मुंह से गाण्ड शब्द सुनकर समर का लण्ड मचल गया। नेहा पीछे मुड़ी और उसने एक कातिल मुश्कान दी। उसकी सेक्सी गाण्ड फिर से समर की आँखों के सामने थी। ना चाहते हुए भी समर का लण्ड बड़ा हो गया। ना वो उससे सहलाने लगा।

नेहा की आँखों में चमक आ गई। फँसा लिया था उसने अपने भाई को अपने जाल में। उसकी खुद की चूत एकदम गीली हो चुकी थी। निपल हार्ड होकर पत्थर बन गये थे। वो भी उत्तेजना की लहर पे सवार थी। उसका भाई अपने पूरे होशो-हवास में अपना लण्ड सहला रहा था अपने पाजामे के अंदर।

समर मन में- “ये मैं क्या कर रहा हूँ? ये गलत है..” समर फिर रुक गया।

नेहा ने ये देखा- “अब क्या हुआ? तुझे अच्छी नहीं लगी मेरी आस, मेरी गाण्ड.." नेहा बोली- “मजा नहीं आया क्या? हम्म्म्म , लगता है मुझे अपनी शार्ट नीचे करनी पड़ेगी..”

समर अपने कानों पे, अपनी आँखों, अपनी किश्मत पे यकीन नहीं कर पा रहा था। क्या ये असल में हो रहा है? मेरी अपनी बड़ी बहन मेरे सामने अपनी गाण्ड का प्रदर्शन कर रही है। मुझे मूठ मारने के लिए उत्तेजित कर रही है। और तो और अपनी शार्ट नीचे भी करने को कह रही है। ये सपना था। मगर उसे समझ में नहीं आ रहा था

की ये बुरा सपना है या अच्छा सपना बुरा या अच्छा, उसके हाथ ने फिर से लण्ड को पकड़ लिया। अब उसे मूठ मारना ही था। अब वो और नहीं रुक सकता था।

नेहा- “गुड समर... करते रहो ऐसे ही.."

नेहा भी उत्तेजित हो चुकी थी। उसे भी अपनी चूत से खेलने का मन कर रहा था। मगर वो ये नहीं कर सकती थी। उसे इस तड़प को कंट्रोल करना पड़ा। कुछ नहीं होता नेहा, एक बार इसको अपने काबू में कर ले। फिर तो मजे ही है। उसने सोचा। गाण्ड अपने भाई की तरफ करके नेहा उसे दिखा रही थी।

उसके भाई की आँखों में ठरक और सेक्स भरा हुआ था। वो धीरे-धीरे अपने पाजामे के अंदर लण्ड को मसल रहा था। नेहा ने ये सीन अपनी लाइफ में पहली बार देखा था। उसने कभी किसी लड़के के साथ ऐसी बातें नहीं की थी, जैसी उसने आज समर से की। शायद वो उसका भाई था इसलिए नेहा के मन में भी डर नहीं बचा था। वो तो बिना किसी फिकर के अपने भाई के पाजामे में बनी उसके लण्ड की शेप देख रही थी। लण्ड तो बहुत अच्छा और तगड़ा लग रहा है इसका। कितने प्यार से हिला रहा है अपना लण्ड। काश मैं समर के लण्ड को देख पाती। एक असल लण्ड का दीदार कर पाती। मगर कैसे? कैसे ये लण्ड पाजामे से बाहर निकाले वो? नेहा के मन में गंदे ख्याल घूम रहे थे।

 
उसके भाई की आँखों में ठरक और सेक्स भरा हुआ था। वो धीरे-धीरे अपने पाजामे के अंदर लण्ड को मसल रहा था। नेहा ने ये सीन अपनी लाइफ में पहली बार देखा था। उसने कभी किसी लड़के के साथ ऐसी बातें नहीं की थी, जैसी उसने आज समर से की। शायद वो उसका भाई था इसलिए नेहा के मन में भी डर नहीं बचा था। वो तो बिना किसी फिकर के अपने भाई के पाजामे में बनी उसके लण्ड की शेप देख रही थी। लण्ड तो बहुत अच्छा और तगड़ा लग रहा है इसका। कितने प्यार से हिला रहा है अपना लण्ड। काश मैं समर के लण्ड को देख पाती। एक असल लण्ड का दीदार कर पाती। मगर कैसे? कैसे ये लण्ड पाजामे से बाहर निकाले वो? नेहा के मन में गंदे ख्याल घूम रहे थे।

उसे अब अपने भाई का लण्ड देखना था। उसकी चूत का यही हुक्म था, नेहा ने अपनी गाण्ड घुमाई, और कहा “अच्छा लग रहा है ना समर?"

समर के लण्ड ने झटका मारा। उसकी बहन उसे मूठ मारते देख रही थी, मगर वो अब रुकने नहीं वाला था। वो रुक नहीं सकता था- “एम्म... ओहह...” करके समर सिसकियां भर रहा था।

नेहा- “समर... तुझे ऐसे पाजामे में मूठ मारने में परेशानी नहीं हो रही... ये सही तरीका थोड़ी है। मूठ मारते वक्त पेनिस खुलकर हवा में होना चाहिये। असली मजा तो तब आता है। मैं सोचती हूँ की तुझे अपना पेनिस बाहर निकाल लेना चाहिये..." नेहा मन गढ़ंत कहानी बना रही थी। उसे तो बस लण्ड देखना था।

समर फिर दुविधा में फँस गया। मगर अब उसका दिमाग सही से नहीं सोच पा रहा था। आखीरकार वहां तो बस सेक्स और उसकी दीदी का बदन घूम रहा था। मन में- “मैं ऐसा तो बिल्कुल नहीं कर सकता। अपनी बहन को अपना लण्ड नहीं दिखा सकता। मगर अपनी बहन के सामने मूठ तो मार ही रहा हूँ। मेरी बहन भी बड़े आराम से अपनी गाण्ड दिखा रही है। जब इतना कुछ हो चुका है फिर लण्ड बाहर निकालने में क्या जाता है? मैं तो खुद चाहता हूँ आराम से लण्ड बाहर निकालकर मूठ मारना, मगर अपनी बहन के सामने..” समर ये सब सोच रहा था।

नेहा- “समर... अपनी दीदी की बात मान और अपना पेनिस बाहर निकाल..." नेहा ने बोला।

समर- “आपके सामने नहीं कर सकता दीदी..” समर ने कहा।

नेहा- “फिर शर्मा रहा है तू? चल समझती हूँ मैं। ओके... मैं पीछे नहीं देखूगी। नहीं देखूगी तेरे पेनिस को। बस तू मेरी गाण्ड को देख और बाहर निकाल उसे। और आराम से मूठ मार..."

नेहा बोली और आगे मुँह करके खड़ी हो गई। एक बार लण्ड बाहर निकल जाए फिर तो वो किसी ना किसी तरह उसे देख ही लेगी। समर ने देखा की नेहा अब नहीं देख रही है। क्या मैं निकाल लूँ लण्ड बाहर? उसने सोचा।

नेहा- “निकाला...” नेहा ने पूछा।

समर- “क्या करूं? मन तो बहुत कर रहा है..” उसने अपने पाजामे के नाड़े पकड़ा।

नेहा- “निकाला समर?”

सब कुछ भूलकर समर ने अपने कपड़े नीचे सरका दिए।

नेहा- “निकाला या नहीं?"

“हम्म्म्म

..” समर बोला, और उसका तना हुआ लण्ड खुली हवा में आ गया।

समर का लण्ड अब बाहर था। ऐसा लगा जैसे वो लण्ड आजादी की साँस ले रहा हो। समर का लण्ड 5/" इंच का था। उसे अपना लण्ड पसंद था। आज तो वो और ज्यादा लंबा हो गया था। अपनी बहन के सामने लण्ड प्रदर्शन करने से वो और भी ज्यादा उत्तेजित था। उसने अपने इंडे को पकड़ा और उसे ऊपर-नीचे करने लगा। उसकी आँखों के सामने इतना सुंदर दृश्य था।

उसकी नेहा दीदी... इतने छोटे कपड़ों में। उसकी टाँगें, उसकी बाहें, उसके निपल, उसकी गाण्ड, सब समर को पागल कर रहे थे। मगर वो जितना हो सके उतना आराम से मूठ मार रहा था। वो जितना हो सके उतनी देर इस पल का मजा लेना चाहता था।

नेहा- “तेरा पेनिस बाहर है ना समर.." नेहा ने पूछा।

समर- “हाँ... दीदी..” समर ने कहा।

ये सुनकर नेहा की चूत टपकने लगी, दो बूंदें और बही उसकी चूत से। उसके गुलाबी निप्पल टाप के अंदर और ज्यादा तन गई। मन किया की बस मुड़ जाए और देख ले उसका लण्ड। मगर ऐसा करने से समर घबरा जायगा

और सब खतम हो जायेगा। उसे कुछ और सोचना था।

नेहा- “गुड समर... अब आराम से, प्यार से खेल अपने पेनिस से। जितना हो सके आनंद ले इस पल का, और अपने पेनिस को भी लेने दे.." नेहा बोली।

समर बिल्कुल अपनी बहन की बात मान रहा था।

 
नेहा- “मैं भी क्या पेनिस पेनिस कर रही हैं। हिन्दी में ज्यादा अच्छा लगता है। लण्ड... हाँ, खेल अपने लण्ड से..." नेहा ने पहली बार किसी के सामने ऐसे शब्द बोले थे, और उससे मजा आ रहा था।

“हाईए.” अपनी दीदी के मुँह से ये शब्द “लण्ड” सुनकर तो समर मूड में आ गया। एक लड़की के मुँह से ऐसे शब्द सुनना कितना अच्छा लगता है, और अगर वो लड़की खुद अपनी बहन हो तब तो पूछो ही मत। उसका लण्ड प्री-कम से गीला हो चुका था।

वहीं उसकी दीदी अपने शातिर दिमाग में आगे का प्लान सोच रही थी। नेहा बोली- “समर, तुझे मजा आ रहा है ना... मुझे पता है लड़कों को मूठ मारते वक्त विजुवल स्टिम्युलेशन चाहिये होती है... क्या मुझे ऐसे देखकर तुझे अच्छा लग रहा है... तू चाहे तो मैं कुछ और भी कर सकती हूँ..."

समर सोचने लगा। ऐसा क्या करेगी दीदी मेरे लिए? क्या वो और कुछ दिखायेगी मुझे? कहा- “क्या और कुछ दीदी?” उसने हिम्मत करके पूछा।

नेहा- “और कुछ जैसे मैं तुझे थोड़ा और शरीर दिखा सकती हूँ अपना..” नेहा बोली।

समर का दिल दौड़ने लगा।

नेहा- “तू चाहे तो मैं अपनी टाप ऊपर करके तुझे अपनी कमर दिखा सकती हूँ.." नेहा बोली- “और तू चाहे तो अपनी निक्कर नीचे करके अपनी गाण्ड दिखा सकती हूँ..."

समर का दिल इतनी जोर से धड़कने लगा जैसे लगा की अभी सीने से बाहर निकल आयेगा- “आप ऐसा......."

नेहा- “हाँ... मैं ऐसा कर सकती हूँ, अगर तू चाहे तो। बड़ी बहन अपने भाई के लिए इतना तो कर ही सकती है..."

समर सोचने लगा। दीदी की कमर मेरे सामने नंगी, और गाण्ड... मेरी बहन की गोरी बड़ी-बड़ी गाण्ड। मेरे सामने नंगी। सेक्स का भूत उसके सिर पर नाच रहा था।

नेहा- “तू चाहता है मैं ऐसा करूं... हाँ?" नेहा बोली।

"उम्म्म्म

...” समर बस इतना बोल पाया।

 

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